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‘जब हीरो गुप्तांग दिखाते थे तो तुम क्या करती थी’: रश्मि ही नहीं, कंगना के लिए भी घृणा दिखा चुका है हिंदूफोबिक अभिजीत सरकार

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के फैकल्टी मेंबर डॉ. अभिजीत सरकार के कुछ पुराने ट्वीटस वायरल हो रहे हैं। इनमें वह देश की एक राजनीतिक पार्टी और कंगना रनौत तथा पायल घोष जैसी अभिनेत्रियों के लिए अपनी कुंठा दिखा रहा है। इससे पहले रश्मि सामंत को निशाना बनाने के कारण सरकार चर्चा में रहा था। हिंदू पहचान के कारण निशाना बनाए जाने के बाद पिछले दिनों सामंत ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन की अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था

वायरल हो रहे ट्वीटस में से एक में अभिजीत सरकार ने कंगना रनौत के लिए कहा है कि वह अपनी कुछ ‘खास तस्वीरें’ ऋतिक रौशन को भेजती थीं और अब वह वही फोटो पार्टी के हर नेता को भी भेजती है? अभिजीत का ये ट्वीट 3 जनवरी 2021 का है। 

इसके बाद एक ट्वीट 22 सितंबर 2020 का है। कंगना ने तब अनुराग कश्यप के खिलाफ सेक्शुअल मिसकंडक्ट के आरोप लगाने वाली पायल घोष के समर्थन में एक ट्वीट किया था।

ट्वीट में कंगना ने कहा था, “पायल घोष ने जो कुछ भी कहा है, कई बड़े हीरोज ने मेरे साथ भी वैसा किया था, अचानक वैन या कमरे का दरवाजा बंद करके अपना गुप्तांग को दिखा देना या पार्टी में डांस फ्लोर पर दोस्ताना डांस के दौरान उनकी जीभ को आपके मुँह से लगा देना, काम के लिए अपॉइंटमेंट लेना और घर आकर तुम्हारे साथ जोर-जबरदस्ती करना।” 

कंगना का यह ट्वीट पायल घोष के आरोपों के समर्थन में था। दोनों अभिनेत्रियों ने बॉलीवुड के काले सच पर बेबाकी से बात रखी थी। लेकिन अभिजीत सरकार ने उन्हें सराहने के बजाय पहले कंगना से पूछा कि जब हीरो उन्हें गुप्तांग दिखाते थे, तो वो क्या करती थी। फिर पायल घोष के आरोपों को पेड कहते हुए पूछा, “क्या अनुराग कश्यप पर इल्जाम लगाने के लिए कोई राजनीतिक पार्टी तुम पर दबाव बना रही है? मैं बस जानने के इच्छुक हूँ।”

पायल के अन्य ट्वीट में जिसमें उन्होंने कहा था, “जो लोग कह रहे हैं कि ये सब राजनीति के लिए कर रही हूँ और मैं हालातों का फायदा उठा रही हूँ। वो पहले कल्पना करें कि यहाँ तुम्हारी बहन या बेटी मेरी जगह हो सकती थी या तुम्हारी माँ भी हो सकती थी…तब आकर बात करो।”  इस ट्वीट पर भी सरकार ने राजनीतिक पार्टी को बीच में घसीटा और कहा कि हमारी माँ-बहनें तुम्हारी पार्टी में नहीं हैं, इसलिए वह सुरक्षित हैं।

रश्मि सामंत के ख़िलाफ़ हिंदूविरोधी अभियान का नेतृत्व

अभिजीत ऑक्सफोर्ड यूनवर्सिटी के इतिहास विभाग के फैकल्टी सदस्य हैं। उन्होंने पिछले दिनों एक ऐसे हिंदूविरोधी अभियान का नेतृत्व किया जिसके कारण स्टूडेंट यूनियन की पहली भारतीय महिला अध्यक्ष रश्मि को इस्तीफा देना पड़ा था। रश्मि को बदनाम करने के लिए कुछ ट्वीट्स वायरल किए गए थे।

हालाँकि अब अभिजीत सरकार खुद अपने पुराने ट्वीट के कारण सोशल मीडिया पर लताड़े जा रहे हैं। उनके ट्वीट्स से साफ पता चलता है कि वे हिंदूफोबिक हैं जो मानता है कि बिना बीफ खाए हिंदू तरक्की नहीं कर सकता।

उनके अनुसार ऑक्सफोर्ड में दिवाली पर हिंदुओं को बीफ परोस दिया गया तो हल्ला करने की क्या जरूरत थी। वह कहते हैं कि ये देशी लोग 1857 के बाद से एक इंच आगे नहीं बढ़े हैं। ऐसे ही सरस्वती पूजन के दिन सरकार ने सोशल मीडिया पर बताया था कि बचपन में उन्होंने तमाम सरस्वती प्रतिमाएँ तोड़ी थीं।

अभिजीत सरकार के विरुद्ध ग्लोबल हिंदू फेडरेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर सतीश शर्मा ने शिकायत भी दायर की है। पुलिस ने बताया है कि अभिजीत के ख़िलाफ उन्हें शिकायत मिली है। उनपर आरोप है कि उन्होंने रश्मि के परिवार की तस्वीर इंस्टाग्राम पर पोस्ट की थी। पोस्ट में की गई टिप्पणी जाँच के दायरे में हैं।

रश्मि सामंत के साथ क्या हुआ?

पिछले दिनों  वामपंथी और हिंदू विरोधी प्रोपगेंडाबाजों ने ऑक्सफोर्ड में रश्मि सामंत के यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन की अध्यक्ष पद पर जीत के बाद उन्हें घेरना शुरू किया था। तरह-तरह के इल्जाम लगा कर उन्हें इस्तीफा देने को मजबूर किया गया था। उनके ख़िलाफ़ इस्लामोफोबिक, ट्रांसफोबिक होने के इल्जाम लगाए गए थे। साथ ही उन्हें हिंदू होने के लिए भी निशाना बनाया गया था। उनकी हालत ऐसी कर दी गई थी कि 24000 यूरो फीस चुकाने के बावजूद वह तंग होकर भारत आ गईं और मानसिक रूप से परेशान होने के कारण अस्पताल में भी भर्ती रहीं। रश्मि सामंत अपने साथ हुए नस्लीय भेदभाव के कारण इतनी दुखी हैं कि उन्हें अब ऑक्सफोर्ड जाना  सुरक्षित नहीं लगता।

जिस हत्यारे को ‘गोरा’ बता छाती कूट रहे थे लिबरल, वह 21 साल का अहमद निकला तो छाई खामोशी: सुपरमार्केट फायरिंग में 10 की गई थी जान

अमेरिका के कोलोराडो (Colorado) के बोल्डर स्थित सुपरमार्केट में फायरिंग कर के 10 लोगों को मौत के घाट उताने वाले शूटर की पहचान हो गई है। उसका नाम अहमद अल अलीवी अलीसा (Ahmad Al Aliwi Alissa) है। पुलिस ने 21 वर्षीय हत्यारे को हिरासत में ले लिया है। फायरिंग में वह भी घायल हो गया था, लिहाजा उसे पहले अस्पताल ले जाया गया। इसके बाद उस पर हत्या का मामला दर्ज कर जेल भेजने की प्रक्रिया शुरू होगी।

मंगलवार (मार्च 23, 2021) को उसने जिस सुपरमार्केट में गोलीबारी की, वहाँ अच्छी-खासी भीड़ थी। मरने वालों में एक पुलिस अधिकारी भी शामिल हैं। फिलहाल इस वारदात के पीछे की मंशा का पता नहीं चल पाया है। लेकिन माना जा रहा है कि हमलावर अकेला ही था। उसने हल्के वजन वाले AR-15 सेमी-ऑटोमैटिक राइफल का प्रयोग किया। पुलिस हथियार का पता लगाने में जुटी हुई है।

हमलावर ने अपनी ज़िंदगी का एक बड़ा हिस्सा संयुक्त राष्ट्र अमेरिका में ही बिताया है। सबसे बड़ी बात तो ये है कि उसकी पहचान बाहर आने से पहले अमेरिका की उप राष्ट्रपति कमला हैरिस की भतीजी मीना हैरिस ने इस नरसंहार के लिए किसी ‘श्वेत व्यक्ति’ को जिम्मेदार ठहराया था। मीना ने लिखा था कि अटलांटा शूट को अभी एक सप्ताह भी नहीं हुए हैं और ‘हिंसक श्वेत लोग’ हमारे लोकतंत्र के लिए बड़ा ख़तरा हैं।

मीना ने लिखा कि वो बोल्डर शूटिंग के बारे में देखते ही समझ गईं। जब हत्यारे की पहचान बाहर आ गई तो मीना हैरिस ने अपने उन ट्वीट्स को डिलीट कर लिया और कहा कि उन्होंने उसकी चमड़ी के रंग को देख कर अंदाज़ा लगाया था कि वो कोई ‘श्वेत व्यक्ति’ रहा होगा। लेकिन, उन्होंने इसे फैक्ट बताते हुए दोहराया कि अमेरिका में अधिकतर मास शूटिंग श्वेत व्यक्ति ही करते हैं। मीना हैरिस को अपनी मौसी के नाम पर ब्रांड बेचने को लेकर ह्वाइट हाउस से भी फटकार लग चुकी है।

वहीं हत्यारे अहमद अल अलीवी अलीसा के फेसबुक अकाउंट से पता चला है कि वह राष्ट्रपति जो बायडेन की डेमोक्रेट पार्टी का समर्थक था और पूर्व-राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के लिए उसने अपशब्दों का इस्तेमाल भी किया था। अब उसका फेसबुक अकाउंट भी हाइड बता रहा है। उसने अमेरिका में बढ़ते इस्लामोफोबिया पर चिंता जताई थी। फेसबुक पर वो अक्सर रिपब्लिकन पार्टी के बारे में लिखता रहता था, जिसके कई स्क्रीनशॉट्स सामने आए हैं।

मीना हैरिस ने दिखाया अपना लिबरल रंग

अरवाडा के रहने वाले अहमद अल अलीवी अलीसी के बारे में पता चला है कि वह गुस्सैल और हिंसक है। एक बार कुश्ती का मैच हारने के बाद वो अजीब ढंग से चिल्लाने लगा था और कमरा बंद कर ऐसा व्यवहार कर रहा था, जैसे सभी को मार डालेगा। वो खुद के मुस्लिम होने की बातें करता था और कोई कुछ कह दे तो इसे हेट क्राइम बताता था।

सिर्फ़ मीना हैरिस ही नहीं बल्कि लिबरल गिरोह के कई लोगों ने उसकी पहचान बाहर आने से पहले अपना रंग दिखाया था। एक लेखिका ने लिखा कि किसी व्हाइट (गोरा) व्यक्ति की ज़िंदगी नहीं अच्छी होगी तो वो दूसरों को मार डालता है। हेमल झावेरी ने लिखा कि हमेशा कोई व्हाइट व्यक्ति ही ऐसा करता है। एमी सिसीकिनद नामक फेमिनिस्ट ने लिखा कि मरने वाले अश्वेत ही रहे होंगे। लेकिन, आरोपित के मुस्लिम निकलने के बाद सभी शांत हो गए।

हिन्दू महिला को बंधक बनाया, मस्जिद में कबूल करवाया इस्लाम: रेप, अश्लील वीडियो, वसूली… अहमद सहित 10 पर FIR

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के देहात कोतवाली क्षेत्र की एक महिला के साथ रेप करने और अश्लील वीडियो बनाकर वसूली करने का मामला उजागर हुआ है। महिला का आरोप है कि रेप के बाद उसका जबरन धर्म परिवर्तन करवाया गया और बाद में उसकी वीडियो इंटरनेट पर अपलोड कर दी गई। पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर 10 लोगों के ख़िलाफ़ मुकदमा दर्ज कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़िता ने बताया कि वह पैन कार्ड बनवाने जनसेवा केंद्र पर गई थी। वहीं उसे अहमद मिला। बहुत कहने के बावजूद कई दिनों तक अहमद ने उसका पैन कार्ड नहीं बनवाया। फिर एक दिन सहारनपुर चलने की बात कहने लगा। 

पीड़िता की मानें तो अहमद एक दिन उसे सहारनपुर के किसी होटल ले गया। जहाँ उसने उसको (पीड़िता को) नशीला पदार्थ देकर दुष्कर्म किया और उसकी वीडियो बना ली। पीड़िता का कहना है कि उसके बाद से अहमद उसे ब्लैकमेल करने लगा। फरवरी में उसकी शादी होने के बाद भी अहमद ने प्रताड़ित करना नहीं छोड़ाऔर उससे 50 हजार रुपए की माँग करने लगा।अपनी आदत से बाज नहीं आया और उससे 50 हजार रुपए की माँग करने लगा।

महिला ने परेशान होकर घर से 50 हजार रुपए चोरी किए और अहमद के पास लेकर गई। वहाँ अहमद के रिश्तेदार- शबाना, रफीक, असरफ, युनुस, युसुफ और उसके अन्य दोस्तों ने मिलकर उसे बंधक बना लिया। उसे एक मस्जिद ले गए, जहाँ धर्मपरिवर्तन करवाने के बाद कागजों पर उससे साइन करवाए गए। 

घटना के कई दिन बाद तक उसे बंधक बनाकर एक गाँव में रखा गया। इस बीच पीड़िता के परिजन उसकी तलाश करते रहे। 16 मार्च को ग्राम प्रधान के हस्तक्षेप के बाद महिला आरोपितों के चंगुल से छूटी। इसके बाद सोमवार को उसने थाने पहुँचकर शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस अधिकारी उमेश रोरिया ने बताया कि सभी मामला दर्ज कर जाँच की जा रही है। जल्द ही आरोपितों को गिरफ्तार किया जाएगा।

सराय काले खाँ के पीड़ित दलित परिवार के समर्थन में आए कपिल मिश्रा: देंगे ₹5 लाख की मदद, बाकी को 21-21 हजार

दिल्ली के सराय काले खाँ में एक दलित हिन्दू युवक ने एक मुस्लिम लड़की से शादी की, जिसके बाद दलित युवक सुमित के मुस्लिम समुदाय की लड़की से शादी करने से नाराज युवती के परिजनों और उनके साथियों ने शनिवार (मार्च 20, 2021) रात सराय काले खाँ गाँव की दलित बस्ती में बेखौफ जमकर उत्पात मचाया था। 50 से अधिक की संख्या में बस्ती में घुसी मुस्लिम भीड़ ने हिन्दुओं की कुल तीन गलियों को निशाना बनाया और तलवार लाठी डंडे और पत्थरों के साथ जमकर हमला कर दिया। 30 से ज्यादा गाड़ियों/ बाइक को भी तहस-नहस कर दिया

अब दिल्ली बीजेपी के नेता कपिल मिश्रा ने सुमित के माता-पिता से बात की है। उन्होंने उनको आर्थिक और सामाजिक रूप से सहयोग का आश्वासन दिया है। कपिल मिश्रा ने ट्वीट करते हुए इसकी जानकारी दी है। उन्होंने अपने ट्वीट में सुमित के माता-पिता के साथ हुई बात-चीत की रिकॉर्डिंग भी शेयर किया है, जिसमें वो उन्हें सहयोग देने की बात कहते हुए नजर आते हैं।

कपिल मिश्रा ने ट्वीट करते हुए लिखा है, “मैंने अभी दिल्ली के सराय काले खाँ में पीड़ित बाल्मीकि परिवार के माता पिता से बात की। हम प्रेम विवाह करने वाले सुमित और खुशी को ₹5 लाख की मदद देंगे। वाल्मीकि मोहल्ले में जिन भी लड़कों की बाइक तोड़ी गई है उनको ₹21-21 हजार देंगे। मदद का कैंपेन कल सुबह शुरू करेंगे।”

गौरतलब है कि शादीशुदा जोड़े ने वीडियो जारी कर सुरक्षा की माँग की है। 22 वर्षीय युवक ने कहा कि उन्होंने मार्च 17 को अपनी मर्जी से शादी की है और लड़की भी बालिग है। युवक और युवती ने वीडियो जारी करके सुरक्षा की गुहार लगाई है। उन्होंने कहा कि गली तहस-नहस कर दी गई है और धारदार हथियारों से किए गए वार में कई लोग घायल भी हुए हैं। युवक ने बताया कि उसके पिता को जान से मारने की धमकी दी जा रही है और ऐसी ही धमकियाँ उसे भी लगातार मिल रही है। युवक ने परिवार और खुद के लिए सुरक्षा की गुहार लगाई।

बता दें कि मुस्लिम भीड़ ने बस्ती में हमला करके ईंट-पत्थर चलाए व चाकू-तलवार, लाठी-रॉड न जाने किन-किन हथियारों से हमला किया। मगर जब बस्ती के हिन्दुओं ने एकजुट होकर उनका प्रतिरोध किया तो वो भाग खड़े हुए।

अब योगी के मंत्री को लाउडस्पीकर पर अजान से हुई दिक्कत, DM को पत्र लिखकर सख्त कार्रवाई की अपील

उत्तर प्रदेश में प्रयागराज से शुरू हुआ अजान को लेकर विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। अब योगी सरकार में संसदीय कार्य एवं ग्राम्य विकास राज्यमंत्री आनंद स्वरुप शुक्ला ने भी लाउडस्पीकार से अजान पर ऐतराज जताया है। मंत्री ने कहा कि लाउडस्पीकर पर अजान के शोर के कारण उनके योग, ध्यान, पूजा पाठ व शासकीय कार्यों में बाधा पैदा होती है। उन्होंने बलिया के जिलाधिकारी को पत्र लिखकर अधिक संख्या में लगे लाउस्पीकरों को हटाने की माँग की है।

मंत्री ने पत्र में लिखी ये बातें

पत्र में लिखा है कि बलिया में स्थित मस्जिदों में नमाज के दौरान अजान, दिन भर लाउडस्पीकर के माध्यम से मजहबी प्रचार-प्रसार, मस्जिद निर्माण के लिए चंदा एकत्र करने एवं विभिन्न प्रकार की सूचनाओं को अत्यधिक तेज आवाज में प्रसारित किया जाता है। जिससे छात्र-छात्राओं के पठन-पाठन एवं बच्चों, बुजुर्ग व बीमार लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। जनमानस को अत्यधिक ध्वनि प्रदूषण का भी सामना करना पड़ रहा है।

मंत्री आनंद शुुक्ला का पत्र (साभार: सोशल मीडिया)

उन्होंने आगे लिखा है कि मेरे विधानसभा क्षेत्र में स्थित मदीना मस्जिद काजीपुर, थाना कोतवाली के समीप कई शैक्षणिक संस्थान हैं। जिसमें सेंट जोसेफ, महर्षि विद्या मंदिर, सतीश चंद्र महाविद्यालय आदि में अध्यनरत विद्यार्थियों को लाउडस्पीकर की तेज आवाज के कारण पठन-पाठन में व्यवधान उत्पन्न हो रहा है। मस्जिद में पाँचों वक्त नमाज की अजान और सारा दिन अन्य सूचनाएँ प्रसारित की जा रही है। जिससे होने वाले शोर के कारण मेरे योग, ध्यान, पूजा-पाठ व शासकीय कार्यों में व्यवधान उत्पन्न होता है। मंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का भी पत्र में जिक्र किया है।

मंत्री ने डीएम से कहा है कि जिन मस्जिदों में परमिशन से ज्यादा लाउडस्पीकर लगे हैं, उन्हें तत्काल हटवाया जाए। साथ ही लाउडस्पीकर की आवाज को सीमित करवाते हुए गाइडलाइन का पालन कराया जाए।

AU की कुलपति ने लिखा था पत्र

गौरतलब है कि इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की कुलपति प्रोफेसर संगीता श्रीवास्तव ने तीन मार्च को कमिश्नर संजय गोयल, IG कवींद्र प्रताप सिंह, जिलाधिकारी भानुचंद गोस्वामी और SSP सर्वश्रेष्ठ त्रिपाठी को पत्र लिखकर कहा था कि मस्जिद में होने वाली अजान की वजह से उनकी नींद खराब हो रही है लिहाजा इसको बंद करवाया जाए। इसके बाद मस्जिद कमेटी ने मीनार पर लगे लाउडस्पीकर का रुख VC संगीता श्रीवास्तव के घर से दूसरी तरफ कर दिया था। लाउडस्पीकर का वॉल्यूम भी कम कर दिया गया था।

मस्जिद में लाउडस्पीकर पर अजान को लेकर प्रयागराज की वीसी की चिट्ठी पर जिले के आईजी ने सख्त एक्शन लिया। उन्होंने रात के 10 बजे से सुबह के 6 बजे तक लाउडस्पीकर बजाने पर रोक लगाए जाने के आदेश दिए। आईजी का कहना था कि पॉल्युशन एक्ट के तहत रात 10 बजे से सुबह के 6 बजे कर लाउडस्पीकर बजाने पर पूरी तरह से बैन है। 

10 महीने पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा था- बिना अनुमति लाउडस्पीकर का इस्तेमाल करना गलत

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 10 महीने पहले अपने एक फैसले में कहा था कि मस्जिदों में लाउडस्पीकर से अजान इस्लाम का हिस्सा नहीं है। किसी भी मस्जिद से लाउडस्पीकर से अजान दूसरे लोगों के अधिकारों में हस्तक्षेप करना है। कोर्ट ने कहा- जिन मस्जिदों के पास लाउडस्पीकर की अनुमति है, वही इसका इस्तेमाल करें। बिना प्रशासन की अनुमति के लाउडस्पीकर से अजान न दें।

‘फर्जी आधार कार्ड से होटल में रुका सचिन वाजे, उसके पास थे जिलेटिन स्टिक वाले ब्लू बैग’: NIA को मिस्ट्री वुमन की तलाश

एंटीलिया केस और वसूली कांड में आरोपित सचिन वाजे को लेकर एक और बड़ा खुलासा हुआ है। सचिन वाजे ने होटल बुक करने के लिए फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल किया था। जिन फर्जी आईडी कार्ड का इस्तेमाल वाजे करता था उसकी कॉपी ‘रिपब्लिक भारत’ के हाथ लगी है। वाजे मुंबई के एक 5 स्टार होटल में 16 से 20 फरवरी तक रुका था। जहाँ रूम बुक करने के लिए फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल किया था। उसके पास दो ब्लू बैग थे, जिसमें जिलेटिन स्टिक थी।

इस फर्जी आधार कार्ड में सचिन वाजे की फोटो दिख रही है मगर नाम लिखा है- सुधाकर सदाशिव खामकर। साथ ही जन्म की तारीख भी गलत लिखी हुई है। खुलासा ये भी हुआ है कि जिस समय वाजे होटल में था वहाँ उससे गुजरात से मिलने के लिए एक महिला आई थी। महिला के पास पैसे गिनने की मशीन भी थी। इस महिला का सचिन वाजे से कोई रिश्ता है या नहीं? यह महिला सचिन वाजे को पहचानती या नहीं? इन सारे सवालों के जवाब एनआईए (NIA) तलाश रही है।

इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस ने दावा किया ट्रांसफर-पोस्टिंग का रैकेट चल रहा है। इसकी रिपोर्ट मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के पास होने के बावजूद उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। फडणवीस ने इस संबंध में सबूत होने की बात कहते हुए कहा कि वे केंद्रीय गृह सचिव को 6.3 जीबी डाटा सौंपेंगे। उन्होंने कहा कि वे आईपीएस और गैर-आईपीएस अधिकारियों के कथित ट्रांसफर पोस्टिंग रैकेट से संबंधित कॉल रिकॉर्डिंग और कुछ दस्तावेज व डेटा सौंपेंगे।

फडणवीस का कहना था कि इंटेलिजेंस कमिश्नर ने ट्रांसफर का रैकेट पकड़ा। इसमें शामिल संदिग्ध इंटरसेप्टेड कॉल्स की रिपोर्ट अगस्त 2020 में महाराष्ट्र के डीजी को भेजी। इस पर चिंता जताते हुए रिपोर्ट मुख्यमंत्री को भेजी गई, लेकिन कोई कार्रवााई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि उनके पास 6.3 जीबी डाटा है जिसमें सारी जानकारी है।

ATS ने दमन से एक कार बरामद की

महाराष्ट्र आतंकवाद रोधी दल (ATS) ने मनसुख हिरेन हत्याकांड के संबंध में दमन से एक कार बरामद की है। एक अधिकारी ने मंगलवार (मार्च 23, 2021) को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र के नंबर वाली एक वॉल्वो कार सोमवार को बरामद की गई जिसके मालिक का अभी पता नहीं चला पाया है। उन्होंने कहा कि बरामद की गई कार को ठाणे स्थित एटीएस कार्यालय में रखा गया है।

इससे पहले, इस हत्याकांड के संबंध में शनिवार रात को दो व्यक्तियों को गिरफ्तारी के बाद एटीएस ने गुजरात से एक अन्य व्यक्ति को गिरफ्तार किया था जिसने कथित तौर पर आरोपितों को सिम कार्ड उपलब्ध कराए थे। अधिकारियों ने बताया था कि उन्हें उक्त व्यक्ति के पास से कई सिम कार्ड मिले थे। एटीएस ने मामले के संबंध में, निलंबित पुलिसकर्मी विनायक शिंदे और सटोरिये नरेश गौड़ को पिछले सप्ताह गिरफ्तार किया था। हालाँकि, मनसुख हत्याकांड की जाँच 22 मार्च को एनआईए को सौंप दी गई थी लेकिन एटीएस अब भी जाँच कर रही है।

19 साल की पाकिस्तानी बीवी की जानकारी छिपाने वाले केटी सुलेमान पर केरल के मुख्यमंत्री चुप क्यों? : भाजपा ने उठाए सवाल

कोंडोट्टी में हुई चुनाव नामांकन की धोखाधड़ी के संबंध में केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की चुप्पी पर विदेश मामलों के केन्द्रीय राज्य मंत्री वी. मुरलीधरन ने उनकी आलोचना की। कई रिपोर्ट्स के अनुसार सीपीआईएम समर्थित केटी सुलेमान हाजी ने केरल विधानसभा चुनाव के अपने नामांकन में अपनी दूसरी बीवी की जानकारी नहीं दी। सुलेमान की दूसरी बीवी एक पाकिस्तानी है।

मातृभूमि में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, 20 मार्च को चुनाव आयोग ने केटी सुलेमान हाजी का नामांकन आगामी जाँच तक रोक दिया क्योंकि वह अपनी दूसरी बीवी की जानकारी देने में असफल रहे।

मुस्लिम लीग के नेताओं ने सुलेमान के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराई है कि उसकी दो शादियाँ हो चुकी हैं और उसकी दूसरी बीवी विदेश में है। इन आरोपों के साथ दुबई में हुए सुलेमान के निकाह के कुछ साक्ष्य भी प्रस्तुत किए गए हैं। उनकी दूसरी बीवी हीरा मोहम्मद सफदर है जो रावलपिंडी, पाकिस्तान की निवासी हैं।  

अपने ट्वीट में मुरलीधरन ने कहा, “केटी सुलेमान हाजी, कोंडोट्टी के सीपीआईएम समर्थित प्रत्याशी, जिन्होंने नामांकन में अपनी दूसरी बीवी की जानकारी छुपाई जो कि एक 19 वर्षीय पाकिस्तानी महिला है। स्वयं को लिबरल कहने वाले पिनाराई विजयन अब खुद चुप हैं, क्या यह आश्चर्य की बात नहीं है?”

वे आगे कहते हैं कि केरल की जनता इस प्रश्न का उत्तर चाहती है जबकि एक प्रत्याशी ने विदेशी नागरिक की पहचान छुपाई है।

केरल में 6 अप्रैल को 140 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव आयोजित होने वाले हैं। चुनाव परिणाम 2 मई को घोषित किया जाएगा।

मनसुख हिरेन हत्याकांड में ATS ने सचिन वाजे को बताया मुख्य साजिशकर्ता, कानून मंत्री ने कहा- महाराष्ट्र में खेला चल रहा है

महाराष्ट्र एटीएस ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर निलंबित पुलिस अधिकारी सचिन वाजे को मनसुख हिरेन हत्याकांड का मुख्य साजिशकर्ता बताया है। वहीं, वाजे ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को गलत बताया है।

एटीएस प्रमुख जय जीत सिंह ने बताया कि सचिन वाजे का कहना है कि वह मनसुख हिरेन के संपर्क में नहीं था और उसने कभी भी स्कॉर्पियो का इस्तेमाल नहीं किया था, जो मुकेश अम्बानी के घर के बाहर से मिली थी। लेकिन हमारे पास सबूत हैं कि वह सीधे तौर पर हत्या में शामिल था। हम आने वाले दिनों में और लोगों को गिरफ्तार करेंगे।

हालाँकि, महाराष्ट्र एटीएस प्रमुख ने हत्या के पीछे वाजे का क्या मकसद था इसका खुलासा नहीं किया है। उन्होंने केवल महत्वपूर्ण दस्तावेज साझा किए हैं, जो हत्या के मामले में वाजे की संलिप्तता की ओर इशारा करते हैं।

एटीएस ने कहा कि अन्य आरोपित नरेश गोरे ने 14 सिम कार्ड खरीदे थे, जिनका उसने इस्तेमाल किया। एटीएस ने बताया कि वह सचिन वाजे की रिमांड के लिए अपील करेंगे।

एटीएस प्रमुख ने यह भी कहा कि आज हत्या के मामले में एक वोल्वो कार को दमन से जब्त किया गया, जिसकी मुंबई की फोरेंसिक टीम द्वारा जाँच की जा रही है।

इसी बीच केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेस में महाराष्ट्र सरकार पर ​हमला बोला। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र में अलग ही खेला चल रहा है। महाविकास अघाड़ी की सरकार वसूली की सरकार बन गई है।

एटीएस अधिकारियों ने आज प्रेस कॉन्फ्रेस की और बिना सवालों के जवाब दिए ही चले गए। महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख का वसूली का कोटा 100 करोड़ रुपए है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार आखिर कौन चला रहा है। हम जाँच नहीं, तथ्य सामने ला रहे हैं।

2012 से 2021: हिंदुओं की दुखद दास्ताँ, जब 12 बार इस्लामी आतंकियों ने बांग्लादेश में बनाया इन्हें निशाना

हाल ही (18 मार्च) में बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय के एक युवा द्वारा कथित तौर पर सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखने के बाद एक इस्लामी समूह के सैकड़ों समर्थकों द्वारा पूर्वोत्तर में स्थित सिलहट डिवीजन में हिंदुओं के 70-80 घरों पर बर्बतापूर्ण हमला करने का मामला सामने आया।

ढाका ट्रिब्यून अखबार के मुताबिक हिफाजत ए इस्लाम के नेता मामुनुल हक के हजारों अनुयायियों ने सिलहट डिवीजन के सुनामगंज जिले के शल्ला उप जिले में एक हिंदू गाँव पर हमला किया। बताया गया कि काशीपुर, नाचनी, चाँदीपुर और कुछ अन्य मुस्लिम बहुल गाँवों से हक के समर्थक, नवागाँव में एकत्र हुए और उन्होंने स्थानीय हिंदुओं के घरों पर डंडों और देसी हथियारों से हमला किया व 70 से 80 घर तोड़ डाले।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार लगभग 70 से 80 हिंदुओं के घरों में तोड़फोड़ की गई थी, लेकिन एक स्थानीय पत्रकार ने दावा किया है कि कम से कम 500 हिंदू घरों में तोड़फोड़ की गई और उन्हें जला दिया गया । इसके अलावा इस्लामी चरमपंथियों ने 8 मंदिरों में भी तोड़फोड़ की। इस हमले को फेसबुक पर लाइव किया गया था।

अगले दिन (19 मार्च, शुक्रवार) कुछ उपद्रवियों ने बांग्लादेश के ठाकुरगाँव के रानीसंकल उपजिला के उत्तरगांव गाँव में स्थित एक मंदिर में काली माता की मूर्ति को भी तोड़ डाला।

पाकिस्तान की तरह बांग्लादेश में भी हिंदुओं पर कई बर्बरतापूर्ण हमले किए गए हैं। दशकों से बांग्लादेश में हिंदू समुदाय इस्लामी कट्टरपंथियों के निशाने पर रहे हैं और आज त​क उनके द्वारा किए जा रहे उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं। इतना ही नहीं धार्मिक उत्पीड़न और भेदभाव के कारण लगभग 11.3 मिलियन (1 करोड़ 13 लाख) हिंदू 1964 और 2013 के बीच बांग्लादेश छोड़ चुके हैं।

बांग्लादेश में हिंदुओं की दुखद दास्तां 1947 के नरसंहार के साथ शुरू हुई थी। बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान यह और बढ़ गई थी, तब लगभग 30,00,000 हिंदू मारे गए थे। यह सदी के सबसे बड़े जनसंहारों में से एक था, जो आज तक जारी है।

साल 2012 और 2013 में फरवरी और नवंबर के बीच, चटगाँव में हठजारी और बशखाली, सतखीरा के कालीगंज, दिनाजपुर के चिरिरबंदर में अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ कम से कम 20 हमले हुए।

हिंदुओं द्वारा 10वें आम चुनावों का बहिष्कार करने से इंकार करने के बाद 2014 में बांग्लादेश में बड़ी झड़पें हुई थीं। बांग्लादेश में मतदान समाप्त होने के तुरंत बाद हिंदुओं को बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी और जमात-शिबिर के कार्यकर्ताओं का सामना करना पड़ा।

ठाकुरगाँव, दिनाजपुर, रंगपुर, बोगरा, लालमोनिरहाट, राजशाही, चटगाँव और जेसोर जैसे कई स्थानों पर हिंदू घरों को लूटा गया और बर्बरतापूर्वक जला दिया गया था।

इसी तरह 23 अक्टूबर, 2019 को बुरहानुद्दीन में पुलिस और स्थानीय मुसलमानों के बीच झड़प में 10 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे और चार लोगों की मौत हो गई थी। वहीं सैकड़ों पुलिसकर्मी मारे गए थे।

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस दौरान 12 हिंदू घरों और एक मंदिर में तोड़फोड़ भी की गई थी। एक हिंदू घर में भी आग लगा दी गई। एक मोटरसाइकिल को भी जला दिया गया था।

पिछले साल 2 नवंबर को कट्टरपंथी इस्लाम के एक समूह ने बांग्लादेश के कोमिला जिले में मुरादनगर उपजिला के अंतर्गत कोरबनपुर गांव में 10 हिंदू परिवारों पर हमला कर दिया था।

डर का माहौल! भारत के सबसे ‘ईमानदार’ पत्रकार 3 दिन से कहाँ गायब? क्या यह चुप्पी ही है आज का शो

जिन्हें लगता है कि साल 2014 में भारतीय जनता पार्टी के सत्ता में आने के बाद से सब कुछ चौपट हो चुका है उनके लिए वह व्यक्ति एक अकेली उम्मीद है और तमाम मूक लोगों की एकमात्र आवाज है। उनका हर रात एक घंटे का शो आता है, सिर्फ़ इसीलिए ताकि इस जहरीली दुनिया में उनके दर्शकों को कुछ पल सुकून के मिल सकें। 

उनके शो में कोई डर का माहौल नहीं होता, कोई निराशा नहीं होती, कहीं अहिष्णुता नहीं होती, कुछ होता है तो वो होता बस और बस न्याय। वह अपनी साधारण सी आवाज में विषय को उठाते हैं और इस तरह तथ्यों को रखते हैं कि जो कोई भी उनके कटघरे में खड़ा होता है वह दोषी बने बिना बाहर नहीं निकलता।

यही सच्ची पत्रकारिता है। सच बोलना बिलकुल वैसे जैसी आपसे उम्मीद हो।

लेकिन, बावजूद इतनी लोकप्रियता के वह पिछले तीन दिनों से कहाँ हैं? हमारे जीवन में जो आशा की किरण थी वह चली गई है और ये चारों तरफ अंधेरा क्यों है भाई?

क्या देश के सबसे ईमानदार पत्रकार की दी न्यूज के साथ कुछ हुआ है जो उन्हें छिपना पड़ रहा है? वो कहाँ है? या कोई एक ऐसी कहानी आ गई है जिसे वह कवर नहीं करना चाहते? वह डर रहे हैं क्या? नहीं-नहीं वह तो निडर हैं…तो फिर? उनकी क्या मंशा है?

और इस संकट की घड़ी में उनके लाखों फॉलोवर्स का क्या हुआ? उनके ज्ञान के बिना उनके दर्शक क्या करेंगे? पिछली बार तो मैंने सुना था कि उनके फॉलोवर्स उनके प्यार में इतना डूबे कि वह अपने नाम से उनका नाम जोड़ रहे हैं। ये लोगों का उनके लिए और उनकी निडर पत्रकारिता के लिए प्यार और श्रद्धा नहीं तो क्या है? एक रात उन्हें अपने ही शो में इस प्यार का पता चला था, सोचिए उनके फॉलोवर्स के लिए वो दिन क्या रहा होगा?

विचार करिए कि सिंघू बॉर्डर के साथी उनके समर्थन में अपना नाम बदल लें। या कल्पना करिए कि कोई पूरा का पूरा गाँव उन्हीं के नाम पर अपना नाम रख ले और उनके पीछे पीछे चलने लगे…. कैसा लगता है न ये सब सुन कर? है विश्व का कोई अन्य पत्रकार जो इतनी वफादारी कमा पाए?

इतने प्यार के बावजूद हमारे प्रिय पत्रकार कहाँ हैं? वह क्यों देश से इस सबसे बड़ी खबर को छिपा रहे हैं? उन्हें किस बात का डर है। सब तो उनका है। वह अपने शो में विपक्षियों के मत को जगह नहीं देते। उनके शो में कोई नहीं चिल्लाता। सिर्फ़ वही होते हैं। उनके पास कहने को सच्चाई होती हैं, जिसकी प्रमाणिकता भी यही होती है कि वह बात उन्होंने बोली हैं।

यही चीज उनके शो को महान बनाती है कि उसमें सिर्फ़ और सिर्फ वही बोलते हैं। शायद शो में यदि कोई और आ जाएगा तो उनकी आवाज में खलल पड़े और उनका शो भी बाकी चैनल पर आने वाले शो जैसा हो जाए। जाहिर है चीजें अच्छे से तभी हो पाती हैं जब आपका एक नजरिया हो और बिना किसी हल्ले वाली एक आवाज हो। और सबसे बड़ी बात तो ये है कि जब उन्होंने हमें सच दिखाने को कहा हुआ है तो हम कहीं और क्यों जाएँ?

उनके तो कर्मचारी भी उनसे डरते हैं। एक बार उन्होंने अपने एम्प्लॉय को वीडियो के क्लिप्स काटकर यूट्यूब पर अपलोड करने से मना कर दी थी। जरा सोचिए! क्या मोनालिशा टुकड़ों में बिखरी अच्छी लगती हैं क्या? नहीं न। तो हमारे पत्रकार का शो क्यों क्लिपों में जाए? मान लीजिए कि यदि ऐसा हो जाता तो क्या आप उस मास्टरपीस को सराह पाते? अब मैं तो छोटा आदमी हूँ। मैं तो मोनालिशा को पूरा देख कर नहीं समझ पाता उसके टुकड़ों को तो क्या ही समझूँगा। लेकिन मुझे पता है कि अन्य लोग जानते होंगे। उनका शो बिलकुल वैसा ही है। इसलिए उन्होंने कहा कि यूट्यूब पर पूरा शो ही अपलोड होना चाहिए।

उन पर यदि अपना तरीका होता तो शायद वह लोगों को यूट्यूब या टीवी पर सिर्फ़ अपना ही शो देखने देते। कहीं बीच में छोड़कर जाने की इजाजत नहीं होती। कुछ खाना नहीं होता। स्विच तो भूल कर भी नहीं बदलना होता। बिलकुल सावधान स्थिति में हर रात उनके ऐतिहासिक घोषणाएँ सुननी होतीं। मैं शर्त लगा सकता हूँ कि सिंघू बॉर्डर पर आधे से ज्यादा साथी ऐसा कर भी रहे होंगे।

तब भी, पता नहीं वो कहाँ चले गए हैं? वो अपने शो से खुद को क्यों छिपा रहे हैं? वह क्यों अपने फॉलोवर्स को नजर नहीं आ रहे।

इससे पहले अन्य लोगों ने उन्हें बहुत बार चुप करवाने की कोशिश की थी। लेकिन वह हर बार हमेशा अपने दर्शकों तक पहुँच जाते थे। वह अपने फॉलोवर्स के लिए अंधेरी स्क्रीन के पीछे से बोलते सुनाई देते थे। जहाँ सिर्फ़ आवाज आती थी और कोई विजुअल्स नहीं दिखता था।

इसके अलावा जब जब असहिष्णुता बढ़ती थी वह अपने दर्शकों तक किसी न किसी तरह बात रखते थे। वह चेहरों को पेंट करवा कर शो में बात करते और खुद ही उनके मतलब भी समझते। बाद में वही भाषा अपने दर्शकों को भी समझा देते। एक महान ज्ञानी आदमी को अपने अनुयायियों तक पहुँचने से कोई फासीवादी सरकार नहीं रोक सकती थी। लेकिन अब चीजें बदल गई हैं। अगर कोई बड़ी स्टोरी आई है और आप मौके पर हैं तो आप उसे इग्नोर कर सकते हैं। लेकिन यदि आपने उस स्टोरी को उठा लिया है तो आपको सच बोलना होगा और सच बोलने के लिए कोई अंतरराष्ट्रीय अवार्ड नहीं मिलेंगे।

शायद इसलिए रेडियो चुप है। कोई ब्लैक स्क्रीन नहीं है। कहीं पेंट हुए चेहरे नहीं हैं और कोई मीम नहीं है। सिर्फ़ चुप्पी है।

इसलिए उनके दर्शकों को मैं कहना चाहता हूँ: यही चुप्पी तुम्हारे रक्षक की हकीकत है। ये चुप्पी ही आज का शो है।