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दुबई एयरपोर्ट पर नौकरी, मोटी सैलरी का लालच: रिटायर्ड फौजी की बेटी रेणु बन गई आयशा अल्वी

उत्तर प्रदेश में इस्लामी धर्मांतरण के एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश होने के बाद शाहजहाँपुर से धर्म परिवर्तन का एक अनोखा मामला सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शाहजहाँपुर जिले के तिलहर तहसील क्षेत्र के एक गाँव के रिटायर फौजी की बेटी ने दुबई एयरपोर्ट पर ज्यादा सैलरी के लालच में इस्लाम अपना लिया।

रेणु गंगवार से आयशा अल्वी बनी युवती रिटायर फौजी की तीन बेटियों में सबसे बड़ी है। उसने बीए पास करने के बाद दिल्ली में एयर होस्टेस का कोर्स किया था, लेकिन यहाँ उसे एयर होस्टेस की नौकरी नहीं मिल सकी। युवती ने बताया कि वह करीब दो साल से दिल्ली एयरपोर्ट पर टिकट रूम में नौकरी कर रही थी। दुबई में जॉब करने के लिए उसने धर्म परिवर्तन कराया। उसका कहना है कि मुस्लिम होने पर दुबई में एडवांटेज मिलता है। इसके साथ ही उसने कहा कि भारत में कम सैलरी है, जबकि दुबई के एयरपोर्ट में नौकरी करने पर अधिक सैलरी मिलती है।

हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक जब युवती दिल्ली एयरपोर्ट के टिकट रूम में जॉब कर रही थी, उस दौरान वहाँ काम करने वाले एक मुस्लिम युवक ने उसे अपनी बातों में फँसाना शुरू कर दिया था। उसे बताया गया कि दुबई एयरपोर्ट पर मुस्लिम लड़कियों को बहुत सुविधाएँ दी जाती हैं, साथ ही मोटी सैलरी भी दी जाती है। इसके वजह से वह मुस्लिम बनने को तैयार हो गई। युवती को 27 मई 2021 को दिल्ली में इस्लाम धर्म कबूल करवाया गया। इस्लाम कबूल करने के बाद युवती ने अपना नाम बदल कर आयशा अल्वी रख लिया।

फिलहाल, युवती के इस बयान पर किसी को भी यकीन नहीं हो रहा है कि वह दुबई में जॉब करने के लिए हिंदू से मुस्लिम बन गई। युवती का कहना है कि उसे इस बात का कोई पछतावा नहीं है। बताया जा रहा है कि पिछले महीने ही उसकी शादी हिंदू लड़के से हुई थी, जो मुंबई में नौकरी कर रहा है।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश एटीएस ने सोमवार (21 जून 2021) को मूक-बधिर छात्रों व कमजोर आय वर्ग के गरीबों-असहायों को धन, नौकरी व शादी करवाने का प्रलोभन देकर धर्मान्तरण कराने वाले एक बड़े गिरोह के दो मौलानाओं मोहम्मद उमर गौतम और जहाँगीर कासिम को गिरफ्तार किया था। इन दोनों पर अब तक करीब 1,000 मूक-बधिर, महिलाएँ और बच्चों को निशाना बनाकर धर्म परिवर्तन कराने का आरोप है। इस मामले में यूपी पुलिस ने आईएसआई और विदेशी फंडिंग होने का शक भी जताया था।

कुत्ते को ईंट मार फिरोज ने खड़ा किया फसाद: बागपत के गाँव में हिंसा, पुलिस तैनात

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के एक गाँव में कुत्ते को ईंट मारने से शुरू हुआ विवाद दो पक्षों के बीच संघर्ष में तब्दील हो गया। इस दौरान हथियार भी लहराए गए। इसमें दो महिला समेत चार लोग घायल हो गए। तनाव को देखते हुए गाँव में पुलिस की तैनाती की गई है।

घटना बुधवार (23 जून 2021) की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बागपत जिले के बालैनी थानाक्षेत्र के दत्तनगर गाँव में हुए संघर्ष के दौरान दोनों ओर से पथराव किया गया। धारदार हथियारों का भी इस्तेमाल हुआ। दोनों पक्षों ने बालैनी थाने पर शिकायत दर्ज कराई है।

एक पक्ष का आरोप है कि दूसरे वर्ग के लोगों ने तलवार व तमंचे लहराए और धार्मिक व भड़काऊ नारे लगाए। मामला दो समुदायों का होने से गाँव में तनाव का माहौल बना हुआ है। पुलिस ने इस मामले में एक पक्ष से जोगेंद्र और दूसरे पक्ष से अल्ताफ व फिरोज को गिरफ्तार कर शांतिभंग की धारा में चालान किया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बुधवार (23 जून 2021) की सुबह दत्तनगर गाँव में जोगेंद्र गिरी के मकान के सामने बैठे कुत्ते को पास के रहने वाले फिरोज ने ईंट मार दी। ईंट गिरी के मकान के अंदर जा गिरी। इसको लेकर दोनों के बीच कहासुनी हो गई, जो कुछ देर बाद मारपीट में बदल गई। शोर-शराबा सुनकर दोनों पक्षों के दर्जनों लोग मौके पर दौड़ पड़े और दोनों ओर से पथराव किया जाने लगा।

आरोप है कि फिरोज के पक्ष के कुछ युवकों ने धारदार हथियार से दूसरे पक्ष पर हमला कर दिया, जिससे वहाँ चीख-पुकार मच गई। इसमें जोगेंद्र पक्ष की महिला यशोदा, सविता, सागर व अनिल गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। अन्य लोग भी चोटिल हुए हैं और कई लोगों ने तो भागकर अपनी जान बचाई। ​इन सभी को पुलिस ने पिलाना सीएचसी में भर्ती कराया। डॉक्टरों ने हालत गंभीर होने के चलते उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया है।

बालैनी थाना प्रभारी नरेश कुमार का कहना है कि इस मामले में जोगेंद्र की तहरीर पर एनसीआर दर्ज की गई है। एक पक्ष से जोगेंद्र व दूसरे पक्ष से अल्ताफ व फिरोज को गिरफ्तार कर शांतिभंग में चालान किया गया है। एहतियातन गाँव में पुलिस बल तैनात है।

बच्चों के खेलने को लेकर दो पक्षों में मारपीट

अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, उसी दिन या​नी बुधवार (23 जून) को ही चाँदीनगर थानाक्षेत्र के खट्टा प्रहलादपुर गाँव में बच्चों के खेलने को लेकर दो पक्षों में मारपीट हो गई। यामीन के बच्चे सरकारी नल के निकट खेल रहे थे, जिसका टिंकू पक्ष ने विरोध किया। इसको लेकर पहले दोनों पक्षों में पहले कहासुनी हुई और बाद में यह मारपीट में बदल गई। इसके बाद दोनों पक्षों में जमकर लाठी-डंडे चले, जिसमें दोनों पक्षों की ओर से यामीन, खलील और टिंकू घायल हो गए।

शबाना आजमी से ऑनलाइन ठगी: पैसा भी ले लिया और शराब भी नहीं दिया, अब फोन भी नहीं उठा रहे

बॉलीवुड अभिनेत्री शबाना आजमी ऑनलाइन ठगी का शिकार हो गई हैं। उन्होंने शराब की डिलिवरी करने वाली एक जानी-मानी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के नाम पर ऑर्डर किया। एडवांस में पेमेंट भी कर दिया। लेकिन, उन्हें डिलिवरी नहीं मिली। धोखाधड़ी का अहसास होने पर आजमी ने ट्वीट कर पूरे मामले की जानकारी दीहै और मुंबई पुलिस से कार्रवाई की माँग की।

ट्वीट में बताया है कि उन्होंने Living Liquidz से कुछ सामान ऑर्डर किया था। उसका एडवांस में पेमेंट भी कर दिया। जब सामान की डिलीवरी नहीं हुई तो उन्होंने फोन किया। लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं किया जा रहा है।

ट्वीट में आजमी ने पेटीएम पेमेंट बैंक के उस एकाउंट नंबर और आईएफएससी कोड की जानकारी दी जिस पर पैसा भेजा था। साथ ही फैंस से ऐसे धोखेबाजों से सावधान रहने को भी कहा है। आजमी ने यह नहीं बताया है कि उन्होंने कितना भुगतान किया है। कई यूजर्स ने उन्हें पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी है। उन्हें बताया है कि अक्सर शराब स्टोर्स के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले अपना कॉन्टैक्ट नंबर दर्ज कर देते हैं जिससे लोग धोखाधड़ी के शिकार हो जाते हैं।

बाद में ट्वीट कर उन्होंने बताया कि उनकी Living Liquidz के मालिक से बात हुई है। उन्होंने बताया है कि उनके साथ फ्रॉड करने वालों का Living Liquidz से कोई लेना-देना नहीं है।  

ज्ञात हो कि जिस Living Liquidz की बात शबाना आजमी कर रही हैं वह मुंबई का एक प्रसिद्ध एल्कोहल डिलीवरी प्लेटफॉर्म है। यहाँ खरीददार स्पिरिट, वाइन, बियर, आरटीडी और मिक्सर जैसी वस्तुओं का ऑर्डर से सकते हैं।

₹60000 करोड़, सबसे सस्ता स्मार्टफोन, 109 शहरों में वैक्सीनेशन सेंटर: नीता अंबानी ने बताया कोरोना काल का ‘धर्म’

भारत के प्रमुख बिजनेस हाउस रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की 44वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में कई बड़ी घोषणाएँ की गई। कंपनी ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में 60 हजार करोड़ रुपए का निवेश करेगी। ‘जियोफोन नेक्स्ट’ (Jiophone next) लॉन्च करने का ऐलान किया गया। दुनिया का सबसे सस्ता बताया जा रहा यह स्मार्टफोन इस साल गणेश चतुर्थी यानी 10 सितंबर से बाजार में आ जाएगा। इस दौरान रिलायंस फाउंडेशन की प्रमुख नीता अंबानी ने कहा कि कोरोना संकट से प्रभावित भारतीयों को उबरने में मदद करना ही उनका धर्म है।

कोविड महामारी के दौरान रिलायंस फाउंडेशन के मानवीय कार्यों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि भारत के सामने जो भी चुनौतियाँ हैं, उनमें कंपनी देश के लोगों के साथ मजबूती से खड़ी है और आगे भी रहेगी। नीता अंबानी ने बताया कि रिलायंस फाउंडेशन ने भारत के 109 शहरों में 116 टीकाकरण केंद्र स्थापित किए हैं और इन प्लेटफॉर्म का उपयोग टीकाकरण अभियान के लिए मुफ्त में किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कोविड के खिलाफ भारतीयों का टीकाकरण अभी सर्वोच्च प्राथमिकता है और फाउंडेशन इसे सफल बनाने के लिए हर संभव सहायता प्रदान करेगा।

नीता अंबानी ने कहा कि रिलायंस फाउंडेशन का मिशन वैक्सीन भारत में सबसे बड़े कॉर्पोरेट टीकाकरण अभियानों में से एक है, जिससे सेवानिवृत्त कर्मचारियों, उनके परिवार के सदस्यों और RIL की सभी साझेदार कंपनियों के कर्मचारियों सहित कुल लगभग 20 लाख लोगों को लाभ होगा।

नीता अंबानी ने कहा, “देशव्यापी टीकाकरण अभियान को अंजाम देना एक बहुत बड़ा काम है। लेकिन यह हमारा धर्म है, यह हर भारतीय के लिए हमारा कर्तव्य, रक्षा और सुरक्षा का हमारा वादा है। हमारा दृढ़ विश्वास है कि एक साथ हम कर सकते हैं और हम इससे उबर जाएँगे।”

अंबानी ने मरीजों की मदद के लिए कोविड केयर फैसिलिटी की स्थापना में RIL के योगदान का भी जिक्र किया। पिछले साल, पीएम केयर्स फंड में 556 करोड़ रुपए दान करने के अलावा, RIL ने अस्पतालों और कोविड केयर फैसिलिटी के निर्माण में सैकड़ों करोड़ खर्च किए थे। अंबानी ने कहा कि जब तक भारत में दूसरी लहर आई, तब तक रिलायंस ने मुंबई में अतिरिक्त 875 अस्पताल बेड स्थापित कर लिए थे।

उन्होंने यह भी कहा कि जब देश को आवश्यकता थी तो RIL ने जामनगर रिफाइनरी को प्रति दिन  1100 मीट्रिक टन मेडिकल-ग्रेड लिक्विड ऑक्सीजन का उत्पादन करने के लिए फिर से तैयार किया और विभिन्न राज्यों को इसकी आपूर्ति की। 

नई ऊर्जा में उद्यम करेगी RIL

RIL प्रमुख मुकेश अंबानी ने घोषणा की है कि RIL नए ऊर्जा कारोबार में 60,000 करोड़ रुपए का निवेश करेगी। इसके साथ ही यह धीरूभाई अंबानी ग्रीन एनर्जी गीगा कॉम्प्लेक्स नामक एक नया ऊर्जा विकास केंद्र शुरू कर रहा है। यह सौर ऊर्जा, स्टोरेज बैट्री, हाइड्रोजन सेल और अन्य पर ध्यान केंद्रित करते हुए 4 गीगा कारखाने शुरू करने की योजना बना रहा है।

मुकेश अंबानी ने कहा कि RIL ने 2030 तक 100GW ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा है। जामनगर में 5000 एकड़ क्षेत्र में गीगा कॉम्प्लेक्स बन रहा है। मुकेश अंबानी ने तेजी से इंटरनेट प्रदान करने के लिए जियो और गूगल के बीच एक नई 5G पार्टनरशिप की भी घोषणा की।

ऑस्ट्रेलियाई जेल से जल्द रिहा होगा विशाल जूड: विदेश मंत्री ने दिलाया भरोसा, खालिस्तानियों के विरोध पर हुई थी गिरफ्तारी

विदेश मंत्रालय ने बुधवार (जून 23, 2021) को हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को आश्वासन दिया कि राज्य का युवक विशाल जूड को बहुत जल्द ऑस्ट्रेलिया की जेल से रिहा किया जाएगा। बता दें कि विशाल को ऑस्ट्रेलियाई पुलिस ने कथित ‘हेट क्राइम’ मामले में गिरफ्तार किया है।

खबरों के मुताबिक, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से बात कर ऑस्ट्रेलिया की जेल से विशाल जूड की रिहाई सुनिश्चित करने के लिए हस्तक्षेप करने की माँग की और मामले में विदेश मंत्रालय के तत्काल हस्तक्षेप की अपील की।

भारतीय छात्र विशाल जूड को ऑस्ट्रेलियाई पुलिस ने 16 अप्रैल को सिडनी में एक हमले में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया था। ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के लोगों के अनुसार, विशाल जूड को इस साल अप्रैल में ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले खालिस्तानी चरमपंथियों और भारत विरोधी प्रोपेगेंडिस्टों से भिड़ने के लिए गिरफ्तार किया गया था। उसकी गिरफ्तारी को दो महीने हो चुके हैं और ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों ने न तो उसे जमानत पर रिहा किया है और न ही भारतीय अधिकारियों को उससे बात करने की अनुमति दी है।

उनकी गिरफ्तारी के बाद पिछले कुछ दिनों में ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में विशाल जूड के समर्थन में सैकड़ों समर्थक जमा हो गए हैं। करनाल और हरियाणा के जिलों में उनकी रिहाई को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।

हरियाणा के मुख्यमंत्री ने मंत्री जयशंकर को विशाल जूड के समर्थन में भारत और ऑस्ट्रेलिया में हो रहे प्रदर्शनों से अवगत कराया। मुख्यमंत्री ने कथित तौर पर यह भी बताया कि कैसे विशाल देश विरोधी ताकतों के खिलाफ खड़े हुए थे, जिन्होंने बाद में उन्हें पीटा और झूठे मामले में फँसाया।

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने राष्ट्रवादी भारतीय विशाल जूड के समर्थन में ट्वीट किया, “सिडनी, ऑस्ट्रेलिया में तिरंगे के सम्मान के लिए, हरियाणा के युवा विशाल जूड ने देश विरोधी ताकतों के साथ मजबूती से लड़ाई लड़ी और तिरंगे का अपमान नहीं होने दिया।” सिडनी में खालिस्तानी चरमपंथियों पर हमला करने के आरोप में वह फिलहाल ऑस्ट्रेलियाई पुलिस की हिरासत में हैं।

सीएम कार्यालय से जारी एक बयान में कहा गया है कि 24 वर्षीय जूड निर्दोष थे और उन्हें ‘राष्ट्र विरोधी ताकतों की साजिश’ के बाद जेल में डाल दिया गया था, क्योंकि उन्होंने तिरंगे के लिए भारत विरोधी तत्वों का विरोध किया था।

कौन हैं विशाल जूड?

ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई कर रहे हरियाणा के 24 वर्षीय विशाल जूड को 16 अप्रैल को सिडनी में तीन आपराधिक घटनाओं में कथित रूप से शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। भारतीय राष्ट्रवादियों के एक समूह की ऑस्ट्रेलिया में खालिस्तानियों के साथ झड़प के बाद ऑस्ट्रेलियाई पुलिस अधिकारियों ने विशाल जूड को उठा लिया। विशाल जूड पिछले दो महीने से जेल में बंद हैं। पुलिस ने संपत्ति को नुकसान पहुँचाने और मारपीट के आरोप में जूड को गिरफ्तार किया है।

कथित तौर पर, विशाल पर तीन अपराधों का आरोप लगाया गया है, जो कथित तौर पर 16 सितंबर 2020 और 14 तथा 28 फरवरी 2021 को हुए थे। दिलचस्प बात यह है कि खालिस्तानी कार्यकर्ताओं को तीनों मामलों में ‘पीड़ित’ के रूप में नामित किया गया है। इन खालिस्तानी तत्वों को भारतीय मूल का माना जाता है। हालाँकि, वे खुद को भारतीय नहीं मानते हैं, लेकिन अपनी धार्मिक पहचान के साथ पहचाने जाने को प्राथमिकता देते हैं और खालिस्तान के विचार का समर्थन करते हैं।

जब से सिडनी पुलिस ने खालिस्तानियों द्वारा पेश किए गए कथित वीडियो के साथ संदिग्ध आरोपों में विशाल को गिरफ्तार किया है, भारतीय प्रवासी विशाल जूड की रिहाई की माँग कर रहे हैं। उन्होंने सिडनी पुलिस अधिकारियों से संपर्क किया है, लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकल सका।

इस बीच, विशाल के वकील ने कानूनी कार्रवाई की धमकी देते हुए इसे जेल अधिकारियों के सामने उठाया, जिसके कारण पुलिस ने विशाल के खिलाफ और आपराधिक आरोप लगाए और मामले को एक उच्च न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया, जिससे विशाल और भारतीय समुदाय को और परेशानी हुई।

विशाल जूड के दोस्तों और परिवार ने आरोप लगाया है कि ऑस्ट्रेलियाई पुलिस ने भारत के लिए बार-बार खड़े होने और ऑस्ट्रेलियाई धरती से संचालित खालिस्तानी तत्वों को चुनौती देने के लिए जूड को निशाना बनाया है। विशाल जूड के दोस्तों और परिवार ने कहा है कि पुलिस ने खालिस्तानी समूहों के दबाव में उसे फँसाने के लिए कार्रवाई की है।

बाद में, यह सामने आया कि विशाल जूड डायबिटीज मरीज है और जेल में उसे दवा नहीं मिल रही थी। कई दिनों तक, उनके दोस्तों और परिवार को उनकी मेडिकल कंडीशन के बावजूद मिलने से मना कर दिया गया। ऑपइंडिया से बात करने वाले उनके दोस्तों ने कहा है कि विशाल का एकमात्र दोष यह था कि उन्होंने भारत के समर्थन में एक तिरंगा रैली निकालने की कोशिश की। ऐसा लगता है कि ऑस्ट्रेलिया में कुछ खालिस्तानी समूहों को इससे परेशानी हो गई।

विशाल जूड के पिता उन तक कांसुलर एक्सेस की कोशिश कर रहे हैं। हालाँकि, ऑस्ट्रेलिया में भारतीय उच्चायोग ने अभी तक भारतीय डायस्पोरा के अनुरोधों को स्वीकार नहीं किया था। ऑपइंडिया से बात करते हुए, भारतीय प्रवासी के सदस्यों में से एक ने भारतीयों के हितों के लिए खड़े होने के लिए भारतीय उच्चायोग की अनिच्छा पर निराशा व्यक्त की थी। उन्होंने दावा किया कि अधिकारी विशाल जूड को रिहा करने या कांसुलर एक्सेस की माँग में कोई दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

मोदी ने भगा दिया वाला प्रोपेगेंडा और माल्या-चोकसी-नीरव पर कसता शिकंजा: भारत में आर्थिक पारदर्शिता का भविष्य

विजय माल्या ने भारतीय स्टेट बैंक और उसके सहयोगी बैंकों को जो नुकसान पहुँचाया था, उसका करीब 40 फीसदी ऋण वसूली न्यायाधिकरण (Debt Recovery Tribunal) ने भरपाई कर दिया है। न्यायाधिकरण ने माल्या की कंपनी यूनाइटेड ब्रेवरी के लगभग 5825 करोड़ रुपए मूल्य के शेयर बेच कर यह भरपाई की है।

न्यायाधिकरण की ओर से जारी विज्ञप्ति में यह भी बताया गया है कि 25 जून तक करीब 800 करोड़ रुपए मूल्य के और शेयर बेचे जाएँगे और उससे हासिल पैसे बैंकों को मिलेंगे। हाल के दिनों में न्यायाधिकरण की ओर से की गई ये सबसे बड़ी उगाही है।

आर्थिक अपराधियों और भगोड़ों के खिलाफ सरकार की ये कार्रवाई केवल माल्या तक सीमित नहीं है। खबरों के अनुसार प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने देश-विदेश में दो और भगोड़े, नीरव मोदी और मेहुल चोकसी की नामी-बेनामी संपत्ति भी जब्त की है।

तीनों आर्थिक अपराधियों की जब्त की गई कुल संपत्ति का मूल्य करीब 18170 करोड़ रुपए है जो बैंकों को इनकी वजह से होने वाले नुकसान का करीब 80 प्रतिशत है। प्रवर्तन निदेशालय से मिली जानकारी के अनुसार ये संपत्ति देश-विदेश में केवल इनके ही नहीं, बल्कि इनकी जान-पहचान के लोगों और रिश्तेदारों के नाम पर भी हैं।

