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पति बोला – ‘दिल चीर के देख तेरा ही नाम होगा’, पत्नी चाकू लेकर पीछे पड़ गई, जान बचा सड़क पर भाग रहा आदमी – Viral Video

नब्बे के दशक में आई फिल्म ‘रंग’ का गीत ‘दिल चीर के देख तेरा ही नाम होगा’ कभी आशिकों का कलमा होता था। अपनी मोहब्बत को प्रदर्शित करने के लिए अक्सर लड़के लड़कियों को देखकर यह गीत गाया करते थे। एक शादीशुदा व्यक्ति जब यह गीत गाए और वो भी अपनी पत्नी के लिए तो उसे पत्नी की ओर से तारीफ उम्मीद होती है।

लेकिन, आगरा के एक व्यक्ति को अपनी पत्नी के लिए ‘दिल चीर के देख तेरा ही नाम होगा’ गाना इतना महँगा पड़ गया कि उसके जान के लाले पड़ गए। पति अपनी जान बचाता सड़कों पर भागता फिर रहा है। उसकी बीवी चाकू लेकर उसके पीछे पड़ी है और उसका दिल चीर कर देखना चाहती है कि वास्तव में वह उससे कितना प्यार करता है।

दरअसल, ट्विटर पर एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें एक आदमी हाइवे पर लगातार भागा जा रहा है। आदमी की दाढ़ी बढ़ी हुई है और भागने के कारण वह हाँफ रहा है। हाँफते हुए ही वह अपनी व्यथा सुना रहा है और लोगों से अपील कर रहा है कि उसे उसकी पत्नी से बचाया जाए।

भागता हुआ व्यक्ति कह रहा है कि वह अपनी बीवी के डर से आगरा से भागते हुए आ रहा है और पत्नी उसका पीछा कर रही है। वह लोगों से बचाने की भी अपील कर रहा है। पत्नी से बचने के लिए भाग रहा पति कौन है, अभी इसका पता नहीं चल सका है। 

विकास पांडेय नाम के व्यक्ति ने अपने ट्विटर हैंडल पर 57 सेकेंड का यह वीडियो ट्वीट किया है। इस वीडियो में एक दाढ़ी वाला व्यक्ति हाईवे पर भागता दिख रहा है। वह व्यक्ति कह रहा है, “मुझे बचा लीजिए दोस्तों। मेरी बीवी मेरे पीछे पड़ी है। मेरी जान के लाले पड़े हुए हैं। मैं भाग आया हूँ आगरा से बाहर। हाईवे पर भाग रहा हूँ दोस्तों।”

वायरल वीडियो में वह व्यक्ति आगे बताता है, “मेरी बीवी मेरे पीछे पड़ी है। कल घर पर ऐसे ही बैठे हुए थे। मेरी बीवी ने मजाक में पूछ दिया कि मुझे कितना प्यार करते हो? मैं समझ नहीं पाया। मैंने बोल दिया कि ‘दिल चीर कर देख तेरा ही नाम होगा’। इसके बाद से वह चाकू लेकर पीछे पड़ी है। वह दिल चीरकर देखना चाहती है कि मैं उससे कितना प्यार करता हूँ। मुझे बचा लीजिए दोस्तों।” 

पत्नी से बचकर भाग रहे इस पति का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। इसे देखने वाले लोगों की संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है। लोग इस वीडियो को देखकर मुस्कुरा रहे हैं और लाइक व शेयर भी कर हैं।

कुछ लोगों का कहना है कि यह फनी वीडियो है। इसे एक स्थान पर खड़े होकर ही कॉमेडी के लिए बनाया गया है। जबकि कुछ लोग वीडियो में दिख रहे व्यक्ति के चेहरे के भाव देखकर उसके पीड़ित होने का अंदाजा लगा रहे हैं।

अभी तक वीडियो में दिख रहे व्यक्ति के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है। पुलिस तक भी वीडियो पहुँचा है। आगरा पुलिस का कहना है कि भाग रहा व्यक्ति आगरा का नाम ले रहा है। मगर, वह वीडियो और व्यक्ति कहाँ का है? अभी तक यह स्पष्ट नहीं है। वीडियो के आधार पर जानकारी कराई जा रही है।

J&K पर अमित शाह की अध्यक्षता में 2 हाई लेवल मीटिंग: LG मनोज सिन्हा, NSA डोभाल भी हुए शामिल

जम्मू-कश्मीर को लेकर शुक्रवार (18 जून 2021) को केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में दो उच्च स्तरीय बैठकें हुई।एक बैठक में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा भी शामिल हुए। दूसरी बैठक में शामिल होने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल और जम्मू-कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह भी गृह मंत्रालय पहुँचे।

पिछले कुछ दिनों से जम्मू-कश्मीर को लेकर हलचल बढ़ी थी। गृह मंत्री की अध्यक्षता में हुई मीटिंग में भाग लेने के लिए वे आज दोपहर दिल्ली पहुँचे। इस मीटिंग में जम्मू-कश्मीर में हुए विकास कार्यों को लेकर चर्चा हुई। गृह मंत्री शाह ने कश्मीर में 76% टीकाकरण होने पर उपराज्यपाल को बधाई दी और अधिकारियों को यह निर्देशित किया कि कश्मीर के लोगों के सर्वांगीण कल्याण के लिए मोदी सरकार की योजनाएँ जन-जन तक पहुँचाई जाए।

गृह मंत्री ने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर में रह रहे शरणार्थियों को शरणार्थी योजनाओं का लाभ मिले तथा केंद्र शासित प्रदेश में कृषि आधारित उद्योगों की स्थापना हो जिससे यहाँ के लोगों को पर्याप्त रोजगार मिल सके।

इसके अलावा न्यूज एजेंसी एएनआई के हवाले से यह भी खबर मिली कि गृह मंत्री शाह की अध्यक्षता वाली एक दूसरी हाई लेवल मीटिंग में शामिल होने के लिए एनएसए अजित डोभाल और अन्य उच्च अधिकारी भी केन्द्रीय गृह मंत्रालय पहुँचे। मीटिंग में शामिल होने डोभाल के अलावा जम्मू-कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह, गृह सचिव अजय भल्ला, इंटेलिजेंस ब्यूरो के डायरेक्टर अरविन्द कुमार, रॉ के चीफ समंत कुमार गोयल और सीआरपीएफ के डायरेक्टर जनरल कुलदीप सिंह भी गृह मंत्रालय पहुँचे।

हालाँकि खबर लिखे जाने तक यह जानकारी नहीं मिल सकी थी कि यह हाई लेवल मीटिंग किसलिए बुलाई गई है लेकिन यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि इस मीटिंग में आगामी समय में अमरनाथ यात्रा प्रारंभ करने की तैयारियों, जम्मू-कश्मीर की वर्तमान सुरक्षा व्यवस्थाओं और जम्मू-कश्मीर में ही कुछ नए प्रोजेक्ट के सिलसिले में भी चर्चा हो सकती है।

