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अनजान शख्स के लिए PM मोदी ने रोका भाषण, फिर कहा – ‘किसी भी माँ के बेटे को बंदूक नहीं उठानी पड़ेगी’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार (अप्रैल 3, 2021) को असम के चुनावी दौरे पर तमुलपुर पहुँचे। पीएम मोदी यहाँ जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि इन दोनों चरणों के बाद लोगों ने यह तय कर लिया है कि असम में फिर एक बार NDA सरकार बनने जा रही है। उन्होंने कहा कि असम की पहचान का बार-बार अपमान करने वाले लोग, यहाँ की जनता को बर्दाश्त नहीं हैं। असम को दशकों तक हिंसा और अस्थिरता देने वाले, अब असम के लोगों को एक पल भी स्वीकार नहीं हैं। 

इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि दो चरणों की वोटिंग के बाद आपके दर्शन करने का मुझे अवसर मिला है। इन दोनों चरणों के बाद असम में फिर एक बार एनडीए सरकार बनेंगी ये लोगों ने तय कर लिया है। 

पीएम ने कहा, मैंने सुना, “कल कुछ लोगों ने घोषणा कर दी है, उसमें उन्होंने मान लिया है कि वो चुनाव हार चुके हैं। अगली सरकार कैसी बनेगी, सरकार के लोगों ने क्या पहना होगा, वो कैसे दिखते होंगे, इसका उन्होंने वर्णन किया है। मेरा उन युवा साथियों से विशेष आग्रह है जो पहली बार वोट डालने जा रहे हैं। देश की आजादी के 75वें वर्ष का पर्व मनाते हुए आप जो वोट डालेंगे, वो इस बात को भी तय करेगा कि जब हम आजादी के 100 वर्ष मनाएँगे, तो असम कितना आगे होगा। भाजपा के संकल्प पत्र में इसके लिए स्पष्ट रोडमैप है।”

असम को हिंसा में झोंकने वाले लोगों को जनता ने नकार दिया है। असम की पहचान का बार-बार अपमान करने वाले लोग यहाँ की जनता को बर्दाश्त नहीं है। असम को कई दशकों तक हिंसा और अस्थिरता देने वाले, अब असम के लोगों को कतई स्वीकार नहीं है। असम के लोग अब विकास, स्थिरता, शांति और भाईचारा चाहता हैं। और इसी सद्भावना के साथ वे हैं।

हमारा तो मंत्र है सबका साथ, सबका विश्वास- पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा कि हमारा तो मंत्र है सबका साथ, सबका विश्वास। उन्होंने कहा कि एनडीए के डबल इंजन सरकार ने पिछले पाँच सालों में असम को लोगों को दुगना लाभ दिया है। विकास हो रहा है और क्नेक्टिविटी में सुधार हुआ है। इस वजह से महिलाओं का जीवन भी सरल हो गया है। युवाओं के लिए रोजगार के अवसर लगातार बढ़ रहे हैं।

सेक्यूलरिज्म और कम्यूनिज्म के खेल ने देश को नुकसान पहुँचाया

पीएम मोदी जब सभा को संबोधित कर रहे थे, उसी दौरान एक शख्स की तबीयत भी बिगड़ गई, जिसके बाद पीएम मोदी ने भाषण को बीच में रोककर कहा कि मेरे साथ जो मेडिकल टीम में डॉक्टर आए हैं, वो जाए और पीड़ित व्यक्ति की मदद करें। इसके बाद पीएम मोदी ने भाषण को आगे बढ़ाया। 

पीएम मोदी ने कहा कि देश में आज कुछ ऐसी गलत बातें फैलाई जा रही हैं, अगर हम समाज में भेदभाव करके, समाज के टुकड़े करके अपने वोट बैंक के लिए कुछ दे दें, दुर्भाग्य देखिए, उसे देश में सेक्युलरिज्म कहा जाता है। लेकिन अगर हम सबके हित में काम करें, बिना भेदभाव के सबके लिए करें तो कहा जाता है कि ये कम्युनल हैं, सेक्यूलरिज्म और कम्यूनिज्म के इस खेल ने देश को काफी नुकसान पहुँचाया है।

बिना भेदभाव के सबको सुविधाएँ दी हैं- पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा कि गरीबों को पक्का घर मिल रहा है, हर जनजाति को मिल रहा है, शौचालय या गैस कनेक्शन बिना भेदभाव सभी को मिला है। पीएम किसान योजना का  लाभ भी हर किसी को मिला है फिर वो छोटा हो या बड़ा किसान हो सभी को लाभ मिल रहा है। यही हमारा काम है। आयुष्मान भारत के तहत 5 लाख का इलाज मुफ्त में मिला है। हमने कोई भेदभाव नहीं किया। यही हमारे सिद्धांत हैं। राजनीति से परे राष्टनीति के तहत जीने वाले लोग है हम।  हम जिंदगी खपाने वाले लोग है।

राज्य में हिंसा रोकने के लिए प्रतिबद्ध हैं- पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा कि रैली में इतनी तादात में आई महिलाओं को देखकर मैं बहुत खुश हूँ। उन्होंने कहा कि हम इसके लिए प्रतिबद्ध हैं कि राज्य के किसी भी बेटे को बंदूक नहीं उठानी पड़े। हमने बोडो समझौता किया है, जिससे असम में शांति की लहर है। अनेक माताओं के आँसू पोंछे गए। हमने अनेक बहनों की पीड़ा को दूर करने के लिए प्रयास किया। मैं यह सभी माताओं और बहनों को विश्वास दिलाता हूँ कि आपके बेटे के सपने पूरे करने के लिए हम लगे रहेंगे। आपके बच्चों को बंदूक न उठानी पड़े, उन्हें जंगलों में जिंदगी गुजारने को मजबूर न होना पड़े, और किसी की गोली का शिकार न होना पड़े, इसके लिए एनडीए सरकार प्रतिबद्ध है।

‘नरसिंहानंद की जुबान और गर्दन काट कर सजा देनी चाहिए…’: पैगंबर मोहम्मद की आलोचना पर AAP नेता अमानतुल्लाह

आम आदमी पार्टी (AAP) विधायक अमानतुल्लाह खान ने पैगंबर मोहम्मद पर कथित आलोचनात्मक टिप्पणियों के लिए डासना देवी मंदिर के प्रमुख पुजारी यति नरसिंहानंद सरस्वती की जुबान और गर्दन काटने की माँग की।

अमानतुल्लाह खान ने यति नरसिंहानंद सरस्वती का इस्लाम की निंदा करता हुआ वीडियो शेयर करते हुए ट्विटर पर लिखा, “हमारे नबी की शान में गुस्ताखी हमें बिल्कुल बर्दाश्त नहीं, इस नफ़रती कीड़े की ज़ुबान और गर्दन दोनों काट कर इसे सख़्त से सख़्त सजा देनी चाहिए। लेकिन हिंदुस्तान का कानून हमें इसकी इजाज़त नहीं देता, हमें देश के संविधान पर भरोसा है और मैं चाहता हूँ कि दिल्ली पुलिस इसका संज्ञान ले।”

यति नरसिंहानंद सरस्वती प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। यहाँ उन्होंने पैगंबर मोहम्मद की असलियत को उजागर करने के लिए हिंदुओं से निडर होने का आग्रह किया। यति नरसिंहानंद सरस्वती ने कहा:

“अगर इस्लाम की असलियत, जिसके लिए मौलाना कहते हैं कि अगर मोहम्मद के बारे बोला तो सिर काट देंगे… हिंदू ये भय अपने दिमाग से निकाल दें। हम हिंदू हैं। हम राम के चरित्र की मीमांसा कर सकते हैं, हम परशुराम के चरित्र की मीमांसा कर सकते हैं, तो हमारे लिए मोहम्मद क्या चीज है? हम मोहम्मद की मीमांसा क्यों नहीं करेंगे और क्यों सच नहीं बोलेंगे?”

