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कोरोना मरीजों को भर्ती करने से किया मना तो दर्ज होगा केस: CM योगी ने अस्पतालों को दिया आदेश

उत्तर प्रदेश में पिछले 24 घंटे में 27 हजार से ज्यादा कोरोना पॉजिटिव मामले आने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अस्पतालों के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। सीएम योगी ने आदेश दिया है कि जो कोई भी मरीजों को भर्ती करने में ढिलाई करता दिखा, उस पर केस दर्ज होगा।

सीएम योगी के इस आदेश के बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सभी कमिश्नर, डीएम और सीएमओ को आदेश जारी कर दिए हैं। सबको बताया जा रहा है कि डीएम और सीएमओ स्तर से भेजे जा रहे कोरोना संक्रमितों को अस्पताल में भर्ती करने में लापरवाही करने वालों के खिलाफ नियमानुसार महामारी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर सख्त कार्रवाई होगी।

बता दें कि योगी सरकार ने राज्य की गंभीर स्थिति को देखते हुए कोरोनाकाल में नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भी जुर्माना लगाने के आदेश दिए हैं। इसके तहत मास्क (Mask) नहीं लगाने पर पहली बार 1 हजार का जुर्माना और दूसरी बार में 10 हजार का जुर्माना वसूल किया जाएगा।

इसके अलावा यूपी सरकार ने राज्य में स्थिति नियंत्रित करने के लिए कई और दिशा निर्देश दिए हैं। इनके मुताबिक यूपी में सभी शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में रविवार को बंदी रहेगी। आवश्यक सेवाओं को छोड़कर सभी बाज़ार दफ़्तर बंद होंगे। इस दिन व्यापक सेनेटाइजेशन अभियान चलेगा।

उल्लेखनीय है कि हाल में योगी सरकार ने मेडिकल कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में ऑक्सीजन प्लांट की स्थापना को लेकर जोर दिया था, जिसके बाद कई जगह ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट की स्थापना हुई, जबकि कइयों में इसके लिए काम अब भी जारी है।

UP में कोरोना की हालत

उत्तर प्रदेश में पिछले 24 घंटे में 27, 426 नए कोरोना मरीजों की पहचान की गई है। वहीं बीते 24 घंटे में 4 हजार 222 लोग पूरी तरह से ठीक होकर घर लौटे हैं और 104 मरीजों की कोरोना से मौत हो चुकी है।

महामारी के बढ़ते कहर में भी टिकैत नहीं करना चाहते धरना खत्म, प्रदर्शनस्थल को बताया- अपना गाँव

कोरोना के बढ़ते प्रभाव ने पूरे देश में पाबंदियाँ बढ़ा दी हैं। हर कोई कोशिश कर रहा है कि भीड़ भाड़ वाले इलाके में जाने से बचे। मगर, किसान नेता राकेश टिकैत ऐसी गंभीर स्थिति में भी अपनी हरकत से बाज नहीं आ रहे। उनका कहना है कि जैसे वह अपने गाँव में रहेंगे वैसे ही यूपी गेट, सिंघु बॉर्डर और टीकरी बॉर्डर पर भी रहेंगे। उन्होंने कहा है कि आंदोलन खत्म नहीं होगा, ये चलता रहेगा।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, राकेश टिकैत ने कहा कि यूपी गेट, सिंघु बार्डर और टीकरी बार्डर पर 5 माह से किसान डटे हैं। एक तरह से यहाँ किसानों ने अपना गाँव बसा लिया है। लॉकडाउन लगेगा, तो क्या गाँव में लोग नहीं रहेंगे। टिकैत ने यह भी कहा कि लाकडाउन लगेगा, तो उसके नियमों का पालन किया जाएगा। गाँवों से किसान यहाँ नहीं आएँगे। मगर जो यहाँ पर है वह यहीं पर रहेंगे। आंदोलन चलता रहेगा।

टिकैत ने यह भी बताया कि वह कोरोना का पहला डोज लगवा चुके हैं। बाकी किसानों को टीका लगवाने के लिए आसपास के निजी अस्पतालों और प्रशासन के बीच बातचीत हो रही है। सभी को टीका लगवाया जाएगा।

यहाँ बता दें कि यूपी गेट पर नए कृषि कानून के विरोध में किसान आंदोलन 28 नवंबर से हो रहा है। यही वजह है कि दिल्ली जाने कई वाली लेन बंद है। कई वाहनों को इसके कारण दिक्कत का सामना भी करना पड़ रहा है।  लेकिन टिकैत व अन्य प्रदर्शनकारियों को आमजन की समस्या से कोई खासा फर्क नहीं पड़ रहा। वह अपनी मनमानी पर अड़े हुए हैं।

वहीं दिल्ली, यूपी, हरियाणा सरकार ने कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए नाइट कर्फ्यू और वीकेंड कर्फ्यू जैसे कड़े ऐलान किए हैं। यूपी सरकार ने तो सख्ती बढ़ाते हुए जुर्माने की रकम भी बढ़ा दी है। यूपी सरकार ने पहली बार नियम उल्लंघन पर पकड़े जाने पर 1 हजार का जुर्माना तय किया है, वहीं दूसरी बार पकड़े जाने पर 10 हजार रुपए का जुर्माना निर्धारित किया है।

इधर दिल्ली सरकार ने उपराज्यपाल के साथ बैठक करने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि दिल्ली की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए शुक्रवार रात 10 बजे से सोमवार सुबह 6 बजे तक के लिए वीकेंड कर्फ्यू लगाया जाएगा। इस दौरान जरूरी सेवाओं से जुड़े लोगों और शादी-विवाह जैसे कार्यक्रमों के लिए लोगों को पास दिए जाएँगे।

फ्रांस में ऐतिहासिक कानून पारित: 15 साल से कम उम्र की बच्ची के साथ रेप केस में होगी 20 साल की सजा

फ्रांसीसी संसद में गुरुवार को ऐतिहासिक कानून पारित किया गया, जिसमें 15 साल से कम उम्र की बच्ची के साथ बलात्कार और दंडनीय अपराध के रूप में 20 साल की सजा का प्रावधान है। पहले फ्रांस में बलात्कार तब ही माना जाता था अगर दूसरा व्यक्ति संबंध बनाने के लिए अपनी सहमति नहीं दे। ऐसे में अदालत का कहना था कि इस मामले में यह साबित नहीं किया जा सकता कि उस व्यक्ति ने नाबालिग के साथ जबरदस्ती की है। वहाँ अभियोजन पक्ष को बलात्कार की सजा दिलाने के लिए पहले सेक्स को असहमति के रूप में साबित करने की आवश्यकता थी।

जस्टिस मिनिस्टर एरिक डुपोंड-मोरेती ने नेशनल असेंबली को बताया, ”हमारे बच्चों और समाज के लिए यह एक ऐतिहासिक कानून है। इससे अब कोई भी वयस्क आरोपित 15 साल से कम उम्र की नाबालिग की सहमति का दावा नहीं कर सकेगा।”

असेंबली ने ट्विटर पर कहा कि बिल के पक्ष में वोट इसके अंतिम पड़ाव पर एकमत के लिए था। हालाँकि, कुछ कानूनविदों को यह चिंता थी कि सहमति से कम उम्र का सेक्स स्वतः ही बलात्कार माना होता है। एक नाबालिग की सहमति से किया गया सेक्स भी व्यस्क को अपराधी बना सकता है।

वहीं, एक “रोमियो और जूलियट” खंड एक नाबालिग और उससे 5 साल बड़े व्यक्ति के बीच यौन संबंधों की अनुमति देता है। ये यौन उत्पीड़न के मामलों में लागू नहीं होगा। लेकिन ये कानून 18 साल से कम उम्र की नाबालिग के साथ बलात्कार को भी दुष्कर्म मानता है।

10 अक्तूबर 2017 को न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित एक साक्षात्कार में 13 महिलाओं ने हॉलीवुड प्रोड्यूसर हार्वी वाइंस्टीन पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। इसके बाद हॉलीवुड सेलेब्रिटी ग्यानेथ पाल्ट्रो, एमा वाटसन, एंजलीना जोली, सलमा हायेक, एशले जुड, उमा थुरमैन और एशिया अर्गेंटो समेत 80 से अधिक महिलाओं ने वाइंस्टीन पर सार्वजनिक रूप से यौन दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया था। इसके बाद 25 मई 2018 में यूएस पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था।

फ्रांस में यह एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। इसके बाद एक फ्रांसीसी लेखक ने पीडोफिलिया के बारे में खुलकर लिखा था। यह आमतौर पर वयस्कों या बड़े उम्र के किशारों (16 या उससे अधिक उम्र) में मानसिक विकार के रूप में परिभाषित किया जाता है। मनोविज्ञान या मेडिकल साइंस की दुनिया में इस बीमारी को पीडोफिलिया कहते हैं

गौरतलब है कि फ्रांस में दो ऐसे मामले सामने आए थे, जिनके कारण देश में बलात्कार की परिभाषा और उससे जुड़े कानून पर बहस छिड़ गई थी। एक मामले में 30 वर्षीय पुरुष के 11 साल की बच्ची के साथ संबंध बनाने की बात सामने आई। मामला अदालत में पहुँचा लेकिन कानून में कमी के कारण नवंबर 2017 को इस व्यक्ति को बरी कर दिया गया था। इसी तरह के एक अन्य मामले ने फरवरी 2018 में एक 28 वर्षीय व्यक्ति ने 11 साल की बच्ची के साथ संबंध बनाए थे।

‘कोरोना+ होने के बाद भी BJP नेता हुए कुंभ में शामिल’: TLI ने पहले फैलाया झूठ, पकड़े जाने पर माँगी माफी

उत्तर प्रदेश मंत्री सुनील भराला को लेकर झूठी खबर चलाने के कारण द लॉजिकल इंडियन को आज (अप्रैल 16, 2021) माफी माँगनी पड़ी। अपनी रिपोर्ट में द लॉजिकल इंडियन ने दावा किया था कि कोरोना पॉजिटिव होने के बावजूद सुनील भराला उत्तराखंड के कुंभ मेले में शामिल हुए। हालाँकि, अब अपने बयान में TLI ने स्वीकार किया कि उन्होंने तथ्यों को गलत प्रकाशित किया था।

अपने बयान में TLI ने कहा, “लॉजिकल इंडियन ने पहले बताया था कि उत्तर प्रदेश के भाजपा नेता सुनील भराला COVID-19 पॉजिटिव हैं और फिर भी अभी उन्होंने हरिद्वार के कुंभ मेले में भाग लिया। हालाँकि, NDTV के साथ इंटरव्यू में नेता ने बताया है कि उन्होंने इस कार्यक्रम में भाग लिया और बाद में वह कोरोना पॉजिटिव हुए।”

The Logical Indian apologises
द लॉजिकल इंडियन ने माँगी माफी

आगे TLI ने लिखा, “हम स्वीकार करना चाहते हैं कि हमने अनजाने में तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया। लॉजिकल इंडियन अपने गलत बयान के लिए माफी माँगता है जिसने दावा किया कि सुनील भराला कोरोना पॉजिटिव होने के बाद भी कुंभ में गए।”

बता दें कि अपने फर्जी पोस्ट में TLI ने सुनील भराला को कोट करते हुए कहा था, “मैं कोविड पॉजिटिव हूँ। मैं फिर भी कुंभ में गया। धर्म कोरोना दिशानिर्देशों से ऊपर है।” अपनी रिपोर्ट में टीएलआई ने यह भी बताया कि कुंभ मेला कोविड हॉट्सपॉट बन चुका है।

इसके बाद यह पोस्ट सोशल मीडिया पर हर जगह वायरल होने लगा। लेकिन तभी कुछ सक्रिय यूजर्स ने TLI के झूठ को पकड़ा और आखिरकार इस केस में द लॉजिकल इंडियन को माफी माँगनी पड़ी।

कोरोना का इस्तेमाल कर के राम मंदिर पर साधा निशाना: AAP की IT सेल वाली ने करवा ली अपने ही नेता केजरीवाल की बेइज्जती

सोशल मीडिया पर आम आदमी पार्टी (AAP) की राष्ट्रीय सोशल मीडिया टीम की सदस्य अंकिता शाह ने कोरोना वायरस की बढ़ती दूसरी लहर का फायदा उठा कर यूँ तो राम मंदिर पर निशाना साधना चाहा, लेकिन लोगों ने उनके ही नेता की असलियत उनके सामने रख दी। मंदिर को लेकर भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करने वाली अंकिता शाह को लोगों ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की सच्चाई बताई।

अंकिता ने ट्विटर पर लिखा, “कहाँ है वो बेवकूफ जो राम मंदिर का चंदा जमा कर रहे थे, काश सरकारों से मंदिर की जगह हॉस्पिटल माँगे होते तो आज ये दशा नहीं होती! Bloody religious morons…”। उन्होंने राम मंदिर के लिए चंदा इकट्ठा करने वालों को गाली दी। लेकिन, उन्हें एक ट्विटर हैंडल ने याद दिलाया कि कैसे सीएम केजरीवाल ने दिल्ली के सभी मस्जिदों के इमामों का वेतन बढ़ाया था।

लोगों ने पूछा कि अगर मुस्लिमों के लिए सरकार कुछ करे तो ठीक और हिन्दू खुद रुपए जमा करके धर्म के लिए कुछ करें तो वो बुरा कैसे? ‘अद्वितीय’ नामक हैंडल ने लिखा, “कहाँ है ये बेवकूफ जो टैक्स पेयर की मेहनत की कमाई से मस्जिदों के मौलानाओं को तनख्वाह बाँट रहा था। काश ये पैसा वोट बैंक पॉलिटिक्स पर लुटाने की जगह अगर हॉस्पिटल्स में खर्च किया गया होता तो आज दिल्ली की ये दशा नहीं होती।”

याद हो कि जनवरी 2019 में दिल्ली के मस्ज़िदों के इमामों के वेतन को ₹10,000 से बढ़ा कर ₹18,000 करने का ऐलान किया गया था। मस्जिदों में अज़ान पढ़ने वाले मुअज़्ज़िनों के वेतन में भी बढ़ोतरी कर इसे ₹9,000 से ₹16,000 कर दिया गया था। दिल्ली में ऐसे 1,500 से भी अधिक मस्ज़िद हैं जो बोर्ड के अंतर्गत नहीं आते हैं, उनके कर्मचारियों को भी वेतन की घोषणा हुई थी। उनके इमामों को ₹14,000 और मुअज़्ज़िनों को ₹12,000 दिए जाने का ऐलान हुआ था। 

‘स्नेहा’ नामक ट्विटर यूजर ने वो खबर निकाली, जिसमें सीएम केजरीवाल ने लोगों को मुफ्त में राम मंदिर का दर्शन कराने की घोषणा की थी। उन्होंने खुद को हनुमान भक्त भी बताया था। राम मंदिर के भूमिपूजन के दौरान उन्होंने देशवासियों को बधाई दी थी। अगर मंदिर गलत है तो केजरीवाल ने ये सब क्यों किया? साथ ही लोगों ने ये भी सवाल दागा कि दिल्ली की AAP सरकार ने कितने अस्पताल बनवाए हैं?

फिर लोग एक RTI से हुए खुलासों को लेकर आए। इससे पता चला था कि 2015-19 में दिल्ली सरकार ने एक भी नया अस्पताल या फ्लाईओवर नहीं बनवाया। सीएम केजरीवाल ने दावा किया था कि पिछले साढ़े चार साल में उनकी सरकार ने 23 फ्लाईओवर बनाए हैं, लेकिन वास्तविकता इसके उलट है कि दिल्ली में AAP सरकार ने वर्षों से केवल विज्ञापन ही दिया है। इस खुलासे के बाद भी केजरीवाल सरकार घिरी थी।

वैक्सीन के कच्चे माल के निर्यात पर अमेरिका ने लगाया बैन, बायडेन को पूनावाला ने कहा – ‘अगर एकजुट हैं तो हटाइए’

सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अदार पूनावाला ने अमेरिका के राष्ट्रपति जो बायडेन से वैक्सीन के लिए आवश्यक कच्चे माल के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को हटाने का अनुरोध किया है। इससे पहले पूनावाला ने कहा था कि अमेरिका और यूरोपीय देशों के द्वारा वैक्सीन निर्माण के लिए आवश्यक कच्चे माल के निर्यात पर लगे प्रतिबंध के कारण देश में वैक्सीन उत्पादन प्रभावित हो रहा है।

ट्विटर पर अमेरिकी राष्ट्रपति को टैग करते हुए एसआईआई के सीईओ अदार पूनावाला ने कहा, “यदि हम इस वायरस को हराने के लिए वाकई एकजुट हैं तो अमेरिका के बाहर स्थित वैक्सीन उत्पादकों की ओर से मैं अमेरिकी राष्ट्रपति से यह अनुरोध करता हूँ कि वैक्सीन के लिए आवश्यक कच्चे माल के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को हटाया जाए, जिससे वैक्सीन उत्पादन को बढ़ाया जा सके।“ उन्होंने ट्वीट में यह भी लिखा कि अमेरिकी राष्ट्रपति के प्रशासन के पास पूरी जानकारी उपलब्ध कराई गई है।  

ज्ञात हो कि अमेरिका और यूरोपीय देशों ने वैक्सीन निर्माण के लिए आवश्यक कच्चे माल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है। इस कच्चे माल में फिल्टर, बैग और कुछ गुणवर्धक रसायन (Adjuvants) शामिल हैं, जो वैक्सीन निर्माण के लिए सबसे जरूरी वस्तुओं में से हैं। Adjuvant, शरीर में एंटी-बॉडी के निर्माण में सहायता करता है, जिससे शरीर का इम्यून सिस्टम मजबूत होता है और उसे एंटीजेन से लड़ने में सहायता मिलती है।

इंडिया टुडे को दिए गए एक इंटरव्यू में पूनावाला ने कहा था कि यदि संभव होता तो वो अमेरिका जाकर वहाँ प्रदर्शन करते और कहते कि अमेरिका के द्वारा कच्चे माल के निर्यात को सीमित करने अथवा रोकने से भारत समेत दुनिया के कई अन्य वैक्सीन निर्माताओं को समस्या का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और यूरोपीय देशों के इस निर्णय से देश में वैक्सीन निर्माण प्रभावित हो रहा है।

पूनावाला ने यह भी कहा कि एसआईआई चीन से कच्चे माल का आयात नहीं करना चाहता है। हालाँकि उन्होंने बताया कि कच्चे माल की यह कमी दीर्घकाल तक नहीं रहेगी क्योंकि जल्दी ही वैक्सीन के लिए आवश्यक कच्चे माल की सप्लाई के लिए नए सप्लायर ढूँढ लिए जाएँगे।

पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया विश्व की सबसे बड़ी वैक्सीन निर्माता है। वर्तमान में यह ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और AstraZeneca की कोविड-19 वैक्सीन का निर्माण कर रही है, जो भारत में कोविशील्ड (Covishield) के नाम से उपलब्ध है। भारत में कोविशील्ड के अतिरिक्त भारत बायोटेक की कोवैक्सीन (Covaxin) नाम की स्वदेशी वैक्सीन को अनुमति दी गई है। फिलहाल भारत में 45 वर्ष से अधिक आयु के सभी लोगों को वैक्सीन लगाई जा रही है।

एक ही लड़की से 4 बार शादी, 3 बार तलाक… वो भी सिर्फ 37 दिन में: छुट्टी नहीं दी तो कोर्ट ने लगाया जुर्माना

नौकरी से छुट्टी लेने के लिए आपने अक्सर लोगों को नए-नए बहाने बनाते सुना होगा, लेकिन क्या कभी आपने ये सुना कि कोई आदमी छुट्टी लेने के लिए बार-बार शादी करे? शायद नहीं। मगर, ताइवान में एक आदमी है, जिसने 37 दिन के अंदर एक ही महिला से 4 बार शादी की और उसी को 3 बार तलाक भी दिया।

ताइवान से आया ये अजीबोगरीब मामला ताइपेई क्षेत्र के एक बैंक का है, जहाँ एक क्लर्क ने पहली बार शादी के लिए आवेदन किया तो उसे सैलरी के साथ आठ दिन की छुट्टियाँ मिल गईं। लेकिन जब 6 अप्रैल 2020 को छुट्टी का समय खत्म हुआ तो उसने दोबारा पत्नी को तलाक दे दिया और अगले ही दिन शादी करके फिर छुट्टियाँ माँग लीं। क्लर्क ने ऐसी हरकत करके सोचा कि शादी करके छुट्टी माँगना उसका कानूनी हक है। 

हद तब हुई, जब बैंक समझ गया कि आखिर उसका कर्मचारी क्या कर रहा है और अगली बार क्लर्क के छुट्टी माँगने पर उन्होंने उसे इनकार कर दिया और वैतनिक अवकाश देने से मना कर दिया। कलर्क ने 32 दिन के वैतनिक अवकाश के लिए ये हरकत बार-बार की। उसने यही शादी और तलाक वाले क्रम को दोहराया, जब बैंक ने फिर भी छुट्टियाँ देने से मना किया तो नाराज क्लर्क श्रम ब्यूरो में शिकायत दर्ज करवाने पहुँच गया और लेबर लीव कानून के उल्लंघन का आरोप लगाया।

दरअसल, उसका कहना था कि ताइवान के कानून के मुताबिक, एक कर्मचारी विवाह के लिए 8 दिन का वैतनिक अवकाश पा सकता है। इस हिसाब से उसे 32 छुट्टियाँ मिलनी चाहिए। दिलचस्प बात ये हुई कि ताइवान के श्रम ब्यूरो ने सारी बात जानने के बाद मामले में पड़ताल की और निष्कर्ष निकाला कि इसमें बैंक ही दोषी है। नतीजन, अक्टूबर 2020 में बैंक पर जुर्माना लगाया गया।

अपनी अपील में बैंक ने कहा भी कि कर्मचारी ने शादी की छुट्टी के लिए वैध तरीका नहीं अपनाया, लेकिन फिर भी कर्मचारी पर कोई फर्क नहीं पड़ा। अभी हाल में 10 अप्रैल को लेबर ब्यूरो ने कहा कि भले ही क्लर्क का व्यवहार अनैतिक था, लेकिन उसने कानून नहीं तोड़ा जबकि बैंक ने लेबर लीव नियमों के अनुच्छेद-2 का उल्लंघन किया।

बता दें कि ताइवान का यह अजीबोगरीब केस सोशल मीडिया पर हर जगह शेयर हो रहा है। लोग यकीन नहीं कर पा रहे कि सारी सच्चाई पता होने के बावजूद बैंक के ऊपर एक्शन कैसे लिया जा सकता है। कुछ लोग इस केस को सुन मजाक उड़ाते हुए कह रहे है- “मेन विल बी मेन।”

कन्या भोज कर मंदिर से लौट रही थीं 2 बहनें, रफीक खान ने 8 और 11 साल की दोनों बच्चियों का किया रेप

नवरात्र में हिंदू माता रानी की जयकार करते हैं। लोग कन्याओं का पूजन कर माता से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इसी बीच मध्य प्रदेश के छतरपुर में कन्या भोज के लिए मंदिर गई दो बहनों के साथ बलात्कार करने का मामला सामने आया है। आरोपित मुस्लिम समुदाय का है। यह घटना छतरपुर जिले के प्रकाश बमोरी थाना क्षेत्र की है। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर मामले की जाँच शुरू कर दी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 8 साल और 11 साल की दो बहनें कन्याभोज के लिए मंदिर गई हुई थीं। मंदिर से वापस लौटते वक्त रफीक खान ने इस शर्मनाक घटना को अंजाम दिया। घटना के बाद से स्थानीय लोगों में काफी गुस्सा है।

वहीं घटना की जानकारी मिलते ही छतरपुर एसपी सचिन शर्मा मौके पर पहुँचे। एसडीओपी शशांक जैन ने मामले में जानकारी देते हुए बताया कि फिलहाल आरोपित को राउंडअप कर लिया गया है। पुलिस को डर है कि घटना के चलते माहौल खराब न हो जाए।

गौरतलब है कि यह वीभत्स घटना पहली नहीं है। इससे पहले भी रेप और गैंगरेप के कई मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मासूम बच्चियों को अपनी हवस का शिकार बनाया है।

हाल ही में महाराष्ट्र के लातूर में 7 साल की मासूम बच्ची से कथित तौर पर दुष्कर्म करने के मामले में एक मुस्लिम शख्स को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने रविवार (11 अप्रैल 2021) को इसकी जानकारी दी थी। एक अधिकारी ने बताया कि 6 अप्रैल को अकरम पठान (26 साल) नाम के एक मुस्लिम शख्स ने निलांगा तहसील के शेडोल में स्थित एक दरगाह में इस शर्मनाक घटना को अंजाम दिया था।

‘उस किताब का नाम ले सकते हो जो असल में वायरस है’: जानें कैसे कॉन्ग्रेस के ‘वैक्सीन’ मीम्स ने किया उसका ही छीछालेदर

कोरोना काल में सोशल मीडिया पर मीम का कारोबार बहुत तेजी से बढ़ा है। कुछ लोगों ने अपनी सृजनात्मकता दिखाने के लिए इस तरीके का इस्तेमाल किया तो कुछ ने अपनी कुंठा निकालने के लिए। लेकिन इस बीच कुछ ऐसे भी धूर्त दिखे जिन्होंने अपनी वाहवाही के लिए बिना सोच समझे मीम को सहारा बनाया। कॉन्ग्रेस, उसी सूची में शामिल नामों में से एक है।

अभी हाल में कर्नाटक कॉन्ग्रेस के ट्विटर हैंडल से कुछ ट्वीट किए गए। इसमें एक तरफ वायरस और दूसरी तरफ वैक्सीन दिखा कर पार्टी ने अपनी हिंदूविरोधी, भाजपा विरोधी, आरएसएस विरोधी मानसिकता का खूब प्रदर्शन किया। मगर, ट्रेंड फॉलो करने के चक्कर में पार्टी भूल गई कि जिन मीम को वो शेयर कर रहे हैं उनका कोई अर्थ है भी या नहीं।

उदाहरण के तौर पर सबसे पहले एक ट्वीट देखिए। इसमें कॉन्ग्रेस ने बताना चाहा कि इस देश के लिए सबसे बड़ा वायरस भगवा रंग का RSS है और इसकी वैक्सीन उनकी पार्टी यानी कॉन्ग्रेस है। अब तर्कों पर बात करें, तो ये सब जानते हैं कि कोई भी वैक्सीन किसी वायरस के बाद आती है लेकिन कॉन्ग्रेसियों को इस लॉजिक से क्या? शायद उन्हें यही नहीं मालूम कि आरएसएस की स्थापना 1925 में हुई थी, जबकि कॉन्ग्रेस 1885 से अस्तित्व में है।

इस मूर्खता के लिए कई सोशल मीडिया यूजर्स ने कॉन्ग्रेस को लताड़ा है। कर्नाटक की भाजपा अध्यक्ष ने तथ्य बताते हुए कहा कि कॉन्ग्रेस 1885 में आई और आरएसस 1925 में। आज भी कॉन्ग्रेस को साफ करने के लिए आरएसएस प्रयास ही कर रही है। मगर कुछ संक्रमण ऐसे होते जिन्हें हटाना मुश्किल हैं लेकिन यदि उनका सफाया नहीं हुआ तो देश कभी आगे नहीं बढ़ पाएगा।

इसके बाद एक अन्य ट्वीट इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को दिखाया गया है। नरेंद्र मोदी पर वायरस लिखा है और मनमोहन सिंह पर वैक्सीन। यहाँ ज्ञात हो कि मनमोहन सरकार के 10 साल के कार्यकाल के बाद मोदी सरकार सत्ता में आई। ऐसे में कॉन्ग्रेस के मीम के क्या अर्थ हैं? क्या कभी ऐसा हुआ है कि वैक्सीन के होते हुए वायरस आए। नहीं, क्योंकि वैक्सीन, वायरस के लक्षण देखने के बाद उसी आधार पर निर्मित होती है। यूजर्स ने इस ट्वीट पर भी कॉन्ग्रेस का खूब मजाक उड़ाया है। लोगों ने पूछा है कि वैक्सीन इतनी कमजोर थी क्या कि वायरस दोबारा आ गया।

बता दें कि इन दोनों ट्वीट में जहाँ एक पार्टी और विचारधार के प्रति कॉन्ग्रेस ने अपनी कुंठा निकाली है और खुद को सर्वेसर्वा दिखाया है वहीं इनके द्वारा किया एक ऐसा भी ट्वीट है जिसमें पार्टी ने संविधान को वैक्सीन बताकर हिंदुओं के प्रति नफरत जाहिर की है।

ट्वीट में कॉन्ग्रेस ने मनुस्मृति को वायरस कहा, जिसे बाद में भाजपा कर्नाटक ने भी अपने हैंडल से शेयर किया। इसमें पूछा गया है कि क्या कॉन्ग्रेस में इतना दम है कि वह उस किताब का नाम ले सके जो असल में वायरस है। आखिर डरपोक कॉन्ग्रेस ने यह ट्वीट डिलीट क्यों किया है। 

नरसिंहानंद और वसीम रिजवी का ‘सिर तन से जुदा’ करने वाले पोस्टर लगाने वालों के खिलाफ FIR, AIMIM के लोगों की तलाश

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में 12 अप्रैल, 2021 को असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लिमीन (AIMIM) ने डासना देवी मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती और शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष वसीम रिजवी के खिलाफ ‘सिर तन से जुदा’ का पोस्टर लगाया था। ऑपइंडिया ने इस घटना की विस्तार से रिपोर्ट की थी।

कानपुर नगर की पुलिस ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए आज (16 अप्रैल) ट्विटर पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। पुलिस ने बताया कि 12 अप्रैल 2021 को कानपुर में एक आपत्तिजनक व धार्मिक रूप से भड़काऊ पोस्टर को लगाए जाने के संबंध में उपद्रवियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। उन्होंने आगे कहा कि आईपीसी की धारा 153 ए और 295 ए के तहत मामला दर्ज किया गया है और पुलिस आरोपितों की तलाश कर रही है। कानपुर पुलिस ने आश्वस्त किया कि आरोपितों की पहचान करने के प्रयास किए जा रहे हैं। गिरफ्त में आते ही उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि हाल ही में उत्तर प्रदेश शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष वसीम रिजवी और डासना देवी मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती के खिलाफ AIMIM की तरफ से पोस्टर लगाए गए थे। पोस्टर में दोनों के सिर कलम करते हुए दिखाया गया था। पोस्टर पर लिखा गया था- एक ही सजा, सिर तन से जुदा। धार्मिक रूप से भड़काऊ पोस्टर के अलावा एक अन्य पोस्टर भी कानपुर में देखा गया। इसमें सबसे ऊपर AIMIM कानपुर लिखा है और नीचे एक बच्चा और कुत्ता, रिजवी और नरसिंहानंद के मुँह में पेशाब करते दिखाए गए हैं। हालाँकि, इससे पहले भी कानपुर पुलिस ने सोशल मीडिया पर यह कहते हुए प्रतिक्रिया दी थी कि पोस्टर हटा दिए गए हैं और मामले की जाँच शुरू कर दी गई है।

ज्ञात हो कि 9 अप्रैल को मध्य प्रदेश के बालाघाट में पुलिस ने मुस्लिम समुदाय के 4 लोगों को यति नरसिंहानंद के पोस्टर लगाने के आरोप में गिरफ्तार किया था। इनकी पहचान मातिन अजहरी, शोएब खान, कासिम खान और रजा खान के तौर पर हुई थी। गिरफ्तारी का विरोध करते हुए AIMIM के जिला प्रभारी नाजिम खान ने कहा था, “पूरे मुस्लिम समुदाय की भावनाओं को आहत करने वाले के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय, हमारे समुदाय के चार सदस्यों को उनका पोस्टर लगाने के लिए गिरफ्तार किया गया है।”

मालूम हो कि प्रेस क्लब में यति नरसिंहानंद पैगंबर मुहम्मद पर विवादित बयान के बाद से कट्टरपंथियों के निशाने पर आ गए हैं। 9 अप्रैल को बरेली के इस्लामिया ग्राउंड में मुस्लिमों ने इकट्ठा होकर उनके खिलाफ ‘सिर तन से जुदा’ के नारे लगाए थे।

AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी भी यति नरसिंहानंद पर कथित तौर पर पैगंबर की तौहीन करने को लेकर गुस्सा जाहिर कर चुके हैं। ट्विटर पर ओवैसी ने लिखा था कि पैगंबर का अपमान बिलकुल बर्दाश्त नहीं है। उन्होंने पूछा था, “क्‍या धर्मगुरुओं के वेश में छिपे ये अपराधी इस्‍लाम से अपना अप्राकृतिक जुड़ाव खत्‍म कर सकते हैं? आप जो चीज पसंद नहीं करते, उस पर इतना समय क्‍यों खपाते हैं। मुझे यकीन है कि आपके अपने धर्म में भी काफी कुछ होगा जिस पर चर्चा हो सकती है।”

वहीं, इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा यति नरसिंहानंद सरस्वती की हत्या करने के पोस्टर लगाने के बाद से हिंदुओं में व्यापक आक्रोश है। देश के विभिन्न कोनों से आए हिंदू महंत के समर्थन में आवाज बुलंद करने लगे हैं।