यह खबर इसलिए महत्वपूर्ण है कि देश में आर्थिक अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई की प्रक्रिया पहले से ठोस नहीं थी। यह इसलिए संभव हो पाया है क्योंकि वर्तमान सरकार ने आर्थिक अपराधों से निपटने के लिए कानून बनाए। कानून बनाने के अलावा वर्तमान सरकार की नीयत हमेशा से आर्थिक अपराध से निपटने और उसे रोकने की रही है जो सरकार द्वारा अभी तक उठाए गए कदमों से स्पष्ट हो जाता है।

अब यह किसी से छिपा नहीं है कि विजय माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चोकसी जैसे लोगों को 2014 तक सरकारी और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था। यह वर्तमान सरकार की नीतियों का असर है जिसकी वजह से आर्थिक अपराध और अपराधियों को पहचानने में न केवल मदद मिली, बल्कि उनके खिलाफ ठोस कानूनी कार्रवाई की शुरुआत हुई।

माल्या के खिलाफ सीबीआई की जाँच जुलाई 2015 में शुरू हुई थी। इसके साथ ही प्रवर्तन निदेशालय ने जनवरी 2016 में अपनी जाँच शुरू की तो मार्च 2016 में माल्या देश छोड़कर लंदन में जा बसा। आए दिन यह प्रश्न पूछा जाता रहा कि वह देश छोड़कर भागा कैसे? साथ ही यह प्रोपेगेंडा भी चलाया गया कि माल्या को भगाने में सरकार का ही हाथ है।

जैसा कि हमारे राजनीतिक विमर्श में होता है, तथ्यों के आधार पर बहुत कम बातें हुई। शोर में यह प्रश्न दब गया कि माल्या को राजनीतिक संरक्षण किसने दिया? सरकारी बैंकों से उसे लोन किसके कहने पर दिया गया? उसके बिजनेस से किसे लाभ हुआ? ये ऐसे प्रश्न थे जो सार्वजनिक मंचों पर इसलिए दब गए क्योंकि हमारे राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक विमर्श शोर प्रधान होते हैं।

यह वर्तमान सरकार द्वारा लगातार की गई कोशिशों का ही नतीजा है कि पहले वेस्टमिनिस्टर कोर्ट से और उसके पश्चात यूके के हाई कोर्ट द्वारा माल्या का प्रत्यर्पण तय किया गया। यही नहीं, यह भी तय हुआ कि वह अपने प्रत्यर्पण के विरुद्ध यूके के सुप्रीम कोर्ट में अपील नहीं कर सकता। ऐसे में यह माल्या को भारत लाया जाना तय है जो आज नहीं तो कल होकर रहेगा। इन सब के बीच जो बात सबसे दिलचस्प रही वह माल्या द्वारा सार्वजनिक मंचों पर की गई अपील थी, जिसमें वह बार-बार बैंकों का बकाया देने के लिए तैयार दिखा। माल्या के विरुद्ध सरकार की लड़ाई और मेहनत यह बताती है कि आर्थिक अपराध को लेकर सरकार की सोच और उसकी नीयत साफ़ है।

नीरव मोदी और मेहुल चोकसी के खिलाफ सरकार ने 2018 में जाँच शुरू की। स्कैम सार्वजनिक होता उसके पहले ही दोनों भारत से भाग गए। दोनों के खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी हुआ और नीरव मोदी को यूके में गिरफ्तार कर लिया गया। आर्थिक अपराध के खिलाफ सरकार की गंभीरता का ही नतीजा है कि नीरव मोदी 2019 से जेल में है और वहाँ की अदालतों में प्रत्यर्पण का केस भी हार चुका हैं। उसको भी भारत लाया जाना तय है।

नीरव मोदी के मामले में जो सबसे दिलचस्प बात रही वह थी दो भूतपूर्व न्यायाधीशों का नीरव मोदी को बचाने का प्रयास। सुप्रीम कोर्ट से रिटायर्ड जस्टिस मार्कण्डेय काटजू और मुंबई हाई कोर्ट से रिटायर्ड जस्टिस एएम थिप्से ने नीरव मोदी के इस दलील के पक्ष में गवाही दी कि यदि उसका प्रत्यर्पण हुआ तो उसके मामले की भारत में निष्पक्ष सुनवाई नहीं हो सकेगी।

यह किसी भी भारतीय के लिए कल्पना से परे है कि वर्षों तक सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में जज रह चुके लोग विदेशी अदालतों में भारतीय अदालतों के खिलाफ गवाही दे रहे थे। वहाँ की अदालत ने दोनों न्यायाधीशों द्वारा दी गई दलीलों को रद्दी की टोकरी में भले ही डाल दिया पर प्रश्न यह उठता है कि उनका इस भगोड़े से कैसा सम्बन्ध होगा जिसकी वजह से ये माननीय उसके पक्ष में विदेशी अदालत में गवाही दे आए? ऐसी क्या मज़बूरी रही होगी? बात यह भी नहीं है कि नीरव मोदी का अपराधी साबित होना बाकी था। यूके की अदालत में वह अपराधी साबित हो चुका था और ये माननीय केवल यह तय करना चाहते थे कि उसे भारत न भेजा जाए। ऐसे में यह प्रश्न सार्वजनिक विमर्शों में पूछा जाना चाहिए कि दोनों माननीय उसे बचाने का प्रयत्न कर रहे थे या किसी ने उन्हें ऐसा करने के लिए कहा था?

