Home Blog Page 3643

200 ‘किसानों’ के खिलाफ FIR: गाजीपुर बॉर्डर पर BJP नेता-कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट, वीडियो से खोज रही UP पुलिस

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर बॉर्डर पर मंगलवार (जून 29, 2021) को ‘किसानों’ और बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच हुई भिड़ंत के बाद पुलिस ने अब तक भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के 200 अज्ञात कार्यकर्ताओं पर एफआईआर दर्ज करवाई है। इन सबके खिलाफ आईपीसी की धारा 147, 148, 223, 352, 427 और 506 के तहत केस दर्ज किया गया है। मामले में कौशांबी पुलिस थाने में बीजेपी के जनरल सेक्रटरी अमित वाल्मिकी ने शिकायत दर्ज करवाई है, जिनके स्वागत के दौरान ही यह हंगामा हुआ। 

अमित बाल्मीकि ने दर्ज करवाई एफआईआर

दरअसल, बुधवार (जून 30, 2021) को भाजपा कार्यकर्ता अपने नेता अमित बाल्मीकि का स्वागत करने के लिए गाजीपुर बॉर्डर पर पहुँचे थे। इस दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं की वहाँ कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे ‘किसानों’ के साथ झड़प हो गई। इसके बाद दोनों ओर से डंडे चलने लगे। किसान अधिक थे, इसलिए वह भारी पड़े और भाजपा कार्यकर्ताओं को भागना पड़ा।

अब इस मामले में बीजेपी नेता अमित बाल्मीकि की शिकायत पर 200 अज्ञात लोगों के खिलाफ कौशाम्बी थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। बताया जा रहा है कि झड़प के दौरान पुलिस ने वीडियो भी बनाया था, जिसके आधार पर आरोपितों की शिनाख्त की जा रही है।

बीजेपी कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में मौजूद ‘किसानों’ ने पहले गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए और फिर कार्यकर्ताओं पर तलवार, भाले, लाठी-डंडों से हमला किया। वहीं ‘किसान’ नेता इसे बीजेपी की साजिश बता रहे हैं। तनाव बढ़ता देख मौके पर तैनात पुलिस ने फटाफट बीजेपी के काफिले को वहाँ से रवाना किया।

बीजेपी कार्यकर्ता महेश नेगी ने कहा था, ”हम लोग गाजीपुर बॉर्डर पर स्वागत कार्यक्रम कर रहे थे, इसी दौरान किसानों ने हम पर अचानक हमला कर दिया। इस हमले में अमित बाल्मीकि को चोट आई है।” महेश ने कहा कि उन्होंने कार्यक्रम की सूचना पुलिस को दी थी और वो वहाँ पर मौजूद भी थी। लेकिन इसके बावजूद किसानों ने उन पर हमला कर दिया।

राकेश टिकैत ने दी धमकी

इस झड़प पर ‘किसान’ नेता राकेश टिकैत ने कहा, “भाजपा के लोग जानबूझकर मंच पर आ गए थे, अगर मंच पर आना है तो बीजेपी छोड़कर आओ, लेकिन यह दिखाना कि हमने गाजीपुर के मंच पर भाजपा का झंडा फहरा कर कब्जा कर लिया, यह गलत है, ऐसे लोगों के बक्कल उधेड़ दिया जाएगा, प्रदेश में फिर कहीं भी नहीं जा सकते हैं, याद रख लेना।”

SDPI नेता सैयद अब्बास गिरफ्तार: बेंगलुरु दंगों का मुख्य साजिशकर्ता, पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ पोस्ट पर शहर में लगाई थी आग

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने पिछले साल अगस्त में बेंगलुरु में हुए दंगा मामले के मुख्य साजिशकर्ता को बुधवार (जून 30, 2021) को गिरफ्तार कर लिया। दंगे के दौरान चार लोगों की मौत हो गई थी। एनआईए के एक प्रवक्ता ने बताया कि गोविंदपुर निवासी 38 वर्षीय सैयद अब्बास को बेंगलुरु से गिरफ्तार किया गया।

उन्होंने बताया कि अब्बास को बेंगलुरु की विशेष एनआईए अदालत के समक्ष पेश किया गया, जहाँ से उसे 6 दिन के लिए एजेंसी की हिरासत में भेज दिया गया। अब्बास बेंगलुरु में सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) का नागवाड़ा वार्ड का अध्यक्ष है। 

गौरतलब है कि इससे पहले बेंगलुरु में हुई हिंसा मामले में फरार चल रहे कॉन्ग्रेस नेता व पूर्व मेयर संपत राज को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। संपत राज को बेंगलुरु से गिरफ्तार किया गया था। उन पर हिंसक भीड़ को उकसा कर दंगे भड़काने का आरोप है। पिछले दिनों कोरोना के इलाज के दौरान संपत एक निजी अस्पताल में भर्ती होने के बाद फरार हो गए थे। इसके बाद से पुलिस लगातार इनकी तलाश कर रही थी।

क्या था मामला?