वर्तमान में जम्मू-कश्मीर में कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में भी भारी गिरावट देखने को मिली है और केंद्र शासित प्रदेश में टीकाकरण कार्यक्रम भी तेजी से चल रहा है, ऐसे में हो सकता है कि यात्रा शुरू करने पर विचार किया जाए। अमरनाथ यात्रा हर साल जून के आखिर में शुरू होती है और संभव है कि इस मीटिंग में गृह मंत्री इसके संबंध में कश्मीर में सुरक्षा-व्यवस्थाओं का जायजा लें।

तालिबान हिंसा के लिए जिम्मेदार नहीं: पाक विदेश मंत्री कुरैशी ने कहा – अफगानिस्तान से भारत फैला रहा आतंक

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने अफगानिस्तान में हो रही हिंसा पर तालिबान को क्लीनचिट देने की कोशिश की है और साथ ही भारत पर यह आरोप लगा दिया कि उसके द्वारा अफगनिस्तान की जमीन से आतंकी गतिविधियाँ चलाई जा रही हैं।

कुरैशी ने अफगानिस्तान के टोलो न्यूज से चर्च करते हुए यह बात कही। न्यूज चैनल ने इस चर्चा का एक अंश ट्विटर पर पोस्ट किया। चर्चा के दौरान जब कुरैशी से अफगानिस्तान में हो रही हिंसाओं के संदर्भ में पूछा गया तो उन्होंने उल्टा यह प्रश्न कर दिया कि इन हिंसाओं के लिए कौन जिम्मेदार है? उन्होंने रिपोर्टर से यह भी कहा कि यदि आप इन हिंसाओं के लिए एक बार फिर तालिबान को जिम्मेदार ठहराना चाहते हैं तो यह एक प्रकार से अतिशयोक्ति होगी। कुरैशी के अनुसार वहाँ कई दूसरे तत्व भी हैं, जो हिंसा फैला रहे हैं।

भारत के बारे में कुरैशी ने कहा, “अफगानिस्तान में भारत की मौजूदगी हद से ज्यादा है। अफगानिस्तान एक संप्रभु देश है, जिसके अपने संबंध हैं, व्यापार है। यहाँ तक सही है लेकिन भारत, अफगानिस्तान की धरती का उपयोग हमारे (पाकिस्तान) खिलाफ कर रहा है।“ यह पूछने पर कि भारत किस प्रकार अफगानिस्तान का उपयोग कर रहा है तो कुरैशी ने आरोप लगाया कि भारत, अफगानिस्तान की जमीन से आतंकी गतिविधियाँ चला रहा है।

हालाँकि पाकिस्तान के विदेश मंत्री वही भाषा बोल रहे थे, जो अक्सर उनके मुल्क की सरकारी और सुरक्षा संस्थाएँ कहती रहती हैं। उनके द्वारा अक्सर यह भ्रम फैलाया जाता है कि अफगानिस्तान में भारत के दर्जन भर दूतावास हैं जबकि वास्तविकता में वहाँ भारत के चार ही दूतावास हैं जो हेरात, जलालाबाद, कांधार और मजार-ए-शरीफ में स्थित हैं। हालाँकि हेरात और जलालाबाद के दूतावास Covid-19 के कारण बंद हो गए थे, जो अभी नहीं खुले हैं।

कुरैशी के बयान पर उनके अपने ही मुल्क के पूर्व सांसद और पश्तून एक्टिविस्ट अफरसियाब खट्टक ने कहा कि तालिबान को विदेश मंत्री की जरूरत कभी नहीं होगी क्योंकि उनके पास कुरैशी के रूप में एक विदेश मंत्री है। अफगानिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हमदुल्लाह मोहिब ने कहा कि पाकिस्तान के विदेश मंत्री बेखबर, अज्ञानी या तालिबान के सहयोगी हैं।

अफगानिस्तान में अमेरिका की वापसी के बाद से ही एक बार फिर हिंसा बढ़ गई है। जैसे-जैसे अमेरिकी फौज अफगानिस्तान छोड़कर जा रही है, तालिबान और अफगानी सुरक्षा बलों के बीच संघर्ष भी बढ़ गया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी का बयान ऐसे समय आया है, जब खुद अफगानिस्तान के सुरक्षा अधिकारी यह बता रहे हैं कि अफगानिस्तान में चल रहे संघर्ष में मात्र दो दिनों, 3 और 4 जून को ही 119 लोग मारे गए हैं, जिनमें 102 तो अफगानी सुरक्षाकर्मी हैं।

हालाँकि इस दौरान अफगानी सेना ने भी कड़ा पलटवार किया है। तालिबान के आँकड़े अपने आतंकियों की मौत के बारे में भले ही कुछ भी कहते हों लेकिन अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय की जानकारी के अनुसार अफगानी सुरक्षा बलों द्वारा चलाए गए आतंक विरोधी ऑपरेशन में 3 जून को 183 तालिबानी कट्टरपंथी और 4 जून को 181 तालिबानी कट्टरपंथी मारे गए। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 24 से 27 प्रांतों में रोजाना इस तरह के संघर्ष हो रहे हैं।  

ब्राह्मण होने के कारण जलाया गया ग्राम कसार का मुकेश? पत्नी ने कहा- उनको सजा नहीं हुई तो वहीं पेट्रोल छिड़ककर मरूँगी

हरियाणा के झज्जर जिले के बहादुरगढ़ तहसील का ग्राम कसार ब्राह्मण बहुल है। इसी गाँव का रहने वाला था 42 साल का मुकेश। उसे जिंदा जलाने का आरोप कथित किसान प्रदर्शनकारियों पर है। दिल्ली से जब आप हिसार की तरफ बढ़ते हैं तो टिकरी बॉर्डर के आगे सड़क के एक तरफ इन्हीं प्रदर्शनकारियों का कब्जा है। इनके टेंट सड़क पर ही बने हैं। इसी सड़क (जिसे बाइपास कहते हैं) से सटा है कसार।

बाइपास से एक सड़क अलग होती है जो कसार गाँव को जाती है। इस सड़क के दोनों ओर खेत हैं। पास में ही ओमेक्स की एक टाउनशिप परियोजना का काम चल रहा है। गाँव की शुरुआत में ही व्यायामशाला है। तालाब हैं। एक शानदार मैदान भी। इसके बाद शुरू होती है बस्ती, जिसकी एक गली में 70 साल के जगदीश चंद्र का घर है। जगदीश चंद्र, मुकेश के पिता हैं। इस गाँव में शुक्रवार (18 जून 2021) को जब हम पहुँचे तो सन्नाटा पसरा था। मुकेश के साथ हुई घटना के कारण ग्रामीण सहमे हुए थे। जो थोड़ी बहुत चहल-पहल थी वह एक-एक कर आ रहे कुछ मीडियाकर्मियों की वजह से थी।

इस घटना के बाबत हमने जब जगदीश चंद्र से बात करने की कोशिश की तो उन्होंने कैमरे के सामने आने से मना कर दिया। फूट- फूटकर रोते हुए इस वृद्ध पिता का कहना था कि अब मुकेश के परिवार को कौन देखेगा। उन्होंने बताया कि मुकेश अपने पीछे पत्नी रेणु और 9 साल के बेटे राहुल को छोड़ गया है। मुकेश तीन भाइयों में सबसे बड़ा था। बकौल जगदीश चंद्र, उनके परिवार के पास खेती नहीं है। उनके बेटे अलग-अलग काम-धंधा कर अपना घर चलाते हैं। मुकेश ड्राइवर था। लॉकडाउन की वजह से अभी उसका काम नहीं चल रहा था। वे कहते हैं, “मैं बस यही चाहता हूँ कि जो दोषी हैं उनको सजा मिले और मुकेश के परिवार की चिंता सरकार करे।”

‘आंदोलन वालों ने जलाया’

शकुंतला ने बताया कि बुधवार (16 जून 2021) की शाम मुकेश घर में खाना बनाने के लिए कहकर निकला था। बाद में उन्हें पता चला कि उनके बेटे को शराब पिलाकर कुछ लोगों ने जिंदा जला दिया। जब हमने उनसे जलाने वाले लोगों के बारे में पूछा तो उनका जवाब था: ये आंदोलन वाले। मुकेश उधर करने क्या गया था, इसके जवाब में उन्होंने कहा कि टहलने के लिए गया था। ध्यान देने वाली बात यह है कि कसार के लोगों के खेत उस जगह से सटे हैं, जिधर किसानों के टेंट हैं। इस गाँव के लोगों को दिल्ली, हिसार, बहादुरगढ़ कहीं भी जाना हो तो उन्हें बाइपास पर जाना होगा, जिसके एक हिस्से पर प्रदर्शनकारियों ने महीनों से कब्जा जमा रखा है।

‘पेट्रोल छिड़कर माचिस लगा दिए, बहुत बुरी तरह जला दिए’

मुकेश की पत्नी रेणु ने बताया कि उन्हें इस घटना के बारे में उनके देवर ने सबसे पहले बताया। वह कहती है कि वे 5 बजे घर से निकले तो सब कुछ ठीक था। कोई लड़ाई-झगड़ा कुछ नहीं था। रेणु ने बताया, “उन्होंने कहा था खाना बनाकर रखना मैं जल्दी आ जाऊँगा। मैंने कहा कि अपना फोन लेकर जाइए तो कहा कि नहीं, मैं जल्दी आ जाऊँगा।” आगे वह कहती हैं, “गए वहाँ पर। बैठाए होंगे वे लोग। दारू पिलाए होंगे। पेट्रोल छिड़कर माचिस लगा दिए। बहुत बुरी तरह जला दिए उसको। मैं किसके सहारे जिऊँगी। मेरा कौन है। एक छोटा सा बच्चा है, उसका भी अब कौन सहारा रहा।”

हमने जब रेणु से पूछा कि क्या मुकेश पहले भी शराब पीता था, तो उन्होंने कहा, “पीते थे। लेकिन इतना नहीं कि कभी खुद को नुकसान पहुँचाए।” फिर वह कहती हैं, “ये जो लोग पड़े हैं, वही ये काम किए हैं। ये लोग किसान नहीं हैं। ये लोग अपराधी हैं। दारू पिए रहते हैं। होश में नहीं रहते हैं। एक साल हो गया ये लोग जा नहीं रहे यहाँ से। गदर मचा रखा है यहाँ पर।”

इससे पहले कभी प्रदर्शनकारियों से किसी तरह का विवाद होने को लेकर पूछे जाने पर रेणु का जवाब था कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। उनका कहना है, “जो ये किया है सरकार उसको सजा दिलाए। मेरा तो जो गया वो गया, उनलोगों को सजा मिलनी चाहिए। सजा नहीं मिली तो मैं वहीं पर जाकर पेट्रोल छिड़ककर मरूँगी। उनके बीच में जाऊँगी। किसी के काबू में नहीं आऊँगी। मैं छोड़ूँगी नहीं। आज मेरे आदमी के साथ हुआ, कल किसी और के साथ होगा। कब तक बर्दाशत करेगा कोई इनको।”

मुकेश के छोटे भाई मंजीत का कहना है कि उनके गाँव का एक आदमी बाइपास के पास स्थित पेट्रोल पंप पर नौकरी करता है। उसने ही सबसे पहले बुधवार की रात करीब 9 बजे उनलोगों को इस घटना की सूचना दी थी। मंजीत ने बताया कि वे लोग जब मौके पर पहुँचे तो मुकेश जला हुआ था। उसे ये लोग पहले सिविल हॉस्पिटल बहादुरगढ़ और फिर एक निजी अस्पताल लेकर गए, जहाँ मुकेश की मौत हो गई। मंजीत ने बताया, “सिविल हॉस्प्टिल में हमने भाई से इस घटना के बारे में पूछा। उन्होंने बताया कि तीन-चार आदमी थे। उन्होंने उसे रोक लिया और कहा कि ‘इकट्ठा’ ही घर भेज देंगे।”

बाइपास के एक हिस्से पर प्रदर्शनकारियों ने इसी तरह कब्जा जमा रखा है

‘ये जो बीमारी रोड पर पड़ी है प्रशासन उसको हटाए’

मंजीत के अनुसार जो लोग रोड पर जमे हैं, वे किसान नहीं हैं। वे पूछते हैं कि किसान हाथ में हल लेगा या तलवार? उनके अनुसार मुकेश को ‘शहीद’ होने के नाम पर बहलाया-फुसलाया गया होगा। उन्होंने कहा, “इस घटना के बाद गाँव का बच्चा-बच्चा गुस्से में है। इनके कारण शाम के 7 बजे के बाद रोड पर चलना मुश्किल हो जाता है। प्रशासन को कार्रवाई के लिए एक सप्ताह का समय दिश गया है। यदि कुछ नहीं हुआ तो फिर आर-पार की लड़ाई होगी।” मंजीत के अनुसार इस मामले में अब तक प्रशासन की भूमिका से वे लोग संतुष्ट हैं। साथ ही वे कहते हैं कि वे लोग इस मामले को जाति-धर्म से नहीं जोड़ना चाहते। वे बस इतना चाहते हैं कि दोषियों को सजा मिले। वे कहते हैं, “ये जो बीमारी रोड पर पड़ी है, प्रशासन उसको हटाए नहीं तो कई बेगुनाह मारे जाएँगे।”

इस गाँव के सरपंच हैं टोनी कुमार। उनको भी बुधवार की रात 9 बजे के करीब ही इस घटना की सूचना मिली थी। उन्होंने बताया, “जब मैं मौके पर पहुँचा तो मुकेश बुरी तरह जल चुका था। उसे जब हम सिविल हॉस्पिटल बहादुरगढ़ लेकर जा रहे थे तो उसने बताया कि उसके ऊपर एक किसान ने तेल गिरा दिया और एक ने माचिस लगा दी। उसने इनके नाम भी बताए। कृष्ण, प्रदीप, संदीप।” उनके अनुसार मुकेश का सिविल हॉस्पिटल में दिया गया बयान डॉक्टर के पास भी है।

राकेश टिकैत ने लगाई जाति की आग?

सरपंच आगे बताते हैं, “मुकेश को हॉस्पिटल पहुँचाकर मैं किसानों के टेंट में आया और आवाज लगाई कृष्ण। एक आदमी बाहर आया जो नशे में धुत था। उससे जब कहा कि मुकेश ने तुम्हारा नाम लिया है तो उसने जातिसूचक शब्द का इस्तेमाल किया।” इस घटना के बाद टोनी कुमार ने एक फेसबुक पोस्ट लिखी थी और दावा किया था कि मुकेश को ‘ब्राह्मण’ होने के कारण निशाना बनाया गया। इस संबंध में पूछे जाने पर वे कहते हैं कि मेरे पास कृष्ण का वीडियो है, जिसमें उसने यह बात कही है। वे यह भी दावा करते हैं कि इस सबके पीछे भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत हैं। टोनी कुमार ने कहा कि टिकैत ने ही सबसे पहले कहा था कि ब्राह्मणों से हिसाब लिया जाएगा। जब उनके नेता जहर भरेंगे तो नीचे के वही काम करेंगे। वे इसके पीछे साजिश की आशंका जताते हुए कहते हैं कि इस घटना को सरकार को बदनाम करने के लिए अंजाम दिया गया।

‘ये किसान नहीं, कसाई हैं’

टोनी कुमार के अनुसार इस मामले में प्रशासन की भूमिका सही है, लेकिन कई बार शिकायत के बावजूद सड़क पर कब्जा जमाए बैठे प्रदर्शनकारियों को नहीं हटाया गया है। इससे होने वाली परेशानियों को लेकर वे बकायदा शिकायत भी कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि इस घटना के बाद स्थानीय विधायक नरेश कौशिक गाँव में पहुँचे थे। साथ ही उन्होंने कहा कि हम नहीं चाहते कि कोई किसान नेता हमारे गाँव में आए। टोनी कुमार ने बताया, “ये किसान नहीं, कसाई हैं। इस मामले में पुलिस-प्रशासन ने पूरी मदद की है। हमने झुग्गियाँ हटाने के लिए प्रशासन को एक सप्ताह का समय दिया है। एक हफ्ते में झुग्गियाँ नहीं हटीं तो आर-पार की लड़ाई होगी।”

बाइपास से कटकर यही सड़क कसार गाँव को जाती है

‘किसान आंदोलन’ में कसार गाँव

महीनों से चल रहे कथित किसान आंदोलन से कसार गाँव के लोग किस तरह जुड़े हैं? इस संबंध में पड़ताल करने पर सरपंच टोनी कुमार ने बताया कि ग्राम खाप से जो जिम्मेदारी मिलती है उसको वे लोग पूरा करते हैं। इसमें मुख्य काम गाँव से चंदा जुटाकर ‘आंदोलनकारियों’ को देना है। मुकेश के भाई संजीत ने भी इनके लिए गाँव में चंदा जुटाए जाने की पुष्टि की। लेकिन आंदोलन में सक्रिय भागीदारी को लेकर यहाँ के लोग इनकार करते हैं।

ग्रामीणों के अनुसार आते-जाते कुछ लोगों से दुआ-सलाम का उनका रिश्ता बन गया है। टोनी कुमार के अनुसार कुछ प्रदर्शनकारी गाँव में आते रहते हैं। उन्होंने बताया कि टिकैत के भड़काउ बयान के बाद भी उनलोगों ने चंदा दिया है। वे कहते हैं, “हम माहौल खराब नहीं करना चाहते। हम भाईचारा बनाए रखना चाहते हैं। लेकिन वे लोग माहौल खराब करने में लगे हैं।”

हुड़दंग, छेड़खानी के भी आरोप

आंदोलनकारियों द्वारा शाम को नशे में धुत होकर यहाँ के लोगों को परेशान करने की शिकायत आम है। प्रशासन को दी शिकायत (जिसकी कॉपी ऑपइंडिया के पास है) में इन्होंने कहा है, “पिछले 6-7 महीनों से गाँव कसार के साथ लगती सड़क पर कथित किसानों ने गदर मचा रखा है। ये गाँव में आकर शराब पीकर हुड़दंग करते हैं। ट्रैक्टर पर घूमते हैं। महिलाओं से छेड़खानी करते हैं। इन्हें तुरंत प्रभाव से गाँव कसार की परिधि से हटाया जाए।”

क्या मुकेश ने आत्महत्या की?

किसान एकता मोर्चा ने एक अस्पष्ट वीडियो जारी कर दावा किया है कि मुकेश गृ​हक्लेश से परेशान था और उसने आत्महत्या की। इस दावे को मुकेश के परिजन और कसार के लोग सिरे से नकार देते हैं। सबका एक ही सवाल है कि जब बुधवार की रात को घटना हुई तो इतनी देर बाद क्यों वीडियो जारी किया गया? उनका कहना है कि उनके पास मुकेश का अंतिम समय का वीडियो बयान है, जो स्पष्ट करता है उसके साथ क्या हुआ था।

सरपंच टोनी कुमार कहते हैं कि यदि वह​ गृहक्लेश से परेशान था तो उनके ही टेंट में आग लगाने क्यों चला गया? जब वह पैसे लेकर घर से निकला नहीं था तो शराब और पेट्रोल कहाँ से खरीद ली? मुकेश के भाई संजीत का भी कहना है कि उनके पास भाई के बयान का वीडियो है, जबकि किसान संगठनों ने सफाई में जो वीडियो जारी किया है, वह असली नहीं है। मुकेश की पत्नी रेणु का दावा है कि उसमें आवाज भी उनके पति की नहीं है। वह कहती हैं, “दस साल से साथ में थी। उनकी आवाज मैं नहीं पहचानूँगी?” शकुंतला का भी दावा है कि किसान संगठनों द्वारा जारी वीडियो में आवाज उनके बेटे की नहीं है।

गौरतलब है कि कथित किसान आंदोलन से रेप जैसी घृणित घटना भी सामने आ चुकी है। प्रदर्शनकारियों के हुड़दंग को लेकर भी शिकायतें आती रहती है। 26 जनवरी को जो कुछ हुआ, वह पूरे देश ने देखा है। लिहाजा यह केवल एक मुकेश या एक कसार गाँव का भोगा ही नहीं लगता। यह उन तमाम गाँवों की पीड़ा लगती है जो सड़क के किनारे कब्जा जमाए बैठे प्रदर्शनकारियों की दबंगई से पीड़ित हैं। क्या पता कब किसके गाँव का मुकेश इस साजिश में जल जाए।

वुहान में मच्छरों पर प्रयोग, दिया जाता था वियाग्रा… गलती से निकल भागे हजारों: Fact Check

कोविड महामारी के बीच फेक न्यूज फैलाने वालों का कारोबार चरम पर है। हाल में एक खबर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई, जिसमें दावा किया गया कि वुहान की एक हाई-सिक्योरिटी लैब से ऐसे हजारों मच्छर भाग गए हैं, जिन्हें वियाग्रा का इंजेक्शन लगाया गया था।

अब खबर कितनी सच्ची है, इसका पता इसी बात से चल जाता है कि दावे को साबित करने के लिए एक ऐसी वेबसाइट का लिंक शेयर किया जा रहा है, जो अपने व्यंग्य लेखों के लिए जानी जाती है। जिसके डिस्क्लेमर में साफ लिखा है कि साइट पर व्यंग्य पब्लिश होते हैं। 

शेयर किए जा रहे आर्टिकल का शीर्षक था-  “वुहान: उच्च सुरक्षा प्रयोगशाला से वियाग्रा वाली वैक्सीन लगे हजारों मच्छर भाग निकले।” ये आर्टिकल साइट पर 2 जून को प्रकाशित हुआ था। 

व्यंग्य साइट ने अपने इस लेख में लिखा था कि वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी ने कल सुरक्षा उल्लंघन की घोषणा करते हुए दावा किया कि आनुवांशिक रूप से संशोधित मच्छर आबादी के लिए हानिरहित थे।

अब सोशल मीडिया पर कई यूजर इस खबर को अलग-अलग तरह से शेयर करने लगे। जबकि असल में ऐसी कोई घटना हुई ही नहीं है। दरअसल पिछले दिनों कोरोना संक्रमण के पीछे वुहान का नाम आने के बाद अब लोग वुहान से नाम पर फैली हर खबर को हकीकत मान ले रहे हैं। लोगों का पूछना है कि आखिर दुनिया की हर मुसीबत चीन के वुहान शहर से ही क्यों शुरू होती है। कुछ कह रहे हैं कि ये चीन जो न करे, वो सब थोड़ा है।

उल्लेखनीय है कि World News Daily Report के पेज के नीचे एक डिस्क्लेमर दिया गया है, जो साबित करता है कि खबर झूठी है। इसमें लिखा है, “इस वेबसाइट में लिखे सभी लेख काल्पनिक व्यंग्य हैं। यहाँ तक कि लेखों में जिन नामों का जिक्र है, वे भी पूरी तरह से काल्पनिक लोगों के हैं। अगर किसी जीवित या मृत व्यक्ति से इनकी समानता होती है, तो इसे मात्र एक करिश्मा कहा जाएगा।”

साइट के डिस्क्लेमर में लिखी गई बात, फिर भी लोग सच मान लेते हैं

‘…इस्तमाल नहीं करो तो जंग लग जाता है’ – रात बिताने, साथ सोने से मना करने पर फिल्ममेकर ने नीना गुप्ता को कहा था

बॉलीवुड एक्ट्रेस नीना गुप्ता की हाल ही में ऑटोबायोग्राफी रिलीज हुई है। इसमें उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ी कुछ घटनों के बारे में खुलकर लिखा है। इसमें उन्होंने एक फिल्ममेकर के साथ घटी घटना का भी जिक्र किया है, जिसमें उन्हें अश्लील चीजें कही गई थीं।

नीना गुप्ता की ऑटोबायोग्राफी को इस हफ्ते के शुरुआत में एक्ट्रेस करीना कपूर द्वारा लॉन्च किया गया। यह ऑटोबायोग्राफी का नाम ‘सच कहूँ तो’ है। इस ऑटोबायोग्राफी में नीना ने उस घटना का भी जिक्र किया है, जब एक डायरेक्टर/प्रोड्यूसर ने उन्हें होटल के कमरे में बुलाया था और रात बिताने के लिए पूछा था। इससे उनका ‘खून जम’ गया था। 

नीना ने कहा कि वह निर्माता-निर्देशक का नाम लेना और शर्मिंदा करना चाहती थीं, लेकिन उनके दोस्तों ने उन्हें ऐसा न करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी पुस्तक में उसका नाम नहीं लिया क्योंकि प्रकाशकों ने उसे ऐसा करने पर कानूनी परिणाम भुगतने की चेतावनी दी थी।

सोनाली बेंद्रे के साथ बात करते हुए नीना ने कहा कि वह पहले चुप रही क्योंकि वह सिर्फ एक ‘स्ट्रगल करने वाली अभिनेत्री’ थी, और अगर वह अधिक पॉपुलर लोगों के खिलाफ बोलती तो लोग उसमें दोष ढूँढते। उन्होंने कहा, “इस फिल्म निर्देशक ने मुझे सबके सामने कहा, ‘चीज़ों को इस्तमाल नहीं करो तो जंग लग जाता है’ क्योंकि मैं उसके साथ नहीं सो रही थी। मैंने परोक्ष रूप से मना कर दिया। उन्होंने इसे सबके सामने, सभी अभिनेताओं और सबके सामने कहा।”

नीना ने निर्देशक के कमेंट को याद करते हुए कहा, “मैं बहुत गुस्से में थी। मैंने वापस आकर अपने दोस्तों से कहा, ‘मैं प्रेस को बताना चाहती हूँ कि उसने मुझसे यह कहा है।’ और मेरे दोस्तों ने कहा, ‘तुम्हारी कौन सुनेगा? वह एक बड़ा नाम है। कोई तुम्हारी नहीं सुनेगा। क्या फायदा बोल कर? तुम्हारी बदनामी होगी। फिर मैंने किसी को बताया और फिर उसने मेरे बारे में कुछ बहुत ही गंदी बातें कही। फिर, मेरे दोस्तों ने कहा, ‘देखो, यही होने वाला है। यह बहुत गंदा हो जाएगा। तो, बस चुप रहो। जब तुम्हारा समय आएगा तो तुम बोलना। यह मेरा समय है, इसलिए मैं यह कह रही हूँ।” 

इस बुक में एक्ट्रेस ने अपने पर्सनल से लेकर प्रोफेशनल लाइफ के बारे में बातें लिखी हैं। जब से यह किताब रिलीज हुई है, तब से एक्ट्रेस चर्चा में बनी हुई हैं। कभी किसी खुलासे को लेकर तो कभी अपने स्ट्रगल और सिंगल मदर को लेकर सुर्खियों में हैं।

मोटरसाइकल बनवाने गया था रोहित, सलाम-सद्दाम ने क्लच वॉयर से गला घोंट मार डाला: गैराज में दफन कर ऊपर हैंडपंप लगाया

मध्य प्रदेश के स​तना जिले में 9 दिन पूर्व मोटरसाइकिल सुधरवाने निकला ऑटो चालक युवक रोहित कुशवाहा रहस्यमयी तरीके से लापता हो गया था, जिसकी हत्या उसके साथियों ने ही पैसे के लालच में कर दी। पुलिस ने पूरे मामले का खुलासा करते हुए दो मोटर मैकेनिक, पप्पू उर्फ सलाम खान और उसके साथी सद्दाम खान को गिरफ्तार किया है।

पुलिस ने बताया कि ऑटो चालक से दोनों आरोपी कर्ज लेना चाहते थे, लेकिन वह युवक कर्ज देने में टाल मटोल करने लगा तो क्लच वायर से उसकी हत्या करके लाश को अपने गैराज में ही दफना दिया और उस पर हैंडपंप लगा दिया। 

ये मामला सतना जिला के नागौद थाना क्षेत्र के कुलगढ़ी का है। यहाँ का रहने वाला 19 वर्षीय रोहित कुशवाहा पिछले 9 दिनों से गायब था। पुत्र की सूचना नहीं मिलने पर पिता ने थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस लगातार कई दिनों तक छानबीन करती रही, लेकिन उसे कोई सुराग हाथ नहीं लगा। थक-हार कर पुलिस ने साइबर सेल और सीसीटीवी फुटेज की मदद ली। जाँच में मिले अहम सुराग के आधार पर पुलिस ने पूछताछ शुरू की और दोनों ने चौंकाने वाला खुलासा किया।

पुलिस ने बताया कि मृतक रोहित कुशवाहा बीते 8 जून को बाइक की रिपेयरिंग कराने सतना आया था, लेकिन फिर घर नहीं लौटा। उसकी मोटरसाइकिल अगले दिन सीतपुरा में एक देसी शराब की दुकान के पास लावारिस हालत में मिली, जिस पर टी-शर्ट, रूमाल और गमछा टँगा हुआ था।

रोहित की दफन लाश को निकलवाती पुलिस (तस्वीर:आजतक)

पुलिस ने बताया कि आखिरी बार दोपहर 2 बजे पिता के फोन करने पर रोहित ने पप्पू मिस्त्री के पास बाइक बनवा कर घर आने की बात कही थी। ऐसे में मैकेनिक से भी पूछताछ की गई, पर वह अनजान बना रहा। 

ऐसे में एक तरफ मुखबिरों को सक्रिय किया गया तो दूसरी तरफ कुलगढ़ी से सतना और सितपुरा के बीच लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खँगाले जाने लगे। फुटेज के आधार पर यह स्पष्ट हो गया कि गायब होने के दिन लगभग साढ़े 11 बजे युवक अपनी गाड़ी से सिविल लाइन की तरफ आया था और शाम 4 बजे वापस जाता दिखाई दिया।

जब बारीकी से रिकॉर्डिंग देखी गई तो आते समय रोहित ने जो कपड़े पहने थे, वापसी में लोवर का रंग बदला हुआ पाया गया। साथ ही चलाने वाले का रंग और कद-काठी में भी अंतर मिला, चप्पल भी बदली हुई नजर आई। इससे पुलिस का संदेह गहरा गया। लिहाजा पप्पू मिस्त्री को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की गई तो उसने सद्दाम के साथ मिलकर हत्या का जुर्म स्वीकार कर लिया।

लाश को निकलवाती पुलिस (तस्वीर: आजतक)

पप्पू उर्फ सलाम ने पुलिस को बताया कि मृतक रोहित ऑटो चलाता था, तभी जान-पहचान हुई थी। बातों-बातों में उसने बताया था कि उसके और उसके पिता के खाते में बड़ी रकम है। इतना सुनने के बाद आरोपियों ने बतौर कर्ज 1-1 लाख रुपए रोहित से माँग लिए, लेकिन रोहित टालता रहा। कुछ दिन बाद रोहित ने फोन उठाना भी बंद कर दिया, लेकिन दोनों ने किसी तरह फिर से संपर्क स्थापित कर लिया। 

जब 8 जून को वह बाइक बनवाने बाड़े में आया तो सलाम और सद्दाम ने उससे रुपयों को लेकर फिर बात की। इस बार भी उसने टाल दिया। इस बात से नाराज होकर आरोपियों ने क्लच वायर से गला घोंटकर हत्या कर दी और बाड़े में ही डेढ़ फीट चौड़ा और 3 फीट गहरा गड्ढा खोदकर लाश को पॉलीथिन में लपेट कर दफना दिया।

ऊपर से मिट्टी और डस्ट डालकर हैंडपंप का पुराना पाइप भी लगा दिया। लाश को दबाने से पूर्व मृतक की टीशर्ट, गमछा और रूमाल निकाल लिया। पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह ने बताया कि आरोपियों ने जुर्म स्वीकार कर लिया है।

टिकरी बॉर्डर पर ज़िंदा जलाने वाला आरोपित गिरफ्तार: कबूल किया ‘किसान आंदोलन’ पर झगड़े के बाद हत्या की साजिश वाली बात

टिकरी सीमा पर ‘किसान आंदोलन’ में एक किसान को ज़िंदा जला कर मार डालने की वारदात में मुख्य आरोपित को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। मुख्य आरोपित मूल रूप से हरियाणा के जींद जिले के रायचंद गाँव का निवासी है। कृष्ण नाम के आरोपित के बारे में पुलिस ने जानकारी दी है कि उसे अपना गुनाह भी कबूल कर लिया है। आरोपित करीब 10 दिनों से टिकरी बॉर्डर पर ‘किसान आंदोलन’ में डेरा जमाए हुए था।

पूछताछ में मुख्य आरोपित ने बताया है कि मृतक भी अक्सर अन्य किसानों के साथ बैठ कर शराब का सेवन करता था। बहादुरगढ़ के सेक्टर 6 थाना प्रभारी जय भगवान ने जानकारी दी है कि मुकेश के साथ 3 अन्य किसान प्रदर्शनकारियों ने बैठ कर शराब पी थी। इसी दौरान मृतक ने ‘किसान आंदोलन’ को लेकर कुछ गलत शब्दों का प्रयोग किया। फिर आरोपित गुस्सा गए और उन्होंने मिल कर मुकेश की हत्या की साजिश रची।

अन्य आरोपितों की गिरफ़्तारी के लिए भी पुलिस दबिश दे रही है। कृष्ण को रिमांड पर लिया जाएगा। इस घटना के सम्बन्ध में अभी और भी सबूत जुटाए जाने हैं। घटनास्थल के नजदीक ही एक पेट्रोल पंप है, जहाँ से CCTV फुटेज जुटाने की तैयारी में पुलिस लगी हुई है। पेट्रोल पंप वालों का कहना है कि सीसीटीवी खराब है, लेकिन पुलिस तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से डेटा जुटाने की कोशिश करेगी। मुकेश ने मरने से पहले हॉस्पिटल में बयान दिया था।

उस वीडियो की जाँच के बाद उसे भी सबूत के रूप में तैयार किया गया है। बता दें कि मुकेश के ऊपर तेल छिड़क कर आग लगा दी गई थी। गंभीर रूप से झुलसे मुकेश की कुछ घंटों बाद उपचार के दौरान मौत हो गई थी। आंदोलन में ‘शहीद’ होने का नाम देकर कसार निवासी मुकेश पर तेल छिड़का गया और फिर आग लगाई गई। इससे पहले उसे शराब भी पिलाई गई थी। किसान संगठनों ने एक अस्पष्ट वीडियो जारी कर अपना बचाव किया।

एक अन्य वीडियो में  मुकेश अस्पताल में इलाज के दौरान अपनी मृत्यु से पहले बयान देते हुए दिखाई दे रहे हैं। यह वीडियो ऑपइंडिया द्वारा एक्सेस किया गया। ऑपइंडिया द्वारा एक्सेस किए गए इस वीडियो में, मुकेश को अपने हमलावरों की पहचान करते हुए स्पष्ट रूप से यह कहते हुए सुना जा सकता है कि टिकरी सीमा पर मौजूद किसानों ने उसे आग लगा दी। इस वीडियो में मुकेश साफ-साफ कह रहे हैं कि टिकरी बॉर्डर पर किसानों ने खासकर सफेद कुर्ते में एक शख्स ने उन्हें आग लगा दी।

कहाँ से आई सती प्रथा? कितना था प्रभाव? NCERT के पास सबूत Nil, फिर भी बच्चों को पढ़ा रहा

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) एक बार फिर विवादों में है। NCERT कई वर्षों से सती प्रथा को लेकर भारतीय संस्कृति के खिलाफ जहर फैलाने की कोशिश में लगा हुआ है, बिना सबूत के। दुर्भाग्य यह है कि स्कूलों में भारतीय शिक्षा पद्धति को लागू करने का दावा करने वाले भी वामपंथियों की इन मंशाओं को अभी तक भाँप नहीं पाए हैं। पिछले कई वर्षों से बच्चों के दिमाग में यह जहर भरा जा रहा है।

इस मामले में सोशल एवं पॉलिटिकल एक्टिविस्ट विवेक पांडेय ने एक RTI दायर की थी, जिसके जवाब चौंकाने वाले हैं। इसमें कहा गया कि एनसीईआरटी के पास भारत में सती प्रथा की उत्पत्ति या इसके प्रभाव के बारे में कोई जानकारी नहीं है। एनसीईआरटी के जवाब के अनुसार, एएसआई के आधार पर विभाग की फाइलों पर अभिलेखों/तथ्यों के स्रोत उपलब्ध नहीं हैं।

विवेक पांडेय ने आरटीआई दायर करते हुए दो बिंदुओं पर जवाब माँगा था। पहले सवाल में उन्होंने पूछा भारत में सती प्रथा होने के संदर्भ के बारे में पूछा। वहीं दूसरे सवाल में उन्होंने देश में सती प्रथा के मामले को लेकर विवरण माँगी थी।  

बता दें कि एनसीईआरटी की कक्षा- 8 के चैप्टर ‘Women, Caste and Reforms’ में सती प्रथा के बारे में बताया गया है। इसमें कहा गया है कि देश के कुछ हिस्सों में उन विधवा औरतों की प्रशंसा की जाती है, जो पति के मरने के बाद उसकी चिता में जल कर अपने प्राण त्याग देती है। इसके अलावा महिलाओं के संपत्ति के अधिकार पर भी प्रतिबंध था। महिलाओं के पास शिक्षा की पहुँच नहीं थी। इसमें कहा गया है कि देश के कुछ हिस्सों में ऐसा माना जाता था कि अगर महिलाएँ शिक्षित होंगी, तो विधवा हो जाएँगी। विवेक पांडेय ने इसी को लेकर एनसीईआरटी से संदर्भ माँगा था।

गौरतलब है कि इससे पहले भी NCERT बिना आधिकारिक विवरण के पाठ्यक्रम पढ़ाने को लेकर विवादों में आ चुका है। इसी तरह कक्षा 12 में पढ़ाए जाने वाली इतिहास की किताब पर बवाल हुआ था। इसमें सिखाया जा रहा था कि औरंगजेब जैसे आक्रांताओं ने भी भारत में रहते हुए मंदिरों की रक्षा की और उनकी देख-रेख का जिम्मा उठाया था। लेकिन जब एनसीईआरटी से इस दावे का स्रोत पूछा गया तो उनके पास अपना दावा साबित करने के लिए कोई प्रमाण या स्रोत नहीं था। ऐसे ही कुतुब मीनार को लेकर भी एनसीईआरटी के पास कोई सबूत नहीं थे कि उसे कुतुबुद्दीन ऐबक और इल्तुतमिश ने बनवाया।

हाल ही में NCERT के पाठ्यक्रम में कक्षा-1 के छात्रों को पढ़ाए जाने वाली कविता ‘आम की टोकरी’ को लेकर सोशल मीडिया पर बवाल हुआ। लोगों ने इसे डबल मीनिंग कविता करार देते हुए पाठ्यक्रम से निकालने की बात की।

इसके अलावा अनिता रामपाल के नेतृत्व में वर्ष 2007 में तैयार की गई इस पुस्तक में ‘द लिटिल बुली’ चैप्टर के माध्यम से छोटे बच्चों में सनातन संस्कृति में विष्णु भगवान के प्रचलित नाम ‘हरि’ के नाम पर एक ऐसे बच्चे की कहानी कही गई है जो लड़कियों को चिढ़ाता है, उन्हें चिकोटी काटता है, उन पर धौंस जमाता है। सब बच्चे उससे डरते हैं और उससे नफरत करते हैं। उससे दूर रहते हैं और आखिर में एक केकड़ा उसे काटकर सबक सिखाता है। ‘हरि’ नाम के उस बच्चे की नकारात्मक छवि बनाकर पाँचवी क्लास में पढ़ने वाले छोटे बच्चों के मन में सनातन संस्कृति के प्रति घृणा के बीज डाले जाते हैं। पिछले पंद्रह सालों से यह कार्य अनवरत किया जा रहा है।

बहन$% हेकड़ी निकाल देंगे गां$ से: किशनगंज के SDM शाहनवाज की गंदी-गंदी गाली वाला ऑडियो वायरल, युवक ने लगाया आरोप

बिहार के किशनगंज में सफाई व्यवस्था को लेकर उठाया गया मामला अब तूल पकड़ रहा है। कारण एक ऑडियो रिकॉर्डिंग है। इसमें कथित तौर पर किशनगंज एसडीएम शाहनवाज अहमद नियाजी शिकायत करने वाले युवक को धमकाते सुनाई पड़ रहे हैं। ऑडियो को गया के पूर्व सांसद हरि मांझी ने भी अपने ट्विटर पर शेयर करके मामले में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से जाँच की माँग की है।

बातचीत के अंश इस प्रकार हैं:

आवाज-1: हेलो, क्या कह रहे थे जी, उस समय मैं मीटिंग में था, क्या कह रहे थे कि फोटो खिंचवाते हैं…
आवाज-2: कौन?
आवाज-1: एसडीएम किशनगंज बोल रहे हैं। क्या कह रहे थे उस समय?
आवाज-2: सर कल एक लड़की गिर गई थी।
आवाज-1: अरे तो बोलने की तमीज तुमको नहीं है। रोड साफ कराना मेरा काम है कि नगर परिषद का काम है?
आवाज-2: कोई कॉल ही तो नहीं उठा रहा है सर। आप मेरा नंबर किसी को दिए थे? किसी का कॉल आया था मेरे पास उन्होंने मुझे वार्ड कमीशनर को कॉल करने को कहा। मैंने 50 कॉल किया कोई रिस्पॉन्स नहीं मिला।
आवाज-1: अरे वार्ड परिषद ने नहीं उठाया। तो क्या नगर परिषद के एग्जिक्यूटिव ऑफिसर को फोन करा? जिसका काम है, ड्यूटी है।
आवाज-2: सर कोई एक्शन नहीं लिया जा रहा है।
आवाज-1: सुनो, सुनो बच्चा क्या उम्र है तुम्हारी।
आवाज -2: सर ज्यादा नहीं है सर। गलती हो गई सॉरी सर।
आवाज-1: उठा कर पटक देंगे। जेल भेज देंगे। तुम्हारी सब हेकड़ी निकाल देंगे।
आवाज-2: सर, हम कुछ गलत तो नहीं बोले न…
आवाज-1: तो तुम ऐसे बात करोगे
आवाज-2: किस तरह से बात किए सर?
आवाज-1: कमर तोड़ देंगे साले तुम्हारी..
आवाज-2: हम क्या बोल दिए सर?
आवाज-1: तुम एसडीएम को बोलोगे कि फोटो खिंचवाते हैं। ये हमारा काम है साला या नगर परिषद का है।
आवाज-2: सर, हमें गूगल में नंबर मिला। आप बताएँ कि ये किसका काम है।
आवाज- 1 : ज्यादा होशियार बना न तो उठाकर पटक देंगे बह%$#&। हीरो बनता है साला। सब साले हेकड़ी निकाल देंगे ग$% से। बह$%^ साला।

बता दें कि सोशल मीडिया पर इस ऑडियो को शेयर किया जा रहा है। ऐसे में ऑपइंडिया के पास जब ये रिकॉर्डिंग पहुँची तो हमने शिकायतकर्ता और एसडीएम दोनों से बात करने का प्रयास किया। शिकायतकर्ता की पहचान विशाल चौधरी के तौर पर हुई और ये पूरा मामला बिहार किशनगंज के धर्मगंज का है।

शिकायतकर्ता ने की ऑपइंडिया से बात

विशाल ऑपइंडिया से बात करते हुए बताते हैं, “हमारे इलाके में बहुत गंदगी फैली हुई थी। सड़क किनारे नाले का कचड़ा निकाला गया था। बारिश हुई तो हर जगह कीचड़ था। चूँकि आने-जाने का रास्ता भी यही है तो एक बार लड़की भी साइकिल के साथ इसमें गिर चुकी थी और कुछ महिलाएँ भी आते-जाते फँस गईं थीं। ऐसे में मैंने शिकायत की। नगर परिषद में कॉल किया। वॉर्ड कमीश्नर को कॉल किया। लेकिन कहीं से कोई रिस्पॉन्स नहीं मिला। फिर मैंने एसडीएम सर को कॉल किया। उन्होंने कहा कि ये मेरा काम नहीं है। नगर परिषद को कॉल करो। हम बोले कि जब नगर पालिका कॉल नहीं उठा रही सर, तो हम एसडीएम के पास जाएँगे। एसडीएमस नहीं सुनेगा तो हम डीएम के पास जाएँगे। ये तो जाहिर सी बात है।”

विशाल के मुताबिक, “इसके बाद एसडीएम ने बोला कि बदतमीज हो तुम। तुम्हें समझ नहीं आता है। मैंने कहा भी सर आप सिर्फ फोटोबाजी करते हैं। आपका नाम आता है कि ऐसे रहो, वैसे रहो। कोरोना से बचो। स्वच्छ रखो। साफ सफाई रखो और 10 दिन से ऐसा हो रहा है। इससे कोरोना वायरस से बचेंगे या ये फैलेगा। ये सुन एसडीएम बोले कि बद्तमीज सब डिविजन आओ तुम। देखते हैं कौन हो तुम। इसके बाद किसी व्यक्ति ने मुझे कॉल किया और उसने मुझे समझाया और मेरी सारी जानकारी ले ली है। हम सब कुछ सही बताए। उन्होंने कहा कि वार्ड कमीश्नर को बोल दो ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव हो जाएगा। कम से कम दुर्गंध नहीं आए। इस बात के करीब 10 घंटे बाद एसडीएम ने दोबारा कॉल किया और जो बात हुई वो आपके सामने है। ”

विशाल कहते हैं कि अब सड़क साफ हो गई है और वो दोबारा इस मामले में शिकायत भी नहीं करते। लेकिन 10 घंटे बाद एसडीएम का जो कॉल आया, उससे वह आहत हैं। वह पूछते हैं कि एसडीएम ने गाली क्यों दी। अगर मामला जानने और ऑडियो सुनने के बाद उनकी कोई गलती निकले तो उन पर केस कर दिया जाए। वह यही पूछते हैं, “एसडीएम सर ने गाली क्यों दी। ये बात आत्मसम्मान की है। सारी ऑडियो सही है। कहीं भी चेक कराइए। सवाल बस यही है कि उन्होंने गाली क्यों दी। ऐसे तो कल को क्राइम कहीं होगा, चुप होना पड़ेगा कि हमें उलटा फँसा दिया जाएगा। अगर ऐसा होगा तो किस पर भरोसा किया जाएगा।”

ऑपइंडिया ने इस संबंध में किशनगंज के एसडीएम शाहनवाज अहमद नियाजी से संपर्क करके उनका पक्ष जानने के लिए कई बार कोशिश की। लेकिन उन्होंने हमारा कॉल रिसीव नहीं किया। आगे यदि उनसे बात होती है और वह अपना पक्ष बताते हैं तो इस रिपोर्ट में अपडेट किया जाएगा।