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गाजा पर 1180 हमले, इजरायल पर दागे 3150 रॉकेट: युद्धविराम को नेतन्याहू की ना, बोले- जंग जारी रहेगी

इजरायल और फलस्तीन के बीच जारी संघर्ष थमता नहीं दिख रहा है। युद्धविराम के अमेरिकी दबाव को खारिज करते हुए इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि जंग जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि हर देश को अपनी रक्षा का अधिकार है। फलस्तीनी आतंकी संगठन हमास का युद्धविराम प्रस्ताव वे पहले ही ठुकरा चुके हैं।

इजरायली डिफेंस फोर्स (IDF) ने बताया है कि संघर्ष शुरू होने के बाद से उसने गाजा में 1180 से ज्यादा हमले किए हैं। वहीं इजरायल पर अब तक करीब 3150 रॉकेट दागे जा चुके हैं। इनमें से 90% रॉकेट को ‘आयरन डोम’ ने आसमान में ही नष्ट कर चुकी है। इजरायल और हमास के बीच बीते सोमवार (10 मई 2021) से संघर्ष ने जोर पकड़ ​रखा है।

इजराइल ने अघोषित युद्ध के आठवें दिन सोमवार (17 मई 2021) को गाजा पट्टी पर फिर हमला किया। संघर्ष में अब तक 207 लोग मारे जा चुके हैं। इनमें 197 फलस्तीनी हैं। डेली मेल के मुताबिक रविवार देर रात से सोमवार (17 मई 2021) सुबह तक 54 इजरायली जेट विमानों ने गाजा शहर और उसके आसपास के 35 ठिकानों पर बमबारी की। आईडीएफ ने कहा कि उसने हमास कमांडरों के 9 शीर्ष कमांडरों के घरों को निशाना बनाया। इनमें से कुछ घर का इस्तेमाल हथियारों को स्टोर करने के लिए भी होता था।

इस बीच, हमास ने इजरायल पर 70 रॉकेट दागे। आईडीएफ के अनुसार इनमें कम से कम 10 गाजा में गिर गए। एक रॉकेट की चपेट में अश्कलोन में यहूदियों का एक मंदिर आ गया। रविवार (16 मई 2021) को भी गाजा पट्टी में हमास प्रमुख के घर पर बम बरसाए थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, रविवार शाम गाजा शहर में की गई इजरायली एयर स्ट्राइक में तीन इमारतें तबाह हो गईं और 42 लोग मारे गए।

इस्लामी मुल्कों के संगठन OIC ने इजरायल की निंदा की है। 57 देशों के इस संगठन ने इजरायल के हमलों को ‘व्यवस्थित अपराध’ करार देते हुए कहा है कि UN जनरल असेम्ब्ली की बैठक बुलाई जानी चाहिए। इन देशों ने एक प्रस्ताव पारित कर कहा है कि इजरायल ने आक्रामक तरीके से फलस्तीन की जमीन कब्जाई है और इस्लामी उम्माह की फलस्तीन के प्रति नैतिक, ऐतिहासिक व कानूनी जिम्मेदारी बनती है।

दूसरी ओर इस्लामी देश संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने हमास को चेताया है। उसने कहा है कि यदि शांति नहीं हुई तो गाजा के लोगों का जीवन नर्क हो जाएगा। साथ ही उसने गाजा में इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में निवेश नहीं करने की भी चेतावनी दी है। वहीं, भारत ने सधी हुई प्रतिक्रिया देते हुए दोनों पक्षों से शांति से काम लेने की अपील की है।

हिन्दू राजाओं ने बसाया, इस्लामी व पुर्तगाली ताकतों ने किया अत्याचार: 3000 वर्ष पुराना है भारत में यहूदियों का इतिहास

फिलिस्तीन में बैठे हमास के आतंकियों ने इजरायल पर रॉकेट दागे, जिसके जवाब में इजरायल ने भी करारा हमला किया। 57 इस्लामी मुल्कों वाले संगठन OIC ने एक सुर में उम्माह का हवाला देते हुए फिलिस्तीन का समर्थन किया और इजरायल की निंदा की। भारत ने भले ही दोनों पक्षों को शांति के लिए समझाया, लेकिन भारतीयों ने जिस तरह से इजरायल के समर्थन में आवाज़ बुलंद किया, उसे दिल्ली में वहाँ के राजदूत ने भी सलाम किया।

ये सब कुछ अचानक नहीं हुआ। समुद्र और इस्लामी मुल्कों से घिरे इजरायल में यहूदियों ने किस तरह से अपना अस्तित्व बचा कर रखा है, ये एक बहुत ही बहादुरी भरा कार्य है। अपनी तकनीकी क्षमता और निर्णय लेने की निडरता के कारण इजरायल से उलझने वाले आतंकियों को इसके भयंकर दुष्परिणाम भुगतने पड़ते हैं। हमास तो दशकों से उसका दुश्मन बना हुआ है और पूरे इजरायल पर कब्ज़ा इन इस्लामी कट्टरपंथियों का लक्ष्य है।

भारत का यहूदियों से काफी प्राचीन सम्बन्ध रहा है। भारत के मालाबार इलाके में यहूदी प्राचीन काल से ही बसे हुए थे, जिन्हें ‘कोचीन यहूदी’ कहा गया। वो वहाँ कैसे आए, इसे लेकर अलग-अलग दस्तावेज अलग-अलग दावे करते हैं। माना जाता है कि राजा सोलोमन (970-931 BC राज्यकाल) के समय व्यापारी के रूप में ये यहूदी केरल आए थे। इससे इजरायल और दक्षिण भारत के बीच होने वाले प्राचीन व्यापार के बारे में भी पता चलता है।

जब यहूदियों के खिलाफ दुनिया भर में अत्याचार हो रहे थे, तब भी भारत में वो सुरक्षित थे और आज तक उन्हें अपने मजहब को लेकर घृणा का सामना नहीं करना पड़ा। अब यहाँ के यहूदियों ने अपनी संस्कृति को भारतीय संस्कृति के साथ जोड़ कर अपनी पहचान को नया रूप दिया है। 1940 के दशक में भारत में 20,000 से भी अधिक यहूदी रहते थे लेकिन इजरायल के गठन के बाद उनमें से कई ने वहाँ घर बसाया।

