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SUV में रखे जिलेटिन की खरीद सचिन वाजे ने की थी, उसी के नाम पर वसूली करता था विनायक शिंदे: NIA जाँच में खुलासा

मुंबई के एंटीलिया केस में हर रोज नए-नए खुलासों ने जाँच एजेंसी एनआईए की नींद उड़ा रखी है। एनआईए की ताजा जाँच में अब सचिन वाजे से जुड़े वसूली का खुलासा हुआ है। एनआईए को मनसुख हिरेन हत्या के आरोपित विनायक शिंदे के घर से एक डायरी मिली है। इस डायरी से जो जानकारी मिली है, वह बेहद चौंकाने वाली हैं।

सचिन वाजे के नाम पर होती थी वसूली

एनआईए के सूत्रों के मुताबिक, डायरी से खुलासा हुआ है कि विनायक शिंदे ठाणे शहर के  बार और पब से प्रोटेक्शन मनी के नाम पर वसूली करता था और यह वसूली सचिन वाजे के नाम पर होती थी। इस डायरी में उन बार और पब का नाम है और उनके नाम के सामने हर महीने की वसूली गई तय राशि है, जो प्रोटेक्शन मनी के तौर पर वसूली जाती थी। उसने तकरीबन 30 बार और क्लब से प्रोटेक्शन मनी के तौर पर वसूली की थी।

मनसुख हिरेन हत्याकांड की साजिश का हिस्सा कैसे बना विनायक?

इन पब और बार में से अधिकतर पब और बार ठाणे शहर और नवी मुंबई के हैं। सचिन वाजे इस वसूली गई रकम में से कुछ हिस्सा विनायक शिंदे को कमीशन के तौर पर देता था। एनआईए सूत्रों के मुताबिक इसी कमीशन की लालच में विनायक शिंदे, सचिन वाज़े की तरफ से रची गई मनसुख हिरेन हत्याकांड की साजिश का हिस्सा बना था। बता दें कि विनायक शिंदे साल 2020 में पेरोल पर बाहर आने के बाद से सचिन वाजे के आदेश पर काम करता था।

इसके अलावा जाँच एजेंसी ने बुधवार (मार्च 31, 2021) को दावा किया कि उद्योगपति मुकेश अंबानी के आवास के निकट एक वाहन में मिली जिलेटिन की छड़ों की खरीद मुंबई पुलिस के निलंबित अधिकारी सचिन वाजे ने की थी। सूत्रों ने बताया कि इस मामले की जाँच कर रही एनआईए ने यह भी पाया कि वाजे ने अपने ड्राइवर के साथ मिलकर अंबानी के आवास के निकट एसयूवी खड़ी की थी।

सूत्र ने बताया कि एसयूवी में रखी गई जिलेटिन की छड़ों की खरीद वाजे ने की थी। एनआईए के पास ऐसा सीसीटीवी फुटेज है, जिसमें घटनास्थल पर वाजे की मौजूदगी दिखी है। उन्होंने बताया कि जाँच के संबंध में एनआईए की टीम मुंबई पुलिस के आयुक्त कार्यालय और आसपास के इलाकों के सीसीटीवी फुटेज जुटा रही है। इससे वाजे की गतिविधियों और अन्य पहलुओं का पता चलेगा।

जाँच एजेंसी ने पाया कि पुलिस प्रमुख कार्यालय के सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर (डीवीआर) के साथ छेड़छाड़ की कुछ कोशिशें हुई लेकिन ज्यादातर फुटेज उपलब्ध हैं। फिलहाल जाँच एजेंसी इस बात की जाँच कर रही है कि आरोपित वाजे ने मुंबई पुलिस आयुक्त कार्यालय और आसपास के इलाके के किसी डीवीआर को नष्ट तो नहीं किया है।

वाजे ने कथित तौर पर पड़ोसी ठाणे के साकेत सोसाइटी के सीसीटीवी फुटेज और डीवीआर को नष्ट करने की कोशिश की। वह यहीं रह रहा था। इसके अलावा उसने नंबर प्लेट को जलाशय में फेंक कर नष्ट करने की कोशिश की। उन्होंने बताया कि एनआईए ने रविवार को एक लैपटॉप, एक प्रिंटर, दो हार्ड डिस्क, दो वाहन नंबर प्लेट, दो डीवीआर और दो सीपीयू को गोताखोरों की मदद से मीठी नदी से बरामद किया। वाजे को एनआईए ने 13 मार्च को गिरफ्तार किया था।

एनआईए 25 फरवरी को अंबानी के घर के बाहर विस्फोटक सामग्री के साथ एसयूवी खड़ी करने और कारोबारी मनसुख हिरेन की मौत के मामले की जाँच कर रही है। हिरेन का शव पाँच मार्च को ठाणे के मुंब्रा कस्बे में एक क्रीक में मिला था।

क्या भारत ने पाकिस्तान के साथ बंद किया था व्यापार, मोदी सरकार दोबारा कर रही बहाल? जानिए सब कुछ

पाकिस्तान में चीनी की बढ़ती कीमतों और संकटों से जूझ रहे कपड़ा उद्योग को बचाने के लिए पाकिस्‍तान की इमरान खान सरकार आज (मार्च 31, 2021) भारत के साथ व्‍यापार की फिर से शुरुआत कर सकती है। दोनों देशों में तनावपूर्ण रिश्तों के बीच यह पाकिस्तान का भारत के साथ संबंधों को सुधारने की दिशा में पहला बड़ा प्रयास हो सकता है। पाकिस्तान को यह निर्णय लेने के लिए इसलिए विवश होना पड़ा है क्योंकि उसकी आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है। ऊपर से कोरोना काल ने उसकी और कमर तोड़ दी है।

पाकिस्तान की आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी ने बुधवार सुबह बैठक किया, जिसमें भारत से चीनी और कॉटन के आयात पर फैसला किया गया। सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान में आर्थिक मामलों से जुड़ी कैबिनेट ने भारत के साथ ट्रेड को मंजूरी दी है। अब पाकिस्तान, भारत से कपास और चीनी का आयात करेगा। इससे पहले अगस्‍त 2019 में जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करने के बाद पाकिस्तान ने भारत के साथ रिश्ते को तोड़ लिया था। पाकिस्तान सरकार चीनी और कॉटन का आयात ऐसे समय पर करने जा रही है जब इन दोनों के लिए पाकिस्तान को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।

भारत पाकिस्तान सहित पड़ोसियों के साथ सामान्य व्यापार संबंधों की इच्छा रखता है

वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने लोकसभा में कहा था कि भारत सामान्य संबंधों की इच्छा रखता है, जिसमें पाकिस्तान सहित सभी देशों के साथ व्यापार शामिल है। बता दें कि पाकिस्तान ने अगस्त 2019 में भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार को एकतरफा निलंबित कर दिया। अगस्त 2019 में पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के लिए विशेष दर्जा समाप्त करने और दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के नरेंद्र मोदी सरकार के कदम के जवाब में भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार को निलंबित करने की घोषणा की थी।

इमरान खान ने पीएम मोदी को लिखा पत्र

इस बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने अपने भारतीय समकक्ष नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिख कर कहा कि जम्मू कश्मीर मुद्दा सहित दोनों देशों के बीच लंबित सभी मुद्दों का समाधान करने को लेकर सार्थक और नतीजे देने वाली वार्ता के लिए अनुकूल माहौल बनाना जरूरी है। खान ने यह पत्र पाकिस्तान दिवस के मौके पर पिछले सप्ताह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उन्हें भेजी गई बधाइयों के जवाब में लिखा।

पीएम मोदी ने अपने पत्र में कहा था कि पाकिस्तान के साथ भारत सौहार्द्रपूर्ण संबंधों की आकांक्षा करता है, लेकिन विश्वास का वातावरण, आतंक और बैर रहित माहौल इसके लिए ‘अनिवार्य’ है। प्रधानमंत्री मोदी के पत्र के जवाब में खान ने उनका शुक्रिया अदा किया और कहा कि पाकिस्तान के लोग भारत सहित सभी पड़ोसी देशों के साथ शांतिपूर्ण सहयोगी संबंध की आकांक्षा रखते हैं। 

आतंक मुक्त माहौल पर खान ने कहा कि शांति तभी संभव है, यदि कश्मीर जैसे सभी लंबित मुद्दों का समाधान हो जाए। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने 29 मार्च को लिखे पत्र में कहा, “हम इस बात से सहमत हैं कि खासतौर पर जम्मू कश्मीर विवाद जैसे भारत और पाकिस्तान के बीच लंबित सभी मुद्दों के समाधान पर दक्षिण एशिया में टिकाऊ शांति एवं स्थिरता निर्भर करती है।”

गौरतलब है कि पिछले दिनों पीएम मोदी ने इमरान खान को पत्र लिख कर दोनों देशों के अच्छे संबंधों की कामना भी की थी। मोदी ने इमरान खान को लिखा, ”पाकिस्तान के राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर मैं पाकिस्तान की आवाम को अपनी शुभकामनाएँ देता हूँ। एक पड़ोसी देश के तौर पर भारत पाकिस्तान के लोगों के साथ सौहार्दपूर्ण रिश्ते की इच्छा रखता है। इसके लिए भरोसा और आतंकवाद एवं आक्रमकता से मुक्त माहौल बेहद जरूरी है।”

बंगाल में ‘खेला’ से ‘The Wire’ को झटका: BJP की दिखी हवा तो जनता को ‘नासमझ’ बता आरफा ने दिखाई ममता

भारत का वामपंथी मीडिया अब उन मुस्लिम वोटरों की तरह हो गया है, जो अपने क्षेत्र में उसी उम्मीदवार को वोट देते हैं जो भाजपा को टक्कर दे रहा हो। वामपंथी मीडिया तो दूर, कविता कृष्णन जैसे वामपंथी नेता भी खुल कर लेफ्ट की बजाए अब ममता बनर्जी की TMC के लिए बैटिंग कर रहे हैं। इसी तरह ‘The Wire’ की आरफा खानम शेरवानी ने पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव के कथित विश्लेषण को लेकर ‘खेला’ करने की कोशिश की, लेकिन उनके ही ग्राउंड रिपोर्टर ने हकीकत उगल दी।

‘The Wire’ ने इस वीडियो में पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के पहले चरण के संपन्न होने के बाद उसका विश्लेषण किया है। आरफा खानमम शेरवानी यूँ तो सोशल मीडिया पर फोटोशॉप्ड तस्वीरों के लिए जानी जाती हैं, लेकिन इस्लामी कट्टरता को आगे बढ़ाने में भी उनका कोई सानी नहीं। वीडियो की शुरुआत में ही वो दावा कर देती हैं कि भाजपा ने अपनी विभाजनकारी नीतियों को आगे रखा है और वो ‘हिंदुत्व’ पर चुनाव लड़ रही है।

वो अलग बात है कि इस दौरान आरफा इस बात का जिक्र करना भूल गईं कि ममता बनर्जी ने चुनाव से पहले फुरफुरा शरीफ दरगाह के लिए 2.6 करोड़ रुपए राज्य के खजाने से दिए थे और उसी दरगाह के मौलाना अब्बास सिद्दीकी की पार्टी को कॉन्ग्रेस-लेफ्ट गठबंधन ने 26 सीटें दे दी हैं। आरफा ने ये भी तर्क दिया कि सत्ता विरोधी लहर का सामना भाजपा को करना पड़ेगा। एक ऐसी पार्टी को, जो पश्चिम बंगाल विधानसभा में मात्र 3 सीटें हैं।

इस वीडियो में आरफा ने बंगाल में ‘The Wire’ के दो पत्रकारों से भी बात की, जो कथित रूप से ग्राउंड रिपोर्टिंग कर रहे हैं। इनमें से एक अजोय आशीर्वाद ने दावा कर डाला कि यहाँ कोई एंटी-इंकम्बेंसी नहीं है और ममता बनर्जी से सब खुश हैं। उन्होंने दावा किया कि सभी लोग ममता बनर्जी की कल्याणकारी योजनाओं की तारीफ कर रहे हैं। बड़ी चालाकी से अजोय ने ये भी कहा कि लोग तारीफ के साथ-साथ परिवर्तन की संभावना भी जता रहे हैं।

उन्होंने स्वीकार किया कि पश्चिम बंगाल में भाजपा के लिए पहले चरण में लोगों का बड़ा झुकाव है। उन्होंने फिर ममता बनर्जी को क्लीनचिट देते हुए तृणमूल के अन्य नेताओं को इसके लिए जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि निचले स्तर के नेता-कार्यकर्ता कट मनी ले रहे हैं और टोलबाजी कर रहे हैं और जिस तरह से ममता ने भतीजे अभिषेक को पार्टी का कंट्रोल दिया है, उससे लोग नाराज़ हैं। बता दें कि भाजपा यही मुद्दे उठती रही हैं।

अजोय ने आरफा खानम शेरवानी से कहा कि पश्चिम बंगाल में इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास हुआ है और उत्तर भारतीय राज्यों के मुकाबले ये आगे है। साथ ही कहा कि ममता सरकार ने स्कूल और अस्पताल बनवाए। बकौल अजोय, लोगों का कहना है कि यहाँ इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी नहीं है। साथ ही लेफ्ट को भी इसका क्रेडिट दिया। लेकिन, उन्होंने कहा कि लोग आय और नौकरी के लिए ममता के काम के बावजूद लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ देख रहे हैं।

प्रोपेगेंडा पोर्टल के ग्राउंड रिपोर्टर की बातें का लब्बोलुआब ये था कि भाजपा पश्चिम बंगाल में हावी हो रही है और लोगों को उसकी बातें पसंद आ रही है। लोगों को पार्टी और प्रधानमंत्री पर भरोसा है। लोग तृणमूल से नाराज़ हैं और सरकार बदलने की बातें कर रहे हैं। बस इस बात का ख्याल रखा गया कि इन सबका क्रेडिट भाजपा और मोदी-शाह को न दिया जाए। जब ‘The Wire’ जैसा संस्थान हार मान ले तो बंगाल की स्थिति का आकलन कर लीजिए।

इसके बाद आरफा ने अपने प्रोपेगेंडा का राग छेड़ना शुरू कर दिया और कहा, “हैरानी की बात ये है कि नौकरियाँ केंद्रीय स्तर लगातार घट रही हैं और भूखमरी की नौबत है। जिनके पास 7 साल पहले नौकरी थी, वो भी अब बेरोजगार हैं। कौन सा भाजपा का ऐसा आर्थिक रिकॉर्ड है?” इस दौरान ये भी खुलासा हुआ कि ‘The Wire’ के पत्रकार रिपोर्टिंग नहीं, भाजपा के खिलाफ नकारात्मक बातें भी कर रहे हैं।

एक तरह से आरफा खानम शेरवानी ने पश्चिम बंगाल की जनता को ही नासमझ करार दिया। भाजपा के पास गुजरात से लेकर उत्तर प्रदेश के उदाहरण हैं, जहाँ की बातें कर के वो बंगाल जैसे राज्यों में अपने काम के बारे में बता सकती है। अजोय ने कहा कि लोग दो मोर्चों से तंग आकर भाजपा की ‘ऊपरी बातों’ पर विश्वास कर रहे हैं और ऐसे में आँकड़े वगैरह उन्हें समझ नहीं आते। आरफा ने भी इसकी हाँ में हाँ मिलाई।

यहाँ पहली बड़ी बात ये है कि वामपंथी पोर्टलों के पत्रकार पश्चिम बंगाल में तृणमूल के लिए कैम्पेन कर रहे हैं और उन्हें बता रहे हैं कि दिल्ली में चीजें बहुत बुरी हैं और मोदी सरकार फेल हो गई है। इन उलटी-सीधी बातों के अलावा भी वो बंगाल की जनता को मूर्ख कह रहे हैं। उन्होंने कहा कि बंगाल की नजर में ‘बाहर से’ भाजपा अच्छी लग रही है। फिर आरफा ने CAA का राग अलापना शुरू कर दिया और दावा कर दिया कि गरीबों और ग्रामीणों तक प्रोपेगेंडा और झूठ पहुँच रहा है।

यहाँ वो कौन से प्रोपेगेंडा की बात कर रही हैं? फरहान अख्तर का प्रोपेगेंडा, जिसमें उन्होंने कहा था कि CAA लागू होने के बाद महिलाएँ, SC/ST और मुस्लिम देश से निकाल बाहर किए जाएँगे? वो झूठ, जिसके हिसाब से योगेंद्र यादव ने दावा किया था कि NPR में नागरिकों के नाम के आगे लाल निशान लगाया जा रहा है? या फिर वो प्रोपेगेंडा, जो ‘The Wire’ के अमेरिकी संस्थापक CAA विरोधियों के साथ मिल कर चला रहे हैं?

क्या आज तक ‘The Wire’ एक ऐसे मुस्लिम नागरिक का नाम बता सकता है, जिसकी नागरिकता CAA की वजह से गई? इस वीडियो में भी पत्रकार ने माना कि बंगाल में शरणार्थियों की अच्छी-खासी संख्या है और साथ ही दावा किया कि भाजपा ने ये भाँप लिया था कि दीदी के खिलाफ कैम्पेन चला कर चुनाव नहीं जीता जा सकता।

अजोय ने इस दौरान गुरुग्राम और ग्रेटर नोएडा की बात की, जहाँ के इंफ्रास्ट्रक्चर की बातें भाजपा कर रही हैं। उन्होंने आरफा की ही बात को काट दी, जिन्होंने कहा था कि भाजपा के पास उपलब्धि के रूप में बताने को कुछ है ही नहीं। ‘The Wire’ के ग्राउंड रिपोर्टर ने TMC नेताओं के भ्रष्टाचार की बात कबूली। साथ ही ‘माइनोरिटी अपीजमेंट’ को ‘भाजपा की थ्योरी’ करार दिया। उन्होंने ये भी कबूला कि दिल्ली और कोलकाता में बैठ कर जो समझ रहे थे कि भाजपा का जमीनी स्तर पर संगठन नहीं है, वो गलत हैं।

उन्होंने कहा कि बूथ स्तर पर बंगाल में भाजपा के अधिक लोग हैं, लेकिन साथ ही ये कहना नहीं भूले कि CPM वाले ही अब भाजपाई हो गए हैं। अंत में ‘The Wire’ वालों ने भाजपा की माइक्रो-स्ट्रेटेजी की दाद दे दी। बंगाल में अगर भाजपा जीतती है तो इसका श्रेय विकास और मोदी-शाह को कम और ‘जनता की नासमझी’ को ज्यादा दिया जाएगा, इसकी तैयारी हो चुकी है। बाकी EVM वाला राग अलापने के लिए नेता तो हैं ही।

सवाल ये है कि मोदी सरकार में कहाँ भूखमरी है? क्या नौकरियों का मतलब सिर्फ केंद्रीय नौकरियाँ ही होती हैं? वो तो सालों से कम हैं। ये आरफा जैसों की झल्लाहट ही है, जो कल को ये भी कह सकते हैं कि भाजपा शासित राज्यों में जनता के दिमाग में चिप फिट कर दी गई गई। चुनाव के रुझान को देख कर जब बंगाल की जनता आरफा और ‘The Wire’ लिए ‘मूर्ख’ हो गई है तो चुनाव के बाद तो ये खुलेआम पब्लिक को ही गाली देते फिरेंगे।

यहाँ ध्यान देने वाली बात ये भी है कि पूरे वीडियो में कहीं भी पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हत्याओं के पीछे TMC के रोल को लेकर चर्चा नहीं की गई। किस तरह से भाजपा के 150 के करीब कार्यकर्ताओं को मार डाला गया, इस पर बात नहीं की गई। कैसे CPM और TMC की शुरू से राजनीतिक हिंसा का कारोबार रहा है, इस पर चुप्पी साध ली गई। लेकिन फिर भी आरफा और ‘The Wire’ जैसों को बंगाल की हवा का अंदाज़ा तो हो ही गया है।

शशि थरूर ने किया संदिग्ध मौत पर आधारित गेम का प्रमोशन, यूजर्स ने कहा- सुनंदा केस में दिखी आशा की किरण

शशि थरूर ने मंगलवार को एक ट्वीट करके बताया कि उनके भतीजे ने अपने साथी के साथ मिलकर एक गेम बनाया है जो एक संदेहास्पद मृत्यु पर आधारित है। थरूर ने यह भी कहा कि इस गेम को खेलने वाले व्यक्ति को लंदन में हुई एक संदेहास्पद मृत्यु का खुलासा करना है। थरूर ने यह भी दावा किया कि गेमिंग की दुनिया में यह गेम ‘हिट’ होने वाला है।

थरूर के इस ट्वीट के बाद सोशल मीडिया में उनका मजाक बन गया। इसके पीछे कारण है उनकी पत्नी की मृत्यु। दरअसल, काँग्रेस नेता शशि थरूर की पत्नी सुनंदा पुष्कर भी संदेहास्पद परिस्थितियों में मृत पाई गई थीं। सुनंदा की मृत्यु का आरोपित थरूर को माना जाता है। शशि थरूर पर अपनी पत्नी को ‘आत्महत्या के लिए’ उकसाने का आरोप लगा है।

थरूर के ट्वीट के बाद कई सोशल मीडिया यूजर ने कहा कि क्या थरूर को अपने कमेंट में व्यंग्य दिखाई दे रहा है?

एक अन्य यूजर ने कहा कि हम देख सकते हैं कि इस गेम को बनाने की प्रेरणा कहाँ से मिली।  

अंकित जैन नाम के एक यूजर ने कहा कि सुनंदा पुष्कर केस में आशा की किरण दिखाई दी।

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर की पत्नी सुनंदा पुष्कर 17 जनवरी 2014 को दिल्ली के लीला होटल में मृत अवस्था में पाई गई थीं। 16 जनवरी 2014 को सुनंदा ने ट्विटर के माध्यम से पाकिस्तानी पत्रकार मेहर तरार पर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का जासूस होने और पति शशि थरूर से संबंध रखने का आरोप लगाया था। इसके कुछ ही घंटों के बाद सुनंदा की टाइमलाइन से ये ट्वीट डिलीट हो गए थे और अगले दिन सुनंदा होटल लीला पैलेस में मृत पाई गईं।  

चाची तबस्सुम ने जबर्दस्ती हनीमून पर भेजा, सामान में छिपा दिया ड्रग्स: कतर की जेल में पैदा हुई बेटी, अब होगी घर वापसी

कतर में सजा काट रहे मुंबई के दंपती ओनीबा और शरीक कुरैशी को बड़ी राहत मिली है। 2019 में कतर में ड्रग से जुड़े मामले में दोनों को 10 साल की सजा सुनाई गई थी और 1 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया गया था। कतर स्थित भारतीय दूतावास ने दोनों के परिवारों को बताया है कि सभी आरोप हटा दिए गए हैं और दोनों जल्द ही मुंबई लौटेंगे।

इस जोड़े को साल 2019 के जुलाई महीने में हमाद इंटरनेशनल एटरपोर्ट से कतर प्रशासन द्वारा गिरफ्तार किया गया था। आरोप है कि इनके बैग से 4.1 किलो ड्रग्स बरामद किया गया था। दरअसल, ओनीबा और शरीक को धोखे में रखकर उनकी चाची तबस्सुम कुरैशी ने ड्रग्स की सप्लाई की थी। दोनों को तबस्सुम ने जबरदस्ती दूसरे हनीमून पर भेजा था और उनकी ट्रिप को स्पॉन्सर किया था। उस समय शरीक एक जापानी कंपनी के साथ काम करता था। ओनीबा को इस घटना के दौरान पता चला कि वह गर्भवती है। उसने फरवरी 2020 में जेल बेटी आयत को जन्म दिया।

मामला तब खुला जब कपल के घरवालों को तबस्सुम का मोबाइल मिला। इस मोबाइल में तबस्सुम और ड्रग्स तस्करों के बीच बातचीत की रिकॉर्डिंग थी। इस बातचीत में तबस्सुम में ड्रग्स की जगह ‘गुटखा’ शब्द का प्रयोग किया था। इसके बाद घरवालों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने तबस्सुम को गिरफ्तार कर लिया। ओनीबा की माँ ने कहा कि वो बहुत खुश हैं। लंबे समय बाद वो अपने बच्चों को देखेंगी

शरीक के पिता शरीफ कुरैशी दोनों की गिरफ्तारी के बाद करीब 15 महीने तक कतर में ही रहे और उन्होंने एक वकील के जरिए लड़ाई लड़ी। कोर्ट द्वारा दोनों को 10 साल की जेल सुनाए जाने के बाद रिश्तेदारों द्वारा अपील की गई। 27 फरवरी 2020 को अपील कोर्ट द्वारा उनकी याचिका खारिज कर दी गई और ट्रायल कोर्ट के आदेश को सही माना। जनवरी 2021 में Court of Cassation (criminal department) ने सुनवाई में ओनीबा और शरीक के वकील द्वारा उपलब्ध करवाए गए डॉक्यूमेंट्स रिव्यू किए।

इसके बाद इस कोर्ट ने अपील स्वीकार कर ली और सजा को रोक दिया। इस कोर्ट ने कहा कि अपीलकर्ताओं का आपराधिक इरादा नहीं था और वे जब्त सामग्री से अनजान थे। कतर में भारतीय दूतावास के लेबर और कम्यूनिटी वेलफेयर डिपार्टमेंट में अस्सिटेंट सेक्शन ऑफिसर धीरज कुमार ने बताया कि अदालत के आदेश की प्रति जारी होने के बाद ओनीबा और शरीक को भारत भेजने की प्रक्रिया शुरू होगी।

खुद को कानून से ऊपर न देखें, FIR क्यों नहीं दर्ज किया; ये आपका कर्तव्य था: परमबीर सिंह से बॉम्बे हाई कोर्ट

मुंबई पुलिस कमिश्नर के पद से हटाए जाने के बाद परमबीर सिंह ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को एक चिट्ठी लिखी थी। इसमें राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख पर निलंबित पुलिस अधिकारी सचिन वाजे को 100 करोड़ रुपए की वसूली का टारगेट देने का आरोप लगाया था। इसके बाद अपने तबादले को चुनौती देते हुए इस मामले की जाँच के लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। शीर्ष कोर्ट ने उन्हें बॉम्बे हाई कोर्ट जाने को कहा था, जहाँ बुधवार (31 मार्च 2021) को मामले की सुनवाई हुई।

बॉम्बे HC ने उन्हें फटकार लगाते हुए कहा है कि अगर पुलिस ऑफिसर होने के बावजूद किसी अपराध को लेकर FIR दर्ज नहीं कर रहे हैं तो इसका अर्थ है कि वो अपने कर्तव्यों के निर्वहन में असफल रहे हैं। मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और जस्टिस जीएस कुलकर्णी की पीठ ने उनकी याचिका पर सुनवाई की।

हाईकोर्ट ने अनिल देशमुख के खिलाफ जाँच का आदेश भी नहीं दिया। कोर्ट ने परमबीर सिंह से पूछा कि उन्होंने FIR क्यों नहीं दर्ज किया, जबकि ये उनका कर्तव्य है? कोर्ट ने कहा कि सिर्फ CM को पत्र भेजने से कुछ नहीं होता, इसके लिए परमबीर सिंह से जवाब माँगा जा सकता है।

HC की पीठ ने कहा कि कोई भी नागरिक अगर किसी अपराध के बारे में पता लगाता है तो उसका कर्तव्य है कि वो FIR दर्ज कराए। पीठ ने ने कहा कि कोर्ट सिर्फ रेयर मामलों में ही FIR का आदेश दे सकता है, सामान्यतः इसके लिए मजिस्ट्रेट कोर्ट का रुख किया जाना चाहिए। परमबीर सिंह को फटकार लगाते हुए कहा कि वो उच्च न्यायालय को मजिस्ट्रेट की अदालत न बनाएँ। कोर्ट ने पूछा कि एक पुलिस अधिकारी के लिए क्या कानून को साइड में रख दिया जाए?

उच्च न्यायालय ने ये भी सवाल पूछा कि क्या नेता-मंत्री और पुलिस अधिकारी कानून से ऊपर हैं? साथ ही परमबीर सिंह को चेताया कि वो खुद को कानून से ऊपर न देखें, कानून उनसे ऊपर है। हाई कोर्ट का कहना था कि एक उच्च पदस्थ पुलिस अधिकारी होने के नाते परमबीर सिंह को आपराधिक कार्रवाइयों की अच्छी समझ है, इसलिए FIR के बिना ये याचिका कुछ भी नहीं। कोर्ट ने कहा कि उन्हें सीआरपीसी की अच्छी समझ है, उन्हें पहले FIR दर्ज करनी चाहिए थी।

हाई कोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि इस मामले में दो चीजों को देखना है- PIL को बरक़रार रखना और बिना FIR के जाँच का आदेश देने की कोर्ट की शक्ति। वहीं महाराष्ट्र सरकार की तरफ से पेश आशुतोष कुम्बकोनी ने परमबीर सिंह पर विक्टिम कार्ड खेलने का आरोप लगाया। साथ ही परमबीर सिंह पर राज्य के गृह मंत्री के साथ उनकी दुश्मनी को छिपाने का आरोप लगाया। पीठ का पूछना था कि वो FIR कहाँ है, जिसके आधार पर CBI को जाँच का आदेश देने पर विचार किया जाए?

महाराष्ट्र सरकार की तरफ से दलील दी गई कि सिंह ने केवल कही-सुनी के आधार पर ही याचिका दायर कर दी और इस मामले में उनके पास कोई सबूत नहीं है। वहीं परमबीर सिंह के वकील ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को भेजे गए पत्र में ‘हार्ड फैक्ट्स’ होने की बात कही। महाराष्ट्र सरकार के वकील ने पूछा कि क्या परमबीर सिंह के पास कोई फर्स्ट हैंड सबूत है?

बता दें कि परमबीर ने ‘बिना किसी पूर्वाग्रह, निष्पक्ष और बिना किसी बाहरी दखल वाले’ जाँच की माँग की थी। उन्होंने आशंका जताई थी कि इस मामले में सबूत मिटाए जा सकते हैंए। उन्होंने खुद को ट्रांसफर के बाद DG (होमगार्ड) बनाए जाने के फैसले को भी चुनौती दी थी। उन्होंने अनिल देशमुख के करतूतों की जाँच के साथ-साथ अपने ट्रांसफर के फैसले पर रोक लगाने का आदेश जारी करने का निवेदन किया था।

मंगलवार को मांस बिक्री पर प्रतिबंध = हिंदू तालिबान का निर्माण: BJP सरकार के फैसले पर लेखक रविंदर का बेतुका बयान

हाल ही में गुरुग्राम में मंगलवार को मांस की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया। प्रतिबन्ध से बेशक कुछ लोगों को परेशानी हुई होगी, लेकिन ‘क्या दोबारा हो सकता है प्यार’ सहित करीब 9 किताबों के लेखक रविंदर सिंह को कुछ ज़्यादा ही पीड़ा हो रही है।

अपनी भड़ास निकालने के लिए शहर में मंगलवार को मांस की दुकानों को बंद करने के निर्णय पर नगर निगम गुरुग्राम (MCG) के एक न्यूज़ लिंक को रीट्वीट करते हुए, रविंदर सिंह ने सवाल किया कि क्या यह प्रतिबंध ‘हिंदू तालिबान का निर्माण’ है? उनके ट्वीट में लिखा था, “अब आप मंगलवार को गुड़गाँव में मांस नहीं बेच सकते। कारण- क्योंकि इससे धार्मिक भावनाएँ आहत होती हैं। हिंदू तालिबान का निर्माण?”

रविंदर सिंह के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

लेखक रविंदर ने अफगानिस्तान और पाकिस्तान के कुछ हिस्सों में फैले कट्टर-वहशी तालिबान की तुलना एक हिंदू बहुल क्षेत्र में मंगलवार को मांस की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के फैसले से की। इनके जैसों के लिए एक विशेष समूह का अधिकार, अधिकार है और बहुसंख्यक समुदाय की आस्था कोई मायने नहीं रखती। जब भी ऐसी बात आती है तो तुरंत हिटलर और तालिबान इन्हें दिखाई देने लगता है। जबकि आज तक रविंदर सिंह जैसे लोगों ने कभी भी खुलकर पाकिस्तानी आतंक या उस तालिबान के कुकृत्यों पर नहीं बोला होगा जिन्होंने औरों का जीना हराम कर दिया है।

पाकिस्तान में तो आए-दिन हिन्दू नाबालिग लड़किया उठाई जाती है, उनका बलात्कार होता है फिर धर्म परिवर्तन कराकर उसी रेपिस्ट मुस्लिम से निकाह करा दिया जाता है जिसने उसकी अस्मत लूटी। बाकी जिस तालिबान का ये नाम ले रहे हैं उसका काम है सार्वजनिक रूप से पत्थरबाज़ी करना, महिलाओं को सार्वजनिक रूप से बोलने से रोकना, लड़कियों को कक्षा आठ से ऊपर शिक्षा प्राप्त करने से रोकना, मनोरंजन के सभी रूपों पर प्रतिबंध लगाना और 6वीं शताब्दी के स्मारक को तोड़ देना। इन सब पर तो कभी नहीं बोला होगा लेकिन गुरुग्राम में ‘हिन्दू तालिबान’ नजर आ रहा है।

इतना ही नहीं रविंदर सिंह ने मंगलवार को मांस पर प्रतिबंध को “धर्म थोपने” के रूप में स्पष्ट रूप से तालिबान के उस हिंसक रूप से जोड़ दिया जिसके लिए वह जाना जाता है।

इससे पहले, उन्होंने कोरोनोवायरस वैक्सीन का मजाक उड़ाते हुए अपने वही वामपंथी गौमूत्र वाले कटाक्ष के साथ सुर्खियों में आए थे। कोरोना वायरस वैक्सीन पर द वायर की पत्रकार रोहिणी सिंह के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए, रविंदर सिंह ने कहा था कि जब हमारे पास गोमूत्र इलाज के रूप में हैं तो हम (भारतीयों) को वैक्सीन की आवश्यकता क्यों होगी।

रविंदर सिंह इस बात पर चिंता व्यक्त कर रहे थे कि क्या भारत में राज्य सरकारों ने अपने हिस्से का वैक्सीन रिज़र्व कर दिया है जबकि दुनिया भर के देश ऐसा कर रहे हैं। लेकिन भारत में गोशालों और लव जिहाद पर बात हो रही है क्योंकि लोगों ने इसी के लिए वोट दिया था न कि वैक्सीन के लिए। ये सब देख कर लगता है कि कितना जहर भरा है इस देश के बहुसंख्यक लोगों के प्रति।

रविंदर सिंह के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

गौरतलब है कि यह सब आज का नहीं है पहले भी रविंदर ने हिंदू धर्म और संस्कृति का अपमान करने के लिए अपना पूरा समय दिया। पिछले महीने, रविंदर सिंह ने अपने 1 मिलियन फॉलोवर को हिंदू धर्म और हिंदुत्व के बीच के अंतर को समझाने की कोशिश की, ऐसे में सिंह ने खजुराहो जैसे मंदिरों की तुलना ‘पोर्न फिल्मों’ से की।

रविंदर सिंह के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

इससे पहले ये नागरिकता संशोधन कानून के बारे में फर्जी न्यूज़ और गलत सूचनाएँ फैलाने में जी जान से लगे रहे, जो कि तीन पड़ोसी इस्लामी देशों में हिंदुओं, सिखों, जैनियों और ईसाइयों सहित धार्मिक अल्पसंख्यकों को सताए जाने के लिए भारतीय नागरिकता सुलभ कराने के लिए लाया गया है।

रविंदर सिंह के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

यहाँ यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि सीएए किसी भी भारतीय, मुस्लिम या अन्यथा उनके मजहब विशेष के आधार पर लागू नहीं है। और न ही कहीं इस बात का जिक्र है कि यदि भारत में रहने वाला मुस्लिम, अपनी नागरिकता साबित नहीं कर सकता है, तो उसे बाहर निकाल दिया जाएगा, सीएए कानून के अनुसार यह एक सरासर झूठ बात है। लेकिन क्या किया है ऐसे लोगों ने उस समय आपने देखा ही।

बता दें कि रविन्द्र सिंह एक-बेस्ट-सेलिंग ’लेखक हैं और अब तक 9 किताबें लिख चुके हैं। ट्विटर पर उनके एक मिलियन से अधिक फॉलोअर हैं और इंस्टाग्राम पर एक लाख से अधिक लोग हैं जो नियमित आधार पर ऐसों की हिन्दुओं के प्रति नफरत, कट्टरता और गलत सूचनाओं के संपर्क में आते हैं।

आज UP नहीं लाया जा सका मुख्तार अंसारी: व्हीलचेयर पर मोहाली की कोर्ट में हुआ हाजिर, रोपड़ जेल वापस भेजा गया

माफिया डॉन मुख्तार अंसारी बुधवार 31 मार्च 2021 को उत्तर प्रदेश नहीं लाया जा सका। उसे दोपहर में मोहाली की कोर्ट में पेश किया गया। उसे फिरौती माँगने के मामले में चार्जशीट की कॉपी देने के लिए कोर्ट लाया गया था। पेशी के बाद उसे रोपड़ जेल भेज दिया गया।

मुख्तार अंसारी को व्हील चेयर पर अदालत लाया गया था। इस दौरान वह बेसुध दिखा। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक पंजाब सरकार ने अदालत से कहा कि वह पूरी तरह से फिट नहीं है, लिहाजा कोर्ट उसे अभी यूपी न जाने दे। वहीं न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार उसने खुद को निर्दोष बताते हुए पंजाब की सरकार पर फँसाने का आरोप लगाया।

मोहाली पुलिस ने बताया कि मुख्तार को कोर्ट की प्रक्रिया के मुताबिक ही लाया गया था। मुख्तार चालान की कॉपी लेने के लिए आरोपित की हैसियत से कोर्ट आया था। अंसारी को चालान की कॉपी रिसीव कराकर कोर्ट से वापस रोपड़ जेल भेज दिया गया। मामले की अगली सुनवाई 12 अप्रैल को होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने दिया है शिफ्ट करने का आदेश

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने मुख्तार अंसारी को पंजाब की जेल से यूपी की बांदा जेल भेजने का आदेश दिया था। न्यायमूर्ति अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ ने निर्देश दिया था कि अंसारी को दो सप्ताह के भीतर यूपी को सौंप दिया जाए और फिर बांदा जेल में रखा जाए। शीर्ष अदालत ने यूपी सरकार की याचिका पर यह निर्णय दिया। याचिका में अंसारी को पंजाब से यूपी जेल में स्थानांतरित करने की माँग की गई थी।

यूपी सरकार ने शीर्ष अदालत को बताया था कि पंजाब सरकार गैंगस्टर से नेता बने अंसारी की रक्षा कर रही है। यूपी सरकार ने कहा कि 30 से अधिक एफआईआर और हत्या के जघन्य अपराध सहित 14 से अधिक आपराधिक मुकदमे और गैंगस्टर अधिनियम के तहत विभिन्न एमपी / एमएलए अदालतों में अंसारी के खिलाफ लंबित हैं, जहाँ उसकी व्यक्तिगत उपस्थिति की माँग की जाती है।

इस बीच मुख्तार अंसारी के खिलाफ POTA (आतंकवाद निरोधक अधिनियम, 2002) के तहत कार्रवाई करने वाले पूर्व डिप्टी SP शैलेन्द्र कुमार सिंह को यूपी सरकार से बड़ी राहत मिली है। उनके खिलाफ दर्ज मुकदमा योगी सरकार ने वापस ले लिया। जनवरी 2004 में वे यूपी STF की वाराणसी यूनिट के प्रभारी डिप्टी एसपी थे। उन्होंने भाजपा विधायक कृष्णनंदन राय हत्याकांड में अहम खुलासा किया था।

उन्होंने पता लगाया था कि इस हत्याकांड के लिए मुख्तार अंसारी ने ‘लाइट मशीनगन (LMG)’ की खरीद की थी। साथ ही उन्होंने उस LMG को बरामद करने में भी सफलता प्राप्त की थी। तब राज्य में मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में सपा की सरकार थी। तत्कालीन राज्य सरकार शैलेन्द्र के इस कदम से नाराज़ हो गई थी और उन पर POTA वापस लेने का दबाव बनाया जाने लगा था। इसके आगे झुकने से इनकार करते हुए शैलेन्द्र सिंह ने यूपी पुलिस सेवा से इस्तीफा दे दिया था।

रवींद्र जडेजा की पत्नी (BJP नेता) ने लड़कों-मर्दों को झाड़ू-कचरा से जोड़ा, बहुतों को लग गई मिर्ची

भारतीय क्रिकेटर रवींद्र जडेजा की पत्नी हैं रीवाबा जडेजा। एक गाँव में वो महिलाओं को लड़कियों के विकास से संबंधित विभिन्न योजनाओं के बारे में समझा रही थीं। इसी दौरान उन्होंने एक ऐसा बयान दिया, जो सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में है।

रीवाबा को ग्रामीणों को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि लड़का हो या लड़की, स्त्री हो या पुरुष… घरेलू कामों में सबको हाथ बँटाना चाहिए। इसके लिए उन्होंने अपने क्रिकेटर पति का उदाहरण दिया।

रीवाबा जडेजा ने सबको बताया कि जब रवींद्र जडेजा को कोई काम करने की जरूरत नहीं भी होती है, तो भी वो मदद करने के लिए रसोई में आते हैं और चाय बनाते हैं।

रीवाबा की यह वीडियो वायरल हो गई है। कई लोग इसे अच्छा बता रहे हैं, तो कई इसके खिलाफ हैं। इस वीडियो में वो कहती हैं कि घर में झाड़ू लगाने से दरबारियों (उनका मतलब राजपूत से था, जो उनकी जाति है) की इज्जत में कोई कमी नहीं आएगी।

रीवाबा जडेजा ने आगे जोर देकर कहा कि हम अपनी बेटियों को समाज में अच्छे से रहना सिखाते हैं, उन्हें शिक्षित करते हैं और उन्हें अपनी संस्कृति के बारे में सिखाते हैं। लेकिन इससे विपरीत हम शायद ही कभी अपने लड़कों से इन्हीं सब बातों को लेकर बातचीत भी करते हैं।

रीवाबा के इस वीडियो के वायरल होने पर समर्थन और असहमति दोनों पक्षों में सोशल मीडिया पर चर्चा हो रही है। अपने आप को स्पष्ट करने के लिए, उन्होंने गुजराती समाचार चैनल वीटीवी को एक साक्षात्कार भी दिया, जहाँ उन्होंने फिर से अपने दृष्टिकोण और मैसेज के बारे में खुल कर बात रखी।

उन्होंने सवाल किया कि समाज में ‘कन्या केलव्नी’ (kanya kelavni, लड़कियों को कौशल-विकसित बनाने की शिक्षा) के बारे में बात की जाती है। लेकिन क्यों ‘कुंवर केलव्नी’ (kunwar kelavni, लड़कों को कुशल-विकसित बनाने की शिक्षा) के बारे में बात नहीं की जाती? एक उदाहरण देते हुए उन्होंने पूछा, “जब एक परिवार में एक लड़का और एक लड़की होती है, तो वे लड़की को प्लेट सिंक में डालने के लिए कहेंगे। लोग अपने बेटों को सिंक में प्लेट रखने के लिए नहीं कहते हैं। जबकि अपना काम करने से कोई छोटा या बड़ा कैसे हो सकता है?”

रीवाबा जडेजा की जो वीडियो क्लिप वायरल हुई है, वह सिर्फ 30 सेकंड की है, जबकि ग्रामीणों के साथ उनकी बातचीत लगभग 2.5 घंटे हुई थी। रीवाबा ने बाद में स्पष्ट किया कि उनका मैसेज किसी विशेष जाति, समुदाय या लिंग के लिए नहीं था। बल्कि उनके कहने का मकसद यह था कि आम कामों के लिए किसी दूसरे के ऊपर निर्भर रहने के बजाय सभी (लड़का हो या लड़की) को सीखने चाहिए।

आपको बता दें कि रीवाबा जडेजा 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले भाजपा में शामिल हुई थीं। पार्टी में उनके शामिल होने के समय गुजरात के कृषि मंत्री आरसी फलदू और सांसद पूनम महाजन मौजूद थे।

बंगाल में गोत्र वार: टीएमसी MP महुआ मोइत्रा के ‘चोटीवाले राक्षस’ पर बोले गिरिराज- धोते रहिए रोहिंग्या के पैर

पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण में 30 विधानसभा सीटों पर 1 अप्रैल को वोट डाले जाएँगे। उससे पहले गोत्र की सियासत गरमा गई है। इसकी शुरुआत मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के एक बयान से हुई। उसके बाद से केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह और तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा के बीच ट्विटर पर जंग छिड़ गई है।

ममता को जवाब देते हुए गिरिराज सिंह ने पूछा था कि क्या रोहिंग्या और घुसपैठियों का भी गोत्र शांडिल्य है। उन्होंने ट्वीट कर कहा था, “रोहिंग्या को वोट के लिए बसाने वाले, दुर्गा-काली पूजा रोकने वाले, हिंदुओं को अपमानित करने वाले, अब हार के खौफ से गोत्र पर उतर गए। ‘शांडिल्य गोत्र’ सनातन और राष्ट्र के लिए समर्पित है, वोट के लिए नहीं।”

इसके जवाब में महुआ मोइत्रा ने ट्वीट किया, “केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह कहते हैं कि ममता का गोत्र रोहिंग्याओं का है। हमें इस पर गर्व है। ये चोटीवाले राक्षस गोत्र से तो कहीं बेहतर है।”

अब इसका जवाब देते हुए गिरिराज ने ट्वीट किया है, “शिखा/चुटिया हिंदुस्तान की सनातन सभ्यता और संस्कृति का अभिन्न अंग रहा है और वोट की खातिर सनातन को गाली देना उचित नहीं है। रोहिंग्या के पैर धोते रहिए…जल्द ही हिदुस्तान जवाब माँगेगा।”

गौरतलब है कि नंदीग्राम में मंगलवार (30 मार्च 2021) को ममता बनर्जी ने बताया कि चुनाव प्रचार के दौरान वे एक मंदिर में गईं तो पुजारी ने उनका गोत्र पूछा और उन्होंने अपना गोत्र ‘माँ-माटी-मानुष’ बताया। रैली में ममता बनर्जी ने कहा कि उनका गोत्र ‘शांडिल्य’ है किन्तु वो अपना गोत्र ‘माँ-माटी-मानुष’ बताती हैं।

नंदीग्राम में भी 1 अप्रैल को मतदान होगा। यहाँ ममता बनर्जी और भाजपा के शुभेंदु अधिकारी के बीच मुकाबला है।