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वसीम रिजवी के काफिले पर पथराव: कुरान से 26 आयतों को हटाने की माँग पर पहले भी मिल चुकी हैं धमकियाँ

शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन वसीम रिजवी पर सोमवार (28 जून) को लखनऊ में हमला हुआ। उनके काफिले पर पथराव किया गया है जिसमें रिजवी बाल-बाल बच गए। यूपी पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।

मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक वसीम रिजवी अपने पुराने घर कश्मीरी मोहल्ले से अपने नए फ्लैट के लिए जा रहे थे। उनके काफिले में दो गाड़ियाँ और भी थीं जो सुरक्षा कारणों से हमेशा उनके काफिले में शामिल रहती हैं। जैसे ही उनका काफिला कश्मीरी मोहल्ले से निकलकर चौकी मंडी इलाके में पहुँचा, कुछ पत्थरबाजों ने उनकी गाड़ियों पर पथराव शुरू कर दिया।

रिजवी ने बताया कि अचानक शुरू हुए इस पथराव से वो घबरा गए और गाड़ी रोकने की कोशिश भी की लेकिन तब तक पत्थरबाज वहाँ से भाग चुके थे। रिजवी ने बताया कि इसकी शिकायत चौक कोतवाली में दर्ज कराई गई है। इसके बाद पुलिस ने घटना की छानबीन शुरू कर दी है और घटना स्थल पर लगे सीसीटीवी कैमरों की जाँच की जा रही है।

हालाँकि वसीम रिजवी हमेशा ही इस्लाम में सुधार की बातों को लेकर कट्टरपंथियों के निशाने पर रहते हैं। हाल ही में रिजवी ने सुप्रीम कोर्ट में कुरान से 26 आयतों को हटाने के लिए याचिका दायर की थी। रिजवी के अनुसार कुरान की ये आयतें आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली हैं, जिन्हें बाद में शामिल किया गया। इसके बाद से ही लगातार रिजवी को इस्लामी कट्टरपंथियों से जान से मारने की धमकी मिलती रही है। इसी धमकी के कारण उनकी सुरक्षा भी बढ़ाई गई थी।

रिजवी ने यह भी दावा किया था कि उन्होंने कुरान के 26 विवादित आयतों को हटा कर नया कुरान-ए-मजीद तैयार किया है। इसको लेकर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिखा था। वसीम रिजवी ने बताया था कि कुरान की इन 26 आयतों में अत्याचार, धार्मिक उन्माद फैलाने वाली बातों का जिक्र है, इसलिए उन्होंने नई कुरान लिखी और प्रधानमंत्री को चिठ्ठी लिख माँग की है कि पुरानी को बैन करें।

रिजवी की याचिका के बाद से ही कई मुस्लिम मौलानाओं और संगठनों ने रिजवी का विरोध किया। कई मुस्लिम नेताओं ने तो रिजवी का सर काटकर लाने पर ईनाम की घोषणा भी की थी।

लश्कर के टॉप कमांडर नदीम अबरार को पुलिस ने श्रीनगर से किया गिरफ्तार: बड़ी आतंकी साजिश नाकाम

जम्मू-कश्मीर में बड़े आतंकी हमले की साजिश को नाकाम कर दिया गया है। जम्मू हवाई अड्डे पर ड्रोन के माध्यम से दोहरे विस्फोट के एक दिन बाद सोमवार (28 जून 2021) को लश्कर-ए-तैयबा के टॉप कमांडर नदीम अबरार को पुलिस ने श्रीनगर से गिरफ्तार कर लिया है।

बताया जा रहा है कि नदीम अबरार कई आतंकी हमलों और हत्याओं में शामिल रहा है। पिछले दिनों लावेपोरा में हुए आतंकी हमले में भी उसकी अहम भूमिका थी, जिसमें सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF) के तीन जवान शहीद हो गए थे। कश्मीर के पुलिस महानिरीक्षक (IG) विजय कुमार ने नदीम की गिरफ्तारी की पुष्टि की है।

विजय कुमार ने कहा, “नदीम अबरार की गिरफ्तारी पुलिस की बड़ी सफलता है। बडगाम के रहने वाले इस आतंकी की पुलिस कई दिनों से तलाश कर रही थी। यह अवंतीपोरा में हुए आतंकी हमले के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक है। उस हमले में विदेशी आतंकी भी शामिल थे।” बताया जा रहा है कि सुरक्षाबलों ने अबरार और एक अन्य संदिग्ध को शहर के बाहरी इलाके पारिमपोरा में चेकपोस्ट पर दबोचा। सुरक्षाबलों ने उसके कब्जे से पिस्टल और एक ग्रेनेड बरामद किया है।  