बता दें कि पिछले साल 11 अगस्त को बेंगलुरू में हजारों लोगों ने विधायक के एक रिश्तेदार के जरिए सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट साझा करने को लेकर कॉन्ग्रेस विधायक आर अखंड श्रीनिवास मूर्ति और उनकी बहन जयंती के घरों में आग लगा दी थी। गुस्साई भीड़ ने डीजे हल्ली और केजी हल्ली पुलिस थानों को इस संदेह में अगा लगा दी थी कि विधायक का रिश्तेदार हवालात में है।

इस मामले को लेकर एनआईए ने कहा कि जाँच में सामने आया है कि आरोपित अब्बास ने अन्य साजिशकर्ताओं के साथ मिलकर वाहनों में आग लगाई और पुलिस अधिकारियों पर हमला किया। दरअसल, आरोप लगा था कि विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के भाँजे ने पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट लिखी थी। ये खबर फैलने के बाद शाम साढ़े 7 बजे के करीब मुस्लिम समुदाय के सैकड़ों लोगों की भीड़ उनके घर के बाहर जमा हो गई थी।

इस मामले पर एनआईए ने कहा कि जाँच में सामने आया है कि आरोपित अब्बास ने अन्य साजिशकर्ताओं के साथ मिलकर वाहनों में आग लगाई और पुलिस अधिकारियों पर हमला किया। दंगे के पीछे SDPI का नाम सामने आने के बाद कर्नाटक सरकार ने इसे बैन करने की बात कही थी।

‘क्लीवेज और थाई’ दिखाने को बोलता था फिल्म डायरेक्टर, ‘आश्रम’ की हिरोइन ने बताई कास्टिंग काउच की कहानी

कास्टिंग काउच बॉलीवुड का घिनौना सच है, जहाँ काम देने के बहाने अभिनेत्रियों के साथ अश्लील बर्ताव किए जाते हैं। इसी को लेकर वेब सीरीज ‘आश्रम’ की एक्ट्रेस रही प्रीती सूद ने अपने कड़वे अनुभवों को साझा किया है। उन्होंने कास्टिंग काउच को लेकर खुलासा किया कि जब वो फिल्ममेकर के पास काम के लिए गई थीं तो उसने क्लीवेज दिखाने और थाई (जाँघ) को एक्सपोज करने वाले कपड़े पहनने के लिए कहा।

प्रीती ने कहा कि उन्हें ये सब सुन कर अपने कानों पर यकीन ही नहीं हुआ और मैं वहाँ से चली गईं। बता दें कि आश्रम सीरीज को डायरेक्टर प्रकाश झा ने निर्देशित किया था। ई टाइम्स को दिए इंटरव्यू में प्रीती ने अपने अनुभवों को याद किया।

एक्ट्रेस ने कहा, “ऑडिशन के दौरान कोई मुझे बूढ़ी कहता था तो कोई कहता था कि मैं इस फिल्म के लिए बनी ही नहीं हूँ। हद तो तब हो गई, फिल्म के आखिर में यह कह कर बाहर कर दिया गया कि मैं लीड एक्ट्रेस से अधिक खूबसूरत हूँ।”

फिल्मों में आने को लेकर प्रीती ने कहा, “मैं छोटे से शहर से आती हूँ, जहाँ मेरी उम्र में पैरेंट्स लड़कियों की शादी करा देते हैं। इसलिए मैंने जब उनसे कहा कि मुझे फिल्मों में करियर बनाना है तो वो इसके लिए सहमत नहीं हुए थे। ऐसा इसलिए क्योंकि छोटी जगहों वाले लोग ये सोचते हैं कि आप टीचर या दूसरी गवर्नमेंट जॉब करके सेटल हो जाओ, घर की रोटी खा के निकलो।”

