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मूक-बधिर बच्चों को बनाने वाले थे ‘मानव बम’, देश-विदेश में होना था इस्तेमाल: इस्लामी धर्मांतरण गिरोह को पाक-अरब से फंडिंग

उत्तर प्रदेश ATS द्वारा गिरफ्तार किए गए दोनों मौलानाओं पर 1000 हिन्दुओं का धर्मांतरण कर के उन्हें मुस्लिम बनाने का आरोप है। ये गिरोह खास कर के मूक-बधिर बच्चों को निशाना बनाता था। मौलानाओं जहाँगीर आलम कासमी और मोहम्मद उमर गौतम को दिल्ली से दबोचा गया था। अब इनसे पूछताछ में कई राज़ सामने आए हैं। अब सामने आया है कि ये मूक-बधिर बच्चों को मुस्लिम बना कर उनका इस्तेमाल आत्मघाती हमलावरों के रूप में करने वाले थे।

नोएडा के सेक्टर-117 स्थित डेफ सोसाइटी के बच्चों को खास कर के इस गिरोह ने निशाना बनाया। इनकी साजिश थी कि मूक-बधिर विद्यार्थियों का उपयोग ‘मानव बम’ के रूप में किया जाए। भारत ही नहीं, इन्हें ‘मानव बम’ बना कर विदेश में भी उनका इस्तेमाल करने की साजिश थी। पाकिस्तान और अरब देशों से इन्हें भारी फंडिंग मिल रही थी, जिससे इस्लामी धर्मांतरण का गिरोह फल-फूल रहा था। गाजियाबाद के डासना मंदिर में घुसने वालों से भी इनका कनेक्शन सामने आया है।

उस प्रकरण में पकड़े गए विपुल, कासिफ व सलीमुद्दीन के तार कई इस्लामी कट्टरपंथी संगठनों से जुड़े हुए मिले हैं। सुरक्षा एजेंसियाँ अब इनके नेटवर्क के तह तक जाने में लगी है। चैरिटेबल सोसाइटी द्वारा संचालित स्कूल के मूक-बधिर बच्चों के अलावा ये गिरोह महिलाओं को भी अपना शिकार बनाता था। कई महिलाओं का इस्लामी मतांतरण करा कर उनका निकाह करा दिया गया। ये दिव्यांग बच्चे बोल-सुन नहीं सकते हैं, इसीलिए उन्हें निशाना बनाया गया।

उन्हें मुस्लिम बना कर उनमें हिन्दू धर्म के प्रति घृणा पैदा की जाती थी। इस्लाम के प्रति उनका विश्वास जगाया जाता था। देश भर में इस गिरोह व इसके नेटवर्क से जुड़े संदिग्ध बैंक खातों की जाँच की जा रही है। 100 से अधिक बैंक खाते रडार पर हैं, जिनमें से फ़िलहाल 3 दर्जन की जाँच की जा रही है। कई आतंकी संगठनों द्वारा फंडिंग के इस खेल में कुछ सफेदपोश भी जुड़े हुए हैं। मुंबई से मौलाना मंजीर धरा गया है, जिसने विपुल का कलीमुद्दीन से संपर्क करा कर उसे गाजियाबाद भेजा था।

उसने कलीमुद्दीन से यूनानी पद्धति में पैरामेडिकल का प्रशिक्षण लिया था। नागपुर का एक कट्टरपंथी संगठन भी एजेंसियों की रडार पर है, जिसका महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में प्रभाव है। विपुल इसी संगठन से जुड़ कर इस्लाम के प्रचार-प्रसार में लगा हुआ था। गरीब परिवार से आने वाले विपुल का धर्मांतरण भी पैसे, नौकरी और शादी का लालच देकर कराया गया था। सलीमुद्दीन ने कासिफ की बहन से उसकी शादी करा कर उसके लिए क्लिनिक भी खुलवा दिया था।

नोएडा की डेफ सोसाइटी को सरकार से भी अनुदान मिल रहा था। स्कूल की संचालक रोमा रिका से पूछताछ जारी है। छात्रों को बरगलाने के लिए कश्मीरी छात्रों का इस्तेमाल किया जाता था। रोमा ने इन गतिविधियों से खुद को अनजान बताते हुए कहा था कि स्कूल में पढ़ने वाले अधिकतर बच्चे परिवार और समाज में नज़रअंदाज़ किए गए होते हैं, इसीलिए उन्हें निशाना बनाना आसान हो सकता है। स्कूल में कश्मीरी मुस्लिम छात्रों को ट्रेनिंग देकर भेजा जाता था।

इन हिन्दू छात्रों का इस्लामी धर्मांतरण करा कर उन्हें केरल के इडुक्की जिले में थांगलपारा ले जाया जाता था। वहाँ ट्रेनिंग कैम्प में चट्टानों की चढ़ाई, आधुनिक हथियारों का प्रशिक्षण और जिहादी साहित्य पढ़ाया जाता था। रोमा रोका ने खुद को बंगाली हिन्दू बताया है। ATS को उनकी दलीलों पर भरोसा नहीं है, इसीलिए मौलानाओं के साथ बिठा कर पूछताछ की जाएगी। दोनों मौलाना एक सप्ताह की पुलिस रिमांड में हैं।

मुंबई के अस्पताल का ICU, चूहों ने कुतर दी मरीज की आँख: शिवसेना के कब्जे वाली BMC चलाती है यह हॉस्पिटल

महाराष्ट्र के मुंबई से एक हैरान कर देने वाले मामला सामने आया है। यहाँ के राजावाड़ी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती नागेश यलप्पा की आँख मंगलवार (22 जून 2021) को चूहों ने कुतर दी। यह अस्पताल शिवसेना के कब्जे वाली बीएमसी द्वारा संचालित है। मुंबई की मेयर किशोरी पेडनेकर ने कहा है कि मरीज की हालत खराब है। उन्होंने घटना की जाँच के आदेश दिए हैं।

मरीज को साँस लेने में दिक्कत हो रही थी। उसे बुखार और किडनी में दर्द की शिकायत के बाद रविवार (20 जून 2021) को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वह वेंटिलेटर सपोर्ट पर है। इस घटना से मरीज की आँख को कितना नुकसान हुआ है, यह अभी पता नहीं चल सका है। अस्पताल की सुपरिंटेंडेंट डॉ. विद्या ठाकुर का दावा है कि पेशेंट की आँख की रोशनी सही सलामत है।

मरीज की बहन ने बयाँ की कहानी

मरीज की बहन यशोदा यल्लापा ने आँख को हुए नुकसान की तस्वीरें दिखाई। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक यल्लापा ने कहा, “इस अस्पताल का मालिकाना हक बीएमसी के पास है। मंगलवार को मैंने उनकी आँख पर एक पट्टी देखी और नीचे खून देखा। हम जैसे साधारण लोग और कहाँ जा सकते हैं? नर्सों ने बताया था कि सिर्फ दो लोग ड्यूटी पर हैं और आईसीयू के लिए यह संख्या काफी कम है। घटना के बाद सिक्योरिटी गार्ड ने मुझे बाहर निकालने की कोशिश की।”