यहूदियों में भी कई प्रकार के समुदाय हैं। भारत में भी लगभग 7 प्रजाति के यहूदी रहते हैं। कोचीन के अलावा ‘चेन्नई यहूदी’ भी हैं, जो 17वीं शताब्दी में हीरे के कारोबारी के रूप में भारत आए थे। वहीं ‘नगरकोइल यहूदी’ अरब से 52 AD के आसपास आए थे। इसके बाद आते हैं वो यहूदी, जिन्हें गोवा पर पुर्तगाल के आक्रमण के बाद अत्याचार का सामना करना पड़ा। ‘बेने इजरायल’ समुदाय के यहूदी कराची में रहते थे, लेकिन विभाजन के बाद उन्हें भागना पड़ा।

लगभग 250 वर्ष पहले सूरत में आकर कुछ ‘बगदादी यहूदी’ बसे थे। इजरायल के ‘खोए हुए समुदायों’ में से एक समूह तेलुगु राज्यों में भी बसा हुआ है। कोचीन आए यहूदियों के बाद इजरायल में एक ‘सेकेण्ड टेम्पल’ को ध्वस्त किए जाने के बाद वहाँ से कई यहूदियों को भागना पड़ा, जिनमें से एक खेप भारत भी आया। जेरुसलम में स्थित ‘सेकेण्ड टेम्पल’ रोमन साम्राज्य ने अपने खिलाफ विद्रोह को दबाने के लिए इस मंदिर को ध्वस्त कर दिया।

रोमन के खिलाफ यहूदियों ने तीन बड़े विद्रोह किए। उन्हें इसकी कीमत भी चुकानी पड़ी। यहूदियों का नरसंहार हुआ, उन्हें भगाया गया और अपने ही देश को छोड़ने के लिए मजबूर किया गया। कोचीन यहूदियों के भारतीय राजाओं के साथ इतने अच्छे सम्बन्ध थे कि उन्हें ताँबे की प्लेट देकर समाज में एक अलग दर्जा दिया गया था। उस समय के दस्तावेजों से पता चलता है कि यहूदियों को कुछ गाँवों में ‘दुनिया ख़त्म होने तक’ रहने के अधिकार दिए गए थे।

ईसाई धर्म की पवित्र पुस्तक बाइबिल में लिखा है कि किस तरह राजा सोलोमन ‘ओफिर’ नामक स्थान से समुद्र के रास्ते सोने-चाँदी का व्यापार करता था। सर विलियम स्मिथ ने ‘अ डिक्शनरी ऑफ द बाइबिल’ में केरल के पूवर को ही ‘ओफिर’ बताया है। कुछ इतिहासकारों ने इसे केरल के कोझिकोड में स्थित प्राचीन नगर बेपुर के रूप में चिह्नित किया। वहीं मैक्स मुलर ने ब्रिटिश काल में गुजरात में स्थित अभिरा को ‘ओफिर’ बताया।

इस जगह को प्राचीन दस्तावेजों में चन्दन, मोर और हाथीदाँत के लिए भी प्रसिद्ध बताया गया है। केरल में 70 AD में रोमन अत्याचार के बाद बड़ी संख्या में यहूदी शरणार्थी पहुँचे। कोडुंगल्लार के हिन्दू महाराजा ने न सिर्फ उनका स्वागत किया, बल्कि रहने के लिए जमीन भी दी। उन्हें अपने धर्म के पालन की आज़ादी दी गई। उस समय केरल में चेरा/पेरुमल राजाओं का शासन था। अंजुवन्नम में भारत के पहले यहूदी गाँव के बसने के सबूत मिलते हैं।

राजा भास्कर रवि वर्मा ने इस गाँव को यहूदियों को उपहार के रूप में दिया था। 1000 CE में यहूदियों के पूर्वज जोसेफ रब्बन को उन्होंने ये उपहार दिया था। रब्बन के नेतृत्व में वहाँ यहूदी लगातार फले-फूले। अंजुवन्नम को ‘पूर्व का जेरुसलम’ कहा जाने लगा। इसके बाद ही यहूदी कोचीन में बसे। हालाँकि, यहूदियों के स्थान बदलने के लिए उनके भीतर की लड़ाई भी जिम्मेदार थी। इस्लामी और पुर्तगाली अत्याचार ने रही-सही कसर पूरी की।

कोडुंगल्लार को तब क्रैंगनोर के रूप में जाना जाता था। पेरियार नदी के किनारे बसा ये शहर एक अमीर और समृद्ध इलाकों में से एक था। पेरियार नदी में 1341 में आई भीषण बाढ़ के बाद ये इलाका पानी में चला गया और मालाबार का कोचीन सबसे बड़ा बंदरगाह बन कर उभरा और यहूदी भी उधर ही बसने लगे। रब्बन के दो बेटों के बीच संपत्ति विवाद के कारण भी उनका पलायन हुआ। इससे वहाँ के राजाओं द्वारा उन्हें दी जा रही सुरक्षा में भी कमी आई।

जोसेफ रब्बन को भारतीय राजाओं ने कर में छूट से लेकर व्यापार में सहायता तक प्रदान की। लेकिन, दुनिया भर में यहूदियों के खिलाफ ‘AntiSemitism’ की भावना का पीछा भारत में भी नहीं छूटा और कुछ विदेशी ताकतों ने यहूदियों पर अत्याचार किया। 1524 में कोडुंगल्लूर में मुस्लिमों और यहूदियों के बीच जबरदस्त संघर्ष हुआ। एक मुस्लिम सरदार के आतंक के कारण भी वहाँ से यहूदियों का पलायन हुआ।

फिर हिन्द महासागर में कारोबार के लिए यूरोप और इस्लामी ताकतों में हिंसक संघर्ष होने लगा, जिसमें यहूदी काफी कमजोर पड़ गए। गोवा में जब पुर्तगाल का शासन आया, तब फिर यहूदियों पर अत्याचार हुए। यहूदियों का भारत के साथ सम्बन्ध काफी पुराना है। प्रसिद्ध ग्रन्थ ‘सूर्य सिद्धांत’ को एक यहूदी खगोलविद सनद इब्न अल यहूदी ने 9वीं शताब्दी में अरबी में अनुवाद किया। दोनों सभ्यताओं के बीच गणित और खगोल ज्ञान का आदान-प्रदान हुआ।

यहूदियों के पवित्र स्थल को सिनेगॉग कहते हैं। आज भी भारत में आपको कई सिनेगॉग मिलेंगे। हालाँकि, इनमें से कई अब सक्रिय नहीं हैं और देखभाल के अभाव में ध्वस्त होने लगे हैं। अरब और यूरोप में जहाँ यहूदियों को घृणा व हिंसा का सामना करना पड़ता था, भारत में उन्हें शांति मिलती थी और सिनेगॉग के निर्माण की इजाजत भी। केरल में पहला सिनेगॉग के निर्माण के लिए राजा ने ही जमीन दी थी।

भारत में अब भी 60 से भी अधिक यहूदियों के सक्रिय और निष्क्रिय सिनेगॉग मौजूद हैं। महाराष्ट्र में इनमें से कई अब भी मौजूद हैं। पहले यहूदी लोग अपने घरों में ही सिनेगॉग बना कर प्रार्थना करते थे। कोंकण में अब भी आपको ‘बेने इजरायल’ समुदाय के यहूदी मिल जाएँगे, जो मराठी भाषी हैं। केरल में पहली बार 1564 में ‘Paradesi Synagogu’ का निर्माण हुआ, जो यहाँ का सबसे पुराना है। इसके लिए भी जमीन कोच्चि के महाराजा ने ही दी थी।

PM-CARES से ₹2000 करोड़ खर्च कर सरकार ने देश भर में वितरित किए करीब 50,000 वेंटिलेटर, महाराष्ट्र को मिले सबसे ज्यादा

कोरोना वायरस के कहर के बीच महामारी से निपटने और अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए PM-CARES फंड से देश भर में राज्यों को करीब 50,000 वेंटिलेटर वितरित गए हैं, ये जानकारी बीजेपी ने दी।

पार्टी ने एक ट्वीट में कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत कोरोना वायरस के खिलाफ बहादुरी से लड़ रहा है। PM-CARES फंड से देश भर में लगभग 50,000 वेंटिलेटर वितरित किए गए हैं।”

ये “मेड-इन-इंडिया” वेंटिलेटर लगभग 2000 करोड़ रुपए की लागत से PM CARES फंड से खरीदे गए थे और सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सरकार द्वारा संचालित COVID अस्पतालों को कोरोना मरीजों के बेहतर इलाज के लिए आवंटित किए गए थे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुल 45,946 वेंटिलेटर में से महाराष्ट्र (देश में कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य) को सबसे ज्यादा वेंटिलेटर दिए गए, जबकि दिल्ली को सबसे कम आवंटन किया गया था।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र को 5,555 वेंटिलेटर, दिल्ली को 763, पंजाब को 810, उत्तर प्रदेश को 5316, पश्चिम बंगाल को 1245, तमिलनाडु को 1450, जबकि केंद्रीय संस्थानों को 3569 मशीनें दी गई थीं। केंद्र ने कहा है कि जून 2021 के अंत तक सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अतिरिक्त 14,000 वेंटिलेटर वितरित किए जाएँगे।

पीएम ने दिया ऑडिट का निर्देश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में वेंटिलेटरों को स्टोर करके रखने और उनका इस्तेमाल नहीं किए जाने की रिपोर्ट्स को गंभीरता से लिया है। उन्होंने अधिकारियों को केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को दिए गए वेंटिलेटर्स के इंस्टालेशन, उनके संचालन का ऑडिट करने का निर्देश दिया है। साथ ही पीएम ने जरूरत पड़ने पर वेंटिलेटर को ऑपरेट करने के लिए स्वास्थ्यकर्मियों को फिर से ट्रेनिंग देने का सुझाव भी दिया है।

वहीं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी कई राज्यों में तकनीकी खामियों के कारण बेकार पड़े वेंटिलेटर्स का सही इस्तेमाल करने की अपील की है। मंत्रालय ने इस मामले में एक बयान जारी कर जानकारी दी है कि वेंटिलेटर की समस्याओं को ठीक करने के लिए एक वॉट्सऐप ग्रुप बनाया गया है। इसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के नोडल अधिकारियों, वेंटिलेटर यूजर हॉस्पिटल और उसे बनाने वाली कंपनियों की टेक्निकल टीम के लोग शामिल हैं, जो कि समस्याओं का समाधान करने के लिए काम करेंगे।

डेढ़ महीने में बेड 10 गुणा: हालात में सुधार, कोरोना की तीसरी लहर पर काबू पाने की तैयारियों में जुटी योगी सरकार

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार (मई 16, 2021) को कहा कि राज्य कोविड-19 महामारी की तीसरी लहर से निपटने के लिए तैयार है। यूपी, देश का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य कोविड-19 की दूसरी लहर से सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में से एक है।

राज्य में अप्रैल में कई दिनों तक 30,000 से अधिक मामले हर दिन सामने आए, हालाँकि अब प्रतिदिन 15,000 से कम हो गई है और 16 मई को, राज्य में कोविड-19 के 10,505 नए मामले दर्ज किए गए। राज्य में कोविड के सक्रिय मामलों की संख्या में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। राज्य फिलहाल कोरोना की दूसरी लहर से लड़ रहा है, मगर उसने पहले ही विशेषज्ञों द्वारा भविष्यवाणी के अनुसार वायरस की संभावित तीसरी लहर से निपटने के लिए एक कठोर कार्य योजना तैयार की है।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने नोएडा फिल्म सिटी में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य कोविड -19 की प्रत्याशित तीसरी लहर से लड़ने के लिए खुद को पूरी तरह से तैयार कर रहा है। भविष्यवाणियों के अनुसार, तीसरी लहर बच्चों, महिलाओं और अन्य कमजोर समूहों को प्रभावित कर सकती है।

कार्य योजना के तहत सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार के लिए तत्काल निर्देश जारी किए गए हैं। बच्चों की उचित और विशेष देखभाल के लिए सभी जिलों में 100 बिस्तरों की न्यूनतम क्षमता वाले बाल चिकित्सा आईसीयू स्थापित किए जा रहे हैं। मेडिकल कॉलेजों में अतिरिक्त वार्ड बनाए जा रहे हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में प्रसार की रोकथाम

उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्र में लगातार वायरस फैलने का खतरा बना हुआ है। प्रसार को रोकने के लिए, यूपी सरकार स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और निगरानी समिति के सदस्यों के साथ काम कर रही है, जो लक्षणों वाले व्यक्तियों की जाँच और पता लगाने के लिए प्रत्येक घर का दौरा कर रहे हैं। उन्हें चिकित्सा किट प्रदान की जा रही हैं जिनमें कोविड -19 की दवाएँ हैं। निगरानी समिति के चार लाख से अधिक सदस्य डोर-टू-डोर टेस्ट कर रहे हैं जो मरीजों की शीघ्र पहचान, आइसोलेशन और उपचार में मदद कर रहे हैं।

सीएम योगी ने कहा, “संबंधित अधिकारियों के निर्देशानुसार हल्के लक्षणों वाले मरीजों को दवा किट के साथ मुफ्त और उचित उपचार प्रदान किया जा रहा है। रोगी को गंभीर न होने देने के लिए टेस्ट के परिणाम की प्रतीक्षा किए बिना प्रारंभिक उपचार प्रदान किया जा रहा है।”

युद्धस्तर पर जारी रहेगा टीकाकरण अभियान

राज्य संगठित और चरणबद्ध तरीके से योजना के अनुसार टीकाकरण अभियान जारी रखेगा। हर व्यक्ति को टीका नि:शुल्क मिलेगा। राज्य अब तक वैक्सीन की 1.5 करोड़ खुराक दे चुका है। टीकाकरण कार्रवाई कार्यक्रम के तीसरे चरण के तहत, 18 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को 23 से अधिक उच्च भार वाले जिलों में मुफ्त टीके मिल रहे हैं। उसके बाद, राज्य ग्रामीण आबादी को टीका उपलब्ध कराएगा। सीएम योगी ने कहा, “मैं खुद निगरानी कर रहा हूँ और पूरी तैयारी सुनिश्चित करने के लिए जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं का जायजा ले रहा हूँ। मैंने अब तक वाराणसी, गोरखपुर, आगरा, मथुरा, अलीगढ़ और अन्य ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा किया है और आगे भी करता रहूँगा।”

इन्सेफलाइटिस से निपटने का अनुभव बच्चों की मदद के काम आता है

राज्य कोविड-19 की संभावित तीसरी लहर के खिलाफ प्रतिस्पर्धा करने के लिए व्यापक तैयारी कर रहा है। इन्सेफलाइटिस से निपटने के लिए सीएम योगी का अनुभव इससे निपटने में काम आएगा। बता दें कि इन्सेफलाइटिस ने कई दशकों तक राज्य में, विशेष रूप से पश्चिमी यूपी में तबाही मचा रखी थी। जब से सीएम योगी ने राज्य की कमान सँभाली है, उस पर 98% का नियंत्रण हो चुका है।

उन्होंने कहा, “हमने खतरे से लड़ते हुए एक व्यापक कार्य योजना बनाई थी और परिणाम के साथ, हताहतों की संख्या जो हर साल 1200 से 1500 के बीच हुआ करती थी, पिछले साल घटकर 63 हो गई। अनुभव के आधार पर बच्चों और महिलाओं के लिए विशेष व्यवस्था की जा रही है।”

राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने ब्लैक फंगस से निपटने के लिए भी एडवाइजरी जारी की है। ब्लैक फंगस के मामलों से निपटने के लिए स्वास्थ्य प्रोफेशनल को प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।

दैनिक जागरण की खबर के अनुसार प्रदेश की योगी सरकार कोरोना से निपटने के लिए स्वास्थ्य व्यवस्था पर काफी ध्यान दिया है। एक अप्रैल तक प्रदेश में जहाँ तकरीबन 700 बेड थे वहाँ 15 मई तक 7,000 बेड बना दिए गए हैं। कोविड अस्पतालों की बात करें तो करीब 73 अस्पताल पूरी तरह से संचालित किए जा रहे हैं। वहीं ऑक्सीजन के लिए लगभग सभी अस्पतालों में एक से दो महीने में ऑक्सीजन प्लांटोंं की क्षमता को बढ़ाया जा रहा है। पीजीआइ, लोहिया, केजीएमयू सहित तमाम बड़े अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांटों की क्षमता को बढ़ाया जा रहा है। करीब एक दर्जन प्लांट के लिए तो कंपनियों को ऑर्डर भी दिए जा चुके हैं।

साभार: दैनिक जागरण

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में एक अप्रैल तक 12 कोविड अस्पताल, 358 एल-वन बेड, 225 एचडीयू बेड, 214 आइसीयू बेड यानी कुल मिलाकर 797 बेड थे। वहीं 15 मई तक यह बढ़ कर 6680 हो गया। जिसमें कोविड अस्पतालों की संख्या 75, एल-वन बेड की संख्या 2797, एचडीयू बेड की संख्या 2461 और आइसीयू बेड की संख्या 1422 शामिल है। 

डीआरडीओ और एचएएल के कोविड अस्पताल आज पूरे जोर-शोर से संचालित हो रहे हैं। उम्मीद है कि कोरोना के खिलाफ जंग में जो मोर्चा प्रशासन ने खड़ा किया है वह इसी तरह मुस्तैद रहेगा, जब तक कोरोना संक्रमित एक भी रोगी मौजूद रहेगा। सीएम योगी ने कहा, “हमें निश्चिंत होकर नहीं बैठना है। सेनाएँ खेमे में नहीं लौटनी चाहिए जब तक शत्रु समर्फण न कर दे।”

