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राजस्थान: पड़ोसी से विवाहिता का हुआ विवाद, पुलिस कॉन्स्टेबल ने 19 दिनों तक किया रेप

राजस्थान में एक बार फिर खाकी को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। एक शादीशुदा महिला ने पुलिस कॉन्स्टेबल पर दुष्कर्म का आरोप लगाया है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, घटना राजस्थान के पाली की है। पुलिस कॉन्स्टेबल पर आरोप है कि महिला को शादी का झाँसा देकर वह अपने साथ भगा ले गया और दुष्कर्म किया। 

रिपोर्ट के अनुसार महिला को कॉन्स्टेबल अजयपाल भाकल उदयपुर, माउंट आबू, सुमेरपर आदि स्थानों पर घुमाता रहा और दुष्कर्म करता रहा। यह सिलसिला तकरीबन 19 दिन तक चला। इसके बाद पीड़िता ने आरोपित से शादी करने की बात छेड़ी, जिस पर वह आग बबूला हो गया और उसकी बुरी तरह से पिटाई कर दी। इन सब ज्यादतियों से परेशान होकर महिला ने होटल से ही फोन कर पुलिस को मामले की जानकारी दी।

सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुँची और महिला को थाने लेकर आ गई। आरोपित कॉन्स्टेबल जब शनिवार (3 जुलाई 2021) को होटल पहुँचा तो कमरे में विवाहिता नदारद मिली। जब उसे जानकारी मिली कि पाली पुलिस उसे ले गई तो वह खुद भी थाने पहुँच गया। वहाँ पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। एसपी कालूराम रावत ने आरोपित कॉन्स्टेबल को निलंबित भी कर दिया है।

थाने के सब इंस्पेक्टर नरेन्द्र सिंह ने बताया कि आरोपित कॉन्स्टेबल का अपनी पत्नी से विवाद चल रहा है। पाली हाउसिंग बोर्ड निवासी पीड़िता भी पिछले करीब डेढ़ साल से मायके में रह रही है। उसने अपने पति व ससुराल पक्ष के लोगों के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का परिवारवाद भी महिला थाने में दे रखा है। 30 वर्षीया महिला की शादी 17 वर्ष पहले हुई थी, जिससे उसे एक सात साल का बच्चा भी है। पड़ोसी से नाली का विवाद होने के बाद पीड़िता की मुलाकात आरोपित कॉन्स्टेबल भाकल से हुई थी। उसके बाद दोनों की फोन पर बातचीत होने लगी।

आरोपित कॉन्स्टेबल विवाहिता को अच्छे भविष्य के सपने दिखाता रहा और उसे विश्वास दिलाया कि वह उससे शादी कर लेगा। आरोपित कॉन्स्टेबल की इन्हीं बातों में विवाहिता फँस गई। 11 जून को आरोपित कांस्टेबल उसे भगाकर ले गया। विवाहिता के घर से बिना बताए निकल जाने पर 13 जून को उसकी माँ ने औद्योगिक थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

उल्लेखनीय है कि आरोपित कॉन्स्टेबल अजयपाल भाकल की 18 दिसम्बर 2015 को प्रथम नियुक्ति पाली में हुई थी। 19 मई 2021 से आरोपित कॉन्स्टेबल गैर-हाजिर चल रहा है। इसको लेकर उसे कई बार नोटिस भेजा गया, लेकिन एक बार भी उसने जवाब नहीं दिया।

गौरतलब है कि राजस्थान से इस तरह की यह पहली घटना सामने नहीं आई है। इसी साल मार्च में अलवर के खड़ेली थाना में अपने पति के खिलाफ FIR लिखवाने गई महिला से बलात्कार का मामला सामने आया था। 26 वर्षीय पीड़िता का पति के साथ विवाद चल रहा है। 2 मार्च 2021 को वह पति के खिलाफ FIR दर्ज करवाने खेड़ली थाना पहुँची थी। आरोप है कि खेड़ली थाने में तैनात सेकेंड ऑफिसर भरत सिंह ने पीड़िता को पति से विवाद के निपटारे का झाँसा दिया। इसके बाद वो थाना परिसर में ही बने आवास में पीड़िता को लेकर गया और वहाँ उसके साथ रेप किया। महिला का आरोप है कि सब-इंस्पेक्टर इतने पर ही नहीं रुके। उसने अगले दो दिन भी पीड़िता को बुलाया और उसके साथ रेप किया।

इसी साल मई में राज्य के मटीली थाने के सिपाही मनीराम पर कई बार बलात्कार करने का आरोप लगाकर एक महिला ने एफ माइनर नहर में कूदकर आत्महत्या कर ली थी। अपने आखिरी संदेश में महिला ने मनीराम और उसकी पत्नी को अपनी मौत का जिम्मेदार बताया था। वीडियो के मुताबिक, मनीराम ने उससे बार-बार दुष्कर्म किया और सिपाही की पत्नी भी उसे तंग करती थी।

एक अन्य मामले में राजस्थान के चूरू जिले में सरदारशहर पुलिस स्टेशन के निलंबित पुलिस निरीक्षक के अलावा आठ पुलिसवालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। पुलिसवालों पर आरोप था कि उन्होंने एक दलित महिला को बंधक बनाकर रखा और उसके साथ बलात्कार किया। पीड़िता ने 9 पुलिसकर्मियों पर उसके साथ पुलिस स्टेशन में ही गैंगरेप का आरोप लगाया था। यही नहींं इसी साल ACP कैलाश बोहरा को एक रेप पीड़िता से रिश्वत माँगने और उसका यौन उत्पीड़न करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

‘स्वराज्य का सरखेल’ जिसने ब्रिटिश, पुर्तगाल, डच और मुगलों को कई बार धूल चटाई: 17 बड़े युद्ध जीते, समुद्र में 40 साल बजा डंका

भारतवर्ष की भूमि पर एक से बढ़ कर एक योद्धा हुआ हैं, जिन्होंने देश-विदेश में अपने झंडे गाड़े। लेकिन, ये नाम थोड़ा अलग सा है। अलग इसीलिए, क्योंकि इनका इलाका जमीन नहीं था। इन्होंने समुद्र फतह किया। इस महावीर ने भारत माँ की तरफ पानी से आने वाले खतरों को तबाह किया। खौफ ऐसा कि 40 साल तक पूरे अरब सागर में एक ही व्यक्ति का डंका बजा और उनका नाम मराठा नौसेना अधिकारी कान्होजी आंग्रे था।

