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मुस्तफा ने पहचान छिपा हिंदू महिला से शादी की, गर्भवती हुई तो अस्पताल में आधार कार्ड से खुला राज

मध्य प्रदेश के इंदौर से लव जिहाद का मामला सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, मुस्तफा नाम के एक शख्स ने अपनी पहचान छिपाकर हिंदू महिला से शादी कर ली। महिला जब गर्भवती हुई तो जाँच कराने अस्पताल पहुँची। वहाँ उसने आधार कॉर्ड पर अपने पति का असली नाम देखा।

इंदौर के द्वारकापुरी थाने में दर्ज शिकायत के अनुसार, पिछले साल अप्रैल में प्रेम विवाह करने वाली महिला को एक साल बाद पता चला कि उसका पति गब्बर नहीं, मुस्तफा है। महिला ने बताया कि दोनों की मुलाकात एक बर्थडे पार्टी में हुई थी। इसके बाद दोनों एक-दूसरे के करीब आ गए और विवाह कर लिया। मुस्तफा ने महिला को अपना नाम गब्बर बताया था। लेकिन जब वह गर्भवती हुई और जाँच कराने अस्पताल पहुँची तो उसने आधार कार्ड में मुस्तफा नाम पाया। महिला की शिकायत पर पुलिस ने मुस्तफा के खिलाफ लव जिहाद कानून के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

हाल ही में मध्य प्रदेश में लव जिहाद और जबरन धर्मांतरण रोकने का नया कानून लागू हुआ है। इस कानून में शादी के बाद बलपूर्वक धर्म-परिवर्तन को गंभीर अपराध माना गया है और इसके लिए 10 वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। बता दें कि अधिनियम की प्रस्तावना में लिखा हुआ है कि यह अधिनियम धर्मांतरण के विरुद्ध धर्म की स्वतंत्रता को सुनिश्चित करता है। इसके साथ ही विवाह, धमकी अथवा बलपूर्वक, लालच जैसे अवैध माध्यमों से धर्मांतरण को रोकता है।

UP पुलिस की आहट से उड़ी मुख्तार अंसारी की भूख, 3 की जगह अब 1 टाइम ही खा रहा: लावारिस मिली एंबुलेंस

कभी पूर्वांचल में दहशत का पर्याय माना जाने वाले मुख्तार अंसारी आज खुद दहशत में जी रहा है। पंजाब की रोपड़ जेल में बंद अंसारी को आज (5 अप्रैल 2021) यूपी पुलिस को सौंपा जाएगा। उसके लिए बांदा जेल को किले में तब्दील कर दिया गया है।

चिंतित अंसारी जेल में अधिकतर समय अपने विशेष बैरक में ही व्यतीत कर रहा है। चिंता के कारण उसकी भूख आधी हो गई और वो दिन में एक वक़्त का भोजन ही कर रहा है। पंजाब के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह)  द्वारा मुख्तार अंसारी को उत्तर प्रदेश ले जाने को लेकर यूपी के अतिरिक्त मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी को लिखे पत्र में उसे गुरुवार (अप्रैल 8, 2021) से पहले ले जाने और उसे जेल में स्वास्थ्य सहित अन्य सुविधाएँ मुहैया कराने को कहा था।

इससे पहले माफिया अंसारी 3 टाइम खाना खाता था। मऊ से पाँचवीं बार विधायक बने मुख़्तार अंसारी को किस रूट से पंजाब लेकर जाया जाएगा, इसे गुप्त रखा गया है। इस दौरान पंजाब पुलिस के कुछ जवान भी शामिल होंगे। यूपी पुलिस की अलग-अलग टीमें इसके लिए रोपड़ गई है। वहाँ मीडिया का भी जमावड़ा लगा हुआ है।

वहीं वो एम्बुलेंस रूपनगर-नंगल हाईवे पर रविवार देर रात नानक ढाबे के पास मिली, जिससे उसे मार्च 31 को मोहाली से रूपनगर कोर्ट ले जाया गया था। रूपनगर से 3 किलोमीटर दूर बरामद हुई इस एम्बुलेंस के नंबर प्लेट पर मिट्टी पड़ी हुई थी। उस एम्बुलेंस को बाराबंकी में फर्जी तरीके से रजिस्टर कराया गया था। यूपी पुलिस ने ढाबे पर जाकर उसके कर्मचारियों से पूछताछ की। पुलिस को सादे ड्रेस में भेजा गया है।

बताया जा रहा है कि चित्रकूट धाम मंडल की स्पेशल पुलिस टीम मुख़्तार अंसारी को लेकर जाएगी। हाल ही में मुख़्तार अंसारी की पत्नी ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिख कर अपने शौहर की सुरक्षा की गुहार लगाई थी। उन्होंने आशंका जताई है कि उनके शौहर को ‘फेक एनकाउंटर में’ मारा जा सकता है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय सुरक्षा बलों को अंसारी के साथ लगाया जाए। उन्होंने कहा कि मुख़्तार अंसारी की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

माफिया मुख्तार अंसारी पर 47 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसको लेकर उसे यूपी की कई अदालतों में पेश होना है। लेकिन वह अपने स्वास्थ्य का हवाला देते हुए काफी दिनों से पंजाब की जेल में बंद है। बताया जाता है कि योगी सरकार ने अकेले मऊ में ही मुख्तार अंसारी के करीबियों के 22 करोड़ से अधिक की संपत्ति पर बुलडोजर चलाने का काम किया है। सुप्रीम कोर्ट ने 26 मार्च को बड़ा फैसला सुनाते हुए मुख्तार अंसारी को उत्तर प्रदेश भेजने का आदेश दिया था। 

15 साल की लड़की से रेप, 13 साल वाली गर्भवती… फिर इनकी मानव तस्करी: ग्रूमिंग गैंग लीडर अब्दुल, आदिल खुला घूम रहे

इंग्लैंड में रोशडेल चाइल्ड ग्रूमिंग गिरोह का सरगना कारी अब्दुल रऊफ सड़कों पर बेखौफ घूम रहा है। यह तब है, जबकि उसकी सजा के अनुसार उसे 6 साल बाद निर्वासित किया जाना था। दरअसल, 51 साल के कारी अब्दुल रऊफ को एक नाबालिग लड़की (15 वर्षीय) के साथ छेड़छाड़ और दुष्कर्म का दोषी पाए जाने पर 6 साल की जेल हुई थी।

डेली मेल में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक हाल ही में उसे खाने-पीने की चीजों की खरीदारी करते हुए देखा गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उसे और उसके दोस्तों अब्दुल अजीज (50 वर्षीय), आदिल खान (51 वर्षीय) को भी निर्वासित किया जाना था, लेकिन अभी तक नहीं किया गया। तीनों के पास दोहरी नागरिकता है। ये सभी पाकिस्तान से ब्रिटेन चले गए थे, जहाँ उन्होंने ब्रिटेन की नागरिकता भी हासिल कर ली।

अब्दुल इन तीनों में सबसे घिनौना या पापी मानसिकता का था। वो खुद को ‘द मास्टर’ कहलाता था। जब उसने एक बच्चे के साथ जबरन सेक्स किया था, तब वो 3 बच्चों का बाप था। उसे एक बच्चे के साथ यौन संबंध बनाने के लिए और मानव तस्करी के लिए 9 साल की सजा सुनाई गई थी।

आदिल खान को ग्रूमिंग गैंग की साजिश और 13 साल की बच्ची की तस्करी के लिए 8 साल की सजा सुनाई गई थी। 13 साल की बच्ची की तस्करी इसलिए की जा रही था क्योंकि वो ग्रूमिंग गैंग का शिकार होकर गर्भवती हो गई थी।

मई 2012 में लिवरपूल क्राउन कोर्ट के जज के शब्द पढ़िए। पढ़िए और समझिए कि इस्लामी कट्टरपंथी लोगों ने इंग्लैंड में ग्रूमिंग गैंग बना कर क्या कहर ढाया था छोटी बच्चियों पर! जज गेराल्ड क्लिफ्टन ने कहा था:

“पीड़ितों के साथ बलात्कार बिना किसी खौफ के… निडर होकर, वीभत्स और हिंसक तरीके से किया गया।”

13 से लेकर 16 साल की लड़कियाँ बनीं शिकार

पिछले साल यूनाइटेड किंगडम के वेस्ट यॉर्कशायर (West Yorkshire) पुलिस ने 32 लोगों पर 8 नाबालिग लड़कियों के साथ यौन अपराधों के 150 मामले दर्ज किए थे। बताया जाता है कि ग्रूमिंग जिहाद यूके के भीतर सबसे बड़ा आपराधिक प्रकरण बनकर उभरा है। यहाँ मुस्लिम युवक श्वेत लड़कियों का यौन उत्पीड़न और उनकी ग्रूमिंग करते हैं।

इन आपराधिक वारदातों को किरक्लीस (Kirklees), ब्रैडफोर्ड (Bradford) और वेकफील्ड (Wakefield) में 1999 से 2012 के दौरान 13 से लेकर 16 साल की पीड़िताओं के साथ अंजाम दिया गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक तमाम पीड़िताओं को वयस्क होने के बाद भी जघन्य अपराधों का शिकार होना पड़ा था। इन वारदातों के ज़्यादातर आरोपित बैटले और ड्यूसबेरी (Batley and Dewsbury) क्षेत्र के निवासी हैं।