सुरवीन चावला भी हुई थीं कास्टिंग काउच की शिकार

हाल ही में बॉलीवुड अभिनेत्री सुरवीन चावला ने भी कास्टिंग काउच को लेकर अपने अनुभव शेयर किए थे। एक्ट्रेस ने वर्ष 2019 में पिंकविला को दिए इंटरव्यू में बताया था कि “मैं दक्षिण की फिल्मों में काम कर रही थी। इसी दौरान एक निर्देशक ने मुझसे कहा कि मैं तुम्हारे शरीर का इंच-इंच देखना चाहता हूँ। मैंने उसके फोन कॉल्स को रिसीव करना बंद कर दिया था। इसके बाद एक राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित निर्देशक ने मुझे परेशान किया। वो मेरे करीब आना चाहता था।”

‘मुंबई 2006’ जैसी चलती ट्रेन में ब्लास्ट, निशाने पर दरभंगा-सिकंदराबाद: UP के शामली पैदा, Pak में बम ट्रेनिंग और हैदराबाद में ठिकाना

बिहार के दरभंगा रेलवे स्टेशन पर हुए पार्सल ब्लास्ट के मामले में एनआईए ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। एनआईए ने दो मुख्य आरोपित इमरान मलिक उर्फ इमरान खान और मोहम्मद नासिर खान उर्फ नासिर मलिक को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपित का पाकिस्तान कनेक्शन सामने आया है और उन्हें लश्कर का आतंकी बताया गया है। दोनों हैदराबाद में रह रहे थे और देश के अलग-अलग हिस्सों में आतंकी हमलों के जरिए दहशत फैलाना चाहते थे। अब एनआईए ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है और उनके जरिए कई जरूरी जानकारी सामने निकल आई है।

एनआईए (NIA) की प्रवक्ता जया राय ने बताया कि 17 जून को दरभंगा रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर पार्सल में विस्फोट हुआ था। जाँच के दौरान पुलिस को केमिकल ब्लास्ट का शक हुआ क्योंकि मौका ए वारदात पर केमिकल की बोतल भी बरामद हुई थी। इस मामले में 24 जून को एनआईए ने जाँच शुरू की थी। इमरान मलिक और मोहम्मद नासिर खान से शुरुआती पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि उन्होंने लोकल केमिकल का इस्तेमाल कर आईईडी तैयार तैयार किया था।

पार्सल ब्लास्ट का ‘पाकिस्तान कनेक्शन’

जाँच में NIA को पता चला कि दोनों आतंकी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हुए हैं। ये लोग देश में और भी आतंकी घटनाओं को अंजाम देने की साजिश की फिराक में थे। NIA के मुताबिक, ये दोनों पाकिस्तान में बैठे अपने आका के आदेश पर हिंदुस्तान में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने में जुटे थे। पूरी साजिश पाकिस्तान में मौजूद आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा के इशारे पर रची गई थी। दोनों भाइयों को जल्द ही एनआईए ट्रांजिट रिमांड पर पटना लाएगी।

गिरफ्तार आरोपित मोहम्मद नासिर खान और उसके भाई इमरान मलिक ने ये आईईडी बम बनाया था। उस बम को कपड़े के एक पार्सल में पैक किया, जिसे सिकंदराबाद से दरभंगा तक लंबी दूरी तय करने वाली ट्रेन में रखा गया।  इनका मकसद था एक चलती हुई यात्री ट्रेन में विस्फोट करना – जैसा 2006 में मुंबई की लोकल ट्रेनों में किया गया था। गिरफ्तार आरोपित मोहम्मद नासिर खान ने वर्ष 2012 में पाकिस्तान का दौरा किया था और वहीं केमिकल बम बनाना सीखा था।

अब उसी तकनीक के जरिए ये आतंकी चलती ट्रेन में भी बड़ी वारदात को अंजाम देना चाहते थे, लेकिन उनके मंसूबे नाकामयाब रह गए और अब उनकी गिरफ्तारी भी हो गई है। जाँच में यह बात भी सामने आई है कि दोनों भाई अपने हैंडलर से बात करने के लिए सुरक्षित संचार माध्यमों का इस्तेमाल कर रहे थे। नासिर और इमरान दराबाद के नामपल्लई में रहते थे पर दोनों मूलत: उत्तर प्रदेश के शामली के हैं। आरोपितों से अभी भी जाँच जारी है, ऐसे में और भी कई चौंकाने वाली बातें सामने आ सकती हैं।

चर्च चलाता था स्कूल, मिले 182 कब्र: पहले दो स्कूलों में मिले थे 966 कब्र – सभ्य बनाने के नाम पर की गईं हत्याएँ?

