उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में बहुचर्चित आरुषि गैंगरेप हत्याकांड में पॉक्सो कोर्ट (POCSO Court) ने अपना निर्णय दे दिया है। चलती कार में आरुषि के साथ गैंगरेप करने के बाद उसकी हत्या करने वाले तीन दरिंदों इजराइल, जुल्फिकार और दिलशाद को कोर्ट ने फाँसी की सजा सुनाई है। इस वीभत्स हत्याकांड के पश्चात पुलिस की लापरवाही भी सामने आई थी।
दरिंदों की हैवानियत
इजराइल, जुल्फिकार और दिलशाद ने 2 जनवरी 2018 को ट्यूशन पढ़ कर घर लौट रही आरुषि (16 वर्ष) का अपरहण कर लिया था। NH-91 में चलती कार में उस मासूम के साथ गैंगरेप किया गया। इसके पश्चात गला दबाकर उसकी हत्या कर दी गई और उसके शव को दादरी क्षेत्र के राजवाहे में एक नहर में फेंक दिया गया।
4 जनवरी 2018 को आरुषि की लाश मिली। परिजनों ने आरुषि की हत्या के जुर्म में इजराइल, जुल्फिकार और दिलशाद को नामजद कराया। इतने दिनों की सुनवाई के बाद अब आरुषि के हत्यारों को सजा मिली। आरुषि की माँ तीनों हैवानों को फाँसी पर लटकता हुआ देखना चाहती हैं।
मौज-मस्ती के लिए अपहरण और गैंगरेप
तब गिरफ्तार किए गए जुल्फिकार और दिलशाद ने बताया था कि वो मौजमस्ती के लिए रास्ते से किसी लड़की को उठाने का प्लान बनाए थे। ऑल्टो कार से वे लोग जब जा रहे थे, तो एक अकेली लड़की को साइकिल से जाते देखा। ट्यूशन से लौट रही इस लड़की को इन लोगों ने डेटसन शोरुम के बगल वाली गली में घुसने के साथ ही कार में खींच लिया।
पुलिस को जुल्फिकार ने बताया था कि लड़की को कार में खींचने के बाद चलती गाड़ी में पिछली सीट पर इजराइल उर्फ मेलानी ने उसका रेप किया था। दिलशाद हाथ पकड़े हुए था। लड़की जब चिल्लाने लगी थी तो जुल्फिकार गाड़ी चलाता रहा और दिलशाद व इजराइल उर्फ मेलानी ने लड़की के दुप्पटे से गला घोंट कर उसकी हत्या कर दी थी।
पहले तो इस केस की जाँच में पुलिस की लापरवाही भी सामने आई थी। तत्कालीन चौकी इंचार्ज ने घटना के पश्चात बरामद किए गए सामान को कोर्ट में प्रस्तुत नहीं किया जबकि बरामद किया हुआ सामान केस का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। कोर्ट की नाराजगी के पश्चात पुलिस जाँच में तेजी आई थी।
पुलिस ने जाँच पूरी करके इजराइल, जुल्फिकार और दिलशाद के विरुद्ध आरोप पत्र प्रस्तुत किया। आरोप पत्र और सबूतों के आधार पर अपर सत्र न्यायाधीश ने तीनों अपराधियों को एक नाबालिग के अपहरण, बलात्कार और हत्या का दोषी पाया और उन्हें जुर्माने के साथ फाँसी की सजा सुनाई।
पिछले डेढ़ महीने से भी कम समय में थूक कर रोटी बनाने का अब चौथा मामला सामने आ गया है। ताज़ा मामला दिल्ली का है। ये हाल में दिल्ली का इस तरह का दूसरा मामला है। दरअसल, दिल्ली में थूक लगा कर तंदूरी रोटी बनाने का एक और वीडियो वायरल हुआ। पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज क के भजनपुरा निवासी मोहम्मद खालिक को गिरफ्तार कर लिया है। वायरल वीडियो उसी क्षेत्र के मदीना ढाबा का है।
बटर नान खा लो मित्रो, एक और वीडियो थुक कर रोटी बनाते हुए सामने आया है, पुलिस ने मुहम्मद खालिक को गिरफ्तार कर लिया है, कोई नही तुम गंगा जमुनी तहजीब कायम रखो pic.twitter.com/xlxD1RpxsT
आरोपित मोहम्मद खालिक इसी ढाबे पर तंदूरी रोटी बनाने का कार्य करता है। वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि रोटी बनाते समय मोहम्मद खालिक उस पर थूकता है, फिर उसे तंदूर में सेंकने के लिए लगा देता है। जाँच के बाद पुलिस ने IPC की धरा 269-70 (उपेक्षापूर्ण कार्य जिससे जीवन के लिए संकटपूर्ण रोग का संक्रम फैलना संभाव्य हो) और 272 (किसी खाद्य या पेय में खतरनाक वस्तु मिलाना) के तहत FIR दर्ज की।
साथ ही उसके खिलाफ महामारी एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जाएगी। मोहम्मद खालिक लगभग एक दशक पहले ही अपने गाँव से काम की तलाश में दिल्ली आया था। पहले वो अजीत नगर में एक ढाबे पर रोटियाँ बनाने का काम करता था। फिर वो अपने जीजा के साथ मोहनपुरी आ गया। मदीना ढाबे पर उसके साथ 5-6 और भी लोग हैं जो काम करते हैं। इस ढाबे का मालिक भी उसकी जान-पहचान का ही है।
बताते चलें कि पिछले कुछ दिनों में इस तरह का पहला मामला मेरठ से सामने आया, जहाँ नौशाद उर्फ़ सोहैल को थूक कर रोटी बनाते हुए वीडियो वायरल होने के बाद गिरफ्तार किया गया। उसका कहना है कि वो 10-15 वर्षों से ऐसा कर रहा है। गाजियाबाद में मोहसिन एक मांगलिक कार्यक्रम में ऐसा ही करते हुए पकड़ा गया। दिल्ली में होटल चाँद में सबी अनवर और इब्राहिम भी ऐसी ही हरकतें करते हुए कैमरे में कैद हुए।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज है। इस बीच कूचबिहार जिले के दिनहाटा टाउन मंडल के अध्यक्ष अमित सरकार का शव मिलने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है। मंडल अध्यक्ष का शव दिनहाटा में लटकते हुए हालत में बरामद किया गया।
Bjp Mandal President, Dinhata Coochbehar murdered and hanged 72 hrs before elections
The opposition are murderers, they are criminals. They should be prosecuted immediately@ECISVEEP you are allowing murderers to contest?
अमित सरकार की हत्या को लेकर बीजेपी कार्यकर्ताओं ने कहा है कि टीएमसी की ओर से इस हत्या को अंजाम दिया गया है। बीजेपी कार्यकर्ताओं ने कहा कि टीएमसी चाहती है कि ऐसा करके वह बीजेपी कार्यकर्ता को डर कर घर में बैठा देंगे लेकिन हम लोग ऐसा नहीं होने देंगे। चुनाव में जीत दर्ज करने के लिए लगातार प्रयास जारी रखेंगे।
Amit Sarkar, mondal president of Dinhata Town, was hanged to death by TMC goons, just 72 hours before the first phase.
Is this what TMC meant by Khela Hobe?
Bengal has been reduced to blood field with political killings becoming the norm. BJP has lost over 130 of its cadres… pic.twitter.com/M1tzMkmXry
अमित सरकार का शव दिनहाटा वेटनरी हॉस्पिटल के परिसर से बरामद किया गया है। मौके पर पहुँच कर पुलिस ने शव को कब्जे में ले लिया है। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है।
मंडल अध्यक्ष का शव मिलने के बाद बीजेपी आईटीसेल के अध्यक्ष अमित मालवीय ने कहा है कि टीएमसी के गुंडों ने पहले चरण के वोटिंग से 72 घंटे पहले बीजेपी नेता की हत्या की है। क्या खेला होवे का यही मतलब है? इस समय बंगाल राजनीतिक हत्याओं का गढ़ बन गया है। बीजेपी ने 130 से ज्यादा कैडर राज्य में खो दिए हैं।
बता दें कि पश्चिम बंगाल में कुल आठ चरणों में चुनाव होंगे। पहले चरण में 30 सीटों पर 27 मार्च को वोटिंग होगी। वहीं, दूसरे चरण में 30 सीटों पर एक अप्रैल को, तीसरे चरण में 31 सीटों पर 6 अप्रैल को, चौथे चरण में 44 सीटों पर 10 अप्रैल को, पाँचवें चरण में 45 सीटों पर 17 अप्रैल को, छठे चरण में 43 सीटों पर 22 अप्रैल को, सातवें चरण में 36 सीटों पर 26 अप्रैल को और आठवें और अंतिम चरण में 35 सीटों पर 29 अप्रैल को वोट डाले जाएँगे। वहीं, पाँच राज्यों में एक साथ 2 मई को नतीजे घोषित किए जाएँगे।
गौरतलब है कि पिछले दिनों पश्चिम बंगाल में एक भाजपा कार्यकर्ता की पीट पीट कर हत्या कर दी गई और 6 अन्य बुरी तरह घायल हुए। यह घटना शनिवार (12 दिसंबर 2020) को हुई जब कार्यकर्ताओं का एक समूह उत्तर 24 परगना जिले में गृह संपर्क अभियान (डोर टू डोर) के लिए निकला था। सैकत भावल (Saikat Bhawal) उस समूह में ही शामिल थे, घटना के बाद मौके पर मौजूद लोग उन्हें उपचार के लिए कल्याणी स्थित जेएनएम अस्पताल लेकर गए जहाँ डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बांकुड़ा के बिष्णुपुर में आज (मार्च 24, 2021) चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए भारतीय जनता पार्टी पर जमकर निशाना साधा। ममता बनर्जी ने भाजपा पर आरोप लगाया कि बीजेपी बाहर से गुंडे ला रही है और बंगाल में प्रचार कर रही है। बंगाल सीएम ने जनसभा में कहा कि भाजपा उत्तर प्रदेश से भगवाधारी और गुटखा चबाने वाले गुंडों को यहाँ पर भेज रही है और वो लोग हमारे कल्चर को बर्बाद कर रहे हैं।
उन्होंने आगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह प्रधानमंत्री पद का बेहद सम्मान करती हैं। लेकिन नरेंद्र मोदी सबसे बड़े झूठे हैं। उन्होंने जो 15 लाख देने का वादा किया था उसका क्या हुआ। सीएम बनर्जी ने दिल्ली की सड़कों को महीनों से घेर कर बैठे किसानों को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि आखिर पीएम ने इस मामले पर चुप्पी क्यों साधी हुई है।
#WATCH | They (BJP) are bringing goons from outside. We don’t call people who hail from Bengal ‘bohiragoto’ (outsider)…Goons from Uttar Pradesh donning saffron clothes & chewing Pan Bahar are being sent here, they are destroying our culture: West Bengal CM in Bishnupur pic.twitter.com/G8N9HrSn9D
ममता बनर्जी ने जनसभा में कहा “नरेंद्र मोदी मिथ्यावादी हैं। नरेंद्र मोदी, अमित शाह और अडानी सब लूट कर चले जाएँगे। उत्तर प्रदेश से भगवा कपड़ा पहने हुए पान चबाते हुए लोग हमारे बंगाल की संस्कृति खत्म करने आए हैं।”
वह बोलीं, “सिर्फ नरेंद्र मोदी का गैस बैलून चलेगा, जो झूठ से भरा हैं। अगर हम खाद बिना पैसे देते हैं तो आपको गैस मुफ्त में देना होगा। मैं जो बोलती हूँ वो करके दिखाती हूँ। आपने बोला- बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, लेकिन एक भी पैसा नहीं दिया। हमने दिया, क्योंकि हम मोदी के तरह झूठ बात नहीं करते हैं।”
ममता बनर्जी ने आगे दावा करते हुए कहा, “हमने बंगाल में 30 प्रतिशत गरीबी को कम किया है। लेकिन बीजेपी ने दिल्ली के दंगा में कितनों का खून बहाया भूल गए हैं। उत्तर प्रदेश में कितना खून बहाया भूल गए। CAA-NRC के लिए कितने लोगों को मारा आप भूल गए।” जनसभा में लोगों से अपील करते हुए ममता ने कहा कि जो सीपीएम के समर्थक हैं मैं उनसे अनुरोध करके कहती हूँ कि आप बीजेपी को वोट देकर अपना वोट बर्बाद न करें।
बता दें कि इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज (मार्च 24, 2021) कांथी में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए दावा किया था कि बंगाल के लोग ममता बनर्जी सरकार का खेला समझ गए हैं और दो मई को उसकी विदाई तय है। उन्होंने कहा कि बंगाल के कोने से कोने से अब एक ही आवाज़ आ रही है, बंगाल के हर घर से एक ही आवाज़ आ रही है, बंगाल के हर मुख से एक ही आवाज़ आ रही है कि 2 मई दीदी जाछे और आसोल परिवर्तन आछे।
महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई के पुलिस महकमे में बड़ा उलटफेर किया है। सचिन वाजे के करीबी सहित 65 अधिकारियों का क्राइम ब्रांच से ट्रांसफर कर दिया गया है। कुल 86 तबादले हुए हैं। इधर सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार करते हुए उन्हें बॉम्बे हाई कोर्ट में अपील करने को कहा है।
परमबीर सिंह ने पुलिस कमिश्नर पद से हटाए जाने के बाद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को एक पत्र लिखा था। इसमें आरोप लगाया था कि राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने वाजे को 100 करोड़ रुपए की वसूली का टारगेट दिया था। इसके बाद सिंह ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए मामले की सीबीआई जाँच की माँग की थी। उन्होंने आशंका जताई थी कि देशमुख इससे जुड़े सबूत नष्ट कर सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (24 मार्च 2021) को उनकी याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस आर सुभाष रेड्डी की पीठ ने कहा कि मामले में अनिल देशमुख को पक्षकार क्यों नहीं बनाया गया? पीठ ने यह भी पूछा है कि आप पहले हाई कोर्ट क्यों नहीं गए? परमबीर सिंह ने सुप्रीम कोर्ट से अपनी याचिका वापस लेते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट में अपील की बात कही है।
सिंह ने याचिका में अपने तबादले को मनमाना और गैरकानूनी बताते हुए आदेश को रद्द करने का भी अनुरोध किया था। इसके अलावा अंतरिम राहत के तौर पर अपने तबादला आदेश पर रोक लगाने और राज्य सरकार, केंद्र तथा सीबीआई को देशमुख के आवास की सीसीटीवी फुटेज फौरन कब्जे में लेने के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया था।
इससे पहले मंगलवार को महाराष्ट्र सरकार ने बड़ा फेरबदल करते हुए 86 पुलिस अधिकारियों का तबादला कर दिया। 86 में से 65 मुंबई क्राइम ब्रांच के हैं। रिपब्लिक वर्ल्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस सूची में सचिन वाजे के करीबी सहयोगी मुंबई पुलिस (CIU) के API रियाज काजी का आर्म्ड फोर्स में ट्रांसफर कर दिया गया है। महाराष्ट्र सरकार ने ये ट्रांसफर ऐसे समय में किए हैं जब एंटीलिया केस की जाँच को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार नए पुलिस प्रमुख हेमंत नागराले ने पद सँभालने के बाद बड़े फेरबदल के संकेत दिए थे। तबादलों को महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम धारा 22 (एन) (2) के तहत निष्पादित किया गया है, जो सार्वजनिक हित के लिए असाधारण मामलों में स्थानांतरण की अनुमति देता है। मुंबई क्राइम ब्रांच में रहे सचिन वाजे पर एंटीलिया के बाहर विस्फोटक लदी कार रखने और मनसुख हिरेन की हत्या का आरोप है।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) एक सांविधिक इकाई है, जो विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा से संबंधित सभी प्रकार के कार्यकलापों की एक जिम्मेदार संस्था है। यूजीसी ने हाल ही में बीए इतिहास के पाठ्यक्रम का एक ड्राफ्ट प्रकाशित किया, जो भारतीय इतिहास के सभी पहलुओं पर प्रकाश डालता है। यूजीसी के इसी प्रयास के कारण कई बुद्धिजीवी और नेता व्यथित हैं, जिनमें असदुद्दीन ओवैसी प्रमुख रूप से सम्मिलित हैं।
दि आइडिया ऑफ भारत
बीए इतिहास का पहला पेपर “आइडिया ऑफ भारत” पर आधारित है। यह भारतवर्ष की अवधारणा, भारतीय ज्ञान परंपरा, कला एवं साहित्य, धर्म, विज्ञान, जैन एवं बौद्ध साहित्य, भारतीय आर्थिक परंपरा एवं ऐसे ही अन्य टॉपिक्स को कवर करता है। इनमें वेद, उपनिषद, महान ग्रंथ, जैन एवं बौद्ध साहित्य, वसुधैव कुटुंबकम की अवधारणा, भारतीय अंक पद्धति एवं गणित, समुद्री व्यापार इत्यादि सम्मिलित है।
ड्राफ्ट में बताया गया है कि इस पाठ्यक्रम के माध्यम से छात्र प्राचीन भारत के नागरिकों के प्रारम्भिक जीवन और संस्कृति से परिचित होंगे एवं उस समाज की व्यवस्था, धर्म पद्धति एवं राजनैतिक इतिहास को जान सकेंगे। इस पाठ्यक्रम का एक उद्देश्य यह भी है कि छात्र भारत में लगातार हुए सामाजिक एवं सांस्कृतिक परिवर्तनों का भी अध्ययन कर सकें।
‘Idea of Bharat’ को लेकर UGC का नया सिलेबस
सिंधु-सरस्वती सभ्यता की व्याख्या
इस स्नातक कोर्स का तीसरा पेपर प्राचीन भारत के इतिहास लेखन एवं ऐतिहासिक स्रोतों की व्याख्या से संबंधित है। इसमें वैदिक काल, जैन और बौद्ध धर्म के उदय से संबंधित कई विषय हैं। इस खंड की सबसे महत्वपूर्ण बात है कि इसमें सिंधु-सरस्वती सभ्यता के अस्तित्व से संबंधित सभी पहलुओं की व्याख्या की गई है। साथ ही हिंदुओं में भेद उत्पन्न करने के लिए प्रचलित की गई आर्य आक्रमण की थ्योरी को भी नकारा गया है।
आर्य आक्रमण की थ्योरी को नकारा, सिंधु-सरस्वती सभ्यता
आक्रांता अब आक्रांता ही कहा जाएगा
अभी तक स्नातक कार्यक्रमों की इतिहास की पुस्तकों में बाबर और तैमूरलंग जैसे आक्रमणकारियों के लिए आक्रांता अथवा आक्रमणकारी जैसे शब्द नहीं लिखे जाते थे किन्तु UGC ने इस ड्राफ्ट में इसे स्वीकार किया है।
नए सिलेबस में बाबर को आक्रांता कहा गया है
बुद्धिजीवियों और नेताओं का विरोध
हालाँकि जब भी इतिहास में किसी भी प्रकार के सुधार की बात आती है तो कुछ राजनैतिक नेताओं और स्वघोषित बुद्धिजीवियों को यह सुधार आरएसएस का षड्यंत्र ही दिखाई देता है। वामपंथी पोर्टल टेलीग्राफ ने कुछ शिक्षकों और विद्यार्थियों का वक्तव्य छापा है कि वैदिक और हिन्दू धार्मिक ग्रंथों का उपयोग करके शिक्षा का भगवाकरण किया जा रहा है। इन “शिक्षकों और विद्यार्थियों” ने यह भी चिंता व्यक्त की है कि “आइडिया ऑफ भारत” पर आधारित ने पाठ्यक्रम से “मुस्लिम शासनकाल की महत्ता” समाप्त हो जाएगी।
टेलीग्राफ ने दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफंस कॉलेज के एक अनजान विद्यार्थी का कथन छापा कि वह “आइडिया ऑफ भारत” के माध्यम से प्राचीन भारतीय सभ्यता के महिमामंडन से व्यथित है। दिल्ली विश्वविद्यालय के ही श्यामलाल कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर जीतेंद्र मीणा जी भी व्यथित हैं कि नया पाठ्यक्रम सेक्युलर साहित्य के स्थान पर धार्मिक साहित्य का महिमामंडन करता है एवं मुगल इतिहास को दरकिनार कर देता है।
Demonising our Muslim past & sidelining historical texts like Arthashastra. Removing chapters on pre-1857 rebellions, Dalit politics & reducing attention on people like Ambedkar, Gandhi, Nehru, Patel should tell you everything about what the real purpose of this effort is 2/2
ऐसे मुद्दों पर ओवैसी कुछ न कहें, यह असंभव है। उन्होंने सीधे भाजपा पर यह आरोप लगा दिया कि भाजपा अपनी हिन्दुत्व की विचारधारा को पाठ्यक्रम में सम्मिलित करने का कार्य कर रही है। ओवैसी ने एक ट्वीट में कहा कि शिक्षा प्रोपेगंडा नहीं है। भाजपा हिन्दुत्व की विचारधारा को पाठ्यपुस्तकों में शामिल कर रही है। माईथोलॉजी को स्नातक कार्यक्रमों में नहीं पढ़ाना चाहिए। ओवैसी ने ड्राफ्ट पर प्रश्न उठाते हुए कहा कि पाठ्यक्रम मुस्लिम इतिहास को मलीन कर रहा है।
अमित शाह को 2014 लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी दी गई थी। तब वो हर न्यूज़ इंटरव्यू में स्पष्ट कहा करते थे कि राज्य में भाजपा को उतनी सीटें आएँगी, जितनी आज तक नहीं आईं। अब पश्चिम बंगाल में भी उन्होंने 200 पार का आँकड़ा और नारा दिया है। लेकिन, पश्चिम बंगाल के पिछले महीने के कुछ ओपिनियन पोल या सर्वेज को देखें तो भाजपा हर जगह तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) से पिछड़ती ही दिख रही थी।
लेकिन, ताज़ा 2 ओपिनियन पोल ऐसे हैं जो सभी का ध्यान अपनी तरफ खींच रहे हैं और मत प्रतिशत का फासला इतना करीब पहुँच गया है कि अब सर्वे करने वाले भी इसे काँटे की टक्कर मान रहे हैं। हम इसकी बात करेंगे, लेकिन इससे पहले आए दो ओपिनियन पोल्स की बात करते हैं पहले, जिसमें ममता बनर्जी फिर से सरकार बनाती दिख रही हैं। सवाल है कि आखिर डेढ़ महीने से भी कम समय में ऐसा क्या बदल गया?
सबसे पहले बात ‘ABP न्यूज़ – C वोटर ओपिनियन पोल‘ की, जिसके परिणाम फरवरी 28, 2021 को जारी किए गए थे। उसमें बताया गया था कि TMC 294 में से 148-164 सीटें जीत कर सत्ता में वापसी कर रही है और भाजपा 92-108 सीटों के साथ उसे कड़ी टक्कर दे सकती है। कॉन्ग्रेस-लेफ्ट-ISF गठबंधन को मात्र 31-39 सीटें दी गई थीं। यानी, उस सर्वे में भाजपा बहुमत (148) से काफी दूर रह जा रही थी।
वहीं इसके लगभग तीन हफ़्तों बाद ‘ABP न्यूज़ – CNX ओपिनियन पोल‘ आया, जिसमें भाजपा बहुमत के करीब पहुँचती दिख रही है। जहाँ TMC को इसमें 136-146 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है, वहीं भाजपा को 130-140 सीटें मिलने की बात कही जा रही है। वामपंथी-कॉन्ग्रेस-ISF गठबंधन को 14-18 सीटें मिलते हुए दिखाया गया है। सबसे बड़ी बात ये है कि मत प्रतिशत में ज्यादा अंतर नहीं है।
ताज़ा सर्वे में जहाँ तृणमूल को 40.07% वोट मिलने का अनुमान लगाया गया है, वहीं 37.75% वोटों के साथ भाजपा के एकदम करीब होने का अनुमान लगाया जा रहा है। जब बात मात्र 3% वोटों से आगे-पीछे होने की हो, तब राज्य में परिवर्तन की आहट सुनाई देने लगती है। 28 फरवरी वाले सर्वे में TMC को 43% और भाजपा को 38% वोट पाते हुए दिखाया गया है। 5% का फासला अब 3% का रह गया है।
अब सवाल कि आखिर तब से अब तक क्या बदल गया? इसमें कई चीजें ध्यान देने लायक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मार्च 8, 2021 को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए अपनी पहली रैली की। जब पिछला सर्वे हुआ था, तब भाजपा के सबसे बड़े चेहरे का प्रचार अभियान शुरू नहीं हुआ था। एक और बात ये है कि तब लेफ्ट-कॉन्ग्रेस-ISF के बीच सीटों का बँटवारा नहीं हुआ था। ISF फुरफुरा शरीफ के मौलाना अब्बास सिद्दीकी की पार्टी है।
माना जा रहा है कि इस गठबंधन में अब्बास के उम्मीदवार ममता बनर्जी की तरफ झुकी हुई मानी जा रही अल्पसंख्यक वोटों को जम कर काटेंगे। इसके अलावा असदुद्दीन ओवैसी ने भी पश्चिम बंगाल में चुनाव लड़ने की घोषणा कर रखी है। इससे ज्यादा फर्क भले न पड़े, लेकिन ओवैसी की जहाँ-जहाँ रैलियाँ होंगी, वहाँ नुकसान तृणमूल का ही होगा। अस्पताल में रहने के कारण ममता बनर्जी को मीडिया फुटेज और पब्लिसिटी तो खूब मिली, लेकिन उनके कई कार्यक्रम भी स्थगित हुए।
अब बात करते हैं सबसे ताज़ा ‘जन की बात ओपिनियन पोल’ की, जिसमें भाजपा की सरकार स्पष्ट रूप से बनती दिख रही है। भाजपा को इसमें 150-162 सीटें मिलने का अनुमान लगाया है, वहीं TMC को 118-134 पर अटकते हुए दिखाया गया है। वहीं वामपंथी गठबंधन मात्र 10-14 पर ही रह जाएगा। इसमें दो बड़ी बातें हैं – 85% मुस्लिम अब भी ममता बनर्जी के साथ हैं और नंदीग्राम में मुख्यमंत्री को झटका लग सकता है।
इसी बीच एक और आँकड़े की बात कर लेते हैं, जो प्रशांत किशोर ने दिसंबर के तीसरे हफ्ते के अंतिम दिन भविष्यवाणी की थी कि भाजपा के लिए मीडिया हाइप बना रही है लेकिन पार्टी दो अंकों की संख्या पार करने के लिए भी तरस जाएगी। इस पर बंगाल भाजपा के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने कहा था कि देश को एक राजनीतिक विशेषज्ञ खोना पड़ेगा। क्या प्रशांत किशोर कहना चाह रहे थे कि भाजपा 99 पर अटक जाएगी?
प्रशांत किशोर की ये भविष्यवाणी मेदिनीपुर के दिग्गज नेता शुभेंदु अधिकारी के भाजपा में शामिल होने के 2 दिन बाद आई थी। ये बौखलाहट थी या मीडिया को पुनर्विश्लेषण की सलाह? राजनीतिक विश्लेषक इसीलिए भी ममता बनर्जी के खिलाफ बहुत कुछ अंदाज़ा नहीं लगा रहे हैं क्योंकि इस बार ऐसी पार्टी उन्हें कड़ी टक्कर दे रही है जो 2016 विधानसभा चुनाव में मात्र 3 सीटें ही जीत पाई थी। 3 से सीधे 148 तक पहुँचना बहुत बड़ी बात होती है।
प्रधानमंत्री अब तक कोलकाता के अलावा पुरुलिया, खड़गपुर और बाँकुड़ा में रैलियाँ कर चुके हैं। कई रैलियाँ अभी होनी हैं। अमित शाह का ज्यादा जोर रोडशो पर है। हो सकता है ममता बनर्जी की पदयात्राओं की काट के रूप में वो ऐसा कर रहे हैं। शाह का अनुमान है कि भाजपा को 294 में से 200 सीटें मिलेंगी ही मिलेंगी। अमित शाह ने पश्चिम बंगाल की तैयारी भाजपा अध्यक्ष बनते ही शुरू कर दी थी और इसीलिए अब उस पद पर न रहते हुए भी वो इसके लिए जीतोड़ मेहनत कर रहे हैं।
असल में भाजपा पिछले विधानसभा चुनाव को देख ही नहीं रही है। उसे 2019 का लोकसभा चुनाव दिख रहा है जो अपेक्षाकृत ताज़ा भी है और पार्टी के लिए मनोबल बढ़ाने वाला भी। भाजपा ने 43.3% वोट शेयर के साथ 18 सीटें जीती थीं। वहीं TMC वोट शेयर के मामले में उससे 3% पीछे रही थी लेकिन भाजपा से 4 सीटें ज्यादा पाने में कामयाब रही थी। अप्रैल 2019 से पहले हुए ओपिनियन पोल्स में तब भी भाजपा को किसी ने 8 से ज्यादा सीटें नहीं दी थीं।
राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक हिजबुल मुजाहिदीन के गिरफ्तार आतंकवादी नवीद बाबू को जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती जानती थीं। इतना ही नहीं उनकी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) का गिरफ्तार नेता वहीद उर रहमान पारा कश्मीर में पत्थरबाजों का गैंग चलाता था। साथ ही आतंकियों के लिए हथियारों का भी इंतजाम करता था।
एनआईए ने अदालत में वहीद उर रहमान सहित 3 लोगों के खिलाफ दायर एक चार्जशीट में बताया है कि पीडीपी नेता ‘पत्थरबाजी’ का रैकेट चलाता था और दक्षिण कश्मीर में हथियार की तस्करी का काम भी करता था। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, चार्जशीट में पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के लिए कहा गया कि वह आतंकवादी नवीद बाबू को जानती थीं। वह उससे एक बार फोन पर बात भी कर चुकी हैं।
चार्जशीट में वहीद उर रहमान पर अपनी पहुँच का गलत इस्तेमाल करने के आरोप लगाए गए हैं। साथ ही ये भी कहा गया कि वहीद ने एके-47 की तस्करी के लिए सरकारी वाहन का इस्तेमाल किया। चार्जशीट के अनुसार, पारा ने दक्षिण कश्मीर में पत्थरबाजी का रैकेट चलाया, जिसे उसने साल 2010-11 में संगठित किया था। उसने पॉलिटिकल माइलेज पाने के लिए पुलवामा में ऐसे 20-25 लड़कों को इकट्ठा किया था जो पत्थरबाजी में शामिल थे।
चार्जशीट में कहा गया है, “वहीद उर रहमान ने घाटी में लश्कर ए तैयबा और हिजबुल मुजाहिद्दीन के आतंकियों को समर्थन दिया। जाँच में ये भी पाया गया कि वह इरफान शफी मीर, दविंदर सिंह और सैयद नवीद मुश्ताक के साथ अपराधिक साजिश में शामिल था ताकि कश्मीर घाटी में सक्रिय आतंकियों के लिए फंड जुटाया जा सके।”
बता दें कि ये पूरा मामला हिजबुल कमांडर नवीद बाबू के साथ पकड़े गए डीएसपी दविंदर सिंह व अन्य की गिरफ्तारी से जुड़ा है। राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने इसमें पीडीपी नेता वहीद उर रहमान को भी आरोपित बनाया है। रहमान ने हाल ही में डीडीसी चुनाव में पुलवामा से जीत हासिल की है, मगर इस केस के चलते अभी वह जेल में है।
इससे पहले पीडीपी नेता पर आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन को 10 लाख रुपए देने के इल्जाम लगे थे। एनआईए का कहना था कि पारा ने इरफान के साथ कई मीटिंग की। वह खुद भी आतंकी संगठन से जुड़ा है। उसने संगठन को हथियार खरीद के लिए 10 लाख रुपए दिए थे। कथित तौर पर ये पैसा दविंदर के जरिए नवीद तक जाना था, जिसे निलंबित अधिकारी ने श्रीनगर एयरपोर्ट पर रिसीव किया था।
उल्लेखनीय है कि दविंदर सिंह को हिजबुल आतंकियों के साथ पिछले साल 11 जनवरी को गिरफ्तार किया गया था। उस समय तीनों एक साथ कार में जा रहे थे। पकड़े जाने पर पता चला कि दविंदर इस्लामी आतंकी संगठन के लिए काम कर रहा है। बाद में ये मामला 18 जनवरी को एनआईए के हाथ आया और अब लंबी जाँच के बाद इसमें चार्जशीट दाखिल हुई है।
दक्षिणी दिल्ली के सराय काले खाँ में शनिवार (मार्च 20, 2021) रात मुस्लिम समुदाय के 50 से अधिक युवकों की उग्र भीड़ ने इलाके की दलित बस्ती में घुसकर आधे घंटे तक लाठी, डंडों, रॉड, कट्टा और तलवार के साथ जिस तरह से रात करीब 11 बजे हमला किया उसे सुनियोजित बताया जा रहा है।
दलित युवक और मुस्लिम लड़की के बीच आपसी सहमति से हुई शादी को लेकर जो उपद्रव हुआ उसके पीछे 38 वर्षीय सबीना नाम की एक महिला का नाम बार-बार सामने आ रहा है। जो मुस्लिम लड़की के मोहल्ले की है। अब दिल्ली पुलिस सबीना को तलाश रही है। उसे मुख्य साजिशकर्ता बताया जा रहा है।
हाथों में तलवार और पत्थर जलाना था हिंदुओं का घर
मुस्लिम लड़की हिंदू लड़का शादी से कट्टरपंथी था भड़का#SaraiKaleKhan में ऐसी थी आतंक की रात अनदेखे वीडियो फुटेज से समझें ‘सहिष्णुता’ की बात pic.twitter.com/ESDqA3zsHS
दलित युवक सुमित की माँ ने ऑपइंडिया को बताया कि उनकी बहू जिसे वो अब ‘खुशी’ बुलाती हैं, की सबीना नाम की एक सहेली/परिचित है, उसके पिता का नाम सुलेमान है, उसका उनकी बहु के घर आना-जाना था। वो इस शादी को लेकर सबसे ज्यादा बिगड़ी हुई थी। वही राजीनामे के दिन सेलेक्ट कॉलोनी थाने में भी 20-25 लोगों को लेकर आई थी और मार देने की धमकी दे रही थी।
युवक की माँ ने साफ कहा कि सबीना ने ही सबको भड़काकर इस हमले की साजिश रची थी क्योंकि वह बार-बार धमकी दे रही थी। हालाँकि, जिस समय यह घटना घटी उस समय लड़के के घर वाले अपनी बस्ती में न होकर किसी दूसरे सुरक्षित जगह पर चले गए थे। जिसकी वजह से उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुँचा है मगर बस्ती के लोग इस घटना से उनसे काफी नाराज हैं क्योंकि उनका काफी नुकसान हुआ है। बस्ती की 30 से अधिक गाड़ियाँ और बाहर रखे कूलर, गमले सहित कई दूसरे सामान मुस्लिम उपद्रवियों द्वारा तोड़ दिए गए हैं।
सुमित की माँ ने ऑपइंडिया को बताया, “मुस्लिम भीड़ ने उस थाने को ही घेर लिया था, जहाँ पर उनमें राजीनामा हुआ था। जब भीड़ ने उनको पूरी तरह से घेर लिया तो पुलिस ने सुरक्षा के मद्दे नजर लड़के के परिजनों को अंदर थाने में बुला लिया। वो लोग गाली-गलौज कर रहे थे। कह रहे थे कि लड़की को दे दो, काट देंगे। अब हमारे काम की नहीं रही। इसने ईमान खो दिया।”
लड़के की माँ ने कहा कि अगर उनकी बेटी जाती है तो ले जाएँ, लेकिन लड़की ने जाने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि डर की वजह से राजीनामा के बाद उन्हें अपने घर लेकर नहीं आईं। उन लोगों ने उनके घर के बाहर भी तोड़फोड़ की। दरवाजा तोड़कर घर में आग लगाने की कोशिश की। अगर उस दिन घर पर वो लोग होते तो वो मार दिए जाते। पुलिस काफी सुरक्षा के साथ उन्हें भीड़ से बचाकर लाई।
अब तक मिली जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है कि सबीना सराय काले खाँ में सभी मुस्लिम परिवारों में उठती-बैठती है। मजहब के नाम पर लोगों को उकसाती रहती है। इससे पहले भी एक बार वह पड़ोसियों के झगड़े को मजहबी रंग देने की कोशिश कर चुकी है।
बस्ती के लोगों ने ऑपइंडिया को बताया कि सबीना ने ही दोपहर में खून की होली खेलने की धमकी दी थी। कहा जा रहा है कि उसने ही कई दूसरे मुस्लिम लोगों से मीटिंग की और उनको उकसाया। इतना ही नहीं ये भी कहा कि अगर लड़का-लड़की सराय काले खाँ आते हैं तो उनकी हत्या कर दी जाए।
पीड़ित के माता-पिता का यह भी कहना है कि इन धमकियों के बाद वो पुलिस सुरक्षा में अपने रिश्तेदारों के घर चले गए थे। इसके बाद भी उनकी तलाश में यहाँ बस्ती पर हमला हुआ। उस भीड़ में मुस्लिम लड़की के परिजन और अन्य सम्बन्धी और बाहर से आई मुस्लिम भीड़ भी थी जिसे बस्ती को लोग नहीं पहचानते। जिसे जानते हैं कुछ का नाम गिनाते हुए पीड़ित परिवार ने FIR भी की है।
पुलिस ने इस मामले में 8 लोगों को नामजद किया है जिनमें से अली, फैसल, हसन और अफरान सहित 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। सबीना समेत तीन अभी भी फरार हैं। हमले में शामिल बाकी लोगों की अभी पहचान फिलहाल नहीं हो पाई है, क्योंकि बताया जा रहा है कि इन लोगों को हमला करने के लिए बाहर से बुलाया गया था। हालाँकि, CCTV फुटेज के आधार पर बस्ती के लोग उनकी भी गिरफ़्तारी की माँग कर रहे हैं।
ऑपइंडिया ने इस बाबत वाल्मीकि बस्ती केदूसरे पीड़ितों से भी बात की जिसमें पीड़ित महिलाओं ने उस रात की भयावह दास्ताँ को बयाँ किया। उन्होंने बताया कि हमलावर उनके घर में घुस गए थे। हमलावरों के हाथों में तलवार, चाकू, छूरी, बंदूकें और डंडे आदि थे। पीड़ितों का कहना है कि चूँकि वो लोग जगे हुए थे, इसलिए बच गए। हमलावरों ने महिलाओं के बाल पकड़ कर भी खींचे। जिससे उन्हें चोटें भी आई। जब उन्होंने बच्चों को अंदर करके दरवाजा लगाने की कोशिश की तो हमलावरों ने बाल पकड़ कर खींचा।
लोगों ने बताया कि मुस्लिम समुदाय के हमलावरों ने दरवाजे पर ईंटें और तलवारें मारी। जिससे कुछ हद तक कई गेट भी टूटे। उन्होंने आग लगाने की भी कोशिश की। वो गाड़ियों से पेट्रोल निकाल रहे थे, मगर लोगों ने देख लिया और छत से कुछ भारी फेंक कर मारा, जिसके बाद वो वहाँ से भागे। पीड़ित महिलाओं ने बताया कि जब लोग थोड़े से आक्रामक हुए तो वो लोग पीछे हटे और बगल वाली गली में गए। वहाँ पर भी उन लोगों ने हमला किया, जहाँ पर 4-5 लोगों को चोटें आई हैं।
एक और पीड़ित महिला ने कैमरे के सामने कहा कि हमला करने वाली मुस्लिम भीड़ में शामिल सबीना नाम की महिला ने उनके कौम (जाति) को गाली दी और धमकी दी कि वो खून की होली खेलेगी। उसने हमें भं* कहा। उसने कहा कि जो भी मुहल्ला वाला बोलेगा, वो पिटेगा।
पीड़ितों ने न्याय की माँग की है। उनका कहना है कि उन्होंने उनके कौम को गाली दी है, इस पर एक्शन लिया जाए। उन्होंने कहा कि वो प्रशासन से माँग करती हैं कि सभी हमलावरों (वो लड़की भी, जिसका नाम सबीना है, जिसने खून की होली खेलने की धमकी दी) को सजा हो।
गौरतलब है कि अब शादीशुदा जोड़े ने भी घटना के बाद बस्ती पर हमले को देखते हुए एक वीडियो जारी कर प्रशासन से सुरक्षा की माँग की है। 22 वर्षीय दलित युवक सुमित ने कहा कि उन्होंने मार्च 17 को अपनी मर्जी से शादी की है और लड़की भी बालिग़ है।
युवक ने कहा कि लड़की के घर वालों ने उसकी बस्ती में हमला कर के ईंट-पत्थर चलाए व चाकू-तलवार से हमला किया। युवक और युवती ने वीडियो जारी कर के सुरक्षा की गुहार लगाई है। उन्होंने कहा कि गली तहस-नहस कर दी गई है और धारदार हथियारों से किए गए वार में कई लोग घायल भी हुए हैं।
वहीं सुरक्षा के मद्देनजर, पुलिस और अर्धसैनिक बलों की एक टीम लगातार मौके पर मौजूद रहती है। बताया जा रहा है कि एक निरीक्षक स्तर के अधिकारी के साथ दोनों समाज के प्रबुद्ध लोग बैठक कर शांति बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं। पुलिस भी दोनों पक्षों के लोगों के संपर्क में है और उनसे शांति बनाए रखने की अपील कर रही है।
तेलंगाना की टीआरएस सरकार पर बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों को वोटर कार्ड मुहैया कराने का आरोप बीजेपी सांसद अरविंद धर्मपुरी ने लगाया है। धर्मपुरी तेलंगाना के निजामाबाद से सांसद हैं। 22 मार्च को उन्होंने लोकसभा में कहा कि तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS) की सरकार अवैध बांग्लादेशी रोहिंग्या प्रवासियों को वोटर कार्ड, पासपोर्ट और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज दे रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि इन्हीं घुसपैठियों की वजह से राज्य में दंगे हो रहे हैं। लोकसभा में धर्मपुरी ने कहा कि उनका निर्वाचन क्षेत्र निजामाबाद भारत विरोधी गतिविधियों का गढ़ बन गया। उनके अनुसार 72 रोहिंग्या घुसपैठियों ने भारतीय पासपोर्ट हासिल कर लिया है। इनमें से 32 निजामाबाद के बोधन के एक ही पते पर हासिल किए गए हैं। रिपोर्टों के अनुसार शुरुआती पड़ताल में यह बात भी सामने आई थी कि इन अवैध रोहिंग्या घुसपैठियों के पश्चिम बंगाल में आधार कार्ड भी बने हुए हैं।
फरवरी 2021 में यह पता चला कि पिछले पाँच वर्षों में तेलंगाना में जो 500 पासपोर्ट जारी किए गए, उनमें से 72 फर्जी दस्तावेजों पर हासिल किए गए। शमशाबाद अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे पर जब तीन लोग आव्रजन अधिकारियों के प्रश्नों का उचित उत्तर नहीं दे पाए, तब इस धोखाधड़ी की तरफ अधिकारियों का ध्यान गया। फर्जी पासपोर्ट का उपयोग करके 32 लोग विभिन्न देशों की यात्रा करने में भी सफल रहे। इनमें से 15 तो भारत लौट आए, लेकिन 17 अभी भी खाड़ी देशों, मलेशिया और सिंगापुर जैसी जगहों पर हैं। उसी महीने में 40 पासपोर्ट के आवेदन हैदराबाद के क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय को स्थानांतरित कर दिए गए, क्योंकि वे सभी बोधन कस्बे के 4 पतों पर ही जारी किए गए थे। धर्मपुरी ने पुलिस पर भी रोहिंग्या घुसपैठियों की सहायता का आरोप लगाया है। उन्होनें कहा कि जब पुलिस अधिकारी वेरिफिकेशन के लिए जाते हैं तो अपना काम ईमानदारी से नहीं करते।
हाल ही में जम्मू में 46 रोहिंग्या घुसपैठियों को हिरासत में लिया गया है। पूछताछ के दौरान उन्होनें हैदराबाद में प्रभुत्व रखने वाली एआईएमआईएम के कम से कम तीन नेताओं का नाम लिया। घुसपैठियों से यह जानकारी मिलने के पश्चात तीनों नेता जाँच एजेंसियों की राडार पर हैं।
धर्मपुरी के अनुसार इन्हीं नेताओं ने बांग्लादेश के रास्ते घुसपैठ करने और फिर जम्मू जाने में रोहिंग्या की मदद की। उन्होंने पुलिस पर TRS और एआईएमआईएम के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया। बीजेपी सांसद ने कहा कि रोहिंग्या पूरे तेलंगाना में फैल चुके हैं और दंगों के लिए जिम्मेदार भी वही हैं। भैंसा दंगे के लिए भी उन्होंने इन्हें ही जिम्मेदार बताया।
उन्होंने कहा, “हाल ही में भैंसा में हुए दंगों में भी रोहिंग्या घुसपैठियों का ही हाथ है। हिंदुओं की हत्या हो रही है, उनके घर और संपत्तियों को जलाया जा रहा है और जेल भी हिन्दू ही भेजे जा रहे हैं।” धर्मरी ने केन्द्रीय एजेंसियों से जाँच और रोहिंग्या घुसपैठियों के मददगारों पर कार्रवाई की माँग की।