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कुरान में शर्तों के साथ अनुमति, पर मुस्लिम मर्द स्वार्थ के लिए कर रहे एक से अधिक निकाह: इलाहाबाद हाई कोर्ट; जानिए एक से अधिक बीवी रखना कब ‘अपराध’, बताई UCC की जरूरत

मुस्लिम मर्द स्वार्थ में एक से अधिक निकाह कर रहे हैं। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की है। अदालत ने कहा है कि कुरान ने शर्तों के साथ एक से अधिक निकाह की अनुमति दी है। एक से अधिक निकाह तभी करना चाहिए जब मुस्लिम मर्द सभी बीवियों से एक सामान्य व्यवहार कर सके।

अदालत ने यह भी कहा कि इस्लाम की शुरुआत में एक से अधिक निकाह की इजाजत बेवा और अनाथों को सहारा देने के मकसद से दी गई थी। लेकिन अब मुस्लिम अपने ‘स्वार्थ’ के लिए इसका दुरुपयोग कर रहे हैं।

हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस्लामी कानून में भले एक से अधिक निकाह अपराध नहीं है, लेकिन शादीशुदा होने के बाद इस्लाम कबूल कर दूसरा निकाह करना अपराध की श्रेणी में आता है। इस दौरान अदालत ने समान नागरिक संहिता (UCC) की जरूरत पर भी जोर दिया।

क्या है मामला

ये टिप्पणी फुरकान, खुशनुमा और अख्तर अली की याचिका से जुड़ी हुई है। मुरादाबाद के मैनाठेर थाने में 2020 में याचियों ने दर्ज एक एफआईआर और सीजेएम कोर्ट द्वारा 8 नवंबर 2020 को चार्जशीट पर लिए गए संज्ञान और समन आदेश को रद्द करने की माँग की थी।

एफआईआर में फुरकान पर आरोप था कि उसने अपनी पहली शादी छुपाकर दूसरी शादी की और रेप किया। फुरकान के खिलाफ आईपीसी की धारा 376 (बलात्कार), 495 (दूसरी शादी छुपाकर विवाह), 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र), 504 (अपमान), और 506 (धमकी) के तहत केस दर्ज किया गया था।

फुरकान के वकील ने कोर्ट में ये दलील दी कि 1937 के शरीयत एक्ट और मुस्लिम कानून के अनुसार एक मुस्लिम पुरुष चार शादियाँ कर सकता है। ऐसे में उस पर धारा 494 लागू नहीं हो सकती। इसके लिए वकील ने 2015 के जाफर अब्बास रसूल मोहम्मद मर्चेंट बनाम गुजरात राज्य के फैसले का भी हवाला दिया।

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस मामले में राज्य सरकार ने कहा कि दूसरा विवाह हर स्थिति में वैध नहीं होता। अगर पहला विवाह हिंदू विवाह अधिनियम 1955 के तहत हुआ है और बाद में इस्लाम अपनाकर दूसरा निकाह किया गया हो तो ऐसे में ये अपराध होगा और व्यक्ति पर धारा 494 लागू होगी।

जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की बेंच ने कहा कि यदि पहली शादी को अवैध घोषित किया गया है, तो इस अपराध के तहत मामला बन सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कोर्ट ने यह भी माना कि अगर पहली शादी विशेष विवाह अधिनियम, विदेशी विवाह अधिनियम, ईसाई विवाह अधिनियम, पारसी विवाह एवं तलाक अधिनियम, या हिंदू विवाह अधिनियम के तहत हुई थी और व्यक्ति इस्लाम में धर्म परिवर्तन कर इस्लामी कानून के अनुसार दूसरा निकाह करता है तब द्विविवाह का अपराध लागू होगा।

युद्ध में मिली थी अनुमति, अब हो रहा दुरुपयोग

पीठ ने कहा, “फैमिली कोर्ट को परिवार न्यायालय अधिनियम की धारा 7 के तहत मुस्लिम पर्सनल लॉ के अनुसार किए गए मुस्लिम निकाह की वैधता तय करने का अधिकार भी है।”

कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि पहले के समय में युद्ध के दौरान बेवा हुई महिलाओं और अनाथ बच्चों की देखरेख और रक्षा के लिए कुरान के तहत एक से अधिक निकाह को सशर्त अनुमति दी गई थी। हालाँकि अब इस प्रावधान का पुरुषों ने अपने ‘स्वार्थ के लिए दुरुपयोग’ करना शुरू कर दिया है।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले सरला मुद्गल और लिली थॉमस मामले की सुनवाई करते हुए मुस्लिम पुरुषों के कई निकाह करने को लेकर कानूनी स्थिति स्पष्ट की थी। उन्होंने वह स्थितियाँ बताई थीं, जिनके तहत किसी मुस्लिम के एक से ज्यादा निकाह करने पर कोई कानूनी कार्रवाई होगी या नहीं होगी।

फुरकान के मामले में जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकल पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले में दिए गए सुझाव से सहमति जताई। सरला और लिली के मामले में संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत बने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के प्रावधान को जोड़ा गया था।

बहुविवाह के साथ अपराध के दाँव पेंच

अपने आदेश में कोर्ट ने मुस्लिम आदमी द्वारा किए गए एक से अधिक निकाह की कानूनी स्थिति और भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 494 के कानूनी दाँव पेंच के बारे में बताया। यह भी निर्धारित किया कि किन परिस्थितियों में द्विविवाह को अपराध माना जा सकता है और कब नहीं।

कोर्ट ने कहा, “यदि कोई मुस्लिम पुरुष अपना पहला निकाह इस्लामी कानून के तहत करता है, तो दूसरा, तीसरा या चौथा निकाह अमान्य नहीं होगी। उस स्थिति में दूसरे निकाह के लिए आईपीसी की धारा 494 लागू नहीं होगी। हालाँकि इनमें वे मामले शामिल नहीं हैं जहाँ दूसरी शादी को शरीयत के अनुसार पारिवारिक न्यायालय अधिनियम की धारा 7 के तहत फैमिली कोर्ट या किसी सक्षम न्यायालय द्वारा बातील (अमान्य विवाह) घोषित किया गया हो।

यदि कोई व्यक्ति पहली शादी विशेष विवाह अधिनियम, 1954, विदेशी विवाह अधिनियम, 1969, ईसाई विवाह अधिनियम, 1872, पारसी विवाह और तलाक अधिनियम, 1936 और हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के तहत करता है, और इस्लाम में धर्म परिवर्तन के बाद इस्लामी कानून के तहत दूसरा निकाह करता है, तो उसका दूसरा नितकाह अमान्य होगा, और इस तरह का निकाह आईपीसी की धारा 494 के तहत अपराध कहलाएगा।

सभी पत्नियों को मिले समान व्यवहार

हाईकोर्ट ने इस पर 18 पन्नों का फैसला दिया है। इसमें कहा गया है कि अगर कोई मुस्लिम पुरुष सभी पत्नियों के साथ समान व्यवहार नहीं कर सकता, तो उसे दूसरे निकाह का अधिकार नहीं मिलना चाहिए।

कोर्ट ने इस मामले में पाया कि फुरकान और शिकायतकर्ता दोनों ही मुस्लिम हैं, इसलिए दूसरे निकाह को वैधता दी गई। हालाँकि कोर्ट ने आईपीसी की धारा 376, 495 और 120-बी के तहत अपराध नहीं होने की बात कही। कोर्ट ने शिकायतकर्ता को भी नोटिस जारी कर अगली सुनवाई 26 मई 2025 से शुरू होने वाले हफ्ते में तय की है।

भारत के खिलाफ फेल हुए हथियार तो चीन ने शुरू किया प्रोपेगेंडा, विदेशी मीडिया में करवाया PR: हर जगह छपवाया एक सा झूठ

भारत ने 7 मई, 2025 को पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिए हमले किए। इसके बाद पाकिस्तानी फौज ने भारतीय सेना को निशाना बनाने का प्रयास किया। हालाँकि, वह बुरी तरह से फेल हुआ।

इस दौरान पाकिस्तानी फौज की नाकामी का बड़ा कारण चीन से लिए गए हथियार रहे। चाहे चीनी फाइटर जेट हों, एयर डिफेन्स सिस्टम हो या फिर उसके बनाए ड्रोन, सब बुरी तरह भारत के खिलाफ नाकाम हुए। अब इससे बिलबिलाया चीन प्रोपेगेंडा पर उतर आया है।

चीन अपने हथियारों की नाकामी को छुपाने के लिए अब ग्लोबल मीडिया पोर्टल्स में पीआर कर रहा है। इसमें यह पोर्टल्स उसका साथ भी दे रहे हैं। इन सभी जगह पर चीनी हथियारों की प्रशंसा करते हुए खबरें बनाई गई हैं।

रणभूमि में जो चीनी हथियार कबाड़ सिद्ध हुए हैं, उन्हें प्रभावी दिखाने का प्रयास चल रहा है। इसके लिए क्लिकबेट हेडलाइन्स का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस चीनी प्रोपेगेंडा को ब्लूमबर्ग, FRANCE24 और द गार्जियन जैसे विदेशी मीडिया संस्थान हवा दे रहे हैं।

अमेरिकी मीडिया संस्थान ने इस चीनी प्रोपेगेंडा को सबसे पहले हवा दी। उसने 13 मई, 2025 को एक खबर लिखी। इसकी हेडलाइन थी, ‘भारत-पाकिस्तान में तनाव के बाद बढ़ी चीनी हथियारों की विश्वसनीयता’ (Chinese Weapons Gain Credibility After India-Pakistan Conflict)।

इस खबर में चीन के हथियारों के विषय में बात की गई। खबर का मुख्य फोकस चीन के बनाए लड़ाकू विमान J-10C और PL-15 मिसाइल पर था। पूरी खबर में दावा किया गया कि पाकिस्तान ने चीन में बने J-10C विमानों का उपयोग भारत के खिलाफ किया।

ब्लूमबर्ग ने यह भी दावा किया कि इस लड़ाकू विमान ने भारत के 5 फाइटर जेट गिरा दिए। इसके लिए उसने पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार और उसकी फौज के बयानों का सहारा लिया। उसने अपने स्तर पर कहीं यह नहीं पुष्टि की कि ऐसा कुछ हुआ भी है या नहीं।

सच्चाई यह है कि पाकिस्तान एक भी भारतीय विमान का मलबा तक नहीं दिखा पाया है। उसके रक्षा मंत्री को इस दावे के चलते सरेआम टीवी पर बेइज्जत होना पड़ा था। पाकिस्तानी फ़ौज ने भी अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में मात्र दावे ही किए और कोई भी सबूत नहीं दिखाए।

ब्लूमबर्ग ने यह सूचनाएँ किनारे करते हुए चीनी विमान को विजेता घोषित कर दिया। उसने उस चीनी मिसाइल PL-15 की तारीफों के भी पुल बाँधे, जो भारत में आकर ताश के पत्ते की तरह गिर गई थी। यह मिसाइल होशियारपुर में बिना कुछ हिट किए पूरी बरामद हुई थी।

ब्लूमबर्ग ने इसे भी प्रभावित बताने की कोशिश की। इस खबर की लिखावट से ही समझ आ जाता है कि यह एक प्रोपेगेंडा आर्टिकल है। इसका सबूत भी ब्लूमबर्ग ने अपनी हरकतों से दे ही दिया। जब 13 मई, 2025 को यह खबर प्रकाशित की गई थी, तब इसके लेखकों के रूप में जोश शियाओ और यिआन ली का नाम दिख रहा था।

यह दोनों संभवतः चीनी प्रोपेगेंडा बढ़ाने वाले पत्रकार हैं। हवा-हवाई दावे को लेकर जब लोगों ने प्रश्न उठाए, तो ब्लूमबर्ग ने 14 मई, 2025 को चुपके से इसमें से एक नाम हटा कर एक भारतीय नाम सुधी रंजन सेन जोड़ दिया। ब्लूमबर्ग का यह कदम स्पष्ट तौर पर विश्वसनीयता बचाने का एक प्रयास नजर आया।

सिर्फ ब्लूमबर्ग ही नहीं बल्कि इस चीनी प्रोपेगेंडा की कतार में FRANCE24, द यूरेशियन टाइम्स और द गार्जियन और रायटर्स जैसे संस्थानों ने भी अपना-अपना हिस्सा दिया। FRANCE24 तो फ्रांस का सरकारी मीडिया संस्थान होने के बाद भी उसी देश में बने राफेल विमानों पर प्रश्न उठाते नजर आया।

FRANCE24 ने भी कुछ-कुछ वैसी ही बातें लिखीं जैसी ब्लूमबर्ग के लेख में लिखी गई थी। FRANCE24 ने भी चीन का J-10 को लेकर प्रोपेगेंडा आगे बढ़ाया। हालाँकि, उसने इस लेख में चीन के HQ-9 और HQ-16 एयर डिफेन्स सिस्टम की कमियाँ भी गिनाईं। यह एयर डिफेन्स सिस्टम भारतीय हमले को नहीं रोक सका था।

इसी तरह ब्रिटिश समाचार संस्थान द गार्जियन ने भी एक खबर छापी, इसमें तो हेडलाइन में ही चीन में बने J-10 और PL-15 मिसाइल को प्रभावी बता डाला। इसमें भी उन्हीं विशेषज्ञों की राय ली गई, जिनसे चीनी हथियारों के विषय में ब्लूमबर्ग या बाकी संस्थानों ने बात की थी।

इन सब लेखों में चीन के हथियारों के प्रभावी होने के दावे कहीं पाकिस्तानी तो कहीं चीन स्रोतों के आधार पर किए गए हैं। सभी मीडिया संस्थानों में एक ही तरह की टोन, भाषा और एक ही जैसे विचार रखने वाले दावे आना कोई सुखद संयोग वैसे भी नहीं हो सकता।

इसके अलावा चीन पर पहले भी पश्चिमी मीडिया संस्थानों में घुसपैठ करने के आरोप लगते ही रहे हैं। ऐसे में उनका एक साथ चीनी हथियारों को लेकर एक ही स्वर में हुआ-हुआ यही दिखाता है कि यह एक चीनी प्रोपेगेंडा है ना कि उसकी सैन्य क्षमताओं का ईमानदार आकलन।

चीनी हथियारों की सच्चाई और उनकी असल क्षमताएँ क्या हैं, यह भारतीय हमले में पहले ही स्पष्ट हो चुका है। पाकिस्तान, बीते कुछ वर्षों में चीन से लगभग ₹40 हजार करोड़ का सैन्य साजोसामान खरीदा है। इसमें ड्रोन से लेकर JF-17 जैसे विमान भी शामिल हैं। लेकिन भारतीय वायु सेना ने स्पष्ट किया है कि उसने पाकिस्तान के कुछ विमान उड़ाए हैं।

संभावना है कि यह JF-17 जैसे विमान रहे हों। चीन के ड्रोन भी भारत में नहीं घुस पाए और उन्हें मार गिराया गया। असल बात ये है कि भारत के हथियारों ने इस तनाव में अद्भुत प्रदर्शन दिखाया है जबकि चीनी हथियार कबाड़ साबित हुए हैं, इसका असर कुछ समय में अंतरराष्ट्रीय हथियार बाजार में दिखेगा।

इस लड़ाई के दौरान चीनी हथियारों की हुई फजीहत उनकी बिक्री पर असर डालेगी। जबकि इस बात की बड़ी संभावना है कि भारतीय हथियार के लिए कई देश आगे आएँ। ऐसे में अपना आर्थिक नुकसान बचाने को भी चीन यह हरकत कर रहा है, इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

‘क्या अदालत बताएगी हम कितने समय में लें फैसला’: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुप्रीम कोर्ट से पूछे 14 सवाल, गवर्नर-प्रेसीडेंट के लिए तय की थी डेडलाइन

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुप्रीम कोर्ट से पूछा है कि क्या कोर्ट राष्ट्रपति और राज्यपाल को ये बता सकता है कि उन्हें कितने समय में विधानसभा से पास हुए बिलों को मंजूरी देनी है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुप्रीम कोर्ट से संविधान के अनुच्छेद 200, 201, 361, 143, 142, 145(3) और 131 से जुड़े सवाल पूछे हैं।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा था कि अगर राष्ट्रपति या राज्यपाल तय समय में बिल को मंजूरी नहीं देते, तो मान लिया जाएगा कि बिल पास हो गया। इसे ‘डीम्ड असेंट’ यानी ‘अपने-आप मंजूरी‘ कहते हैं।

ऐसे में राष्ट्रपति ने पूछा है कि जब राज्यपाल के पास कोई बिल आता है तो उनके पास क्या विकल्प होता है और क्या राज्यपाल मंत्री परिषद की सलाह मानने के लिए बाध्य है?

राष्ट्रपति का मानना है कि कोर्ट का ये फैसला उनके और राज्यपाल के संवैधानिक अधिकारों को कम करता है। इसलिए उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 143(1) के तहत सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में राय माँगी है। अनुच्छेद 143(1) राष्ट्रपति को ये अधिकार देता है कि वो किसी बड़े कानूनी या सार्वजनिक महत्व के सवाल पर सुप्रीम कोर्ट की राय ले सकते हैं। इसे प्रेसिडेंशियल रेफरेंस भी कहते हैं।

राष्ट्रपति ने सुप्रीम कोर्ट को कुल 14 सवाल भेजे हैं। इन सवालों का जवाब देने के लिए सुप्रीम कोर्ट को कम से कम पाँच जजों की एक संवैधानिक पीठ बनानी होगी। ये सवाल बहुत अहम हैं क्योंकि ये राष्ट्रपति और राज्यपाल के अधिकारों, उनकी भूमिका और कोर्ट की शक्तियों से जुड़े हैं।

राष्ट्रपति ने ये भी कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 200 और 201, जो बिलों को मंजूरी देने की प्रक्रिया बताते हैं, उनमें कोई ऐसा कोई नियम नहीं है जिसमें बिल को मंजूरी देने के लिए कोई समय-सीमा लिखी हो। न ही संविधान में ‘डीम्ड असेंट’ जैसी कोई बात कही गई है।

राष्ट्रपति ने पूछे हैं ये 14 अहम सवाल

  1. जब राज्यपाल के पास बिल आता है, तो उनके पास क्या-क्या विकल्प होते हैं?
  2. क्या बिल पर फैसला लेते वक्त राज्यपाल को मंत्रियों की सलाह माननी ही पड़ती है?
  3. क्या राज्यपाल का फैसला कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है?
  4. क्या संविधान का अनुच्छेद 361 कहता है कि राज्यपाल के फैसले को कोर्ट में नहीं ले जाया जा सकता?
  5. जब संविधान में कोई समय-सीमा नहीं है, तो क्या कोर्ट ये तय कर सकता है कि राज्यपाल को कब तक फैसला लेना है?
  6. क्या राष्ट्रपति का फैसला भी कोर्ट में चुनौती दी जा सकता है?
  7. क्या कोर्ट ये बता सकता है कि राष्ट्रपति को बिल पर कब और कैसे फैसला लेना है?
  8. अगर राज्यपाल कोई बिल राष्ट्रपति को भेजता है, तो क्या राष्ट्रपति को सुप्रीम कोर्ट से राय लेनी पड़ती है?
  9. क्या बिल के कानून बनने से पहले कोर्ट उसमें दखल दे सकता है?
  10. क्या सुप्रीम कोर्ट अनुच्छेद 142 के तहत राष्ट्रपति या राज्यपाल के फैसले को बदल सकता है?
  11. क्या बिना राज्यपाल की मंजूरी के विधानसभा से पास बिल कानून बन सकता है?
  12. क्या संविधान कहता है कि बड़े कानूनी सवालों को पाँच जजों की बेंच को भेजना जरूरी है?
  13. क्या सुप्रीम कोर्ट अनुच्छेद 142 के तहत ऐसा आदेश दे सकता है जो संविधान या कानून के खिलाफ हो?
  14. क्या केंद्र और राज्य सरकारों के बीच झगड़े सिर्फ अनुच्छेद 131 के तहत ही सुलझाए जा सकते हैं, या कोर्ट के पास और भी रास्ते हैं?

ये सवाल सिर्फ समय-सीमा तय करने की बात नहीं हैं। ये राष्ट्रपति और राज्यपाल की संवैधानिक भूमिका, उनके अधिकारों और कोर्ट की शक्तियों के दायरे से जुड़े हैं। अब सुप्रीम कोर्ट को इन सवालों पर गहराई से विचार करना होगा और एक साफ राय देनी होगी। इस फैसले का असर देश की संवैधानिक व्यवस्था और केंद्र-राज्य संबंधों पर भी पड़ सकता है। इसलिए ये मामला बहुत अहम माना जा रहा है।

गालियाँ, आँखों पर पट्टी, ब्रश करने नहीं दिया… रिपोर्ट में बताया BSF जवान के साथ पाकिस्तान ने 21 दिनों तक कैसा किया सलूक, सीमा पर सेना की तैनाती की जानकारी निकालना चाहता था आतंकी मुल्क

पाकिस्तान ने 23 अप्रैल, 2025 को एक सीमा सुरक्षा बल (BSF) को जवान को हिरासत में लिया था। उसे 14 मई, 2025 को छोड़ दिया गया। लेकिन इन 21 दिनों में पाकिस्तानियों ने उसे काफी प्रताड़ित किया। पाकिस्तानियों ने उसे सोने नहीं दिया और गालियाँ भी दी।

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, गिरफ्तारी के बाद BSF पूर्णम कुमार शॉ जवान को पाकिस्तान में तीन जगह ले जाया गया था। इन लोकेशन के विषय में नहीं BSF जवान को नहीं पता है। यहाँ पाकिस्तानियों ने जवान से सीमा पर BSF की पोस्टिंग के विषय में जानकारी जुटाने की कोशिश की।

BSF जवान से पाकिस्तान के फौजियों ने आम नागरिक बन कर जानकारी जुटाने की कोशिश की। उससे यहाँ उन अधिकारियों के विषय में जानकारी जुटाने का प्रयास भी पाकिस्तान की फौज ने किया, जो पाकिस्तान की सीमा पर तैनात हैं।

इसके अलावा BSF के इन अधिकारियों के नम्बर भी साझा करने का दबाव जवान पर बनाया गया। यह जानकारियाँ निकालने की कोशिश के अलावा पाकिस्तानी फ़ौज ने जवान शॉ को मानसिक तौर पर प्रताड़ित भी किया।

रिपोर्ट बताती है कि उन्हें इस पाकिस्तान में कस्टडी के 21 दिनों के दौरान ढंग से सोने नहीं दिया गया, उन्हें फौजियों ने गालियाँ दी। इसके अलावा, अधिकांश मौकों पर उनकी आँखों पर पट्टी बाँध कर रखी गई। हालाँकि, उनके साथ शारीरिक तौर पर कोई प्रताड़ना नहीं की गई।

BSF जवान शॉ को 14 मई को वापस लाए जाने के बाद उनसे पाकिस्तान में हुए बर्ताव को लेकर भी जानकारियाँ ली गई हैं। उन्हें अटारी-वाघा बॉर्डर से BSF वापस लाई थी। भारत ने इस दौरान एक पाकिस्तानी रेंजर को भी वापस किया था।

BSF जवान शॉ को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद 23 अप्रैल, 2025 को पाकिस्तानी रेंजर ने पंजाब के फिरोजपुर में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर से गिरफ्तार कर लिया था। पाकिस्तानियों ने दावा किया था कि वह उनकी जमीन पर आ गए थे। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद दबाव केचलते पाकिस्तान को उन्हें रिहा करना पड़ा था।

भारत की विजय पर विदेशी मीडिया की मुहर, NYT-वाशिंगटन पोस्ट ने माना- पाकिस्तान को घर में घुसकर मारा, 6 एयरबेस तबाह: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सैटेलाइट तस्वीरें दिखाई

भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से पाकिस्तान को काफी नुकसान हुआ है। भारत ने पहले भी इस बात की पुष्टि सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए की थी। अब न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में भी खुलकर ये बात लिख दी गई है।

जम्मू कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले की जवाबी कार्रवाई में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ लॉन्च किया था। 7 मई 2025 को शरू हुए इस मिशन में भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर के 9 आतंकी ठिकाने धवस्त कर दिए थे।

इससे तिलमिलाए पाकिस्तान ने जब ड्रोन और मिसाइल से भारत के शहरों पर हमला करने की कोशिश की तो भारतीय सेना ने उसे नाकाम कर दिया। लेकिन इसके बाद चार दिन तक यह सैन्य संघर्ष जारी रहा।

भारत के हमलों से पस्त हुआ पाक

इस संघर्ष के दौरान भारत हमेशा से ही पाकिस्तान पर हावी रहा। भारतीय सेना ने कराची से 100 मील यानी लगभग 160 किलोमीटर दूर भोलारी एयरबेस, पाकिस्तानी फौज के मुख्यालय और प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ के कार्यालय से लगभग 25 किमी की दूरी पर स्थित नूर खान एयरबेस, रहीम यार खान एयरफील्ड, सरगोधा एयरबेस, पसरूर और सियालकोट स्थित एयरबेस के रडार स्थलों समेत कई मुख्य जगहों पर हमला किया था।

देश के कई बड़े और महत्वपूर्ण जगहों पर एयर स्ट्राइक से हुए हमलों में पाकिस्तान को नुकसान भी हुआ लेकिन आतंकी मुल्क ने हमेशा से इस बात को नकारा कि पाकिस्तान में कोई भी नुकसान हुआ है।

अब न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में सैटेलाइट तस्वीरों के बिनाह पर यह बताया गया है कि पाकिस्तान को इस सैन्य संघर्ष में काफी नुकसान पहुंचा है। तस्वीरों में पहले और बाद की स्थिति को साफ तौर पर इसे दिखाया गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है, “सैटेलाइट तस्वीरों से साफ पता चलता है कि हमले काफी व्यापक थे। ज्यादातर नुकसान भारत ने पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर पहुंचाया है।”

पाकिस्तान के भोलारी एयरबेस के पहले और बाद की सैटेलाइट तस्वीर (NYT)

रिपोर्ट में यह भी लिखा गया कि दोनों पक्षों का किए गए हमले सटीक और टारगेटेड थे जो कि हाईटेक युग के युद्ध की तस्वीर बयां करता है। हालाँकि पाक ने भारत में नुकसान के जितने दावे किए, उतने नहीं हुए हैं।

पाकिस्तान में 10 मई को एक नोटिस जारी कर कहा था कि रहीम यार खान हवाई अड्डे का रनवे क्रियाशील नहीं है पर इसका कोई कारण नहीं बताया था। सैटेलाइट तस्वीरों से हुए नुकसान से ये कारण भी साफ तौर पर सामने आ गया।

इसी तरह पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में सरगोधा एयरबेस के रनवे के दो हिस्सों पर भारत ने हमला किया। सैटेलाइट से प्राप्त तस्वीरों में भी यह हमले से पहले और बाद की स्थिति साफ नजर आ रही है।

पाकिस्तान के झूठे दावों की खुली पोल

अपने नुकसान से बौखलाए पाकिस्तान के अधिकारियों ने यह झूठ फैलाने की कोशिश की कि पाकिस्तानी फौज ने भारत के उधमपुर एयरबेस को हमले से तबाह कर दिया है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि 12 मई की सैटेलाइट की तस्वीरों में किसी तरह का नुकसान नहीं दिख रहा है।

उधमपुर एयरबेस की सैटेलाइट तस्वीर (NYT)

सैटेलाइट तस्वीरों का हवाला देते हुए न्यूयॉर्क टाइम्स में साफ तौर पर लिखा गया है कि चार दिनों तक चले इस टकराव के दौरान भारत ने पाकिस्तान की सैन्य सुविधाओं और हवाई अड्डों को काफी नुकसान पहुँचाया है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत और पाकिस्तान के बीच चली सैन्य संघर्ष परमाणु सशस्त्र दो देशों के बीच आधी सदी में सबसे व्यापक लड़ाई रही। दोनों देशों ने एक दूसरे की हवाई सुरक्षा का परीक्षण करने और सैन्य सुविधाओं पर हमले के लिए मिसाइल और ड्रोन्स का उपयोग किया और इसीलिए उन्होंने एक दूसरे पर गंभीर नुकसान पहुंचने का दावा भी किया।

वाशिंगटन पोस्ट ने भी बताया भारत को बताया विजेता

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के बाद वाशिंगटन पोस्ट की भी एक रिपोर्ट सामने आई। उसने रिपोर्ट में लिखा कि भारत ने पाकिस्तान के 6 एयरबेस पर हमला कर उन्हें ध्वस्त कर दिया है। सैटेलाइट तस्वीरों का हवाला देते हुए उसने भी लिखा है कि भारत ने पाक हवाई इड्डों के तीन हैंगर्स, दो रनवे और एयरफोर्स के 4 मोबाइल टावरों को तबाह कर दिया है। दो दर्जन सैटेलाइट तस्वीरों और वीडियों की समीक्षा के बाद इस नतीजों को साफ तौर पर लिखा गया है।

पाक के हमले बेअसर

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत भारतीय सशस्त्र बलों ने रफीकी, मुरीदके, चकलाला, रहीम यार खान, सुक्कुर और चुनियन समेत कई पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर भी गंभीर हमले किए।

पाकिस्तान के पक्ष पर न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा, “पाक ने जिन जगहों पर हमला करने का दावा किया है, उनकी सैटेलाइट तस्वीरें सीमित हैं। यह तस्वीर पाकिस्तानी हमलों से हुए नुकसान को स्पष्ट तौर पर नहीं दिखाती हैं। यहाँ तक कि जिन जगहों पर सैन्य कार्रवाई के पुष्ट सबूत हैं, उनकी भी तस्वीर पूरी तरह नहीं मिली है।”

यह बताता है कि पाकिस्तान की ओर से की गई कार्रवाई में भारत को हल्का-फुल्का नुकसान ही पहुंचा है। चार दिनों तक चले हमलों के बाद 10 मई 2025 को संघर्ष को समाप्त करने के लिए दोनों देशों के बीच सीजफायर का समझौता किया गया।

नकली देशभक्त बनना बंद कर… आमिर खान की ‘सितारे जमीन पर’ का ट्रेलर आते ही उठी बहिष्कार की माँग: नेटिजन्स बोले- देशविरोधी, पहलगाम से लेकर ऑपरेशन सिंदूर के वक्त कहाँ था

बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं। खान ग्रुप की नकली देशभक्ति से हर कोई भली भाँति अवगत है। आने वाली फिल्म ‘सितारे जमीन पर’ के प्रमोशन के लिए अमीर खान की देशभक्ति जाग उठी,  फिल्म ‘सितारे जमीन पर’ के ट्रेलर रिलीज के साथ ही सोशल मीडिया खासकर X पर #BoycottAamirKhan और #BoycottSitareZameenPar ट्रेंड्स ने जोर पकड़ा।

आमिर पर पहलगाम आतंकी हमले (22 अप्रैल 2025) और भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर (7 मई 2025) पर चुप्पी साधने का आरोप है। X यूजर्स ने इसे उनकी ‘नकली देशभक्ति’ का सबूत बताया, खासकर जब उन्होंने फिल्म के प्रचार के समय देशभक्ति का प्रदर्शन किया।

इसके अलावा, उनके पुराने विवाद- 2015 का ‘असहिष्णुता’ बयान, फिल्म PK में हिंदू प्रथाओं पर कथित व्यंग्य, और तुर्की-चीन से संबंध- ने जनता का गुस्सा और बढ़ाया। यह लेख आमिर खान की कथित ‘नकली देशभक्ति‘ और हिंदू विरोधी छवि को समय रेखा के साथ उजागर करता है।

22 अप्रैल 2025: पहलगाम आतंकी हमला और आमिर की चुप्पी

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में टीआरएफ ने पर्यटकों पर हमला किया, जिसमें 26 लोग मारे गए। इसने देश में गुस्सा पैदा किया, और कई बॉलीवुड सितारों ने तुरंत प्रतिक्रिया दी।

आमिर ने 15 दिन बाद, 7 मई 2025 को एबीपी शिखर सम्मेलन में कहा, “हमें यकीन है कि पीएम मोदी जी इस पर जरूर कुछ करेंगे। लोगों को न्याय मिलना चाहिए।” X यूजर्स ने इसे देर से दी गई प्रतिक्रिया माना और उनकी चुप्पी को ये कहते हुए ‘असंवेदनशील’ करार दिया कि “भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय आमिर ने सेना के लिए एक भी ट्वीट नहीं किया।”

7 मई 2025: ऑपरेशन सिंदूर और आमिर की खामोशी

भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में पाकिस्तान और PoK में 9 आतंकी ठिकानों को नष्ट किया, जिसमें 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए। कई सितारों ने सेना की तारीफ की। आमिर ने इस दौरान कोई पोस्ट या बयान नहीं दिया। X यूजर्स ने इसे उनकी ‘देश विरोधी’ मानसिकता से जोड़ा।

12 मई 2025: देर से पोस्ट और “नकली देशभक्ति”

पीएम मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन के बाद, आमिर खान के प्रोडक्शन हाउस ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया: ‘ऑपरेशन सिंदूर के हीरोज को सलाम। हमारे सशस्त्र बलों की हिम्मत और बहादुरी के लिए आभार। पीएम मोदी को उनकी लीडरशिप के लिए धन्यवाद।’

X यूजर्स ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे ‘नकली देशभक्ति’ और फिल्म प्रचार का हथकंडा बताया। एक यूजर ने लिखा, “सुबह हो गई? ट्रेलर रिलीज के साथ ही ट्रोल होना शुरू हो गया। लोग उनकी चुप्पी को भुला नहीं रहे।”

#BoycottSitareZameenPar और #BoycottAamirKhan ट्रेंड्स चले। यूजर्स ने आमिर की चुप्पी, पुराने विवाद (PK, असहिष्णुता बयान), और तुर्की-पाकिस्तान से कथित संबंधों को आधार बनाया।

एक यूजर ने लिखा, “देश पर इतना बड़ा आतंकी हमला हुआ और आमिर चुप रहे। अब फिल्म रिलीज होने वाली है, तो देशभक्ति दिखा रहे हैं।”

2014: PK में हिंदू धर्म का कथित अपमान

आमिर खान की फिल्म PK ने मूर्ति पूजा और हिंदू बाबाओं पर व्यंग्य किया। डायलॉग जैसे ‘कौन हिंदू, कौन मुसलमान, थप्पा किधर है दिखा’ को हिंदू समुदाय ने अपमानजनक माना। विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल ने फिल्म को “हिंदू विरोधी” करार दिया। #BoycottPK ट्रेंड चला, लेकिन फिल्म ने 600 करोड़ से अधिक कमाई की।

2015: “असहिष्णुता” बयान

रामनाथ गोयनका अवार्ड्स में आमिर ने भारत में ‘बढ़ती असहिष्णुता’ की बात की, यह कहते हुए कि उनकी पत्नी किरण राव ने देश छोड़ने की सोची थी। यह बयान दादरी हत्याकांड के समय आया।

इस पर बीजेपी और हिंदू संगठनों ने इसे ‘देश को बदनाम करने की साजिश’ बताया। हिंदू महासभा ने आमिर को ‘पाकिस्तान जाने’ की सलाह दी और देशद्रोह का मुकदमा दर्ज करने की मांग की। #BoycottAamirKhan ट्रेंड शुरू हुआ।

2020: तुर्की और चीन से कथित संबंध

RSS की पत्रिका ने आमिर को ‘चीन का पसंदीदा खान’ कहा, उनकी फिल्म दंगल की चीन में सफलता और वीवो के ब्रांड एम्बेसडर होने पर सवाल उठाए। तुर्की के राष्ट्रपति की पत्नी से मुलाकात को ‘पाकिस्तान समर्थक’ तुर्की से संबंध के रूप में देखा गया।

RSS ने इसे ‘भारत के दुश्मनों से दोस्ती’ बताया। एक बार फिर #BoycottAamirKhan ट्रेंड को बल मिला। आमिर ने इस पर कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया।

2021: सीएट टायर विज्ञापन विवाद

आमिर के सीएट टायर विज्ञापन में बच्चों को सड़कों पर पटाखे न जलाने की सलाह दी गई, जिसे दिवाली की परंपरा का अपमान माना गया। इसके बाद #BoycottCeat और #BoycottAamirKhan ट्रेंड्स चले।

X यूजर्स ने आमिर पर हिंदू त्योहारों को निशाना बनाने और अपने धर्म के मुद्दों पर चुप रहने का आरोप लगाया। इस पर आमिर ने कहा कि उनका इरादा किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था।

आमिर खान की नकली देशभक्ति का पर्दाफाश

आमिर खान की देशभक्ति पर सवाल उठने के पीछे कई कारण हैं। जैसे कि सही समय पर चुप्पी, प्रचार में बोलना। पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर जैसे राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर आमिर की चुप्पी, और फिर फिल्म प्रचार के समय देशभक्ति दिखाने को जनता ने ढोंग माना। उनकी 12 मई की पोस्ट को ‘नकली देशभक्ति’ का सबूत बताया गया।

इसके अलावा पिछले विवादों का बोझ भी कम नहीं है। PK, असहिष्णुता बयान, सीएट विज्ञापन, और तुर्की-चीन से कथित संबंधों ने उनकी छवि को ‘हिंदू विरोधी’ और ‘देश विरोधी’ बनाया। X यूजर्स ने इन्हें बार-बार उठाकर बॉयकॉट को हवा दी।

संवेदनशील समय में आमिर का फिल्म प्रमोशन करना भी एक कारण है। ‘सितारे जमीन पर’ का ट्रेलर ऐसे समय में रिलीज हुआ, जब भारत-पाक तनाव चरम पर था। इसे असंवेदनशील माना गया।

इसके साथ साथ लोगों में बॉलीवुड के खिलाफ सामान्य गुस्सा भी बना हुआ है। X पर आमिर के साथ-साथ शाहरुख और सलमान जैसे कलाकारों को भी निशाना बनाया गया, जो बॉलीवुड को ‘पाकिस्तान समर्थक’ या ‘हिंदू विरोधी’ मानने वाली भावना का हिस्सा है।

आतंकवादियों के बाद अब उग्रवादियों की बारी… सेना ने मणिपुर में 10 को किया ढेर: भारी मात्रा में हथियार-गोला बरामद, भारत-म्यांमार सीमा पर हुई कार्रवाई

भारत- म्यांमार सीमा के पास मणिपुर के चंदेल में असम राइफल्स ने 10 उग्रवादियों को मार गिराया है। दरअसल वहाँ मौजूद असम राइफल्स को इसकी खुफिया जानकारी मिली। इसके बाद इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया गया।

उग्रवादियों ने इस दौरान सेना पर फायरिंग की और एनकाउंटर शुरू हुआ। सेना ने 10 उग्रवादियों को मौत के घाट उतार दिया।सर्च ऑपरेशन अभी भी जारी है। ऑपरेशन में किसी भी जवान के घायल होने की खबर नहीं आई है। मणिपुर में जारी अशांति के बीच सेना की ये बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।

भारतीय सेना की पूर्वी कमान ने ट्वीट किया, “भारत-म्यांमार सीमा के पास चंदेल जिले के खेगजॉय तहसील के न्यू समतल गांव के पास सशस्त्र कैडरों की आवाजाही की खुफिया जानकारी मिली। असम राइफल्स इकाई ने 14 मई 2025 को एक ऑपरेशन शुरू किया। ऑपरेशन के दौरान सैनिकों पर संदिग्ध कैडरों द्वारा गोलीबारी की गई। इस पर एक्शन लेते हुए 10 उग्रवादियों को ढेर कर दिया गया है और बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया गया। ऑपरेशन अभी भी जारी है…”

कुछ दिनों पहले भारत सरकार और भारतीय सेना ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए म्यांमार बॉर्डर को पूरी तरह सील कर दिया है और फ्री आवाजाही को बंद कर दिया गया है। हालाँकि मणिपुर की दो अहम जातियाँ नागा और कुकी ने इसका विरोध किया था लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा को देखते हुए ये करना जरूरी था। इसका असर भी दिखने लगा है और उग्रवादियों के मूवमेंट पर सेना आसानी से नजर बनाए रख पा रही है। पहले उग्रवादी मणिपुर में आतंक फैला कर म्यांमार भाग जाते थे।

उग्रवादी काफी समय से भारत-म्यांमार वाले इलाके में जोलैंड के रूप में नया राज्य बनाना चाहते हैं।

ड्रोन-मिसाइल दाग-दागकर पस्त हो गया पाकिस्तान, पर भारत में इस बार नहीं दिखी युद्ध काल की वह आपाधापी: आर्मी ब्रैट का सैल्यूट स्वीकार करिए PM मोदी

मैं पूजा राणा। कलम की सिपाही हूँ। आजकल दिल्ली में रहती हूँ। आर्मी ब्रैट हूँ। पिता के तबादलों के साथ ही मेरे दोस्त, स्कूल, शहर सब बदल जाते थे। पर इस यात्रा में जो कभी नहीं बदला, वह है सरहदों और वर्दी से मेरा रिश्ता।

भारतीय थल सेना की 24 साल तक सेवा करने वाले मेरे पिता दो साल पहले ही रिटायर हुए हैं। इस दौरान देश के सामने आई हर चुनौती को उन्होंने करीब से देखा। 1999 में पाकिस्तान के साथ हुई जंग के दौरान वे कारगिल में मोर्चे पर थे। उस समय मेरा जन्म भी नहीं हुआ था। लेकिन मेरे घर की दीवारों पर उस समय की किस्से-कहानियाँ अब भी अंकित हैं।

मेरी माँ ने कई बार सुनाया है कि कैसे कारगिल युद्ध के दौरान उनकी हर सुबह रेडियो से होती थी। रेडियो से चिपक कर घंटों युद्ध की खबरें सुनना ही उनकी दिनचर्या हो गई थी। वह मोबाइल-सोशल मीडिया का जमाना नहीं था। सूचना क्रांति दूर थी। लेकिन अपने बेटे की खबर लेने की मेरी दादी की जिद्द के आगे ये सब बाधा नहीं थी। उन्होंने किसी तरह पापा की यूनिट का नंबर खोज निकाला। पापा के कमांडिंग ऑफिसर से बात की।

माँ बताती हैं कि उस समय केवल सेना ही नहीं, पूरा देश भी लड़ रहा था। गाँव के लोग अनाज जमा करने लगे थे। किचन का सारा राशन सहेज कर रखा गया था। आशंका थी कि युद्ध का असर देश के भीतर नागरिकों पर भी पड़ सकता है। उन्हें सामान्य वस्तुओं की किल्लत भी झेलनी पड़ सकती है।

यानी, युद्ध भले सीमा पर लड़ा जा रहा था। भले लोगों के जज्बे में कोई कमी नहीं ​थी। लेकिन हर मन के एक कोने में कहीं न कहीं डर भी था और उससे उनकी सामान्य दिनचर्या भी प्रभावित थी।

युद्ध और अपने पड़ोस में बैठे आतंकी मुल्क (पाकिस्तान) की करतूतों से भले मेरा बचपन का वास्ता रहा हो, पत्रकारिता में आने के बाद भले मैंने रूस-यूक्रेन युद्ध की खबरों पर लगातार नजर रखी हो, पर युद्ध काल के उस ‘समय’ को मैंने जीवन में कभी महसूस नहीं किया था।

पर पहलगाम में इस्लामी आतंकियों ने जब धर्म पूछकर हिंदुओं का कत्लेआम किया, जब भारतीय सेना ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान में घुसकर आतंकियों के ठिकानों को तबाह कर दिया, बौखलाए पाकिस्तान ने जब देश के कई शहरों में ड्रोन-मिसाइल अटैक किए, कई जगहों से ब्लैकआउट की खबरें आने लगी, संघर्ष विराम का उल्लंघन कर रिहायशी इलाकों पर गोलाबारी हुई, यहाँ तक कि देश की राजधानी दिल्ली पर मिसाइल दागा गया जिसे रास्ते में ही सेना ने मार गिराया… मैंने उस डर को महसूस नहीं किया जो पहले से सुन रखा था।

जिस दिल्ली में मैं काम करती हूँ, वहाँ दिनचर्या सामान्य थी। सड़कों पर ट्रैफिक का वही शोर था। मेरठ के उस शहर में भी सब कुछ अपनी गति से चल रहा था, जहाँ आज मेरे रिटायर पिता रहते हैं। मेरे उस गाँव में भी सब कुछ सामान्य था, जहाँ 1999 में सब इकट्ठे होकर रेडियो पर कारगिल युद्ध की खबरें सुना करते थे। न अपने घरों में सामान जमा करने की कोई होड़ देखी। न ही किसी चेहरे पर यह भय दिखा कि अब क्या होगा।

आखिर क्या कारण था कि युद्ध काल को लेकर जैसे अनुभव मेरी मम्मी-दादी के रहे हैं, वैसा मेरा नहीं है? पाकिस्तान के ड्रोन मिसाइल अटैक से जब इसका विस्तार होने की आशंका थी, तब भी सामान्य भारतीयों के शिकन पर चिंता क्यों नहीं थी? 1971 के बाद जब देशभर में पहली बार ‘रेड सायरन’ की गूँज सुनाई पड़ी तो भी कहीं कोई पैनिक नहीं था?

इसका सबसे बड़ा कारण देश में उस नेतृत्व का होना है, जिसने आम लोगों में यह भरोसा पैदा किया है कि देश मजबूत हाथों में है। जिसने सेना का सशक्तिकरण और आधुनिकीकरण साथ-साथ किया है। इस सरकार ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से पहले भी सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक से देशवासियों को सुरक्षित होने का भरोसा दिलाया था। यह विश्वास पैदा किया था कि हम इस्लामी आतंकियों को पाकिस्तान में घुसकर मारने में सक्षम है। याद कीजिए नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने से पहले का वह समय, जब रक्षा मंत्री यह कहा करते थे कि हथियार खरीदने के लिए सरकार के पास पैसे नहीं है। जब राजनीति के लिए सेना के नाम का इस्तेमाल कर मीडिया में तख्तापलट के लिए सेना के आगरा से कूच करने की खबरें प्लांट करवाई गई थी।

युद्ध काल के उस भय को खत्म करने के लिए, हम में यह विश्वास पैदा करने के लिए, भारतीय सेना को गर्व के क्षण देने के लिए, भारत के पराक्रम का डंका बजाने के लिए इस आर्मी ब्रैट का सैल्यूट स्वीकार करिए प्रधानसेवक नरेंद्र मोदी जी!

बराक-8, हारोप, हेरोन… ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में मित्र राष्ट्र के हथियार ने भी दिखाया पराक्रम: जानिए पाकिस्तान को घुटने पर लाने में इजरायल-भारत की जुगलबंदी कितनी निर्णायक

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम स्थित बैसरन घाटी में 22 अप्रैल को हुए घातक आतंकी हमले में 26 हिंदू पर्यटकों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हुए। इस हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर है, जिससे दोनों देशों के बीच सीमावर्ती संघर्ष तेज़ हो गया। जवाबी कार्रवाई में ड्रोन, लड़ाकू विमान और मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। हालाँकि यह संघर्ष एक अनिश्चित युद्धविराम की घोषणा के साथ अचानक थम गया, लेकिन इस घटना ने भारत-पाक प्रतिद्वंद्विता को एक नए, अधिक खतरनाक चरण में प्रवेश करा दिया।

इस हमले का जवाब देने के लिए भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर‘ शुरू किया। इस ऑपरेशन में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। इस दौरान इजरायल के बनाए अत्याधुनिक हथियारों का खूब इस्तेमाल हुआ, जिसने भारत और इजरायल की गहरी दोस्ती और रक्षा सहयोग को दुनिया के सामने दिखाया।

भारत ने पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों पर हमला करने और उनकी मिसाइलों व ड्रोनों को नाकाम करने के लिए इजरायल, रूस और स्वदेशी रक्षा प्रणालियों का शानदार इस्तेमाल किया। इस ऑपरेशन में भारत ने अपनी तकनीकी ताकत का परिचय दिया। भारत, इजरायल, अमेरिका, रूस और फ्रांस जैसे देशों से हथियार खरीदने वाला दुनिया का एक बड़ा देश है।

हारोप ड्रोन

‘ऑपरेशन सिंदूर’ में इजरायल के हारोप ड्रोन ने पाकिस्तान की वायु रक्षा प्रणालियों पर सटीक हमले किए। इसे ‘आत्मघाती’ या ‘कामिकेज’ ड्रोन कहते हैं, जो रडार को खोजकर नष्ट करने में माहिर है। इन ड्रोनों ने पाकिस्तान के कई अहम ठिकानों पर हमला किया, जिसमें लाहौर की एक बड़ी वायु रक्षा सुविधा को तबाह कर दिया।

भारत ने पुष्टि की कि उसकी मानवरहित हवाई प्रणालियों और वायु रक्षा ग्रिड ने कई पाकिस्तानी ड्रोन, हथियारों और मिसाइलों को नष्ट किया, जो पठानकोट और श्रीनगर जैसे 15 भारतीय वायुसेना ठिकानों को निशाना बना रहे थे। भारत ने 2009 से 2019 के बीच इजरायल से कम से कम 25 हारोप ड्रोन खरीदे, जो अब सक्रिय हैं और इस ऑपरेशन में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) का हारोप ड्रोन और मिसाइल की खूबियों को विकसित किया गया है। यह वायु रक्षा इकाइयों और रडार जैसे बड़े लक्ष्यों को खुद खोजकर नष्ट कर सकता है। इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज (IISS) की रिपोर्ट के मुताबिक, हारोप भारत की मानव रहित सटीक हमला करने की क्षमता का अहम हिस्सा है।

हारोप एक सटीक आत्मघाती ड्रोन है, जिसे गहरे हमलों के लिए बनाया गया है। यह इलेक्ट्रो-ऑप्टिक सीकर की मदद से अलग-अलग दिशाओं से लक्ष्य को पहचान सकता है और नौ घंटे तक हवा में रह सकता है। यह सैटेलाइट जैमिंग (GNSS) और युद्धक्षेत्र में मानवीय दखल के खिलाफ मजबूत है, जिससे मुश्किल हालात में भी यह काम करने में सक्षम बना रहा है।

50 पाउंड के वारहेड से लैस हारोप, कैमरा और ऑपरेटर की मदद से चलते लक्ष्यों को ट्रैक कर सकता है या रेडिएशन सीकर से रडार साइट्स को खुद निशाना बना सकता है। अगर रडार पहले सक्रिय होकर बंद हो जाए, तो हारोप उसकी आखिरी जगह पर जाकर इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल तकनीक से उसे खोजकर नष्ट कर देता है। यह स्थिर और गतिशील दोनों तरह के जमीन पर मौजूद लक्ष्यों को निशाना बना सकता है।

हारोप को ट्रक, मोबाइल प्लेटफॉर्म या नौसैनिक जहाजों से लॉन्च किया जा सकता है और यह 600 किलोमीटर की दूरी या छह घंटे तक उड़ सकता है। इसे ऑपरेटर नियंत्रित कर सकता है या यह पूरी तरह आटोमेटिक तरीके से भी काम कर सकता है।

हेरोन एमके 2 यूएवी

हेरॉन Mk2 एक उन्नत मध्यम-ऊँचाई, लंबी उड़ान वाला (MALE) ड्रोन है, जिसे इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) ने विकसित किया है। यह भारतीय वायुसेना और सेना की निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाने में मदद करता है। नवंबर 2022 में भारतीय सेना ने दो हेरॉन Mk2 शामिल किए, जबकि सितंबर 2023 तक पूर्वोत्तर में दो और तैनात किए। अगस्त 2023 में भारतीय वायुसेना ने चार और नवंबर में दो और खरीदे।

यह ड्रोन 32,000 फीट की ऊंँचाई पर उड़ सकता है और 35,000 फीट तक जा सकता है। यह 40 घंटे से ज्यादा उड़ान भर सकता है, जिससे सीमा पर दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने और खुफिया जानकारी जुटाने में बहुत प्रभावी है। इसकी पेलोड क्षमता 500 किलोग्राम है, जिसमें उन्नत सेंसर, कैमरे और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध उपकरण लगाए जा सकते हैं।

यह ड्रोन दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने, समय से चेतावनी देने और युद्ध क्षति का आकलन करने में अहम भूमिका निभाता है। इसकी ऊँची उड़ान और लंबी अवधि की क्षमता इसे ज्यादातर जमीन आधारित खतरों से दूर रखती है, जिससे यह भारतीय वायुसेना की रणनीतिक ताकत बन गया है।

स्काईस्ट्राइकर के घूमते हथियार

स्काईस्ट्राइकर ड्रोन को इजरायल की एल्बिट सिक्योरिटी सिस्टम्स ने भारत की अल्फा डिजाइन टेक्नोलॉजीज के साथ मिलकर बनाया है। इसे 2021 में भारतीय सेना में शामिल किया गया। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में इन ड्रोनों का इस्तेमाल हुआ। इसे लोइटरिंग मुनिशन कहते हैं और इसे बेंगलुरु के पश्चिमी हिस्से में बनाया गया है।

यह ड्रोन मिसाइल की तरह हमला करता है, लेकिन यूएवी (UAV) की तरह उड़ता है। यह सटीक हथियार है, जिसे मैन्युअल या स्वायत्त रूप से चलाया जा सकता है। यह लक्ष्य क्षेत्र में मंडराकर लक्ष्यों को खोजता और नष्ट करता है। इसका कम शोर और कम ऊँचाई पर सीक्रेट तरीके से उड़ान इसे खुफिया कामों के लिए आदर्श बनाती है। इसकी रेंज 100 किलोमीटर है और इसमें 5 से 10 किलोग्राम का बम होता है।

स्काईस्ट्राइकर का इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन इसे सीक्रेट ऑपरेशनों के लिए बेहतर बनाता है। यह ऑपरेटर द्वारा बताए गए लक्ष्यों को खोजकर उन पर हमला कर सकता है। जीपीएस या कनेक्टिविटी न होने पर भी यह सटीक हमले कर सकता है। अगर कोई लक्ष्य न मिले, तो यह ऑपरेटर को सुरक्षित वापस लौटने या हमला रोकने की सुविधा देता है।

यह ड्रोन लंबी दूरी के सटीक हमलों के लिए किफायती यानी सस्ता भी है और जमीनी सेना को एयर फायर मिशनों में मदद करता है। बालाकोट हमले के बाद भारतीय सेना ने इमरजेंसी खरीदी के तहत 100 स्काईस्ट्राइकर ड्रोन खरीदे।

बराक-8

पाकिस्तान ने दिल्ली पर फतह-II बैलिस्टिक मिसाइल दागी, लेकिन भारत की बराक-8 मिसाइल रक्षा प्रणाली ने इसे हरियाणा के सिरसा में रोक दिया। बराक-8 को भारत और इजरायल ने मिलकर बनाया है। यह लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल है, जिसकी रेंज 70 किलोमीटर है और इसे 100 किलोमीटर तक बढ़ाया जा सकता है।

बराक को DRDO और इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज ने मिलकर संयुक्त रूप से विकसित किया। ‘बराक’ का मतलब हिब्रू में ‘बिजली’ होता है। यह मिसाइल मोबाइल लॉन्चर से नौसेना के जहाजों या जमीन पर इस्तेमाल हो सकती है। 275 किलोग्राम की यह मिसाइल 60 किलोग्राम का वारहेड ले जाती है, जो लक्ष्य के पास विस्फोट करता है। इसमें दोहरी पल्स रॉकेट मोटर और थ्रस्ट वेक्टर कंट्रोल है, जो इसे मैक 2 की गति देता है।

बराक-8 में दोतरफा डेटा लिंक, डिजिटल रडार, RF सेंसर और सिस्टम वाइड कम्युनिकेशन जैसी आधुनिक तकनीकें हैं। IAI ने 2021 में बताया कि इसने हवाई लक्ष्यों को रोकने और नष्ट करने में सफलता पाई। यह 360 डिग्री कवरेज देती है और दिन-रात, किसी भी मौसम में कई लक्ष्यों को निशाना बना सकती है।

बराक-8 मिसाइल प्रणाली लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों, क्रूज मिसाइलों, बैलिस्टिक मिसाइलों, एंटी-शिप मिसाइलों और मानव रहित हवाई वाहनों (UAVs) से सुरक्षा प्रदान करती है। इसका दूसरा संस्करण, एमआरएसएएम, एक भूमि-आधारित मिसाइल प्रणाली है, जिसमें मोबाइल लॉन्चर, ट्रैकिंग रडार, और कमांड और कंट्रोल सिस्टम शामिल हैं।

सीकर, एंडगेम एवियोनिक्स और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी भारत में विकसित तकनीकों के साथ, प्रणोदन रॉकेट सिस्टम और थ्रस्ट वेक्टर सिस्टम सहित कुछ अन्य घटक DRDO प्रयोगशालाओं द्वारा निर्मित किए गए हैं। इस प्रणाली को भारतीय नौसेना के प्रोजेक्ट 17 (ए) फ्रिगेट और विक्रमादित्य विमान वाहक नौका पर तैनात किया गया है, जिसमें रेंज 70 किलोमीटर तक है।

स्पाइस-2000 बम

इजरायल की स्पाइस-2000 किट आम बमों को सटीक स्टैंड-ऑफ हथियारों में बदल देती है, जो आतंकी ठिकानों को निशाना बनाते हैं और नागरिकों को कम नुकसान पहुँचाते हैं। इन्हें लड़ाकू विमानों से छोड़ा जाता है।

इन्हें इजरायल की राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स की अमेरिकी इकाई ने बनाया है। इसमें INS/GPS सिस्टम और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सीकर है, जो जीपीएस की गैर-मौजूदगी में भी सटीक हमले करता है। राफेल के मुताबिक, यह किट 1000 और 2000 पाउंड के बमों को सटीक हथियारों में बदल देती है।

राफेल वेबसाइट के आनुसार, “अत्यधिक परिष्कृत और युद्ध-सिद्ध स्पाइस गाइडेंस किट आज के जटिल होते युद्धक्षेत्रों की ज़रूरतों को पूरा करते हैं। वे 1000 पाउंड और 2000 पाउंड वर्ग के सामान्य उद्देश्य और प्रवेश वारहेड को सटीक स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक हथियारों में बदल देते हैं जो जीपीएस-रहित वातावरण में सटीक सटीकता के साथ एक साथ हमले करते हैं।”

स्पाइस-2000 बम में एडवांस नेविगेशन, मार्गदर्शन और होमिंग Dopamine एल्गोरिदम है, जो सटीकता के साथ कई लक्ष्यों पर हमला करता है। यह ‘फायर एंड फॉरगेट’ तकनीक पर काम करता है, यानी पायलट बम को मिशन सौंपता है और यह खुद लक्ष्य तक पहुँचता है। 900 किलोग्राम के वारहेड के साथ, यह कठोर लक्ष्यों को भेद सकता है।

26 फरवरी 2019 को बालाकोट हमले में भारतीय वायुसेना ने इन बमों का इस्तेमाल कर जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों को नष्ट किया। चार बम छतों से इमारतों में घुसे और सटीक हमला किया।

जब आतंकवादी सो रहे थे, भारतीय वायुसेना के विमानों ने पाँच स्पाइस-2000 बमों को दागा, जिनमें से कम से कम चार बम छतों के जरिए इमारत में घुस गए। इस सटीक हमले के दौरान, भारतीय वायुसेना के विमानों ने अपने लक्ष्यों पर बम गिराने के बाद तुरंत अपने ठिकानों पर वापसी की।

टैवोर X95 असॉल्ट राइफलें

2010 के दशक में भारत ने अपने विशेष बलों के लिए टैवोर X95 राइफलें शामिल कीं। बाद में इन्हें अन्य अर्धसैनिक बलों के लिए भी खरीदा गया। इजरायल वेपन्स इंडस्ट्रीज ने पुँज लॉयड रक्षा सिस्टम को इनके निर्माण का लाइसेंस दिया।

भारतीय सेना के विशेष बल, नौसेना के MARCOS, वायुसेना के गरुड़ कमांडो और सीमा सुरक्षा बल इन राइफलों का इस्तेमाल करते हैं। ये छोटी, बुलपप डिज़ाइन वाली राइफलें नजदीकी लड़ाई के लिए बेहतर हैं।

इन असॉल्ट राइफलों को पहले IWI से आयात किया जाता था, जो एक पूर्व इज़राइली सरकारी कंपनी थी, जिसे 2005 में निजीकरण के बाद स्वामित्व में लिया गया था। बाद में, ‘आत्मनिर्भर भारत’ कार्यक्रम के तहत इन्हें भारत में उत्पादित किया गया और हाल ही में एयरो इंडिया 2021 में प्रदर्शित किया गया, जहाँ इन हथियारों पर ‘मेड इन इंडिया’ का टैग लगा था।

ऑपरेशन सिंदूर

भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकवादी संगठनों से जुड़े 9 ठिकानों पर हमला करने के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया। यह ऑपरेशन 7 मई को सुबह 1:05 बजे शुरू हुआ और 23 मिनट तक चला। इस दौरान आर्मेमेंट एयर-सोल मॉड्यूलेयर (AASM) हैमर बम और स्कैल्प मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। इसके अतिरिक्त, विशेष लक्ष्यों को नष्ट करने के लिए स्काईस्ट्राइकर ड्रोन का भी उपयोग किया गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 100 आतंकी मारे गए, जिनमें जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मुहम्मद मसूद अजहर अल्वी के परिवार के लोग और कंधार अपहरण कांड के मास्टरमाइंड अब्दुल रऊफ अजहर शामिल थे। लश्कर-ए-तैयबा का कमांडर मुदस्सर (अबू जुंदाल) को भी ढेर कर दिया गया। पाकिस्तान ने जवाबी हमला करने की कोशिश की, लेकिन भारतीय सेना ने उसे नाकाम कर दिया।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ में इजरायली हथियारों का इस्तेमाल भारत और इजरायल के बीच मजबूत रक्षा सहयोग का प्रतीक है। बराक-8, हारोप, हेरॉन Mk2, स्काईस्ट्राइकर, स्पाइस-2000 और टैवोर X95 जैसे हथियारों ने भारत की सैन्य ताकत को बढ़ाया। यह दोस्ती न सिर्फ रक्षा क्षेत्र में, बल्कि तकनीक और रणनीति के आदान-प्रदान में भी गहरी होती जा रही है, जो दोनों देशों को और मजबूत बनाएगी।

मूल रूप से ये रिपोर्ट अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित की गई है। इसे पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

राजस्थान मे 1000+ बांग्लादेशी घुसपैठिए पकड़े, डिटेंशन सेंटर में किया बंद: 140+ को किया डिपोर्ट, एक्शन में भजनलाल सरकार

राजस्थान की भजनलाल सरकार ने बांग्लादेशी घुसपैठियों पर तगड़ा एक्शन लिया है। राजस्थान के भीतर सरकार ने 1000 से अधिक बांग्लादेशियों को गिरफ्तार किया है। इन्हें डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। इन्हें वापस भेजने की कार्रवाई भी चालू हो गई है। इनका पहला जत्था भरके बांग्लादेश रवाना कर दिया गया है।

यह कार्रवाई भजनलाल सरकार ने बुधवार (14 मई, 2025) को की है। बुधवार को राजस्थान पुलिस ने 148 बांग्लादेशी घुसपैठियों को पकड़ कर जोधपुर में वायुसेना के एयरबेस पर छोड़ा है। यहाँ से उन्हें एक विशेष विमान के जरिए पश्चिम बंगाल भेजा गया है। यहाँ BSF से सहयोग करके उन्हें बांग्लादेश भेजा जाएगा।

राजस्थान में पुलिस ने अब तक 1008 बांग्लादेशी घुसपैठियों को पकड़ा है। यह बांग्लादेशी घुसपैठिए राजस्थान के 17 जिलों से गिरफ्तार किए गए हैं। जयपुर रेंज से सबसे बड़ी संख्या में घुसपैठिए गिरफ्तार हुए हैं। सबसे अधिक गिरफ्तारियाँ सीकर में हुई हैं।

सीकर से पुलिस ने 393 बांग्लादेशी घुसपैठिए गिरफ्तार किए हैं। इनमें से अधिकांश ईंट भट्ठों पर काम कर रहे थे। राजस्थान में बांग्लादेशी घुसपैठियों को पकड़ने के बाद उन्हें जयपुर स्थित एक डिटेंशन सेंटर में रखा गया था। राजस्थान में 6 ऐसे डिटेंशन सेंटर बनाए गए हैं।

जो घुसपैठिए अभी राजस्थान के भीतर बचे हैं, जल्द ही उन्हें भेजा जाएगा। बांग्लादेश सरकार को भी उसके नागरिकों के विषय में सूचना दी जा रही है। यह कार्रवाई 22 अप्रैल, 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद चालू हुई थी। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राज्य भर में घुसपैठिए ढूँढने का आदेश दिया था।

राजस्थान में इन्हें पकड़ने के लिए विशेष टीमों का भी गठन किया गया था। इन टीमों ने राजस्थान में लोगों की आईडी एवं उनके फोन तथा बैंक खातों की जाँच करके नागरिकता का पता लगाया है। राजस्थान के अलावा भी देश के बाकी राज्यों में घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई हो रही है।

इससे पहले असम के मटिया डिटेंशन कैंप में रखे गए 100 से अधिक रोहिंग्या भी वापस बांग्लादेश भेज दिए गए थे। इसकी पुष्टि असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने भी की थी।