उन्होंने आगे कहा, “अगर आज मोहम्मद का सच दुनिया के मुसलमान को चल जाए तो उसे अपने मुसलमान होने पर शर्म आएगी। क्योंकि भगवान हर इंसान के अंदर एक अंतरात्मा देता है, जिसे पता होता है कि क्या अच्छा है, क्या बुरा है और जब किसी इंसान को पता चलेगा कि वो केवल एक चोर, लुटेरे, बलात्कारी को, औरतों की सौदागरी करने वाले को फॉलो कर रहा था, तो उसे शर्म आएगी। ये तो हिंदुस्तान के घटिया नेता और नकली धर्मगुरु हैं, जिन्होंने इस्लाम जैसी गंदगी का महिमामंडन कर दिया। अगर इस्लाम के बारे में खुल कर बोला जाता तो आज हम मुसलमान को अपने मुसलमान होने पर शर्म आती। उसे शर्म आती कि वो हिंदुओं के खाने में थूक रहा है, उसे शर्म आती कि उसने अपने भाई जैस दोस्त की पत्नी और बेटी पर गंदी निगाह डाली।”

गौरतलब है कि इससे पहले भी अमानतुल्लाह खान ने दिल्ली दंगों के आरोपी ताहिर हुसैन का बचाव करने के लिए ’मुस्लिम कार्ड’ खेला था। उसने उसके खिलाफ ढेर सारे सबूतों को अनदेखा करते हुए दावा किया कि उसे सिर्फ इसलिए सजा दी जा रही है क्योंकि वह मुस्लिम है। बता दें कि खान पर खुद CAA विरोध प्रदर्शनों के दौरान 15 दिसंबर, 2019 को दिल्ली में हिंसा भड़काने का आरोप है।

‘हिंदी मीडियम’ वाली सबा कमर ने तोड़ी सगाई, मंगेतर अजीम पर यौन शोषण, रेप और मौत की धमकी देने के आरोप

पाकिस्तानी एक्ट्रेस सबा कमर ने मंगेतर अजीम खान के साथ रिश्ता खत्म करने का ऐलान किया है। ‘हिंदी मीडियम’ में इरफान के साथ नजर आ चुकी सबा ने सोशल मीडिया पर सगाई तोड़ने की घोषणा की है। साथ ही यह भी कहा है कि अजीम से वह जिंदगी में कभी नहीं मिली है। अजीम यौन शोषण, रेप और मौत की धमकी देने जैसे आरोपों से घिरा है।

सबा ने इंस्टाग्राम पर एक लंबा नोट लिखा है। इसके जरिए सगाई तोड़ने की जानकारी दी है। सगाई टूटने से वह काफी खुश हैं। नोट की शुरुआत में लोगों को अभिवादन के साथ स्माइली भी एड किया है। उन्होंने लिखा है, “सभी को हैलो, मैं एक बेहद जरूरी ऐलान करने जा रही हूँ। बहुत सारी निजी वजहों से मैं अजीम खान के साथ सगाई तोड़ रही हूँ।”

सबा ने आगे लिखा,“अब हम शादी नहीं कर रहे हैं। उम्मीद करती हूँ कि आप लोग मेरे फैसले को सपोर्ट करेंगे, जैसे आप हमेशा से करते आए हैं और मुझे लगता है कि कभी देर नहीं होती है अगर आपको, अगर आपको वक्त पर सच्चाई का पता चल जाए। मैं एक और चीज स्पष्ट कर देना चाहती हूँ, मैं अपनी जिंदगी में कभी भी अजीम खान से नहीं मिली हूँ। हम मोबाइल के जरिए एक-दूसरे से जुड़े रहे हैं। मेरे लिए ये बहुत कठिन वक्त चल रहा है, लेकिन भी बीत जाएगा। इंशाअल्लाह। आप सभी को ढेर सारा प्यार।”

‘मेरी तरफ की कहानी नहीं बताई है’

अजीम खान ने भी सबा कमर के इस पोस्ट पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सबा के पोस्ट को रिपोस्ट करते हुए लिखा, “उन्होंने मेरी तरफ की कहानी नहीं बताई है। हाँ, ये मेरी गलती थी।”

बता दें कि अजीम के साथ सगाई की घोषणा के कुछ दिनों बाद ही सबा की एक फैन उजाला ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट लिख कर अजीम खान के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए थे। महिला ने आरोप लगाया कि अजीम खान खुद को महिला बता कर एक प्राइवेट महिला ग्रुप में शामिल हुआ और फिर वहाँ से निजी जानकारी को सार्वजनिक किया।

