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दिल्ली सरकार के App पर हॉस्पिटल में कई बेड्स खाली, हकीकत में एक भी नहीं: CM केजरीवाल ने झूठ बोला?

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल दावा कर रहे हैं कि प्रदेश में हॉस्पिटल बेड्स की कमी नहीं है, लेकिन जमीनी स्थिति इसके एकदम उलट है। सोशल मीडिया पर कुछ अस्पतालों से बात करने के बाद लोगों ने अपनी बात सामने रखी। कई लोगों ने अपने परिवार या रिश्तेदारों के व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर इस महामारी के दौरान कोविड बेड्स के उपलब्ध न रहने की बात बताई। स्थिति सचमुच भयावह दिख रही है।

सोशल मीडिया पर शेयर किए गए ऑडियो के अनुसार, दिल्ली सरकार के एप पर ‘श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीटूशन’ में 5 बेड्स खाली होने की बात बताई जा रही थी, लेकिन जब वहाँ कॉल किया गया तो पता चला कि एक भी बेड खाली नहीं है। अस्पताल की तरफ से बताया गया कि एप पर क्या बताया जा रहा है, इस बारे में उन्हें कुछ नहीं पता, लेकिन वहाँ मरीजों की भर्ती को लेकर वेटिंग लिस्ट चल रही है।

इसी तरह अप्रैल 15 को ही ‘प्राइमस सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल’ में 18 खाली बेड्स होने की बात एप पर बताई गई, लेकिन जब अस्पताल में कॉल कर के पूछा गया तो पता चला कि कोविड मरीज के लिए एक भी बेड खाली नहीं है। अस्पताल की तरफ से कहा गया कि एप्लीकेशन में ऐसा क्यों दिखा रहा, उन्हें नहीं पता। इसी तरह एप पर ‘शांति मुकुंद हॉस्पिटल’ में 68 बेड्स खाली होने की बात कही गई, लेकिन अस्पताल ने कहा कि ये दूसरे मरीजों के लिए है।

इसी तरह ‘मैक्स स्मार्ट गुजरमल मोदी हॉस्पिटल’ में एप पर 7 बेड्स खाली दिखाए जा रहे थे, लेकिन वहाँ फोन करने पर बताया गया कि क्वारंटाइन के लिए भी बेड नहीं हैं। ‘दीपचंद बंधू अस्पताल’ से भी यही जवाब आया। जबकि एप पर यहाँ भी 30 बेड्स खाली दिखाए जा रहे थे। अस्पताल की रिसेप्शनिस्ट ने कहा कि दिन भर उपलब्ध बेड्स की संख्या में बदलाव होते रहते हैं, इसीलिए एप पर खाली बेड्स की संख्या दिखाई गई होगी।

जिस दिन के ये आँकड़े हैं और फोन कॉल्स किए गए, उसी दिन ये खबर भी आई थी कि अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के अस्पतालों में 5000 बेड्स खाली होने की बात कही है। दिल्ली सरकार अब तक 14 प्राइवेट और 6 सरकारी अस्पतालों को डेडिकेटेड कोविड फैसिलिटी में कन्वर्ट कर चुकी है। कहा गया था कि सोमवार (अप्रैल 12, 2021) को कोरोना के इलाज के लिए 2653 नए बेड्स जोड़े गए, जिससे कुल संख्या 14,900 हो गई।

दिल्ली में वीकेंड कर्फ्यू लगाया जा चुका है। साथ ही AAP सुप्रीमो ये भी कह रहे हैं कि जब तक जरूरी न हो, तब तक लोग अस्पतालों का रुख न करें। मीनाक्षी ठाकुर नामक ट्विटर यूजर ने लिखा कि वो एक दिन में ही ऐसे 6 लोगों से मिलीं, जो दिल्ली के अस्पतालों में एक अदद बेड पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब वास्तविकता यही है, तो दिल्ली सरकार हजारों बेड्स खाली होने की बात क्यों कह रही है?

कई ट्विटर इन्फ्लुएंसर्स ने कहा कि उनकी टाइमलाइन पर लोगों की लंबी लाइन लगी हुई है, जो दिल्ली के अस्पताल में बेड्स के लिए गुहार लगा रहे हैं। ऐसा नहीं है कि दिल्ली में ये स्थिति अचानक से आ गई है। पिछले साल 2020 में किस तरह से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को मैदान में उतरना पड़ा था, सबने देखा। फिर स्थिति ठीक हुई थी। अर्धसैनिक बलों ने फैसिलिटीज की व्यवस्था की। उसके बाद स्थिति फिर जस की तस हो गई।

जून 2020 के पहले हफ्ते में ही जहाँ एक तरफ दिल्ली सरकार प्रदेश के अस्पतालों में बेड्स की कमी न होने की बात कह रही थी, कई बड़े अस्पतालों ने बताया था कि वो पूरी क्षमता के साथ भरे पड़े हैं। NDTV की पड़ताल में मैक्स हॉस्पिटल्स, फोर्टिस हॉस्पिटल्स और होली फैमिली हॉस्पिटल ने बेड उपलब्ध न होने की जानकारी दी थी। जबकि उस समय भी दिल्ली सरकार का स्मार्टफोन एप दर्जनों बेड्स खाली होने के आँकड़े दे रहा था।

फ़िलहाल दिल्ली में कोरोना के 54,309 सक्रिय मामले हैं। पिछले 1 दिन में ही यहाँ 16,699 नए कोविड-19 मरीज सामने आए हैं। 1 दिन में ठीक होने वाली की संख्या (13,014) नए मरीजों की संख्या से कम है। प्रदेश में पिछले 1 दिन में कोरोना से 112 नई मौतें हुईं, जिससे मृतकों का कुल आँकड़ा 11,652 तक पहुँच गया। दिल्ली में प्रत्येक 10 लाख में 39,575 कोरोना पॉजिटिव हो चुके हैं। पिछले एक सप्ताह में प्रतिदिन 1.7% की औसत से मरीजों की संख्या में वृद्धि हो रही है।

पाकिस्तान के उकसावे का सैन्य जवाब देने से पीछे नहीं हटेगा मोदी का नया भारत: अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट

अमेरिका में कॉन्ग्रेस को दी गई रिपोर्ट में अमेरिकी इंटेलिजेंस कम्युनिटी ने कहा है कि पाकिस्तान के द्वारा भारत विरोधी गतिविधियों के बाद उसे सैन्य स्तर पर जवाब देने की संभावना में वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने पिछले समकक्षों से कहीं आगे हैं।

अमेरिकी कॉन्ग्रेस के समक्ष रखी गई वार्षिक संकट आकलन रिपोर्ट (Annual Threat Assessment Report) में राष्ट्रीय सुरक्षा के निदेशक कार्यालय (ODNI) ने भारत और पाकिस्तान के मध्य किसी भी प्रकार के युद्ध की संभावना से पूरी तरह इनकार किया है। लेकिन यह शंका व्यक्त की है कि दोनों देशों के बीच का संकट निकट भविष्य में और भी गहराता जाएगा।  

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत अपने पड़ोसियों के साथ सामान्य संबंध स्थापित करना चाहता है। लेकिन जब तक पाकिस्तान आतंक और हिंसा मुक्त वातावरण सुनिश्चित नहीं करता, तब तक भारत उससे किसी भी प्रकार का कोई मैत्री संबंध नहीं रखेगा।

ODNI की रिपोर्ट में यह बात विशेष रूप से कही गई है कि पाकिस्तान के प्रति सैन्य कार्रवाई करने में पिछले राष्ट्राध्यक्षों की तुलना में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ज्यादा मुखर है। पाकिस्तान द्वारा भारत में कोई भी आतंकी हमला अथवा कश्मीर के अंदर अशान्ति की परिस्थितियाँ दो परमाणु हथियार संपन्न देशों के मध्य संभावित संघर्ष का कारण बन सकती हैं। अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के उन्मूलन और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बाँटने के बाद से ही दोनों देशों की राजधानियों में एक-दूसरे के हाई कमिश्नर नहीं हैं।

ODNI की रिपोर्ट की रिपोर्टर के अनुसार, अफगानिस्तान में लड़ाई के समय ईराक और सीरिया अमेरिकी सेना के प्रमुख चिंता का विषय थे। लेकिन परमाणु संपन्न भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष की स्थिति पूरे विश्व के लिए अभी भी चिंता का विषय है। यह रिपोर्ट भविष्य की परिघटनाओं के निकटवर्ती और दूरगामी प्रभाव पर आधारित होती है। वाशिंगटन में जारी होने वाली यह रिपोर्ट नीति-निर्माताओं को विश्व भर में अमेरिकी सैन्य संयोजन के लिए सहायता करती है।

द प्रिंट की ‘ज्योति’ में केमिकल लोचा ही नहीं, हिसाब-किताब में भी कमजोर: अल्पज्ञान पर पहले भी करा चुकी हैं फजीहत

प्रोपेगेंडा पोर्टल ‘द प्रिंट’ की पत्रकार ज्योति मल्होत्रा अपने अजीबोगरीब बयानों के कारण चर्चा में हैं। पहले तो उन्होंने कोरोना के दौरान ली जाने वाली दवा रेमेडिसविर (Remdesivir) को लेकर इस बात से आपत्ति जताई कि वो ‘केमिकल एंड फर्टिलाइजर्स’ मंत्रालय के अंतर्गत आता है। अब सोशल मीडिया पर उन्हें एक और कन्फ्यूजन के लिए ट्रोल किया गया है। उन्हें समझाया गया कि केमिकल विभाग, स्वास्थ्य मंत्रालय के अंतर्गत नहीं आता है।

जिस कन्वर्सेशन के कारण ज्योति मल्होत्रा चर्चा में हैं, वो ट्विटर पर पायल मेहता के साथ हुई। पायल ने PIB का महत्वपूर्ण अपडेट शेयर किया, जिसमें लिखा था कि भारत सरकार के पत्तन, पोत और जलमार्ग राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री श्री मनसुख मंडाविया ने रेमेडिसविर दवा के सभी मौजूदा विनिर्माताओं और अन्य हितधारकों के साथ बैठक के बाद केंद्र सरकार ने रेमडेसिविर के उत्पादन को बढ़ाने का फैसला लिया है।

रेमेडिसविर के सात विनिर्माताओं की मौजूदा कुल स्थापित क्षमता 38.80 लाख शीशी प्रतिमाह है। छह विनिर्माताओं को 10 लाख शीशी प्रतिमाह की उत्पादन क्षमता वाले सात अतिरिक्त स्थलों के लिए फास्ट ट्रैक अनुमति दी गई है। वहीं अन्य 30 लाख शीशी प्रतिमाह उत्पादन प्रक्रिया में है। इससे विनिर्माण क्षमता में लगभग 78 लाख शीशी प्रतिमाह बढ़ोतरी हो जाएगी। निर्यात के लिए रखी गई रेमेडिसविर की 4 लाख शीशी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए विनिर्माताओं को दी गईं।

इस पर ज्योति मल्होत्रा पूछने लगीं कि एंटी-कोविड ड्रग रेमडेसिविर के एक्सपोर्ट को प्रतिबंधित करने के फैसले से शिपिंग मंत्री का क्या लेना-देना है? साथ ही उन्होंने पूछा कि स्वास्थ्य मंत्री कहाँ हैं? इस पर पायल ने उन्हें बताया कि मंडाविया ‘केमिकल एंड फर्टिलाइजर्स’ मंत्री भी हैं। यही विभाग ही है। फिर ज्योति ने लिखा कि क्या रेमडेसिविर केमिकल या फर्टिलाइजर है, कोई इससे अच्छा तर्क होना चाहिए।

पायल ने उन्हें समझाया, “चूँकि ये एक दवा है, इसलिए फार्मासिटिकल्स विभाग के अंतर्गत आता है। ये विभाग केमिकल एंड फर्टिलाइजर्स मंत्रालय के तहत आता है।” साथ ही उन्होंने समझाने के लिए सरकारी वेबसाइट का लिंक भी शेयर किया। फिर ज्योति ने उन्हें समझाने के लिए धन्यवाद देते हुए लिखा कि वो जीवन जीती हैं और सीखते जाती हैं। लेकिन, तब तक उनकी किरकिरी हो चुकी थी और लोगों को उनके अल्पज्ञान का थाह लग चुका था।

2020 में अप्रैल माह में ही मल्होत्रा ने प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार समिति की पूर्व सदस्य शमिका रवि के साथ बातचीत की थी। इसमें कोरोना को लेकर हालिया स्थिति और इससे निपटने के लिए लगे लॉकडाउन पर चर्चा की गई थी। उस बातचीत में अन्य देशों में कोरोना से निपटने की नीतियों पर भी बात हुई थी। अब लोगों ने मल्होत्रा को याद दिलाया है कि कैसे वह मिलियन में जीरो की संख्या को लेकर कन्फ्यूज्ड हो गई थीं।

शमिका ने कहा था कि नीतियों को तैयार करने वाला माहौल स्थिर नहीं है। उन्होंने बताया था कि कैसे हर देश इस महामारी से अलग-अलग तरीके से निपट रहा था। उन्होंने उदाहरण दिया था कि जिस चीन में एक मिलियन मरीजों की संख्या का अंदाज़ा लगाया गया था, वहाँ सिर्फ 85,000 ही मिले। इस पर मल्होत्रा ने कहा था, “लेकिन ये मिलियन से ज्यादा दूर नहीं है।” अब आप उनके गणित ज्ञान का अंदाज़ा लगा लीजिए।

1 मिलियन का अर्थ होता है 10 लाख और 85,000 उससे काफी कम संख्या है। उन्होंने 1 मिलियन को उस संख्या से नजदीक बता दिया था, जिससे वो पौने 12 गुना ज्यादा है। शमिका भी ये बात सुन कर कुछ देर शॉक्ड हो गई थी। अव्वल तो ये हुआ कि ‘द प्रिंट’ ने इस मामले में हास्यास्पद स्पष्टीकरण जारी किया।

इसमें कहा गया कि ज्योति मल्होत्रा का मतलब 8,50,000 से था, न कि 85,000 से, इसीलिए उन्होंने इसे 1 मिलियन के करीब बताया। बता दें कि अब भी चीन में कुल कोरोना संक्रमितों की संख्या 1,03,000 है, जो 1 मिलियन से लगभग 10 गुना कम है। फिर इस स्पष्टीकरण का क्या मलतब? इस तरह से ज्योति मल्होत्रा का ‘नॉट टू फार’ 9.15 लाख से पीछे रह गया था। अब उन्होंने रेमडेसिविर पर ज्ञान दिया है।

