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आतंकी कसाब को दबोचने वाले ASI तुकाराम के नाम पर मकड़ी की प्रजाति का नामकरण, जीव वैज्ञानिकों ने दिया विशेष सम्मान

मुंबई आतंकी हमले (26/11) में अपनी शहादत देकर आतंकवादी अजमल कसाब को जिंदा पकड़वाने वाले बलिदानी तुकाराम ओंबले को जीव वैज्ञानिकों ने विशेष सम्मान दिया है। महाराष्ट्र में हाल ही मिली मकड़ी की दो नई प्रजातियों में से एक का नाम आइसियस तुकारामी (Icius Tukarami) दिवंगत पूर्व सहायक उप निरीक्षक (ASI) तुकाराम ओंबले के नाम पर रखा गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहली बार इस नाम का उपयोग मकड़ियों की खोज करने वाले शोधकर्ताओं की टीम ने एक शोध पत्र में किया है। इस शोध पत्र का उद्देश्य महाराष्ट्र में मिली मकड़ी की दो नई प्रजातियों जेनेरा फिनटेला और आइसियस से दुनिया को अवगत कराना था।

शोधकर्ताओं का कहना है कि इनमें से एक मकड़ी का नाम आइसियस तुकारामी उन्होंने मुंबई अटैक के हीरो तुकाराम ओंबले के नाम पर रखा है। उन्होंने आगे कहा कि ओंबले ने अपनी जान की परवाह किए बिना 23 गोलियाँ खाने के बाद भी आतंकी अजमल कसाब को जिंदा धर दबोचने में अहम भूमिका निभाई थी।

निहत्थे पकड़ा एके-47 का बैरल

गौरतलब है कि 27 नवंबर की रात जब ओंबले का गिरगाँव चौपाटी पर अजमल कसाब से सामना हुआ, तब वह पूरी तरह निहत्थे थे। यह जानने के बावजूद कि सामने वाले के हाथों में एके-47 है, वह अपनी जान की परवाह किए बिना आतंकी पर टूट पड़े। अपने हाथों से उसकी एके-47 का बैरल पकड़ लिया। ट्रिगर दबा और पल भर में कई गोलियाँ चलीं और ओंबले मौके पर ही बलिदानी हो गए। इसके पहले अजमल कसाब और उसके साथी आतंकी इस्माइल खान ने छत्रपती शिवाजी टर्मिनल और कामा अस्पताल को अपना निशाना बनाया था।

दरअसल, ओंबले से पहले उनके गाँव से कोई भी व्यक्ति पुलिस का हिस्सा नहीं बना था, लेकिन उनके शहीद होने के बाद 13 युवा पुलिस में भर्ती हुए। मुंबई से 284 किलोमीटर दूर, महज 250 परिवारों का गाँव, केदाम्बे। इस गाँव के लिए देश के लिहाज से तीन तिथियाँ सबसे अहम हैं – पहली 15 अगस्त, दूसरी 26 जनवरी और तीसरी 26 नवंबर।

बलिदान होने के बाद हुए थे अशोक चक्र से सम्मानित

बलिदानी होने के उपरांत तुकाराम को बहादुरी के लिए अशोक चक्र पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है। तुकाराम की याद में मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त राकेश मारिया ने लिखा है, ”ओंबले के ही कारण कसाब को पकड़ा गया। उन्होंने जो किया उससे ही लश्कर-ए-तैयबा की साजिश को नाकाम किया जा सका।” इसके अलावा गिरगाँव चौपाटी पर जिस जगह तुकाराम वीरगति को प्राप्त हुए थे, वहाँ उनकी प्रतिमा भी लगाई गई है और उसे प्रेरणा स्थल का नाम दिया गया है।

‘दोनों लड़के घबराए थे… मैंने सहज बना दिया’: तापसी पन्नू के साथ इंटिमेट सीन से ‘डर’ गए थे विक्रांत और हर्षवर्धन

बॉलीवुड एक्ट्रेस तापसी पन्नू ने अपनी आने वाली फिल्म हसीन दिलरुबा के को-एक्टर्स को लेकर एक खुलासा किया है। उन्होंने विक्रांत मेस्सी और हर्षवर्धन राणे को लेकर बताया कि कैसे वो दोनों उनके साथ इंटिमेट सीन करने में डर गए थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक इंटरव्यू में तापसी ने इसका खुलासा किया। उन्होंने कहा कि शायद एक्टर्स को उनकी छवि या फिर कोई और समस्या थी जिसकी वजह से दोनों ‘डरे’ हुए थे।

तापसी ने कहा, “मुझे उम्मीद है कि मैंने उनके लिए इसे सहज बना दिया क्योंकि वे बहुत डरे हुए लग रहे थे… वे सोचते थे पता नहीं ये क्या करेगी हमारे साथ। मुझे लगा दोनों लड़के बहुत घबराए हुए थे… मुझे नहीं पता मेरी इमेज की वजह से या फिर कोई दूसरी समस्या थी। लेकिन मैं विनील के पास जाती थी और शिकायत करती थी।”

