पश्चिम बंगाल, केरल, असम, तमिलनाडु और पुड्डुचेरी में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। इसमें कॉन्ग्रेस काफी आक्रामक दिखने का प्रयास कर रही है। खास कर असम और केरल में।
यहाँ पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बयान लगातार सीमाएँ लाँघ रहे हैं। कॉन्ग्रेस अध्यक्ष ने पहले केरल में क्षेत्रवाद को बढ़ावा देने वाला बयान दिया, उसके बाद उन्होंने असम में इस्लामी तुष्टीकरण की कोशिश की।
असम में खरगे का मुस्लिम तुष्टिकरण वाला दाँव
असम विधानसभा चुनाव प्रचार थमने से चंद घंटे पहले मल्लिकार्जुन खरगे ने रैली के दौरान कहा कि ” यहाँ हिन्दू और मुस्लिम भाई बैठे हैं। अगर कोई जहरीला साँप आपके सामने से गुजर रहा है और नमाज भी पढ़ रहे हैं, तो नमाज छोड़कर पहले उस जहरीली साँप को मारना। ये कुरान में है और मैं यही कहूँगा। आप नमाज तोड़ने की परवाह ना करें। जहरीला साँप है बीजेपी और आरएसएस, इसको अगर आप नहीं मारेंगे, तो आप कभी नहीं बचेंगे।”
असम जैसे संवेदनशील राज्य में, जहाँ घुसपैठियों और बांग्लादेशी मुस्लिम आबादी से जनता त्रस्त है। सरकारी जमीन पर बड़े पैमाने पर कब्जा कर चुके घुसपैठियों से असम के मूल निवासी परेशान हैं। इस चुनाव में घुसपैठियों को बाहर निकालने, एनआरसी, भूमि सुधार जैसे मुद्दे अहम बन गए हैं। ऐसे में मुस्लिमों की तुष्टिकरण के लिए कुरान और नमाज का नाम लेना और बीजेपी-आरएसएस को जहरीला साँप कहना, राजनीतिक के जबदस्त गिरते स्तर को दर्शाता है।
देश की सबसे पुरानी पार्टी कॉन्ग्रेस और उसके अध्यक्ष को यह इल्म भी नहीं है कि वह जिस पद पर हैं, उनकी बातें और बर्ताव देश के लोगों को रास्ता दिखाती है। इस तरह का बयान देकर देश को क्या संदेश देना चाहते हैं खरगे?
यही वजह है कि बीजेपी ने भी उन्हें चुनौती दे डाली है कि असम में चुनाव जीत कर दिखाएँ। गृहमंत्री शाह ने खरगे के बयान पर टिप्पणी करते हुए कहा कि चुनाव में हार का डर सता रहा है इसलिए बीजेपी-आरएसएस पर इस तरह के बयान दे रहे हैं अध्यक्ष खरगे।
गुजरातियों को ‘अनपढ़’ कहा था खरगे ने
इससे पहले केरल के इडुक्की की एक रैली में उन्होंने गुजरातियों और उत्तर भारतीय राज्यों के लोगों को नीचा दिखाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि मोदी गुजरात और दूसरे इलाकों के लोगों को बेवकूफ बना सकते हैं, क्योंकि वे अनपढ़ हैं, लेकिन केरल के लोग पढ़े-लिखे और समझदार हैं, वे बेवकूफ नहीं बनेंगे।
उन्होंने कहा, “केरल के लोग बहुत स्मार्ट हैं। वे बहुत पढ़े-लिखे हैं। मोदीजी… विजय (केरल के CM) आप दोनों गुजरात और दूसरी जगहों के अनपढ़ लोगों को बेवकूफ बना सकते हैं, लेकिन आप केरल के लोगों को बेवकूफ नहीं बना सकते।”
केरल चुनाव में जाकर गुजरात और दूसरे राज्यों के लोगों को ‘बेवकूफ’ और ‘अनपढ़’ बताना क्या राज्यों में नफरत पैदा नहीं करता? क्या एक राज्य की तुलना में दूसरे राज्य को नीचा दिखाने की ये कोशिश नहीं है? गुजरात में पिछले दो दशक से ज्यादा वक्त से कॉन्ग्रेस सत्ता में नहीं लौटी है, तो अब कॉन्ग्रेस अध्यक्ष जनता को ही ‘बेवकूफ’ समझने लगे हैं। हिन्दी राज्यों में भी पार्टी का बुरा हाल है। ऐसे में सत्ता से बेदखल होने पर जनता को ‘अनपढ़’ कहना, सिर्फ राज्यों का ही नहीं, देश का अपमान है।
हालाँकि उन्होने सोशल मीडिया पर इसके लिए खेद प्रकट कर दी और कहा कि उनके मन में गुजरातियों के लिए काफी सम्मान है। ऐसी टिप्पणियाँ रैली में कर उन्होंने जनता को ठेस पहुँचा दी और अब चुपके से खेद जता कर उसपर मरहम लगने की उम्मीद कर रहे हैं।
कर्नाटक चुनाव में पीएम मोदी को कहा था ‘साँप’
इससे पहले भी मल्लिकार्जुन खरगे ने ‘जहरीला साँप’ शब्द का इस्तेमाल किया था। वक्त था कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2023। एक चुनावी रैली के दौरान उन्होने पीएम मोदी की तुलना ‘जहरीले साँप’ से की थी। उन्होंने कहा था कि मोदी जहरीला साँप की तरह हैं। आप इसे जहर समझें या न समझें, लेकिन अगर आप इसे चखेंगे, तो मर जाएँगे…आप सोच सकते हैं कि क्या ये जहर ठीक है। खरगे के खिलाफ कोर्ट में भी अर्जी दायर की गई थी।
महाकुंभ पर भी विवादित बयान
कॉन्ग्रेस अध्यक्ष खरगे न सिर्फ मुस्लिम तुष्टिकरण वाले बयान देते हैं, बल्कि सनातन को अपमानित करने का भी कोई मौका नहीं छोड़ते। प्रयागराज महाकुंभ 2025 में जब लाखों श्रद्धालु डुबकी लगाने के लिए त्रिवेदी के तट पर जुटे थे, उस वक्त खरगे ने कहा कि डुबकी लगाने से गरीबी दूर नहीं होगी और न ही किसी का पेट भरेगा।
मध्यप्रदेश के महू में रैली के दौरान उन्होंने गंगा स्नान को रोजी-रोटी से जोड़ा और तंज कसा। यह न सिर्फ उन करोड़ों लोगों का अपमान था, जो डुबकी लगाने के लिए देश के कोने-कोने से आए थे, बल्कि यह सनातन का भी अपमान था। क्या खरगे ऐसा ही बयान किसी दूसरे धर्म की परंपरा को लेकर दे सकते हैं?
इतना ही नहीं उन्होंने पीएम मोदी और गृहमंत्री शाह के लिए कहा था कि इनलोगों ने इतने पाप किए हैं कि उन्हें डुबकी लगाने से भी स्वर्ग नहीं मिलेगा। कॉन्ग्रेस का कोई नेता महाकुंभ में डुबकी लगाने तो नहीं गया था। अब शायद बगैर डुबकी लगाए ही उन्हें स्वर्ग मिलने का भान हो गया हो, तो बात अलग है।
RSS पर प्रतिबंध लगाने की खरगे ने की थी माँग
कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 31 अक्टूबर 2025 को सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती के मौके पर कहा था कि आरएसएस पर फिर से प्रतिबंध लगा देना चाहिए। उन्होंने कहा था कि देश में कानून व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं के लिए यही संगठन जिम्मेदार है। हालाँकि उन्होंने इसे व्यक्तिगत विचार कहा, लेकिन खरगे के बयान के बाद सियासी बवाल हुआ था।
आरएसएस दुनिया की सबसे बड़ी स्वंयसेवी संस्था है। 100 साल का स्वर्णिम इतिहास वाली इस संस्था ने देश को दो सबसे सफल प्रधानमंत्री दिए हैं। एक नरेन्द्र मोदी और दूसरे अटल बिहारी वाजपेयी। समाज को सही दिशा दिखाने वाली इस संस्था को जनता ने सिर आँखों पर बिठाया है। इस पर आरोप मढ़ कर खरगे जी कॉन्ग्रेस को कैसा मार्गदर्शन कर रहे हैं?
दरअसल कॉन्ग्रेस अपनी दयनीय हालत के लिए अपने कर्मों को नहीं, देश की जनता, आरएसएस, बीजेपी और पीएम मोदी को जिम्मेदार ठहराती है। 60 साल राज करने के बाद भी जनता एक के बाद एक तीन लोकसभा चुनावों और कई राज्यों में हरा चुकी है। सत्ता से बेदखल होने का दुख खरगे जी को इतना हो गया है कि अब जनता को ही बेवकूफ और अनपढ़ समझने लगे हैं।
कॉन्ग्रेस के नेताओं के विवादित बोल हमेशा चुनाव में बीजेपी को फायदा पहुँचाते रहे हैं। चाहे वह सोनिया गाँधी का पीएम मोदी पर दिया गया ‘मौत का सौदागर’ वाला बयान हो या राहुल गाँधी का बिहार चुनाव के दौरान दिया गया ‘नाचने वाला’ बयान। फिलहाल कॉन्ग्रेस अध्यक्ष खरगे की बारी है, जिन्होंने केरल से असम तक बीजेपी-आरएसएस पर आपत्तिजनक टिप्पणी की और मुस्लिम तुष्टिकरण वाला बयान दिया।
उनका बयान विभाजनकारी, वैमनस्यपूर्ण और नफरत से भरा था। हालाँकि कॉन्ग्रेस अध्यक्ष ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि वे व्यक्तिगत बयान नहीं देते और उनके कहने का मतलब विचारधारा साँप की तरह हैं, जिसे चाटते ही मौत हो जाएगी। लेकिन राजनीति में बयान काफी मायने रखते हैं।
अब सवाल यह उठता है कि कॉन्ग्रेस ने 60 साल के शासनकाल में क्या बोया, जिसे काटते वक्त उसे जहर की याद आ रही है। भ्रष्टाचार, वंशवाद, परिवारवाद से लेकर देश के विभाजन का आरोप कॉन्ग्रेस पर लगते रहे हैं। ऐसे में अपने प्रतिद्वंदी पार्टी को निचले स्तर पर आकर गालियाँ देना उनके राजनीतिक दिवालिएपन को दर्शाता है। इतिहास गवाह है कि जब-जब कॉन्ग्रेस ने व्यक्तिगत तौर पर पीएम मोदी, बीजेपी या आरएसएस पर आपत्तिजनक बयान दिया है, बुरी तरह हारी है।












