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उद्धव ठाकरे की सरकार ने सिर्फ पब्लिसिटी पर खर्च कर डाले ₹155 करोड़, हर महीने ₹9.68 करोड़: RTI से खुलासा

महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार ने अब तक 155 करोड़ रुपए सिर्फ पब्लिसिटी पर ही खर्च कर दिए हैं। एक RTI से ये खुलासा हुआ है। महाराष्ट्र के ‘डायरेक्टर जनरल इन्फॉर्मेशन’ और ‘पब्लिक रिलेशन्स (PR)’ ने RTI एक्टिविस्ट अनिल गलगली को सूचना दी है कि ‘महा विकास अघाड़ी (MVA)’ सरकार ने पिछले 16 महीने में पब्लिसिटी पर 155 करोड़ रुपए खर्च किए हैं, जिसमें से 5.99 करोड़ रुपए सोशल मीडिया पर खर्च किए गए।

इस तरह से औसतन हर महीने शिवसेना-NCP-कॉन्ग्रेस की सरकार ने 9.68 करोड़ रुपए केवल पब्लिसिटी पर ही खर्च कर डाले। RTI एक्टिविस्ट ने इस सरकार के गठन के बाद से अब तक प्रचार-प्रसार पर हुए खर्च का ब्यौरा माँगा था। DGI और PR विभाग ने दिसंबर 11, 2019 से लेकर मार्च 12, 2021 तक की समयावधि में हुए खर्च का विवरण दिया है। 2019 में MVA सरकार ने 20.31 करोड़ रुपए इस मद में खर्च किए थे।

साथ ही टीकाकरण अभियान के प्रचार-प्रसार पर MVA सरकार ने 19.92 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। वहीं इसके अगले साल, यानी 2020 की बात करें तो इसमें MVA सरकार ने 26 विभागों के पब्लिसिटी कैम्पेन पर 104.55 करोड़ रुपए खर्च किए। ‘महिला दिवस’ के मौके पर प्रचार-प्रसार अभियान में 9.99 करोड़ रुपए खर्च किए गए। ‘नेशनल हेल्थ मिशन’ के विज्ञापनों में 22.65 करोड़ रुपए खर्च हुए।

साथ ही स्पेशल पब्लिसिटी कैम्पेन पर 22.65 करोड़ रुपए खर्च हुए। महाराष्ट्र के ‘शहरी विकास मिशन’ पर 6.49 करोड़ रुपए खर्च किए गए। ‘आपदा प्रबंधन विभाग’ ने 9.42 करोड़ रुपए प्राकृतिक आपदाओं को लेकर पब्लिसिटी पर खर्च किए, जिसमें से 2.25 करोड़ रुपए सोशल मीडिया पर खर्चे गए। ‘स्वास्थ्य शिक्षा’ विभाग ने 18.63 करोड़ तो ‘शिव भोजन’ अभियान में 20.65 लाख खर्च हुए। इसमें से 5 लाख रुपए सोशल मीडिया पर खर्च किए गए।

वहीं मौजूदा साल यानी 2021 की बात करें तो इस साल पहले ढाई महीने में ही 12 विभागों ने पब्लिसिटी में 29.79 करोड़ रुपए खर्च किए। इसमें से 15.94 करोड़ रुपए ‘स्वास्थ्य शिक्षा’ विभाग ने खर्च किए। ‘जल जीवन मिशन’ की पब्लिसिटी के लिए 1.88 करोड़ रुपए खर्च किए गए, जिसमें से 45 लाख रुपए सोशल मीडिया पर खर्च हुए। ‘महिला एवं बल विकास मंत्रालय’ ने पब्लिसिटी पर 2.45 करोड़ रुपए का खर्च दिखाया है, जिसमें से 20 लाख रुपए सोशल मीडिया पर गए।

इसी तरह ‘अल्पसंख्यक कल्याण विभाग’ ने 50 लाख रुपए में से 48 लाख सोशल मीडिया पर खर्च किए। सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने 3.15 करोड़ रुपए खर्च किए। अनिल गलगली का कहना है कि पब्लिसिटी के लिए खर्च के ये आँकड़े काफी ज्यादा हो सकते हैं, क्योंकि DGI और PR विभाग के पास शत-प्रतिशत सूचना नहीं है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया का खर्च संदेह बढ़ाने वाला है और ‘क्रिएटिविटी’ के नाम पर किए गए खर्च भी संदेहास्पद हैं।

उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिख कर निवेदन किया है कि वो प्रत्येक विभाग द्वारा पब्लिसिटी पर खर्च की गई रकम को उनके नामों की सूची के साथ इंटरनेट पर प्रकाशित करवाएँ, जिन्हें इसका लाभ मिला। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र फड़नवीस ने कहा कि 246 करोड़ रुपए इस सरकार ने इस साल का पब्लिसिटी बजट रखा है। उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकार के दौरान पब्लिसिटी पर मात्र 26 करोड़ रुपए खर्च हुए थे।

फड़नवीस ने पूछा कि आखिर ये पब्लिसिटी क्यों की जा रही है, किस योजना के लिए की जा रही है? उन्होंने कहा कि जब 2019 में MVA की सरकार बनने के बाद से अब तक कुछ हुआ ही नहीं है, इस सरकार की कोई उपलब्धि ही नहीं है तो पब्लिसिटी क्यों? उन्होंने माँग की कि पूरे खर्च का विवरण जारी किया जाए, ताकि पता चले कि लाइमलाइट में बने रहने के लिए इन नेताओं ने क्या किया। उन्होंने कहा कि इस साल MVA ने पब्लिसिटी बजट 246 करोड़ रुपए कर दिया है, जबकि उनकी सरकार के पहले वर्ष में ये मात्र 26 करोड़ रुपए था।

निष्कलंक महादेव मंदिर: पांडव जहाँ हुए थे अपने पापों से मुक्त, डूब जाता है जिसका 5 स्वयंभू शिवलिंग समुद्र में

महाभारत काल के कई ऐसे स्थान हैं, जो आज भी उस समय के महान इतिहास की गवाही देते हैं। कई ऐसे स्थान हैं, जो भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े हैं तो कई पांडवों की तपस्या और पश्चाताप के साक्षी हैं। महाभारत के विनाशकारी युद्ध के बाद पांडव अपने ही सगे-संबंधियों के वध के पाप से मुक्ति के लिए प्रयास करते रहे।

