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‘ताबीज के कारण गर्भ में हुई बच्चे की मौत, इसी कारण गुस्से में बुजुर्ग को पीटा’ – UP पुलिस के सामने आरोपित ने कबूला

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद शहर में बुजुर्ग की दाढ़ी काटने का मामला अभी भी सोशल मीडिया पर चर्चाओं का विषय बना हुआ है। इसी कारण पुलिस भी दिन-रात काम कर जाँच पूरी करने में जुटी हुई है। इसी क्रम में शुक्रवार (जून 18, 2021) को जाँच अधिकारी ने डासना जेल में बंद प्रवेश गुर्जर के बयान दर्ज किए हैं, जिसमें उसने अब्दुल समद की पिटाई करने की बात कबूल कर ली है। 

‘ताबीज के कारण गर्भ में हुई बच्चे की मौत’

12 जून से रंगदारी के एक दूसरे मामले में जेल में बंद प्रवेश ने बताया कि उस रात वो गुस्से में था। क्योंकि उसे लगता था कि समद के द्वारा दिए गए ताबीज की वजह से उसकी पत्नी के गर्भ में 5 महीने के बच्चे की मौत हो गई थी। उसके साथ बुरा हो रहा था। उसने बताया कि उसकी दाढ़ी उसने नहीं, कल्लू ने काटी थी, क्योंकि वो भी बहुत गुस्से में था। काफी सारे लोग वहाँ मौजूद थे। बयान दर्ज करने के बाद अब पुलिस परवेज को रिमांड में लेने की तैयारी कर रही है।

गिरफ्तार 9 लोगों में से 8 को मिली कोर्ट से जमानत

इस मामले में एक दिन पहले पुलिस ने चार और आरोपितों को गिरफ्तार किया था। इन आरोपितों के नाम हिमांशु, अनस, शावेज और बाबू हैं। शुक्रवार को इन सभी को पुलिस ने कोर्ट में पेश किया, जहाँ जज ने चारों को जमानत दे दी। अभी तक इस मामले में 9 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिसमें से 8 को जमानत मिल चुकी है। वहीं ट्विटर समेत 9 लोगों को गाजियाबाद पुलिस ने नोटिस भेजकर 1 हफ्ते के अंदर जाँच अधिकारी के सामने पेश होने की बात कही है।

गौरतलब है कि हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसके आधार पर आरोप लगाया गया कि उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में एक मुस्लिम व्यक्ति से जबरदस्ती ‘जय श्री राम’ बुलवाया गया। मुस्लिम बुजुर्ग ने 4 अज्ञात लोगों पर पिटाई और जबरन दाढ़ी शेव कराने का आरोप लगाया। उक्त बुजुर्ग ने दावा किया कि उसका अपहरण कर के एक सुनसान इलाके में स्थित घर में ले जाया गया और वहीं ‘जय श्री राम’ बुलवाया गया। जिसके बाद पुलिस ने मामले की सच्चाई बताते हुए किसी भी तरह से सांप्रदायिक एंगल होने से इनकार किया है।

आंध्र प्रदेश: टीपू सुल्तान की प्रतिमा लगा रहे जगन रेड्डी के MLA और मुस्लिम, विरोध करने पर BJP नेताओं की गिरफ्तारी

आंध्र प्रदेश के कडप्पा जिले के प्रोद्दुतुर में इस्लामिक शासक टीपू सुल्तान की प्रतिमा लगाने का विरोध कर रहे प्रदेश भाजपा के कई नेताओं को शुक्रवार (18 जून 2021) को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार किए गए नेताओं में आंध्र भाजपा के राज्य महासचिव एस. विष्णु वर्धन रेड्डी भी शामिल हैं। भाजपा नेता सुनील देवधर ने वीडियो जारी करके इसकी जानकारी दी।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार प्रोद्दुतुर से सत्ताधारी दल वाईएसआर कॉन्ग्रेस के विधायक आर शिवप्रसाद रेडी और स्थानीय मुस्लिम टीपू सुल्तान की प्रतिमा लगाने की कोशिश कर रहे हैं। यह खबर जब भाजपा तक पहुँची तो पार्टी ने पहले चेतवानी दी। लेकिन जब इस मामले में प्रशासन से कोई मदद नहीं मिली तो राज्य भाजपा इकाई ने इसका विरोध करने का निर्णय लिया।

प्रशासन पर तुष्टिकरण का आरोप लगाते हुए भाजपा के राज्य महासचिव एस. विष्णु वर्धन रेड्डी, जिलाध्यक्ष येल्ला रेड्डी, पूर्व जिलाध्यक्ष अंकल रेड्डी और किसान मोर्चा के अध्यक्ष शशि भूषण रेड्डी उस जगह पर पहुँच गए, जहाँ टीपू सुल्तान की प्रतिमा स्थापित किए जाने की योजना बनाई गई थी। भाजपा नेताओं ने यह कहते हुए इसका विरोध किया कि मुस्लिमों के तुष्टिकरण के लिए टीपू सुल्तान के पुतले को जानबूझकर स्थापित किया जा रहा है और प्रोद्दुतुर के विधायक स्थानीय मुस्लिमों की सहायता कर रहे हैं। इसके बाद पुलिस ने विरोध कर रहे सभी भाजपा नेताओं को गिरफ्तार कर लिया और घटनास्थल से दूर ले गए।

भाजपा के राष्ट्रीय सचिव और आंध्र प्रदेश के सह प्रभारी सुनील देवधर ने वीडियो जारी कर कहा है कि वो मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी के द्वारा विष्णु वर्धन रेड्डी और अन्य भाजपा नेताओं की गिरफ्तारी कराए जाने की निंदा करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा नेताओं की गिरफ्तारी इसलिए की गई क्योंकि उन्होंने हजारों हिंदुओं की हत्या करने वाले और सैकड़ों मंदिरों को नष्ट करने वाले टीपू सुल्तान की प्रतिमा लगाए जाने का विरोध किया।