हालाँकि, यह पहली बार नहीं है जब मुंबई के किसी अस्पताल में इस तरह की घटना हुई है। इससे पहले 2017 में कांदिवली स्थित शताब्दी अस्पताल में भी चूहों ने दो मरीजों को कुतर डाला था। अस्पताल के ही एक कर्मचारी ने इसकी दुर्दशा की कहानी बयाँ करते हुए कहा, “यह अस्पताल लंबे समय प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार है। अस्पताल अधीक्षक पिछले पाँच साल से रेनोवेशन के लिए राशि की माँग कर रहे हैं। अस्पताल के इमरजेंसी मेडिकल सर्विस विंग को पूर्व सांसद गुरुदास कामत ने अपने फंड से 2006 में बनवाया था। राजावाड़ी के पूर्वी उपनगरों के सबसे बड़े अस्पतालों में से एक होने के बाद भी बीएमसी इसके लिए धन की मँजूरी नहीं दे रही है।”

घटना के बाद मुंबई की मेयर किशोरी पेडनेकर ने आईसीयू में मरीज का हाल जाना। इस दौरान उनके साथ स्थानीय विधायक दिलीप लांडे भी थे। इस मामले में मेयर किशोरी पेडनेकर एक मीटिंग भी की। उन्होंने कहा, “मरीज की हालत ठीक नहीं है। उनका हीमोग्लोबिन केवल एक है। वो शराबी भी है। ऐसी घटना नहीं होनी चाहिए थी। हमने जाँच का आदेश दे दिया है। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”

मेयर के साथ इस बैठक में मरीज की बहन यशोदा यल्लापा भी शामिल हुईं। बैठक के बाद पेडनेकर ने कहा, “नॉर्थ वार्ड के असिस्टेंट कमिश्नर अजीत कुमार अंबी ने कहा है कि वो यहाँ पर रात में चूहे पकड़ने वालों को तैनात करेंगे। ताकि ऐसी घटनाएँ दोबारा न हों।” मेयर ने कहा कि जो हुआ उसे मैं सही नहीं ठहरा सकती। लेकिन, मैंने देखा है कि आईसीयू पूरी तरह से खचाखच भरा हुआ है। जब किसी ने उसका दरवाजा खोला होगा तो चूहा घुस गया होगा। मैंने निर्देश दिया है कि रात में सभी पर्दों को मोड़ दिया जाए ताकि चूहे दिखाई दें। वहीं स्टाफ की कमी को स्वीकार करते हुए मेयर ने कहा कि जब रात में नर्सें होती हैं तो उन्हें इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।

‘CM योगी पहाड़ी, गोरखपुर मंदिर मुस्लिमों की’: धर्मांतरण पर शिकंजे से सामने आई मुनव्वर राना की हिंदू घृणा

शायर मुनव्वर राना ने उत्तर प्रदेश ATS (आतंक रोधी दस्ता) द्वारा गिरफ्तार किए गए दो मौलानाओं और उन पर लगे 1000 हिन्दुओं के इस्लामी धर्मांतरण के आरोपों पर टिप्पणी की है। मुनव्वर राना ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि ATS को ही ख़त्म कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि ATS को 1000 से ऊपर गिनती ही नहीं आती है, वरना वो इसे 4000 भी बना देते। उन्होंने पूछा कि जब धर्मांतरण का आँकड़ा 100 पहुँचा होगा, तब क्या ATS बैठ कर गाँजा पी रही थी?

मुनव्वर राना ने NBT से बातचीत करते हुए कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में भाजपा हार जाएगी, लेकिन योगी आदित्यनाथ जीत जाएँगे। उन्होंने दावा किया कि योगी आदित्यनाथ को प्रधानमंत्री बनने की इतनी जल्दी है कि 1000 क्या, वो ये भी कह सकते हैं कि यूपी में 1 करोड़ हिन्दू धर्मांतरण कर के मुस्लिम बन गए हैं। उन्होंने कहा, “बेचारे हिन्दू इतने कमजोर हो गए हैं कि वो कुछ पैसों के लालच के लिए मुस्लिम हो जाते हैं।”

मुनव्वर राना ने कहा कि कोरोना महामारी ने हिन्दू-मुस्लिम का फासला मिटा दिया था और दोनों ये समझ गए थे कि उन्हें मिलजुल कर रहना चाहिए और एक-दूसरे के काम आना चाहिए, लेकिन चुनाव के लिए ये सब ‘कहानी’ गढ़ी जा रही है। उन्होंने कहा कि हिन्दू-मुस्लिम नफरत के लिए ये सब किया जा रहा है। मुनव्वर राना ने बड़ा दावा किया कि कल को 20 महिलाओं को बिठा कर ये भी कहवाया जा सकता है कि मुस्लिमों ने उनका रेप किया है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास और कोई काम रह नहीं गया है, इसीलिए वो ‘मदरसे में रेप’ और मस्जिदों में आपराधिक वारदात वाली बातें करेंगे। उन्होंने कहा कि जिस मठ में बैठ कर योगी जी मुस्लिमों को गालियाँ देते हैं, उस मठ की जमीन मुस्लिमों ने ही दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक ‘पहाड़ी’ ने आकर उत्तर प्रदेश पर कब्ज़ा कर लिया है। साथ मौलानाओं की गिरफ़्तारी को ‘चुनावी तिकड़म’ करार दिया।

वहीं ‘TV9 भारतवर्ष’ से बात करते हुए मुनव्वर राना ने आशंका जताई कि मुख्तार अंसारी को मरवाया जा सकता है और इसके आरोप भी सीएम योगी पर मढ़ा। उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ को मानने वाले 99% लोग सांप्रदायिक हैं। उन्होंने कहा कि ‘1000 धर्मांतरण’ वाले मुद्दे से सीएम योगी को चुनाव में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि कोई नमाज पढ़ने से मुस्लिम नहीं हो जाता। साथ ही कहा कि ‘जिहाद’ का मतलब है अपने-आप पर काबू रखना।

इसी साल अप्रैल में खबर आई थी कि यूरिन में इन्फेक्शन की वजह से मुनव्वर राना को दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया था। 68 वर्षीय शायर राणा गले के कैंसर से भी पीड़ित हैं। साल 2017 में उनके सीने में तेज दर्द उठा था। उनके फेफड़ों और गले में इंफेक्शन भी हुआ था, जिसके बाद उन्हें SGPGI में भर्ती कराया गया था।  पिछले 7 सालों में कई बार उनके घुटने का ऑपरेशन हो चुका है, लेकिन इसके बाद भी उन्हें चलने-फिरने में दिक्कत हो रही थी।

कन्नौज के मंदिर में घुसकर दिलशाद ने की तोड़फोड़, उमर ने बताया- ये सब किसी ने करने के लिए कहा था

उत्तर प्रदेश के कन्नौज के छिबराऊ में विजय नाथ मंदिर में तोड़फोड़ की घटना के बाद हालात तनावपूर्ण हैं। वहाँ मंगलवार (जून 22, 2021) की सुबह दूसरे समुदाय के व्यक्तिों ने उत्तेजक नारेबाजी करते हुए प्रवेश किया और देवी देवताओं की मूर्ति पर हमला बोल दिया। घटना की जानकारी होने पर हिंदू संगठन पहुँचे और मंदिर की हालत देख कार्रवाई की माँग की गई।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, घटना छिबरामऊ के प्रमुख विजयपाल चौराहे पर स्थित विजय नाथ मंदिर की है। जहाँ सुबह लगभग 10 बजे दिलशाद नाम का व्यक्ति कुछ लोगों के साथ मंदिर में घुसा और अचानक उसने मंदिर में तोड़फोड़ करना शुरू कर दिया। इस दौरान मंदिर के पुजारी रामकिशोर मिश्रा की नजर उस पर पड़ी। उन्होंने दिलशाद को रोकने का प्रयास किया लेकिन दिलशाद पुजारी से ही भिड़ गया।

पुजारी ने इसके बाद जोर-जोर से हल्ला मचाया और लोगों ने इकट्ठा होकर दिलशाद को पकड़ा। साथ ही उसकी हरकत जानकर उसे पीटा भी। थोड़ी देर में घटना की सूचना पाते ही पुलिस भी पहुँच गई। पुलिस ने दिलशाद को हिरासत में लिया और इलाके में पुलिस बल की तैनाती की गई।

अभी तक इस मामले में तीन लोग हिरासत में लिए गए हैं। हिंदू संगठन इस घटना की जानकारी होने पर प्रदर्शन कर रहे हैं। पुलिस मामले को शांत कराकर कार्रवाई करने का आश्वासन दे रही है।  पीपल चौराहे इलाके में एक मस्जिद की सुरक्षा भी बढ़ाई गई है।

मीडिया को एसपी अरविंद कुमार ने बताया कि मामले की जाँच की जा रही है। 3 लोगों को हिरासत में लिया गया है। आरोपितो पर एनएसए भी लगाया जाएगा। अभी मौके पर पुलिस बल तैनात है। जानकारी के मुताबिक आरोपित दिलशाद छिबरामऊ का ही रहने वाला है। पुलिस उसे पकड़कर जानने का प्रयास कर रही है कि उसने ऐसा क्यों किया।

बता दें कि विजय नाथ मंदिर में शिवलिंग, नंदी और नागराज विराजमान है। इनके अलावा मंदिर में राम दरबार, हनुमानजी सहित देवी प्रतिमाएँ भी स्थापित हैं और साईं प्रतिमा भी लगी है। सामने आई तस्वीरों में देख सकते हैं कि नंदी की ही मूर्ति जमीन पर गिरी हुई है। वहीं अन्य चीजें भी अस्त व्यस्त हैं।

मंगलवार सुबह घटित इस घटना में कहा जा रहा है कि दिलशाद के साथ 5-6 साथी और नजर आए थे लेकिन वह भीड़ को देखकर भाग निकले। भीड़ ने इनका पीछा किया और इनमें से एक को पकड़कर पुलिस को सौंपा। इसकी पहचान उमर फारूख उर्फ बंटी के तौर पर हुई है। वह बिरतिया मोहल्ले का निवासी है। अभी तक पुलिस की पूछताछ में आरोपित ने बताया है कि मूर्ति खंडित करने के लिए उसे किसी ने कहा था। लेकिन किसने? ये जवाब अभी तक नहीं मिला है। फिलहाल पुलिस उसे थाने ले जाकर पूछताछ कर रही है।

क्या है पीटर पैन सिंड्रोम? जानिए मुंबई की अदालत ने नाबालिग के यौन शोषण मामले में आरोपित को क्यों दी जमानत

मुंबई की एक अदालत ने 14 साल की एक लड़की के अपहरण और यौन उत्पीड़न के मामले में ‘पीटर पैन सिंड्रोम’ (Peter Pan Syndrome) से पीड़ित एक व्यक्ति को सोमवार (21 जून 2021) को जमानत दे दी। विशेष न्यायाधीश एससी जाधव ने 25000 रुपए के मुचलके और कई अन्य शर्तों पर 23 वर्षीय आरोपित की जमानत को मंजूरी दी। आरोपित की ओर से पेश हुए वकील सुनील पांडे ने दलील दी कि उनका मुवक्किल ‘पीटर पैन सिंड्रोम’ से पीड़ित है।

पांडे ने अदालत से कहा कि दोनों के बीच संबंध सहमति से बने थे। पीड़िता के परिवार को उनके रिश्ते के बारे में पता था, लेकिन लड़के की बीमारी और उसकी अच्छी पृष्ठभूमि नहीं होने के कारण लड़की का परिवार उनके रिश्ते और लड़के के परिवार वालों को पसंद नहीं करता था। वकील ने कहा कि पीड़िता को इस बात की जानकारी थी कि वह क्या कर रही है और उसने अपनी इच्छा से संबंध बनाया था।

अदालत ने दलीलें सुनने के बाद आरोपित को जमानत देते हुए कहा, ”उसे हिरासत में रखने कोई फायदा नहीं है, क्योंकि मामले की जाँच पूरी हो चुकी है।” अदालत ने कहा कि पीड़िता का बयान प्रथम दृष्टया दिखाता है कि उसने अपने माता-पिता का घर खुद छोड़ा और आरोपित के साथ आई।

पीटर पैन सिंड्रोम क्या है?

गुरुग्राम स्थित क्लीनिक की मनोवैज्ञानिक मानवी शर्मा ने इंडिया टुडे को बताया कि आम आदमी की भाषा में कुछ वयस्कों को भावनात्मक और वित्तीय जिम्मेदारियों का निर्वहन करना चुनौतीपूर्ण लगता है। इस व्यवहार को पीटर पैन सिंड्रोम कहा जाता है। यह कहीं अधिक जटिल है, क्योंकि पीटर पैन सिंड्रोम से पीड़ित लोग दूसरों की जरूरतों के प्रति असंवेदनशील हो सकते हैं, ये काम नहीं करना चाहते हैं।

उन्होंने कहा, “इस सिंड्रोम से पीड़ित व्यक्ति व्यवहारिक नहीं होता है, सहानुभूति व्यक्त नहीं कर सकता है। वे शराब के आदी हो सकते हैं, आक्रामक हो सकते हैं और अनुचित तरीके से कार्य कर सकते हैं। लेकिन उन्हें प्यार से समझाकर उनकी जिम्मेदारियों का अहसास कराया जा सकता है।”

पहली बार पीटर पैन सिंड्रोम के नाम का इस्तेमाल डॉ डैन केली ने 1983 में लिखी अपनी पुस्तक ‘पीटर पैन सिंड्रोम: मेन हू हैव नेवर ग्रोन अप’ में किया गया था। कुछ विशेषज्ञों का मानना है व्यवहार के इस पैटर्न का किसी के रिश्तों और जीवन की गुणवत्ता पर प्रभाव पड़ सकता है। पीटर पैन सिंड्रोम का नाम स्कॉटिश उपन्यासकार और नाटककार जेएम बैरी के नाटक के पात्र पीटर पैन के नाम पर रखा गया है। नेवरलैंड द्वीप पर रहने वाला पीटरपैन एक उत्साही और शरारती लड़का है, जो उड़ सकता है लेकिन कभी बड़ा नहीं हो सकता। इस उपन्यास पर फिल्म भी बन चुकी है।

क्या सिंड्रोम एक वास्तविक विकार है?