अजीम पर लगे थे यौन शोषण के आरोप

उजाला ने लिखा कि अजीम ने कई महिलाओं की जिंदगी बर्बाद किया, जिसमें वो भी शामिल हैं। उसने बताया कि वो महिलाओं के ग्रुप से उसकी फोटो लेकर सोशल मीडिया में पोस्ट करता था। इसके साथ ही महिला वहाँ पर जो भी प्राइवेट कंटेंट पोस्ट करती थी, उसे भी वह अपने पब्लिक सोशल मीडिया चैनल पर डालता था और अपने फॉलोवर्स को उसके ऊपर अटैक करने के लिए उकसाया। अजीम ने उसे रेप और मौत की धमकी दी। गंदे-गंदे मैसेज किए। महिला ने कहा कि यह तो सिर्फ एक उदाहरण है, इसके अलावा कई और महिलाएँ हैं, जिसे उसने रेप और मौत की धमकी दी। इस आरोप के बाद नेटिजन्स अजीम खान के कैरेक्टर को लेकर स्पष्टीकरण माँग रहे हैं।

Saba Qamar's boyfriend accused of death and rape threats
महिला ने अजीम खान पर लगाए गंभीर आरोप

अजीम के वीडियो का सबा ने किया था सपोर्ट

इन आरोपों के बड़ा अजीम ने इंस्टाग्राम पर वीडियो पोस्‍ट कर सफाई दी थी। हालाँकि उसने बाद में वीडियो डिलीट कर दिया। सबा कमर ने भी अजीम का सपोर्ट किया था। सबा ने अजीम के वीडियो पर कमेंट करते हुए लिखा था, “मुझे तुम पर भरोसा है।”

अजीम खान ने अपने वीडियो में कहा था, “मैं पिछले दो दिनों से ढेर सारा प्यार और सपोर्ट करने के लिए आप सभी का शुक्रिया अदा करना चाहता हूँ। कुछ लोग ऐसे थे जिन्होंने अजीब बातें कही और मैं वीडियो मैसेज के जरिए उन्हें जवाब देना चाहता था। मैं सबा के पास्‍ट के बारे में नहीं जानता और न ही सबा को मेरे बीते हुए कल से कोई मतलब है। मुझे समझ नहीं आ रहा कि लोग क्‍यों मेरे ऊपर फर्जी आरोप लगा रहे हैं। जबकि सच कुछ और है।”

क्‍या आरोपों के कारण टूटा है रिश्‍ता?

अजीम ने वीडियो में आगे कहा था, “आप किसी की जिंदगी सिर्फ शोहरत पाने के लिए बर्बाद कर रहे हैं। ऐसे लोगों को शर्म आनी चाहिए। हमारे लिए हमारा भविष्‍य मायने रखता है। यकीन मानिए हमें इससे फर्क नहीं पड़ता कि लोग हमारे बारे में क्‍या सोचते हैं।” हालाँकि, इन सारे मसलों के बाद सबा का यूँ सगाई तोड़ना सवाल पैदा करता है कि क्‍या यह सब अजीम खान पर लगे आरोपों की वजह से ही हुआ है।

राकेश टिकैत ने डिलीट मारा राजस्थान में काफिले पर हमले वाला ट्वीट, बीजेपी पर मढ़ा था दोष

भारतीय किसान यूनियमन (BKU) के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने राजस्थान में अपने काफिले पर हुए हमले वाला ट्वीट डिलीट कर दिया है। इसमें उन्होंने बीजेपी पर हमले का आरोप लगाया था। हमला 2 अप्रैल को अलवर जिले में हुआ था। उस समय टिकैत हरसौरा में सभा को संबोधित करने जा रहे थे। पथराव में काफिले में शामिल गाड़ियों के शीशे टूट गए थे।

हमले की सूचना मिलने पर दिल्ली-यूपी के गाजीपुर बॉर्डर पर टिकैत के समर्थकों ने नेशनल हाईवे 9 को जाम कर दिया। बाद में पुलिस हस्तक्षेप के बाद ट्रैफिक बहाल हुई थी।

टिकैत ने ट्विटर पर वीडियो साझा करते हुए लिखा था, “राजस्थान के अलवर जिले के ततारपुर चौराहा, बानसूर रोड पर बीजेपी के गुंडों द्वारा जानलेवा हमला किया गया, लोकतंत्र के हत्या की तस्वीरें।”

राकेश टिकैत द्वारा किया गया ट्वीट, जो अब डिलीट कर दिया गया है

टिकैत ने ‘हमले’ वाला ट्वीट डिलीट कर दिया। लेकिन, फेसबुक पर इससे संबंधित पोस्ट हटाना भूल गए हैं। उन्होंने ट्वीट क्यों डिलीट किया यह नहीं बताया है। लेकिन, राजस्थान में हुई घटना को लेकर बीजेपी पर आरोप लगाने को लेकर नेटिजन्स ने ​उनको निशाने पर लिया था।

पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “राकेश टिकैत पर राजस्थान मे हमला। केजरीवाल से जब मीडिया दूर हो जाती थी वो बेचारा खुद अपने कार्यकर्ता से ही थप्पड़ खाकर मीडिया कवरोज बटोर लेता था टिकैत भी केजरी का ही गुर्गा है मीडिया इसको घास नहीं डाल रही तो कभी ओडिशा तो कभी राजस्थान में अपने ही कार्यकर्ताओं से थप्पड़ खा रहा है।”

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी इस घटना को लेकर ट्वीट किया था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए एक यूजर ने लिखा कि राकेश टिकैत ने तो अपना ट्वीट डिलीट कर लिया है। अब आपकी बारी है मुख्यमंत्री। एक अन्य यूजर ने अशोक गहलोत के ट्वीट पर लिखा, “कॉन्ग्रेस सरकार के रहते कोई कैसे अटैक कर सकता है, इसका  मतलब आपने सुरक्षा के बंदोबस्त नहीं किए और ऊपर से बीजेपी के ऊपर इल्जाम लगा रहे हैं।”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “जाँच के बाद पता चलेगा कि वो लोग अशोक गहलोत जैसे ही कॉन्ग्रेसी चमचे थे।”

अमित गौतम नाम के एक यूजर ने लिखा, “उत्तर प्रदेश में कोई घटना घटित हो तो भाजपा जिम्मेदार और अगर राजस्थान में भी कोई घटना घटित तो भी भाजपा जिम्मेदार। अरे भैया जाँच करवाओ। सरकार तुम्हारी है ये चिल्ल पों मत मचाओ।”

बता दें कि दिल्ली की सीमाओं (टीकरी, सिंघू और गाजीपुर) पर किसान चार महीने से अधिक समय से आंदोलन कर रहे हैं। गाजीपुर बॉर्डर के आंदोलन का नेतृत्व राकेश टिकैत के हाथों में है। टिकैत का कहना है कि जब तक केंद्र सरकार तीन नए कृषि कानूनों को वापस नहीं लेगी तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

नाममात्र के पैसे में ज्यादा काम करे यूपी-बिहार के मजदूर, इसलिए देते हैं ड्रग्स: पंजाब को चिट्ठी लिख केंद्र ने जताई चिंता

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पंजाब सरकार को एक पत्र लिखा है। इसमें राज्य में काम कर रहे उत्तर प्रदेश और बिहार के मजदूरों की स्थिति को लेकर चिंता जताई गई है। पत्र के मुताबिक इन मजदूरों को बंधुआ बनाकर रखा जाता है। ज्यादा काम लेने के लिए उन्हें ड्रग्स दिया जाता है। काम के एवज में उन्हें नाम मात्र का पैसा दिया जाता है।

पत्र के मुताबिक विशेषकर पंजाब के सीमावर्ती गाँवों में इन बंधुआ मजदूरों के साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा ह। केंद्र ने राज्य सरकार से इस गंभीर समस्या पर विचार करने को कहा है।

हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक 17 मार्च को यह पत्र पंजाब के मुख्य सचिव और डीजीपी को लिखा गया। इसमें कहा गया है कि अच्छे वेतन के वादे पर यूपी और बिहार के गरीब मजदूर अपने घर से सैकड़ों किलोमीटर दूर पंजाब में काम करने के लिए जाते हैं। लेकिन, वहाँ पहुँचने के बाद उनका शोषण किया जाता है। बंधुआ मजदूरों को खेतों में लंबे समय तक काम करवाने के लिए अक्सर ड्रग्स दिया जाता है। इससे उनकी मानसिक और शारीरिक स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

मंत्रालय पत्र में कहा है, “इस गंभीर समस्या पर ध्यान दें। इसमें मानव तस्करी, बंधुआ मजदूरी और मानवाधिकारों का उल्लंघन शामिल है। आपसे अनुरोध है कि इस मामले के समाधान के लिए उचित कदम उठाएँ।” साथ ही मंत्रालय ने इस मामले में राज्य सरकार से प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की रिपोर्ट देने के लिए कहा है।

गृह मंत्रालय ने केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्रालय को भी इस मामले पर ध्यान देने को कहा है। सभी राज्यों विशेषकर उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश और ओडिशा को विभिन्न स्तरों पर जागरूकता पैदा करने के लिए उपयुक्त निर्देश जारी करने को कहा है। साथ ही इन राज्यों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि बेहतर रोजगार की संभावनाओं और वेतन का झूठा वादा कर गरीबों और कमजोरों को झॉंसा न दिया जा सके।

बता दें कि साल 2019 और 2020 में पंजाब के गुरदासपुर, अमृतसर, फिरोजपुर और अबोहर के सीमावर्ती गाँवों से बचाए गए लोगों की स्थिति के आधार पर यह पत्र लिखा गया है। सीमा सुरक्षा बल ने इन सीमावर्ती क्षेत्रों से 58 बंधुआ मजदूरों को बचाया था। गृह मंत्रालय के मुताबिक, पूछताछ के दौरान यह सामने आया कि इनमें से ज्यादातर की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी।

‘बीजेपी ने पूरे सिस्टम पर कब्जा कर लिया है, अमेरिका कुछ बोल नहीं रहा’: राहुल गाँधी ने मोदी विरोध में विदेशी दखल को किया आमंत्रित

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने हार्वर्ड केनेडी स्कूल के प्रोफेसर निकोलस बर्न्स के साथ शुक्रवार (2 अप्रैल 2021) को लाइव चर्चा करते हुए कई मुद्दों को लेकर मोदी सरकार के कामकाज पर सवाल उठाया। उन्होंने अमेरिका से भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने की माँग की। बावजूद इसके कि केंद्र सरकार कई बार ये स्पष्ट कर चुकी है कि देश के अंदरूनी मामलों में न तो किसी विदेशी ताकत का हस्तक्षेप है और न ही भविष्य में ऐसा होने दिया जाएगा।

लेकिन, वायनाड के सांसद तो जैसे एक मिशन पर हों कि किसी भी सूरत में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को धूमिल करना है। हार्वर्ड केनेडी स्कूल के ‘इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिटिक्स एंड पब्लिक सर्विस’ की ओर से राहुल गाँधी को ‘भारतीय राजनीति और लोक सेवा में चुनौतियाँ, अवसर और प्रभाव’ विषय पर चर्चा के लिए आमंत्रित किया गया था।

राहुल ने जिन निकोलस बर्न्स के साथ चर्चा की वे ग्रीस में अमेरिका के पूर्व राजदूत रहे हैं। वर्तमान में वे हार्वर्ड के जॉन एफ कैनेडी स्कूल ऑफ गवर्नमेंट में कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय राजनीति के प्रोफेसर हैं।

कार्यक्रम के अंत में जब निकोलस बर्न्स चर्चा के निष्कर्ष पर पहुँचे थे, तभी कॉन्ग्रेस नेता ने भारत में अमेरिका के हस्तक्षेप न करने को लेकर सवाल किया, जिसने कुछ देर के लिए अमेरिकी प्रोफेसर को भी स्तब्ध कर दिया। राहुल ने कहा कि वह बहुत जल्दी अपनी बात कहेंगे। उन्होंने कहा, “भारत में जो कुछ भी चल रहा है, उसके बारे में अमेरिकी सरकार की ओर से अब तक मैंने कोई टिप्पणी नहीं। अगर आप कहते हैं कि लोकतंत्र में भागीदारी है, मेरा मतलब है, यहाँ (भारत) जो भी हो रहा है उस पर आपके क्या विचार हैं?”

भारतीय अस्मिता और उसके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने के राहुल गाँधी के सवाल ने निकोलस बर्न्स को भी कुछ देर के लिए स्तब्ध कर दिया। राहुल गाँधी ने यह भी कहा, “मैं बुनियादी तौर पर मानता हूँ कि अमेरिका इस पर गहराई से विचार करेगा। स्वतंत्रता का विचार, आपके संविधान में निहित है जो बहुत ही शक्तिशाली है। लेकिन, आपको स्वतंत्रता की उस विचारधारा का बचाव करना पड़ा। यही असली सवाल है।” हालाँकि, राहुल के इस सवाल को ज्यादा तवज्जो नहीं देते हुए बर्न्स ने कहा कि वे अगले सप्ताह दूसरे भारतीय अतिथियों के साथ अगला सत्र करेंगे तो इस सवाल का जवाब देंगे।

इस चर्चा के दौरान राहुल गाँधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी जमकर आलोचना की। उन्होंने कृषि कानून, लॉकडाउन के साथ ही असम में बीजेपी नेता की कार में मिले ईवीएम तक का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह एक बहुत ही गंभीर मामला है, लेकिन कोई भी नेशनल चैनल इसे कवर नहीं कर रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ने पूरे सिस्टम पर कब्जा कर लिया है। यही कारण है कि कॉन्ग्रेस तो क्या कोई भी विपक्षी दल बीजेपी का मुकाबला नहीं कर पा रहा है।

कॉन्ग्रेस MLA के बेटे ने पार्टी की महिला नेता से किया रेप, गैंगस्टर से पूरे परिवार को मरवाने की धमकी: FIR दर्ज

मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले की बड़नगर विधानसभा के कॉन्ग्रेस विधायक मुरली मोरवाल के बेटे पर दुष्कर्म का मामला दर्ज किया गया है। यह मामला इंदौर के महिला थाने में एक युवती ने दर्ज करवाया है। युवती ने आरोप लगाया है कि शादी का झाँसा देकर उसके साथ रेप किया गया है। आरोपित करण मोरवाल उज्जैन के युवा कॉन्ग्रेस के पूर्व जिला कार्यकारी अध्यक्ष रह चुके हैं। युवती की शिकायत पर पुलिस ने धारा 376 के तहत करण मोरवाल पर मामला दर्ज कर मामले की जाँच शुरू कर दी है।

युवा कॉन्ग्रेस की पदाधिकारी है युवती

बताया गया है कि जिस युवती ने विधायक मुरली मोरवाल के बेटे पर दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया है, वो युवा कॉन्ग्रेस की पदाधिकारी है। युवती बीते साल दिसंबर में करण मोरवाल के संपर्क में आई थी। इससे पहले युवती ने गुरुवार (अप्रैल 1, 2021) को डीआईजी से मामले की शिकायत की थी और फिर शुक्रवार (अप्रैल 2, 2021) को पुलिस ने युवती की शिकायत पर विधायक के बेटे के खिलाफ धारा 376 के तहत मामला कर लिया।

पीड़िता का आरोप है कि कुछ महीनों पहले करण भवरकुआं थाना क्षेत्र में किसी होटल में लेकर उसे गया था। वहाँ उसने कई बार युवती के साथ दुष्कर्म किया। युवती पुलिस से शिकायत ना करे, इसके लिए कई बार जान से मारने की धमकी भी दे चुका है।

थाना प्रभारी ज्योति शर्मा के मुताबिक पीड़िता की कैंट रोड पर कुछ वर्षों पहले करण से मुलाकात हुई थी। उसने वैलेंटाइन डे के दिन युवती को प्रपोज करने के बाद उसके साथ दुष्कर्म किया। युवती ने दावा किया है कि विधायक के बेटे के साथ बातचीत की रिकॉर्डिंग उसके पास हैं, जिसमें वह उसे धमकियाँ दे रहा है। आरोपित विधायक पिता का रौब झाड़ कर धमकाता था।

युवती का आरोप है कि विधायक के बेटे ने उसे शादी का झाँसा दिया और नशीला पदार्थ पिला कर घर लाकर भी उसके साथ दुष्कर्म किया। उसने जब शादी की बात की तो वह उसे उल्टा धमकाने लगा। विधायक के बेटे ने एक गैंगस्टर से भी उसे व उसके परिवार को मरवा देने की सुपारी देने की धमकी दी। पीड़िता ने पुलिस में शिकायत करने की बात कही तो उसे पैसे देकर मामला निपटाने को कहा।