2018-19 में इंग्लैंड में 19000 बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न

डेली मेल ने आधिकारिक आँकड़ें पेश करते हुए अनुमान लगाया था कि 2019 में इंग्लैंड में लगभग 19,000 नाबालिगों के साथ यौन ग्रूमिंग (sexual grooming) की वारदात को अंजाम दिया गया था। इंग्लैंड में स्थानीय प्रशासन ने 2018-19 में कुल 18,700 पीड़ितों की पहचान की थी, जिनकी संख्या पाँच साल पहले 3300 थी।

पिछले 40 साल में ब्रिटेन में कम से कम 5 लाख गैर-मुस्लिम (काफिर) लड़कियों के साथ समुदाय विशेष के लोगों ने रेप किया है। रेप पीड़िता डॉ. एला हिल ने ‘Triggernometry’ को दिए एक इंटरव्यू में इसका खुलासा किया था।

20 साल पहले की डरावनी कहानी को याद करते हुए हिल ने बताया कि उन्हें उनके पाकिस्तानी मुस्लिम ब्वॉयफ्रेंड ने निशाना बनाया था। उसका रिश्ता जल्द ही मजहबी रूप में तब्दील हो गया। पाकिस्तानी मुस्लिम ब्वॉयफ्रेंड ने रॉदरहैम, शेफ़ील्ड और ब्रैडफोर्ड के आसपास अलग-अलग फ्लैटों में ले जाकर उनके साथ रेप किया और उन्हें यातनाएँ दी थी।

महिला ने बताया कि उसने उन्हें इतनी गहरी चोट दी थी कि उससे उबरने में लगभग 1 साल लग गए थे। ब्वॉयफ्रेंड ने हिल के माता-पिता को जान से मारने की धमकी दी थी, जिसकी वजह से वह चुपचाप सब कुछ सहन करती रहीं।

यति न​रसिंहानंद की गर्दन काटने की बात करने वाले अमानतुल्लाह खान के समर्थन में इस्लामी कट्टरपंथी, बता रहे- दिल्ली का टाइगर

उत्तर प्रदेश के डासना देवी मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती का सिर और जुबान काटने की धमकी देने वाले आम आदमी पार्टी (AAP) के MLA अमानतुल्लाह खान के समर्थन में इस्लामी कट्टरपंथी उतर आए हैं। ट्विटर पर उसके समर्थन में ट्रेंड चला रहे हैं।

कट्टरपंथी सोशल मीडिया पर यति नरसिंहानंद की गिरफ्तारी की माँग कर रहे हैं, जबकि उनका सिर कलम करने की धमकी देने वाले का समर्थन।

अमानतुल्लाह ने स्वामी नरसिंहानंद को मजहबी कीड़ा बताते हुए लोगों को उकसाने की कोशिश की थी कि वो डासना देवी मंदिर के प्रमुख महंत को नुकसान पहुँचाने की कोशिश करें। उसके भड़कावे का असर यह हो रहा है कि कट्टरपंथी इस्लामिस्ट ट्विटर पर महंत के खिलाफ ट्रेंड चला रहे हैं।

कॉन्ग्रेस समर्थक सोशल मीडिया पर सवाल कर रहे हैं कि आखिर दिल्ली पुलिस डासना देवी मंदिर के महंत को गिरफ्तार क्यों नहीं कर रही है। क्या वो मोदी सरकार से डर रही है।

टीपू सुल्तान पार्टी ने तो सिर और जुबान काटने की धमकी देने वाले अमानतुल्लाह खान को ‘दिल्ली का टाइगर’ घोषित कर दिया है। बता दें कि इस पार्टी की स्थापना 2019 में आम चुनाव से पहले हुई थी। इसने लोकसभा चुनावों में भी हिस्सा लिया था। कर्नाटक के ग्रामसभा चुनाव में कुछ सीटें भी जीती थीं।

गौरतलब है कि अमानतुल्लाह खान ने बीते 3 अप्रैल को अपने ट्विटर हैंडल से खुले तौर पर यति नरसिंहानंद की जुबान और गला काटने की धमकी दी थी। आप MLA ने लिखा, “हमारे नबी की शान में गुस्ताखी हमें बिल्कुल बर्दाश्त नहीं। इस नफरती कीड़े की जुबान और गर्दन दोनों काट कर इसे सख्त से सख्त सजा देनी चाहिए। लेकिन हिंदुस्तान का कानून हमें इसकी इजाजत नहीं देता।”

आप विधायक ने इस हेटफुल ट्वीट को एक दिन तक अपने ट्विटर पर पिन करके रखा था। जब लोगों ने सोशल मीडिया पर ट्विटर से इसकी शिकायत की तो रविवार को ट्विटर ने इसे डिलीट कर दिया। लेकिन, फेसबुक पर यह अभी भी है।

