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तालाब पर नहाती हिन्दू महिलाओं का वीडियो बनाने से रोका तो मुस्लिमों ने किया हमला, ‘अल्लाहू अकबर’ के लगाए नारे: ऑपइंडिया को पीड़ितों ने बताई आपबीती, गुजरात का मामला

गुजरात के तापी जिले में एक हिन्दू परिवार पर मुस्लिम भीड़ ने हमला किया। यह हमला कथित तौर पर एक जलाशय के पास नहा रहीं हिन्दू महिलाओं का वीडियो बनाने से रोकने पर हुआ। आरोप है कि मुस्लिम जलाशय के पास कपड़े बदल रहीं हिन्दू महिलाओं का वीडियो बनाना चाहते थे।

यह घटना तापी जिले के उच्छल के थुति गांव में हुई है। पीड़ित परिवार दलित है। आरोप है कि इसके बाद 15 मुसलमानों की भीड़ ने अस्पताल और सड़क पर इस परिवार को निशाना बनाया। इस मामले में उच्छल पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कर ली गई है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

शिकायत के अनुसार घटना रविवार (18 मई, 2025) को हुई। इस मामले में उच्छल पुलिस ने 15 ‘अज्ञात’ मुस्लिम समूहों के खिलाफ बीएनएस की धारा 115(2), 117(2), 189(2), 190, 191(2), 191(3) और जीपी एक्ट की धारा 135 के तहत मामला दर्ज किया है।

बाँध से लेकर अस्पताल तक बनाया निशाना

FIR में लगाए आरोपों के अनुसार, सूरत के किरण अस्पताल में ड्राइवर के रूप में काम करने वाले दलित व्यक्ति प्रताप सिंह चौहान अपने परिवार और पड़ोसियों के साथ बाइक और कार से उच्छल तालुका के थुती गाँव में उकाई बाँध जलाशय तक गए थे। उनके साथ महिलाएँ और बच्चे भी थे।

वे दोपहर में इसी के पास एक जलाशय में नहाने गए थे। शिकायत के अनुसार, नहाने के बाद महिलाओं में से एक बिस्तर की चादर के पीछे अपने कपड़े बदल रही थी, इसी बीच परिवार ने देखा कि कुछ मुस्लिम व्यक्ति महिला का वीडियो बना रहे थे।

FIR में बताया गया है कि इस पर ऑब्जेक्शन करने पर एक व्यक्ति पर मुस्लिम व्यक्तियों ने हमला किया। जब यह घटना सामने आई तो दलित परिवार के सभी सदस्य एकजुट हुए और उन्होंने मुस्लिम युवक से वीडियो बनाने से मना किया। इसके बाद आरोपितों ने परिवार के सदस्यों पर हमला कर दिया।

जब पुलिस ने अपराधियों में से एक के मोबाइल फोन की जाँच की तो उसमें कोई वीडियो नहीं मिला, लेकिन दूसरे ने उन्हें अपने फोन की जाँच नहीं करने दी। इसके बाद मुस्लिम लोग इलाके से बाहर चले गए।

इसके कुछ ही देर बाद, लगभग 4 बजे, 15 से 20 की मुस्लिम भीड़ हथियारों से लैस होकर वापस लौटी और सीधा हमला शुरू कर दिया। बताया गया है कि हमले के दौरान एक हिंदू गंभीर रूप से घायल हो गया और उसे सोनगढ़ अस्पताल ले जाया गया।

सोनगढ़ जाते समय मुस्लिम भीड़ के दो और लोग सड़क पर आ गए और उन्होंने गाड़ी को घेर लिया। इसके बाद यह भीड़ उस अस्पताल ही पहुँच गई जहाँ यह दलित परिवार के सदस्य भर्ती थे। यहाँ मुस्लिमों पर हँगामा करने का आरोप है।

पुलिस पर भी लगाए आरोप

पीड़ित परिवार का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें वे अपने दर्दनाक अनुभव को बता रहे हैं। एक युवक ने बताया कि जब वह सोनगढ़ पुलिस के पास गया तो पुलिस ने कहा, “अच्छा हुआ तुम बच गए, वरना सोनगढ़ के मुसलमान तुम्हें मार देते।” इसके अलावा, वीडियो में किसी ने इस घटना की तुलना पहलगाम आतंकी हमले से की है।

वहीं एक महिला ने बताया कि जब वह कपड़े बदल रही थी, तो दो मुस्लिम पुरुष और एक मुस्लिम महिला ऊपर से उसका वीडियो बनाने लगे। जब परिवार ने उनसे प्रश्न किया तो वे नीचे आ गए और बहस करने लगे। इसके अलावा, एक अन्य व्यक्ति ने भी वीडियो में घटना को शेयर किया।

मुस्लिम भीड़ ने लगाए अल्लाहू अकबर क नारे: पीड़ित

ऑपइंडिया से बातचीत में प्रताप सिंह चौहान ने बताया कि मुस्लिम भीड़ ने अल्लाहू अकबर के नारे लगाते हुए उनके परिवार पर हमला किया। उन्होंने बताया कि इस हमले में महिलाएँ और बच्चे भी घायल हुए, इसके अलावा सोनगढ़ अस्पताल में मुस्लिमों का एक समूह इकट्ठा हुआ और धमकियाँ दीं।

उन्होंने आगे बताया कि सोनगढ़ पुलिस ने पहले इस मामले में आरोपितों की ही दर्ज शिकायत लिख लिया था। स्थानीय हिंदू संगठन के पदाधिकारी चंदन सिंह गोहिल ने ऑपइंडिया को बताया कि आरोपियों में से एक मुस्लिम व्यक्ति है जो स्थानीय पार्षद के तौर पर काम करता है।

उन्होंने यह भी बताया कि वह पहले भी कई अपराधों में शामिल रहा है और एक बार तो पुलिस ने उसका सार्वजनिक जुलूस भी निकाला था। उन्होंने बताया कि मुस्लिम भीड़ ने परिवार के खिलाफ झूठी शिकायत दर्ज कराई और पुलिस ने उसे स्वीकार भी कर लिया।

उन्होंने बताया कि अपराधी सोनगढ़ के दबंग हैं। उन्होंने बताया कि अभी दो महीने पहले ही एक आरोपित और उसके पिता को पुलिस ने जुलूस में घुमाया था। इसके अलावा, एक हत्या के मामले में उनकी भूमिका के बारे में भी आरोप लगाए गए थे। उन्होंने स्थानीय पुलिस की भी आलोचना की।

उन्होंने संकेत दिया कि एक पार्षद भी उस समूह का हिस्सा था जो लड़ाई-झगड़ा करने के लिए आया था। हिंदू नेता ने बताया दिया कि जब आरोपितों को मामला दर्ज करने के इरादे के बारे में पता चला, तो वे तुरंत शिकायत दर्ज कराने के लिए पुलिस स्टेशन गए और दावा किया कि दलित परिवार ने एक मुस्लिम महिला से छेड़छाड़ की है।

उन्होंने कहा, “इस शिकायत के पीछे कोई आधार नहीं है। असल हिंदू पुरुष अपनी पत्नियों, बच्चों और परिवारों के साथ मौजूद थे, तो वे इस तरह का कैसे काम कर सकते थे?” उन्होंने पुलिस पर मामले को निपटाने के इरादे से लगातार शिकायतें दर्ज करने का भी आरोप लगाया।

हिन्दू आदमी पर पुलिस बना रही दबाव

गोहिल ने बताया कि अधिकांश समय तक इस घटना पर किसी का ध्यान नहीं गया। हालाँकि, एक-दो दिन बाद एक हिंदू व्यक्ति ने पीड़ित परिवार का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया, जिससे गुजरात में इस घटना की चर्चा होने लगी। वीडियो बनाने वाला व्यक्ति सूरत का रहने वाला है।

गोहिल ने बताया कि सूरत के संबंधित क्षेत्र के पुलिस इंस्पेक्टर ने उन पर दबाव बनाना शुरू कर दिया, जिसके कारण फुटेज को डिलीट कर दिया गया। हालाँकि, यह पहले ही वायरल हो चुका था। इसके बाद यह विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल संज्ञान में आया।

सोशल मीडिया पर यह वीडियो खूब वायरल हो रहा है। अधिकारियों ने इस मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है और दोनों पक्षों से शिकायत भी मिली है। ऑपइंडिया से बातचीत में उच्छल थाने के पुलिस इंस्पेक्टर ने बताया कि घटना के बाद दंगा करने के आरोप में छह लोगों को पकड़ा गया है और उनके खिलाफ दो शिकायतें दर्ज की गई हैं।

गौरतलब है कि इस घटना को कई दिन बीत चुके हैं और वीडियो वायरल हुए दो दिन हो चुके हैं, लेकिन मामले के बारे में किसी भी मीडिया में कोई जानकारी सामने नहीं आई है। इसके पीछे दो संभावित कारण हो सकते हैं। एक तो यह कि मीडिया को आरोपित पार्षद का डर है, जिसका खासा प्रभाव है और दूसरा यह कि पुलिस खुद मामले को दबा रही है। सच क्या है, यह पता लगाना मुश्किल है। फिर भी यह तो स्पष्ट है कि घटना को छिपाने की कोशिशें की गई हैं और जारी हैं।

पीएम मोदी के खिलाफ जहर उगल New York के मेयर का चुनाव जीतना चाहता है जोहरान ममदानी, खुद को बताया ‘गुजराती मुस्लिम’: राम मंदिर के खिलाफ की थी रैली, हिन्दुओं ने किया विरोध

न्यूयॉर्क शहर के मेयर पद के उम्मीदवार और फिल्म निर्माता मीरा नायर के बेटे जोहर ममदानी को विरोध का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिकी सांसदों और भारतीय समुदाय के नेताओं ने मीरा नायर के बेटे ज़ोहरान ममदानी की आलोचना की है। दरअसल उन्होने पीएम मोदी को ‘वॉर क्रिमिनल’ कहा था। 15 मई को ‘न्यू मेयर न्यू मीडिया’ नाम के कार्यक्रम में उन्होने पीएम मोदी की इजरायल के पीएम नेतन्याहू से तुलना की थी।

2002 के गुजरात दंगों के लिए पीएम मोदी को दोषी ठहराते हुए उन्होंने कहा, “नरेंद्र मोदी ने गुजरात में मुस्लिम समुदाय का सामूहिक नरसंहार इस हद तक करने में मदद किया की कि हम यह भी नहीं मानते कि अब गुजराती मुसलमान बचे हैं। और जब मैं किसी को बताता हूँ कि मैं गुजराती मुसलमान हूँ, तो उन्हें यह जानकर झटका लगता है।”

भारतीय मुस्लिम मूल के ममदानी भारतीय हिंदू नेताओं, खासकर पीएम मोदी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने के लिए जाने जाते हैं। उन्होने 2020 में मोदी की पार्टी से जुड़े हिंदुओं को “फाँसीवादी” कहा और मोदी की निंदा न करने के लिए न्यूयॉर्क के अपने सहयोगी नेताओं जेनिफर राजकुमार और केविन थॉमस की आलोचना की। राजकुमार ने ममदानी पर पलटवार करते हुए “चरमपंथी और विभाजनकारी” कहते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी और मतदाताओं से “घृणा को अस्वीकार करने का आग्रह किया, चाहे वह वामपंथी हों या दक्षिणपंथी।”

एक पत्रकार ने ममदानी से हाल ही में पूछा कि अगर वह मेयर बनते हैं और पीएम मोदी न्यूयॉर्क में रैली करते हैं और संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की माँग करते हैं तो क्या वह पीएम मोदी के साथ मंच पर शामिल होंगे। इस पर उन्होने कहा कि वो पीएम मोदी के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने गुजरात 2002 के दंगों का हवाला दिया और कहा कि उनका परिवार भारत के गुजरात से आता है और उनका परिवार मुस्लिम है, वह एक मुस्लिम हैं।

इसके बाद उन्होंने दंगों के लिए पीएम मोदी को दोषी ठहराते हुए कहा, “नरेंद्र मोदी ने गुजरात में मुसलमानों के सामूहिक नरसंहार को इस हद तक अंजाम देने में मदद की कि अब हम यह भी नहीं मानते कि गुजराती मुसलमान हैं। और जब मैं किसी को बताता हूं कि मैं गुजराती मुसलमान हूँ, तो उन्हें यह जानकर झटका लगता है कि ऐसा भी हो सकता है। और यह वह व्यक्ति है जिसे हमें उसी तरह से देखना चाहिए जैसे हम बेंजामिन नेतन्याहू को देखते हैं। यह एक युद्ध अपराधी हैं।”

फिल्म निर्माता मीरा नायर के बेटे ममदानी का हिंदुओं को निशाना बनाने का इतिहास रहा है। उसने न्यूयॉर्क के 250,000 इंडो-अमेरिकन समुदाय के लोगों के भीतर चिंता पैदा की है। इनमें ज़्यादातर हिंदू हैं। जब अयोध्या में राम मंदिर बनाया जा रहा था, तो उन्होंने 2020 में इसके खिलाफ एक रैली का नेतृत्व किया था। जब वे रैली में बोल रहे थे, तो वहाँ हिंदुओं के खिलाफ़ अपमानजनक टिप्पणियाँ की जा रही थीं। रैली का आयोजन खालिस्तान समर्थकों ने किया था।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने दंगों में पीएम मोदी को पहले ही क्लीन चिट दे दी है और ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि वे दंगों की साजिश रचने में शामिल थे। उन्होंने गोधरा कांड को भी नजरअंदाज किया और ये नहीं बताया कि दंगे तब भड़के थे जब अयोध्या से लौट रहे 59 हिंदू कारसेवकों को गोधरा में मुस्लिम भीड़ ने जिंदा जला दिया था, इस मामले में कई मुस्लिम गुंडों को दोषी ठहराया गया था।

2011 की जनगणना के अनुसार गुजरात में मुस्लिम आबादी लगभग 10% थी, जो पिछले दशक में बढ़ी होगी। यह दावा करना कि गुजराती मुसलमान नहीं बचे हैं, एक बेतुका बयान है और न्यूयॉर्क में भारतीय उच्चायोग से मिलकर इसका विरोध किया जाना चाहिए।

सिख समुदाय के नेता और मानवाधिकार वकील जसप्रीत सिंह ने ममदानी की आलोचना करते हुए कहा, “हमारे शहर में नफरत के लिए कोई जगह नहीं है। हम सभी के लिए समानता, प्यार और सम्मान में विश्वास करते हैं। हम मानते हैं कि सभी एक ही ईश्वर की संतान हैं। लेकिन ज़ोहरान ने अपने मंच का इस्तेमाल हिंदू विरोधी बयानबाजी को बढ़ावा देने के लिए किया है। शब्द मायने रखते हैं और भारतीय समुदाय को एकजुट करने के बजाय, वह हमें धर्म के आधार पर विभाजित करना चाहते हैं। वह मुसलमानों और हिंदुओं को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा करना चाहते हैं। हिंदुओं को फाँसीवाद से जोड़ना और उनके खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करना बेहद आपत्तिजनक है।”

उन्होंने ममदानी पर हिंदू समुदाय को ‘अमानवीय’ कहने का आरोप लगाया और सवाल किया कि क्या वह न्यूयॉर्क सिटी की सेवा करने के योग्य हैं?

क्या राजदीप सरदेसाई को इंडिया टुडे ने नौकरी से निकाला, विदाई भी नहीं दी? सोशल मीडिया में लग रहे कयास, कहा था- पाकिस्तान को दे दो PoK

अंग्रेजी समाचार TV चैनल इंडिया टुडे से पत्रकार राजदीप सरदेसाई को निकाले जाने की खबरें सोशल मीडिया पर लगातार तैर रही हैं। सोशल मीडिया पर लोग एक कड़ी से दूसरी कड़ी जोड़ कर राजदीप की विदाई को लेकर चर्चाएँ कर रहे हैं।

राजदीप सरदेसाई को लेकर इन चर्चाओं को और भी बल तब मिला जब ABP न्यूज की पत्रकार मेघा प्रसाद ने एक्स (पहले ट्विटर) पर एक ट्वीट किया। उन्होंने लिखा, “मीडिया के एक बड़े और ताकतवर व्यक्ति को बाहर निकाल दिया गया… आपके कर्म लौट कर आपको वापस मिलते हैं।”

इस ट्वीट में मेघा ने किसी का नाम नहीं लिया लेकिन लोग तुरंत ही कयास लगाने लगे। कई लोगों ने दावा किया कि यह इशारा इंडिया टुडे के एंकर राजदीप सरदेसाई की तरफ है, जिन्होंने हाल ही में PoK पर एक विवादित टिप्पणी की थी।

इस आग में घी डालने का काम एक्स पर की गई कई और पोस्टों ने किया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि सरदेसाई को उनके विवादास्पद रवैये और हितों के टकराव के कारण चैनल से बिना कोई सम्मानजनक विदाई दिए हटा दिया गया है।

PoK पाकिस्तान को सौंपने की दी थी सलाह

इंडिया टुडे के डिबेट शो में उन्होंने कहा कि भारत को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) पाकिस्तान को सौंप देना चाहिए और नियंत्रण रेखा (एलओसी) को अंतरराष्ट्रीय सीमा मान लेना चाहिए। सरदेसाई ने इसे कश्मीर समस्या का ‘स्थायी समाधान’ बताया था।

राजदीप ने कहा कि आतंकवाद और जम्मू-कश्मीर के आंतरिक मुद्दों पर चर्चा जरूरी है, लेकिन पीओके वापस लेना संभव नहीं। इसको लेकर राजदीप को काफी विरोध झेलना पडा था और उनकी सोशल मीडिया पर आलोचना हुई थी।

पहले भी फैला चुके झूठ

यह पहली बार नहीं है जब राजदीप सरदेसाई से जुड़ा कोई विवाद सामने आया हो। इससे पहले जनवरी 2021 में, किसान प्रदर्शन के दौरान गलत सूचना फैलाने के कारण उन्हें इंडिया टुडे ने दो सप्ताह के लिए ऑफ एयर कर दिया था और एक महीने का वेतन काट लिया था।

सरदेसाई ने ट्वीट किया था कि गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर रैली के दौरान मरने वाले एक प्रदर्शनकारी की मौत पुलिस की गोलीबारी में हुई थी। बाद में पुष्टि हुई थी कि उसकी मौत ट्रैक्टर के पलटने से हुई थी। इसके बाद इंडिया टुडे को उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ा था।

अब आगे सरदेसाई के साथ क्या होगा?

अगर सरदेसाई को बाहर निकाले जाने की बात आगर सच साबित होती है तो वह ऐसे ही लोगों की एक लम्बी लाइन में शामिल हो जाएँगे। इससे पहले कई को हस्तियों पत्रकारिता की आड़ में दुष्प्रचार करने के लिए बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है।

इसके बाद वह रवीश कुमार, अभिसार शर्मा, अजीत अंजुम की तरह पीड़ित होने का नाटक कर सकते हैं और दावा कर सकते हैं कि उन्हें ‘असहज सवाल’ पूछने के लिए बर्खास्त कर दिया गया था और बस यूट्यूब पर चले जाएँ। यहाँ वह अपना प्रोपेगेंडा खुल कर चला सकते हैं।

नोट: यह आर्टिकल सोशल मीडिया में चल रही अपुष्ट कनफुस्कियों और कयासों पर आधारित है। खबर लिखे जाने तक इंडिया टुडे या राजदीप सरदेसाई की तरफ से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई थी।

जो सतनाम करता था चरस की तस्करी, सबसे पहले उसे बनाया ईसाई… फिर 3000+ सिखों का धर्मांतरण: पीलीभीत में घरों से हटाए गए क्रॉस निशान

पीलीभीत में 3000 से अधिक सिखों को ईसाई बनाने का मामला उजागर होने के बाद कार्रवाई शुरू हो गई है। घरों पर लगे क्रॉस के निशान हटवाए जा रहे हैं। इससे पहले करीब 500 सिखों ने घर वापसी की थी। जिला प्रशासन ने धर्मांतरण की इस साजिश के जाँच के भी आदेश दिए हैं।

नेपाल से सटे उत्तर प्रदेश पीलीभीत जिले में करीब 22 हजार सिख रहते हैं। सिख संगठनों की शिकायत के बाद आशंका जताई जा रही है कि धर्मांतरण के लिए विदेशों से फंडिंग हुई है। रिपोर्टों के अनुसार सिखों का धर्मांतरण करने के लिए पादरी नेपाल से आए थे। साथ ही धर्मांतरित लोगों के घरों में दक्षिण कोरिया के कैलेंडर मिले हैं। उल्लेखनीय है कि पीलीभीत के ग्रामीण इलाके नेपाल की खुली सीमा से सटे हैं।

दैनिक भास्कर ने अपनी ग्राउंड रिपोर्ट में बताया है सबसे पहले जिस सिख को ईसाई बनाया गया था, उसका नाम सतनाम सिंह है। वह चरस की तस्करी करता था। टाटरगंज गाँव के रहले वाले सतननाम सिंह को पास्टर बनाया गया। उसने लालच देकर आसपास के गाँवों में ईसाई धर्मांतरण के इस रैकेट को आगे बढ़ाया।

पीलीभीत के बेल्हा गाँव के गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सचिव परमजीत सिंह के हवाले से इस रिपोर्ट में बताया गया है कि करीब 150 घरों पर क्रॉस के निशान बने हुए हैं। कुछ घरों में प्रार्थना गतिविधियाँ भी हो रही है। उन्होंने बताया है कि शिकायत के बाद प्रशासन ने घरों के बाहर लगे क्रॉस निशान हटवाने का अभियान शुरू किया है। साथ ही करीब 100 घरों में विशेष तरह के कैलेंडर मिलने की बात कहते हुए धर्मांतरण के लिए दक्षिण कोरिया से पैसा आने की आशंका जताई है।

बेल्हा गाँव के गुरुद्वारे में 9 परिवारों की एक सूची भी लगाई है। इन परिवारों का सामाजिक बहिष्कार करते हुए अपने नाम से सिंह हटाने को कहा गया है। स्थानीय गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष गुरदयाल सिंह के अनुसार 2002 में विदेशी पादरियों ने टाटरगंज के 2 लोगों का लालच देकर धर्मांतरण कराया था। इसके बाद से यही 2 लोग पूरा सिंडिकेट चला रहे हैं।

रिपोर्ट में बताया गया है कि ईसाई धर्मांतरण को लेकर पहली FIR 13 मई 2025 को पीलीभीत के हजारा थाने में दर्ज कराई गई थी। टाटरगंज की मनजीत कौर ने 2 लाख रुपए और मकान का लालच देकर ईसाई बनाने का दबाव डालने का आरोप लगाया है। इस एफआईआर में भी सतनाम सिंह का नाम है।

गौरतलब है कि 3000 से अधिक सिखों को ईसाई बनाने का मामला ऑल इंडिया सिख पंजाबी वेलफेयर काउंसिल ने उजागर किया था। उसके बाद अन्य सिख संगठन और प्रशासन हरकत में आया। पिछले दिनों करीब 500 सिखों की घर वापसी भी कराई गई थी। सीमा से सटे इलाकों में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) जागरुकता अभियान भी चला रही है।

क्या है ‘कावेरी इंजन’, क्यों इस तकनीक में भारत को आत्मनिर्भर बनाने की हो रही माँग: क्या हैं इसके फायदे, कहाँ अटका है काम… जानिए सब कुछ

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने रक्षा क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बड़े प्रयास किए हैं। इसी के चलते अब भारत हजारों करोड़ का रक्षा सामान विदेशों को बेच तक रहा है। भारत ने इसी बीच अपना स्वदेशी जेट एयरक्राफ्ट तेजस भी बनाया है।

कुछ ऐसी तकनीकें अभी भी है, जिनके लिए भारत विदेशों पर निर्भर है। लड़ाकू विमानों के इंजन ऐसी ही एक तकनीक है। भारत यह तकनीक हासिल करने के लिए ‘कावेरी’ इंजन बना रहा है। इसमें तेजी लाई जाए, इसके लिए अब लोग सोशल मीडिया पर Fund Kaveri Engine (फंड कावेरी इंजन) ट्रेंड चला रहे हैं।

यह सोशल मीडिया ट्रेंड सोमवार (26 मई, 2025) से चालू हुआ। इस दौरान नेटीजेंस ने मोदी सरकार से अपील की कि वह कावेरी इंजन के लिए और भी धनराशि मुहैया करवाएँ और जल्द से जल्द जेट इंजन के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर कर दें।

‘Zoomerjeet’ नाम के एक सोशल मीडिया हैंडल ने सबसे पहले इसकी शुरुआत की। नाम ना बताने वाले इस अकाउंट से सबसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हर ट्वीट के रिप्लाई में कावेरी इंजन को अधिक फंड देने की माँग की। यह काफी क्रिएटिव तरीके से किया गया।

प्रधानमंत्री के लगभग हर ट्वीट पर ऐसे रिप्लाई किए गए। 26 मई की शाम तक यह राष्ट्रीय स्तर का ट्रेंड बन गया और इसमें कई और लोग शामिल हो गए। अभय नाम के एक यूजर ने लिखा कि निर्मला जी (वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण) भले ही आप GST 18% की जगह 20% ले लो, लेकिन कावेरी के लिए फंड बढ़ाओ।

लोगों ने इसके लिए जल्द ही कई और क्रिएटिव तरीके निकाले और इस संबंध में पोस्टर बनाने भी चालू कर दिए। कई यूजर्स ने इसके लिए सोवियत स्टाइल वाले प्रोपेगेंडा पोस्टर बनाए और सरकार से माँग की कि जल्द कावेरी इंजन को फंड करके देश को आत्मनिर्भर बनाया जाए।

कई लोगों ने तो इसे भारत की सांस्कृतिक संप्रभुता से भी जोड़ दिया और उस तरह के पोस्टर बना कर फंडिंग की माँग की। एक यूजर ने तो कहा कि हमें इस इंजन के लिए क्राउडफंडिंग (जनता से पैसा इकट्ठा करना) की कोशिश करनी चाहिए।

इस मुहिम में रक्षा मामलों पर रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार शिव अरूर भी शामिल हो गए। उन्होंने अपने एक शो में भी इस संबंध में बात की।

क्या है कावेरी इंजन?

‘कावेरी’ उस इंजन प्रोग्राम का नाम है, जिसे डिफेन्स रिसर्च एंड डेवेलपमेंट आर्गेनाईजेशन (DRDO) भारत के लिए विकसित कर रहा है। DRDO की GTRE लैब इसे बना रही है। योजना है कि यह कावेरी इंजन आने वाले समय में हमारे स्वदेशी लड़ाकू विमानों में लगाया जाएगा। इस पर लम्बे समय से काम चल रहा है। कुछ तकनीकी सीमाओं और कभी कभार फंडिंग की कमी के चलते यह प्रोजेक्ट लटका हुआ है। सबसे पहले कल्पना की गई थी कि कावेरी इंजन को भारत के अपने लड़ाकू विमान LCA तेजस में लगाया जाएगा।

कावेरी इंजन के समय पर तैयार ना हो पाने और इसका प्रदर्शन आशानुरूप ना होने के चलते इसे LCA तेजस प्रोग्राम से अलग कर दिया गया था। इसके LCA तेजस में अमेरिकी कम्पनी जनरल इलेक्ट्रिक (GE) के बने F404 इंजन लगाए गए हैं। भारत अब बड़ी संख्या में तेजस विमान बना रहा है लेकिन अमेरिकी कम्पनी GE इंजन की डिलीवरी में देरी कर रही है। इसके चलते नए तेजस मार्क-1A विमानों का निर्माण धीमी गति से हो रहा है। इसका सीधा प्रभाव भारत की एयरफ़ोर्स पर पड़ रहा है, जो विमानों की कमी से जूझ रही है।

क्यों हुई कावेरी इंजन बनाने में देरी?

इसमें कोई संदेह नहीं है कि कावेरी इंजन एक महत्वपूर्ण परियोजना है और इसके बनने पर तकनीकी क्षमताओं में कई गुने की बढ़ोतरी होगी। हालाँकि, इसमें काफी देरी हुई है। इसके पीछे बड़ा कारण इंजन बनाने में होने वाले तकनीकी जटिलताएँ हैं।

इस इंजन को बनाने के लिए एयरोथर्मल डायनेमिक्स, मैटेरियल साइंस, एडवांस्ड मेटलर्जी और कंट्रोल सिस्टम जैसे मामलों में रिसर्च करनी पड़ी है। यह सभी तकनीकें बनाना काफी कठिन है। एक और समस्या भारत को इस इंजन के तकनीकी विकास में मदद ना मिलना है।

इसके अलावा इंजन की तकनीकों को बनाने के लिए विशेषज्ञों और इन्फ्रा की कमी भी है। कई बार भारत में विकसित तकनीकों के टेस्ट के लिए रूस पर निर्भर रहना पड़ा है। इसके अलावा विकसित होने के बाद भी इंजन केवल 70-75 kN (किलोन्यूटन) का थ्रस्ट ही पैदा कर पाया था।

यह शक्ति उस इंजन क्षमता से कम थी, जिसकी जरूरत भारतीय विमानों को थी। तेजस जैसे विमानों को 90-100 kN की आवश्यकता थी। ऐसे में अब इसे AMCA और UCAV जैसे प्रोजेक्ट के लिए विकसित किया जा रहा है।

इससे पहले फ्रांस की स्नेक्मा के साथ इस इंजन के विकास की बात चल रही थी। लेकिन 2013 में इस पर भी सहमति नहीं बनी क्योंकि यह कम्पनी पूरी तकनीकें साझा नहीं करना चाहती थी। भारत को यह स्वीकार नहीं था।

Fund Kaveri Engine में क्या माँग?

नेटीजेंस की माँग है कि जो भी तकनीकें अभी भारत हासिल नहीं कर पाया है, इसके लिए लगभग ₹16000-₹17000 करोड़ की फंडिंग की दी जाए। उनका कहना है कि अभी तक कावेरी प्रोग्राम को ₹2000 करोड़ की फंडिंग मिली है, जो कम है।

नेटीजेंस ने इसके लिए विदेशों का उदाहरण दिया है, जहाँ एक जेट इंजन के निर्माण पर ₹40 हजार करोड़ तक का खर्च किया गया है। उनका कहना है कि यदि इस काम के लिए फंडिंग बढ़ा दिए जाए तो यह प्रोग्राम जल्दी पूरा हो सकेगा और भारत इस संबंध में आत्मनिर्भर हो जाएगा। इसी लिए यह ट्रेंड चलाया जा रहा है।

DRDO बनाएगी 5th जेनेरेशन का विमान ‘AMCA’, निजी कम्पनियाँ भी हो सकेंगी शामिल: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दी हरी झंडी, फाइटर जेट बनाने को मोदी सरकार ने दिए थे ₹15000 करोड़

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) को बनाने वाले कार्यक्रम को मंजूरी दे दी है। ये पाँचवी जेनेरेशन का फाइटर जेट होंगे। इसके जरिए स्वदेशी एयरोस्पेस तकनीक को बढ़ावा दिया जाएगा। रक्षा मंत्री कार्यालय के एक्स हैंडल पर इसकी जानकारी साझा की गई है।

एक्स पर साझा पोस्ट में लिखा गया है कि भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने और घरेलू एयरोस्पेस उद्योग को मजबूत करने के लिए रक्षा मंत्री ने उन्नत मध्यम युद्धक विमान (AMCA) कार्यक्रम के एक्जीक्यूशन (निष्पादन) मॉडल को मंजूरी दे दी है।

रक्षा मंत्रालय ने एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) को इसे बनाने की मंजूरी दे दी है। ADA के साथ इस 5th जेनेरेशन फाइटर जेट को बनाने में निजी कंपनियाँ भी शामिल हो सकती हैं।

पोस्ट में यह भी लिखा गया कि स्वदेशी विशेषज्ञता, क्षमता और योग्यता का उपयोग करके AMCA प्रोटोटाइप विकसित करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।इससे एयरोस्पेस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2024 में भारतीय वायु सेना (IAF) के लिए 5th जेनेरेशन वाले AMCA फाइटर जेट के निर्माण के लिए 15,000 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी।

सीएनबीसी टीवी18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस कार्यक्रम की सफलता से भारत को विदेशी फाइटर जेट पर निर्भर नहीं रहना होगा, बल्कि एयरोस्पेस इंडस्ट्री को बढ़ावा मिलेगा और स्वदेशी कंपनियाँ भी नई और अत्याधुनिक तकनीक पर काम कर सकेंगी। इससे भविष्य में भारत अपने बनाए फाइटर जेट्स अन्य देशों को बेचने की क्षमता पैदा कर सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, इस मॉडल के निर्माण के लिए भारतीय कंपनियों के लिए जल्द ही एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) जारी किया जा सकता है। इसके बाद इस कार्यक्रम का हिस्सा बनने कि लिए भारतीय सरकारी और निजी कंपनियाँ बिडिंग (bidding) में भाग ले सकती हैं। निजी कंपनियाँ ज्वाइंट वेंचर या कंसोर्टियम की तरह भी सम्मिलित हो सकती हैं।

भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद वायुसेना में लड़ाकू विमानों की कमी पर रक्षा मंत्रालय काफी ध्यान दे रहा है। देश पर अमेरिका और रूस से 5th जेनेरेशन का लड़ाकू विमान खरीदने का भी काफी दबाव है। ऐसे में स्वदेशी लड़ाकू विमान बनाने वाले इस कार्यक्रम से काफी उम्मीदें लगाई जा रही हैं। इसके निर्माण के लिए चुनी गई कंपनियाँ भी वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी स्थिति मजबूत कर सकती हैं।

जहाँ से तीनों सेनाओं ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की थामी थी कमान… वहाँ का जारी हुआ बुकलेट, सामने आई War Room की तस्वीरें

भारतीय सेना ने हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर के बारे में एक खास किताब (बुकलेट) निकाली है। इस किताब में पहली बार उस खास कमरे की तस्वीरें दिखाई गई हैं जहाँ से इस बड़े ऑपरेशन पर नज़र रखी जा रही थी।

इन तस्वीरों में आप देखेंगे कि सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी और वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह मिलकर इस ऑपरेशन पर लगातार ध्यान दे रहे थे। यह दिखाता है कि हमारी तीनों सेनाएँ किस प्रकार एकजुट होकर काम करती हैं।

यह खास कमरा असल में भारतीय सेना का कमांड सेंटर था। यहीं से ऑपरेशन सिंदूर की पूरी योजना बनाई गई और उस पर निगरानी रखी गई। इस किताब से सेना ने साफ कर दिया है कि यह ऑपरेशन पूरी तरह से सबकी जानकारी और तालमेल के साथ किया गया था, और तीनों सेनाओं के बड़े अधिकारी हर पल की खबर रख रहे थे।

रात के अंधेरे में आतंकियों पर सेना का करारा प्रहार

भारतीय सेना ने हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम से एक बेहद गोपनीय और सफल सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया, जिसमें पाकिस्तान समर्थित 9 प्रमुख आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। इस ऑपरेशन में 100 से ज़्यादा आतंकवादी मारे गए, जो भारत की आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस‘ नीति का स्पष्ट प्रमाण है।

जारी की गई तस्वीरों में, भारतीय सशस्त्र बलों के शीर्ष अधिकारी, जिनमें थलसेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी भी शामिल हैं, ऑपरेशन रूम से इस हमले की सीधी निगरानी करते हुए दिख रहे हैं। एक तस्वीर जो रात 1:05 बजे की है, वह ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के शुरू होने के समय को दर्शाती है। इन तस्वीरों में जनरल द्विवेदी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी ड्रोन फुटेज और सैटेलाइट तस्वीरों के लाइव प्रसारण को बेहद बारीकी से देखते हुए नज़र आ रहे हैं।

यह ऑपरेशन भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों, ड्रोन्स और नौसेना के उपकरणों के सटीक समन्वय का नतीजा था। हमले में कथित तौर पर स्कैल्प क्रूज मिसाइल, लेजर-गाइडेड बम और सशस्त्र यूएवी (अनमैन्ड एरियल व्हीकल्स) का इस्तेमाल किया गया। यह दिखाता है कि भारतीय सशस्त्र बल न केवल एकजुट हैं, बल्कि उनके पास अत्याधुनिक तकनीक भी मौजूद है, जिससे वे दुश्मन को उसके ही गढ़ में घुसकर मार गिराने में सक्षम हैं।

बुकलेट में क्या-क्या है?

पहलगाम हमले की तस्वीरें और उसके बाद सरकार ने कितनी तेज़ी से कदम उठाए और क्या-क्या तैयारियाँ कीं। ऑपरेशन सिंदूर में जिन आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया, उनकी पूरी जानकारी। भारत की इस कार्रवाई को दुनिया भर से कितना समर्थन मिला। मीडिया ने इस बारे में क्या खबरें दीं और पाकिस्तान के गिराए गए ड्रोन्स का मलबा।यह बुकलेट यह भी बताती है कि भारत ने अब सीमा पार से होने वाले आतंकवाद से निपटने के लिए एक नया और पक्का तरीका अपना लिया है।

विदेश मंत्री ने की तारीफ

इन सभी दलों की कोशिशों की तारीफ करते हुए, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया पर कहा, “भारत आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ (बिल्कुल बर्दाश्त नहीं) की नीति पर एकजुट है। एक साथ हमारी आवाज़ आतंकवाद से लड़ने का मजबूत संदेश दे रही है।” यह बात दिखाती है कि भारत कितना दृढ़ है और आतंकवाद से लड़ने के लिए दुनिया के देशों के साथ मिलकर काम करने को तैयार है।

कुल मिलाकर, ऑपरेशन सिंदूर की यह किताब दिखाती है कि भारतीय सेना ने अपनी रणनीति बदल ली है, तीनों सेनाएँ बहुत अच्छे तालमेल से काम कर रही हैं, और भारत आतंकवाद के खिलाफ बिल्कुल भी नरमी नहीं बरतेगा।

सुख चैन से जियो, रोटी खाओ, वरना मेरी गोली तो है ही… भुज से पाकिस्तान को PM मोदी का सीधा संदेश: प्रधानमंत्री आवास में लगेगा सिंदूर का पौधा, महिलाओं ने की भेंट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के भुज में एक जनसभा को संबोधित करते हुए पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा, “सुख चैन से जियो, रोटी खाओ, वरना मेरी गोली तो है ही।” पीएम मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति को दोहराते हुए कहा कि भारत की नीति आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (26 मई 2025) को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र करते हुए कहा कि यह भारत की इस प्रतिबद्धता को दर्शाता है। पीएम ने कहा, “भारत पर्यटन में विश्वास करता है, जो लोगों को एकजुट करता है, लेकिन पाकिस्तान जैसे देश आतंकवाद को ही अपना पर्यटन मानते हैं, जो वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए खतरा है।”

पीएम मोदी ने पाकिस्तान की जनता, खासकर युवाओं और बच्चों को संबोधित करते हुए भावुक अपील की। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान की फौज और सरकार ने आतंकवाद को धंधा बना दिया है। ये लोग आतंक से पैसा कमाते हैं, और इसकी कीमत वहाँ के मासूम बच्चे और युवा चुकाते हैं।” उन्होंने पाकिस्तानी युवाओं से सवाल किया, “क्या तुम ऐसे शासन और फौज का साथ दोगे, जिसने तुम्हारा भविष्य बर्बाद कर दिया? अब फैसला तुम्हें करना है।” पीएम ने कहा कि पाकिस्तान में बच्चे स्कूल नहीं जा पाते, युवाओं को नौकरी नहीं मिलती, और माँओं को बिजली-पानी के लिए तरसना पड़ता है। यह सब वहाँ की सत्ता की गलत नीतियों का नतीजा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “भारत के जवाब से पाकिस्तान घबरा गया। उन्होंने कच्छ सहित सीमा क्षेत्रों में ड्रोन भेजे… 1971 के युद्ध में कच्छ की बहादुर महिलाओं ने 72 घंटे में भुज के रनवे को ठीक करके पाकिस्तान के दुष्प्रचार को हराया था… वो महिलाएंँ मुझसे मिलीं, मुझे आशीर्वाद दिया और एक सिंदूर का पौधा भेंट किया। इसे पीएम हाउस में लगाया जाएगा।”

पीएम मोदी ने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा कि जो भारत की संप्रभुता को चुनौती देगा, उसे बिना किसी अपवाद के परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर एक सैन्य अभियान से कहीं अधिक है। यह मानवता की रक्षा और आतंकवाद को खत्म करने का मिशन है।”

पीएम ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जिक्र करते हुए कहा कि भारत ने पाकिस्तान को कार्रवाई का मौका दिया, लेकिन जब उसने कुछ नहीं किया, तो भारतीय सशस्त्र बलों को पूरी छूट दी गई। उन्होंने कहा, “हमारे बहादुर सैनिकों ने आतंकवादी ठिकानों पर सटीक हमला किया, बिना किसी नागरिक क्षेत्र या निर्दोष लोगों को नुकसान पहुँचाए। यह हमारी सेना की क्षमता और अनुशासन का प्रमाण है।”

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत की लड़ाई आतंकवाद और उसे पनाह देने वालों से है। उन्होंने कहा, “बँटवारे के बाद जिस देश (पाकिस्तान) का जन्म हुआ, उसका एकमात्र लक्ष्य भारत से दुश्मनी और नुकसान पहुँचाना है। लेकिन हमारा लक्ष्य गरीबी दूर करना, अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और विकसित भारत बनाना है।” पीएम ने गुजरात में 53,400 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया, जिसमें बिजली, सड़क, पानी और सौर ऊर्जा से जुड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं।

नहीं गली दाल तो पुतिन को ‘पागल’ बताने लगे डोनाल्ड ट्रंप, कहा- वे निर्दोषों का खून बहा रहे, हड़पना चाहते हैं पूरा यूक्रेन: 3+ साल से जारी जंग को चुटकी में खत्म करवाने का कर रहे थे दावा

अमेरिका का राष्ट्रपति बनने के बाद से डोनाल्ड ट्रंप लगातार कोशिश कर रहे हैं कि यूक्रेन पर रूसी हमला बंद हो जाए। इसके लिए वो टेंपररी सीजफायर से लेकर पूर्ण युद्धविराम तक की गुहार लगा चुके हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को दोस्त बताने से लेकर उनसे कई बार बातचीत कर चुके हैं, यहाँ तक कि यूक्रेनी राष्ट्रपति को सार्वजनिक तौर पर हड़का भी चुके हैं। इसके बावजूद रूसी हमले नहीं रुक रहे, जिसकी वजह से डोनाल्ड ट्रंप अब गुस्से में आ चुके हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने व्लादिमीर पुतिन को पागल तक कह दिया है।

इस दौरान ट्रंप ये बताना नहीं भूले कि इनकी पुतिन से बहुत बनती है, लेकिन साथ ही जोड़ा कि बीते कुछ समय से पुतिन बदल चुके हैं। अब वो यूक्रेन का सिर्फ एक टुकड़ा नहीं, बल्कि पूरे का पूरा यूक्रेन ही कब्जाना चाहते हैं। हालाँकि ट्रंप ने ये भी जोड़ दिया कि अगर रूस यूक्रेन को पूरा कब्जाता है, तो ये रूस के पतन की शुरुआत होगी, यानी वो बर्बादी की तरफ अपने कदम बढ़ा रहा है।

ट्रंप ने अपने सोशल नेटवर्किंग साइट ट्रुथ पर रविवार (25 मई 2025) को एक पोस्ट डाला और पुतिन पर जमकर भड़ास निकाली। ट्रंप ने अपनी पोस्ट में कहा, “रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ मेरे हमेशा से बहुत अच्छे संबंध रहे हैं, लेकिन शायद उनके साथ कुछ ऐसा हुआ है। वह बिल्कुल पागल हो गए हैं! वह बेवजह बहुत से लोगों को मार रहे हैं, और मैं सिर्फ सैनिकों की बात नहीं कर रहा हूँ। यूक्रेन के शहरों में बेवजह मिसाइल और ड्रोन दागे जा रहे हैं।”

ट्रंप ने कहा, “मैंने हमेशा कहा है कि वे यूक्रेन का सिर्फ एक टुकड़ा नहीं, बल्कि पूरा यूक्रेन चाहते है, और शायद यह सही साबित हो रहा है, लेकिन अगर वह ऐसा करते हैं, तो इससे रूस का पतन हो जाएगा!”

ट्रंप ने यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की की भी आलोचना की और कहा कि उनके बोलने का तरीका समस्याएँ खड़ी करता है और इससे उनके देश को कोई भी फायदा नहीं होता। उन्होंने जेलेंस्की को सलाह दी कि वे इस तरह की बयानबाजी बंद करें। इसके साथ ही ट्रंप ने दावा किया कि अगर वे अमेरिका के राष्ट्रपति होते तो रूस-यूक्रेन युद्ध कभी शुरू ही नहीं होता।

ट्रंप ने कहा, “यह जेलेंस्की, पुतिन और बाइडेन की लड़ाई है, ‘ट्रंप’ की नहीं। मैं केवल एक बड़ी और भयानक आग को बुझाने में मदद कर रहा हूँ।” राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि यूक्रेन में रूस का हालिया हमला और राष्ट्रपति जेलेंस्की की बयानबाजी शांति के प्रयासों के लिए भी बाधा बन रही है।

राष्ट्रपति पुतिन के खिलाफ डोनाल्ड ट्रंप का तीखा बयान यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की के उस आरोप के बाद आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिकी चुप्पी ने पुतिन को और अधिक ताकतवर बना दिया है। जेलेंस्की ने रूसी नेतृत्व पर दबाव बढ़ाने की अपील करते हुए कहा, “रूस की क्रूरता को रोका नहीं जा सकता, अगर इसे नजरअंदाज किया गया तो यह और बढ़ेगी।” उन्होंने अमेरिका और अन्य देशों की चुप्पी को पुतिन के लिए प्रोत्साहन बताया।

इस बीच, ट्रंप लगातार पुतिन के शांति वार्ता को लेकर बदलते रुख पर निराशा जताते रहे हैं। उनकी पुतिन को लेकर निराशा अब सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं है, बल्कि वे रूस के खिलाफ कुछ व्यापारिक प्रतिबंध लगाने पर भी विचार कर रहे हैं।

वैसे, पहले ट्रंप रूस पर नए प्रतिबंध लगाने के लिए इच्छुक नहीं थे, पुतिन के साथ दोस्ताना रवैया अपनाते थे और जेलेंस्की को फटकार लगाते थे, लेकिन अब उन्होंने पुतिन को ‘पागल’ तक कह दिया है और रूस के खिलाफ सेकंडरी बैन लगाने पर विचार कर रहे हैं। 

बता दें कि कुछ समय पहले ट्रंप का रूस के प्रति नरम रुख भी देखने को मिला था, जब उन्होंने पुतिन से टेलीफोन पर बातचीत के बाद मॉस्को पर नए प्रतिबंध लगाने से इनकार कर दिया था। लेकिन अब उनकी हालिया टिप्पणियाँ, जिसमें उन्होंने पुतिन पर शांति प्रयासों को नुकसान पहुँचाने का आरोप लगाया है, अमेरिका की नीति में अस्थिरता को दिखाती हैं।

गौरतलब है कि बीते साल चुनाव अभियान के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि यदि वे सत्ता में आए तो 24 घंटे में रूस-यूक्रेन युद्ध समाप्त करा देंगे। लेकिन अब तो करीब पाँच महीने बीत चुके हैं और उनकी तमाम कोशिशों के बावजूद रूस-यूक्रेन युद्ध में कोई कमीं नहीं आई है।

दिलचस्प बात यह है कि डोनाल्ड ट्रंप खुद को वैश्विक शांतिदूत के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। हाल ही में भारत-पाकिस्तान के तनाव के दौरान, जब भारत ने पाकिस्तानी आतंकी ठिकानों और सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुँचाया, तब ट्रंप ने बार-बार व्यापार के जरिए इस संघर्ष को सुलझाने का दावा किया। हालाँकि उनका यह दावा भी विवादित ही रहा, क्योंकि भारत ने उनके दावे को सार्वजनिक तौर पर खारिज कर दिया।

‘भाई (फरहान) बाद में करेगा, मैं पहले वायरल करूँगी तेरा Video’: रिपोर्ट में बताया- ‘मुस्लिम गैंग’ के लिए हिंदू लड़कियों को फँसाती थी जोया, सरगना के फोन में 64 अश्लील वीडियो मिले

मध्य प्रदेश के भोपाल में हिन्दू लड़कियों को फँसाने वाले मुस्लिम गैंग के सरगना फरहान के फोन से 64 लड़कियों के वीडियो मिले हैं। इनमें से 58 एक ही कॉलेज की हैं। यह भी पता चला है कि हिन्दू लड़कियों को फँसाने में फरहान की मदद उसकी बहन जोया करती थी। जोया भी हिन्दू लड़कियों को धमकाती थी कि वह उनके अश्लील वीडियो वायरल कर देगी। फरहान हिन्दू लड़कियों को कलमा पढ़वाता था और उन्हें रोजे के बारे में बताता था। यह सब खुलासे SIT जाँच में हुए हैं।

वीडियो वायरल करने की धमकी देती थी जोया

दैनिक जागरण की एक रिपोर्ट के अनुसार, फरहान भोपाल के TIT कॉलेज की लड़कियों को विशेष रूप से निशाना बनाता था। उसके फोन से जिन 64 लड़कियों की अश्लील वीडियो मिली हैं, उनमें से 58 लडकियाँ इसी कॉलेज की थीं। रिपोर्ट में बताया गया है कि फरहान की बहन जोया ही हिन्दू लड़कियों को फरहान के लिए फँसाती थी। वह फरहान के बाकी साथियों के लिए भी यही काम करती थी। यहाँ तक कि जब कोई लड़की फरहान से बात करना बंद कर देती थी तो वह उसे फोन कर देती।

जोया हिन्दू लड़कियों से कहती थी कि फरहान भाई उसके बात ना करने से अपसेट हैं और दबाव बनाती थी कि उससे बात करे। हिन्दू लड़कियाँ जब अपने अश्लील वीडियो वायरल किए जाने की धमकी का हवाला देती थीं तो वह खुद यही धमकी देने लगती थी। रिपोर्ट बताती है कि जोया ने एक लड़की से कहा कि फरहान भाई तो बाद में वीडियो वायरल करेंगे, पहले वही वायरल कर देगी। वहीं जोया का भाई फरहान और उसके साथी लड़कियों का धर्मांतरण करवाने की पूरी कोशिश करते थे।

रोजा-कलमा सिखाते थे

रिपोर्ट बताती है कि फरहान और उसके साथी लड़कियों को बताते थे कि उनकी दुआ में बहुत ताकत होती है। वह हिन्दू धर्म के खिलाफ भी भड़काते थे। यहाँ तक कि रोजे रखने को लेकर भी वह लड़कियों को ब्रेनवाश करते थे और कलमा सिखाते थे। इस मामले में अब SIT जाँच भी जारी है। मामले में फरहान के साथ ही 4 और आरोपित पकड़े गए हैं। एक आरोपित अब भी फरार है। उसे पकड़ने का प्रयास चल रहा है। इनसे पूछताछ में रोज नए खुलासे हो रहे हैं।

जिन लड़कियों को फँसाया, उसके खाते से शेयर ट्रेडिंग

इस मामले में SIT जाँच भी जारी है। SIT जाँच में सामने आया है कि फरहान ने 2 लड़कियों के खाते से शेयर ट्रेडिंग किया करता था। पुलिस को पता चला है कि वह इन लड़कियों के खाते से लाखों का लेनदेन कर चुका है। उसने इन खातों में ₹15 लाख का लेनदेन किया है।

फरहान के खातों में भी ₹50 लाख का लेनदेन हुआ है। यह भी पता चला है कि उसे ₹1 लाख की एक्स्ट्रा कमाई होती थी। यह पैसा वह लड़कियों को फँसाने पर खर्च करता था। फरहान से और पूछताछ हो रही और पता किया जा रहा है कि उसके किससे लेनदेन हुए हैं।

गौरतलब है कि भोपाल में हिन्दू लड़कियों को निशाने पर लेकर उनका रेप करने वाला ‘मुस्लिम गैंग’ के सवाब लिए यह कर रहा था। मुस्लिम गैंग इस काम को इस्लाम के नजरिए से अच्छा मानती थी। इसके लिए वह ज्यादा से ज्यादा हिन्दू लड़कियों को निशाना बना रहे थे।

वह वीडियो बनाकर लड़कियों को प्रताड़ित करते थे। यह सारे खुलासे मुस्लिम गैंग के सरगना फरहान ने किए हैं। मुस्लिम गैंग के सरगना फरहान ने पुलिस पूछताछ में बताया कि उसे हिन्दू लड़कियों का रेप करने, उन्हें फँसाने और वीडियो के बहाने धमकाने का कोई भी पछतावा नहीं है। उसने पुलिस को बताया है कि यह इस्लाम के हिसाब से सवाब का काम है।

मामले में फरार आरोपित को पुलिस पकड़ने के लिए जोर लगा रही है।