महाराष्ट्र में कोरोना की आड़ में कई धंधे, घर लौट रहे प्रवासी कामगारों से ‘वसूली’ कर रही पुलिस

महाराष्ट्र में कोरोना की दूसरी लहर से पैदा हुए सकंट का फायदा उठाकर कमाई करने के लगातार मामले सामने आ रहे हैं। घर लौट रहे प्रवासी मजदूरों ने महाराष्ट्र पुलिस पर वसूली का आरोप लगाया है। राज्य में 15 दिनों का कर्फ्यू लगने लगाए जाने के कारण मजदूर अपने घरों को लौटने के लिए मजबूर हैं।

एक टैक्सी ड्राइवर ने बताया, “कर्फ्यू लगने के बाद आजीविका की समस्या उत्पन्न हो गई है। हम अपने घरों की ओर लौट रहे हैं। पिछले साल भी हम लॉकडाउन के दौरान अपने घरों को लौट गए थे। लेकिन स्थिति सुधरने के बाद हम फिर से वापस आ गए। पिछले साल की तरह इस साल भी पुलिस हमसे जबरन वसूली कर रही है।”  

इसी तरह महाराष्ट्र से वापस लौट रहे एक प्रवासी मजदूर सनाउल्लाह खान ने बताया, “हम पुणे से आ रहे हैं। एक बस ने हमसे 2500-3000 रुपए लिए। महाराष्ट्र बॉर्डर पर हमें बस से उतारकर दो गाड़ियों में बैठने को कहा गया। बॉर्डर चेक प्वाइंट पर पुलिस और परिवहन विभाग के लोगों ने भी हमें अनदेखा कर दिया।”

दो जीपों में सवार 50 से ज्यादा प्रवासी मजदूर इंदौर बाइपास के पास देखे गए जो जबलपुर जा रहे थे। इनलोगों को इंदौर की राउ थाना पुलिस ने एक एनजीओ की मदद से बचाया।

समाजसेवी शैलेश कुमावत ने बताया, “यहाँ खाने और विश्राम करने के साथ डॉक्टर और दवाइयों की भी व्यवस्था की गई है। आवश्यकता पड़ने पर हम अस्पताल से भी मदद लेते हैं। यहाँ आने वाले मजदूर थके हुए होते हैं। लिहाजा स्थानीय पुलिस की सहायता से हमने उनके लिए कुछ व्यवस्थाएँ की हैं।”  

मंगलवार (13, अप्रैल) को महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार ने राज्य में कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को रोकने के लिए धारा 144 लगाने का आदेश दे दिया। सरकार के इस कदम से महाराष्ट्र में रहने वाले मजदूरों में घबड़ाहट का माहौल निर्मित हो गया। इसके बाद ये मजदूर महाराष्ट्र छोड़कर अपने राज्यों की ओर निकलने लगे।

इससे पहले खबर आई थी कि मुंबई में कई टूर एंड ट्रैवल ऑपरेटर लोगों को 300 रुपए में कोविड 19 की नेगेटिव रिपोर्ट दे रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई में लॉकडाउन जैसी पाबंदियों के बाद कई लोग अपने घर लौटने को मजबूर हैं। कई राज्यों ने महाराष्ट्र से लौटने वालों के लिए कोविड-19 RT-PCR की नेगेटिव रिपोर्ट अनिवार्य कर दिया है। लोगों की इसी मजबूरी का फायदा उठाकर टूर एंड ट्रैवल्स वालों ने नया धंधा शुरू किया है। यहाँ वे यात्रियों को 300 रुपए में कोरोना की नेगेटिव रिपोर्ट उपलब्ध कराते हैं, वो भी बिना टेस्ट के।

यह बात भी सामने आ चुकी है कि BMC के अधिकारी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बाहरी देशों से आए लोगों को 7 दिन के अनिवार्य क्वारंटाइन में रखने की बजाय उनसे 10-12 हजार रुपए लेकर उन्हें एयरपोर्ट से निकलने में मदद कर रहे हैं। मिड-डे ने खुलासा किया था कि एयरपोर्ट पर बीएमसी अधिकारियों को इसलिए तैनात किया गया कि वो कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित देश जैसे- ब्रिटेन, यूरोप, मिडिल ईस्ट और साउथ अफ्रीका, से आए यात्रियों का 7 दिन का क्वारंटाइन सुनिश्चित करें, लेकिन अधिकारी उनसे पैसों की लेन-देन कर उन्हें छोड़ रहे हैं।

सुशांत पर फेक न्यूज के लिए AajTak को ऑन एयर माँगनी पड़ेगी माफी, ₹1 लाख जुर्माना: NBSA ने खारिज की याचिका

‘न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग स्टैण्डर्ड अथॉरिटी (NBSA)’ ने समाचार चैनल ‘आजतक’ की समीक्षा याचिका को खारिज कर दी है। चैनल से कहा है कि वह शुक्रवार (अप्रैल 23, 2021) शाम 8 बजे सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में गलत सूचना देने के लिए माफीनामा का प्रसारण करे। NBSA ने इस संबंध में अक्टूबर 2020 में जो आदेश दिया था, उस पर फिर से मुहर लगाई है। ‘आज तक’ ने ब्रॉडकास्टिंग के नियमों का उल्लंघन किया था।

दरअसल, चैनल ने सुशांत सिंह राजपूत के अंतिम शब्द बताकर जिन चीजों का प्रसारण किया था, वो गलत थे। ‘आजतक’ को फुल स्क्रीन पर बड़े शब्दों में लिख कर इस माफीनामे का प्रसारण करना होगा और बैकग्राउन्ड से उसे साफ आवाज में पढ़ना होगा। चैनल को 1 लाख रुपए का जुर्माना भरने को भी कहा गया है। ‘आजतक (AajTak)’ के खिलाफ फिल्म निर्माता निलेश नवलखा ने शिकायत दायर की थी। माफीनामे का टेक्स्ट इस प्रकार होगा:

“आजतक इसके लिए माफी माँगता है कि सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग करते समय हमने चैनल पर कुछ ट्वीट्स चलाए थे। चैनल ने झूठा दावा किया था कि वो सुशांत सिंह राजपूत के अंतिम ट्वीट्स थे। ऐसा कर हमने प्रसारण संबंधी नियमों का उल्लंघन किया है। ये दिशा-निर्देश कहते हैं कि खबरों की एक से अधिक सूत्रों से पुष्टि करनी चाहिए। गलती होने पर फैक्ट्स को तुरंत सुधारा जाना चाहिए।”

इससे पहले ‘आजतक’ को अक्टूबर 27, 2020 को माफी माँगने को कहा गया था, लेकिन चैनल ने समीक्षा के लिए याचिका दायर कर दी थी। NBSA ने कहा कि ‘आजतक’ की याचिका में उसके पक्ष में कुछ था ही नहीं। कुछ अन्य चैनलों को भी इस मामले में गलत रिपोर्टिंग करते हुए पकड़ा गया था और उन्हें माफी माँगने को कहा गया था। ‘आजतक’ ने पिछले आदेश का पालन नहीं किया, इसलिए अब उसे नई तारीख पर माफी माँगनी होगी।

आजतक ने दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के कथित आखिरी ‘ट्वीट्स’ पर उनकी मौत के दो दिन बाद 16 जून को ख़बर प्रकाशित की थी। ‘आज तक’ ने यह लेख अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से भी साझा किया था। आज तक ने जो लिंक साझा किया था उसके भीतर इस बात का दावा किया गया था कि सुशांत ने कथित तौर पर आत्महत्या के संकेत दिए थे। बाद में बिना किसी स्पष्टीकरण के यह ख़बर (ट्वीट) हटा ली गई थी।

फ्रांस ने अपने नागरिकों और कंपनियों को पाकिस्तान छोड़ने की दी सलाह, पैगंबर के कार्टून पर हिंसा के बाद गृहयुद्ध से हालात

फ्रांस ने अपने नागरिकों और कंपनियों को अस्थायी तौर पर पाकिस्तान छोड़ने की सलाह दी है। पाकिस्तान में गृह युद्ध की स्थिति को देखते हुए फ्रांसीसी दूतावास ने यह सलाह दी है। फ्रांस विरोधी तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) के हिंसक प्रदर्शनों के बाद पाकिस्तान के कई हिस्सों में हिंसा की खबर के बाद ये सलाह दी गई है। अपने नागरिकों को भेजे ईमेल में दूतावास ने लिखा है कि खतरे को देखते हुए उन्हें और फ्रांस की कंपनियों को पाकिस्तान छोड़ने की सलाह दी जाती है।

पाकिस्तानी अखबार डॉन से फ्रांसीसी दूतावास के सूचना विभाग के वर्निक वैंगर (Veronique Wagner) ने कहा, “प्रदर्शनों के कारण फ्रांसीसी नागरिकों पर आए संकट के चलते हमने अपने नागरिकों को पाकिस्तान छोड़ने की सलाह दी है।“

फ्रांस में अक्टूबर 2020 में एक 45 वर्षीय शिक्षक की गला रेत कर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद फ्रांस के राष्ट्रपति ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बात करते हुए पत्रिकाओं द्वारा पैगंबर मोहम्मद के कार्टून बनाए जाने के अधिकार को भी समर्थन दिया था। तब से ही पाकिस्तान में फ्रांस विरोधी प्रदर्शन चल रहे हैं।

हाल ही में पाकिस्तान की सरकार ने टीएलपी को बैन करने का निर्णय लिया है। टीएलपी एक इस्लामिक कट्टरपंथी समूह है। यह पाकिस्तान में ईशनिंदा कानून के समर्थन में प्रदर्शन करता रहता है। टीएलपी के इस्लामिक कट्टरपंथ के कारण ही पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर प्रमुख रूप अत्याचार हो रहा है। टीएलपी पाकिस्तान में हो रही फ्रांस विरोधी हिंसाओं के पीछे प्रमुख रूप से जिम्मेदार है और पाकिस्तान में फ्रांसीसी दूतावास के निष्कासन की माँग कर रहा है।

सोमवार को टीएलपी के नेता साद रिजवी को गिरफ्तार किया गया था। रिजवी ने टीएलपी की माँगों को पूरा करने के लिए 20 अप्रैल का समय दिया था। रिजवी की गिरफ़्तारी के बाद पाकिस्तान में हिंसक प्रदर्शन बढ़ गए, जिनमें 2 पुलिसवालों की जान गई और लगभग 370 लोग घायल हो गए। पाकिस्तान के एक मंत्री शेख राशिद का बयान आया था कि वे पैगंबर के सम्मान की रक्षा के पक्ष में हैं, किन्तु टीएलपी की माँगों को स्वीकार करने पर पाकिस्तान की छवि एक कट्टरपंथी देश के रूप में हो जाएगी।

गुरुवार को ट्विटर पर #FrenchLeavePakistan ट्रेंड करता रहा। सितंबर 2020 में जब चार्ली हेब्दो ने पैगंबर मोहम्मद के कार्टून को पुनः प्रकाशित किया तब पेरिस में उसके कार्यालयों पर एक पाकिस्तानी नागरिक द्वारा हमला किया गया और उसने दो लोगों को चाकू मार दी थी।

रिजवी की गिरफ़्तारी के बाद हुई हिंसा से जुड़ी कई खबरें और वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहे हैं।

‘आरोग्य सेतु’ की शर्त पर उमर खालिद को जमानत… पर जेल में ही रहेगा दिल्ली हिंदू विरोधी दंगों का आरोपित

दिल्ली की एक अदालत ने JNU के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद को जमानत दे दी है। उसके खिलाफ दिल्ली दंगों में संलिप्तता को लेकर खजूरी ख़ास थाने में मामला दर्ज किया गया था। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में जाँच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट भी दायर हो गया है, ऐसे में अब सुनवाई में लंबा समय लगने की संभावना है। उमर खालिद को 10 अक्टूबर 2020 को जुडिशल कस्टडी में लिया गया था।

इस मामले में उमर खालिद के खिलाफ 25 फरवरी 2020 को एफआईआर दर्ज की गई थी। यह मामला उत्तर-पूर्वी दिल्ली के खजूरी खास में हिंसा से जुड़ा है। यह दूसरी एफआईआर थी (FIR No. 101/2020) जिसके तहत बीते साल 1 अक्टूबर को उसे गिरफ्तार किया गया था।

जेएनयू के पूर्व छात्र नेता और दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों के आरोपित को जमानत देते हुए कड़कड़डूमा कोर्ट एडिशनल जज विनोद यादव ने कहा, “उमर खालिद को सिर्फ इसलिए अनंतकाल तक जेल में कैद कर के नहीं रखा जा सकता क्योंकि इस मामले में अभी दंगाई भीड़ में शामिल और लोगों को चिह्नित किया जाना है और कई अन्य गिरफ्तारियाँ भी होनी हैं।” उन्होंने 20 हजार के निची मुचलके और हर सुनवाई पर हाजिर होने की शर्त पर उसे जमानत दी। जेल से रिहाई पर अपना नंबर खजूरी खास थाने के एसएचओ को मुहैया कराने को कहा। साथ ही यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि मोबाइल दुरुस्त हो और उसमें ‘आरोग्य सेतु’ एप डाउनलोड किया गया हो।

जमानत की शर्त यह भी है कि उमर खालिद सबूतों के साथ छेड़छाड़ का प्रयास नहीं करेगा और साथ ही गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश भी नहीं करेगा। साथ ही वो अपने आसपास के इलाकों में शांति और भाईचारे का माहौल बना कर रखेगा।

ये मामला चाँदबाग पुलिया के नजदीक मेन करावल नगर रोड पर हुई हिंसा से जुड़ा हुआ है। ये दंगा मुख्य आरोपित ताहिर हुसैन के इशारे पर हुआ था। खालिद की तरफ से दलील दी गई कि उस दौरान वो वहाँ उपस्थित ही नहीं था और न ही उसके और ताहिर के बीच बैठक के कोई प्रत्यक्ष सबूत हैं। उसके खिलाफ दलील दी गई कि उसके द्वारा उकसाई गई भीड़ दूसरे समुदाय के लोगों और संपत्ति को अधिकाधिक नुकसान पहुँचाना चाहती है।

3 महीने पहले ही आरोप पत्र का संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने कहा था कि प्रथम दृष्टया जाँच निष्कर्षों के अनुसार, JNU के छात्र नेता रहे उमर खालिद और AAP के पार्षद रहे ताहिर हुसैन ने मिल कर नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली दंगों की साजिश रची थी– ये मानने के वाजिब आधार हैं। चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट दिनेश कुमार ने ये बातें कही थी। कोर्ट ने कहा था कि ये बयान ये दिखाने के लिए पर्याप्त है कि उक्त अवधि में उमर खालिद दिल्ली दंगों के मुख्य आरोपित ताहिर हिस्सें से लगातार संपर्क में था।

यह जानना जरूरी है कि इस मामले में जमानत मिलने के बावजूद उमर खालिद अभी जेल से बाहर नहीं निकल पाएगा। इस मामले में एफआईआर दर्ज होने से पहले ही एक अन्य मामले (FIR 59) में वह हिरासत में लिया जा चुका था। इस मामले में उसके खिलाफ UAPA की धाराएँ भी लगाई गई हैं। यानी, FIR 59 में जमानत नहीं मिलने तक वह जेल में ही रहेगा।

कोरोना से जंग में मुकेश अंबानी ने गुजरात की रिफाइनरी का खोला दरवाजा, फ्री में महाराष्ट्र को दे रहे ऑक्सीजन

देश में कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के कारण स्वास्थ्य सुविधाओं पर भारी दबाव पड़ रहा है। ऐसे में देश के सबसे अमीर उद्योगपति और रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के मालिक मुकेश अंबानी सहायता के लिए आगे आए हैं। अपनी रिफाइनरी की ऑक्सीजन की सप्लाई उन्होंने अस्पतालों को मुफ्त में शुरू की है। इसकी शुरुआत महाराष्ट्र से हुई है। राज्य को रिलायंस से 100 टन ऑक्सीजन की सप्लाई की जाएगी।

गुजरात के जामनगर में रिलायंस की रिफाइनरी है। यह दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी है। इस रिफाइनरी में उत्पादित ऑक्सीजन की सप्लाई महाराष्ट्र को की जाएगी और वो भी बिना किसी मूल्य के। महाराष्ट्र के शहरी विकास मंत्री एकनाथ शिंदे ने भी ट्वीट कर इसकी पुष्टि की है। जामनगर की रिफाइनरी से महाराष्ट्र को 100 टन ऑक्सीजन की सप्लाई की जाएगी, जिससे कोरोना वायरस से गंभीर रूप से संक्रमित मरीजों को इसका लाभ मिल सकेगा।

जामनगर में रिलायंस की रिफाइनरी में एक अधिकारी ने भी नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जामनगर से ऑक्सीजन महाराष्ट्र भेजी जा रही है। रिफाइनरी में उत्पादित ऑक्सीजन का एक हिस्सा मेडिकल उपयोग के लिए तैयार किया जा रहा है। महाराष्ट्र कोरोना वायरस संक्रमण से सबसे ज्यादा प्रभावित है। ऐसे में मुकेश अंबानी और रिलायंस का यह निर्णय कोरोना वायरस से लड़ने में महाराष्ट्र के लिए बेहद मददगार साबित होगा।

महाराष्ट्र में कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के कारण स्वास्थ्य सुविधाएँ भी असंतुलित हो रही हैं। राज्य में ऑक्सीजन की कमी से कई मरीजों की जानें भी जा चुकी हैं। महाराष्ट्र ने केंद्र सरकार से राज्य में पड़ोसी राज्यों से ऑक्सीजन की सप्लाई बढ़ाने की अपील की थी। बढ़ते संक्रमण के कारण मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों में भी ऑक्सीजन की माँग तेजी से बढ़ रही है।

महाराष्ट्र में बुधवार को कोरोना वायरस के 58,952 नए संक्रमित मरीज मिले, जिससे कुल मरीजों का आँकड़ा बढ़कर 35,78,160 हो गया। राज्य में सक्रिय मरीजों की संख्या भी 6,12,070 है।

‘वाइन की बोतल, पाजामा और मेरा शौहर सैफ’: करीना कपूर खान ने बताया बिस्तर पर उन्हें क्या-क्या चाहिए

बॉलीवुड अभिनेत्री करीना कपूर खान ने अपना ‘बेडरूम सीक्रेट’ खोला है, जो सोशल मीडिया में खासा चर्चा का विषय बन रहा है। करीना कपूर ने कहा कि वो जब भी बिस्तर पर जाती हैं तो उन्हें 3 चीजें चाहिए होती हैं- पाजामा, वाइन की एक बोतल और शौहर सैफ अली खान। पटौदी खानदान की बहू ने यह बात दोस्त तान्या घावरी से डिस्कवरी प्लस के शो ‘Star VS Food’ की शूटिंग के दौरान हुई बातचीत में कही।

बता दें कि सैफ अली खान और करीना कपूर की शादी को 8 वर्ष हो चुके हैं। उससे पहले ये दोनों 5 साल रिलेशनशिप में भी रहे थे। करीना कपूर का शो ‘Star VS Food’ गुरुवार (अप्रैल 15, 2021) से ही डिस्कवरी प्लस पर आ रहा है। इस शो में ही बात करते हुए करीना ने जब अपने ‘बेडरूम सीक्रेट’ बताया तो वहाँ मौजूद सभी लोग ठहाके लगा कर हँस पड़े। करीना कपूर अपने जवाब पर खुश भी नजर आईं।

अपनी पीठ थपथपाते हुए ‘3 इडियट्स’ और ‘बजरंगी भाईजान’ में काम कर चुकी अभिनेत्री ने कहा, “मुझे लगता है इससे बेहतर जवाब और कुछ नहीं हो सकता है। मुझे इसके लिए इनाम मिलना चाहिए।” इस शो में मलाइका अरोड़ा, अर्जुन कपूर, करण जौहर, प्रतीक गाँधी भी नजर आने वाले हैं। इस शो के जरिए बॉलीवुड में ‘बेबो’ नाम से पुकारी जाने वाली करीना OTT प्लेटफॉर्म पर डेब्यू कर रही हैं।

करीना कपूर ने इस शो का प्रोमो अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर भी शेयर किया

करीना कपूर इससे पहले किसी पाकविद्या वाले शो में भी नजर नहीं आई थीं। वीडियो में करीना कुछ घिसती नजर आती हैं और उनके मुँह से निकलता है- मेरे हाथ दुखने लगे। फिर निर्देशक करण जौहर की आवाज सुनाई देती है कि मैं अपना चेहरा खराब नहीं करना चाहता। इस शो में सभी सेलेब्रिटी अपने-अपने किचेन में खाना पकाने की तैयारी करते दिखेंगे। अब देखना है कि इसे दर्शकों की कैसी प्रतिक्रिया मिलती है।

तिहाड़ के 3468 कैदी ‘लापता’, कोरोना के कारण इमरजेंसी पेरोल पर जेल से बाहर निकले थे 6740

कोरोना महामारी के कारण पैदा हुए हालात की वजह से तिहाड़ जेल में बंद 6,740 कैदियों को इमरजेंसी पेरोल पर रिहा किया गया था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इनमें से 3,468 ‘लापता’ हैं। अब जेल प्रशासन ने इनका पता लगाने के लिए दिल्ली पुलिस से कहा है। लापता कैदियों के बारे में जेल प्रशासन के पास कोई सूचना भी नहीं है। इन कैदियों की संख्या 3000 से ऊपर है।

कोविड-19 के प्रारंभ के समय ही जेल में बंद कैदियों की सुरक्षा के लिए भी कई प्रयास हुए थे। इन्हीं प्रयासों की श्रृंखला में 2020 में तिहाड़ जेल में कैदियों की संख्या को कुछ हद तक सीमित करने के लिए 6740 कैदियों को आपातकालीन पेरोल पर रिहा किया गया था। रिहा किए गए इन कैदियों में से कई कैदी कैंसर, एचआईवी, किडनी और दमा की गंभीर बीमारियों से पीड़ित थे। इनमें से 3468 कैदी वापस लौट कर नहीं आए।

जिन कैदियों को रिहा किया गया उनमें से 1,184 सजायाफ्ता कैदी थे। इन्हें शुरुआत में आठ हफ्तों के लिए पेरोल पर रिहा किया गया था। यह समय परिस्थिति के हिसाब से बढ़ती गई। आखिर में इन कैदियों को 7 फरवरी से 6 मार्च के बीच सरेंडर करने के लिए कहा गया था। कई कैदी वापस आ गए किन्तु इनमें से 112 कैदी अभी भी लापता हैं।

इसी प्रकार 5556 विचाराधीन कैदियों को आपातकालीन पेरोल पर रिहा किया गया। इन्हें मार्च के अंत तक सरेंडर करने के लिए कहा गया था। इनमें से भी 2200 कैदी ही लौट कर आए। कई कैदी तिहाड़ के अलावा मंडोली और रोहिणी जेल से भी रिहा किए गए थे।

तिहाड़ जेल प्रशासन ने न लौटने वाले कैदियों की लिस्ट दिल्ली पुलिस को दे दी है। प्रशासन के निवेदन पर अब दिल्ली पुलिस इन लापता कैदियों की तलाश करेगी।

पिछले साल कोरोना वायरस के संक्रमण के प्रारंभ होने के बाद सुप्रीम कोर्ट के सुझाव पर जेल में कैदियों की संख्या को कम करने के लिए कई राज्यों ने समितियों का निर्माण किया। दिल्ली में भी उच्च न्यायालय की जज हिमा कोहली की अध्यक्षता में एक समिति का निर्माण हुआ जिसकी सलाह पर तिहाड़ और अन्य जेलों से कैदियों को आपातकालीन पैरोल पर रिहा करने के सुझाव पर अमल किया गया।

तिहाड़ जेल दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी जेल है जिसकी क्षमता लगभग 10,000 कैदियों को रखने की है। अब तक यहाँ कुल 174 कैदी और 300 स्टाफ सदस्य कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं।