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इशरत जहाँ आतंकवादी ही थी… नहीं होने का कोई सबूत नहीं: कोर्ट ने ‘फेक’ एनकाउंटर में पुलिसकर्मियों को बरी किया

सीबीआई की विशेष अदालत में इशरत जहाँ एनकाउंटर मामले में क्राइम ब्रांच के तीन अधिकारियों की ओर से की गई कार्यवाही को जायज ठहराया है। सीबीआई की विशेष अदालत ने आखिरी तीन आरोपित आईपीएस अधिकारी तरुण बारोट, जीएल सिंघल और सहायक उप निरीक्षक अनाजू चौधरी को भी आरोप से बरी कर दिया है। सभी पर इशरत जहाँ, जावेद शेख उर्फ ​​प्राणेश पिल्लई और दो अन्य लोगों का जून 2004 में ‘फर्जी’ एनकाउंटर करने का आरोप था।

पिछले दिनों तीनों ही अधिकारियों ने आरोपों से मुक्त करने की अर्जी लगाई थी। इससे पहले तत्कालीन महानिदेशक पीपी पांडे, तत्कालीन डीआईजी डी जी वंजारा व तत्कालीन पुलिस उपायुक्त एन के अमीन को भी आरोपों से मुक्त कर दिया गया था। अदालत ने कहा कि क्राइम ब्रांच के अधिकारी जी एल सिंघल, तरुण बारोट व अनाजू चौधरी ने आईबी से मिले इनपुट के आधार पर कार्यवाही की जैसा उन्हें करना चाहिए था। 

अदालत ने यह भी कहा कि इशरत को आतंकवादी नहीं मानने का कोई कारण नजर नहीं आता है। कोर्ट ने कहा कि इशरत जहाँ, लश्कर ए तैयबा की आंतकी थी, इस खुफिया रिपोर्ट को नकारा नहीं जा सकता, इसलिए तीनों अधिकारियों को निर्दोष बताते हुए बरी किया जाता है।

पुलिस अधिकारियों ने जिस घटना को अंजाम दिया वह परिस्थिति के हिसाब से सही थी तथा उनके द्वारा यह जानबूझकर किया गया हो, ऐसा नहीं लगता है। इशरत जहाँ व उसके तीन साथियों जावेद शेख, अमजद अली व जीशान जौहर को क्राइम ब्रांच ने जून 2004 में एक एनकाउंटर में मार गिराया था। इस एनकाउंटर मामले में गुजरात के पूर्व पुलिस महानिदेशक पी पी पांडे पूर्व आईपीएस एवं क्राइम ब्रांच के मुखिया डी जी बंजारा तथा पुलिस उपाध्यक्ष एनके अमीन को भी आरोपित बनाया गया था।

महाराष्ट्र: होलिका दहन में मुस्लिम भीड़ का उत्पात, पानी डाला-लात मारी; मंदिर में ‘अल्लाहु अकबर’ के बाद दूसरी घटना

महाराष्ट्र के अकोला जिले में एक मंदिर में मुस्लिम भीड़ द्वारा होलिका दहन में विघ्न उत्पन्न करने की खबर आई है। लगभग 200-300 की संख्या में आई मुस्लिम भीड़ ने होलिका दहन के दौरान उस पर न सिर्फ पानी उड़ेल दिया, बल्कि लात से मार-मार कर आग को बुझा दिया। सोशल मीडिया पर ये वीडियो तेज़ी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद हिन्दुओं ने आक्रोश जताते हुए महाराष्ट्र की उद्धव सरकार से कार्रवाई की माँग की है।

यह घटना अकोला के पोला चौक स्थित हनुमान मंदिर की है। यह मंदिर मुस्लिमों के प्रभाव वाले इलाके में है। आरोप है कि जब हिन्दू होलिका दहन के कार्यक्रम में लगे हुए थे, तभी मुस्लिम भीड़ वहाँ आ गई और दोनों में संघर्ष होने लगा। इसके बाद मजहबी भीड़ ने होलिका की आग को बुझा दिया। लात मार कर उसका अपमान किया और हिन्दुओं को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा।

इस मंदिर को ‘उदासी मठ’ के रूप में भी जाना जाता है, जो काफी प्राचीन है। महाराष्ट्र भाजपा सोशल मीडिया के सदस्य स्वानंद कोंडोलिकार ने बताया कि मंदिर मुस्लिम बहुल क्षेत्र में स्थित है। उन्होंने जानकारी दी कि इस मंदिर को पिछले कई वर्षों से नज़रअंदाज़ किया जाता रहा है। ऐसे में पिछले कुछ महीनों से कुछ हिन्दू युवकों ने यहाँ शनिवार के शनिवार नियमित रूप से हनुमान चालीसा और आरती की शुरुआत की है।

इससे पहले भी महाराष्ट्र से इस तरह की एक और घटना सामने आई थी। लगभग 50 से 60 मुस्लिम कट्टरपंथियों ने मलंगगढ़ किले के ऊपर बने मच्छिंद्रनाथ के प्राचीन मंदिर में घुसकर हिंदू श्रद्धालुओं की आरती को बाधित करने के लिए ‘अल्लाह-हू-अकबर’ के नारे लगाए। हिंदू पारंपरिक आरती कर रहे थे, तभी मुस्लिमों की भीड़ ने मच्छिंद्रनाथ मंदिर में प्रवेश किया और इसे बाधित करने का प्रयास किया।

​2 ठिकानों पर रेड-8 घंटे पूछताछ, तब गिरफ्तार हुआ एजाज खान: बोला- बीवी का हुआ है गर्भपात, खाती है नींद की गोलियाँ

अभिनेता एजाज खान को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने मंगलवार (मार्च 30, 2021) को मुंबई एयरपोर्ट से हिरासत में लिया था। मुंबई में दो ठिकानों पर हुए रेड में एजेंसी को बड़ी सफलता हाथ लगी थी। एजाज़ खान से 8 घंटे चली पूछताछ के NCB ने उसे गिरफ्तार कर लिया। ड्रग्स से जुड़े एक मामले में ये कार्रवाई की गई। अब NCB उसे रिमांड पर लेने के लिए कोर्ट में पेश करेगी।

कोर्ट में पेश किए जाने से पहले एजाज खान को मेडिकल चेकअप के लिए अस्पताल ले जाया गया। एजाज खान का कहना है कि उसके घर से मात्र 4 नींद की गोलियाँ ही मिली थीं। उसकी बीवी का गर्भपात हो गया था, जिस कारण वो ‘एंटी-डेप्रेसेंट्स’ के रूप में उन गोलियों का प्रयोग करती थी। ड्रग्स पेडलर शादाब बटाटा के साथ पूछताछ में उसका नाम सामने आया था। एजाज के साथ अँधेरी और लोखंडवाला में तलाशी अभियान चलाई गई।

एजाज खान ने हिरासत में लिए जाने से पहले दावा किया था कि वो खुद ही NCB अधिकारियों से मिलने के लिए एजेंसी के साउथ मुंबई स्थित दफ्तर आया है। इससे पहले जुलाई 2019 में भी उसे मानहानि और हेट स्पीच मामलों में गिरफ्तार किया गया था। वह ‘बिग बॉस’ और ‘फियर फैक्टर’ जैसे रियलिटी शो का हिस्सा रहा है। 2018 में भी एजाज खान को मुंबई की एंटी नारकोटिक्स सेल ने प्रतिबंधित ड्रग्स रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के वक्त वह नशे में धुत था।

2019 में एजाज खान एक विवादित वीडियो की वजह से गिरफ्तार हुआ था। उसमें उसने कहा था, “ये सारे पंडितों की पूरी गली को इतना मारो और इनको जेल में डालो। कौन से पंडित? ये दरिंदे हैं साले। बल्कि सारे हिंदुस्तान के पंडितों को इनको अंदर करवाना चाहिए। इन्होंने पंडितों का नाम भी खराब किया है। पंडितों की जाति का नाम खराब किया है। ब्राह्मणों की जाति का नाम खराब किया है। अब तो ऐसा हो गया है कि पंडित भी मॉब लिंचिंग कर रहे हैं। मतलब ब्राह्मण पंडित भी मॉब लिंचिंग में आ गए हैं। क्या बात है यार! कमाल हो गया।”

अब दिल्ली में बताना होगा, माँस ‘झटका’ है या ‘हलाल’: NDMC ने भी रेस्टॉरेंट-दुकान पर बोर्ड लगाने के दिए निर्देश

मीट 'झटका' है या 'हलाल'। यह बात अब नॉर्थ दिल्ली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (NDMC) के अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी रेस्टॉरेंट्स, ढाबे और मीट की दुकानों को बताना होगा। NDMC के मेयर जय प्रकाश ने कहा है कि हिन्दुओं और सिखों के लिए 'हलाल' माँस निषिद्ध है, ऐसे में एक प्रस्ताव पारित कर के सभी रेस्टॉरेंट्स, ढाबे और मीट की दुकानों को निर्देश दिया गया है कि वो अपने प्रतिष्ठानों के सामने पोस्टर लगा कर बताएँ कि वे 'हलाल' माँस सर्व करते हैं, या फिर 'झटका'।

ईस्ट और साउथ MCD में भी इसी तरह का प्रस्ताव पारित किया जा चुका है। फिलहाल दिल्ली की सभी 3 नगर निगमों में भाजपा की सत्ता है। 2022 में दिल्ली में स्थानीय निकाय का चुनाव भी होना है। मेयर जय प्रकाश ने बुधवार (मार्च 31, 2021) को बताया कि आज हुई बैठक में इस प्रस्ताव को पास किया गया। सभी प्रतिष्ठानों को अब बेचे या खिलाए जाने वाले माँस के ‘झटका’ या ‘हलाल’ होने की जानकारी देनी होगी

NDMC की स्टैंडिग कमिटी ने इस प्रस्ताव को पेश किया था। जहाँ ‘झटका’ मीट के लिए पशु को तुरंत ही मार दिया जाता है, वहीं ‘हलाल’ मीट के लिए उसके एक खास नस को काट कर धीमे-धीमे मरने के लिए छोड़ दिया जाता है। नॉर्थ दिल्ली में चाँदनी चौक, दरियागंज और कश्मीरी गेट जैसे इलाके भी हैं, जहाँ माँस की दुकानें, रेस्टॉरेंट्स और ढाबे बड़ी संख्या में हैं। दिसंबर 2020 में साउथ MCD ने भी ऐसा ही प्रस्ताव पारित किया था।

ईस्ट MCD ने 2018 में ही ऐसा फैसला ले लिया था। हालाँकि, कई रेस्टॉरेंट्स और मीट की दुकानों के मालिकों ने इस कदम का विरोध किया है। उनका कहना है कि इससे न सिर्फ उनके कारोबार पर असर पड़ेगा, बल्कि मुस्लिमों के स्वामित्व वाले ‘हलाल’ दुकानों और रेस्टॉरेंट्स का कारोबार ठप्प हो जाएगा, जो अधिकतर ‘हलाल’ ही पेश करते हैं। डिफेंस कॉलोनी, सरोजिनी नगर, साउथ एक्सटेंशन, अमर कॉलोनी और INA में भी मीट की कई दुकानें/रेस्टॉरेंट्स हैं।

SDMC द्वारा पारित प्रस्ताव में कहा गया था, “दक्षिण दिल्ली म्युनिशपल कॉर्पोरेशन के अंतर्गत आने वाले चार ज़ोन के 104 वार्डों में हजारों होटल-रेस्टोरेंट हैं। इनमें से लगभग 90 प्रतिशत में मांस परोसा जाता है। लेकिन किसी में यह बताया नहीं किया जाता है कि परोसा जा रहा मांस ‘हलाल’ या ‘झटका’ है।” ‘हलाल’ मीट के लिए मारे जाते समय जानवर को मुस्लिमों के पवित्र स्थल मक्का की तरफ़ ही चेहरा करना होता है और वो तड़प-तड़प कर मरता है।

वहीं गुरुग्राम का स्थानीय निकाय में भी माँस को प्रतिबंधित करने की माँग बढ़ रही है। हाल ही में सिविल बॉडी ने सभी मीट की दुकानों को आदेश दिया था कि वे मंगलवार को बंद रखें। काउंसिलर अश्विनी ने माँग की है कि सप्ताह के सातों दिन मीट की दुकानें बंद रहें। अब तक मीट के दुकानदार ही फैसला करते थे कि किस दिन उन्हें बंद रखना है। हरियाणा सरकार का कहना है कि ये MCG का फैसला है, इससे उसका कोई सम्बन्ध नहीं।

SC/ST एक्ट में फँसाने की धमकी, गर्भवती होते यौन शोषण: महाराष्ट्र की ‘लेडी सिंघम’ की सुसाइड की हर डिटेल

महाराष्ट्र की ‘लेडी सिंघम’ के रूप में जानी जाने वाली 28 वर्षीय महिला फॉरेस्ट रेन्ज ऑफिसर ने पिछले बीते गुरुवार (25 मार्च 2021) को सुसाइड कर ली थी। इसके बाद से ही इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर कई सवाल पूछे जा रहे हैं। दीपाली चव्हाण मोहिते ने अपनी सर्विस रिवॉल्वर से ही खुद को गोली मार ली थी। घटना अमरावती के हरिशाल गाँव की है, जहाँ टाइगर रिजर्व भी स्थित है। दीपाली की खून से लथपथ लाश उनके आधिकारिक फ्लैट में मिली थी।

रिश्तेदारों और सहकर्मियों ने उनकी लाश देखने के बाद इसकी सूचना पुलिस को दी। आत्महत्या के समय वह 5 महीने की गर्भवती भी थीं। दीपाली की लाश के पास से कथित रूप से एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें उन्होंने एक वरिष्ठ IFS अधिकारी पर यौन शोषण और प्रताड़ना का आरोप लगाया है। मेलघाट टाइगर रिजर्व में कार्यरत रहीं मोहिते ने सुसाइड नोट में DCF (डिप्टी कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स) विनोद शिवकुमार पर कार्रवाई की माँग की है, ताकि किसी और के साथ ऐसा न हो।

शिवकुमार पर अपने पद का दुरुपयोग करने, मानसिक प्रताड़ना देने और यौन शोषण करने के आरोप लगाए गए हैं। दीपाली ने पिछले कुछ महीनों में कई बार MTR फील्ड डायरेक्टर MS रेड्डी के समक्ष इसकी शिकायत की थी। आरोप है कि रेड्डी ने शिकायत को नज़रअंदाज़ कर आरोपित का ही साथ दिया। शिवकुमार पर शराबी होने का आरोप लगाते हुए दीपाली ने सार्वजनिक रूप से गाली-गलौज करने और शारीरिक सम्बन्ध बनाने के लिए दबाव डालने का आरोप भी लगाया है।

आरोप है कि जब दीपाली ने शिवकुमार की इन हरकतों का विरोध किया तो DCF ने उन्हें कठिन असाइनमेंट्स देना शुरू कर दिया और सैलरी रोक कर व्यस्ततम वर्क शेड्यूल दे दिया। वो रात को मिल कर अश्लील बातें करने का दबाव बनाता था। एक टूरिस्ट कॉम्प्लेक्स में अकेले बुला कर सेक्सुअल फेवर माँगता था। साथ ही दीपाली ने ये बड़ा आरोप भी लगाया कि शिवकुमार ने SC/ST एक्ट के तहत उसके खिलाफ मामला दर्ज करवाने की धमकी दी थी।

दीपाली ने लिखा है कि मंगिया गाँव के कुछ लोगों ने उन पर SC/ST एक्ट लगाने की धमकी दी थी। आरोप है कि जब दीपाली शिवकुमार को इसके बारे में बताया, तो उसने कहा कि वो देखेगा कि SC/ST एक्ट की किन धाराओं के तहत दीपाली को जेल होगी और वो सज़ा सुनिश्चित करेगा। ग्रामीणों ने दीपाली को नजरबन्द कर दिया था और सूचना मिलने पर शिवकुमार ने इसे ड्रामा करार दिया था।

एक सहकर्मी के मुताबिक फरवरी 2020 में शिवकुमार ने दीपाली को सैकड़ों किलोमीटर की तीन दिन की पेट्रोल ड्यूटी के लिए बाध्य किया था। उस समय वह गर्भवती थी। बाद में उसका गर्भपात हो गया, जिसके कारण वह गहरे अवसाद में थी। उप-मुख्यमंत्री अजित पवार ने इस मामले में जाँच की बात कही है। महाराष्ट्र सरकार ने फ़िलहाल MS रेड्डी को सस्पेंड कर दिया है। वहीं विनोद शिवकुमार को भी सस्पेंड कर गिरफ्तार कर लिया गया है। दीपाली जंगल के तस्करी और फॉरेस्ट माफिया गिरोह के खिलाफ कार्रवाई के बाद मशहूर हुई थीं।

कोरोना वैक्सीन के लिए छुट्टी, पत्रकारों के लिए स्पेशल जाँच कैंप: जमीनी और प्रैक्टिकल स्तर पर योगी सरकार का काम

कोविड के बढ़ते संक्रमण के दौर में उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने पत्रकारों के लिए स्पेशल मुहिम चलाई है। उत्तर प्रदेश सरकार का सूचना विभाग 31 मार्च को एक कैम्प का आयोजन कर रहा है।

28 मार्च को भी एक ऐसा ही कैम्प लखनऊ के मीडिया सेंटर में लगाया गया था। लेकिन किसी कारणवश सिर्फ 60 पत्रकारों ने ही उस दिन अपनी जाँच कराई थी। इस संख्या को बढ़ाने और अधिक से अधिक पत्रकारों की जाँच के लिए दूसरी बार यह कैंप लगाई गई।

पत्रकार, कोरोना संक्रमण और जाँच

कोरोना संक्रमण को रोकने का सबसे कारगर तरीका इसकी टेस्टिंग ही है। चूँकि हर हमेशा काम को लेकर बाहर रहने वाले पत्रकारों को इसके संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है, इसलिए ऐसे पत्रकार जो किसी कोविड पेशेंट के संपर्क में पिछले दिनों आए हों या वो किसी तरह का लक्षण महसूस कर रहे हों, तो वे मीडिया सेंटर में जाकर अपनी जाँच करवा सकते हैं।

लखनऊ के मीडिया सेंटर में कोरोना जाँच का यह कैंप 11 बजे दिन के बाद शुरू होगा।

कोरोना वैक्सीन के लिए छुट्टी

वोटिंग के लिए छुट्टी को लेकर सरकारी आदेश के बारे में अब तक सुना होगा। अब यही व्यवस्था कोरोना वैक्सीन को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार ने की है। प्रदेश सरकार के आदेश के अनुसार कोरोना वैक्सीन के लिए लोगों को छुट्टी दी जाएगी। यह छुट्टी सरकारी और प्राइवेट कर्मचारियों दोनों को मिलेगी।

20 लाख कोरोना वैक्सीन लगाने वाला पहला राज्य UP

कुछ दिन पहले उत्तर प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य बना था, जहाँ 20 लाख लोगों को कोरोना वैक्सीन का लाभ मिला। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस उपलब्धि पर संतोष जाहिर किया था। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि सारी चीजें पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए और पोर्टल पर प्रत्येक दिन के टीकाकरण के आँकड़ों को अपलोड किया जाए।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया था कि नियमित मॉनीटरिंग करते हुए लक्षित आयु वर्ग के अधिक से अधिक लोगों को इसके लिए प्रेरित और प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि जिले में बने इंटीग्रेटेड कमांड और कंट्रोल सेंटरों का उपयोग भी टीकाकरण के लिए किया जाए।

‘TIME’ मैगजीन में CM योगी के कोरोना नियंत्रण पर लेख

कोरोना काल में उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा किए गए कार्यों की गूँज दुनिया भर में सुनाई दे रही है। अंतरराष्ट्रीय ‘Time’ मैगजीन में छपे एक लेख में इसकी चर्चा हुई। ‘Time’ मैगजीन में छपे लेख में कहा गया है कि कोरोना से निपटने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उठाए गए क़दमों से पूरी दुनिया प्रभावित है और WHO ने भी इसकी प्रशंसा की है।

मजदूरों को स्वच्छ भोजन और पानी देने, कम्युनिटी किचेंस की व्यवस्था और लॉकडाउन में उनके बीच 6.75 करोड़ फ़ूड पैकेट्स बाँटने जैसे क़दमों की प्रशंसा की गई है। विभिन्न पेंशन योजनाओं के तहत 86.8 लाख लोगों को 2 महीने का एडवांस पेंशन दिया गया।

मुख्तार अंसारी पर POTA लगाने वाले DSP को मुलायम सरकार ने भेज दिया था जेल, योगी सरकार ने वापस लिया केस

उत्तर प्रदेश के खूँखार माफिया नेता मुख्तार अंसारी के खिलाफ POTA (आतंकवाद निरोधक अधिनियम, 2002) के तहत कार्रवाई करने वाले पूर्व डिप्टी SP शैलेन्द्र कुमार सिंह को यूपी सरकार से बड़ी राहत मिली है। उनके खिलाफ दर्ज मुकदमा योगी सरकार ने वापस ले लिया है। जनवरी 2004 में वे यूपी STF की वाराणसी यूनिट के प्रभारी डिप्टी एसपी थे। उन्होंने भाजपा विधायक कृष्णनंदन राय हत्याकांड में अहम खुलासा किया था।

उन्होंने पता लगाया था कि इस हत्याकांड के लिए मुख्तार अंसारी ने ‘लाइट मशीनगन (LMG)’ की खरीद की थी। साथ ही उन्होंने उस LMG को बरामद करने में भी सफलता प्राप्त की थी। तब राज्य में मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में सपा की सरकार थी। तत्कालीन राज्य सरकार शैलेन्द्र के इस कदम से नाराज़ हो गई थी और उन पर POTA वापस लेने का दबाव बनाया जाने लगा था। इसके आगे झुकने से इनकार करते हुए शैलेन्द्र सिंह ने यूपी पुलिस सेवा से इस्तीफा दे दिया था।

इस्तीफा देने के कुछ महीने बाद ही वाराणसी के कैंट थाने में उनके खिलाफ DM कार्यालय के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी लालजी की तरफ से डीएम दफ्तर के रेस्ट रूम में घुसकर तोड़फोड़, मारपीट और हंगामा करने की FIR दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने तुरंत चार्जशीट भी दाखिल कर दी थी और शैलेन्द्र को जेल जाना पड़ा था। अब इस केस को उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने वापस ले लिया है। शैलेन्द्र ने इस पर ख़ुशी जताते हुए कहा:

“राजनीति से प्रेरित होकर मेरे ऊपर वाराणसी में आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया गया था और मुझे जेल में डाल दिया गया था। लेकिन, जब योगी जी की सरकार बनी तो उक्त मुकदमे को प्राथमिकता के साथ वापस लेने का आदेश पारित किया गया, जिसे CJM न्यायालय द्वारा मार्च 6, 2021 को स्वीकृति प्रदान की गई। न्यायालय के आदेश की प्रति आज ही प्राप्त हुई। मैं और मेरा परिवार योगी जी की इस सहृदयता का आजीवन ऋणी रहेगा।”

शैलेन्द्र सिंह ने संघर्ष के दिनों में साथ देने वाले सभी लोगों को भी धन्यवाद दिया। सहायक अभियोजन अधिकारी की तरफ से दी गई रिपोर्ट के आधार पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (वाराणसी) ने मुकदमा वापस लेने का आदेश जारी किया। फरवरी 2004 में ततकालीन राज्यपाल विष्णुकांत शास्त्री को भेजे पत्र में शैलेन्द्र ने आरोप लगाया था कि LMG जब्ती केस में मुख़्तार अंसारी का नाम हटाने के लिए उन पर ऊपर से बड़ा दबाव बनाया जा रहा है।

गौरतलब है कि पंजाब की जेल में बंद मुख़्तार अंसारी के उत्तर प्रदेश प्रत्यर्पण में वहाँ की कॉन्ग्रेस सरकार कई महीनों से अड़ंगा लगा रही थी। 5 दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि गैंगस्टर मुख्तार अंसारी दो सप्ताह के भीतर उत्तर प्रदेश की बांदा जेल में शिफ्ट किया जाए। कोर्ट ने कहा था कि बांदा जेल के अधीक्षक चिकित्सा सुविधाओं की देखरेख करेंगे। पंजाब सरकार की तरफ से दावा किया गया था कि किसी राज्य को इस प्रकार के स्थानांतरण का कोई मौलिक अधिकार नहीं है।

नंदीग्राम में हार रहीं ममता बनर्जी, खुद प्रशांत किशोर का सर्वे हुआ लीक: सोशल मीडिया पर तेजी से फैली खबर – Fact Check

ममता बनर्जी नंदीग्राम में हारने वाली हैं। खुद प्रशांत किशोर का सर्वे लीक हो गया है। – ये दोनों लाइन लीक हुए सर्वे के स्क्रीनशॉट के साथ सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है।

I-PAC (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमिटी) के सर्वे का स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है। नंदीग्राम में ममता बनर्जी के हारने के अलावा बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे फेज में भाजपा के आगे बढ़ने (30 में से 23 सीटों पर BJP की जीत) को लेकर भी दावे किए जा रहे हैं। यह सब कुछ उसी लीक हुए स्क्रीनशॉट में दिख रहे आँकड़ों को आधार पर किया जा रहा है।

नंदीग्राम में ममता की हार: दावे और प्रतिक्रिया

ममता बनर्जी नंदीग्राम में हारने वाली हैं – इसको लेकर सोशल मीडिया पर जो स्क्रीनशॉट शेयर किया जा रहा है, उससे एकदम अलग एक स्क्रीनशॉट को फेक बताते हुए 29 मार्च को तृणमूल कॉन्ग्रेस ने एक ट्वीट किया था।

तृणमूल के अनुसार भाजपा के लोग फेक खबरों को फैला रहा हैं। तब उन्होंने उस दिन के स्क्रीनशॉट को फेक बताया था। प्रशांत किशोर की I-PAC (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमिटी) ने तृणमूल के इस ट्वीट को रिट्वीट किया था।

ममता की नंदीग्राम में हार, नए दावे का क्या?

सबसे ऊपर जो दो ट्वीट में ममता बनर्जी के नंदीग्राम हारने और बंगाल चुनाव के दूसरे फेज में भाजपा के आगे बढ़ने को लेकर दावे किए जा रहे हैं, उस पर अभी तक TMC या I-PAC की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। जिस पर प्रतिक्रिया आई थी, वो स्क्रीनशॉट भी अलग है।

जब तक तृणमूल कॉन्ग्रेस या खुद प्रशांत किशोर की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आती है, तब तक इस दावे को झुठलाना आसान नहीं – यह पूरी तरह सच भी हो सकता है और पूरी तरह झूठ भी।

SIMI के ‘इंजीनियरिंग’ सेल को उम्रकैद: गोधरा का बदला लेने निकले थे सज्जाद, आकिब, रफीक सहित 12 आतंकी… बम बनाने का था जखीरा

राजस्थान में प्रतिबंधित आतंकी संगठन ‘Students’ Islamic Movement of India (SIMI)’ के 12 आतंकियों को उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई है। वहीं 1 को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया। जयपुर की जिला अदालत ने मंगलवार (मार्च 30, 2021) को दोषियों को आतंकी करार दिया और आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई। दोषी करार दिए गए आतंकियों में ज्यादातर इंजीनियरिंग के छात्र थे।

ये आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन के लिए काम करते थे। 2014 में ATS (आतंक निरोधी दस्ता) और SOG (स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप) ने गिरफ्तार किया था। इनमें से 6 सीकर के, 3 जोधपुर के, एक-एक जयपुर और पाली के और एक बिहार के गया का है। वहीं जोधपुर के एक आरोपित को बरी कर दिया गया। ये मामला SIMI के स्लीपर सेल से जुड़ा हुआ है। ये राजस्थान में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए बम वगैरह बना रहे थे।

ATS के अनुसार, सिमी की स्लीपर सेल को एक्टिव करने के लिए जयपुर से गिरफ्तार हुए मारुफ के रिश्तेदार उमर ने इंटरनेट के जरिए संपर्क कर इन युवकों को संगठन से जोड़ा था। फिर इन्होंने आतंकी गतिविधियों में सक्रियता बढ़ा दी थी। इससे पहले कि ये किसी बड़ी साज़िश को अंजाम देते, सभी पकड़े गए। 7 साल तक कोर्ट में चले ट्रायल में अभियोजन पक्ष ने 178 गवाह और 506 डॉक्यूमेंट्री एविडेंस पेश किए।

फर्जी दस्तावेजों से सिम खरीदने, जिहाद के नाम पर फंड जुटाने, आतंकियों को शरण देने और बम विस्फोट के लिए रेकी करने जैसे आरोपों में कोर्ट ने इन्हें दोषी पाया। गोपालगढ़ में हुई पुलिस फायरिंग की एक घटना के कारण ये बौखलाए हुए थे। उनके पास से लैपटॉप, फोन, पेन ड्राइव, किताबें, दस्तावेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान जब्त किए गए थे। मार्च 28, 2014 को इस मामले में FIR दर्ज की गई थी। ‘दैनिक भास्कर’ की खबर के अनुसार, 12 आतंकियों के डिटेल्स इस प्रकार हैं:

  • 1. मोहम्मद अम्मार यासर, पुत्र मोहम्मद फिरोज खान, उम्र 22 साल, निवासी काजी मोहल्ला शेरघाटी, गया (बिहार)
  • 2. मोहम्मद सज्जाद, पुत्र इकबाल चौहान (32), अन्जुम स्कूल के पास, मोहल्ला कुरैशीयान, सीकर – इसे वकार और आकिब ने अपने साथ जोड़ा था।
  • 3. मोहम्मद आकिब, पुत्र अशफाक भाटी (22), मोहल्ला जमीदारान वार्ड 13, सीकर – सिविल इंजीनियरिंग का छात्र था। पहले मारूफ, फिर वकार से जुड़ा। मुंबई में आतंकी ट्रेनिंग ली। मारूफ के साथ मिल कर सीकर के कई जगह की रेकी कर नक़्शे बनाए।
  • 4. मोहम्मद उमर, पुत्र डॉ. मोहम्मद इलियास (18), जमीदारान वार्ड 2, सीकर – कोटा में मेडिकल की तैयारी कर रहा था। मारूफ व बरकत इसके परिजन ही हैं।
  • 5. अब्दुल वाहिद गौरी, पुत्र मोहम्मद रफीक (26), मोहल्ला कुरैशियान, वार्ड 31, सीकर – तहसील में टाइपिस्ट था। नक़्शे इसी ने बनाए।
  • 6. मोहम्मद वकार, पुत्र अब्दुल सत्तार (22), मोहल्ला रोशनगंज, वार्ड 13, सीकर – सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई बीच में छोड़ आतंक का रास्ता चुना।
  • 7. अब्दुल माजिद उर्फ अद्दास, पुत्र असरार अहमद (21), मोहल्ला जमीदारान वार्ड 12, सीकर – 21 वर्ष की उम्र में स्लीपर सेल से जुड़ गया था।
  • 8. मोहम्मद मारुफ, पुत्र फारुक इंजीनियर, डी 105, संजय नगर, झोटवाड़ा, जयपुर
  • 9. वकार अजहर, पुत्र मोहम्मद तस्लीम रजा, 20 पुराना चूड़ीघरों का मोहल्ला, पाली
  • 10. बरकत अली, पुत्र लियाकत अली (28), मकान नं 8, हाजी स्ट्रीट, शान्तिप्रिय नगर, जोधपुर – कंस्ट्रक्शन का ठेकेदार था।
  • 11. मोहम्मद साकिब अंसारी, पुत्र मोहम्मद असलम (25), ए 45, बरकतुल्ला कॉलोनी, जोधपुर – कम्प्यूटर का जानकार था। फर्जी सिम व फोन का जुगाड़ किया। अभिजीत नाम की फर्जी पहचान से काम करता था।
  • 12. अशरफ अली खान, पुत्र साबिर अली (40), 653, लायकान मोहल्ला, जोधपुर – उसने अपने ठिकानों का इस्तेमाल आतंकी हरकतों के लिए किया।

वहीं मशरफ इकबाल पुत्र छोटू खां (32), नई सड़क, गुलजारपुरा, जोधपुर को कोर्ट ने बरी कर दिया। ये आतंकी गोधरा और भरतपुर में हुए दंगों का बदला लेना चाहते थे। दिल्ली में गिरफ्तार आतंकी मोहम्मद वकास ने पूछताछ में खुलासा किया था कि इंडियन मुजाहिदीन के तहसीन भटकल और यासीन भटकल ने जयपुर में कुछ लोगों को बम बनाने की ट्रेनिंग दी है, जिसके बाद जाँच शुरू की गई थी। 

इनके कब्जे से भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री व बम बनाने के उपकरण जब्त किए गए थे। इन सभी के तार पाकिस्तान से जुड़े हुए थे। 6 अन्य नामजद भी हैं, जिनकी अब तक गिरफ़्तारी नहीं हो पाई है। ये राष्ट्रीय महत्व की इमारतों व शॉपिंग मॉल्स को निशाना बनाने वाले थे। इंजीनियरिंग छात्र होने के कारण उन्हें तकनीक की जानकारी थी। आरोपितों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ढाई महीने से नियमित सुनवाई हो रही थी।

तीन तलाक के खिलाफ आतिया साबरी की एक और बड़ी जीत: मिलेगा ₹13,44000 की एकमुश्त राशि, 21 हजार/महीने गुजारा भत्ता

तीन तलाक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई लड़कर जीतने वाली आतिया साबरी ने एक और बड़ी जीत हासिल की है। दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर के मुताबिक, परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश नरेंद्र कुमार ने अतिया को प्रार्थना पत्र की तारीख से देय 13 लाख 44 हजार रुपए का एकमुश्त देय राशि गुजारा भत्ते के रूप में देने का आदेश दिया है।

इसके अलावा अदालत ने अतिया साबरी को 21 हजार रुपए महीना और दो बेटियों को सात-सात हजार रुपए गुजारा भत्ता देने के आदेश दिया है।

गौरतलब है कि हरिद्वार की लक्सर कोतवाली क्षेत्र के सुल्तानपुर निवासी अतिया को उसके पति ने वर्ष 2016 में तीन तलाक देकर घर से निकाल दिया था। इसके खिलाफ आवाज उठाते हुए आतिया ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसके बाद साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को असंवैधानिक घोषित कर दिया था।

आतिया की लंबी लड़ाई के बाद केंद्र सरकार ने तीन तलाक के खिलाफ कानून भी बनाया। तभी से अतिया अपनी दोनों बच्चियों के साथ पिता के पास सहारनपुर उत्तर प्रदेश रहती आ रही हैं। अतिया ने अपनी दो बच्चियों और अपने गुजारा भत्ता के लिए सहारनपुर के परिवार न्यायालय में एक केस दायर किया था।

बता दें कि आतिया की शादी में परिवार वालों ने कार, जेवर सहित 25 लाख रुपए खर्च किए थे। इसके बावजूद ससुराल वालों ने 20 लाख रुपए की माँग पूरी न होने पर अतिया को जहर देकर मारने की भी कोशिश की थी, लेकिन वह बचकर अपने मायके लौट आई थी।

गुजारा भत्ता मिलने के फैसले से अतिया के परिवार वालों बेहद खुश नजर आ रहे हैं। उन्होंने इसे सच की जीत बताया है।