एक कनाडाई स्वदेशी समुदाय ने बुधवार (जून 30, 2021) को कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत में क्रैनब्रुक के पास एक पूर्व स्वदेशी आवासीय विद्यालय के आसपास अचिह्नित कब्रों में 182 लोगों के अवशेषों के बरामद होने की बात कही।

रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस कॉर्पोरल शेल्डन रॉब ने इस मामले पर बोलते हुए AFP को बताया, “हम इसे संदिग्ध मानते हुए इसकी जाँच कर रहे हैं।” स्वदेशी आवासीय स्कूलों में बच्चों के साथ हुए दुर्व्यवहार के लिए पोप फ्रांसिस से माफी माँगने की माँग की गई। कनाडा के सबसे बड़े स्वदेशी संगठन के प्रमुख ने बुधवार को कहा कि पोप फ्रांसिस इस साल के अंत में स्वदेशी नेताओं के साथ बैठक करेंगे और कनाडा आने पर चर्चा करेंगे। इसके साथ ही वह स्कूलों के संचालन में चर्च की भूमिका के लिए माफी माँगेंगे।

कैनेडियन कॉन्फ्रेंस ऑफ कैथोलिक बिशप्स ने कहा कि पोप कनाडा के तीन सबसे बड़े स्वदेशी समूहों – फर्स्ट नेशंस, मेटिस और इनुइट के प्रतिनिधियों के साथ वेटिकन में अलग-अलग मिलेंगे। इस साल दिसंबर में बैठकों की चार दिवसीय श्रृंखला के दौरान इसका समापन होगा।

बिशप ने लिखा, “पोप फ्रांसिसी स्वदेशी लोगों से सीधे सुनने, अपनी हार्दिक निकटता व्यक्त करने, उपनिवेशवाद के प्रभाव और आवासीय स्कूल प्रणाली में चर्च की भूमिका को संबोधित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

कनाडा के एक स्कूल में दफन 751 लोगों के शव

गौरतलब है कि ये इस तरह की तीसरी घटना है। हाल ही में कनाडा के एक आवासीय स्कूल से 751 बच्चों के अवशेष मिले थे। एक अधिकारी ने बताया था कि जाँचकर्ताओं को इस आवासीय स्कूल के परिसर से 751 अचिह्नित कब्रें मिली थीं। आशंका जताई गई कि इनमें भी बच्चों के शव दफनाए गए हैं।

ट्रूथ एंड रिकॉन्सिलिएशन कमिशन ने पाँच वर्ष पहले संस्थान में बच्चों के साथ हुए दुर्व्यवहार पर विस्तृत रिपोर्ट दी थी। इसमें बताया गया कि दुर्व्यवहार एवं लापरवाही के कारण कम से कम 3200 बच्चों की मौत हो गई थी।

215 आदिवासी बच्चों के मिले थे अवशेष

इससे पहले कनाडा के एक बंद पड़े बोर्डिंग स्कूल के परिसर में 215 आदिवासी बच्चों के अवशेष पाए गए थे। इनमें से कुछ की उम्र तीन साल तक की बताई गई। इस मामले में Tk’emlups te Secwepemc जनजाति ने बताया था कि ब्रिटिश कोलंबिया में 1978 से बंद पड़े कमलूप्स इंडियन रेजीडेंशियल स्कूल (KIRS) में बच्चों के अवशेषों की बरामदगी हुई। तब इन्हें रडार विशेषज्ञों की मदद से जमीन से निकाला गया था।

रिपोर्ट में ये भी कहा गया था कि बच्चों को वहाँ शारीरिक शोषण, बलात्कार, कुपोषण व अन्य अत्याचारों से गुजरना होता था। रिपोर्ट के अनुसार इस आवासीय स्कूल में रहने के दौरान 4100 बच्चों की मौत हुई थी। लेकिन कनाडा के सबसे बड़े आवासीय स्कूल में दफनाए गए इन 215 बच्चों का रिकॉर्ड इस लिस्ट में शामिल नहीं किया गया था।

पलनि का मुरुगन स्वामी मंदिर: 9 बेहद जहरीले पदार्थों से बनी मूर्ति, जहाँ पूजे जाते हैं भगवान के साथ आयुर्वेद के ज्ञाता भी

ऑपइंडिया की मंदिर श्रृंखला में आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताएँगे, जिसके विषय में हाल ही में मद्रास हाई कोर्ट का निर्णय आया। हम बात कर रहे हैं तमिलनाडु के डिंडीगुल जिले के पलनि में स्थित अरुल्मिगु दंडायुधपाणी मंदिर की, जहाँ मद्रास हाई कोर्ट ने अपना निर्णय सुनाते हुए मंदिर में स्थापित देवता को नाबालिग या अबोध बालक माना है और मंदिर से जुड़ी पूरी संपत्ति को मंदिर के हवाले करने का आदेश दिया है। अरुल्मिगु दंडायुधपाणी मंदिर भगवान शिव के पुत्र भगवान मुरुगन अथवा कार्तिकेय को समर्पित है तथा उनका सबसे प्रसिद्ध एवं सबसे विशाल मंदिर माना जाता है।