एक्ट्रेस से जब पूछा गया कि क्या उन्होंने ऐसे सीन के बारे में पहले से अपने पार्टनर को बता दिया था। इस पर तापसी ने कहा, “नहीं, मैंने अपने साथी को अपने इंटीमेट सीन के बारे में नहीं बताया। यह मेरा प्रोफेशनल जीवन है। मैं इसे अपने निजी जीवन से बहुत दूर रखती हूँ। मैं उम्मीद नहीं करती कि वह अपने प्रोफेशनल जीवन में मुझसे अनुमति लेंगे, इसलिए उन्हें मुझसे भी यही उम्मीद करनी चाहिए।”

वहीं विक्रांत मेस्सी ने माना कि कभी-कभी उनकी साथी ने उनकी स्क्रिप्ट पढ़ी और ऐसी सीन के बारे में जानती थी, लेकिन उन्होंने खुद से कभी जानबूझकर उन्हें पहले से कुछ नहीं बताया। हर्षवर्धन ने कहा कि उन्हें जिस तरह की स्क्रिप्ट दी गई उसमें ऐसे सीन करना काफी सामान्य है।

बता दें कि हसीन दिलरुबा में नजर आने जा रहे विक्रांत मेस्सी लगातार चौथी नेटफ्लिक्स रिलीज में दिखेंगे। इससे पहले वह कार्गो, डॉली किट्टी, वो चमकते सितारे और गिन्नी वेड्स सन्नी में दिख चुके हैं। वहीं हर्षवर्धन आखिरी बार तैश में दिखाई दिए थे। हसीन दिलरुबा को विनिल मैथ्‍यू ने डायरेक्‍ट किया है, जबकि कहानी कनिका ढ‍िल्‍लन ने लिखी है।

रत्नूचक इलाके में दिखे 2 ड्रोन, लश्कर के निशाने पर थे ATC और पार्क किए गए हेलिकॉप्टर: सुरक्षा व्यवस्था सख्त

जम्मू एयरपोर्ट पर भारतीय वायुसेना स्टेशन के तकनीकी क्षेत्र में ड्रोन के माध्यम से हुए हमले के बाद अब रत्नूचक (कालूचक) सैन्य क्षेत्र में दो ड्रोन दिखाई दिए। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक 27-28 जून की मध्यरात्रि को रत्नूचक इलाके में भारतीय सेना के ब्रिगेड हेडक्वार्टर के ऊपर दो ड्रोन को उड़ता हुआ देखा गया। हालाँकि तुरंत ही क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) ने गोलीबारी की जिसके बाद दोनों ड्रोन वापस लौट गए।

इस घटना के बाद से सेना के अलावा पुलिस भी सतर्क हो गई है। जम्मू के कालूचक इलाके में जम्मू पुलिस के द्वारा सभी तरह के वाहनों की जाँच की गई।

लेफ्टिनेंट कर्नल देवेन्द्र आनंद PRO (डिफेंस) ने न्यूज एजेंसी एएनआई को यह सूचना दी कि ड्रोन दिखने के बाद सुरक्षा कर्मियों को हाई अलर्ट किया गया जिसके बाद QRT सक्रिय हुई और गोलीबारी की जिससे दोनों ड्रोन वापस लौट गए। आनंद ने यह भी बताया कि सैन्य कर्मियों की सतर्कता के कारण एक बड़ा खतरा टल गया और सभी सुरक्षाकर्मी हाई अलर्ट पर हैं एवं सर्च ऑपरेशन जारी है।

सूत्रों के द्वारा यह जानकारी प्राप्त हुई है कि ड्रोन दिखाई देने के बाद तुरंत ही ब्रिगेड हेडक्वार्टर के आसपास के इलाके को सुरक्षित किया गया और साथ ही सर्च ऑपरेशन चलाया गया। हालाँकि सूत्रों के मुताबिक फिलहाल रत्नूचक इलाके में किसी प्रकार की कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली है।

मीडिया खबरों से यह जानकारी भी सामने आ रही है कि केन्द्रीय जाँच एजेंसियों और जम्मू-कश्मीर पुलिस के द्वारा की गई जाँच में प्रथम दृष्ट्या यह संभावना जताई जा रही है कि इन ड्रोन हमलों में पाकिस्तान के लश्कर-ए-तैयबा का हाथ है। इसके अलावा यह भी संभावना है कि आतंकी संगठन के निशाने पर एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) और पार्क किए गए हेलिकॉप्टर अथवा राडार थे।  