कान्होजी आंग्रे का जन्म सुवर्णदुर्ग में हुआ था। ये जगह महाराष्ट्र के रत्नागिरी में स्थित है। 1669 ईश्वी में जन्मे कान्होजी आंग्रे ने 20 साल बाद ही मराठा सैन्य शक्ति को बढ़ाने में अपनी ताकत झोंक दी और फिर अगले 40 साल तक इसी एक काम में लगे रहे, अपने निधन तक। पुर्तगाल, ब्रिटिश, मुग़ल हो या फिर डच – समुद्र में उनका कोई सानी न था। अगर समुद्र के रास्ते कोई कुछ गलत करेगा तो उसे उनके हाथों सज़ा मिलनी तय थी।

अक्सर ब्रिटिश और पुर्तगाली आक्रांताओं के जहाज उनका शिकार बनते थे। भारतीय नौसेना के इतिहास में उनका एक अलग स्थान इसीलिए भी है, क्योंकि कम से कम 17 ऐसे बड़े मौके आए जब उन्हें युद्ध के मैदान में उतरना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी भी विदेशी ताकतों को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। हमेशा ही जीत उनकी हुई। उन्होंने बचपन से ही तैराकों के साथ पानी के दाँव-पेंच सीखने शुरू कर दिए थे।

फिर उन्होंने जहाज की यात्रा और इसके अलग-अलग आयामों को सीखा। सतारा के मुखिया ने 1698 में सतारा के मुखिया ने उन्हें ‘सरखेल या दरिया सारंग’ के रूप में नियुक्त किया। ऐसा समझ लीजिए, उन्हें मराठा नौसेना की जिम्मेदारी सौंप दी गई। इसके बाद भारत के पश्चिमी तटों पर उनका ही राज़ चलने लगा, मुंबई से लेकर वेंगुर्ला तक। सबसे पहले तो ईस्ट कंपनी के जहाज उनका निशाना बने और इसके बाद यूरोपीय ताकतों के मन में उनका खौफ बैठ गया।

भारत के बारे में ईसा के जन्म से पहले ही दुनिया भर में ये बात फ़ैल गई थी कि ये ‘सोने की चिड़िया’ है और यहाँ के लोग बड़े ही सीधे-सादे हैं। इसीलिए, तभी से लुटेरों का यहाँ आना शुरू हो गया था। कई मुल्क सिर्फ भारत के एक छोटे से हिस्से से लुटे हुए धन के कारण अमीर हो गए। प्रारम्भ में चंद्रगुप्त मौर्य, अशोक, समुद्रगुप्त और हर्षवर्धन जैसे राजाओं ने विदेशी ताकतों को धूल चटाई, लेकिन बाद में आंतरिक कलह ने भारत को लुटेरों का अड्डा बना दिया।

यहाँ हम 17वीं शताब्दी के अंतिम दशक और मुख्यतः 18वीं सदी के पहले 30 साल की बात कर रहे हैं। तब तक भारत में विदेशी आक्रांताओं ने अपनी जड़ें जमा ली थीं और दिल्ली में मुगलों का शासन था। मराठा शक्तिशाली बन कर उभरे थे और छत्रपति शिवाजी का नाम लेकर उनका कद बढ़ता जा रहा था। बाजीराव ने दिल्ली तक मराठा साम्राज्य का विस्तार शुरू कर दिया था और इधर समुद्र में कान्होजी आंग्रे जैसे योद्धा तैनात थे।

हिंद महासागर की लड़ाई शुरू हो चुकी थी क्योंकि जहाँ दिल्ली में मुस्लिम आक्रांताओं ने पैठ बनाई हुई थी, समुद्र के रास्ते यूरोपियन ताकतों ने भारत को लूटना शुरू कर दिया था। व्यापारी के वेश में आने वाले ये लुटेरे बड़ी लंबी साजिश का एक हिस्सा था, जिसका दुष्परिणाम अंततः भारत की गुलामी के रूप में हुआ। लेकिन, तब हिंद महासागर और अरब सागर को आज़ाद करने की मुहिम के लिए छत्रपति शिवाजी ने ही नौसेना की नींव डाल दी थी और कई समुद्री दुर्ग तैयार किए थे।

विनायक दामोदर सावरकर ने भी अपनी पुस्तक ‘हिन्दू पदपादशाही‘ में लिखा है कि मराठों समुद्री ताकत को दबाने का साहस किसी भी आक्रांता में नहीं हुआ। अब जब समुद्री सीमा बड़ी थी, दुश्मन कई थे, साधन संपन्न थे और बड़े क्षेत्र पर नजर रखनी पड़ती थी, इसीलिए कान्होजी आंग्रे को भी एक बड़ी सेना रखनी पड़ी। इसके लिए विदेशी जहाजी बेड़ों पर ‘चौथ’ लगाया गया। अंग्रेजों ने विरोध किया तो उन्हें सबक सिखाया गया।

कान्होजी आंग्रे के लिए उनके सामान लदे जहाजों को पकड़ कर जब्त करना बाएँ हाथ का खेल हुआ करता था। लेकिन, 1715 में चार्ल्स बून को मुंबई का गवर्नर बना कर भेजा गया और उसने प्रण लिया कि वो कान्होजी आंग्रे की ताकत को ख़त्म कर देगा। अभिमानी बून ने एक बड़ी सेना लेकर विजय दुर्ग पर आक्रमण किया। आक्रमणकारी जहाजों में ‘हंटर, रिवेंज, विक्ट्री और हॉक’ नाम के जहाज शामिल थे। इन नामों से ही पता चलता है कि अंग्रेजों की सोच क्या थी।

उसने दो तरफ से किले पर हमला किया। जबरदस्त गोलीबारी की गई, लेकिन उसे एहसास हो गया कि ये अभेद्य है और इसके चारों तरफ तोपखाने हैं। अंग्रेजों ने इसके भीतर जाने की लाख कोशिशें की, लेकिन मराठा तोपों ने सब बेकार कर दिए। अंत में मराठों ने अंग्रेजों की विशाल सेना पर धावा बोला और उन्हें अच्छी-खासी क्षति पहुँचाई। अंग्रेज जितनी जल्दी आए थे, उससे भी जल्दी भाग खड़े हुए।