वहीं, CNN-News18 को मिली जानकारी के मुताबिक, कश्मीर के शोपियां से तीन आतंकवादियों को गिरफ्तार किया गया है। आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा बड़े हमलों की तैयारी कर रहा था। वह कश्मीर घाटी के भीड़-भाड़ वाले बाजारों में हमलों की योजना बना रहा था। रविवार (27 जून 2021) को जम्मू एयरपोर्ट पर हुए हमलों के पीछे भी इस्लामिक आतंकी संगठन लश्कर का ही हाथ बताया जा रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, जम्मू पुलिस ने नासिर-उल-हक नाम के एक आतंकी को 6 किलोग्राम आईईडी विस्फोटक सामग्री के साथ पकड़ा था। जम्मू के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक चंदन कोहली ने कहा कि नासिर की गिरफ्तारी के साथ ही बड़े आतंकी हमले को नाकाम करने में सफलता मिली है। उन्होंने नासिर की पहचान रामबन के ज़ैनहाल-बनिहाल के निवासी के रूप में की है। उनका कहना है कि नासिर पाकिस्तान और दक्षिणी कश्मीर के शोपियां में बैठे आतंकी सरगनाओं के संपर्क में था।

एसएसपी ने कहा कि नासिर को लश्कर-ए-तैयबा के फ्रंटल ग्रुप द रेजिस्टेंस फोर्स ने जम्मू के भीड़ वाले कई इलाकों में आईईडी लगाने का काम सौंपा था। उन्होंने कहा कि पुलिस की टीम ने उसको बरमिनी रोड पर नियमित जाँच के दौरान पकड़ा था, जहाँ वह पीले रंग का बैग लेकर बठिंडी की ओर जा रहा था। पुलिस को देखकर उसने भागने की कोशिश की, लेकिन उसे धर दबोच लिया गया। कोहली ने बताया कि नासिर के बैग की तलाशी लेने पर उसमें से आईईडी बरामद हुआ, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। नासिर के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। एसएसपी ने कहा कि जाँच अभी शुरुआती चरण में है। जाँच आगे बढ़ने पर और गिरफ्तारियाँ होने की संभावना है।

बता दें कि जम्मू हवाई अड्डा परिसर(एयरफोर्स के टेक्निकल एरिया) में रविवार (27 जून 2021) को रात करीब दो बजे महज पाँच मिनट के अंतराल में दो धमाके हुए थे, जिसके बाद से पूरे जम्मू-कश्मीर में पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियाँ अलर्ट पर हैं। कश्मीर में सुरक्षा बल एक्शन मोड में हैं और हर तरफ सुरक्षा एजेंसियाँ दबिश दे रही हैं।

धर्मांतरण रैकेट में विदेशी फंडिंग का खुलासा, UK-मिडिल ईस्ट से आए करोड़ों: इरफ़ान, मन्नान सहित 3 को ATS ने किया गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश में सामूहिक धर्मांतरण रैकेट मामले में विदेशी फंडिंग का खुलासा हुआ है। इसमें हवाला के माध्यम से फंडिंग की बात सामने आई है जिसमें कतर, दुबई और आबूधाबी से ट्रांजेक्शन होने के सबूत मिले हैं। साथ ही उत्तर प्रदेश एटीएस ने इस मामले में तीन अन्य आरोपितों को भी गिरफ्तार किया है।

यूपी एडीजी (लॉ &ऑर्डर) की प्रेस कांफ्रेंस में बताया गया है कि उमर गौतम जो पूर्व से ही हिरासत में है, उसने इरफान के साथ मिलकर प्रलोभन देकर धर्मांतरण करने का कार्य किया है। इनका पूरा गैंग था जो प्रलोभन देकर लोगों के धर्म परिवर्तन का कार्य करता था।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी कहा गया है कि सामूहिक धर्मांतरण के इस मामले अलीगढ़, बनारस, नोएडा और सहारनपुर समेत 27 जिलों के एसपी को पत्र लिखकर सत्यापन करवाया जा रहा है। आरोपितों द्वारा कई मूक-बधिरों का धर्मांतरण कराया गया। इन मूक-बधिरों के ब्रेन वाश करने का काम एटीएस द्वारा गिरफ्तार किए गए राहुल भोला के द्वारा किया जाता था।

जाँच में विदेशी फंडिंग का एंगल भी सामने आया है। एटीएस के अनुसार 2 करोड़ रुपए यूनाइटेड किंगडम से आए जिनका उपयोग मुख्य आरोपित उमर गौतम और मुफ्ती कासिम के द्वारा किया गया। एटीएस के मुताबिक यूके से यह फंडिंग गुजरात के किसी व्यापारी के खाते के माध्यम से की गई जिसकी जानकारी को वैरिफाई किया जा रहा है। इस पूरी फंडिंग में लगातार फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट अधिनियम का उल्लंघन होता रहा और जिसकी जाँच ईडी के द्वारा की जा रही है।

साभार- दैनिक जागरण

इसके अलावा यह जानकारी भी सामने आ रही है कि एटीएस को दोनों मुख्य आरोपितों के बैंक खातों में मध्य-पूर्वी देशों से फंडिंग के भी सबूत मिले हैं। इस पूरे मामले में विभिन्न पहलुओं पर जाँच की जा रही है। हालाँकि एटीएस ने आज (28 जून) ही तीन अन्य आरोपितों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपितों में मन्नू यादव उर्फ अब्दुल मन्नान निवासी गुरुग्राम हरियाणा, इरफान शेख निवासी बीड महाराष्ट्र और राहुल भोला निवासी नई दिल्ली शामिल हैं। इसके अलावा शनिवार (26 जून) को एटीएस मुख्य आरोपितों को एनसीआर के आसपास उन 4 जिलों में लेकर गई जहाँ आरोपितों के द्वारा बड़े पैमाने पर धर्मांतरण के उद्देश्य से यात्राएं की गई।

उत्तर प्रदेश में भूचाल मचा देने वाले इस धर्मांतरण मामले में फतेहपुर के नूरुल हुदा इंग्लिश मीडियम स्कूल की भूमिका भी संदिग्ध रही है। जाँच के दौरान यह जानकारी सामने आई थी कि नूरुल हुदा स्कूल का उपयोग उमर गौतम अपने धर्मांतरण के कार्य के लिए करता था। इस स्कूल में पढ़ाने वाली अंग्रेजी की एक टीचर ने भी स्कूल में इस्लामी धर्म परिवर्तन के मुद्दे पर आवाज उठाई थी। हिन्दू बच्चों को उर्दू और अरबी पढ़ाने का विरोध करने पर अंग्रेजी की टीचर को स्कूल से निकाल दिया गया था और उनके साथ बदतमीजी भी की गई थी। हालाँकि ऑपइंडिया की रिपोर्ट के बाद राष्ट्रीय बाल अधिकार आयोग ने फतेहपुर के DM और SP को तलब किया था।  

ज्ञात हो कि यूपी ATS ने मूक बाधिर छात्रों व कमजोर आय वर्ग के गरीबों-असहायों को धन, नौकरी व शादी करवाने का प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराने वाले एक बड़े गिरोह के दो मौलानाओं को गिरफ्तार किया था। इन दोनों पर अब तक करीब 1000 मूक बधिर, महिलाएँ और बच्चों को निशाना बनाकर धर्म परिवर्तन कराने का आरोप है। यही नहीं, इस मामले में यूपी पुलिस ने आईएसआई और विदेशी फंडिंग होने का शक भी जताया है। 

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ये इस्लामी गिरोह ब्रेनवाश के जरिए हिंदुओं का धर्मांतरण कराते थे। गिरफ्तार आरोपितों में मुफ्ती काजी जहाँगीर आलम कासमी और मोहम्मद उमर गौतम शामिल हैं। उमर गौतम का खुद इस्लामीकरण हुआ था।

फेसबुक व गूगल को समन, 29 जून को पेश होने का आदेश: शशि थरूर की अध्यक्षता वाली स्थायी समिति करेगी पूछताछ

केंद्र सरकार के नए आईटी नियमों को लेकर सोशल मीडिया दिग्गज कंपनी ट्विटर के साथ विवाद जारी है। इस बीच कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर की अध्यक्षता वाली सूचना प्रौद्योगिकी पर संसद की स्थाई समिति ने नागरिकों के अधिकारों की रक्षा और सोशल मीडिया एवं ऑनलाइन समाचार मीडिया प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग को रोकने के लिए फेसबुक और गूगल को समन जारी किया है। समिति ने आईटी दिग्गजों को मंगलवार (29 जून 2021) को पेश होने को कहा है।

यह बैठक कल शाम चार बजे होगी। केंद्र सरकार के नए आईटी नियमों के पालन को लेकर सरकार और ट्विटर के बीच जारी विवाद की पृष्ठभूमि में यह बैठक हो रही है। संसद भवन एनेक्सी में समिति के सदस्यों, सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधिकारियों और फेसबुक एवं गूगल के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में यह बैठक होगी।

गौरतलब है कि केरल के तिरुवंतपुरम से कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर की अध्यक्षता वाली संसद की स्थायी समिति में 31 सदस्य शामिल हैं, जिनमें 21 लोकसभा और 10 राज्यसभा के सदस्य हैं।

नागिरकों के अधिकारों की रक्षा पर होगी बात

मंगलवार (29 जून 2021) को होने वाली इस बैठक के बारे में बताया गया है कि इसमें डिजिटल न्यूज मीडिया प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग और डिजिटल स्पेस में महिला सुरक्षा पर जोर देने को लेकर हो रही है। इस बैठक में समिति दिग्गज आईटी कंपनियों से जानना चाहेगी कि उन्होंने अपने प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग को रोकने के लिए क्या कदम उठाए हैं। इसके बाद 6 जुलाई 2021 को समिति की अगली बैठक में आईटी मिनिस्ट्री के प्रतिनिधि कमेटी के सामने इससे जुड़े सबूत रखेंगे। रिपोर्ट के मुताबिक समिति और फेसबुक, गूगल और ट्विटर सहित सोशल मीडिया साइटों के प्रतिनिधियों के बीच दो बैठकें हो चुकी हैं।

केंद्रीय मंत्री के अकाउंट को ट्विटर ने बंद कर दिया था

केंद्र सरकार के साथ जारी खींचतान के बीच पिछले हफ्ते ट्विटर ने केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद के अकाउंट को भी बंद कर दिया था। प्रसाद ने कहा था कि उन्हें लगभग एक घंटे तक अपने ट्विटर अकाउंट तक पहुँच से वंचित रखा गया था। वहीं, कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी कहा कि कॉपीराइट मुद्दे पर उन्हें भी इसी समस्या का सामना करना पड़ा।

थरूर ने यह भी कहा कि वह अपने और रविशंकर प्रसाद के अकाउंट को कुछ देर के लिए बंद करने के मामले में ट्विटर इंडिया से स्पष्टीकरण माँगेंगे। थरूर ने ट्वीट किया, “सूचना प्रौद्योगिकी पर संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष के रूप में मैं कह सकता हूँ कि हम ट्विटर इंडिया से आरएस प्रसाद और मेरे खातों को बंद करने और भारत में संचालन के दौरान उनके द्वारा पालन किए जाने वाले नियमों और प्रक्रियाओं के लिए स्पष्टीकरण माँगेंगे।”

सुप्रीम कोर्ट ने नूँह में हिंदुओं की सुरक्षा देने वाली याचिका को किया खारिज, कहा- ‘मीडिया रिपोर्ट पर सुनवाई नहीं’

सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार (28 जून 2021) को हरियाणा के मुस्लिम बहुल नूँह जिले (मेवात) में हिंदुओं को सुरक्षा देने की माँग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। वकील विष्णुशंकर जैन के जरिए वकीलों और एक्टिविस्टों के एक समूह ने यह याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं ने इसे कट्टरपंथी संगठनों की साजिश बताया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक याचिका में कहा गया है, “वहाँ कई हिंदुओं को जबरन इस्लाम कबूल करवाया गया है। कई महिलाओं व लड़कियों का अपहरण और उनका बलात्कार किया गया है। यहाँ हिंदू महिलाएँ बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं हैं। मुसलमानों ने अनुसूचित जाति के लोगों पर भारी अत्याचार किए हैं।”

याचिका में कहा गया है कि नूँह जिले में पुलिस, प्रशासन और प्रदेश सरकार वहाँ हिंदुओं की जिंदगी और उनकी स्वतंत्रता को बरकरार रखने में पूरी तरह से असफल साबित हो रहे हैं। याचिका में दावा किया गया है कि नूँह में वर्ष 2011 में 20 फीसदी हिंदू थे, लेकिन अब ये घटकर 10-11 फीसदी रह गए हैं। वहीं तब्लीगी जमात के संरक्षण में इस्लाम को मानने वालों की आबादी तेजी से बढ़ी है।

इस मामले में याचिकाकर्ताओं ने उस चार सदस्यीय कमेटी की रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें कमिटी के सदस्यों ने 31 मई 2020 को नूँह के प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर अपनी रिपोर्ट सीएम मनोहर लाल खट्टर को सौंपी थी। याचिका में कहा गया है, “मुसलमानों द्वारा उन पर किए गए कई जघन्य अपराधों और अत्याचारों के लिए हिंदुओं ने कई एफआईआर और शिकायतें दर्ज कराई हैं, जिस पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं की गई है।”

याचिकाकर्ताओं ने सर्वोच्च न्यायालय में कहा कि हरियाणा का नूँह जिला एंटी नेशनल तत्वों से प्रभावित हो चुका है और वहाँ का हिंदू समुदाय जानवरों की तरह जीवन जीने के लिए मजबूर है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट से सीबीआई, एनआईए और सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त जज की वाली एक एसआईटी के गठन की माँग की गई है, ताकि जबरन धर्मान्तरण, हिंदू महिलाओं और नाबालिग लड़कियों के बलात्कार के आरोपों की जाँच की जा सके। इसके साथ ही शीर्ष कोर्ट से बीते 10 सालों में हिंदुओं द्वारा दबाव में की गई बिक्री को रद्द करने की माँग की गई है।

इस मामले की सुनवाई सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश एनवी रमणा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय खंडपीठ ने की। इसमें सीजेआई के अलावा जस्टिस ऋषिकेश रॉय और एएस बोपन्ना भी शामिल रहे। सुनवाई की शुरुआत में ही चीफ जस्टिस एन वी रमणा ने कहा, “हम अखबार की खबरों के आधार पर इस याचिका पर सुनवाई नहीं कर सकते हैं।” कोर्ट ने एडिशनल एफिडेविड के बारे पूछताछ के बाद हिंदुओं की सुरक्षा की माँग वाली याचिका को खारिज कर दिया।

हिंदुओं पर अत्याचार और धर्मान्तरण का अड्डा बना मेवात

राजस्थान और हरियाणा में आने वाला मेवात क्षेत्र लंबे समय से अपराध का केंद्र रहा है। यह संगठित अपराध, पशु तस्करी और अवैध रोहिंग्याओं का केंद्र रहा है।

इससे पहले फरवरी 2020 में मेवात के तवाडु के एक गाँव में एक विवाहिता के अपहरण और गैंगरेप की खबर सामने आई थी। पीड़िता का सितंबर 2019 में अपहरण कर लिया गया था और उसे बंदी बनाकर रखा गया था, लेकिन 15 जनवरी 2020 को वह आरोपितों के चंगुल से भाग निकली। कैद से भागने के बाद उसने पाँच लोगों पर अपहरण और महीनों तक सामूहिक बलात्कार करने का आरोप लगाया था। महिला ने बताया था कि कैद में रखने के दौरान आरोपी उसे ड्रग्स देते थे और गैंगरेप करते थे। पीड़िता ने बताया था कि अपहरणकर्ता उसका अश्लील वीडियो भी शूट करते थे और उसे इंटरनेट पर डालने की धमकी देते थे।

इसी तरह सितंबर 2020 में इस्माइल, इरशाद और साहिर ने एक 15 वर्षीय नाबालिग का अपहरण कर लिया था। आरोपितों ने उसे नशीला पदार्थ खिलाकर उसके साथ गैंगरेप किया। नूँह के पिनाँगवा गाँव में हुई इस वारदात में नाबालिग के साथ 28 घंटे तक गैंगरेप किया गया और उसे प्रताड़ित किया गया। आरोपित लड़की के परिचित ही थे। पीड़िता ने बताया था कि वह सुबह घूमने के लिए बाहर गई थी, इसी दौरान इस्माइल ने उसे बाजरे के खेत में ले जाने का लालच दिया और उसके साथ रेप किया। करीब 2 घंटे बाद दूसरा आरोपित साहिर आया और उसने भी उसके साथ रेप किया। बाद में इरशाद ने भी उसके साथ वही हरकत की। पीड़िता ने अपने बयान में बताया था कि आरोपितों ने उसका रेप करने से पहले उसे नशीला पदार्थ खिलाया था।

इसी तरीके से पिछले साल अक्टूबर में हरियाणा के फरीदाबाद में निकिता तोमर नाम की 21 वर्षीय छात्रा के साथ लव जिहाद और उसका धर्मान्तरण कराने की कोशिश की गई थी। नहीं मानने पर आरोपित ने गोली मारकर निकिता की हत्या कर दी थी। फरीदाबाद के बल्लभगढ़ में अग्रवाल कॉलेज के बाहर दो लोगों ने दिनदहाड़े उसकी गोली मारकर हत्या कर दी थी। इनमें से एक तौसीफ उसे लगातार परेशान कर रहा था। निकिता ने तौसीफ के खिलाफ छेड़छाड़ और उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन बाद में समझौता हो गया था।

हत्या से एक दिन पहले ही निकिता ने आरोपित तौसीफ के खिलाफ परेशान करने और धर्मान्तरण कराने की कोशिश करने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोपितों ने अग्रवाल कॉलेज के बाहर जब निकिता को गोली मारी तो वो घटना वहीं पर लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। हत्या का यह वीडियो वायरल हो गया था। इसके बाद पुलिस ने तौसीफ और उसके साथी रेहान को गिरफ्तार कर लिया। तोमर की हत्या का मुख्य आरोपित तौसीफ भी मेवात का रहने वाला था, जो कट्टरपंथी इस्लामियों द्वारा बड़े पैमाने पर हिंदू महिलाओं के धर्मांतरण, अपहरण और बलात्कार के लिए बदनाम है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने नए IT नियमों पर रोक लगाने से किया इनकार: द वायर, क्विंट, ऑल्ट न्यूज ने दायर की थी याचिका

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार (28 जून 2021) को डिजिटल मीडिया के लिए बनाए गए नए आईटी नियमों पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। हाईकोर्ट के जस्टिस सी हरि शंकर और सुब्रमण्यम प्रसाद की अवकाश पीठ ने कहा कि वह इस समय ऐसा आदेश पारित करने के लिए याचिकाकर्ताओं से सहमत नहीं है।

दरअसल, ‘फाउंडेशन फॉर इंडिपेंडेंट जर्नलिज्म, द वायर, द क्विंट डिजिटल मीडिया लिमिटेड और ऑल्ट न्यूज चलाने वाली कंपनी प्रावदा मीडिया फाउंडेशन ने सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियमावली, 2021 (आईटी नियम 2021) पर रोक लगाने का अनुरोध किया था।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्हें एक ताजा नोटिस जारी किया गया है, जिसके तहत उन्हें नए आईटी नियमों का पालन करना होगा। अगर उन्होंने ऐसा नहीं किया तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसको लेकर जस्टिस सी हरि शंकर और जस्टिस सुब्रमण्यम ने कहा कि इन कंपनियों को केवल नए IT कानून का पालन करने के लिए नोटिस जारी किया गया था, जिस पर कोई रोक नहीं है।

पीठ ने कहा, ”हम आपसे सहमत नहीं हैं। आप चाहते हैं तो हम एक विस्तृत आदेश जारी कर देंगे या आप चाहते हैं तो हम इसे रोस्टर बेंच के सामने दोबारा अधिसूचित कर देंगे।” द वायर, द क्विंट डिजिटल मीडिया लिमिटेड और ऑल्ट न्यूज मीडिया कंपनियों की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील नित्य रामकृष्णन ने हाईकोर्ट से अनुरोध किया है कि छुट्टियों के बाद कोर्ट खुलने पर इस मामले को सूचीबद्ध किया जाए

मालूम हो कि याचिका में नए आईटी नियमों को निष्प्रभावी करने का अनुरोध किया गया था, क्योंकि यह समाचारों एवं समसामयिकी के प्रकाशकों को परिभाषित करता है और उन पर लागू होता है। साथ ही इसमें यह भी कहा गया था कि ये आने वाले समय में डिजिटल न्यूज मीडिया को भारी नुकसान पहुँचाने वाले हैं और उनके अधिकारों का हनन करते हैं।

बता दें कि ये नियम डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के यूजर्स को उनके अधिकारों के उल्लंघन के मामले में उनकी शिकायतों के समाधान होने और इनकी जवाबदेही तय करने के लिए बनाए गए हैं। संसदीय समिति ने भी आपत्तिजनक कंटेंट्स के मूल निर्माता की पहचान को सुनिश्चित करने की सिफारिश की थी। सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकार को ऐसे प्लेटफॉर्म्स पर चाइल्ड पोर्नोग्राफी, रेप और गैंगरेप की तस्वीरों, वीडियो तथा साइट को खत्म करने के लिए दिशानिर्देश तय करने को कहा था।

अब्दुल बन गया देशराज, किसान की बेटी से रेप कर बनाया वीडियो: किडनैप कर धर्मांतरण-निकाह

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले से लव जेहाद का मामला सामने आया है। आरोपित मुस्लिम युवक ने पहचान छुपाकर एक हिन्दू किसान की बेटी के साथ बलात्कार किया और उसका वीडियो बना लिया। इसके बाद ब्लैकमेल कर पीड़िता का धर्म परिवर्तन करवाया और उससे निकाह कर लिया। आरोपित को बाराबंकी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

घटना बाराबंकी जिले के कुर्सी थाना क्षेत्र अंतर्गत अमरसंडा गाँव की है। अपर पुलिस अधीक्षक अवधेश सिंह ने बताया है कि अमरसंडा गाँव के एक किसान ने थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। किसान ने शिकायत में बताया था कि अब्दुल वहाब नाम का एक युवक दो साल पहले बटाई पर उसकी जमीन में खेती कराने लगा। पीड़िता के पिता ने आरोप लगाया कि वहाब ने अपनी पहचान छुपाए रखी और अपना नाम देशराज गौतम बताया। इसके अलावा वहाब ने अपने भाई का नाम हंसराज बताया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार वहाब का किसान के घर आना-जाना लगा रहा। इस दौरान वहाब ने पीड़िता को अपने प्रेम जाल में फँसा लिया। एक दिन उसने मौका पाकर किसान की बेटी का बलात्कार किया और उसका वीडियो बना लिया। बाद में उस वीडियो के दम पर पीड़िता को ब्लैकमेल करते हुए वहाब धर्म परिवर्तन करने और निकाह करने का दबाव बनाने लगा। इसमें असफल रहने पर वहाब ने पीड़िता का 20 जून को अपहरण कर लिया। परिजनों की शिकायत पर 23 जून को पुलिस ने देवां कोतवाली क्षेत्र के पीड़ गाँव से अब्दुल रशीद के घर से पीड़िता को बरामद किया। इसके साथ ही पुलिस ने आरोपित वहाब को भी गिरफ्तार कर लिया है।

पुलिस की हिरासत में आने के बाद दोनों के निकाह का मामला सामने आया। वहाब ने एक विवाह समिति का प्रमाण-पत्र भी दिखाया जिसमें पीड़िता का नाम बदलकर सिमरन लिखाया गया है। इसके अलावा प्रमाण-पत्र में शादी की तारीख 15 मार्च 2020 भी दर्ज है।

इस मामले में न्यूज18 की खबर के मुताबिक एक हिन्दूवादी संगठन का यह भी आरोप है कि आरोपित वहाब पहले से शादीशुदा है और उसका एक पाँच साल का लड़का भी है। इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि आरोपित पहले भी तीन लड़कियों के साथ ऐसा कर चुका है। अपर पुलिस अधीक्षक अवधेश सिंह ने बताया है कि मामले की छानबीन की जा रही है।

बारातियों को दावत में नहीं मिली मटन करी, गुस्से में दूल्हे ने तोड़ी शादी: लौटने से पहले दूसरी महिला संग किए हाथ पीले

ओडिशा से एक अनोखा मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि शादी में दुल्हन के परिवार वालों द्वारा मटन करी नहीं परोसे जाने से दूल्हा आग-बबूला हो गया और इतनी छोटी-सी बात पर शादी तोड़ दी। रिपोर्ट्स के अनुसार, जब शादी की रस्में निभाई जा रही थीं तभी 27 वर्षीय दूल्हे रमाकांत पात्रा को पता चला कि बरातियों को खाने में मटन करी नहीं परोसी गई। इसकी वजह से वह गुस्सा हो गया और शादी की रस्में शुरू होने से पहले ही वहाँ से चला गया। यह घटना शुक्रवार (25 जून) की बताई जा रही है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह अनोखी घटना जाजपुर जिले के सुकिंडा की है। पड़ोसी क्योंझर जिले के रहने वाले पात्रा की शादी सुकिंडा के बांधगाँव की एक लड़की से होनी थी। दूल्हा और बाराती जब शादी में पहुँचे तो दुल्हन के परिवार वालों ने उनका जमकर स्वागत किया। जब बारातियों को खाने के लिए भोजन स्थल पर ले जाया गया तो वहाँ उन्हें पता चला कि शादी की दावत में मटन करी शामिल ही नहीं है। मेन्यू में मटन की कमी से नाराज दूल्हे के पक्ष ने कथित तौर पर दुल्हन के परिवार वालों के साथ बहस की।

ये सब देखने के बाद दूल्हा रमाकांत पात्रा ने शादी तोड़ने का फैसला कर लिया। हालाँकि, दुल्हन पक्ष ने उसे मनाने की बहुत कोशिश की, इसके बावजूद वह अपनी बात पर अड़ा रहा। इसके बाद दूल्हे की बारात बिना शादी किए ही वहाँ निकल गई। वे कथित तौर पर बाकी दिन उसी ब्लॉक में एक रिश्तेदार के यहाँ रुके थे। इस दौरान पात्रा ने घर लौटने से पहले उसी रात फूलझरा गाँव की एक अन्य महिला से शादी कर ली। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस संबध में स्थानीय पुलिस थाने में कोई भी शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है।

बता दें कि मटन करी ओडिशा का लोकप्रिय व्यंजन है। इसे अक्सर शादियों, पिकनिक और अन्य दावतों सहित अधिकांश सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल किया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि जो परिवार शादी की दावत में मटन करी को शामिल नहीं करता है, उसे अक्सर मेहमानों की आलोचना का सामना करना पड़ता है।

‘टीके से युवा अधिक मर रहे, मैं नहीं लगवाऊँगा’: शिगूफा छोड़ प्रशांत भूषण ने कहा- मैं वैक्सीन का विरोधी नहीं

अपने विवादित बयानों के कारण हमेशा सुर्खियों में रहने वाले सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण ने एक बार फिर कोरोना वैक्सीन के खिलाफ बयान दिया है। उन्होंने एक के बाद एक ट्वीट कर कहा कि वह भारत में टीकाकरण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन सभी के लिए टीकाकरण के वे सख्त विरोध में हैं।

प्रशांत भूषण का दावा है कि वैक्सीन इतनी खतरनाक है कि गंभीर बीमारियों और कोरोना वायरस से मारने की बजाय टीके लगवाने से युवाओं की अधिक मौत हो सकती है।

प्रशांत भूषण ने खुद को वैक्सीन सपोर्टर बताते हुए कथित तौर पर टीका लगवाने से अपनी पत्नी को खोने वाले एक आदमी को लेकर लिखे गए एक लेख का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि वो मानते हैं कि प्रायोगिक और बिना जाँच की गई वैक्सीन को सभी को देने के लिए बढ़ावा देना गैर-जिम्मेदाराना है, खासतौर पर युवाओं और कोरोना से उबरे लोगों के लिए यह खतरनाक है।

प्रशांत भूषण का कोरोना के खिलाफ किया गया ट्वीट

सर्वोच्च न्यायालय के वकील भूषण ने ट्वीट किया, “कोरोना के कारण स्वस्थ युवाओं की मौत की आशंका शायद ही हो, लेकिन टीके लगवाने से उनके मरने की आशंका अधिक है। कोरोना से स्वस्थ हुए लोगों की रोगों से लड़ने की क्षमता वैक्सीन से मिलने वाली प्रतिरोधक क्षमता की तुलना में कहीं अधिक होती है। ऐसे में प्राकृतिक प्रतिरक्षा तंत्र विकसित करने में वैक्सीन बाधा बन सकता है।” वकील ने कहा कि न तो उन्होंने टीका लगवाया है और न ही भविष्य में लगवाने की उनकी कोई योजना है।

प्रशांत भूषण का कोरोना के खिलाफ किया गया ट्वीट

टीकाकरण अभियान को कमजोर करने की कोशिश कर रहे प्रशांत भूषण

टीकाकरण की प्रक्रिया में तेजी नहीं लाने पर केंद्र सरकार की आलोचना करने और उसे इसके लिए जिम्मेदार ठहराने के लिए लोग अटैक मोड पर बैठे हैं। ऐसे कुछ कामरेड और उनके कथित बुद्धिजावी साथी सक्रिय रूप में टीके को लेकर लोगों को हो रही झिझक को लगातार बढ़ावा दे रहे हैं। अपनी बातों को पुख्ता करने के लिए ये घटिया तर्क देते हैं कि वे वैक्सीनेशन के खिलाफ नहीं हैं।

हालाँकि, कोरोना को मात देने के लिए केंद्र सरकार द्वारा कराए जा रहे टीकाकरण पर प्रशांत भूषण का यह रुख कोई नया नहीं है। उन पर लगातार टीके को लेकर लोगों को गुमराह करने के आरोप लगते रहे हैं।

कोरोना वैक्सीन को लेकर दुष्प्रचार करते हुए प्रशांत भूषण ने हाल ही में एक गुमराह करने वाली रिपोर्ट शेयर की थी। इसमें टीके के कारण होने वाली मौतों की दर को काफी अधिक बताया गया था। उन्होंने lifesitenews.com नाम की एक वेबसाइट की एक रिपोर्ट ट्वीट की थी, जिसमें यह दावा किया गया था कि कोरोना के डेल्टा वैरिएंट से संक्रमित लोगों की मौत की तुलना में टीका लगवाने से मरने वाले लोगों की संख्या अधिक है।

टीकाकरण को कमजोर करने की साजिश के तहत भूषण ने इस महीने (जून 2021) की शुरुआत में एक रिपोर्ट शेयर की थी। इसमें उन्होंने दावा किया था कि कोरोना की वैक्सीन लगवाने के बाद लोगों की मौतें हो रही हैं। उन्होंने जो रिपोर्ट शेयर की थी वो उत्तराखंड पुलिस को लेकर थी। इसमें ये कहा गया था कि राज्य में 2,000 से अधिक पुलिसकर्मी कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे, जिनमें से 90 फीसदी ने वैक्सीन लगवाई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें से 5 की मौत भी हो गई थी।

इसी साल अप्रैल 2021 में प्रशांत भूषण ने यूके की यात्रा के दौरान भी अपने वैक्सीन विरोधी एजेंडे को आगे बढ़ाते हुए टीकों के प्रभाव पर संदेह जताया था। इससे पहले उन्होंने कोरोना की रोकथाम के लिए मास्क के असर पर भी सवाल उठाया था।

खास बात यह है कि माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ट्विटर पश्चिमी देशों में वैक्सीन विरोधी प्रचार करने वालों के खिलाफ सख्त रहा है। उसने ऐसे कई अकाउंट को भी सस्पेंड कर दिया था। वैक्सीन को लेकर गलत जानकारी फैलाने के मामले में ट्विटर ने अमेरिकी लेखिका नाओमी वोल्फ के अकाउंट को बंद कर दिया था। अब देखना ये है कि प्रशांत भूषण के मामले में वह क्या कदम उठाता है।

पंजाब में केजरीवाल की ‘प्रेस कॉन्फ्रेंस’ पर किचकिच, गुजरात में सोमनाथ मंदिर पहुँचे AAP नेता का विरोध

इन दिनों आम आदमी पार्टी (AAP) पंजाब और गुजरात में पैठ बनाने की कोशिशों में हैं। इसी क्रम में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का मंगलवार (जून 29, 2021) को पंजाब भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस होना है। इसको लेकर आप और पंजाब की कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार आमने-सामने आ गई है। दूसरी ओर, गुजरात में आप नेता गोपाल इटालिया को विरोध के चलते सोमनाथ मंदिर से बगैर दर्शन ही वापस लौटना पड़ा। इटालिया पिछले कुछ दिनों से अपने हिंदूफोबिक वीडियो की वजह से चर्चा में हैं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर विवादों की शुरुआत आप के एक दावे से हुई। पार्टी ने कहा कि कैप्टन अमरिंदर सिंह के कार्यालय ने केजरीवाल को प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए अनुमति देने से मना कर दिया है। ये कॉन्फ्रेंस मंगलवार को पंजाब भवन में 1 बजे होनी थी। बावजूद वे प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे।

अमरिंदर सिंह ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले ही केजरीवाल सभा करके गए हैं तो उनको प्रेस कॉन्फ्रेंस से रोकने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि यदि आप चाहे तो वे उनके लिए लंच का प्रबंध भी कर सकते हैं। साथ ही पंजाब के सीएम ने कहा कि झूठ बोलकर आप सिर्फ सियासी नौटंकी करना चाहती है।

बता दें कि पंजाब की जनता को आकर्षित करने के लिए AAP ने वहाँ भी फ्री बिजली का वादा किया है। आप ने सोमवार को कहा है कि यदि उनकी सरकार प्रदेश में आई तो वह 200 यूनिट मुफ्त देंगे। यदि दिल्ली में 73% लोगों का बिजली का बिल जीरो आ सकता है तो पंजाब में क्यों नहीं आएगा। पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं।

दूसरी तरफ रिपोर्टों के अनुसार सोमनाथ मंदिर पहुॅंचे इटालिया को विरोध के कारण मंदिर के बाहर से ही कार में बैठकर लौटना पड़ा। इसको लेकर आप नेता ने पुलिस से शिकायत की है। इसमें कहा गया है कि भाजपा से जुड़े कुछ लोगों ने उनका विरोध किया।

इटालिया के कुछ पुराने वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे। इसमें वह ब्राह्मणों और हिंदू परंपराओं को अपमानित करते दिखे थे। हिन्दू मान्यताओं का अपमान करते हुए इटालिया ने कहा था कि जो इन सत्संग और कथा में शामिल होते हैं वो हिजड़ों के जैसे तालियाँ बजाते हैं। उन्होंने कहा, “मुझे ऐसे लोगों पर शर्म आती है। जो मैं कहता हूँ वह आपको अगर अच्छा न लगे तो मुझे ब्लॉक कर दीजिए। लेकिन हमें उनकी जरूरत नहीं है जो संस्कृति और प्रथाओं के नाम पर हिजड़ों की तरह ताली बजाते हैं। कुछ साधु स्टेज से फालतू बातें करेंगे और हम हिंजड़ों की तरह ताली बजाएँगे।”