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राणा प्रताप सिर काट-काट करता था सफल जवानी को… हमारी विरासत कौन – श्रीराम जैसा जीवन जीने वाला धर्म रक्षक, या फिर अकबर?

बचपन में हमने एक कविता पढ़ी थी, जिसकी कुछ पंक्तियाँ आज भी जेहन में ताज़ा हैं:

“चढ़ चेतक पर, तलवार उठा रखता था भूतल पानी को
राणा प्रताप सिर काट-काट करता था सफल जवानी को”

उन पंक्तियों के माध्यम से हमने राणा प्रताप और उनके शौर्य को जाना। राजस्थान के क्षेत्रों में तो आज भी यह कहावत है-

“माई रे एहड़ा पूत जण जेणा राणाप्रताप”

(अर्थात्, लगभग 500 साल के बाद, आज भी लोगों के मन में यह इच्छा है कि उनका बेटा महाराणा प्रताप जैसा हो।)

विपरीत क्षणों में भी थामी रखी धर्म की उँगली

आपको आधुनिक युग में ऐसा कोई महापुरुष शायद ही मिलेगा, जो 500 वर्षों से लगातार वीरता, शौर्य और स्वाभिमान का प्रतीक बना हुआ है। महाराणा प्रताप आज भी उतने ही महत्वपूर्ण बने हुए हैं, जितने वो 500 साल पहले थे। 

इस परिवर्तनशील दुनिया में, सारी प्राकृतिक और मानव निर्मित चीजें अस्थाई हैं। सब कुछ एक न एक दिन खत्म हो जाना है। लेकिन, इस क्षणभंगुर दुनिया में अगर कुछ शाश्वत है, अगर कुछ स्थाई है तो वह है, स्वाभिमान और आत्मसम्मान। महाराणा प्रताप ने इसी स्वाभिमान और आत्मसम्मान की रक्षा के लिए अपना सब कुछ दाँव पर लगा दिया। 

महाराणा ने इस देश को यह संदेश दिया कि कैसे विपरीत क्षणों में भी धर्म की ऊँगली थाम कर खड़े रहना है। उन्होंने हम भारतीयों को सदैव अपने स्वाभिमान के लिए डटे रहना सिखाया। हम अगर उनकी जीवन यात्रा देखेंगे तो उसमें कई घटनाएँ ऐसी मिलती हैं, जिनसे बहुत कुछ सीखा जा सकता है। 

महाराणा प्रताप जब मेवाड़ की गद्दी पर बैठे तो अकबर की तरफ से उनको न जाने कितने प्रलोभन दिए गए, कि आप दरबार में हाज़िरी लगाइए, अकबर को बादशाह कहिए, और मुगलिया सल्तनत के झंडे के तले मेवाड़ पर शासन करिए।

जाहिर है, उस समय देश के अनेक रजवाड़े ऐसा कर रहे थे। उन रजवाड़ों ने अकबर को अपना बादशाह मान लिया था और अकबर का हुक्म मानते हुए, वो लोग अपना प्रशासन भी चलाते थे। लेकिन, प्रताप तो किसी और ही मिट्टी के बने हुए थे। उन्होंने मेवाड़ की गद्दी पर बैठते ही एकलिंग भगवान की सौगंध खाई थी कि वे मुगलों की अधीनता कभी स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने इस धरा के स्वाभिमान और राष्ट्र के आत्मसम्मान के लिए सारे लुभावने प्रस्तावों को जूते की नोक से उड़ा दिया। उन्होंने मेवाड़ राजवंश के उस राजचिह्न को चरितार्थ किया, जिसमें कहा गया है,

जो दृढ़ राखे धर्म को
तिहि राखे करतार” (अर्थात्, जो अपने धर्म पर दृढ़ रहता है परमात्मा स्वयं उसकी रक्षा करते हैं।)

मिलती-जुलती है महाराणा प्रताप और श्रीराम की जीवन-यात्रा

पूरे मध्यकाल के दौरान जब मुगलिया सल्तनत का चारों तरफ बोलबाला था, उस समय भी मेवाड़ राजवंश ने महाराणा प्रताप के नेतृत्व में भारतीय स्वाभिमान के ध्वज को लहराए रखा। यदि हम उस दौर में महाराणा प्रताप के समर्पण को ठीक से समझ लें, तो हम उस दौर को ‘मुग़ल काल’ न कहकर ‘महाराणा काल’ कहेंगे। अपनी मातृभूमि के प्रति ऐसा समर्पण, अपने धर्म के प्रति ऐसी अगाध श्रद्धा विरले ही देखने को मिलती है। 

उनके बारे में एक और रोचक बात यह है, कि कई बार महाराणा प्रताप की जीवन यात्रा, मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की जीवन यात्रा से मिलती-जुलती नजर आती है।

दोनों ही राजवंश में जन्मे थे, दोनों को ही वनवास झेलना पड़ा। मातृभूमि के प्रति दोनों ही के अंदर अगाध प्रेम था। जहाँ एक तरफ महाराणा अपनी मातृभूमि के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर देते हैं, वहीं दूसरी तरफ भगवान श्री राम “जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी” कहते हुए जन्मभूमि को स्वर्ग से भी ऊपर का स्थान देते हैं।

भगवान राम पिता के वचनों का पालन करने के लिए सब कुछ छोड़कर जंगल के लिए प्रस्थान करते हैं तो गोस्वामी तुलसीदास लिखते हैं

“रघुपति प्रजा प्रेमबस देखी, सदय हृदय दुख भयउ बिशेषी”

भगवान राम को जंगल जाते देख प्रजा उनके साथ जाने को तैयार हो जाती है। ठीक उसी प्रकार, जब महाराणा जंगल जाते हैं, तो उनकी प्रजा जंगल में जाने के लिए उनके पीछे-पीछे चल पड़ती है।

भगवान राम की यात्रा जब आगे बढ़ती है तो माता सीता को रावण के चंगुल से छुड़ाने के लिए भगवान राम ने भी जनजातियों को साथ मिलाया, वनवासियों को साथ मिलाया, दलितों को, वंचितों को, व वानर समूहों को अपने साथ मिलाया। ठीक उसी प्रकार महाराणा प्रताप ने भी अपनी मातृभूमि मेवाड़ के उद्धार के लिए हमेशा समाज के वंचित वर्गों को अपने साथ मिलाए रखा। भील समाज के साथ उनकी मित्रता की तो अनेक कथाएँ देश में आज भी प्रचलित हैं। प्रताप ने राजवंश और प्रजा के बीच की सीमाओं को धुंधला कर दिया था। भीलों के साथ मिलकर प्रताप ने मेवाड़ की एकता को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया था

कभी-कभी तो ऐसा लगता है, कि इस देश में जब भी कोई महापुरुष अवतरित होता है, तो उस महापुरुष के अंदर भगवान श्री राम की चेतना स्वत: ही प्रवेश कर जाती है। शायद बहुत लोग जानते होंगे, कि महाराणा प्रताप और गोस्वामी तुलसीदास समकालीन थे। दोनों कभी मिले भी थे या नहीं, यह विद्वानों के बीच चर्चा का विषय है। लेकिन आप जब गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस पढ़ेंगे, तो तो आप पाएँगे कि उनमें कई ऐसी चौपाइयाँ हैं, जो लिखी तो भगवान राम के लिए गई थीं, लेकिन शब्दशः वैसी घटनाएँ महाराणा प्रताप के साथ भी हुईं। जैसे – जंगल जाने की घटना, वनवासियों के साथ मिलकर रावण को हराने की योजना, इत्यादि। यह इस देश की संस्कृति है, कि भगवान राम से लेकर महाराणा प्रताप तक सबने सामाजिक समरसता को सर्वोपरि रखा। बिना किसी भेदभाव के सबको अपने साथ मिलाए रखा। 

इसीलिए, हमे यह सोचना होगा कि हम अपने बच्चों को प्रताप बनाना चाहते हैं या अकबर।

महाराणा प्रताप या अकबर? हमारी विरासत कौन?

हम किसके पदचिह्नों पर अपने बच्चों को चलाना चाहते हैं? क्योंकि किसी राष्ट्र के दो विपरीत आदर्श नहीं हो सकते। यदि अकबर महान हैं, तो हमें प्रताप को भूलना होगा, और यदि महाराणा प्रताप महान हैं, तो अकबर को महान कहना बंद करना होगा। एक राष्ट्र के रूप में हमारी जिम्मेदारी है कि हम किसे महान बनाना चाहते हैं और अपने बच्चों को क्या पढ़ाना चाहते हैं। लाल किले की प्राचीर से माननीय प्रधानमंत्री जी ने देश को पंचप्रण दिए थे। उन 5 प्रणों में से एक प्रण यह भी है कि हमें अपनी विरासत पर गर्व करना है।

हमें समझना होगा कि हमारी असली विरासत कौन है। इस राष्ट्र को यह निर्णय करना होगा, कि वह अपनी विरासत के रूप में महाराणा प्रताप को मानेगा या फिर अकबर को। क्योंकि भविष्य का वटवृक्ष अतीत की जड़ों से अंकुरित होता है। यदि हमारे आदर्श उच्च नैतिकता वाले होंगे तो हमारा समाज अपने आप नैतिक बनेगा। 

यह दुर्भाग्य ही रहा है कि इतिहास में हमेशा से ही इस राष्ट्र के रणबाँकुरों को वह स्थान नहीं मिल पाया जो उन्हें मिलना चाहिए था। कई बार अनजाने में तो कई बार जानबूझ कर इतिहास को छुपाने का भरसक प्रयास किया गया। लेकिन, जैसे पत्थरों का सीना चीरकर पौधे पल्लवित हो आते हैं, वैसे ही सच भी बाहर आ ही जाता है।

साहिर लुधियानवी का शे’र भी है –

हज़ार बर्क़ गिरे, लाख आँधियाँ उट्ठें
वो फूल खिल के रहेंगे जो खिलने वाले हैं 

अब राष्ट्र अपने असली नायकों को पहचान रहा है। देश का सांस्कृतिक पुनरुद्धार हो रहा है। आज राष्ट्र अपने उन नायकों के बारे में जान रहा है, जिन्होंने अपनी मातृभूमि के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। आज आप भारत के चाहे किसी भी शहर में चले जाइए, आपको वहाँ अकबर की मूर्तियाँ नहीं दिखेंगी, लेकिन भारत के लगभग प्रत्येक शहर में आपको चेतक पर सवार महाराणा प्रताप की मूर्तियाँ जरूर दिखेंगी। लोगों के अंदर महाराणा प्रताप की ऐसी स्वीकार्यता इसीलिए भी है, क्योंकि उन्होंने मानवीय मूल्यों को सदैव शिरोधार्य रखा। जिसकी धमनियों में मातृभूमि के प्रति ऐसा अगाध प्रेम बह रहा हो, ऐसे महापुरुष को तो इतिहास भी अपने सुनहरे पृष्ठों में स्थान देने को बाध्य हो जाता है।

प्रताप ने हमें एक आशा दी कि यदि एक अकेला राजा उस समय के सर्वाधिक शक्तिशाली राजा से लड़ सकता है, तो आज हम भी भारत को नष्ट करने में जुटी शक्तियों को पराजित कर सकते हैं। महाराणा प्रताप का जीवन हमें यह संदेश देता है कि अस्तित्त्व के संघर्ष में कभी युद्धविराम नहीं होता। हमें लगातार सतर्कता बनाए रखनी है तथा राष्ट्र के खिलाफ उठे हर कदम का पुरजोर जवाब देना है। जब तक पृथ्वी पर एक भी भारतीय जीवित है, तब तक प्रताप जीवित रहेंगे, क्योंकि प्रताप एक भावना हैं।  प्रताप सम्मान व स्वतंत्रता की ऐसी भावना हैं, जिस पर काल की धूल कभी जम ही नहीं सकती।

उदयपुर में हिंदू सब्जी वाले पर मुस्लिमों ने तलवार से किया हमला, भीड़ इकट्ठा कर दुकान में आग लगाई दी: ‘नींबू’ विवाद में ‘कन्हैया लाल कांड’ दोहराने का प्रयास

राजस्थान के उदयपुर में एक हिन्दू सब्जी विक्रेता पर मुस्लिम भीड़ ने हमला कर दिया। उसको तलवारों से काट कर घायल कर दिया गया। उसकी दुकान पर कट्टरपंथियों की भीड़ ने पत्थरबाजी भी की। कट्टरपंथी भीड़ ने सब्जी मंडी में आगजनी भी की। मामले में पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह घटना शुक्रवार (16 मई, 2025) को हुई। उदयपुर की धानमंडी इलाके में स्थित सतबीर नाम के हिन्दू सब्जी विक्रेता की दुकान पर कुछ मुस्लिम युवक सब्जी खरीदने आए थे। सब्जी खरीदने के दौरान नींबू के भाव को लेकर मुस्लिमों ने झगड़ा चालू किया।

सतबीर ने उनसे जाने को कहा तो वह हमलावर हो गए। उन्होंने सतबीर के ऊपर पत्थर फेंके और गाली-गलौज की। उन्होंने आसपास की दुकानों पर भी हमला किया और उन्हें नष्ट कर दिया। सतबीर और उसके साथी जब तक इस हमले से संभलते, मुस्लिम युवक पूरी भीड़ लेकर आ गए।

इस बार उन्होंने सतबीर पर तलवारों से हमला कर उसे घायल कर दिया। रिपोर्ट्स में यह भी बताया कि भीड़ ने इसके बाद आसपास मौजूद सब्जी की दुकानों में आग लगा दी। घायल सतबीर को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।

मामले में हिन्दू संगठनों ने उदयपुर में प्रदर्शन कर कार्रवाई की माँग की है। हमला करने वाले युवक मौके से फरार हैं। पुलिस ने लोगों को आश्वासन दिया है कि वह दोषियों पर जल्द कार्रवाई करेगी। माहौल को देखते हुए अतिरक्त सुरक्षाबल तैनात कर दिए गए हैं।

उदयपुर में इस घटना ने मजहबी तनाव को फिर बढ़ा दिया है। इस हमले को 2022 में दरजी कन्हैया लाल पर हुए हमले की तरह देखा जा रहा है। कन्हैया लाल की हत्या 2 मुस्लिमों ने कर दी थी। उन्होंने कन्हैया लाल का कैमरे के सामने गला रेत दिया था। इस मामले में कन्हैया लाल का परिवार आज भी न्याय का इन्तजार कर रहा है

दहेज उत्पीड़न केस में फँसे शख्स को 26 साल बाद मिली राहत, कोर्ट ने परिवार को भी बाइज्जत बरी किया: 1999 में हुआ था केस, जज बोले- 498ए का हो रहा गलत इस्तेमाल

सुप्रीम कोर्ट ने दहेज उत्पीड़न और क्रुरता का आरोप लगाने वाली महिला को चेतावनी देते हुए पति और ससुराल वालों को बरी कर दिया है। कोर्ट का कहना है कि क्रूरता के लिए लगे आईपीसी की धारा 498ए का दुरुपयोग किया गया है क्योंकि इसके सबूत नहीं मिले हैं कि महिला के साथ ‘क्रूरता’ की गई।

कोर्ट ने कहा कि किसी खास दिन, समय या घटना का उल्लेख किये बिना इन धाराओं को जोड़ना अभियोजन पक्ष के मामले को कमजोर करता है।

जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस एससी शर्मा की खंडपीठ ने पति की अपील पर सुनवाई करते हुए पति और ससुरालवालों को बरी करने का आदेश दिया। पति का पक्ष ये था कि केवल 12 दिन साथ रहने के बाद पत्नी उसे छोड़कर चली गई थी। इसके कोई मेडिकल सबूत नहीं है कि उसने पत्नी के साथ मार-पीट की जिससे उसका गर्भपात हुआ।

साल 1999 में दर्ज एफआईआर में पत्नी ने पति और ससुरालवालों पर शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया था। पत्नी ने अपनी शिकायत में कहा था कि उससे 2 लाख रुपए दहेज की माँग की गई थी। उसे लात-धूँसे मारे गए, जबरन नशीले पदार्थ का सेवन कराया गया। इसकी वजह से उसका गर्भपात हो गया।

कोर्ट ने ये भी कहा कि शिकायतकर्ता मेडिकल साक्ष्य भी देने में असर्मथ रही है जिसमें उसके गर्भपात की बात हो। कोर्ट का कहना है कि बगैर सबूत के केवल भावनात्मक या मानसिक परेशानी, आईपीसी की धारा 498ए के तहत आरोपी को दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं है। कोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि आपराधिक कानून में संदेह के आधार पर फैसला नहीं होता बल्कि सबूत की आवश्यकता होती है।

दारा लक्ष्मी नारायण एवं अन्य बनाम तेलंगाना राज्य एवं अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट के हाल के फैसले का हवाला भी दिया गया। कोर्ट ने कहा कि ससुराल के किसी भी सदस्य के खिलाफ ‘क्रूरता करने का’ सबूत दिये बिना उसे दोषी नहीं ठहराया जा सकता और अभियोजन पक्ष उसे आधार नहीं बना सकते

कोर्ट ने पुख्ता सबूत के बिना वैवाहिक विवादों में परिवार के सदस्यों को फँसाने की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता जाहिर किया और इस बात पर जोर दिया कि इस तरह आईपीसी की धारा 498ए का दुरुपयोग इसकी सुरक्षात्मक प्रवृति को कमजोर करता है।

हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ने अभियोजन पक्ष के दलील को खारिज करते हुए पति और ससुरालवालों को बरी कर दिया।

कभी तंज तो कभी सवाल… सेना के शौर्य पर कॉन्ग्रेसियों को नहीं विश्वास: बार-बार माँग रहे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का सबूत, अब की कर्नाटक MLA ने पूछा- कौन मरा, कहाँ मरा, कितने मरे

भारतीय सेना के मिशन ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के पूरा होने के बाद अब कर्नाटक के कॉन्ग्रेसी MLA कोथुर मंजूनाथ ने सेना पर ही सवाल खड़ेकर दिए हैं। उनका कहना है कि ये मिशन सिर्फ एक दिखावा था। पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए लोगों को न्याय नहीं मिला।

कॉन्ग्रेस के कर्नाटक विधायक कोथुर मंजूनाथ ने बयान में कहा, “ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ एक दिखावा था। कुछ हुआ ही नहीं। बस दिखावे के लिए तीन चार विमान ऊपर भेजे और वापस बुला लिए।”

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मंजूनाथ ने पहलगाम आतंकी हमले के पीड़ितों के बारे में सवाल पूछते हुए आगे कहा, “क्या पहलगाम में मारे गए 26-28 लोगों को इंसाफ मिलेगा? क्या उन महिलाओं का दुख कम होगा? क्या यही तरीका है उनके सम्मान करने का?”

सेना पर सवाल क्यों?

जम्मू कश्मीर के पहलगाम के बैसारन घाटी में 22 अप्रैल 2025 को आतंकी हमले में 26 पर्यटकों की जान चली गई थी। आतंकियों ने सभी लोगों से धर्म पूछ कर उनके गैर-मुस्लिम होने के पुष्टि करने के बाद बेरहमी से उनको मार दिया था। मरने वालों में देश के अलग-अलग राज्यों से कश्मीर गए ज्यादातर हिंदू पर्यटक थे।

भारत सरकार ने 7 मई 2025 को जवाबी एक्शन में ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया था। इसके तहत तड़के ही भारतीय सेना ने एयर स्ट्राइक से पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर में बसे 9 आतंकी ठिकानों पर मिसाइल से मत कर दिया था। इसमें लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन के लगभग 100 आतंकियों के मारे जाने की बात सेना ने कही थी।

सेना के इस बयान पर मंजूनाथ ने सवाल किया है। उन्होंने कहा, “इस बात की क्या पुष्टि है कि 100 आतंकवादी मारे गए? हमारी सीमा में जो घुसे, उन आतंकवादियों की पहचान क्या है?”

उन्होंने इंटेलिजेंस सिस्टम प्रणाली की सफलता पर भी तंज कसा। मंजूनाथ ने पूछा, “सीमा पर सुरक्षा क्यों नहीं थी और आतंकी कैसे भाग गए? हमें आतंकवाद की जड़ समेत तने और शाखों को भी पहचान कर खत्म करना चाहिए।”

कार्रवाई में भी परेशानी

कोथुर मंजूनाथ यही नहीं रुके। इसके बाद उन्होंने मीडिया पर भी सवाल खड़े कर दिए। वह बोले, “सारी टीवी चैनल अलग-अलग कहानी बता रहे हैं। कोई यह नहीं बता रहा है कि असल में कौन मारा गया, कहाँ मारा गया और कितने मारे गए।”

मंजूनाथ के इस बयान को सुनकर कॉन्ग्रेस की पुरानी आदत फिर फिर याद आ रही है। असल में कॉन्ग्रेसियों के पास कोई मुद्दा नहीं बचा है। उन्हें सरकार की आलोचना के लिए जब कुछ नहीं मिल रहा तो सेना पर ही सवाल उठा दिया। दिलचस्प बात तो ये है कि इस तरह की हरकतें सिर्फ कॉन्ग्रेस के विधायक या छुटभय्ये नेता ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के स्तर वाले नेता तक कर चुके हैं।

बात पलटने में माहिर विपक्ष

इससे पहले जब भारत सरकार पहलगाम आतंकी हमले के बाद एक्शन में समय ले रही थी तो यही विपक्ष था जिसने जमकर मोदी सरकार और भाजपा पर आरोप-प्रत्यारोप का खेल खेला था और यहाँ तक कहा था कि सरकार कुछ नहीं करेगी। अब जब एक्शन हो चुका है और इस कार्रवाई से पूरे देश को संतुष्टि मिली है तो विपक्ष के नेता यह कह रहे हैं कि युद्ध नहीं होना चाहिए था।

इनकी दोगली बातों में मंजूनाथ का एक और बयान शामिल है। उन्होंने कहा, “कर्नाटक के लोग पाकिस्तान, चीन, बांग्लादेश हर जगह के नागरिकों के युद्ध के खिलाफ हैं।” साथ ही ऑपरेशन सिंदूर की कार्रवाई पर ये कह दिया कि जिन महिलाओं के सामने उनके पतियों को मारा गया यह कार्रवाई उनका दुख नहीं मिटा सकती और यह समाधान नहीं है।

शायद मंजूनाथ ने कर्नाटक के ही शिवमोगा के रहने वाले मंजूनाथ समेत कानपुर के शुभम द्विवेदी, पुणे के संतोष जगदाले और कौस्तुभ गणबोटे के घरवालों की वो खुशी और संतुष्टि का भाव चेहरे पर नहीं देखा जो ऑपरेशन सिंदूर के बाद उनके मन में था और उन्होंने इस एक्शन पर सरकार को धन्यवाद कहा था।

एक तरफ नहीं रह पा रहा विपक्ष

अगर मंजूनाथ की बात पर गौर किया जाए तो असल में एक सवाल उन्हीं से पूछा जाना बनता है कि अगर ऑपरेशन सिंदूर जैसा एक्शन आतंकी हमलों का समाधान नहीं है तो कॉन्ग्रेस के अनुसार समाधान क्या होना चाहिए।

आतंकी जब तब भारत में निर्दोष लोगों की जान ले लेते हैं। भारत के दिल में घुसकर 26/11 के मुंबई हमले कर देते हैं। सीमा की रक्षा करने वाले देश के 40 जवानों को मौत की घाट उतार देते हैं। साथ ही बेखौफ होकर यह सोचते हैं कि भारत कभी कोई एक्शन नहीं ले सकता।

ऐसे में ऑपरेशन सिंदूर की कार्रवाई कॉन्ग्रेसियों को क्यों परेशान कर रही है और वह भी तब जबकि इसमें सिर्फ आतंकियों को ही निशाना बनाया गया और दुश्मन देश पाकिस्तान की सैन्य रक्षा प्रणाली को कमजोर करने की कोशिश की गई। आम लोगों को जरा-सा भी हताहत नहीं किया गया।

सब एक ही थाली के चट्टे-बट्टे

मंजूनाथ कोई इकलौते कॉन्ग्रेसी नहीं हैं जो ऑपरेशन सिंदूर या सरकार पर सवाल उठा रहे होंं। विपक्ष के राजनेताओं में भारतीय सेना को लेकर कोई न कोई परेशानी होती ही रही है।

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता पृथ्वीराज चौहान ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए ऑपरेशन सिंदूर को भावनात्मक लाभ लेने की का बयान दिया था। उन्होंने यह कहा था कि ऑपरेशन मिशन का नाम सिंदूर रखकर सरकार भावनात्मक लाभ लेने की कोशिश कर रही है।

इसके अलावा कॉन्ग्रेस नेता राशिद अल्वी ने भी पूछा था कि ऑपरेशन सिंदूर में क्या सभी आतंकवादी मारे गए हैं? और क्या मोदी सभी आतंकियों को खत्म कर पाएँगे। इसी तरह कॉन्ग्रेस की वरिष्ठ नेता उदित राज को भी इस मिशन के नाम पर ही परेशानी हो गई थी। उन्होंने यह बयान दे डाला था इस मिशन का नाम कुछ और होना चाहिए था क्योंकि यह एक धर्म विशेष को बताता है।

बात यही नहीं रुकती। सहारनपुर के कॉन्ग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी ऑपरेशन सिंदूर की सफलता पर सवाल उठाने में देर नहीं की थी और इस मिशन का पूरा हिसाब माँग लिया था। इमरान मसूद ने तो उरी में मारे गए जवानों के लिए जवाबी कार्रवाई में की गई सर्जिकल स्ट्राइक पर भी सवाल खड़े कर दिए थे और यह कह दिया था कि पाकिस्तान सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर भारत का मजाक उड़ाता है।

यह कोई पहली बार नहीं है कि जब कॉन्ग्रेसियों ने इस तरह की बयानबाजी की हो। पार्टी के बड़े नेता सामने से तो सरकार के काम की तारीफ कर रहे हैं, लेकिन उनके नीचे बैठे विधायक और राज्य स्तरीय नेता लगातार इस तरह के बयान देकर सेना का मनोबल तोड़ने और लोगों के बीच कायम शांति व्यवस्था भंग करने की कोशिश करते रहते हैं।

भारत से बात करने को बेचैन हुआ पाकिस्तान… PM शरीफ बोले- मैं शांति वार्ता के लिए तैयार, हमें हमारा पानी चाहिए: पहले दे रहा था परमाणु बम की गीदड़भभकी, अब सीजफायर बढ़ाने को गिड़गिड़ाया

पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने दावा किया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर 18 मई तक बढ़ गया है। वहीं पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने भारत से बातचीत की पेशकश की है।

पाकिस्तान की संसद को संबोधित करते हुए इशाक डार ने कहा, “10 मई को दोनों देशों के बीच DGMO स्तर की बातचीत में 12 मई तक सीजफायर पर सहमति, 12 मई को वार्ता में 14 मई तक सीजफायर पर सहमति बनी। 14 मई को जो बात हुई उसमें 18 मई तक सीजफायर का फैसला लिया गया।”

ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान में मची तबाही और भारत की ताकत पूरी दुनिया ने देखी है। अब विदेशी मीडिया भी ये मान रहे हैं कि भारत के टारगेटेड हमले ने पाकिस्तान को बर्बाद कर दिया। सिंधु जल संधि के स्थगन के भारत के फैसले का असर भी पाकिस्तान पर गहरा पड़ा है। तपतपाती गर्मी में प्यासा रह जाने का डर पाकिस्तान को साफ नजर आ रहा है। इसलिए बातचीत के टेबल पर पाकिस्तान आने की कोशिश कर रहा है। भारत ने पहले ही ऐलान कर दिया है कि ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है और सिंधु जल संधि स्थगित करने का फैसला जारी है। पाकिस्तान के साथ बात जब होगी तो आतंकवाद और पीओके पर होगी।

पाकिस्तान ने सिंधु जल समझौते के स्थगन पर पुनर्विचार करने का आग्रह भी भारत से किया था, लेकिन भारत ने ये कहते हुए मना कर दिया कि जब तक पाकिस्तान भारत की शर्तों को नहीं मानता तब तक सिंधु का जल उसे नसीब नहीं होगा।

इस परिस्थिति में ‘बेचारा’ पाकिस्तान भारत की शर्तों को मानने के लिए तैयार हो गया है। पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने 15 मई 2025 को कहा कि भारत से बातचीत करने के लिए वो तैयार हैं। शांति वार्ता में कश्मीर मुद्दा भी शामिल है। शहबाज ने कहा कि शांति की शर्तों में कश्मीर मुद्दा भी शामिल है। हालाँकि पीएम मोदी ये साफ कर चुके हैं कि वार्ता पीओके और आतंकवाद पर होगी।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने भारत के साथ टकराव में शामिल अपने देश के अधिकारियों और सैनिकों से बातचीत की। पंजाब के कामरा एयरबेस के दौरे के दौरान उन्होने शांति वार्ता की जानकारी भी दी। शहबाज शरीफ के साथ सेना प्रमुख असीम मुनीर, उप प्रधानमंत्री इशाक डार, रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ मौजूद थे।

ऑपरेशन सिंदूर के तहत एयर स्ट्राइक और अस्थाई सीजफायर के बाद पीएम मोदी ने पाकिस्तान को सख्त संदेश दिए थे। 15 मई 2025 को विदेश मंत्री जयशंकर ने दो टूक कहा कि बातचीत सिर्फ तभी होगी जब पाकिस्तान अपने देश में फल-फूल रहे आतंकवाद को जड़ से खत्म करेगा। उन्होने कहा, “पाकिस्तान को मालूम है कि उन्हें क्या करना है? भारत ने आतंकियों की लिस्ट सौंप दी है। इन्हें भारत के हवाले करना होगा। जब तक आतंकवाद को पनाह मिलता रहेगा, पाकिस्तान से कोई बातचीत नहीं होगी।”

विदेश मंत्री जयशंकर ने ये भी साफ कर दिया कि 1960 में लागू सिंधु जल समझौता भी तब तक ठंडे बस्ते में पड़ी रहेगी।

5 दिन में ही डोनाल्ड ट्रंप ने लिया U टर्न, भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर कराने के दावे से पीछे हटे: अमेरिका का ‘जीरो टैरिफ’ वाला गुब्बारा S जयशंकर ने फोड़ा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान के बीच युद्धविराम पर अपनी भूमिका को लेकर नया बयान देकर सबको चौंका दिया है। पहले उन्होंने दावा किया था कि अमेरिका की मध्यस्थता से 10 मई 2025 को भारत-पाकिस्तान में युद्धविराम हुआ, लेकिन अब वह इससे पलट गए हैं। एक कार्यक्रम में ट्रंप ने कहा, “मैं ये नहीं कह रहा कि मैंने मध्यस्थता की, लेकिन मैंने भारत-पाकिस्तान के बीच खतरनाक तनाव को कम करने में मदद की।”

ट्रंप ने पहले ट्वीट कर कहा था कि वह दोनों देशों की समझदारी और बुद्धिमत्ता से खुश हैं, जिन्होंने पूर्ण युद्धविराम पर सहमति जताई। हालाँकि, भारत ने ट्रंप के दावे को सिरे से खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत-अमेरिका के बीच सैन्य तनाव पर बात हुई, लेकिन ट्रेड का कोई जिक्र नहीं था। ट्रंप ने दावा किया था कि उन्होंने दोनों देशों को ट्रेड में मदद की पेशकश की, जिसके बाद युद्धविराम हुआ।

जयशंकर ने ट्रंप के ‘जीरो टैरिफ’ वाले दावे को भी किया खारिज

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी ट्रंप के दावों को खारिज करते हुए भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर स्थिति साफ की। उन्होंने कहा, “व्यापार वार्ता चल रही है, लेकिन अभी कुछ तय नहीं हुआ। कोई भी सौदा दोनों देशों के लिए फायदेमंद होना चाहिए।”

जयशंकर ने कश्मीर मुद्दे पर भारत का रुख दोहराया कि यह द्विपक्षीय मामला है और इसमें किसी तीसरे देश का दखल बर्दाश्त नहीं होगा। ऑपरेशन सिंदूर पर बोलते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत ने आतंकी ढाँचे को नष्ट किया और पाकिस्तान को भारी नुकसान पहुँचाया। उन्होंने साफ किया कि पाकिस्तान ने भारत की सलाह को नजरअंदाज कर हमला किया, जिसका भारत ने मुँहतोड़ जवाब दिया।

निलंबित रहेगा सिंधु जल समझौता, PoK पर होगी बात

जयशंकर ने पाकिस्तान को आतंकवाद पर कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को आतंकियों की सूची सौंपनी होगी और उनके बुनियादी ढाँचे को खत्म करना होगा। साथ ही, सिंधु जल समझौता तब तक निलंबित रहेगा, जब तक सीमा पार आतंकवाद बंद नहीं होता। कश्मीर पर भारत का रुख साफ है कि अब केवल पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) की वापसी पर बात होगी।

जयशंकर ने युद्धविराम पर कहा कि यह स्पष्ट है कि गोलीबारी बंद करने की माँग पाकिस्तान की थी, क्योंकि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर में अपने लक्ष्य हासिल कर लिए थे।

भाड़ में जाओ ट्रंप… बीत गए वे दिन जब दुनिया को नचाता था अमेरिका, ‘नया भारत’ किसी के दबाव में नहीं करता समझौते: अपने निर्णयों से पाकिस्तान को लाता है घुटनों पर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दावा कर रहे हैं कि भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच गोलीबारी रुकवाने का श्रेय उन्हें मिलना चाहिए। लेकिन उनका यह दावा पूरी तरह गलत और आत्ममुग्धता से भरा है। भारत ने साफ कर दिया है कि ऑपरेशन सिंदूर और उससे जुड़े फैसले पूरी तरह उसके अपने थे, न कि अमेरिका की मध्यस्थता से। भारत ने यह भी बताया कि कोई औपचारिक युद्धविराम हुआ ही नहीं। ऑपरेशन को रोकना भारत का रणनीतिक फैसला था, जो उसकी शर्तों पर लिया गया। अगर पाकिस्तान कोई गलती करता है, तो यह समझौता तुरंत खत्म भी हो सकता है।

भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों (DGMO) के बीच पहले से बातचीत चल रही थी, और उसी के तहत यह कदम उठाया गया। ऐसे में ट्रंप का दावा कि उन्होंने गोलीबारी रुकवाई, सरासर गलत है। भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों और स्वतंत्र नीति के आधार पर यह फैसला लिया, न कि अमेरिकी दबाव में।

ट्रंप ने परमाणु युद्ध रोकने का किया फर्जी दावा, भारत ने किया खारिज

ट्रंप बार-बार कह रहे हैं कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान को युद्ध से रोका और एक संभावित परमाणु संघर्ष टाल दिया। अपने बयानों में वह खुद को शांति का ऐसा मसीहा बताते हैं, जिसने अपने शांतिपूर्ण नेतृत्व से एशियाई देशों को राह दिखाई और दुनिया को परमाणु युद्ध बचा लिया। लेकिन यह दावा न सिर्फ बढ़ा-चढ़ाकर किया गया, बल्कि हकीकत से कोसों दूर है।

सऊदी अरब में एक कार्यक्रम में ट्रंप ने फिर यही दावा दोहराया। उन्होंने कहा कि उनके व्यापारिक प्रभाव और शर्तों की वजह से दोनों देश समझौते के लिए तैयार हुए। उनके स्टाफ ने तालियाँ बजाकर और सिर हिलाकर उनका समर्थन किया। ट्रंप यहीं नहीं रुके, उन्होंने तो यह भी कह दिया कि भारत और पाकिस्तान अब इतने अच्छे दोस्त हो गए हैं कि उन्हें जल्द डिनर करना चाहिए। यह बयान भी उनकी उसी पुरानी रणनीति का हिस्सा था, जिसमें वे खुद को वैश्विक संकटों का समाधानकर्ता देखते रहते हैं।

लेकिन भारतीय विदेश मंत्रालय ने 13 मई 2025 को ट्रंप के दावों को खारिज कर दिया। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान को शत्रुता छोड़ने और बातचीत की मेज पर आने के लिए भारत की सैन्य ताकत और सख्त रवैये ने मजबूर किया, न कि किसी विदेशी मध्यस्थता ने। उन्होंने साफ कहा कि भारत अपने फैसले खुद लेता है और अपने हितों के हिसाब से चलता है।

ट्रंप का यह दावा कि उन्होंने व्यापार का इस्तेमाल करके भारत-पाकिस्तान को राजी किया, भी पूरी तरह निराधार है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत-अमेरिका के बीच हुई किसी भी बातचीत में व्यापार का जिक्र तक नहीं हुआ। उन्होंने दो टूक कहा कि यह दावा पूरी तरह निराधार है। उन्होंने कहा कि भारत ने अपने सभी फैसले राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीति के आधार पर लिए, न कि किसी व्यापारिक सौदेबाजी के तहत।

डोनाल्ड ट्रंप के परमाणु युद्ध रोकने के दावे को भी भारत ने खारिज कर दिया। जायसवाल ने उसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “देखिए, हमारी तरफ से सैन्य कार्रवाई पूरी तरह से पारंपरिक दायरे में थी। कल रक्षा ब्रीफिंग में भी यह साफ तौर पर कहा गया था, जहाँ संबंधित सवालों पर चर्चा की गई थी। हालाँकि, ऐसी खबरें थीं कि पाकिस्तान की नेशनल कमांड अथॉरिटी 10 मई को बैठक करेगी, जो हमने देखी। लेकिन बाद में उन्होंने इसका खंडन किया। पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने खुद सार्वजनिक रूप से किसी भी परमाणु पहलू से इनकार किया है।”

तो सवाल यह है कि ट्रंप यह दावा क्यों कर रहे हैं? क्या वे अपने MAGA समर्थकों को खुश करने के लिए खुद को दुनिया का उद्धारक दिखाना चाहते हैं? या उनके सहयोगी उन्हें गलत जानकारी देकर खुश रखना चाहते हैं? ट्रंप के बयान न सिर्फ गलत हैं, बल्कि भारत-पाकिस्तान जैसे जटिल संघर्ष को बेहद सरल और गलत तरीके से पेश करते हैं।

भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों पुराने इस संघर्ष की जमीनी हकीकत को नजरअंदाज करते हुए ट्रंप ने इसे ऐसे पेश किया मानो यह उनके हस्तक्षेप से अचानक सुलझ गया हो, जो कि न तो कूटनीतिक रूप से सही है, न ही वास्तविकता के करीब है।

भारत अपने दुश्मन को जानता है, उसे कब और क्या निशाना बनाना है

ट्रंप के बयान कई वजहों से चिंता पैदा करते हैं। उन्होंने भारत और पाकिस्तान को ऐसे दो बेवकूफ देशों की तरह दिखाने की कोशिश की, जो बिना वजह लड़ रहे हैं। यह न सिर्फ अपमानजनक है, बल्कि इस क्षेत्र के संघर्ष की वास्तविक ऐतिहासिक और राजनीतिक जटिलताओं को भी नजरअंदाज करता है।

हैरानी की बात है कि अगर कोई देश बिना ठोस कारण के युद्ध, बमबारी, प्रतिबंध और धमकियों से दुनिया में तनाव बढ़ाता रहा है, तो वह अमेरिका खुद है, खासकर ट्रंप के पिछले कार्यकाल में।

भले ही ट्रंप ने शांति की बातें की हों और व्यापार को प्राथमिकता देने का दावा किया हो, इससे उन्हें भारत की सैन्य रणनीति या कूटनीति को दिशा देने का कोई नैतिक या राजनीतिक अधिकार नहीं मिल जाता। भारत ने ऑपरेशन सिंदूर और उससे जुड़े सभी निर्णय अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा प्राथमिकताओं के आधार पर लिए थे, न कि किसी बाहरी दबाव या मध्यस्थता के तहत।

भारत पिछले 75 वर्षों से पाकिस्तान के साथ जटिल और चुनौतीपूर्ण संबंधों को संभाल रहा है। इन दशकों में भारत ने पाकिस्तान के साथ युद्ध लड़े हैं, कई दौर की बातचीत की है, कूटनीतिक प्रयास किए हैं और सीमित व्यापार भी किया है, और यह सब अमेरिका की वजह से नहीं, बल्कि उसके बावजूद किया है।

आज भारत एक सैन्य और रणनीतिक महाशक्ति बन चुका है। उसे ट्रंप और रुबियो जैसे नेताओं से यह सीखने की जरूरत नहीं कि पाकिस्तान से कैसे निपटना है। भारत अच्छे से जानता है कि उसका दुश्मन कौन है, उसे कब और कैसे निशाना बनाना है, और कब रुकना है।

भारत ने लगभग आठ दशकों तक इस पड़ोसी देश के साथ काम किया है। टकराव, संवाद और सामरिक संतुलन के जरिये। सच तो यह है कि पाकिस्तान को भारत से बेहतर कोई नहीं समझता, न अमेरिका, न उसके नेता।

ऑपरेशन सिंदूर का मकसद अपने लक्ष्य को सटीकता से भेदना और रणनीतिक जीत हासिल करना था। मोदी सरकार ने साफ कर दिया है कि अब किसी भी आतंकी हमले को युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा। भारत ने पाकिस्तान की पुरानी ‘परमाणु धमकी’ की रणनीति को भी बेअसर कर दिया है।

भारत ने दुनिया को बता दिया कि अब पाकिस्तान यह बहाना नहीं बना सकता कि आतंकी संगठनों पर उसका कोई नियंत्रण नहीं है। हर आतंकी हमले के लिए न सिर्फ आतंकी संगठन, बल्कि पाकिस्तान सरकार और उसकी व्यवस्था भी जिम्मेदार होगी। यह भारत की नई रणनीतिक सोच और सख्त सुरक्षा नीति का हिस्सा है, जो निर्णायक कार्रवाई और स्पष्ट जवाबदेही पर आधारित है।

अगर ट्रंप वाकई स्थिति को समझते, तो उन्हें पता होता कि भारत अपनी जरूरत और रणनीति के हिसाब से पाकिस्तान में लक्ष्यों को निशाना बना सकता है। इसके लिए उसे वाशिंगटन या किसी बाहरी दबाव की जरूरत नहीं।

भारत-पाकिस्तान संघर्ष की जटिलताओं को समझने का दिखावा करना, खासकर जब ट्रंप ‘व्यापार’ को एक लालच के तौर पर पेश करते हैं, यह पश्चिमी शक्तियों की उथली और अहंकारी मानसिकता को दर्शाता है। भारत की सुरक्षा और कूटनीतिक फैसले पूरी तरह से उसकी स्वायत्तता, रणनीतिक समझ और राष्ट्रीय हितों पर आधारित हैं, न कि किसी विदेशी दबाव या मध्यस्थता से।

भारत-पाकिस्तान संघर्ष की जटिल गतिशीलता को समझने का केवल दिखावा करना, और यह मान लेना कि दोनों देश किसी बाहरी नेता के इशारे पर नाच सकते हैं। वह भी ‘व्यापार’ जैसे लालच के माध्यम से पश्चिमी शक्तियों की हल्की-फुलकी और घमंडी सोच को उजागर करता है।

व्यापार एक द्विपक्षीय प्रक्रिया है, न कि कोई परोपकारी कदम। भारत, जिसकी आबादी 1.4 अरब है, आज एक उभरती हुई आर्थिक महाशक्ति है। अमेरिका भारत के साथ व्यापार इसलिए करता है क्योंकि इससे उसे आर्थिक रूप से लाभ होता है, न कि भारत पर किसी दबाव या एहसान के तहत।

ट्रंप का यह दावा कि उन्होंने व्यापार का लालच देकर भारत को सैन्य कार्रवाई रोकने के लिए मजबूर किया, पूरी तरह हास्यास्पद है। ऑपरेशन सिंदूर भारत की एक सफल और निर्णायक कार्रवाई थी। इसके बाद जो भी समझौता हुआ, वह पाकिस्तान के अनुरोध पर और भारत की शर्तों पर हुआ, न कि किसी बाहरी दबाव या व्यापार के लिए।

दुनिया को नियंत्रित करने का भव्य भ्रम, एक खोखले दावे से दूसरे तक चलता हुआ।

यह वही डोनाल्ड ट्रंप हैं जिन्होंने कई बार बड़े दावे किए थे कि वह रूस-यूक्रेन युद्ध को एक ही दिन में खत्म कर देंगे। लेकिन अब उनके दोबारा पदभार संभाले करीब पाँच महीने हो चुके हैं, और युद्ध अभी भी पूरी ताकत से जारी है। उनके दावे एक बार फिर हकीकत से कोसों दूर साबित हुए हैं।

यह वही डोनाल्ड ट्रंप हैं जिन्होंने दावा किया था कि वे हमास को एक ही बार में सभी इज़रायली बंधकों को रिहा करने के लिए मजबूर कर देंगे, और यह भी कहा था कि हमास उनकी ताकत और श्रेष्ठता से काँप रहा है। लेकिन हकीकत यह है कि इज़रायल द्वारा ग़ाज़ा पर लगातार सैन्य हमलों, व्यापक तबाही और हर तरह के कूटनीतिक और सैन्य दबाव के बावजूद, कई बंधक अब भी हमास की हिरासत में हैं। ट्रंप के दावे एक बार फिर ज़मीनी सच्चाई से दूर और खोखले साबित हुए हैं।

यह वही डोनाल्ड ट्रंप हैं जिन्होंने बड़े-बड़े वादे किए थे। कि वे जेफरी एपस्टीन से जुड़ी फाइलें सार्वजनिक करेंगे, अमेरिकी अर्थव्यवस्था को तुरंत सुपर-तेज़ विकास के रास्ते पर ले जाएंगे, और एक जादुई छड़ी की तरह अवैध आव्रजन और देश में बढ़ते हिंसक अपराधों को रोक देंगे। लेकिन हकीकत यह है कि ऐसे मुद्दे बेहद जटिल होते हैं, और इनका समाधान किसी घमंडी राजनेता की सनक या दावे भर से नहीं होता। जमीनी समस्याएँ भाषणों या दिखावे से नहीं, ठोस नीति और गंभीर प्रयासों से हल होती हैं, जो अब तक देखने को नहीं मिले हैं।

जहाँ तक रूस-यूक्रेन युद्ध का सवाल है, यह तय करना पूरी तरह उन देशों के संबंधित नेताओं यूक्रेन के राष्ट्रपति और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का अधिकार है कि युद्ध को कैसे आगे बढ़ाना है, बातचीत कब और कैसे करनी है, तनाव को कैसे कम करना है और युद्ध को कैसे समाप्त करना है। अमेरिका चाहें तो मध्यस्थता की पेशकश कर सकता है या वार्ता में सहयोग दे सकता है, लेकिन व्लादिमीर पुतिन उसके आदेश मानने के लिए बाध्य नहीं हैं। इस संघर्ष का समाधान केवल संबंधित पक्षों की राजनीतिक इच्छाशक्ति और कूटनीतिक प्रयासों से ही संभव है, न कि बाहरी दबाव या दावों से।

भारत की नीति या सैन्य रणनीति वाशिंगटन पर नहीं है निर्भर

अमेरिका और व्यापक रूप से पूरे पश्चिमी जगत को अक्सर दुनिया को उपदेश देने की आदत है। एक प्रकार का औपनिवेशिक हैंगओवर, जो उन्हें यह भ्रम देता है कि पूरी दुनिया, विशेष रूप से वैश्विक दक्षिण, अब भी उनकी आज्ञा का पालन करने के लिए बाध्य है, जैसे 1800 के दशक में हुआ करता था।

लेकिन भारत एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र है, जिसने आज़ादी के बाद से लगातार जटिल भू-राजनीतिक और सैन्य चुनौतियों का सामना करते हुए अपनी नीति और रणनीति स्वयं तय की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत और भी अधिक मुखर और आत्मविश्वासी हुआ है, विशेष रूप से अपनी सामरिक क्षमताओं को लेकर।

भारतीय नौसेना आज हिंद महासागर क्षेत्र में एक प्रमुख शक्ति बन चुकी है, चाहे वह सोमालिया के तटों पर समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करना हो या बांग्लादेश के जल क्षेत्रों में प्रभाव बनाए रखना।

भारत क्षेत्रीय और वैश्विक मंच पर अपने हितों की रक्षा करने को तैयार है, बिना किसी बाहरी दबाव के। भारत अमेरिका के साथ दोस्ती और व्यापार का स्वागत करता है, लेकिन यह रिश्ता बराबरी और आपसी सम्मान पर आधारित होना चाहिए, न कि एकतरफा निर्देशों पर।

भारत ने ऑपरेशन सिंदूर और उससे जुड़े फैसलों से साबित कर दिया कि वह अपनी सुरक्षा और रणनीति के मामले में पूरी तरह स्वतंत्र है। भारत-पाकिस्तान के रिश्तों को समझने में अमेरिका या उसके नेताओं की कोई जरूरत नहीं। भारत अपनी ताकत और समझ से हर चुनौती का सामना करने को तैयार है।

(यह रिपोर्ट मूल रूप से अंग्रेजी में संघमित्रा ने लिखी है, इसका हिंदी अनुवाद विवेकानंद मिश्रा ने किया है)

पहलगाम आतंकी हमले को लेकर पाकिस्तानी औरत ने बोला झूठ, हिन्दू महिला ने दिया जवाब: इस्लामी कट्टरपंथी दे रहे रेप-हत्या की धमकी, AIMIM प्रवक्ता भी दे रहा साथ

इस्लामी कट्टरपंथियों ने एक हिंदू महिला को को सोशल मीडिया पर निशाना बनाया है। महिला इंफ्लुएंसर ने पहलगाम आतंकी हमले को लेकर सच बयान किया था। इसके बाद इस्लामी कट्टरपंथी भड़क गए। इस्लामी कट्टरपंथियों ने शर्मिष्ठा को हत्या और रेप की धमकी दी। अब पाकिस्तानी सोशल मीडिया पर यह वीडियो ट्रेंड कर रहा है।

दरअसल, शर्मिष्ठा ने एक वीडियो इंस्टाग्राम पर अपलोड किया था। इसमें एक पाकिस्तानी महिला द्वारा पहलगाम आतंकी हमले में हिंदुओं के नरसंहार से इनकार करने पर प्रतिक्रिया दी गई थी। शर्मिष्ठा ने वीडियो में पाकिस्तान के खिलाफ गुस्सा दिखाया था।

वीडियो में एक पाकिस्तानी महिला का मजाक उड़ाते हुए शर्मिष्ठा ने कहा कि इस्लाम में जो जन्नत में ’72 हूर’ मिलने की अवधारणा है, वह असल में चकलाघर जैसी सोच है।

शर्मिष्ठा ने कहा कि पाकिस्तानी महिला को लगता है कि भारत ने बिना किसी कारण के युद्ध शुरू कर दिया है। उन्होंने पूछा कि क्या पाकिस्तानी महिला ने पहलगाम हमले और अतीत में पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित अन्य आतंकी हमलों के बारे में सुना है। शर्मिष्ठा ने आगे पूछा कि क्या भारतीय सेना को इन आतंकी हमलों के बारे में कुछ नहीं करना चाहिए?

इस वीडियो में अपशब्द और अपमानजनक लहजे का इस्तेमाल किया गया था। हालाँकि, यह एक पाकिस्तानी नागरिक के प्रति प्रतिक्रिया और जिहादी आतंकवादियों का मजाक उड़ाने के लिए था। ऐसे आतंकी, जिनको काफिरों को मारने से खुशी मिलती है।

इस मामले में भारत के इस्लामी कट्टरपंथियों ने भी पाकिस्तानियों का साथ दिया। उन्होंने वीडियो पर पाकिस्तान की प्रतिक्रिया का समर्थन किया। इस वीडियो को पैगंबर के अपमान करने के दावे के साथ सोशल मीडिया पर शेयर किया गया। मुस्लिमों ने शर्मिष्ठा के सोशल मीडिया अकाउंट पर उनके खिलाफ अपशब्द और सर तन से जुदा की धमकियाँ देना शुरू कर दिया।

इसी क्रम में मोहम्मद शादाब खान नाम के एक व्यक्ति ने शर्मिष्ठा के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करने की धमकी दी। उसने कहा, “पैगंबर मुहम्मद (SAW) का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, कार्रवाई की जानी चाहिए! शर्मिष्ठा नाम की एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ने पाकिस्तान को निशाना बनाने की आड़ में हमारे प्यारे पैगंबर मुहम्मद (SAW) के खिलाफ एक घिनौनी और घृणित टिप्पणी की है।” उसने शर्मिष्ठा के खिलाफ पश्चिम बंगाल की ममता सरकार से कार्रवाई की माँग की।

इसी बीच झूठे मुस्लिम पीड़ित की कहानी सुनाकर इस्लाम का प्रोपेगेंडा फैलाने वाले पोर्टल ‘द ऑब्जर्वर पोस्ट’ ने कहा, “शर्मिष्ठा नामक एक ट्विटर यूजर ने पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ बार-बार घिनौनी कमेंट्स किए हैं। नेटिज़ेंस संबंधित BNS धाराओं के तहत उसके खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई की माँग कर रहे हैं।”

अकबरुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के नेता वारिस पठान ने भी इस मुद्दे पर अपनी आवाज उठाई और इस्लामी कट्टरपंथियों को भड़काया। उसने भी हिंदू इंफ्लुएंसर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की माँग की। उन्होंने कहा, “यह शर्मिष्ठा है, जिसने हमारे पैगंबर (pbuh) के बारे में काफी अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया है। इसे कोई भी मुसलमान बर्दाश्त नहीं करेगा।”

यह पूरा मामला साल 2022 में पूर्व बीजेपी प्रवक्ता नुपुर शर्मा मामले की तरह है। उन्होंने पैगंबर मोहम्मद और उनकी शादी के बारे में कुछ कहा था। उनकी बातें एक टीवी शो की बहस के दौरान हुई थीं, जहाँ वे एक मुस्लिम नेता की अपमानजनक टिप्पणी का जवाब दे रही थीं।

लेकिन कुछ लोगों ने उनकी बातों का गलत अर्थ निकाल लिया और उन्हें गलत तरीके से पेश किया। AltNews के मोहम्मद जुबैर जैसे लोगों ने उनकी बातों की वीडियो क्लिप का एक छोटा-सा हिस्सा निकालकर ऑनलाइन वायरल कर दिया। इसके बाद नुपुर शर्मा और उनके परिवार को जान से मारने और बलात्कार की धमकियाँ मिलने लगी।

अब ऐसे ही शर्मिष्ठा को भी इस्लामवादियों से धमकियाँ मिल रही हैं। पहलगाम में पाकिस्तानी जिहादियों ने हिंदुओं की हत्या की थी और उनसे धर्म पूछकर गोली मार दी गई थी। लेकिन एक पाकिस्तानी महिला इस हिंदू नरसंहार और पाकिस्तान की भूमिका से इ्न्कार करती है, जिस पर एक हिंदू इंफ्लुएंसर ने गुस्से में जवाब दिया। लेकिन अंत में पीड़ित कौन होता है? मुसलमान नहीं, बल्कि वह हिंदू जो बोल रहा था। इस्लामी हिंदुओं के समर्थन में बोलने वालों को दबाने में माहिर हो गए हैं। वे हिंदुओं को ही परेशान करने का आरोप लगाते हैं और उन्हें धमकाते हैं।

सोशल मीडिया पर दी गई सबसे गंदी गालियों और धमकियों के स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए शर्मिष्ठा ने एक एक्स पोस्ट में लिखा, “मुझे खेद है… प्यारे भारतीयों, मुझे ट्रोल किया गया, हमला करने और रेप करने, हत्या करने और कट्टरपंथी पाकिस्तानी आतंकवादियों के प्रति अपना गुस्सा जाहिर करने के लिए सबक सिखाने की धमकी दी गई, जिन्होंने मेरे निर्दोष देशवासियों को भयानक पहलगाम आतंकी हमले में मार डाला। मैंने वो सब सहा, क्योंकि मेरे लिए मेरा देश पहले आता है।”

शर्मिष्ठा ने धमकियों के बीच बिना शर्त माफी माँगते हुए कहा कि उनका किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का कोई इरादा नहीं था। उन्होंने कहा, “मैं बिना शर्त माफी माँगती हूँ। मैंने जो कुछ भी लिखा, वह मेरी निजी भावनाएँ थीं और मैंने कभी जानबूझकर किसी को ठेस नहीं पहुँचाना चाहा। अगर किसी को ठेस पहुँची है तो मैं उसके लिए खेद प्रकट करती हूं। मैं सहयोग और समझदारी की अपेक्षा करती हूँ। अब से मैं अपने सार्वजनिक पोस्ट में सावधानी बरतूँगी। कृपया एक बार फिर मेरी माफी स्वीकार करें।”

बाँके बिहारी के नाम पर खरीदी जाएगी जमीन, योगी सरकार बनाएगी कॉरिडोर: सुप्रीम कोर्ट ने दी हरी झंडी, मंदिर के पैसे का भी होगा इस्तेमाल

उत्तर प्रदेश के वृन्दावन में बाँके बिहारी मंदिर के आसपास कॉरिडोर बनाने को हरी झंडी मिल गई है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जमीन खरीदने को अनुमति दे दी है। इसके लिए मंदिर के आसपास जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। यह कॉरिडोर ₹500 करोड़ से बनाया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (15 मई, 2025) को एक फैसले में मंदिर के एफडी में जमा पैसे का इस्तेमाल जमीन खरीदने के लिए करने की अनुमति दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस पैसे का इस्तेमाल मंदिर के आसपास की 5 एकड़ जमीन खरीदने के लिए कर लिया जाए लेकिन जमीन को भगवान के नाम पर ही रजिस्टर करवाया जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, “उत्तर प्रदेश सरकार ने कॉरिडोर विकसित करने के लिए ₹500 करोड़ से अधिक की खर्च करने का बीड़ा उठाया है। हालाँकि, वे जमीन खरीदने के लिए मंदिर का पैसा इस्तेमाल करना चाहते हैं, जिसे उच्च न्यायालय ने 08.11.2023 के आदेश द्वारा अस्वीकार कर दिया था।”

कोर्ट ने आगे कहा, “हम उत्तर प्रदेश को इस योजना को पूरी तरह से लागू करने की अनुमति देते हैं। बाँके बिहारी जी ट्रस्ट के पास देवता/मंदिर के नाम पर FD जमा है… राज्य सरकार को प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण के लिए सावधि जमा में पड़ी राशि का उपयोग करने की अनुमति है।”

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में 2023 में इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा दिए गए एक फैसले को पलटा है। हाई कोर्ट ने कहा था कि जमीन खरीदने के लिए होने वाला खर्च उत्तर प्रदेश सरकार को स्वयं वहन करना होगा। वहीं योगी सरकार ने कुछ कानूनी समस्याओं के चलते इस खरीद के लिए मंदिर के पैसे का इस्तेमाल करने को कहा था।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई के दौरान इस बात पर भी जोर दिया कि सिर्फ बाँके बिहारी मंदिर डेवलपमेंट बोर्ड के अलावा बाकी संस्थाएँ भी इस विकास के लिए जोर लगाएँ। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार काशी कॉरिडोर की तर्ज पर वृन्दावन में भी कॉरिडोर बनाना चाह रही है।

यह कॉरिडोर तीन हिस्सों में होगा और इसमें बाँके बिहारी मंदिर के अलावा भी कई मंदिर शामिल किए हैं। कॉरिडोर बनने के बाद यहाँ 10 हजार से अधिक श्रद्धालु एक साथ दर्शन कर सकेंगे। अभी हर बार वृन्दावन में बड़े मौकों पर भीड़ जमा हो जाती है।

200+ बंकर तबाह, 450 IED डिफ्यूज, 31 ढेर… 21 दिन में 1200 वर्ग किमी का नक्सल पहाड़ ध्वस्त: अमित शाह ने दोहराया 31 मार्च तक लाल टेरर का सफाया करने का संकल्प

छत्तीसगढ़ के कर्रेगुट्टा पहाड़ पर चलाया गया नक्सल विरोधी अभियान पूरा हो गया है। इस अभियान में गुफाओं में छुपे नक्सलियों को मार गिराया गया है। इन पर संयुक्त रूप से ₹1 करोड़ से अधिक का इनाम था। इस सफल ऑपरेशन की गृह मंत्री अमित शाह ने भी प्रशंसा की है। उन्होंने फिर स्पष्ट किया है कि 31 मार्च, 2026 तक देश नक्सलमुक्त हो जाएगा।

कर्रेगुट्टा पहाड़ पर यह ऑपरेशन 21 अप्रैल 2025 को चालू हुआ था। इस ऑपरेशन में सुरक्षाबलों ने 31 नक्सली मारे हैं। इनमें 16 महिला नक्सली और 15 पुरुष नक्सली शामिल हैं। इन नक्सलियों पर कुल मिलाकर ₹1 करोड़ 72 लाख का इनाम रखा गया था। इस ऑपरेशन के चलते 1200 स्क्वायर किलोमीटर का इलाका नक्सलमुक्त हो गया है।

नक्सलियों ने कर्रेगुट्टा पहाड़ पर 200 सुरंगों और बंकरों में अपना ठिकाना बना रखा था। वहाँ से यह अपनी कार्रवाइयों को अंजाम देते थे। सुरक्षाबलों ने यह सुरंगे भी तबाह कर दी। यहाँ उन्होंने 4 हथियार फैक्ट्रियाँ बना रखी थीं। उनको भी सुरक्षाबलों ने तहस नहस कर दिया है।

इस पहाड़ को नक्सलियों ने काफी और दुर्गम बना कर रखा था। उन्होंने यहाँ आसपास 400 से अधिक IED लगा रखीं थीं। इन्हें डिफ्यूज करके जवान आगे बढ़े। कुछ धमाके भी हुए, जिसके चलते 18 जवान घायल हुए। इन जवानों का इलाज चल रहा है।

यहाँ सुरक्षाबलों को 2 टन से अधिक विस्फोटक और बड़ी संख्या में हथियार भी बरामद हुए हैं। अब यहाँ से नक्सली भाग गए हैं। इस ऑपरेशन की प्रशंसा देश के गृह मंत्री अमित शाह ने भी की है। उन्होंने 31 मार्च, 2026 तक देश को नक्सल मुक्त करने का लक्ष्य दोहराया है।

उन्होंने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “नक्सल मुक्त भारत के संकल्प में एक ऐतिहासिक सफलता प्राप्त करते हुए सुरक्षा बलों ने नक्सलवाद के विरुद्ध अब तक के सबसे बड़े ऑपरेशन में छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा के कुर्रगुट्टालू पहाड़ (KGH) पर 31 नक्सलियों को मार गिराया। जिस पहाड़ पर कभी लाल आतंक का राज था, वहाँ आज शान से तिरंगा लहरा रहा है।”

उन्होंने बताया, “कुर्रगुट्टालू पहाड़ PLGA बटालियन 1, DKSZC, TSC & CRC जैसी बड़ी नक्सल संस्थाओं का Unified Headquarter था, जहाँ नक्सल ट्रेनिंग के साथ-साथ रणनीति और हथियार भी बनाए जाते थे।”

गृह मंत्री ने बताया है कि इस पूरे ऑपरेशन के दौरान किसी भी सुरक्षाबल को जीवन का नुकसान नहीं हुआ। इस ऑपरेशन की प्रशंसा पीएम मोदी ने भी की है। उन्होंने लिखा, “सुरक्षा बलों की यह सफलता बताती है कि नक्सलवाद को जड़ से समाप्त करने की दिशा में हमारा अभियान सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। नक्सलवाद से प्रभावित क्षेत्रों में शांति की स्थापना के साथ उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए हम पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।”

लगातार मारे जा रहे नक्सली

गृह मंत्री अमित शाह ने 31 मार्च, 2026 का समय सुरक्षाबलों को नक्सलियों का सफाया करने के लिए दिया है। इसे लिए लगातार ऑपरेशन हो रहे हैं। 2024 में सुरक्षाबलों ने 290 नक्सली मारे थे। वहीं 2025 में यह संख्या लगभग 130 पहुँच चुकी है। सैकड़ों की संख्या में नक्सली सरेंडर कर चुके हैं।

वर्ष 2025 में सुरक्षाबलों को नक्सलियों के खिलाफ लगातार बड़ी सफलताएँ हाथ लगी हैं। अब तक कई ऐसे ऑपरेशन छत्तीसगढ़ में हो चुके हैं, जिनमें एक दर्जन से ज्यादा नक्सली एक साथ मार गिराए गए हों। एक रिपोर्ट बताती है कि अब तक 2025 के भीतर छत्तीसगढ़ में 120 से अधिक नक्सली मार गिराए गए हैं।

2025 के पहले दिन से ही सुरक्षाबलों ने नक्सलियों पर शिकंजा कसना चालू कर दिया था। 2 जनवरी, 2025 को बीजापुर में हुई मुठभेड़ में 5 नक्सली मारे गए थे। उसके बाद यह सिलसिला चलता ही रहा। 16 जनवरी को हुई एक मुठभेड़ में 18 नक्सली मार गिराए गए थे।

21 जनवरी, 2025 को गरियाबंद पहाड़ी पर हुई एक मुठभेड़ में 16 नक्सली मारे गए थे। इनमें नक्सलियों का टॉप कमांडर चलापति भी था। चलापति ₹1 करोड़ का इनामी नक्सली था। उसके साथ ही एक-दो और भी बड़े कमांडर मारे गए थे।

इस वर्ष की सबसे बड़ी मुठभेड़ 9 फरवरी को हुई थी। नेशनल पार्क क्षेत्र में हुए ऑपरेशन के दौरान यहाँ 31 नक्सली मार गिराए गए थे। यह ऑपरेशन महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के सुरक्षाबलों ने मिलकर किया था। यह हमला नक्सलियों की एक मीटिंग पर हुआ था। इसी तरह के बड़े ऑपरेशन के चलते नक्सलियों की अब कमर टूट गई है।

सुरक्षाबल अब उन इलाकों में घुस रहे हैं, जहाँ पहले नक्सली एकक्षत्र राज कर रहे थे। उन्हें ग्रामीणों से मिलने वाला समर्थन भी अब कम हो चुका है। दुर्गम इलाकों में चौकियाँ बनाने के चलते सुरक्षाबल उनकी हर एक मूवमेंट पर नजर रख रहे हैं।