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दिल्ली में कोई भी नया अस्‍पताल, फ्लाईओवर नहीं बनवाया: AAP की खुली पोल, 2015-19 के बीच RTI से बड़ा खुलासा

दिल्ली की सत्ता पर काबिज आम आदमी पार्टी एक बार फिर से सवालों के घेरे में है। केजरीवाल सरकार पर आरोप है कि उन्होंने 2015 से 2019 के बीच कई समस्‍याओं के बावजूद दिल्ली में कोई भी नया अस्‍पताल और फ्लाईओवर नहीं बनाया है। दिल्ली सरकार के विकास के चौतरफा झूठे दावों का खुलासा आरटीआई (RTI) में हुआ है।

सत्ता में आने से पहले ‘आप’ ने दिल्ली की जनता से कई लोक लुभावन वायदे किए थे, जो अब तक धरातल पर नजर नहीं आए। वहीं, सीएम केजरीवाल ने दावा किया है कि पिछले साढ़े चार साल में उनकी सरकार ने 23 फ्लाईओवर बनाए हैं, लेकिन वास्तविकता इसके उलट है कि दिल्ली में AAP सरकार ने वर्षों से केवल विज्ञापन ही दिया है।

तेजपाल सिंह ने आरटीआई याचिका में इस संबंध में सवाल पूछे थे। जब संबंधित विभागों ने अपने-अपने जवाब भेज दिए तो यह पक्का हो गया कि AAP सरकार द्वारा लगातार किए गए लोक लुभावन दावों के विपरीत ना तो कोई अस्पताल बनाया गया और ना ही 2015 से 2019 के बीच दिल्ली में किसी फ्लाईओवर का निर्माण किया गया।

दिल्ली सरकार द्वारा पिछले 5 वर्षों में स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं, इसकी जानकारी लेने के लिए साल 2019 में यह आरटीआई दायर की गई थी। नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष अक्षय लाकड़ा ने आरटीआई द्वारा 3 जुलाई 2019 को पूछे गए सवालों के जवाबों की प्रति को शुक्रवार (2 अप्रैल, 2021) को ट्वीट किया है।

उन्होंने लिखा है, ”RTI से खुलासा हुआ कि 1 अप्रैल 2015 से लेकर 31 मार्च 2019 के बीच दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार ने ना ही किसी हॉस्पिटल को अनुदान दिया और न ही किसी नए फ्लाईओवर का निर्माण करवाया। बस झूठे विज्ञापन दे-दे कर जनता को मूर्ख बना लिया और जनता भी इसकी बातों में आ गई।”

गौरतलब है कि ‘आप’ ने चुनावी वायदे करते हुए जनता को कई मुफ्त योजनाओं का प्रलोभन दिया था। बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएँ मुहैया कराने को प्राथमिकता बताते हुए उन्होंने इसे चुनावी अभियान के रूप में इस्तेमाल किया। साल 2015 में चुनावी घोषणापत्र में ‘आप’ ने राजधानी के अस्पतालों में कुल बिस्तरों की संख्याा 40,000 तक बढ़ाने का वादा किया था।

मिलिए येल के प्रोफेसर मुबारक से, बांग्लादेश में मंदिरों पर इस्लामी कट्टरपंथियों के हमले का दोष मोदी के मत्थे डाला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बांग्लादेश दौरे के विरोध में इस्लामी कट्टरपंथियों ने न केवल हिंसक प्रदर्शन किए थे, बल्कि मंदिरों को भी निशाना बनाया था। इसमें हिफाजत-ए-इस्लामी नामक संगठन की खास भूमिका थी। पाकिस्तानी इशारों पर काम करने वाला यह कट्टरपंथी संगठन बांग्लादेश में इस्लामिक हुकूमत की वकालत करता है।

अब इस हिंसा को जायज ठहराने की कोशिश येल यूनिवर्सिटी में इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर अहमद मुशफिक मुबारक ने की एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए की है। पोस्ट में उन्होंने हिफाजत की हिंसा का बचाव करते हुए इसके लिए मोदी के दौरे को जिम्मेदार ठहराया है।

मुबारक के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

मुबारक ने 29 मार्च को किए गए ट्वीट में लिखा है कि बांग्लादेश मोदी के बुने हुए जाल में फँस गया। मोदी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में वोट करने वाले कुछ बंगालियों के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले मंदिर की यात्रा की। उनकी इस यात्रा से बांग्लादेश में सांप्रदायिक दंगे प्रारंभ हो गए। मुबारक यहीं नहीं रुका। उसने कहा कि मोदी पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश सीमा के दोनों ओर सांप्रदायिक माहौल बनाने में सफल रहे। क्यों हम हिन्दू-मुस्लिम के बीच विभाजनकारी राजनीति का हिस्सा बन रहे हैं? येल के इस प्रोफेसर ने कहा कि बांग्लादेश में हुई हिन्दू-विरोधी हिंसाओं के जिम्मेदार पीएम मोदी ही हैं।

बांग्लादेश में हिफाजत-ए-इस्लाम के द्वारा हिंदुओं के विरुद्ध की गई हिंसा की रिपोर्ट्स मीडिया में आने के बाद मुबारक ‘सेक्युलर’ बन गया और भारत, बांग्लादेश और पाकिस्तान में सुधार की बाते करने लगा। उसने हिन्दू मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर हुए इस्लामी हमले को नजरअंदाज करते हुए कहा कि बेहतर होगा यदि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों को सुरक्षित रखने में मुसलमान आगे आएँ और भारत में अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे व्यवहार के विरुद्ध हिन्दू अपनी आवाज उठाएँ। उसने आगे कहा कि यदि अल्पसंख्यकों के लिए मजबूती से आवाज उठाई जाए तो बांग्लादेश का हिफाजत-ए-इस्लाम, भारत में मोदी और पाकिस्तान के मुल्ला हमें कभी भी बाँट नहीं पाएँगे।

मुबारक के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

मुबारक की इस गैर-तार्किक और मुस्लिमों के संतुलन के लिए की गई तुलना पर उसकी आलोचना भी हुई। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने उसे आइना दिखाया।

प्रदीप नाम के एक ट्विटर यूजर ने लिखा कि म्यांमार में रोहिंग्या, हिंदुओं को मार रहे हैं लेकिन वे ही विक्टिम हैं। प्रदीप ने मुबारक को कहा कि यदि वह मुसलमानों को विक्टिम मानने की मानसिकता को छोड़ दे तो उसे पता चलेगा कि मुस्लिम सबसे सुरक्षित भारत में ही हैं।   

ट्वीट का स्क्रीनशॉट

एक यूजर ने लिखा कि भारत में मुस्लिम नेता जामा मस्जिद या अजमेर शरीफ जाते हैं, तब तो कोई हिन्दू इस पर प्रश्न नहीं करता और न ही सांप्रदायिक होता है। यूजर ने मुबारक से कहा कि या तो वह अज्ञानी है अथवा हिन्दूफोबिक।

ट्वीट का स्क्रीनशॉट

सैंडी नाम के एक यूजर ने मुबारक का जवाब देते हुए लिखा कि भारत की तुलना अन्य देशों से करने से पहले वह भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की स्थिति को सन 1947 में और वर्तमान में देखे। उसे समझ आ जाएगा कि पाकिस्तान और बांग्लादेश में अल्पसंख्यक मुट्ठी भर हैं, जबकि भारत में उनकी संख्या दुगुनी हो चुकी है।

ट्वीट का स्क्रीनशॉट

हिन्दू श्मशान और मंदिर पर इस्लामिक हमला :

पीएम मोदी की दो दिवसीय बांग्लादेश की यात्रा के दौरान इस्लामिक संगठन द्वारा उनके विरोध में हिन्दू मंदिरों पर हमला किया गया। यात्रा समाप्त होने के बाद भी हमले जारी रहे। मगुरा जिले के मोहम्मदपुर में 400 वर्ष पुराने अष्टग्राम महा श्मशान और राधगोबिंद आश्रम में तोड़ फोड़ की गई और उनके कई हिस्सों को आग के हवाले कर दिया गया। इस घटना में रथ और भगवान की मूर्तियाँ भी जल कर रख हो गईं थी। इस हिन्दू विरोधी हिंसा के पीछे हिफाजत-ए-इस्लाम का हाथ था जो हिंदुओं के प्रति अपनी घृणा के लिए जाना जाता रहा है।

‘वोट न बँटने दें’: थर्ड फेज से पहले ‘गोत्र’ वाली ममता ने बदली चाल, मुस्लिम ‘भाई-बहनों’ को किया याद

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के तीसरे चरण की सीटों पर 6 अप्रैल को वोट पड़ेंगे। उससे पहले ममता बनर्जी ने ‘मुस्लिम भाई-बहनों’ को याद किया है। उनसे अपना वोट नहीं बँटने देने की अपील की है।

वैसे मुस्लिम तुष्टिकरण ममता बनर्जी की राजनीति का अहम पहलू रहा है। लेकिन ‘जय श्रीराम’ के नारे से बिदकने वाली बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पहले दो चरण के चुनावों में अपने हिंदू होने की दुहाई देते नजर आईं थी। न केवल वे मंदिर जाते, चंडी पाठ करते दिखीं बल्कि मतदाताओं को यह भी बताया कि वे किस गोत्र से ताल्लकुक रखती हैं।

अब सारी स्थिति देखते हुए वह एक बार फिर अपने पुराने एजेंडे पर लौट आईं हैं। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार नॉर्थ परगना की एक चुनाव रैली में उन्होंने कहा, “मैं सभी अल्पसंख्यक भाइयों और बहनों से अनुरोध करती हूँ कि वे अपना वोट न बॅंटने दें।”

बता दें कि ममता बनर्जी ने पूरे चुनाव में भाजपा पर लगातार ‘जय श्रीराम’ नारे के कारण विभाजनकारी राजनीति करने का आरोप लगाया है। लेकिन अब सवाल है कि वह खुद अलग से मुस्लिम वोटरों से अपील करके कौन सी धर्मनिरपेक्षता की नई परिभाषा गढ़ रही हैं। शायद ममता बनर्जी को पता लगने लगा है कि इन चुनावों के बाद सत्ता उनके हाथ से निकल जाएँगी, इसलिए उन्हें तीसरे चरण से पहले अपने मुस्लिम भाई-बहनों की याद आ गई।

उल्लेखनीय है कि बंगाल विधानसभा चुनाव का मुख्या मुकाबला तृणमूल कॉन्ग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच होता नजर आ रहा है। लेकिन दो अन्य गुट भी हैं जो राज्य में मुस्लिमों से वोट पाने की आस लगाए बैठे हैं। पहली असुद्दीन ओवैसी की AIMIM है, जिसके कारण ममता बनर्जी को डर है कि उनके वोट ओवैसी की पार्टी ले जाएगी। दूसरा गुट CPIM, कॉन्ग्रेस और अब्बास सिद्दिकी का गठबंधन है। कहा जा रहा है कि बंगाल में अब्बास सिद्दकी की 30-35 सीटों पर अच्छी पकड़ है।

इन्हीं दो गुटों के कारण ममता बनर्जी को अपना मुस्लिम वोट बैंक बँट जाने का डर है। यही वजह है कि उन्होंने राज्य में भाजपा के बढ़ते प्रभाव को देख खुलेआम अपने भाई-बहनों को याद किया है।

मालूम हो कि कुछ समय पहले बंगाल की मुख्यमंत्री ने स्वयं स्वीकारा था कि वह राज्य में भाजपा को अकेले नहीं हरा पाएँगी, इसलिए उन्हें विपक्षी पार्टियों का साथ चाहिए। उन्होंने इस संबंध में बड़ी विपक्षी पार्टियों को खत लिखकर समर्थन माँगा था। ये पत्र पहले चरण के बाद लिखा गया था।

ममता ने यह खत 15 गैर भाजपा नेताओं को भेजा था। इसमें कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी, एनसीपी प्रमुख शरद पवार, डीएमके चीफ एमके स्टालिन, झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक, आँध्र प्रदेश के सीएम जगन मोहन रेड्डी, राजद प्रमुख तेजस्वी यादव, सपा प्रमुख अखिलेश यादव और नेशनल कॉन्फ्रेंस के फारूक अब्दुल्ला के साथ पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती भी शामिल थीं।

महाराष्ट्र के बाद अब छत्तीसगढ़ में भी बेकाबू हुआ कोरोना: दुर्ग जिले में नहीं मिल रही शवों के अंतिम संस्कार के लिए जगह

भारत में कोरोना की चौथी लहर ने कई राज्यों की स्थिति चिंताजनक बना दी है। सिर्फ़ पिछले 24 घंटों की बात करें तो यहाँ कुल 89,129 मामले रिपोर्ट किए गए। वहीं 714 लोगों को इस संक्रमण के कारण जान गँवानी पड़ी। 

स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, देश में इस हफ्ते की शुरुआत में कोरोना वायरस संक्रमण के कुल 1 करोड़ 20 लाख 39 हजार 644 मामले थे। लेकिन सिर्फ 5 दिनों के अंदर ही देश में कोरोना के 3,52,616 नए मामले रिपोर्ट हुए। इन 5 दिनों में ही कोरोना की वजह से 2,267 मौतें भी हुईं।

हाल में कैबिनेट सचिव राजीव गौबा के साथ स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने देश में कोरोना के मौजूदा हालातों पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करके 11 राज्य में स्थिति को चिंताजनक बताया था।

इन 11 राज्यों में महाराष्ट्र, पंजाब, कर्नाटक, केरल, छत्तीसगढ़, चंडीगढ़, गुजरात, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, दिल्ली और हरियाणा शामिल हैं। केंद्र सरकार ने राज्य प्रशासन से अपने अपने प्रदेश में टीकाकरण में तेजी लाने को कहा है। 31 मार्च तक इन राज्यों की कोविड मामलों में 90 फीसदी और बीमारी के चलते होने वाली मौतों में 90.5 फीसदी की भागीदारी रही है।

स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने बताया कि मार्च में कोरोना संक्रमण में बढ़ोतरी की दर 6.8 फीसद तक पहुँच गई है, जो पिछले साल के जून में सबसे अधिक वृद्धि दर 5.5 फीसद से भी अधिक है। इसी तरह से कोरोना के कारण होने वाली मौतों में भी 5.5 फीसद की बढ़ोतरी देखी गई है।

11 राज्यों में कोरोना की स्थिति

महाराष्ट्र में कोरोना की स्थिति दिन पर दिन हाथ से निकल रही है। शुक्रवार को अकेले महाराष्ट्र से 47,827 केस आए जबकि पूरे अमेरिका में 69,986 केस दर्ज किए गए। यानी महाराष्ट्र से कवेल कुछ हजार ज्यादा केस।

इस समय महाराष्ट्र कुल मौतों के मामले में भी वैश्विक स्तर पर 14वें स्थान पर पहुँच गया है। वहाँ मरने वालों की संख्या 55,379 हो गई है और कुल संक्रमितों की संख्या में 29 लाख 4 हजार 76 है। कोरोना मरीजों के मामले में महाराष्ट्र 10 वें नंबर है। इससे ऊपर सूची में सिर्फ़ अमेरिका, ब्राजील, फ्रांस, रूस और ब्रिटेन हैं।

महाराष्ट्र के बाद कोरोना वायरस के कारण छत्तीसगढ़ सबसे ज्यादा प्रभावित प्रदेश होता जा रहा है। शुक्रवार को छत्तीसगढ़ में कोरोना वायरस के 4 हजार 174 नए मामले रिपोर्ट किए गए। जिसके बाद कुल कोरोना संक्रमितों की संख्या वहाँ 3 लाख 57 हजार 978 तक पहुँच गई।

यहाँ के दुर्ग जिले का ऐसा हाल है कि कोरोना से मौतों का आँकड़ा बेकाबू हो रहा है। दुर्ग जिले में 964 मामले आए हैं। स्थिति ऐसी हो चुकी है कि वहाँ अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट और कब्रिस्तानों में जगह नहीं मिल पा रही। प्रशासन ने यहाँ 6 अप्रैल से 14 अप्रैल तक के लिए लॉकडाउन लगा दिया है।

समाचार एजेंसी एएनआई को दुर्ग जिला कलेक्टर ने बताया, “इससे पहले अंतिम संस्कार दो जगहों पर हो रहे थे। बीते दो दिनों में कोरोना से मौतों का आँकड़ा बढ़ गया है और बहुत से शवों को श्मशान घाट लाया जा रहा है। हम अंतिम संस्कार के लिए 2-3 और जगहों का प्रबंध कर रहे हैं।”

दिल्ली में कोरोना के मामलों में बहुत तेजी से बढ़ोतरी हुई है। शुक्रवार को दिल्ली में कोरोना के 3,594 नए केस आए, जो कि इस साल सबसे ज्यादा हैं। इससे पहले आखिरी बार 4 दिसंबर को दिल्ली में सबसे ज्यादा 4 हजार 67 मामले दर्ज किए गए थे।

कर्नाटक में कोविड 19 से जुड़ी नई गाइडलाइन जारी कर दी गई है। राज्य में सिनेमा हॉल, पब, बार, क्लब और रेस्ट्रॉन्ट आदि को 50 प्रतिशत क्षमता के साथ संचालित किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, जिम और स्विमिंग पूलों को पूरी तरह से बंद करने का आदेश दिया गया है। शुक्रवार को वहाँ 4,991 मामले सामने आए और 6 लोगों की मौत हो गई।

इसी तरह शुक्रवार को गुजरात में 2,640 मामले दर्ज किए गए। पंजाब में ये संख्या 2,903 रही। तमिलनाडु में भी शुक्रवार को कोरोना संक्रमितों का आँकड़ा 3 हजार पार गया। इसी प्रकार मध्य प्रदेश में 2,777 मामले सामने आए।

हरियाणा में वैक्सीन का काम तेजी से चलने के बावजूद वहाँ शुक्रवार को 1861 केस सामने आए हैं। हालाँकि राज्य में 17 लोगों को वैक्सीन डोज लगाई जा चुकी है। केरल में आज 2506 कोरोना के नए मामले सामने आए हैं। वहाँ कुल 26,407 एक्टिव केस हैं। चंडीगढ़ में भी कोरोना संक्रमितों की संख्या 3 हजार पार कर गई है।

‘इमरान’ ने पलटा ‘इमरान’ का फैसला: 7 दिन पहले मंत्री की हाँ, PM की कुर्सी पर बैठते ही ना: कॉमेडी कंट्री पाकिस्तान

पाकिस्तान ने भारत से कॉटन और चीनी के आयात को पुनः प्रारंभ करने का निर्णय रद्द कर दिया है। गौरतलब है कि हाल ही में पाकिस्तान की सरकारी कमिटी ने भारत से आयात प्रारंभ करने की स्वीकृति प्रदान की थी किन्तु गुरुवार (1, अप्रैल) को कैबिनेट की मीटिंग में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कमिटी की सिफारिशों को खारिज करते हुए भारत से होने वाले आयात को खारिज कर दिया।

पहले यह खबर आम थी, अब खास बन गई है। कारण एक चुटकुला है। पाकिस्तान में इमरान खान नाम के एक मंत्री ने भारत के साथ व्यापार शुरू करने पर हामी भरी थी। हास्यास्पद यह है कि इमरान खान नाम के ही प्रधानमंत्री ने भारत के साथ व्यापार नहीं करने पर भी हामी भरी। और चुटकुला यह है कि मंत्री इमरान खान और प्रधानमंत्री इमरान खान दोनों एक ही इंसान है।

न्यूज18 द्वारा एक्सक्लूसिवली प्राप्त किए गए एक दस्तावेज के अनुसार 26 मार्च को इमरान खान ने वाणिज्य मंत्री के तौर पर कैबिनेट की आर्थिक समन्वयन समिति (ECC) की उन सिफारिशों को मंजूरी दी थी, जिसमें भारत से व्यापार संबंधों को पुनः प्रारंभ करने की बात कही गई थी। अब 6 दिनों के बाद इमरान खान ने ही प्रधानमंत्री के रूप में कमिटी की इन सिफारिशों को खारिज कर दिया।

न्यूज18 की खबर के अनुसार पाकिस्तान कैबिनेट से यह माँग की गई थी कि वो चीनी के आयात की स्वीकृति प्रदान करे। इस दस्तावेज में ‘भूमि और समुद्री मार्ग’ से आयातकों को 30 जून 2021 तक भारत से 3 लाख मिलियन टन के आयात की अनुमति देने की बात भी कही गई है। यह दस्तावेज 26 मार्च का बताया जा रहा है और उसमें यह भी कहा गया है कि भारत से व्यापार प्रारंभ करने के ECC के प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री इमरान खान ने वाणिज्य मंत्री के तौर पर विचार किया और उसे स्वीकृति प्रदान की।

फिर दिन आया गुरुवार यानी 1 अप्रैल। पाकिस्तान में भारत के साथ ‘द्विपक्षीय’ संबंधों पर ‘विचार-विमर्श’ करने के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई गई। इसमें यह निर्णय लिया गया कि जब तक भारत, जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 3701 को पुनः लागू नहीं करता, तब तक भारत के साथ किसी भी तरीके का व्यापार प्रारंभ नहीं किया जाएगा।

है ना चुटकुला! इमरान खान ने ही इमरान खान के निर्णय को पलट दिया और कहा कि भारत के साथ व्यापार प्रारंभ करने से कश्मीर के लोगों में पाकिस्तान के प्रति गलत धारणा विकसित होगी।

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने भी कहा कि जब तक भारत जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने के अपने निर्णय पर पुनर्विचार नहीं करता, तब तक भारत-पाक संबंध सामान्य नहीं हो पाएँगे।

‘याद रखना सबके घर में माँ-बहन है’: हीरोइन से TMC कैंडिडेट बनी कौशानी बनर्जी धमका कर माँग रही वोट

हीरोइन से तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की उम्मीदवार बनीं कौशानी बनर्जी का एक वीडियो वायरल हो रहा। इसमें वह वोटरों को धमकाती दिख रही हैं। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में कौशानी कृष्णानगर (उत्तर) सीट से किस्मत आजमा रहीं हैं।

एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए वह एक उन्होंने एक शख्स को खींचा और पूछा, “तुम बीजेपी से हो? इधर आओ।” उसी समय तृणमूल कॉन्ग्रेस के ‘अति उत्साही’ कार्यकर्ता ‘जय बंगला’ का नारा लगाने लगते हैं। इसके बाद कौशानी बनर्जी कहती हैं, “सबके घर में माँ-बहन हैं। वोट देते समय याद रखना।”

(Video Courtesy: Youtube/News 18 Bangla)

माताओं-बहनों का संदर्भ देकर कौशानी ने यह जताने की कोशिश की कि बीजेपी को वोट देने पर उनकी परिवार की महिलाओं के साथ अत्याचार होगा। हालाँकि यह स्पष्ट रूप से नहीं कहा गया है, लेकिन उनके बयान के कहने का यह मतलब निकाला जा रहा है कि टीएमसी के लिए मतदान नहीं करने से पार्टी का गुस्सा समाज की महिलाओं पर उतर सकता है।

बीजेपी की राज्य इकाई ने कौशानी बनर्जी की टिप्पणी के लिए तृणमूल कॉन्ग्रेस पर पलटवार करते हुए ट्वीट किया, “इस तरह उन्होंने बंगाल की महिलाओं को धमकी दी, यह पिशी (ममता बनर्जी की) संस्कृति है। बंगाल की महिलाएँ निश्चित रूप से पीशी शासन के तहत सुरक्षित नहीं हैं।”

यह पहली बार नहीं है कि चुनाव प्रचार के दौरान तृणमूल कॉन्ग्रेस के किसी उम्मीदवार ने डराने-धमकाने वाली रणनीति का सहारा लिया है। शुक्रवार (अप्रैल 2, 2021) को अलीपुरद्वार जिले के फलकता में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा, “केंद्रीय सुरक्षाकर्मी, जो बाहर से आए हैं, आपको डराने का प्रयास करेंगे। कल, उन्होंने नंदीग्राम में किया। चुनाव शुरू होने से लगभग 48 घंटे पहले, केंद्रीय सुरक्षा बल गाँवों में जाते हैं और लोगों को टीएमसी को वोट न देने के लिए डराते हैं। वे लोगों को टीएमसी के लिए मतदान करने के खिलाफ चेतावनी देते हैं।”

ममता बनर्जी ने दावा किया कि तृणमूल कॉन्ग्रेस को हराने के लिए केंद्रीय सुरक्षाकर्मी भाजपा के साथ मिलकर चाटुकारिता कर रहे हैं। फलकता के लोगों को हिंसक साधनों का सहारा लेने के लिए उकसाते हुए कहा, “उन्हें मत सुनो। अगर वे आपको डराने-धमकाने की कोशिश करते हैं, तो आपको एकजुट होकर हँसुआ, लाठी और झाड़ू से उनका पीछा करना चाहिए।”

केरल की ननों के साथ बदसलूकी मामले में UP पुलिस ने 3 को किया गिरफ्तार, गृह मंत्री अमित शाह ने दिया था आश्वासन

उत्तर प्रदेश के झाँसी में 19 मार्च 2021 को दो ननों समेत 4 महिलाओं के साथ हुए दुर्व्यवहार के मामले में पुलिस ने 3 लोगों को गिरफ्तार किया है। बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने 19 मार्च को इन ननों पर धर्मांतरण करवाने का आरोप लगाते हुए शिकायत दी थी।

शुक्रवार को सर्कल ऑफिसर नीम खान मंसूरी ने बताया, “गुरुवार की रात, स्टेशन पर गश्त के दौरान, जीआरपी एसएचओ सुनील कुमार सिंह को सूचना मिली कि बुकिंग हॉल के पास दो व्यक्ति पुलिसकर्मियों के साथ बहस कर रहे हैं। वह आंदोलन शुरू करने की धमकी देते हुए दावा कर रहे थे कि पुलिस ने मामले में उचित कार्रवाई नहीं की और ननों को जाने दिया।”

उन्होंने बताया कि इससे पहले मामले में दोनों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। लेकिन इस घटना के बाद पुलिस ने ननों के साथ दुर्व्यवहार करने के मामले में अंचल अरजरिया (Anchal Arjaria) और पुरुकेश अमारया (Purukes Amraya) को गिरफ्तार किया। बाद में पुलिस ने अजय शंकर तिवारी, जिन्होंने इस पूरे केस में सबसे पहले शिकायत की थी, उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया।

द न्यूज मिनट के अनुसार, तीनों को पुलिस ने लोकल मजिस्ट्रेट के सामने पेश कर 14 दिन के लिए जेल भेज दिया है। मामले के प्रकाश में आने के बाद पुलिस ने कहा कि बजरंग दल द्वारा दायर की गई शिकायत का कोई आधार नहीं था, इसलिए चारों महिलाओं को अगली ट्रेन से ओडिशा भेज दिया गया।

इस बीच साइरो मालाबार चर्च ने बयान जारी कर इसे सुनियोजित हमला बताया। वहीं केरल सीएम पिनरई विजयन ने भी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को खत लिख कर मामले में कार्रवाई की माँग की, जिस पर अमित शाह ने उन्हें जाँच का आश्वासन दिया।

अमित शाह ने कहा, “ननों के समूह के साथ हुई कथित बदसलूकी के मामले में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मैं केरल के लोगों को यह आश्वासन देना चाहूँगा कि इस मामले के दोषियों को यथाशीघ्र न्याय के शिकंजे में लाया जाएगा।”

बता दें कि 19 मार्च को उत्तर प्रदेश के झाँसी में उत्कल एक्सप्रेस के कोच B-2 से यात्रा कर रहीं दो नन और दो ‘पोस्टुलेंट’ को रेलवे पुलिस ने ट्रेन से उतार कर पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था। बजरंग दल के स्थानीय कार्यकर्ताओं ने शिकायत की थी कि दो महिलाओं को कथित तौर पर जबरन धर्म परिवर्तन के लिए ले जाया जा रहा है और इसके बाद इन नन को हिरासत में लिया गया।

अब NIA ने सचिन वाजे से जुड़ी मर्सिडीज बरामद की, एंटीलिया मामले में अब तक 8 गाड़ियाँ जब्त

एंटीलिया बम कांड में नया मोड़ सामने आया है। बताया जा रहा है कि एनआईए (NIA) ने आज मुंबई से एक और लग्जरी कार बरामद की है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सफेद रंग की नई मर्सिडीज कार जिसका रजिस्ट्रेशन नंबर MH 46 X 3420 है, उसे जब्त कर NIA कार्यालय लाया गया है। इसकी जाँच की जा रही है कि कार का सचिन वाजे और मनसुख हिरेन की मौत के मामले से कोई संबंध है या नहीं।

अब तक एनआईए ने इस केस में आधा दर्जन से अधिक वाहनों को जब्त किया है, जो कथित तौर पर वाजे द्वारा इस्तेमाल किए गए थे। व्हीकल रजिस्ट्रेशन डेटाबेस के अनुसार, कार मर्सिडीज एमएल 250 सीडीआई है, जो पनवेल आरटीओ से रजिस्टर है। इसके मालिक की पहचान गगनप्रीत सिंह बेदी के रूप में हुई है।

गौरतलब है कि एजेंसी ने सचिन वाजे की गिरफ्तारी के बाद से 8 कारें बरामद की हैं। 30 मार्च को एनआईए ने नवी मुंबई से सचिन वाजे के नाम रजिस्टर एक महँगी कार मित्सुबिशी आउटलैंडर एसयूवी (स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल) जब्त की थी। इससे पहले एजेंसी ने 6 अन्य विभिन्न वाहनों को भी जब्त किया था, जो कथित तौर पर वाजे द्वारा उपयोग में लाई गई थी।

NIA को मीठी नदी से भी कई अहम सबूत हाथ लगे हैं। नदी से निकाले गए CCTV के 2 DVR जाँच एजेंसी को मिले। गोताखोरों ने नदी से दो CPU और एक ही नंबर की दो नंबर प्लेट निकाली थी। इसके साथ ही नदी से एक प्रिंटर भी निकाला गया था, जिसे कथित तौर पर वाजे के सहयोगी एपीआई (API) रियाज काजी द्वारा सबूत को नष्ट करने के लिए नदी में फेंक दिया गया था।

एआईए इसकी भी जाँच कर रही है कि वाजे ने इतनी कारों और नकली नंबर प्लेटों का इस्तेमाल क्यों किया। वहीं, विजय मधुकर नाडे ने दावा किया है कि उनकी कार 16 नवंबर, 2020 को औरंगाबाद के उद्धवराव पाटिल चौक से चोरी हो गई थी, जिसको लेकर उन्होंने FIR दर्ज कराई थी।

बता दें कि निलंबित पुलिस अधिकारी वाजे ने खुद 25 फरवरी को उद्योगपति मुकेश अंबानी के आवास एंटीलिया के पास पार्क किए गए विस्फोटक से भरे स्कॉर्पियो में धमकी भरा पत्र रखा था। एनआईए ने खुलासा किया कि वाजे पहले स्कॉर्पियो के अंदर धमकी भरा पत्र रखना भूल गया था और बाद में इसे रखने के लिए वापस आया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, जाँच के दौरान, एनआईए अधिकारियों ने पाया कि वाजे ने एंटीलिया के पास बम से लदे वाहन को पार्क करने से लेकर धमकी भरे पत्र को कार के अंदर रखने तक की पूरी कवायद को खुद से कॉर्डिनेट किया था। एनआईए अधिकारियों ने निष्कर्ष पर पहुँचने के लिए मुलुंड टोल कलेक्शन प्वाइंट से सीसीटीवी फुटेज प्राप्त किया।

25 फरवरी को, मुंबई पुलिस ने बम से लदी स्कॉर्पियो से मुकेश और नीता अंबानी को संबोधित एक पत्र बरामद किया था, जिसमें दावा किया गया था कि यह विस्फोटक सिर्फ एक ’ट्रेलर’ है। गौरतलब है कि NIA द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद वाजे को 15 मार्च को सस्पेंड कर दिया गया था। एडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस ने उसके निलंबन का आदेश जारी किया था।

नाइजीरिया: बोको हराम का लड़ाकू विमान मार गिराने का दावा, मलबे और लाश के साथ वीडियो किया जारी

इस्लामिक आतंकी संगठन बोको हराम ने नाइजीरिया की वायु सेना का एक लड़ाकू विमान मार गिराने का दावा किया है। यह विमान 31 मार्च 2021 को देश के उत्तर-पूर्वी हिस्से से लापता हो गया था। बोको हराम ने एक वीडियो जारी कर कहा है कि इस विमान को उसके लड़ाकों ने मार गिराया है

रॉयटर्स की खबर के मुताबिक नाइजीरियाई वायु सेना का विमान ‘अल्फा जेट 475’ देश के उत्तर-पूर्वी हिस्से में बोको हराम और उसकी शाखा ‘इस्लामिक स्टेट वेस्ट अफ्रीका प्रोविन्स’ से लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था। वायु सेना इस विमान के सफल उपयोग का दावा करती रही है। ऐसे में बोको हराम के द्वारा इस विमान को मार गिराने के दावे से आतंकी संगठनों के खिलाफ नाइजीरिया के अभियान को झटका लगा है।

रॉयटर्स ने बताया है कि वीडियो में मास्क लगाए हुए एक आतंकी विमान के मलबे पर खड़ा है और वह विमान की पहचान नाइजीरियन वायु सेना के ‘अल्फा जेट 475’ के रूप में करता है। वीडियो में एक क्षत-विक्षत लाश भी दिखाई देती है। आतंकी कहता है, “तुम अपने विमान के इस पायलट को देख सकते हो जिसे तुमने अल्लाह के बंदों को नुकसान पहुँचाने के लिए भेज था। अल्लाह ने इसके साथ यही किया। यह आसमान से गिरा है और यदि तुमने यह सब बंद नहीं किया तो यही तुम्हारी सजा है।”

नाइजीरियन वायु सेना ने शुक्रवार को बयान जारी कर बताया था कि 31 मार्च को उनका लड़ाकू विमान ‘अल्फा जेट 475’ दो क्रू सदस्यों के साथ लापता हो गया। वायु सेना ने विमान के क्रैश होने की आशंका जताई थी। साथ ही बताया था कि बचाव एवं खोज अभियान चल रहा है।

ममता को नाराज नहीं, सिद्दीकी के साथ नहीं… बंगाल चुनाव से इसलिए गायब हैं कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ से लेकर ‘युवा’ नेता

पश्चिम बंगाल में सत्ता पाने के लिए जहाँ टीएमसी और बीजेपी एड़ी चोटी का जोर लगा रही है, वहीं दूसरी ओर अब तक कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता राज्य में चुनाव प्रचार तक में नजर नहीं आए हैं। सीएनएन न्यूज 18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, कॉन्ग्रेस का कोई भी वरिष्ठ नेता राज्य में चुनाव प्रचार नहीं करना चाहता है। यही कारण है कि पश्चिम बंगाल में आठ में से दो चरणों का चुनाव संपन्न हो चुका है, लेकिन इस दौरान वहाँ कोई भी वरिष्ठ नेता चुनाव प्रचार करता दिखाई नहीं दिया।

बताया जा रहा है कि कॉन्ग्रेस पार्टी टीएमसी को राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी का मुकाबला करने के लिए एक सहयोगी के रूप में देख रही है। यही कारण है कि वह राज्य में अपनी मौजूदगी दर्ज कराकर बीजेपी को कड़ी टक्कर दे रही ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमस पार्टी को परेशान नहीं करना चाहती है। भले ही कॉन्ग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी सीएम और टीएमसी के खिलाफ बोलते रहे हैं, लेकिन पार्टी में अन्य लोग ममता बनर्जी और टीएमसी के खिलाफ कोई भी टिप्पणी करने से बचते हैं।

कॉग्रेस के सीएम के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध हैं, इसलिए वे उन पर सीधा हमला करने से बच रहे हैं। भले ही पार्टी ने बंगाल में वाम मोर्चे के साथ गठबंधन करके ममता बनर्जी को काफी हद तक परेशान किया है, लेकिन कॉन्ग्रेस आलाकमान टीएमसी के खिलाफ सक्रिय रूप से अभियान चलाकर उन्हें परेशान नहीं करना चाहती है।

यह भी अनुमान लगाया जा रहा है कि कॉन्ग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता फुरफुरा शरीफ के मुस्लिम धर्मगुरु अब्बास सिद्दीकी के नेतृत्व में नवगठित भारतीय धर्मनिरपेक्ष मोर्चा के साथ भी नहीं दिखना चाहते हैं, जो बंगाल में पार्टी के सहयोगी हैं। अब्बास सिद्दीकी के मुताबिक, ”यह दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है कि कॉन्ग्रेस पार्टी अब तक राज्य में चुनाव प्रचार में गायब है।”

खबरों के मुताबिक अधीर रंजन चौधरी ने भी सिद्दीकी के साथ मंच साझा करने से इनकार कर दिया है, क्योंकि वह इस्लामिक पार्टी से खुश नहीं हैं। वहीं जानकारों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में जिस तरह से बीजेपी ममता बनर्जी पर हमलावर है, उसकी वजह से टीएमसी के सामने मुश्किलें हैं। यह कहना गलत नहीं होगा कि ममता बनर्जी अब तक अपनी जिंदगी का सबसे कठिन चुनाव लड़ रही हैं।