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‘बंगाल का बच्चा-बच्चा दीदी का खेल समझ गया है’: बोले पीएम मोदी- TMC ने अंधकार दिया, BJP देगी सोनार बांग्ला

पश्चिम बंगाल में 27 मार्च को पहले चरण की सीटों के लिए वोट पड़ेंगे। उससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज (मार्च 24, 2021) कांथी में एक चुनावी रैली को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि बंगाल के लोग ममता बनर्जी सरकार का खेला समझ गए हैं और दो मई को उसकी विदाई तय है। उन्होंने कहा कि बंगाल के कोने से कोने से अब एक ही आवाज़ आ रही है, बंगाल के हर घर से एक ही आवाज़ आ रही है, बंगाल के हर मुख से एक ही आवाज़ आ रही है कि 2 मई दीदी जाछे और आसोल परिवर्तन आछे। 

PM मोदी ने कहा कि तृणमूल कॉन्ग्रेस किसानों की दुश्मन बनी बैठी है। आने वाली 2 मई को विकास के बीच आने वाली सारी दीवारें टूट जाएँगी। पीएम ने आजादी की लड़ाई में दिए बंगाल के योगदान को भावी पीढ़ी तक पहुँचाना अपनी प्राथमिकता बताई।

ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “दीदी आजकल मेदिनीपुर में आकर बार-बार बहाने बना रही हैं। दीदी उन बहनों, उन परिवारों को जवाब नहीं दे पाईं जिनको पहले अम्फान ने तबाह किया और फिर तृणमूल के तोलाबाजों ने लूट लिया। यहाँ केंद्र सरकार ने जो राहत भेजी थी, वो ‘भाइपो विंडो’ में फँस गई।”

पीएम ने सवाल दागते हुए कहा, “दीदी, आज पश्चिम बंगाल पूछ रहा है कि अम्फान की राहत किसने लूटी? गरीब का चावल का किसने लूटा? अम्फान के सताए लोग, आज भी टूटी हुई छत के नीचे जीने को मजबूर क्यों हैं।” प्रधानमंत्री ने ममता बनर्जी के लिए कहा, “जब जरूरत होती है तो तब दीदी दिखती नहीं, जब चुनाव आता है तो कहती हैं- सरकार दुआरे-दुआरे! यही इनका खेला है। पश्चिम बंगाल, यहाँ का बच्चा-बच्चा, ये खेला समझ गया है।”

पीएम मोदी ने वादा किया कि उनकी पार्टी हर मायने में बंगाल का विकास करेगी और राज्य में हर स्कीम को स्कैम मुक्त करेगी। यहाँ कट, कमीशन पर रोक लगेगा। लाभार्थियों के बैंक खाते में सीधा लाभ देने के लिए, डीबीटी देने के लिए कदम उठाए जाएँगे। कोई बिचौलिया नहीं होगा, कोई तोलाबाज नहीं होगा।

पार्टी के संकल्प पत्र के बारे में जनता को बताते हुए पीएम ने पार्टी नेताओं की तारीफ की और बताया कि कैसे टीएमसी को बंगाल की जनता की चिंता नहीं है, इसलिए कई योजनाओं से उन्हें वंचित रखा है। मगर डबल इंजन की सरकार सबका विकास करेगी।

बंगाल की जनता को पीएम ने आश्वासन दिलाया कि वह किसानों के हक के 3 साल के पैसे भी उनके खातों भेजेंगे। हल्दिया को नदी जलमार्गों से कनेक्ट करेंगे। उन्होंने असम का उदाहरण देते हुए बताया कि 5 वर्षों में वहाँ तेजी से विकास के काम हुए। इन 5 वर्षों में असम में शांति आई है, स्थिरता आई है। उन्होंने कहा कि जिन्होंने अलगाववाद का रास्ता चुना था, वो मुख्यधारा में लौट आए हैं। बंगाल को भी अब शांति चाहिए, स्थिरता चाहिए, बम-बंदूकों और हिंसा से मुक्ति चाहिए। तृणमूल सरकार ने बंगाल को सिर्फ अंधकार दिया है। भाजपा की डबल इंजन की सरकार बंगाल को सोनार बांग्ला देगी।

‘ट्रांसफर-पोस्टिंग का बड़ा रैकेट… उद्धव, आदित्य, पवार का नाम लिया दलालों ने’: महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ तीसरा ‘लेटर बम’

महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार के नेता जिस पुलिस को दुनिया में सबसे सक्षम और सबसे तेज़-तर्रार बताते नहीं अघाते थे, अब एक-एक कर के उन्हीं पुलिस अधिकारियों के कारण उनकी पोल खुलती जा रही है। पूर्व मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह के पत्र को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। उससे पहले DG संजय पांडे के पत्र से बवाल मचा। और अब स्टेट इंटेलिजेंस कमिश्नर रश्मि शुक्ला के एक पत्र को लेकर ‘महा विकास अघाड़ी (MVA)’ सरकार कटघरे में है।

सवाल उठता है कि आखिर उस पत्र में क्या था? दरअसल, अगस्त 2020 में तत्कालीन DGP सुबोध जायसवाल को भेजे गए पत्र में रश्मि शुक्ला ने बताया था कि उनकी टीम ने कुछ ऐसे फोन कॉल्स को इंटरसेप्ट करने में कामयाबी पाई है, जिससे पता चला है कि कई लोग पुलिस अधिकारियों की मनमाने ट्रांसफर-पोस्टिंग कराने के बदले रुपए लेने के धंधे में शामिल हैं। 7 पन्ने के इस पत्र में कई बड़े नेताओं के नाम थे।

पत्र के अनुसार, इंटेरसेप्टेड कॉल्स में पता चला कि रुपयों के बदले मनमानी ट्रांसफर-पोस्टिंग कराने वालों ने आपसी बातचीत में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, NCP के संस्थापक-अध्यक्ष शरद पवार और उन्हीं ही पार्टी के नेता व राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख के नाम भी लिए हैं। इसमें कई पुलिस अधिकारियों के नाम भी हैं, जो शुक्ला के हिसाब से इन दलालों के संपर्क में थे। ट्रांसफर-पोस्टिंग डील में इससे बड़ी गड़बड़ी के सबूत मिलते हैं।

तभी राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र फड़नवीस ने केंद्रीय गृह सचिव से दिल्ली में मुलाकात कर 6.3 GB डेटा के कंटेंट सबूत के रूप में सौंपे। फड़नवीस ने सीलबंद लिफाफे में सबूत सौंपते हुए मामले की CBI जाँच की माँग की और कहा कि राज्य सरकार किसी को बचाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने इस प्रकरण में अदालत जाने की भी बात कही। NCP ने परमबीर सिंह की तरह रश्मि शुक्ला को भी भाजपा का एजेंट करार दिया।

NCP की मुंबई यूनिट के अध्यक्ष, पार्टी के प्रवक्ता और राज्य सरकार में अल्पसंख्यक विभाग के मंत्री नवाब मलिक ने आरोप लगाया कि रश्मि शुक्ला ने बिना अनुमति कई नेताओं के फोन टैप किए हैं और उन्होंने सरकार गठन के समय ये सब किया था। उन्होंने कहा कि रश्मि ने अवैध रूप से कॉल रिकार्ड्स तैयार किए और इसीलिए ‘सज़ा’ के रूप में उनका तबादला कर दिया गया। उन्होंने दावा किया कि पत्र में जिन अधिकारियों के नाम हैं, उनमें से अधिकतर का तबादला हुआ ही नहीं।

परमबीर सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में हालिया तबादलों के खिलाफ डाली गई याचिका में भी इस पत्र का जिक्र किया है। अगस्त 25, 2020 के इस पत्र में ऐसे लोगों के नाम हैं, जिनके काफी मजबूत राजनीतिक कनेक्शंस हैं। लिखा गया था कि आरोपों की पुष्टि के लिए संदिग्ध गतिविधियों वाले इन लोगों के फोन्स को क़ानूनी प्रक्रिया के तहत सर्विलांस पर रखा गया, जिसके बाद पता चला कि आरोपों में दम है।

इंस्पेक्टर से लेकर कई बड़े IPS अधिकारियों के इन दलालों से संपर्क में होने की बात कही गई थी। जिन 7 लोगों के फोन टैप किए गए, वो हैं – महादेव इंग्ले, संतोष जगताप, नवाज़ मनेर अज़्मुद्दीन, देवानंद भोजे, उमेश राठौड़, विशाल कदम और उमेश पाटिल। भोजे को महाराष्ट्र पुलिस विभाग का कर्मचारी बताया गया था। पत्र में 11 IPS और 32 वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के नाम थे। कहा गया कि ये सभी दलालों के साथ संपर्क में थे।

साथ ही इन लोगों के बीच फोन पर हुई बातचीत की ट्रांसक्रिप्ट की समरी भी उपलब्ध कराई गई थी, जिसमें वो लोग ‘दादा’, ‘पवार साहेब’, आदित्य ठाकरे और अनिल देशमुख के नाम लेते दिख रहे हैं। पत्र में लिखा था कि महादेव इंग्ले सामाजिक और राजनीतिक हलकों में बड़ी धमक रखता है। इतना ही नहीं, पुलिस अधिकारियों के अलावा कलक्टर्स, डिप्टी कलक्टर्स, MHADA व एक्साइज विभाग के अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग के बदले रुपए लेने की बात भी कही गई थी।

रश्मि शुक्ला ने एक उच्च-स्तरीय जाँच के साथ-साथ इसमें संलिप्त लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की ज़रूरत जताई थी। उन्होंने लिखा था कि इससे सरकार की विश्वसनीयता और कार्यप्रणाली पर गंभीर आक्षेप लगते हैं, इसीलिए मुख्यमंत्री ठाकरे को इससे तुरंत अवगत कराया जाए। इसके बाद अगस्त 26 को DGP जायसवाल ने राज्य के गृह सचिव सीताराम कुंटे को पत्र लिख कर सीएम ठाकरे को अवगत कराने और CID क्राइम पुणे से इसकी जाँच कराने की सिफारिश की।

इस पत्र के आने के कुछ ही दिनों बाद रश्मि शुक्ला का तबादला कर के उन्हें सिविल डिफेंस का हेड बना दिया गया। इसके बाद उन्होंने केंद्रीय सेवा को चुना और उन्हें CRPF में पोस्ट दी गई। इंगले का कहना है कि वो एक ड्राइवर है, जो कार रेंट देने के एजेंट के रूप में काम करता है। उसने कहा कि वो ग्राहकों को अपना फोन यूज करने देता है, किसी ने इसका गलत प्रयोग किया होगा। उसने दावा किया कि वो ओस्मानाबाद में रहता है और मुंबई कभी गया ही नहीं।

शुक्ला के पत्र में लिखा गया है कि इंगले का फोन 29 पुलिस अधिकारियों के साथ संपर्क में था, जिनमें से एक DIG रेंज का अधिकारी भी था। पत्र में उसका चार्ज 10 ग्राम के सोने का गहना या फिर 5000 रुपए से लेकर 50 लाख रुपए तक बताया गया है। इस आरोप को लेकर जगताप ने कहा कि वो कोरोना पॉजिटिव हो गया है और अस्वस्थ है। जगताप ने यह भी बताया कि कि वो वर्ग-2 का अधिकारी है और जुलाई 2020 में उसका फोन खो गया था।

राजस्थान में गाय-गोशाला के नाम पर फर्जीवाड़ा: 1 भी गाय नहीं पर सरकार ने दिए करोड़ों, गुल रोशन जैसे नाम भी

राजस्थान में गाय और गोशाला के नाम पर एक चौंकाने वाला फर्जीवाड़ा सामने आया है। ऐसे 12 गोशाला का पता चला है जहाँ एक भी गोवंश नहीं था। फिर भी वे सरकारी योजनाओं का लाभ उठा रहे थे।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक जैसलमेर में पशुपालन विभाग की टीम के निरीक्षण में ऐसे गोशाला की पोल खुली। कुल 25 गोशाला का फिजिकल सत्यापन हुआ। इनमें 12 फर्जी पाए गए। लेकिन, ये प्रत्येक वर्ष अनुदान की राशि उठा रहे थे।

रिपोर्ट में बताया गया है कि काठोड़ी उत्थान संस्थान और जंज विकास संस्थान द्वारा ​संचालित गोशाला में निरीक्षण के दौरान एक भी गोवंश नहीं था। यही हाल लखा गाँव में संचालित रता बाबा गौशाला विकास संस्थान और जैसुराणा में चानणे विकास एवं सेवा संस्थान के गोशाला का भी था। रिपोर्ट के अनुसार चांधन के मंगलियों की ढ़ाणी में संचालित अमन गोशाला, जैसुराणा के गुल रोशन गोशाला जैसी जगहों पर भी एक भी पशु नहीं मिले। इनमें से हरेक ने गोवंश के नाम पर लाखों के अनुदान उठाए हैं।

वहीं ‘ख्वाजा गरीब नवाज गोशाला’ में पिछले साल के 273 की तुलना में इस साल 26, ‘मोहम्मद गोशाला सूजियों की ढाणी’ में पिछले साल 205 की तुलना में इस साल 72, भागु गाँव की ‘जैसाण कादरी गोशाला’ में पिछले साल की 535 की तुलना में 230, जैसुराणा की ‘दीन मोहम्मद गोशाला’ में पिछले साल की 381 की तुलना में इस साल 170, ‘जन्नत गोशाला’ में पिछले साल की 418 की तुलना में 80 व ‘सिकंदर गोशाला’ में पिछले साल 455 की तुलना में इस साल मात्र 50 गोवंश ही पाए गए।

इनमें से 6 गोशालाएँ ऐसी हैं, जिन्होंने हाल ही में पिछले साल का 62 लाख रुपए का भुगतान उठाया था। इनके संचालकों ने सरकार से झूठ कहा कि उनके पास 1814 पशु हैं, और 62 लाख रुपए खुद डकार लिए। अब जाँच टीम ने इन सभी गोशालाओं के संचालकों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण माँगा है।

जैसलमेर में दर्जनों ऐसे गोशाला हैं, जिनका संचालन गोवंश संरक्षण के नाम पर किया जा रहा है। हर साल विभाग की टीमों से इनका भौतिक सत्यापन होता है, ऐसे में आश्चर्य की बात है कि ये आज तक पकड़े नहीं गए। इन्होंने कागजात में दिखाया कि उनके पास बड़ी संख्या में गाय हैं और अनुदान की राशि उठा ली। जैसलमेर नोडल की 25 गोशाला के आकस्मिक निरीक्षण के दौरान पता चला कि इनमें से मात्र 4 ही ऐसे हैं, जिनके पास भवन है। 20 गोशाला में पशुओं के लिए छाया तक की व्यवस्था नहीं।

सरकार द्वारा प्रत्येक वर्ष इन सभी को करोड़ों रुपयों का भुगतान किया जाता रहा है। 9 गोशालाओं में पिछले साल के मुकाबले पशुओं की संख्या कम हो गई। अब जाँच टीम की अनुशंसा के बाद इनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।

मुस्लिम होने के लिए सताया तो ‘एंटी सोशल’ हो गया: 10 लोगों की हत्या करने वाले अहमद के भाई का दावा

अमेरिका के कोलोराडो के बोल्डर स्थित सुपरमार्केट में कल (मार्च 23, 2021) फायरिंग कर 10 लोगों को हत्या करने वाले अहमद अल अलीवी अलीसा (Ahmad Al Aliwi Alissa) पुलिस की हिरासत में है। इस बीच उसके भाई ने दावा किया है कि अहमद मानसिक तौर पर शायद बीमार हो। भाई के मुताबिक हाई स्कूल में अहमद को उसके नाम और मुस्लिम होने के कारण सताया जाता था, जिसके कारण वह ‘एंटी सोशल’ हो गया था। 

वहीं डैमिन क्रूज नाम के एक व्यक्ति का कहना है कि वह अहमद को 5वीं कक्षा से जानता है। क्रूज का दावा है कि अहमद बहुत अकेला था। लोग उसके गुस्से के कारण उससे उलझते भी नहीं थे। क्रूज के मुताबिक अहमद अक्सर मुस्लिमों के साथ होते रवैए पर बात करता था। वह कहता था कि मुस्लिमों को बराबरी नहीं दी जा रही। उनके साथ बुरा बर्ताव होता है।

अहमद के एक पूर्व क्लासमेट की मानें तो वह (अहमद) अक्सर सोचता था कि उसे मुस्लिम होने के कारण प्रताड़ित किया जा रहा है। एक क्लासमेट के अनुसार, वह अपने मुस्लिम होने पर बात करता था और कहता था कि अगर किसी ने उसके साथ कुछ भी किया तो वह हेटक्राइम फाइल करेगा।

इतना ही नहीं अहमद अपने आपको नस्लवाद का पीड़ित बताता था और सोचता था कि लोग उसके बारे में अनाप-शनाप बोल रहे हैं। उसके एक रिश्तेदार ने ये भी बताया है कि सुपरमार्केट में गोलीबारी करने से दो दिन पहले उन्होंने उसे मशीन गन जैसी दिखने वाली चीज से खेलते देखा था।

2018 में अहमद को थर्ड डिग्री हमले का दोषी पाया गया था। उस समय उसने एक क्लासमेट पर हमला किया था। इसके बाद उसे 1 साल की सजा हुई थी। 

फेसबुक ने डिलीट की अहमद की सोशल मीडिया प्रोफाइल

शूटर अहमद की पैदाइश सीरिया की है। पुलिस ने अभी उसकी कोई जानकारी रिवील नहीं की है। मगर उसके सोशल मीडिया प्रोफाइल से पता चला है कि वह सीरिया में जन्मा और आधे से ज्यादा जीवन अमेरिका में बिताया। उसके कट्टरपंथी विचार वाले कई पोस्ट हर जगह वायरल होने के बाद फेसबुक ने उसके अकाउंट को डिलीट कर दिया है। उसकी प्रोफाइल न केवल फेसबुक से हटी है, बल्कि इंटरनेट की अर्काइव वेबसाइट से भी गायब है। फेसबुक का कहना है कि Dangerous Individuals and Organizations policy के तहत उसकी प्रोफाइल हटाई गई है। 

कुछ वायरल पोस्ट देख कर पता चलता है कि अहमद बेहद शक्की किस्म का शख्स है। हर चीज के लिए वह इस्लामोफोबिया को जिम्मेदार मानता है। 5 जुलाई 2019 को उसने अपने फोन के हैक होने के पीछे भी इस्लामोफोबिया को कारण बता दिया था।

इसके अलावा वह डोनाल्ड ट्रंप से नफरत करता था। वह अक्सर ऐसे आर्टिकल लिंक शेयर करता था जिसमें ट्रंप के विरोध में बातें हो या उनकी आलोचना हो।

वह कट्टर इस्लामी समर्थक था और खुलेआम समलैंगिकता का विरोध करता था। उसने एक पोस्ट में लिखा था, “अगर कोई सीधा इंसान जेल जाए और गे बनकर लौटे तो इसका मतलब ये नहीं होता कि वह अपनी मर्जी से गे बना है।”

बता दें किअहमद ने जिस सुपरमार्केट में गोलीबारी की थी वहाँ हमले के वक़्त अच्छी-खासी भीड़ थी। मरने वालों में एक पुलिस अधिकारी भी शामिल थे। फिलहाल इस वारदात के पीछे की मंशा का पता नहीं चल पाया है। फायरिंग में अहमद भी घायल हो गया था।

कानपुर में कबाड़ बेच कर ₹150 करोड़ का फर्जीवाड़ा: आलम और आसिफ गिरफ्तार, 24+ करोड़ रुपए की टैक्स चोरी

उत्तर प्रदेश के कानपुर में कबाड़ की आड़ में 150 करोड़ रुपए के फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। जीएसटी खुफिया महानिदेशालय की टीम ने इस मामले में संलिप्त दो युवकों को गिरफ्तार कर लिया है। बताया जा रहा है कि टीम ने 24.14 करोड़ रुपए की टैक्स चोरी पकड़ी है और करीब 95 लाख रुपए सीज किए हैं।

हिंदुस्तान में प्रकाशित खबर के मुताबिक, खुफिया एजेंसियों ने दो सगे भाइयों नूर आलम और मोहम्मद आसिफ को पकड़ा है। वे इन आरोपितों को महज चेहरा मान रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक इस पूरे खेल के पीछे किसी फैजल खान का नाम आ रहा है। फिलहाल दोनों आरोपितों को 14 दिन की रिमांड पर लिया गया है।

जीएसटी की खुफिया एजेंसियों ने कबाड़ की आड़ में बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी की सूचना मिलने के बाद कानपुर और लखनऊ यूनिट के अफसरों को इसके संदर्भ में सूचित किया। अफसरों ने कोयला नगर और उन्नाव के दो गोदामों पर छापेमारी की। ये गोदाम हिंद ट्रेडर्स के नाम पर चल रहे थे। वहीं, कबाड़ की सप्लाई गाजियाबाद और पंजाब की बड़ी स्टील कंपनियों को की जा रही थी।

बता दें कि बरामद दस्तावेजों की स्क्रूटनी में पाया गया कि हिंदुस्तान ट्रेडर्स, भारत इंडस्ट्रीज और रिमझिम स्टील्स ने बिना सप्लाई के बिल-वाउचर प्राप्त किए। 150 करोड़ रुपए के बिल बनाकर इन फर्मों ने बिना टैक्स दिए 24.14 करोड़ रुपए का इनपुट टैक्स क्रेडिट ले लिया।

कुल फर्जीवाड़ा 600 करोड़ रुपए से भी ज्यादा होने के आसार हैं। गोदामों से करीब 100 टन माल बरामद किया गया है।

‘कमरे में बुलाया और कहा समझौता करना पड़ेगा’: अंकिता लोखंडे ने बताया- फिल्म के बदले प्रोड्यूसर के साथ सोने की थी शर्त

टीवी सीरियल ‘पवित्र रिश्ता’ से मशहूर होने के बाद हाल में बॉलीवुड में एंट्री करने वाली अभिनेत्री अंकिता लोखंडे ने एक इंटरव्यू में कास्टिंग काउच को लेकर निजी अनुभव शेयर किया है। बॉलीवुड बब्बल को दिए इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि करियर के शुरुआती दिनों में उन्हें एक प्रोड्यूसर के साथ सोने को कहा गया था।

अंकिता ने खुद को बेहद बहुत मजबूत शख्सियत बताते हुए कहा कि वह कभी किसी को अपनी तरफ गलत ढंग से नहीं देखने देतीं। लेकिन शुरुआती दिनों में वह कास्टिंग काउच की दो बार शिकार हुईं। इंटरव्यू में अंकिता ने बताया,

“जब मैं केवल 19-20 साल की थी तो मुझे साउथ फिल्मों के लिए बुलाया गया था। उस दौरान एक आदमी ने मुझे कमरे में बुलाया और कहा कि हम आपसे कुछ पूछना चाहते हैं। उसके बाद वह बोला, आपको समझौता करना पड़ेगा।”

अंकिता ने आगे बताया, “तब मैं कमरे में अकेली थी तो मैंने हिम्मत दिखाई और पूछा, ठीक है बताइए किस तरह का समझौता करना होगा मुझे? क्या मुझे पार्टियों में जाना होगा या डिनर के लिए? फिल्म के प्रोड्यूसर क्‍या चाहते हैं? लेकिन उन्होंने जवाब दिया कि आपको प्रोड्यूसर के साथ सोना होगा।”

इतना सुनने के बाद अंकिता बताती हैं कि उन्होंने उस आदमी की बैंड बजा दी। उन्होंने जवाब दिया, “मुझे लगता है कि आपके प्रोड्यूसर को सोने के लिए लड़की चाहिए, न कि कोई प्रतिभाशाली लड़की। इसके बाद मैं वह वहाँ से चली आई। बाद में उन्होंने मुझसे माफी माँगी और कहा कि वह अपनी फिल्म में मुझे ही लेने की कोशिश करेंगे। लेकिन मैंने कहा कि अगर तुमने कोशिश की और मुझे ले भी लिया तो भी मुझे तुम्हारी फिल्म नहीं करनी है।”

दूसरा अनुभव शेयर करते हुए अंकिता ने कहा, “टीवी इंडस्ट्री में नाम कमाने के बाद जब मैं फिर से फिल्मों में वापस आई, तो एक बार फिर से मुझे कास्टिंग काउच का सामना करना पड़ा। तब मेरा सामना एक बड़े एक्टर से हुआ। जब मैं उनसे मिली और हाथ मिलाया तो मुझे वैसी वाइब्स मिलीं। मैंने जल्दी से अपने हाथ उसके पास से हटा दिए। मैं यह जान गई थी, अब मेरा यहाँ नहीं होगा, क्योंकि वहाँ देने और लेने वाला काम थ। मैं समझ गई थी कि ये जगह मेरे लिए नहीं है।”

बता दें कि अंकिता लोखंडे ने बॉलीवुड बब्बल को दिए अपने इंटरव्यू में सुशांत सिंह राजपूत के साथ अपने रिश्ते, उनसे हुए ब्रेकअप, अपने करियर, कास्टिंग काउच, नए रिलेशन जैसे तमाम मुद्दों पर बात की। साल 2019 में वह कंगना रनौत के साथ मणिकर्णिका में नजर आई थीं। उससे पहले उन्होंने ‘पवित्र रिश्ता’ सीरियल के अलावा झलक दिखला जा, कॉमेडी सर्कस जैसे रिएलटी शो में काम किया था।

दावा 1 लाख का, आए 5000 भी नहीं: उड़ते तम्बुओं के बीच बोले टिकैत- फिर टूटेंगे दिल्ली के बैरिकेड्स

घटते समर्थन के बीच ‘भारतीय किसान यूनियन (BKU)’ के नेता राकेश टिकैत की बयानबाजी तेज हो गई है। उन्होंने धमकी दी है कि किसान फिर से दिल्ली जाएँगे और बैरिकेड तोड़ेंगे। उन्होंने मंगलवार (मार्च 23, 2021) को जयपुर की एक रैली में ये बातें कही। शुक्रवार को किसान संगठनों ने ‘भारत बंद’ का भी आह्वान किया है।

राकेश टिकैत ने दावा किया है कि तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ लड़ रहे किसान संगठन एक हैं और उनमें विभाजन जैसी कोई बात नहीं है। बता दें कि ‘किसान आंदोलन’ में राजनीति और इसके नेताओं की मंशा पर सवाल उठाते हुए कई संगठन इससे अलग हो गए हैं। पश्चिम बंगाल में वामपंथियों ने इससे किनारा कर लिया। राकेश टिकैत ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने किसानों को धर्म व जाति के आधार पर विभाजित करने की कोशिश की, लेकिन असफल रही।

उन्होंने किसानों से कहा कि आपलोगों को दिल्ली जाकर फिर से बैरिकेडों को तोड़ना पड़ेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान पर भी कटाक्ष किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि नए कानूनों के तहत अब किसान अपनी फसल कहीं भी बेच सकते हैं। उन्होंने कहा कि किसान राज्यों की विधानसभाओं, सभी DM दफ्तरों और संसद भवन में बेच कर इसे सही साबित करेंगे, क्योंकि संसद से बेहतर भला कौन मंडी हो सकती है।

राजस्थान की राजधानी जयपुर के विद्याधर नगर स्टेडियम में टिकैत ने रैली की। कहने को तो ये ‘महापंचायत’ थी, लेकिन इसमें भीड़ ही नहीं थी। दावा 1 लाख की भीड़ जुटाने का किया गया था, लेकिन मुश्किल से 5000 लोग भी नहीं जुटे। आयोजकों ने अंधड़ और खराब मौसम पर सारा दोष मढ़ दिया और वक्ताओं ने कहा कि भीड़ न होने से सरकार खुश होगी।

रैली में भगदड़ सी स्थिति थी और एक व्यक्ति घायल भी हो गया। तंबू का पाइप एक युवक के सिर पर ही जा गिरा। राकेश टिकैत ने मोदी सरकार को किसान-विरोधी बताते हुए पूँजीपतियों के साथ समझौते करने के आरोप लगाया और कहा कि देश की जनता न जागी तो ये देश बेच कर चले जाएँगे। मंच पर कॉन्ग्रेस और भीम आर्मी के कई नेता जुटे। रैली की तैयारी करीब एक हफ्ते से चल रही थी, लेकिन फिर भी ये फ्लॉप रही।

इससे पहले बेंगलुरु के किसानों को भड़काते हुए टिकैत ने उन्हें दिल्ली की तर्ज पर पूरे शहर को घेरने को कहा था। उन्होंने कहा कि ये लड़ाई लंबी चलेगी और जब तक तीनों ‘काले कानून’ वापस नहीं हो जाते और MSP पर नया कानून नहीं आ जाता, तब तक हर शहर में ऐसे विरोध-प्रदर्शन शुरू करने होंगे। बता दें कि दिल्ली सीमा से अधिकतर किसान लौट चुके हैं और संगठनों के नेता अब भीड़ नहीं जुटा पा रहे हैं।

त्रिपुरा: स्कूल जा रही 8 साल की बच्ची को पार्क में ले गया SFI नेता शमीम अहमद, रेप के प्रयास में गिरफ्तार

त्रिपुरा में विप्लब देव के सत्ता में आने के बाद से पश्चिम बंगाल की तर्ज पर होने वाली हिंसा की घटनाओं में भारी कमी आई है। राज्य में अब विपक्ष के नेता कुकर्म करते हुए धरे जा रहे हैं। ताज़ा मामला उदयपुर के महारानी इलाके का है, जहाँ CPM नेता शमीम अहमद रेप का प्रयास करते हुए पकड़ा गया।

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री के OSD संजय मिश्रा ने बताया कि इस घटना के बाद CPM का असली चेहरा सामने आया है। उन्होंने बताया कि शमीम अहमद ने एक 8 साल की नाबालिग बच्ची के साथ रेप का प्रयास किया, जिसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। आरोप है कि शमीम अहमद ने लालच देकर बच्ची को फुसलाया और फिर उसे स्ताहनिया इको पार्क में ले गया। वहीं उसने रेप का प्रयास किया, लेकिन बाद में पकड़ा गया।

शमीम अहमद ‘स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI)’ का नेता है, जो CPI (M) का छात्र संघ है। उसके खिलाफ इंडियन पैनल कोड की धारा 354 (किसी महिला के साथ छेड़छाड़ या उत्पीड़न) और 506 (आपराधिक धमकी) और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम, 2012, (POCSO) एक्ट के सेक्शन 8 के तहत FIR दर्ज की गई है। जब उसने ये कुकृत्य किया, तब बच्ची स्कूल जा रही थी।

वो बहला-फुसला कर बच्ची को बाइक पर बिठा कर ले गया। वहाँ उसने बच्ची के साथ अश्लील हरकतें शुरू कर दी और उसके चेहरे पर किस करने लगा। साथ ही उसने लड़की के साथ हाथापाई भी की। जब बच्ची ने रोना-चिल्लाना शुरू किया तो उसने उसे चुप रहने के लिए धमकाया। फिर उसने ऑटो में बिठा कर लड़की को स्कूल भेज दिया। बच्ची ने घर जाकर अपनी माँ को पूरी घटना के बारे में बताया, जिसके बाद थाने में FIR दर्ज कराई गई।

‘जब हीरो गुप्तांग दिखाते थे तो तुम क्या करती थी’: रश्मि ही नहीं, कंगना के लिए भी घृणा दिखा चुका है हिंदूफोबिक अभिजीत सरकार

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के फैकल्टी मेंबर डॉ. अभिजीत सरकार के कुछ पुराने ट्वीटस वायरल हो रहे हैं। इनमें वह देश की एक राजनीतिक पार्टी और कंगना रनौत तथा पायल घोष जैसी अभिनेत्रियों के लिए अपनी कुंठा दिखा रहा है। इससे पहले रश्मि सामंत को निशाना बनाने के कारण सरकार चर्चा में रहा था। हिंदू पहचान के कारण निशाना बनाए जाने के बाद पिछले दिनों सामंत ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन की अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था

वायरल हो रहे ट्वीटस में से एक में अभिजीत सरकार ने कंगना रनौत के लिए कहा है कि वह अपनी कुछ ‘खास तस्वीरें’ ऋतिक रौशन को भेजती थीं और अब वह वही फोटो पार्टी के हर नेता को भी भेजती है? अभिजीत का ये ट्वीट 3 जनवरी 2021 का है। 

इसके बाद एक ट्वीट 22 सितंबर 2020 का है। कंगना ने तब अनुराग कश्यप के खिलाफ सेक्शुअल मिसकंडक्ट के आरोप लगाने वाली पायल घोष के समर्थन में एक ट्वीट किया था।

ट्वीट में कंगना ने कहा था, “पायल घोष ने जो कुछ भी कहा है, कई बड़े हीरोज ने मेरे साथ भी वैसा किया था, अचानक वैन या कमरे का दरवाजा बंद करके अपना गुप्तांग को दिखा देना या पार्टी में डांस फ्लोर पर दोस्ताना डांस के दौरान उनकी जीभ को आपके मुँह से लगा देना, काम के लिए अपॉइंटमेंट लेना और घर आकर तुम्हारे साथ जोर-जबरदस्ती करना।” 

कंगना का यह ट्वीट पायल घोष के आरोपों के समर्थन में था। दोनों अभिनेत्रियों ने बॉलीवुड के काले सच पर बेबाकी से बात रखी थी। लेकिन अभिजीत सरकार ने उन्हें सराहने के बजाय पहले कंगना से पूछा कि जब हीरो उन्हें गुप्तांग दिखाते थे, तो वो क्या करती थी। फिर पायल घोष के आरोपों को पेड कहते हुए पूछा, “क्या अनुराग कश्यप पर इल्जाम लगाने के लिए कोई राजनीतिक पार्टी तुम पर दबाव बना रही है? मैं बस जानने के इच्छुक हूँ।”

पायल के अन्य ट्वीट में जिसमें उन्होंने कहा था, “जो लोग कह रहे हैं कि ये सब राजनीति के लिए कर रही हूँ और मैं हालातों का फायदा उठा रही हूँ। वो पहले कल्पना करें कि यहाँ तुम्हारी बहन या बेटी मेरी जगह हो सकती थी या तुम्हारी माँ भी हो सकती थी…तब आकर बात करो।”  इस ट्वीट पर भी सरकार ने राजनीतिक पार्टी को बीच में घसीटा और कहा कि हमारी माँ-बहनें तुम्हारी पार्टी में नहीं हैं, इसलिए वह सुरक्षित हैं।

रश्मि सामंत के ख़िलाफ़ हिंदूविरोधी अभियान का नेतृत्व

अभिजीत ऑक्सफोर्ड यूनवर्सिटी के इतिहास विभाग के फैकल्टी सदस्य हैं। उन्होंने पिछले दिनों एक ऐसे हिंदूविरोधी अभियान का नेतृत्व किया जिसके कारण स्टूडेंट यूनियन की पहली भारतीय महिला अध्यक्ष रश्मि को इस्तीफा देना पड़ा था। रश्मि को बदनाम करने के लिए कुछ ट्वीट्स वायरल किए गए थे।

हालाँकि अब अभिजीत सरकार खुद अपने पुराने ट्वीट के कारण सोशल मीडिया पर लताड़े जा रहे हैं। उनके ट्वीट्स से साफ पता चलता है कि वे हिंदूफोबिक हैं जो मानता है कि बिना बीफ खाए हिंदू तरक्की नहीं कर सकता।

उनके अनुसार ऑक्सफोर्ड में दिवाली पर हिंदुओं को बीफ परोस दिया गया तो हल्ला करने की क्या जरूरत थी। वह कहते हैं कि ये देशी लोग 1857 के बाद से एक इंच आगे नहीं बढ़े हैं। ऐसे ही सरस्वती पूजन के दिन सरकार ने सोशल मीडिया पर बताया था कि बचपन में उन्होंने तमाम सरस्वती प्रतिमाएँ तोड़ी थीं।

अभिजीत सरकार के विरुद्ध ग्लोबल हिंदू फेडरेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर सतीश शर्मा ने शिकायत भी दायर की है। पुलिस ने बताया है कि अभिजीत के ख़िलाफ उन्हें शिकायत मिली है। उनपर आरोप है कि उन्होंने रश्मि के परिवार की तस्वीर इंस्टाग्राम पर पोस्ट की थी। पोस्ट में की गई टिप्पणी जाँच के दायरे में हैं।

रश्मि सामंत के साथ क्या हुआ?

पिछले दिनों  वामपंथी और हिंदू विरोधी प्रोपगेंडाबाजों ने ऑक्सफोर्ड में रश्मि सामंत के यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन की अध्यक्ष पद पर जीत के बाद उन्हें घेरना शुरू किया था। तरह-तरह के इल्जाम लगा कर उन्हें इस्तीफा देने को मजबूर किया गया था। उनके ख़िलाफ़ इस्लामोफोबिक, ट्रांसफोबिक होने के इल्जाम लगाए गए थे। साथ ही उन्हें हिंदू होने के लिए भी निशाना बनाया गया था। उनकी हालत ऐसी कर दी गई थी कि 24000 यूरो फीस चुकाने के बावजूद वह तंग होकर भारत आ गईं और मानसिक रूप से परेशान होने के कारण अस्पताल में भी भर्ती रहीं। रश्मि सामंत अपने साथ हुए नस्लीय भेदभाव के कारण इतनी दुखी हैं कि उन्हें अब ऑक्सफोर्ड जाना  सुरक्षित नहीं लगता।

जिस हत्यारे को ‘गोरा’ बता छाती कूट रहे थे लिबरल, वह 21 साल का अहमद निकला तो छाई खामोशी: सुपरमार्केट फायरिंग में 10 की गई थी जान

अमेरिका के कोलोराडो (Colorado) के बोल्डर स्थित सुपरमार्केट में फायरिंग कर के 10 लोगों को मौत के घाट उताने वाले शूटर की पहचान हो गई है। उसका नाम अहमद अल अलीवी अलीसा (Ahmad Al Aliwi Alissa) है। पुलिस ने 21 वर्षीय हत्यारे को हिरासत में ले लिया है। फायरिंग में वह भी घायल हो गया था, लिहाजा उसे पहले अस्पताल ले जाया गया। इसके बाद उस पर हत्या का मामला दर्ज कर जेल भेजने की प्रक्रिया शुरू होगी।

मंगलवार (मार्च 23, 2021) को उसने जिस सुपरमार्केट में गोलीबारी की, वहाँ अच्छी-खासी भीड़ थी। मरने वालों में एक पुलिस अधिकारी भी शामिल हैं। फिलहाल इस वारदात के पीछे की मंशा का पता नहीं चल पाया है। लेकिन माना जा रहा है कि हमलावर अकेला ही था। उसने हल्के वजन वाले AR-15 सेमी-ऑटोमैटिक राइफल का प्रयोग किया। पुलिस हथियार का पता लगाने में जुटी हुई है।

हमलावर ने अपनी ज़िंदगी का एक बड़ा हिस्सा संयुक्त राष्ट्र अमेरिका में ही बिताया है। सबसे बड़ी बात तो ये है कि उसकी पहचान बाहर आने से पहले अमेरिका की उप राष्ट्रपति कमला हैरिस की भतीजी मीना हैरिस ने इस नरसंहार के लिए किसी ‘श्वेत व्यक्ति’ को जिम्मेदार ठहराया था। मीना ने लिखा था कि अटलांटा शूट को अभी एक सप्ताह भी नहीं हुए हैं और ‘हिंसक श्वेत लोग’ हमारे लोकतंत्र के लिए बड़ा ख़तरा हैं।

मीना ने लिखा कि वो बोल्डर शूटिंग के बारे में देखते ही समझ गईं। जब हत्यारे की पहचान बाहर आ गई तो मीना हैरिस ने अपने उन ट्वीट्स को डिलीट कर लिया और कहा कि उन्होंने उसकी चमड़ी के रंग को देख कर अंदाज़ा लगाया था कि वो कोई ‘श्वेत व्यक्ति’ रहा होगा। लेकिन, उन्होंने इसे फैक्ट बताते हुए दोहराया कि अमेरिका में अधिकतर मास शूटिंग श्वेत व्यक्ति ही करते हैं। मीना हैरिस को अपनी मौसी के नाम पर ब्रांड बेचने को लेकर ह्वाइट हाउस से भी फटकार लग चुकी है।

वहीं हत्यारे अहमद अल अलीवी अलीसा के फेसबुक अकाउंट से पता चला है कि वह राष्ट्रपति जो बायडेन की डेमोक्रेट पार्टी का समर्थक था और पूर्व-राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के लिए उसने अपशब्दों का इस्तेमाल भी किया था। अब उसका फेसबुक अकाउंट भी हाइड बता रहा है। उसने अमेरिका में बढ़ते इस्लामोफोबिया पर चिंता जताई थी। फेसबुक पर वो अक्सर रिपब्लिकन पार्टी के बारे में लिखता रहता था, जिसके कई स्क्रीनशॉट्स सामने आए हैं।

मीना हैरिस ने दिखाया अपना लिबरल रंग

अरवाडा के रहने वाले अहमद अल अलीवी अलीसी के बारे में पता चला है कि वह गुस्सैल और हिंसक है। एक बार कुश्ती का मैच हारने के बाद वो अजीब ढंग से चिल्लाने लगा था और कमरा बंद कर ऐसा व्यवहार कर रहा था, जैसे सभी को मार डालेगा। वो खुद के मुस्लिम होने की बातें करता था और कोई कुछ कह दे तो इसे हेट क्राइम बताता था।

सिर्फ़ मीना हैरिस ही नहीं बल्कि लिबरल गिरोह के कई लोगों ने उसकी पहचान बाहर आने से पहले अपना रंग दिखाया था। एक लेखिका ने लिखा कि किसी व्हाइट (गोरा) व्यक्ति की ज़िंदगी नहीं अच्छी होगी तो वो दूसरों को मार डालता है। हेमल झावेरी ने लिखा कि हमेशा कोई व्हाइट व्यक्ति ही ऐसा करता है। एमी सिसीकिनद नामक फेमिनिस्ट ने लिखा कि मरने वाले अश्वेत ही रहे होंगे। लेकिन, आरोपित के मुस्लिम निकलने के बाद सभी शांत हो गए।