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‘इस्लाम अपनाओ या मोहल्ला छोड़ो’: कानपुर में हिन्दू परिवारों ने लगाए पलायन के बोर्ड, मुस्लिमों ने घर में घुस की छेड़खानी और मारपीट

उत्तर प्रदेश के कानपुर स्थित कर्नलगंज में 10 हिन्दू परिवारों ने अपने घर छोड़ने का निर्णय ले लिया है। वहाँ के हिन्दू परिवारों का कहना है कि उन पर दबाव बनाया जा रहा है कि या तो वो इस्लाम मजहब अपना कर मुस्लिम बन जाएँ, या फिर घर छोड़ कर चले जाएँ। पीड़ित परिवारों ने कहा कि उनकी जान पर रोज ख़तरा मँडरा रहा है क्योंकि मुस्लिम दबंग उन्हें डराने के लिए हमेशा कोई न कोई हरकत करते रहते हैं।

‘लाइव हिंदुस्तान’ की खबर के अनुसार, ये घटना कर्नलगंज थाना क्षेत्र के रेल पटरी इलाके की है। शनिवार (जून 20, 2021) को वो पूरी रात डर के साए में रहे। एक परिवार ने बताया कि उनके घर की बेटी के साथ छेड़छाड़ की गई और जब भाइयों ने मना किया तो घर में घुस कर मारपीट की गई। लड़की के साथ बलात्कार का भी प्रयास किया गया। 9 नामजद और 3 अज्ञात के खिलाफ मामला भी दर्ज कराया गया है।

पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए 3 आरोपितों को गिरफ्तार भी किया था, लेकिन परिवार का आरोप है कि उनमें से 2 किसी तरह छूटने में कामयाब रहे। कुछ हिन्दू परिवारों ने अपने घर के बाहर पलायन का संदेश भी लिख दिया है। मोहल्ले के ही एक दबंग आफ़ताब पर आरोप लगा है कि वो धमकी देता है कि जैसे ही योगी सरकार जाएगी और सपा की सरकार आएगी, वो पीड़ितों द्वारा दर्ज कराए गए केस का भी बदला लेगा।

छेड़खानी और मारपीट की घटना को लेकर जानकारी देते हुए कानपुर के नगर आयुक्त असीम अरुण ने कहा कि ये दो समुदायों से सम्बंधित मामला था और आरोपितों को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने बताया कि उन्हें इसकी जानकारी है कि वहाँ के नागरिक असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और उनसे हम संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि किसी को भी अपने पड़ोसी को धमकाने या असुरक्षित महसूस कराने की इजाजत नहीं दी जाएगी, सभी को अपनी संपत्ति पर रहने का अधिकार है।

पीड़ित परिवारों ने समाजवादी पार्टी के स्थानीय विधायक अमित बाजपेई पर भी आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सपा विधायक आरोपितों की मदद कर रहे हैं। इन 10 हिन्दू परिवारों में से कुछ बिहार से आकर बसे हैं। बताया गया है कि पीड़ित परिवार के घर में 50 की संख्या में मुस्लिम भीड़ घुसी थी। ‘बजरंग दल’ के स्थानीय कार्यकर्ताओं ने इस घटना के विरोध में प्रदर्शन भी किया और न्याय की माँग की।

वासेपुर की नगमा और उसका Covid-19 प्रोटोकॉल: 9 साल पुरानी बात, ऋचा चड्ढा ने क्लिप शेयर कर दिलाई याद

साल 2020 में जब कोरोना संक्रमण ने दस्तक दी तो इससे बचने के लिए विश्व भर में कुछ नियम अनिवार्य कर दिए गए। इनमें हाथ को सैनेटाइज करना, इम्युनिटी बढ़ाने के लिए खाना पेट भर खाना, सोशल डिस्टेंसिंग जैसे कई प्रोटोकॉल शामिल हैं। आज 2021 में जब ये छोटी-छोटी बातें सबको पता है उस समय बॉलीवुड अभिनेत्री ऋचा चड्ढा ने बताया है कि गैंग्स ऑफ वासेपुर में नगमा के किरदार में उन्होंने कोविड से बचने के ये उपाय 9 साल पहले बता दिए थे।