मेहुल चोकसी इस समय डोमिनिका की जेल में है। उसे भारत लाने में सरकार के प्रयास कितने गंभीर रहे हैं वह हम सब देख चुके हैं। आर्थिक अपराधों और अपराधियों से निपटने की वर्तमान सरकार की कोशिश और मंशा संतोषप्रद रही हैं, इस बात को कोई नकार नहीं सकता। ऐसे में आशा करनी चाहिए कि जैसे-जैसे कानून मज़बूत होंगे, मामले अदालत में उठेंगे और उन पर त्वरित फैसले होंगे, आर्थिक वातावरण और पारदर्शिता न केवल बढ़ेगी बल्कि मज़बूत होगी और हमारी अर्थव्यवस्था, उद्योग और व्यापार के प्रति देशी विदेशी लोगों का विश्वास सुदृढ़ होगा।

कोरोना वैक्सीन पर प्रशांत भूषण की नई कारस्तानी: भ्रामक रिपोर्ट शेयर की, दावा- टीका लेने वालों की मृत्यु दर ज्यादा

इस्लामपरस्त वामपंथी प्रशांत भूषण एक बार फिर ट्वीट्स के जरिए कोरोना वैक्सीन पर लोगों को गुमराह कर डराने की कोशिश करते नजर आए हैं। एक्टिविस्ट वकील सोशल मीडिया पर वही चुनिंदा लेख पोस्ट करते हैं, जो कोविड-19 वैक्सीन के खिलाफ लिखे होते हैं। भले ही वे सीधे तौर पर वैक्सीन के खिलाफ कुछ नहीं कहते हैं, लेकिन इस तरह की रिपोर्ट्स को वो पोस्ट करते रहते हैं। इसमें कोई संदेह नहीं है कि वे इन पोस्ट के माध्यम से क्या कहना चाहते हैं।

वैक्सीन विरोधी दुष्प्रचार को जारी रखते हुए उन्होंने बुधवार (23 जून, 2021) को lifesitenews.com वेबसाइट की एक रिपोर्ट ट्वीट की। इसमें लिखा गया था कि जो लोग कोरोना वायरस के डेल्टा वैरिएंट से संक्रमित मिले थे, उनमें टीका नहीं लगाने वालों की तुलना में टीका लगा चुके लोगों की मृत्यु दर अधिक थी। यूके के हेल्थ डेटा का हवाला देते हुए, रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वैक्सीन नहीं लगाने वाले लोगों की तुलना में वैक्सीन लगा चुके लोगों की डेल्टा वैरिएंट से मृत्यु दर छह गुना अधिक है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन 4,087 लोगों में डेल्टा प्लस वैरिएंट की पुष्टि हुई है, उन्होंने 14 दिन या उससे पहले कोरोना का टीका लगाया था, उनमें से 26 की मौत हो गई थी, यानी मृत्यु दर 0.00636 प्रतिशत थी। वहीं, कोरोना वायरस के डेल्टा वैरिएंट से संक्रमित पाए गए 35,521 लोगों में से किसी ने भी टीके की एक भी खुराक नहीं ली थी। उनमें से 34 की मौत हो गई थी, जिसका अर्थ है कि मृत्यु दर 0.000957% है। इससे पता चला कि टीका लगाने वाले लोगों की मृत्यु दर, टीका नहीं लगाने वाले लोगों की मृत्यु दर से 6 गुना अधिक थी। हालाँकि, रिपोर्ट पर गौर करें तो मृत्यु दर बेहद कम है, यानी 1% से भी कम।

रिपोर्ट में भ्रामक शीर्षक का इस्तेमाल

रिपोर्ट में वास्तविक डेटा का लिंक भी शामिल था, जिससे पता चलता है कि रिपोर्ट में एक भ्रामक शीर्षक का इस्तेमाल किया गया है। क्योंकि इस तरह का निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है कि डेल्टा वैरिएंट से संक्रमित वैक्सीन लगाने वालों की अधिक मौतें हो रही हैं। दरअसल, स्वास्थ्य डेटा केवल वैक्सीन लगवाने वाले और वैक्सीन नहीं लगवाने वाले लोगों की मृत्यु का आँकड़ा देता है। इसमें आयु समूह, सह-रुग्णता (co-morbidities) आदि जैसे अन्य कारक शामिल नहीं हैं।

रिपोर्ट में दो कैटेगरी को शामिल ही नहीं किया गया

डेटा में तीन कैटेगरी में टीकाकरण करने वाले लोगों का विवरण भी था, लेकिन रिपोर्ट ने उनमें से केवल एक का इस्तेमाल किया। वहीं, दो कैटेगरी को मनमाने ढंग से छोड़ दिया गया, क्योंकि उनमें मृत्यु दर सबसे कम है। रिपोर्ट में उन लोगों की संख्या भी शामिल थी, जिन्होंने 14 दिन या उससे अधिक समय पहले वैक्सीन की दूसरी डोज ली थी। स्वास्थ्य डेटा में उन लोगों का आँकड़ा भी दिया गया है, जिन्होंने वैक्सीन की पहली खुराक 21 दिन पहले या उससे अधिक समय पहले ली थी।

जिन 4,094 लोगों ने 21 दिन से भी कम समय पहले कोरोना की पहली खुराक ली थी, उनमें से केवल 1 व्यक्ति की मौत डेल्टा वैरिएंट से हुई थी। वहीं, 9,461 लोगों में से जिन्हें 21 दिन से अधिक समय पहले पहली खुराक मिली थी, उनमें से 10 लोगों की मौत हो गई थी। इसका मतलब यह है कि जिन लोगों ने टीके की पहली खुराक ली थी, उनकी संयुक्त मृत्यु दर 0.000812% थी, जो टीका नहीं लेने वाले लोगों की दर से कम थी। जिन लोगों को कम से कम 21 दिन पहले खुराक मिली थी, उनकी मृत्यु दर 0.000244% बहुत कम है।

दो खुराक लेने के बाद यह सबसे अच्छा काम करता है

यदि हम इस डेटा की व्याख्या करें तो यह दिखाता है कि टीका लगने के 21 दिनों के भीतर लोग सबसे अधिक सुरक्षित हैं। वहीं, 21 दिनों के बाद मृत्यु दर बढ़ जाती है और दूसरी खुराक लेने के बाद यह और बढ़ जाती है। लेकिन ऐसा नहीं है कि वैक्सीन इस प्रकार से काम करती है। दरअसल, कोरोना का टीका कई दिनों के बाद काम करना शुरू कर देता है। कोविड-19 टीके की दोनों खुराक लेने के बाद यह सबसे अच्छा काम करता है। यह कई देशों में टीकों पर किए गए कई ट्रायल में साबित हुआ है।

इसलिए, यूके के स्वास्थ्य डेटा पर टीकाकरण और बिना टीकाकरण वाले लोगों के बीच कोरोना के डेल्टा वैरिएंट से हुई मौतों के तुलनात्मक अध्ययन पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। कोविड-19 में मृत्यु कई कारकों पर निर्भर करती है और सार्थक निष्कर्ष पर आने के लिए उन सभी का विश्लेषण किया जाना चाहिए।

इससे पहले भी लोगों को कर चुके हैं गुमराह

गौरतलब है कि इससे पहले भी प्रशांत भूषण कोरोना वैक्सीन को लेकर लोगों को गुमराह कर उन्हें डराने की कोशिश कर चुके हैं। इसके लिए उन्होंने ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक खबर का सहारा लिया था, जिसकी हेडिंग में लिखा था कि उत्तराखंड पुलिस के 2,000 से भी अधिक जवान कोरोना से संक्रमित हुए, जिनमें से 93% ने वैक्सीन की दोनों डोज ले रखी थी। प्रशांत ने लेख में से आँकड़ा निकाल कर अपने ट्वीट में डालते हुए लिखा था कि अप्रैल-मई में 2,382 उत्तराखंड पुलिस के जवान कोरोना संक्रमित हुए। इस दौरान ये भी ड्यूटी पर थे। साथ ही उन्होंने ये भी कॉपी पेस्ट किया कि इनमें से 2,204 पूरी तरह रिकवर हो चुके हैं, लेकिन 5 की मौत हो गई। इसके बाद उन्होंने ‘Hmm’ भी लिखा था।

‘हर चोर का मोदी सरनेम क्यों’: सूरत की कोर्ट में पेश हुए राहुल गाँधी, कहा- कटाक्ष किया था, अब याद नहीं

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी गुजरात के सूरत की एक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश हुए। मामला ‘सारे मोदी चोर’ वाले बयान को लेकर उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मानहानि के मामले से जुड़ा है। राहुल गाँधी ने गुरुवार (24 जून 2021) को इस मामले में अपना बयान दर्ज कराया।

गुजरात के भाजपा विधायक पूर्णेश मोदी ने यह मामला दर्ज करवाया था। सूरत के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने एक हफ्ते पहले राहुल 24 जून को अदालत में मौजूद रहने के निर्देश दिए थे। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार कॉन्ग्रेस नेता ने अदालत को बताया कि उन्होंने चुनाव के दौरान राजनीतिक कटाक्ष किया था। उन्होंने यह बात किसी समाज के लिए नहीं कही थी। साथ ही कहा कि इस मामले में अब उन्हें ज्यादा कुछ याद नहीं है।

अब इस मामले में अगली सुनवाई 12 जुलाई को होगी। सूरत की कोर्ट में पेशी से पहले राहुल गाँधी ने एक ट्वीट किया था। इसमें लिखा था, ”अस्तित्व का पूरा रहस्य यही है कि कोई डर ना हो।”  

गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव के दौरान कर्नाटक के कोलार में नीरव मोदी, ललित मोदी और नरेंद्र मोदी का नाम लेते हुए तत्कालीन कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने पूछा था कि सभी चोरों के उपनाम मोदी क्यों है? 13 अप्रैल 2019 को उन्होंने कहा था, “नीरव मोदी, ललित मोदी, नरेंद्र मोदी इन सभी के नाम में मोदी लगा हुआ है। सभी चोरों के नाम में मोदी क्यों लगा होता है।”

इसके बाद सूरत से भारतीय जनता पार्टी के विधायक पूर्णेश मोदी ने कॉन्ग्रेस नेता के खिलाफ पूरे मोदी समुदाय को बदनाम करने की शिकायत दर्ज कराई थी। पूर्णेश ने अप्रैल 2019 में कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 499 और 500 के तहत केस दर्ज करवाया था, जो आपराधिक मानहानि से संबंधित है। राहुल अपने विवादित बयानों को लेकर देश भर की विभिन्न अदालतों में मानहानि के कई मामलों का सामना कर रहे हैं।

‘ममता के वकील भी पॉलिटिकल’: नंदीग्राम की सुनवाई से खुद को अलग करने पर जस्टिस चंदा ने फैसला सुरक्षित रखा

कलकत्ता हाई कोर्ट के जस्टिस कौशिक चंदा ने उस याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है, जिसमें उनसे खुद को सुनवाई से अलग करने की माँग की गई है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने यह अर्जी दाखिल की है। मामला नंदीग्राम के विधानसभा चुनाव के नतीजों को हाईकोर्ट में चुनौती देने से जुड़ा है।

जस्टिस चंदा की एकल पीठ ने गुरुवार (24 जून 2021) को सुनवाई करते हुए कहा कि जब ममता बनर्जी के लिए केस लड़ रहे वकीलों की राजनैतिक पृष्ठभूमि होने के बाद भी उन पर भरोसा किया जा सकता है तो जज के लिए यह स्वीकार्यता क्यों नहीं? बनर्जी ने जस्टिस चंदा के बीजेपी से जुड़ाव का हवाला देकर ‘पक्षपात की संभावना’ जताई थी।

जस्टिस चंदा ने कहा कि इस केस में शामिल दोनों वकील का राजनीतिक जुड़ाव है। ममता बनर्जी की ओर से पेश हुए अभिषेक मनु सिंघवी से उन्होंने कहा, “आप कॉन्ग्रेस से हैं और दूसरे वकील एसएन मुखर्जी भाजपा से जुड़े रहे हैं। लेकिन आप दोनों केस लड़ रहे हैं। अगर राजनैतिक पृष्ठभूमि वाले वकीलों पर भरोसा किया जा सकता है तो जज पर क्यों नहीं?”

ममता बनर्जी ने नंदीग्राम चुनाव परिणाम में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इस पर सुनवाई करने के लिए ममता बनर्जी ने कलकत्ता हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल को एक पत्र लिखकर अपनी याचिका जस्टिस कौशिक चंदा के अलावा किसी दूसरी पीठ को सौंपने का अनुरोध किया था। कारण यह था कि ममता बनर्जी, जस्टिस चंदा को भाजपा का सदस्य बता रही थीं।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के वकील संजय बसु ने दावा किया था कि याचिका पर सुनवाई कर रहे जस्टिस कौशिक चंदा भाजपा के सक्रिय सदस्य रह चुके हैं। ऐसे में चुनाव याचिका पर फैसले के राजनीतिक निहितार्थ होंगे। उन्होंने यह भी कहा था कि उनकी मुवक्किल को न्यायिक प्रणाली और न्यायालय पर बहुत विश्वास है लेकिन माननीय न्यायाधीश की ओर से पूर्वाग्रह की आशंका है।

आपको बता दें कि ममता बनर्जी ने नंदीग्राम चुनाव परिणाम में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका में पश्चिम बंगाल विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष और भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के निर्वाचन को रद्द करने की माँग की गई है। दरअसल नंदीग्राम में ममता बनर्जी ने शुभेंदु के विरुद्ध चुनाव लड़ा था, जहाँ उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

स्वरोजगार संगम: CM योगी आदित्यनाथ ने बाँटे ₹2505 करोड़ के ऋण, 31542 MSME को फायदा

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर नियंत्रित होने के बाद उत्तर प्रदेश की योगी सरकार औद्योगिक-आर्थिक गतिविधियों को तेज करने के प्रयास में है। इसके लिए सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) विभाग द्वारा आयोजित ऑनलाइन स्वरोजगार संगम कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की 31,542 एमएसएमई इकाइयों को 2505.58 करोड़ रुपए ऋण वितरित किया।

इसके साथ ही भदोही, मुरादाबाद, गाजियाबाद, मीरजापुर, मैनपुरी, मऊ, आगरा, बिजनौर और मुजफ्फरनगर के 73.54 करोड़ रुपए के ‘एक जिला, एक उत्पाद’ सामान्य सुविधा केंद्र (CFC) का शिलान्यास व पोर्टल का शुभारंभ किया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार (जून 23, 2021) को अपने सरकारी आवास से ऑनलाइन स्वरोजगार संगम कार्यक्रम से जुड़े। उन्होंने कहा कि एमएसएमई और निर्यात प्रोत्साहन विभाग ने रोजगार सृजन के क्षेत्र में अच्छा काम किया है। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में राहत मिलते ही एमएसएमई इकाइयों के लिए ऑनलाइन ऋण मेले का आयोजन सराहनीय है। सीएम योगी ने इसी तर्ज पर एक महीने में सभी 75 जिलों में भी ऋण मेले आयोजित कर उनसे प्रभारी मंत्री, स्थानीय सांसद, विधायक आदि को भी जोड़ने का निर्देश दिया।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कोरोना संक्रमण के पहले चरण में भी बैंकों के साथ समन्वय करके एमएसएमई इकाइयों को मजबूत करने के लिए बड़ी मात्रा में ऋण वितरण किया गया था, जिससे बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर तैयार हुए। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी आबादी का प्रदेश होने के बावजूद यहाँ बेरोजगारी की दर सबसे कम है। सरकार ने चार लाख से अधिक युवाओं को राजकीय सेवाओं में नौकरी दी है, जबकि एमएसएमई के माध्यम से डेढ़ करोड़ रोजगार दिए गए।

केंद्र सरकार ने की मदद

सीएम योगी ने कहा कि कोरोना महामारी में जीवन बचाने के अनेक प्रयास किए गए। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश अच्छी स्थिति में रहा। दुनिया की बड़ी-बड़ी ताकतें पस्त हो गई, लेकिन हमारा देश मजबूती से खड़ा रहा। 2021 मार्च में कोरोना ने फिर अपना स्वरूप दिखाना प्रारम्भ कर दिया, हमने अप्रैल से ही कोरोना से बचाव के कार्य शुरू कर दिए थे। इन प्रयासों के बावजूद कई लोगों ने अपने स्वजनों को खोया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों की भरपूर मदद की। चाहे बात मेडिसिन की हो, टेस्टिंग की हो, ऑक्सीजन की हो या फिर अब वैक्सीन की।

हर जिले में लोन मेला

मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी तरह हमें जीवन और आजीविका को बचाने के लिए कार्य करना है। पिछली कोरोना लहर में 40 लाख माइग्रेंट आए थे। हमने उन्हें यूपी में ही काम दिया और MSME यूनिट ने उन्हें सहयोग दिया। उसी का परिणाम है कि आज प्रदेश का युवा निरंतर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि ऋण प्रदान करने की हमारी योजना है। उसी को आगे बढ़ाने के काम होंगे। पूँजी से ही पूँजी बढ़ेगी। हमारा प्रयास है कि अगले एक महीने में 75 जनपदों में हर जिले में लोन मेला आयोजित किया जाए। तभी ये कार्य पूरा होगा।