ज्ञात हो कि जम्मू के एयरपोर्ट में भारतीय वायुसेना के अधिकार वाले क्षेत्र में रविवार (27 जून) को दो विस्फोट हुए थे। हमले के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया गया था। शुरुआती जाँच में माना जा रहा है कि ऐसा करके पाकिस्तान ने 2016 में हुए पंजाब के पठानकोट हमले को दोहराने की कोशिश की है।

जम्मू-कश्मीर के डीजीपी ने दो बम धमाकों को आतंकी हमला बताया है। इस हमले के बाद एनआईए भी जाँच में जुट गई थी और मामले में जम्मू-कश्मीर पुलिस के द्वारा UAPA के तहत केस भी दर्ज कर लिया गया है।

‘हत्या आतंकी करते हैं, BBC उनका पाप धोने आ जाता है’: जम्मू-कश्मीर में हमले को ‘चरमपंथी’ बताने पर बिफरे नेटिजन्स

जम्मू-कश्मीर में एक पूर्व विशेष पुलिस अधिकारी (एसपीओ) के घर पर हमला कर आतंकियों ने उनकी हत्या कर दी। इस खबर को लेकर सोमवार (28 जून 2021) को ब्रिटेन की राष्ट्रीय प्रसारण समाचार सेवा (बीबीसी) ‘खेल’ किया। उसने इसे ‘चरमपंथी’ हमला बताते हुए इसे जस्टिफाई करने की कोशिश की। ‘चरमपंथी’ का अर्थ ‘कट्टरवादी’ से होता है, जो कि ‘आतंकवादी’ से अलग है।

बीबीसी की रिपोर्ट

रविवार (27 जून 2021) को आतंकवादियों ने पूर्व विशेष पुलिस अधिकारी (एसपीओ) की पुलवामा के हरिपरिगाम गाँव स्थित घर में घुसकर गोली मारकर हत्या कर दी थी। आतंकवादियों के हमले में एसपीओ फैयाज अहमद भट की पत्नी राजा बेगम और बेटी राफिया की भी मौत हो गई।

इस मामले में बीबीसी ने अपने इस्लाम समर्थक और हिंदू विरोधी पूर्वाग्रह को जाहिर किया। उसने बर्बर आतंकवादियों को चरमपंथी करार दिया। बस फिर क्या था सोशल मीडिया पर नेटिजन्स बीबीसी से इस कदर नाराज हुए कि उन्होंने चैनल को आईना दिखाया कि सत्य को सत्य कहने की जरूरत है, भले ही वो सुनने में कड़वा लगे। आतंकी को आतंकी ही कहा जाना चाहिए, चरमपंथी नहीं।

लोगों ने बीबीसी को बताया कि चरमपंथी और आतंकवादी दोनों किस तरह से अलग हैं। लोगों ने यह भी सवाल किया कि क्या बीबीसी इस बात को मानता है कि न्यूयॉर्क में 9/11 के आतंकी हमले के अपराधी आतंकवादी नहीं चरमपंथी थे।

नेटिज़न्स ने यह भी बताया कि कैसे बीबीसी आमतौर पर इस तरह की आतंकी गतिविधियों को कम आँक कर इस पर अपनी सफाई पेश करता है।

बीबीसी पहले भी इस तरह के कार्य करता रहा है। उसने अपने हिंदू विरोधी पूर्वाग्रह को छिपाने की कभी कोशिश नहीं की। देश की राजधानी दिल्ली में फरवरी 2020 में हुए हिंदू विरोधी दंगों के दौरान भी बीबीसी ने ऐसा ही किया था। उसने विजुअल्स का इस्तेमाल करते हुए अपने नैरेटिव के अनुसार दिल्ली पुलिस के खिलाफ एकतरफा न्यूज दिखाई थी। उसने दिल्ली पुलिस के कॉन्स्टेबल रतन लाल और आईबी कर्मचारी अंकित शर्मा की मौत समेत पुलिसकर्मियों पर हुए हमले को दिखाने की कभी जहमत नहीं उठाई। आम आदमी पार्टी के नेता ताहिर हुसैन के नेतृत्व वाली इस्लामी भीड़ पर आईबी के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या का आरोप है।

बीबीसी ने इसी साल फरवरी 2021 में किसान आंदोलन में हिंदुओं और सिखों के बीच फूट डालने के लिए ब्रिटिश लेखक को प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराया था। इतना ही नहीं, बीबीसी ने फिलिस्तीन के आतंकी संगठन हमास को भी अपने विचारों के लिए प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराया था। इसको लेकर उसकी काफी आलोचना भी हुई थी। चैनल के जरिए बीबीसी ने बर्बर आतंकी संगठन को पीड़ित साबित करने की कोशिश की थी। इसके अलावा, बीबीसी पर भारत के प्रति नस्लवादी होने के आरोप भी लगते रहे हैं।