गवर्नर बून नहीं माना और उसने अगले साल खाण्डेरी द्वीप पर आक्रमण किया, लेकिन वहाँ भी उसे हार मिली। विवश होकर उसने इंग्लैंड के राजा को एक पूर्व जहाजी बेड़ा तैयार कर के भेजने का निवेदन किया। इसके बाद कोमोडोर मैथ्यू के नेतृत्व में अंग्रेजों का एक जंगी बेड़ा आया। कान्होजी आंग्रे का खौफ देखिए कि अब दो दुश्मन भी एक होने वाले थे। जी हाँ, अंग्रेजों ने पुर्तगालियों को भी अपने साथ मिला लिया।

17वीं शताब्दी की शुरुआत में ही ‘ईस्ट इंडिया कंपनी’ भारत में पाँव जमाने के लिए बेचैन हो गई थी और इसके लिए थॉमस बेस्ट को भेजा गया था, जो सूरत में फैक्ट्री लगाना चाहता था। लेकिन, मुगलों की संधि पुर्तगालियों से थी, जिससे अंग्रेजों को खासी दिक्कत आ रही थी। पुर्तगालियों ने अपनी कूटनीति से मुगलों को खुश रखा हुआ था। सूरत के पास सुवाली में एक युद्ध हुआ और अंग्रेजों ने पुर्तगालियों को हरा दिया।

भारत के एक वीर का डर देखिए कि यूरोप की दो बड़ी ताकतें, जो अब तक भारत में वर्चस्व जमाने के लिए दुश्मन बनी हुई थीं – वो एक हो गईं। इस बार कान्होजी आंग्रे के सामना पुर्तगाल और अंग्रेजों की संयुक्त शक्ति से था। उत्तर प्रदेश के पूर्व राज्यपाल राम नाइक की मानें तो कान्होजी आंग्रे मराठा स्वराज्य के पहले ‘सरखेल’ थे, यानी आज की नौसेना में इसे एडमिरल के रूप में समझ सकते हैं।

कान्होजी भी डरने वालों में से नहीं थे। उन्होंने बचपन से अपने पिता तुकाजी से ही समुद्र की कलाबाजियाँ सीखी थीं। इसीलिए, देवगढ़, अलीबाग और पूर्णागढ़ जैसे कई तटों पर उन्होंने अभेद्य दीवारें खड़ी की थीं, ताकि व्यापार के नाम पर भारत को गुलाम बनाने की साजिश करने वालों की मंशा सफल न हो। उन्होंने ‘अलीबागी रुपैया’ नामक करेंसी भी चलाई। उन्होंने विजय दुर्ग, अलीबाग और कोलाबा में अपना मुख्य बेस बनाया।

80 युद्ध नौकाओं के साथ मराठा नौसेना के मुखिया कान्होजी आंग्रे पश्चिमी समुद्र तट पर डटे रहते थे। 1712 में उन्होंने बॉम्बे के ब्रिटिश प्रेसिडेंट विलियम एस्लाबी की हथियारबंद नौका को जब्त किया था। गोवा में उन्होंने अंग्रेजी जहाजों का आवागमन दूभर कर दिया। 1721 में 6000 सैनिकों को ‘समुद्र के सरखेल’ को पकड़ने के लिए लगाया गया। अंग्रेजों और पुर्तगालियों की तरह नीदरलैंड ने भी विजय दुर्ग पर चढ़ाई की, लेकिन नाकाम लौटे।

छत्रपति साहूजी की मराठा नौसेना की कमाल संभालने वाले कान्होजी आंग्रे ने जब कमान संभाली थी तो मराठों के पास महज 8-10 नौकाएँ ही थीं और दुश्मन चारों तरफ उत्पात मचा रहा था। केवल उनके कारण अंग्रेजों को अपने जहाजों पर हर साल 49 लाख रुपए (तब) खर्च करने पड़ते थे, ताकि कान्होजी उसे पकड़ न पाएँ। तो, कोमोडोर मैथ्यू के नेतृत्व में आई संयुक्त सेना को भी मराठों ने हराया। आग-बबूला होकर कोमोडोर दुर्ग की तरफ दौड़ा, लेकिन एक मराठा सैनिक ने उसके जांघ पर वार कर उसे घायल कर दिया।

उसने दो बार पिस्तौल भी चलाई, लेकिन सब व्यर्थ क्योंकि गुस्से में वो गोली भरना ही भूल गया था। मौके का फायदा उठा कर पुर्तगाली सेना पर मराठे टूट पड़े और वो भागने लगी। उन्हें पीछे हटते देख कर अंग्रेज भी भाग खड़े हुए। कोंकण के सिद्दी मुस्लिमों और हैदराबाद के निजाम की सेनाएँ भी उनसे टकरा कर भागती थीं। 1729 में 60 वर्ष की आयु में ही उनका निधन हो गया, लेकिन उन्होंने दुश्मनों को भारतीय समुद्री सीमा में फटकने नहीं दिया।

ऐसा नहीं है कि कान्होजी आंग्रे ने धन के लिए मराठा नौसेना की कमाल संभाली थी। एक बार एक पुर्तगाली कमांडर उनके लिए हीरे-जवाहरात सहित कई संदूकों में भर कर भेंट लेकर आया और व्यापार की अनुमति माँगी। कान्होजी ने जब पूछा कि क्या वो व्यापार कर के चला जाएगा तो उसने यहीं रहने का इरादा जताया। इसे भाँप कर वीर मराठा ने सारे धन को लात मार दिया और उसे दफा हो जाने को कहा।

अरब सागर में महाराष्ट्र की जमीनी सीमाँ से 5 किलोमीटर दूर एक द्वीप का नामकरण कान्होजी आंग्रे के नाम पर किया गया है। उनके नाम पर क्रूज भी चलती है। मुंबई पोर्ट ट्रस्ट इस द्वीप को विकसित कर के इसे एक बड़ा पर्यटन स्थल बनाने के लिए काम कर रहा है। भारतीय नौसेना के वेस्टर्न कमांड में ‘INS आंग्रे’ भी है। 21 वर्षों तक खाण्डेरी का किला कान्होजी का मुख्य बेस रहा। ये द्वीप दक्षिणी मुंबई में स्थित है।