मंदिर का इतिहास एवं निर्माण

डिंडीगुल के पलनि के शिवगिरि पर्वत स्थित मुरुगन स्वामी के इस मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है। हालाँकि वर्तमान मंदिर का निर्माण चेर राजाओं द्वारा कराया गया है लेकिन इसका वर्णन स्थल पुराण और तमिल साहित्य में मिलता है।

जब महर्षि नारद ने भगवान शिव और माता पार्वती को ‘ज्ञानफलम’ अर्थात ज्ञान का फल उपहार स्वरूप दिया तो भगवान शिव ने उसे अपने दोनों पुत्रों भगवान गणेश और कार्तिकेय स्वामी में से किसी एक को देने का निर्णय लिया। इसके लिए दोनों के सामने यह शर्त रखी गई कि जो भी सम्पूर्ण संसार की परिक्रमा शीघ्रता से कर लेगा, उसे यह फल प्राप्त होगा। इसके बाद कार्तिकेय स्वामी अपने वाहन मोर पर सवार होकर निकल गए पूरे संसार की परिक्रमा करने लेकिन भगवान गणेश ने अपने माता-पिता की परिक्रमा कर ली और कहा कि उनके लिए उनके माता-पिता ही संसार के समान हैं। भगवान शिव ने प्रसन्न होकर वह ज्ञानफल भगवान गणेश को दे दिया। जब कार्तिकेय स्वामी परिक्रमा करके लौटे तो नाराज हो गए कि उनकी परिक्रमा व्यर्थ हो गई। इसके बाद कार्तिकेय स्वामी ने कैलाश पर्वत छोड़ दिया और पलनि के शिवगिरि पर्वत पर निवास करने लगे। यहाँ ब्रह्मचारी मुरुगन स्वामी बाल रूप में विराजमान हैं।

मंदिर का निर्माण 5वीं-6वीं शताब्दी के दौरान चेर वंश के शासक चेरामन पेरुमल ने कराया। कहा जाता है कि जब पेरुमल ने पलनि की यात्रा की तो उनके सपनों में कार्तिकेय या मुरुगन स्वामी आए और पलनि के शिवगिरि पर्वत पर अपनी मूर्ति के स्थित होने की बात राजा को बताई। राजा पेरुमल को वाकई उस स्थान पर कार्तिकेय स्वामी की मूर्ति प्राप्त हुई, जिसके बाद पेरुमल ने उस स्थान पर मंदिर का निर्माण कराया। इसके बाद चोल और पांड्य वंश के शासकों ने 8वीं से 13वीं शताब्दी के दौरान मंदिर के विशाल मंडप और गोपुरम बनवाए। मंदिर को सुंदर कलाकृतियों से सजाने का काम नायक शासकों ने किया।

माना जाता है कि मुरुगन स्वामी की मूर्ति 9 बेहद जहरीले पदार्थों को मिलाकर बनाई गई है। हालाँकि आयुर्वेद में इन जहरीले पदार्थों को एक निश्चित अनुपात में मिलाकर औषधि निर्माण की प्रक्रिया का भी वर्णन है। पलनि के अरुल्मिगु दंडायुधपाणी मंदिर के गोपुरम को सोने से मढ़ा गया है। मंदिर का परिसर काफी विशाल है और यहाँ तक पहुँचने के लिए 689 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं। हालाँकि मंदिर के गर्भगृह तक जाने की अनुमति किसी को भी नहीं है लेकिन फिर भी यहाँ श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बनी रहती है। मंदिर परिसर में ही भगवान शिव और माता पार्वती, भगवान गणेश और ऋषि बोगार की समाधि है। ऋषि बोगार आयुर्वेद के विद्वान माने जाने जाते हैं और उन्होंने ही मुरुगन स्वामी की मूर्ति का निर्माण किया है।

पलनि के इस मुरुगन स्वामी मंदिर की विशेषता यहाँ का प्रसाद है, जिसे ‘पंचतीर्थम प्रसादम’ कहा जाता है। पलनि के इस विशेष प्रसाद को भौगोलिक संकेत या GI टैग भी प्रदान किया गया है। पलनि के इस पंचतीर्थम का निर्माण केला, घी, इलायची, गुड़ और शहद से किया जाता है। तिरुपति के लड्डू की तरह पलनि का यह पंचतीर्थम प्रसाद भी अत्यंत प्रसिद्ध है।

कैसे पहुँचें?

पलनि का सबसे नजदीकी हवाईअड्डा कोयंबटूर अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा है, जो यहाँ से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसके अलावा मदुरै का हवाईअड्डा भी पलनि से लगभग 125 किमी की दूरी पर स्थित है। पलनि खुद भी एक रेलवे स्टेशन है, जो कोयंबटूर-रामेश्वरम रेललाइन पर स्थित है। पलनि तक पहुँचने के लिए मदुरै, कोयंबटूर और पलक्कड से ट्रेनें चलती हैं, साथ ही चेन्नई से पलनि के लिए रेलमार्ग की बेहतर सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावा सड़क मार्ग से भी पलनि पहुँचना आसान है क्योंकि तमिलनाडु राज्य परिवहन की बसें सीधे ही कई बड़े शहरों से पलनि के लिए चलाई गई हैं। इसके अलावा केरल राज्य परिवहन की बसें कोझिकोड, कासरगोड, कोट्टयम, पलक्कड और एर्नाकुलम जैसे शहरों को पलनि से जोड़ती हैं।

संस्कृत भाषा में एकमात्र समाचार पत्र चलाने वाले केवी संपत कुमार का निधन: PM मोदी, गृहमंत्री अमित शाह ने जताया शोक

भारत में संस्कृत के एकमात्र दैनिक समाचार पत्र ‘सुधर्मा’ को चलाने वाले उसके संपादक केवी संपत कुमार का आज (जून 30, 2021) दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। तमाम कठिनाइयों के बावजूद संस्कृत में अखबार निकालने और उसे लोकप्रिय बनाने में योगदान देने के लिए संपत कुमार और उनकी पत्नी विदुषी के एस जयलक्ष्मी को साल 2020 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।

संपत रॉय के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने बुधवार को ट्वीट कर गहरी संवेदना व्यक्त की। पीएम मोदी ने अपने ट्वीट में लिखा, “केवी संपत कुमार जी एक प्रेरक व्यक्तित्व थे, जिन्होंने विशेष रूप से युवाओं के बीच संस्कृत को संरक्षित और लोकप्रिय बनाने के लिए अथक प्रयास किया। उनका जुनून और दृढ़ संकल्प प्रेरणादायक था। उनके निधन से दुखी हूँ। उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूँ। ओम शांति।”

वहीं, केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने हिंदी और संस्कृत भाषा में ट्वीट कर केवी संपत के निधन पर शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा, ”केवी संपत कुमार जी का जीवन संस्कृत भाषा के संरक्षण व संवर्धन के प्रति समर्पित रहा। संस्कृत भाषा को आम बोलचाल का हिस्सा बनाने में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उनका निधन संस्कृत व पत्रकारिता जगत के लिए बड़ी क्षति है। प्रभु दिवंगत आत्मा को सद्गति प्रदान करें। ॐ शांति।”

गौरतलब है कि ‘सुधर्मा’ संस्कृत का एकमात्र दैनिक समाचार पत्र है। यह कर्नाटक के मैसूर से प्रकाशित होता है। भारत सरकार ने देश के एकमात्र दैनिक संस्कृत समाचार पत्र चलाने वाले दंपत्ति ‘सुधर्मा’ के संपादक व प्रकाशक केवी संपत कुमार और उनकी पत्नी जयलक्ष्मी को संयुक्त रूप से साल 2020 में पद्मश्री पुरस्कार के लिए चयनित किया था।

इस समाचार पत्र में वेद, योग, धार्मिक विषयों के आलेख प्रकाशित होते हैं। साथ ही राजनीति और सांस्कृतिक समाचारों के साथ ही अन्य जानकारियाँ भी प्रकाशित होती हैं। बताया जाता है कि संस्कृत के विद्वान पं. वरदराज आयंगर ने संस्कृत भाषा के प्रचार प्रसार के लिए 15 जुलाई 1970 को सुधर्मा की शुरुआत की थी, जिसके बाद उनके पुत्र केवी संपत कुमार, पुत्रवधु जयलक्ष्मी ने इस कार्य को आगे बढ़ाया।

J&K में खत्म हुई ‘कैपिटल शिफ्टिंग’ की 149 साल पुरानी परंपरा, ₹200 करोड़ की बचत से होगा वंचितों का कल्याण

जम्मू कश्मीर में प्रशासन ने आज (जून 30, 2021) बड़ा फैसला लेते हुए 149 साल पुरानी ‘दरबार स्थानांतण (capital shifting)’ व्यवस्था को खत्म कर दिया। प्रशासन के इस फैसले के साथ ही अधिकारियों को जम्मू एवं श्रीनगर में मिली आवास सुविधा भी रद्द हो गई।

इससे पहले उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने दशकों पुरानी व्यवस्था को खत्म करने का ऐलान किया था। अब इस काम के लिए अधिकारियों को 3 सप्ताह का समय दिया गया है। इसके भीतर अधिकारियों को दोनों राजधानी शहरों में अपने आवास खाली करने को कहा गया है।

इस मामले पर जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल ने 20 जून को ऐलान किया था कि जम्मू-कश्मीर प्रशासन पूरी तरह से ई-ऑफिस व्यवस्था अपना चुका है और इस तरह साल में दो बार ‘दरबार स्थानांतरण’करने की प्रथा समाप्त हो गई है।

उन्होंने कहा था, “अब जम्मू और श्रीनगर के दोनों सचिवालय 12 महीने सामान्य रूप से काम कर सकते हैं। इससे सरकार को प्रति वर्ष 200 करोड़ रुपए की बचत होगी, जिसका उपयोग वंचित वर्गों के कल्याण के लिए किया जाएगा।”

इस ऐलान के बाद आज संपदा विभाग के आयुक्त सचिव एम राजू की ओर से जारी आदेश में आज कहा गया है कि श्रीनगर और जम्मू में अधिकारियों और कर्मचारियों के आवासीय आवंटन को रद्द करने को मंजूरी दे दी गई है। दरबार स्थानांतरण के तहत जम्मू के कर्मचारियों को श्रीनगर में और श्रीनगर के कर्मियों को जम्मू में आवास आवंटित किए गए थे। ऐसे में आदेश में कहा गया है कि अधिकारी और कर्मचारियों को 21 दिनों के भीतर दोनों राजधानी शहरों में सरकार द्वारा आवंटित अपने आवासों को खाली करना होगा।

उल्लेखनीय है कि ‘दरबार स्थानांतरण’ के तहत राजभवन, नागरिक सचिवालय और कई अधिकारी साल में दो बार जम्मू और श्रीनगर स्थानांतरित होते थे। यह प्रथा महाराज गुलाब सिंह ने 1872 में शुरू की थी जिसके तहत प्रशासन सर्दियों में जम्मू से और गर्मियों में श्रीनगर से काम करता था।

तीन बच्चों की माँ शबाना ने अपने प्रेमी जीजा हकीम के साथ मिलकर लिव इन पार्टनर संजय को बेरहमी से मारा, गिरफ्तार

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में तीन बच्चों की माँ ने अपने प्रेमी जीजा के साथ मिलकर लिव इन पार्टनर को मौत के घाट उतार दिया है। बताया जा रहा है कि संजय नाम के शख्स के साथ शबाना नाम की महिला लिव इन रिलेशनशिप में रहती थी। यह युवक शबाना और उसके प्रेमी जीजा के बीच रोड़ा बन रहा था। इसलिए दोनों ने उसे दर्दनाक मौत देने की योजना बनाई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों आरोपितों जीजा और साली ने उस युवक के सिर पर पहले सिलबट्टे से और फिर ब्लेड से गर्दन पर वार किए। इसके बाद भी जब वह नहीं मरा तो उन्होंने तकिए से उसका गला घोंट दिया।

इस वारदात को सोमवार (28 जून 2021) रात को खंडवा के रामनगर के मल्टी में अंजाम दिया गया था। पुलिस ने बुधवार (30 जून 2021) को बताया कि उन्होंने 26 वर्षीय संजय का शव उसी रात तालाब से बरामद किया था। उन्होंने बताया कि संजय पिता तुलसीराम बामने करीब 2 साल से रामनगर स्थित चीरा खदान मल्टी में किराए के मकान में रह रहा था। एक रिपोर्ट के मुताबिक, संजय ने शबाना नाम की महिला से शादी भी कर ली थी।

पुलिस ने हत्या का केस दर्ज कर लिया है। उन्हें जाँच में युवक की गर्दन पर धारदार हथियार से वार के निशान और मल्टी नंबर 15 में खून के धब्बों के निशान मिले हैं। पुलिस के अनुसार, संजय के साथ शबाना लिव इन रिलेशनशिप में रह रही थी। उन्होंने शक के आधार पर महिला को हिरासत में लेकर उससे पूछताछ शुरू की। हालाँकि, सख्ती बरतने पर महिला ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर संजय की हत्या करने की बात कबूल कर ली है।

