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‘हम 11 फिदायीन हमलावर हैं, योगी आदित्यनाथ और अमित शाह को मारेंगे’: धमकी वाला मेल CRPF को भेजा गया

सीआरपीएफ के मुंबई कार्यालय को मंगलवार (अप्रैल 6, 2021) की सुबह एक ई मेल भेजा गया। रिपोर्टों के मुताबिक इसमें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को जान से मारने की धमकी दी गई है।

जानकारी के मुताबिक, मेल में धार्मिक स्थान जैसी जगह पर हमले की बात है। यह भी लिखा है कि योगी आदित्यानाथ और अमित शाह को फिदायीन हमले में मारा जाएगा। इंडिया टुडे के अनुसार, मेल में उल्लेख है कि ‘हम 11 फिदायीन हमलावर हैं”, जो योगी आदित्यनाथ और अमित शाह को मारेंगे।

बता दें कि इससे पहले योगी आदित्यनाथ को मैसेज के जरिए जान से मारने की धमकी मिली थी। मैसेज में कहा गया था कि 24 घंटे के अंदर AK-47 से उड़ा दूँगा। अगर खोज सकते हो तो मुझे खोज कर दिखाओ। उससे पूर्व, 21 नवंबर 2020 को भी यूपी 112 के हेल्पडेस्क के वाट्सएप नंबर पर एक धमकी का मैसेज मिला था। पुलिस ने छानबीन करने के बाद आरोपित को आगरा से गिरफ्तार किया था। मैसेज भेजने वाला नाबालिग था।

वहीं 21 मई 2020 को मुख्यमंत्री को बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी। वाट्सएप नंबर पर मिले मैसेज में कहा गया था कि मुख्यमंत्री को बम से उड़ा दूँगा। इस मामले में भी आरोपित को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था।

इसी प्रकार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को गणतंत्र दिवस पर बम से उड़ाने की धमकी मिली थी। उनके साथ देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सरधना विधायक संगीत सोम समेत कई बड़े नेताओं को मारने की बात भी पत्र में लिखी गई थी।

पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को जान से मारने की धमकी देने के आरोप में अनवर नाम का शख्स गिरफ्तार किया गया था। अनवर के खिलाफ विट्टल पुलिस स्टेशन पर यतीश नाम के एक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि अनवर ने अपने संदेशों में कथित तौर पर सीएए और एनआरसी से मुसलमानों पर असर पड़ने पर वह पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को मारने की धमकी दी थी।

कोरोना से महाराष्ट्र यूँ ही नहीं बेहाल: BMC को ₹10 हजार दो-घर जाओ, विदेश से आने वालों के क्वारंटाइन के नाम पर कागजी खानापूर्ति

महाराष्ट्र में कोरोना के बढ़ते मामलों ने राज्य की स्थिति को चिंताजनक बना दिया है। रविवार (4 अप्रैल 2021) को वहाँ 57000 नए केस दर्ज किए गए, जो कि अब तक का सबसे अधिक आँकड़ा है। सिर्फ मुंबई में ही प्रतिदिन 11,000 से ज्यादा मामले आ रहे हैं। ऐसे में मिड-डे ने मुंबई में बढ़ रहे कोरोना केसों पर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट प्रकाशित की है।

इस रिपोर्ट के मुताबिक BMC के अधिकारी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बाहरी देशों से आए लोगों को 7 दिन के अनिवार्य क्वारंटाइन में रखने की बजाय उनसे 10-12 हजार रुपए लेकर उन्हें एयरपोर्ट से निकलने में मदद कर रहे हैं। 

मिड-डे ने खुलासा किया कि एयरपोर्ट पर बीएमसी अधिकारियों को इसलिए तैनात किया गया कि वो कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित देश जैसे- ब्रिटेन, यूरोप, मिडिल ईस्ट और साउथ अफ्रीका, से आए यात्रियों का 7 दिन का क्वारंटाइन सुनिश्चित करें, लेकिन अधिकारी उनसे पैसों की लेन-देन कर उन्हें छोड़ रहे हैं। समाचार पत्र ने अपनी पड़ताल में यह भी पाया कि यात्रियों को एयरपोर्ट से निकालने के लिए एक विस्तृत व्यवस्था है।

SOP का उल्लंघन कर बीएमसी अधिकारी यात्रियों भेज रहे घर

बीएमसी के स्टैंडर्ड ऑपरेशन प्रोसिजर (एसओपी) के अनुसार, 65 साल से ऊपर के लोग, गर्भवती महिलाएँ, 5 साल के बच्चों के साथ उनके माता-पिता, गंभीर बीमारी वाले लोग, या फिर परिवारिक स्थिति के कारण कहीं से लौटने वालों के लिए होम आइसोलेशन की छूट है, वरना सभी यात्रियों के लिए 7 दिन का क्वारंटाइन अनिवार्य है।

लेकिन इन नियमों का उल्लंघन करने वाला मुंबई में कोई और नहीं, बल्कि बीएमसी खुद है। वह अपने ही बनाए रूल्स का उल्लंघन कर घूस लेकर यात्रियों को एयरपोर्ट से निकाल रही है। इसके बाद उनके नाम होटल की लिस्ट में दिखाए जा रहे हैं जिन्हें इंस्टीट्यूशनल क्वारंटाइन में रखा गया। रिपोर्ट बताती है कि ये सौदा उस समय होता है जब यात्री के पास होटल के कमरे में लगातार 7 दिन तक रहने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं होते। 

इस पड़ताल में ये भी पता चला कि जो भी यात्री इस 7 दिन की अवधि को पूरा किए बिना निकलना चाहते थे उन्हें  WestInn होटल चुनने को कहा गया। इसके बाद उन्हें 6 से 7 के ग्रुप में बस में बैठाया गया। इस दौरान न तो यात्रियों ने पीपीई सूट पहना और न ही बस के ड्राइवर ने।

मिड डे ने अपनी जाँच में एक बस का पीछा किया जो सनशाइन होटल पर रुकी और एक पैसेंजर वहाँ से बाहर आया। यहाँ उस यात्री का सामान इनोवा कार में रखवा दिया गया और फिर वही यात्री बस में दोबारा चढ़ गया, जब बस अंधेरी वेस्ट इन होटल पहुँची, तो वही यात्री दोबारा बाहर आया। थोड़ी देर बाद इनोवा गाड़ी वहाँ पहुँची और यात्री होटल से निकल कर इनोवा में बैठ कर चला गया।

मिड डे ने इनोवा का पीछा किया। गाड़ी एयरपोर्ट से 60 किलो दूर उल्वे की ओर गई और फिर ओम अनंत रेजिडेंसी के पास जाकर रुकी, यहाँ यात्री उतरा। पूछताछ में पता चला कि वह व्यक्ति गल्फ नेशनल से लौटा है और फ्लैट नंबर 102 में रहता है। 

बीएमसी अधिकारी ने रिपोर्टर से 10 हजार देने को कहा

रिपोर्ट के अनुसार, ये अकेला मामला नहीं है। घटना के अगले दिन भी बेस्ट बस को मिड डे ने दोबारा फॉलो किया, जहाँ उन्हें फिर एक ऐसा यात्री मिला जिसे बीच रास्ते में उतारकर उसे उसके घर भेज दिया गया।

इस रिपोर्ट में बीएमसी अधिकारी वसंत और मिड डे रिपोर्टर की बातचीत भी है, जो अपने रिश्तेदार को अनिवार्य क्वारंटाइन से निकालने की बात कह रहा है। इस बातचीत में रिपोर्टर से वसंत 10 हजार रुपए की माँग करता है। वसंत कहता है कि यात्री को पहले होटल ले जाया जाएगा, जहाँ चेक इन के बाद पैसा देते ही उसे छोड़ देंगे। लेकिन, कागजी काम में एक घंटा लग सकता है।

जब रिपोर्टर ने पूछा कि अगर इस बीच बीएमसी अधिकारी चेक करने आ गए तो? इस पर वसंत ने खुलासा किया कि बीएमसी अधिकारी होटल जाते हैं और वहाँ वसूली करते हैं। होटल और बीएमसी वालों में पूरी सेटिंग हो रखी है।

वसंत ने कहा कि वह यात्रियों को क्वारंटाइन से भगाने का इंतजाम कर चुका है। उसने मिड डे रिपोर्टर को दीपाली नाम की महिला को कॉल करने को कहा जो ये सब मैनेज करती है। जब मिड डे ने दीपाली से बात की तो उसने मिलने से मना कर दिया, लेकिन रिपोर्टर की बहन को क्वारंटाइन से बचाने के लिए 11,000 रुपए माँगे।

पूरा तंत्र है होटल में क्वारंटाइन यात्रियों को चेक करने के लिए: BMC का दावा

बता दें कि मिड डे के इन दावों को बीएमसी ने नकारा है। उनका कहना है कि उनके पास पूरा तंत्र है ये चेक करने के लिए कि यात्री होटल में क्वारंटाइन हैं या नहीं। उप नगर आयुक्त पराग मसूरकर, हवाई अड्डे पर विदेश से आने वाले लोगों को क्वारंटाइन करवाने के प्रभारी हैं। उन्होंने सफाई में कहा कि संभव है कलेक्टर कार्यालय के अधिकारी इस चीज में शामिल हों। उन्होंने कहा कि हवाई अड्डे पर कलेक्टर कार्यालय के अधिकारी भी मौजूद हैं और होटलों की सूची कलेक्टर कार्यालय के कर्मचारियों के पास दी गई है।

बता दें कि इस मामले में मिड डे की रिपोर्ट के बाद बीएमसी के वरिष्ठ अधिकारी एक्शन में आ गए हैं। डीएमसी पराग मसूरकर का कहना है कि मिड डे की रिपोर्ट के बाद वह यात्रियों के नाम के साथ अपने रिकॉर्ड और होटल का मिलान कर रहे हैं। किसी भी प्रकार का भ्रष्टारचार मिलने पर सभी लोगों पर एक्शन लिया जाएगा।

बीएमसी दे रही गलत जानकारी: कलेक्टर

वहीं, मुंबई उपनगर जिले के कलेक्टर मिलिंद बोरिकर ने कहा कि बीएमसी गलत जानकारी दे रही है। उन्होंने बताया कि उनका कर्मचारी मुंबई पहुँचने वाले अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को अलग करने के लिए हवाई अड्डे पर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरी प्रक्रिया बीएमसी द्वारा नियंत्रित है और उनकी इसमें कोई भूमिका नहीं है।

मिड डे द्वारा यह पूछे जाने पर, जैसा कि डीएमसी मसूरकर ने कहा है, क्या हवाई अड्डे पर कलेक्टर कार्यालय के कर्मचारियों के पास होटलों की सूची रखी गई है? इसके जवाब में कलेक्टर ने कहा, “नहीं, नहीं। वह आपको गलत जानकारी दे रहे हैं क्योंकि हम क्वारंटाइन सुविधा में नहीं हैं। हमारे स्टाफ केवल यात्रियों को अलग करने के लिए वहाँ काम कर रहे हैं।”

5 राज्यों की 475 सीटों पर हो रहा मतदान, बंगाल में TMC की गुंडई शुरू: दक्षिण के 3 राज्यों में आज ही सभी सीटों पर वोटिंग

खबरों में भले ही पश्चिम बंगाल ही छाया हो, लेकिन आज (अप्रैल 6, 2021) 5 राज्यों की जिन 475 सीटों पर मतदान हो रहा है, उनमें मात्र 31 सीटें ही पश्चिम बंगाल की हैं। आज का दिन चुनाव आयोग (EC) के लिए बड़ा ही व्यस्त रहने वाला है। बंगाल के अलावा तमिलनाडु की 234, केरल की 140, असम की 40 और पुडुचेरी की 30 सीटों पर मतदान हो रहा है। दक्षिण भारत के तीनों राज्यों में इसी चरण में मतदान पूरा हो जाएगा।

तमिलनाडु में 10 वर्षों से सत्ता से बाहर DMK के लिए जहाँ ये चुनाव अस्तित्व की लड़ाई बन गई है, वहीं सत्ताधारी AIADMK को जयललिता की अनुपस्थिति में पलानिस्वामी-पनीरसेल्वम की जोड़ी की विश्वसनीयता बचानी है। यहाँ 6.8 करोड़ से भी अधिक वोटर 234 सीटों पर 3998 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे। कमल हासन और TTV दिनाकरन भी दोनों पार्टियों का खेल खराब कर सकती है।

वहीं केरल में भाजपा कितना मजबूत हो पाई है, ये इस चुनाव में पता चलेगा। सबरीमाला मामले के बाद ये पहले विधानसभा चुनाव है। पलक्कड़ से भाजपा उम्मीदवार ‘मेट्रो मैन’ ई श्रीधरन ने सुबह-सुबह ही मतदान किया। यहाँ 3.75 करोड़ वोटर 957 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे। सोना तस्करी और राजनीतिक हिंसा में फँसी CPI(M) को ओपिनियन पोल्स ने बढ़त में दिखाया है। कॉन्ग्रेस नीत UDF के लिए राहुल गाँधी ने चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंकी है।

असम में आज तीसरे और अंतिम चरण का चुनाव हो रहा है। कुल 337 उम्मीदवारों की किस्मत आज EVM में बंद हो जाएगी। भाजपा के फायरब्रांड नेता हिमंत बिस्वा शर्मा का विधानसभा क्षेत्र जलकुबरी में भी आज ही मतदान हो रहे हैं। भाजपा का गठबंधन असम गण परिषद (AGP) और यूनाइटेड पीपल्स पार्टी लिबरल (UPPL) के साथ है। इस चरण में कॉन्ग्रेस के 20 विधायकों की सीट है। पार्टी ने कट्टरवादी बदरुद्दीन अजमल की AIDUF के साथ गठबंधन किया है।

वहीं पश्चिम बंगाल में आज जिन सीटों पर चुनाव हो रहे हैं, उन्हें तृणमूल कॉन्ग्रेस का गढ़ माना जाता है। हावड़ा के ग्रामीण इलाके और सुंदरबन में TMC ने अच्छी-खासी पैठ बनाई थी। डायमंड हार्बर से खुद ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक सांसद हैं। हुगली और साउथ परगना 24 में भी मतदान हो रहे हैं। भाजपा के स्वप्न दासगुप्ता और CPI(M) के 77 वर्षीय कांति प्रसाद ऐसे उम्मीदवार हैं, जिन पर नजरें हैं।

साउथ 24 परगना के डायमंड हार्बर से भाजपा उम्मीदवार दीपक हलदर ने आरोप लगाया है कि दागीरा बदलदांगा में बूथ संख्या 143 और 180 पर TMC के गुंडे लोगों को अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं करने दे रहे हैं। उन्होंने चुनाव आयोग से इसकी शिकायत की है।

पुडुचेरी में चुनाव से कुछ दिन पहले कॉन्ग्रेस की सरकार गिर गई थी। वहाँ सीधी लड़ाई UPA बनाम NDA की है। भाजपा ने 2 बार के मुख्यमंत्री व दिग्गज नेता एन रंगासामी की ‘AINR कॉन्ग्रेस’ को 30 में से 16 सीटें दी हैं।

बंगाल: मतदान से पहले TMC नेता के घर से मिला EVM और VVPAT, ऑफिसर ने कहा- रात होने पर रिश्तेदार के यहाँ रुके थे

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के एक नेता के घर से EVM बरामद होने के बाद इलाके में सनसनी फ़ैल गई। राज्य में मंगलवार (अप्रैल 6, 2021) को तीसरे चरण का चुनाव भी चल रहा है। ऐसे में इससे 1 रात पहले इस तरह की घटना से TMC घेरे में आ गई है। तुलसीबेरिया के तृणमूल नेता गौतम घोष को ग्रामीणों ने 1 इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और 4 वोटर-वेरिफायेबल पेपर ऑडिड ट्रेल (VVPAT) के साथ पकड़ा।

ये घटना उलूबेरिया नॉर्थ विधानसभा क्षेत्र की है, जहाँ तीसरे चरण में ही वोट डाले जा रहे हैं। भाजपा उम्मीदवार चिरन बेरा ने आरोप लगाया कि ये चीजें TMC नेता के घर से मिली हैं, जिससे पता चलता है कि राज्य की सत्ताधारी पार्टी चुनाव में धाँधली कर रही है। उन्होंने बताया कि EVM और VVPAT को चुनावी ड्यूटी के लिए कार से लाया गया था। साथ ही तृणमूल नेता के घर के बाहर ‘सेक्टर 17’ की चुनावी ड्यूटी की कार भी पड़ी मिली।

वहाँ के सेक्टर अधिकारी को भी ग्रामीणों ने दबोच लिया। सेक्टर ऑफिसर ने अपने बचाव में कहा कि चुनावी ड्यूटी के लिए मशीनों को लाते समय काफी रात हो गई थी। केंद्रीय सशस्त्र बल सो गए थे और उन्होंने बूथ खोला ही नहीं। लिहाजा उन्होंने अपने एक रिश्तेदार के घर पर रात बिताना उचित समझा। सूचना मिलते ही पुलिस भी वहाँ पहुँची, लेकिन स्थिति बिगड़ने के कारण लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर कर दिया।

उक्त सेक्टर अधिकारी को सस्पेंड कर दिया गया है और उसके पास से मिली EVM को भी जब्त कर लिया गया है। इन EVM का प्रयोग मतदान में नहीं किया जाएगा। पश्चिम बंगाल में आज 31 सीटों पर मतदान हो रहा है, जो सुबह 7 बजे ही शुरू हुआ। साउथ 24 परगना जिले की 16, हावड़ा की 7 और हुगली की 8 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं। भाजपा ने स्थानीय अधिकारियों की निष्ठा पर सवाल उठाए हैं।

वहीं चुनाव आयोग ने भी इस मामले में बयान जारी किया है। इलेक्शन कमीशन ने कहा कि सेक्टर अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही बताया कि मतदान की प्रक्रिया में उस EVM का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। ECI ने आश्वासन दिया कि इसमें शामिल सभी लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।

2 इतालवी, फिरौती के लिए रचा खुद के अपहरण का ड्रामा; सीरिया में असली जिहादियों के हाथ बेच दिए गए

कभी-कभी जरूरत से ज्यादा होशियारी भारी मुसीबत में डाल देती है। यह बात इटली के इन दो नागरिकों से बेहतर कोई नहीं समझ सकता है। दरअसल, इटली की सरकार से फिरौती हासिल करने के लिए दो लोगों ने नकली आतंकवादियों के हाथों खुद के अपहरण की साजिश रची। लेकिन, उनके साथ दर्दनाक घटना तब हो गई, जब उन्हें असली जिहादियों के हाथों बेच दिया गया।

इतालवी अभियोजकों के मुताबिक, एलेसेंड्रो सैंड्रिनी और सर्जियो जानोटी ने दो अल्बानियाई पुरुषों और एक अन्य इतालवी व्यक्ति के नकली गिरोह की मदद से अपने ही अपहरण की साजिश रच डाली। ये दोनों इतालवी नागरिक अन्य लोगों से उनके गृह शहर ब्रेशिया में मिले थे।

अभियोजकों का दावा है कि इसी गिरोह के साथ दोनों व्यक्ति 2016 में 5 महीने के लिए तुर्की ले जाए गए थे। इनके बीच में सरकार से पैसे हासिल करने को लेकर डील हुई थी। इसके मुताबिक नकली आईएसआईएस की तरह ही अपहरण का वीडियो शूट किया जाना था। इसके बाद उन्हें छुड़ाने के लिए सरकार से मिलने वाली फिरौती की रकम को आपस में बाँटना था।

पुलिस ने दावा किया है कि सैंड्रिनी की गर्लफ्रेंड ने अपहरणकर्ताओं को सुना था कि वे सैंड्रिनी को एक विला में ‘ड्रग्स, शराब और लड़कियों’ के बीच विलासिता में रखना चाहते थे। सैंड्रिनी ने अपनी प्रेमिका को इस योजना के बारे में बताया था। साथ ही ये लालच दिया था कि अगर वह यह बात किसी को नहीं बताएगी तो उसे 100,000 यूरो देगा। अभियोजकों का दावा है कि अपहरणकर्ता सैंड्रिनी की प्रेमिका को मुँह बंद रखने के लिए हर सप्ताह 50 यूरो देते थे।

सूत्रों के मुताबिक, जिस गिरोह के साथ मिलकर सैंड्रिनी ने खुद के अपहरण की साजिश रची थी उसी ने धोखा देकर उन्हें सीरिया में कट्टर इस्लामी समूह ‘तुर्किस्तान इस्लामिक पार्टी’ के आतंकियों को बेच दिया। इस तरह सैंड्रिनी अपने ही बने जाल में फँस गया। हालाँकि, सैंड्रिनी ने इन आरोपों का खंडन करते हुए एक स्थानीय समाचार पत्र से कहा, “शुरू से अंत तक वास्तविक अपहरण था।”

इस अपहरण के पीछे शामिल गिरोह को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इन्हीं पर ज़ानोटी के भी नकली अपहरण का शक है। इससे पहले जानोटी ने दावा किया था कि तुर्की में दुर्लभ सिक्के खरीदने के दौरान उसका अपहरण कर लिया गया था। इसके बाद जानोटी को एक इस्लामी आतंकवादी संगठन को सौंप दिया गया था। 2019 में छूटने से पहले वह सैंड्रिनी की तरह अल-कायदा से जुड़ा हुआ था। सूत्रों के मुताबिक, “सैंड्रिनी के खिलाफ जांच चल रही है और जानोटी फेक किडनैपिंग के मामले में जल्द ही पकड़ा जा सकता है।”

2018 में सैंड्रिनी का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें उसके असली किडनैपिंग का सीन था। इसमें वह हथियारबंद अपहरणकर्ताओं के सामने घुटने टेक कर मदद की गुहार लगा रहा था। इसके बाद मई 2019 में अपहरणकर्ताओं के चंगुल से रिहा होने के बाद उसने दावा किया था कि उसे तुर्की में छुट्टियाँ बिताने के दौरान होटल में ड्रग दिया गया और अपहरण कर लिया गया था। रिहा होने के बाद जब वो वापस लौटा तो उसे कई डकैती वारदातों में शामिल होने के कारण घर में नजरबंद किया गया था।

जानोटी ने अब तक आरोपों पर चुप्पी साध रखी है। साल भर पहले अप्रैल 2019 में आतंकवादियों ने उसे रिहा किया था। उस दौरान इटली के तत्कालीन पीएम गिउसेप कोंटे ने कहा था कि जानोटी की हालत अच्छी है और उसने मामले की जाँच के लिए इटैलियन इंटेलीजेंस ब्यूरो को धन्यवाद दिया है।

वहीं जानोटी की पूर्व पत्नी ने इतालवी समाचार पत्र ला रिपब्लिका को बताया कि वह उस पर लगे आरोपों के बारे में सुनकर हैरान थीं। उसने हमें बताया कि जब उसे अलेप्पो के पास कैद कर रखा गया था, तो उसे घोड़े की तरह घास खाने के लिए मजबूर किया गया था।

सूत्रों का कहना है कि इटली की सरकार को संदेह है कि इनकी रिहाई के लिए फिरौती दी गई थी। इटैलियन न्यायिक सूत्रों के मुताबिक, किडनैपिंग की इन घटनाओं में दोनों व्यक्तियों को एक भी पैसा नहीं मिला। अगर कुछ भी भुगतान किया गया था, तो उन्हें कुछ भी नहीं मिला।

सीरियल ब्लास्ट का आरोपित अब्दुल, सुप्रीम कोर्ट ने बताया ‘खतरनाक आदमी’: कभी कॉन्ग्रेस नेता ओमन चांडी ने किया था सपोर्ट

आप एक खतरनाक आदमी हैं। लाइवलॉ की रिपोर्ट के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अगुवाई वाली पीठ ने यह टिप्पणी अब्दुल नजीर मदनी पर की। मदनी बेंगलुरु में 2008 में हुए सीरियल ब्लास्ट का आरोपित है। पीडीपी नेता मदनी ने जमानत शर्तों में छूट की गुहार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर रखी है। इस पर सोमवार को तीन सदस्यीय पीठ ने सुनवाई की। पीठ में सीजेआई बोबडे के अलावा जस्टिस बोपन्ना और जस्टिस रामासुब्रमण्यम शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने 11 जुलाई 2014 को मदनी को स्वास्थ्य के आधार पर जमानत दी थी। न्यायालय ने मदनी को जमानत देते हुए उसे बेंगलुरु शहर नहीं छोड़ने और जमानत अवधि के दौरान अपने ठहरने के बारे में जानकारी मुहैया कराने को भी कहा था। इसके बाद कई बार उसकी जमानत अवधि बढ़ाई गई।

न्यायमूर्ति जे. चेलमेश्वर और न्यायमूर्ति एके गोयल की पीठ ने मदनी को साल 2015 में बीमार माँ को देखने के लिए जमानत देते हुए कहा था कि वह अपनी आजादी का दुरुपयोग नहीं करे। इसको लेकर आज मदनी की ओर से अदालत में पेश हुए वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि उसने अपनी जमानत शर्तों का दुरुपयोग नहीं किया है।

गौरतलब है कि केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता ओमन चांडी ने बेंगलुरु ब्लास्ट के मुख्य आरोपी मदनी को बिना मुकदमे के अनिश्चितकाल तक जेल में रखने को अनुचित बताया था। चांडी ने कहा था कि कर्नाटक की जेल में बंद मदनी के खिलाफ मामले के तथ्यात्मक पहलुओं पर नहीं ध्यान दिया गया, पीडीपी नेता को इस तरह कैद में रखना ठीक नहीं है।

ओमन चांडी ने कर्नाटक में बेंगलुरु के एक हेल्थ रिसॉर्ट में मदनी से मुलाकात भी की थी। इस पर अभियोजन टीम के एक सदस्य ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि मदनी गंभीर अपराध के मामले में हिरासत में था। वह कथित तौर पर आतंकी गतिविधियों में संलिप्त था। अगर मुख्यमंत्री ऐसे किसी आरोपी से मिलते हैं, तो यह घातक साबित हो सकता है।

बता दें कि बेंगलुरु में जुलाई 2008 में सिलसिलेवार बम धमाके की घटना को अंजाम दिया गया था। इसमें पुलिस ने 32 आरोपितों की पहचान की थी, जिनमें से 22 को अब तक गिरफ्तार किया जा चुका है। इस पूरे मामले में शोएब नाम के शख्स की अहम भूमिका थी।

नक्सली हमलों में 70% कमी, फिर भी 3 साल में वामपंथी आतंकवाद ने 162 जवानों, 463 नागरिकों का खून बहाया

छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में हुए नक्सली हमले में 23 जवान बलिदान हो गए। लापता सीआरपीएफ जवान राकेश्वर सिंह के नक्सलियों के कब्जे में होने की आशंका है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने क​हा है कि ये बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा और नक्सलियों के खिलाफ अभियान और तेज होगा।

आँकड़े बताते हैं कि मोदी सरकार के कार्यकाल में नक्सली हिंसा में लगातार कमी आई है। बावजूद इसके 2018-2020 के बीच वामपंथी आतंकवाद ने 162 जवानों और 463 नागरिकों की जान ली है। इसी साल फरवरी में लोकसभा में एक सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने नक्सली हिंसा से जुड़े तथ्य सामने रखे थे।

इस अंतराल में 473 नक्सली भी मार गिराए गए। 4319 नक्सलियों को अलग-अलग राज्यों से गिरफ्तार किया गया। इसके मुताबिक तीन साल की अवधि के दौरान देश में नक्सली हिंसा की 2168 घटनाएँ हुईं।

लोकसभा में सरकार द्वारा नक्सली हमलों के बारे में दिया गया विवरण (साभार: लोकसभा)

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बताया था कि 2009 के मुकाबले 2020 में इस तरह की घटनाओं में 70 फीसदी तक की कमी आई है। 2009 में यह संख्या 2258 थी जो 2020 में घटकर 665 हो गई। सरकार ने बताया है कि वामपंथियों की हिंसा से होने वाली मौतों में भी 80 फीसदी की कमी दर्ज की गई है। हिंसा की वजह से 1805 मौतें हुई थीं जो 2020 में 183 पर पहुँच गई।

सरकार ने जानकारी दी कि आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा और तेलंगाना में 2018 में वामपंथी हिंसा की 833 घटनाएँ हुईं। 2018 के दौरान इन राज्यों में 173 नागरिकों की मौत हुई और 67 सुरक्षाकर्मी बलिदान हुए थे। 2018 में 225 नक्सली मारे गए थे, जबकि 1933 को गिरफ्तार किया गया था।

इन राज्यों में 2019 में नक्सल हिंसा के 670 मामले दर्ज किए थे। इसमें 150 नागरिक मारे गए और 52 सुरक्षाकर्मी भी वीरगति को प्राप्त हुए थे। आँकड़ों के मुताबिक इसी साल 145 नक्सली मारे गए और 1276 को गिरफ्तार किया गया।

वहीं इन प्रदेशों में साल 2020 में 665 नक्सली हिंसा की वारदातें हुईं थीं। इनमें कम से कम 140 नागरिकों की मौत हुई और 43 सुरक्षाकर्मियों को अपनी जान गँवानी पड़ी। इसके अलावा 103 वामपंथी चरमपंथी भी मारे गए थे, जबकि 1110 को गिरफ्तार किया गया था।

छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा

छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा नक्सली हिंसा हुई। आँकड़ों के मुताबिक 2018 में 392, 2019 में 263 और 2020 में 315 नक्सल वारदातें इसी राज्य में हुई। छत्तीसगढ़ में ही सर्वाधिक सुरक्षाकर्मियों का बलिदान भी हुआ। यहाँ 2018 में 55, 2019 में 22 और 2020 में 36 जवानों का बलिदान हुआ। बीते तीन 3 साल में इन हमलों में राज्य में 228 नागरिकों की मौत हुई। 2018 में सर्वाधिक 98 लोगों की हत्या नक्सलियों ने की।

छत्तीसगढ़ के बाद झारखंड में नक्सली हिंसा के कारण सबसे अधिक जवानों का बलिदान हुआ है। 2018 में वामपंथी हिंसा की 205 घटनाएं हुईं, जिसमें नौ सुरक्षा अधिकारी वीरगति को प्राप्त हुए। 2019 में राज्य में एलडब्ल्यूई हिंसा की 200 वारदातों में 22 सुरक्षाकर्मियों का बलिदान हुआ। इसके अलावा 2020 में 199 वारदातों में एक सुरक्षाकर्मी वीरगति को प्राप्त हुआ। तीन वर्षों के दौरान झारखंड में 114 नागरिकों की मौत हुई है। 2018 और 2020 के बीच आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में कोई भी सुरक्षाकर्मी बलिदान नहीं हुआ।

गौरतलब है कि शनिवार को छत्तीसगढ़ के बीजापुर और सुकमा जिले की सीमा पर नक्सलियों के साथ हुई मुठभेड़ में 23 जवान बलिदान हो गए थे। वहीं पिछले महीने छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान आईईडी विस्फोट में DRG के पाँच जवान बलिदान हुए थे। छत्तीसगढ़ पहुँचे अमित शाह ने सोमवार को कहा, “नक्सलियों के खिलाफ इस लड़ाई को अंजाम तक ले जाना मोदी सरकार की प्राथमिकता है। पिछले 5-6 वर्षों में हमने छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में काफी अंदर तक जाकर सुरक्षा कैंप बनाए हैं। मैं देश को विश्वास दिलाता हूँ कि नक्सलियों के खिलाफ ये लड़ाई और तीव्र होगी। हम विजयी होंगे।”

2 पत्रकार-गुमनाम कॉल, कहाँ हैं जवान राकेश्वर सिंह: नक्सली हमले के बाद छत्तीसगढ़ में अमित शाह, कहा- ये लड़ाई और तेज होगी

छत्तीसगढ़ के बीजापुर में नक्सली हमले के बाद से लापता जवान को लेकर एक बड़ी जानकारी सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक दो स्थानीय पत्रकारों ने सोमवार (5 अप्रैल) को दावा किया कि उन्हें गुमनाम कॉल आया था। कॉल करने वाले ने उनसे कहा कि CRPF का जवान उनके कब्जे में है। जवान सुरक्षित है और उसे कोई नुकसान नहीं पहुँचाया जाएगा।

दो पत्रकारों में से एक गणेश मिश्रा, बीजापुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष हैं। उन्होंने कहा, “फोन करने वाले ने खुद की पहचान उजागर नहीं की। उसने कहा है कि माओवादी दो से तीन दिन में जवान को रिहा कर देंगे।” वहीं सुकमा में नवभारत के एक पत्रकार राजा सिंह राठौड़ ने कहा, “फोन करने वाले ने अपना नाम हिडमा बताया है। उसने कहा है कि लापता जवान हमारी हिरासत में है। मैंने जवान के बारे में पूछा, तो बताया गया कि वह सुरक्षित है। जिस व्यक्ति ने हिडमा होने का दावा किया था, उसने कहा कि ज्यादा जानकारी और तस्वीरें बहुत जल्द शेयर की जाएँगी।”

बीजापुर के पुलिस अधीक्षक कमलोचन कश्यप ने उन खबरों का खंडन किया है, जिसमें कहा गया था कि उन्हें भी किसी गुमनाम कॉलर ने फोन किया था। न्यूज18 से उन्होंने कहा, “जवान माओवादियों की कैद में हो सकता है। सुरक्षा बलों ने 5-6 किलोमीटर के दायरे में घटना के बाद जवान की तलाश की, लेकिन उसका पता नहीं लगा सके।” उन्होंने आगे कहा कि जवान का पता लगाने के प्रयास जारी हैं और पुलिस पत्रकारों को आए फोन कॉल की जाँच करने की कोशिश कर रही है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार 35 वर्षीय जवान राकेश्वर सिंह मन्हास हमले के दौरान तर्रेम क्षेत्र में जंगलों में लापता हो गए थे। सुरक्षा बलों द्वारा बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान के बीच, इन अटकलों ने जोर पकड़ लिया है कि जवान को सीपीआई-माओवादी कैडर द्वारा बंदी बना लिया गया है। सुरक्षा एजेंसियों के सूत्र मानते हैं कि इनपुट मिले हैं, लेकिन अभी तक बातचीत की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है। सूत्रों के मुताबिक, माओवादियों ने अब तक जम्मू के रहने वाले मन्हास को छोड़ने के एवज में कोई शर्त नहीं रखी है।

इस बीच राकेश्वर सिंह की पत्नी मीनू मन्हास ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपने पति की रिहाई सुनिश्चित करने की अपील की है। उन्होंने कहा, “मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह से आग्रह करती हूँ कि मेरे पति को वापस लाएँ। वे जहाँ भी हों उनको वापस लाया जाए। वे सुरक्षित हैं तो किसी तरह उनको वापस लाइए। मैं मोदी जी से आग्रह करती हूँ कि मेरे पति को उसी तरह वापस लाएँ, जैसे पाकिस्तान से विंग कमांडर अभिनंदन को लेकर आए थे।”

इस बीच, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोमवार को छत्तीसगढ़ के जगदलपुर पहुॅंचे। बलिदानी जवानों को श्रद्धांजलि दी। अस्पताल जाकर घायल हवानों का हाल जाना। बीजापुर जिले के बासागुड़ा में सीआरपीएफ कैंप जाकर मुठभेड़ में शामिल जवानों से मिलकर संवाद किया।

उन्होंने कहा, “नक्सलियों के खिलाफ इस लड़ाई को अंजाम तक ले जाना मोदी सरकार की प्राथमिकता है। पिछले 5-6 वर्षों में हमने छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में काफी अंदर तक जाकर सुरक्षा कैंप बनाए हैं। मैं देश को विश्वास दिलाता हूँ कि नक्सलियों के खिलाफ ये लड़ाई और तीव्र होगी। हम विजयी होंगे।” इससे पहले शाह ने कहा था कि हम जवानों के परिजनों और देश को विश्वास दिलाते हैं कि बहादुर जवानों ने देश के लिए जो खून बहाया है वह व्यर्थ नहीं जाएगा।

गौरतलब है कि शनिवार को नक्सलियों ने कुख्यात माओवादी कमांडर माडवी हिडमा के नेतृत्व में घात लगाकर हमला किया था जिसमें 23 जवान बलिदान हो गए थे।

सैलरी के लाले और अखबारों में तस्वीरों संग फुल फेज विज्ञापन: केजरीवाल सरकार को हाई कोर्ट ने फटकारा

दिल्‍ली नगर निगम (MCD) के कर्मचारियों को समय से सैलरी और पेंशन नहीं मिलने को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने केजरीवाल सरकार को फटकार लगाई है। इससे जुड़ी जनहित याचिका (PIL) पर सोमवार (5 अप्रैल 2021) को सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि एक तरफ विज्ञापनों पर पैसे खर्च किए जा रहे दूसरी ओर इस मुश्किल समय में कर्मचारियों को वेतन के लाले पड़े हैं।

न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार हाई कोर्ट ने कहा, हम देख सकते हैं कि किस तरह से सरकार राजनेताओं की तस्वीरों के साथ अखबारों में पूरे पन्ने का विज्ञापन देने पर खर्च कर रही है। लेकिन कर्मचारियों की सैलरी तक नहीं दी जाती है।

केजरीवाल सरकार को फटकार लगाते हुए कोर्ट ने सवाल किया, “क्या ये अपराध नहीं है कि इतने कठिन समय में भी, आप विज्ञापन पर पैसा खर्च कर रहे हैं।” आप सरकार की मंशा पर सवालिया निशान लगाते हुए कोर्ट ने कहा कि नगर निगमों को धन नहीं देना पड़े, इसलिए सरकार वित्तीय संकट का हवाला देती है। लेकिन, अखबारों और अन्य माध्यमों से विज्ञापन पर पैसा खर्च करने में सरकार को कोई दिक्कत नहीं है।

कोर्ट ने केजरीवाल सरकार को किसी भी तरह की मोहलत देने से इनकार करते हुए कर्मचारियों का मार्च तक का पूरा बकाया क्लियर करने का आदेश दिया है। वित्तीय वर्ष 2020-21 के संशोधित अनुमान के अनुसार, दिल्ली सरकार को ईडीएमसी को 864.8 करोड़ रुपए, एसडीएमसी को 405.2 करोड़ रुपए और उत्तरी दिल्ली नगर निगम को 764.8 करोड़ रुपए देने हैं।

आजतक की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि एमसीडी को वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए 400 करोड़ रुपए का फंड मिलना था, लेकिन उसे दिल्ली सरकार से केवल 109 करोड़ रुपए मिले हैं।

4 साल में कोई अस्पताल या फ्लाईओवर नहीं

हाल ही में तेजपाल सिंह द्वारा दायर एक आरटीआई से पता चला था कि AAP सरकार द्वारा किए गए विश्वस्तरीय बुनियादी ढाँचे के लम्बे-लम्बें दावों के विपरीत, राजधानी में 2015-2019 के बीच यानी 4 सालों में न तो कोई नया अस्पताल बनाया और न ही किसी फ्लाईओवर का निर्माण किया। केजरीवाल सरकार द्वारा पिछले 5 वर्षों में स्वास्थ्य और बुनियादी ढाँचे के क्षेत्र में किए गए कार्यों की जानकारी के लिए 2019 में RTI दायर की गई थी।

 नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष अक्षय लाकड़ा ने आरटीआई द्वारा 3 जुलाई 2019 को पूछे गए सवालों के जवाबों की प्रति को शुक्रवार (2 अप्रैल, 2021) को ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा है, ”RTI से खुलासा हुआ कि 1 अप्रैल 2015 से लेकर 31 मार्च 2019 के बीच दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार ने ना ही किसी हॉस्पिटल को अनुदान दिया और न ही किसी नए फ्लाईओवर का निर्माण करवाया। बस झूठे विज्ञापन दे-दे कर जनता को मूर्ख बना लिया और जनता भी इसकी बातों में आ गई।”

इस बीच, खान मार्केट इलाके को सँवारने के नाम पर वहाँ एक नया सेल्फी पॉइंट बनाया गया है।

शीला दीक्षित सरकार में परिवहन मंत्री रहे हारून यूसुफ का आरोप है कि केजरीवाल सरकार ने दिल्ली में विज्ञापन और प्रचार पर 611 करोड़ रुपए खर्च किए हैं, लेकिन सरकारी स्कूलों की स्थिति और बुनियादी सुविधाओं के उत्थान के लिए कुछ नहीं किया है।

केजरीवाल सरकार पर पूर्व में जनता के लिए काम करने की जगह झूठे और भ्रामक प्रचारों के जरिए अपना महिमामंडन करने के आरोप भी लग चुके हैं।

मुस्तफा ने पहचान छिपा हिंदू महिला से शादी की, गर्भवती हुई तो अस्पताल में आधार कार्ड से खुला राज

मध्य प्रदेश के इंदौर से लव जिहाद का मामला सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, मुस्तफा नाम के एक शख्स ने अपनी पहचान छिपाकर हिंदू महिला से शादी कर ली। महिला जब गर्भवती हुई तो जाँच कराने अस्पताल पहुँची। वहाँ उसने आधार कॉर्ड पर अपने पति का असली नाम देखा।

इंदौर के द्वारकापुरी थाने में दर्ज शिकायत के अनुसार, पिछले साल अप्रैल में प्रेम विवाह करने वाली महिला को एक साल बाद पता चला कि उसका पति गब्बर नहीं, मुस्तफा है। महिला ने बताया कि दोनों की मुलाकात एक बर्थडे पार्टी में हुई थी। इसके बाद दोनों एक-दूसरे के करीब आ गए और विवाह कर लिया। मुस्तफा ने महिला को अपना नाम गब्बर बताया था। लेकिन जब वह गर्भवती हुई और जाँच कराने अस्पताल पहुँची तो उसने आधार कार्ड में मुस्तफा नाम पाया। महिला की शिकायत पर पुलिस ने मुस्तफा के खिलाफ लव जिहाद कानून के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

हाल ही में मध्य प्रदेश में लव जिहाद और जबरन धर्मांतरण रोकने का नया कानून लागू हुआ है। इस कानून में शादी के बाद बलपूर्वक धर्म-परिवर्तन को गंभीर अपराध माना गया है और इसके लिए 10 वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। बता दें कि अधिनियम की प्रस्तावना में लिखा हुआ है कि यह अधिनियम धर्मांतरण के विरुद्ध धर्म की स्वतंत्रता को सुनिश्चित करता है। इसके साथ ही विवाह, धमकी अथवा बलपूर्वक, लालच जैसे अवैध माध्यमों से धर्मांतरण को रोकता है।