वहीं ऑक्सीजन की बात करें तो कोरोना की दूसरी लहर में एक समय में इसकी माँग सौ मीट्रिक टन तक पहुँच चुकी थी। उस समय शहर में सिर्फ बीस-पच्चीस मीट्रिक टन ऑक्सीजन उत्पादित हो रही थी, लेकिन प्रशासन ने ऑक्सीजन ट्रेन और एयरफोर्स की मदद से माँग को पूरा किया। अब लगभग सभी अस्पतालों में प्लांट स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। बताया जा रहा है कि दो महीनों के भीतर ही सभी प्रमुख अस्पतालों में भरपूर ऑक्सीजन होगी।

उत्तर प्रदेश में कोविड-19

कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में राज्य 1 मई से लगातार बेहतर हो रहा है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार, 16 मई को राज्य में कोविड-19 के 10,505 नए मामले सामने आए। 9 अप्रैल के बाद यह पहली बार है जब राज्य में करीब 10,000 मामले सामने आए हैं। नए मामले 9 अप्रैल से बढ़ रहे थे और 24 अप्रैल को चरम पर थे, उस समय राज्य में एक ही दिन में 38,055 मामले दर्ज किए गए थे।

राज्य में फिलहाल 1,63,003 एक्टिव मामले हैं। 16 मई को 24,837 मरीज ठीक हुए और 308 लोग कोविड-19 से जंग हार गए। टेस्ट पॉजिटिव अनुापत लगातार गिर रहा है। रविवार (मई 16, 2021) को यह घटकर 3.9% हो गया।

बंगाल में अब ‘नारदा’ पर बवाल: TMC समर्थकों का CBI दफ्तर पर पथराव, मंत्री-विधायक की गिरफ्तारी से भड़कीं ममता

नारदा केस में गिरफ्तारियों के बाद पश्चिम बंगाल में नया राजनीतिक ड्रामा शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद कोलकाता के निजाम पैलेस स्थित सीबीआई कार्यालय के बाहर बैठी हुई हैं। सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के कार्यकर्ताओं ने जाँच एजेंसी के दफ्तर पर पत्थरबाजी की। बैरिकेड तोड़कर भीतर दाखिल होने की कोशिश की।

सोमवार (17 मई 2021) की सुबह सीबीआई को ममता सरकार के मंत्री फिरहाद हाकिम, सुब्रत मुखर्जी, विधायक मदन मित्रा और पूर्व मेयर सोवन चटर्जी को पूछताछ के लिए अपने दफ्तर ले गई। बाद में इन्हें गिरफ्तार कर लिया। इनको ले जाने की खबर आते ही ममता बनर्जी भी सीधे CBI दफ्तर पहुँच गईं। उन्होंने अपनी गिरफ्तारी की चुनौती भी एजेंसी को दी है। टीएमसी ने सीबीआई पर बदले के तहत कार्रवाई करने का आरोप लगाया है।

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने सीबीआई दफ्तर के बाहर आगजनी और पथराव के बावजूद पुलिस के मूकदर्शक बने रहने पर नाराजगी जताई है। उल्लेखनीय है कि गिरफ्तार नेता घोटाले के वक्त ममता सरकार में मंत्री थे और इनके खिलाफ कार्रवाई को लेकर धनखड़ पहले ही CBI को अनुमति दे चुके हैं।

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, वकील अनिंदो राउत ने दावा किया है कि उन्होंने ममता बनर्जी को अधिकारियों से यह कहते सुना कि स्पीकर और राज्य सरकार की अनुमति के बिना मंत्रियों और विधायकों की गिरफ्तारी कोई नहीं कर सकता।

इस पहले मुख्य सूचना आयुक्त आरसी जोशी ने बताया था कि सीबीआई ने इस मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश पर 16 अप्रैल 2017 को मामला दर्ज किया था। अब इस मामले में फिरहाद हाकिम, सुब्रत मुखर्जी, मदन मित्रा और सोवन चटर्जी को गिरफ्तार किया है। ये सभी उस समय बंगाल सरकार में मंत्री थे। कोलकाता के निज़ाम पैलेस स्थित CBI दफ्तर में इन चारों से पूछताछ की जा रही है।

गौरतलब है कि बंगाल में साल 2016 के विधानसभा चुनाव से पहले नारदा स्टिंग टेप सार्वजनिक हुए था। स्टिंग ऑपरेशन कथित तौर पर नारदा न्यूज पोर्टल के मैथ्यू सैमुअल ने किया था। इन स्टिंग्स में टीएमसी नेताओं को कथित तौर पर कंपनी के प्रतिनिधियों से रुपए लेते हुए देखा गया था। स्टिंग्स सामने आने के बाद राज्य में खूब बवाल मचा, जिसके बाद यह मामला हाई कोर्ट पहुँचा था। इसके बाद मामले की जाँच सीबीआई को सौंप दी गई थी। मैथ्यू सैमुअल सीबीआई द्वारा टीएमसी नेताओं की गिरफ्तारी का स्वागत किया है। साथ ही तत्कालीन मंत्री और वर्तमान में बीजेपी विधायक दल के नेता शुभेंदु अधिकारी की गिरफ्तार नहीं होने पर सवाल भी उठाया है।

ओडिशा के DM ने बिगाड़ा सोनू सूद का खेल: जिसके लिए बेड अरेंज करने का लूटा श्रेय, वो होम आइसोलेशन में

अभिनेता सोनू सूद के मददगार अवतार का एक और भांडा फूट गया है। ताजा मामले में अभिनेता सोनू सूद ने ओडिशा के बरहामपुर के गंजम सिटी अस्पताल में एक मरीज के लिए बिस्तर की व्यवस्था करने का दावा किया जिसपर गंजम के कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट ने सोनू सूद के इस फर्जीवाड़े का खुलासा करते हुए ट्विटर पर प्रशासन के आधिकारिक अकाउंट के जरिए बताया कि जिस मरीज के लिए बेड अरेंज करने का दावा किया गया है वो मरीज स्टेबल कंडीशन में होम आइसोलेशन में है।

यह भी पता चला कि मरीज को दरअसल बिस्तर की जरूरत नहीं थी और इस मामले में बरहामपुर (ब्रह्मपुर) नगर निगम खुद स्थिति की निगरानी कर रहा है। बता दें कि बरहामपुर (Berhampur) को ब्रह्मपुर (Brahmapur) के नाम से भी जाना जाता है।

गौरतलब है कि अभिनेता सोनू सूद ने 15 मई को दावा किया था कि गंजम सिटी अस्पताल में किसी प्रदीप बेहरा के अनुरोध पर, उन्होंने उनके लिए एक बेड की व्यवस्था की गई थी। ट्विटर अकाउंट, जो कथित रूप से प्रदीप बेहरा का बताया जा रहा है, ने अपने पोस्ट में कहा था कि वह अपनी पत्नी के लिए एक बेड की तलाश कर रहे हैं, जिनके हालत लगातार बिगड़ती जा रही है लेकिन ऐसा करने में वह असहाय हैं।

फिलहाल, मदद के लिए अभिनेता सोनू सूद को किया गया ट्वीट तब से गायब है। ऐसा संदेह किया जा रहा है कि सोनू सूद वास्तव में किसी की मदद किए बिना भी कोविड -19 रोगियों के लिए मदद की व्यवस्था करने के लिए क्रेडिट का झूठा दावा कर रहे थे।

उन्होंने हाल ही में एक ट्विटर यूजर को प्लाज्मा की आपूर्ति करने के लिए क्रेडिट खाया था, जिसने एक मरीज के लिए उनसे मदद माँगी थी, लेकिन बाद में, ट्विटर यूजर ने खुद स्पष्ट किया कि उसके परिवार को ऐसी किसी व्यवस्था के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।

एक अलग मामले में, अभिनेता सूद ने एक ऐसे मरीज के लिए बेड अरेंज करने का श्रेय लेने का दावा किया था, जो पहले ही बीमारी से मर चुका था। इस बीच यह बात भी सामने आई है कि सोनू सूद सोशल मीडिया पर खुद को कोविड रोगियों के लिए मसीहा के रूप में चित्रित करते हुए अपने आत्म-प्रशंसनीय पोस्ट साझा कर रहे हैं।

ऐसे पोस्टों में किसी में उन्हें भगवान हनुमान के रूप में चित्रित किया गया और किसी में भारत माता को उनकी सेवा के लिए उन्हें नमन करते हुए दिखाया गया है।

‘एक और हिटलर की जरूरत’: पाकिस्तानी पत्रकार आदिल रजा ने दिखाई यहूदी घृणा, CNN का है कंट्रीब्यूटर

सीएनएन के फ्रीलाँसर आदिल रजा ने इजराइल और फिलिस्तीन के बीच चल रहे अघोषित युद्ध के बीच कहा कि आज दुनिया को एक हिटलर की जरूरत है। हालाँकि, बाद में इस्लामाबाद के रहने वाले न्यूज प्रोड्यूसर राजा ने अपने इस ट्वीट को डिलीट कर दिया।

साभार: ट्विटर

आदिल राजा के Linked.in प्रोफाइल के अनुसार, वह ARY न्यूज से जुड़ा है। वह CNN से भी बतौर फ्रीलांसर कंट्रीब्यूटर जुड़ा हुआ है।

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‘एक और हिटलर की जरूरत’ वाले ट्वीट के बाद से आदिल के अन्य ट्वीट्स के स्क्रीनशॉट भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। इन्हीं में से एक में उसने कहा है कि वह फीफा विश्व कप के फाइनल में जर्मनी का समर्थन इसलिए कर रहा था, क्योंकि एडॉल्फ हिटलर जर्मन था और उसने ‘यहूदियों के साथ अच्छा किया’ था। बता दें कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हिटलर ने जर्मनी में यहूदियों का नरसंहार किया था।

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एक और ट्वीट में उसने हिटलर की तारीफ की थी।

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यहीं नहीं आदिल के अंदर भारत के प्रति इतना जहर भरा है कि वह फिलिस्तीन के हालात की तुलना कश्मीर से करता है।

साभार: ट्विटर

15 मई 2021 को उसने ट्वीट किया कि फिलिस्तीन में जैसा यहूदी (इजराइल) कर रहे हैं, वैसा ही ‘भारतीय हिंदू अधिकृत कश्मीर में कर रहे हैं’। यहाँ उसने कश्मीर को ‘अधिकृत कश्मीर’ कहा, जबकि ‘अधिकृत कश्मीर’ भारत का एक अभिन्न अंग है जो कि पाकिस्तान और चीन द्वारा अवैध रूप से कब्जा किए गए कश्मीर का हिस्सा है।

हाल ही में इजराइल और फिलिस्तीन के बीच हिंसक झड़प शुरू होने के बाद से ही पाकिस्तान में इजराइल के खिलाफ नफरत उफान मार रही है। आदिल से पहले पाकिस्तानी एक्ट्रेस वीना मलिक ने भी हिटलर को कोट करते हुए यहूदियों के नरसंहार की बात की थी।

रियलिटी शो से ट्विटर ट्रोल बने एक ट्वीट में एडॉल्फ हिटलर का हवाला देते हुए कहा गया है, “मैं दुनिया के सभी यहूदियों को मार डालता… लेकिन मैंने दुनिया को यह दिखाने के लिए कुछ को जिंदा छोड़ दिया ताकि दुनिया को ये पता चल सके कि मैनें उन्हें क्यों मारा..।”

बता दें कि हमास के खिलाफ इजरायली कार्रवाई को देखते हुए पाकिस्तानी सोशल मीडिया में लगातार प्रधानमंत्री इमरान खान से इजराइल पर परमाणु हमला करने की अपील कर रहे हैं।

Tauktae हुआ ‘बेहद तीव्र’, मुंबई एयरपोर्ट बंद, गुजरात की ओर बढ़ रहा 22 सालों का सबसे ताकतवर तूफान

अभी भारत कोरोना वायरस की दूसरी लहर से जूझ ही रहा है कि एक और आपदा ने देश की परेशानी बढ़ा दी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने सोमवार (17 मई) को कहा कि Tauktae एक “बेहद तीव्र चक्रवाती तूफान” में बदल गया है। इस तूफान की वजह से कर्नाटक, गोवा, महाराष्ट्र में भारी बारिश हो रही है। कर्नाटक में चक्रवाती तूफान की वजह से हुई बारिश से 4 लोगों की मौत हो गई। इस तूफान से 180-190 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएँ चल रही हैं। हालांकि, आईएमडी का पूर्वानुमान है कि गुजरात तट से टकराने पर इसकी तीव्रता कम हो जाएगी। ये अरब सागर के केंद्र से 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ रहा है।

इसके पोरबंदर के अलावा भावनगर स्थित महुवा के तटवर्ती इलाकों में सोमवार (मई 17, 2021) रात तक पहुँचने की संभावना है। 1.5 लाख लोगों को गुजरात के निचले तटवर्ती इलाकों से स्थानांतरित करने की प्रक्रिया चालू कर दी गई है। NDRF और SDRF की 54 टीमों को मौके पर लगाया गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, सोमवार शाम को Tauktae तूफान गुजरात के तट को पार करेगा। गुजरात के 17 जिलों से लोगों को शिफ्ट करने की प्रक्रिया जारी है। वहाँ के तटवर्ती इलाकों में कई जहाज अब भी फँसे हुए हैं।

महाराष्ट्र में तूफान का असर, मुंबई में एयरपोर्ट सेवा ठप

महाराष्ट्र में भी इस तूफान से निपटने के लिए तैयारी जोरों पर है। वहाँ हुई बारिश के बाद कई जगह पहले ही पानी जमा हो गया। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने एक बैठक कर के तैयारियों की समीक्षा की। रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग और रायगढ़ के लोगों को शिफ्ट किया जा रहा है। सीएम ने कहा कि वो स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए हैं।

Tauktae तूफान के कारण मुंबई में कई घंटों तक बारिश होती रही। सड़कों पर कई जगह पानी जमा हो गया और पेड़ों के उखड़ कर गिर जाने से सड़क जाम हो गया। बांद्रा-वर्ली समुद्री रास्ते को बंद कर दिया गया है। BMC ने लोगों को किसी और रूट का इस्तेमाल करने को कहा है। बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में बारिश के कारण वहाँ बने कोविड सेंटर में भी अफरातफरी की स्थिति रही। करीब 500 मरीजों को मुंबई के अन्य अस्पतालों में शिफ्ट किया गया।

महाराष्ट्र के देवगढ़ में 4 मछुआरे गायब बताए जा रहे हैं। मछली मारने के लिए वहाँ गई 3 नावों में से 2 ही वापस आई। रायगढ़, पालघर, मुंबई, ठाणे और रत्नागिरी में अगले कुछ घंटों तक 90-100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएँ चलेंगी। आज दोपहर 11 बजे से 2 बजे तक मुंबई एयरपोर्ट पर सभी सेवाएँ बाधित रहेंगी। आपदा विभाग ने गुजरात में एयरक्राफ्ट्स की तैनाती की है। मुंबई में ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया गया है।

बताया जा रहा है कि गुजरात में 1998 के बाद अब तक का सबसे बड़ा तूफान आने वाला है। अगले 48 घंटे राज्य के लिए काफी अहम रहने वाले हैं। गुजरात और महाराष्ट्र में कोरोना की स्थिति को देखते हुए अस्पतालों और मरीजों पर इसका बुरा असर पड़ने की आशंका है। कई जगह बिजली गुल है। लोगों को घर में रहने कहा गया है। केरल और गोवा में भी इसका असर देखा जा रहा है।

जैश की साजिश, टारगेट महंत नरसिंहानंद: भगवा कपड़ा और पूजा सामग्री के साथ जहाँगीर गिरफ्तार, साधु बन मंदिर में घुसता

दिल्ली पुलिस ने महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती की हत्या की साजिश का पर्दाफाश करते हुए एक आतंकी को गिरफ्तार किया है। यति नरसिंहानंद दिल्ली से सटे गाजियाबाद के डासना स्थित शिव-शक्ति पीठ के महंत हैं। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने सोमवार (मई 17, 2021) को जान मोहम्मद डार उर्फ़ जहाँगीर को पहाड़गंज के एक होटल से दबोचा। उसके पास से भगवा कपड़ा भी बरामद हुआ है।

रिपोर्टों के अनुसार वह महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती की हत्या की सुपारी लेकर आया था। वह जम्मू-कश्मीर का रहने वाला है और पाकिस्तान स्थित अपने आकाओं से निर्देश ले रहा था। पड़ोसी मुल्क में बैठे आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के एक सरगना ने उसे इस हत्याकांड के लिए भेजा था। उसे साधु के वेश में मंदिर में घुस महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती की हत्या करनी थी। दिल्ली पुलिस ने उसके पास से एक पिस्टल और 2 मैगजीन के अलावा 15 कारतूस भी बरामद की है।

उसने पूछताछ में आबिद नाम के अपने एक आका के बारे में बताया है, जो उसे पाकिस्तान से निर्देशित कर रहा था। व्हाट्सएप्प के जरिए वह उसके संपर्क में रहता था। आबिद ने उसे महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती का एक वीडियो दिखाया था और फिर उनकी हत्या के लिए भड़काया था। इसके लिए जहाँगीर को हथियार चलाने की ट्रेनिंग भी दिलवाई गई थी। आबिद ने काम हो जाने पर रुपए देने की बात भी कही थी।

जहाँगीर अप्रैल 23, 2021 को ही कश्मीर से दिल्ली के लिए निकला था। दिल्ली में उमर नाम का एक शख्स उसका इंतजार कर रहा था, जिससे उसकी मुलाकात होनी थी। उमर और जहाँगीर टेलीग्राम के जरिए एक-दूसरे के संपर्क में थे। उमर ने ही दिल्ली में उसके लिए ठहरने की व्यवस्था करने का जिम्मा उठाया था। जहाँगीर जब दिल्ली के लिए निकला, उसी दिन उसके बैंक खाते में 35,000 रुपए भी डाले गए थे।

‘दैनिक जागरण’ की खबर के अनुसार, दिल्ली पुलिस जहाँगीर से अब भी पूछताछ कर रही है जिसमें कई नए राज खुल कर बाहर आने की संभावना है। गाजियाबाद पुलिस के कान भी इस सूचना के बाद खड़े हो गए हैं। आरोपित के पास से जिस तरह पूजा सामग्री, कलावा और कुमकुम मिला है, उससे साफ़ है कि वह साधु के वेश में मंदिर में घुसने में कामयाब हो सकता था। लखनऊ में हिन्दू नेता कमलेश तिवारी की हत्या भी भगवा कपड़ा पहने आरोपितों ने की थी।

जान मोहम्मद डार उर्फ़ जहाँगीर पुराना दहशतगर्द है और 2016 में पत्थरबाजी के मामले में वो अनंतनाग में गिरफ्तार भी किया गया था। आतंकी बुरहान वानी के एनकाउंटर के बाद उसने भारतीय सेना पर पत्थरबाजी की थी। अक्टूबर 2019 में युसूफ खान और हाशिम अली ने जिस तरह कमलेश तिवारी की हत्या की थी, उसी तर्ज पर जहाँगीर की भी तैयारी थी। फ़िलहाल ये दोनों भी जेल में बंद हैं। दोनों भगवा कपड़ा पहन बातचीत के बहाने तिवारी के दफ्तर में घुसे थे।

हाल के दिनों में महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती के एक बयान को ‘रसूल अल्लाह की शान में गुस्ताखी’ बता कर भारत के कई शहरों में कट्टर मुस्लिमों ने विरोध-प्रदर्शन किया था। बांग्लादेश और पाकिस्तान तक में उनके खिलाफ भड़काऊ बातें की गईं। बांग्लादेश के कट्टर मौलानाओं ने कहा था कि नरसिंहानंद ने ‘रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम’ की शान में गुस्ताखी की है और इसी की ‘सज़ा’ कोरोना की मौतों के रूप में मिल रही है।

विनोद दुआ की बेटी ने ‘भक्तों’ के मरने की माँगी थी दुआ, माँ के इलाज में एक ‘भक्त’ MP ने ही की मदद

मीटू (MeToo) के आरोपित पत्रकार विनोद दुआ कोरोना संक्रमित होने के कारण अस्पताल में भर्ती हैं। उनकी पत्नी चिन्ना दुआ भी गुरुग्राम के मेदांता में COVID के कारण भर्ती हैं। चिन्ना दुआ को रविवार (16 मई 2021) को टोसिलिजुमैब (Tocilizumab) इंजेक्शन की जरूरत थी। कोरोना संक्रमण के इलाज के दौरान इस्तेमाल की जाने वाली यह एक महत्वपूर्ण दवा है। उनकी बेटी, अभिनेत्री और ‘कॉमेडियन’ मल्लिका दुआ दवा के लिए मदद माँगने इंटरनेट पर पहुँच गईं।

मल्लिका दुआ का ट्वीट और उसके बाद की प्रतिक्रियाएँ

मल्लिका ने अभिनेता सोनू सूद और कॉन्ग्रेस नेता दीपेंद्र हुड्डा जैसी विभिन्न हस्तियों और नेताओं को मदद के लिए ट्वीट किया। लेकिन, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर सहित किसी भी भाजपा नेता से संपर्क नहीं किया था। फिर भी भाजपा सांसद और केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप पुरी ने उन्हें अपना नंबर दिया और बताया कि दवा का इंतजाम हो गया है।

गौरतलब है कि मोदी समर्थक भाजपा नेताओं को ‘भक्त’ बताते हुए मल्लिका पूर्व में उनके मरने की दुआ माँग चुकी हैं। लेकिन, जब मुश्किल वक्त आया तो एक ‘भक्त’ ने ही उनकी मदद की।

सोशल मीडिया पर वायरल एक क्लिप में दुआ से ट्विटर अकाउंट के बारे में पूछा गया था कि वह चाहती हैं कि उन्हें सस्पेंड कर दिया जाए। इसमें वह कहती हैं, “सभी ‘भक्त’ हाँ। ये सभी आईटी सेल f*cks उन्हें बस मर जाना चाहिए।”

इससे पहले मल्लिका दुआ ने पुलवामा में वीरगति प्राप्त करने वालों के साथ एकजुटता दिखाने वाले लोगों के खिलाफ अपशब्द कहे थे। नृशंस हमले में अपने प्राणों की आहुति देने वाले बलिदानियों और उनके शोक संतप्त परिवारों के प्रति असंवेदनशीलता दिखाते हुए दुआ ने कहा था कि ‘लोग हर दिन मरते हैं’। उन्होंने कहा था, “मैं उनसे पूछना चाहती हूँ कि लोग हर दिन भूख, भुखमरी, बेरोजगारी और कई अन्य कारणों से मरते हैं, क्या हम उन सभी पर शोक करते रहते हैं, क्या हम पूरे साल शोक मनाते रहते हैं। यह बकवास है।”

हालाँकि, भाजपा समर्थकों ने इन अमीरों की मदद करने पर बीजेपी के मंत्री का विरोध भी किया है। उनका कहना है कि आम लोग भी समान रूप से पीड़ित हैं और हायर क्लास ने उनसे मदद भी नहीं माँगी थी।

ट्विटर यूजर अंकित जैन ने ऐसे वक्त में जब हर किसी को चिकित्सकीय मदद की जरूरत है दुआ जैसे खास लोगों की मदद पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि एलीट क्लास को तब भी मदद मिल जाती है जब उन्होंने मंत्री को टैग तक नहीं किया था।

वहीं ट्विटर यूजर अंकुर सिंह ने ने इस पर सवाल उठाते हुए याद दिलाया कि कैसे मल्लिका के पिता पत्रकार विनोद दुआ ने पूर्व पीएम और भाजपा नेता अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर श्रद्धांजलि देने को ‘पाखंड’ बताया था।

इस बीच मल्लिका दुआ ने मदद के लिए पुरी का शुक्रिया अदा किया है और पुरी ने दुआ को दवा देने वाला अपना ट्वीट डिलीट कर दिया है।