पीटर पैन सिंड्रोम को व्यापक रूप से एक pop-psychology शब्द के रूप में मान्यता प्राप्त है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे एक विकार के रूप में मान्यता नहीं दी है। वर्तमान मामले में, यह बताने के लिए कोई ऐसा रिकॉर्ड नहीं है कि आरोपित मानसिक बीमारी से पीड़ित था।

कुछ मनोवैज्ञानिकों ने इस शब्द के इस्तेमाल को आगे बढ़ाया है, लेकिन इसे अभी भी एक pop-psychology विषय माना जाता है। सिंड्रोम के मुख्य लक्षणों में पेशेवर जीवन और व्यक्तिगत मामलों दोनों में जिम्मेदारियों की उपेक्षा करना और भावनात्मक रूप से असंवेदनशील होना पाया गया है। इस सिंड्रोम से पीड़ित वयस्क पुरुष या महिला सामाजिक रूप से अपरिपक्‍व होती है।

दिल्ली के पास थी 11 लाख वैक्सीन, फिर 21 जून को सिर्फ 76,000 को क्यों लगा टीका: केजरीवाल सरकार से BJP ने किया सवाल

21 जून से देश भर में शुरू हुए महा वैक्सीनेशन अभियान के तहत जहाँ एक दिन में 86 लाख से ज्यादा टीके लगाए गए। वहीं दिल्ली में वैक्सीन को लेकर राजनीति अब भी थमी नहीं। मध्य प्रदेश में जहाँ जनता को वैक्सीन लगाने का रिकॉर्ड कायम हुआ। वहीं दिल्ली की आम आदमी पार्टी ये कहती रही कि ये अभियान सिर्फ नाम मात्र है। अब इन लगातार आरोपों के बाद भाजपा ने दिल्ली की केजरीवाल सरकार से कुछ सवाल किए हैं। 

दिल्ली की भाजपा ईकाई ने कहा कि केजरीवाल सरकार वैक्सीन पर ओछी राजनीति से दिल्ली के लोगों की जान को खतरे में डाल रहे हैं। भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता पूछते हैं कि 21 जून को केजरीवाल सरकार के पास 11 लाख से अधिक वैक्सीन थी, फिर भी सेंटरों पर वैक्सीन की कमी क्यों थी।

अगले सवाल में आदेश गुप्ता पूछते हैं कि जब 21 जून को देश भर में 86 लाख से अधिक टीकाकरण हुआ तो दिल्ली में केवल 76000 लोगों को वैक्सीन क्यों लगा? वह पूछते हैं कि केजरीवाल सरकार जनता में भ्रम फैलाने का काम क्यों कर रही हैं। आखिर पीएम मोदी द्वारा भिजवाई गई फ्री कोविड वैक्सीन कहाँ गई।

आदेश गुप्ता सवाल करते हैं कि जब हर राज्य का सीएम वैक्सीन सेंटरों का दौरा कर रहे हैं तो दिल्ली के मुख्यमंत्री गायब क्यों हैं। आखिर जो उन्होंने 2700 सेंटर खोलने की बात कही थी तो अभी तक पर्याप्त वैक्सीन सेंटर क्यों नहीं बनाए गए हैं।

गौरतलब है कि दिल्ली में वैक्सीन को लेकर राजनीति आज सुबह से ही तेज हो रखी है। उप मुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया ने जहाँ बताया कि उन्हें जून के महीने में वैक्सीन नहीं मिली। वहीं स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने उनपर निशाना साधते हुए तंज कसा।

डॉ हर्षवर्धन ने लिखा ” ‘झूठई लेना, झूठई देना, झूठई भोजन, झूठ चबेना’ यानि कुछ लोग झूठ ही स्वीकार करते हैं, झूठ ही दूसरों को देते हैं, झूठ का ही भोजन करते हैं व झूठ ही चबाते हैं। रामचरित मानस की यह चौपाई दिल्ली के CM अरविंद केजरीवाल और उनके मंत्रियों पर सटीक बैठती है।”

इस ट्वीट पर मनीष सिसौदिया ने जवाब दिया और कहा, “डॉक्टर साहब! क्या भारत सरकार दिल्ली के लिए 21 जून के बाद वैक्सीन की कोई सप्लाई देने जा रही है या दिल्ली सरकार ने जो वैक्सीन ख़रीदी थीं, जून में केवल उतनी ही मिलेंगी? जुलाई के महीने में भी दिल्ली के लिए केवल 15 लाख वैक्सीन? आप खुद ही सोचिए इस दर से तो अभी 15-16 महीने लगेंगे।”

इसी प्रकार आप नेता आतिशी ने भी भाजपा का प्रोपगेंडा एक्सपोज करने का दावा करते हुए बताया कि दिल्ली में 18 से ऊपर वालों के लिए वैक्सीन की शॉर्टेज है और 45 से ऊपर वालों के लिए वैक्सीन ज्यादा है। ऐसे में उन लोगों ने अनुमति माँगी थी कि 45 से ऊपर वालों की वैक्सीन 18+ ग्रुप को दी जाए, लेकिन बहुत अनुरोध के बाद आज जाकर इस पर सुनवाई हुई।

भारत ने कोरोना संकटकाल में कैसे किया चुनौतियों का सामना, किन सुधारों पर दिया जोर: पढ़िए PM मोदी का ब्लॉग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना संकट पर मंगलवार (22 जून 2021) को लिंक्डइन पर एक ब्लॉग लिखा है। पीएम मोदी ने इस ब्लॉग के जरिए समझाया कि किस तरह देश ने केंद्र और राज्यों की भागीदारी के साथ कोरोना काल के दौरान चुनौतियों का सामना किया। पीएम मोदी ने कहा, ”मई 2020 में आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत सरकार ने यह घोषणा की थी कि राज्य सरकारों को 2020-21 में अतिरिक्त उधार लेने की इजाजत दी जाएगी।”

उन्होंने कहा, “जब दुनिया भर में वित्तीय संकट था, उस समय भारतीय राज्य 2020-21 में ज्यादा उधार लेने में सफल रहे हैं। आपको यह जानकर सुखद आश्चर्य होगा कि हम 2020-21 में राज्य 1.06 लाख करोड़ रुपए का अतिरिक्त उधार लेने में सक्षम रहे हैं।” PM मोदी ने कहा कि केंद्र और राज्यों में भागीदारी के रवैये की वजह से ही संसाधनों की उपलब्धता में यह बढ़त संभव हुई।

भारत कोई अपवाद नहीं

पीएम ने ‘प्रोत्साहन और सुधार में विश्वास’ नामक ब्लॉग में लिखा, “कोविड-19 महामारी नीति बनाने के मामले में दुनिया भर की सरकारों के लिए चुनौतियाँ लेकर आई। भारत कोई अपवाद नहीं है। पब्लिक वेलफेयर के लिए पर्याप्त संसाधन जुटाना सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक साबित हो रहा है।”

उन्होंने आगे कहा कि भारतीय सार्वजनिक वित्त में सुधार के लिए हल्का धक्का देने वाली कहानी है। इस कहानी के मायने यह हैं कि राज्यों को अतिरिक्त धन प्राप्त करने के लिए प्रगतिशील नीतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है। पीएम मोदी ने कहा कि इस अभ्यास के परिणाम न केवल उत्साहजनक हैं, बल्कि इस धारणा के विपरीत भी हैं कि तेजतर्रार आर्थिक नीतियों के सीमित खरीदार होते हैं।

चार सुधारों पर दिया जोर

पीएम ने अपने ब्लॉग में कहा कि जिन चार आर्थिक सुधारों से अतिरिक्त उधारी जुड़ी हुई थी (जीडीपी का 0.25 फीसद हर एक से जुड़ा था), उनकी दो विशेषताएँ थीं। खासकर गरीब और ​वंचित तबके के जीवनस्तर में सुधार हो और इसके साथ राज्यों की राजकोषीय स्थिरता भी बनी रहे।

पहले सुधार में वन नेशन वन राशन कार्ड

पहले सुधार के तहत उन्होंने उल्लेख किया कि ‘वन नेशन वन राशन कार्ड’ (One Nation One Ration Card) नीति के तहत राज्य सरकारों को यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता थी कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत में राज्य में सभी राशन कार्ड सभी परिवार के सदस्यों की आधार संख्या के साथ लिंक हों और राशन की सभी दुकानों के पास इलेक्ट्रॉनिक पॉइंट ऑफ सेल डिवाइस उपलब्ध हों।

इससे प्रवासी मजदूर देश में कहीं से भी अपना राशन प्राप्त कर सकते हैं। नागरिकों को इन लाभों के अलावा, फर्जी कार्ड और डुप्लिकेट सदस्यों के हटने से वित्तीय फायदा भी हुआ है। 17 राज्यों ने इस सुधार को पूरा किया और उन्हें 37600 करोड़ रुपए उधार मिले।

दूसरे सुधार में कारोबारी सुगमता को बढ़ाना

दूसरे सुधार में कारोबारी सुगमता को बढ़ाना था। इसके तहत राज्यों को यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता थी कि वे 7 एक्ट के तहत व्यापार से संबंधित लाइसेंस को मामूली भुगतान के साथ ऑटोमेटिक, ऑनलाइन और सबके लिए आसान बनाएँ। यह सुधार (19 कानूनों को शामिल करते हुए) सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए विशेष रूप से मददगार है, जो ‘इंस्पेक्टर राज’ से सबसे अधिक पीड़ित हैं। यह एक बेहतर निवेश माहौल, अधिक निवेश और तेज विकास को भी बढ़ावा देता है। 20 राज्यों ने इस सुधार को पूरा किया और उन्हें 39521 करोड़ रुपए अतिरिक्त उधार मिले।

तीसरे सुधार में सीवरेज चार्ज की न्यूनतम दरों को नोटिफाई करना

तीसरे सुधार में राज्यों को प्रॉपर्टी टैक्स और वॉटर-सीवरेज चार्ज की न्यूनतम दरों को नोटिफाई करना था। वहीं, शहरी इलाकों में प्रॉपर्टी ट्रांजैक्शन वैल्यू और करंट कॉस्ट के लिए स्टाम्प ड्यूटी गाइडलाइन को अधिसूचित करना था। इससे शहरी गरीबों और मध्यम वर्ग के लोगों को बेहतर गुणवत्ता की सेवा हासिल हो सकेगी। इस सुधार से नगर निगम के कर्मचारियों को भी लाभ होता है, जिन्हें अक्सर मजदूरी के भुगतान में देरी का सामना करना पड़ता है। 11 राज्यों ने इन सुधारों को पूरा किया और उन्हें 15957 करोड़ रुपए की अतिरिक्त उधारी दी गई।

चौथे सुधार में किसानों को मुफ्त बिजली

चौथे सुधार में किसानों को मुफ्त बिजली सप्लाई के बदले डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) से जोड़ा जाए। इसके लिए राज्यव्यापी नीति बनानी थी और राज्य के किसी एक जिले में इसे पूरी तरह से पायलट आधार पर लागू करना था। इससे जीएसडीपी के 0.15% की अतिरिक्त उधारी जुड़ी हुई थी। यह वितरण कंपनियों के वित्त में सुधार करता है, पानी और ऊर्जा के संरक्षण को बढ़ावा देता है और बेहतर वित्तीय और तकनीकी प्रदर्शन के माध्यम से सेवा की गुणवत्ता में सुधार करता है। 13 राज्यों ने कम से कम एक कम्पोनेंट को लागू किया, जबकि 6 राज्यों ने डीबीटी को लागू किया। नतीजतन, उन्हें 13201 करोड़ रुपए अतिरिक्त उधारी की अनुमति दी गई।

बता दें कि पीएम मोदी ने साथ ही यह भी कहा, “मैं उन सभी राज्यों का आभारी हूँ, जो नागरिकों की बेहतरी के लिए ऐसे कठिन समय में भी इन नीतियों को अपनाने में आगे रहे हैं।”

‘वास्तविक परेशानियों’ से कॉन्ग्रेस ने मोदी विरोधी राष्ट्र मंच से किया किनारा, अठावले ने कहा- ये कुछ भी कर लें मोदी रहेंगे नंबर-1

नेशनल कॉन्ग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार के आवास पर मंगलवार (22 जून) को राष्ट्र मंच की बैठक में 8 दलों के नेता शामिल हुए। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस बैठक के लिए यशवंत सिन्हा ने ही एनसीपी सुप्रीमो से अनुरोध किया था। सहमति मिलने पर कॉन्ग्रेस समेत तमाम दलों को आमंत्रित किया गया। लेकिन, बैठक के लिए बुलाए जाने के बावजूद कॉन्ग्रेस के कई नेता इसमें शामिल नहीं हुए।

कौन-कौन हुआ बैठक में शामिल

जानकारी के मुताबिक आज इस बैठक में टीएमसी नेता यशवंत सिन्हा, गीतकार जावेद अख्तर, राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) के अध्यक्ष जयंत चौधरी, नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला, पूर्व जेडीयू नेता पवन वर्मा, सीपीआई सांसद बिनॉय विश्वम, टीएमसी नेता मजीद मेमन, सपा नेता घनश्याम चौधरी तथा अन्य नेता शामिल हुए।

बैठक के बाद टीएमसी नेता यशवंत सिन्हा ने कहा कि राष्ट्र मंच की बैठक ढाई घंटे तक चली और इसमें कई मुद्दों को लेकर चर्चा हुई। वहीं, आरएलडी अध्यक्ष जयंत चौधरी ने बताया कि बैठक में किसानों के मुद्दे, अर्थव्यवस्था तथा अन्य राष्टव्यापी मुद्दों पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि किसान राजनीति हमेशा असरदार रही है, देश की राजनीति में जब-जब परिवर्तन आए हैं, उनमें किसानों की अहम भूमिका रही है। 

सपा नेता घनश्याम तिवारी ने कहा, “राष्ट्र मंच एक ‘मंच’ होगा जिसमें देश के विकास और भविष्य के लिए दृष्टि रखने वाला हर कोई शामिल होगा, चाहे वह राजनीतिक दल, सामाजिक संगठन या व्यक्ति हो। राष्ट्र मंच में भारत और विदेशों में वे लोग भी शामिल होंगे जो देश के बारे में सोचते हैं।”

कॉन्ग्रेस नेता नहीं हुए शामिल

एनसीपी नेता मजीद मेमन ने बताया कि इस बैठक के लिए कॉन्ग्रेस नेता विवेक तंखा, मनीष तिवारी, कपिल सिब्बल, डॉ अभिषेक मनु सिंघवी और शत्रुघ्न सिन्हा को निमंत्रण भेजा गया था। लेकिन उनमें से कई के पास वास्तविक परेशानियाँ थी।

मेनन कहते हैं, “ऐसा माना गया कि विपक्षी दलों की बैठक में कॉन्ग्रेस का बहिष्कार हो रहा है। ये बात गलत है। किसी पार्टी को नहीं निकाला गया है। हमने उन सभी नेताओं को निमंत्रण भेजा जो राष्ट्र मंच की विचारधारा को मानते हैं जिसमें सब राजीनितिक पार्टियाँ आ गई। कोई राजनीतिक भेदभाव नहीं। मैंने खुद व्यक्तिगत तौर पर कॉन्ग्रेस नेताओं को बुलाया था।”

मजीद मेमेन ने बताया कि मीडिया में जो बातें चल रही थीं कि शरद पवार कोई बड़ा कदम उठाने वाले हैं और कॉन्ग्रेस का बहिष्कार हो रहा है, वो सब गलत बात हैं। इसके अलावा जो मीडिया ने कहा कि राष्ट्र मंच भाजपा विरोधी पार्टियों को इकट्ठा कर रही है। ये भी गलत है। ये मीटिंग पवार के आवास पर हुई लेकिन मीटिग उन्होंने नहीं बुलाई थी।

पीएम मोदी रहेंगे नंबर 1-रामदास अठावले

बता दें कि एक ओर जहाँ शरद पवार के दिल्ली स्थित आवास पर विपक्षी दलों की बैठक हुई। वहीं भाजपा नेताओं ने इस पर अपनी राय दी। रामदास अठावले ने कहा कि कोई फर्क नहीं पड़ता चाहे जितने दल पीएम मोदी के विरोध में बना दिए जाएँ लेकिन वो हमेशा नंबर वन रहेंगे। 

वहीं भाजपा नेता मीनाक्षी लेखी से जब इस बैठक पर पूछा गया तो उन्होंने कहा इस तरह के घटनाक्रम हर उन नेताओं के द्वारा किए जाते हैं जिनको जनता ने बार बार नकारा है। ये कोई नई बात नहीं है। ये 2014 से पहले भी हुए हैं उसके बाद भी हुए हैं। 2019 के बाद भी हुए हैं।

उन्होंने कहा कि आजकल चुनाव पार्टियों के बस का नहीं रहा क्योंकि वे बपौती वाली राजनीति करते हैं। कुछ कंपनियाँ हैं जो चुनाव लड़ने में मदद करने का काम करती हैं। उनको अपना बिजनेस चलाना है। वे सबको प्रधानमंत्री बनाने का कार्यक्रम चलाएँगे तभी पैसा कमाएँगे, नहीं तो पैसा कैसे कमाएँगे।

गौरतलब है कि एनसीपी प्रमुख के आवास पर हुई इस बैठक से पहले मीडिया में ऐसी चर्चा थी कि ये चर्चा 2024 में पीएम मोदी के ख़िलाफ़ विपक्ष को इकट्ठा करने का एक प्रयास है। जिसे चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर से मुलाकात होने के बाद पवार ने बुलाया है।

पल्स पोलियो से टीके को पिटवा दिया अब कॉन्ग्रेस के कोयला स्कैम से पिटेगी मोदी की ईमानदारी: रवीश कुमार

रवीश कुमार ने सुई तो नहीं भोंकवाई पर उन्हें टीका चुभ गया। टीका सुई में न रहकर माथे पर रहे तब भी रवीश को चुभता है। आज फिर से चुभा तो वे लोगों के विश्वास पर खरे उतरते हुए चिल्लाए; पल्स पोलियो के सामने पिट गया आज का टीका अभियान। 

पढ़कर लगा जैसे पल्स पोलियो ने गुंडे भेजकर टीके की पिटाई करवा दी हो और टीका बेचारा बंगाल में बीजेपी समर्थक की तरह मार खाकर जमीन पर पड़ा हो और इधर से रवीश कुमार उसके मुँह के आगे माइक रख कर पूछ रहे हों; वैसे तो टीका ब्राह्मणवाद का प्रतीक है पर पत्रकार होने के नाते इतना तो पूछना ही पड़ेगा कि पिट कर कैसा लग रहा है? बाते यहाँ से शुरू होकर आगे जाती और शायद वहाँ भी पहुँचती जहाँ रवीश टीके से कहते; मुझे पता था कि मोदी जी एक न एक दिन तुम्हें पिटवा देंगे। दरअसल पिटना ही तुम्हारी नियति है। 

रवीश के अनुसार चूँकि टीका मोदी जी का था इसलिए उसके प्रति उनकी सहानुभूति भी शुद्ध नहीं रहती। वे दूसरे ही पल उससे कहते; मोदी के टीके हो, ऐसे में पिटते नहीं तो और क्या होता? सोनिया जी के पल्स पोलियो ने तुम्हारी पिटाई कर दी। किसी और के टीके होते तो मुझे तुम्हारे साथ खालिस सहानुभूति होती। मैं तुम्हारे लिए आवाज़ उठाता। इस पल्स पोलियो के खिलाफ आज का प्राइम टाइम करता और कल तुम्हारे समर्थन में… माफ़ करो, किसी का समर्थन करते हुए मैं दिखना नहीं चाहता इसलिए तुम्हारे समर्थन में नहीं बल्कि पल्स पोलियो के विरोध में फेसबुक पोस्ट भी लिखता। पर अब तुम्हारे लिए क्या कहें? एक तो मोदी के हो और ऊपर से टीका। मुझे टीका और टीका वालों से नफ़रत है।
 
उधर टीका बेचारा रवीश को ध्यान से देखते हुए मन ही मन सोचता; एक टीका रहे या 86 लाख, माथे पर रहे या सिरिंज में, इन्हें छोटा ही लगेगा क्योंकि इनकी ये सोच टीका के बारे में नहीं है बल्कि उस व्यक्ति के बारे में है जिसके माथे पर एक टीका लगा है या जो एक दिन में 86 लाख टीके का प्रबंध करता हो। सब बात की एक बात यह है कि ये व्यक्ति एक ऐसा फूफा है जो किसी और के विवाह में स्वादिष्ट भोजन खाकर यह कहने में जरा भी नहीं हिचकेगा कि; भोजन तो बड़ा स्वादिष्ट था लेकिन अगर नमक अधिक हो जाता तो खराब हो जाता। हाँ, अगर विवाह राहुल गाँधी का हुआ तो बात और होगी। 

टीका आगे सोचता; अंतर की बात पर इन्हें या तो जातियों का अंतर पता है या फिर अवॉर्ड का। इनके लिए टीके और पल्स पोलियो में अंतर भले न हो पर ये रामनाथ गोयनका अवार्ड और मैग्सेसे अवॉर्ड में अन्तर कभी नहीं भूलेंगे। ये कभी नहीं कहेंगे कि अभिसार शर्मा और ये एक जैसे ही हैं क्योंकि अभिसार को भी रामनाथ गोयनका अवार्ड मिला है। पर ये ऐसा नहीं कहेंगे। इन्हें पल्स पोलियो और टीके में अंतर दीखता अगर टीका राहुल गाँधी के माथे पर होता या 86 लाख टीकों का प्रबंधन राहुल गाँधी ने किया होता। विरोध के इनके ही स्वर में इनका दिमाग ऐसा डूबा है कि इन्हें प्रणॉय राय भी याद नहीं दिला सकते कि पल्स पोलियो और कोरोना का टीका अलग-अलग है क्योंकि पोलियो संक्रामक रोग नहीं है। इनके लिए इंजेक्शन लगाना और दो बूँद दवा पिलाना भले एक ही काम है पर फील्ड रिपोर्टिंग और एंकरिंग अलग-अलग काम है। 

टीका आगे सोचता; पल्स पोलियो से टीके को पिटवा ही दिया था तो साथ-साथ 2012 में तब की सरकार के स्कैम से 2021 में जीरो स्कैम को भी पिटवा देना चाहिए था। लिख देना चाहिए था कि;  2012 के कोयला स्कैम से पिट गई मोदी सरकार की ईमानदारी। आखिर किसी को भी पिटवा देना रवीश कुमार के फेसबुक पोस्ट का खेल है।

TMC के गुंडों ने किया गैंगरेप, कहा- तेरी काली माँ न*गी है, तुझे भी न*गा करेंगे, चाकू से स्तन पर हमला: पीड़ित महिलाओं की दास्तान

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा पर प्रदेश की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी आँखें बंद कर रखी है। उन्हें पीड़ितों का दुख और कष्ट सुनाई नहीं दे रहा है। इस बीच टीएमसी के गुंडों द्वारा शरीरिक हिंसा और यौन शोषण की शिकार कई महिलाएँ उनके साथ हुए भयावह वारदात के बारे में बताने के लिए आगे आई हैं।

इसी कड़ी में ऑर्गनाइजर की एक रिपोर्ट में ऐसी ही शोषित महिलाओं की कुछ कहानियों को प्रकाशित किया गया है, जिन्हें पश्चिम बंगाल में भाजपा का समर्थन करने की कीमत चुकानी पड़ी है।

बीजेपी की पोलिंग एजेंट पिंकी बाज ने टीएमसी के अत्याचारों को साझा किया

पश्चिम बंगाल के उत्तरी परगना के जयग्राम गाँव की रहने वाली 34 वर्षीय पिंकी बाज ने दिल्ली स्थित राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को दी गई अपनी शिकायत में ममता बनर्जी की टीएमसी के सत्ता में वापसी के साथ उनके परिवार के साथ हुए भयावहता के बारे में बताया।

पिंकी ने आरोप लगाया कि 2 मई 2021 की शाम करीब साढ़े सात बजे मुजफ्फर बैद्य, महबूर बैद्य, आखर भागी, आजा मुल्ला, लबावली गाजी और अन्य के नेतृत्व में टीएमसी के करीब 50 गुंडे उनके घर में घुस आए। पिंकी ने बताया, “उन्होंने मुझे गंदी गालियाँ दी। बांस के डंडों, लोहे की छड़ों और नंगे हाथों से पीटा। घर के एक-एक सामान को नष्ट कर दिया और 3 लाख रुपए के सामान को लूट लिया।”

टीएमसी के गुंडों ने कहा, “जैसी तुम्हारी हिंदू देवी माँ काली न* गी है। वैसे ही तुमको न*गा करेंगे।” पिंकी ने आगे बताया कि उन्होंने मेरे भगवान को गाली देकर मेरे धार्मिक विश्वास पर हमला किया। गंदी गालियाँ दीं और मेरे साथ बलात्कार करने की धमकी भी दिया। इसके अलावा देवी काली और भगवान राम को लेकर भी सेक्सुअल कमेंट किया।

भाजपा कार्यकर्ता ने अपने साथ घटी भयावह घटना का जिक्र करते हुए कहा, “टीएमसी के गुंडों ने मेरा शारीरिक और मानसिक शोषण किया और मेरे धार्मिक विश्वास पर भी हमला किया। ये ऐसा अपमान है, जिसमें मैं जिंदगीभर नहीं भूल सकती।”

ऑर्गनाइजर ने दावा किया है कि टीएमसी के गुंडों ने 2 मई 2021 के काफी पहले से ही बीजेपी कार्यकर्ता पिंकी को परेशान करना शुरू कर दिया था। रिपोर्ट के मुताबिक, 17 अप्रैल 2021 को अनुसूचित जाति से आने वाली पिंकी पोलिंग बूथ पर थी। इसी दौरान टीएमसी के गुंडों ने उनसे अभद्रता करते हुए जातिसूचक गालियाँ दी। इतना ही नहीं उन्होंने बीजेपी वर्कर को रेप की धमकी देते हुए सत्ता में वापसी होने पर गोली मारने की भी धमकी दी थी।

पिंकी बाज ने अपनी शिकायत में बताया है कि उसी दिन मतदान खत्म होने के बाद जब वो अपने बेटे के साथ अपने घर जा रही थीं तो रास्ते में मुजफ्फर बैद्य, महबूर बैद्य, आखर भागी, आजा मुल्ला, लबावली गाज़ी ने उन्हें रोक लिया। साथ ही पिंकी के 17 वर्षीय बेटे को बेरहमी से पीटा।

टीएमसी के गुंडों ने बीजेपी कार्यकर्ता और उसके बेटे को तब तक परेशान किया, जब तक कि वो उस गाँव को छोड़कर नहीं गए। हालाँकि ऐसा नहीं है कि गाँव छोड़ने के बाद बच गए। दरअसल, गाँव के बाहर रहकर काम करने वाले पिंकी के पति ने मामले का समाधान निकालने के लिए मुजफ्फर बैद्य को फोन किया। लेकिन आरोपित ने कहा कि पहले उन्हें उनकी पत्नी को उसके पास भेजना होगा। इसके बाद ही वो उन्हें गाँव में आने देंगे।

ऑर्गनाइजर के साथ बात करते हुए बीजेपी की पोलिंग एजेंट पिंकी बाज ने कहा कि वो चाहती हैं कि टीएमसी के गुंडों को उनके किए पापों की सजा जरूर मिले।

बीजेपी कार्यकर्ता अपर्णा दास के साथ टीएमसी के गुंडों ने किया रेप, जहर खिलाया

पिंकी बाज की ही तरह टीएमसी के गुंडों ने खेजुरी विधानसभा क्षेत्र के बरोटोला की रहने वाली भाजपा कार्यकर्ता अपर्णा दास को भी खूब प्रताड़ित किया गया। इसके कारण उन्हें गाँव छोड़कर जाना पड़ा। उन्होंने कहा कि अगर 5 साल बाद प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनेगी तो ही वह वापस अपने गाँव आएँगी।

दास ने अपने साथ हुई उस दर्दनाक घटना को याद करते हुए कहा कि दो जून 2021 को मुस्लिम समुदाय के कुछ लड़के उनके घर आए और उन्हें गाँव छोड़ने की धमकी दी। इसके बाद, “एक रात के बाद वो वापस आए और मेरे घर के सामने बम ब्लॉस्ट कर दिया। अगले दिन वो फिर आ धमके और फिर से बम फोड़ा।”

अपर्णा दास ने बताया, “उसके अगले दिन एक बार फिर उस्मान (आरा), गौतम दास, शुशांत दास, सुब्रतो दास नाम के टीएमसी के गुंडे रात करीब 10 बजे मेरे घर आ धमके। उन्होंने मेरी बहू से दरवाजा खोलने को कहा। मेरी बहू असम से है, वो इनके बारे में नहीं जानती थी। इसलिए उसने मुझे देखने के लिए कहा। मैंने तुरंत उसे एक कमरे में बंद कर दिया और दरवाजा खोल दिया। वो सभी जबरन मेरे घर के अंदर घुस आए और मुझसे मेरी बहू को बाहर निकालने को कहने लगे। उन्होंने उसके साथ रेप करने को कहा। इसके बाद मैं उनके पैरों में गिर गई। मैंने उनसे कहा कि मैं उनकी माँ जैसी हूँ और वो उनकी बहन जैसी है। मैं उनके सामने हमें जाने देने की भीख माँगती रही, वो जिद पर अड़े रहे। करीब एक घंटे तक आतंकित करने के बाद अगले दिन आने का बोलकर वो चले गए।”

पिछली रात हुई घटना से डरी अपर्णा ने इसके बारे में अपने पड़ोसियों से बात की तो उन्होंने बहू को किसी सुरक्षित जगह भेजने की सलाह दी। ताकि टीएमसी के गुंडे वहाँ नहीं पहुँच सकें। इसके बाद भाजपा कार्यकर्ता ने अपनी बहू को पड़ोसी के ही घर में छिपा दिया। अपर्णा दास ने उस घटना को याद करते हुए बताया कि 5 जून 2021 की टीएमसी के वो गुंडे वापस से उनके घर आ धमके और दरवाजा पीटने लगे। अपर्णा यह जानती थीं कि दरवाजा खोलना खतरनाक हो सकता है, इसलिए उन्होंने कोई जवाब ही नहीं दिया।”

बीजेपी वर्कर ने बताया, “टीएमसी के गुंडों ने लात मारकर मेरे घर का दरवाजा खोल दिया और जबरन अंदर घुस आए और मेरी बहू के बारे में पूछा। उन्होंने उसे पूरे घर में ढूँढा, लेकिन जब वो नहीं मिली तो उस्मान ने मेरा रेप किया। मैं उससे दया की भीख माँगती रही कि मैं तुम्हारी माँ जैसी हूँ मेरे साथ ऐसा मत करो, लेकिन मेरी चीख-पुकार उसके बहरे कानों तक नहीं पहुँची। वह मेरा बलात्कार करता रहा। उस दिन एक मुस्लिम गुंडे ने एक हिंदू महिला का सम्मान लूट लिया। वे यहीं नहीं रुके। गौतम दास ने उस्मान को मुझे मारने की सलाह दी। ताकि मैं किसी को इसके बारे में बता न सकूँ। इसके बाद चारों ने मिलकर जबरदस्ती मेरा मुँह खोला और जहर डाल दिया। मैं अपना होश खो बैठी थी, मुझे नहीं पता कि मुझे कब और कैसे बचाया गया।”

टीएमसी के गुंडों के आतंक से आतंकित भाजपा कार्यकर्ता ने कहा, “मैं आप सभी से न्याय दिलाने का अनुरोध करती हूँ। मैं एक हिंदू महिला हूँ, जिसके सम्मान को मुस्लिम गुंडों ने लूट लिया है। मैं केवल एक विक्टिम बनकर नहीं रहना चाहती हूँ। प्लीज मुझे न्याय दिलाने के लिए आगे आएँ।”

पिंकी बाज और अपर्णा दास ये वो दो महिलाएँ हैं, राज्य में विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद टीएमसी के गुंडों ने अपना शिकार बनाया।

भाजपा कार्यकर्ता की बेटी से पिता के सामने बंदूक की नोक पर गैंगरेप

इसी तरह, बीरभूम की रहने वाली 21 वर्षीय दिया गुहा ने बताया कि उनके पिता भाजपा कार्यकर्ता हैं और वो उन्हीं के साथ रहती हैं। 2 मई 2021 को स्थानीय टीएमसी नेता मामूल शेख और मुस्लिम समुदाय के 10 से 12 अन्य टीएमसी गुंडे उसके घर में घुस गए और सभी को पीटना शुरू कर दिया।

दिया ने बताया, “उन्होंने मेरे कपड़े फाड़ दिए और जब मेरे पिता ने मुझे बचाने की कोशिश की तो उन्हें बेरहमी से पीटा और कहा कि नहीं हम लोगों को तू नहीं चाहिए.. तेरी बेटी चाहिए.. हम लोगों को हिंदू लड़की चाहिए (हम आपको नहीं चाहते, हम आपकी बेटी चाहते हैं। हमें एक हिंदू लड़की चाहिए)”।

ऑर्गनाइज़र ने अपनी रिपोर्ट में आगे कहा है कि टीएमसी के इन गुंडों ने 21 वर्षीय युवती के साथ उसके पिता की आँखों के सामने बंदूक की नोक पर बारी-बारी से गैंगरेप किया। लड़की का पिता लाचार होकर अपनी बेटी को देखता रहा और एक के बाद एक सातों आरोपितों ने उसे ताने मारे।

यहीं टीएमसी के गुंडे गैंगरेप तक सीमित नहीं रहे। उन्हें दिया और उसके पिता की हत्या करने की भी कोशिश की और कहा, “लड़की और बाप को मार दो नहीं तो हमारे लिए ज़हर हो जाएगा।”

दिया ने कहा कि किसी तरह से उनके पिता ने अपनी पगड़ी से उनके नंगे शरीर को ढँका और घर के पिछले दरवाजे से बाहर निकलकर भाग गए। तब से वापस अपने घर नहीं लौट सके हैं।

हल्दीपारा गाँव में भी टीएमसी के गुंडों ने बीजेपी समर्थक का किया यौन शोषण

पूर्व बर्धमान जिले के हल्दीपारा गाँव की प्रतिमा दास ने रोते हुए अपनी आपबीती बताई। उन्होंने कहा, “मैं भाजपा समर्थक हूँ, इसी की सजा देने के लिए टीएमसी के गुंडे मेरे घर में घुस आए और घूँसे और डंडों से मुझे पीटा। उन्होंने मेरी साड़ी और ब्लाउज को फाड़ दिया और मेरे स्तनों पर चाकू से कई बार हमला किया। उन्होंने मेरे निजी अंगों को छूआ। ” प्रतिमा के मुताबिक, उनके ही घर में कैद करके रखा गया है। क्योंकि टीएमसी के गुंडों ने पूरे गाँव को घेर रखा है और किसी को भी न तो बाहर जाने दिया जा रहा है और न ही अंदर आने दिया जा रहा है।

NHRC ने पश्चिम बंगाल हिंसा की जाँच के लिए 7 सदस्यीय टीम का गठन किया

इस बीच राष्ट्रीय महिला आयोग ने बंगाल में महिलाओं के साथ हुए अत्याचार के मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए एक जाँच समिति का गठन किया है। समिति ने पीड़ितों से मिलकर अपनी रिपोर्ट सौंपी है। वहीं राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने 21 जून 2021 को राज्य में चुनाव बाद की हिंसा की जाँच के लिए 7 सदस्यीय कमेटी का गठन किया है।

दरअसल, NHRC ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के 18 जून 2021 के उस आदेश का पालन किया है, जिसमें कोर्ट ने उसे शिकायतों की जाँच करने का निर्देश दिया था।

इस कमेटी का गठन कोलकाता हाई कोर्ट द्वारा ममता बनर्जी सरकार की याचिका को खारिज करने के बाद किया गया। बता दें कि ममता सरकार ने हाई कोर्ट में एनएचआरसी की जाँच के उसके (कोलकाता हाई कोर्ट) 18 जून 2021 के आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की थी।

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने हिंसा पर ममता बनर्जी की चुप्पी पर साधा निशाना

कोलकाता हाई कोर्ट द्वारा पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद की हिंसा की जाँच पर रोक लगाने की ममता बनर्जी की याचिका के खारिज होने पर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने खुशी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सोमवार (21 जून 2021) को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री को राज्य में चल रहे अपराधों को चुप रहकर देखने के मामले कड़ी फटकार लगाई गई है।

ईरानी ने ममता पर निशाना साधते हुए सवाल किया, “महिलाओं को उनके घरों से निकाल दिया जाता है और खुलेआम बलात्कार किया जाता है। एक 60 वर्षीय महिला ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाकर दावा किया कि उसके साथ सिर्फ इसलिए बलात्कार किया गया क्योंकि वह एक भाजपा कार्यकर्ता और समर्थक थी। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और कितने बलात्कार चुपचाप देखेंगी?”

केंद्रीय मंत्री ने कहा, “शायद हमारे लोकतंत्र में मैंने पहली बार देखा है कि एक सीएम को लोगों की हत्या होते सिर्फ इसलिए देख रही है, क्योंकि उन्होंने उसकी पार्टी को वोट नहीं दिया … पहले तो उनके (ममता बनर्जी) हाथ खून से सने हुए थे, अब दामन पर भी महिलाओं पर अत्याचार के दाग हैं।”