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अकाउंट से ₹26.50 लाख, लॉकर से दस्तावेज: सचिन वाजे की गिरफ्तारी के बाद कौन है वो, जिसने उसके खाते से निकाले ये सब?

एंटीलिया केस मामले में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने पता लगाया है कि उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर के पास एक एसयूवी गाड़ी में विस्फोटक मिलने के मामले में पुलिस अधिकारी सचिन वाजे की गिरफ्तारी के 5 दिन बाद वाजे तथा उनके एक सहयोगी के संयुक्त बैंक खाते से 26.50 लाख रुपए निकाले गए। यह राशि 18 मार्च को निकाली गई। यह जानकारी मुंबई की एक अदालत को शनिवार (अप्रैल 3, 2021) को दी गई।

एनआईए ने वाजे के सहयोगी का नाम नहीं लिया। एनआईए ने कहा कि मुंबई के वर्सोवा इलाके में स्थित एक बैंक के लॉकर से भी कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज निकाले गए। यह लॉकर वाजे और उनके एक सहयोग के संयुक्त नाम पर है और सहयोगी भी मामले में आरोपित है।

विशेष अदालत ने वाजे की हिरासत 7 अप्रैल तक बढ़ाई

जाँच एजेंसी ने अदालत से कहा कि जाँच के दौरान उसे कई अहम सामग्रियाँ मिली हैं, जिनमें लैपटॉप, डीवीआर (डिजिटल वीडियो रिकार्डर), क्षतिग्रस्त हालत में एक सीपीयू शामिल हैं और उनकी जाँच करने की जरूरत है। इसके बाद विशेष अदालत ने वाजे की हिरासत 7 अप्रैल तक बढ़ा दी।

एनआईए कारोबारी मनसुख हिरेन की मौत के मामले की भी जाँच कर रही है। एजेंसी ने अदालत से कहा कि वाजे को 4 मार्च को ‘अपराध स्थल’ के पास देखा गया था। 5 मार्च को ठाणे में हिरेन का शव मिला था। एनआईए ने अदालत को बताया कि 2 अप्रैल को एक मर्सिडीज कार जब्त की गई।

एजेंसी ने दक्षिण मुंबई के एक क्लब से एक डायरी भी बरामद की है, जिसमें जिक्र किया गया है कि वाजे को एक बड़ी राशि का भुगतान किया गया था। एजेंसी ने अदालत को बताया कि उसे वाजे के घर में एक अज्ञात व्यक्ति का पासपोर्ट मिला है और उस व्यक्ति की पहचान करने के लिए वाजे की हिरासत की जरूरत है।

वाजे का अपने सहयोगी के साथ एक संयुक्त बैंक खाता और एक संयुक्त लॉकर  

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने कहा कि वाजे का अपने सहयोगी के साथ एक संयुक्त बैंक खाता और एक संयुक्त लॉकर है। एनआईए की याचिका का विरोध करते हुए वाजे के वकील अबद पोंडा ने कहा कि एनआईए गैरकानूनी गतिविधियाँ रोकथाम कानून के प्रावधानों के तहत 15 दिन पूरा होने के बाद आरोपित की रिमांड माँग सकती है।

पोंडा ने एनआईए की इस दलील को खारिज कर दिया कि वाजे का वर्सोवा में बैंक में कोई संयुक्त खाता रखा था। उन्होंने माँग की कि एनआईए को आरोपितों के नाम और हस्ताक्षर के साथ बैंक खाता खोलने का फॉर्म दिखाना चाहिए, जिसे एजेंसी ने स्वीकार नहीं किया।

इस बीच, वाजे ने अदालत में कहा कि उन्हें हृदय संबंधी कुछ समस्याएँ हैं और उन्हें दौरा (स्ट्रोक) आया था। वाजे ने किसी हृदय रोग विशेषज्ञ से जाँच कराने का अनुरोध किया। वाजे के वकील ने अदालत में कहा कि उनके हृदय में एक रुकावट है, जिसका इलाज केवल एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी से ही किया जा सकता है। हालाँकि एनआईए ने कहा कि उन्होंने जाँच करवाई है और वाजे का हृदय सामान्य रूप से काम कर रहा है।

हाथरस मामला: पत्रकार सिद्दीकी समेत PFI के 8 लोगों के खिलाफ 5000 पेज की चार्जशीट, UP पुलिस ने लगाया UAPA

यूपी के हाथरस में दलित लड़की के साथ हुई रेप और हत्या के मामले में दंगों की साजिश रचने के आरोप में उत्तर प्रदेश पुलिस ने केरल के पत्रकार सिद्दीकी कप्पन पर UAPA के तहत चार्जशीट दायर किया है। यूपी के हाथरस में हुए रेप और हत्या के मामले में यूपी एसटीएफ की एक टीम दंगों की साजिश की जाँच कर रही थी। जिसको लेकर अब टीम ने मथुरा कोर्ट में UAPA के तहत एक चार्टशीट फाइल की है। 

PFI और उस से जुड़े संगठन के 8 आरोपितों के खिलाफ दाखिल की गई चार्जशीट में सिद्दीकी कप्पन,अतीकुर्रहमान, मसूद अहमद, रउफ शरीफ, अंसद बदरूद्दीन, फिरोज, दानिश का नाम शामिल है। मामले की अगली सुनवाई 1 मई 2021 को निर्धारित की गई है।

कुल 5000 पेज की चार्जशीट में यूपी एसटीएफ ने हाथरस में दंगों की साजिश का खुलासा किया है। चार्जशीट के मुताबिक मथुरा से गिरफ्तार हुआ सिद्दीकी कप्पन, दंगों का थिंक टैंक और पीएफआई के स्टूडेंट विंग का सदस्य रउफ शरीफ दंगों की साजिश और फंडिंग में शामिल था।

उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से दायर की गई चार्जशीट में कहा गया है कि गिरफ्तार किए गए सभी आरोपित हाथरस में दंगा भड़काना चाहते थे और उसकी साजिश रच रहे थे। चार्जशीट के अनुसार सिद्दीकी कप्पन ने ही दंगों की साजिश रची थी और पीएफआई मेंबर रउफ शरीफ इन दंगों की फंडिंग के लिए काम कर रहा था। 5000 पन्नों की चार्जशीट में पीएफआई के सदस्यों पर मस्कट और दोहा में वित्तीय संस्थानों से 80 लाख रुपए की धनराशि प्राप्त करने का आरोप लगाया गया है।

इसके अलावा एसटीएफ ने आरोप पत्र में कहा है कि पीएफआई की केरल शाखा के कमांडर अंसद बदरुद्दीन और उसका साथी फिरोज खान देश भर में भ्रमण करके संगठन के युवकों को फिजिकल एजुकेशन के नाम पर विस्फोटक सामग्री बनाने, उसके इस्तेमाल करने के साथ चाकू, तलवार और पिस्टल चलाने का भी प्रशिक्षण देता था। एसटीएफ ने इनको आतंकी गिरोह का सदस्य बताते हुए सांप्रदायिक और वर्ग संघर्ष के दौरान हिंसा कराने के भी आरोप लगाए हैं।

बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) ने शनिवार (दिसंबर 12, 2020) को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के युवा नेता रऊफ शरीफ को हिरासत में लिया। रऊफ शरीफ देश छोड़कर भागने की फिराक में था, मगर ED ने समय रहते कार्रवाई की और उसे धर दबोचा।

मीडिया रिपोर्ट में ED के हवाले से बताया गया था कि शरीफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में वांछित था। आरोप था कि रऊफ शरीफ के खाते में ओमान और कतर से दो करोड़ रुपए आए थे। यह भी आरोप था कि इन पैसों का प्रयोग असामाजिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। शरीफ से पूछताछ के लिए जाँच एजेंसियों ने उसे नोटिस भी जारी किए थे लेकिन जाँच एजेंसियों के नोटिसों से खुद को बचा रहा था। वह कोरोना महामारी का बहाना बनाकर काफी समय से छिपा हुआ था।

गौरतलब है कि हाथरस मामले में जमकर हो रही राजनीति के दौरान मथुरा जाते समय PFI के चार सदस्य सिद्दीक कप्पन, अतीकुर्रहमान, आलम और मसूद को गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ के बाद यह खुलासा हुआ था कि उनकी हाथरस में दंगा फैलाने की साजिश थी। साथ ही रऊफ शरीफ का नाम सामने आया था। इसके बाद यूपी पुलिस ने प्रोडक्शन वारंट के लिए आवेदन किया था।

डासना मंदिर के महंत के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने दर्ज की FIR, AAP के अमानतुल्लाह की शिकायत के बाद कार्रवाई

गाजियाबाद के डासना मंदिर के महंत स्वामी यति नरसिंहानंद सरस्वती के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। इंडियन एक्सप्रेस के पत्रकार महेंद्र सिंह मनराल के अनुसार दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कथित तौर पर पैंगबर मोहम्मद के खिलाफ टिप्पणी कर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के आरोप में यह कार्रवाई की गई है।

दिल्ली पुलिस ने बताया कि इस वीडियो पर संज्ञान लेते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 153-A और 295-A के तहत पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यति नरसिंहानंद की टिप्पणी वाला यह वीडियो सोशल मीडिया में वायरल है।

इससे पहले आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक अमानतुल्लाह खान ने इस वीडियो को लेकर दिल्ली के जामिया नगर थाने में महंत के खिलाफ शिकायत की थी। अमानतुल्लाह खान ने ट्विटर पर वीडियो शेयर कर कहा था कि नरसिंहानंद की गुस्ताखी के लिए उनके ख़िलाफ़ जामिया नगर में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है।

उसने कहा, “यति नरसिंहानंद ने जो पैगंबर मोहम्मद की शान में गुस्ताखी की है, उसके लिए हुक्म है कि उसका सिर कलम कर दिया जाए या उसकी जुबान काट ली जाए। लेकिन संविधान पर हमें भरोसा है। उम्मीद है कि उसके ऊपर कार्रवाई करके उसे जेल भेजा जाएगा। हम सारे धर्म के गुरुओं- श्रीराम, श्रीकृष्ण सभी का सम्मान करते हैं। इसलिए हम नहीं चाहते हैं किसी भी धर्म को मानने वाला हमारे धर्म गुरु… की शान में गुस्ताखी करे। शरीयत अगर यहाँ होता तो इस शख्स को सरेआम गर्दन काट कर, जुबान काटकर लटका दिया जाता। पर हम कानून का सम्मान करते हैं और वो इसकी इजाजत नहीं देता, इसलिए मैं यहाँ आया हूँ। आला अधिकारी से अपील करता हूँ कि इस शख्स ने मुल्क के माहौल को बिगाड़ने की कोशिश की है। मुसलमानों के दिल को ठेस पहुँची है, तकलीफ हुई है क्योंकि हम किसी भी हाल में ये गुस्ताखी बर्दाश्त नहीं कर सकते।”

शिकायत से पहले अमानतुल्लाह खान ने ट्विटर पर लिखा, “हमारे नबी की शान में गुस्ताखी हमें बिल्कुल बर्दाश्त नहीं, इस नफ़रती कीड़े की ज़ुबान और गर्दन दोनों काट कर इसे सख़्त से सख़्त सजा देनी चाहिए। लेकिन हिंदुस्तान का कानून हमें इसकी इजाज़त नहीं देता, हमें देश के संविधान पर भरोसा है और मैं चाहता हूँ कि दिल्ली पुलिस इसका संज्ञान ले।”

छत्तीसगढ़ में 10 दिन में 2 बार: बीजापुर में 5 जवान बलिदान-9 नक्सली भी ढेर, 250 नक्सलियों के होने का अनुमान

छत्तीसगढ़ के बस्तर डिवीजन के बीजापुर जिले में नक्सलियों के सथ मुठभेड़ में 5 जवान बलिदान हो गए। 9 नक्सली भी मार गिराए गए हैं। मौके पर करीब 250 नक्सलियों के होने का अनुमान था।

छत्तीसगढ़ में 10 दिनों के भीतर इस तरह की यह दूसरी घटना है। इससे पहले 23 मार्च को नारायणपुर में नक्सलियों ने पुलिस जवानों की बस को आईडी ब्लास्ट से उड़ा दिया था। इस हमले में भी 5 जवान बलिदान हो गए थे, जबकि 14 अन्य जख्मी हुए थे। बस में 24 जवान सवार थे।

बीजापुर जिले में नक्सलियों के साथ हुई मुठभेड़ में 12 जवान घायल हैं। बीजापुर में सुकमा सीमा के पास बड़ी संख्या में नक्सलियों की हलचल का इनपुट मिलने के बाद सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम गश्त पर थी। सर्च ऑपरेशन के दौरान ही सुरक्षा बलों और नक्सलियों में मुठभेड़ शुरू हो गई। तीन घंटे तक चली इस मुठभेड़ में सुरक्षा बलों के 5 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए। जिला रिजर्व गार्ड के तीन जवानों को उपचार के लिए एयरलिफ्ट करके रायपुर लाया गया है।

मुठभेड़ बीजापुर जिले के तारेम क्षेत्र में हुई जहाँ सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम माओवादी विरोधी ऑपरेशन चला रही थी। सुरक्षा बालों की इस संयुक्त टीम में सीआरपीएफ की कमांडो बटालियन, जिला रिजर्व गार्ड और स्पेशल टास्क फोर्स के जवान थे।

बस्तर क्षेत्र के आईजी पी. सुंदरराज ने बताया कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार मुठभेड़ में सुरक्षा बलों द्वारा नौ नक्सलियों को मार गिराए जाने की खबर है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में लगभग 250 नक्सलियों के मूवमेंट की खबर थी।

रिपोर्ट्स के अनुसार घटनास्थल पर अतिरिक्त सुरक्षा बल पहुँच चुके हैं। इसके अलावा नौ एम्बुलेंस और दो हेलीकॉप्टर भी राहत कार्य में लगे हुए हैं। इसमें भारतीय वायु सेना का MI-17 हेलीकॉप्टर शामिल है। डीआईजी (नक्सल ऑपरेशन) ओपी पाल ने बताया कि घटनास्थल से एक महिला नक्सली की लाश बरामद हुई है।

भारत के 7 पड़ोसी देश: मुस्लिम दिन दूने रात चौगुने, कट्टरपंथ का बोलबाला; हिंदुओं की हालत दिनोंदिन बदतर

एक संस्था है। नाम है सेंटर फॉर डेमोक्रेसी प्लूरेलिज़्म एंड ह्यूमन राइट्स। अंग्रेजी में CENTER FOR DEMOCRACY PLURALISM AND HUMAN RIGHTS यानी CDPHR। संस्था ने भारत के 7 पड़ोसी देशों में अल्पसंख्यकों की स्थिति और मानवाधिकार को लेकर रिपोर्ट जारी की है।

ये देश हैं: पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, श्रीलंका, तिब्बत, मलेशिया और इंडोनेशिया। यह रिपोर्ट वकील, जज, पत्रकारों, शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों की टीम ने तैयार की है। नागरिक समानता, गरिमा, न्याय और लोकतंत्र की स्थिति के आधार पर इसे तैयार किया गया है।

रिपोर्ट में भारत के पड़ोसी देशों में अल्पसंख्यकों की वर्तमान स्थिति का विस्तृत वर्णन किया गया है। इसके मुताबिक अल्पसंख्यकों की सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक हालत एकदम खस्ता है। इन देशों में अल्पसंख्यक की महिलाओं के साथ रेप, मर्डर जैसी घटनाएँ आए दिन सामने आती रहती हैं।

एक-एक कर जानते हैं कि किस देश में अल्पसंख्यकों की स्थिति कैसी है।

बांग्लादेश

भारत का पड़ोसी देश बांग्लादेश जब 1971 में बना था, तब ये एक सेक्युलर राष्ट्र था। लेकिन, 1975 में वहाँ की सरकार ने संविधान से धर्मनिपेक्ष शब्द को हटाकर उसमें कुरान की आयतों को शामिल कर दिया। इसी के साथ ये एक मुस्लिम देश बन गया। यहाँ इस्लामिस्ट अतिवादी हर दिन धार्मिक अल्पसंख्यकों पर अत्याचार करते हैं।

ढाका विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अबुल बरकत की रिपोर्ट के मुताबिक, बीते 4 दशकों में 2,30,612 लोगों ने यहाँ से पलायन किया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पलायन की अगर यही स्थिति रही तो अगले 30 साल में यहाँ कोई भी हिंदू बचेगा ही नहीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया बांग्लादेश की यात्रा के बाद वहाँ हिफाजत-ए-इस्लाम ने मंदिरों को निशाना बनाया था।

बांग्लादेश में गठन के समय 1971 में बड़े पैमाने पर नरसंहार हुआ था। आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, वह मानवीय इतिहास का सबसे डरावना समय था। करीब 30 लाख लोगों का नरसंहार हुआ था और 2 लाख महिलाओं के साथ रेप किया था। लेकिन, इस पर पाकिस्तान ने कभी खुलकर बात नहीं की। जस्टिस हुमुदूर रहमान के नेतृत्व में 1972 में एक फैक्ट फाइडिंग कमेटी बनाई गई थी। इसकी एक कॉपी पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो को सौंपी गई थी, जिसे तुरंत ही नष्ट कर दिया गया था। 21 अगस्त 2000 को इंडिया टुडे में यह रिपोर्ट छपी थी।

इस नरसंहार के बाद बांग्लादेश में सेक्युलरिज्म का उदय हुआ। लेकिन, कट्टरपंथियों के राजनीति में पैठ बनाने के बाद 1977 में संविधान से सेक्युलरिज्म को हटाकर उसमें इस्लाम को प्राथमिकता दी गई। 1988 में इस्लाम बांग्लादेश का मुख्य धर्म बन गया।

आर्थिक सेक्टर में भी यहाँ अल्पसंख्यकों को कोई सुविधा नहीं है। देश में 11 बैंक काम कर रहे हैं, जिनमें 100 फीसदी शरिया है। चिटगोंग हिल ट्रैक्ट एकमात्र ऐसा क्षेत्र है, जहाँ 1951 में 90 फासदी बुद्धिस्ट आबादी थी। हिंदू अल्पसंख्यक लंबे समय से पीड़ित रहे हैं। यहाँ बंगालियों की संख्या ज्यादा है। चिटगोंग क्षेत्र में भी करीब 55 फीसदी इस्लामिक आबादी है। स्टडीज के मुताबिक 1951 में हिंदुओं की आबादी 23% थी, जो 2017 में घटकर 9 फीसदी रह गई थी।

रिपोर्ट के मुताबिक 1951 में बांग्लादेश में मुस्लिम आबादी 76.85% थी, जो बढ़कर 2011 में 90.39% हो गई है। दूसरी ओर हिंदू, बुद्धिस्ट, सिख और जैन धर्म की जनसंख्या उसी पीरियड में 22.89% से घटकर 9.30% हो गई है। CDPHR मुताबिक, “यही वो समय है जब अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार जैसी वैश्विक एजेंसी को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए।”

इसमें बताया गया है 2003 में अल्पसंख्यक महिलाओं और बच्चों के उत्पीड़न को रोकने के लिए लाए गए एक्ट को सही तरीके से लागू नहीं किया गया है। बांग्लादेश यूएन के शांति स्थापना मिशन में सबसे ज्यादा 6731 सैनिकों का योगदान देता है, ताकि दुनिया में शांति स्थापित की जा सके। लेकिन, उसके अपने देश में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हो रहे हैं। 1946 में यहाँ पहला हिंदू विरोधी दंगा हुआ था। इसके बाद 1971 में नरसंहार हुआ था। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि आवामी लीग की सरकार आर्थिक मोर्चे इस्लामिक बैंकिग के जरिए कट्टरता फैला रही है।

वहाँ दो तरह के कुआमी और आलिया मदरसा चलते हैं, जिनका मकसद इस्लामिक शिक्षा को आगे बढ़ाना है। कुआमी में कुरान, हदीस, इस्लामिक लॉ, इस्लामिक संस्कृति आदि के बारे में पढ़ाया जाता है, जबकि आलिया मदरसा में दूसरे विषय भी पढ़ाए जाते हैं। 1950 में यहाँ 4430 मदरसा थे, जिनकी संख्या बढ़कर 54,130 हो गई है। बांग्लादेश शैक्षिक सूचना और सांख्यिकी-2008 के डाटा के अनुसार, 39,612 कुआमी मदरसों में 52,47,600 विद्यार्थी रजिस्टर्ड थे। वहीं 14,152 आलिया मदरसों में 4,58,0082 छात्र थे। बांग्लादेशी इस्लामिक आंतकी संगठन JMB देश में सांस्कृतिक कार्यक्रमों और सिनेमा घरों का विरोध करता है। “लज्जा” उपन्यास की लेखिका तसलीमा नसरीन के खिलाफ 1992 में फतवा जारी किया गया था।

पाकिस्तान

पाकिस्तान मुस्लिम राष्ट्र है, लेकिन वहाँ खुद मुसलमान ही सुरक्षित नहीं हैं। पाकिस्तान में शिया और अहमदिया मुसलमानों के कुरान पढ़ने पर भी रोक है। यहाँ सुन्नी मुसलमानों की अधिकता है। वहाँ धार्मिक अल्पसंख्यकों हिंदू, सिख और ईसाइयों की हालत बहुत ही खराब है। अल्पसंख्यक युवतियों के साथ बलात्कार, अपहरण और मारपीट की घटनाएँ तो आम हैं। अल्पसंख्यकों को डरा-धमकाकर जबरन धर्मांतरण कराया जाता है।

रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में हिंदुओं पर एट्रोसिटी एक्ट लगाकर उन्हें जबरन जेलों में ठूँस दिया जाता है। वहाँ के धार्मिक अल्पसंख्यक सुन्नी मुसलमानों की असहिष्णुता के सताए हैं। पाकिस्तान में आज भी 1950 जैसै हालात हैं। आजादी के वक़्त पाकिस्तान में हिंदुओं के सबसे बड़े नेता रहे जोगेंद्रनाथ मंडल ने हिंदुओं के खिलाफ एट्रोसिटी के बारे पाकिस्तान की सरकार और वहाँ के प्रधानमंत्री को सूचित किया था।

उन्होंने इस बात का खुलासा किया था कि पूर्वी और पश्चिमी पाकिस्तान में हिंदुओं पर अत्याचार बढ़ रहा है। ढाका में 10 फरवरी 1950 को 10,000 हिंदुओं का कत्लेआम किया गया था। मंडल ने एक पत्र में खुलासा किया था कि पाकिस्तान के सिंध और कराची में दलित हिंदू बहुत ही बुरी स्थिति में हैं। सुन्नी मुसलमानों ने 363 हिंदू मंदिरों और गुरुद्वारों को बूचड़खाने में बदल दिया था।

एक अन्य व्यक्ति जो पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों को सामने लाए वो फरहनाज इसपहानी हैं, जिन्होंने पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों से ज्यादती को उजागर किया था। 1977-1980 के दौरान पाकिस्तान के तीसरे मिलिट्री जनरल रहे जिया-उल-हक ने पाकिस्तान के इस्लामीकरण की नीति को लागू किया था। 1998 की जनगणना के मुताबिक पाकिस्तान में हिंदू केवल 1.6 फीसदी और ईसाई 1.59 प्रतिशत थे। एशियन ह्यूमन राइट्स वॉच की रिपोर्ट के मुताबिक, “पाकिस्तान के सिंधु प्रांत में हर महीने 20-25 अपहरण होते हैं और हिंदू लड़कियों का धर्म परिवर्तन कराया जाता है।”

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की रहने वाली आसिया बीबी पहली अल्पसंख्यक क्रिश्चियन महिला थी, जिसे देश द्रोह के केस में फाँसी की सजा हुई थी। 2010 में इस्लामी चरमपंथी भीड़ ने देशद्रोह का आरोप लगाकर पंजाब प्रांत में 7 ईसाइयों को जिंदा जला दिया था। इस हमले में 18 लोग घायल हुए थे और 50 घरों को आग लगा दी गई थी। लाहौर में 2013 में पुलिस के सामने 40 ईसाई घरों को जला दिया गया था। वहाँ शियाओं पर हमले बढ़े हैं, लेकिन मीडिया उसे क्षेत्रवाद की लड़ाई बता रहा है।

पाकिस्तान नेशनल असेंबली की मेंबर फरहनाज इसाफानी का कहना है कि भारत-पाकिस्तान बँटवारे के साथ ही अल्पसंख्यकों पर अत्याचार शुरू हो गया था। अल्पसंख्यकों पर हमला करने वालों के तालिबान और कट्टरपंथियों के साथ सीधे संबंध हैं। शिया और अहमदिया मुसलमान, जिन्हें आधिकारिक तौर पर मुसलमान मानने से इंकार किया गया है। इन सभी को सुसाइड बॉम्ब के जरिए टार्गेट किया जा रहा है।

अमेरिका की ;पाकिस्तान में धार्मिक आजादी’ 2010 की रिपोर्ट के मुताबिक, “धार्मिक अल्पसंख्यकों पर प्रति हिंसा में प्रशासनिक असफलता सबसे बड़ा कारण रहा है। धार्मिक हमलों में हमलावर ऊपरी दवाबों के कारण जल्दी ही छूट जाया करते थे।”

अफगानिस्तान

CDPHR की रिपोर्ट के मुताबिक भारत के पड़ोसी देश अफगानिस्तान में मानवाधिकार की हालत भी बहुत खराब है। यहाँ अल्पसंख्यकों के साथ दोहरा व्यवहार किया जाता है। यह इस बात की गवाही है कि 1970 की जनसंख्या के मुताबिक अफगानिस्तान में हिंदू और सिखों की संख्या करीब 7 लाख थी। अब केवल 200 हिंदू और सिख परिवार रह गए हैं। यहाँ के संविधान में ही लिखा है कि केवल मुस्लिम व्यक्ति ही देश का राष्ट्रपति अथवा प्रधानमंत्री बन सकता है। इसके अलावा अधिकारियों को केवल इस्लामिक सिद्धांतों को ही मानना पड़ेगा।

CDPHR की अध्यक्ष डॉ. प्रेरणा मल्होत्रा के मुताबिक, “अफगानिस्तान में सामाजिक और राजनीतिक कट्टरता बढ़ी है। संवैधानिक दृष्टि से इस देश में केवल मुसलमानों को ही जगह दी गई है, जबकि गैर मुस्लिमों से ऐसे पेश आया जाता है कि जैसे वो उस देश का नागरिक ही न हो।”

90 के दशक में तालिबान का फैलाव अफगानिस्तान में हुआ। इसके बाद देश में बड़े पैमाने पर अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचार बढ़ा और लोगों ने पलायन करना शुरू कर दिया। 2016 में वहाँ हिंदुओं और सिखों की संख्या करीब 3000 थी। यह 2020 में घटकर करीब 900 रह गई है।

अफगानिस्तान की कोर्ट में भी अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव किया जाता है। न्याय करने से पहले यह देखा जाता है कि अभियुक्त का धर्म कौन सा है। ‘धार्मिक स्वतंत्रता की आजादी’ पर अमेरिकी आयोग की 2017 की रिपोर्ट में लिखा है, “एक गैर मुस्लिम को कोर्ट कानूनी सहायता तक उपलब्ध नहीं कराता है।”

तिब्बत

तिब्बत के बारे में समूची दुनिया जानती है कि चीन तिब्बतियों के मानवाधिकार को बलपूर्वक किस प्रकार से कुचल रहा है। वह तिब्बती बौद्धों की सामाजिक, आर्थिक, भाषाई और सांस्कृतिक पहचान को खत्म करने की कोशिश कर रहा है। हालाँकि उसने ये कभी स्वीकार नहीं किया। चीन ने चांबो के युद्ध में 1951 में तिब्बत पर कब्जा कर लिया था।

इतिहासकारों के मुताबिक माओजेडॉंग ने सत्ता में आने के लिए तिब्बत पर हमला करने की योजना तैयार की थी। 13वें दलाई लामा ने अपनी कैबिनेट में ये घोषणा की थी कि तिब्बत एक स्वतंत्र राष्ट्र है। 1959 में तिब्बत के लोगों ने चीन के खिलाफ प्रदर्शन किया। जिसके बाद चीन में नरसंहार करते हुए वहाँ हजारों लोगों को मार दिया। इसके बाद 80 हजार तिब्बतियों के साथ दलाई लामा इंडिया चले आए। केंद्रीय योजना आयोग की तिब्बतियन प्रशासन पर 2009 की रिपोर्ट के मुताबिक, “भारत में 94,203 तिब्बती रहते हैं।”

मलेशिया

मलेशिया में भूमिपुत्रों की आबादी कुल जनसंख्या की 69 फीसदी है। इनमें से 51 प्रतिशत मलय समुदाय से हैं। इसके अलावा बोर्नियन और भारतवंशियों की आबादी 17 फीसदी है। 2018 के मलेशिया सांख्यिकी विभाग के मुताबिक, मलेशियन चाइनीज 23 और मलेशियन हिंदू वहाँ केवल 7 फीसदी हैं। मलय मुस्लिमों के समर्थन से बीते कुछ सालों में मलेशिया कट्टर इस्लामीकरण की ओर बढ़ा है। बीते 3 दशक में अब्दुल्ला बडावी के शासनकाल से नजीब रज्जाक और महातिर मुहम्मद (2018-2020) के दौरान मलेशिया में इस्लामिक चरमपंथ बढ़ा है।

यहाँ की स्टेट पॉलिसी के मुताबिक मलेशिया ‘भूमिपुत्र’ की नीति का अनुसरण करता है। इसे वहाँ के दूसरे प्रधानमंत्री अब्दुल रज्जाक हुसैन ने 1970 में लागू किया था। 8 अगस्त 2019 में विवादित इस्लामिक वक्ता जाकिर नाइक ने मलेशिया में अल्पसंख्यक चीनी और भारतीय मलेशियन को ‘मेहमान’ कहा था।

मलेशिया के कोटाबारू में एक सभा में उसने कहा था, “लोग मुझे मेहमान कहते हैं, लेकिन मुझसे पहले तो चीनी मेहमान हैं। वो यहाँ पैदा नहीं हुए। अगर आप चाहते हैं कि नया मेहमान वापस जाए तो पहले पुराने को यहाँ से निकालिए। इसके बाद ही मलेशिया पूरी तरह से इस्लामिक राष्ट्र होगा।”

जाकिर नाइक ने आगे कहा था कि मलेशिया के अल्पसंख्यक हिंदुस्तान के अल्पसंख्यकों से 100 गुना ज्यादा स्वतंत्र हैं। CDPHR की रिपोर्ट के मुताबिक, “नाइक ने अकेले ही मलेशिया के अल्पसंख्यकों का उतना नुकसान कर दिया, जितना कोई अन्य नहीं कर सका।”

1954-2018 तक मलेशियन इंडियन कॉन्ग्रेस सत्ता में रही, लेकिन इसने अपने वादे नहीं पूरे किए। उल्टे भारतीय समुदाय पर भ्रष्टाचार परिवारवाद, दो समुदायों को लड़ाकर राजनीति करने के आरोप इस पर लगे।

श्रीलंका

श्रीलंका में तमिलों की स्थिति किसी से छुपी नहीं है। CDPHR की रिपोर्ट के मुताबिक वहाँ मानवाधिकार और धार्मिक अल्पसंख्यकों की हालत खराब है। 26 साल तक चले गृह युद्ध के कारण वहाँ एक लाख लोग मारे गए थे, जबकि 20,000 तमिल गायब हो गए हैं।

इसकी शुरुआत 1956 से हुई। जब श्रीलंकाई तमिलों के खिलाफ पहला दंगा हुआ। इसके बाद क्रमश: 1958, 1971,1977, 1981 और 1983 में बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक दंगे हुए। 1983 का दंगा बहुत बड़ा अंतरराष्ट्रीय मुद्दा भी बन गया था, क्योंकि उसमें बड़े पैमाने पर हिंसा और मानवाधिकारों का उल्लंघन हुआ था।

इंडोनेशिया

दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम देश इंडोनेशिया में बीते कुछ वर्षों में धार्मिक कट्टरता का स्वरूप भयावह हुआ है। यहाँ पर इस्लामी चरमपंथियों का आतंक बढ़ा है। यहाँ 88% मुस्लिम ही हैं, जो कि पूरी दुनिया की मुस्लिम आबादी का 12.5 फीसदी हैं। 2010 की जनगणना के मुताबिक, इंडोनेशिया में 6 प्रतिशत प्रोटेस्टेंट, 3 फीसदी रोमन कैथोलिक, 2 फीसदी हिंदू, 1 फीसदी बौद्ध, 1 प्रतिशत कंफ्यूशियस और एक फीसदी अन्य हैं।

1945 में स्वतंत्र होने के बाद इंडोनेशिया में मसयूमी पार्टी सत्ता में आई, जो देश की सबसे बड़ी इस्लामिक पार्टी थी। इसने कम्युनिस्टों का देश से सफाया करने के नाम पर 1965-1966 तक बाली और जावा में चीनी और हिंदुओं का जमकर नरसंहार किया। यह नरसंहार कोई तात्कालिक तौर पर होने वाली घटना नहीं, बल्कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए की साजिश के तहत लंबे समय में इसे अंजाम दिया गया। इस्लाम के नाम पर यहाँ देशद्रोह का कानून लाया गया। इसके तहत गैर मुस्लिम समुदाय को टारगेट किया जाता है।

73 फीसदी की तेजी से बढ़ रहा इस्लाम

अमेरिका की शोध संस्था प्यू रिसर्च के एक शोध के मुताबिक दुनिया में जहाँ हिंदू-ईसाइयों की जनसंख्या 34-35 फीसदी की तेजी से बढ़ रही है और बौद्ध मतावलंबियों की संख्या 0.3 प्रतिशत की तेजी से घट रही है। वहीं इस्लाम तेजी से अपने पाँव पसार रहा है। मुस्लिमों की आबादी 73 प्रतिशत की तेजी से बढ़ रही है। यह दुनिया की जरूरत से 150 फीसदी अधिक है।

संस्था के मुताबिक, “अगले 30 सालों में दुनिया की आबादी बढ़कर 930 करोड़ के करीब हो जाएगी। मुस्लिमों की आबादी 3.1 फीसदी की दर से बढ़ रही है, जबकि समाज शास्त्रियों के मुताबिक फर्टिलिटी रेट 2.1 होना चाहिए। ताकि होने वाले 2 बच्चे मां-बाप की मृत्यु के पश्चात उनका स्थान ले लें। इससे धरती पर अतिरिक्त बोझ भी नहीं पड़ेगा। मुसलमानों का फर्टिलिटी रेट 3.1 है, जो दुनिया की आवश्यकता से 150 फीसदी ज्यादा है।”

‘कुछ निर्देशकों ने मेरे साथ सेक्स करने की कोशिश की’: सलमान की Ex-GF ने बॉलीवुड के चाल-चलन पर से उठाया पर्दा

पाकिस्तान फिल्म एक्ट्रेस और सलमान खान की गर्लफ्रेंड रह चुकीं सोमी अली ने एक इंटरव्यू में बॉलीवुड को लेकर चौंकाने वाले दावे किए हैं। उन्होंने बताया कि बॉलीवुड में कई निर्देशकों ने उनका शोषण करने का प्रयास किया, क्योंकि वे जानते थे कि वह बुरे दौर से गुजर रही हैं।

जूम के साथ बॉलीवु़ड पर बातचीत करते हुए सोमी ने कहा, “कुछ निर्देशकों ने मेरे साथ सेक्स करने की कोशिश की। यहाँ मैं एक अपमानजनक रिश्ते में रही। तो हाँ, यह कुल मिलाकर मेरे लिए बुरा था।”

मालूम हो कि 90 के दशक में बॉलीवुड में सोमी अली, सलमान खान से शादी करने के इरादे से आई थीं। यहाँ उन्होंने सलमान को 8 साल डेट भी किया। अली ने कहा कि जब वह सलमान खान के साथ रिश्ते में थी तब उन्होंने उनसे कुछ भी नहीं सीखा और पिछले 5 वर्षों में वह उनके संपर्क में नहीं हैं। लेकिन वह उनकी माँ (सलमा) से बातचीत करती रहती हैं।

सोमी अली ने इससे पहले कहा था कि उनका रिश्ता सलमान खान के धोखा देने के कारण टूट गया था। वह ऐश्वर्या राय के लिए उन्हें धोखा दे रहे थे।

गौरतलब है कि पाकिस्तान के कराची में जन्मी सोमी अली फ़िलहाल अमेरिका में ‘नो मोर टीयर्स’ नामक NGO का संचालन करती हैं। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया कि 16 वर्ष की उम्र में उनके मुंबई आने का एक ही कारण था– सलमान खान से शादी।

‘बॉम्बे टाइम्स’ को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, “वो 1991 का वर्ष था और मैं मात्र 16 साल की थी। मैंने ‘मैंने प्यार किया’ फिल्म देखी और सोचा कि मुझे इस व्यक्ति से शादी करनी है। मैंने अपनी माँ से कह दिया कि मैं कल ही भारत जा रही हूँ। उन्होंने मुझे मेरे कमरे में भेज दिया, लेकिन मैं विनती करती रही कि मुझे सलमान खान के साथ शादी करने के लिए भारत जाने दो।”

अपने इंटरव्यू में सोमी ने ये भी कहा था कि बॉलीवुड में उनके कारण कुछ रिलेशनशिप भी बर्बाद हुए थे, क्योंकि उन्हें कोई गलत सलाह दे रहा था– जिसकी वो हर बात मानती थीं। सोमी ने बताया कि उनका रिलेशनशिप भी फेल हो गया, जिसके बाद वो 1999 में मियामी लौट गईं। उन्होंने नौवीं कक्षा में पढ़ाई छोड़ दी थी, लेकिन वापस आकर साइकोलॉजी में डिग्री ली।

‘बनारस में तिलक-चोटी वाले खूब मिलेंगे, हर-हर महादेव भी सुनने को मिलेगा’: PM मोदी ने पूछा- फिर क्या करेंगी दीदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (3 अप्रैल 2021) को पश्चिम बंगाल के हगुली और सोनारपुर में चुनावी रैलियों को संबोधित किया। सोनारपुर में उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को निशाने पर लेते हुए कहा कि वह बंगाल में जय श्री राम से चिढ़ती हैं, जबकि बनारस से चुनाव लड़ने पर उन्हें तिलक और चोटी वाले लोग खूब मिलेंगे।

प्रधानमंत्री ने यह तंज टीएमसी सांसद के उस बयान को लेकर कसा में जिसमें उन्होंने कहा था कि ममता अगला चुनाव बनारस से लड़ेंगी। टीएमसी सांसद ने यह बात पीएम मोदी द्वारा ममता के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम के अलावा किसी पर सीट से चुनाव लड़ने को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में कही थी।

पीएम मोदी ने कहा कि दीदी की पार्टी कह रही है कि वो बनारस से चुनाव लड़ेंगी। ऐसे में दो बातें पूरी तरह से साफ हो गई हैं। एक तो यह कि ममता दीदी ने बंगाल में अपनी हार स्वीकार कर ली है और दूसरी कि अब वो बंगाल से बाहर कोई स्थान तलाश रही हैं।

उन्होंने कहा, “बनारस के लोग बड़े ही दयालु हैं। लेकिन दीदी को वहाँ ‘चोटी’ और ‘तिलक’ वाले कई लोगों से मिलना पड़ेगा। ‘जय श्री राम’ का नारा उन्हें परेशान कर देता है लेकिन बनारस में उन्हें हर दो मिनट में ‘हर हर महादेव’ भी सुनना पड़ेगा, तब दीदी क्या करेंगी?”

पीएम मोदी ने यह भी कहा कि संभव है कि उनकी सरकार ने हल्दिया से वाराणसी का जो जलमार्ग बनवाया है उसे देखकर ममता दीदी का मन बनारस की तरफ मुड़ गया हो। ममता बनर्जी के ‘बाहरी लोगों’ के बयान का जवाब देते हुए पीएम मोदी ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश और बनारस के लोग उन्हें बाहरी भी नहीं कहेंगे। दरअसल कई बार ममता बनर्जी भाजपा के नेताओं को बंगाल में बाहरी कहती आई हैं।

वहीं रायदिघी में रैली को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि हैदराबाद (असदुद्दीन ओवैसी) और फुरफुरा शरीफ (अब्बास सिद्दीकी) को हिन्दू-मुस्लिम वोट बाँटने के लिए भाजपा ने पैसे दिए हैं। यदि आप एनआरसी नहीं चाहते हैं तो इन्हें वोट मत दीजिए, क्योंकि इन्हें वोट देने का मतलब है भाजपा को वोट देना।

ममता ने यह भी कहा कि हिन्दू-मुस्लिम साथ बैठकर चाय पीते हैं और दुर्गा पूजा एवं काली पूजा में भी साथ भाग लेते हैं। यह हमारी संस्कृति है। यदि हमारे गाँव में कोई अस्थिरता होगी तो इसका फायदा भाजपा को ही होगा।

आपको बात दें कि पश्चिम बंगाल में 6 अप्रैल को तीसरे चरण के लिए वोट डाले जाएँगे।  इस चरण में 31 सीटों के लिए मतदान होगा। राज्य में 8 चरणों में मतदान होना है।

हिमाचल प्रदेश: लिफ्ट नहीं दी तो निहंग सिख ने कृपाण से काट दी उँगलियाँ, दूसरे के सिर पर वार

हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के मांड्याली गाँव में एक निहंग सिख ने छोटी सी बात पर दो स्थानीय लोगों पर जानलेवा हमला बोल दिया। घटना में एक पीड़ित की 4 उँगलियाँ कट गईं तो दूसरे के सिर पर गहरे जख्म आए। 

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, तेज सिंह नामक निहंग सिख ने बुधवार (मार्च 31, 2021) की शाम बलवीर नाम के एक बाइक सवार से श्रीआनंदपुर साहिब जाने के लिए लिफ्ट माँगी। लेकिन बाइक सवार के गाँव से जगह दूर होने के कारण उसने लिफ्ट देने से मना कर दिया। इतनी सी बात पर नाराज होकर तेज सिंह ने अपनी कृपाण निकाली और 40 साल के बलवीर की 4 उँगलियाँ काट दीं। धनीराम ने जब बीच-बचाव किया तो उसके सिर पर भी बुरी तरह हमला किया।

हमले के बाद तेज सिंह जंगलों में भाग गया। मगर, मौके पर मौजूद स्थानीयों ने उसका पीछा किया। उसे पकड़कर मारा, फिर पुलिस के हवाले कर दिया। बिलासपुर पुलिस ने तेज सिंह के ख़िलाफ़ धारा 307 में मुकदमा दर्ज कर केस की जाँच शुरू कर दी है।

वहीं, बलवीर और धनीराम को नैना देवी सिविल अस्पातल में भर्ती करवाकर उन्हें उपचार दिलवाया गया। फिर फर्स्ट एड के बाद उन्हें आनंदपुर साहिब रेफर कर दिया गया। इसके बाद गुरुवार को उन्हें वहाँ से घर भेज दिया गया। बलवीर की कटी हुई उँगलियाँ स्टिच लगाकर जोड़ दी गई, जबकि धनीराम के सिर पर भी टाँके लगे हैं।

भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक घटना वाले दिन की सारी बात बताते हुए बलवीर ने कहा,

“बुधवार शाम की बात है। बाइक में पेट्रोल डलवाने के बाद मैं घर के लिए रवाना हुआ। इसी दौरान एक निहंग ने मुझे रोका। रुकते ही वह बिना पूछे बाइक पर बैठ गया और श्री आनंदपुर साहिब जाने को कहा। मैंने कहा कि मुझे मांड्याली तक ही जाना है। यह सुनकर निहंग गुस्से में आ गया और बाइक से उतरकर डंडे से हमला किया। मैं कुछ समझ पाता, निहंग ने कृपाण से वार कर दिया। जान बचाने के प्रयास में तलवार के वार से मेरे बाएँ हाथ की चार उँगलियाँ कट गईं। साथ लगते एक घर में धार्मिक कार्यक्रम के चलते कुछ लोग पास ही मौजूद थे। लोगों के वहाँ पहुँचने से पहले ही निहंग जंगल की ओर भाग गया।”

बलवीर पर हमले के बाद जंगल की तरफ भाग रहे निहंग सिख ने धनीराम पर हमला किया। धनीराम उसे पकड़ने की कोशिश कर रहे थे। निहंग सिख ने धनीराम के सिर पर कृपाण से मारा। दोनों को चोट पहुँचाने के बाद वह जंगल में चला गया। बाद में स्थानीयों ने पकड़कर उसे पुलिस के हवाले किया।

बता दें कि हाल ही में पंजाब में निहंग सिखों के हमले में कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे। वहाँ निहंग सिखों ने अचानक से हमला कर थाना प्रभारी की कलाई काट दी थी और उनकी दूसरी कलाई पर भी गंभीर जख्म आए थे। 

‘शरीयत होता तो सरेआम गर्दन-जुबान काट लटका दिया जाता’: AAP के अमानतुल्लाह ने डासना मंदिर के महंत के खिलाफ की शिकायत

आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक अमानतुल्लाह खान ने पैगंबर मोहम्मद पर कथित आलोचनात्मक टिप्पणियों के लिए डासना देवी मंदिर के प्रमुख महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती के खिलाफ दिल्ली के जामिया नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई है। इससे पहले AAP नेता ने महंत की जुबान और गर्दन काटने की माँग की थी।

अमानतुल्लाह खान ने ट्विटर पर वीडियो शेयर कर बताया कि नरसिंहानंद की गुस्ताखी के लिए उनके ख़िलाफ़ जामिया नगर में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है। उसने कहा है,

“यति नरसिंहानंद ने जो पैगंबर मोहम्मद की शान में गुस्ताखी की है, उसके लिए हुक्म है कि उसका सिर कलम कर दिया जाए या उसकी जुबान काट ली जाए। लेकिन संविधान पर हमें भरोसा है। उम्मीद है कि उसके ऊपर कार्रवाई करके उसे जेल भेजा जाएगा। हम सारे धर्म के गुरुओं- श्रीराम, श्रीकृष्ण सभी का सम्मान करते हैं। इसलिए हम नहीं चाहते हैं किसी भी धर्म को मानने वाला हमारे धर्म गुरु… की शान में गुस्ताखी करे। शरीयत अगर यहाँ होता तो इस शख्स को सरेआम गर्दन काट कर, जुबान काटकर लटका दिया जाता। पर हम कानून का सम्मान करते हैं और वो इसकी इजाजत नहीं देता, इसलिए मैं यहाँ आया हूँ। आला अधिकारी से अपील करता हूँ कि इस शख्स ने मुल्क के माहौल को बिगाड़ने की कोशिश की है। मुसलमानों के दिल को ठेस पहुँची है, तकलीफ हुई है क्योंकि हम किसी भी हाल में ये गुस्ताखी बर्दाश्त नहीं कर सकते।”

यति नरसिंहानंद पर कार्रवाई को लेकर एक तरफ जहाँ अमानतुल्लाह खान आला अधिकारियों से मिल रहे हैं। वहीं भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने कहा है, “स्वामी यति नरसिंहानंद को हाथ भी लगाने की गलती मत करना। ये देश किसी किताब से नहीं, केवल संविधान से चलेगा।”

बता दें कि एफआईआर कराने से पहले आज सुबह अमानतुल्लाह खान ने ट्विटर पर लिखा, “हमारे नबी की शान में गुस्ताखी हमें बिल्कुल बर्दाश्त नहीं, इस नफ़रती कीड़े की ज़ुबान और गर्दन दोनों काट कर इसे सख़्त से सख़्त सजा देनी चाहिए। लेकिन हिंदुस्तान का कानून हमें इसकी इजाज़त नहीं देता, हमें देश के संविधान पर भरोसा है और मैं चाहता हूँ कि दिल्ली पुलिस इसका संज्ञान ले।” 

आप नेता का यह कट्टर बयान यति नरसिंहानंद सरस्वती की एक वीडियो पर आया। इसमें वह प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। यहाँ उन्होंने पैगंबर मोहम्मद की असलियत को उजागर करने के लिए हिंदुओं से निडर होने का आग्रह किया। यति नरसिंहानंद सरस्वती ने कहा:

“अगर इस्लाम की असलियत, जिसके लिए मौलाना कहते हैं कि अगर मोहम्मद के बारे बोला तो सिर काट देंगे… हिंदू ये भय अपने दिमाग से निकाल दें। हम हिंदू हैं। हम राम के चरित्र की मीमांसा कर सकते हैं, हम परशुराम के चरित्र की मीमांसा कर सकते हैं, तो हमारे लिए मोहम्मद क्या चीज है? हम मोहम्मद की मीमांसा क्यों नहीं करेंगे और क्यों सच नहीं बोलेंगे?”

उन्होंने आगे कहा,

“अगर आज मोहम्मद का सच दुनिया के मुसलमान को चल जाए तो उसे अपने मुसलमान होने पर शर्म आएगी। क्योंकि भगवान हर इंसान के अंदर एक अंतरात्मा देता है, जिसे पता होता है कि क्या अच्छा है, क्या बुरा है और जब किसी इंसान को पता चलेगा कि वो केवल एक चोर, लुटेरे, बलात्कारी को, औरतों की सौदागरी करने वाले को फॉलो कर रहा था, तो उसे शर्म आएगी। ये तो हिंदुस्तान के घटिया नेता और नकली धर्मगुरु हैं, जिन्होंने इस्लाम जैसी गंदगी का महिमामंडन कर दिया। अगर इस्लाम के बारे में खुल कर बोला जाता तो आज हम मुसलमान को अपने मुसलमान होने पर शर्म आती। उसे शर्म आती कि वो हिंदुओं के खाने में थूक रहा है, उसे शर्म आती कि उसने अपने भाई जैस दोस्त की पत्नी और बेटी पर गंदी निगाह डाली।”

इसरो जासूसी केस में रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के हवाले: 27 साल पहले तबाह कर दी थी वैज्ञानिक नाम्बी नारायणन की जिंदगी

27 साल पुराने चर्चित इसरो जासूसी केस (ISRO Espionage Case) में उच्च स्तरीय समिति ने अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी है। तीन सदस्यीय समिति का गठन शीर्ष अदालत ने ही 14 सितंबर 2018 को किया था। पूर्व जज डीके जैन की अगुवाई वाली समिति को वैज्ञानिक नम्बी नारायणन (Nambi Narayanan) के खिलाफ साजिशों में केरल के पुलिस अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल का जिम्मा सौंपा गया था।

मीडिया रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट सौंपे जाने की जानकारी दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस समिति का गठन करने के साथ-साथ केरल सरकार को नारायणन को अपमानित करने और असहनीय पीड़ा देने के लिए 50 लाख रुपए का मुआवजा देने के भी निर्देश दिए थे।

नम्बी नारायणन की गिरफ्तारी 1994 में केरल में कॉन्ग्रेस शासन के दौरान हुई थी। अब इसी मामले में ढाई साल की जाँच के बाद समिति ने सीलबंद लिफाफे में उच्चतम न्यायालय को अपनी रिपोर्ट दी है। इसमें गिरफ्तारी के समय की परिस्थितियों की जाँच की गई है।

इससे पहले सीबीआई ने नारायणन की गैरकानूनी गिरफ्तारी के लिए केरल में तत्कालीन शीर्ष पुलिस अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया था। वहीं इस केस के बाद कुछ लोगों ने तत्कालीन मुख्यमंत्री के करुणाकरण पर निशाना साधा था, जिसकी वजह से उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था।

ISRO जासूसी केस

घटना 30 नवंबर 1994 की है। कुछ पुलिस वाले नम्बी नारायणन के घर पर आ धमके। उन्होंने कहा कि DIG आपसे बात करना चाहते हैं। जब नारायणन ने पूछा कि क्या उन्हें गिरफ्तार किया जा रहा है तो पुलिसकर्मियों ने ना में जवाब दिया। उन्हें पुलिस की गाड़ी में आगे बिठा कर ले जाया गया (अपराधियों को अक्सर पीछे बिठाया जाता है)। असल में उससे पहले 20 अक्टूबर को मरियम रशीदा नामक मालदीव की एक महिला को गिरफ्तार किया गया था।

बताया गया था कि वो एक जासूस है और ISRO में कुछ संपर्कों के जरिए वो पाकिस्तान को भारतीय रॉकेट तकनीक की बारीकियाँ सप्लाई कर रही है। 13 नवंबर को उसी साल फौजिया हुसैन नामक मालदीव की एक और महिला को गिरफ्तार किया गया, जो मरियम की दोस्त थी। नम्बी नारायणन तब क्रायोजेनिक इंजन प्रोजेक्ट के मुखिया और लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम्स के डायरेक्टर इन चार्ज हुआ करते थे।

उस समय नारायणन के साथ दो अन्य वैज्ञानिकों डी शशिकुमारन और के चंद्रशेखर को भी गिरफ्तार किया गया था। इन तीन वैज्ञानिकों के अलावा रूसी स्पेस एजेंसी का एक भारतीय प्रतिनिधि एसके शर्मा, एक लेबर कॉन्ट्रैक्टर और फौजिया हसन नामक एक व्यक्ति की भी गिरफ्तारी हुई थी। इन सभी पर पाकिस्तान को इसरो के रॉकेट इंजन की सीक्रेट जानकारी देने के आरोप लगाए गए थे।

पूरे मामले की जाँच के दौरान नम्बी नारायणन को 50 दिनों तक हिरासत में रखा गया था और काफी यातनाएँ दी गई थीं। लेकिन पूरी कहानी में ट्विस्ट आया 1996 में। सीबीआई ने अप्रैल 1996 में चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट को बताया कि यह पूरा मामला फर्जी है। जो भी आरोप लगाए गए हैं उसके कोई सबूत नहीं हैं।

इसके बाद कोर्ट ने इसरो जासूसी केस में गिरफ्तार किए गए सभी आरोपितों को रिहा कर दिया था। लेकिन नम्बी नारायणन को रिहाई से संतुष्टि नहीं थी। वो अपने ऊपर लगा गद्दारी का दाग धोना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने लंबी कानूनी लड़ाई की ओर जाने का फैसला किया। उनकी यह लड़ाई चली भी सच में बहुत लंबी– 24 साल और सुप्रीम कोर्ट तक। देश की सर्वोच्च न्यायालय ने 14 सितंबर 2018 को कहा कि नारायणन को केरल पुलिस ने बेवजह गिरफ्तार किया और उन्हें मानसिक प्रताड़ना दी।

इस मामले में साल 2019 में पूर्व रॉ अधिकारी ने भारत के उप-राष्ट्रपति रहे हामिद अंसारी पर भी कई गंभीर आरोप लगाए थे। पत्रकार चिरंजीवी भट ने पूर्व रॉ अधिकारी एनके सूद से बातचीत की थी, जिसमें उन्होंने हामिद अंसारी के क़रीबी द्वारा वैज्ञानिक नाम्बी नारायणन को बदनाम करने और उनका करियर तबाह करने की बात का खुलासा किया। (आप पूरे इंटरव्यू को हूबहू यहाँ पढ़ सकते हैं) पूर्व रॉ अधिकारी ने पत्रकार चिरंजीवी भट से बात करते हुए कहा:

“रतन सहगल नामक व्यक्ति हामिद अंसारी का सहयोगी रहा है। आपने नम्बी नारायणन का नाम ज़रूर सुना होगा। उन पर जासूसी का आरोप लगा था लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनके ख़िलाफ़ लगे सारे आरोपों को निराधार पाया था। वे निर्दोष बरी हुए। लेकिन, किसी को नहीं पता है कि उनके ख़िलाफ़ साज़िश किसने रची? ये सब रतन सहगल ने किया। उसने ही नम्बी नारायणन को फँसाने के लिए जासूसी के आरोपों का जाल बिछाया। ऐसा उसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि बिगाड़ने के लिए किया। रतन जब आईबी में था तब उसे अमेरिकन एजेंसी सीआईए के लिए जासूसी करते हुए धरा जा चुका था। अब वह सुखपूर्वक अमेरिका में जीवन गुजार रहा है। वह पूर्व-राष्ट्रपति अंसारी का क़रीबी है और हमें डराया करता था। वह हमें निर्देश दिया करता था।”

फिलहाल नारायणन अपनी जिंदगी पर बनी फिल्म को लेकर भी चर्चा में है। बॉलीवुड और तमिल फिल्मों में भिनय का लोहा मनवा चुके रंगनाथन माधवन ने बतौर निर्देशक अपनी पारी शुरू की फिल्म ‘रॉकेट्री – द नम्बी इफ़ेक्ट’ से। इसका ट्रेलर आ गया है और इसे सोशल मीडिया पर अच्छी प्रतिक्रिया भी मिल रही है। यह फिल्म पद्म भूषण से सम्मानित नारायणन की बायोपिक है।