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अब इकोनमी ही नहीं, डिफेंस सेक्टर में भी ग्लोबल पॉवर बनकर उभरा है भारत: ऑपरेशन सिंदूर में दुनिया ने देखा दम, नई डिफेंस पॉलिसी के बाद इजरायल-अमेरिका-रूस की लाइन में एंट्री

पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम की बैसरन घाटी में 26 हिंदू पर्यटकों की बेरहमी से हत्या कर दी और कई लोगों को घायल कर दिया। इस खौफनाक हमले ने भारत की पाकिस्तान के प्रति नीति को पूरी तरह बदल दिया।

इसके बाद भारत ने सख्त रवैया अपनाया। सिंधु जल संधि को रोक दिया, पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा रद्द कर दिए, दोनों देशों के बीच व्यापार बंद कर दिया और पाकिस्तानी मीडिया- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पाबंदी लगा दी। ये कदम पाकिस्तान के लिए मुश्किल वक्त की शुरुआत माने जा रहे हैं।

7 मई की सुबह भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया। भारतीय सेना ने पाकिस्तान में घुसकर नौ आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए। लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों के ठिकाने पूरी तरह तबाह कर दिए गए। इस कार्रवाई से आतंकवाद को बहुत बड़ा झटका लगा।

पाकिस्तान ने इसका जवाब देने के लिए जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती इलाकों में आम लोगों, मंदिरों और गुरुद्वारों पर हमले किए। लेकिन भारत के आधुनिक हथियारों और स्मार्ट रणनीति ने पाकिस्तान की हर नापाक साजिश को नाकाम कर दिया। इसके बाद भारत ने और सख्त कदम उठाया और पाकिस्तान के बड़े सैन्य ठिकानों पर निर्णायक और सटीक हमले किए, जिससे उन्हें भारी नुकसान हुआ।

इस नुकसान से परेशान होकर 10 मई को पाकिस्तान के सैन्य संचालन महानिदेशक (DGMO) ने भारत के DGMO से संपर्क किया और युद्धविराम की बात की। लेकिन जैसा पहले से अनुमान था, पाकिस्तान ने इस समझौते को तोड़ा। उसने सीमा पर गोलीबारी शुरू कर दी और रात में ड्रोन हमले किए। हालाँकि, भारतीय सुरक्षा बलों ने इन हमलों को भी पूरी तरह नाकाम कर दिया।

आतंकवाद को अब युद्ध माना जाएगा

10 मई को भारत ने साफ-साफ ऐलान किया कि अब किसी भी आतंकवादी हमले को युद्ध की तरह लिया जाएगा और उसका जवाब भी उसी स्तर पर दिया जाएगा। यह भारत की सुरक्षा नीति में बहुत बड़ा बदलाव है। सूत्रों के मुताबिक, इस फैसले से सीमा पार आतंकी साजिशों के खिलाफ पूरी सैन्य ताकत से जवाब देना आसान हो गया है।

भारत ने पहले भी 2016 में उरी, 2019 में पुलवामा और अब पहलगाम हमले के जवाब में सैन्य कार्रवाई की थी। लेकिन 10 मई का यह फैसला अब इस नीति को एक स्पष्ट और आधिकारिक रणनीति बनाता है।

जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र में भारत के पूर्व राजदूत दिलीप सिन्हा ने ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ से कहा, “बालाकोट में भारत ने पहली बार पाकिस्तान के अंदर आतंकी ठिकानों पर हमला करने का हक लिया था। पहलगाम के बाद इसे और आगे बढ़ाया गया। 9/11 के बाद से दुनिया मानती है कि आतंकवाद को समर्थन देने वाला देश अपनी संप्रभुता के पीछे नहीं छिप सकता। भारत अब चाहे बड़ा संघर्ष हो, इस हक का इस्तेमाल करेगा।”

यह कदम पाकिस्तान के लिए सख्त चेतावनी है, जो कई आतंकी संगठनों से जुड़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार आतंकवाद के खिलाफ साफ नीति बनाना चाहती है ताकि ऐसे हमलों के जिम्मेदार लोगों को कड़ी सजा दी जाए। पुलवामा और पहलगाम हमलों के जवाब में भारत की सैन्य कार्रवाई को न तो पाकिस्तान की जाँच की माँग और न ही अंतरराष्ट्रीय दबाव रोक पाया।

सिन्हा ने आगे कहा, “अब इसे राष्ट्रीय नीति का दर्जा दे दिया गया है। भारत यह तय करेगा कि कौन सा आतंकी हमला युद्ध माना जाए। यह हमें अमेरिका और इजरायल की तरह बनाता है, जिन्होंने आतंकवाद के खिलाफ एकतरफा सैन्य कार्रवाई का हक रखा है।”

भारत की नई सुरक्षा नीति में साफ कहा गया है कि अगर पाकिस्तान आतंकवादियों के जरिए भारत पर हमला करता है, तो उसे युद्ध माना जाएगा। भारत ऐसे हमलों का जवाब देने का पूरा हक रखता है और जरूरत पड़ने पर हर कदम उठाएगा।

नया भारत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चुप्पी रखी और 12 मई की रात देश को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की सख्त और तेज कार्रवाई अब देश की सुरक्षा नीति का हिस्सा है। “ऑपरेशन सिंदूर ने आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई में नया मानक बनाया है। यह हमारी न्यू नॉर्मल पॉलिसी है।”

मोदी ने साफ किया कि ऑपरेशन सिंदूर को खत्म नहीं माना जाए। भारत पाकिस्तान की हर हरकत पर नजर रखेगा। अपने 22 मिनट के राष्ट्र संबोधन में उन्होंने जोर देकर कहा, “हमने पाकिस्तान के आतंकी और सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई को सिर्फ रोका है। हम उसका रवैया देखेंगे कि वह क्या करता है।”

प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा, “भारत की वायुसेना, थलसेना, नौसेना, बीएसएफ और अर्धसैनिक बल हर वक्त तैयार हैं। सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और अब ऑपरेशन सिंदूर हमारी नीति का हिस्सा बन गए हैं।” हालाँकि, उनके भाषण का सबसे महत्वपूर्ण पहलू वह क्षण था जब उन्होंने उन तीन नई सामान्य बातों की ओर ध्यान दिलाया, जो अब पाकिस्तान की किसी भी शत्रुतापूर्ण कार्रवाई के प्रति भारत की प्रतिक्रिया का स्थायी हिस्सा बन गई हैं। ये तीनों सिद्धांत भारत की नई सुरक्षा नीति में निर्णायक बदलाव को दर्शाते हैं।

भारत की शर्तों पर निर्णायक जवाबी कार्रवाई :  पीएम मोदी ने कहा, “पहला, अगर भारत पर कोई आतंकी हमला होता है तो उसका मुँहतोड़ जवाब दिया जाएगा। हम अपनी शर्तों पर ही मुँहतोड़ जवाब देंगे। हम हर उस जगह पर सख्त कार्रवाई करेंगे जहाँ से आतंकवाद की जड़ें निकलती हैं।”

प्रधानमंत्री मोदी ने जोर देकर कहा कि भारत अब पाकिस्तान की किसी भी आक्रामक कार्रवाई का जवाब उसी अनुपात में, अपनी शर्तों पर, और आतंकवाद की जड़ पर प्रहार करते हुए देगा। पाकिस्तान की ओर स्पष्ट संकेत करते हुए उन्होंने इन तीन नए सिद्धांतों को भारत की प्रतिक्रिया नीति का हिस्सा बताया। इस घोषणा के साथ ही भारत ने दोनों देशों के बीच दशकों से चल रहे तथाकथित ‘सीमित युद्ध’ के विकल्प को प्रभावी रूप से अस्वीकार कर दिया है।

परमाणु ब्लैकमेल बर्दाश्त नहीं :  उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “दूसरी बात, भारत किसी भी परमाणु ब्लैकमेल को बर्दाश्त नहीं करेगा। भारत परमाणु ब्लैकमेल की आड़ में विकसित हो रहे आतंकवादी ठिकानों पर सटीक और निर्णायक हमला करेगा।”

पाकिस्तान की आदत रही है कि वह हर आतंकी हमले के बाद भारत और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को डराने के लिए परमाणु हमले की धमकी देता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में न केवल इस रणनीति को बेनकाब किया, बल्कि स्पष्ट रूप से कहा कि ऐसी खोखली और डराने वाली धमकियाँ भारत को किसी भी उल्लंघन की स्थिति में सख्त और निर्णायक जवाब देने से नहीं रोक सकतीं।

आतंकवादियों और उनके प्रायोजकों के बीच कोई भेद नहीं : उन्होंने कहा, “तीसरी बात, हम सरकार द्वारा प्रायोजित आतंकवाद और आतंकवाद के मास्टरमाइंड के बीच कोई अंतर नहीं करेंगे। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दुनिया ने एक बार फिर पाकिस्तान का घिनौना चेहरा देखा, जब पाकिस्तानी सेना के शीर्ष अधिकारी मारे गए आतंकवादियों को अंतिम विदाई देने आए थे। यह राज्य प्रायोजित आतंकवाद का पुख्ता सबूत है, और हम अपने नागरिकों को किसी भी खतरे से बचाने के लिए निर्णायक कदम उठाते रहेंगे”।

पाकिस्तान का आतंकवादियों से गहरा संबंध व्यापक रूप से प्रलेखित है। इस देश ने न केवल आतंकवादी हमलों का जश्न मनाया है, बल्कि अपनी संसद में ओसामा बिन लादेन जैसे आतंकियों का महिमामंडन भी किया है, जिससे वह वर्षों से आतंकवादियों के लिए एक सुरक्षित ठिकाना बन गया है। पाकिस्तानी राजनेता और सेना के अधिकारी भी समय-समय पर इस सच्चाई को स्वीकार कर चुके हैं।

भारत के हालिया अभियान के दौरान यह और स्पष्ट हो गया जब 100 से अधिक आतंकवादियों को मार गिराया गया और उनके अंतिम संस्कार में वरिष्ठ पाकिस्तानी सैन्य अधिकारियों की उपस्थिति दर्ज की गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी संदर्भ में यह दोटूक संदेश दिया कि भारत अब आतंकवादी संगठनों और उन्हें समर्थन देने वालों के बीच कोई फर्क नहीं करेगा, दोनों को एक ही दृष्टिकोण से देखा जाएगा और समान रूप से जवाब दिया जाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “भारत का रुख बिल्कुल साफ है। आतंक और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते, आतंक और व्यापार एक साथ नहीं चल सकते, और पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते।” उन्होंने यह संकेत भी दिया कि पाकिस्तान जैसे शत्रुतापूर्ण पड़ोसी के साथ किसी भी संभावित बातचीत का दायरा केवल आतंकवाद और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) तक सीमित रहेगा। प्रधानमंत्री ने यह सख्त संदेश मंगलवार (13 मई 2025) को आदमपुर एयरफोर्स स्टेशन पर वायु योद्धाओं और सैनिकों से बातचीत के दौरान दोहराया, जिससे भारत की बदली हुई सुरक्षा नीति और कूटनीतिक स्थिति और भी स्पष्ट हो गई।

भारत की तकनीकी ताकत, पाकिस्तान की नाकामी

‘ऑपरेशन सिंदूर’ में भारत ने अपनी सैन्य ताकत, रणनीति और तकनीक का शानदार प्रदर्शन किया। पाकिस्तान ने भारतीय नागरिक इलाकों और सैन्य ठिकानों पर ड्रोन, मिसाइल और रॉकेट से हमले किए। लेकिन भारत ने सिर्फ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। भारतीय सेना ने अपनी एकीकृत वायु रक्षा प्रणाली (Integrated Air and Missile Defense System) से सैन्य ठिकानों और संपत्तियों की पूरी रक्षा की।

भारत की मिसाइलों ने बहावलपुर, मुरीदके, मुजफ्फराबाद और कोटली जैसे आतंकी ठिकानों को सटीक निशाना बनाकर तबाह कर दिया। पाकिस्तान की महँगी मिसाइल रक्षा प्रणाली पूरी तरह बेकार साबित हुई। भारत के स्वदेशी हथियार, इजरायली तकनीक और रूस का S-400 सिस्टम पाकिस्तान के ड्रोन और मिसाइलों को रोकने में कामयाब रहा। इसके उलट, पाकिस्तान की चीनी रक्षा प्रणालियाँ पूरी तरह नाकाम रहीं। भारतीय ड्रोन और मिसाइलें बिना रुकावट पाकिस्तान में घुसीं और अपने निशाने पूरे किए।

भारत ने अपनी ‘आयरन डोम’ जैसे आकाशतीर और S-400 सुदर्शन चक्र वायु रक्षा सिस्टम को रणनीतिक रूप से तैनात किया। इनसे तुर्की के ड्रोन, चीनी मिसाइलें और कुछ पाकिस्तानी विमान नाकाम हो गए। पाकिस्तान ने लंबी दूरी के रॉकेट, कामिकेज ड्रोन और चीनी पीएल-15 मिसाइलों का इस्तेमाल किया। लेकिन भारत की वायु रक्षा ने ज्यादातर हमलों को नाकाम कर दिया। कुछ हमले ही रक्षा प्रणाली को भेद पाए, लेकिन उन्होंने भी मामूली नुकसान किया।

भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तानी हमले का मुंहतोड़ जवाब देते हुए नागरिक क्षेत्रों को निशाना बनाने की उसकी कोशिशों को नाकाम किया। इसके लिए भारत ने अपने स्वदेशी ‘आयरन डोम’ आकाशतीर एयर डिफेंस सिस्टम (ADS) को रूस से प्राप्त S-400 सुदर्शन चक्र ADS के साथ रणनीतिक रूप से तैनात किया। भारत की एकीकृत, बहुस्तरीय वायु रक्षा प्रणाली ने तीव्र संघर्ष के दौरान तुर्की के ड्रोन, चीनी मिसाइलों और संभावित रूप से कुछ पाकिस्तानी विमानों का भी प्रभावशाली रूप से सामना कर उन्हें निष्क्रिय कर दिया।

अधिकारियों के अनुसार, पाकिस्तान ने संघर्ष के दौरान लंबी दूरी के रॉकेट, लोटरिंग म्यूनिशन और क्वाडकॉप्टर के साथ-साथ तुर्की निर्मित बाइकर यिहा कामिकेज़ ड्रोन और अस्सिसगार्ड सोंगार ड्रोन का इस्तेमाल किया। इसके अलावा, पाकिस्तान ने चीन निर्मित पीएल-15 लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों का भी उपयोग किया, जो विशेष रूप से दृश्य सीमा से परे की मुठभेड़ों के लिए डिजाइन की गई हैं।

भारत ने इस संघर्ष में पहली बार ब्रह्मोस मिसाइल का युद्ध में इस्तेमाल किया। यह दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है और भारत की सटीक जवाबी क्षमता का प्रतीक है।

पाकिस्तान की फतह-II बैलिस्टिक मिसाइल और चीनी पीएल-15 मिसाइलें भारतीय रक्षा प्रणालियों के सामने बेकार रहीं। चीनी HQ-9 और HQ-16 रक्षा प्रणालियाँ भी भारतीय हमलों को रोकने में नाकाम रहीं, जिससे पाकिस्तान की रक्षा क्षमताओं की बड़ी खामियाँ उजागर हो गईं।

भारतीय वायुसेना के संचालन महानिदेशक ए.के. भारती ने बताया कि कई पाकिस्तानी लड़ाकू विमान मार गिराए गए, हालाँकि यह साफ नहीं कि वे F-16 थे या JF-17। पाकिस्तान ने चीनी ड्रोन विंग लूंग और CH-II का भी इस्तेमाल किया, लेकिन भारत ने उन्हें सीमा पर ही मार गिराया।

इस संघर्ष ने पाकिस्तान की चीनी वायु रक्षा प्रणालियों की कमजोरियों को उजागर कर दिया। HQ-9 और HQ-16 जैसी प्रणालियाँ भारतीय स्कैल्प स्टील्थ क्रूज मिसाइलों और हैमर ग्लाइड बमों को रोकने में पूरी तरह विफल रहीं। इन प्रणालियों की सीमित पहचान क्षमता और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग के प्रति संवेदनशीलता के कारण वे कम ऊँचाई पर, ज़मीन के करीब उड़ने वाले खतरों की प्रभावी पहचान नहीं कर पाईं, जिससे भारत के सटीक और गुप्त हमले सफल रहे।

पाकिस्तान की वायु रक्षा प्रणाली में पर्याप्त आक्रामकता की कमी और ताल-मेल का अभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया, जिसका भारत ने अपनी SEAD (शत्रु वायु रक्षा का दमन) रणनीति के तहत भरपूर फायदा उठाया। भारतीय बलों ने रडार नोड्स को सटीकता से निशाना बनाकर पाकिस्तान की वायु रक्षा प्रणाली को प्रभावी ढंग से निष्क्रिय कर दिया।

रफीकी, मुरीद, नूर खान, रहीम यार खान, सुक्कुर और चुनियन जैसे प्रमुख सैन्य हवाई अड्डों पर हमले किए गए, जबकि स्कार्दू, भोलारी, जैकोबाबाद और सरगोधा के हवाई अड्डों को भारी नुकसान पहुँचा। इसके अलावा, सियालकोट और पसरूर स्थित रडार साइटों को भी निशाना बनाया गया।

भारत ने डिकॉय विमान, सिग्नल दमन और रडार जैमिंग जैसी उन्नत रणनीतियों का इस्तेमाल किया, जिसने पाकिस्तान की वायु रक्षा को पूरी तरह कमजोर कर दिया।

सूत्रों के अनुसार, “9 और 10 मई को भारत ने एक ही ऑपरेशन में परमाणु-सशस्त्र राष्ट्र के 11 एयरबेस पर हमला करने वाला पहला देश बन गया, जिसमें पाकिस्तान की वायु सेना की 20 प्रतिशत संपत्ति नष्ट हो गई। भोलारी एयरबेस पर भारी नुकसान हुआ, जिसमें स्क्वाड्रन लीडर उस्मान यूसुफ (और चार एयरमैन) की मौत और प्रमुख लड़ाकू विमानों का नष्ट होना शामिल है।” हमले के दौरान कई पाकिस्तानी वायुसेना के लड़ाकू विमान नष्ट हो गए।

भारत ने पाकिस्तान के एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (AWACS) विमान को मार गिराकर उसे और अधिक अपमानित किया। इस कार्रवाई से पाकिस्तान की हवाई निगरानी क्षमता और युद्धक्षेत्र समन्वय को गंभीर झटका लगा, जिससे उसकी समग्र वायु रक्षा और संचालन क्षमता पर बड़ा असर पड़ा।

झूठ और आपत्तिजनक टिप्पणियों की आड़ में भारत ने पाकिस्तान में महत्वपूर्ण संपत्तियों को नष्ट कर दिया

भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान के भीतरी इलाकों में सटीक हमलों की अभूतपूर्व क्षमता का प्रदर्शन किया, जो यूक्रेन में रूसी कार्रवाई की तरह दिखाई दी, जबकि पाकिस्तान खुद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हास्य का पात्र बना रहा।

पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने सीएनएन को दिए एक साक्षात्कार में अपने ही देश के दावे कि पाकिस्तान ने राफेल सहित पाँच भारतीय लड़ाकू विमानों को मार गिराया और इसे ‘सोशल मीडिया पोस्ट’ करार देकर खारिज कर दिया।

सरकार द्वारा यह दावा भी किया गया कि लाहौर, कराची और रावलपिंडी सहित विभिन्न स्थानों पर भारत द्वारा भेजे गए 25 ड्रोन को रोका और नष्ट किया गया, लेकिन बाद में रक्षा मंत्री ने संसद में यह कहकर पलटी मार दी कि सैन्य प्रतिष्ठानों का स्थान उजागर न हो, इसलिए ड्रोन को जानबूझकर नहीं रोका गया।

पाकिस्तान की सेना ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत के खिलाफ गलत सूचना फैलाने की कोशिश की, जिसमें भारतीय प्रेस ब्रीफिंग के एक एडिट किए गए वीडियो और बिना ठोस सबूतों वाले पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन का उपयोग किया गया।

उन्होंने यह दावा भी किया कि भारत का एस-400 सिस्टम नष्ट हो गया और आदमपुर एयरबेस को भारी नुकसान पहुँचा, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं एयरबेस पर जाकर खारिज कर दिया। वहाँ की तस्वीरों में एस-400 प्रणाली सही-सलामत देखी गई।

पाकिस्तान के लोकप्रिय कॉमेडियन और पॉडकास्ट होस्ट शहजाद घियास शेख ने पियर्स मॉर्गन के ‘सेंसर’ शो में एक विवादास्पद बयान दिया, जिसमें उन्होंने दावा किया कि ओसामा बिन लादेन पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों से छिपने की कोशिश कर रहा था। इस पर मॉर्गन ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “अगर आपकी खुफिया एजेंसियों को नहीं पता था कि वह वहाँ है, तो यह सैन्य खुफिया इतिहास की सबसे खराब विफलता होगी।”

इस बीच, जब पाकिस्तान प्रचार, विजय जुलूस और भ्रामक दावों में व्यस्त था, उसकी रक्षा और रडार प्रणाली पूरी तरह रक्षाहीन नजर आई। भारतीय हमलों के सामने पाकिस्तान की यह स्थिति ऐसी लग रही थी जैसे वह खुले मैदान में बैठी हुई निशाना बनने को तैयार बत्तख हो।

यह स्थिति 2019 के बालाकोट हवाई हमले की याद दिलाती है, जब पाकिस्तान की वायुसेना के एक फैन पेज पर नींद से सो जाओ क्योंकि PAF जाग रहा है पोस्ट होने के तुरंत बाद ही उसे भारतीय हमलों का सामना करना पड़ा था। इस बार भी इतिहास ने खुद को दोहराया, और पाकिस्तान फिर से असहाय दिखा।

मनमोहन से मोदी तक: भारत की नीति में बड़ा बदलाव

कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार ने पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवादी हमलों, विशेष रूप से 2008 के मुंबई हमलों (26/11), के बावजूद कभी भी निर्णायक सैन्य कार्रवाई नहीं की। 26 नवंबर 2008 को पाकिस्तान के दस आतंकवादियों ने मुंबई पर हमला कर 166 निर्दोष लोगों की जान ले ली और 300 से अधिक को घायल कर दिया।

इसके बावजूद, तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ कोई ठोस सैन्य प्रतिक्रिया नहीं दी। बलपूर्वक जवाब देने की बजाय केवल ‘कड़ी निंदा’ की गई, कैंडल मार्च निकाले गए और इस्लामाबाद को दस्तावेज़ी डोज़ियर भेजे गए। आतंकवाद के इतने गंभीर कृत्य के बाद भी पाकिस्तान को दंडित करने की कोई पहल नहीं की गई, जिससे सरकार की कमजोर प्रतिक्रिया की व्यापक आलोचना हुई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने हर बड़े आतंकी हमले के बाद निर्णायक सैन्य कार्रवाई कर पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश दिया है। 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक, 2019 का बालाकोट एयरस्ट्राइक और अब ऑपरेशन सिंदूर इसका सबूत हैं। पहलगाम हमले के बाद की कार्रवाई ने इस सख्त नीति को और साफ कर दिया।

भारत ने अब वैश्विक मंच पर यह स्थापित कर दिया है कि वह एक निष्क्रिय ताकत नहीं, बल्कि सैन्य, कूटनीतिक और औद्योगिक रूप से उभरती हुई वैश्विक शक्ति है, जो अपनी संप्रभुता पर किसी भी उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं करेगी।

इसके विपरीत, कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के कार्यकाल में आतंकवादी घटनाओं के बावजूद सैन्य कार्रवाई से बचा गया। विशेष रूप से 26/11 मुंबई हमलों के बाद, तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार ने केवल ‘कड़ी निंदा’, कैंडल मार्च और पाकिस्तान को डोज़ियर भेजने तक ही प्रतिक्रिया सीमित रखी।

पूर्व वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल फली एच. मेजर (सेवानिवृत्त) ने पुष्टि की कि 26/11 के बाद वायुसेना ने जवाबी हमले के कई विकल्प तैयार किए थे और सरकार को इसकी जानकारी दी गई थी। उन्होंने कहा, “हम अगले 18-24 घंटों में हमले के लिए तैयार थे, लेकिन सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।”

उन्होंने हाल ही में 26/11 साजिशकर्ता तहव्वुर हुसैन राणा के प्रत्यर्पण का स्वागत करते हुए यह भी कहा कि यदि तत्काल कार्रवाई की जाती, तो संभवतः वह अब तक इतिहास बन चुका होता। कॉन्ग्रेस की निष्क्रियता और पाकिस्तान के खिलाफ निर्णायक कदम उठाने में विफलता उसकी आतंकवाद के प्रति कमजोर नीति को उजागर करती है।

नये भारत ने अपनी क्षमता और दृढ़ विश्वास का परिचय दिया

भारत ने स्पष्ट रूप से घोषित कर दिया है कि वह अब एक शांत और दबा हुआ राष्ट्र नहीं, बल्कि एक सशक्त वैश्विक शक्ति है जो बहुध्रुवीय विश्व की जटिलताओं को पार करने की क्षमता रखता है। पाकिस्तान के खिलाफ हालिया जीत ने न केवल भारत की सैन्य श्रेष्ठता को प्रदर्शित किया, बल्कि स्वदेशी हथियारों के निर्माण में इसकी उपलब्धियों को भी उजागर किया है।

भारत और पाकिस्तान की तुलना अब अप्रासंगिक हो गई है। भारत आज दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, जबकि पाकिस्तान आर्थिक रूप से संकटग्रस्त है और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और अन्य देशों की सहायता पर निर्भर है।

जहाँ पाकिस्तान अपने हथियारों के लिए मुख्य रूप से चीन, तुर्की और अमेरिका पर निर्भर है, वहीं भारत का ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा क्षेत्र में एक उल्लेखनीय सफलता बन चुका है। इसके अलावा, भारतीय नौसेना ने समुद्री क्षेत्र में अपनी निर्णायक और प्रभावशाली उपस्थिति स्थापित कर ली है, जो भारत की समग्र सैन्य क्षमता का एक और सशक्त प्रमाण है।

हालिया संघर्ष के दौरान भारतीय नौसेना के स्वदेशी विमानवाहक पोत INS विक्रांत ने पाकिस्तान की हवाई रणनीति को हतोत्साहित करने में अहम भूमिका निभाई। इसकी कमान में कार्यरत वाहक युद्ध समूह ने उत्तरी अरब सागर में तेजी से और बिना किसी विरोध के प्रवेश किया, जो भारत के समुद्री प्रभुत्व का स्पष्ट संकेत था।

INS विक्रांत की प्रभावशाली उपस्थिति ने पाकिस्तान की किसी भी बड़ी हवाई कार्रवाई को रोक दिया। इस स्वदेशी विमानवाहक पोत से मिले रणनीतिक लाभ ने भारत की निवारक शक्ति को और मज़बूत किया तथा महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया।

वाइस एडमिरल ए. एन.प्रमोद ने पुष्टि की कि नौसेना, भूमि और समुद्र दोनों मोर्चों पर कराची जैसे प्रमुख पाकिस्तानीठिकानों पर हमले के लिए पूरी तरह तैयार थी, जिससे भारत की समग्र सैन्य तैयारियों का संकेत मिलता है।

वाइस एडमिरल ए. एन. प्रमोद ने बताया कि भारतीय रक्षा बलों की एकीकृत सैन्य योजना के तहत नौसेना के वाहक युद्ध समूह, सतही युद्धपोत, पनडुब्बियाँ और विमानन परिसंपत्तियाँ पूर्ण युद्ध तत्परता के साथ तुरंत समुद्र में तैनात कर दी गईं।

उन्होंने खुलासा किया कि पहलगाम आतंकी हमले के 96 घंटों के भीतर, अरब सागर में हुई कई गोलीबारी के दौरान नौसेना ने अपने अभियानों और रणनीति का मूल्यांकन और सुधार किया।

भारतीय नौसेना ने कराची सहित समुद्र और ज़मीन पर सटीक लक्ष्यों को किसी भी समय भेदने की पूरी तैयारी और क्षमता प्रदर्शित की, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि भारतीय नौसेना निर्णायक और निवारक मुद्रा में उत्तरी अरब सागर में पूरी मजबूती से तैनात रही। यह रहा आपके पैराग्राफ का पुनर्लेखन जिसमें सभी महत्वपूर्ण जानकारियाँ स्पष्ट और प्रभावशाली रूप में समाहित हैं।

15 जनवरी को मुंबई के नौसेना डॉकयार्ड में, प्रधानमंत्री नरेंद्रमोदी ने तीन प्रमुख नौसैनिक जहाजों INSसूरत, INS नीलगिरि और INS वाघशीर को राष्ट्र को समर्पित करते हुए घोषणा की कि भारत एकउभरती हुई वैश्विक समुद्री शक्ति बन रहा है।

उन्होंने इसे समुद्री सुरक्षा और रक्षा उत्पादन क्षेत्र में बड़ी छलांग करार दिया। बीते दस वर्षों में, भारतीय नौसेना ने 33 युद्धपोत और 7 पनडुब्बियाँ अपने बेड़े में जोड़ी हैं, जिनमें से 39 जहाज भारत में निर्मित हैं।

इनमें भारत का पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत INS विक्रांत और परमाणु पनडुब्बियाँ INS अरिहंत और INS अरिघात शामिल हैं जो देश की स्वतंत्र नौसैनिक निर्माण क्षमता और सामरिक आत्मनिर्भरता का प्रतीक हैं।

निष्कर्ष

पाकिस्तान की छवि जहाँ आतंकवादी संगठनों से जुड़ी पहचान तक सीमित है, वहीं भारत एक उभरती हुई वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित हो चुका है। भारत ने विशिष्ट गुटों के साथ गठबंधन से बचते हुए संतुलित और स्वतंत्र विदेश नीति अपनाई है। वह QUAD (भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान, अमेरिका) और I2U2 (भारत, इज़राइल, यूएई, अमेरिका) जैसे बहुपक्षीय मंचों का हिस्सा है, साथ ही रूस के साथ मजबूत व्यापारिक और रक्षा संबंध भी बनाए रखता है।

भारत ने इजरायल के साथ रणनीतिक भागीदारी कायम की है, जबकि सऊदी अरब, मिस्र, कुवैत, यूएई, बहरीन, अफगानिस्तान, मालदीव और फिलिस्तीन जैसे मुस्लिम बहुल देशों के साथ भी सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इन आठ देशों से उनके सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाज़ा गया है। यह भारत की व्यापक और संतुलित कूटनीति का प्रमाण है।

रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान जब वैश्विक स्तर पर रूस से संबंध तोड़ने का दबाव था, भारत ने संतुलन और लचीलापन दिखाते हुए अपनी स्वतंत्र विदेश नीति को बनाए रखा। भारत ने न केवल रूस से रणनीतिक साझेदारी बनाए रखी, बल्कि युद्ध के समाधान के लिए लगातार बातचीत और शांति का मार्ग अपनाने की सलाह दी। यह रुख वैश्विक राजनीति में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है, विशेष रूप से संकटों के समय। कोविड-19 महामारी के दौरान, जब कई पश्चिमी शक्तियाँ आत्मकेंद्रित रुख अपना रही थीं, भारत ने ‘वैक्सीन मैत्री’ पहल के जरिए दर्जनों गरीब और विकासशील देशों को जीवन रक्षक टीकों की आपूर्ति की। इससे भारत की वैश्विक नेतृत्व क्षमता और मानवीय दृष्टिकोण उजागर हुआ।

भारत आज न केवल ज़रूरतमंदों की मदद करने की क्षमता रखता है, बल्कि अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ किसी भी खतरे का निर्णायक और विनाशकारी जवाब देने में भी पूरी तरह सक्षम है।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने साबित किया कि भारत अब सिर्फ जवाब देने वाला नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन को आकार देने वाला देश है। चाहे दुश्मन हों या वैश्विक समुदाय, भारत की इस सक्रिय भूमिका ने दुनिया की सियासत बदल दी है। भारत अब बहुध्रुवीय दुनिया में एक मजबूत और स्थायी ताकत है।

(यह रिपोर्ट मूल रूप से अंग्रेजी में रुक्मा राठौर ने लिखी है, इसका हिंदी अनुवाद विवेकानंद मिश्रा ने किया है।)

3 मुख्य एयरबेस पर मिसाइल गिरते ही निकल गई थी पाकिस्तान की हवा, तुरंत मदद के लिए पहुँचा अमेरिका के पास: अब सामने आ रहा सारा सच, जानें भारत ने कैसे आतंकी मुल्क को डाला खौफ में

जम्मू कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए हमले के जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया। 7 मई 2025 को पाकिस्तान और POK में 9 आतंकी ठिकानों को ध्वस्त करने के बाद 10 मई 2025 को भारतीय वायुसेना ने एयर स्ट्राइक कर पाकिस्तान के 11 हवाई अड्डों पर हमला किया। इनमें पाक के सबसे महत्वपूर्ण 3 एयरबेस- जकोबाबाद, चकलाला (रावलपिंडी) और सरगोधा हवाई अड्डे भी थे। इन हमलों से पाकिस्तानी सेना में भूचाल आ गया।

असल में ये 3 सैन्य हवाईअड्डे पाकिस्तान के पास अमेरिका से भेजे गए F-16 फाइटर जेट्स के रखरखाव, संचालन और डिप्लॉयमेंट के लिए सबसे जरूरी हैं। इसके अलावा यहाँ पर ट्रेनिंग और सशस्त्र जखीरे जैसे आवश्यक चीजें भी हैं।

चकलाला पर हमला खास तौर पर इसलिए भी जरूरी था क्योंकि यह पाकिस्तान का एक ट्रांसपोर्ट हब होने के साथ साथ एयर-रिफ्यूलिंग एसेट के लिए भी सबसे महत्वपूर्ण जगह है। इसी जगह पर पाकिस्तान के प्रमुख ट्रांसपोर्ट स्वाड्रन्स हैं और यहीं से लड़ाकी विमानों की सीमा बढ़ाई जाती है। C-130 हरक्यूलिस और IL-78 मिड-एयर रिफ्यूलर जैसे विमान यहाँ पर रखे जाते हैं। ये लॉजिस्टिक्स और स्ट्रैटेजिक एयरलिफ्ट ऑपरेशन के लिए जरूरी हैं।

इन वायुसेना अड्डों पर भारत के हमले से पाकिस्तान एक तरह से पंगु हो गया है। चकलाला पाकिस्तान के रणनीतिक योजनाओं के विभाग (Strategic Plans Division) के भी सबसे पास में स्थित है, जहाँ पर देश के परमाणु शस्त्रागार की देखरेख की जाती है।

इस हमले ने इस्लामाबाद को घुटनों पर ला दिया है। इसी के कारण पाकिस्तान को अमेरिका से बीचबचाव की दरख्वास्त करनी पड़ गई।

जनरल मुनीर ने वॉशिंगटन के आगे फैलाए हाथ

इस हमले को 1971 के बाद से सबसे बड़ा भारतीय सैन्य हमला कहा जा रहा है। पाकिस्तानी फौज के प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात कर भारत के साथ बढ़ रहे तनाव को कम करने के लिए अमेरिका को दखल देने की गुजारिश की।

पाकिस्तान की गुजारिश के कुछ समय बाद रुबियो ने दोनों देशों से बातचीत शुरू करने के पेशकश की। साथ ही इस मुद्दे पर भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से चर्चा की। अमेरिका ने मध्यस्थता करने और भारत और उसके पड़ोसी देश के बीच भविष्य के संघर्षों को कम करने में मदद करने का प्रस्ताव भी दिया।

इसके तुरंत बाद, पाकिस्तान के सैन्य संचालन महानिदेशक (DGMO), मेजर जनरल काशिफ अब्दुल्ला ने भारतीय अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई से बात कर दुश्मनी रोकने की पेशकश की। भारतीय अधिकारियों ने इस प्रस्ताव को पाकिस्तान के एयर डिफेंस और सैन्य इंफ्रास्ट्रक्चर को धराशायी करने का प्रत्यक्ष सबूत माना।

वायु सेना की बेहतरी ने क्षेत्रीय सैन्य संतुलन को किया मजबूत

भारत ने कुल 11 पाकिस्तानी एयरबेस और दो राडार साइट्स को निशाना बनाया। इतने कम समय में इतना बड़ा हमला कर सैना के लिए एक ‘नया सामान्य’ स्थापित कर दिया है।
पाकिस्तान की प्रतिक्रिया देने में अक्षमता उसके ध्वस्त हो चुके वायु रक्षा तंत्र और भारतीय सशस्त्र बलों की बेहतरीन क्षमता को दिखाती है जो उसकी पुरानी सैन्य तैयारियों के कारण ऐसी हुई।

भारत के हमलों ने दोनों देशों के बीच बढ़ रहे तकनीकी अंतराल को भी सबके सामने रख दिया। भारतीय अधिकारियों ने कहा कि पाकिस्तान की खुद को बेचारा दिखलाने की आदत ने ही उसे अमेरिका से मदद की गुहार लगाने पर मजबूर कर दिया। 10 मई को भारत की सैन्य शक्ति के प्रदर्शन ने भारतीय उपमहाद्वीप में रणनीतिक गणनाओं को एक बार फिर परिभाषित कर दिया है।

हालाँकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बार-बार दावा किया है कि उनके दखल के कारण ही भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम हुआ। लेकिन भारत ने किसी भी तीसरे पक्ष की भूमिका को पूरी तरह से नकारा है। ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्होंने व्यापार को ‘हथियार’ की तरह इस्तेमाल किया ताकि दोनों देशों को सीजफायर के लिए सहमत किया जा सके, लेकिन भारत ने इसे भी सिरे से खारिज कर दिया।

इसके अलावा, भारतीय सेनाओं और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इसे सीजफायर के तौर पर नहीं, बल्कि एक समझ के रूप में देखा जाना चाहिए। भारत आने वाले दिनों में भी पाकिस्तान के व्यवहार का आकलन करता रहेगा और उसके अनुसार ही अब एक्शन लेगा। भारत के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर जारी है।

भारत ने UN से की TRF के खिलाफ कार्रवाई की माँग

एक ओर पाकिस्तान भारत के हमलों से हुए नुकसान को छिपाने की कोशिश कर रहा है तो दूसरी ओर, नई दिल्ली ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में लश्कर-ए-तैयबा की सहायक संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) को आतंकवादी संगठन घोषित करने की माँग की है। इसे लेकर भारत ने अपना डिप्लोमैटिक कैंपेन तेज कर दिया है। TRF ने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम आतंकी हमले की जिम्मेदारी ली थी। इस घटना में पाकिस्तान की भूमिका को सामने लाने वाला एक दस्तावेज प्रस्तुत किया गया है। हालाँकि इस्लामाबाद चीन के समर्थन से, UNSC में TRF को सुरक्षा देने का अब भी प्रयास कर रहा है।

क्या ‘सोम यज्ञ’ करने से सच में होती है वर्षा… वैज्ञानिकों ने ‘सनातन परंपरा’ पर शुरू किया शोध, उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में अनुष्ठान से हुई शुरुआत

सनातन में यज्ञ और हवन का महत्व वैदिक काल से ही चला आ रहा है। भगवान श्री राम के जन्म से लेकर पूर्वजों की श्रद्दांजलि देने के लिए आज भी यज्ञ का ही सहारा लिया जाता है। सनातन की इसी परंपरा में सूखे जैसी आपदा के समाधान के लिए ‘सोम यज्ञ’ करवाया जाता था।

मान्यताएँ कहती हैं कि इससे बारिश हो भी जाती थी। अब इसी वैदिक मान्यता की पुष्टि और यज्ञ की वैज्ञानिकता को परखने के लिए मध्य प्रदेश में शोध किया जा रहा है।

मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (MPCST)भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान इंदौर (IIT Indore) और भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक इस शोध में प्रतिभाग कर रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 24 अप्रैल 2025 को लगभग 15 वैज्ञानिकों की टीम ने मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर में इस प्रयोग को किया। उन्होंने वैदिक अनुष्ठानों के अनुसार सोम यज्ञ किया। इसके बाद उन्होंने 24 अप्रैल से 29 अप्रैल तक मौसम में बदलाव, एयरोसोल बिहेवियर और तापमान में परिवर्तन समेत कुछ अन्य पहलुओं की जाँच की।

यज्ञ का पौराणिक महत्व

वैज्ञानिकों के अनुसार, पौराणिक समय में सोम यज्ञ के लिए समोवल्ली (सरकोस्टेमा ब्रेविस्टिम्मा) नामक एक पौधे के रस का उपोग किया जाता था। मान्यता है कि देशी गाय के दूध से बने घी के साथ मिलाकर जब इस पौधे के रस को अग्नि में डाला जाता है तो न सिर्फ वातावरण शुद्ध होता है बल्कि बादलों का संघनन भी बढ़ जाता है।

नमी बढ़ने के बाद यज्ञ के आस पास की जगहों पर बारिश होती है। अध्यात्मिक तौर पर यज्ञ और हवन का महत्व विज्ञान से कहीं न कहीं जुड़ा हुआ भी है। हवन में डाले जाने वाले गुड़ और घी से ऑक्सीजन बनता है। इससे निकलने वाले धुएँ से 94% हानिकारण जीवाणु और विषाणु खत्म हो जाते हैं।

जिस जगह पर यज्ञ किया जाता है उस जगह को पवित्र माना जाता है। इसके पीछे का कारण ये है कि यज्ञ के धुएँ से उस जगह पर जीवाणुओं का स्तर लगभग एक माह तक नहीं बढ़ पाता। इससे न केवल घर में शुद्धता रहती है पर साथ ही फसलों में भी कीड़े नहीं लग पाते।

आस्था और विज्ञान का मिश्रण

वैज्ञानिकों का कहना है कि यह करने के पीछे उनका उनका उद्देश्य इस परंपरा की सत्यता को प्रमाणित करना था। इस शोध को पीरा करने में अक्षय कृषि परिवार नाम के एक गैर सरकारी संगठन (NGO) ने अपनी भूमिका निभाई थी।

रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय मौसम विभाग के सेवानिवृत्त वैज्ञानिक राजेश माली ने बताया कि ये शोध 24 अप्रैल 2025 को शुरू हुआ था और आगे कई वर्षों तक चलेगा। इसके परिणाम से न केवल पौराणिक मान्यताओं पर लोगों का विश्वास बढ़ सकेगा पर साथ ही हमारे ऋषि मुनियों के ज्ञान की ख्याति भी बढ़ेगी।

राजेश ने बताया,”शोध में हम लगभग 13 उपकरणों का उपयोग करके अलग-अलग चीजों को माप रहे हैं। इन उपकरणों में से एक ‘क्लाउड कंडेनसेशन न्यूक्लियर काउंटर’ (CCN काउंटर) यज्ञ वाली जगह और उसके आसपास के पर्यावरण में बादल में मौजूद एयरोसोल कणों की सांद्रता पर काम करता है।

वहीं दूसरा मुख्य उपकरण ‘टेथरसॉन्ड’ एक सेंसरयुक्त गु्ब्बारा होता है। ये वायुमंडल में नमी, तापमान, दबाव आदि को जाँचता है। एक अन्य उपकरण स्कैनिंग मोबिलिटी पार्टिकल साइजर (SMPS) से आस पास की एयरोसोल की घटनाओं की गणना के लिए उपयोग किया जाता है।

कई बार रिकॉर्ड हो रहा डेटा

आईआईटीएम के क्षेत्रीय कार्यालय के एक अन्य वैज्ञानिक डॉ. यांग लियान के अनुसार, वैज्ञानिकों की टीम इस शोध में आगे के तुलनात्मक अध्ययन करने के लिए लगातार डेटा रिकॉर्ड कर रही है।

उन्होंने कहा, “उपकरणों से सभी डेटा लेने के बाद हम यज्ञ के प्रभाव से पर्यावरण पर हुए असर का विश्लेषण करेंगे। इसके लिए हम दिन में चार बार डेटा रिकॉर्ड कर रहे हैं। सुबह और शाम के अलावा यज्ञ के दौरान भी दो बार डेटा रिकॉर्ड किया जा रहा है।”

MPCST के निदेशक और शोध टीम के एक सदस्य अनिल कोठारी ने कहा, “यह अध्ययन विज्ञान और भारत के ऋषि मुनियों के द्वारा दी गई जानकारियों के बीच एक पुल की तरह काम करेगा। शोध के पूरा होने के बाद पर्यावरण और विज्ञान के क्षेत्र में नई जानकारी सामने आ सकती है।”

अक्षय कृषि परिवार के संयोजक गजानंद डांगे का कहना है कि अगर इस शोध के परिणाम उत्साहजनक नहीं मिलते हैं तो वैज्ञानिकता को परखने के लिए नई मशीनें भी लाईं जा सकती हैं। उन्होंने कहा, “इस शोध का उद्देश्य सदियों पुरानी पारंपरिक मान्यताओं को वैज्ञानिक प्रमाण देना है।”

वैज्ञानिकों का मानना है कि इस शोध के परिणाम के आधार पर आगे चलकर ग्लोबल वार्मिंग समेत कई अन्य पर्यावरणीय समस्याओं में इन पारंपरिक तरीकों का उपयोग करने पर विचार किया जा सकता है।

मियाँ शहबाज नकल तो कर लोगे, पर मोदी जैसा साहस कहाँ से लाओगे: नए भारत का आदमपुर ने किया उद्घोष, पसरूर ने पस्त पाकिस्तान की दिखाई तस्वीर

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके पाकिस्तानी समकक्ष शहबाज की उम्र में करीब साल भर का ही अंतर है। लेकिन अपनी उपस्थिति से नरेंद्र मोदी जो प्रभाव पैदा करते हैं, उसके आगे शरीफ कहीं नहीं टिकते। यह फर्क भारतीय वायुसेना के आदमपुर एयरबेस की नरेंद्र मोदी की यात्रा और उनकी देखादेखी शरीफ का सियालकोट के पसरूर फौजी छावनी जाने के दौरान भी दिखा।

आदमपुर एयरबेस गए PM मोदी, दिखाया S-400 और MIG 29

पाकिस्तान की तरफ से यह प्रोपेगेंडा चलाया गया था कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जवाब में उसने पंजाब में स्थित भारतीय वायुसेना के आदमपुर एयरबेस को तबाह कर दिया है। साथ ही यह अफवाह भी फैलाई गई कि पाकिस्तान ने इस बेस पर तैनात एयर डिफेंस सिस्टम S-400 को भी नुकसान पहुँचाया है। उल्लेखनीय है कि इस एयरबेस को पाकिस्तान ने 1965, 1971 और 1999 के युद्ध दौरान भी निशाना बनाने की कोशिश की थी, लेकिन नाकाम रहा था।

13 मई 2025 को आदमपुर एयरबेस पर जवानों के बीच पीएम मोदी, पीछे रनवे पर खड़ा दिख रहा मिग-29 (फोटो साभार: X/@narendramodi)
13 मई 2025 को आदमपुर एयरबेस पर पीएम मोदी, पीछे दिख रहा एस-400 (फोटो साभार: pib.gov.in)

सीजफायर के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आदमपुर एयरबेस पहुँचकर पाकिस्तान के सारे प्रोपेगेंडा को दुनिया के सामने ध्वस्त कर दिया। इस दौरान दुनिया ने उस S-400 को भी देखा, जिसे नुकसान पहुँचाने का दुष्प्रचार चलाया गया था। MIG-29 को भी उसी एयरबेस के रनवे पर देखा, जिसे तबाह करने के दावे थे। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर जवानों तक के हावभाव, उत्साह और बातचीत सब ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता की कहानी बता रहे थे। साथ ही पाकिस्तान के झूठों की पोल भी खोल रहे थे।

फौजी छावनी जाकर शहबाज शरीफ ने दिखाया टैंक

प्रधानमंत्री मोदी की नकल कर शहबाज शरीफ ने अपने मुल्क के पंजाब प्रांत स्थित सियालकोट के पसरूर फौजी छावनी की यात्रा कर ली। लेकिन उनमें से किसी भी एयरबेस पर जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाए, जिन्हें ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत भारतीय सेना ने तबाह कर पाकिस्तान को घुटने पर ला दिया था।

सियालकोट के पसरूर फौजी छावनी में शहबाज शरीफ ने टैंक पर चढ़कर कराया फोटो सेशन (फोटो साभार: इंडिया टुडे)

AI जेनरेटेड तस्वीर छपवाकर ‘आसमान का शहंशाह’ होने का मुगालता पालने वाला पाकिस्तान इस यात्रा के दौरान कुछ भी ऐसा प्रदर्शित नहीं कर पाया, जिससे उसकी सेना की क्षमता का दुनिया को पता चले। सबसे हास्यास्पद तो यह रहा कि जिस लड़ाई में लड़ाकू विमानों, मिसाइल, ड्रोन, यूएवी, एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल हुआ, उसके बारे में संदेश देने के लिए टैंक पर चढ़कर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने फोटो सेशन कराया।

PM मोदी का सीधा संदेश, शरीफ की घिसीपिटी बातें

भारत से बदला लेंगे– यह पैदाइश के बाद से ही पाकिस्तान की सियासत और फौज का तकिया कलाम है। 1947, 65, 71, 99 के युद्ध में पराजय, मुल्क का विभाजन होने के बाद भी पाकिस्तान इस एक लाइन से आगे नहीं बढ़ पाया। बदला लेने की यह बात कहते-सुनते पाकिस्तान की कई पीढ़ियाँ खाक हो गई, उसके बाद सर्जिकल स्ट्राइक हो या एयर स्ट्राइक या फिर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ भारत ने पाकिस्तान को घर में घुसकर लगातार मारा, लेकिन वह इस एक लाइन से आगे नहीं बढ़ पाया।

टैंक पर चढ़कर भी लस्त-पस्त शहबाज शरीफ ‘1971 की जंग का आपने इस जंग में बदला ले लिया’ वाला डायलॉग से आगे नहीं बढ़ पाए। जिस मुल्क की सीमा में घुसकर भारत ने आतंकी ठिकानों से लेकर एयरबेस तक तबाह कर दिए, एयर डिफेंस सिस्टम और हथियारों को भोथरा कर दिया, जिसके ड्रोन-मिसाइल भारतीय सेना ने पतंग की तरह काट गिराए, उस मुल्क का प्रधानमंत्री जब बदला लेने का दंभ भरता है तो न उसके हावभाव में विश्वास दिखता है, न उसके शब्दों में। यही शरीफ के इस संबोधन में परिलक्षित भी हो रहा था। मार खाई फौज में मरे हुए आत्मविश्वास से भरोसा पैदा नहीं किया जा सकता। लिहाजा शरीफ की यात्रा के जो वीडियो सामने आए हैं, उसमें पाकिस्तानी फौजियों का निस्तेज दिखना आश्चर्यजनक नहीं है।

इसके ठीक उलट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन ‘नया भारत’ का उद्घोष था। उनके हर एक शब्द से ऑपरेशन सिंदूर और भारतीय सेना के पराक्रम का जयघोष हो रहा था। संबोधन के दौरान उनका हावभाव, भारत माता के जयकारे बता रहे थे कि भारत का मनोबल और खुद में विश्वास किस स्तर का है।

उन्होंने कहा;

PM मोदी की नकल कर ली, पर वह लकीर नहीं खींच पाए शरीफ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के एक-एक शब्द की तरह आदमपुर की उनकी यात्रा के संदेश भी स्पष्ट हैं। आदमपुर उस मजबूत भारत का प्रतीक है, जो आतंकी मुल्क की गुहार पर अपनी सैन्य कार्रवाई स्थगित कर सकता है। लेकिन जिसमें फिर से आतंकी गतिविधि या फौजी दुस्साहस का मुँहतोड़ जवाब अपनी शर्तों और अपने तरीकों से देने का पराक्रम भी है। जो बताता है कि वह शांति का पक्षधर है, लेकिन दुश्मन को मिट्टी में मिलाना भी अच्छी तरह से जानता है।

दूसरी तरफ शहबाज शरीफ के शब्द उतने ही पुराने, घिसेपिटे और उलझे हुए हैं, जितना पुराना पाकिस्तान। उनकी यात्रा के संदेश उतने ही ऊर्जाहीन हैं, जितनी पाकिस्तानी फौज की हालत है।

कश्मीर में झेलम के अधूरे तुलबुल प्रोजेक्ट को लेकर भिड़े उमर अब्दुल्ला और महबूबा, खेलने लगे ‘इस पार और उस पार’ का खेल: सिंधु नदी समझौते के निलंबन का फायदा उठाना चाहते हैं CM, लेकिन मुफ्ती कर रही विरोध

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती के बीच तुलबुल नेविगेशन परियोजना और सिंधु जल संधि को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। यह विवाद शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर और गहरा गया, जब दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर तीखे हमले किए।

तुलबुल नेविगेशन परियोजना का मकसद झेलम नदी पर नौवहन और बिजली उत्पादन को बेहतर करना है। उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार (15 मई 2025) को इस परियोजना को पुनर्जीवित करने की बात कही थी, जिसे महबूबा मुफ्ती ने उकसाने वाला कदम बताया। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब पहलगाम आतंकी हमले, सिंधु जल संधि के निलंबन और ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव कम हुआ था।

उमर अब्दुल्ला ने महबूबा के आरोपों को ‘सस्ता प्रचार’ करार देते हुए कहा कि वह बहस को ‘गटर’ के स्तर पर नहीं ले जाएँगे। उन्होंने एक्स पर लिखा कि वह जम्मू-कश्मीर के लोगों के हित में अपने नदियों का उपयोग करने की वकालत करते रहेंगे। उमर ने कहा कि वह पानी को रोकने नहीं, बल्कि इसका ज्यादा इस्तेमाल अपने लोगों के लिए करना चाहते हैं। उन्होंने महबूबा पर तंज कसते हुए कहा कि वह पोस्ट करती रहें, वह अब ‘असली काम’ करेंगे।

महबूबा मुफ्ती ने तुलबुल परियोजना को 1980 के दशक में शुरू किया गया बताया, जिसे पाकिस्तान के विरोध के कारण सिंधु जल संधि के तहत रोक दिया गया था। संधि के अस्थायी निलंबन के बाद अब इसके दोबारा शुरू होने की संभावना है। महबूबा ने उमर के दादा शेख अब्दुल्ला का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने सत्ता खोने के बाद पाकिस्तान से जुड़ने की वकालत की थी, लेकिन बाद में भारत के साथ आ गए। उन्होंने उमर पर राजनीतिक सुविधा के हिसाब से रुख बदलने का आरोप लगाया।

उमर ने जवाब में कहा कि सिंधु जल समझौते का विरोध ऐतिहासिक अन्याय को सुधारने की कोशिश है। बता दें कि उमर अब्दुल्ला हों या महबूबा मुफ्ती, जब सत्ता में होते हैं तो भारत की बात करते हैं, विपक्ष में जाते ही विरोधी राग अलापने लग जाते हैं। वो इस मामले में भी दिख रहा है। इस समय मोदी सरकार ने सिंधु जल समझौते को निलंबित कर रखा है। ऐसा पहलगाम हमले के बाद किया गया। ऑपरेशन सिंदूर पर बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि खून और पानी साथ नहीं बह सकते।

’43 रोहिंग्या औरतों-बच्चों-बुजुर्गों को समंदर में फेंक दिया’: सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- किसने देखा, कहाँ है सबूत? वकील से कहा- देश में इतना कुछ हो रहा, नई कहानी मत गढ़ो

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (16 मई 2025) को रोहिंग्या शरणार्थियों के कथित तौर पर म्यांमार भेजे जाने की याचिका पर सुनवाई की। याचिका में दावा किया गया कि भारत सरकार ने बच्चे, औरतें, बुजुर्ग और कैंसर जैसे गंभीर बीमारियों से पीड़ित 41 रोहिंग्याओं को जबरदस्ती म्यांमार भेज दिया।

याचिका में दावा किया गया है कि इन लोगों को अंडमान ले जाकर समुद्र में फेंक दिया गया। जस्टिस सूर्या कांत और जस्टिस एन. कोटिस्वर सिंह की बेंच ने इस याचिका पर सवाल उठाए और इसे ‘बड़ी खूबसूरती से गढ़ी कहानी’ बताया। कोर्ट ने कहा कि याचिका में कोई पक्का सबूत नहीं है, सिर्फ हवा-हवाई और बिना आधार वाले दावे किए गए हैं। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कोई राहत नहीं दी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, जस्टिस सूर्या कांत ने याचिकाकर्ता के वकील से सख्त लहजे में कहा, “हर दिन आप नई-नई कहानी लेकर आते हैं। इस कहानी का आधार क्या है? बहुत खूबसूरती से बनाई गई कहानी! कोई सबूत तो दिखाइए।” कोर्ट ने पूछा कि क्या कोई वीडियो या गवाह है जो इन दावों को साबित कर सके। याचिकाकर्ता की तरफ से सीनियर वकील कॉलिन गोंसाल्वेस ने बताया कि दिल्ली में मौजूद याचिकाकर्ताओं को फोन कॉल से यह खबर मिली। उन्होंने कहा कि म्यांमार के तट से टेप रिकॉर्डिंग मौजूद है और सरकार इसकी जाँच कर सकती है। लेकिन जस्टिस कांत ने सवाल किया कि दिल्ली में बैठा याचिकाकर्ता अंडमान की घटना को कैसे सच साबित कर सकता है।

कोर्ट ने इस याचिका को 31 जुलाई 2025 को सुनवाई के लिए एक दूसरे रोहिंग्या मामले के साथ जोड़ दिया, जो तीन जजों की बेंच के सामने है। कोर्ट ने फौरन सुनवाई और निर्वासन रोकने की याचिकाकर्ता की माँग को खारिज कर दिया। गोंसाल्वेस ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (UN-OHCHR) की एक रिपोर्ट का जिक्र किया, जिसमें इस मामले की जांच शुरू होने की बात थी। इस पर जस्टिस कांत ने कहा कि वे इस रिपोर्ट पर तीन जजों की बेंच में बात करेंगे और याचिकाकर्ता को यह रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने को कहा। उन्होंने आगे कहा, “बाहर बैठे लोग हमारे देश की संप्रभुता को चुनौती नहीं दे सकते।”

जस्टिस कांत ने यह भी बताया कि 8 मई को तीन जजों की बेंच ने ऐसी ही एक याचिका में निर्वासन (डिपोर्टिंग) रोकने से मना कर दिया था। उस सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि अगर रोहिंग्याओं को भारत में रहने का हक नहीं है, तो उन्हें कानून के मुताबिक निर्वासित किया जाएगा। कोर्ट ने याचिकाकर्ता के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब देश मुश्किल वक्त से गुजर रहा है, तब ऐसी ‘काल्पनिक कहानियाँ’ सामने लाई जा रही हैं। गोंसाल्वेस ने कोर्ट से रोहिंग्याओं के मानवाधिकारों की रक्षा की गुहार लगाई और बताया कि देश में 8000 रोहिंग्या UNHCR कार्ड के साथ मौजूद हैं।

याचिका में दावा था कि दिल्ली पुलिस ने बायोमेट्रिक डेटा लेने के बहाने रोहिंग्याओं को हिरासत में लिया, उन्हें बसों और वैन में ले जाया गया, फिर पोर्ट ब्लेयर भेजकर नौसेना के जहाजों पर हाथ-पैर बाँधकर समुद्र में छोड़ दिया गया। याचिकाकर्ताओं ने माँग की कि निर्वासित लोगों को वापस भारत लाया जाए, उन्हें रिहा किया जाए और आगे से UNHCR कार्ड वालों को गिरफ्तार न किया जाए।

इस्लामी आतंकियों की तरफ से पाकिस्तानी हीरो-हिरोइन करते रहे बैटिंग, पर भारतीय सेना के साथ खड़ा नहीं हो पाया बॉलीवुड: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर मौन रहे इन पतितों का इलाज क्या है?

जम्मू कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले में 26 हिंदुओं को मार दिया गया। मरने से पहले उनका नाम पूछा गया, प्रमाण-पत्र माँगा गया और यहाँ तक कि कपड़े उतार कर इसकी पुष्टि भी की गई। लेकिन क्या आपने इस्लामी आतंक के विरोध में बॉलीवुड के ‘तख्ती गैंग’ की आवाज सुनी?

पहलगाम हमलों में धर्म पूछने तक ही भयावता सीमित नहीं रही। इस प्रक्रिया के बाद महिलाओं के सामने ही उनके सुहाग और घर के पुरुषों को माथे पर गोली मारी गई। इस सदमे से उबर पाना शायद उन महिलाओं के लिए कभी संभव नहीं हो पाएगा। इस भावना को समझ पाना भी हर किसी के बस की बात नहीं है। फिर भी उनके संवेदना पर सहानुभूति भरे शब्दों का मरहम तो लगाया ही जा सकता है। लेकिन बॉलीवुड के ज्यादातर हस्तियों ने इसकी जरूरत नहीं समझी।

कभी साथ खड़ा होता था बॉलीवुड

अतीत में ऐसे मौकों पर हमने बॉलीवुड की बड़ी हस्तियों की आवाज सुनी है। आपातकाल के दौर में जब मीडिया की आवाज कुचलने की कोशिश हुई थी, तब भी बॉलीवुड में वैसी चुप्पी नहीं देखी गई थी, जैसा ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देखने को मिला।

1948 में जब पाकिस्तान ने कश्मीर में कबायली हमले का नाम लेकर भारत पर आक्रमण किया, उस समय प्रसिद्धि के चरम पर रहे मुकेश, राज कपूर, आइएस जौहर, गीता बाली, नर्गिस, कामिनी कौशल समेत कई सितारों ने युद्ध में भारत का पलड़ा मजबूत रखने के लिए कई लाख रुपए जुटाए।

इसके बाद 1962 और 1965 के युद्ध में भी किशोर कुमार, सुनील दत्त, नर्गिस, लता मंगेश्कर, वहीदा रहमान आदि मोर्चे तक पहुँचे और भारतीय जवानों का मनोबल बढ़ाया और धन जमा किया।

1971 में हुए युद्ध में प्राण, किशोर कुमार, शम्मी कपूर, लता मंगेश्कर, वहीदा रहमान, कल्याणजी-आनंदजी और नर्गिस जैसे सितारों ने बांग्लादेश सहायता समिति बनाई। 1999 के कारगिल युद्ध में तो बॉलीवुड के सितारों में ऐसा आक्रोश था कि जवानों का साथ देने के लिए नाना पाटेकर मोर्चे तक पर चले गए थे।

कारगिल के बाद भी पाकिस्तान लगातार अपनी औकात दिखाता ही रहता है। कभी 2016 में उरी तो कभी 2019 में पुलवामा में जवानों को बेखौफ होकर मारना, 26/11 के मुंबई हमले करना या जून 2024 में वैष्णो देवी जा रही बस को निशाना बनाना, आतंकियों ने हमारे खून को पानी की तरह बहाया।

इस तरह के कई घर उजाड़ दिए, कितने ही बच्चों को अनाथ कर दिया। लेकिन देश में हुई ज्यादातर घटनाओं पर कुछ सितारों को छोड़कर बाकी ने चुप्पी साधने में बेहतरी समझी।

दुश्मन देश के अभिनेता से लें सीख

अब एक बार फिर वापस आते हैं अपने मुद्दे पर। पहलगाम आतंकी हमले हुए। कई लोग घायल हुए। कुछ अपने परिवार को हमेशा के लिए छोड़ गए। इन सभी के लिए और देश के हित में बॉलीवुड के इक्का-दुक्का लोगों ने पोस्ट किया।

पूरी ‘खान आर्मी’, ‘कपूर खानदान’, भट्ट कैंप समेत अन्य बड़े नामों ने इससे दूरी बनाई और बस अपने काम से काम रखा। वैसे आपको याद दिला दूँ कि ये वही बड़े-बड़े नाम हैं जिन्होंने कठुआ मामले में तख्ती लेकर फोटो खिंचाई थी। उस समय उन्हें खुद को हिंदू होने पर शर्म आ रही थी।

बॉलीवुड के कलाकारों को जहां एक ओर इतना समय नहीं मिल पाया कि वह देश के लिए दो लाइन ही लिख दें। वहीं दूसरी ओर, पहलगाम हमले की जवाब में जब भारत ने एक्शन लिया तो पाकिस्तान के अधिकतर बड़े-बड़े नाम अपने मुल्क के हक में खड़े नजर आए।

उनमें से कइयों ने तो बॉलीवुड में कई फिल्मों में काम भी किया है। ‘सनम तेरी कसम’ में प्रसिद्धि पा चुकी पाकिस्तानी अभिनेत्री मावरा होकेन ने तो भारत को ‘कायर’ तक की उपाधि से नवाज दिया। फवाद खान, हानिया आमिर, माहिरा खान जैसे कई नाम इनमें शामिल हैं। खास बात तो यह है कि उनके बड़ी संख्या में भारत में भी प्रशंसक हैं।

बॉलीवुड की नकली देशभक्ति

देशभक्ति को लेकर भारतीय अभिनेता अक्सर तब जागते हैं जब उनकी कोई फिल्म रिलीज होने वाली हो या फिर इससे उनका कोई निजी हित जुड़ा हुआ हो। ताजा उदाहरण आमिर खान हैं जिनकी फिल्म ‘सितारे जमीन पर’ सिनेमाघर में रिलीज होने वाली है। पहलगाम हमले से लेकर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ तक की पूरी प्रक्रिया के दौरान आमिर ने चुप्पी बनाए रखी। लेकिन, फिल्म प्रमोशन से ठीक एक दिन पहले उनकी टीम ने प्रधानमंत्री के पक्ष में कसीदे पढ़ने शुरू कर दिए।

इसी तरह तुषार कपूर भी ‘कंपकंपी’ के प्रमोशन के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस में पहुँचे। यहाँ उनसे पाकिस्तान का साथ देने वाले देश तुर्की के बॉयकॉट पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने इससे किनारा कर लिया। हालाँकि वो ये कहना नहीं भूले कि वो ‘देश’ के साथ हैं।

बिन बोले भी कुछ लोग देश के हक में हैं

हालाँकि इन अभिनेताओं से परे बॉलीवुड में कुछ ऐसे लोग भी हैं जो बिना कुछ कहे देश का साथ देने में पीछे नहीं रहते। भारत के लिए अनाप-शनाप लिखने वाली मावरा को बॉलीवुड में बन रही ‘सनम तेरी कसम -2’ से मेकर्स ने निकाल फेंका। यहाँ तक कह डाला कि मावरा को एक भी रुपए नहीं दिए जाएंगे। फिल्म के अभिनेता हर्षवर्धन राणे ने भी भारत के हक में बात की।

इसके अलावा फिल्म कपूर एंड संस के गाने ‘बुद्धू सा मन’ के पोस्टर से Spotify app ने फवाद खान को फोटोशॉप कर हटा दिया। जबकि फवाद ने उस फिल्म में मुख्य भूमिका निभाई थी। इसी तरह ‘रईस’ फिल्म के गाने जालिमा को पाकिस्तानी अभिनेत्री माहिरा खान पर शूट किया गया है। लेकिन गाने के पोस्टर से उन्हें गायब कर दिया गया है।

निष्कर्ष

बॉलीवुड में अभिनेताओं ने एक ट्रेंड चला लिया है, जिसमें हकीकत हो या फिर फिल्में- अभिनेताओं ने हिंदुओं का मजाक उड़ाना, उनके प्रतीकों पर तंज कसना, उनकी मान्यताओं पर सवाल खड़े करना, उनका सबसे पसंदीदा शौक बन गया है।

हालाँकि जब भी मुस्लिमों की बात होती है तो पूरा बॉलीवुड ‘पीड़ित’ की तरह व्यवहार करने लगता है। फिर चाहे वह सिनेमा बनाएँ या फिर उनके निजी जीवन हो, इनका दोगलापन बाहर आ जाता है और हर संभव कोशिश में यह लग जाते हैं कि किस तरह हिंदुओं को अपमानित करें और मुस्लिम संप्रदाय की आन बान शान को मजबूती से दिखा सकें।

समय के साथ आम लोगों को भी ये समझ में आने लगा है कि बॉलीवुड में प्रसिद्धि और प्रशंसकों का प्यार पाने वाले ये नाम सिर्फ अपने मतलब के लिए ही जीते हैं। इससे परे फिर चाहे आस पास के लोग हों, उनका समाज हो या देश हो, इन लोगों को कोई मतलब नहीं होता।

इसी के चलते अब सोशल मीडिया का सहारा लेकर लोग इन अभिनेताओं और उनकी फिल्मों का बॉयकॉट का हैशटैग और उन्हें ट्रोल कर नींद से जगाने काम करने लगे हैं। लेकिन हमने कई मौकों पर देखा है कि आम लोगों की यह चेतना कुछ दिनों की ही होती है। इसलिए इनके धंधे पर कुछ खास असर नहीं पड़ता है।

ऐसे में यह आवश्यक है कि बॉलीवुड की यह चुप्पी हमें हर उस मौके पर कचोटे जब भी हमें इन सितारों में सेलिब्रिटी और इनके सिनेमा में मनोरंजन दिखता है।

‘द वायर’ को भोपाल के ‘मुस्लिम गैंग’ की करतूतें उजागर होने से दिक्कत, ‘सवाब’ के लिए हिंदू लड़कियों से रेप को भूल ‘मीडिया एथिक्स’ का बजा रहा झुनझुना

भोपाल में मुस्लिमों लड़कों ने एक गैंग बनाया। इस गैंग ने एक-एक कर कई हिन्दू लड़कियों को फँसाया, उनका रेप किया, वीडियो बनाया। यहाँ तक कि उनके वीडियो पोर्न साइट्स पर बेचने का प्रयास भी किया। मुस्लिम लड़के ने पूछताछ में बताया कि यह सब ‘सवाब’ के लिए किया जाता है। इसको ज्यों का त्यों मीडिया ने लिख दिया। अब इससे प्रोपेगेंडा पोर्टल ‘द वायर’ को दिक्कत हो गई। द वायर को इससे समस्या है कि जिन मुस्लिमों ने यह घृणित अपराध ‘सवाब’ के लिए किया, उनकी सच्चाई क्यों छापी गई।

द वायर में हुनेज़ा खान ने 16 मई, 2025 को एक लेख लिखा। इस लेख में खान ने दावा किया कि भोपाल के इस रेप मामले का मीडिया ट्रायल किया है। लड़कियों की भयावह आपबीती सुन कर बनाई गई इन खबरों से ‘मजहबी नफरत’ पैदा होती है, यह वायर ने लिखा। मुस्लिम लड़कों ने भोपाल में हिन्दू लड़कियों को गाँजा पिलाकर उनका रेप किया था, उनके वीडियो बनाए थे, सिगरेट से जलाते भी थे। यह बातें जब मीडिया संस्थानों ने बिना लागलपेट के कह दीं, तो वायर को मिर्ची लग गई। उसे यह बातें व्हाट्सएप फॉरवर्ड जैसी लगीं।

हिन्दू बच्चियों की पीड़ा वायर को व्हाट्सएप फॉरवर्ड जैसी लगती है। वायर इस घटना को हिन्दू लड़कियों के खिलाफ किए गए अपराध नहीं बल्कि ‘कथित’ तौर पर ‘कॉलेज की लड़कियों’ के साथ हुई एक घटना बताता है। यानी एक तरफ तो वह मीडिया संस्थानों पर इसलिए गुस्सा है कि उन्होंने इन मुस्लिमों की सच्चाई बताओ बताई और लोगों को जागरूक किया वहीं दूसरी तरफ वह इस पूरे अपराध को ही टोन डाउन कर देता है और सच्चाई को करीने से छुपा लेता है।

वायर कहता है कि इस तरह की रिपोर्टिंग के चलते मीडिया के ‘एथिक्स’ यानी आचार में कमी आई है। यानी अगर मीडिया हिन्दुओं की पीड़ा दिखाने लगे तो उसका एथिक्स खत्म हो जाता है। याद रखिए कि वायर वही संस्थान है जिसने भाजपा के खिलाफ एक हिट स्टोरी की थी। बाद में उसे इसे माफ़ी माँगते हुए हटाना पड़ा था। उसके साथ यह एक बार नहीं हुआ, बल्कि बार-बार उसने माफी माँगी है। उसके यहाँ अपूर्वानंद जैसे लोग लिखते हैं, जिन पर दिल्ली दंगों में शामिल होने का आरोप है।

यही वायर ‘एथिक्स’ की बात कर रहा है। यह वैसी ही बात हुई जैसे कोई डकैत इस बात की आलोचना करे कि हिंसा क्यों बुरी चीज है। वायर इसी खबर में पूरा फोकस इस बात पर शिफ्ट करना चाहता है कि यह अपराध असल में मुस्लिम लड़कों ने अपनी जिहादी मानसिकता के चलते नहीं बल्कि ‘पितृसत्ता’ के चलते किए हैं। वायर की यह मुस्लिम अपराधियों को बचाने की बेशर्मी कोई आश्चर्य की बात नहीं है। वह युद्ध काल में तक भारत विरोधी प्रोपेगेंडा को हवा देता रहा है, हिन्दुओं के खिलाफ अपराध उसके लिए तो छोटी बात हैं।

जिस ‘लव जिहाद’ के हजारों मामले सामने आ चुके हैं, जिसकी शिकार हिन्दू ही नहीं ईसाई लड़कियां तक रही हैं, वह वायर को गलत लगता है। वह जिहाद का असल मतलब बताता है। असल में वायर को समस्या इस बात से नहीं है कि मीडिया के कोई स्टैण्डर्ड गिर रहे हैं, या फिर मीडिया चीजों का हौव्वा खड़ा कर रही है। उसे पीड़ा इस बात की है कि मुस्लिमों का नाम और उनके मिशन को मीडिया ने साफ़ तौर क्यों नहीं बताया।

वायर वे स्वर्णिम दिन वापस चाहता है, जब मुस्लिम आरोपित होने पर ‘मैन’, ‘शख्स’ और ‘समुदाय विशेष’ जैसे शब्द लिख कर करीने से उनका अपराध छुपा लिया जाता था। जब हिन्दू को आक्रामक दिखाया जाता था। वह वे दिन वापस चाहता है जब दंगों में मारे जाने के बाद भी हिन्दू ही अपराधी होते थे। मीडिया के स्टैण्डर्ड गिरने से अगर उसे मतलब होता तो सबसे पहले रोज झूठ का कारोबार करने वाला यह संस्थान खुद ही अपना शटर गिराता। उसकी पीड़ा दूसरी है।

भोपाल के मामले में मुस्लिम गैंग के सरगना फरहान ने पुलिस पूछताछ में बताया था कि उसे हिन्दू लड़कियों का रेप करने, उन्हें फँसाने और वीडियो के बहाने धमकाने का कोई भी पछतावा नहीं है। उसने पुलिस को बताया था कि यह इस्लाम के हिसाब से सवाब का काम है। फरहान ने पुलिस को यह भी बताया है वह हिन्दू लड़कियों का जीवन बर्बाद करना चाहते थे और इस काम को जिहाद मानते थे, इसलिए उन्हें ही निशाना बनाते थे। उसे इस बात पर गर्व है।

इस गैंग में शामिल लड़के एक दूसरे का वीडियो रेप करते हुए बनाते थे। गैंग में शामिल लड़कों के नाम फरहान, अबरार, नबील, साद और अली समेत तमाम थे। इनमें से कोई रेप करने के लिए कमरा दिलाता था तो कोई गांजा लाता था। कोई सलाह देता था कि अगर कोई हिन्दू लड़की रेप से मना करने लगे तो उसका वीडियो बेच दो। डांस एकेडमी, कॉलेज, ऑफिस समेत तमाम ऐसी जगहें थीं जहाँ से इन हिन्दू लडकियों को निशाना बनाया जाता था। लेकिन वायर के लिए यह सब सच बताना ‘घृणा’ का काम है।

वायर को अब यह दर्द होता रहेगा, क्योंकि समाज में पिछले 11 वर्षों में जो बदलाव आया है, उसने हिन्दुओं को अपनी पीड़ा व्यक्त करने के लिए मजबूत किया है।

जिस अब्दुल के परिवार को 1 लाख देंगे राहुल गाँधी, वह तालाब पर नहाने आई ST महिला का करना चाहता था रेप: ग्रामीणों की पिटाई में मौत, झारखंड सरकार पैसा-नौकरी-घर सब देगी

झारखंड के बोकारो जिले में पुलिस को सूचना मिली की एक व्यक्ति जिसका नाम अब्दुल है, उसे कुछ लोग बंधक बनाकर पीट रहे हैं। मौके पर पहुँची पुलिस ने युवक को लोगों से छुड़ाया और उसे अस्पताल पहुँचा, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। अब्दुल का पूरा नाम अब्दुल कलाम था और उसकी उम्र 22 साल थी। आरोप है कि अब्दुल ने तालाब पर नहाने गई 27 साल की एसटी महिला को दबोच लिया और उसके साथ रेप की कोशिश की। जिसके बाद इकट्ठा हुए ग्रामीणों ने उसे बंधक बना लिया और उसकी पिटाई कर दी। अब ये पूरा मामला मॉब लिंचिंग का बताया जा रहा है और अब्दुल के लिए सोशल मीडिया पर न्याय की माँग भी की जा रही है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये वारदात गुरुवार (8 मई 2025) की है, जो पेंक नरेनपुर थाना इलाके में घटी। जब सटरिंग का काम करने वाला 22 साल के अब्दुल कलाम काम के सिलसिले में बोकारो ज़िले के पेंक नारायणपुर थाना क्षेत्र के कडरूखुट्ठा गाँव पहुँचा था। गाँव के ही महावीर मुर्मू की पत्नी तालाब में नहा रही थी। तभी अब्दुल वहाँ पहुँचा और महिला से छेड़छाड़ शुरू कर दी। आरोप है कि उसने दुष्कर्म की भी कोशिश की।

ऑपइंडिया के पास इस मामले की एफआईआर कॉपी मौजूद है। एफआईआर के मुताबिक, अब्दुल ने महिला को न सिर्फ पीछे से कस कर पकड़ा, बल्कि उसके स्तन भी दबोच लिए। उसने महिला को पटक दिया और रेप की कोशिश की।

महिला ने अब्दुल का हाथ काट लिया और फिर वो चिल्लाने लगी। जब तक मौके पर लोग पहुँचते, अब्दुल फरार हो गया। हालाँकि महिला के शोर मचाने पर पहुँचे लोगों और परिजनों ने उसे दौड़ाकर पकड़ लिया और पेड़ से बाँध दिया। कुछ लोगों ने उसको थप्पड़ भी जड़ें। इसके बाद लोगों ने उसकी पहचान की जानकारी ली, तो पता चला कि वो पेंच गाँव का ही अब्दुल कलाम है। इसके बाद पुलिस को बुलाकर उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया।

हालाँकि मीडिया रिपोर्ट्स और अब्दुल के चाचा की ओऱ से दर्ज कराई गई एफआईआर लिखा है कि लोगों की पिटाई से अब्दुल घायल हो गया। जब पुलिस अब्दुल को बोकारो थर्मल हॉस्पिटल लेकर अस्पताल पहुँची, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। इस घटना को मॉब लिंचिंग यानी भीड़ द्वारा हत्या का नाम दिया गया।

अब्दुल के चाचा मो. कलीमुद्दीन ने FIR में दावा किया कि अब्दुल मानसिक रूप से बीमार था। उसका राँची और हजारीबाग में इलाज भी चला था। चाचा का कहना है कि अब्दुल कोई अपराधी नहीं था, और अगर उसने कुछ गलत किया भी, तो उसे कानून को सौंपना चाहिए था, न कि भीड़ को उसकी जान ले लेनी चाहिए थी। अब्दुल की अम्मी रेहाना खातून का रो-रोकर बुरा हाल है। वो कहती हैं कि अब्दुल उनका इकलौता सहारा था। उसके पिता कयूम अंसारी पहले ही गुजर चुके हैं, और अब वो पूरी तरह बेसहारा हो गई हैं।

अब्दुल के चाचा की शिकायत पर मॉब लिंचिंग का केस दर्ज कर रुपण माँझी, बहाराम माँझी, सुखलाल माँझी और बालेश्वर हाँसदा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। बेरमो के एसडीएम मुकेश मछुआ ने बताया कि मॉब लिंचिंग के तहत अब्दुल के परिवार को सरकार की तरफ से 4 लाख रुपये का मुआवजा, एक आवास और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी। लेकिन अब्दुल के परिवार ने 4 लाख के मुआवजे को लेने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि उन्हें पैसा नहीं, इंसाफ चाहिए।

रेप की कोशिश करने वाले अब्दुल के पक्ष में उतरी झारखंड की हेमंत सरकार

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार ने अब्दुल के परिवार को 1 लाख रुपये की अतिरिक्त मदद देने का ऐलान किया। कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने भी 1 लाख रुपये की सहायता देने की बात कही। इसके अलावा, सिद्दिकी समुदाय ने अब्दुल की अम्मी को 51 हजार रुपये की मदद दी।

झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री और कॉन्ग्रेस विधायक इरफान अंसारी खुद अब्दुल के घर गए और अब्दुल की अम्मू रेहाना खातून से मुलाकात की। इरफान अंसारी ने वादा किया कि दोषियों को कड़ी सजा दी जाएगी। इरफान ने कहा, “हमारी सरकार इस मामले में गंभीर है। पीड़ित परिवार को हर तरह की मदद दी जाएगी।” डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो, बेरमो सर्किल इंस्पेक्टर नवल किशोर, और कई स्थानीय अधिकारी भी अब्दुल के परिवार से मिलने पहुँचे।

फोटो साभार: प्रभात खबर

कॉन्ग्रेस और इंडी गठबंधन ने इस घटना को सांप्रदायिक रंग देने की भरपूर कोशिश की। राहुल गाँधी द्वारा मुआवजे की घोषणा और स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी का अब्दुल के परिवार से मिलना इस बात का संकेत था कि वे इस घटना को अपने वोटबैंक को मजबूत करने के लिए इस्तेमाल करना चाहते थे। यह वही कॉन्ग्रेस है, जो आदिवासी समुदाय के अधिकारों की बात तो करती है, लेकिन जब बात उनकी बहन-बेटियों की इज्जत की आती है, तो चुप्पी साध लेती है।

सोशल मीडिया, खासकर X पर लोग हेमंत सरकार और राहुल गाँधी पर निशाना साध रहे हैं। लोगों का कहना है कि हेमंत सोरेन सरकार लोगों के टैक्स पेयर्स के पैसों को रेपिस्टों के परिवार को देने में खर्च कर रही है।

दूसरी तरफ, अब्दुल के समर्थक इसे मॉब लिंचिंग का मामला बता रहे हैं। वो कहते हैं कि अब्दुल को बिना सबूत के मार डाला गया।

अब्दुल के समाज के लोगों ने उसे मेहनती, मासूम, मानसिक रूप से कमजोर बताया गया। सदफ अफरीन जैसे लोगों ने इसे हिंदू-मुस्लिम का रंग देने की कोशिश की, यह कहकर कि अब्दुल को सिर्फ इसलिए मारा गया क्योंकि वो मुस्लिम था।

इस पूरे मामले में सबसे दर्दनाक बात यह है कि पीड़िता की आवाज को हर कोई दबाने में लगा है। वो महिला, जिसके साथ अब्दुल ने घिनौनी हरकत की, वो आज मानसिक और सामाजिक आघात से गुजर रही है। उसका परिवार डर और दबाव में जी रहा है। उनके समुदाय के लोग, जो उसकी इज्जत बचाने के लिए आगे आए, वो जेल में हैं। सवाल ये है कि एक तरफ अब्दुल के परिवार को तमाम मदद मिल रही है, लेकिन दूसरी तरफ पीड़िता और उसके परिवार को हेमंत सरकार क्या दे रही है? सिर्फ जेल और सजा?

पाकिस्तान के पास दिखाने को 1 लड़ाकू विमान तक नहीं, पर दावा भारत के 6 फाइटर प्लेन गिराने का: 7 ‘पत्रकार’ ने गढ़ा प्रोपेगेंडा, ब्लूमबर्ग-रायटर्स-NYT जैसे ‘मीडिया संस्थानों’ ने फैलाया

भारत ने 7 मई, 2025 को पाकिस्तान और POK के भीतर 9 जगह आतंकी ठिकानों को मिसाइल-ड्रोन से उड़ाया। इसके बाद पाकिस्तानियों ने भारत के सैन्य अड्डे निशाने पर लेने का प्रयास किया। इसमें वह विफल हुए। भारत का इस पूरी लड़ाई के दौरान कोई भी नुकसान नहीं हुआ। हालाँकि, पाकिस्तानियों ने इस दौरान खूब भारतीय प्रोपेगेंडा किया। उन्होंने दावा किया कि इस लड़ाई के दौरान भारतीय लड़ाकू विमान गिराए गए हैं। इस दावे को बड़ा करके दिखाने में ब्लूमबर्ग, रायटर्स और CNN जैसे संस्थानों ने साथ दिया।

पाकिस्तानी लगातार भारत के जेट गिराने का दावा करते रहे। उनके मंत्रियों से लेकर फौजी और सोशल मीडिया हैंडल्स तक ने यह दावा आगे बढ़ाया। यह दावा करने वालों ने बिना किसी लड़ाकू विमान का मलबा दिखाए और कोई फुटेज वगैरह दिखाए बिना ही भारत के खिलाफ खूब प्रोपेगेंडा किया। उन्होंने AI वाली इमेजेस दिखा कर भी झूठ फैलाया। इसी प्रोपेगेंडा को धार दी ग्लोबल मीडिया आउटलेट्स में काम करने वाले पाकिस्तानी मुस्लिम पत्रकारों ने, उन्होंने इसे ऐसे दिखाया कि पाकिस्तान के दावे एकदम सत्य हैं।

इसका सबसे पहला उदाहरण है अमेरिकी मीडिया संस्थान ब्लूमबर्ग। ब्लूमबर्ग ने अपनी पाकिस्तानी दावे के ऊपर ही पूरी खबर बना दी। उसके पाकिस्तानी पत्रकार कामरान हैदर ने खबर चलाई, ‘पाकिस्तान ने कहा कि उसने भारत के पाँच लड़ाकू विमान गिराए हैं।’ इस खबर के भीतर भी पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के दावे का सहारा लिया गया। ब्लूमबर्ग ने यह रिपोर्ट पक्षपाती ना लगे, इसके लिए इसमें एक भारतीय पत्रकार अनूप रॉय का नाम भी जोड़ दिया गया। यह तरकीब लगभग सभी मीडिया संस्थानों ने अपनाई।

पाकिस्तानी पत्रकार प्रोपेगेंडा भारत

इसी तरह रायटर्स के पत्रकार सईद शाह और इदरीस अली ने भी भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा को हवा दी। रायटर्स में उन्होंने खुले तौर पर दावा किया कि चीन में बने पाकिस्तानी फाइटर जेट ने भारत के दो लड़ाकू विमान गिराए हैं। इस खबर को बनाने के लिए उन्होंने किन्हीं अनजान दो अमेरिकी अधिकारीयों का हवाला दिया। उनका यह दावा सीजफायर होने के बाद भी पुष्ट नहीं हो पाया है। हालाँकि, लड़ाई के दौरान इसके जरिए पाकिस्तान ने खूब प्रोपेगेंडा किया।

पाकिस्तानी पत्रकार प्रोपेगेंडा भारत

इसी तरह भारत विरोधी अमेरिकी मीडिया संस्थान न्यूयॉर्क टाइम्स ने भी भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा किया। उसने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर के बाद खबर छापी कि भारत ने पाकिस्तान पर हमला तो किया है लेकिन संभवतः उसके लड़ाकू विमान मार गिराए गए हैं। NYT के लिए यह खबर सलमान मसूद और जिया उर रहमान ने लिखी। यह दोनों पत्रकार पाकिस्तान के हैं और NYT ने इनके दावे बिना पुष्ट किए ही भारत विरोधी खबर चला दी।

इसी तरह एक और अमेरिकी मीडिया संस्थान CNN ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद यही राह पकड़ी। उसने भी भारत के विमान गिरने वाली खबर चलाई। यह इनपुट देने वाली उसकी पत्रकार सोफिया सैफी थी। चौंकाने वाली बात यह थी कि इन पत्रकारों ने अपने पत्रकारिता धर्म को छोड़ कर पाकिस्तान का प्रोपेगेंडा चलाना चुना लेकिन इसे हवा इनके संस्थानों ने दी। यह वो संस्थान हैं जो आए दिन तथ्यों को लेकर ज्ञान बांचते हैं।

भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा चलाने की कवायद में संस्थान Nikkei Asia भी रहा। उसका पत्रकार अदनान आमिर लगातार भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा करता रहा है। आमिर इस्लामाबाद में बैठ कर पाक फ़ौज और उसके मंत्रियों का प्रोपेगेंडा चलाने में जुटा रहा। अदनान आमिर ने एक खबर में दावा कर दिया कि पाकिस्तान ने भारत के 5 फाइटर जेट गिराए हैं। इसने बताया कि चीनी विमान ने 3 राफेल और 1 MiG-29 और सुखोई-30 गिराए हैं।

भारत के खिलाफ चले इस प्रोपेगेंडा में एक समान रूप से पाकिस्तानी पत्रकारों ने फर्जी दावे किए और उन्हें विदेशी मीडिया संस्थानों ने हवा दी। जबकि असलियत यह है कि पाकिस्तान के रक्षा मंत्री से जब इसकी सच्चाई पूछी गई तो उन्होंने दावा कर दिया था कि यह तो सोशल मीडिया पर पड़ा है। इसको लेकर उनकी खूब फजीहत हुई थी। भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा करने में यह पाकिस्तानी पत्रकार और ग्लोबल मीडिया संस्थान पाकिस्तानी फ़ौज से भी आगे निकल गए।

इसी कड़ी में अल जजीरा ने दावा किया था कि भारत में राफेल उड़ाने वाली फाइटर पायलट शिवांगी सिंह पाकिस्तान के कब्जे में हैं। बाद में पाक फ़ौज ने ही यह दावा नकार दिया। पाकिस्तानी पत्रकारों ने भारत के खिलाफ यह खबरें चलाने के दौरान ना तथ्य परखे, ना कोई आधिकारिक सूचनाएँ ली और ना ही स्वयं सच्चाई जानने का प्रयास किया। उन्होंने सीधे तौर पर बस पाकिस्तान ने जो भी प्रोपेगेंडा किया, उसे ज्यों का त्यों छाप दिया।

यह कोई पहला मौक़ा नहीं है जब विदेशी मीडिया संस्थानों ने अपनी भारत घृणा खुल कर दिखाई हो। हर मौके पर वह भारत को लेकर प्रोपेगेंडा चलाते रहते हैं। कभी उनका निशाना भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी होते हैं तो कभी हिन्दू। जब पाकिस्तान के खिलाफ भारत युद्ध कर रहा था, तो उनका निशाना भारत बन गया।