3 भाई, नाम- आफताब, शकील और सगीर: दुनिया की नजर में कारीगर, चलाते थे हथियारों की फैक्ट्री

नोएडा पुलिस की क्राइम ब्रांच और गौतमबुद्ध नगर जिले के बिसरख थाना पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए शनिवार (3 जुलाई 2021) को अवैध हथियार फैक्टरी का भंडाफोड़ किया। पुलिस ने इस मामले में गाजियाबाद के केला भट्टा में रहने वाले तीन सगे भाइयों आफताब, शकील और सगीर को गिरफ्तार किया है। इनकी कार से 10 पिस्टल और भारी मात्रा में अवैध हथियार बनाने में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों के अलावा कई अर्ध निर्मित हथियार बरामद किए गए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तीनों आरोपित गाजियाबाद के केला भट्टा में अवैध हथियारों की फैक्टरी चला रहे थे। लेकिन पकड़े जाने की आशंका होने पर फैक्टरी को मेरठ शिफ्ट करने के लिए सामान लेकर ग्रेनो वेस्ट से गुजर रहे थे। बताया जा रहा है कि आरोपित दिल्ली के हाशिम से पिस्टल बनाने का सामान खरीदते थे और मेरठ के रहीस को वो अब तक 500 पिस्टल बेच चुके हैं।

डीसीपी क्राइम अभिषेक के मुताबिक, 3 जुलाई को क्राइम ब्रांच को सूचना मिली थी कि अवैध पिस्टल बनाने का काम करने वाले आरोपित कार से गुजरने वाले हैं। सूचना मिलते ही स्वाट टीम प्रभारी शावेज खान और बिसरख कोतवाली प्रभारी अनिता चौहान की टीम आरोपितों की तलाश में जुट गई। इनका खुलासा करने वाली टीम को पुलिस आयुक्त ने 40 हजार इनाम की घोषणा की थी।

पुलिस ने गाजियाबाद से मेरठ शिफ्ट होने के दौरान शाहबेरी गाँव के पास कार को रोककर चेकिंग की तो उसमें 10 पिस्टल और भारी मात्रा में असलाह बनाने का सामान बरामद हुआ। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए आरोपितों ने पूछताछ में बताया कि वह मेरठ में अवैध ​हथियारों की फैक्टरी लगाने के लिए ये सामान लेकर जा रहे थे। इससे पहले वह गाजियाबाद में फैक्टरी चला रहे थे। उन्होंने बताया कि वे पिस्टल तैयार करने के लिए सारा सामान दिल्ली निवासी हाशिम से लेते थे, जबकि पिस्टल को तैयार कर वह मेरठ निवासी रहीस को बेचते थे।

रिपोर्ट्स में यह भी खुलासा हुआ है कि ये आरोपित इंपोर्टेड हैंडगन के मॉडल यानी विदेशी कंपनी लामा की हूबहू नकल कर देसी पिस्तौल बना रहे थे। ऐसी पिस्टल का इस्तेमाल बड़े गिरोह या उनसे जुड़े बदमाश करते हैं। तीनों आरोपित एनसीआर में अब तक 500 पिस्टल बेच चुके हैं। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि ये सभी एनसीआर व ​पश्चिम यूपी के बड़े गिरोह या उनसे जुड़े बदमाशों को पिस्टल बेचते होंगे। जो इनकी पिस्टलों से कई वारदात को अंजाम दे चुके होंगे।

पुलिस ने कहा कि तीनों भाई लोहा और आभूषणों को तराशने का काम अच्छे से जानते थे। इनमें से सगीर सबमर्सिबल पंप लगाने का काम जानता था, जो पिस्टल बनाने का मुख्य कारीगर भी है। ये तीनों पिस्टल बनाने में होने वाले बारीक काम को भी किया करते थे। इस हुनर को आरोपितों ने हथियार बनाने के काम में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया था और अपने काम की आड़ में पिछले एक दशक से गाजियाबाद में इस ऑपरेशन को अंजाम दे रहे थे।

आरोपित बेहद सफाई से इस काम को किया करते थे। इससे उनकी पिस्टल आसानी से बिक जाती थी, इसे बनाने में उनका दो से तीन हजार रुपए का खर्च आता था। लेकिन इसके बदले में वह इसकी कई गुना ज्यादा कीमत वसूलते थे। तीनों आरोपित रहीस को एक पिस्टल करीब 25-25 हजार रुपए में बेचा करते थे। वहीं, रहीस एक पिस्टल का सौदा एक लाख रुपए में करता था। इसके लिए रहीस उनसे मुलाकात कर नकद भुगतान करता था।

पुलिस के मुताबिक, रहीस और सगीर अवैध हथियारों की बिक्री के मामले में दिल्ली की तिहाड़ जेल में साल 2010 में बंद हुए थे। इसी दौरान दोनों की पहचान जेल में हुई थी। दोनों ने यहाँ एक-दूसरे से अवैध हथियार बनाने व बिक्री के संबंध में जानकारी हासिल की थी। रहीस ने सगीर से कहा था कि अगर वह बेहतर पिस्टल तैयार कर सकता है, तो बिक्री की जिम्मेदारी उसकी रहेगी। जेल से बाहर आने के बाद ही आरोपित अवैध हथियारों के कारोबार में जुट गए।

‘आप को दुख हुआ, शॉक भी लगा होगा… लेकिन हम बहुत खुश’ – तलाक के बाद हाथों में हाथ डाल आमिर-किरण का वीडियो

बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान और किरण राव ने शनिवार (3 जुलाई 2021) को अपनी 15 साल की शादी को खत्म करने का ऐलान किया। इसके बाद से दोनों के इंटरव्यू की एक क्लिप सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हो रही है। वीडियो में किरण राव और आमिर खान एक साथ बैठे हुए हैं।

इस दौरान आमिर कहते हैं, ”आप लोगों को बहुत दुख हुआ होगा और शॉक भी लगा होगा, लेकिन हम आपको बताना चाहते हैं कि हम बहुत खुश हैं। हमारे रिश्ते में चेंज आया है, लेकिन हम दोनों एक दूसरे के साथ हैं। तो आप लोग ऐसा कभी मत सोचिएगा।”

‘थ्री इडियट्स’ फिल्म के अभिनेता ने किरण का हाथ पकड़ते हुए आगे कहा, ”पानी फाउंडेशन हमारे लिए आजाद की तरह है। जैसे हमारा बच्चा आजाद है, वैसे ही पानी फाउंडेशन है। हम लोग हमेशा फैमिली ही रहेंगे। आप लोग हमारे लिए दुआ कीजिए कि हम खुश हों। हम लोगों को बस यही कहना था।”

गौरतलब है कि आमिर खान और किरण राव ने 3 जुलाई को एक संयुक्त बयान जारी किया था। इसमें दोनों ने कहा था, ”ये 15 वर्ष इतने अच्छे बीते कि हमने इस दौरान आजीवन साथ रहने वाले अनुभव एक-दूसरे के साथ साझा किया।”

उन्होंने कहा, “हम साथ में खुश रहे, हँसे। हमारा रिश्ता विश्वास, प्यार और सम्मान के मामले में लगातार बढ़ता ही रहा। अब हमने निर्णय लिया है कि अब हम जीवन के नए अध्याय की शुरुआत करेंगे, लेकिन पति-पत्नी के रूप में नहीं।” बकौल आमिर खान और किरण राव, उनका ये नया जीवन उनके बेटे आजाद के अभिभावक के रूप में होगा, एक परिवार के रूप में होगा।

दोनों ने अपने संयुक्त बयान में ये भी कहा था, “हम साथ मिल कर फिल्में भी बनाते रहेंगे। ‘पानी फाउंडेशन’ के माध्यम से हम उन कहानियों को फिल्मी परदे पर उतारेंगे, जो हमारे दिल के करीब होंगी। हम अपने बेटे आजाद को लेकर सजग हैं और एक माता-पिता के रूप में उसे पूरा प्यार देंगे।

बता दें कि किरण राव आमिर खान की दूसरी पत्नी हैं। इससे पहले अभिनेता ने रीना दत्त से 1986 में शादी की थी। आमिर व उनकी पहली पत्नी रीना दत्ता का एक बेटा जुनैद खान और एक बेटी इरा खान है। इरा सोशल मीडिया पर खासा एक्टिव रहती हैं। रीना से आमिर की शादी 2002 में खत्म हो गई थी। इसके बाद उन्होंने 28 दिसंबर 2005 में किरण राव से शादी की थी। किरण से आमिर की पहली मुलाकात फिल्म ‘लगान’ के सेट पर हुई थी, जहाँ वह बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर काम कर रही थीं।

ट्विटर पर अब हिंदू देवी के अपमान का केस, महुआ मोइत्रा के ‘Susu Potty’ ट्वीट का हाईकोर्ट में किया बचाव

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर के खिलाफ पाँचवी शिकायत दर्ज हुई है। एक वकील ने हिन्दू देवी के अपमान पर दिल्ली पुलिस की साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई है। हालाँकि, ट्विटर इन शिकायतों के बाद भी बाज नहीं आ रहा है। दिल्ली हाईकोर्ट में ट्विटर ने तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) नेता महुआ मोइत्रा और प्रोपेगेंडाबाज पत्रकार स्वाति चतुर्वेदी के आपत्तिजनक ट्वीट का यह कहते हुए बचाव किया कि दोनों के ट्वीट, उसकी नीतियों का उल्लंघन नहीं करते हैं।

दरअसल, एथिस्ट रिपब्लिक नाम के ट्विटर हैन्डल से कुछ टीशर्ट की तस्वीर पोस्ट की गई। इनमें से एक टीशर्ट पर देवी काली की तस्वीर बनी हुई थी। शिकायत दर्ज कराने वाले वकील द्वारा इसे आपत्तिजनक माना गया और इस संबंध में दिल्ली पुलिस की साइबर सेल में ट्विटर के एमडी मनीष माहेश्वरी और ट्विटर हैन्डल एथिस्ट रिपब्लिक के खिलाफ मामला दर्ज कराया। ट्विटर के खिलाफ दर्ज इस शिकायत में धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का आरोप लगाया गया है।

पहले भी दर्ज हुए हैं मामले

ट्विटर के खिलाफ यह पाँचवीं शिकायत है। ट्विटर के खिलाफ 2-2 मामले दिल्ली और उत्तर प्रदेश में दर्ज हो चुके हैं जबकि एक मामला मध्य प्रदेश में दर्ज हुआ है। गाजियाबाद में एक मुस्लिम बुजुर्ग से मारपीट के मामले में ट्विटर पर खूब फेक न्यूज फैलाई गई और कहा गया कि मुस्लिम बुजुर्ग को ‘जय श्री राम’ बुलवाने के लिए पीटा गया लेकिन ट्विटर ने इन फेक न्यूज पर कोई कार्रवाई नहीं की। इसी के चलते गाजियाबाद पुलिस ने ट्विटर के खिलाफ मामला दर्ज किया। इसके अलावा हाल ही में देश का गलत नक्शा अपनी वेबसाइट पर दिखाने के कारण बुलंदशहर और मध्यप्रदेश में ट्विटर के खिलाफ शिकायत दर्ज हुई।

चाइल्ड पॉर्नोग्राफिक कंटेन्ट के कारण भी दिल्ली पुलिस की साइबर सेल में ट्विटर के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। इस संबंध में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के द्वारा शिकायत की गई थी। जिसके बाद ट्विटर इंक और ट्विटर कम्युनिकेशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ।

टीएमसी नेता और प्रोपेगेंडा पत्रकार का बचाव

टीएमसी नेता महुआ मोइत्रा और पत्रकार स्वाति चतुर्वेदी के आपत्तिजनक ट्वीट पर कार्रवाई करने में असफल रहने के बाद ट्विटर इंक के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। यहाँ दोनों के द्वारा किए गए ट्वीट के स्क्रीनशॉट दिए गए हैं जिनके आधार पर ट्विटर के खिलाफ याचिका दायर हुई।

टीएमसी नेता महुआ मोइत्रा के द्वारा किए गए ट्वीट का स्क्रीनशॉट
पत्रकार स्वाति चतुर्वेदी के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

इस पर ट्विटर ने कोर्ट में मोइत्रा और चतुर्वेदी का बचाव करते हुए कहा कि दोनों के ट्वीट ऐसे नहीं थे कि उन पर कार्रवाई की जाए। ट्विटर का कहना था कि दोनों के ट्वीट किसी भी प्रकार से ट्विटर की किसी भी नीति का उल्लंघन नहीं करते हैं।

एक कागज के कारण उड़ने से बच गई सिकंदराबाद-दरभंगा एक्सप्रेस, काजीपेट में धमाके की आतंकियों ने रची थी साजिश

बिहार के दरभंगा रेलवे स्टेशन पर जून 17, 2021 को दोपहर 3:25 बजे एक पार्सल में रखा बम फटने से विस्फोट हुआ था। अब पता चला है कि आतंकियों की मंशा उसे कहीं और किसी और समय पर फोड़ने की थी, ताकि बड़ी तबाही मचाई जा सके। आतंकियों की मुख्य साजिश सिकंदराबाद से दरभंगा के बीच चलने वाली 07007 डाउन स्पेशल ट्रेन को निशाना बनाने की थी, जिससे सैकड़ों यात्री आवागमन करते हैं।

आतंकियों की साजिश थी कि इस ट्रेन में एक भी व्यक्ति ज़िंदा न बच पाए। ‘दैनिक भास्कर’ की खबर के अनुसार, धमाके के लिए रखे नाइट्रिक और सल्फ्यूरिक एसिड में आतंकियों के सोचे समय पर रिएक्शन नहीं हुआ, जिससे एक बड़ी तबाही टल गई। पार्सल में रखे बम में ब्लास्ट तब हुआ, जब ट्रेन दरभंगा स्टेशन पहुँच चुकी थी। इस ब्लास्ट में जानमाल की क्षति नहीं हुई, लेकिन बम पहले फटता तो ट्रेन ‘द बर्निंग ट्रेन’ बन सकती थी।

ब्लास्ट के समय पार्सल को ट्रेन से उतारा जा चुका था और सभी यात्री भी ट्रेन से बाहर आ गए थे। आतंकियों की साजिश थी कि 15-16 जून की मध्य रात्रि में विस्फोट किया जाए। इसके लिए जगह के रूप में सिकंदराबाद स्टेशन से 132 KM दूर काजीपेट जंक्शन को चुना गया था। उनकी मंशा थी कि इस समय अधिकतर यात्री सो रहे होते हैं, इसीलिए उनके बचने का कोई चांस ही न हो। ये ट्रेन 15 जून की रात 10:40 बजे सिकंदराबाद से चली थी।

132 किलोमीटर दूर काजीपेट जंक्शन इसका पहला स्टॉपेज था। ये ट्रेन 12:38 में सामान्यतः वहाँ पहुँचती है। वहीं से निकलने के बाद ब्लास्ट हो, ऐसी आतंकियों की मंशा थी। NIA की टीम ने हैदराबाद से सगे भाई इमरान मलिक और नासिर मलिक को गिरफ्तार किया है, जिनसे पूछताछ में ये खुलासा हुआ। उत्तर प्रदेश के शामली स्थित कैरान से पकड़े गए मोहम्मद सलीम और टेलर कफील ने भी कई राज़ उगले हैं।

ये तो पहले भी खबर में आ चुका है कि जिस पार्सल में ब्लास्ट हुआ, वो बम लिक्विड के रूप में एक शीशी के बोतल में रखा हुआ था। दोनों केमिकल के बीच एक कागज़ की मोटी परत दी गई थी। यही कागज़ समय पर नहीं जला, जिससे ब्लास्ट देर से हुआ। अभी आतंकियों से पूछताछ जारी है, ऐसे में कई खुलासे होने बाकी हैं। ट्रेन में अगर उसके चलने के 1:54 घंटे बाद विस्फोट होता तो नजारा भयावह हो सकता था।

औरत बनने के लिए गौरांग की पहल: हेयर रिमूवल के लिए फंड रेजिंग, समर्थन में उठे हाथ

भारत में फंड इकट्ठा करने वाले प्लेटफॉर्म बड़ी तेजी से बढ़ रहे हैं। लोग अपनी आपातकालीन आर्थिक और चिकित्सकीय जरूरतों को पूरा करने के लिए इन प्लेटफॉर्म्स का उपयोग कर रहे हैं। हाल ही में एक फंडरेजर सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। यह फंडरेजर गौरांग नाम के एक व्यक्ति ने अपने बालों को हटाने (hair removal) के लिए शुरू किया गया है।

गौरांग से प्रकृति सोनी बने बेंगलुरु के इस निवासी का कहना है कि उसे अपने बालों को हटाने के लिए फंड की जरूरत है क्योंकि उसके परिवार की आर्थिक हालत ठीक नहीं है। हालाँकि, पहली बार सुनने में यह भले मजाक लगे, लेकिन प्रकृति ने बताया कि यह उनके लिए जिंदगी की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। प्रकृति 21 वर्षीय एक ट्रांस-वुमन हैं।

प्रकृति ने यह बताया कि उन्हें अपने शरीर के बालों को हटाने की जरूरत है, ताकि उनकी जैविक और लैंगिक पहचान के बीच अंतर को खत्म किया जा सके। प्रकृति ने अपने फंडरेजर पेज में बताया कि यह अंतर उन्हें मानसिक रूप से तनावग्रस्त कर देता है। प्रकृति इसे ‘जेंडर डायस्फोरिया’ नाम देती हैं।

उन्होंने बताया कि Covid-19 के कारण देश भर में लगाए गए लॉकडाउन के कारण उनका जेंडर डायस्फोरिया और भी बुरी स्थिति में पहुँचा गया है। इसलिए उन्होंने लेजर ट्रीटमेंट के जरिए अपने शरीर के बालों को पूरी तरह हटाने का निर्णय लिया है। चूँकि, उनकी आर्थिक हालत सही नहीं है इसलिए उन्होंने इस काम में लोगों की मदद लेने का निर्णय लिया और यह प्रकृति सोनी के लिए काम कर गया, जो पहले गौरांग सोनी थीं।

अपने दावे की पुष्टि के लिए प्रकृति ने बेंगलुरु के ही रमैया मेमोरियल हॉस्पिटल के डॉक्टर का लिखा हुआ लेटर भी अपलोड किया है। लेटर में लिखा गया है, “क्लाइंट ने खुद को स्त्री के रूप में पेश किया है इसलिए उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए मैं इस रिपोर्ट में उनके लिए स्त्रीलिंग सर्वनाम का उपयोग करूँगा।“

डॉक्टर ने प्रकृति को एक ‘मेल टू फीमेल ट्रांसजेंडर’ के रूप में परिभाषित किया है, जिसे बचपन से ही एक विपरीत लिंग वाले सदस्य के रूप में स्वीकार किए जाने की इच्छा थी। लेटर में यह भी कहा गया है कि उनका (प्रकृति) परिवार और उनके संपर्क के लोगों ने उनका हमेशा साथ दिया और यह दिखाई भी देता है, क्योंकि प्रकृति ने अपने तय लक्ष्य का आधा फंड जुटा लिया है।

रिपोर्ट लिखे जाने तक एक अज्ञात व्यक्ति ने 5,000 की सहायता की है, जो अब तक की सर्वाधिक रकम है। उस व्यक्ति ने प्रकृति के लिए संदेश दिया है कि उसे यह उम्मीद है कि प्रकृति अपने तय लक्ष्य तक जल्दी ही पहुँच जाएँगी और उनका इलाज हो जाएगा। उसने लिखा है कि प्रकृति एक शानदार व्यक्ति हैं और अपने जीवन में सर्वश्रेष्ठ की हकदार हैं।

एक दूसरे दानकर्ता आदिल ने लिखा, “मैं तुम्हें बता नहीं सकता कि मैं तुम्हारे लिए कितना खुश हूँ। मैं उम्मीद करता हूँ कि सब कुछ जल्दी ठीक हो जाएगा।“

28 अक्टूबर 2020 को लिखे गए डॉक्टर के लेटर में कहा गया है कि प्रकृति ने पिछले 2 वर्षों से एक महिला की तरह जीवन गुजारने के अपने अनुभव के बारे में बताया है। लेटर में यह भी बताया गया है कि प्रकृति (गौरांग) को स्कूल में लड़कियों के साथ खेलना और उन्हीं की तरह रहना पसंद था।

डॉक्टर के लेटर में बताया गया है कि प्रकृति प्राइमरी और सेकंडरी, दोनों स्तर पर अपनी लैंगिक असमानता से छुटकारा चाहती हैं। लेटर में बताया गया है कि प्रकृति को हार्मोन रिप्लेसमेंट थैरेपी की आवश्यकता है ताकि वह अपने शरीर को स्त्री का रूप दे सकें, जो उनकी लैंगिक पहचान के अनुरूप है।

हालाँकि, अभी तक यह पता नहीं चला है कि प्रकृति ने हार्मोन रिप्लेसमेंट थैरेपी ली है या नहीं। हो सकता है इसके लिए उन्हें एक और फंडरेजर की जरूरत पड़े। फिलहाल बालों को हटाने के लिए शुरू किया गया फंडरेजर ठीक तरीके से आगे बढ़ रहा है।

महाराष्ट्र में भीड़ की गुंडई: तुकाराम पवार की मॉब लिंचिंग, अपराधी जमील कुरैशी की मौत के बाद पुलिस पर हमला

महाराष्ट्र में ग्रामीणों की भीड़ ने एक प्राइवेट बिजली कंपनी के गार्ड की पीट-पीट कर हत्या कर दी। बिजली बिल न जमा करने वालों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा था, जिससे आक्रोशित भीड़ ने मॉब लिंचिंग की इस घटना को वारदात को अंजाम दिया। वहीं रविवार (जुलाई 4, 2021) को ही पुलिस ने जानकारी दी कि अलग घटना में एक भीड़ के हमले में महाराष्ट्र के तीन पुलिसकर्मी घायल हो गए। ये दोनों ही घटना ठाणे के भिवंडी में हुई।

भिवंडी पावरलूम टाउन में ही इस घटना ने एक बार फिर से महाराष्ट्र में भीड़ अपराध को चर्चा में ला दिया है। शनिवार को बिजली कंपनी के कुछ अधिकारी तुकाराम पवार नामक सिक्योरिटी गार्ड के साथ कनेरी गाँव के कटाई क्षेत्र में गए हुए थे। निजामपुरा थाने की पुलिस ने बताया कि ये लोग उस इलाके में बिजली बिल जमा न करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए गए थे। जो कई महीने के डिफॉलटर्स थे, उनका बिजली कनेक्शन काटा जाना था।

तभी अचानक से 12-15 ग्रामीणों की भीड़ वहाँ आ धमकी और बिजली कंपनी के कार्य में बाधा डालने लगी। ग्रामीणों ने बिजली कंपनी के कर्मचारियों की पिटाई की। उन्होंने बिजली कनेक्शन काटने से भी रोक दिया। इस हमले में गार्ड तुकाराम पवार बुरी तरह घायल हो गए। उन्हें आनन-फानन में भिवंडी के IGM अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। रास्ते में ही उनकी जान जा चुकी थी।

निजामपुरा पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और ‘एक्सीडेंटल डेथ’ का मामला दर्ज किया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। मृतक के बेटे का कहना है कि पॉवर कंपनी की लापरवाही से ही उसके पिता की मौत हुई है। कंपनी के पब्लिक रिलेशन्स (PR) अधिकारी चेतन बिजलानी का कहना है कि डिफॉलटर्स के खिलाफ ये सामान्य अभियान था, इसीलिए पुलिस की सुरक्षा की माँग नहीं की गई।

उन्होंने बताया कि जब विशेष अभियान चलाया जाता है तब पुलिस की सुरक्षा की माँग की जाती है। वहीं दूरी घटना भिवंडी के ही कसाई वड़ा में शुक्रवार को हुई। गुजरात पुलिस और भिवंडी क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम सादे कपड़ों में जमील कुरैशी नाम के एक अपराधी को पकड़ने गई हुई थी। 38 वर्षीय जमील के खिलाफ वलसाड पुलिस थाने में कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस को देख कर गिरफ़्तारी से बचने के लिए कुरैशी चौथी मंजिल पर स्थित फ्लैट की खिड़की से ही कूद गया।

भिंवडी जोन के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (DCP) योगेश चव्हाण ने बताया कि खिड़की से कूदने के कारण अपराधी की मौत हो गई। इसके बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस पर उसे धक्का देकर मार डालने का आरोप लगाया और हमला कर दिया। वायरल वीडियो में महिलाओं-पुरुषों की भीड़ को पुलिसकर्मियों को पीटते और पत्थरबाजी करते देखा जा सकता है। ये एक संवेदनशील क्षेत्र है, इसीलिए पुलिस ने मामला दर्ज कर के गश्ती बढ़ा दी है।

हैदराबाद में स्थापित होगी तीसरी वैक्सीन परीक्षण प्रयोगशाला, PM CARES से फंड

केंद्र सरकार ने हैदराबाद में वैक्सीन-परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित करने के लिए PM CARES फंड से धनराशि आवंटित की है। प्रयोगशाला के अगस्त तक तैयार होने की उम्मीद है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री (MoS) जी किशन रेड्डी ने यह जानकारी दी।

सिकंदराबाद से लोकसभा सदस्य रेड्डी ने ट्वीट कर कहा, “हैदराबाद में वैक्सीन परीक्षण प्रयोगशाला की स्थापना के लिए फंड को मँजूरी देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार। हैदराबाद में फार्मा क्षेत्र के व्यापक विकास की दिशा में यह एक बड़ा कदम है। इससे कोविड-19 के टीकों के उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा।”

रेड्डी ने नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि मौजूदा समय में देश में वैक्सीन परीक्षण के सिर्फ दो ही प्रयोगशालाएँ हैं। एक, कसौली में केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला और दूसरी, नोएडा में राष्ट्रीय जैविक संस्थान। उन्होंने बताया कि पीएम केयर्स फंड से जैव प्रौद्योगिकी विभाग के तहत हैदराबाद के राष्ट्रीय पशु जैव प्रौद्योगिकी संस्थान में वैक्सीन परीक्षण की तीसरी प्रयोगशाला स्थापित की जाएगी। उन्होंने कहा कि फार्मा रिसर्च का केंद्र माने जाने वाले हैदराबाद के लिए यह वरदान होगा।

बता दें कि दो प्रयोगशालाओं की स्थापना के लिए 6 मार्च को पीएम केयर्स फंड से धनराशि जारी किया गया है। एक, नेशनल सेंटर फॉर सेल साइंस पुणे में और दूसरा, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एनिमल बायोटेक्नोलॉजी हैदराबाद में।

उल्लेखनीय है कि तेलंगाना सरकार ने भी केंद्र से हैदराबाद में वैक्सीन परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित करने का अनुरोध किया था। उद्योग मंत्री के टी रामाराव ने इस संबंध में तीन बार केंद्र से अनुरोध किया था। सबसे हालिया अनुरोध 20 जून को किया गया था। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन को लिखे एक पत्र में रामा राव ने कहा था कि हैदराबाद दुनिया की वैक्सीन राजधानी के रूप में उभरा है। राव ने कहा, “मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि राज्य सरकार वैक्सीन केंद्र को फास्ट ट्रैक पर स्थापित करने के लिए हर संभव सहयोग देगी।”

AAP के सांसद भगवंत मान और MLA हरपाल सिंह कर रहे थे CM के घर के सामने विरोध-प्रदर्शन, पंजाब में FIR दर्ज

पंजाब के मोहाली में शनिवार (3 जुलाई 2021) को मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के घर के पास विरोध कर रहे आम आदमी पार्टी (AAP) के लोकसभा सांसद भगवंत मान और विधायक हरपाल सिंह चीमा समेत पार्टी के 23 सदस्यों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 188 और आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत नामजद FIR दर्ज की गई है। 

इसके अलावा, 200 अज्ञात लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है, जो इस प्रदर्शन का हिस्सा थे। यह जानकारी मोहाली के एसएसपी ने दी है। एसएसपी के मुताबिक, इस पूरे मामले में जाँच की जा रही है। शनिवार को आम आदमी पार्टी ने सिसवां में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के फार्महाउस पर प्रदर्शन किया था। 

बता दें कि AAP की पंजाब इकाई के प्रमुख भगवंत मान के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता बिजली कटौती को लेकर कॉन्ग्रेस सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। मुख्यमंत्री के फार्महाउस की ओर जाने वाली सड़क पर भारी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था और बहुस्तरीय बैरिकेड लगाए गए थे। AAP पार्टी के झंडे लिए कार्यकर्ता जैसे ही बैरिकेड के पहले स्तर से आगे बढ़े और दूसरे स्तर तक पहुँचे, पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछार की।

पंजाब अभूतपूर्व बिजली की कमी से जूझ रहा है और चिलचिलाती गर्मी के बीच शहरी और ग्रामीण इलाकों में लंबे समय तक बिजली की कटौती हो रही है। पंजाब सरकार ने राज्य सरकार के कार्यालयों के समय में कटौती करने और उच्च ऊर्जा खपत वाले उद्योगों को बिजली की आपूर्ति कम करने का पहले ही आदेश जारी कर दिया है।

अमरिंदर सिंह के नेतृत्व वाली सरकार उपभोक्ताओं, विशेष कर धान की खेती करने वाले किसानों को फसल बोने के लिए पर्याप्त बिजली उपलब्ध नहीं करा पाने पर विपक्ष के निशाने पर है। इससे पहले AAP नेताओं ने लोगों को सस्ती दरों पर 24 घंटे बिजली मुहैया कराने में ‘विफल’ रहने के लिए कॉन्ग्रेस सरकार की आलोचना की थी। मान ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि वे पंजाब के 2.75 करोड़ लोगों के ‘दुख’ को मुख्यमंत्री तक पहुँचाने के लिए एकत्र हुए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री पर आरोप लगाया था कि वह ‘अपने फार्महाउस में सो रहे हैं।’