आंध्र प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष सोमू वीरराजू ने कहा कि टीपू सुल्तान की प्रतिमा लगाने से क्षेत्र में तनाव पैदा हो सकता है। साथ ही यह हिंदुओं की भावनाओं को भी आहत करेगा। हालाँकि भाजपा नेताओं की माँगों को अनसुना करते हुए कई मुस्लिम नेताओं ने प्रोद्दुतुर में इस उद्देश्य के लिए भूमिपूजन भी कर दिया है। वीरराजू ने इस मामले में मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी से अपना रूख स्पष्ट करने की माँग की है। साथ ही कहा है कि जब तक टीपू सुल्तान की प्रतिमा स्थापित करने का निर्णय वापस नहीं लिया जाता तब तक विरोध जारी रहेगा।

समीर कुरैशी बन गया सैम मार्टिन, ईसाई महिला को फँसाया: गुजरात में लव जिहाद विरोधी कानून में पहली गिरफ्तारी

गुजरात में हाल ही में अमल में आए लव जिहाद विरोधी कानून के तहत पहली गिरफ्तारी हुई है। खबर है कि एक मुस्लिम युवक ने ईसाई बनकर महिला को प्रेम जाल में फँसाया और फिर उसके साथ दुष्कर्म कर उसकी आपत्तिजनक तस्वीरें खींच लीं। बाद में इन्हीं तस्वीरों के जरिए उसने जबरन निकाह किया और उसका गर्भपात करवाता रहा। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने युवक को गिरफ्तार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वडोदरा पुलिस ने समीर कुरैशी नाम के व्यक्ति को गुजरात धर्म की स्वतंत्रता (संशोधन) अधिनियम, 2021 के तहत गिरफ्तार किया गया। पुलिस का कहना है कि समीर अपने अब्बा के साथ दुकान चलाता था और उस पर आरोप है कि उसने खुद को ईसाई धर्म का दिखाकर दूसरे धर्म की महिला को प्रेम जाल में फँसाया। साल 2019 में सोशल मीडिया पर वह महिला से सैम मार्टिन के नाम से मिला था।

पुलिस के अनुसार, उस समय महिला ने युवक का धर्म देखते हुए उससे शादी करने के लिए हाँ कर दी, लेकिन बाद में पता चला कि शादी ईसाई रीति रिवाज से नहीं, बल्कि मुस्लिम रीति रिवाजों से हो रही थी। शादी के नाम पर निकाह का आयोजन हुआ। निकाह के बाद पहले पीड़िता का नाम बदलवाया गया और फिर उस पर धर्म परिवर्तन करने का दबाव बनाया जाने लगा। समीर अपनी बात मनवाने के लिए महिला को जातिसूचक गालियाँ भी देता था। 

बता दें कि शिकायतकर्ता ने इस संबंध में मीडियाकर्मियों को भी बताया। उन्होंने कहा कि समीर कुरैशी ने सोशल मीडिया पर अपनी फर्जी पहचान के जरिए पीड़िता को फँसाया। उसके बाद उसने महिला के साथ दुष्कर्म किया और महिला की आपत्तिजनक तस्वीरों के जरिए उसे ब्लैकमेल कर करके उससे निकाह किया। इन संबंधों के दौरान महिला को गर्भपात के लिए भी मजबूर किया जाता था।

उल्लेखनीय है कि गुजरात में लव जिहाद विरोधी कानून 15 जून से लागू हुआ है। इसके लिए  गुजरात धर्म की स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक, 2021 को विधानसभा में एक अप्रैल को बहुमत से पारित किया गया था। इसे गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने मई में मँजूरी दी थी। गुजरात धर्म की स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक, 2021 के तहत शादी के जरिए जबरन धर्म परिवर्तन कराने पर सख्त सजा का प्रावधान रखा गया है। गुजरात धार्मिक स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक, 2021 को अपनी स्वीकृति दी थी, जिसमें कुछ मामलों में 10 साल तक की कैद और 5 लाख रुपए के जुर्माने का प्रावधान है।

विकिपीडिया पर 3 साल तक दौड़ती रही एक ऐसी ट्रेन जो थी ही नहीं, लाहौर यूनिवर्सिटी के शोध पत्र में भी हुआ कॉपी-पेस्ट

दुनिया भर में विकिपीडिया को जानकारी का एक विश्वसनीय स्रोत माना जाता है। इसके संस्थापक और प्रकाशक बड़े गर्व से दावा करते हैं कि यहाँ बिन तथ्यों को जाँचे कोई जानकारी नहीं दी जाती। ऐसे में वामपंथ की ओर खास दिलचस्पी रखने वाली इस वेबसाइट ने कई दक्षिणपंथी वेबसाइटों को भी ब्लैक लिस्ट में रखा हुआ है, जिसका मतलब साफ है कि ये साइट उन मीडिया हाउसों को जानकारी का एक प्रमाणिक स्रोत तक नहीं मानती।

हालाँकि, इस बीच ध्यान देने वाली बात ये है कि इसी साइट को एक आभासी ट्रेन से जुड़ी जानकारी विश्वसनीय लगती है, जिसका जिक्र पाकिस्तान इस्टर्न रेलवे के विकिपीडिया के पेज पर करीब 3 साल मौजूद रही। इसके हवाला देकर न केवल आम लोगों को बल्कि लाहौर की पंजाब यूनिवर्सिटी को भी बेवकूफ बनाने का काम हुआ। बता दें कि पूर्वी पाकिस्तान को स्वतंत्रता मिलने और बांग्लादेश बनने के बाद पाकिस्तान पूर्वी रेलवे का नाम बदलकर बांग्लादेश रेलवे कर दिया गया था।

ऐसे में 28 नवंबर 2016 को, विकिपीडिया के एक संपादक ने PAKHIGHWAY यूजरनेम से पाकिस्तान पूर्वी रेलवे के विकि पेज पर एडिट किया, जहाँ यूजर ने ट्रेन संख्या 5214 के साथ मशरिक-मघरेब एक्सप्रेस नामक एक ट्रेन के बारे में विवरण डाला। एडिट में कहा गया कि ट्रेन 1950 से 1955 तक चली और इस बीच पश्चिमी पाकिस्तान के कोह-ए-ताफ्तान से पूर्वी पाकिस्तान के चटगाँव तक संचालित हुई। विकि पेज ने यह भी कहा कि ट्रेन में अटारी और बेनापोल के बीच भारतीय रेलवे ट्रैक और रोलिंग स्टॉक का इस्तेमाल किया गया था।

Wikipedia page before the detail of the train was removed

इस एडिट के बाद जल्द ही इस ट्रेन का विवरण फेसबुक पोस्ट और ब्लॉग पर दिखाई देने लगा और कुछ समय बाद लाहौर में पंजाब विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित एक शोध पत्र में भी इसका उल्लेख देखने को मिल गया।

“क्यों पाकिस्तान रेलवे प्रदर्शन करने में विफल रहा है: यात्री परिप्रेक्ष्य पर एक विशेष फोकस” शीर्षक वाले शोध पत्र में विकिपीडिया लेख से मशरिक-मघरेब एक्सप्रेस के बारे में लाइनें कॉपी-पेस्ट की गई थी।

Paper by Punjab University, Lahore

ट्रेन को लेकर विकिपीडिया पर प्रकाशित जानकारी स्पष्ट रूप से फर्जी थी। इस बात के कोई भी सबूत नहीं है कि भारत के रास्ते पश्चिम पाकिस्तान और पूर्वी पाकिस्तान के बीच कोई सीधी ट्रेन चलती थी। यदि ऐसा होता तो अब तक यह एक मशहूर ऐतिहासिक तथ्य होता। दरअसल, मुहम्मद अली जिन्ना ने उस समय पाकिस्तान के दो हिस्सों के बीच 1,280 किलोमीटर लंबे ट्रांजिट कॉरिडोर का प्रस्ताव रखा था, लेकिन न तो ब्रिटिश सरकार और न ही कॉन्ग्रेस पार्टी इस पर राजी हुई।

विकिपीडिया के इन एडिट किए गए दावों ने ऐसे लॉजिकों को भी खारिज कर दिया कि आखिर इतनी महत्वपूर्ण ट्रेन कोह-ए-ताफ्तान, पाकिस्तान के सबसे पश्चिमी रेलवे स्टेशन, जो एक छोटे से पहाड़ी सीमावर्ती शहर में स्थित है, वहाँ से क्यों चलेगी। इतनी जरूरी ट्रेन को तो लाहौर, कराची जैसे शहरों से चलना चाहिए। इसी तरह चटगाँव तो बांग्लादेश के सबसे पूर्वी तरफ स्थित है। यदि कोई ट्रेन चलती भी तो ढाका से चलती।

ट्रेन के बारे में कोई भी प्रमाणिक स्रोत या तर्क न होने के बावजूद मशरिक-मघरेब एक्सप्रेस के बारे में जानकारी विकिपीडिया पेज पर 3 साल तक रही। फिर पिछले साल अगस्त में ही किसी ने उस वाक्य को हटा दिया, क्योंकि दूसरी बार एडिट करने वाले को इससे जुड़ा कोई लिंक वहाँ नहीं मिला और न किसी विश्वसनीय स्रोत में इसका उल्लेख दिखा।

अब यह तो ज्ञात नहीं है कि PAKHIGHWAY यूजरनेम वाले यूजर ने ऐसी एडिटिंग क्यों की। लेकिन संयोग से, उस यूजर को किसी दूसरे कारण के चलते विकिपीडिया से स्थायी रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया है। विकिपीडिया के अनुसार, कई अकाउंट्स का दुरुपयोग करने और अन्य यूजर के साथ बहस करने के लिए टॉक पेज का उपयोग करने को लेकर यूजर को अनिश्चित काल के लिए प्रतिबंधित किया गया है।

एडिट के पीछे संदिग्ध दावे

बता दें कि विकिपीडिया पर करीब 3 साल तक फर्जी जानकारी रखने का यह मामला सोशल मीडिया पर एक फेसबुक पोस्ट के बाद सामने आया, जहाँ लोगों ने दावा किया कि उसने NALSAR क्विज़िंग वेबसाइट पर “गूगलर्स को रोकने” के लिए ऐसा एडिट किया था। फेसबुक पर कई लोगों द्वारा पोस्ट किए गए दावे में कहा गया है कि एडिट करने के बाद, व्यक्ति इसे वापस सही करना भूल गया और बाद में ऐसा करना लगभग असंभव हो गया, क्योंकि तब तक कुछ अकादमिक लेखों और यहाँ तक कि आधिकारिक पाकिस्तान रेलवे वेबसाइटों में भी इसके उल्लेख किया जा चुका था।

हालाँकि, यह दावा करने वाले अधिकांश लोग भारतीय हैं, और PAKHIGHWAY के एडिट हिस्ट्री से, जिन्होंने विकिपीडिया पेज में परिवर्तन किया था, यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि वह यूजर पाकिस्तानी है क्योंकि यूजर द्वारा किए गए अन्य सभी एडिट पाकिस्तान से संबंधित हैं।

फेसबुक पोस्ट में यह भी कहा गया है कि उस समय ऐसी कोई ट्रेन नहीं हो सकती थी, क्योंकि गेज के टूटने से यह असंभव हो जाता। हालाँकि, यह सच नहीं है, क्योंकि पश्चिम पाकिस्तान, पूर्वी पाकिस्तान और भारत, तीनों को ब्रिटिश सरकार द्वारा निर्मित एक ही रेलवे बुनियादी ढाँचा विरासत में मिला था और स्वतंत्रता से पहले इन तीन क्षेत्रों में नियमित रूप से ट्रेनें चलती थीं। इसलिए, यह सच है कि विकिपीडिया लेख में तीन साल तक काल्पनिक जानकारी थी, लेकिन हो सकता है कि इसे लेकर किए जा रहे दावे भी गलत हों।

पैसे और राजनीतिक संपर्कों से बचता रहा है दुष्कर्म का आरोपित फ्रेंको मुलक्कल: पूर्व HC जज का दावा

कर्नाटक हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज माइकल फ्रांसिस सलदान्हा ने दावा किया है कि बलात्कार आरोपित पूर्व बिशप फ्रेंको मुलक्कल पैसों और राजनैतिक संबंधों के चलते बचता रहा है। सलदान्हा ने यह भी कहा कि अब यह एक राष्ट्रीय मुद्दा बन चुका है और अकेले केरल से ही लगभग 60,000 ननों ने यौन उत्पीड़न की बात उठाई है।

रिपब्लिक के साथ बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि 2018 में ही सिस्टर लूसी ने उन्हें यह सूचना दी थी कि केरल की कई नन और अन्य लोग यह मुद्दा उठा रहे हैं कि जाँच में तत्कालीन बिशप मुलक्कल के खिलाफ अपराधिक मामला सामने आने के बाद भी न तो उसे गिरफ्तार किया गया और न ही कोई ट्रायल शुरू हुआ। रिटायर्ड जस्टिस सलदान्हा ने बताया कि तब सिर्फ एक ही माँग थी कि यदि कोई गंभीर यौन उत्पीड़न में शामिल है तो उसके खिलाफ उचित कानून के तहत कार्रवाई की जाए।

उन्होंने सर्वे के आधार पर एक गंभीर दावा करते हुए कहा कि अकेले केरल से 60,000 नन और पूरे देश में कई अन्य ने अपने यौन उत्पीड़न को लेकर आवाज उठाई है। सलदान्हा ने कहा कि इस सर्वे के बाद यह मुद्दा अब केरल भर का नहीं रह जाता, बल्कि यह एक राष्ट्रीय मुद्दा बन जाता है। इसके अलावा चर्चा के दौरान सलदान्हा ने बलात्कार के आरोपित फ्रेंको मुलक्कल के खिलाफ प्रदर्शन करने पर सिस्टर लूसी को नन के रूप में बर्खास्त करने के लिए फ्रान्सिस्कन क्लैरिस्ट कॉन्ग्रेगेशन (FCC) की आलोचना भी की।

ज्ञात हो कि हाल ही में वेटिकन ने निष्कासित सिस्टर लूसी कलपूरा की तीसरी याचिका भी खारिज कर दी थी। साथ ही एर्नाकुलम के फ्रान्सिस्कन क्लैरिस्ट कॉन्ग्रेगेशन ने कलपूरा को कॉन्वेंट खाली करने का आदेश भी दिया था। याचिका में कलपूरा ने अपने निष्कासन को रद्द करने की माँग की थी। दरअसल दो साल पहले बलात्कार के आरोपित पूर्व बिशप फ्रेंको मुलक्कल का विरोध करने के बाद कलपूरा से नन की पदवी छीन ली गई थी। हालाँकि कर्नाटक हाई कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस सलदान्हा ने सिस्टर लूसी की कानूनी लड़ाई में उनका साथ देने का फैसला किया है।

जून 2018 में एक 43 वर्षीय नन ने एक पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए पूर्व बिशप फ्रेंको मुल्लकल पर आरोप लगाया था कि, 2014 में एक जरूरी मुद्दे पर चर्चा करने के बहाने मुलक्कल ने उसे बुलाकर उसका यौन उत्पीड़न किया था। इसके बाद यह क्रम लगातार दो वर्ष तक जारी रहा। इसके बाद इस मामले की जाँच के लिए एक कमेटी का गठन किया गया था। सिस्टर लूसी कलपूरा उन पॉंच ननों में शामिल हैं, जिन्होंने बिशप फ्रैंको मुलक्कल पर रेप का आरोप लगाने वाली नन का समर्थन किया था।

उद्घाटन की लिस्ट जारी, कौन करेगा, क्या-क्या करेगा… सब क्लियर: मुख्यमंत्री-विधायक सबकी बल्ले-बल्ले

दिल्ली के विधायक जी ने स्पीड ब्रेकर का उद्घाटन कर दिया। ट्वीट की झड़ी लग गई। सब यह सोचने लगे कि पुल और सड़क का उद्घाटन तो समझ आता है पर स्पीड ब्रेकर का उद्घाटन! सब यह बहस कर रहे थे कि यह अभूतपूर्व घटना भारत के किसी भी राज्य में प्रशासन की ऐतिहासिक मिसाल है। यह बहस भी होने लगी कि यह कैसे हुआ कि मुख्यमंत्री जी ने स्पीड ब्रेकर जैसे महत्वपूर्ण निर्माण का उद्घाटन करने के लिए किसी विधायक को अलाऊ कैसे किया? मुझे लगता है कि ऐसा कुछ हुआ होगा;    

विधायकों का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से मिला। दुआ सलाम के बाद बात शुरू हुई तो मुख्यमंत्री जी बोले; “देखिए, मेरी बात सुनिए, मुझे पता है कि आप सब भी उद्घाटन जैसे महत्वपूर्ण काम करना चाहते हैं लेकिन मेरी भी तो मजबूरी समझिए। आज कह रहे हैं कि उद्घाटन करना चाहते हैं। कल कहेंगे कि अस्पताल और पुल का मुआयना वगैरह भी आप लोग ही करेंगे फिर परसों कहेंगे कि केंद्र सरकार को गाली भी आप ही देना चाहते हैं? इसका क्या असर होगा वो सोचा है आपने? ऊपर से ये जो लिस्ट आपने दी है, यदि उन सारी चीजों का उद्घाटन आप लोग करने लगेंगे तो मेरे लिए बचेगा ही क्या?”

विधायकों का नेता धीरे से कुछ बुदबुदाया। उसकी बुदबुदाहट सुनकर उप मुख्यमंत्री ने कहा; “आप कुछ कहना चाहते हैं?”

नेता ने हाँ में सिर हिलाया। मुख्यमंत्री ने अपने दोनों हाथ भौतिकी विज्ञान के प्रोफ़ेसर की तरह उठाए। देख कर लग रहा था कि ऊर्जा को लेकर आइंस्टीन का प्रसिद्ध समीकरण विधायकों को समझाना चाहते हों। समझाने की मुद्रा बनाते हुए बोले; “गोयल जी, आप कहिए, जो भी बोलना चाहते हैं वो कहिए”

गोयल जी ने राहत की साँस ली और बोले; “मैं तो केवल यह कहना चाहता था कि कुछ चीजों का उद्घाटन हमें भी करने दिया जाना चाहिए। उद्घाटन वगैरह करने का मौका मिलता रहेगा तो हमें भी विधायक होने का एहसास होता रहेगा। नहीं तो इस शहर रुपी प्रदेश में हमारे लिए है ही क्या? ऐसे में ये लिस्ट जो हमने सर्व सम्मति से बनाई है, उसे देखकर मुख्यमंत्री महोदय एक बार अप्रूव कर दें तो यह झमेला ही ख़त्म हो जाए कि किन चीजों का उद्घाटन मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री कर सकते हैं और किन चीजों का हम विधायक लोग।”

मुख्यमंत्री जी ने लिस्ट हाथों में ली और उसे पढ़ने लगे। गमलों का उद्घाटन, नई कचरा गाड़ी का उद्घाटन, हैंडपंप का उद्घाटन, कोरोना टेस्ट सेंटर का उद्घाटन, पानी टैंकर का उद्घाटन, राशन कार्ड का… सॉरी राशन दुकान का उद्घाटन, सरकारी विज्ञापनों वाली होर्डिंग का उद्घाटन, स्पीड ब्रेकर का उद्घाटन…… पढ़ते-पढ़ते रुक गए। बोले; गोयल जी, ये स्पीड ब्रेकर के उद्घाटन को लेकर पिछली कार्यकारिणी में ही निर्णय लिया जा चुका था न? समझौता हो गया था कि किसी भी विधानसभा क्षेत्र में स्पीड ब्रेकर का उद्धघाटन मैं करूँगा और अगर मैं गोवा, उत्तराखंड या पंजाब चुनाव की भूमिका बनाने के लिए दिल्ली से बाहर रहा तो गोपाल राय जी करेंगे, और वे भी न रहे तब फिर विधायक जी लोग करेंगे और वह भी प्रायर अप्रूवल के बाद? और ये इस लिस्ट में पानी टैंकर के उद्घाटन पर फिर से विचार करने की बात कहाँ से आ गई? ये भी फाइनल हो गया था कि पानी टैंकर का उद्घाटन राघव करेगा!”

गोयल जी ने तुरंत सावधान की मुद्रा पकड़ ली। बोले; वो क्या है कि जबसे ये कोरोना आया है, तब से नए काम हो नहीं रहे हैं। नए काम नहीं हो रहे हैं तो उद्घाटनों की संख्या ड्रास्टिकली गिर गई है। मैंने खुद पिछला उद्घाटन दस महीने पहले किया था, जब अपने इलाके में नाले पर एक पुलिया बनी थी। किसी पोस्टर पर अपना चेहरा देखे आठ महीने हो गए। वैसे भी अब जो नए काम हो रहे हैं, वो सभी हेल्थ मिनिस्ट्री के हैं।”

मुख्यमंत्री ने उन्हें बीच में टोकते हुए कहा; “अरे ये इतनी बड़ी भूमिका मत बाँधिए। सीधा पानी टैंकर पर आइए”

गोयल जी सकपका गए। बोले; “मैं उसी पर आ रहा था। मैं कहना चाहता था कि ये पानी टैंकर का काम गर्मी में शुरू होता है। इधर आप लोग ऑक्सीजन ऑडिट… सॉरी सॉरी ऑक्सीजन टैंकर के उद्घाटन में बिजी थे तो हमने सर्व सम्मति से यह विचार किया कि आप लोगों के पास समय कम रहेगा, ऐसे में विधायक लोग इसका उद्घाटन देख लें तो अच्छा रहेगा। वैसे भी पानी की किल्लत हर विधानसभा क्षेत्र में होनी है। सारे विधायक अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र में टैंकरों का उद्घाटन कर लेंगे तो अच्छा रहेगा।

मुख्यमंत्री जी ने उन्हें धैर्य के साथ सुना लेकिन कन्विंस्ड नज़र नहीं आए। बोले; “और ये स्पीड ब्रेकर का उद्घाटन? ये मामला इस लिस्ट में क्यों आया?”

कुछ क्षणों के लिए गोयल जी को लगा कि पता होता कि ये हाल होगा तो ज्ञापन लेकर आता ही नहीं। धीरे से बोले; “वो अभी लॉकडाउन खुला है और ट्रैफिक आने लगेगा तो हमने सोचा कि कुछ उद्घाटन किया जाए। सोशल मीडिया हैंडल करने वाले शिकायत कर रहे थे कि ट्विटर फेसबुक पर एक महीने से कोई नई फोटो नहीं लगी है। एक महीने पहले कोरोना के टेस्टिंग सेंटर का उद्घाटन किया था तब फोटो पोस्ट किया गया था। लगभग हर विधायक का यही हाल है इसलिए सोचा कि उद्घाटन विधायक ही कर लें। कई लोगों ने तो अपने इलाके में लॉकडाउन के दौरान दो-चार जगह इसी आशा में स्पीड ब्रेकर तोड़वाए थे कि नए बनेंगे तो उद्घाटन करने को मिल जाएगा। लेकिन आपको आपत्ति है तो हम बिना उद्घाटन किए ही उन्हें बनवा कर खोल देंगे।”

मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री ने आपस में कुछ विचार विमर्श किया। उसके बाद मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल से कहा; “देखिए, ऐसा है कि हमारी सरकार के तमाम कामों में उद्घाटन सबसे महत्वपूर्ण काम है पर यह आवश्यक है कि उद्घाटन को लेकर किसी तरह का विवाद पार्टी की छवि… मेरा मतलब मुख्यमंत्री की छवि को धक्का लगता है। ऐसे में यह जरूरी है कि किन चीजों का उद्घाटन कौन करेगा, यह तय हो जाए। हम आप लोगों की डिमांड समझते हैं और यह भी सही है कि कोरोना की वजह से आजकल उद्घाटन के मौके काम मिल रहे हैं। ऐसे में उद्घाटन के लिए कुछ चीजों को हमने रिज़र्व लिस्ट से निकालने का फैसला किया है। हमें लगता है कि स्पीड ब्रेकर के उद्घाटन का महत्वपूर्ण काम हमें विधायकों के लिए अपने रिज़र्व लिस्ट से निकाल देना चाहिए। उसके अलावा हम कहेंगे कि विधायकगण पानी टैंकर का, नाले पर पुलिया का, राशन दुकान का वगैरह का उद्घाटन कर सकते हैं। हम जल्द ही एक कॉन-करेंट लिस्ट जारी करेंगे, जिससे यह क्लीयर हो जाएगा कि कौन-कौन किस-किस चीज का उद्घाटन कर सकता है। 

गोयल जी ने प्रतिनिधिमंडल की तरफ से मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया और सारे विधायक खुश होकर वहाँ से चल दिए। एक विधायक ने फोन निकाला, किसी को कॉल किया और बोला; “जिन्दर, कल दो अच्छी जगह देख कर स्पीड ब्रेकर तोड़ ताकि परसों से काम शुरू हो जाए। और हाँ, वो फोटोग्राफर है न मल्होत्रा, उसको आज शाम को बुला…”

‘बाबा का ढाबा’ वाले कांता प्रसाद ने 6 साल पहले भी की थी सुसाइड की कोशिश: बेटे ने मीडिया को बताया

कुछ माह पहले एक यूट्यूब वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर चारों ओर मशहूर हुआ ‘बाबा का ढाबा’ अब दोबारा चर्चा में है। अब ढाबे के मालिक कांता प्रसाद ने सुसाइड की कोशिश की है। शराब के साथ नींद की गोलियाँ खा लेने के वाले प्रसाद अभी सफदरजंग के ICU में जीवन और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं। इस बीच उनके बेटे ने उन्हें लेकर एक बड़ा खुलासा किया है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, कांता प्रसाद के बेटे आजाद ने बताया कि उनके पिता पिछले कई साल से अवसाद से ग्रसित थे और 6 साल पहले भी उन्होंने सुसाइड करने की कोशिश की थी। आजाद के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों से उनके पिता के पास ऐसे फोन कॉल आते थे जो उन्हें गाली देते थे और यूट्यूबर गौरव से माफी माँगने को कहते थे।

आजाद कहते हैं, “उन्होंने नींद की गोलियाँ खाईं। 6 साल पहले भी उन्हें ऐसे ही नींद की गोलियाँ खा ली थीं। अभी वह वेंटिलेटर पर हैं। उनके अवसाद का कारण यही था कि उनसे माफी माँगने को कहा जा रहा था और उन्हें गालियाँ दी जा रही थी। कई लोगों ने तो उन्हें लेकर यूट्यूब पर भी बोला। लोग उनकी दुकान पर आते थे और ये सब बोलते थे, साथ ही तरह-तरह की बात करते थे। न जाने उन्हें नींद की गोलियाँ कहाँ से मिली। वह पैसों को लेकर भी चिंतित थे।”

आजाद कहते हैं कि उनके पिता का बर्ताव मशहूर होने के कारण नहीं बदला, बल्कि उनके साथ जुड़े लोगों ने उन्हें बरगलाया। अगर केवल गौरव उनसे जुड़ते तो समस्य़ा नहीं थी, लेकिन कई लोगों के जुड़ने से उन्हें वसान के बारे में गलत सूचनाएँ मिलने लगीं।

तनाव के चलते किया सुसाइड अटेम्प्ट

बता दें कि कांता प्रसाद के अस्पताल में एडमिट होने को लेकर दिल्ली पुलिस ने बताया कि गुरुवार को रात 11:15 बजे उन्हें पता चला कि 81 साल के कांता प्रसाद अस्पताल में भर्ती किए गए हैं। उन्होंने शराब के साथ नींद की दवा खा ली थी जिसके चलते वह बेहोश अवस्था में थे।

अस्पताल ने अपनी जाँच रिपोर्ट में बताया है कि कांता प्रसाद ने अल्कोहल के साथ नींद की गोली ली थी और वो अचेत अवस्था में पाए गए थे। इस मामले में एक बयान में कांता प्रसाद के बेटे करन ने कहा है कि उसके पिता ने शराब के साथ नींद की गोली खा ली थी। डीसीपी साउथ ने भी यही जानकारी दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, कांता प्रसाद की पत्नी बादामी देवी ने पुलिस को बताया है कि उनके पति पिछले कुछ दिनों से काफी तनाव में थे। बताया जा रहा है कि अस्पताल में उनकी हालत नाजुक बनी हुई है।

वीडियो से रातों रात फेमस हो गए थे कांता प्रसाद

मालूम हो कि ‘बाबा का ढाबा’ के संचालक कांता प्रसाद का एक वीडियो पिछले साल 2020 में इंटरनेट पर वायरल हुआ था। यूट्यूबर गौरव वासन द्वारा शेयर किए गए वीडियो में वह असहाय दिख रहे थे। इस वीडियो के वायरल होने के बाद उनका ढाबा चल निकला।

दिसंबर 2020 में कांता प्रसाद ने छोड़कर दिल्ली के ही मालवीय नगर में एक शानदार रेस्टोरेंट खोला था। उस दौरान उन्होंने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए लोगों से उनके रेस्टोरेंट पर आने की अपील भी की थी। हालाँकि अब वे रेस्टोरेंट बंद कर फिर से अपने ढाबे पर शिफ्ट हो गए हैं।

फर्जी दस्तावेज, नौकरी, महिलाओं की तस्करी: भारत में घुसपैठियों को लाने वाले 4 रोहिंग्या को UP की ATS ने पकड़ा

उत्तर प्रदेश एटीएस ने अवैध रूप से भारत में बांग्लादेशियों की घुसपैठ कराने के मामले में 4 रोहिंग्या को गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि उन्हें इस गिरोह को लेकर लंबे समय से सूचना मिल रही थी। जिसके बाद उन्होंने निगरानी रखनी शुरू की और उन्हें मेरठ में रहने वाले हाफिज शफीक नाम के व्यक्ति और उसके साथियों का पता चला। पुलिस ने इनकी गिरफ्तारी के बाद इन्हें कोर्ट में पेश कर अपनी रिमांड में ले लिया है। अब पूछताछ की जा रही है।

उत्तर प्रदेश के एडीजी प्रशांत कुमार का कहना है, “हाफिज शफीक मेरठ में एक गिरोह चला रहा था, जो भारत में लाए गए रोहिंग्याओं के आधार, वोटर आईडी, पासपोर्ट आदि बनवाते थे। इन्होंने कई महिला रोहिंग्या की तस्करी कर विदेशों में भी पहुँचाया है। हाफिज शफीक सहित 4 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है।”

प्राप्त जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार हुए चारों आरोपितों की पहचान हाफिज शफीक, अजीजुर्रहमान, मुफीजुर्रहमान और मोहम्मद इस्माइल के तौर पर हुई है। इनमें से अजीरुर्रहमान और मुफीजुर्रहमान म्यांमार के रखाइन प्रांत के हैं। हफीज, म्यांमार के मुशीदम का निवासी है और इस्माइल म्यांमार के टमरू का रहने वाला है। ये लोग अभी मेरठ के अलीपुर में रहते थे। 

18 जून को हफीज और मुफीजुर्रहमान को मेरठ के अलीगढ़ से पकड़ा गया। वहीं अजीजुर्रहमान और मोहम्मद इस्माइल को बुलंदशहर के खुर्जा से एटीएस टीम ने गिरफ्तार किया। इन सभी पर आरोप है कि ये रोहिंग्या और बांग्लादेशियों को भारत की सीमा में अवैध रूप से लाते थे। बाद में उनके फर्जी दस्तावेज तैयार करवाकर उन्हें संस्थानों में नौकरी दिलाते थे। साथ ही उनकी आमदनी के बड़े हिस्से को बतौर वसूली लेते थे। 

पुलिस का कहना है कि ये गिरोह भारत में जिन लोगों की एंट्री करवाता था उनमें से कई विभिन्न प्रकार की आपराधिक एवं देश विरोधी गतिविधियों में संलिप्त हैं। पड़ताल में पता चला है कि इन लोगों ने न केवल घुसपैठियों के फर्जी दस्तावेज बनवाए, बल्कि उनके लिए बाहर की विदेश यात्राएँ भी करवाई। इसके अलावा ये लोग रोहिंग्या महिलाओं की तस्करी में भी शामिल थे। इसके लिए इन्हीं फर्जी दस्तावेजों को प्रयोग में लाया जाता था। 

पुलिस ने इनके पास से 3 आधार कार्ड, 3 मोबाइल फोन, बर्मा का 1 पहचान पत्र, एक फर्जी आधार, 2 पासपोर्ट की फोटोकॉपी, 1 लैपटॉप, 1 पेनड्राइव, कुछ विदेशी मुद्रा और अन्य रोहिंग्या प्रवासियों के लिए बनवाए गए भारतीय पासपोर्टों में वोटर आईडी व भारतीय जन्म प्रमाण पत्र भी बरामद किए गए है। चारों आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद इन्हें कोर्ट में पेश करके रिमांड में भेज दिया गया है। पता लगाया जा रहा है कि इनके साथ और कौन-कौन इस काम में संलिप्त हैं।

पति बोला – ‘दिल चीर के देख तेरा ही नाम होगा’, पत्नी चाकू लेकर पीछे पड़ गई, जान बचा सड़क पर भाग रहा आदमी – Viral Video

नब्बे के दशक में आई फिल्म ‘रंग’ का गीत ‘दिल चीर के देख तेरा ही नाम होगा’ कभी आशिकों का कलमा होता था। अपनी मोहब्बत को प्रदर्शित करने के लिए अक्सर लड़के लड़कियों को देखकर यह गीत गाया करते थे। एक शादीशुदा व्यक्ति जब यह गीत गाए और वो भी अपनी पत्नी के लिए तो उसे पत्नी की ओर से तारीफ उम्मीद होती है।

लेकिन, आगरा के एक व्यक्ति को अपनी पत्नी के लिए ‘दिल चीर के देख तेरा ही नाम होगा’ गाना इतना महँगा पड़ गया कि उसके जान के लाले पड़ गए। पति अपनी जान बचाता सड़कों पर भागता फिर रहा है। उसकी बीवी चाकू लेकर उसके पीछे पड़ी है और उसका दिल चीर कर देखना चाहती है कि वास्तव में वह उससे कितना प्यार करता है।

दरअसल, ट्विटर पर एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें एक आदमी हाइवे पर लगातार भागा जा रहा है। आदमी की दाढ़ी बढ़ी हुई है और भागने के कारण वह हाँफ रहा है। हाँफते हुए ही वह अपनी व्यथा सुना रहा है और लोगों से अपील कर रहा है कि उसे उसकी पत्नी से बचाया जाए।

भागता हुआ व्यक्ति कह रहा है कि वह अपनी बीवी के डर से आगरा से भागते हुए आ रहा है और पत्नी उसका पीछा कर रही है। वह लोगों से बचाने की भी अपील कर रहा है। पत्नी से बचने के लिए भाग रहा पति कौन है, अभी इसका पता नहीं चल सका है। 

विकास पांडेय नाम के व्यक्ति ने अपने ट्विटर हैंडल पर 57 सेकेंड का यह वीडियो ट्वीट किया है। इस वीडियो में एक दाढ़ी वाला व्यक्ति हाईवे पर भागता दिख रहा है। वह व्यक्ति कह रहा है, “मुझे बचा लीजिए दोस्तों। मेरी बीवी मेरे पीछे पड़ी है। मेरी जान के लाले पड़े हुए हैं। मैं भाग आया हूँ आगरा से बाहर। हाईवे पर भाग रहा हूँ दोस्तों।”

वायरल वीडियो में वह व्यक्ति आगे बताता है, “मेरी बीवी मेरे पीछे पड़ी है। कल घर पर ऐसे ही बैठे हुए थे। मेरी बीवी ने मजाक में पूछ दिया कि मुझे कितना प्यार करते हो? मैं समझ नहीं पाया। मैंने बोल दिया कि ‘दिल चीर कर देख तेरा ही नाम होगा’। इसके बाद से वह चाकू लेकर पीछे पड़ी है। वह दिल चीरकर देखना चाहती है कि मैं उससे कितना प्यार करता हूँ। मुझे बचा लीजिए दोस्तों।” 

पत्नी से बचकर भाग रहे इस पति का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। इसे देखने वाले लोगों की संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है। लोग इस वीडियो को देखकर मुस्कुरा रहे हैं और लाइक व शेयर भी कर हैं।

कुछ लोगों का कहना है कि यह फनी वीडियो है। इसे एक स्थान पर खड़े होकर ही कॉमेडी के लिए बनाया गया है। जबकि कुछ लोग वीडियो में दिख रहे व्यक्ति के चेहरे के भाव देखकर उसके पीड़ित होने का अंदाजा लगा रहे हैं।

अभी तक वीडियो में दिख रहे व्यक्ति के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है। पुलिस तक भी वीडियो पहुँचा है। आगरा पुलिस का कहना है कि भाग रहा व्यक्ति आगरा का नाम ले रहा है। मगर, वह वीडियो और व्यक्ति कहाँ का है? अभी तक यह स्पष्ट नहीं है। वीडियो के आधार पर जानकारी कराई जा रही है।

J&K पर अमित शाह की अध्यक्षता में 2 हाई लेवल मीटिंग: LG मनोज सिन्हा, NSA डोभाल भी हुए शामिल

जम्मू-कश्मीर को लेकर शुक्रवार (18 जून 2021) को केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में दो उच्च स्तरीय बैठकें हुई।एक बैठक में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा भी शामिल हुए। दूसरी बैठक में शामिल होने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल और जम्मू-कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह भी गृह मंत्रालय पहुँचे।

पिछले कुछ दिनों से जम्मू-कश्मीर को लेकर हलचल बढ़ी थी। गृह मंत्री की अध्यक्षता में हुई मीटिंग में भाग लेने के लिए वे आज दोपहर दिल्ली पहुँचे। इस मीटिंग में जम्मू-कश्मीर में हुए विकास कार्यों को लेकर चर्चा हुई। गृह मंत्री शाह ने कश्मीर में 76% टीकाकरण होने पर उपराज्यपाल को बधाई दी और अधिकारियों को यह निर्देशित किया कि कश्मीर के लोगों के सर्वांगीण कल्याण के लिए मोदी सरकार की योजनाएँ जन-जन तक पहुँचाई जाए।

गृह मंत्री ने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर में रह रहे शरणार्थियों को शरणार्थी योजनाओं का लाभ मिले तथा केंद्र शासित प्रदेश में कृषि आधारित उद्योगों की स्थापना हो जिससे यहाँ के लोगों को पर्याप्त रोजगार मिल सके।

इसके अलावा न्यूज एजेंसी एएनआई के हवाले से यह भी खबर मिली कि गृह मंत्री शाह की अध्यक्षता वाली एक दूसरी हाई लेवल मीटिंग में शामिल होने के लिए एनएसए अजित डोभाल और अन्य उच्च अधिकारी भी केन्द्रीय गृह मंत्रालय पहुँचे। मीटिंग में शामिल होने डोभाल के अलावा जम्मू-कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह, गृह सचिव अजय भल्ला, इंटेलिजेंस ब्यूरो के डायरेक्टर अरविन्द कुमार, रॉ के चीफ समंत कुमार गोयल और सीआरपीएफ के डायरेक्टर जनरल कुलदीप सिंह भी गृह मंत्रालय पहुँचे।

हालाँकि खबर लिखे जाने तक यह जानकारी नहीं मिल सकी थी कि यह हाई लेवल मीटिंग किसलिए बुलाई गई है लेकिन यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि इस मीटिंग में आगामी समय में अमरनाथ यात्रा प्रारंभ करने की तैयारियों, जम्मू-कश्मीर की वर्तमान सुरक्षा व्यवस्थाओं और जम्मू-कश्मीर में ही कुछ नए प्रोजेक्ट के सिलसिले में भी चर्चा हो सकती है।

वर्तमान में जम्मू-कश्मीर में कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में भी भारी गिरावट देखने को मिली है और केंद्र शासित प्रदेश में टीकाकरण कार्यक्रम भी तेजी से चल रहा है, ऐसे में हो सकता है कि यात्रा शुरू करने पर विचार किया जाए। अमरनाथ यात्रा हर साल जून के आखिर में शुरू होती है और संभव है कि इस मीटिंग में गृह मंत्री इसके संबंध में कश्मीर में सुरक्षा-व्यवस्थाओं का जायजा लें।