कोतवाली TI बीएल मंडलोई ने बताया, ”शबाना ने पहले संजय को अपने प्रेम के जाल में फँसाया था। इसके बाद युवक अपने माता-पिता को छोड़कर महिला के साथ लिव इन में रहने लगा। महिला अपने पति को छोड़ चुकी थी, लेकिन उसके तीन बच्चों का खर्च ठीक चल रहा था।” उन्होंने बताया कि शबाना की बहन के साथ हुए विवाद के बाद से उसका जीजा हकीम अकेला पड़ गया। इसके बाद उसने मल्टी नंबर 15 में आना-जाना शुरू कर दिया। घर में हकीम को देखने के बाद संजय आगबबूला हो जाता था। इसको लेकर उसका कई बार शबाना से झगड़ा भी हुआ था। वहीं, शबाना और उसके जीजा का प्यार धीरे-धीरे परवान चढ़ने लगा था। महिला अब संजय से छुटकारा पाने की कोशिश कर रही थी। इस बीच जीजा और साली ने मिलकर अपने प्यार में बाधा बन रहे संजय को रास्ते से हटाने की योजना बनाई।

बताया जा रहा है कि 28 जून की रात करीब एक बजे शबाना ने हकीम के साथ मिलकर संजय को मौत के घाट उतार दिया। उन्होंने युवक की जान लेने के लिए उसकी गर्दन पर सात वार किए थे। मल्टी का कमरा खून से भर गया था। हत्या के बाद दो-तीन घंटे तक उन्होंने साक्ष्य मिटाने का प्रयास किया। इसके बाद खून से सने कपड़ों और लाश को बोरे में भरकर दोनों ने तालाब में फेंक दिया था।

संजय सिंह और उनके वकील के खिलाफ अयोध्या में शिकायत दर्ज: रामभक्तों को ‘चंदा चोर’ कहने से संत नाराज

अयोध्या मामले पर आम आदमी पार्टी (AAP) नेता संजय सिंह के ‘चंदा चोर’ वाले बयान के ख़िलाफ़ जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर और हिन्दू रक्षा सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रबोधानंद गिरी ने अयोध्या कोतवाली में शिकायत दर्ज करवाई है। संजय सिंह के साथ उनके लीगल सेल के यूपी अध्यक्ष अधिवक्ता जेके शुक्ला के ख़िलाफ़ भी शिकायत हुई है।

संत महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद गिरी महाराज ने आरोप लगाया कि इन लोगों (संजय सिंह व उनके सहयोगी) ने छल कपट, कूट रचित व आपराधिक साजिश के तहत राम मंदिर ट्रस्ट को ‘चंदा चोर’ कहकर करोड़ों रामभक्तों को गुमराह करने की कोशिश किया है, जिससे देश के करोड़ो रामभक्तों की जनभावना आहत हुई।

उन्होंने अपनी शिकायत में ये भी कहा कि संजय सिंह और उनके साथी राम मंदिर निर्माण में बाधा डाल रहे है। भ्रामक कुप्रचार से राम मंदिर ट्रस्ट की छवि को धूमिल कर रहे हैं, जिसको हिन्दू रक्षा सेना बर्दाश्त नहीं करेगी। यह सभी राष्ट्रद्रोह का कार्य कर रहे हैं। इनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाए।

जानकारी के मुताबिक यह शिकायत स्वामी प्रबोधानंद गिरि ने संजय सिंह के खिलाफ तहरीर अयोध्या कोतवाली के कोतवाल अशोक कुमार सिंह के हाथ में सौंपी है। उनका कहना है कि संजय सिंह व उनके सहयोगी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए, क्योंकि वह पिछले कई दिनों से गंदी राजनीति करने के तहत संजय सिंह और उनके सहयोगी राम भक्तों पर झूठे और गंदे आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर पुलिस ने कानूनी कार्रवाई नहीं की तो वह इस बात को लेकर सीएम योगी से मुलाकात करेंगे।

बता दें कि इस शिकायत के अलावा बुधवार को ही कथित स्वयं सेवक विक्रम मणि तिवारी ने भी संजय सिंह के ख़िलाफ़ अयोध्या कोतवाली सिटी में एक तहरीर दी है। इसमें उन्होंने कहा है कि राम मंदिर के लिए समर्पण निधि घर घर जाकर इकट्ठा किया था, इसलिए वह और उसके जैसे लाखों स्वयंसेवक और भाजपा कार्यकर्ता इसके दायरे में आ गए हैं। इसलिए राज्यसभा सदस्य संजय सिंह और अरविंद केजरीवाल के खिलाफ कड़ी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए।