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बंगाल: मतदान से पहले TMC नेता के घर से मिला EVM और VVPAT, ऑफिसर ने कहा- रात होने पर रिश्तेदार के यहाँ रुके थे

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के एक नेता के घर से EVM बरामद होने के बाद इलाके में सनसनी फ़ैल गई। राज्य में मंगलवार (अप्रैल 6, 2021) को तीसरे चरण का चुनाव भी चल रहा है। ऐसे में इससे 1 रात पहले इस तरह की घटना से TMC घेरे में आ गई है। तुलसीबेरिया के तृणमूल नेता गौतम घोष को ग्रामीणों ने 1 इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और 4 वोटर-वेरिफायेबल पेपर ऑडिड ट्रेल (VVPAT) के साथ पकड़ा।

ये घटना उलूबेरिया नॉर्थ विधानसभा क्षेत्र की है, जहाँ तीसरे चरण में ही वोट डाले जा रहे हैं। भाजपा उम्मीदवार चिरन बेरा ने आरोप लगाया कि ये चीजें TMC नेता के घर से मिली हैं, जिससे पता चलता है कि राज्य की सत्ताधारी पार्टी चुनाव में धाँधली कर रही है। उन्होंने बताया कि EVM और VVPAT को चुनावी ड्यूटी के लिए कार से लाया गया था। साथ ही तृणमूल नेता के घर के बाहर ‘सेक्टर 17’ की चुनावी ड्यूटी की कार भी पड़ी मिली।

वहाँ के सेक्टर अधिकारी को भी ग्रामीणों ने दबोच लिया। सेक्टर ऑफिसर ने अपने बचाव में कहा कि चुनावी ड्यूटी के लिए मशीनों को लाते समय काफी रात हो गई थी। केंद्रीय सशस्त्र बल सो गए थे और उन्होंने बूथ खोला ही नहीं। लिहाजा उन्होंने अपने एक रिश्तेदार के घर पर रात बिताना उचित समझा। सूचना मिलते ही पुलिस भी वहाँ पहुँची, लेकिन स्थिति बिगड़ने के कारण लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर कर दिया।

उक्त सेक्टर अधिकारी को सस्पेंड कर दिया गया है और उसके पास से मिली EVM को भी जब्त कर लिया गया है। इन EVM का प्रयोग मतदान में नहीं किया जाएगा। पश्चिम बंगाल में आज 31 सीटों पर मतदान हो रहा है, जो सुबह 7 बजे ही शुरू हुआ। साउथ 24 परगना जिले की 16, हावड़ा की 7 और हुगली की 8 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं। भाजपा ने स्थानीय अधिकारियों की निष्ठा पर सवाल उठाए हैं।

वहीं चुनाव आयोग ने भी इस मामले में बयान जारी किया है। इलेक्शन कमीशन ने कहा कि सेक्टर अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही बताया कि मतदान की प्रक्रिया में उस EVM का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। ECI ने आश्वासन दिया कि इसमें शामिल सभी लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।

2 इतालवी, फिरौती के लिए रचा खुद के अपहरण का ड्रामा; सीरिया में असली जिहादियों के हाथ बेच दिए गए

कभी-कभी जरूरत से ज्यादा होशियारी भारी मुसीबत में डाल देती है। यह बात इटली के इन दो नागरिकों से बेहतर कोई नहीं समझ सकता है। दरअसल, इटली की सरकार से फिरौती हासिल करने के लिए दो लोगों ने नकली आतंकवादियों के हाथों खुद के अपहरण की साजिश रची। लेकिन, उनके साथ दर्दनाक घटना तब हो गई, जब उन्हें असली जिहादियों के हाथों बेच दिया गया।

इतालवी अभियोजकों के मुताबिक, एलेसेंड्रो सैंड्रिनी और सर्जियो जानोटी ने दो अल्बानियाई पुरुषों और एक अन्य इतालवी व्यक्ति के नकली गिरोह की मदद से अपने ही अपहरण की साजिश रच डाली। ये दोनों इतालवी नागरिक अन्य लोगों से उनके गृह शहर ब्रेशिया में मिले थे।

अभियोजकों का दावा है कि इसी गिरोह के साथ दोनों व्यक्ति 2016 में 5 महीने के लिए तुर्की ले जाए गए थे। इनके बीच में सरकार से पैसे हासिल करने को लेकर डील हुई थी। इसके मुताबिक नकली आईएसआईएस की तरह ही अपहरण का वीडियो शूट किया जाना था। इसके बाद उन्हें छुड़ाने के लिए सरकार से मिलने वाली फिरौती की रकम को आपस में बाँटना था।

पुलिस ने दावा किया है कि सैंड्रिनी की गर्लफ्रेंड ने अपहरणकर्ताओं को सुना था कि वे सैंड्रिनी को एक विला में ‘ड्रग्स, शराब और लड़कियों’ के बीच विलासिता में रखना चाहते थे। सैंड्रिनी ने अपनी प्रेमिका को इस योजना के बारे में बताया था। साथ ही ये लालच दिया था कि अगर वह यह बात किसी को नहीं बताएगी तो उसे 100,000 यूरो देगा। अभियोजकों का दावा है कि अपहरणकर्ता सैंड्रिनी की प्रेमिका को मुँह बंद रखने के लिए हर सप्ताह 50 यूरो देते थे।

सूत्रों के मुताबिक, जिस गिरोह के साथ मिलकर सैंड्रिनी ने खुद के अपहरण की साजिश रची थी उसी ने धोखा देकर उन्हें सीरिया में कट्टर इस्लामी समूह ‘तुर्किस्तान इस्लामिक पार्टी’ के आतंकियों को बेच दिया। इस तरह सैंड्रिनी अपने ही बने जाल में फँस गया। हालाँकि, सैंड्रिनी ने इन आरोपों का खंडन करते हुए एक स्थानीय समाचार पत्र से कहा, “शुरू से अंत तक वास्तविक अपहरण था।”

इस अपहरण के पीछे शामिल गिरोह को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इन्हीं पर ज़ानोटी के भी नकली अपहरण का शक है। इससे पहले जानोटी ने दावा किया था कि तुर्की में दुर्लभ सिक्के खरीदने के दौरान उसका अपहरण कर लिया गया था। इसके बाद जानोटी को एक इस्लामी आतंकवादी संगठन को सौंप दिया गया था। 2019 में छूटने से पहले वह सैंड्रिनी की तरह अल-कायदा से जुड़ा हुआ था। सूत्रों के मुताबिक, “सैंड्रिनी के खिलाफ जांच चल रही है और जानोटी फेक किडनैपिंग के मामले में जल्द ही पकड़ा जा सकता है।”

2018 में सैंड्रिनी का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें उसके असली किडनैपिंग का सीन था। इसमें वह हथियारबंद अपहरणकर्ताओं के सामने घुटने टेक कर मदद की गुहार लगा रहा था। इसके बाद मई 2019 में अपहरणकर्ताओं के चंगुल से रिहा होने के बाद उसने दावा किया था कि उसे तुर्की में छुट्टियाँ बिताने के दौरान होटल में ड्रग दिया गया और अपहरण कर लिया गया था। रिहा होने के बाद जब वो वापस लौटा तो उसे कई डकैती वारदातों में शामिल होने के कारण घर में नजरबंद किया गया था।

जानोटी ने अब तक आरोपों पर चुप्पी साध रखी है। साल भर पहले अप्रैल 2019 में आतंकवादियों ने उसे रिहा किया था। उस दौरान इटली के तत्कालीन पीएम गिउसेप कोंटे ने कहा था कि जानोटी की हालत अच्छी है और उसने मामले की जाँच के लिए इटैलियन इंटेलीजेंस ब्यूरो को धन्यवाद दिया है।

वहीं जानोटी की पूर्व पत्नी ने इतालवी समाचार पत्र ला रिपब्लिका को बताया कि वह उस पर लगे आरोपों के बारे में सुनकर हैरान थीं। उसने हमें बताया कि जब उसे अलेप्पो के पास कैद कर रखा गया था, तो उसे घोड़े की तरह घास खाने के लिए मजबूर किया गया था।

सूत्रों का कहना है कि इटली की सरकार को संदेह है कि इनकी रिहाई के लिए फिरौती दी गई थी। इटैलियन न्यायिक सूत्रों के मुताबिक, किडनैपिंग की इन घटनाओं में दोनों व्यक्तियों को एक भी पैसा नहीं मिला। अगर कुछ भी भुगतान किया गया था, तो उन्हें कुछ भी नहीं मिला।

सीरियल ब्लास्ट का आरोपित अब्दुल, सुप्रीम कोर्ट ने बताया ‘खतरनाक आदमी’: कभी कॉन्ग्रेस नेता ओमन चांडी ने किया था सपोर्ट

आप एक खतरनाक आदमी हैं। लाइवलॉ की रिपोर्ट के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अगुवाई वाली पीठ ने यह टिप्पणी अब्दुल नजीर मदनी पर की। मदनी बेंगलुरु में 2008 में हुए सीरियल ब्लास्ट का आरोपित है। पीडीपी नेता मदनी ने जमानत शर्तों में छूट की गुहार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर रखी है। इस पर सोमवार को तीन सदस्यीय पीठ ने सुनवाई की। पीठ में सीजेआई बोबडे के अलावा जस्टिस बोपन्ना और जस्टिस रामासुब्रमण्यम शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने 11 जुलाई 2014 को मदनी को स्वास्थ्य के आधार पर जमानत दी थी। न्यायालय ने मदनी को जमानत देते हुए उसे बेंगलुरु शहर नहीं छोड़ने और जमानत अवधि के दौरान अपने ठहरने के बारे में जानकारी मुहैया कराने को भी कहा था। इसके बाद कई बार उसकी जमानत अवधि बढ़ाई गई।

न्यायमूर्ति जे. चेलमेश्वर और न्यायमूर्ति एके गोयल की पीठ ने मदनी को साल 2015 में बीमार माँ को देखने के लिए जमानत देते हुए कहा था कि वह अपनी आजादी का दुरुपयोग नहीं करे। इसको लेकर आज मदनी की ओर से अदालत में पेश हुए वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि उसने अपनी जमानत शर्तों का दुरुपयोग नहीं किया है।

गौरतलब है कि केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता ओमन चांडी ने बेंगलुरु ब्लास्ट के मुख्य आरोपी मदनी को बिना मुकदमे के अनिश्चितकाल तक जेल में रखने को अनुचित बताया था। चांडी ने कहा था कि कर्नाटक की जेल में बंद मदनी के खिलाफ मामले के तथ्यात्मक पहलुओं पर नहीं ध्यान दिया गया, पीडीपी नेता को इस तरह कैद में रखना ठीक नहीं है।

ओमन चांडी ने कर्नाटक में बेंगलुरु के एक हेल्थ रिसॉर्ट में मदनी से मुलाकात भी की थी। इस पर अभियोजन टीम के एक सदस्य ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि मदनी गंभीर अपराध के मामले में हिरासत में था। वह कथित तौर पर आतंकी गतिविधियों में संलिप्त था। अगर मुख्यमंत्री ऐसे किसी आरोपी से मिलते हैं, तो यह घातक साबित हो सकता है।

बता दें कि बेंगलुरु में जुलाई 2008 में सिलसिलेवार बम धमाके की घटना को अंजाम दिया गया था। इसमें पुलिस ने 32 आरोपितों की पहचान की थी, जिनमें से 22 को अब तक गिरफ्तार किया जा चुका है। इस पूरे मामले में शोएब नाम के शख्स की अहम भूमिका थी।

नक्सली हमलों में 70% कमी, फिर भी 3 साल में वामपंथी आतंकवाद ने 162 जवानों, 463 नागरिकों का खून बहाया

छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में हुए नक्सली हमले में 23 जवान बलिदान हो गए। लापता सीआरपीएफ जवान राकेश्वर सिंह के नक्सलियों के कब्जे में होने की आशंका है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने क​हा है कि ये बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा और नक्सलियों के खिलाफ अभियान और तेज होगा।

आँकड़े बताते हैं कि मोदी सरकार के कार्यकाल में नक्सली हिंसा में लगातार कमी आई है। बावजूद इसके 2018-2020 के बीच वामपंथी आतंकवाद ने 162 जवानों और 463 नागरिकों की जान ली है। इसी साल फरवरी में लोकसभा में एक सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने नक्सली हिंसा से जुड़े तथ्य सामने रखे थे।

इस अंतराल में 473 नक्सली भी मार गिराए गए। 4319 नक्सलियों को अलग-अलग राज्यों से गिरफ्तार किया गया। इसके मुताबिक तीन साल की अवधि के दौरान देश में नक्सली हिंसा की 2168 घटनाएँ हुईं।

लोकसभा में सरकार द्वारा नक्सली हमलों के बारे में दिया गया विवरण (साभार: लोकसभा)

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बताया था कि 2009 के मुकाबले 2020 में इस तरह की घटनाओं में 70 फीसदी तक की कमी आई है। 2009 में यह संख्या 2258 थी जो 2020 में घटकर 665 हो गई। सरकार ने बताया है कि वामपंथियों की हिंसा से होने वाली मौतों में भी 80 फीसदी की कमी दर्ज की गई है। हिंसा की वजह से 1805 मौतें हुई थीं जो 2020 में 183 पर पहुँच गई।

सरकार ने जानकारी दी कि आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा और तेलंगाना में 2018 में वामपंथी हिंसा की 833 घटनाएँ हुईं। 2018 के दौरान इन राज्यों में 173 नागरिकों की मौत हुई और 67 सुरक्षाकर्मी बलिदान हुए थे। 2018 में 225 नक्सली मारे गए थे, जबकि 1933 को गिरफ्तार किया गया था।

इन राज्यों में 2019 में नक्सल हिंसा के 670 मामले दर्ज किए थे। इसमें 150 नागरिक मारे गए और 52 सुरक्षाकर्मी भी वीरगति को प्राप्त हुए थे। आँकड़ों के मुताबिक इसी साल 145 नक्सली मारे गए और 1276 को गिरफ्तार किया गया।

वहीं इन प्रदेशों में साल 2020 में 665 नक्सली हिंसा की वारदातें हुईं थीं। इनमें कम से कम 140 नागरिकों की मौत हुई और 43 सुरक्षाकर्मियों को अपनी जान गँवानी पड़ी। इसके अलावा 103 वामपंथी चरमपंथी भी मारे गए थे, जबकि 1110 को गिरफ्तार किया गया था।

छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा

छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा नक्सली हिंसा हुई। आँकड़ों के मुताबिक 2018 में 392, 2019 में 263 और 2020 में 315 नक्सल वारदातें इसी राज्य में हुई। छत्तीसगढ़ में ही सर्वाधिक सुरक्षाकर्मियों का बलिदान भी हुआ। यहाँ 2018 में 55, 2019 में 22 और 2020 में 36 जवानों का बलिदान हुआ। बीते तीन 3 साल में इन हमलों में राज्य में 228 नागरिकों की मौत हुई। 2018 में सर्वाधिक 98 लोगों की हत्या नक्सलियों ने की।

छत्तीसगढ़ के बाद झारखंड में नक्सली हिंसा के कारण सबसे अधिक जवानों का बलिदान हुआ है। 2018 में वामपंथी हिंसा की 205 घटनाएं हुईं, जिसमें नौ सुरक्षा अधिकारी वीरगति को प्राप्त हुए। 2019 में राज्य में एलडब्ल्यूई हिंसा की 200 वारदातों में 22 सुरक्षाकर्मियों का बलिदान हुआ। इसके अलावा 2020 में 199 वारदातों में एक सुरक्षाकर्मी वीरगति को प्राप्त हुआ। तीन वर्षों के दौरान झारखंड में 114 नागरिकों की मौत हुई है। 2018 और 2020 के बीच आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में कोई भी सुरक्षाकर्मी बलिदान नहीं हुआ।

गौरतलब है कि शनिवार को छत्तीसगढ़ के बीजापुर और सुकमा जिले की सीमा पर नक्सलियों के साथ हुई मुठभेड़ में 23 जवान बलिदान हो गए थे। वहीं पिछले महीने छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान आईईडी विस्फोट में DRG के पाँच जवान बलिदान हुए थे। छत्तीसगढ़ पहुँचे अमित शाह ने सोमवार को कहा, “नक्सलियों के खिलाफ इस लड़ाई को अंजाम तक ले जाना मोदी सरकार की प्राथमिकता है। पिछले 5-6 वर्षों में हमने छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में काफी अंदर तक जाकर सुरक्षा कैंप बनाए हैं। मैं देश को विश्वास दिलाता हूँ कि नक्सलियों के खिलाफ ये लड़ाई और तीव्र होगी। हम विजयी होंगे।”

2 पत्रकार-गुमनाम कॉल, कहाँ हैं जवान राकेश्वर सिंह: नक्सली हमले के बाद छत्तीसगढ़ में अमित शाह, कहा- ये लड़ाई और तेज होगी

छत्तीसगढ़ के बीजापुर में नक्सली हमले के बाद से लापता जवान को लेकर एक बड़ी जानकारी सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक दो स्थानीय पत्रकारों ने सोमवार (5 अप्रैल) को दावा किया कि उन्हें गुमनाम कॉल आया था। कॉल करने वाले ने उनसे कहा कि CRPF का जवान उनके कब्जे में है। जवान सुरक्षित है और उसे कोई नुकसान नहीं पहुँचाया जाएगा।

दो पत्रकारों में से एक गणेश मिश्रा, बीजापुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष हैं। उन्होंने कहा, “फोन करने वाले ने खुद की पहचान उजागर नहीं की। उसने कहा है कि माओवादी दो से तीन दिन में जवान को रिहा कर देंगे।” वहीं सुकमा में नवभारत के एक पत्रकार राजा सिंह राठौड़ ने कहा, “फोन करने वाले ने अपना नाम हिडमा बताया है। उसने कहा है कि लापता जवान हमारी हिरासत में है। मैंने जवान के बारे में पूछा, तो बताया गया कि वह सुरक्षित है। जिस व्यक्ति ने हिडमा होने का दावा किया था, उसने कहा कि ज्यादा जानकारी और तस्वीरें बहुत जल्द शेयर की जाएँगी।”

बीजापुर के पुलिस अधीक्षक कमलोचन कश्यप ने उन खबरों का खंडन किया है, जिसमें कहा गया था कि उन्हें भी किसी गुमनाम कॉलर ने फोन किया था। न्यूज18 से उन्होंने कहा, “जवान माओवादियों की कैद में हो सकता है। सुरक्षा बलों ने 5-6 किलोमीटर के दायरे में घटना के बाद जवान की तलाश की, लेकिन उसका पता नहीं लगा सके।” उन्होंने आगे कहा कि जवान का पता लगाने के प्रयास जारी हैं और पुलिस पत्रकारों को आए फोन कॉल की जाँच करने की कोशिश कर रही है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार 35 वर्षीय जवान राकेश्वर सिंह मन्हास हमले के दौरान तर्रेम क्षेत्र में जंगलों में लापता हो गए थे। सुरक्षा बलों द्वारा बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान के बीच, इन अटकलों ने जोर पकड़ लिया है कि जवान को सीपीआई-माओवादी कैडर द्वारा बंदी बना लिया गया है। सुरक्षा एजेंसियों के सूत्र मानते हैं कि इनपुट मिले हैं, लेकिन अभी तक बातचीत की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है। सूत्रों के मुताबिक, माओवादियों ने अब तक जम्मू के रहने वाले मन्हास को छोड़ने के एवज में कोई शर्त नहीं रखी है।

इस बीच राकेश्वर सिंह की पत्नी मीनू मन्हास ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपने पति की रिहाई सुनिश्चित करने की अपील की है। उन्होंने कहा, “मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह से आग्रह करती हूँ कि मेरे पति को वापस लाएँ। वे जहाँ भी हों उनको वापस लाया जाए। वे सुरक्षित हैं तो किसी तरह उनको वापस लाइए। मैं मोदी जी से आग्रह करती हूँ कि मेरे पति को उसी तरह वापस लाएँ, जैसे पाकिस्तान से विंग कमांडर अभिनंदन को लेकर आए थे।”

इस बीच, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोमवार को छत्तीसगढ़ के जगदलपुर पहुॅंचे। बलिदानी जवानों को श्रद्धांजलि दी। अस्पताल जाकर घायल हवानों का हाल जाना। बीजापुर जिले के बासागुड़ा में सीआरपीएफ कैंप जाकर मुठभेड़ में शामिल जवानों से मिलकर संवाद किया।

उन्होंने कहा, “नक्सलियों के खिलाफ इस लड़ाई को अंजाम तक ले जाना मोदी सरकार की प्राथमिकता है। पिछले 5-6 वर्षों में हमने छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में काफी अंदर तक जाकर सुरक्षा कैंप बनाए हैं। मैं देश को विश्वास दिलाता हूँ कि नक्सलियों के खिलाफ ये लड़ाई और तीव्र होगी। हम विजयी होंगे।” इससे पहले शाह ने कहा था कि हम जवानों के परिजनों और देश को विश्वास दिलाते हैं कि बहादुर जवानों ने देश के लिए जो खून बहाया है वह व्यर्थ नहीं जाएगा।

गौरतलब है कि शनिवार को नक्सलियों ने कुख्यात माओवादी कमांडर माडवी हिडमा के नेतृत्व में घात लगाकर हमला किया था जिसमें 23 जवान बलिदान हो गए थे।

सैलरी के लाले और अखबारों में तस्वीरों संग फुल फेज विज्ञापन: केजरीवाल सरकार को हाई कोर्ट ने फटकारा

दिल्‍ली नगर निगम (MCD) के कर्मचारियों को समय से सैलरी और पेंशन नहीं मिलने को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने केजरीवाल सरकार को फटकार लगाई है। इससे जुड़ी जनहित याचिका (PIL) पर सोमवार (5 अप्रैल 2021) को सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि एक तरफ विज्ञापनों पर पैसे खर्च किए जा रहे दूसरी ओर इस मुश्किल समय में कर्मचारियों को वेतन के लाले पड़े हैं।

न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार हाई कोर्ट ने कहा, हम देख सकते हैं कि किस तरह से सरकार राजनेताओं की तस्वीरों के साथ अखबारों में पूरे पन्ने का विज्ञापन देने पर खर्च कर रही है। लेकिन कर्मचारियों की सैलरी तक नहीं दी जाती है।

केजरीवाल सरकार को फटकार लगाते हुए कोर्ट ने सवाल किया, “क्या ये अपराध नहीं है कि इतने कठिन समय में भी, आप विज्ञापन पर पैसा खर्च कर रहे हैं।” आप सरकार की मंशा पर सवालिया निशान लगाते हुए कोर्ट ने कहा कि नगर निगमों को धन नहीं देना पड़े, इसलिए सरकार वित्तीय संकट का हवाला देती है। लेकिन, अखबारों और अन्य माध्यमों से विज्ञापन पर पैसा खर्च करने में सरकार को कोई दिक्कत नहीं है।

कोर्ट ने केजरीवाल सरकार को किसी भी तरह की मोहलत देने से इनकार करते हुए कर्मचारियों का मार्च तक का पूरा बकाया क्लियर करने का आदेश दिया है। वित्तीय वर्ष 2020-21 के संशोधित अनुमान के अनुसार, दिल्ली सरकार को ईडीएमसी को 864.8 करोड़ रुपए, एसडीएमसी को 405.2 करोड़ रुपए और उत्तरी दिल्ली नगर निगम को 764.8 करोड़ रुपए देने हैं।

आजतक की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि एमसीडी को वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए 400 करोड़ रुपए का फंड मिलना था, लेकिन उसे दिल्ली सरकार से केवल 109 करोड़ रुपए मिले हैं।

4 साल में कोई अस्पताल या फ्लाईओवर नहीं

हाल ही में तेजपाल सिंह द्वारा दायर एक आरटीआई से पता चला था कि AAP सरकार द्वारा किए गए विश्वस्तरीय बुनियादी ढाँचे के लम्बे-लम्बें दावों के विपरीत, राजधानी में 2015-2019 के बीच यानी 4 सालों में न तो कोई नया अस्पताल बनाया और न ही किसी फ्लाईओवर का निर्माण किया। केजरीवाल सरकार द्वारा पिछले 5 वर्षों में स्वास्थ्य और बुनियादी ढाँचे के क्षेत्र में किए गए कार्यों की जानकारी के लिए 2019 में RTI दायर की गई थी।

 नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष अक्षय लाकड़ा ने आरटीआई द्वारा 3 जुलाई 2019 को पूछे गए सवालों के जवाबों की प्रति को शुक्रवार (2 अप्रैल, 2021) को ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा है, ”RTI से खुलासा हुआ कि 1 अप्रैल 2015 से लेकर 31 मार्च 2019 के बीच दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार ने ना ही किसी हॉस्पिटल को अनुदान दिया और न ही किसी नए फ्लाईओवर का निर्माण करवाया। बस झूठे विज्ञापन दे-दे कर जनता को मूर्ख बना लिया और जनता भी इसकी बातों में आ गई।”

इस बीच, खान मार्केट इलाके को सँवारने के नाम पर वहाँ एक नया सेल्फी पॉइंट बनाया गया है।

शीला दीक्षित सरकार में परिवहन मंत्री रहे हारून यूसुफ का आरोप है कि केजरीवाल सरकार ने दिल्ली में विज्ञापन और प्रचार पर 611 करोड़ रुपए खर्च किए हैं, लेकिन सरकारी स्कूलों की स्थिति और बुनियादी सुविधाओं के उत्थान के लिए कुछ नहीं किया है।

केजरीवाल सरकार पर पूर्व में जनता के लिए काम करने की जगह झूठे और भ्रामक प्रचारों के जरिए अपना महिमामंडन करने के आरोप भी लग चुके हैं।

मुस्तफा ने पहचान छिपा हिंदू महिला से शादी की, गर्भवती हुई तो अस्पताल में आधार कार्ड से खुला राज

मध्य प्रदेश के इंदौर से लव जिहाद का मामला सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, मुस्तफा नाम के एक शख्स ने अपनी पहचान छिपाकर हिंदू महिला से शादी कर ली। महिला जब गर्भवती हुई तो जाँच कराने अस्पताल पहुँची। वहाँ उसने आधार कॉर्ड पर अपने पति का असली नाम देखा।

इंदौर के द्वारकापुरी थाने में दर्ज शिकायत के अनुसार, पिछले साल अप्रैल में प्रेम विवाह करने वाली महिला को एक साल बाद पता चला कि उसका पति गब्बर नहीं, मुस्तफा है। महिला ने बताया कि दोनों की मुलाकात एक बर्थडे पार्टी में हुई थी। इसके बाद दोनों एक-दूसरे के करीब आ गए और विवाह कर लिया। मुस्तफा ने महिला को अपना नाम गब्बर बताया था। लेकिन जब वह गर्भवती हुई और जाँच कराने अस्पताल पहुँची तो उसने आधार कार्ड में मुस्तफा नाम पाया। महिला की शिकायत पर पुलिस ने मुस्तफा के खिलाफ लव जिहाद कानून के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

हाल ही में मध्य प्रदेश में लव जिहाद और जबरन धर्मांतरण रोकने का नया कानून लागू हुआ है। इस कानून में शादी के बाद बलपूर्वक धर्म-परिवर्तन को गंभीर अपराध माना गया है और इसके लिए 10 वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। बता दें कि अधिनियम की प्रस्तावना में लिखा हुआ है कि यह अधिनियम धर्मांतरण के विरुद्ध धर्म की स्वतंत्रता को सुनिश्चित करता है। इसके साथ ही विवाह, धमकी अथवा बलपूर्वक, लालच जैसे अवैध माध्यमों से धर्मांतरण को रोकता है।

UP पुलिस की आहट से उड़ी मुख्तार अंसारी की भूख, 3 की जगह अब 1 टाइम ही खा रहा: लावारिस मिली एंबुलेंस

कभी पूर्वांचल में दहशत का पर्याय माना जाने वाले मुख्तार अंसारी आज खुद दहशत में जी रहा है। पंजाब की रोपड़ जेल में बंद अंसारी को आज (5 अप्रैल 2021) यूपी पुलिस को सौंपा जाएगा। उसके लिए बांदा जेल को किले में तब्दील कर दिया गया है।

चिंतित अंसारी जेल में अधिकतर समय अपने विशेष बैरक में ही व्यतीत कर रहा है। चिंता के कारण उसकी भूख आधी हो गई और वो दिन में एक वक़्त का भोजन ही कर रहा है। पंजाब के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह)  द्वारा मुख्तार अंसारी को उत्तर प्रदेश ले जाने को लेकर यूपी के अतिरिक्त मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी को लिखे पत्र में उसे गुरुवार (अप्रैल 8, 2021) से पहले ले जाने और उसे जेल में स्वास्थ्य सहित अन्य सुविधाएँ मुहैया कराने को कहा था।

इससे पहले माफिया अंसारी 3 टाइम खाना खाता था। मऊ से पाँचवीं बार विधायक बने मुख़्तार अंसारी को किस रूट से पंजाब लेकर जाया जाएगा, इसे गुप्त रखा गया है। इस दौरान पंजाब पुलिस के कुछ जवान भी शामिल होंगे। यूपी पुलिस की अलग-अलग टीमें इसके लिए रोपड़ गई है। वहाँ मीडिया का भी जमावड़ा लगा हुआ है।

वहीं वो एम्बुलेंस रूपनगर-नंगल हाईवे पर रविवार देर रात नानक ढाबे के पास मिली, जिससे उसे मार्च 31 को मोहाली से रूपनगर कोर्ट ले जाया गया था। रूपनगर से 3 किलोमीटर दूर बरामद हुई इस एम्बुलेंस के नंबर प्लेट पर मिट्टी पड़ी हुई थी। उस एम्बुलेंस को बाराबंकी में फर्जी तरीके से रजिस्टर कराया गया था। यूपी पुलिस ने ढाबे पर जाकर उसके कर्मचारियों से पूछताछ की। पुलिस को सादे ड्रेस में भेजा गया है।

बताया जा रहा है कि चित्रकूट धाम मंडल की स्पेशल पुलिस टीम मुख़्तार अंसारी को लेकर जाएगी। हाल ही में मुख़्तार अंसारी की पत्नी ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिख कर अपने शौहर की सुरक्षा की गुहार लगाई थी। उन्होंने आशंका जताई है कि उनके शौहर को ‘फेक एनकाउंटर में’ मारा जा सकता है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय सुरक्षा बलों को अंसारी के साथ लगाया जाए। उन्होंने कहा कि मुख़्तार अंसारी की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

माफिया मुख्तार अंसारी पर 47 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसको लेकर उसे यूपी की कई अदालतों में पेश होना है। लेकिन वह अपने स्वास्थ्य का हवाला देते हुए काफी दिनों से पंजाब की जेल में बंद है। बताया जाता है कि योगी सरकार ने अकेले मऊ में ही मुख्तार अंसारी के करीबियों के 22 करोड़ से अधिक की संपत्ति पर बुलडोजर चलाने का काम किया है। सुप्रीम कोर्ट ने 26 मार्च को बड़ा फैसला सुनाते हुए मुख्तार अंसारी को उत्तर प्रदेश भेजने का आदेश दिया था। 

15 साल की लड़की से रेप, 13 साल वाली गर्भवती… फिर इनकी मानव तस्करी: ग्रूमिंग गैंग लीडर अब्दुल, आदिल खुला घूम रहे

इंग्लैंड में रोशडेल चाइल्ड ग्रूमिंग गिरोह का सरगना कारी अब्दुल रऊफ सड़कों पर बेखौफ घूम रहा है। यह तब है, जबकि उसकी सजा के अनुसार उसे 6 साल बाद निर्वासित किया जाना था। दरअसल, 51 साल के कारी अब्दुल रऊफ को एक नाबालिग लड़की (15 वर्षीय) के साथ छेड़छाड़ और दुष्कर्म का दोषी पाए जाने पर 6 साल की जेल हुई थी।

डेली मेल में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक हाल ही में उसे खाने-पीने की चीजों की खरीदारी करते हुए देखा गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उसे और उसके दोस्तों अब्दुल अजीज (50 वर्षीय), आदिल खान (51 वर्षीय) को भी निर्वासित किया जाना था, लेकिन अभी तक नहीं किया गया। तीनों के पास दोहरी नागरिकता है। ये सभी पाकिस्तान से ब्रिटेन चले गए थे, जहाँ उन्होंने ब्रिटेन की नागरिकता भी हासिल कर ली।

अब्दुल इन तीनों में सबसे घिनौना या पापी मानसिकता का था। वो खुद को ‘द मास्टर’ कहलाता था। जब उसने एक बच्चे के साथ जबरन सेक्स किया था, तब वो 3 बच्चों का बाप था। उसे एक बच्चे के साथ यौन संबंध बनाने के लिए और मानव तस्करी के लिए 9 साल की सजा सुनाई गई थी।

आदिल खान को ग्रूमिंग गैंग की साजिश और 13 साल की बच्ची की तस्करी के लिए 8 साल की सजा सुनाई गई थी। 13 साल की बच्ची की तस्करी इसलिए की जा रही था क्योंकि वो ग्रूमिंग गैंग का शिकार होकर गर्भवती हो गई थी।

मई 2012 में लिवरपूल क्राउन कोर्ट के जज के शब्द पढ़िए। पढ़िए और समझिए कि इस्लामी कट्टरपंथी लोगों ने इंग्लैंड में ग्रूमिंग गैंग बना कर क्या कहर ढाया था छोटी बच्चियों पर! जज गेराल्ड क्लिफ्टन ने कहा था:

“पीड़ितों के साथ बलात्कार बिना किसी खौफ के… निडर होकर, वीभत्स और हिंसक तरीके से किया गया।”

13 से लेकर 16 साल की लड़कियाँ बनीं शिकार

पिछले साल यूनाइटेड किंगडम के वेस्ट यॉर्कशायर (West Yorkshire) पुलिस ने 32 लोगों पर 8 नाबालिग लड़कियों के साथ यौन अपराधों के 150 मामले दर्ज किए थे। बताया जाता है कि ग्रूमिंग जिहाद यूके के भीतर सबसे बड़ा आपराधिक प्रकरण बनकर उभरा है। यहाँ मुस्लिम युवक श्वेत लड़कियों का यौन उत्पीड़न और उनकी ग्रूमिंग करते हैं।

इन आपराधिक वारदातों को किरक्लीस (Kirklees), ब्रैडफोर्ड (Bradford) और वेकफील्ड (Wakefield) में 1999 से 2012 के दौरान 13 से लेकर 16 साल की पीड़िताओं के साथ अंजाम दिया गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक तमाम पीड़िताओं को वयस्क होने के बाद भी जघन्य अपराधों का शिकार होना पड़ा था। इन वारदातों के ज़्यादातर आरोपित बैटले और ड्यूसबेरी (Batley and Dewsbury) क्षेत्र के निवासी हैं।

2018-19 में इंग्लैंड में 19000 बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न

डेली मेल ने आधिकारिक आँकड़ें पेश करते हुए अनुमान लगाया था कि 2019 में इंग्लैंड में लगभग 19,000 नाबालिगों के साथ यौन ग्रूमिंग (sexual grooming) की वारदात को अंजाम दिया गया था। इंग्लैंड में स्थानीय प्रशासन ने 2018-19 में कुल 18,700 पीड़ितों की पहचान की थी, जिनकी संख्या पाँच साल पहले 3300 थी।

पिछले 40 साल में ब्रिटेन में कम से कम 5 लाख गैर-मुस्लिम (काफिर) लड़कियों के साथ समुदाय विशेष के लोगों ने रेप किया है। रेप पीड़िता डॉ. एला हिल ने ‘Triggernometry’ को दिए एक इंटरव्यू में इसका खुलासा किया था।

20 साल पहले की डरावनी कहानी को याद करते हुए हिल ने बताया कि उन्हें उनके पाकिस्तानी मुस्लिम ब्वॉयफ्रेंड ने निशाना बनाया था। उसका रिश्ता जल्द ही मजहबी रूप में तब्दील हो गया। पाकिस्तानी मुस्लिम ब्वॉयफ्रेंड ने रॉदरहैम, शेफ़ील्ड और ब्रैडफोर्ड के आसपास अलग-अलग फ्लैटों में ले जाकर उनके साथ रेप किया और उन्हें यातनाएँ दी थी।

महिला ने बताया कि उसने उन्हें इतनी गहरी चोट दी थी कि उससे उबरने में लगभग 1 साल लग गए थे। ब्वॉयफ्रेंड ने हिल के माता-पिता को जान से मारने की धमकी दी थी, जिसकी वजह से वह चुपचाप सब कुछ सहन करती रहीं।

यति न​रसिंहानंद की गर्दन काटने की बात करने वाले अमानतुल्लाह खान के समर्थन में इस्लामी कट्टरपंथी, बता रहे- दिल्ली का टाइगर

उत्तर प्रदेश के डासना देवी मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती का सिर और जुबान काटने की धमकी देने वाले आम आदमी पार्टी (AAP) के MLA अमानतुल्लाह खान के समर्थन में इस्लामी कट्टरपंथी उतर आए हैं। ट्विटर पर उसके समर्थन में ट्रेंड चला रहे हैं।

कट्टरपंथी सोशल मीडिया पर यति नरसिंहानंद की गिरफ्तारी की माँग कर रहे हैं, जबकि उनका सिर कलम करने की धमकी देने वाले का समर्थन।

अमानतुल्लाह ने स्वामी नरसिंहानंद को मजहबी कीड़ा बताते हुए लोगों को उकसाने की कोशिश की थी कि वो डासना देवी मंदिर के प्रमुख महंत को नुकसान पहुँचाने की कोशिश करें। उसके भड़कावे का असर यह हो रहा है कि कट्टरपंथी इस्लामिस्ट ट्विटर पर महंत के खिलाफ ट्रेंड चला रहे हैं।

कॉन्ग्रेस समर्थक सोशल मीडिया पर सवाल कर रहे हैं कि आखिर दिल्ली पुलिस डासना देवी मंदिर के महंत को गिरफ्तार क्यों नहीं कर रही है। क्या वो मोदी सरकार से डर रही है।

टीपू सुल्तान पार्टी ने तो सिर और जुबान काटने की धमकी देने वाले अमानतुल्लाह खान को ‘दिल्ली का टाइगर’ घोषित कर दिया है। बता दें कि इस पार्टी की स्थापना 2019 में आम चुनाव से पहले हुई थी। इसने लोकसभा चुनावों में भी हिस्सा लिया था। कर्नाटक के ग्रामसभा चुनाव में कुछ सीटें भी जीती थीं।

गौरतलब है कि अमानतुल्लाह खान ने बीते 3 अप्रैल को अपने ट्विटर हैंडल से खुले तौर पर यति नरसिंहानंद की जुबान और गला काटने की धमकी दी थी। आप MLA ने लिखा, “हमारे नबी की शान में गुस्ताखी हमें बिल्कुल बर्दाश्त नहीं। इस नफरती कीड़े की जुबान और गर्दन दोनों काट कर इसे सख्त से सख्त सजा देनी चाहिए। लेकिन हिंदुस्तान का कानून हमें इसकी इजाजत नहीं देता।”

आप विधायक ने इस हेटफुल ट्वीट को एक दिन तक अपने ट्विटर पर पिन करके रखा था। जब लोगों ने सोशल मीडिया पर ट्विटर से इसकी शिकायत की तो रविवार को ट्विटर ने इसे डिलीट कर दिया। लेकिन, फेसबुक पर यह अभी भी है।