Home Blog Page 36

एक और ‘अब्दुल’ ने दिखाई औकात, एक और हिंदू महिला की मिली सड़ती लाश: महाराष्ट्र में बच्चे की डिलीवरी के बाद ही सादिक हैवानियत पर उतरा, पढ़ें 9 ऐसे और मामले

हिंदू लड़कियाँ जब किसी इस्लामी कट्टरपंथी के झाँसे में आती हैं तो उन्हें ये मालूम चलने में काफी देर हो जाती है कि असल में उनका ‘अब्दुल’ अलग नहीं है। वो ये नहीं समझ पाती कि आज जिसके लिए वो समाज से ये कहती फिर रही हैं कि ‘मेरा अब्दुल वैसा नहीं है’, वहीं एक दिन उनकी निर्ममता से हत्या कर लाश ठिकाने लगा देगा।

हत्या ना भी कर पाया तो ऐसी हालत तो ऐसी कर ही देगा कि तुम खुद ही जीना ना चाहो। यहीं वजह है कि समय-समय पर ये बताना जरुरी हो जाता है कि किसी ‘अब्दुल’ के झूठे प्यार पर भरोसा कर हिंदू लड़कियाँ केवल ‘लव जिहाद’ का शिकार बन सकती हैं इससे ज्यादा कुछ नहीं।

महाराष्ट्र में सादिक ने की हिंदू बीवी की हत्या, पेट्रोल डालकर जलाया चेहरा

महाराष्ट्र के अकोला जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। मामले में पुलिस ने आरोपित सादिक शाह तशरीफ शाह को गिरफ्तार कर लिया है। उस पर अपनी हिंदू बीवी रवीना पवार की हत्या करने और पहचान छिपाने के लिए उसके चेहरे को पेट्रोल डालकर जलाने का आरोप है।

रवीना ने हत्या से महज आठ दिन पहले ही एक बच्चे को जन्म दिया था। घटना सोमवार (6 अप्रैल 2026) को सामने आई, जब डाबकी रोड पुलिस स्टेशन क्षेत्र में स्थित अन्नपूर्णा माता मंदिर के पास एक 30 से 32 वर्षीय महिला का आंशिक रूप से जला हुआ शव मिलने की सूचना पुलिस को मिली।

सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची, पंचनामा किया और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। महिला का चेहरा बुरी तरह से जला हुआ था, जिससे उसकी पहचान संभव नहीं हो सकी। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रेस नोट और सोशल मीडिया के जरिए जानकारी साझा की, जिसके बाद मृतका की पहचान रवीना पवार के रूप में हुई।

CCTV से हुआ खुलासा, बहन के घर में छिपा था सादिक

जाँच के दौरान शक की सुई उसके शौहर सादिक शाह पर गई, जो घटना के बाद फरार हो गया था। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए उसे वाशिम जिले के बार्शी टाकली इलाके में उसकी बहन के घर से गिरफ्तार कर लिया। जाँच में सामने आया कि सादिक और रवीना मूल रूप से वाशिम जिले के शेलू बाजार के रहने वाले थे और उन्होंने लव मैरिज की थी।

दोनों मुंबई में काम करते थे, लेकिन रवीना के प्रेग्नेंट होने के बाद हाल ही में डिलीवरी के लिए अकोला आए थे और किराए के मकान में रह रहे थे। पुलिस के अनुसार, दोनों के बीच अक्सर घरेलू विवाद होते थे, जो इस बार खतरनाक मोड़ पर पहुँच गए। आरोपित ने रवीना का गला घोंटकर हत्या कर दी और उसके बाद शव को मंदिर के पास फेंक दिया।

पहचान छिपाने के इरादे से उसने उसके चेहरे पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी और मौके से फरार हो गया। मामले की जाँच में इलाकों के CCTV फुटेज ने अहम भूमिका निभाई, जिसकी मदद से पुलिस ने आरोपित की लोकेशन ट्रेस की और उसे गिरफ्तार करने में सफलता पाई।

आरोपित की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने बाल कल्याण विभाग से समन्वय कर रवीना के बच्चे को उनके संरक्षण में सौंप दिया है, जहाँ अब उसकी देखभाल की जा रही है।

ये अकेला ऐसा मामला नहीं है, जहाँ हिंदू लड़कियों ने ‘अब्दुल’ को ‘वैसा’ नहीं समझा, फिर भी वो ऐसा ही निकला। ऐसे ही कुछ मामलों की पड़ताल हमने की।

मुंबई में हिंदू डॉक्टर ने दी जान, सुसाइट नोट में लिखी बॉयफ्रेंड फैजुल मोहम्मद की करतूत

मुंबई के एंटॉप हिल इलाके में एक हिंदू महिला डॉक्टर स्तुति सोनावने की आत्महत्या के मामले में पुलिस ने उनके बॉयफ्रेंड फैजुल मोहम्मद खान को गिरफ्तार किया था। पुलिस को डॉक्टर के कमरे से 6 पन्नों का एक भावुक सुसाइड नोट मिला था। इसमें फैजुल द्वारा किए गए मानसिक उत्पीड़न और शक का जिक्र था।

सुसाइड नोट के अनुसार, स्तुति और फैजुल की मुलाकात एक ऐप के जरिए हुई थी। स्तुति ने लिखा कि उनके बीच कई खुशहाल पल थे और फैजुल ने उनका जन्मदिन ताज होटल में भी मनाया था। बाद में फैजुल का व्यवहार बदल गया। फैजुल स्तुति पर शक करने लगा और उनके लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करने लगा, जिससे वे गहरे तनाव में चली गईं।

फैजुल स्तुति को बार-बार धमकियाँ देता था और कहता था, “तू एक दिन फ्रिज में मिलेगी”। स्तुति ने यह जानकारी अपनी सहेली को भी दी थी। इसी मानसिक तनाव के कारण उन्होंने 8 मार्च की 2026 की रात दुपट्टे से फाँसी लगाकर जान दे दी। डॉक्टर के पिता ने बताया कि 9 मार्च की सुबह जब दरवाजा तोड़ा गया, तब स्तुति का शव बरामद हुआ।

फरीदाबाद से मुजफ्फरनगर तक सेम पैटर्न: हिंदू पतियों की हत्या

इसी साल फरवरी में यूपी से हरियाणा तक मुस्लिम युवकों द्वारा हिन्दू पत्नियों को प्रेमजाल में फँसा कर पतियों की हत्या कराने का गंभीर मामला सामने आया था। फरीदाबाद और मुजफ्फरनगर में धोखे और अवैध संबंध का खुलासा होने पर पुलिस ने कड़ी कार्रवाई कर सादिक, रियाउल, कविता और सोनिया को गिरफ्तार कर लिया।

फरीदाबाद में पत्नी ने प्रेमी रियाउल के साथ मिलकर पति सुमन की हत्या कर उसका शव ट्रैक पर फेंक दिया। सुमन और उसकी पत्नी झारखंड के गोड्डा की रहने वाले थे, जबकि प्रेमी रियाउल पश्चिम बंगाल के मालदा का था। पत्नी कविता और उसका प्रेमी एक साथ फरीदाबाद के महाराजपुर में रह रहे थे।

दरअसल सुमन को उसकी पत्नी के अवैध संबंध की जानकारी हो गई थी। 30 नवंबर 2025 को सुमन की हत्या की गई और रेलवे ट्रैक पर शव रख दिया गया ताकि मौत की वजह का पता न चल सके। हालाँकि जाँच के दौरान सब सामने आ गया।

ऐसी ही एक घटना यूपी के मुजफ्फरनगर में हुई। यहाँ सोनिया ने अपने प्रेमी सादिक के साथ मिलकर पति संजीव उर्फ जीवन की गला घोंटकर हत्या कर दी और शव को कंबल में लपेट कर नाले में फेंक दिया था। सोनिया के मुताबिक, उसका प्रेम प्रसंग अपने ससुराल हरीनगर में रहने वाले सादिक से चल रहा था।

हत्या वाले दिन सोनिया ने पति संजीव को एक घर पर बुलाया था। वहाँ पहले से सादिक छिपा हुआ था। दोनों ने बेरहमी से रस्सी से गला घोंटकर संजीव की हत्या कर दी और शव को नाले में फेंक दिया। दोनों ही मामलों में हिंदू महिलाओं ने मुस्लिम प्रेमियों पर भरोसा कर अपनी जिंदगी पूरी तरह बर्बाद कर ली।

गुजरात में हिंदू लड़की के साथ लिव-इन में 3 बच्चों का अब्बू आबिद, युवती ने दी जान

गुजरात के वटवा इलाके से एक गंभीर मामला सामने आया थी। यहाँ एक मुस्लिम शख्स ने एक हिंदू लड़की को शादी का झाँसा देकर 2 साल तक धोखे में रखा। जब युवती को पता चला कि प्रेमी मोहम्मद आबिद का पहले ही निकाह हो चुका है और 3 बच्चों का अब्बू है तो वह यह सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाई और उसने आत्महत्या कर ली।

युवती पिछले 2 साल से आरोपित मोहम्मद आबिद शेख के साथ सैयादवाड़ी में लिव-इन में रह रही थी। युवती के घरवालों ने उसे कई बार समझाने की कोशिश की, लेकिन आबिद के झूठे प्यार में पागल लड़की को लगा कि वह उससे शादी करेगा। असलियत तब खुली जब आबिद ने शादी से साफ इनकार कर दिया।

इसके बाद युवती को पता चला कि वह जिसे कुँवारा समझ रही थी, वह तो 3 बच्चों का अब्बा है। 22 जनवरी 2026 को युवती का शव उसके कमरे में मिला। परिवार का आरोप है कि आबिद अक्सर उनके साथ मारपीट करता था। हिंदू युवती के हाथ पर ब्लेड के निशान और आँखों के पास चोट भी मिली। आरोपित आबिद को जुहापुरा से गिरफ्तार किया गया था।

कर्नाटक में निकाह के लिए नहीं मानी रंजीथा तो रफीक ने बीच सड़क पर गला रेत डाला

कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के येल्लापुर कस्बे में 3 जनवरी 2026 को 30 वर्षीय दलित महिला की बीच सड़क पर चाकू मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस के अनुसार, 4 जनवरी 2026 को हत्या का आरोपित रफीक इमामसाब भी जंगल में पेड़ से लटका पाया गया। जाँच के दौरान मृतका की पहचान कलम्मा नगर निवासी रंजीथा भानसोडे के रूप में हुई।

पुलिस ने बताया कि घटना वाले दिन रंजीथा अपने काम से घर लौट रही थी, तभी उस पर चाकू से हमला किया गया। हत्या का मुख्य आरोपित रफीक इमामसाब वारदात के बाद फरार हो गया था। प्रारंभिक जाँच में सामने आया कि आरोपित रंजीथा पर निकाह का दबाव बना रहा था। महिला और उसके परिवार ने इस प्रस्ताव का विरोध किया था।

निकाह से इनकार के बाद आरोपित ने चाकू से हमला कर दिया। रंजीथा की करीब 12 साल पहले महाराष्ट्र के सोलापुर निवासी सचिन कटेरा से शादी हुई थी और उनका एक बेटा है। वह अपने पति से अलग रह रही थी और येल्लापुर में अपने परिवार के साथ रहती थी और एक सरकारी स्कूल में मिड-डे मील सहायक के रूप में काम करती थी।

हरियाणा में बिलाल ने 2 साल लिव-इन में रहने के बाद की उमा की गर्दन काटी

हरियाणा के यमुनानगर में बिलाल नामक शख्स को हिंदू प्रेमिका उमा की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। करीब दो साल से लिव इन में बिलाल के साथ रह रही उमा का गर्दन कटा हुआ शव बरामद हुआ था। उमा उत्तर प्रदेश के सहारनपुर की रहने वाली थी। वह पहले से शादीशुदा थी और एक बच्चे की माँ भी थी।

वो बिलाल से शादी करने का कह रही थी लेकिन उसका दूसरी जगह निकाह तय हो गया था जिसके बाद वो उमा की हत्या की प्लानिंग करने लगा था। 14 दिसंबर 2025 को बिलाल का निकाह होना था, इससे पहले वह उमा को घुमाने के बहाने साथ लाया था। इस बीच बिलाल ने कार की सीट बेल्ट से उमा का गला घोंट दिया।

उसने शव की पहचान छिपाने के लिए उसकी गर्दन काट ली और पॉलिथीन में डालकर जंगल में फेंक दी। ताकि उसे कोई पहचान ना सके। पुलिस ने मर्डर को सुलझाने के लिए SIT गठित की थी और काफी तलाश के बाद जब पुलिस बिलाल के घर पहुँची तो उसके निकाह की तैयारी चल रही थी। मौके पर पहुँच कर पुलिस ने उसे अरेस्ट कर लिया।

गुजरात में फैजल पठान ने पहले बीवी की हत्या की फिर हिंदू गर्लफ्रेंड को भी मार डाला

गुजरात के नवसारी जिले में फैजल नासिर पठान को दो हत्याओं के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार किया था। पहले उसे हिंदू गर्लफ्रेंड रिया की हत्या मे गिरफ्तार किया गया। तभी खुलासा हुआ कि तीन महीने पहले आरोपित फैजल ने अपनी बीवी सुहाना का भी कत्ल किया था।

पुलिस को 29 अक्टूबर 2025 को खंडहर पड़े राइस मिल में महिला रिया का नग्न अवस्था में खून से लथपथ शव बरामद हुआ था। जाँच-पड़ताल के बाद पुलिस ने आरोपित फैजल नासिर पठान को गिरफ्तार कर लिया। फैजल ने बताया कि पैसों के लेनदेन पर हुए झगड़े के बाद उसने रिया की हत्या कर शव को खंडहर में छिपा दिया था।

पुलिस पूछताछ में ही फैजल नासिर ने बताया कि तीन महीने पहले जुलाई 2025 में उसने अपनी बीवी सुहाना को भी मार डाला था। उसने बताया कि सुहाना से परिवार के मर्जी के बिना निकाह किया था। इसके बाद दोनों के बीच मनमुटाव हुआ और तलाक हो गया। फिर फैजल ने सुहाना को उसी खंडहर में बुलाया और हत्या कर दी।

जबलपुर में अब्दुल समद ने पहले लक्ष्मी के पेट में घोंपा चाकू, फिर रेत दिया गला

जबलपुर के देवताल पहाड़ी पर 9 मई 2025 को 18 साल की लक्ष्मी अहिरवार की बेरहमी से हत्या हुई थी। इस खौफनाक हत्याकांड का खुलासा करते हुए पुलिस ने अब्दुल समद को गिरफ्तार किया था। हत्यारा नागपुर भागने की फिराक में था, लेकिन 48 घंटे के अंदर पुलिस ने उसे पकड़ लिया।

लक्ष्मी मूल रूप से छतरपुर के खजुराहो की रहने वाली थी। वह अपने परिवार के साथ जबलपुर में देवताल गार्डन के पास मंदिर निर्माण में मजदूरी करने आई थी। जनवरी 2025 में नागपुर में काम के दौरान उसकी मुलाकात अब्दुल से हुई। अब्दुल वहाँ वॉटर प्लांट में काम करता था। दोनों में दोस्ती हुई और फोन पर बातें शुरू हो गईं।

लक्ष्मी के खजुराहो लौटने पर अब्दुल ने उसे 10 हजार का मोबाइल गिफ्ट किया। लेकिन मई से लक्ष्मी ने उसकी कॉल्स उठाना बंद कर दिया। अब्दुल को शक हुआ कि लक्ष्मी किसी और लड़के से बात करती है। उसने लक्ष्मी के पुराने फोन की कॉल हिस्ट्री देखी, जिसमें खजुराहो के एक लड़के से बातचीत का पता चला।

लक्ष्मी ने अब्दुल के मुस्लिम होने की वजह से रिश्ता तोड़ने का फैसला किया। यह बात अब्दुल को बर्दाश्त नहीं हुई। उसने ठान लिया कि वह लक्ष्मी को सबक सिखाएगा। 7 और 8 मई को वह लक्ष्मी से मिलने जबलपुर आया। 9 मई को उसने मिठाई लाकर लक्ष्मी से कसम खाने को कहा कि वह किसी और से बात नहीं करती।

लक्ष्मी ने मिठाई खाने और कसम लेने से इनकार कर दिया। गुस्से में आगबबूला अब्दुल ने दो चाकू निकाले और लक्ष्मी पर ताबड़तोड़ वार किए। पहले पेट में चाकू घोंपा, फिर उसका गला रेत कर उसे मौत के घाट उतार दिया।

अब्दुल तो अब्दुल है, तुमसे मिलकर बदल थोड़े जाएगा

ये कुछ मामले आपके सामने हैं लेकिन कितनी ही घटनाएँ ऐसी होंगी, जिनका खुलासा ही नहीं हो सका। सोचने वाली बात है कि हर साल ऐसे मामले खबरों के रुप में सामने आते हैं, बावजूद इसके हिंदू लड़कियाँ-महिलाएँ लव जिहाद का शिकार बन रही हैं।

जैसे ही किसी अब्दुल से किसी हिंदू लड़की का प्रेम संबंध स्थापित होता है, उन्हें अपना समाज दुश्मन लगने लगता है और फिर वे कहती फिरती हैं कि ‘मेरा अब्दुल वैसा नहीं है।’ सच्चाई तो यहीं कि तुम उनके झाँसे में आकर धर्मांतरण के लिए भी राजी हो सकती हो, लेकिन अब्दुल तो अब्दुल ही रहेगा।

मिडिल ईस्ट अपडेट्स 07/04/26:अब तक 1800+ नाविक और 815000 लोग लौटे घर, जानिए सरकार ने और क्या-क्या बताया

ईरान युद्ध के कारण पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच, केंद्र सरकार ने 9 अप्रैल को रोज़ाना होने वाली अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग आयोजित की। हालाँकि अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ़्ते के संघर्ष-विराम पर सहमति बन गई है, लेकिन उल्लंघन, शांति वार्ता की शर्तों में विरोधाभास और हिंसा के फिर से शुरू होने की आशंका के चलते स्थिति अभी भी नाज़ुक बनी हुई है।

MEA ने खाड़ी देशों के साथ भारत के जुड़ाव के बारे में जानकारी दी। प्रेस वार्ता के दौरान, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर संयुक्त अरब अमीरात का दौरा करेंगे, ताकि दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूती मिले।

MEA के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि हम पश्चिम एशिया में हो रहे घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रख रहे हैं और इस क्षेत्र के देशों के साथ लगातार संपर्क में हैं। जैसा कि पहले बताया गया था, विदेश मंत्री 11-12 अप्रैल 2026 को संयुक्त अरब अमीरात की आधिकारिक यात्रा पर जाएँगे। UAE के साथ संबंध को और मजबूत करने पर जोर देंगे और व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाएँगे। खाड़ी के दूसरे देशों से भी संपर्क साधा जा रहा है। पेट्रोलियम मंत्री 9-10 अप्रैल 2026 को कतर की यात्रा पर हैं।

अतिरिक्त सचिव (खाड़ी) असीम आर महाजन ने परिस्थिति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एक 24/7 कंट्रोल रूम और मिशन, एडवाइजरी, हेल्पलाइन और स्थानीय अधिकारियों के साथ तालमेल के जरिए लगातार मदद किया जा रहा है। 28 फरवरी को ईरान और इजराइल-अमेरिका के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से 815000 यात्री पश्चिम एशिया से वापस आ चुके हैं। UAE,सऊदी अरब, ओमान और कुछ हद तक कतर का एयरस्पेस खुला हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि खाड़ी के जिन इलाकों में पाबंदियाँ हैं, वहाँ के लिए वैकल्पिक रास्तों का इंतजाम किया जा रहा है।

महाजन ने कहा कि भारत खाड़ी और पश्चिम एशिया के हालात पर करीब से नज़र रख रहा है, और एक 24/7 कंट्रोल रूम और मिशन, एडवाइज़री, हेल्पलाइन और स्थानीय अधिकारियों के साथ तालमेल के ज़रिए लगातार मदद दे रहे हैं। 28 फरवरी के बाद से 815,000 से ज़्यादा यात्री वापस आ चुके हैं, और उड़ानें उन देशों से चल रही हैं, जहाँ का एयरस्पेस खुला है। इनमें UAE, सऊदी अरब, ओमान और कुछ हद तक कतर शामिल हैं। जिन इलाकों में पाबंदियाँ हैं, जैसे- कुवैत, बहरीन, इजरायल और इराक, वहाँ के लिए वैकल्पिक रास्तों का इंतजाम किया जा रहा है। 2170 भारतीयों को आर्मेनिया और अजरबैजान के रास्ते ईरान से बाहर निकाला गया है। भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयास जारी है।

पिछले 24 घंटों में किसी भी भारतीय जहाज या नाविक से जुड़ी कोई घटना सामने नहीं आई है।

बंदरगाह जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के संयुक्त सचिव मुकेश मंगल के मुताबिक, बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय, विदेश मंत्रालय (MEA) और भारतीय मिशनों के साथ अच्छा समन्वय है। पिछले 24 घंटों में किसी भी भारतीय जहाज या नाविक से जुड़ी कोई घटना सामने नहीं आई है और जहाज GreenAsha सुरक्षित रूप से JNPA पहुँच गया है।

उन्होंने कहा कि DG शिपिंग कंट्रोल रूम ने 5600 से ज्यादा कॉल और 12000 ईमेल का निपटारा किया है। इनमें पिछले 24 घंटों में आए 166 कॉल और 317 ईमेल शामिल हैं। अब तक 1800 से ज्यादा भारतीय नाविकों को सुरक्षित स्वदेश वापस लाया जा चुका है, जिनमें हाल ही में लौटे 49 नाविक भी शामिल हैं। बंदरगाहों पर काम सामान्य रूप से चल रहा है और नाविकों के कल्याण और समुद्री गतिविधियों में कोई रुकावट न आए, यह सुनिश्चित करने के प्रयास लगातार जारी हैं।

वैश्विक आपूर्ति में रुकावट के बावजूद दवाओं की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। फार्मास्यूटिकल्स विभाग के आधिकारिक प्रतिनिधि और रसायन उर्वरक मंत्रालय के संयुक्त सचिव सत्यप्रकाश ने माना कि ईरान युद्ध के कारण दवा बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की वैश्विक आपूर्ति में रुकावट आई है। हालाँकि, भारत में दवाओं की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं।

संकट में फार्मा क्षेत्र को सहारा देने के लिए केंद्र सरकार ने 40 पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर सीमा शुल्क घटाकर शून्य कर दिया है।

इसके अलावा, सरकार प्रमुख मंत्रालयों के साथ समन्वय कर रही है ताकि प्रोपलीन, अमोनिया और मेथनॉल जैसे महत्वपूर्ण कच्चे माल की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। ये चीजें आइबुप्रोफेन जैसी दवाओं के लिए जरूरी हैं। मंत्रालय ने बताया कि मॉर्फोलिन और पैकेजिंग सामग्री की आपूर्ति का प्रबंधन भी किया जा रहा है।

संयुक्त सचिव ने कहा, “पश्चिम एशिया संकट के कारण फार्मा इनपुट की वैश्विक आपूर्ति में रुकावट आई है, जिसका असर सॉल्वैंट्स और APIs (दवाओं में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल) पर पड़ा है। हालाँकि दवाओं की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। इस क्षेत्र को सहारा देने के लिए सरकार ने 40 पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर सीमा शुल्क घटाकर शून्य कर दिया है। फार्मा और पेट्रोकेमिकल्स के बीच मजबूत जुड़ाव को देखते हुए, सरकार प्रमुख मंत्रालयों के साथ समन्वय कर रही है ताकि प्रोपलीन, अमोनिया और मेथनॉल जैसे महत्वपूर्ण इनपुट की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। ये आइबुप्रोफेन जैसी दवाओं के लिए जरूरी हैं।”

उन्होंने कहा कि मेथनॉल की आपूर्ति अभी भी हालाँकि चिंता का विषय बनी हुई है। घरेलू उत्पादक आगे आ रहे हैं और लॉजिस्टिक्स को मजबूत किया जा रहा है। मॉर्फोलिन और पैकेजिंग सामग्री जैसे अन्य इनपुट का प्रबंधन भी किया जा रहा है। उम्मीद है कि स्थिति जल्द ही सामान्य हो जाएगी। कुल मिलाकर, सरकार दवाओं के उत्पादन में किसी भी तरह का व्यवधान नहीं आने देना चाहती है। इस पर सरकार की कड़ी नजर है।

LPG में घरेलू ग्राहकों को प्राथमिकता

पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने गुरुवार को मीडिया को बताया कि पश्चिम एशिया संकट के कारण भारत में LPG की सप्लाई पर असर पड़ा है, क्योंकि देश की 60% LPG जरूरतें आयात से पूरी होती हैं। सरकार ने घरेलू ग्राहकों को प्राथमिकता दी है। इसके अलावा ऑनलाइन बुकिंग 98% तक पहुँच गई है, और OTP आधारित LPG डिलीवरी 92% पर है।

मंत्रालय ने माना कि सप्लाई चेन में रुकावटों के कारण कमर्शियल LPG पर असर पड़ा है। हालाँकि इसे लगभग 70% तक बहाल कर दिया गया है।

संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के मुताबिक, “घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी गई है, और 100% सप्लाई सुनिश्चित की गई है। किसी भी LPG डिस्ट्रीब्यूटर के पास स्टॉक खत्म होने की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है। 51 लाख से ज्यादा घरों में LPG सिलेंडर की डिलीवरी हुई। हमारी ऑनलाइन बुकिंग 98% तक पहुँच गई है। OTP आधारित LPG डिलीवरी 92% पर है। कमर्शियल LPG पर कुछ असर पड़ा है। हालाँकि इसे लगभग 70% तक बहाल कर दिया गया है। फार्मास्यूटिकल्स, फूड, पॉलीमर्स, कृषि, पैकेजिंग और पेंट्स जैसे सेक्टरों के लिए थोक गैर-घरेलू LPG सप्लाई भी बहाल कर दी गई है।”

इसके अलावा, पेट्रोलियम मंत्रालय ने बताया कि छात्रों और मजदूरों की मदद के लिए 5 kg LPG सिलेंडरों की सप्लाई बढ़ा दी गई है। तेल मार्केटिंग कंपनियों ने लोगों में जागरूकता पैदा करने के लिए कैंप भी लगाए गए हैं।

मंत्रालय के मुताबिक, “छात्रों और मजदूरों की मदद के लिए 5 kg LPG सिलेंडरों की सप्लाई बढ़ा दी गई है। पिछले हफ़्ते में, तेल मार्केटिंग कंपनियों ने 2000 से ज्यादा जागरूकता कैंप लगाए। एक ही दिन में 1.06 लाख से ज्यादा 5 kg सिलेंडर बिके, जबकि फरवरी में औसत बिक्री लगभग 77,000 थी। 23 मार्च से अब तक ऐसे लगभग 10 लाख सिलेंडर बिक चुके हैं।”

अरफा के लिए US-इजरायल की मार से तबाह हुआ ईरान ‘विश्वगुरु’, वो सुपरपॉवर भी: ‘उम्माह’ के लिए कुछ भी करेगा ‘इस्लामी’ इकोसिस्टम, समझें इनका दोहरापन

अरफा खानम शेरवानी जिन्हें हम सब ‘अरफा’ के नाम से जानते हैं, एक बार फिर अपने दोगले चेहरे का प्रदर्शन कर रही हैं। बुधवार (08 अप्रैल 2026) को ही उन्होंने दो पोस्ट किए। पहले पोस्ट में लिखा कि “ईरान उभर के सामने आया है” और दूसरे में सीधे घोषणा कर दी- “I have no hesitation in saying that after defeating America, Iran is now the ultimate ‘Vishwa Guru’ of the world”। फिर ईरान दूतावास की पोस्ट को कोट करते हुए लिख दिया, “Hello Superpower 👋”। वाह रे अरफा! विश्वगुरु? सचमुच?

याद दिला दें कि जब भारत के संदर्भ में ‘विश्वगुरु’ शब्द आता है तो इन कॉन्ग्रेसियों और इस्लामी इकोसिस्टम वालों को चिढ़ मच जाती है। जब पीएम मोदी ने जब भारत को विश्वगुरु बनाने की बात की तो इन्हें हँसी आ गई, ट्रोलिंग शुरू हो गई। लेकिन आज अस्थाई संघर्ष-विराम के मौके पर अचानक ईरान को ‘विश्वगुरु’ और ‘सुपरपावर‘ बताने लगी हैं। समझते भी हैं ये लोग कि विश्वगुरु होने का मतलब क्या होता है? या फिर बस उम्माह का झंडा लेकर घूमने का बहाना चाहिए?

अरफा, कल तक तुम अयातोल्ला की ख़िलाफ़त कर रही थीं। महिला अधिकार, मानवाधिकार, फ्रीडम ऑफ़ एक्सप्रेशन के नाम पर ईरान की तानाशाही को कोस रही थीं। फिर अचानक अमेरिका के खिलाफ़ ‘इस्लामी उम्माह’ का नारा लगाने लगीं।

और अब? अस्थाई सीजफायर होते ही ईरान को विश्वगुरु साबित करने में जुट गईं।

क्यों?

क्योंकि तुम्हारा सहोदर पाकिस्तान वहाँ दलाली करने लगा था। बात अब उम्माह की हो गई है ना?

वर्ना उसी ईरान के मूल निवासियों (पारसियों) को भारत ने अपने घर में पनाह दी है। बिना किसी परेशानी के। वे यहाँ फल-फूल रहे हैं, व्यापार कर रहे हैं, पढ़ रहे हैं, परिवार चला रहे हैं। लेकिन अरफा को समस्या भारत से इस बात की है कि वो तमाम झंझावातों के बीच भी अपने सभी लोगों का ख्याल रख रहा है। उसी ईरान से लोगों को बाहर निकालकर ला रहा है, जिसमें अधिकतर इसके मुस्लिम भाई ही हैं। फिर भी इन नमकहरामों के मन में भारत के प्रति इतनी घृणा बैठी हुई है कि बर्बाद हो चुके ईरान में उन्हें विश्वगुरु दिखने लगा है।

इसे ही कहते हैं दोगलापन। ये खाएँगी भारत का, भारत की हवा-पानी, भारत की आजादी, भारत की मीडिया में छूट, भारत की सिक्योरिटी। लेकिन गाएँगी ईरान का, पाकिस्तान का, लेबनान का, गाजा का… या हर उस जगह का जहाँ इनके उम्माह वाले दिखेंगे। हाँ भाई, क्यों नहीं? क्योंकि ये तो ‘काफिरों’ का देश है ना। तो इनका प्रेम ‘अपने’ उम्माह भाइयों पर ही रहेगा। चाहे वहाँ लाखों मार दिए जाएँ (अयातोल्लाओं की ओर से) या इनके बंधु पूरी दुनिया को बम-धमाकों में उड़ाते रहें जन्नत के नाम पर।

अभी उसी ईरान से तस्वीरें सामने आई हैं, जिसमें अपने पुलों को बचाने के लिए ईरान महिलाओं और बच्चों की ह्यूमन चेन बना रहा है। महिलाएँ, बच्चे – जिनकी सुरक्षा के नाम पर अरफा पहले चिल्लाती थीं- आज उनको ढाल बनाकर पुल बचा रहे हैं। और अरफा? उन्हें ‘विश्वगुरु’ कह रही हैं। वाह रे दोगलों! कल तक महिला-वाद के नाम पर अयातोल्ला को कोसती थीं, आज वही महिलाएँ ह्यूमन शील्ड बन रही हैं तो मुँह बंद। क्योंकि अब उम्माह का मुद्दा आ गया।

अरफा तुम The Wire की सीनियर एडिटर हो, AMU की एलुम्ना हो। तुम्हारा पूरा इकोसिस्टम कॉन्ग्रेस और इस्लामी लॉबी का है। तुम्हें हमेशा ‘सेकुलरिज्म’ का ढोंग रचाना पड़ता है। लेकिन जब बात अपनी आती है तो असली चेहरा सामने आ जाता है। पाकिस्तान से प्यार, ईरान से प्यार, गाजा से प्यार – लेकिन भारत? भारत तो बस ‘फासीवादी’ है, ‘इस्लामोफोबिक’ है। भारत ने ईरानियों को शरण दी, उनको सुरक्षा दी, लेकिन तुम्हें ये सहन नहीं होता। क्योंकि तुम्हारा दिल कहीं और बसता है। तुम्हें भारत की तरक्की, भारत की मजबूती, भारत की विश्व पटल पर बढ़ती पहचान कभी रास नहीं आई।

देखो अरफा, विश्वगुरु बनने के लिए सिर्फ़ एक युद्ध में अमेरिका से टकराना काफी नहीं होता। विश्वगुरु वो होता है जो अपने नागरिकों की रक्षा करे, महिलाओं को आजादी दे, बच्चों को भविष्य दे, अर्थव्यवस्था को मजबूत करे। ईरान में आज महिलाएँ हिजाब के नाम पर कोड़े खा रही हैं, विरोध करने पर जेल जा रही हैं। लेकिन तुम्हें वो ‘सुपरपावर’ दिख रहा है। क्योंकि तुम्हारा एजेंडा हिंदुस्तान को नीचा दिखाना है। तुम चाहती हो कि भारत हमेशा ‘दूसरे’ देशों के मुकाबले छोटा दिखे।

ये दोगलापन सिर्फ़ तुम्हारा नहीं, पूरे उस इकोसिस्टम का है जिसमें तुम खड़ी हो। कल अमेरिका दुश्मन था, आज ईरान हीरो बन गया। कल पाकिस्तान ‘पीस’ का दूत था, आज ईरान ‘विश्वगुरु’। कल महिला अधिकार, आज उम्माह। कल सेकुलर, आज इस्लामी ब्रदरहुड। ये चरित्रहीनता है। ये नमकहरामी है।

अरफा, तुम भारत में बैठकर ईरान का गान गा सकती हो। लेकिन हकीकत ये है कि भारत ने तुम्हें वो आजादी दी है जो ईरान में कभी नहीं मिलेगी। तुम बिना हिजाब के घूम सकती हो, बिना डरे बोल सकती हो, बिना जेल गए आलोचना कर सकती हो। लेकिन तुम्हें ये आजादी भी भारत से ही मिली है। फिर भी तुम्हारा दिल ईरान और पाकिस्तान के लिए धड़कता है।

ये ही तो दुख की बात है। भारत तुम्हें खिला-पिला रहा है, लेकिन तुम्हारा प्रेम ‘अपने’ उम्माह भाइयों के लिए है। बर्बाद ईरान में विश्वगुरु ढूँढ रही हो, जबकि असली विश्वगुरु वो देश है जो तुम्हें शरण दे रहा है। लेकिन तुम्हारा? वाह रे दोगलों… वाह!

‘पूरे सभ्यता का कर दूँगा नाश’ से लेकर ‘लोगों को मारकर आया मजा’ तक: पढ़िए 40 दिन में कितने हिंसक हुए ट्रंप, कभी बौराए हुए थे नोबेल सम्मान के लिए

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने 8 युद्ध रुकवाने के नाम पर नोबल शांति पुरस्कार की माँग की थी, लेकिन पुरस्कार नहीं मिला। फिर क्या था, ट्रंप ने दिखाया अपना असली रंग। नोबल देने वाली समिति से लेकर नार्वे, डेनमार्क और दूसरे नाटो के सदस्यों, कनाडा और कई देशों को धमकाते-धमकाते वेनेजुएला और फिर ईरान पर हमलावर हो गए।

ईरान युद्ध के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने कभी युद्ध जीत लेने की बात कही, तो कभी ईरान को गालियाँ दी। इतना ही नहीं, उन्होंने एक रात में ईरानी सभ्यता को नष्ट करने और ‘पाषाण युग’ में भेज देने का दावा भी किया। साथ ही, यह भी कहा कि ईरानी हमले का ‘टारगेट’ पूरा कर लिया गया है। रिजीम बदल दिया गया है, क्योंकि सारे बड़े नेता मारे गए हैं। पिछले करीब 40 दिनों में उनके बयान से अंदाजा लगाया जा सकता है कि ‘विश्वशांति के दूत’ बनने वाले ट्रंप का चाल, चरित्र और चेहरा क्या है।

युद्ध की शुरुआत से लेकर सीजफायर तक ट्रंप ने कई विध्वंसक बयान दिए। अमेरिका और इजरायल के हमले में जब ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की मौत हो गई थी, तो उन्होंने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि खामेनेई ने उन्हें दो बार मारने की कोशिश की, इसलिए उसे मार दिया।

मोज्तबा खामेनेई के जिंदा रहने की बात कहते हुए कहा था कि नए सुप्रीम लीडर खामेनेई ज्यादा दिनों तक सुरक्षित नहीं रह पाएगा। ट्रंप ने कहा कि जो नए लीडर बन सकते थे वे ज्यादातर मर चुके हैं।

ईरानी युद्धपोत को डुबोने पर ‘मजा’ आया

ईरान का युद्धपोत IRIS डेना जब हिन्द महासागर में श्रीलंका के तट के पास से गुजर रहा था तो अमेरिकी पनडुब्बी ने टॉरपीडो हमले से ईरान के आधुनिक युद्धपोत IRIS डेना को डुबो दिया। अमेरिका ने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत करीब 46 ईरानी शिप को समुद्र में डुबोने का दावा किया। इस पर राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि उनके सैनिकों को ईरानी शिप पर कब्जा करने से ज्यादा उन्हें डुबोने में मजा आता है।

एक रात में सभ्यता के अंत की धमकी

सीजफायर से पहले 7 अप्रैल 2026 को उन्होंने ईरान को धमकाते हुए कहा था कि आज रात एक पूरी सभ्यता खत्म हो सकती है, जो वापस कभी नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि वो ऐसा नहीं चाहते हैं, लेकिन अगर ईरान ने समझौता नहीं किया तो ऐसा ही होगा।

ईरान युद्ध के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने कई बार ईरान को पूरी तरह तबाह करने की धमकी दी। अमेरिकी अल्टीमेटम से 48 घंटे पहले भी उन्होंने कहा कि अगर समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका ‘ईरान को उड़ा देगा’।

ट्रंप ने कहा, “हम ईरान के साथ अच्छी तरह बातचीत कर रहे हैं। लेकिन हम किसी नतीजे तक नहीं पहुँचे हैं। समझौते की अच्छी संभावना है। अगर नहीं हुआ, तो मैं वहाँ सब कुछ उड़ा दूँगा।”

गालियाँ देते हुए नरक में भेजने की दी धमकी

राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को 6 अप्रैल को एक बार फिर तबाह करने की धमकी दी। सोशल मीडिया पर गालियाँ देते हुए उन्होंने कहा कि पावर प्लांट डे और ब्रिज डे- दोनों एक साथ मनाएँगे वरना होर्मुज खोल दो। तुम लोगों को नरक में पहुँचा देंगे। ईरान के होर्मुज नहीं खोलने पर गालियाँ दी और ‘पाषाण युग में पहुँचा’ देने की बात कही।

इतना ही नहीं दो हफ्ते के सीजफायर के बाद भी ईरान को धमकाते हुए कहा कि अमेरिकी सेना मध्यपूर्व में रहेगी और असली समझौता नहीं हुआ तो ‘ बड़े और ज्यादा तेज हमले शुरू हो जाएँगे।’

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर नाटो देशों को धमकी

उन्होंने होर्मुज खोलने के लिए नाटो देशों से मदद माँगी और जब ज्यादातर नाटो देशों ने मदद देने से इनकार कर दिया तो कहा कि उन्हें नाटो देशों की जरूरत नहीं है। वह अपने दम पर होर्मुज को खुलवा सकते हैं। इसके बाद उन्होंने कहा कि होर्मुज के बगैर भी उनका काम चल सकता है, क्योंकि अमेरिका के पास रूस- चीन से ज्यादा खुद का तेल है और जिन देशों को होर्मुज से तेल मँगवाने की जरूरत है, वे इसके लिए कोशिश करें। अमेरिका को इसकी जरूरत नहीं है।

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका किसी देश की मदद नहीं करेगा, उन्हें अपने लिए खुद खड़ा होना होगा। इसके अलावा ट्रंप ने अमेरिका से तेल खरीदने का भी विकल्प दिया। लेकिन सीजफायर से पहले ईरान को होर्मुज नहीं खोलने पर पावर प्लांट, तेल ढाँचे को नष्ट करने की धमकी दे डाली थी।

ट्रंप ने युद्ध के दौरान यहाँ तक कहा कि ईरान अमेरिका के लिए बड़ी संख्या में तेल टैंकर भेज रहा है। ट्रंप के मुताबिक ईरान ने पहले 10 और अब कुल 20 बड़े तेल टैंकर अमेरिका को भेज रहा है, जो स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से होकर गुजरेंगे। जबकि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को इजरायल और अमेरिका के लिए बंद करने की बात कही थी।

पाषाण युग से स्वर्ण युग तक की बात

जो राष्ट्रपति ट्रंप एक हफ्ते पहले ईरान को पाषाण युग में पहुँचा देने की बात कह रहे थे, वे एक हफ्ते में ही पलट गए। ईरान और अमेरिका में दो हफ्ते के सीजफायर के बाद ‘स्वर्ण युग’ की बात कही। इस ऐतिहासिक बदलाव की बात उन्होंने सोशल मीडिया ट्रूथ पर की। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि दुनिया में तेल की आवाजाही के लिए अहम होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के लिए कहा है। ईरान इस रास्ते पर अपना नियंत्रण रखेगा।

जिस ट्रंप ने पहले ईरान के बिजली घरों और पूलों को निशाना बनाने के लिए डेडलाइन दी थी, उसने ईरान के पुनर्निमाण की प्रक्रिया शुरू करने और मध्यपूर्व के ‘स्वर्णयुग’ की बात की।

खुद को शांति का दूत बताया था ट्रंप ने

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को नोबल शांति पुरस्कार चाहिए था। उन्होने दुनियाभर में युद्ध रुकवाने का श्रेय लेते हुए कहा था कि दुनिया का कोई प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति उनके नजदीक नहीं हैं, जिन्होंने 8 युद्ध रुकवाए हों।

जिन युद्धों को रुकवाने का जिक्र किया, उसमें पाकिस्तान के खिलाफ भारत का ऑपरेशन सिंदूर भी शामिल है। इसके अलावा कंबोडिया और थाइलैंड. कोसोबो-सर्बिया, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और रवांडा, इजरायल-ईरान, मिश्र-इथियोपिया, आर्मेनिया-अजरबैजान शामिल है। इन युद्धों को रुकवाने की बात करते करते उन्होंने 15 से ज्यादा बार ‘ऑपरेशन सिंदूर’ खत्म करवाने की बात की। लेकिन सच यही है कि ऑपरेशन सिंदूर रोका गया था। इसके पीछे पाकिस्तान की गिड़गिड़ाकर युद्धविराम की भीख माँगना था, न की ट्रंप की दखलंदाजी।

शांति पुरस्कार नहीं मिलने के बाद ट्रंप आक्रामक नजर आए। उन्होंने नोबल पुरस्कार देने वाली कमेटी पर सवाल उठाए और नॉर्वे को भी धमकाया। वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति और उनकी पत्नी को रातों रात घर से उठाकर अपने देश ले गए और वेनेजुएला को अपने इशारों पर चलने के लिए विवश कर दिया। उन्होंने खुद को कार्यकारी राष्ट्रपति तक घोषित कर दिया। दरअसल ट्रंप की नजर वेनेजुएला के तेल भंडार पर थी, जिस पर अब अमेरिका का नियंत्रण है।

ट्रंप का आक्रामक रवैया उस वक्त भी सामने आया जब उसने ‘रेयर अर्थ मेटल्स’ की बहुलता वाले ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के लिए डेनमार्क को अल्टीमेटम दे दिया। उन्होंने नाटो देशों को मजबूर करने की कोशिश की, कि वे अमेरिका का समर्थन करें।

बृहत अमेरिका बनाने की मंशा से उन्होंने कनाडा को अमेरिका में मिलाकर 51वां राज्य बनाने की बात कही। इसका कनाडा में काफी विरोध भी हुआ।

विश्वशांति के लिए पुरस्कार पाने की लालसा रखने वाले ट्रंप ने शांति को काफी पीछे छोड़ दिया। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से बाहर निकलने की घोषणा कर दी और अमेरिकन फंडिंग रोक दी। विश्वभर को टैरिफ की धमकी देकर अपनी शर्तों पर ट्रेड डील करने वाले राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर सीधा आक्रमण भी किया। इजरायल के साथ मिलकर 28 फरवरी को जिस युद्ध की उन्होंने शुरुआत की, उसका मकसद ईरान को परमाणु संपन्न बनने से रोकने का बताया गया। इस दौरान ईरान को ‘जानवर’, ‘पाषाण युग में भेजना’, ‘नरक में भेजना’, तबाह कर देने से लेकर गालियाँ तक दे डाली।

ईरानी उड़ाए मजाक, नेटीजन्स कहे अमेरिका का ‘दलाल’: मिडिल ईस्ट युद्ध के बीच घुसे पाकिस्तान को हर ओर से पड़ रही लात, जानिए कैसे दोनों देशों को गुमराह करने में आतंकिस्तान का हाथ

अमेरिका और ईरान के बीच 6 हफ्तों से चल रही भीषण जंग पर दो हफ्ते के लिए ‘ब्रेक’ तो लग गया है, लेकिन इस ब्रेक के पीछे ‘शांतिदूत’ बनने की कोशिश करने वाले पाकिस्तान की अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर थू-थू हो रही है। खुद को मध्यस्थ बताने वाला पाकिस्तान अब ‘दलाली’ के आरोपों और सोशल मीडिया पर भद्दी गालियों का सामना कर रहा है। वजह है… सीजफायर की शर्तों को लेकर पैदा की गई वो गफलत, जिसने ईरान और इजरायल को फिर से आमने-सामने खड़ा कर दिया है।

प्रस्तावों की गफलत: ईरान के 10-सूत्रीय प्लान में लेबनान का जिक्र

ईरान ने युद्धविराम के लिए 10 शर्तों का एक प्रस्ताव रखा था, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बातचीत के लिए एक सही आधार माना। इस प्रस्ताव में ईरान ने मुख्य रूप से तीन बड़ी माँगें रखी थीं, पहली यह कि अमेरिका भविष्य में दोबारा हमला न करने की पक्की गारंटी दे, दूसरी यह कि व्यापार के लिए बेहद जरूरी ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ वाले समुद्री रास्ते पर ईरान का ही कब्जा बना रहे, और तीसरी सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह थी कि लेबनान में हिजबुल्लाह समेत तमाम मोर्चों पर चल रही जंग को तुरंत रोका जाए।

यही लेबनान वाला मुद्दा इस पूरे समझौते में विवाद और फजीहत की सबसे बड़ी वजह बन गया। दरअसल, पाकिस्तान ने बीच में पड़कर ईरान को यह यकीन दिला दिया था कि अमेरिका लेबनान में भी हमले रोकने के लिए तैयार है। लेकिन जैसे ही सीजफायर शुरू हुआ और इजरायल ने लेबनान पर ताबड़तोड़ बमबारी जारी रखी, वैसे ही पाकिस्तान के दावों की पोल खुल गई। इससे यह साफ हो गया कि पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच तालमेल बैठाने के बजाय गलत जानकारी फैलाई थी, जिसके कारण अब उसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी किरकिरी हो रही है।

जेडी वेंस का करारा जवाब: ‘लेबनान शामिल ही नहीं था’

जब लेबनान हमलों पर सवाल उठा, तो अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्पष्ट कर दिया कि पाकिस्तान ने ‘कन्फ्यूजन’ पैदा की है। जेडी वेंस ने कहा, “लेबनान का मुद्दा सीजफायर की शर्तों में शामिल ही नहीं था। ईरानियों को शायद गलतफहमी हुई या गलत जानकारी दी गई।” ट्रंप और नेतन्याहू ने भी साफ कर दिया कि यह सीजफायर सिर्फ ईरान और अमेरिका के बीच है, लेबनान के हिजबुल्लाह के लिए नहीं। पाकिस्तान ने अपनी ‘पीठ थपथपाने’ के चक्कर में दोनों पक्षों को अलग-अलग बातें बता दीं, जिसका नतीजा अब गालियों के रूप में सामने आ रहा है।

सोशल मीडिया पर ‘आतंकिस्तान’ की शामत: ईरानियों ने भी लताड़ा

पाकिस्तान को केवल भारत ही नहीं, बल्कि अब ईरानी नागरिक भी जमकर खरी-खोटी सुना रहे हैं। सोशल मीडिया पर #FuckPakistan ट्रेंड कर रहा है। खुद को ईरानी बताने वाले अकॉउंट्स पाकिस्तान को जमकर लताड़ रहे हैं और साथ ही भारत की तारीफ कर रहे हैं।

ثنا ابراهیمی (Sana Ebrahimi) ने साफ लिखा, “ईरानियों के पाकिस्तान से नफरत करने के कई कारण है।” फिर, “पाकिस्तान को फिर से भारत बना दो। मैं उस देश पर भरोसा नहीं करती जिसने ओसामा बिन लादेन को पनाह दी।” उन्होंने यहाँ तक कहा कि ‘जम्मू-कश्मीर भारत का है।’

کاپیتان (The Captwin) ने लिखा, “पाकिस्तानी बिना इंटरनेट के शहबाज का बचाव करने कैसे आएँगे?”, अन्य पोस्ट में लिखा, “पाकिस्तान बम।” इन्होंने भारतीय मीम्स की तारीफ की और 1971 में भारत के सामने 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों के सरेंडर की याद दिलाई।

صادُقِ زَمَند (Zamandaam) ने तंज कसा, “एक ऐसा देश जो आतंकवाद का पालना है और परमाणु बम की धमकी देता है, वो शांति कराएगा? पाकिस्तान और शांति? मज़ाक है क्या! पाकिस्तान, बांग्लादेश और मौजूदा पाकिस्तान को ‘ग्रेटर भारत’ (Greater India) में मिला देना चाहिए।”

इसके अलावा, यूजर ने लिखा, “ईरान का सबसे ज़्यादा परेशान करने वाला पड़ोसी पाकिस्तान है। यह सचमुच एक बेकार और घटिया देश है। पाकिस्तान से हमेशा एक गंदी, पिछड़ी, अंधविश्वासी और प्रदूषित सी वाइब आती है। सच कहूँ तो, मुझे हमेशा से पाकिस्तान और पाकिस्तानियों से नफरत रही है। मुझे उम्मीद है कि भारत इस बेकार और गंदे देश का किस्सा हमेशा के लिए खत्म कर देगा।”

डूब मरने की सलाह और कड़वा सच

पाकिस्तान की हालत आज उस बिन बुलाए बाराती जैसी है जो शादी में क्रेडिट लेने के चक्कर में जूते खा रहा है। एक तरफ उसका अपना मुल्क आर्थिक तंगहाली में डूबा है, और दूसरी तरफ वह दो परमाणु शक्तियों के बीच ‘शांतिदूत’ बनने का स्वांग रच रहा था। पाकिस्तान ने सोचा था कि वह इस मध्यस्थता के जरिए दुनिया में तारीफ बटोरेगा, लेकिन उसकी ‘कॉपी-पेस्ट’ कूटनीति ने उसे दुनिया के सामने एक ‘मैसेंजर बॉय’ और ‘दलाल’ बनाकर छोड़ दिया है।

ईरानियों का यह कहना कि ‘पाकिस्तान उनके पड़ोस का सबसे गंदा और बेकार देश है’, यह बताने के लिए काफी है कि मजहब के नाम पर भी पाकिस्तान की कोई इज्जत नहीं बची है। भारत की विदेश नीति जहाँ स्वतंत्र और अडिग है, वहीं पाकिस्तान आज भी ‘किराए के बिचौलिए’ से ज्यादा कुछ नहीं बन पाया। कुल मिलाकर, पाकिस्तान के लिए यह सीजफायर ‘गले की हड्डी’ बन गया है, न निगलते बन रहा है, न उगलते।

आम दिनों में करो महिलाओं का अपमान, चुनावों के वक्त चिल्लाओ ‘नारीवाद’: कॉन्ग्रेसी नेताओं की दोगलई फिर उजागर, फेक वीडियो देख उड़ाया पत्रकार का मजाक

कॉन्ग्रेस पार्टी जिसका नारा रहा है-‘लड़की हूँ लड़ सकती हूँ’, लेकिन उसने कभी लड़कियों, महिलाओं की इज्जत को समाज में उछालने में कोई शर्म नहीं की है। पार्टी के नेता कभी सोशल मीडिया पर तो कभी किसी इंटरव्यू में नारी को मजाक का केंद्र बनाते रहे हैं। अब कॉन्ग्रेस नेत्री डॉक्टर रागिनी नायक ने भी इसी नीचता में अपनी सहभागिता सुनिश्चित की है।

रागिनी नायक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आज तक की एंकर और पत्रकार चित्रा त्रिपाठी का एक वीडियो शेयर करते हुए ना सिर्फ उनका अपमान किया है, बल्कि सच्चाई सामने आने के बावजूद अपने पोस्ट को डिलीट नहीं किया है। आईए जानते हैं कि वीडियो में क्या है और कैसे कॉन्ग्रेस पार्टी का इतिहास ही हमेशा महिलाओं के अपमान का रहा है।

इस फेक वीडियो में कथित तौर पर चित्रा कहती दिखती हैं, “बलूचिस्तान को देखिए, खैबर पख्तूनख्वा को देखिए।” इस पर पाकिस्तानी कहता है, “चित्रा जी बलूचिस्तान को देखने के लिए जनरल आसिफ मुनीर काफी हैं, मैं तो सिर्फ आपको ही देखूँगा आज, अगर मेरी नजरें आपसे हटी तो 50 किलो मेकअप, जो आप अपने चेहरे पर थोप के आई हैं उसका क्या फायदा?”

इस पर चित्रा कहती हैं, “मेकअप पर टिप्पणी मत करिए, आपके पाकिस्तान में भी खातूने करती हैं मेकअप।” तो वह कहता है, “बिल्कुल पाकिस्तानी औरतें मेकअप करती हैं, मगर अपने खर्चे से, आपके मेकअप का खर्चा तो मोदी जी का है ना।”

वीडियो के साथ रागिनी नायक ने लिखा, “चित्रा – मेरे Makeup पर टिप्पणी मत करिए..पाकिस्तानी खातूनें भी Makeup करती हैं। Pak पैनलिस्ट- बिल्कुल, पाकिस्तानी औरतें Makeup करती हैं, पर अपने खर्चे से..आपके Makeup का खर्चा मोदी जी का है ना। पाकिस्तानियों को शो पर बुला कर, उनके हाथों यूँ जलील होने की क्या मजबूरी है भला ???”

अगले ही ट्वीट में रागिनी नायक ने लिखा, “अब चित्रा कह रही हैं कि ये Video Fake है! चलिए अच्छा है! ऐसी बेइज्जती तो भगवान दुश्मन की भी ना कराए!” सोचने वाली बात है कि अगर चित्रा ने ये पुष्टि कर दी है कि वीडियो फेक है और रागिनी यह मान भी रहीं है तो भी अपना पोस्ट हटाया क्यों नहीं।

दरअसल उनका असल मुद्दा तो केवल एक महिला का मजाक उड़ाना था, बेइज्जती करना था। वो भी तब, जब बेइज्जती कर रहा व्यक्ति पाकिस्तान जैसे आतंकी देश का हो। साफ समझा जा सकता है कि नारीवाद के नाम पर चिल्लाने वाली इस पार्टी की नेताओं की मानसिकता क्या है।

इन्होंने ये बातें एक फर्जी वीडियो पर बोली हैं। यानी इन्हें प्रमाणिकता से लेना-देना नहीं होता, पाकिस्तान ही अगर इनके मतलब की बात कर देगा तो ये उसे कोट करके भारतीयों का मजाक उड़ा लेंगे।

रागिनी के साथ अलका लांबा को भी चित्रा त्रिपाठी ने दी नसीहत

कॉन्ग्रेस नत्री अलका लांबा ने भी X पर वहीं वीडियो शेयर करते हुए लिखा था, “चित्रा की क्या मजबूरी होगी जो पाकिस्तान के लोगों को अपने चैनल/शो में बुला कर चर्चा करवाने की? और यूँ उनके हाथों जलील होने की ??” अलका लांबा की पोस्ट पर जवाब देते हुए चित्रा ने लिखा, “अलका लांबा जी पाकिस्तान का यूट्यूबर अपने व्यूज बढ़ाने के लिये मेरे वीडियो में काँट छाँट करके फेक न्यूज तैयार करता है। आजतक कभी भी ये व्यक्ति मेरे शो का हिस्सा नहीं रहा।”

चित्रा ने आगे लिखा, “हैरानी होती हूँ जब कॉन्ग्रेस के बड़े पद पर बैठी महिला एक न्यूज एंकर के पीछे पड़ जाये, आप लगातार मेरे उपर टिप्पणी करती हैं और मैं इग्नोर करती हूँ। मगर मैडम पाकिस्तानी फेक न्यूज के एजेंडे में मत पड़ें। पाकिस्तान से आपकी मोहब्बत आपका ही नुकसान करेगी।”

मंडी में रं&… रेट सही मिलता है’: कॉन्ग्रेसियों ने कंगना रनौत पर की थी अभद्र टिप्पणी

भाजपा की ओर से हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा सीट से अभिनेत्री कंगना रनौत को टिकट मिलने के बाद उनके खिलाफ भी अभद्र टिप्पणियों की बाढ़ आ गई थी। टिप्पणी करने वालों में कॉन्ग्रेस के पदाधिकारी और इस्लामी नामों वाले अकाउंट थे।

खुद को नारीवादी और पत्रकार बताने वाली मृणाल पांडे ने एक्स पर लिखा, “शायद यूँ कि मंडी में सही रेट मिलता है?” हालाँकि चौतरफा छीछालेदर के बाद कॉन्ग्रेसी मुखपत्र नेशनल हेराल्ड की संपादक मृणाल पांडे ने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया।

कॉन्ग्रेस की ही राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत के अकाउंट से लिखा गया, “क्या भाव चल रहा है मंडी में कोई बताएगा?” यह पोस्ट भी श्रीनेत के अकाउंट से हटा दिया गया है। इस पर सुप्रिया श्रीनेत ने सफाई दी है कि उनके फेसबुक और इन्स्टाग्राम अकाउंट को किसी और का भी एक्सेस था और उसने यह पोस्ट की। उन्होंने कहा है कि वह ऐसा पोस्ट कभी नहीं करती।

सबसे घटिया बात कि कंगना का विरोध करने वालों ने भाषाई स्तर की बिलकुल भी परवाह नहीं की। एक और ट्विटर यूजर ने कंगना की एक फोटो के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया।

‘भगवा रंग की ब्रा पहन भक्तों को जवाब दें’: पठान के बचाव में कॉन्ग्रेसी उदित राज का बयान

बॉलीवुड एक्टर शाहरुख खान की फिल्म पठान (Pathaan) में ‘भगवा रंग’ के गाने को लेकर काफी विवाद हुआ था। इस बीच कॉन्ग्रेस के नेता उदित राज (Udit Raj) ने नारीवादियों से भगवा रंग की बिकनी और ब्रा पहनने की सलाह दी थी। इसको लेकर वो सोशल मीडिया यूजर के निशाने पर भी आ गए थे।

अक्सर विवादों में रहने वाले भाजपा के पूर्व नेता और वर्तमान में कॉन्ग्रेस पार्टी में शामिल उदित राज ने अपने ट्वीट में लिखा था, “स्त्रीवादियों से मेरी सलाह है बिकनी और ब्रा आदि भगवा रंग का ही पहनकर इन भक्तों को जवाब दें।” सोशल मीडिया पर एक यूजर ने लिखा कि इसकी शुरुआत उन्हें अपने घर से करनी चाहिए।

वहीं कुछ यूजर ने उन्हें मानसिक रूप से बीमार बताया है। एक अन्य यूजर ने लिखा, “जरा अपनी पार्टी के सबसे बड़े लीडर तक यह जवाब पहुँचा तो दो। यह जानबूझकर खाली सुनवाने के लिए यह ट्वीट किया गया लगता है। कसम खा लिए हो जबतक राहुल गांँधी को कॉन्ग्रेस का अध्यक्ष नहीं बना देते ऐसे ही passive mode में गाली सुनवाते रहेंगे।”

अपनी असली मानसिकता स्वीकारो: नारीवाद को लेकर ढोंग क्यों?

देखा जाए तो कॉन्ग्रेस पार्टी को किसी भी महिला की इज्जत से कोई खास फर्क पड़ता नहीं है, तो फिर सवाल ये है कि नारीवाद-नारीवाद चिल्लाने की जरुरत क्या है? ये वहीं पार्टी है, जिसने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिवगंत माँ को भी नहीं छोड़ा था। पार्टी अपने फायदे के लिए किसी को भी निशाना बना सकती है, चाहे आधार ही झूठा क्यों ना निकल जाए।

जिस पार्टी में देश की आधी आबादी की भी इज्जत ना हो, वह पार्टी, ‘लड़की हूँ लड़ सकती हूँ’ जैसे नारे देकर ऐसे झूठे दिखावे करती है। सब छोड़िए पार्टी की महिला नेत्री भी खुद महिला होकर जब एक महिला की सरेआम बेइज्जती कर सकती हैं, तो फिर पार्टी के अन्य नेताओं से तो महिलाओं की इज्जत की क्या ही उम्मीद करना।




TOI ने मोदी सरकार के असली बयान से की छेड़छाड़, ईरान-अमेरिका सीजफायर की खबर में जबरन घुसाया ‘पाकिस्तान’ का नाम: पढ़िए कैसे किया खेल

मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के सीजफायर का भारत ने खुले दिल से स्वागत किया है। भारत सरकार ने इसे वैश्विक स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा के लिए जरूरी बताया, लेकिन इस सकारात्मक खबर के बीच अंग्रेजी अखबार ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ (TOI) ने एक ऐसा नैरेटिव सेट करने की कोशिश की, जिससे भारत की कूटनीति से ज्यादा पाकिस्तान की ‘महारत’ की बू आ रही है।

भारत ने क्या कहा?

भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने बुधवार (8 अप्रैल 2026) को बेहद संतुलित बयान जारी किया। भारत ने कहा कि हम इस युद्धविराम (Ceasefire) का स्वागत करते हैं और उम्मीद करते हैं कि इससे पश्चिम में स्थायी शांति का रास्ता साफ होगा। भारत ने शुरू से ही ‘डिएस्केलेशन, डायलॉग और डिप्लोमेसी’ (तनाव कम करना, संवाद और कूटनीति) पर जोर दिया है।

भारत की सबसे बड़ी चिंता वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर थी। मंत्रालय ने स्पष्ट कहा कि युद्ध ने लोगों को बहुत कष्ट दिए हैं, और वैश्विक व्यापार को बाधित किया है, इसलिए व्यापारिक जहाजों की आवाजाही बिना किसी रोक-टोक के होनी चाहिए।

‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्टिंग: भारत के नाम पर पाकिस्तान की ब्रांडिंग

हैरानी की बात यह है कि जहाँ भारत ने अपने बयान में कहीं भी पाकिस्तान का जिक्र तक नहीं किया, वहीं ‘टाइम्स ऑफ इंडिया‘ ने अपनी रिपोर्ट की हेडलाइन में ही लिख दिया, “भारत ने पाकिस्तान की मध्यस्थता वाले युद्धविराम का स्वागत किया।” TOI ने अपनी रिपोर्ट में भारत के स्वागत को सीधे तौर पर पाकिस्तान की ‘सफलता’ से जोड़ दिया।

TOI की रिपोर्ट में यह दिखाने की कोशिश की गई कि पाकिस्तान एक बहुत बड़ा ‘इंटरमीडियरी’ (बिचौलिया) बनकर उभरा है। इतना ही नहीं, TOI ने यह भी दावा कर दिया कि MEA प्रवक्ता ने उम्मीद जताई है कि पाकिस्तान की इस ‘कोशिश’ से यूक्रेन युद्ध में भी शांति का रास्ता निकलेगा। यह एक तरह से भारत के बयान के कंधे पर रखकर पाकिस्तान की कूटनीतिक जीत का ढोल पीटने जैसा है।

क्या छिपाने की कोशिश की गई?

TOI की रिपोर्ट में पाकिस्तान के ‘ब्रोकर’ रोल को तो बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया। लेकिन इस बात को दबा दिया गया कि भारत का रुख हमेशा से ‘थर्ड पार्टी मेडिएशन’ (तीसरे पक्ष की मध्यस्थता) के खिलाफ रहा है। भारत का स्टैंड साफ है कि पाकिस्तान आतंकवाद का गढ़ है और जब तक वह सरहद पार आतंकवाद नहीं रोकता, भारत उससे कोई बात नहीं करेगा। लेकिन TOI ने इसे ऐसे पेश किया जैसे भारत को इस बात का डर है कि पाकिस्तान को इस शांति प्रक्रिया से ‘अंतरराष्ट्रीय वैधता’ मिल जाएगी।

होर्मुज मार्ग और भारत की प्राथमिकता

भारत की असली प्राथमिकता होर्मुज रास्ते से अपने LPG टैंकरों को सुरक्षित निकालना और खाड़ी देशों में रहने वाले 1 करोड़ भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। भारत ने सीजफायर का स्वागत इसी व्यावहारिक आधार पर किया है, ना कि पाकिस्तान की मेजबानी की खुशी में। लेकिन TOI की रिपोर्ट में ऐसा महसूस कराया गया कि भारत पाकिस्तान की इस नई ‘भूमिका’ से असहज है।

पत्रकारिता या पड़ोसी की वकालत?

TOI की इस पूरी रिपोर्ट को पढ़कर ऐसा लगता है कि जैसे खबर का फोकस भारत का बयान नहीं, बल्कि पाकिस्तान की इमेज चमकाना है। भारत ने ‘शांति’ का स्वागत किया था, पाकिस्तान की ‘मध्यस्थता’ का नहीं। विदेश मंत्रालय के बयान में कहीं भी पाकिस्तान के प्रति कृतज्ञता नहीं थी, लेकिन ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ ने अपनी रिपोर्ट में शब्दों की बाजीगरी कर इसे ‘पाकिस्तान ब्रोकर्ड’ (पाकिस्तान द्वारा कराया गया) करार दे दिया।

यह जानते हुए भी कि पाकिस्तान और भारत के संबंध तनावपूर्ण हैं और भारत द्विपक्षीय मसलों में किसी तीसरे की दखल पसंद नहीं करता, TOI ने पाकिस्तान को एक ‘ग्लोबल पीसमेकर’ के रूप में पेश करने की कोशिश की। सरल शब्दों में कहें तो, भारत ने जो कहा वो ‘डिप्लोमेसी’ थी। लेकिन उसे जिस तरह रिपोर्ट किया गया वो ‘पाकिस्तान प्रेम’ की चाशनी में डूबा हुआ नैरेटिव था। भारत की चिंता अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर थी, जिसे TOI ने पाकिस्तान की तथाकथित इंटरनेशनल सफलता के डर में बदल दिया।

गौरव गोगोई ने इंटरनेट पर मौजूद खाली घरों की तस्वीरों को ‘चुराया’, कहा- इसे मेरे दोस्त ने दुबई से भेजा: नेटीजन्स भड़के, पूछा- क्या सिर्फ Fake न्यूज फैलाते हो?

कॉन्ग्रेस सांसद गौरव गोगोई फिलहाल असम सीएम हिमंता बिस्वा सरमा और उनकी पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा पर अपने बेबुनियादी और निराधार आरोपों को लेकर चर्चा में हैं। इसी बीच अब वे अपने एक और झूठे दावे को लेकर घिर गए हैं।

गौरव गोगोई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कुछ फोटोज शेयर करते हुए दावा किया है कि यह तस्वीरें उनके दोस्त ने मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच दुबई से भेजी हैं। वह यह दिखाने की कोशिश कर रहे कि वहाँ के हालात सही नहीं है और लोगों के घर खाली पड़े हुए हैं।

उन्होंने फोटो शेयर करते हुए लिखा, “मिडिल ईस्ट में मेरे दोस्त मुझे टाउनहाउस एड्रेस अटलांटिस द रॉयल रेजिडेंसेस, क्रेसेंट रोड, पाम जुमेराह, दुबई की तस्वीरें भेज रहे हैं।” इन तस्वीरों की सच्चाई जानने के लिए जब हमने इन तस्वीरें को Google पर सर्च किया तो सच्चाई कुछ और निकली। दरअसल यह तस्वीरें ‘Knight Frank’ नाम की वेबसाइट से चुराई (दूसरों की तस्वीरों को अपने नाम से बताया) गई हैं।

इन तस्वीरों की पुष्टि के लिए जब हमने रिवर्स Image किया तो इस साइट पर यह फोटो अपलोड मिली, जिसके बाद सामने आया कि असल में गौरव गोगोई जो दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, असल में वह बात है ही नहीं। अब सोशल मीडिया पर भी यूजर्स के बीच भी गौरव गोगोई अपना तमाशा बनवा रहे हैं। यूजर्स स्क्रिनशॉट्स शेयर कर उनकी खिल्ली उड़ा रहे हैं।

किसी ने कहा ‘पाईजान’ तो कोई दोस्त का नाम बता रहा ‘हमजा’

एक यूजर ने स्क्रिनशॉट शेयर करते हुए लिखा, “आप एक धोखेबाज हैं। आप इस वेबसाइट से तस्वीरें चुरा रहे हैं। क्या आप अपनी पत्नी एलिजाबेथ कोलबर्न का पाकिस्तानी बैंक खाता साझा कर सकते हैं?”

इसी तरह एक अन्य यूजर ने लिखा, “गौरव गोगोई जैसे लोगों के लिए यह कोई नई बात नहीं है… पूरी कॉन्ग्रेस पार्टी ही एक फ्रॉड है।”

एक ने कॉन्ग्रेस पार्टी और गौरव गोगोई को टैग करते हुए लिखा, ” कॉन्ग्रेस पार्टी, गौरव गोगोई और कॉन्ग्रेस के बाकी लोगों को लगता है कि हम अभी भी इंटरनेट से पहले के जमाने में जी रहे हैं।”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “गौरव गोगोई का कनेक्शन सीधा सरहद पार, लेकिन झूठ का यह नेटवर्क जल्दी डाउन हो गया।”

एक यूजर ने पवन खेड़ा को टैग करते हुए लिखा, “क्या ये पैजान भी भगौड़ा पवन खेड़ा की तरह भाग जाएगी।”

किसी ने लिखा कि ये ISI एजेंट है और फेक न्यूज फैलाता है तो किसी ने लिखा कि चुप रहो वर्ना पाकिस्तान भेज देंगे। किसी ने लिखा, “बस उसे नजरअंदाज कर दो, जैसे पूरे असम ने उसे नजरअंदाज कर दिया है (हमें कॉन्ग्रेस नहीं चाहिए)।”

इसी तरह तमाम यूजर्स ने जमकर गौरव गोगोई की बेइज्जती की है। गौरतलब है कि पिछले कई दिनों से गौरव गोगोई अपने ऐसे ही झूठे दावों को लेकर सुर्खियाँ बटोरने का काम कर रहे हैं और फिर झूठे साबित हो रहे हैं।

वारंट लेकर आई गुजरात पुलिस, AAP विधायक गोपाल इटालिया ने माँ से बदसलूकी का लगा दिया आरोप: निकाय चुनावों से पहले ‘विक्टिम कार्ड’ का दाँव पड़ा उलटा

गुजरात में स्थानीय निकाय चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, राजनीतिक माहौल भी तेजी से गरमाता जा रहा है। इसी बीच आम आदमी पार्टी के विधायक गोपाल इटालिया के एक दावे ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है।

उन्होंने गुजरात पुलिस पर आरोप लगाया कि वह उनके सूरत स्थित घर पर पहुँची और उनकी माँ के साथ दुर्व्यवहार किया। उन्होंने यह भी कहा कि यह सब राज्य के गृह मंत्री हर्ष संघवी के इशारे पर हुआ।

सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ विवाद

गोपाल इटालिया ने एक्स पर भावुक पोस्ट लिखते हुए सवाल उठाया कि क्या एक साधारण किसान परिवार से आने वाले व्यक्ति का राजनीति में आना अपराध है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनकी बुजुर्ग माँ को डराने-धमकाने की कोशिश की और सोसायटी के गार्ड से भी उनके आने-जाने के बारे में पूछताछ कर माहौल बनाने की कोशिश की गई।

उन्होंने यह भी कहा कि अगर सरकार को उनसे कोई समस्या है तो उन्हें सीधे बुलाया जाए या गिरफ्तार किया जाए, लेकिन उनके परिवार को परेशान करना गलत है। इस दौरान उन्होंने खुद को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में पेश किया जो राजनीति में बदलाव लाने आया है, लेकिन अब उनके परिवार को इसका खामियाजा उठाना पड़ रहा है।

पुराने विवाद भी आए चर्चा में

अहम बात ये भी है कि गोपाल इटालिया पहले भी विवादों में रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री और दूसरे नेताओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियाँ की थीं। संतों और कथाकारों के बारे में भी अश्लील बयान दिए थे।

ऐसे में उनके साफ राजनीति वाले दावे पर भी सवाल उठने लगे। गोपाल के आरोपों को आम आदमी पार्टी के समर्थकों ने तेजी से वायरल किया। पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने भी सोशल मीडिया के जरिए गुजरात पुलिस पर निशाना साधा और इसे राजनीतिक दबाव की कार्रवाई बताया। माहौल ऐसा बनाया गया कि चुनाव से पहले विपक्षी नेताओं को डराने की कोशिश की जा रही है।

कुछ ही घंटों में सामने आई सच्चाई

लेकिन यह पूरा नैरेटिव ज्यादा देर तक नहीं टिक पाया। कुछ ही घंटों में पुलिस ने घटना की जानकारी दी। दरअसल, गोपाल इटालिया के खिलाफ 2020 में मेहसाणा में एक FIR दर्ज हुई थी, जो अभी अदालत में लंबित है।

कोर्ट के बार-बार समन भेजे जाने के बावजूद वह पेश नहीं हुए, तो अदालत ने उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया। ऐसे में पुलिस ने कोर्ट के ऑर्डर को मानते हुए उनको गिरफ्तार करने पहुँची थी।

पुलिस क्यों पहुँची थी घर?

पुलिस के अनुसार, गोपाल घर पर नहीं मिले, इसलिए उनकी माँ से सामान्य पूछताछ की गई। इसके बाद टीम ने रिकॉर्ड के लिए घर की तस्वीर ली और बिना किसी विवाद के वापस लौट गई।

पुलिस ने साफ कहा कि किसी को न तो धमकाया गया और न ही किसी तरह का दुर्व्यवहार किया गया। यह केवल कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा था।

वारंट की बात छुपाने पर सवाल

यहाँ सबसे बड़ा सवाल यही उठा कि गोपाल इटालिया ने अपने पोस्ट में यह नहीं बताया कि पुलिस वारंट लेकर आई थी। उन्होंने पूरे मामले को भावनात्मक रूप देकर एकतरफा कहानी पेश की, जिससे लोगों में सहानुभूति पैदा हो सके।

इस बीच सोशल मीडिया पर एक ऑडियो क्लिप भी वायरल हो गई, जिसमें कथित तौर पर गोपाल इटालिया की आवाज सुनी गई। बातचीत में सामने वाला व्यक्ति जीतू कहता है कि पुलिस वारंट लेकर आ सकती है।

इस पर गोपाल जवाब देते हैं कि चिंता की बात नहीं है। वह स्थिति संभाल लेंगे। बाद में ऑडियो के सामने आने के बाद गोपाल इटालिया ने एक और वीडियो जारी किया और दावा किया कि यह AI से बनाया गया है और इसके पीछे हर्ष संघवी का हाथ है। आम आदमी पार्टी ने भी इसे फर्जी बताया।

हालाँकि, यहाँ एक महत्वपूर्ण सवाल उठता है कि अगर ऑडियो फर्जी है, तो इसकी फॉरेंसिक जाँच (FSL) की माँग क्यों नहीं की गई? ऐसा करने से सच्चाई सामने आ सकती थी। लेकिन खबर लिखे जाने तक ऐसी कोई माँग नहीं की गई।

(मूल रूप से ये रिपोर्ट गुजराती में लिखी हुई है। जिसको पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करे)

बंगाल में वोटर लिस्ट से हटे ‘मुस्लिम’ नाम तो इस्लामी और वामपंथी बिलबिलाए: ‘पीड़ित’ वाली कहानी सुनाकर फैला रहे प्रोपेगेंडा, घुसपैठियों की संख्या कर रहे नजरअंदाज

पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर बदलाव के बाद करीब 90 लाख वोटरों के नाम हटाए जाने के बाद राजनीतिक बहस छिड़ गई है। चुनाव आयोग ने मंगलवार (7 अप्रैल 2026) को ताजा डेटा शेयर किया है। उसके अनुसार, प्रक्रिया के आखिरी स्टेज में कुल 27,16,393 वोटर अयोग्य पाए गए।

शुरुआत में चुनाव ने 58.25 लाख वोटर्स के नाम हटा दिए। दिसंबर 2025 में प्रकाशित ड्राफ्ट में मरे हुए, गैर-मौजूद, शिफ्ट हुए या दो जगहों पर एंट्री वाले पाए गए थे। इनके नाम हटते ही कुल वोटरों की संख्या 7.66 करोड़ से घटकर 7.04 करोड़ हो गया। 28 फरवरी 2026 को फाइनल सूची से और 5 लाख नाम हटा दिए गए। इसके बाद कुल हटाए गए नामों की संख्या 91 लाख से थोड़ी कम रह गई।

शुरू में जिन 60.06 लाख वोटर्स के नाम पर सवाल उठे थे, उनमें से लगभग आधे अयोग्य पाए गए। सबसे ज्यादा नाम मुर्शिदाबाद में हटाए गए। यह जिला मुस्लिम बहुल है। यहाँ 11 लाख वोटर्स में से 4.55 लाख से ज्यादा वोटर्स अयोग्य पाए गए। यह जिला बांग्लादेश की सीमा से लगा हुआ है, इसलिए यहाँ सबसे ज्यादा घुसपैठिए हैं।

दूसरी तरफ, झारग्राम में सबसे कम नाम कटे। यहाँ सिर्फ 1240 नाम हटाए गए। कोलकाता में बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटे। कोलकाता नॉर्थ में 39164, कोलकाता साउथ में 28468 नाम हटाए गए। भवानीपुर इसी जिले में आता है, जहाँ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और बीजेपी से सुवेंदु अधिकारी आमने-सामने हैं।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और ‘टारगेट’ करने के आरोप

जैसे ही ये नंबर पब्लिक डोमेन में आए, तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार और अलग-अलग मीडिया संगठनों ने अपने तरीके से लिखना शुरू कर दिया। कहा गया कि चुनाव आयोग मुस्लिम वोटर्स को टारगेट कर रहा है। आरोप लगाने में सीएम ममता बनर्जी भी पीछे नहीं रही, उन्होंने EC और BJP की लीडरशिप वाली केंद्र सरकार पर ‘टारगेट करके नाम हटाने’ का आरोप लगाया।

नादिया में एक रैली के दौरान, उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी जानबूझकर मतुआ, राजबंशी और अल्पसंख्यकों को बाहर कर रहे हैं, ताकि उनका वोटर बेस कमजोर हो सके। उन्होंने कहा कि यह ‘भेदभाव’ टीएमसी को नुकसान पहुँचाने की एक सोची-समझी चाल है।

कुछ मीडिया संगठनों ने इस खबर को हवा दी। देश भर की मीडिया में ‘लाखों मुस्लिम वोटर्स’ को हटाने को प्रमुखता से उठाया जाने लगा। पूरे एडमिनिस्ट्रेटिव काम को इस्लामोफोबिक प्रोजेक्ट के तौर पर पेश किया जाने लगा।

उदाहरण के लिए, हैदराबाद के एक उर्दू अखबार, द सियासत डेली ने 7 अप्रैल को एक रिपोर्ट छापी, जिसकी हेडलाइन थी: ‘पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम में हटाए गए 95 प्रतिशत वोटर्स मुस्लिम हैं। “

कोलकाता की संस्था सबर इंस्टीट्यूट ने दावा किया कि नंदीग्राम के लिए 7 सप्लीमेंट्री लिस्ट में, 95.5% नाम हटाए गए। इसमें बताया गया कि नंदीग्राम की आबादी में मुस्लिम सिर्फ 25% हैं, लेकिन हटाए जाने का सबसे ज्यादा असर उन पर पड़ा। जबकि 75% गैर-मुस्लिम आबादी में सिर्फ 4.5% नाम हटाए गए। ये रिपोर्ट ‘टारगेट’ करने का एक ‘पैटर्न’ साबित करने के लिए बनाई गई थीं।

द स्क्रॉल जैसे दूसरे आउटलेट्स ने भी ऐसा ही किया, और सबर इंस्टीट्यूट के उसी डेटा का इस्तेमाल करके यह बताया कि SIR प्रोसेस असल में अल्पसंख्यकों के खिलाफ था।

हजारों हिन्दू वोटरों को हटाया गया

लेकिन, डेटा को ध्यान से देखने पर पता चलता है कि ‘सिर्फ मुस्लिम’ वाली बात सच्चाई से परे है। असल में हजारों हिंदू नाम हटे हैं। इनमें मतुआ-नामशूद्र समुदाय से ज्यादा हैं। इससे बीजेपी के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी हो गई है। बोंगाँव लोकसभा सीट से सांसद बीजेपी के केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर ने इस पर जोर दिया है।

मतुआ इलाके के पाँच विधानसभा क्षेत्रों में लगभग 1.38 लाख नाम हटाए गए हैं। चांदपारा ग्राम पंचायत में एक खास मामले में, एक सप्लीमेंट्री लिस्ट से 186 में से 183 नाम हटा दिए गए। इनमें से अधिकांश मतुआ समुदाय के हैं।

सबर इंस्टीट्यूट के अपने एनालिसिस में बताया है कि मतुआ क्षेत्र में 7.8% का कोई दस्तावेज नहीं था, जो राज्य में औसत से लगभग दोगुना है।

यहाँ तक ​​कि बागदा, बनगांव उत्तर और गायघाटा जैसी बीजेपी की जीती हुई सीटों में हजारों वोटरों को हटा दिया गया। लोकल बीजेपी नेता अब अपने समर्थकों को जवाब नहीं दे पा रहे हैं। ये पूछ रहे हैं कि अगर पार्टी केंद्र में सत्ता में है, तो उनके नाम क्यों हटाए गए।

बड़ा मुद्दा: गैर-कानूनी प्रवास और नकली वोटर

इस पूरी कवायद के मूल में घुसपैठ और नकली वोटर एंट्री का मुद्दा है। भारत और बांग्लादेश के बीच 4095 K.M. लंबी बॉर्डर लाइन है, पश्चिम बंगाल 2216 किमी शेयर करता है, जो 54% से ज्यादा है। दोनों जगह के लोग भाषा और वेशभूषा के हिसाब से एक जैसे हैं। इसलिए पश्चिम बंगाल बांग्लादेशी घुसपैठियों से बहुत ज्यादा प्रभावित है।

पश्चिम बंगाल के दस जिले हैं जो बांग्लादेश की सीमा से सटे हैं। ये हैं- नॉर्थ 24 परगना, नादिया, मुर्शिदाबाद, मालदा, नॉर्थ दिनाजपुर, साउथ दिनाजपुर, दार्जिलिंग, कूचबिहार और जलपाईगुड़ी। बॉर्डर के दोनों तरफ के लोग अक्सर भाषा और नस्ल के हिसाब से एक जैसे होते हैं, जिससे बॉर्डर पार आने-जाने वालों को ट्रैक करना मुश्किल काम है।

इस वजह से बांग्लादेश से घुसपैठ के मामले में पश्चिम बंगाल सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में से एक बन गया है। माना जाता है कि पिछले कुछ सालों में इन 7 जिलों में रहने वाले ऐसे कई लोगों ने पहचान पत्र हासिल कर लिए और अपना नाम वोटर लिस्ट में जुड़वा दिया।

यह कोई छिपी हुई बात नहीं है कि पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा गैर-कानूनी बांग्लादेशी प्रवासी हैं। पिछले तीन सालों में 2600 से बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़कर बांग्लादेश वापस भेजा गया।

ये समझा जा सकता है कि अगर कोई नकली दस्तावेजों के साथ भारत में गैर-कानूनी तरीके से रह रहा है और इसकी जाँच होगी, तो ज़ाहिर तौर पर हटाए गए नामों में से ज़्यादातर ऐसे लोगों के नाम होंगे।

यह किसी धर्म के खिलाफ़ कोई ‘साजिश’ नहीं है; यह एक पुरानी समस्या पर प्रशासनिक कार्रवाई है।

डर का फैक्टर: बॉर्डर से भाग रहे घुसपैठिए

SIR के काम करने का सबसे बड़ा सबूत किसी स्प्रेडशीट में नहीं, बल्कि बॉर्डर पर मिलता है। जब से चुनाव आयोग ने पिछले साल नवंबर में स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न के दूसरे फेज के लिए घर-घर जाकर गिनती की घोषणा की है, तब से गैर-कानूनी बस्तियों में डर का माहौल है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में लोगों के ग्रुप बैग और सामान लेकर हकीमपुर (बशीरहाट) जैसे चेकपोस्ट पर बांग्लादेश बॉर्डर की ओर वापस जाते हुए दिख रहे हैं।

DD न्यूज और सोशल मीडिया क्लिप की रिपोर्ट में ऐसे लोग दिख रहे हैं जो 5, 7 या 10 साल से भारत में गैर-कानूनी तरीके से रह रहे थे, लेकिन अचानक उन्होंने जाने का फैसला कर लिया। उनमें से कुछ ने कैमरे पर खुलेआम माना कि उनके पास कोई डॉक्यूमेंट नहीं थे और वे यहाँ गैर-कानूनी तरीके से रह रहे थे। एक आदमी ने बताया कि वह कोलकाता एयरपोर्ट के पास बिराटी में रहता था, लेकिन उसके पास कोई पेपर नहीं था और वह सख्त वेरिफिकेशन प्रोसेस के डर से भाग रहा था। दूसरे लोग टैक्सी ड्राइवर या ईंट भट्टों में काम कर रहे थे, जो नकली ID की मदद से लोकल आबादी में घुल-मिल गए थे।

ऐसे ही एक वीडियो में कुछ लोग मान रहे हैं कि वे बगैर कागजात के भारत में रह रहे हैं। एक महिला ने कहा उनके पास कोई डॉक्यूमेंट नहीं हैं, लेकिन वह भारत में काम कर रही है। एक पुरुष ने कहा कि हाँ हम अवैध तरीके से रह रहे हैं।

कहा जाता है कि उनमें से कई लोग कंस्ट्रक्शन, ट्रांसपोर्ट और छोटे बिज़नेस में काम कर रहे थे, और सालों से लोकल लोगों के साथ घुल-मिल गए थे।

यह अचानक पलायन साबित करता है कि घर-घर वेरिफिकेशन के दौरान पकड़े जाने का डर असली है। सालों तक राजनीतिक समर्थन और ‘सेक्युलर’ शील्ड ने इन गैर-कानूनी लोगों को रहने और वोट देने दिया। लेकिन EC के कड़ा स्टैंड लेने और 2002 से जुड़े डॉक्यूमेंट्री प्रूफ माँगने के बाद कई लोगों को भागना पड़ा।

नतीजा यह है कि जहाँ मीडिया ‘टारगेटेड डिलीशन’ पर फोकस करता है और राजनीतिक पार्टियाँ एसआईआर का इस्तेमाल पीड़ित बनने के लिए करती हैं, वहीं असलियत साफ दिख रहा है। पश्चिम बंगाल के वोटरों में घुसपैठिए बड़ी संख्या में शामिल थे।

अभी 91 लाख नामों को हटाना एक जरूरी सर्जरी है, ताकि सिर्फ भारतीय नागरिक ही राज्य का भविष्य तय कर सकें। चाहे मुर्शिदाबाद में कोई मुस्लिम हो या बोंगांव में कोई मतुआ, अगर आप अपना पहचान साबित नहीं कर सकते, तो आपका नाम लिस्ट में नहीं होना चाहिए।

(यह मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा गया लेख है। इसे पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें)