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सपा नेता उम्मेद पहलवान दिल्ली में गिरफ्तार, UP पुलिस ले जाएगी गाजियाबाद: अब्दुल की पिटाई के बाद डाला था भड़काऊ वीडियो

गाजियाबाद के लोनी में मुस्लिम बुजुर्ग से मार पिटाई मामले के बाद सोशल मीडिया पर भड़काऊ वीडियो डालने वाला समाजवादी पार्टी का नेता उम्मेद पहलवान गिरफ्तार कर लिया गया है। यह जानकारी मीडिया को पुलिस ने दी।

गाजियाबाद एसएसपी ने मीडिया को बताया कि गाजियाबाद पुलिस की एक टीम ने उम्मेद पहलवान को गिरफ्तार कर लिया है। ये गिरफ्तारी दिल्ली के लोक नारायण अस्पताल के पास हुई है। गिरफ्तारी के बाद उसे गाजियाबाद लाया जाएगा और फिर आगे की पूछताछ होगी।

पुलिस ने अब तक बुजुर्ग की मारपीट मामले में 9 लोगों को गिरफ्तार किया है। इदरीस की गिरफ्तारी एक अलग मामला है। आगे जो तथ्य पूछताछ के बाद सामने आएँगे, उन्हें पुलिस मीडिया से साझा करेगी।

बता दें कि इससे पहले बुजुर्ग की मारपीट मामले को सोशल मीडिया पर ‘जय श्री राम’ का एंगल देकर प्रसारित करने के आरोप में उम्मेद के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज हुई थी। FIR के अनुसार, उसने ही सबसे पहले बुजुर्ग के साथ अनावश्यक वीडियो बनाया और इसे वायरल करने के लिए इसमें धार्मिक वैमनस्यता फैलाने वाली बातें कहीं। आरोप है कि घटना की सत्यता जाँचे बिना ही वीडियो में धार्मिक आधार पर बातें की गईं।

उस पर यह भी आरोप है कि इस वीडियो के कारण जनता की धार्मिक भावनाएँ आहत हुई हैं। साथ ही धार्मिक विभाजन के लिए इसे वायरल किया गया, जिसका फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने भी कोई फैक्ट-चेक नहीं किया।

उम्मेद पहलवान के खिलाफ IT एक्ट की धाराएँ भी लगाई गई थीं। जिसके बाद वो फरार हो गया और फेसबुक पर लिखा कि उसके खिलाफ ‘फर्जी मुकदमा’ दायर किया गया है, क्योंकि उसने 72 साल के बुजुर्ग की मदद की।

भारत में कोविशील्ड के डोज का गैप OK है, एस्ट्राजेनेका ने किया समर्थन: कहा- ‘देश-परिस्थितियों के हिसाब से सही फैसला’

भारत में कोरोना वैक्सीन कोविशील्ड की दो डोज के बीच 12 से 16 सप्ताह के गैप का ब्रिटिश फार्मा कंपनी एस्ट्राजेनेका ने समर्थन किया है। एस्ट्राजेनेका-ऑक्सफोर्ड ने ही इस वैक्सीन का फॉर्मूला तैयार किया है। भारत में सीरम इंस्टीट्यूट इसे कोविशील्ड नाम से बना रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एस्ट्राजेनेका के क्लिनिकल ट्रायल के मुख्य जाँचकर्ता प्रोफेसर एंड्रयू पोलार्ड ने शुक्रवार (18 जून 2021) को एक इंटरव्यू में कहा कि दोनों देशों की वैक्सीनेशन पॉलिसी की तुलना नहीं की जानी चाहिए, क्योंकि दोनों देशों में अलग-अलग परिस्थितियों के कारण अलग-अलग फैसले लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन ने दो डोज के गैप को कम किया है, क्योंकि उसकी आबादी के एक बड़े हिस्से का वैक्सीनेशन हो चुका था।

एंड्रयू पोलार्ड ने कहा, ”वैक्सीन सिंगल डोज के बाद दूसरे और तीसरे महीने में ज्यादा सुरक्षा प्रदान करती है, यानी इसका सुरक्षा का स्तर और भी बढ़ जाता है। ऐसे में भारत द्वारा डोज के गैप बढ़ाने के फैसले में हमें कोई कमी नजर नहीं आती है।”

पोलार्ड ऑक्सफोर्ड वैक्सीन ग्रुप के डायरेक्टर भी हैं। उन्होंने कहा, “एक टीकाकरण नीति का लक्ष्य जल्द से जल्द अधिक संख्या में लोगों को वैक्सीन की कम से कम एक डोज देना होता है, जो भारत की वर्तमान परिस्थितियों में समझ आता है।”

अब तक 26.89 करोड़ कोविड-19 वैक्सीन

भारत में अब तक 26,89,60,399 (26.89 करोड़) कोविड-19 वैक्सीन की डोज दी जा चुकी हैं। वैज्ञानिक ने कहा कि दो खुराक की जरूरत है। एक अच्छा हो सकता है, लेकिन सुरक्षा की दृष्टि से दूसरे की भी जरूरत है।

ब्रिटेन में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में बाल चिकित्सा संक्रमण और प्रतिरक्षा के प्रोफेसर पोलार्ड ने कहा कि एस्ट्राजेनेका एक खुराक वाले टीके पर काम नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि टीके की कमी की स्थिति में कम संख्या में लोगों के लिए बेहतर स्तर की सुरक्षा प्रदान करने के बजाय अधिक से अधिक लोगों के लिए सुरक्षा के उपाय सुनिश्चित करना समझ में आता है। यह सही फैसला है।

उन्होंने इस बात को समझाया कि एस्ट्राजेनेका वैक्सीन की एक डोज, जिसे भारत में कोविशील्ड के नाम से जाना जाता है, गंभीर बीमारी और अस्पताल में भर्ती होने से 70 प्रतिशत से अधिक सुरक्षा प्रदान करती है।

पोलार्ड आगे कहते हैं, ”इस तथ्य से विचलित नहीं होना चाहिए कि एक खुराक लक्षण वाली (सिप्टोमैटिक) बीमारी के खिलाफ केवल 30 प्रतिशत सुरक्षा प्रदान करती है।”

अब गैप 12 से 16 हफ्ते का

मालूम हो कि भारत में कोविशील्ड की दो खुराकों के बीच का अंतर पहले 4 से 6 सप्ताह का था। फिर इसे बढ़कर 6 से 8 सप्ताह किया गया और अब यह गैप 12 से 16 हफ्ते का है।

वहीं, इससे पहले कोविड वर्किंग ग्रुप के चीफ डॉ. एनके अरोड़ा ने भी इस फैसले को वैज्ञानिक सबूतों के आधार पर सही बताया था। कोविशील्ड के दो डोज का अंतर बढ़ाए जाने के बाद से चल रही बहस के बीच उन्होंने कहा था कि इस वैक्सीन का सिंगल डोज कोरोना के डेल्टा वैरिएंट के खिलाफ 61% तक कारगर है।

ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका के साथ मिलकर बनाया गया है कोविशील्ड

बता दें कि कोविशील्ड को सीरम इंस्टीट्यूट ने ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका के साथ मिलकर बनाया है। एस्ट्राजेनेका एक एडेनोवायरस वेक्टरेड वैक्सीन है। इस वैक्सीन को चिम्पैंजी के एडिनोवायरस को जैनिटिकली इंजीनियर्ड करके कोरोना के स्पाइक प्रोटीन को डालकर तैयार किया जाता है। एडिनो वायरस मानव के लिए नुकसानदायक नहीं होता है, बल्कि यह कोरोना संक्रमण से बचाने में मददगार होगा।

जोधपुर में पहले रेप फिर धमकी… परेशान हो बच्ची ने किया सुसाइड: प्रशासन फेल, राजस्थान में 7 दिनों में दूसरी ऐसी घटना

राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार में बच्चियों के साथ हैवानियत की घटनाएँ थमने का नाम नहीं ले रही हैं। एक बार फिर प्रदेश के दूसरे सबसे बड़े शहर जोधपुर (Jodhpur) से एक नाबालिग छात्रा से हैवानियत की घटना सामने आई है। शहर के डांगियावास थाना क्षेत्र में 14 साल की एक नाबालिग छात्रा से दो युवकों ने दुष्कर्म किया। दुष्कर्म के बाद आरोपित नाबालिग छात्रा को लगातार धमकियाँ देते रहे। इन धमकियों से परेशान होकर मासूम ने विषैला प्रदार्थ पीकर अपनी जान दे दी।

दुष्कर्म की घटना के बाद पीड़ित छात्रा घर में गुमसुम रहने लगी थी। बाद में छात्रा ने घटना के बारे में अपनी माँ को बताकर विषैला प्रदार्थ पी ली। पीड़िता की तबियत बिगड़ने पर उसे महात्मा गाँधी अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

डांगियावास थानाधिकारी कन्हैयालाल ने बताया कि नाबालिग बच्ची के परिजनों ने प्रकाश व रामनिवास के खिलाफ दुष्कर्म करने का मामला दर्ज करवाया है। इसके बाद पुलिस ने आरोपित प्रकाश को तो तुरंत गिरफ्तार कर लिया, लेकिन रामनिवास फरार हो गया और उसकी तलाश की जा रही है। दोनों आरोपित डांगियावास थाना क्षेत्र के ही रहने वाले हैं।

वहीं, पीड़ित बच्ची की मौत के बाद समाज के लोगों ने अस्पताल की मोर्चरी में विरोध प्रदर्शन किया। परिजनों ने भी आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की। इस पर पुलिस अधिकारियों ने आरोपितों को कड़ी सजा दिलवाने का आश्वासन दिया।

गौरतलब है कि 12 जून को जोधपुर जिले के भोपालगढ़ और फलौदी कस्बे से नाबालिग बच्चियों के साथ दुष्कर्म करने का मामला सामने आया था। जिसके भोपालगढ़ की पीड़िता ने कुएँ में कूदकर आत्महत्या कर ली थी, जबकि फलौदी कस्बे की नाबालिग का अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया था। ऑपइंडिया ने इस मामले को जोर-शोर से उठाया था।

भोपालगढ़ थाना क्षेत्र में नाबालिग से बलात्कार के मामले में पीड़ित के चाचा ने गाँव के ही मोइनुद्दीन के खिलाफ रेप का केस दर्ज कराया है। जबकि, फलौदी कस्बे में निजी स्कूल के शिक्षक सूरजाराम ने 15 वर्षीय नाबालिग छात्रा का अश्लील वीडियो बनाकर उसका रेप करने की कोशिश की थी।

इससे पहले जोधपुर के ही शेरगढ़ में सरकारी स्कूल के दो शिक्षकों ने 6 साल की बच्ची के साथ दरिंदगी की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, इसी साल (2021) की शुरुआत में ही शेरगढ़ के मोकमगढ़ स्थित बाबा की नामबाड़ी में सरकारी स्कूल के दो शिक्षकों ने स्कूल में ही 6 साल की बच्ची से 3-4 बार रेप किया था। जब एक रेप कर रहा था तो दूसरा आरोपित गेट के बाहर पहरा देता था।

‘खाना बनाकर रखना’ कह कर घर से निकला था मुकेश, जिंदा जलाने की खबर आई: ‘किसानों’ के टेंट या गुंडई का अड्डा?

हरियाणा के बहादुरगढ़ के कसार गाँव के 42 साल के मुकेश को जिंदा जलाने के मामले में पुलिस मुख्य आरोपित कृष्ण को गिरफ्तार कर चुकी है। अब तक की जाँच से यह बात सामने आई है कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने मुकेश के साथ शराब पी और फिर उसे जिंदा जला दिया। मुकेश के परिजनों को जब इसकी सूचना मिली तो वे उसे अस्पताल ले गए, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। हालाँकि मौत से पहले मुकेश का एक वीडियो बनाया गया था, जिसमें वह आरोपितों के नाम ले रहा है।

यह घटना बुधवार (16 जून 2021) रात की है। मुकेश की पत्नी रेणु का इस घटना के बाद से बुरा हाल है। ऑपइंडिया से बातचीत में वह बार-बार एक ही सवाल दोहराती हैं कि अब उनका और उनके 10 साल के बेटे का क्या होगा? ग्रामीणों ने प्रशासन को इस मामले में सात दिन का समय देते हुए एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें पीड़ित परिवार को आर्थिक मदद देने की भी माँग रखी गई है।

उस दिन की घटना को लेकर पूछे जाने पर रेणु ने बताया कि मुकेश शाम के 5 बजे के करीब घर से निकला था। वह अपना मोबाइल भी साथ नहीं ले गया था। रेणु कहती है, “वे 5 बजे घर से निकले तो सब कुछ ठीक था। कोई लड़ाई-झगड़ा कुछ नहीं था।उन्होंने कहा था खाना बनाकर रखना मैं जल्दी आ जाऊँगा। मैंने कहा कि अपना फोन लेकर जाइए तो कहा कि नहीं, मैं जल्दी आ जाऊँगा।”

ग्रामीणों और परिजनों का दावा है कि सरकार को बदनाम करने की नीयत से कथित किसान प्रदर्शनकारियों ने ‘शहीद’ होने के नाम पर नशे में मुकेश को बहलाया-फुसलाया होगा। जैसा कि उसकी विधवा भी कहती हैं, “गए वहाँ पर। बैठाए होंगे वे लोग। दारू पिलाए होंगे। पेट्रोल छिड़कर माचिस लगा दिए। बहुत बुरी तरह जला दिए उसको।” रेणु का कहना है कि उनके गाँव से सटे बाइपास पर कब्जा जमाए बैठे कथित किसान नशे में रहते हैं। उल्टा-सीधा खाते हैं। उसका सवाल है कि यदि ये किसान होते तो इस तरह दारू पीते?

ऑपइंडिया से बातचीत में इन कथित किसानों के शराब पीने और उत्पात को लेकर मुकेश के परिजनों के अलावा सरपंच टोनी कुमार और अन्य ग्रामीणों ने भी शिकायतें की। ग्रामीणों का कहना है कि ये किसान उनके खेतों में शौच के लिए आते हैं, जिससे महिलाओं को परेशानी होती है। प्रशासन को दी शिकायत में भी ग्रामीणों ने कहा है, “पिछले 6-7 महीनों से गाँव कसार के साथ लगती सड़क पर कथित किसानों ने गदर मचा रखा है। ये गाँव में आकर शराब पीकर हुड़दंग करते हैं। ट्रैक्टर पर घूमते हैं। महिलाओं से छेड़खानी करते हैं। इन्हें तुरंत प्रभाव से गाँव कसार की परिधि से हटाया जाए।”

मुकेश की माँ शकुंतला भी बताती हैं कि उनका बेटा घर से ‘खाने बनाकर रखने’ के लिए कहकर टहलने निकला था। अपने बेटे को जलाने का आरोप प्रदर्शनकारियों पर लगाते हुए उन्होंने ऑपइंडिया के साथ बातचीत में कृष्ण का नाम भी लिया।

कथित किसानों के टेंट इस गाँव से सटे हैं इसलिए ग्रामीणों का उधर जाना आश्चर्यजनक भी नहीं लगता। खुद ग्रामीण भी मानते हैं कि आते-जाते कई लोगों से उनका दुआ सलाम हो जाता है। कसार के सरपंच टोनी कुमार ने भी इस घटना से पहले प्रदशर्नकारियों के गाँव में आते रहने की पुष्टि हमारे साथ बातचीत में की। ग्राम खाप के निर्देश पर प्रदशर्नकारियों को चंदा इकट्ठा कर भी ग्रामीण देते रहे हैं। हालाँकि आंदोलन में सक्रिय सहभागिता से वे इनकार करते हैं। मुकेश के परिजनों का भी दावा है कि वे कभी आंदोलन का हिस्सा नहीं रहे।

मुकेश के भाई मंजीत का दावा है कि जींद के प्रदर्शनकारी ज्यादा परेशानी खड़ी कर रहे हैं। दिलचस्प यह है कि इस मामले का मुख्य आरोपित कृष्ण भी जींद का ही है। यह भी कहा जा रहा है ​कि मुकेश को ‘ब्राह्मण’ होने के कारण निशाना बनाया गया। सरपंच इसके लिए राकेश टिकैत के ब्राह्मण विरोधी बयानों को जिम्मेदार मानते हैं और उनका कहना है कि घटना के बाद जब वे कृष्ण के पास पहुँचे तो उसने भी ब्राह्मण विरोधी बातें की।

गौरतलब है कि मुकेश के परिवार के पास खेती की जमीन नहीं है। उसके पिता जगदीश चंद्र ने बताया कि मुकेश तीन भाइयों में सबसे बड़ा था। सब अपने छोटे-मोटे काम कर अपना परिवार पालते हैं। मुकेश गाड़ी चलाता था और लॉकडाउन की वजह से फिलहाल उसके पास काम नहीं था। ऐसे में उसकी मौत ने उसकी पत्नी और बेटे को बेसहारा कर दिया है।

ऐसे में सवाल उठता है कि किसानों के नाम पर सड़क पर कब्जा जमाए बैठे ये लोग कौन हैं? इनका मकसद क्या है? क्या इनके टेंट नशे और गुंडई के अड्डे हैं? जैसा कि मुकेश की विधवा रेणु भी कहती हैं, “ये जो लोग पड़े हैं, वही ये काम किए हैं। ये लोग किसान नहीं हैं। ये लोग अपराधी हैं। दारू पिए रहते हैं। होश में नहीं रहते हैं। एक साल हो गया ये लोग जा नहीं रहे यहाँ से। गदर मचा रखा है यहाँ पर।”

3 मिनट में 2 विधायकों के बेटे बने अफसर: पंजाब कॉन्ग्रेस में नाराजगी को दूर करना का ‘कैप्‍टन फॉर्मुला’ – बदली अनुकंपा पॉलिसी

पंजाब कॉन्ग्रेस में चल रहे घमासान के बीच कुछ विधायकों की नाराजगी को दूर करने के लिए मुख्यमंत्री कैप्‍टन अमरिंदर सिंह सरकार ने नया रास्‍ता अपनाया है। कुछ विधायकों की नाराजगी को दूर करने के लिए उनके बेटों को डीएसपी, तहसीलदार जैसे पदों से नवाजा जा रहा है। विभागीय सचिवों के ऐतराज के बाद अब बीच का रास्ता निकाला जा रहा है।

पंजाब मंत्रिमंडल ने दो विधायकों के बेटों को अफसर बनाने के प्रस्ताव को तीन मिनट में मंजूरी दे दी। सांसद प्रताप सिंह बाजवा के भतीजे और विधायक फतेहजंग बाजवा के बेटे अर्जुन प्रताप सिंह बाजवा को पंजाब पुलिस में इंस्पेक्टर (ग्रेड-2) और विधायक राकेश पांडे के बेटे भीष्म पांडे को राजस्व विभाग में नायब तहसीलदार नियुक्त किया गया। इस प्रस्ताव को विपक्षी दलों के कड़े विरोध के बावजूद मंत्रिमंडल ने सिर्फ तीन मिनट में पारित कर दिया। 

मंत्रिमंडल ने प्रस्ताव को पारित करने के लिए अनुकंपा आधार पर नौकरी देने संबंधी नियमों में भी संशोधन किया, क्योंकि दोनों को अनुकंपा के आधार पर ही नौकरी दी गई है। इन दोनों के दादा पूर्व मंत्री सतनाम सिंह बाजवा और जोगिंद्र पाल पांडे की पंजाब में आतंकवाद के समय आतंकियों ने हत्या की थी। दोनों की नियुक्ति को अनुकंपा के आधार पर नियुक्तियों संबंधी पॉलिसी, 2002 में एक बार छूट देकर विशेष केस के तौर पर माना गया है। हालाँकि, इसे  प्रथा के तौर पर नहीं विचारा जाएगा। विपक्षी दलों-शिरोमणि अकाली दल और आम आदमी पार्टी ने सरकार के इस फैसले का कड़ा विरोध भी किया। 

अपनी कुर्सी बचाने के लिए विधायकों के बच्चों को नौकरी दे रहे कैप्टन: सुखबीर

शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा अपनी कुर्सी बचाने के लिए कॉन्ग्रेस विधायकों के बच्चों को नौकरी देने के फैसले को निंदनीय बताया। उन्होंने कहा कि 2022 में राज्य में शिअद-बसपा गठबंधन सरकार बनते ही ऐसी सभी अवैध नियुक्तियों को रद्द कर दिया जाएगा।

अकाली दल अध्यक्ष ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि जहाँ गरीब और मेधावी छात्र नौकरियों का इंतजार कर रहे हैं, कॉन्ग्रेस सरकार ने घर-घर नौकरी योजना को बदल कर केवल कॉन्ग्रेस घर नौकरी में बदल दिया है। पहले अनुकंपा के आधार पर पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते को डीएसपी नियुक्त किया गया था। अब कॉन्ग्रेसी विधायक फतेहजंग सिंह तथा राकेश पांडे को इंस्पेक्टर और नायब तहसीलदार के पद पर झूठे अनुकंपा के आधार पर नई नौकरियाँ पैदा कर नियुक्त किया गया है। 

सुखबीर ने नियुक्तियों को अवैध बताते हुए कहा कि उनके दादाओं की कथित कुर्बानी के बदले विधायकों के बच्चों को नौकरियाँ नहीं दी जा सकती हैं। यह निंदनीय है कि मुख्यमंत्री ने पंजाब कॉन्ग्रेस पार्टी में चल रही तकरार में अपनी कुर्सी बचाने के उद्देश्य से ऐसा कर अधिनियम को झूठा आधार दिया है। मुख्यमंत्री को इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि 1987 में पूर्व मंत्री सतनाम सिंह बाजवा को गोली मारने पर केस दर्ज किया गया था। 

एफआईआर में कहा गया था कि सतनाम सिंह बाजवा को व्यक्तिगत मतभेद के आधार पर गोली मारी गई थी। इस मामले में बलिदान का तो सवाल ही पैदा नहीं होता, जिसके आधार पर बाजवा के पोते को उनके दादा की मौत के 33 साल बाद सरकारी नौकरी देकर पुरस्कृत किया जा रहा है।

‘सांसद और केरल कॉन्ग्रेस प्रमुख सुधाकरण ने मेरे बच्चों के अपहरण की साजिश रची थी’ – केरल के CM विजयन का गंभीर आरोप

केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने केरल के ही पीसीसी अध्यक्ष और कॉन्ग्रेस के लोकसभा सांसद के सुधाकरण पर गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि सुधाकरण ने एक बार उनके बच्चे का अपहरण करने की योजना बनाई थी।

विजयन ने शुक्रवार (18 जून 2021) को मीडिया से बात करते हुए दावा किया कि कॉन्ग्रेस के ही कन्नूर के दिवंगत स्थानीय नेता पी रामकृष्णन, जो सुधाकरण के करीबी दोस्त थे, उन्होंने उनसे (विजयन) कई साल पहले कन्नूर में उनके घर पर मुलाकात की थी। उस कॉन्ग्रेस नेता ने सतर्क रहने की हिदायत देते हुए कहा था कि सुधाकरण, विजयन के दो बच्चों के अपहरण की योजना बना रहे थे। विजयन ने कहा कि उन्होंने अपनी पत्नी सहित किसी को भी नहीं बताया, क्योंकि वे इससे डर जाते। उनके बच्चे उस दौरान स्कूल ही जा रहे थे।

दरअसल, हाल ही में एक इंटरव्यू में के सुधाकरण ने अपने कॉलेज के दिनों के यादों को साझा किया था। उन्होंने कहा था कि कन्नूर के थालास्सेरी में ब्रेनन कॉलेज में तनाव के दौरान कॉलेज परिसर में हुए राजनीतिक संघर्ष में विजयन के साथ मारपीट की गई थी। बता दें कि पी विजयन और के सुधाकरण दोनों उसी कॉलेज के पूर्व छात्र थे।

मारपीट की घटना से विजयन का इंकार

हालाँकि, पिनाराई विजयन ने उनके साथ हुई मारपीट की घटना से इनकार करते हुए कहा कि उस घटना के दौरान परीक्षा देने के लिए वह कॉलेज गए थे। इस मामले में उनके शामिल होने के बाद कुछ वामपंथी छात्र कार्यकर्ता सुधाकरण को उठा ले गए थे। पी विजयन ने कॉन्ग्रेस के कुछ नेताओं द्वारा सुधाकरण के खिलाफ पहले की गई कई टिप्पणियों को भी याद किया।

बहरहाल कॉन्ग्रेस ने कहा है कि एक या दो दिन में सुधाकरण अपने नए रूप के साथ सामने आएँगे। उन्हें केरल पीसीसी का अध्यक्ष बनाकर कॉन्ग्रेस नेतृत्व विजयन को टक्कर देने के लिए एक मजबूत प्रतिद्वंद्वी खड़ा करने की नीति पर काम कर रहा है।

कोरोना के टीकों से बढ़ जाती है मर्दों की प्रजनन क्षमता: 26-36 से बढ़ कर 30-44 का आया रिजल्ट

एक शोध में कहा गया है कि फाइजर और मॉडर्ना के टीके पुरुषों की प्रजनन क्षमता को कोई नुकसान नहीं पहुँचाते। शोध में यह भी पाया गया है कि इन टीकों की दोनों खुराक लेने के बाद भी प्रतिभागियों में शुक्राणुओं का स्तर अच्छा बना रहा।

बृहस्पतिवार (17 जून 2021) को जामा पत्रिका में प्रकाशित इस अध्ययन में 18 से 50 साल के 45 स्वस्थ लोगों को शामिल किया गया था। इन लोगों को फाइजर और मॉडर्ना के टीके लगने थे। इन अध्ययन में उन लोगों को बाहर रखा गया था जिन्हें 90 दिन पहले तक कोरोना का संक्रमण हुआ था या उसके लक्षण नजर आए थे।

अध्ययन में हिस्सा लेने वाले प्रतिभागियों की जाँच कर यह सुनिश्चित किया गया था कि उन्हें पहले से ही किसी प्रकार की प्रजनन समस्या ना हो।

अध्ययन में शामिल पुरुषों के पहली खुराक लेने के 2 से 7 दिन पहले और दूसरी खुराक के करीब 70 दिनों के बाद इन लोगों के वीर्य के नमूने लिए गए। इसके बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशा-निर्देशों के आधार पर प्रशिक्षित विशेषज्ञों (एंड्रोलॉजिस्ट) ने कई मानकों पर शुक्राणुओं का विश्लेषण किया।

इसमें वीर्य की मात्रा, शुक्राणु गतिशीलता और कुल गतिशील शुक्राणुओं की संख्या (टीएमएससी) मापी गई। शोधकर्ताओं को टीकों से पहले और बाद में शुक्राणुओं में किसी भी तरह की गिरावट नहीं दिखी।

अध्ययन की शुरुआत में शुक्राणु एकाग्रता 26 मिलियन/मिलीलीटर और कुल गतिशील शुक्राणुओं की संख्या 36 मिलियन थी। वैक्सीन की दूसरी खुराक के बाद, औसत शुक्राणु सांद्रता (Concentration) बढ़कर 30 मिलियन/एमएल और औसत टीएमएससी 44 मिलियन हो गई।

शोधकर्ताओं ने कहा कि वीर्य की मात्रा और शुक्राणु की गतिशीलता में भी काफी वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि टीकों में एमआरएनए होता है न कि जीवित वायरस। इसलिए, यह संभावना नहीं है कि टीका शुक्राणु मानकों को प्रभावित करेगा।

अमेरिका की मियामी यूनिवर्सिटी के इन शोधकर्ताओं का कहना है, “पहले हुए ट्रायलों में टीकों के प्रजनन क्षमता से संबंध की जाँच नहीं हुई थी। ऐसे में प्रजनन क्षमता पर नकारात्मक असर की धारणा के चलते लोग टीके लगवाने से हिचकिचा रहे हैं। यही वजह है कि हमने शुक्राणुओं को लेकर यह मूल्यांकन किया।”

राजस्थान में रायमाता मंदिर की जमीन पर कब्जे को लेकर विवाद: आम रास्ता की बात कह प्रशासन ने 9 को किया गिरफ्तार

राजस्थान के झुंझुनूं जिले के गांगियासर गाँव के रायमाता मंदिर की जमीन से रास्ता खुला रखने की बात को लेकर दिन भर तनाव की स्थिति बनी रही। महंतों ने मंदिर की जमीन में तारबंदी कर रास्ता बंद कर दिया था, लेकिन प्रशासन ने उसे हटवा दिया और साथ ही उन पर यह दवाब भी डाला कि वह लिखित में दें कि उन्होंने यह तारबंदी हटाया है। 

मंदिर के महंत दशमगिरी ने आरोप लगाया कि मंडावा विधायक रीटा चौधरी के दबाव में प्रशासन ने यह कार्रवाई की है। पुलिस ने गांगियासर के 9 लोगों को शांतिभंग के आरोप में गिरफ्तार भी किया है। बताया जा रहा है कि मंदिर के महंत दशमगिरी व अन्य लोग मंदिर की जमीन पर पूर्णतया तारबंदी के पक्ष में थे। वहीं गाँव के कुछ लोगों की रास्ता बंद होने को लेकर आपत्ति थी। 

साभार: पत्रिका

मामले को निपटाने के लिए एसडीएम शकुंतला चौधरी, डीएसपी भंवरलाल, तहसीलदार बबीता, नायब तहसीलदार जगदीशप्रसाद मीणा, थानाधिकारी रिया चौधरी, मलसीसर एसएचओ मुकेश कुमार के अलावा बगड़ व मंडावा एसएचओ तथा पुलिस लाइन से पर्याप्त जाप्ता गाँव पहुँच गया। प्रशासन ने मंदिर के महंत दशमगिरी, बिसाऊ गणेशनाथ आश्रम के महंत रविनाथ व मंदिर कमेटी के अन्य सदस्यों से चर्चा की लेकिन बात नहीं बनी।

साभार: भास्कर

पूरे घटनाक्रम को लेकर महंत दशमगिरी ने जहाँँ प्रशासन पर दबाव डालने का आरोप लगाया है, वहीं गणेशनाथ आश्रम बिसाऊ के महंत रविनाथ ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने पूरी कार्रवाई विधायक रीटा चौधरी व जिला कलेक्टर के दबाव में की है। रास्ता देने को लेकर लिखित देने का भी दबाव बनाया गया। जिले के आला अधिकारी सहित बड़ी संख्या में पुलिस बल दिन भर मंदिर परिसर में तैनात रहे। वहीं पुलिस प्रशासन के अधिकारी दिन भर गुप्त बैठकें करते रहे। मौके पर पहुँचे एडीएम गौड़ भी पूरे मामले में चुप्पी साधे रहे।

बताया जा रहा है कि इस मंदिर की जमीन पर ‘शांतिप्रिय’ समुदाय कब्जा करना चाहती है। यह जमीन मंदिर के नाम पर है और वहाँ के एसपी, एमएलए सब मंदिर के पुजारी पर दबाव बनाकर मंदिर की जमीन से उनको रास्ता दिलवाना चाहते हैं।

एक ट्विटर यूजर ने बताया कि वहाँ का प्रशासन सरकार के कहने पर काम कर रहा है। वहाँ की एमएलए कॉन्ग्रेस की है ओर कलेक्टर भी ‘शांतिप्रिय’ समुदाय से ही है। वो किसी की सुन नहीं रहे हैं। इस मामले में 9 लड़को को शांतिभंग के आरोप में इसलिए गिरफ्तार इसलिए किया गया क्योंकि वो सब मंदिर गए हुए थे। इनका गुनाह सिर्फ इतना था कि ये शांतिप्रिय समुदाय से नहीं थे।

अन्य ट्विटर यूजर ने भी इस पर आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा, “ये तो हद हो गई है। अगर प्रशासन भी उनका ही साथ देगा तो हिंदू न्याय के लिए कहाँ जाए। कोई नहीं आप वहाँ के हिंदू एक होकर संघर्ष शुरू करें, सारा देश आपके साथ होगा। चुप बैठकर गलत होने देना महा पाप है।वहाँ के सारे हिंदू जागें।”

एक यूजर ने लिखा, “ये गलत है पहले से जब कोई घोषित रास्ता नहीं है तो उनको कोई अधिकार नहीं है उसमें रास्ता लेने का किसी की पर्सनल जगह में रास्ता लेने का कोई अधिकार नहीं है।”

सत्यवर्ती चौरसिया ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “सबसे बड़ी गलती राजस्थान के हिंदुओं की है, जिन्होंने बीजेपी के विरुद्ध वोट करके कॉन्ग्रेस को वोट दिया। जिसकी गलती थी केवल उसको वोट नहीं देता, बाकी बीजेपी नेताओं व समर्थक पार्टियों को तो जीता सकते थे। खैर,अब कॉन्ग्रेस की सच्चाई सभी के सामने आ ही चुकी है तो अबकी बार बीजेपी को वोट देना।”

खीर भवानी माता मंदिर: शुभ-अशुभ से पहले बदल जाता है कुंड के जल का रंग, अनुच्छेद-370 पर दिया था खुशहाली का संकेत

भारत के मंदिर ही उसे सबसे अलग बनाते हैं और शायद ये मंदिर ही हिंदुओं में आज भी सनातन को जीवित रखने का एक प्रमुख कारण भी हैं। भारत देश के लगभग सभी मंदिरों की अपनी कुछ मान्यताएँ और प्रथाएँ हैं। ऐसा ही एक मंदिर जम्मू-कश्मीर में स्थित है, जहाँ स्थापित है माँ दुर्गा की प्रतिमा। खीर भवानी माता के नाम से जाना जाने वाले इस मंदिर का रहस्य ही उसे सबसे अलग बनाता है और यह रहस्य है मंदिर में स्थित कुंड के जल के रंग बदलने का। इस कुंड का जल आज भी कश्मीर में आने वाली विपत्ति की सूचना देता है। तो आइए जानते हैं, क्या है मंदिर का इतिहास और कैसे लंका से यहाँ पहुँचीं खीर भवानी माता।

पौराणिक मान्यता

लंका नरेश रावण माता खीर भवानी का परम भक्त था। उसने अपनी तपस्या और साधना से माता को प्रसन्न किया था। हालाँकि जब रावण अपने अहंकारवश बुरे कामों में संलिप्त हो गया तब माता उससे नाराज रहने लगीं। लेकिन माता, रावण से तब पूरी तरह रुष्ट हो गईं जब उसने माता सीता का अपहरण कर लिया।

उसी दौरान माता सीता की तलाश में जब हनुमान जी लंका पहुँचे तब माता खीर भवानी ने हनुमान जी से कहा कि वो उन्हें किसी दूसरी जगह ले चलें। माता के आदेश का पालन करते हुए हनुमान जी माता की प्रतिमा को लंका से ले आए और उन्हें जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर से 14 किमी दूर तुलमुल गाँव में स्थापित कर दिया।

गांदरबल जिले में स्थित इस खीर भवानी माता मंदिर में माँ दुर्गा की प्रतिमा स्थापित है। स्थानीय निवासी माता को राग्या देवी के नाम से भी जानते हैं। माता को खीर का प्रसाद चढ़ाया जाता है। कहा जाता है कि उन्हें खीर अत्यधिक प्रिय है। इसी कारण मंदिर में माँ दुर्गा को खीर भवानी के नाम से जाना जाता है। माता को खीर अर्पित करने के बाद उसे श्रद्धालुओं में वितरित किया जाता है।

मंदिर में स्थापित खीर भवानी माता (फोटो साभार : पत्रिका)

इस खीर भवानी मंदिर में हर साल एक पारंपरिक मेला लगता है। जम्मू-कश्मीर समेत सभी हिन्दू श्रद्धालुओं के लिए यह मेला अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसे खीर भवानी मेला कहा जाता है। इस दौरान मंदिर में तरह-तरह के अनुष्ठान कराए जाते हैं। यहाँ आने वाले श्रद्धालु माँ दुर्गा के मंत्रोच्चार के बीच माता खीर भवानी के दर्शन करते हैं। हालाँकि पिछली वर्ष की भाँति इस वर्ष भी मंदिर में मेले का आयोजन नहीं हो सका। कोरोना वायरस संक्रमण के चलते इस बार भी मंदिर में कोविड प्रोटोकॉल के तहत ही श्रद्धालु दर्शन कर सके।

मंदिर का रहस्यमयी कुंड जो देता है विपत्ति की जानकारी

खीर भवानी माता का मंदिर अपने रहस्यमयी कुंड के लिए भी प्रसिद्ध है। ऐसा कहा जाता है कि जब भी जम्मू-कश्मीर पर कोई प्राकृतिक आपदा आती है, तब कुंड का जल अपना रंग बदल देता है। किसी प्राकृतिक आपदा की स्थिति में कुंड का जल काला हो जाता है। इससे यह संकेत मिलता है कि जम्मू-कश्मीर में कोई विपत्ति आने वाली है। 2014 की बाढ़ और कारगिल युद्ध के दौरान कुंड के जल का रंग क्रमशः काला और लाल हो गया था। हालाँकि यह कुंड घाटी की उन्नति का संकेत भी देता है। कहा जाता है कि जब अनुच्छेद-370 हटाया गया था तब कुंड का जल हरे रंग का हो गया था। जल का यह हरा रंग कश्मीर की उन्नति और खुशहाली का प्रतीक माना गया।

कैसे पहुँचे?

खीर भवानी माता मंदिर के सबसे निकटतम स्थित हवाईअड्डा श्रीनगर का है। यहाँ से लेह, जम्मू, दिल्ली, मुंबई और चंडीगढ़ जैसे शहरों के लिए फ्लाइट उपलब्ध रहती हैं। मंदिर का निकटतम रेलवे स्टेशन भी श्रीनगर ही है। यह 119 किमी लंबे बारामूला-बनिहाल रेलवे लाइन पर स्थित है। इसके अलावा सड़क मार्ग से भी खीर भवानी माता मंदिर पहुँचना आसान है। मंदिर की श्रीनगर से दूरी लगभग 14 किमी ही है। राष्ट्रीय राजमार्ग 1A और 1D श्रीनगर से जुड़े हुए हैं। यहाँ से आसानी से मंदिर तक पहुँचने के लिए कई साधन उपलब्ध हैं।  

‘देश का कानून सर्वोपरि, आपका नियम नहीं’ – शशि थरूर की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने ट्विटर को सुनाई दो टूक

केंद्र सरकार के नए आईटी नियमों को लेकर सरकार और ट्विटर में जारी तनाव के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को संसदीय समिति ने शुक्रवार (18 जून 2021) को तलब किया। इस समिति की अध्यक्षता कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर ने की।

उनके अलावा समिति की बैठक में सांसद महुआ मोइत्रा, निशिकांत दुबे, राज्यवर्धन सिंह राठौर, तेजस्वी सूर्या, संजय सेठ, जफर इस्लाम, सुभाष चंद्रा और जयदेव गल्ला शामिल रहे।

वहीं माइक्रो ब्लॉगिंग साइट्स की ओर से ट्विटर इंडिया की लोक नीति प्रबंधक शगुफ्ता कामरान और कानूनी सलाहकार आयुषी कपूर ने संसदीय समिति के समक्ष अपना पक्ष रखा। प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के मुद्दे पर तलब किए गए ट्विटर से समिति ने कई कड़े सवाल पूछे।

केंद्र सरकार के नए आईटी नियमों को लेकर संसद की स्थाई समिति ने ट्विटर से जब यह पूछा कि क्या वो देश के नियमों और कानूनों को मानता है तो उसने कहा कि वो केवल खुद की पॉलिसीज को फॉलो करता है।

ट्विटर की नीति से ऊपर है देश का कानून

रिपोर्ट के मुताबिक, ट्विटर को कड़ी फटकार लगाते हुए संसदीय समिति ने स्पष्ट सवाल किया कि भारत के कानूनों का उल्लंघन करने के मामले में आप पर जुर्माना क्यों नहीं लगाया जाए? इसके अलावा संसदीय समिति ने अमेरिकी कंपनी को स्पष्ट कहा है कि देश का कानून ही सर्वोपरि है, उसकी नीति नहीं। उसे देश के कानून का पालन करना ही होगा। सूत्रों ने कहा है कि पार्लियामेंट्री कमेटी में इस बात पर आम सहमति बनी है कि ट्विटर को आईटी एक्ट का पालन करते हुए मुख्य अनुपालन अधिकारी की नियुक्त करना चाहिए।

करीब डेढ़ घंटे की इस पूछताछ के दौरान ट्विटर से संसदीय समिति ने यह पूछा कि आपके लिए देश का कानून जरूरी है या आपकी नीति? इसके जवाब में कंपनी के अधिकारियों ने कहा कि वो भारतीय कानूनों का सम्मान करते हैं, लेकिन व्यापक हित को देखते हुए कंपनी के नियमों का पालन करते हैं।

समिति के सवालों का जवाब नहीं दे पाया ट्विटर

सूत्रों के मुताबिक पता चला है कि संसदीय समिति ने ट्विटर से कई तीखे सवाल किए थे, जिसका वो उत्तर नहीं दे पाया। इसके अलावा सांसदों ने इस विषय को भी उठाया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने पर्मानेंट अनुपालन अधिकारी के बजाय एक अंतरिम अधिकारी की नियुक्ति की है, जो वकील है।

दूसरे दौर की बैठक पर बनी सहमति

संसदीय समिति में इस बात को लेकर एक राय बनी है कि ट्विटर के अधिकारियों के साथ दूसरे दौर की वार्ता होनी चाहिए। समिति ने प्लेटफॉर्म से कुछ सवालों के लिखित जवाब माँगे हैं। गौरतलब है कि इससे पहले कई बार केंद्र सरकार नियमों के पालन, टूलकिट मामले को लेकर ट्विटर को चेतावनी दे चुकी है।