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सोनू सूद की फाउंडेशन का कमाल: तेजस्वी सूर्या से मदद माँग खुद खा गए क्रेडिट

बेंगलुरु पुलिस, बेंगलुरु फायर डिपार्टमेंट, ड्रग कंट्रोलिंग डिपार्टमेंट और बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या के ऑफिस के प्रयासों से 12 मई को श्रेयस अस्पताल में संभावित ऑक्सीजन संकट टल गया। हालाँकि, सोनू सूद का चैरिटी फाउंडेशन इस नेक काम का श्रेय लेने के लिए खबरों में बना रहा। सभी मीडिया रिपोर्टों ने सोनू सूद और उनके फाउंडेशन को ऑक्सीजन की व्यवस्था करने का श्रेय दिया और इस दौरान कहीं भी तेजस्वी सूर्या के ऑफिस का जिक्र नहीं किया गया।

घटनाओं का कालक्रम

ऑपइंडिया ने श्रेयस अस्पताल के डॉ. समित हविनाल द्वारा लिखे गए पहले पत्र को एक्सेस किया, जिसमें 12 मई को हुई घटनाओं की शृंखला की व्याख्या की गई थी। कृपया ध्यान रखें कि हम किसी को भी अस्पताल के लिए ऑक्सीजन की व्यवस्था करने की पूरी प्रक्रिया में शामिल होने से बदनाम नहीं कर रहे हैं। हम में से हर कोई इस संकट से बचने के लिए दूसरों की मदद करने की पूरी कोशिश कर रहा है।

डॉ. समित ने कहा कि रात करीब 11 बजे उन्हें अस्पताल से फोन आया कि ड्यूरा सिलेंडर से लिक्विड ऑक्सीजन लीक हो रही है जिसके कारण अपर्याप्त प्रवाह हो रहा है। अस्पताल में दो ड्यूरा सिलेंडर हैं जिनका उपयोग वे निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए रोटेशन में करते हैं। उनका एक सिलेंडर उस समय रिफिलिंग के लिए भुरुका गैस में था, लेकिन वहाँ एक बड़ी कतार थी।

पत्र के पहले संस्करण में तेजस्वी सूर्या के नाम का उल्लेख

बैकअप सिलिंडर भी एक घंटे में खत्म होने वाला था और 19 मरीजों की जान दाँव पर लगी हुई थी। उन्होंने तुरंत श्रेयस अस्पताल के पीआरओ अरुण को फोन किया और सूद चैरिटी फाउंडेशन की मेघा चौधरी को फोन करके 5-6 सिलेंडर देने का अनुरोध किया। मेघा ने आगे फाउंडेशन की ओर से हशमत रजा को अनुरोध भेजा और भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या के सुमुख, ओएसडी सहित कई अधिकारियों को अलर्ट किया। तात्कालिकता को समझते हुए, सुमुख ने तुरंत डॉ. समित को बुलाया और उनसे सारी जानकारी ली।

सुमुख के पास सारी जानकारी लेने के बाद, उन्होंने जल्द से जल्द ऑक्सीजन प्राप्त करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। उन्होंने भुरुका गैस में कतार को दरकिनार कर जल्द से जल्द ड्यूरा सिलेंडर भरने की कोशिश की। सिलेंडर को रिफिल किया गया था, लेकिन अस्पताल पहुँचने में 60 मिनट और लगने थे। इस बीच महालक्ष्मी लेआउट इंस्पेक्टर कंथाराजू और उनकी टीम जिला दमकल अधिकारी जगदीश को लेकर अस्पताल पहुँच गई। एहतियात के तौर पर वे अपने साथ फायर एंबुलेंस लेकर गए थे। एसीपी रीना सुवर्णा भी टीम की मदद के लिए अस्पताल पहुँचीं।

पत्र के पहले संस्करण में तेजस्वी सूर्या के नाम का उल्लेख

ड्रग कंट्रोल ऑफिसर हरीश और सुरेश ने भी अस्पताल को फोन किया और तुरंत पास के अस्पताल से कुछ सिलेंडर की व्यवस्था की। जल्द ही ड्यूरा सिलेंडर अस्पताल पहुँच गया और विभिन्न विभागों की मदद से एक बड़ा संकट टल गया। डॉ. समित ने अपने पत्र में सोनू सूद फाउंडेशन, पुलिस विभाग, अग्निशमन विभाग, औषधि नियंत्रण विभाग और तेजस्वी सूर्या के ऑफिस से सुमुख को धन्यवाद दिया।

COVID संकट के लिए कार्रवाई में वॉर रूम

एमपी तेजस्वी सूर्या के कार्यालय में विशेष कर्तव्य अधिकारी के रूप में काम करने वाले सुमुख ने बताया कि सरकार में एक विभाग है जो इस तरह के किसी भी SOS कॉल को रिसीव करने के कुछ ही मिनटों के भीतर कार्य करता है। उन्होंने बातचीत के दौरान रोहित का उल्लेख किया, जो एक स्वयंसेवक है और कोविड -19 राहत प्रदान करने के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि रोहित को ही अस्पताल में किसी मरीज से सूचना मिली थी कि कुछ ऑक्सीजन का संकट चल रहा है। सुमुख ने तुरंत डॉ. समित को बुलाया और स्थिति का जायजा लिया और पुलिस विभाग, दमकल विभाग और ड्रग कंट्रोलर्स को तुरंत अस्पताल पहुँचने के लिए कहा।

उन्होंने पत्र में उल्लिखित गैस एजेंसी को भी बुलाया और कतार को बायपास कर दिया ताकि तत्काल आधार पर सिलेंडर को रिफिल किया जा सके। इस बीच, पुलिस ने कुछ सिलेंडरों के साथ अस्पताल की मदद की और श्रेयस अस्पताल में सुमुख द्वारा डॉक्टर को फोन करने के 90 मिनट के भीतर संभावित संकट टल गया।

सोनू सूद फाउंडेशन 

ऑपइंडिया से बात करते हुए, सोनू सूद फाउंडेशन से जुड़े हशमत रज़ा ने दावा किया कि उनके सहयोगी मेघा को ऑक्सीजन संकट के बारे में पता चला और उन्हें अलर्ट किया। रज़ा ने अपनी टीम को जुटाया जो उनके पास मौजूद 5-6 सिलेंडरों के साथ अस्पताल पहुँची। उन्होंने गैस फिलिंग स्टेशन पर कतार को भी बायपास करवाया ताकि ड्यूरा सिलेंडर को रिफिल कर तत्काल अस्पताल पहुँचाया जा सके।

जब हमने उनसे पूछा कि वे गैस रिफिलिंग स्टेशन पर लंबी कतार को कैसे बायपास करने में कामयाब रहे, तो उन्होंने दावा किया कि उनके संगठन ने स्वास्थ्य मंत्री के पीआरओ को बुलाया था जिन्होंने इसे करवाया। पूरी बातचीत के दौरान उन्होंने एक बार भी सुमुख या तेजस्वी सूर्या का नाम नहीं लिया।

यहाँ तक कि सूद चैरिटी फाउंडेशन की ओर से शेयर किए गए ट्वीट में भी तेजस्वी सूर्या का नाम नहीं लिया गया।

समित के मुताबिक घटना का कालक्रम

डॉ समित ने ऑपइंडिया से बात करते हुए घटनाओं के कालक्रम की पुष्टि की, जैसा कि उनके अस्पताल द्वारा पहले जारी पत्र में उल्लेख किया गया है। उन्होंने विशेष रूप से सुमुख के बारे में बात की, तेजस्वी के सूर्या के ओएसडी, पुलिस विभाग, अग्निशमन विभाग और ड्रग कंट्रोलर्स ने उन्हें समय पर ऑक्सीजन प्राप्त करने में मदद की। उन्होंने उल्लेख किया कि उन्होंने मदद के लिए सोनू सूद के फाउंडेशन को कॉल किया था, जिन्होंने संभवतः सूर्या के कार्यालय को अनुरोध भेजा, जिसके बाद सभी एक्शन में आ गए।

पत्र के दूसरे संस्करण से सूर्या का नाम गायब

हमें मिले पत्र के दूसरे संस्करण में तेजस्वी सूर्या के कार्यालय का नाम पूरी तरह से हटा दिया गया था। सुमुख का नाम था, लेकिन यह स्पष्ट नहीं था कि उन्होंने किस तरह से मदद की, क्योंकि उनके पद का कहीं भी उल्लेख नहीं किया गया था।

पत्र का अंतिम संस्करण, जहाँ तेजस्वी सूर्या के कार्यालय का नाम पूरी तरह से हटा दिया गया था

पत्र के इस संस्करण को बेंगलुरु शहर के पुलिस आयुक्त कमल पंत ने भी पोस्ट किया था, जिन्होंने लिखा था, “यह सब जीवन बचाने के बारे में है! @mhlayoutps, @acpjcnagar, सोनू सूद फाउंडेशन के पीआई श्री कंथाराजू और अन्य विभागों के अधिकारियों द्वारा त्वरित प्रतिक्रिया और समय पर एक्शन ने श्रेयस अस्पताल में लगभग 30-कोविड ​​रोगियों की जान बचाई। जब 12 मई की रात को ऑक्सीजन रिसाव का पता चला तो वे अस्पताल पहुँचे और समय रहते आपातकालीन सिलेंडर की व्यवस्था की। हमारे #COVIDHeroes को प्रणाम। बहुत सराहना!”

बेंगलुरु सिटी के नॉर्थ डिवीजन के पुलिस उपायुक्त धर्मेंद्र कुमार मीणा ने लिखा, “श्री कंथराज, पीआई महालक्ष्मी और टीम अन्य रिस्पॉन्डर्स के साथ मौके पर पहुँचे और श्रेयस में जीवन के लिए ऑक्सीजन रिसाव की स्थिति को कम करने के लिए @acpjcnagar की देखरेख में अस्पताल में तेजी से तकनीशियन और अतिरिक्त ऑक्सीजन सिलेंडर जुटाए। वेल डन टीम।”

सुमुख ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा, “यह संभव है कि सूद चैरिटी फाउंडेशन खुद को किसी राजनीतिक दल से नहीं जोड़ना चाहता था, इसलिए उन्होंने पत्र से सूर्या के कार्यालय का नाम हटा दिया। हालाँकि, सरकार के प्रयासों को बदनाम करना और किसी ऐसी चीज का श्रेय लेना सही नहीं है जिसमें आपकी भागीदारी लगभग न के बराबर थी।”

हाल ही में अभिनेता सोनू सूद के मददगार अवतार का एक और भांडा फूटा था। सोनू सूद ने ओडिशा के बरहामपुर के गंजम सिटी अस्पताल में एक मरीज के लिए बिस्तर की व्यवस्था करने का दावा किया जिस पर गंजम के कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट ने सोनू सूद के इस फर्जीवाड़े का खुलासा करते हुए ट्विटर पर प्रशासन के आधिकारिक अकाउंट के जरिए बताया कि जिस मरीज के लिए बेड अरेंज करने का दावा किया गया है वो मरीज स्टेबल कंडीशन में होम आइसोलेशन में है।

ऐसा संदेह किया जा रहा है कि सोनू सूद वास्तव में किसी की मदद किए बिना भी कोविड -19 रोगियों के लिए मदद की व्यवस्था करने के लिए क्रेडिट का झूठा दावा कर रहे थे। उन्होंने हाल ही में एक ट्विटर यूजर को प्लाज्मा की आपूर्ति करने के लिए क्रेडिट खाया था, जिसने एक मरीज के लिए उनसे मदद माँगी थी, लेकिन बाद में, ट्विटर यूजर ने खुद स्पष्ट किया कि उसके परिवार को ऐसी किसी व्यवस्था के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।

जेल पहुँचते ही बीमार हुए ममता के मंत्री-विधायक, अस्पताल लाए गए: जमानत पर हाई कोर्ट ने लगा दी थी रोक

पश्चिम बंगाल में नारदा केस में गिरफ्तार नेताओं की तबीयत जेल में बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें मदन मित्रा, सोवन चटर्जी और सुब्रत मुखर्जी शामिल हैं। इन्हें एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

सोमवार (17 मई 2021) को चार नेताओं की टीएमसी ने इस केस में गिरफ्तारी की थी। जिन नेताओं की गिरफ्तारी की गई थी उनमें ममता बनर्जी की मौजूदा सरकार के मंत्री फिरहाद हाकिम और सुब्रत मुखर्जी शामिल हैं। सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस के विधायक मदन मित्रा और पूर्व मेयर सोवन चटर्जी को भी गिरफ्तार किया गया था।

इनकी गिरफ्तारी के बाद से राज्य का राजनीतिक पारा गरम है। गिरफ्तारी की खबर मिलते ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद सीबीआई दफ्तर पहुँच गईं थी। वहॉं धरने पर बैठते हुए उन्होंने एजेंसी को खुद की गिरफ्तारी की चुनौती दी। TMC कार्यकर्ताओं ने जाँच एजेंसी के दफ्तर पर पत्थरबाजी और बैरिकेड तोड़कर भीतर दाखिल होने की कोशिश भी की थी।

बाद में चारों नेताओं को सीबीआई की विशेष अदालत ने जमानत दे दी। लेकिन हाई कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी। इसके बाद इन नेताओं को सोमवार की रात प्रेसिडेंसी जेल भेज दिया गया। जेल पहुँचने के कुछ घंटों के बाद ही सुब्रत मुखर्जी ने तबीयत खराब होने की शिकायत की, जिसके बाद उन्हें एसएसकेएम अस्पताल ले जाया गया। इसके बाद मित्रा और चटर्जी को भी तबीयत खराब होने पर अस्पताल लाया गया

इससे पहले हाई कोर्ट ने ममता बनर्जी के नेतृत्व में धरने और ट्रायल कोर्ट परिसर में हजारों समर्थकों के साथ राज्य के कानून मंत्री की मौजूदगी को लेकर आपत्ति दर्ज की थी। हाई कोर्ट ने कहा कि अगर नेताओं को गिरफ्तार किए जाने के बाद इस तरह की घटनाएँ होती हैं तो लोगों का न्यायपालिका में विश्वास खत्म हो जाएगा।

इसके बाद कलकत्ता हाई कोर्ट के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल और जस्टिस अर्जित बनर्जी ने अगले आदेश तक गिरफ्तार नेताओं को न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा, “न्यायिक व्यवस्था में नागरिकों का विश्वास होना सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये उनके लिए अंतिम विकल्प है। लोगों को ऐसा लग सकता है कि कानून-व्यवस्था की जगह भीड़तंत्र हावी है। खासकर ऐसे मामले में, जहाँ राज्य की मुख्यमंत्री CBI दफ्तर में भीड़ का नेतृत्व कर रही हों और कानून मंत्री अदालत के परिसर में। अगर आप कानून के राज़ में विश्वास रखते हैं तो ऐसी घटनाएँ नहीं होनी चाहिए।”

बैटरी चोरी के आरोप में 3 दलित लड़कों को नंगा करके पीटा, गाँव में लगवाया चक्कर: मो नासिर, अख्तर समेत 6 गिरफ्तार

बिहार के गया जिले में तीन दलित युवकों के साथ बदसलूकी की घटना प्रकाश में आई है। पुलिस का कहना है कि एक ग्राम पंचायत में तीन दलित लड़कों पर बैटरी चोरी के इल्जाम में, उनके कपड़े उतार कर उन्हें मारा गया और पूरे गाँव भर में उनकी परेड करवाई गई।

हिंदुस्तान टाइम्स में 18 मई को प्रकाशित अविनाश कुमार की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने कहा कि रविवार (अप्रैल 16, 2021) को इस संबंध में वीडियो वायरल हुई थी। कथिततौर पर इसमें नजर आया था कि लड़कों से जबरदस्ती उठक बैठक करवाई गई, उनसे गाँव का गोल चक्कर लगवाया गया।

इस दौरान बाकी लोग सिर्फ मोबाइल पर उनकी फिल्म बनाते रहे। कोई उनकी मदद को आगे नहीं आया। बात बढ़ने पर शनिवार को इस संबंध में गाँव में तनाव का माहौल रहा। हालाँकि बाद में दोनों समुदायों के नेताओं से बात करके स्थित कंट्रोल कर ली गई।

गया के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आदित्य कुमार ने बताया कि घटना की जाँच के लिए पुलिस अधीक्षक राकेश कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया है। इसके अलावा इस मामले में दुकान के मालिक मोहम्मद शेरू आलम, मोहम्मद ज़िन्नत, मोहम्मद तेज़ू, अमरजीत सिंह, मोहम्मद नासिर और मोहम्मद अख्तर को गिरफ्तार किया गया है। इनके ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 341, 342, 323, 504,506, 34 के अलावा आईटी एक्ट, एससी एसटी एक्ट, पॉक्सो एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ है।

गौरतलब है कि चोरी के इल्जाम में दलितों के साथ बर्बरता की एक तस्वीर पिछले साल राजस्थान से भी सामने आई थी। नागौर में 2 दलित भाइयों के साथ बर्बतापूर्ण तरीके से मारपीट करके उन्हें तड़पाने के लिए उनके प्राइवेट पार्ट्स में पेट्रोल डालकर स्क्रू ड्राइवर घुसाया गया था।

दोनों भाई बाइक सर्विसिंग करवाने गए थे। लेकिन वहाँ उन पर चोरी का इल्जाम लगाते हुए उनसे मारपीट की जाने लगी। इस घटना की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। वीडियो में दिखा था कि उन्हें कितनी बुरी तरह मारा गया और पीटने के बाद जान से मारने की धमकी भी दी गई।

इजरायल का Iron Dome वाशिंगटन पोस्ट को खटका… तो आतंकियों के हाथों मर ‘शांति’ लाएँ यहूदी?

इजरायल और फिलिस्तीन के संघर्ष में जहाँ अधिकतर लोग आतंकवादियों के सफाई के लिए यहूदी मुल्क की प्रशंसा कर रहे हैं, वहीं मीडिया का एक वर्ग ऐसा है जो मान ही नहीं सकता है कि इस्लामी कट्टरता या आतंकवाद जैसी किसी चीज का अस्तित्व भी है और इसीलिए वो लगातार इजरायल को बदनाम करने में लगा हुआ है। ‘वाशिंगटन पोस्ट’ के एक लेख में इजरायल के नागरिकों की सुरक्षा करने वाले ‘आयरन डोम’ को इस हिंसा का कारण बताया गया है।

बता दें कि इजरायल का ‘आयरन डोम’ एक एरियल एंटी-मिसाइल सिस्टम है जो गाज़ा की तरफ से आने वाले रॉकेट हमलों की पहचान करता है और फिर उन्हें मार गिराया जाता है जिससे यहाँ के नागरिकों को नुकसान नहीं होता। पिछले एक दशक में इसने हमास के हजारों ऐसे रॉकेट्स को रोका है, जो इजरायल में तबाही मचा सकते थे। ‘वाशिंगटन पोस्ट’ का कहना है कि इस के कारण इजरायल समस्या के समाधान में ‘उत्तेजना’ नहीं दिखा रहा।

ये ‘आयरन डोम’ सिस्टम किसी चमत्कार से कम नहीं है, जो शॉर्ट-रेन्ज रॉकेट्स का काल है। ये हमास की तरफ से आने वाले 90% रॉकेट्स को ब्लॉक करता है। विशेषज्ञ इसे इजरायल का ‘इन्सुरेंस पॉलिसी’ भी बताते हैं। हमास एक बार में दर्जनों रॉकेट्स छोड़ता है, इस उम्मीद में की संख्या ज्यादा होने पर एकाध अपने लक्ष्य पर लग जाए। अमेरिका का ‘पेट्रियट सिस्टम’ भी तुलनकतमक रूप से इसके पीछे है।

क्या मीडिया का ये वर्ग चाहता है कि कोई देश अपनी सुरक्षा न करे और अपने लोगों को सिर्फ इसीलिए मरने के लिए छोड़ दे, क्योंकि हमला इस्लामी कट्टरपंथियों व आतंकियों की तरफ से किया जा रहा है? अपनी सुरक्षा की व्यवस्था करना भी अब पाप हो गया क्योंकि इससे ‘समाधान की उत्तेजना’ कम होती है? सोचिए, अगर ये तकनीक नहीं होती तो पिछले दो हफ़्तों से गाज़ा की तरफ से रॉकेट्स की जो बरसात की गई है उससे एक छोटे से देश में कितनी भीषण तबाही मचती!

‘ओपन यूनिवर्सिटी ऑफ इजरायल’ के प्रोफेसर और ‘राजनीतिक वैज्ञानिक’ यागिल लेवी द्वारा लिखे गए इस लेख में इस ‘आयरन डोम’ को हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है, क्योंकि ये इजरायल को गाज़ा के हमलों से बचाव के अलावा जवाबी कार्रवाई के लिए ताकत प्रदान करता है। लेख में लिखा गया है कि इससे गाज़ा पर बमबारी का खर्च कम हो जाता है, इजरायल को नागरिकों के जानमाल की क्षति की चिंता नहीं रहती और गाज़ा समस्या का राजनीतिक समाधान नहीं निकल पाता।

लेख की भाषा पर गौर कीजिए, “इस संघर्ष से पहले तक पिछले एक दशक में इजरायल के मायर 18 नागरिक ही हमास के हमले में मारे गए हैं। इससे इजरायल पर एक घरेलू दबाव पैदा होता है कि वो गाज़ा के क्षेत्रों पर कब्ज़ा करे। हमास को उखाड़ फेंके। दक्षिणपंथी गुट की तरफ से ऐसा दबाव आता है। जब-जब हमास ने टनल का प्रयोग कर के इजरायल में घुसना चाहा, इजरायल ने जमीनी ऑपरेशन लॉन्च कर दिया।”

मीडिया संस्थान के कहने का मतलब ये है कि इजरायल को अपने लोगों को मरने के लिए छोड़ देना चाहिए और एकमात्र प्राथमिकता आतंकी संगठन हमास की माँगों को संतुष्ट करने को दिया जाना चाहिए। लेकिन, इस लेख में बड़ी चालाकी से इस बात की चर्चा तक नहीं की गई है कि ताज़ा संघर्ष हमास द्वारा रॉकेट्स छोड़ने के साथ शुरू हुआ। अगर हमास को समाधान चाहिए तो उसने हिंसा का रुख क्यों अख्तियार किया?

‘वाशिंगटन पोस्ट’ को इस बात से परेशानी है कि UN द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों से इजरायल और ‘सावधान’ हो गया है। तोप, रॉकेट्स और ड्रोन्स के माध्यम से पश्चिमी देश भी अपने दुश्मनों पर दूर से हमले करते रहे हैं, फिर इजरायल ने क्या गलत किया? खुद बराक ओबामा ने राष्ट्रपति रहते ‘आयरन डोम’ के लिए 2014 में 225 मिलियन डॉलर (आज की तारीख़ में 1642.95 करोड़ रुपए) की फंडिंग दी थी। अमेरिका ने इस पर गर्व जताया था।

2014 के युद्ध के बाद ये इजरायल-फिलिस्तीन सीमा पर सबसे खतरनाक स्थिति है। ‘वाशिंगटन पोस्ट’ का कहना है कि इसने इजरायल को ‘सुरक्षा का झूठा एहसास’ दे रखा है। लेवी ये चर्चा करना भी नहीं भूले हैं कि ये हमेशा के लिए नहीं रहेगा और तकनीक की ये सफलता की जगह ‘राजनीतिक समाधान’ निकलना चाहिए। सवाल ये है कि निर्दोष नागरिकों की जान बचाने वाली तकनीक से किसी को क्यों कोई समस्या होनी चाहिए?

एक तो यहूदी पूरी दुनिया में काफी कम संख्या में बचे हुए हैं और सदियों से ‘Anti-Semitism’ का शिकार रहने, यूरोप/रोमन/इस्लामी ताकतों के हाथों नरसंहार झेलने और अपने मुल्क इजरायल के इस्लामी मुल्कों से घिरा होने के बावजूद अगर उन्होंने अपनी सुरक्षा के तगड़े इंतजाम कर के जानमाल की क्षति से बचने की व्यवस्था की है तो इसमें समस्याजनक क्या है? लिबरल गिरोह अब इस बात से भी परेशान है कि इजरायल अब खुद की सुरक्षा में भी इतना आक्रामक है।

ये वही लोग हैं, जो जम्मू कश्मीर में भी आतंकियों द्वारा आम नागरिकों की हत्या पर चुप्पी साध लेते हैं लेकिन जब भारतीय सेना आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करती है तो मानवाधिकार का बाग अलापने लगते हैं। इनकी चिरकाल की इच्छा ये रहती है कि कोई भी देश इस्लामी आतंकवाद से न तो अपनी सुरक्षा की व्यवस्था करे और न ही हमलों के प्रत्युत्तर में वार करे। तो क्या यहूदी ‘अल्लाहु अकबर’ चिल्लाते हुए खुद का गला काट लें ताकि ‘वाशिंगटन पोस्ट’ जैसे संस्थान संतुष्ट हों?

‘ये आपकी धरोहर’: जब फिजिक्स के प्रोफेसर राजनाथ सिंह को INMAS डायरेक्टर ने 2-DG का दिया श्रेय

कोविड संक्रमण से जंग जीतने की दिशा में DRDO की लैब इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एण्ड एलाइड साइंस (INMAS) ने 17 मई को 2 -deoxy-D-glucose (2-DG) नाम से तैयार दवाई की पहली खेप लॉन्च की। इस दवाई का पहला बैच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्र स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन की मौजूदगी में एक कार्यक्रम में लॉन्च हुआ।

इस दौरान इनमास के निदेशक डॉ. एके मिश्रा ने कार्यक्रम में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का अलग ढंग से आभार व्यक्त किया। उन्होंने संत कबीरदास का दोहा पढ़ते हुए कहा, “गुरु गोविन्द दोऊ खड़े, काके लागूं पांय। बलिहारी गुरु आपने गोविन्द दियो बताय।” 

इस दोहे का अर्थ है- गुरु और गोबिंद (भगवान) एक साथ खड़े हों तो किसे पहले प्रणाम करना चाहिए– गुरु को अथवा गोबिन्द को? ऐसी स्थिति में गुरु के श्रीचरणों में शीश झुकाना उत्तम है क्योंकि उनके कृपा रूपी प्रसाद से गोविन्द का दर्शन करने का सौभाग्य मिलता है।

डॉ. मिश्रा ने कार्यक्रम में उन दिनों को याद किया जब साल 1988 में मिर्जापुर के केबी पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज में राजनाथ सिंह उनके भौतिक विज्ञान के प्रोफेसर हुआ करते थे। उन्होंने राजनाथ सिंह को सम्मान देते हुए कहा, “ये आपकी ही धरोहर है जो आपके सामने प्रस्तुत है।”

डॉ. मिश्रा ने इस दवाई को उनके संस्थान का एक मूल्यवान वैज्ञानिक काम बताया। उन्होंने कहा कि ये बताते हुए वे सम्मानित महसूस कर रहे हैं कि संस्थान अब दवा के रूप में एक मूल्यवान वैज्ञानिक कार्य प्रस्तुत कर रहा है, वो भी उसी शिक्षक के हाथों से, जिसने कभी उनकी (डॉ. एके मिश्रा की) वैज्ञानिक शिक्षा की नींव रखी।

बता दें कि वर्तमान में देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गोरखपुर यूनिवर्सिटी से प्रथम श्रेणी में फिजिक्स की स्नातकोत्तर की डिग्री ली हुई है। इसके बाद वह केबी पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज में भौतिक विज्ञान के प्रोफेसर लगे। बाद में उत्तर प्रदेश में पहली बार आई भाजपा सरकार में उन्होंने शिक्षा मंत्री का पद सँभाला। इतिहास की पाठ्यपुस्तकों के पुर्नलेखन का उन्होंने आदेश दिया था। साथ ही वैदिक गणित को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया था।

2-DG दवाई का उद्घाटन, राजनाथ सिंह ने कहा- आशा की नई किरण

सोमवार को कोविड-19 की दवा 2-डीजी की पहली खेप जारी करने के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह कहा था कि यह दवा कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ लड़ाई में ‘आशा की नई किरण’ लेकर आई है। वह बोले, “डीआरडीओ और डीआरएल द्वारा विकसित, 2-डीऑक्सी-डी-ग्लूकोज (2-डीजी) कोविड -19 के खिलाफ प्रभावी साबित होगा। यह हमारे देश के वैज्ञानिक कौशल का एक बेहतरीन उदाहरण है। मैं अपनी ओर से डीआरडीओ और इस दवा के अनुसंधान एवं विकास में शामिल सभी संस्थानों को बधाई देता हूँ।”

क्या है 2-डीजी?

2-डीऑक्सी-डी-ग्लूकोज (2-डीजी) कोविड संक्रमितों की ऑक्सीजन पर निर्भरता कम करता है। DRDO के अधिकारियों के अनुसार ये दवाई ग्लूकोज की तरह बॉडी में जाती है और संक्रमित सेल तक पहुँचकर प्रोटीन के ऊर्जा उत्पादन को नष्ट कर वायरस को फैलने से रोकती है। ये दवाई फेफड़ों में फैले संक्रमण पर भी काम करती है, जिससे मरीज की ऑक्सीजन पर निर्भरता कम हो सके। जानकारी के मुताबिक इस दवाई की पहली और दूसरी खेब सीमित तौर पर इस्तेमाल होगी। इसे पहले एम्स, सैन्य अस्पतालों और डीआरडीओ के हॉस्पिटल में प्रयोग में लाया जाएगा। जून के बाद ये हर जगह उपलब्ध होगी।

यूनिफॉर्म सिविल कोड और जनसंख्या नियंत्रण कानून वक्त की जरूरत, क्योंकि उनका कोई विशेषाधिकार नहीं

बीते सप्ताह दो-तीन घटनाएँ बहुत महत्वपूर्ण हुईं। लेकिन दुर्भाग्य से भारत की तथाकथित मेनस्ट्रीम मीडिया में उसका कोई जिक्र या संज्ञान तक नहीं लिया गया। पहले तो मद्रास हाई कोर्ट के एक फैसले की बात। यह मुकदमा भी बहुत खौफनाक है, अगर हम इसके परिणामों पर विचार करें। तमिलनाडु के पेरुंबलूर में एक गाँव है कलाथुर। भारत के कई अन्य हिस्सों की तरह ही पहले यह गाँव भी हिंदू बहुल था और अब वहाँ मुहम्मदवादियों की संख्या अधिक हो गई है, वे बहुमत में हैं।

कश्मीर हो या बंगाल या फिर देश के किसी भी हिस्से का गाँव या शहर, एक बार बहुमत में आते ही मुहम्मदवादी वहाँ शरिया लागू करना चाहते हैं। उनकी मजहबी किताब में मूर्तिपूजा सबसे बड़ा शिर्क है, गुनाहे-अज़ीम है, तो उन्होंने कलाथुर के हिंदुओं के तीन मौजूदा मंदिरों और वहाँ के त्योहारों पर रोक लगानी चाही। वजह वही, जो तैमूर से बाबर और अकबर से औरंगजेब तक चली आ रही है- हिंदुओं का कन्वर्जन और निजाम-ए-मुस्तफा की शुरुआत।

उस गाँव के बहुसंख्यक मुहम्मदवादियों ने हिंदुओं के तीन दिनों तक चलनेवाले त्योहार पर इस आधार पर पाबंदी लगानी चाही कि उससे उनके ‘जज्बात’ घायल होते हैं। हमेशा की तरह हमारे प्रशासन ने (जो भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल की करामात से पर्याप्त हिंदू-विरोधी है) ने कुछ छोटी-मोटी पाबंदियाँ उत्सव पर लगा दीं। इससे मुहम्मदवादियों को और बल मिला और ‘ये दिल माँगे मोर’ की तर्ज पर उन्हें इस पर पूरी तरह से रोक चाहिए था।

मामला मद्रास हाईकोर्ट पहुँचा। माननीय मद्रास उच्च न्यायालय का बहुत-बहुत धन्यवाद कि उन्होंने लानत-मलामत करते हुए इस माँग को सिरे से खारिज कर दिया। उच्च न्यायालय ने कहा, “प्रत्येक समुदाय को दूसरों की भावनाओं का अपमान किए बिना धार्मिक जुलूस निकालने का मौलिक अधिकार है। क्षेत्र विशेष का बहुसंख्यक समूह दूसरे धर्म के लोगों को धार्मिक जुलूस निकालने या त्योहार मनाने से नहीं रोक सकता।”

अब दूसरी घटना पर चलते हैं। इजरायल ने हमास के आतंकी ठिकानों पर हमला किया है। ये घटना हजारों मील दूर हो रही है, लेकिन सबसे अधिक दर्द भारत के मुहम्मदवादियों को हो रहा है। देश भर में, सोशल मीडिया पर तो जो अरण्य-रोदन ये कर रहे हैं, सो तो ठीक ही है, बाकी जो लोग इजरायल के पक्ष में कुछ लिख रहे हैं, उनकी पिटाई भी कर रहे हैं। यूएई से एक ऐसा ही वीडियो वायरल भी हुआ था। अपने देश में भी जहाँ कहीं मुहम्मदवादी बहुसंख्या में हैं, वहाँ किसी को हिम्मत नहीं कि इजरायल के पक्ष में कुछ कह सकें। हमास के आतंकी भले ही कितने भी निर्दोषों की जान ले लें, बच्चों और महिलाओं के बीच छिप कर रॉकेट दागते रहें, वे इनके लिए गाजी थे और रहेंगे।

तीसरी और अंतिम घटना के तौर पर बंगाल में हिंदुओं के कत्ल, उत्पीड़न की घटनाओं को ले सकते हैं। राजनीति अपना काम करेगी, यह वर्ण्य विषय भी नहीं है। लेकिन इन तीन घटनाओं के सूत्र लेकर आगे के सबक, आगे की शिक्षा पर बात की जानी जरूरी है।

आतंकी हमास के पक्ष में खड़ा होना, बंगाल के हिंदुओं के विस्थापन-पलायन और मद्रास हाईकोर्ट में दाखिल याचिका को जोड़ने वाला सूत्र कौन सा है? वह कौन सी एक लड़ी है, एक धागा है, जो इन तीनों घटनाओं को पिरोता है? जाहिर तौर पर, वह मुहम्मदवाद है। इस देश का दुर्भाग्य रहा है कि जिस मजहब की वजह से इस देश के दो टुकड़े हो चुके हैं, बाकायदा मजहब के नाम पर एक टुकड़ा काटकर मुहम्मदवादियों ने पहले ही अलग ले लिया है, उसके बावजूद अब भी इस देश में मुहम्मदवाद पर, उसके तरीकों पर चर्चा नहीं होती, सब कुछ कालीन के नीचे बुहारा जाता है।

मुहम्मदवाद का सीधा सा लक्ष्य है- निजाम-ए-मुस्तफा यानी पूरी दुनिया में मुहम्मदवाद की स्थापना। इसके लिए वह उम्माह की सोचता है, ध्यान करता है, वह इसके लिए जरूरी टूल्स भी अपनाता है। जहाँ वह कम संख्या में हैं, विक्टिम हैं। बहुसंख्या में आते ही वे शरिया-शरिया चिल्लाते हैं। तलवार के जोर से, लालच और भय- सब मुहम्मदवाद के टूल हैं। यही वजह है कि तुर्की के लिए इस देश में आंदोलन हुआ, जबकि खुद तुर्की ने खिलाफत को खत्म किया। यहाँ अगर बाबरी ढाँचा ढहाया गया तो पाकिस्तान और बांग्लादेश में सैकड़ों मंदिर तबाह हुए। हिंदुओं की जान और संपत्ति गई। भारत में जो दंगे हुए, वह छोड़ ही दीजिए।

बीते साल सीएए को बहाना बनाकर (और एक ऐसे काल्पनिक एनआरसी को, जिसका कहीं अस्तित्व ही नहीं) दिल्ली में जिस तरह हिंदू-विरोधी दंगे हुए, वह हम सभी ने देखा है। उसी तरह, हमास के आतंकियों के खुले समर्थन में आने वाले यह नहीं बताते कि हमास ने जितने रॉकेट दागे हैं, वे इजरायल के नागरिकों पर और मुहम्मदवादियों के माहे-मुकद्दस में दागे गए।

भारत बहुत वर्षों से इस नासूर से ग्रस्त है। इससे निबटने का एक ही उपाय है कि मुहम्मदवादियों को यह समझा दिया जाए कि उनका कोई विशेषाधिकार नहीं है। यूनिफॉर्म सिविल कोड को जल्द से जल्द लागू किया जाए, साथ ही जनसंख्या नियंत्रण कानून भी। इसके अलावा हरेक स्तर पर मुहम्मदवादियों को यह बताने की जरूरत है कि इस देश का शासन संविधान से चलता है और चलता रहेगा, किसी शरिया से नहीं।

‘ईद खुशियों का त्यौहार, कुंभ कोरोना का सुपर स्प्रेडर’: कॉन्ग्रेस का टूलकिट, मोदी और हिंदुओं को बदनाम करने का खाका

सोशल मीडिया पर एक टूलकिट धड़ल्ले से वायरल हो रहा है, जिसके बारे में भाजपा नेताओं ने दावा किया है कि ये कॉन्ग्रेस पार्टी का है। उक्त दस्तावेज पर कॉन्ग्रेस का चुनाव चिह्न हाथ छाप भी अंकित है और बताया जा रहा है कि पार्टी ने अपने नेताओं को दी गई निर्देशावली को दस्तावेज का शक्ल दिया था, जो अचानक से लीक हो गया। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने इसे ट्विटर पर शेयर करते हुए तंज कसा कि कॉन्ग्रेस इस तरीके से आपदा में लोगों की मदद कर रही है।

इस ‘टूलकिट’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को कोरोना के प्रबंधन में असफल रहने का दावा करते हुए इसके पीछे कुम्भ मेला, चुनावी रैलियों और सेन्ट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को जिम्मेदार ठहराया है। नेताओं को बताया गया है कि कैसे देश के विभिन्न कोने में मोदी सरकार को घेरना है। साथ ही हरिद्वार में लगे कुम्भ को कोरोना का ‘सुपर स्प्रेडर’ करार देते हुए लिखा गया है कि भाजपा अपने फायदे के लिए हिन्दू धर्म का राजनीतिकरण करती है।

इस ‘टूलकिट’ की मानें तो कॉन्ग्रेस ने अपने नेताओं को निर्देश दिया है कि वो कुम्भ को बार-बार ‘सुपर स्प्रेडर कुम्भ’ कह कर सम्बोधित करें। लिखा है कि इससे लोगों को एहसास होगा कि भाजपा की ‘हिन्दू नीतियाँ’ ही सभी समस्याओं के लिए जिम्मेदार हैं। साथ ही लिखा है कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया पहले से ही ऐसा कर रहा है। इस नैरेटिव को आगे बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय मीडिया और ‘दोस्त पत्रकारों’ के साथ साँठगाँठ की बात भी की गई है।

‘कॉन्ग्रेस के टूलकिट’ के अनुसार, भाजपा कुम्भ पर लगे आरोपों का जवाब देने के लिए ईद का नाम ले सकती है लेकिन हमें दोनों त्योहारों की तुलना वाले ‘जाल’ में फँसने से बचना है। स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि ईद को लेकर एकदम से चुप्पी साध ली जाए और जहाँ भी ईद को लेकर बात हो उस पोस्ट या ट्वीट से खुद को अलग किया जाए। साथ ही समाचार एजेंसी ‘रायटर्स’ और BBC जैसे मीडिया संस्थानों के लेख भी शेयर किए गए हैं।

संबित पात्रा ने जिसे कॉन्ग्रेस का ‘टूलकिट’ बताया, उसमें लिखा है, “हमारे कार्यकर्ताओं और समर्थकों को इसके लिए प्रोत्साहित किया जाए कि वो सावधानी से लगातार तस्वीरें वगैरह शेयर कर के सोशल मीडिया के माध्यम से ये बताएँ कि जहाँ कुम्भ एक राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन है, वहीं ईद में जुटने वाली भीड़ विभिन्न परिवारों और समुदायों का एक सुखद मिलान समारोह है।” साथ ही ऐसा प्रदर्शित करने को भी कहा गया है जैसे कॉन्ग्रेस के लोग इस आपदा में पीड़ितों की लगातार मदद कर रहे हों।

इसके लिए चरणबद्ध तरीके से बताया गया है कि लोगों की ‘मदद’ कैसे करनी है। पहले चरण में एक सोशल मीडिया टीम बना कर मदद की गुहार लगा रहे लोगों को मैसेज करना है। दूसरे चरण में उनसे कहना है कि वो फिर से वैसा ही पोस्ट करें लेकिन अबकी यूथ कॉन्ग्रेस और इसके नेताओं को टैग कर के। तीसरे चरण में ‘दोस्त पत्रकारों’ की मदद से उस पोस्ट को आगे बढ़ाना है। अगले चरण में जो बात कही गई है, वो चौंकाने वाली है।

इस ‘टूलकिट’ में लोगों की ‘मदद’ के लिए कॉन्ग्रेस के स्थानीय नेताओं को निर्देश दिया गया है कि वो आसपास के अस्पतालों में कुछ बेड्स व अन्य सुविधाएँ पहले से ही ब्लॉक कर के रखें, जिन्हें अपने नेताओं के निवेदन पर ही मुक्त किया जाए। पाँचवें पॉइंट में निर्देश दिया गया है कि IYC के हैंडल को टैग न करने वाले पीड़ितों को कोई प्रतिक्रिया न दी जाए। पत्रकारों, प्रभावशाली लोगों और मीडिया के लोगों की ‘मदद’ को प्राथमिकता देने को कहा गया है।

इस ‘टूलकिट’ में माना गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अप्र्रूवल रेटिंग उच्चस्तर की है और आपदा व ‘कुप्रबंधन’ के बावजूद इसे कोई नुकसान नहीं पहुँचा है। कॉन्ग्रेस पार्टी ने कहा है कि यही वो मौका है, जब उनके व्यक्तित्व व छवि को धूमिल किया जाए। ऐसे हैंडल्स बनाने को खा गया है, जो देखने में मोदी समर्थक लगे। फिर उन हैंडलों से सरकार की आलोचना करनी है। विदेशी मीडिया में पीएम मोदी के खिलाफ लेखों को जम कर शेयर करने को कहा गया है।

‘टूलकिट’ में बताया गया है कि जिस तरह विदेशी मीडिया और उनके पत्रकार लगातार जलती चिताओं और लाशों की तस्वीरें शेयर कर रहे हैं, कुछ वैसा ही जोर-शोर से करना है। साथ ही ऐसे ‘नाटकीय’ तस्वीरें स्थानीय पत्रकारों को उपलब्ध कराने को निर्देशित किया गया है। साथ ही भारत को बदनाम करने के लिए कोरोना के ‘इंडियन स्ट्रेन’ शब्दावली का बार-बार प्रयोग करने का निर्देश दिया गया है।

इस ‘टूलकिट’ में ‘बुद्धिजीवियों और विचारकों’ के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए अपशब्दों और आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग कराने को खा गया है, क्योंकि जनता में उनकी ‘स्वीकार्यता’ है। भाजपा नेताओं को बदनाम करने हेतु अमित शाह के लिए ‘मिसिंग’, एस जयशंकर के लिए ‘क्वारनटाइण्ड’, राजनाथ सिंह के लिए ‘साइडलाइंड’ और निर्मला सीतारमण के लिए ‘संवेदनहीन’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने को कहा गया है।

साथ ही ऐसी पत्रिकाओं की कवर स्टोरीज को जम कर शेयर करने की सलाह दी गई है, जिसमें भाजपा नेताओं या सरकार को ‘मिसिंग’ लिखा गया हो। साथ ही पीएम मोदी को लगातार पत्र भी लिखने को बोला गया है। ‘पीएम केयर्स फंड’ पर सवाल खड़े करने के लिए सिविल सर्वेंट्स से आवाज़ उठवाने की बात की गई है। इसमें ये भी स्वीकार किया गया है कि छत्तीसगढ़, पंजाब और राजस्थान जैसे राज्यों में ‘पीएम केयर्स फंड’ से भेजे गए वेंटिलेटर्स बिना प्रयोग किए पड़े हुए हैं।

इस खबर को काटने के लिए झूठ बोलने की सलाह दी गई है। कॉन्ग्रेस नेताओं को कहना है कि ये सारे वेंटिलेटर्स खराब थे। ‘पीएम केयर्स’ को बदनाम करने के लिए RTI एक्टिविस्ट्स को जुटा कर लगातार सवाल पूछने को उकसाने के लिए भी निर्देश दिया गया है। झूठा नैरेटिव बनाने की बात कही गई है कि गुजरात को मोदी सरकार ‘स्पेशल ट्रीटमेंट’ दे रही है। अन्य राज्यों के नागरिकों में क्रोध उत्पन्न करने के लिए बार-बार ये दिखाने को कहा गया है कि गुजरात के अलावा बाकी राज्यों के साथ सौतेला व्यवहार हो रहा है।

साथ ही ‘सेन्ट्रल विस्टा प्रोजेक्ट’ को कैसे बदनाम करना है, ये भी बताया गया है। सरकार पहले ही कह चुकी है कि इसका बजट देश के स्वास्थ्य बजट से कई गुना कम है और ये कई साल का है। ‘टूलकिट’ में सलाह दी गई है कि लोगों में ये फैलाना है कि इस रकम से 2 करोड़ परिवारों को ‘न्याय योजना’ के तहत 6000 रुपए मिल जाते। दुष्प्रचार करने की सलाह दी गई है कि ये जनता के लिए नहीं, मोदी के लिए उनका व्यव्तिगत ‘वैनिटी प्रोजेक्ट’ है। दिल्ली हाईकोर्ट में केस करने की बात भी की गई है।

हालाँकि, कॉन्ग्रेस पार्टी ने इस टूलकिट को फेक बताया है और इससे कोई सम्बन्ध होने से इनकार किया है। AICC रिसर्च डिपार्टमेंट के अध्यक्ष राजीव गौड़ा ने कहा कि भाजपा जिस टूलकिट को फैला रही है और उसका कॉन्ग्रेस से सम्बन्ध बता रही है, इस ‘ठगी’ के खिलाफ कॉन्ग्रेस पार्टी केस दर्ज करेगी। उन्होंने कहा कि भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और प्रवक्ता संबित स्वराज के खिलाफ केस दर्ज कराया जाएगा।

नोट: ऑपइंडिया फ़िलहाल ये दावा नहीं करता है कि ये टूलकिट कॉन्ग्रेस पार्टी ने तैयार किया है। भाजपा नेताओं और सोशल मीडिया पर ये इसी दावे के साथ शेयर किए जा रहे हैं।

उत्तर प्रदेश: महिलाओं-बच्चों के लिए हर जिले में एंबुलेंस रिजर्व, तीसरी लहर से निपटने के लिए योगी सरकार ने कसी कमर

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर का असर कम होने के साथ ही उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने तीसरी लहर से निपटने की तैयारियाँ शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि तीसरी लहर में बच्चे और महिलाएँ ज्यादा संक्रमित हो सकते हैं। लिहाजा राज्य सरकार ने पहले ही हर जिले में महिलाओं और बच्चों के लिए एंबुलेंस के पुख्ता इंतजाम कर दिए हैं।

लाइव हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकार ने ऐसी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए 2200 एंबुलेंस तैयार किए हैं। ये एंबुलेंस महिलाओं और बच्चों के लिए रिजर्व होंगी। सरकार की प्राथमिकता ग्रामीण क्षेत्र और राज्य में टेस्टिंग बढ़ाना है। इसके अलावा दूसरी लहर की रोकथाम के लिए योगी सरकार ने 24 मई तक लॉकडाउन बढ़ाने का ऐलान भी किया है।

सुधार की दिशा में उठाए कदम

शुरुआत में कोरोना की दूसरी लहर के प्रकोप से उत्तर प्रदेश भी अछूता नहीं था। आए दिन 30 हजार के लगभग केस आ रहे थे। लेकिन योगी सरकार ने राज्य की स्थिति को सुधारने में कोई कसर नहीं छोड़ी। नतीजन 1 मई को संक्रमण दर 11% तक आ गई, जबकि 30 अप्रैल तक ये 25 % के आसपास थी। इसी तारीख को राज्य में सबसे ज्यादा कोरोना केस (3,10,783) सामने आए थे।

राज्य में संक्रमितों को लेकर ऐसा प्रत्यक्ष बदलाव योगी सरकार की प्रतिबद्धता के कारण देखने को मिला। उन्होंने स्थिति सुधार के लिए Team-09 का गठन किया। इस टीम ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों पर गाँव-गाँव जाकर संक्रमण को रोकने के लिए सक्रियता से काम किया।

ग्रामीण इलाकों में टेस्टिंग बढ़ाई गई। लक्षण वाले लोगों को चेक करके मेडिकल किट दी गई। वैक्सीनेशन का काम तेजी से हुआ। इसके अतिरिक्त हर ग्राम पंचायत में निगरानी समिति बनाई गई, जिन्होंने स्वच्छता को बढ़ावा दिया। सफाई कर्मचारी नियुक्त किए गए ताकि गाँवों में लगातार सफाई, फॉगिंग आदि हो सके। 

इन प्रयासों के लिए WHO ने भी योगी सरकार को सराहा। अब योगी सरकार राज्य की स्थिति पहले से सुधरने पर तीसरी लहर से लड़ने के लिए पहले से खुद को तैयार कर रही है। इस दौरान सबसे ज्यादा ध्यान वैक्सीनेशन पर दिया जा रहा है। राज्य प्रशासन का कहना है कि 18 से 44 साल के लोगों के लिए टीकाकरण अभियान पहले 8 सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में चलाया गया। बाद में ये 11 डिविजनल हेडक्वार्टर में हुआ। अब 17 मई से इसकी शुरुआत 23 डिस्ट्रिक्ट हेडक्वार्टर में हुई है।

बता दें कि इस समय राज्य में 1,63,003 एक्टिव केस हैं। 16 मई तक 24 हजार से ज्यादा संक्रमित रिकवर हुए और 308 ने इस संक्रमण के कारण अपनी जान गँवाई। धीरे-धीरे पॉजिटिव अनुपात गिर रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया था कि राज्य तीसरी लहर से लड़ने के लिए खुद को तैयार कर रहा है। पिछले 15 दिनों के अंदर 1.45 लाख एक्टिव केस कम हुए हैं। इसके अलावा अब राज्य में ढाई से तीन लाख टेस्ट हो सकते हैं।

मेरठ के जुड़वा: 24 साल पहले 3 मिनट के अंतर पर पैदा हुए, कोरोना से कुछ घंटों के अंतर पर हुई मौत

जोफ्रेड वर्गीज ग्रेगरी और राल्फ्रेड जॉर्ज ग्रेगरी भाई थे। वो भी जुड़वा। 23 अप्रैल 1997 को एक साथ पैदा हुए थे। जन्म में केवल तीन मिनट का अंतर था। पूरी जिंदगी साथ बिताई। मौत कुछ घंटों के अंतराल पर हुई। मेरठ के इन जुड़वा भाइयों की जान कोरोना संक्रमण के कारण गई है।

24 अप्रैल को दोनों भाई बीमार पड़े थे। 10 मई को कोरोना संक्रमण की रिपोर्ट नेगेटिव आई। अचानक फिर तबीयत बिगड़ी और 13 तथा 14 मई को एक-एक कर मौत हो गई।

इनके पिता ग्रेगरी रेमंड राफेल के हवाले से मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है बीमार होने से पहले दोनों ने 23 अप्रैल को अपना 24वाँ जन्मदिन मनाया था। जन्म लेने के बाद दोनों ने हर काम साथ किया। सोना, खाना, खेलना और यहाँ तक कि पढ़ाई पूरी कर कंप्यूटर इंजीनियर बनना। हैदराबाद में नौकरी भी साथ-साथ की।

राफेल के अनुसार पहले जोफ्रेड की मौत हुई थी। इसकी सूचना जब उनकी माँ को मिली तो उनके मुँह से बरबस ही निकल गया कि अब राल्फ्रेड भी नहीं बचेगा। ऐसा ही हुआ अगले दिन उसकी भी मौत हो गई। राफेल के अनुसार, “दोनों कोरिया और फिर जर्मनी जाने की योजना बना रहे थे। पता नहीं भगवान ने हमें इस तरह सजा क्यों दी।” उन्होंने कहा, “डॉक्टर उन्हें कोविड वार्ड से सामान्य आईसीयू में शिफ्ट करने की सोच रहे थे। हालॉंकि मैनें अस्पताल से आग्रह किया था कि दो दिन और कोविड वार्ड में ही उनके स्वास्थ्य की निगरानी करें। अचानक 13 मई की शाम मेरी पत्नी के पास फोन आया था और हमारी दुनिया उजड़ गई।”

रिपोर्ट के अनुसार जोफ्रेड की मौत के बाद राल्फ्रेड ने अपनी माँ को फोन किया था। उसने बताया कि उसकी तबीयत ठीक हो रही। इसके बाद उसने जोफ्रेड के बारे में पूछा। घरवालों ने मौत की बात छिपाते हुए कहा कि उसे दिल्ली के अस्पताल में शिफ्ट किया जा रहा है। ग्रेगरी और उनकी पत्नी मेरठ के सेंट थॉमस स्कूल में शिक्षक हैं। मूल रूप से केरल का रहने वाला यह दंपती 90 के दशक में मेरठ आकर बस गया था।

DGP सरकार को बताए बिना छुट्टी पर, SC में मुंबई के पूर्व CP: इधर कोरोना और तूफान से महाराष्ट्र बेहाल

महाराष्ट्र की सत्ताधारी पार्टी शिवसेना राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) संजय पांडे से खफा है। एक तरफ जहाँ राज्य कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर से बेहाल है, वहीं दूसरी तरफ तौकते तूफ़ान ने उसकी परेशानी बढ़ा दी है। इन सबके बीच DGP पांडे अपने गृह नगर चंडीगढ़ में छुटियाँ मना रहे हैं। यहाँ तक कि ये भी साफ़ नहीं है कि उन्होंने अपनी छुट्टियों के बारे में महाराष्ट्र सरकार को सूचित भी किया है या नहीं।

1986 बैच के पुलिस अधिकारी संजय पांडे पहले ही खुद को परमबीर सिंह के खिलाफ जाँच से अलग कर चुके हैं। ‘Times Now’ ने अपने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि शिवसेना उनसे खासी नाराज़ है। DGP पांडे ने इस खबर के सामने आने के बाद सफाई देते हुए कहा कि वो स्थिति पर नज़र रखे हुए हैं और जल्द ही मुंबई लौटेंगे। उन्होंने कहा कि वो अपने मातहत पुलिस अधिकारियों के साथ संपर्क में हैं।

राज्य में ये शायद पहली बार हो रहा है जब पक्ष और विपक्ष दोनों ही पुलिस के मुखिया की अनुपस्थिति पर सवाल उठा रहे हैं। राज्य में अब भी कोरोना के साढ़े 4 लाख सक्रिय मामले हैं और पिछले 1 दिन में 1000 लोगों की मौत हो चुकी है। ऊपर से तौकते तूफ़ान की वजह से मुंबई में तबाही मची है और 6 लोगों की मौत हो गई। भयंकर हवाओं और भारी बारिश के कारण हुई क्षति का खुद सीएम उद्धव ठाकरे ने आकलन किया और आवश्यक निर्देश दिए।

उधर मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने अपने खिलाफ चल रही विभागीय जाँच को रुकवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और आरोप लगाया है कि उन्हें झूठे मामलों में फँसाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले की जाँच कर रहा अधिकारी उन्हें धमका रहा है कि अगर उन्होंने राज्य के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ दर्ज शिकायत वापस नहीं लिया तो उन्हें झूठे मामलों में फँसाया जाएगा।

NCP नेता अनिल देशमुख पर विवादित पुलिस अधिकारी सचिन वाजे के जरिए राज्य के विभिन्न प्रतिष्ठानों से 100 करोड़ रुपए की वसूली के आरोप लगे थे, जिसके बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था। बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद इस मामले की जाँच अब CBI के हाथों में है। परमबीर सिंह ने CBI को जाँच मुंबई पुलिस के जाँच अधिकारी के साथ हुई फोन पर बातचीत के ट्रांसक्रिप्ट सौंपे हैं। उन्होंने इन्क्वायरी ऑफिसर पर धमकी देने का आरोप लगाया।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका में कहा है कि उन्हें महाराष्ट्र सरकार पर भरोसा नहीं है, इसीलिए उनके खिलाफ चल रहे सभी मामलों को राज्य से बाहर स्थानांतरित किया जाए और किसी स्वतंत्र एजेंसी को दी जाए। परमबीर सिंह फ़िलहाल महाराष्ट्र के DG (होमगार्ड) हैं। महाराष्ट्र पुलिस ने उनके खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज कर रखा है। मई 20 तक उनकी गिरफ़्तारी पर रोक लगी हुई है। उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट में अपने खिलाफ विभागीय जाँच और FIR, दोनों को चुनौती दी है।