दरअसल, ऋचा चड्ढा ने फेसबुक पर गैंग्स ऑफ वासेपुर से अपनी कुछ वीडियो क्लिप्स शेयर की है। फिल्म में उन्होंने नगमा खातून का रोल अदा किया था। 2012 में रिलीज हुई इस फिल्म की क्लिप्स से मजेदार ढंग से कोविड केयर से जुड़ी बातों को जोड़कर दिखाया गया है।

एक सीन में नगमा पुलिस को आगे आने से मना करती है। दूसरे में वह खाना खाने को कहती है। अगले में बेटे को मारते हुए हाथ धोने को कहती है। चौथे में झाड़ू से मारते हुए आसपास के लोगों को हटाती है और संदेश देती है कि जब मास्क पहने लोग आते हैं तो वो उससे कैसे डील करती है।

इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर उनकी बहुत तारीफ हुई। लोगों ने बताया कि कैसे उन्हें गैंग्स ऑफ वासेपुर में नगमा खातून का रोल और उनके डॉयलॉग पसंद आए थे। बता दें कि ऋचा चड्ढा ने तो ये वीडियो हँसी-मजाक में कोरोना से जोड़कर प्रासंगिक बनाते हुए शेयर की है। लेकिन ये बात सच है कि एक व्यक्ति ऐसा भी था जिसने अनुमान लगा लिया था कि कोरोना वायरस आने वाला है।

मार्को नाम के ट्विटर यूजर के 3 जून 2013 को किए गए ट्वीट में देख सकते हैं कि लिखा था- “कोरोना वायरस…आ रहा है।” बता दें कि साल 2013 में किए गए इस ट्वीट के पीछे कोई विशेष कारण नहीं था। चूँकि कोरोना वायरस का नाम पहले से अस्तित्व में था तो मार्को द्वारा इस्तेमाल किया गया शब्द हैरान करने वाला नहीं है। लेकिन 2020 में इस वायरस का प्रकोप विश्व भर में फैलने के बाद ये ट्वीट प्रासंगिक हो गया और लोग इसे शेयर करने लगे। इस ट्वीट को इतना शेयर इसलिए भी किया गया क्योंकि ट्विटर पर डेट और टाइम को एडिट करने का कोई ऑप्शन नहीं होता।

केरल: CPM के ईसाई कार्यकर्ता की पत्नी और बेटे को जबरन बनाया मुसलमान, विरोध करने पर पार्टी ने निकाला

केरल में सत्ताधारी सीपीएम ने ईसाई कार्यकर्ता पीटी गिल्बर्ट को पार्टी से निकाल दिया है। अपनी पत्नी और बेटे के जबरन धर्म परिवर्तन का विरोध करने के कारण उन पर पार्टी ने यह कार्रवाई की है। जन्मभूमि की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि वह गिल्बर्ट सीपीएम की निरोलपाल शाखा समिति के सदस्य थे और जबरन इस्लामी धर्मांतरण के खिलाफ शिकायत की थी।

सीपीएम कार्यकर्ता गिल्बर्ट ने आरोप लगाया है कि इस धर्म परिवर्तन के पीछे का मास्टरमाइंड पंचायत सदस्य नज़ीरा और कालीकट विश्वविद्यालय का कर्मचारी उसका पति यूनुस है। इन्होंने ने ही उनकी पत्नी और बेटे का धर्म परिवर्तन कराया है। गिल्बर्ट ने कहा कि इस ग्रुप में कोट्टियादीन इस्माइल भी शामिल है, जो पास में एक बेकरी की दुकान चलाता है। इसके अलावा लतीफ उर्फ ​​कुंजन, शाहुल हमीद, बुशरा और कुलसू उसके पड़ोसी हैं। गिलबर्ट ने बताया कि उसकी पत्नी इस्माइल की बेकरी में काम करती थी। एक दिन जैसे ही वह काम पर जा रहा था कि पड़ोस की मुस्लिम महिलाएँ उसके घर आ गईं।

सीपीएम कार्यकर्ता का कहना है कि उसकी पत्नी ने उससे बार-बार कट्टरपंथी इस्लामी आतंकवादी संगठन आईएसआईएस के बारे में पूछा था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, गिल्बर्ट को उसकी पत्नी और उसका बेटा कोझिकोड के एक रिलीजियस सेंटर ‘तरबियात’ में मिले थे। उसका कहना है कि ‘तरबियात’ को देखने से वह केरल का हिस्सा नहीं लगता। इसके अलावा उसने वहाँ पर खतना होने के बाद पुरुषों को दर्द में पाया था। गिल्बर्ट को उसकी पत्नी और बेटे तक से नहीं मिलने दिया गया।

गिल्बर्ट ने कहा कि उन्होंने अपनी पार्टी से अपनी पत्नी और बेटे को जबरन धर्म परिवर्तन से बचाने के लिए मदद माँगी थी। हालाँकि, इसके तुरंत बाद ही सीपीएम की मलप्पुरम जिला कमेटी ने एक प्रेस रिलीज जारी कर उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया। पार्टी विरोधी गतिविधि के नाम पर उनकी सदसयता रद्द की गई है।

लाहौर में मुंबई हमले के मास्टरमाइंड आंतकी हाफिज सईद के घर के पास बड़ा धमाका: 2 की मौत, 17 घायल

पाकिस्तान के लाहौर के जौहर कस्बे में जबरदस्त धमाका हुआ है। इसमें एक पुलिसकर्मी सहित 2 लोगों की मौत और 17 लोगों के घायल होने की खबर है। पाकिस्तानी मीडिया डॉन के मुताबिक रेस्क्यू में जुटे अधिकारियों ने बताया कि ब्लास्ट एहसान मुमताज हॉस्पिटल के पास हुआ है। मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि यह धमाका मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड आतंकी हाफिज सईद के घर के पास हुआ है। हालाँकि अभी तक यह नहीं पता लगा है कि आतंकी हाफिज सईद घर पर था या नहीं।

पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्ट्स के अनुसार, लाहौर में जहाँ धमाका हुआ है, वह एक रिहायशी इलाका है। चश्मदीदों का कहना है कि एक व्यक्ति मोटरसाइकिल पर यहाँ आया और उसे यहाँ खड़ी करके चला गया। बाद में बताया जा रहा है कि वह मोटरसाइकिल फट गई।

रिपोर्ट के अनुसार, सभी घायलों को अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती करवाया गया है। धमाके बाद पुलिस की टीमें और तमाम जाँच एजेंसियाँ भी घटनास्थल पर पहुँच गई हैं। विस्‍फोट इतना जोरदार था कि आसपास की इमारतों के शीशे टूट गए हैं। कई वाहनों को भी नुकसान पहुँचा है।

रिपोर्ट के अनुसार, इस धमाके को लेकर लाहौर के अधिकारी अभी कुछ भी स्पष्ट नहीं बता रहे हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह गैस एक्सप्लोजन भी हो सकता है या कोई अन्य वजह भी हो सकती है। हालाँकि अभी तक इस बारे में कुछ भी कहना ठीक नहीं है।

पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस ने पूरे इलाके को सील कर दिया गया है। वहीं, पाकिस्तानी पंजाब के चीफ मिनिस्टर उस्मान बुजदार ने आईजी को घटना की जाँच कर जल्द रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए है। उन्होंने कहा कि जो भी इस घटना के लिए जिम्मेदार हैं, उन पर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही ब्लास्ट में घायल लोगों को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

लूट का 80% रिकवर, ₹9371 करोड़ बैंकों-केंद्र को ट्रांसफर: भगोड़े विजय माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चोकसी पर सख्ती का नतीजा

सरकारी बैंकों को हजारों करोड़ का चूना लगाकर देश छोड़ भागे विजय माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चोकसी पर सख्ती का नतीजा दिखने लगा है। न केवल इनको वापस लाने के प्रयास जारी हैं, बल्कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) इनकी जब्त संपत्ति का एक हिस्सा सरकारी बैंकों और केंद्र को ट्रांसफर भी कर चुकी है।

ईडी ने बताया है कि इनकी 18,170.02 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की जा चुकी है। यह इनके द्वारा की गई लूट का करीब 80 फीसदी हिस्सा है। जब्त की गई संपत्तियों में से 9,371.17 करोड़ रुपए के एसेट्स बैंकों और केंद्र सरकार को ईडी ने ट्रांसफर भी कर दिए हैं।

प्रवर्तन निदेशालाय ने कहा है, “प्रोटेक्शन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) कानून के तहत एजेंसी ने विजय माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चोकसी के मामले में 18,170.02 करोड़ रुपए की संपत्ति को जब्त किया है। यह राशि बैंकों को हुए कुल नुकसान का लगभग 80.45 फीसदी है। प्रवर्तन निदेशालय ने 9,371.17 करोड़ रुपए की कुर्क/जब्त की संपत्ति पीएसबी और केंद्र सरकार को ट्रांसफर भी कर दिया है।”

माल्या, मोदी और चोकसी ने अपनी कंपनियों के जरिए पैसों की हेराफेरी कर बैंकों को 22,585.83 करोड़ रुपए का नुकसान पहुँचाया था। रिपोर्ट के मुताबिक, बंद हो चुकी एयरलाइंस किंगफिशर के मालिक विजय माल्या बैंकों के लोन डिफाल्टर के मामले में ईडी की जाँच का सामना कर रहे हैं। इस मामले में ई़डी और सीबीआई मामले की जाँच कर ही रही थीं कि माल्या 2 मार्च, 2016 को विदेश भाग गए। उसी दिन बैंकों ने उनके खिलाफ कर्ज की वसूली के लिए कोर्ट का रुख भी किया था। इसके बाद केंद्र सरकार ने जनवरी 2019 में माल्या को आर्थिक अपराधी अधिनियम के तहत भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कर दिया था। माल्या फिलहाल माल्या इंग्लैंड में है।

वहीं पंजाब नेशनल बैंक से 13,500 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी करने के बाद हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी और नीरव मोदी 2018 में देश छोड़कर फरार हो गए थे। नीरव मोदी को 19 मार्च 2019 को लंदन में गिरफ्तार किया गया था। मेहुल चोकसी बंद हो चुकी फेमस दिग्गज गीतांजलि समूह का मालिक था। वह फिलहाल डोमिनिका में बंद है।

जानिए कैसे श्याम प्रताप सिंह बन गया मौलाना मोहम्मद उमर, पूर्व PM का रिश्तेदार है परिवार: AMU से मिल चुका है सम्मान

उत्तर प्रदेश ATS ने जिन दो मौलानाओं को 1000 हिन्दुओं का धर्मांतरण करने के आरोप में दबोचा है, उनमें से एक मौलाना मोहम्मद उमर गौतम पहले हिन्दू हुआ करता था। इस्लामी धर्मांतरण से पहले उसका नाम श्याम प्रताप सिंह था। वो मूल रूप से फतेहपुर जिले के थरियाँव थाना क्षेत्र के रमवा गाँव का निवासी है। उसने 1979 में ही गाँव छोड़ दिया था और नैनीताल के पंतनगर में रहने लगा था। फिर उसने दिल्ली को अपना ठिकाना बनाया।

पंतनगर में एक मुस्लिम लड़की से उसे प्यार हो गया। उसे अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) में प्रवक्ता बनाने का लालच दिया गया और इसके बाद उसने धर्मांतरण कर के इस्लाम अपना लिया। 1982 में वो उत्तर प्रदेश लौटा और गाजीपुर थाना क्षेत्र के खेसहन गाँव के रहने वाले छत्रपाल सिंह की बेटी राजेश कुमारी से शादी रचाई। फिर वो पत्नी को लेकर दिल्ली चला गया। धर्म-परिवर्तन के बाद उसका परिवार उससे नाराज़ रहता था और उससे बात भी न के बराबर ही होती थी।

‘दैनिक भास्कर’ की खबर के अनुसार, उमर साल दो साल में अपने गाँव आता ज़रूर था लेकिन परिजन उससे काफी कम बातचीत करते थे। गाँव के लोगों में से भी कुछ को उसके बारे में पता है तो कुछ उसे नहीं जानते। उसके चचेरे भाई राजू सिंह ने बताया कि हाईस्कूल पूरी करने के बाद ही वो पंतनगर चला गया था। 6 भाइयों में श्याम प्रताप सिंह उर्फ़ मौलाना मोहम्मद उमर गौतम चौथे नंबर का है।

पाकिस्तान-अरब से फंडिंग लेकर मूक-बधिर बच्चों को मुस्लिम बना कर उन्हें आत्मघाती हमलावर के रूप में इस्तेमाल करने की साजिश वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ तो स्थानीय डीएसपी सहित कई पुलिसकर्मी उसके पैतृक गाँव पहुँचे और चचेरे भाई से पूछताछ की। परिजनों ने बताया कि माँ की मौत के बाद उन्हें सनातन प्रक्रिया से जलाए जाने के विरुद्ध वो शव को दफनाने की जिद कर रहा था, जिससे भाइयों में झगड़ा भी हुआ था।

राजेश कुमारी के साथ उसकी शादी तो हुई थी लेकिन गौना नहीं हुआ था। इस बात को छिपा कर उसने चोरी-छिपे गौना करा लिया था। वापस आकर पत्नी ने अपने माता-पिता को जानकारी दी थी कि वो भी मुस्लिम बन गई है और ‘बीबी’ की तरह रहना स्वीकार कर लिया है। परिजनों ने एक निजी बैठक कर के मौलाना मोहम्मद उमर गौतम पर वापस हिन्दू धर्म अपनाने के लिए दबाव भी बनाया था, लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकला।

जब वो श्याम प्रताप सिंह हुआ करता था, तब उसके ताहिर नामक दोस्त ने AMU में नौकरी और उसकी मुस्लिम गर्लफ्रेंड से निकाह का लालच देकर इस्लाम कबूल करवाया था। तब वो जीबी पंत विश्वविद्यालय में पढ़ता था। चूँकि धर्मांतरण गिरोह की जड़ें पूरे देश में फैली हुई है, NIA भी जल्द जाँच से जुड़ सकती है। मौलाना मोहम्मद उमर गौतम का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वो 18 बार इंग्लैंड जाने की बात कह रहा है।

साथ ही इस वीडियो में उसने दावा किया कि वो यूनिवर्सिटी में पढ़ने के दौरान ही 7 लोगों का इस्लामी धर्मांतरण करा चुका है। उसने बताया था कि गोरखपुर का उसका एक दोस्त 4 बार अफ्रीका और इंग्लैंड जा चुका है। पोलैंड, पुर्तगाल, जर्मनी, सिंगापुर, अमेरिका और इंग्लैंड से लोगों ने आकर उसके इस्लामी सेंटर से धर्मांतरण और निकाह का प्रमाण-पत्र बनवाया। उसने कइयों के कोर्ट मैरिज कराए। हर महीने लगभग ऐसे 15 सर्टिफिकेट जारी किए जाते थे।

मौलाना मोहम्मद उमर गौतम कहता था कि वो ‘अल्लाह का काम’ कर रहा है। उमर गौतम का इस्लाम के प्रति झुकाव प्रतापगढ़ के एक नासिर खान से मिलने के बाद पैदा हुआ। 1984 में एक दुर्घटना के कारण वो क्लासेज नहीं अटेंड कर पाता था, तब नासिर ने उसकी मदद की थी। वो उमर गौतम को अस्पताल लेकर गया था और अपने मेस से बना खाना उसे देता था। नासिर ने उसे पैगम्बर मुहम्मद पर किताब पढ़ने को दिया।

इस बीच नासिर श्याम को लगातार इस्लामिक किताबें पढ़ने के लिए देता रहा। करीब डेढ़ साल तक चले इस सिलसिले के बाद श्याम इस्लाम से इतना प्रभावित हुआ कि उसने हिंदू धर्म त्यागकर इस्लाम अपना लिया और नाम बदलकर मोहम्मद उमर गौतम रख लिया। उसने जामिया मिलिया इस्लामिया से इस्लामिक स्टडीज में एमए भी किया है। 57 वर्षीय मौलाना गौतम का परिवार पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप (VP) सिंह का दूर का रिश्तेदार है।

AMU ने इस्लाम का प्रचार-प्रसार के लिए मौलना मोहम्मद उमर गौतम को सम्मानित भी किया था। इसके ‘जेद्दाह चैप्टर’ विभाग ने उसे अवॉर्ड दिया था। कहा गया था कि वो ‘पूरी निष्ठा और दृढ़ता के साथ इस्लाम के प्रचार-प्रसार में लगातार अभूतपूर्व योगदान’ दे रहा है। डासना मंदिर में घुसने वाले विपुल और कासिफ से पूछताछ के दौरान इन दोनों का नाम सामने आया था। पाकिस्तान की ISI का रोल भी इसमें सामने आ रहा है।

जम्मू-कश्मीर: नमाज पढ़ने मस्जिद जा रहे थे इंस्पेक्टर परवेज अहमद, इस्लामी आतंकियों ने गोलियाँ दाग ली जान

जम्मू-कश्मीर में श्रीनगर के कनिपोरा में नमाज पढ़ने के लिए मस्जिद जा रहे पुलिस इंस्पेक्टर परवेज अहमद डार की आतंकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी। वे काउंटर इंटेलीजेंस यूनिट में तैनात थे। हमला मंगलवार (22 जून 2021) की रात करीब 8.15 बजे हुआ। दो इस्लामी आतंकियों ने हमले को अंजाम दिया।

जम्मू कश्मीर पुलिस ने बताया कि दो आतंकवादियों ने पुलिस इंस्पेक्टर परवेज अहमद डार पर उस समय गोलियाँ चला दी, जब वह मगरिब की नमाज अदा करने जा रहे थे। घटना के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया जहाँ उन्होंने अंतिम साँस ली।

घटना सीसीटीवी में रिकॉर्ड हो गई है। इसमें दो आतंकी पिस्टल से फायरिंग करते देखे गए हैं। इस मामले में केस दर्ज छानबीन शुरू कर दी गई है। इसके अलावा इलाके की घेराबंदी कर संदिग्धों से पूछताछ भी की जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, आतंकी पहले से घात लगाए हुए थे। आतंकियों ने इंस्पेक्टर पर पीछे से हमला किया और भाग निकले। परवेज अहमद डार 2000 बैच के पुलिस अधिकारी थे। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, आतंकियों ने इंस्पेक्टर परवेज अहमद डार को तीन गोलियाँ मारी थी।

इंस्पेक्टर परवेज अहमद डार की हत्या की जिम्मेदारी आतंकी संगठन द रेजिस्टेंट फ्रंट (TRP) ने ली है। इस संगठन ने इसे टारगेट किलिंग करार देते हुए युवाओं को प्रताड़ित करने वाले पुलिस के जवानों को चेतावनी दी है। इससे पहले बीते 17 जून 2021 को भी आतंकियों ने श्रीनगर के पुराने शहर के ईदगाह इलाके एक पुलिस के जवान की हत्या कर दी थी। वीरगति पाने वाला जवान जावेद अहमद डार एक जज के पीएसओ के तौर पर तैनात थे। इस हमले की जिम्मेदारी भी द रदिस्टेंट फ्रंट ने ही ली थी।

1980 में गिरा विमान, उससे पहले 3 बार हुआ था संजय गाँधी की हत्या का प्रयास: विकीलीक्स ने किया था उजागर

संजय गाँधी को कभी उनकी माँ इंदिरा गाँधी का उत्तराधिकारी माना जाता था। आपातकाल के दौरान हुए अधिकतर फैसलों पर संजय की छाप थी। लेकिन, जून 23, 1980 को मात्र 33 वर्ष की आयु में एक विमान हादसे में उनकी संदेहास्पद मौत हो गई। उनकी पत्नी मेनका गाँधी और बेटे वरुण गाँधी भाजपा से सांसद हैं। क्या आपको पता है कि विकीलीक्स ने दावा किया था कि संजय गाँधी की हत्या के लिए 3 बार प्रयास हो चुके था?

अप्रैल 2013 में विकीलीक्स ने एक यूएस केबल के हवाले से दावा किया था कि 3 बार संजय गाँधी की हत्या की कोशिश की गई थी। एक बार जब वो उत्तर प्रदेश के दौरे पर थे, तब एक हाई-पॉवर्ड राइफल का इस्तेमाल कर के उन्हें मारने की कोशिश की गई थी। सितंबर 1976 में अमेरिकी दूतावास ने एक केबल में बताया था कि ‘एक सोची-समझी साजिश के तहत’ प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के छोटे बेटे संजय को एक अज्ञात हमलावर ने निशाना बनाने की कोशिश की।

हालाँकि, ये कोशिश असफल रही थी। तारीख देख कर पता चलता है कि ये घटना आपातकाल के दौरान हुई होगी। एक गुप्त सूत्र के हवाले से उस यूएस केबल में कहा गया था कि अगस्त 30-31, 1976 को संजय गाँधी पर तीन गोलियाँ चली थीं। संजय गाँधी गंभीर रूप से घायल नहीं हुए और किसी तरह बच कर निकल गए। ये उनकी हत्या का तीसरा प्रयास था। यूएस केबल में ये भी दावा किया गया था कि इस हमले का आरोप बाहर से संचालित होने वाले ‘क्रांतिकारी शक्तियों’ पर मढ़ा जाएगा।

ये दिलचस्प है कि अमेरिकी केबल ने भारतीय ख़ुफ़िया विभाग के सूत्रों को ही अपनी जानकारी का स्रोत बताया था। इसमें कहा गया था कि अगर संजय गाँधी जख्मी हुए भी तो उनकी स्थिति क्या थी, इस बारे में कुछ साफ़ नहीं है। उस समय की ख़बरों में इस हमले को लेकर जानकारी नहीं मिलती और कॉन्ग्रेस नेताओं का कोई बयान भी नहीं आया था। संजय गाँधी की जिस तरह की छवि थी, इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि उनके कई दुश्मन रहे होंगे।

आपातकाल के दौरान भेजी गई इस जानकारी में अमेरिकी दूतावास ने कहा था कि इस घटना से जुड़ी सूचनाओं को दबा कर रखा जा रहा है। आपातकाल का ही नुकसान था कि 1977 के चुनाव में इंदिरा गाँधी की हार हुई थी। जनता पार्टी सत्ता में आई, लेकिन संजय गाँधी की हत्या की कोशिश के सम्बन्ध में कोई जाँच नहीं हुई। संजय गाँधी की जब हत्या हुई, उससे 6 महीने पहले ही उनकी माँ के नेतृत्व में फिर से कॉन्ग्रेस की सरकार सत्ता में लौट आई थी।

‘टोपी-कुर्ता-दाढ़ी वाला ही होता है हैवानियत का शिकार’: AAP विधायक अमानतुल्लाह खान ने शेयर किया वीडियो, जानिए सच्चाई

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसे आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक अमानतुल्लाह खान ने आगे बढ़ाया है। इस वीडियो में देखा जा सकता है कि कुछ लोग मिल कर एक व्यक्ति को पीट रहे हैं और वो जमीन पर गिरा हुआ है। एक शख्स ने इस दौरान उस युवक को बाइक से कुचलने का भी प्रयास किया। भीड़ द्वारा पीटे जा रहे इस व्यक्ति के वीडियो को लेकर तरह-तरह के दावे किए जा रहे हैं।

दिल्ली वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष अमानतुल्लाह खान ने इस वीडियो को अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से शेयर करते हुए लिखा, “नए भारत में नए कीर्तिमान अब कुछ इस तरह बनाए जा रहे हैं। अगर आप में इंसानियत ज़िंदा है तो आपको भी देख कर दुःख होगा। हर बार की तरह ‘टोपी-कुर्ता-दाढ़ी’ वाला शख्स ही हैवानियत का शिकार होता दिखेगा। BJP सरकार भले ही विकास करने में असमर्थ रही हो, लेकिन नफ़रत फैलाने में अव्वल साबित हुई। दुःखद!”

अब हम आपको बताते हैं कि इस वीडियो की सच्चाई क्या है। दरअसल, वीडियो में लोग मराठी में बातें करते हुए दिख रहे हैं। ‘दैनिक भास्कर’ ने अपने मराठी संस्करण ‘दिव्य मराठी’ के हवाले से बताया है कि इस वीडियो में कहीं भी मजहब-जाति को लेकर टिप्पणी नहीं की गई है। वीडियो में लोगों की बात सुनने के बाद पता चलता है कि ये मामला सांप्रदायिक नहीं है। 15 जून का ये मामला महाराष्ट्र के अमरावती का है।

हुआ कुछ यूँ कि महेंद्र बसवनाथे नामक व्यक्ति के घर के बाहर उनकी बाइक खड़ी थी। शाम 5 बजे अचानक से एक चार पहिया वाहन आया और उसने बाइक को टक्कर मार दी। इतना ही नहीं, वो बाइक को 2 किलोमीटर तक घसीटता ही चला गया। ड्राइवर को आक्रोशित लोगों ने पकड़ कर पीटा और पुलिस के हवाले कर दिया। उसका नाम मोहम्मद फेजान था। ये जनता के आक्रोश का मामला था, जिस तरह की घटनाएँ अक्सर देखने को मिलती हैं।

अख़बार के स्थानीय संवाददाताओं ने इस घटना के सांप्रदायिक होने से इनकार किया है। अक्सर ऐसा देखा जाता है कि तेज़ रफ़्तार गाड़ी से अगर किसी को नुकसान पहुँचता है तो लोगों का गुस्सा सबसे पहले उस गाड़ी के ड्राइवर पर ही फूटता है। इस दौरान वो ये नहीं देखते कि सामने वाला किस धर्म-जाति-मजहब का है। कई बार चोरी के मामले में भी ऐसा होता है। इसके सहारे अमानतुल्लाह खान जैसे लोग राजनीति चमकाने में लगे हैं।

कोरोना का डेल्टा प्लस वैरिएंट: केंद्र ने केरल, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश को किया आगाह

कोरोना वायरस संक्रमण से निपटने को लेकर जारी लड़ाई के बीच केंद्र सरकार महामारी की तीसरी लहर को लेकर चेतावनी जारी कर चुकी है। इसी कड़ी में मंगलवार (22 जून 2021) को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने वायरस के नए डेल्टा प्लस वैरिएंट पर महाराष्ट्र, केरल और मध्य प्रदेश के लिए एडवाइजरी जारी की। मौजूदा वक्त में कोरोना के इस वैरिएंट को ‘वैरिएंट ऑफ कंसर्न (VOC)’ की कैटेगरी में रखा गया है।

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने तीन राज्यों (महाराष्ट्र, केरल और मध्य प्रदेश) को इस बात की जानकारी दी है कि महाराष्ट्र के रत्नागिरी और जलगाँव जिलों में कोरोना के नए वैरिएंट का जीनोम सिक्वेंसिंग सैंपल पाया गया है। इसके अलावा यह केरल के पलक्कड़ और पठानमथिट्टा जिले, मध्य प्रदेश के भोपाल और शिवपुरी जिले में भी पाया गया है। यह रिपोर्ट स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, जैव प्रौद्योगिकी विभाग, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) और वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) की 28 प्रयोगशालाओं के एक संघ INSACOG के नए रिसर्च पर आधारित है।

INSACOG ने कोरोना के डेल्टा प्लस वैरिएंट को वर्तमान में ‘वैरिएंट ऑफ कंसर्न’ बताया है। इसकी कई विशेषताएँ हैं।

– प्रसार तेजी से होता है
– फेफड़े की कोशिकाओं के के रिसेप्टर्स से मजबूती से जुड़ने में सक्षम
– मोनोक्लोनल एंटीबॉडी के असर में कमी

डेल्टा वैरिएंट के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय ने तीनों राज्यों को INSACOG द्वारा पहचाने गए जिलों और समूहों में तत्काल रोकथाम के उपाय करने को कहा है। साथ ही प्राथमिकता के आधार पर भीड़ को कंट्रोल करने, टेस्टिंग बढ़ाने और वैक्सीनेशन को बढ़ाने समेत दूसरे कोविड प्रोटोकॉल का पालन करने की सलाह दी है। इन राज्यों की सरकारों को पॉजिटिव पाए गए लोगों को सैंपल को INSACOG की रजिस्टर्ड लैब में भेजने को कहा गया है। इससे महामारी को जानने में मदद मिलेगी और इसके आधार पर राज्यों को आगे की गाइडलाइंस जारी की जाएगी।