महाराष्ट्र गृह मंत्री अनिल देशमुख ने दिया इस्तीफा, CM ठाकरे को कहा – ‘पद से मुक्त करें’

महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। अनिल देशमुख ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नाम से पत्र लिखते हुए इस्तीफा स्वीकार करने की माँग की है।

आज (5 अप्रैल 2021) ही बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख पर निलंबित पुलिस अधिकारी सचिन वाजे के जरिए मुंबई के प्रतिष्ठानों से प्रति महीने 100 करोड़ रुपए की वसूली के आरोप मामले में CBI को प्रारंभिक जाँच करने को कहा है।

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गृह मंत्री अनिल देशमुख के इस्तीफे को लेकर ट्विटर पर अपनी बात रखी थी। उनका कहना था कि बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले के बाद अनिल देशमुख को स्वयं ही इस्तीफा दे देना चाहिए या फिर खुद मुख्यमंत्री ठाकरे को उनसे ऐसा करने को कहना चाहिए।

बॉम्बे हाई कोर्ट का फैसला

बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि 15 दिनों के भीतर CBI अपनी प्रारंभिक जाँच ख़त्म कर सकती है। प्रारंभिक जाँच के बाद ये CBI के निदेशक के ऊपर होगा कि वो इस मामले में आगे क्या कार्रवाई करना चाहते हैं। कोर्ट ने कहा:

“हम जानते हैं कि अनिल देशमुख राज्य के गृह मंत्री हैं, जो पुलिस के ऊपर होते हैं। एक स्वतंत्र जाँच होनी चाहिए। जाँच कानून के हिसाब से होनी चाहिए।”

नक्सली हमले पर घड़ियाली आँसू बहाने वाले कन्हैया कुमार, 76 CRPF जवानों की मौत का जश्न किसने मनाया था? युद्ध में चीन के साथ कौन था?

छत्तीसगढ़ के बीजापुर में नक्सलियों ने घात लगा कर हमारे सुरक्षा बलों पर हमला किया, जिसमें 22 जवान बलिदान हो गए। ये नक्सलियों की एक सोची-समझी साजिश थी, क्योंकि 3 गाँव खाली करा लेना और किसी क्षेत्र में 15 दिनों तक डटे रहने का अर्थ है कि उन्हें वहाँ के कुछ लोगों से समर्थन मिला और उनके शहरी आकाओं से भी। लेकिन, कन्हैया कुमार जैसे लोग इस नक्सली हमले और बलिदानी जवानों की लाशों पर राजनीति कर रहे हैं।

कन्हैया कुमार ने इस दुःखद घटना को लेकर किए गए अपने ट्वीट में लिखा, “बाप गृहमंत्री, बेटा BCCI सेक्रेटरी… बाप किसान, बेटा जवान… बेशर्म सत्ता से पूछिए कि कितने मंत्रियों के बच्चे फ़ौज में शामिल होते हैं? कायराना नक्सली हमले में लहू देश के आम लोगों का बहता है और कुर्सीजीवी इसका फ़ायदा उठाते हैं। देश को ये साज़िश समझनी होगी। वीर जवानों व किसानों को नमन!” क्या आपको किसी हिसाब से भी यह शोक जताने वाला ट्वीट लगता है?

अब आते हैं मंत्रियों के या उनके परिजनों के फ़ौज में होने की बात पर। केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक की बेटी सेना में हैं। उनकी बेटी कैप्टन डॉक्टर श्रेयसी निशंक हरिद्वार के रुड़की स्थित मिलिट्री हॉस्पिटल में सेवारत हैं। वो 2018 में आर्मी मेडिकल कॉर्प्स में शामिल हुई थीं। उनकी इस उपलब्धि पर उनके पिता ने कहा था कि बेटियाँ किसी भी मामले में बेटों से कम नहीं होतीं। क्या इससे कन्हैया कुमार के झूठ का पर्दाफाश नहीं होता?

केंद्रीय सड़क एवं परिवहन राज्यमंत्री विजय कुमार सिंह (जनरल वीके सिंह) भारत के सेना प्रमुख रहे हैं। जनरल वीके सिंह गाजियाबाद लोकसभा क्षेत्र से लगातार दो बार बड़े अंतर से सांसद बने हैं। वे भारतीय सेना के डेकोरेटेड अधिकारी रहे हैं, जिन्हें कई सम्मान प्राप्त हुए। ये तथ्य भी कन्हैया कुमार के दावों की पोल खोलता है। केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर इसी साल ‘टेरिटोरियल आर्मी’ में कैप्टन बने। वो इस पद पर जाने वाले न सिर्फ पहले केंद्रीय मंत्री, बल्कि पहले सांसद हैं।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भाई सेना में सूबेदार हैं और LAC पर पहरा देते हैं। सूबेदार शैलेन्द्र मोहन यूपी सीएम के छोटे भाई हैं, जो सालों भर संवेदनशील क्षेत्र में पेट्रोलिंग में लगे रहते हैं। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री BC खंडूरी सेना में मेजर जनरल हुआ करते थे। अप्रैल 2019 में 7 और उसी साल जुलाई में 2 सैन्य अधिकारियों ने रिटायरमेंट के बाद समाजसेवा के लिए भाजपा को अपनी पहली पसंद बनाया।

केंद्रीय मंत्री रहे राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने 1990-2013 तक सेना में सेवा दी थी और वो जम्मू-कश्मीर के आतंकरोधी ऑपरेशन का हिस्सा भी रहे थे। वो रिटायर्ड कर्नल हैं। जसवंत सिंह और जगतवीर सिंह जैसे सैन्य अधिकारियों ने राजनीतिक पारी के लिए भाजपा को पहली पसंद बनाया। असली बात तो ये है कि वामपंथी नेता अक्सर सेना को गाली देते हैं और फिर पूछते हैं कि तुम्हारे परिजन सेना में क्यों नहीं हैं?

ऐसे में, जब कोई कन्हैया कुमार यह कह रहा होता है कि मोदी सरकार के मंत्रियों या उनके परिजन सेना में नहीं हैं, तो वो चाहता है कि आप जनरल वीके सिंह, कैप्टन श्रेयसी निशंक और कैप्टन अनुराग ठाकुर के बारे में ये सब न जान पाएँ। ये लोग उस विधारधारा के समर्थक हैं, जिसकी पुरोधा अरुंधति रॉय जैसे लोग हैं। अरुंधति रॉय ने एक अंतरराष्ट्रीय मंच से खुलेआम कहा था कि भारतीय सेना अपने ही लोगों को मारती है।

आज जब ऐसे लोग घड़ियाली आँसू लेकर आ जाएँ तो क्या इससे वो देशभक्त साबित हो जाएँगे? रवीश कुमार को दिए इंटरव्यू में इसी कन्हैया कुमार ने कहा था कि जिन आदिवासियों को नक्सली कह कर मारा जाता है, वो निर्दोष और भोले-भाले लोग हैं। JNU में इसी कन्हैया कुमार के गैंग पर भारतीय सेना के अपमान का आरोप लगा था। आज ये खुद को जवानों का हितैषी बता कर पेश कर रहे।

अब आते हैं कन्हैया कुमार जैसों के इतिहास पर, जिससे पता चल जाता है कि सेना को लेकर बहाए गए इनके आँसू घड़ियाली हैं। जिस छत्तीसगढ़ में ये नक्सली हमला हुआ है, उसी राज्य में अप्रैल 2010 में 76 CRPF जवानों को नक्सलियों ने बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया था। उसी राज्य के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा था कि इस घटना के बाद JNU में जवानों की मौत का जश्न मनाया गया, जिससे वो व्यथित हो गए थे।

अधिकारी SRP कल्लूरी हमले के समय उसी क्षेत्र में DIG हुआ करते थे। उन्होंने याद दिलाया था कि किस तरह कुछ तथाकथित लेखकों ने तब इस जघन्य वारदात को ‘जनता की जीत’ बताया था। अप्रैल 2010 में JNU में ABVP और कॉन्ग्रेस का छात्र संघ NSUI, दोनों ने ही वामपंथियों पर आरोप लगाया था कि उन्होंने जवानों की हत्या का जश्न मनाया। बचाव में वामपंथियों ने कहा था कि वो तो बीएस ‘ऑपरेशन ग्रीन हंट’ का विरोध कर रहे थे।

नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन चलाने का विरोध करने वाले ये नक्सली आज उन जवानों के हितैषी बन रहे हैं। तब NSUI के महासचिव रहे शेख शाहनवाज ने बताया था कि DSU (डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स यूनियन) और AISA (ऑल इंडिया स्टूडेंट्स यूनियन) ने जवानों की हत्या का जश्न मनाया था। बता दें कि AISA राजनीतिक दल CPI(M-L) लिबरेशन का छात्र संघ है। कन्हैया कुमार CPI के नेता हैं। फिर इनमें और प्रतिबंधित SIMI में कोई अंतर ही कहाँ रहा?

अब आते हैं भारत में वामपंथियों के इतिहास पर। याद कीजिए, 2020 में भारत-चीन के बीच संघर्ष में जब हमारे कई जवान वीरगति को प्राप्त हुए थे तब इन चीन समर्थक वामपंथी दलों ने अपने बयान में कहीं भी चीन की निंदा नहीं की थी। 50 के दशक में तत्कालीन पीएम जवाहरलाल नेहरू जब चीन के साथ नजदीकियाँ बढ़ा रहे थे, तब कॉन्ग्रेस में भी उनका विरोध हुआ। लेकिन, चीन ने तब CPI से अपील की थी कि वो नेहरू का साथ दे।

1959 में CPI ने तिब्बत पर चीन के आक्रमण का समर्थन किया था और कहा था कि तिब्बत को चीन मध्यकालीन अंधकार से निकाल रहा है। तब वामपंथी पार्टियों ने तिब्बत के विद्रोह के पीछे ‘भारतीय प्रतिक्रियावादियों और पश्चिमी साम्राज्यवादियों’ का हाथ बताया था। चीन सीमा पर खड़ा था और CPI उसे भारत की सीमा मान भी नहीं रही थी। कोलकाता और पंजाब में चीन समर्थक वामपंथी खासे सक्रिय थे।

आज कन्हैया कुमार को सबसे पहले अपनी पार्टी से पूछना होगा कि सेना में उनके परिजनों के होने की बात तो दूर, वामदलों के कितने नेताओं ने भारतीय सेना का समर्थन किया है? कन्हैया कुमार को सवाल खुद से पूछना होगा कि JNU में जब देशविरोधी नारे लगे थे तो उसके बाद आरोपों की सूई घूम-फिर कर उन तक क्यों पहुँची थी? अर्बन नक्सलियों के समर्थक खुद को जंगली नक्सलियों का विरोधी बताने के हक़दार नहीं।

अंत में ये याद दिलाना ज़रूरी है कि शाहीन बाग़ और किसान आंदोलन के दौरान भीमा-कोरेगाँव में खून बहाने वाले नक्सलियों की रिहाई की माँग की गई थी। मार्च 2021 में ऐसे ही एक नक्सली वरवरा राव स्वास्थ्य कारणों के आधार पर 6 महीने की जमानत लेने में कामयाब रहा। उस पर माओवादियों के साथ मिल कर हमले की साजिश रखने का आरोप है। मार्च में वरवरा राव छूटा। अप्रैल में 22 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए।

छत्तीसगढ़ में काफी प्लानिंग के बाद करीब 400 नक्सलियों ने सुरक्षा बलों पर हमला किया था। इस माओवादी हमले का नेतृत्व प्रतिबंधित संगठन के ‘बटालियन नंबर 1’ का कुख्यात कमांडर माडवी हिडमा कर रहा था, जिसकी तलाश पुलिस को कई वर्षों से है। जवान जब जोनगुडा, जीरागाँव और टेकलगुड़ुम से अपने कैम्प लौट रहा था, तभी ये हमला हुआ। नक्सली ये तीनों गाँव खाली करा चुके थे।

गोकशी के वारंटी को पकड़ने गई पुलिस पर पथराव, 6 घायल-पेड़ों की आड़ लेकर बचाई जान

उत्तर प्रदेश में इटावा के विल्लोचियान मोहल्ले में वारंटी को गिरफ्तार करने गई पुलिस टीम पर जानलेवा हमला किया गया। आरोपित अनीस उर्फ साजन के साथियों द्वारा किए गए पथराव में 6 पुलिसवाले बुरी तरह से घायल हो गए। इनमें एक महिला पुलिसकर्मी भी है। पुलिसवालों ने पेड़ों की आड़ लेकर खुद की जान बचाई।

पथराव में महिला सिपाही पूजा तिवारी, सिपाही सलमान, गजराज, अंकित, राजेश, जगन बुरी तरह से घायल हुए हैं। सभी का अस्पताल में इलाज चल रहा है। इस बात की जानकारी जसवंतनगर कोतवाली प्रभारी नवरत्न गौतम ने दी है।

वहीं, साथियों का कवर लेकर आरोपित घटनास्थल से रफूचक्कर हो गया। उसके पाँच साथियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। मथुरा केदोता छाता मोहल्ला निवासी वकील, फक्कड़पुरा निवासी इजहार, शोएब, कसाई मोहल्ला के रहने वाले शाजिद और कटरा विल्लोचियान के रहने वाले अफीस को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इन सभी पर सरकारी काम में बाधा डालने, बलवा समेत कई धाराओं में केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने बताया कि आरोपी बीते 2 महीने से गोकशी के मामले में फरार चल रहा था।

गोकशी में क्या है सजा का प्रावधान

गोकशी के मामले में हर राज्य में अलग-अलग नियम हैं। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राज्य में गोहत्या के कानून को सख्त बनाने के लिए “उत्तर प्रदेश गोवध निवारण (संशोधन) अध्यादेश-2020” को पास किया था। इसके तहत राज्य में गोहत्या पर 10 साल की सजा का प्रावधान किया गया है। गोवंश को शारीरिक तौर पर नुकसान पहुँचाने पर 1 से 7 साल की सजा होगी। इसके अलावा गोकशी और गायों की तस्करी से जुड़े अपराधियों के फोटो भी सार्वजनिक रूप से चस्पा किए जाएँगे।

‘CM योगी आदित्यनाथ ने पत्रकार को दी गाली’ – AAP और सपा नेता जिस वीडियो को कर रहे वायरल, उसका फैक्ट चेक

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल किया जा रहा है। वायरल वीडियो में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आपत्तिजनक शब्द बोल रहे हैं।

इस वीडियो को सोशल मीडिया के आम यूजर के अलावा विपक्षी पार्टियाँ भी शेयर कर रही हैं। आम आदमी पार्टी से लेकर समाजवादी पार्टी के नेता तक इसे वायरल करने में लगे हुए हैं।

कुछ यूजर सीएम योगी का 26 सेकेंड का वीडियो तो कुछ 8 सेकेंड का वीडियो शेयर करके उनकी छवि को नुकसान पहुँचा रहे हैं। इन वीडियो के आखिरी 3 सेकेंड में ही आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया है।

वायरल हुए वीडियो की जाँच में जबकि यह सामने आया कि सीएम योगी के ओरिजिनल वीडियो के साथ छेड़छाड़ की गई है। आखिरी के 3 सेकेंड के वीडियो को एडिट किया गया है।

वीडियो से संबंधित जाँच और उसे एडिटेड पाए जाने की बात जब मीडिया ने रिपोर्ट की, तो उसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी ने रिट्वीट किया है।

देश के 60% कोरोना संक्रमित सिर्फ महाराष्ट्र में, मजदूरों का पलायन फिर शुरू: उद्धव सरकार ने की लॉकडाउन की घोषणा

महाराष्ट्र में कोरोना की रफ़्तार नियंत्रण से बाहर जाने के कारण एक बार फिर से लॉकडाउन लगाने की घोषणा हुई है। यहाँ तक कि नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र फड़नवीस ने भी इस पर उद्धव ठाकरे सरकार का समर्थन करते हुए गरीबों के लिए आर्थिक पैकेज की माँग की है। वहीं इसके साथ ही मजदूरों का पलायन भी फिर से शुरू हो गया है। प्रवासी मजदूरों को डर है कि फिर से लॉकडाउन लगने के कारण वो वहाँ फँस जाएँगे।

कोरोना की पहली लहर ख़त्म होने के बाद ये सभी मजदूर वापस कमाने के लिए बड़े शहरों की तरफ निकल गए थे, लेकिन अब वो फिर से पलायन करने लगे हैं। मुंबई में 30 लाख प्रवासी कामगार रहते हैं। शहर में रविवार (अप्रैल 4, 2021) की रात से नाइट कर्फ्यू लगा दिया गया है। फरवरी से अब तक कोरोना मरीजों की संख्या 400% बढ़ी है। इस सप्ताह के अंत तक सरकार राज्य में और सख्ती बढ़ा सकती है।

पूरे भारत में प्रवासियों की संख्या 10 करोड़ से भी अधिक बताई जाती है, जो दूसरे राज्यों में जाकर काम करते हैं और अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। पिछले साल इनके घर लौटने के लिए सरकार ने स्पेशल ट्रेनों की व्यवस्था की थी। सभी को मुफ्त ट्रांसपोर्ट मुहैया कराए गए थे। सड़क पर लगने वाले स्टॉल, कल-कारखाने और निर्माण कार्य रुक गए थे। यूपी के कुछ शहरों में अगले कुछ दिनों तक ट्रेनों की बुकिंग भी फुल हो चुकी है।

अब बिहार, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के लिए ट्रेन पकड़ने के लिए रेलवे स्‍टेशनों पर लोगों की काफी भीड़ देखी जा रही है। मजदूरों में यूपी-बिहार के ही सबसे ज्यादा हैं। कइयों को तो रोजगार देने वालों ने ही जाने को कह दिया है। खासकर रेस्टॉरेंट्स को काम करने वाले लौट रहे हैं। यूपी के मजदूरों का कहना है कि उनके राज्य में स्थिति बेहतर है, इसीलिए वो लौट रहे हैं। कंस्ट्रक्शन कार्य में लगे मजदूर भी लौट रहे हैं।

महाराष्ट्र में कोरोना की स्थिति भयावह होती जा रही है। पूरे भारत में सक्रिय कोरोना मामलों की संख्या 7.38 लाख पहुँच गई है, जिसमें से 4.3 लाख अकेले महाराष्ट्र से हैं। देश में कुल सक्रिय मामलों के 58.27% महाराष्ट्र में ही हैं। पिछले 1 दिन में देश में 1 लाख से भी अधिक नए कोरोना मरीज सामने आए, जिनमें से 11,000 अकेले मुंबई के थे। अब तक कुल मरने वालों में से भी 33% अकेले महाराष्ट्र से हैं।

देश में कोरोना ने अब तक 1,65,138 लोगों की जान ली है, जिसमें से 55,878 मरीजों की मौत अकेले महाराष्ट्र में हुई। महाराष्ट्र में कोरोना से जितने लोग मरे हैं, उसका एक चौथाई भी किसी अन्य राज्य में नहीं मरे। देश में पिछले 1 दिन में 1.03 लाख नए मामले सामने आए, जिसमें से 57,000 अकेले महाराष्ट्र से आए। इसमें से 12,472 पुणे से हैं। ठाणे, नागपुर और नासिक की स्थिति भी खराब होती जा रही है।

महाराष्ट्र में शुक्रवार से वीकेंड लॉकडाउन का ऐलान भी किया गया है। मॉल्स, रेस्टॉरेंट्स और यात्राओं को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। उद्धव ठाकरे ने कैबिनेट बैठक में ये फैसला लिया। रात 8 बजे से सुबह 7 बजे तक कर्फ्यू अब भी जारी है। इस वीकेंड पर बाहर निकलने पर भी पाबंदी होगी। पार्क, प्लेग्राउंड और सिनेमा हॉल बंद रहेंगे। सरकारी दफ्तरों में 50% ऑक्युपेंसी रहेगी और प्राइवेट कंपनियों को ‘वर्क फ्रॉम होम’ के लिए कर्मचारियों को सुविधाएँ मुहैया कराने को कहा गया है।

हैकर्स ने लीक किया मार्क जुकरबर्ग का फोन नंबर, 53 करोड़ Facebook यूजर्स का डेटा खरीददारी के लिए उपलब्ध

फेसबुक पर यूजर्स का व्यक्तिगत डेटा लीक करने या फिर उनका इस्तेमाल कारोबारी हितों के लिए किए जाने पर चर्चा तो कई महीनों से चल रही है, लेकिन अब कंपनी के CEO मार्क जुकरबर्ग का ही फोन नंबर लीक होने के बाद लोग पूछ रहे हैं कि जब कंपनी के संस्थापक का ही डेटा सुरक्षित नहीं है तो फिर आम यूजर्स का क्या? एक लोकल हैकिंग फोरम ने फेसबुक पर कई लोगों के पर्सनल डेटा को लीक किया है।

हैकिंग फोरम ने ऑनलाइन जिन लोगों के डेटा लीक किया है, उसमें ‘फेसबुक इंक’ के संस्थापक और CEO मार्क जुकरबर्ग का नाम भी शामिल है। उनका नाम, लोकेशन, शादी से जुड़े डिटेल्स, जन्मदिन और फेसबुक यूजर आईडी सहित कई डेटा लीक हो गए। उन्हें मिला कर कुल 53 करोड़ फेसबुक यूजर्स का डेटा लीक हुआ है। इनमें 106 देशों के लोग शामिल हैं। फेसबुक के सह-संस्थापकों क्रिस ह्यूज और डस्टिन मॉस्कोविट्ज के डेटा भी सुरक्षित नहीं बचे।

अमेरिका के 3.2 करोड़, यूके के 1.1 करोड़ और भारत के 60 लाख लोगों के डेटा लीक किए गए हैं। फेसबुक आईडी, नाम, लोकेशन, बायो और ईमेल एड्रेस को ऑनलाइन डाल दिया गया है। इजरायली साइबर क्राइम फर्म ‘हडसन रॉक’ के सह-संस्थापक अलोन गल ने इसका खुलासा करते हुए बताया कि ये डेटा 2 साल पुराने हो सकते हैं। हैकर्स के बीच फेसबुक से जुड़े फोन नंबर्स पहले से ही सर्कुलेट हो रहे थे।

आशंका जताई गई कि ये वही डेटाबेस हो सकता है। जबकि फेसबुक के अधिकारियों का कहना है कि जिस तकनीकी खामी की वजह से ये डेटा लीक हुए थे, उसे कंपनी ने 2019 में ही दूर कर लिया था। एक बोट उसे बेच रहा था। इसके बदले कुछ यूरो माँगे जा रहे थे। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि लोगों को फेसबुक पर ‘सोशल इंजीनियरिंग अटैक्स’ से बच कर रहना चाहिए और नंबर वगैरह प्राइवेट कर के रखना चाहिए।