अब ट्विटर ने जम्मू-कश्मीर कर दिया भारत से बाहर, पहले भी कई बार कर चुका है ऐसे कारनामे: कार्रवाई की माँग

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर और भारत सरकार के बीच नए आईटी नियमों को लेकर चल रहे विवाद के बीच ट्विटर का एक नया कारनामा सामने आया है। बताया जा रहा है कि ट्विटर ने भारतीय नक्शे से जम्मू कश्मीर को बाहर दिखाया है। टाइम्स नाऊ ने अपने ट्वीट पर यह जानकारी दी।

ट्विटर के ‘ट्वीप लाइफ’ सेक्शन में जो मैप दिख रहा है उससे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को भारत से अलग दिखाया गया है। ट्विटर की यह गलती इस बार सबसे पहले ट्विटर यूजर @thvaranam द्वारा पकड़ी गई है।

ट्विटर की यह गलती सामने आते हैं सोशल मीडिया यूजर्स ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। लोगों ने केंद्रीय कानून मंत्री सहित कई नेताओं को टैग कर सख्त कार्रवाई की माँग की है।

मालूम हो कि यह पहली बार नहीं है कि ट्विटर भारत के भाग को मानचित्र में गलत प्रस्तुत कर रहा हो। इससे पहले ट्विटर ने लेह की ‘जियो लोकेशन’ जम्मू कश्मीर, पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना में दिखाई थी। इस संबंध में 18 अक्टूबर 2020 को रक्षा विशेषज्ञ नितिन गोखले ने एक लाइव ब्रॉडकास्ट के जरिए दिखाया था कि कैसे ट्विटर (Twitter) अपनी ‘लोकेशन’ में जम्मू कश्मीर को चीन का हिस्सा बता रहा था।

गोखले लेह के लोकप्रिय युद्ध स्मारक ‘हॉल ऑफ फेम’ से लाइव थे और इसी दौरान उन्होंने ट्विटर की इस गड़बड़ी को पकड़ा। उन्होंने ट्विटर से पूछा कि आखिर वो जम्मू कश्मीर को भारत का हिस्सा न बता कर चीन का भाग क्यों बता रहा है? इस मामले के सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने भी ट्विटर को चेतावनी जारी की थी। सूचना प्रसारण मंत्रालय के सचिव अजय साव्हने ने इस मुद्दे पर ट्विटर के सीईओ जैक डोरसे को एक पत्र लिखा और पत्र के जरिए जम्मू कश्मीर को चीन का हिस्सा बताने पर कड़ी आपत्ति जताई थी।

पत्र में लिखा गया था कि सूचना प्रसारण मंत्रालय के सचिव अजय साव्हने ने पत्र में ट्विटर को लिखा कि लेह केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख का मुख्यालय है। इसके अलावा लद्दाख और जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और यह भारतीय संविधान के अंतर्गत आता है। लिहाज़ा जिस प्रकार का मानचित्र ट्विटर ने पेश किया, वह पूरी तरह अस्वीकार्य और आपत्तिजनक है। 

ट्विटर को कड़ी चेतावनी देते हुए मंत्रालय के सचिव ने लिखा था कि इस तरह की हरकतों से सिर्फ और सिर्फ ट्विटर की छवि खराब होती है। इसके अलावा ट्विटर का यह रवैया उसकी निरपेक्षता पर भी सवाल खड़े करता है। कड़े शब्दों में यह भी कहा गया कि आने वाले समय में इस तरह की गलतियाँ स्वीकार नहीं की जाएँगी। यह सरासर गैर ज़िम्मेदाराना हरकत थी, जिसका सीधा प्रभाव लोगों की भावनाओं और देश की अखंडता पर पड़ता है।    

यूपी पुलिस के समक्ष बयान दर्ज कराने पहुँचे सबा नकवी और मोहम्मद ज़ुबैर: ट्विटर पर फैलाया था ‘जय श्री राम’ वाला झूठ

गाजियाबाद के लोनी थाने में दो समुदायों के बीच वैमनस्य पैदा करने और फेक न्यूज़ फैलाने के आरोप में पत्रकार सबा नकवी और AltNews के मोहम्मद ज़ुबैर के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी। मोहम्मद ज़ुबैर कई दिनों से ट्विटर पर भी सक्रिय नहीं है। अब ये दोनों उत्तर प्रदेश के लोनी थाने में हाजिरी देने पहुँचे हैं। पुलिस ने वहाँ दोनों का बयान दर्ज किया। इन दोनों ने सोशल मीडिया के माध्यम से झूठ फैलाया था।

इसी मामले में समाजवादी पार्टी के स्थानीय नेता उम्मेद पहलवान के खिलाफ भी ‘राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA)’ लगाने की तैयारी की जा रही है। उसे जून 19, 2021 को गिरफ्तार किया गया था। उसने ही पीड़ित से फेक वीडियो शूट करा कर ‘जबरन जय श्री राम बुलवाने’ वाली बात जोड़ी थी, जबकि आरोपितों में कई मुस्लिम थे और ये ताबीज की वजह से मारपीट का मामला था। इसमें कोई सांप्रदायिक एंगल नहीं निकला।

हाल ही में इसी मामले में गाजियाबाद पुलिस ने ट्विटर को दूसरा नोटिस जारी किया था। इस नोटिस में कहा गया था कि ट्विटर जाँच में सहयोग नहीं कर रहा है और उसके द्वारा दिया गया स्पष्टीकरण औचित्य पूर्ण नहीं है। इसके साथ ही यूपी पुलिस ने ट्विटर इंडिया के MD महेश महेश्वरी को 24 जून 2021 को 10:30 बजे तक गाजियाबाद के लोनी थाना में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया था।

गाजियाबाद में मुस्लिम बुजुर्ग की पिटाई वाले प्रकरण में ही बिन तथ्यों को जाने ट्वीट करने के बाद यूपी पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर मामले में पत्रकार राणा अय्यूब को कोर्ट से 4 सप्ताह के लिए ट्रांजिट अंतरिम जमानत मिली है। हाईकोर्ट ने कहा कि आवेदक को न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिए, 4 सप्ताह की अस्थाई अवधि दी जा सकती है। यूपी पुलिस ने अय्यूब के अलावा 8 के विरुद्ध एफआईआर की थी।

‘मंदिर की मूर्ति अपनी रक्षा नहीं कर सकती, मेरी ख़ाक करेगी’: जेल से ताहिर बनकर निकला ताराचंद

उत्तर प्रदेश में एक ऐसा मामला सामने आया है, जहाँ जेल जाने से व्यक्ति हिंदू था और सज़ा काट कर बाहर आया तो वो मुस्लिम बन चुका था। 46 वर्षीय ताराचंद एक अपराध के सिलसिले में 3 वर्ष पहले मेरठ की एक जेल में बंद हुआ था। जेल से बाहर निकलने के बाद ताहिर बन चुका था। इस्लामी धर्मांतरण के आरोप लगे। हालाँकि, पकड़े जाने पर उसने दाढ़ी कटा ली और कहने लगा कि वो सिर्फ नमाज पढ़ता था, उसने इस्लाम नहीं अपनाया था।

दरअसल, जेल में रहने के दौरान ही ताराचंद की मुलाकात और जान-पहचान कुछ कैदियों से हुई थी, जो बाद में दोस्ती में भी बदल गई। इसमें उसके कुछ मुस्लिम दोस्त ऐसे थे, जिन्होंने मुक़दमे में उसकी सहायता की और बाहर निकलने में मदद की। NBT के अनुसार, अब ताराचंद ने कहा है, “मैं मंदिर और मस्जिद दोनों जगह जाता हूँ। इसमें बुराई क्या है? ईश्वर तो दो नहीं हो सकता है। यह केवल एक ही है। इससे क्या अंतर पड़ता है कि हम कौन सा तरीका अपनाते हैं।”

ताराचंद का दावा है कि 43 महीने तक जेल में रहने के बावजूद उसके परिवार से कोई उसे पूछने तक नहीं आया और उसे अकेला छोड़ दिया गया। उसने एक उस्मान का नाम लिया और कहा कि उसने अपने दोस्तों के साथ मिल कर उसकी मदद की। बकौल ताराचंद, उसने उस्मान व उसके दोस्तों के साथ काफी समय बिताया। उन्होंने उसके लिए फंड्स भी इकट्ठे किए। उसका कहना है कि दाढ़ी बढ़ाई और नमाज पढ़ी, लेकिन धर्मांतरण नहीं किया।

जेल प्रशासन ने जेल में धर्मांतरण की घटना से इनकार किया है। किठौर इलाके के सीओ बृजेश सिंह का कहना है कि ताराचंद ने जेल में रहते हुए कानूनी रूप से धर्मांतरण नहीं कराया। साथ ही किसी अन्य मजहब को कबूल करने की बात भी उन्होंने नकार दी। इधर ताराचंद इस्लाम के बारे में बात करते हुए कहता है कि यहाँ कौमी एकता है और लोग एक-दूसरे के काम आते हैं। ‘वेबदुनिया’ की खबर के अनुसार, उसने पूछा कि मंदिर में अपनी सुरक्षा न कर पाने वाली प्रतिमा किसी दूसरे की सुरक्षा क्या करेगी?

बता दें कि ताराचंद हत्या के मुक़दमे में जेल गया था। वो 5 वक़्त का नमाज भी पढ़ने लगा था। इस घटना पर ख़ुफ़िया विभाग की भी नजर है। मुंडाली थाना क्षेत्र के मऊखास गाँव निवासी ताराचंद का कहना है कि वो बतौर ड्राइवर बाहर कार्य करता था, इसी दौरान उसकी बीवी की नजदीकी किसी और के साथ बढ़ गई। आरोप है कि पैरोल पर बाहर आए ताराचंद ने गाँव के कुछ युवकों पर इस्लाम अपनाने के लिए दबाव भी डाला।

ताराचंद 2015 में ही किसी मोहम्मद के संपर्क में आया था। लगभग 2 साल तक दोनों ने साथ काम किया। इसके बाद वो दिल्ली के अप्सरा बॉर्डर होते हुए असम भी गया था। उसका कहना है कि गुवाहाटी में ही उसने पहली बार नमाज पढ़ी थी। ग्राम प्रधान रवींद्र के बेटे का कहना है कि गाँव के कुछ लोग ताराचंद से मिले हुए हैं। आरोप है कि उसका ब्रेनवॉश किया गया है। कोर्ट में पैरवी के लिए उसके पास रुपया कहाँ से आया था, इसकी भी जाँच की माँग की जा रही है।

‘उर्दू मीडियम स्कूल में वैक्सीनेशन शिविर, मस्जिद से 3 बार टीका नहीं लगवाने का ऐलान’: सेवा भारती ने की कड़ी कार्रवाई की माँग

मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के नसरुल्लागंज में कोरोना वैक्सीन न लगवाने के लिए मस्जिद से हुए ऐलान के बाद सेवा भारती ने इस मुद्दे पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। सेवा भारती ने नसरुल्लागंज के अनुभागीय अधिकारी (SDM) को पत्र लिख कर मामले में कठोर कदम उठाने की अपील की है।

SDM को लिखे गए पत्र में सेवा भारती ने कहा कि एक ओर जहाँ कोरोना से जंग में वैक्सीनेशन अभियान महोत्सव की तरह मनाया जा रहा है। वहीं 23 जून को एक घटना सामने आई है जहाँ मस्जिद से ऐलान करके वैक्सीन न लगवाने को कहा गया।

पत्र के मुताबिक, 23 जून को वैक्सीनेशन अभियान उर्दू मीडियम स्कूल में चलाया जा रहा था। लेकिन तभी मस्जिद से ऐलान हुआ कि लोग कोरोना वैक्सीन न लगवाएँ। न्यूज रिपोर्ट्स बताती हैं कि मस्जिद से यह ऐलान एक बार नहीं, बल्कि 3 बार हुआ। इसके बाद मोहल्ले सहित पूरे नगर में हड़कंप मच गया। इस घोषणा को न केवल मुस्लिम मोहल्ले के लोगों ने सुना, बल्कि मोहल्ले से सटे हुए कई घरों के लोगों ने भी सुना।

इस घटना के 3 दिन बाद सेवा भारती ने एसडीएम को पत्र लिखा। इस हरकत को आपराधिक कृत्य बताते हुए कहा कि एक तरफ वे लोग वैक्सीनेशन के लिए लोगों को घर-घर जाकर प्रेरित कर रहे हैं और दूसरी ओर ऐसी चीजें हो रही है। संगठन की माँग है कि इस संबंध में कठोर कार्रवाई की जाए ताकि आगे ऐसी घटनाएँ न हों।

बता दें कि इस मामले में शिकायत के बाद, पुलिस ने एक व्यक्ति को हिरासत में लेकर अपनी पूछताछ की थी। लेकिन उस पर कार्रवाई क्या हुई, इस बात की जानकारी अभी नहीं मिल सकी। हमने नसरुल्लागंज पुलिस और वहाँ के एसडीएम डीएस तोमर से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उनसे भी बात नहीं हो पाई। उनसे बात होते ही हम इस रिपोर्ट को अपडेट करेंगे।

अन्य मीडिया रिपोर्ट्स में आए एसडीएम के बयान के मुताबिक उन्होंने कहा है कि गुरुवार को वैक्सीनेशन अभियान का आयोजन उर्दू मीडियम स्कूल में किया गया था। इसमें 180 लोगों ने वैक्सीन लगवाई। लेकिन मस्जिद से एनाउंसमेंट किस आधार पर हुई यह जाँच का विषय है।

केजरीवाल ने लिखा: महेश भाई AAP में स्वागत है, कभी अपहरण और वसूली में हुई थी गुजरात के इस कारोबारी की गिरफ्तारी

साल 2022 में होने वाले गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी ने रविवार (जून 27, 2021) को सूरत के व्यापारी महेश सवानी का अपनी पार्टी में स्वागत किया। सवानी के पार्टी से जुड़ते ही उनसे जुड़े मामलों की दोबारा चर्चा होने लगी। AAP को घेरते हुए बताया जाने लगा कि साल 2020 में सवानी को अपहरण और जबरन वसूली के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने उन्हें पार्टी में शामिल करवाया। दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप सुप्रीमो केजरीवाल ने ट्वीट कर पार्टी में उनका स्वागत किया। गौरतलब है कि कई शैक्षणिक संस्थान के मालिक और कथित तौर पर सामाजिक कार्यकर्ता महेश सवानी पर 65 साल के गौतम पटेल की किडनैपिंग और उनसे 19 करोड़ रुपए माँगने का आरोप है। 

रिपोर्ट्स के मुताबिक पटेल और उनके बिजनेस पार्टनर ने सवानी से अपने इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के लिए उधारी ली थी। इसके बाद पटेल को उन्हें 3 करोड़ देने थे। लेकिन किसी कारणवश भुगतान न होने पर उन्होंने एक जमीन में 60% हिस्सेदारी देने की बात की। हालाँकि, सवानी इस ऑफर से अपनी रकम नहीं वसूल पाए। जिसके चलते उन्होंने पटेल के अपहरण की योजना बनाई। जब पटेल अपने बेटे की शादी के लिए भारत आए तो उन्हें किडनैप कर लिया गया। पटेल की किडनैपिंग उनके घर पर पहले से लगे सीसीटीवी फुटेज में कैद हो गई। इसके बाद इस मामले ने तूल पकड़ा और सवानी गिरफ्तार भी हुए।

बता दें कि सवानी को अनाथ लड़कियों की सामूहिक शादी और अपने कर्मचारियों को कार और घर देने के लिए जाना जाता है।

नेतृत्व से खुश होकर थामा हाथ

आम आदमी पार्टी से जुड़ते हुए सवानी ने दावा किया कि वह पार्टी के अच्छे नेतृत्व से खुश होकर पार्टी से जुड़ रहे हैं। सवानी ने कहा, “51 साल की समाज सेवा के बाद, मैंने अपनी सेवाओं को बड़े स्तर पर जारी रखने के लिए राजनीति में शामिल होने का फैसला किया। शिक्षा हर चीज का आधार है। दिल्ली में सरकारी स्कूल सबसे अच्छे हैं। हाल ही में दिल्ली के दौरे के दौरान मुझे पता चला कि दिल्ली सरकार 700 से 800 स्कूल चलाती है। मैंने ऐसे सात स्कूलों का दौरा किया जो किसी भी निजी स्कूल को टक्कर दे सकते हैं। मैंने वहाँ चिकित्सा सुविधाएँ भी देखी हैं। आप सरकार की पहल बेहतरीन है, इसलिए मैंने पार्टी में शामिल होने का फैसला किया है।”

सवानी के पार्टी से जुड़ने पर सिसोदिया ने कहा, “AAP गुजरात में एक खाली प्लॉट की तरह है, जहाँ राज्य की नई और आधुनिक राजनीति का घर बनाया जा सकता है। इसकी नींव रखने के लिए हम महेश जी का आम आदमी पार्टी में स्वागत करते हैं।” सिसोदिया ने कॉन्फ्रेंस करते हुए दावा किया, “गुजरात में आम आदमी पार्टी दिन-रात चौगुनी की गति से आगे बढ़ रही है।” 

उन्होंने महेश सवानी का स्वागत करते हुए कहा कि अब दिल्ली का ही नहीं, गुजरात का भी काम बोलने लगा है, पार्षदों का काम बोलने लगा है। इन सब से प्रभावित होकर, महेश ने AAP परिवार में शामिल होने का फैसला किया ।

ब्राह्मणों को गाली देते आप नेता की वीडियो वायरल

उल्लेखनीय है कि इससे पहले हमने आपको बताया था कि कैसे गुजरात के AAP नेता गोपाल इटालिया के कुछ पुराने वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे। इसमें वह ब्राह्मणों और हिंदू परंपराओं को अपमानित करते दिखे थे। वायरल वीडियो में AAP नेता ने कहा,

“मैं जो कहता हूँ अगर वो आपको सही नहीं लगे तो मुझे ब्लॉक कर दो क्योंकि मुझे आपकी जरूरत नहीं। लोग सत्यनारायण कथा और भागवत कथा जैसी अवैज्ञानिक और फालतू की चीजों पर पैसा और समय बर्बाद कर देते हैं। इसके बाद भी लोगों को यह नहीं पता चलता कि उन्हें ऐसा करके क्या हासिल हुआ। वे दूसरों का समय भी बर्बाद कर देते हैं। अगर हम 5 पैसे भी ऐसी फालतू चीजों पर खर्च कर देते हैं तो हमें मनुष्य की तरह जीने का अधिकार भी नहीं है।”

हिन्दू मान्यताओं का अपमान करते हुए इटालिया ने कहा था कि जो इन सत्संग और कथा में शामिल होते हैं वो हिजड़ों के जैसे तालियाँ बजाते हैं। उन्होंने कहा, “मुझे ऐसे लोगों पर शर्म आती है। जो मैं कहता हूँ वह आपको अगर अच्छा न लगे तो मुझे ब्लॉक कर दीजिए। लेकिन हमें उनकी जरूरत नहीं है जो संस्कृति और प्रथाओं के नाम पर हिजड़ों की तरह ताली बजाते हैं। कुछ साधु स्टेज से फालतू बातें करेंगे और हम हिंजड़ों की तरह ताली बजाएँगे।”

बता दें कि गुजरात के पार्षद चुनावों में आम आदमी पार्टी ने 120 में से 27 सीट जीती थी। इसके बाद पार्टी ने मान लिया कि वह राज्य में भाजपा को हरा सकते हैं और इसीलिए उन्होंने आगे राज्य चुनाव लड़ने का फैसला किया। अब आगामी वर्षों में अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में पार्टी यूपी, उत्तराखंड, गोवा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश के राज्य चुनाव लड़ेगी।

कोरोना टीकाकरण में भारत ने अमेरिका को भी पीछे छोड़ा, लगातार 46वें दिन नए संक्रमितों से अधिक रही ठीक होने वालों की संख्या

लोगों को कोरोना वैक्सीन डोज देने के मामले में भारत ने अमेरिका को भी पीछे छोड़ दिया है। सोमवार (जून 28, 2021) तक के आँकड़ों के अनुसार, भारत ने जनवरी 16, 2021 को टीकाकरण अभियान की शुरुआत की और अब तक देश में कोरोना वैक्सीन की 32.36 करोड़ डोज दी है। अमेरिका में भारत से पहले, यानी दिसंबर 14, 2020 को ही टीकाकरण अभियान शुरू हो गया था और वहाँ वैक्सीनेशन का आँकड़ा 32.33 करोड़ है।

भारत और अमेरिका के बाद इस सूची में यूनाइटेड किंगडम (UK) का स्थान आता है, जहाँ कोरोना टीकाकरण अभियान बाकी देशों से पहले ही शुरू हो गया था। वहाँ दिसंबर 8, 2020 को शुरू हुए वैक्सीनेशन प्रोग्राम के दौरान अब तक कोरोना वैक्सीन की 7.67 करोड़ चुकी है। इसके बाद क्रमशः यूरोप के ही तीनों देशों जर्मनी, इटली और फ्रांस का स्थान आता है, जहाँ वैक्सीनेशन प्रोग्राम दिसंबर 27, 2020 को ही शुरू हुआ था।

इन तीनों ही देशों में क्रमशः 7.14, 5.24 और 4.96 करोड़ लोगों को कोरोना वैक्सीन की डोज दी जा चुकी है। भारत में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 46,148 मामले सामने आए हैं। पिछले कुछ सप्ताह से कोरोना के मामलों में कमी आई है, लेकिन विशेषज्ञ अब भी तीसरी लहर की आशंका जता रहे हैं, जिसके लिए तैयारी चालू है। कुछ ही दिनों में बच्चों के लिए भी कोरोना वैक्सीन आने वाली है। इसका ट्रायल अंतिम चरण में है।

पिछले 24 घंटों में भारत में कोरोना से होने वाली मौतों की संख्या 979 है। भारत में अब तक 3,02,79,331 लोगों को कोरोना अपना शिकार बना चुका है। साथ ही इस संक्रमण ने 3.96 लाख लोगों की जान ली है। भारत में 5.6% वयस्क ऐसे हैं, जिन्हें कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज दी जा चुकी है। हालाँकि, अमेरिका 40% नागरिकों का पूर्ण टीकाकरण कर चुका है। भारत में पिछले एक सप्ताह में ही 3.91 करोड़ लोगों को कोरोना वैक्सीन की खुराक दी गई।

ये संख्या कनाडा, मलेशिया और सऊदी अरब जैसे देशों की जनसंख्या से भी अधिक है। भारत में कोरोना के कुल मामलों के 1.89% केस ही अब सक्रिय बचे हैं। लगातार 46वें दिन ऐसा हुआ है, जब नए कोरोना संक्रमितों की संख्या से ठीक होने वाले लोगों की संख्या से कम रही। ‘डेली पॉजिटिविटी रेट’ 2.94% रहा और लगातार 21वें दिन ऐसा हुआ है जब ये आँकड़ा 5% से कम रहा। ये राहत की बात है।

जहाँ तक कोरोना के डेल्टा प्लस वैरिएंट की बात है, ये भारत सहित 12 देशों के लिए परेशानी का सबब बन चुका है। ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों ने तो इससे निपटने के लिए लॉकडाउन भी लगाए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (जून 27, 2021) को ‘मन की बात‘ में लोगों को कोरोना वैक्सीन लेने के लिए जागरूक किया और बताया कि किस तरह 100 वर्ष की उम्र में भी उनकी माँ ने वैक्सीन की डोज ली।