हिमालयी क्षेत्र में ही कई ऐसे मंदिर हैं, जहाँ पांडवों ने पश्चाताप के उद्देश्य से भगवान शिव की तपस्या की। ऐसा ही एक क्षेत्र गुजरात में अरब सागर तट पर स्थित है, जहाँ भगवान शिव ने पाँचों पांडवों को निष्कलंक बनाया। यही कारण है कि यहाँ स्थापित हुआ निष्कलंक महादेव मंदिर, जहाँ स्थित हैं 5 स्वयंभू शिवलिंग।

5000 साल पुराना है निष्कलंक महादेव मंदिर

महाभारत का युद्ध समाप्त हो चुका था। पांडव दुःखी थे कि उन्होंने अपने ही सगे-संबंधियों को युद्ध में मौत के घाट उतार दिया। इसके लिए उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से सलाह माँगी। उन्होंने पांडवों को एक काली गाय और काला ध्वज दिया और कहा कि पांडव ध्वज को लेकर काली गाय का अनुसरण करें। जहाँ भी दोनों का रंग सफेद हो जाएगा, वहाँ पांडवों को उनके पाप से मुक्ति मिल जाएगी।

पांडव कई दिनों तक विभिन्न स्थानों में उस काली गाय का अनुसरण करते हुए घूमते रहे लेकिन न तो गाय का रंग ही बदला और न ही उस ध्वजा का। इसी क्रम में जब पांडव वर्तमान गुजरात के कोलियाक तट पर पहुँचे, तब ध्वजा और गाय दोनों सफेद रंग के हो गए। पांडवों ने प्रसन्न होकर भगवान शिव की तपस्या की।

पांडवों की तपस्या से प्रसन्न होकर पाँचों भाइयों को 5 अलग-अलग शिवलिंग के स्वरूप में भगवान के दर्शन प्राप्त हुए। चूँकि भगवान शिव ने पांडवों को भगवान कृष्ण के कहे अनुसार पाप से मुक्त किया अर्थात निष्कलंक बनाया, इस कारण इस स्थान को निष्कलंक महादेव मंदिर कहा गया।

समुद्र में डूब जाता है मंदिर

भारत के कुछ गिने-चुने समुद्री तट मंदिरों में से एक है भावनगर के समीप स्थित निष्कलंक महादेव मंदिर। अरब सागर में स्थित यह मंदिर तट से लगभग 1 किलोमीटर अंदर पानी में स्थित है। श्रद्धालु पानी से होकर ही इस मंदिर में दर्शन करने के लिए जाते हैं। मंदिर एक चौकोर चबूतरे पर स्थित है। यहाँ 5 स्वयंभू शिवलिंग हैं, जहाँ प्रत्येक शिवलिंग के पास एक नंदी भी विराजमान है।

जब भी समुद्र में ऊँचा ज्वार उठता है, तब मंदिर डूब जाता है। इस दौरान सभी शिवलिंग पानी के अंदर चले जाते हैं। हालाँकि दूर से मात्र मंदिर की ध्वजा ही दिखाई पड़ती है। इसके बाद जब पुनः समुद्र का जल स्तर कम होता है, तब वापस से मंदिर सामने आ जाता है। समुद्र की ताकतवर लहरों के बीच सदियों से यह मंदिर बिना किसी नुकसान के खड़ा है, यह अपने आप में एक रहस्य है।

भाद्रपद महीने की अमावस्या को यहाँ एक विशेष मेला लगता है, जिसे ‘भाद्रवी’ कहा जाता है। निष्कलंक महादेव मंदिर में भाद्रवी का विशेष महत्व है। हालाँकि अमावस्या और पूर्णिमा के दौरान ज्वार सक्रिय रहता है और मंदिर पानी में डूबा हुआ रहता है लेकिन भगवान शिव के भक्त भी ज्वार के उतर जाने की प्रतीक्षा में ही रहते हैं।

कैसे पहुँचें?

निष्कलंक महादेव मंदिर का सबसे नजदीकी मिनी हवाईअड्डा भावनगर ही है। यहाँ से मुंबई और अहमदाबाद के लिए उड़ान उपलब्ध रहती है। भावनगर के सबसे नजदीक स्थित प्रमुख हवाईअड्डा अहमदाबाद में स्थित है, जिसकी दूरी यहाँ से लगभग 180 किमी है।

भावनगर रेलवे डिवीजन में स्थित भावनगर टर्मिनस इस महादेव मंदिर का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन है जो वड़ोदरा, अहमदाबाद, सूरत, मुंबई, दिल्ली जैसे लगभग सभी बड़े शहरों से रेलमार्ग से जुड़ा हुआ है।

मंदिर से भावनगर टर्मिनस की दूरी लगभग 25 किमी है। इसके अलावा सड़क मार्ग से भावनगर गुजरात के लगभग सभी शहरों से जुड़ा हुआ है। गुजरात राज्य परिवहन की बस सेवा का उपयोग करके आसानी से भावनगर पहुँचा सकते हैं, जहाँ से निष्कलंक महादेव मंदिर पहुँचना भी आसान ही है।

कॉन्ग्रेस का कार्यक्रम, प्रियंका गाँधी का संबोधन, पार्टी की UP महिला मोर्चा अध्यक्ष से बदसलूकी: वरिष्ठ नेताओं पर बिफरीं प्रीति तिवारी

उत्तर प्रदेश कॉन्ग्रेस महिला मोर्चा (पश्चिमी क्षेत्र) की अध्यक्ष प्रीति तिवारी ने पार्टी के वरिष्ठ अधिकारियों पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाया है। दरअसल, मथुरा के वृंदावन में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर कॉन्ग्रेस की ओर से आयोजित दो दिवसीय कार्यकर्ता प्रशिक्षण शिविर की रविवार (4 जुलाई 2021) को शुरुआत हुई। प्रियंका वाड्रा द्वारा संबोधित किए जा रहे इस प्रशिक्षण शिविर में प्रीति तिवारी का कंधा पकड़कर उन्हें पीछे धकेल दिया गया और प्रवेश करने से रोक दिया गया। उन्होंने पार्टी नेताओं पर अभद्रता करने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रियंका गाँधी नेतृत्व कर रही हैं, लेकिन पार्टी में महिलाओं की इज्जत नहीं है।

प्रीति तिवारी ने पत्रकारों से कहा कि जब उन्होंने प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रवेश करने की कोशिश की तो प्रदेश कॉन्ग्रेस के पदाधिकारियों ने उनके साथ बदसलूकी की। तिवारी ने आरोप लगाया कि यहाँ के नेताओं को तमीज नहीं है। उन्होंने कहा कि कंधा पकड़ कर उन्हें पीछे धकेल दिया गया और कार्यक्रम स्थल पर जाने से रोका गया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश उपाध्यक्ष योगेश दीक्षित, प्रदेश सचिव योगेश तलान व अन्य लोगों ने उनका कंधा पकड़कर रोका।

उन्होंने कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह पार्टी की पदाधिकारी हैं। यहाँ तक कि एक सामान्य महिला के साथ भी ऐसा व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए। तिवारी ने कहा कि उन्हें कार्यक्रम स्थल पर आने में देर हो गई थी। प्रियंका वाड्रा का लाइव वीडियो चल रहा था। इसलिए वे उसे इंतजार करने के लिए भी कह सकते थे, लेकिन हॉल में प्रवेश करने से रोकने के लिए उन्हें मुझे छूने की जरूरत नहीं थी। उन्होंने बताया कि योगेश दीक्षित ने ही उनके कंधे को छुआ था।

वहीं, इस घटना पर सफाई देते हुए कॉन्ग्रेस ने कहा है कि पार्टी के नेता उन्हें पहचान नहीं पाए। कॉन्ग्रेस नेता प्रदीप माथुर ने कहा कि प्रीति तिवारी को किसी ने नहीं पहचाना इसलिए उन्हें गेट पर ही रोक दिया गया था। उन्होंने कहा कि जब अन्य कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने यह देखा तो उन्होंने हस्तक्षेप किया और प्रीति तिवारी को अंदर आने की इजाजत दिलाई। यह पूरा मामला एंट्री को लेकर था, क्योंकि सिर्फ डेलीगेट्स को आमंत्रित किया गया था।

हालाँकि, कॉन्ग्रेस का स्पष्टीकरण कहीं से भी औचित्यपूर्ण नहीं है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं द्वारा एक महिला को छूना और उसके साथ दुर्व्यवहार करना कहीं से भी उचित नहीं है। साथ ही यह भी दिलचस्प है कि जिस उत्तर प्रदेश के कॉन्ग्रेस उपाध्यक्ष अपनी पार्टी की महिला विंग की प्रमुख को पहचान नहीं पाने का दावा कर रहे हैं, वहाँ अगले साल मतदान होना है।

जब मार डाले गए 10000 हिंदू, पहचान के लिए उनकी संपत्तियों पर लिखा गया ‘H’: मजहबी पहचान बता ‘सेफ’ थे मुस्लिम और ईसाई

बांग्लादेश मुक्ति संघर्ष के दौरान पाकिस्तान की फौज ने जो वीभत्स अत्याचार किए थे उनके बारे में पढ़कर आज भी लोग सिहर उठते हैं। पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) में पाकिस्तानी फौज ने भयानक लूटमार मचाई थी। महिलाओं का बलात्कार किया गया, उनकी हत्या की गई। संपत्तियों को लूटा गया, घर जलाए गए, यहाँ तक कि बच्चों को भी नहीं छोड़ा था। ऐसे ही एक नरसंहार के बारे में दुनिया को 4 जुलाई 1971 को खबर लगी थी, जब न्यूयॉर्क टाइम्स (NYT) में इस संबंध में रिपोर्ट छपी। फरीदपुर में अंजाम दिए गए इस नरसंहार में पाकिस्तानी फौज ने हिन्दुओं को विशेष तौर पर चिह्नित कर उनका कत्लेआम किया था।

तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान के केंद्र में स्थित फरीदपुर में हिंदुओं के दमन की एक व्यवस्थित मुहिम चलाई गई थी। 50 साल पहले आज ही के दिन (04 जुलाई 1971) न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी जिसमें फरीदपुर में हुए हिंदुओं के नरसंहार के बारे में बताया गया था। रिपोर्ट में बताया गया था कि पाकिस्तानी फौज ने हिंदुओं की पहचान करने के लिए उनकी संपत्तियों पर पीले रंग में बड़े अक्षरों में ‘H’ लिखा था। इस रिपोर्ट के मुताबिक फरीदपुर में 10,000 हिंदुओं को मौत के घाट उतार दिया गया था।

हिंदुओं के खिलाफ पाकिस्तानी फौज के इस अभियान को ‘फरीदपुर कैम्पेन’ कहा जाता है। यह कैम्पेन शुरू हुआ 21 अप्रैल 1971 को जब पाकिस्तानी फौज ने फरीदपुर में प्रवेश किया था। शाम का समय था। पाकिस्तानी फौज फरीदपुर पहुँच चुकी थी। फरीदपुर में प्रवेश करने के बाद जब पाकिस्तानी फौज स्थानीय गोलचामोट इलाके में पहुँची तब उन्हें श्री आँगन आश्रम से भजन-कीर्तन की आवाज सुनाई दी। पाकिस्तानी फौज ने आश्रम को घेर लिया।

फौज को देखकर कई साधु वहाँ से निकल गए, लेकिन 9 ब्रह्मचारी संतों ने भागना स्वीकार नहीं किया। सेना उन सभी 9 संतों को खींचकर बाहर लाई। उनमें से एक संत नबकुमार ब्रह्मचारी किसी तरह बचने में सफल रहे और नजदीकी झाड़ियों में छुप गए। नबकुमार के अनुसार सभी संतों को एक लाइन में खड़ा करके पाकिस्तानी फौज ने एक-एक को 12 गोलियाँ मारी थी। संतों ने ‘जय जगतबंधु हरि’ का उद्घोष करते हुए अपने प्राण गँवा दिए। यही श्री आँगन हत्याकांड हिंदुओं के खिलाफ फरीदपुर कैम्पेन की शुरुआत थी।

उसके बाद से तो जैसे पाकिस्तानी फौज हिंदुओं के खून की प्यासी सी हो गई थी। हालाँकि उस दौरान पूर्वी पाकिस्तान के दूसरे समुदायों को भी पाकिस्तानी फौज से खतरा था। खासकर उन लोगों को, जो पूर्वी पाकिस्तान की मुक्ति के पक्षधर थे और शेख मुजीबुर्रहमान की विचारधारा का अनुसरण कर रहे थे। लेकिन फिर भी यह तथ्य है कि मुस्लिम और ईसाइयों को हिंदुओं से कम खतरा था। फरीदपुर में मुस्लिमों ने अपने घरों और दुकानों पर बड़े अक्षरों में अपनी पहचान लिखी थी। इसके अलावा जो थोड़ी बहुत संख्या में ईसाई थे उन्होंने भी अपने घर में क्रॉस लगा दिया था और अपने कपड़ों पर भी क्रॉस सिलवा लिया था।

यहाँ ध्यान देने योग्य बात यह है कि मुस्लिम और ईसाई समुदाय के लोगों ने खुद ही अपने मजहबी प्रतीकों को अपनी रक्षा के लिए उपयोग किया था, लेकिन हिंदुओं की संपत्तियों की पहचान के लिए पाकिस्तानी फौज ने अभियान चलाया और उन पर पीले रंग में बड़े अक्षरों में ‘H’ लिखा ताकि हिंदुओं की पहचान की जा सके।

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार फरीदपुर कैम्पेन के दौरान पाकिस्तानी फौज के द्वारा लगभग 10,000 हिन्दू मौत के घाट उतार दिए गए थे। यह संख्या अधिक भी हो सकती है। मारे गए इन हिंदुओं में बूढ़े, बच्चे, नौजवान और महिलाएँ सभी शामिल थे। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अंदर की हिंदुओं के बयान दर्ज हैं जो पाकिस्तानी फौज के हाथों अत्याचार की कहानी कहते हैं।

फरीदपुर में पाकिस्तानी फौज के हिन्दू विरोधी अभियान के दौरान कई नरसंहार हुए जैसे, मध्यमपारा नरसंहार, ईशानगोपालपुर नरसंहार, सेंदिया नरसंहार, चार भद्रासन हत्याकांड आदि। इन सभी नरसंहारों में निहत्थे हिंदुओं को मारा गया, उनके घरों को जलाया गया। सबसे बड़ी बात थी कि इन क्रूर नरसंहारों के दौरान हिंदुओं की पहचान की गई।

फरीदपुर से संबंधित रिपोर्ट्स में यह बताया गया है कि पाकिस्तानी फौज गाँवों में घुसकर हिंदुओं के घरों के बारे में पूछताछ किया करती थी। इसके बाद हिंदुओं के घरों और दुकानों को आग के हवाले कर दिया जाता था। पाकिस्तानी फौज ने अपने विश्वासपात्र नियुक्त किए हुए थे जो हिंदुओं की जानकारी सेना को देते थे। सेना भी हिंदुओं की संपत्तियों को इन्हीं विश्वासपात्रों को सौंप देती थी। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में यहाँ तक बताया गया था कि पाकिस्तानी फौज ने हिंदुओं के कत्लेआम के लिए दूसरे लोगों को हथियार मुहैया कराए थे। इनमें गैर बंगाली मुस्लिम भी शामिल थे।

फरीदपुर में आज भी हिंदुओं के नरसंहार के कई निशान मौजूद हैं। भारत के सहयोग से पूर्वी पाकिस्तान मुक्त हो गया और बांग्लादेश का निर्माण हुआ लेकिन इस संघर्ष में हिंदुओं ने जो कत्लेआम झेला था वह शायद ही किसी के भूलना आसान हो। दुखद यह है कि बांग्लादेश में बचे-खुचे हिंदू इस्लामी कट्टरपंथ के उस खतरे से आज भी जूझ रहे थे।

बकाया माँगने पर कॉन्ग्रेस नेता ने व्यवसायी को पीटा: पार्टी की दिखाई धौंस, कहा- दुकान नहीं खुलने दूँगा

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में एक कॉन्ग्रेस नेता द्वारा मारपीट का मामला सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें उधारी की रकम माँगने पर कॉन्ग्रेस नेता हरमेंद्र शुक्ला अपने बेटों के साथ मिलकर व्यवसायी और उसके ​बेटे को पीटते हुए दिखाई दे रहे हैं। इसके साथ ही कॉन्ग्रेस नेता ने दुकान में तोड़-फोड़ कर जान से मारने की धमकी भी दी।

घटना से आहत व्यवसायी संजय कुमार गुप्ता और उनके बेटे ने सिविल लाइन थाने में शिकायत दर्ज कराई है। पीड़ित व्यवसायी हर्षित गुप्ता (संजय कुमार गुप्ता) ने ऑपइंडिया को बताया, “शहर कॉन्ग्रेस कमेटी के सचिव व झुुग्गी-झोपड़ी प्रकोष्ठ के अध्यक्ष और ठेकेदार हरमेंद्र शुक्ला ने उधारी की रकम माँगने पर हमारे साथ मारपीट की। उनका हमारे साथ व्यापारिक लेन-देन है। उन्होंने दो साल पहले हमारी दुकान से 7,22,000 रुपए का सामान लिया था। इस समान की मेरे पास पक्की रसीद है, जिस पर कॉन्ग्रेस नेता के हस्ताक्षर भी हैं। इसको लेकर मैं उन्हें दो बार नोटिस भी भेज चुका हूँ कि मुझे मेरे पैसे वापस कर दिए जाएँ।”

हर्षित ने आगे बताया,​ “मैंने 28 जून को हरमेंद्र शुक्ला को दूसरा नोटिस भेजा था, जिसमें लिखा था आप हमें 15 दिनों के अंदर भुगतान कर दें, वरना हम आपके ऊपर कानूनी कार्रवाई करेंगे। उधारी की रकम माँगने पर कॉन्ग्रेस नेता हरमेंद्र शुक्ला आगबबूला हो गए। जब मेरे पिता संजय कुमार गुप्ता पीडब्ल्यूडी ऑफिस बिलासपुर किसी काम से गए, तब वह वहाँ मेरे पिता से मिले और उनसे गाली-गलौच करने लगे। उनको ऑफिस में घुसने नहीं दिया। उन्होंने मेरे पिता को जान से मारने की धमकी दी और कहा कि मैं तुम्हें एक भी पैसा नहीं दूँगा, तुम्हें जो करना है करो। मैं कॉन्ग्रेस पार्टी से हूँ। तुम्हारी दुकान नहीं खुलने दूँगा।”

व्यवसायी ने बताया कि इसके बाद कॉन्ग्रेस नेता मारपीट पर उतारू हो गए। हरमेंद्र अपने बेटों, अमन शुक्ला और अभिषेक शुक्ला के साथ मिलकर उनके पिता को पीटा। वहाँ मौजूद कुछ लोगों ने हर्षित को इसकी सूचना दी। जब वह बीच-बचाव करने वहाँ पहुँचे तो उन्हें भी पीटा गया।

वहीं, दूसरे पक्ष ने भी मारपीट की शिकायत की है। कॉन्ग्रेस नेता हरमेंद्र शुक्ला ने मीडिया से कहा कि उनके ऊपर मारपीट के आरोप बेबुनियाद और मनगढ़ंत हैं। पुलिस ने दोनों पक्षों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और जाँच में जुट गई है।

नई दुनिया में प्रकाशित खबर

आपको बता दें कि शहर में कॉन्ग्रेस नेताओं की बदसलूकी का यह कोई पहला मामला नहीं है। बीते दिनों रेलवे क्षेत्र के कॉन्ग्रेस नेता मोतीलाल थारवानी ने आरक्षक के साथ बदसलूकी की थी। इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने कॉन्ग्रेस नेता के खिलाफ केस दर्ज किया था। मामला प्रकाश में आने के बाद से फरार चल रहे कॉन्ग्रेस नेता को पुलिस ने नागपुर से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

इसके अलावा, सीएम के कार्यक्रम में विधायक शैलेश पांडे के साथ ब्लॉक अध्यक्ष तैयब हुसैन द्वारा की गई हाथापाई का मामला भी खासा सुर्खियों में रहा था। इसको लेकर कॉन्ग्रेस की तरफ से जाँच समिति भी गठित की गई थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट में तैयब हुसैन को दोषी माना था और पार्टी ने तैयब को पद से हटा दिया था।

असम में जनसंख्या के इस विस्फोट को समझिए: 40 मुस्लिम बहुल सीट, 10 साल में 30 से 55% बढ़ गए वोटर

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मुस्लिमों से अपील की थी कि वे सरकार के जनसंख्या नियंत्रण के प्रयास में सहभागी बनें और परिवार नियोजन को अपनाएँ। हालाँकि, राजनैतिक तौर पर सीएम सरमा की इस अपील का विरोध प्रारंभ हो गया। लेकिन मुस्लिम बहुल विधानसभा क्षेत्रों के विश्लेषण के आधार पर यह निष्कर्ष सामने आता है कि सीएम सरमा का अनुमान ठीक ही है। यदि मुसलमानों की जनसंख्या (घुसपैठ और जन्म के द्वारा) में ऐसे ही वृद्धि होती रही तो असम की जनसांख्यिकी एक दिन पूरी तरह बदल जाएगी।

40 मुस्लिम बहुल विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या का विश्लेषण करने पर यह पता चलता है कि पिछले 10 वर्षों में बरपेटा, धुबरी, गोलपारा और होजई जैसे इलाकों में मतदाताओं की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। इन क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या में 30% से लेकर 55% तक की वृद्धि देखने को मिली है। बरपेटा जिले के दो विधानसभा क्षेत्रों- जनिया और बागबर में तो 2011 से 2021 के दौरान 50% से अधिक वृद्धि दर्ज की गई। इन क्षेत्रों में अधिकतर लोग पूर्वी बंगाल या बांग्लादेश के हैं।

10 विधानसभा क्षेत्रों में जनसंख्या वृद्धि 40% से 50% दर्ज की गई और इनमें से अधिकतर मुस्लिम बहुल क्षेत्र हैं। असम में हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में इन 40 सीटों में से 33 पर कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन की जीत हुई। इनमें से 20 पर कॉन्ग्रेस, 11 पर बदरुद्दीन अजमल की AIUDF, 1-1 सीट पर सीपीआईएम और बीपीएफ की जीत हुई। इस गठबंधन के उलट भाजपा मात्र 7 सीटें ही जीत सकी, जबकि विधानसभा चुनावों में उसे कुल 60 सीटें मिली हैं।

अब दूसरे कुछ विधानसभा क्षेत्रों की बात करें तो जहाँ स्थानीय समुदाय (असम के हिन्दू और जनजातीय समुदाय) की आबादी है और मुस्लिमों की जनसंख्या अपेक्षाकृत कम है, वहाँ मतदाताओं की संख्या में लगभग 10% से 20% की वृद्धि ही दर्ज की गई। इनमें पूर्वी गुवाहाटी, हफलॉन्ग, बोकाजन, धर्मापुर और सिबसागर जैसे इलाके शामिल हैं। यहाँ 2011 से 2021 के दौरान मतदाताओं की संख्या में क्रमशः 6%, 13%, 14%, 11% और 12% वृद्धि दर्ज की गई।

कई विधानसभा क्षेत्रों में यह स्पष्ट तौर पर देखा जा सकता है कि मुस्लिम बहुल इलाकों के मतदाताओं में सामान्य इलाकों के मतदाताओं की तुलना में लगभग 3 गुणा वृद्धि हुई। इससे भविष्य में यह निश्चित है कि ऐसी सीटों की संख्या बहुतायत में होगी, जो मुस्लिमों के नियंत्रण में होंगी। इस तरह की वृद्धि दर से निश्चित तौर पर असम एक बड़ा जनसांख्यिकी परिवर्तन को देखने वाला है।

इस विश्लेषण से यह भी पता चलता है कि जनसंख्या नियंत्रण को लेकर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की चिंता पूरी तरह से जायज है और इसके लिए वह बेहद सख्त नजर आ रहे हैं। हालाँकि, उनके द्वारा इसके लिए लगातार समाज के प्रत्येक वर्ग से चर्चा की जा रही है और उनका यह मानना है कि इस नीतिगत निर्णय में सब की सहमति शामिल रहे।

सीएम सरमा ने कहा कि वह मुस्लिम समुदाय के सशक्तिकरण के लिए प्रयास करते रहेंगे और उनसे लगातार बातचीत होती रहेगी, लेकिन जनसंख्या नियंत्रण नीति और परिवार नियोजन को लेकर उनकी प्रतिबद्धता स्पष्ट है। 

हाल ही में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने असम में राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ उठाने के लिए 2 बच्चों की नीति (Two-Child Policy) को लागू करने का फैसला किया है। घोषणा के अनुसार, कर्जमाफी या अन्य सरकारी योजनाओं के लाभ लेने के लिए इस नीति का अनुपालन करना अनिवार्य होगा। हालाँकि, यह भी निर्णय लिया गया कि चाय बागानों में काम करने वाले मजदूर और अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों पर फिलहाल यह नीति लागू नहीं होगी। असम सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए 2 बच्चों की नीति (Two-Child Policy) सबके लिए अनिवार्य होगी और सभी समुदायों पर इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।

लोनी केस में चार्जशीट दाखिल, 11 आरोपित: ताबीज के कारण हुई मारपीट को दे दिया गया था ‘जय श्रीराम’ का रंग

उत्तर प्रदेश पुलिस ने लोनी मामले में चार्जशीट दायर की है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार चार्जशीट में 11 लोगों के नाम हैं। चार्जशीट में समाजवादी पार्टी के नेता उम्मेद पहलवान का नाम नहीं है। उसके खिलाफ एक अलग चार्जशीट दायर की जाएगी। पहलवान फिलहाल NSA के तहत जेल में बंद है।

रिपोर्ट के अनुसार आरोपितों के खिलाफ आईपीसी की धारा 323 (नुकसान पहुँचाना), 504 (शांति भंग करना), 506 (धमकाना), 295A (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना), 147 (दंगा), 148 (दंगों में घटक हथियार) और 149 (गैर-कानूनी एकत्रीकरण) के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोपितों में परवेज गुज्जर और कल्लू गुज्जर भी शामिल हैं।

यह वही मामला है जहाँ कई प्रोपेगेंडाबाजों ने यह कहकर फेक न्यूज फैलाई थी कि पीड़ित से ‘जय श्री राम’ बुलवाया गया और बाद में उसके साथ मारपीट की गई। बाद में यह पता चला कि यह एक फेक न्यूज थी।  

परवेज गुज्जर ने बताया था कि उसकी पत्नी 6 महीने की गर्भवती थी। गुज्जर ने अब्दुल समद सैफी से ताबीज ली थी। लेकिन उसके कथित गलत प्रभाव से अजन्मे बच्चे की मौत हो गई। परवेज ने बताया कि जब से उसने ताबीज ली थी तभी से ही उसके साथ गलत होने लगा था। इससे वह गुस्सा हो गया और उसने सैफी की पिटाई कर दी।  

यूपी पुलिस ने ट्विटर समेत अन्य पर दर्ज किया था मामला

15 जून को गाजियाबाद पुलिस ने 7 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। इसमें ऑल्ट न्यूज के को-फाउंडर मोहम्मद जुबैर, पत्रकार राणा आयूब और अन्य शामिल थे। मामले में ट्विटर इंक और ट्विटर कम्युनिकेशन्स इंडिया को अपने प्लेटफॉर्म पर फैलाई जा रही फेक न्यूज के खिलाफ कार्रवाई न करने के लिए आरोपित बनाया गया था।

यहाँ ध्यान देने योग्य बात यह है कि ट्विटर से ‘इंटरमिडियरी’ प्लेटफॉर्म का दर्जा छीन लिया गया था क्योंकि उसके द्वारा भारत के नए आईटी कानूनों का अनुपालन नहीं किया गया जो 26 मई से लागू हुए। इसके बाद गाजियाबाद पुलिस के द्वारा समुदायों में संघर्ष की स्थिति उत्पन्न करने के लिए म्यूटेड वीडियो वायरल करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई।

17 जून को यह रिपोर्ट आई कि स्थानीय समाजवादी पार्टी नेता उम्मेद पहलवान इदरिस को गाजियाबाद पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने इदरिस पर निजी दुश्मनी पर आधारित घटना को सांप्रदायिक रंग देने का आरोप लगाया था।

‘सेकुलर पपी, मोदी हेटर’: प्रियंका चोपड़ा पर बरसीं कंगना रनौत, पॉलिटिकल स्टैंड बदलने पर घेरा

अपने बेबाक बयानों को लेकर अक्‍सर सुर्खियों में रहने वाली बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत ने अब प्रियंका चोपड़ा के पॉलिटिकल स्‍टैंड पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि अब प्रियंका नेशनलिस्‍ट से सेकुलर पपी बन गई हैं। कंगना का यह बयान तब सामने आया जब उन्‍होंने एक न्‍यूज वेबसाइट का ट्वीट देखा। दरअसल, हाल ही में लिंक्डइन पर न्यूयॉर्क टाइम्स द्वारा प्रकाशित विज्ञापन में ‘हिंदू-विरोधी, मोदी-विरोधी’ संवाददाताओं की माँग की गई थी।

अब तक चार नेशनल अवॉर्ड अपने नाम कर चुकी कंगना ने बॉलीवुड-हॉलीवुड में अपनी खास पहचान बनाने वाली प्रियंका पर निशाना साधते हुए इंस्टाग्राम पर लिखा, ”लेकिन यह केवल पत्रकारिता में ही नहीं है। यह हर फील्ड में है, जिस तरह प्रियंका चोपड़ा राष्ट्रवादी से सेकुलर पपी बन गई हैं। मोदी जी की सबसे बड़ी फैन से उनकी आलोचक और हेटर तक, ये सब स्पष्ट है। बेसिकली रोटी के लिए दुनिया नाचती है। अपने देश में फ्रीडम तो है। जो करना है करो।”

कंगना के इंस्टाग्राम पोस्ट का स्क्रीनशॉट

दरअसल, 1 जुलाई को विवादास्पद अमेरिकी न्यूज वेबसाइट न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिंक्डइन पर जॉब रिक्रूटमेंट पोस्ट की थी। यह जॉब दिल्ली में साउथ एशिया बिजनेस संवाददाता के लिए है। इसमें हायरिंग की शर्तें देखकर ऐसा लगता है जैसे बिना हिंदू विरोधी या फिर मोदी विरोधी हुए बिना वहाँ जॉब पाना बेहद मुश्किल है।

अपने विज्ञापन के जरिए न्यूयॉर्क टाइम्स ने कहा था कि आवेदन करने वाला ऐसा हो, जो भारत सरकार के खिलाफ लिख सके और सत्ता बदलने की उनकी कोशिशों में अपना योगदान दे सके। इस जॉब पोस्टिंग में अखबार ने ये तक लिखा था कि वैसे तो भारत जनसंख्या के मामले में चीन को टक्कर दे रहा है, लेकिन फिर भी विश्व मंच पर बड़ी आवाज बनने की महत्वाकांक्षा पाले हुए है।

खैर, यह पहली बार नहीं है, जब कंगना ने सोशल मीडिया पर प्रियंका चोपड़ा के पाखंड का खुलासा किया है। इससे पहले भी वह देसी गर्ल (प्रियंका) और दिलजीत दोसांझ जैसे दोहरा मापदंड अपनाने वालों की बखिया उधेड़ चुकी हैं। मालूम हो कि पिछले साल किसान आंदोलन को लेकर दिलजीत दोसांझ की कंगना रनौत से लंबी बहस चली थी। ऐसे में कई लोगों ने दिलजीत को सही ठहराया था। इसी फेहरिस्त में प्रिंयका चोपड़ा ने भी दोसांझ का एक ट्वीट, रीट्वीट कर उनका और किसानों का समर्थन किया था। दिलजीत ने अपने इस ट्वीट में लिखा था, ”प्यार की बात करें। कोई भी धर्म लड़ाई नहीं सिखाता। हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन और बौद्ध सब एक-दूसरे के साथ हैं। भारत इसी रीति के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। यहां सभी प्यार से रहते हैं। यहाँ हर धर्म को इज्जत दी जाती है।”

कंगना ने पिछले साल अपने ट्वीट्स में कहा था, “दिलजीत दोसांझ और प्रियंका चोपड़ा जैसे लोगों को किसानों के प्रदर्शन को गुमराह और प्रोत्साहित करने के लिए वामपंथी मीडिया द्वारा इनकी सराहना की जाएगी। इस्लाम समर्थक, भारत विरोधी फिल्म इंडस्ट्री और ब्रांड उन्हें ऑफर से भर देंगे। अंग्रेजी/औपनिवेशिक हैंगओवर में रहने वाले मीडिया घराने उन्हें पुरस्कारों से सम्मानित करेंगे। समस्या यह है कि पूरी प्रणाली देशद्रोहियों को पनपने और विकसित करने के लिए डिजाइन की गई है और हम इस भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ संख्या में बहुत कम हैं, लेकिन मुझे यकीन है कि अच्छाई बनाम बुराई की हर लड़ाई में करिश्मा होगा। बुराई बहुत मजबूत रही है। जय श्री राम।”

बता दें कि राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित अभिनेत्री कंगना रनौत के अकाउंट को ट्विटर द्वारा मनमाने ढंग से सस्पेंड कर दिया गया था। ट्विटर ने दावा किया था कि उन्होंने मंच के सामुदायिक दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया है। दरअसल, एक्ट्रेस ने अपने मैसेज में पश्चिम बंगाल में चुनावी नतीजे घोषित होने के बाद की टीएमसी कार्यकर्ताओं द्वारा की गई हिंसा के खिलाफ आवाज उठाई थी।

बॉलीवुड अभिनेत्री ने हिंसक घटनाओं को लेकर सिलसिलेवार ट्वीट कर नाराजगी जताते हुए लिखा था, “धिक्कार है हर उस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया टट्टू को जो इस नरसंहार के लिए जिम्मेदार हैं। जिन्होंने इन खून की प्यासी राक्षसी (ममता बनर्जी) को बढ़ावा दिया। भारत याद रखो ये हिंदू राष्ट्रवादियों की मृत्यु नहीं, बल्कि राष्ट्रवाद की मृत्यु है।”

लश्कर का आतंकी, ट्रेनिंग के लिए गया पाकिस्तान: घरवालों ने पूछा तो कहा- भारत का जासूस हूँ, रॉ के मिशन पर जा रहा

दरभंगा ब्लास्ट के सिलसिले में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने 30 जून 2021 दो भाइयों को गिरफ्तार किया था। इनके नाम हैं, नासिर खान उर्फ नासिर मलिक और इमरान मलिक। जाँच से यह बात सामने आई है कि दोनों भाई लश्कर आतंकी हैं और इन्होंने ही सिकंदराबाद-दरभंगा एक्सप्रेस के पार्सल में विस्फोटक रखा था। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के शामली के रहने वाले इन भाइयों की गिरफ्तारी हैदराबाद से हुई थी। इसके बाद इनके पिता पूर्व फौजी मिसा खान ने दावा किया था कि उनके बेटे रॉ के लिए काम करते हैं और उन्हें फँसाया गया है।

अब द हिंदू की एक रिपोर्ट से पता चला है कि नासिर ने घरवालों को झाँसे में रखा था। उनसे कहा था कि वह रॉ की एक महिला के लिए काम करता है। पाकिस्तान यात्रा को लेकर घरवालों से कहा था कि रॉ टास्क पर भेज रही है। मूसा खान ने इमरान के भी भारतीय जासूस होने का दावा किया था। साथ ही आरोप लगाया कि रॉ की महिला अधिकारी ने ही उनके बेटों को फँसाया है।

अब यह जानकारी सामने आ रही है कि नासिर ने अपनी पत्नी और पिता को यह बता रखा था कि वह रॉ की एक महिला अधिकारी के साथ काम करता है। अक्सर जब नासिर देर रात तक फोन पर लंबी बातें करता तो उसके परिवार वाले प्रश्न उठाया करते थे। ऐसे में नासिर ने उन्हें बताया कि वह दुश्मनों से देश की रक्षा करने के लिए रॉ के साथ काम कर रहा है।

कई बार जा चुका है पाकिस्तान

2012 में जब नासिर पाकिस्तान गया था तब भी उसने अपने परिवार को यह भरोसा दिलाया था कि उसे एक नया टास्क मिला है। इसके पहले और बाद में भी नासिर पाकिस्तान गया। वहाँ पाकिस्तान-अफगानिस्तान बॉर्डर पर 4 महीनों तक लश्कर-ए-तैयबा ने उसे ट्रेनिंग दी।

NIA के मुताबिक नासिर खान ने पाकिस्तान से ही केमिकल से आईईडी बनाने की ट्रेनिंग ली थी। NIA ने बताया कि दोनों भाइयों का मकसद सिकंदराबाद-दरभंगा एक्सप्रेस को उड़ाना था। साथ ही दोनों देश के अलग-अलग हिस्सों में आतंकी हमला कर दहशत फैलाना चाहते थे।

दरभंगा रेलवे स्टेशन ब्लास्ट

दरभंगा रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर 17 जून को पार्सल में विस्फोट हुआ था। इस मामले में 24 जून को एनआईए ने जाँच शुरू की थी। इसके बाद मोहम्मद नासिर खान और इमरान खान की गिरफ्तारी हुई थी। गिरफ्तार आरोपितों ने खुद आईईडी तैयार की थी। फिर उसे कपड़े के एक पार्सल में पैक किया, जिसे सिकंदराबाद से दरभंगा तक लंबी दूरी तय करने वाली ट्रेन में रखा गया। इनका मकसद था चलती ट्रेन में विस्फोट करना था, जैसा 2006 में मुंबई की लोकल ट्रेनों में किया गया था। जाँच में यह बात भी सामने आई कि दोनों भाई अपने हैंडलर से बात करने के लिए सुरक्षित संचार माध्यमों का इस्तेमाल कर रहे थे।

BSP का पूर्व सांसद दाऊद अहमद, लखनऊ में ₹100 करोड़ की 5 मंजिला इमारत: 5 घंटे में ढाह दी गई

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के पूर्व सांसद दाऊद अहमद पर लखनऊ जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। प्रशासन ने रविवार (4 जुलाई 2021) की सुबह यहाँ की रिवर बैंक कॉलोनी में दाऊद अहमद की 5 मंजिला अवैध इमारत को जमींदोज कर दिया। इस निर्माणाधीन इमारत लागत करीब 100 करोड़ बताई जा रही है। इसे गिराने में प्रशासन को 5 घंटे लगे। इस दौरान एक हादसा भी हुआ। बिल्डिंग का मलबा पोकलैंड मशीन पर गिर पड़ा, जिसके चलते ड्राइवर मलबे के बीच फँस गया। उसे तुरंत रेस्क्यू कर सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

प्रशासन के मुताबिक, दाऊद ने इस बिल्डिंग का अवैध तरीके से निर्माण करवाया था। निर्माण के लिए पुरातत्व विभाग से NOC नहीं ली गई थी, जबकि विभाग बार-बार नोटिस जारी कर रहा था। इसके बावजूद, दाऊद ने अवैध निर्माण को नहीं गिरवाया। अब लखनऊ प्रशासन ने नगर निगम, ASI और पुलिस विभाग के साथ मिलकर बिल्डिंग पर बुलडोजर चलाया है।

जानकारी के मुताबिक, इस बिल्डिंग का नक्शा भी एलडीए के अधिकारियों ने बिना एएसआई की अनुमति के ही स्वीकृत कर दिया था। हालाँकि, बाद में विरोध के बाद इसको निरस्त कर दिया। अब एएसआई के आदेश पर जिला प्रशासन और पुलिस के लोग संयुक्त अभियान चलाकर इमारत को ध्वस्त कर रहे हैं। ये बिल्डिंग रेजीडेंसी के नजदीक है और इस सीमा के भीतर ऊँचे निर्माण प्रतिबंधित है।

लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) की ओर से इस अवैध बिल्डिंग को गिराने की कोशिश पूर्व में की गई थी, लेकिन रसूख और कागजों में फँसा कर इसको रोक दिया गया था। तब नक्शा पास होने और अन्य कई कारण बताते हुए कार्रवाई रोकी गई थी। इस बिल्डिंग को लेकर बाद में एएसआई के संयुक्त निदेशक ने पूर्व सांसद दाऊद को नोटिस जारी किया था। इसमें कहा गया था कि सात दिन में ये निर्माण खुद हटा लें। हटाए न जाने की दशा में प्रशासन की जेसीबी मशीनों ने इमारत को ध्वस्त करना शुरू कर देगा।

रविवार सुबह सात बजे से ही बिल्डिंग को गिराने के लिए कार्रवाई की गई। विरोध की आशंका को लेकर पुलिस फोर्स को भी बुला लिया गया था। हालाँकि, कोई विरोध के लिए सामने नहीं आया। पुरातत्व विभाग के संयुक्त महानिदेशक ने 3 जुलाई 2021 को इसे ध्वस्त करने का आदेश पारित किया था। जिसके बाद रविवार को कार्रवाई की गई। बिल्डिंग पाँच मंजिला बनाई गई थी। इसमें केवल फिनिशिंग काम बचा था।

बाहर का पिलर्स तोड़ते वक्त गिरा मलबा

अपार्टमेंट के भीतरी हिस्से में बने पिलर्स मजदूरों की मदद से तोड़े गए। इसके बाद बाहरी पिलर पोकलैंड मशीन की मदद से तोड़ा जाना था। यह पिलर टूटते ही पूरी इमारत अपने आप गिर जाती। हालाँकि इस दौरान इंजीनियर इस बात का अंदाजा नहीं लगा सके कि पिलर टूटने के बाद इमारत सीधे मशीन की तरफ ही गिरेगी। यहाँ तक कि ड्राइवर भी पिलर तोड़ने के बाद उतनी तेजी से पीछे नहीं हट पाया। इस बीच इमारत भरभराकर सीधे मशीन की तरफ ही गिरी और पोकलैंड मलबे में दब गई। हालाँकि पोकलैंड के भीतर ड्राइवर के चारों तरफ लोहे का केबिन था जिसके चलते उसे गंभीर चोटें नहीं आई हैं।