पीड़िता को पता चला कि करण इसी तरह से और लड़कियों का शोषण कर चुका है। जिसके बाद वह होटल गई और वहाँ से मौजूदगी के सबूत इकट्ठे किए। इसके बाद उसकी इमारत में लगे सीसीटीवी कैमरे के फुटेज भी निकाले। इन फुटेज में करण उसे सहारा देकर ले जाते हुए दिखाई दे रहा है। इससे स्पष्ट हो गया कि करण ने नशे की हालत में उसके साथ संबंध बनाए थे।

कॉन्ग्रेस विधायक ने आरोपों को बताया झूठा

इस पूरे मामले में कॉन्ग्रेस विधायक मुरली मोरवाल व उनके बेट करण मोरवाल की तरफ से भी इंदौर पुलिस महानिरीक्षक को एक लिखित में आवेदन दिया गया है। जिसमें बताया गया है कि युवती द्वारा लगाए गए सभी आरोप गलत हैं, क्योंकि युवती खुद करण मोरवाल पर शादी करने के लिए दबाव बना रही थी और पूर्व में युवती ने उसे झूठे रेप के मामले में फँसाने की धमकी भी दी थी। इसके साथ ही मामले की निष्पक्ष जाँच की माँग भी की गई है।

पहले भी चर्चा में आ चुके हैं करण मोरवाल

कुछ महीने पहले करण मोरवाल का एक ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें वह एक महिला पटवारी को धमकाते सुनाई दे रहे थे। वायरल हुए ऑडियो में MLA पुत्र और महिला पटवारी के बीच बातचीत हो रही थी। बताया गया था कि शहर की सरकारी जमीन पर एक ग्रामीण कब्जा कर मकान बना रहा था, जिसे MLA पुत्र बनने देने के लिए कह रहा था, जबकि महिला पटवारी कार्रवाई करने की बात कह रही थी।

‘नेशन ऑफ इस्लाम’ के नेता का समर्थक, मुहम्मद नाम रखने के लिए पेटिशन: कैपिटल हिल के हमलावर को जानिए

वॉशिंगटन में अमेरिकी संसद (कैपिटल हिल) के बाहर भारतीय समयानुसार शुक्रवार देर रात हमला। हमलावर ने पहले कार से बैरिकेड को टक्कर मारी और फिर चाकू से पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया। एक पुलिस अफसर की मौत हो गई और एक अन्य जख्मी हैं। संदिग्ध हमलावर भी पुलिस की गोली लगने से मारा गया।

हमलावर की पहचान नोआह ग्रीन के रूप में हुई है। उसकी उम्र 25 वर्ष के करीब बताई जा रही। हमले का मकसद साफ नहीं है। पुलिस ने इसके आतंकी घटना होने से इनकार किया है। मारे गए पुलिस अफसर की पहचान विलियम एफ इवांस के तौर पर हुई है। वे कैपिटल पुलिस फोर्स में 18 साल से सेवा दे रहे थे।

कैपिटल पुलिस चीफ वाईडी पिटमैन ने एक बयान में कहा है कि डिपार्टमेंट के फर्स्ट रिस्पॉन्डर यूनिट में तैनात बिली हमले में जख्मी हो गए और कुछ देर बाद उनकी मौत हो गई। दूसरे पुलिस अधिकारी की स्थिति स्थिर है और वे खतरे से बाहर हैं। पिटमैन ने बताया कि बैरिकेड को टक्कर मारने के बाद हमलावर हाथ में चाकू लिए कार से बाहर निकला।

वाशिंगटन मेट्रोपोलिटन पुलिस डिपाटमेंर्ट के मुखिया राबॅर्ट जे कोंटी ने बताया कि जाँचकर्ताओं के सामने फिलहाल हमले का मकसद स्पष्ट नहीं है, लेकिन माना जा रहा है कि यह हमला आतंकवाद से जुड़ा नहीं है। संसद की स्पीकर नैंसी पेलोसी ने इवांस को लोकतंत्र के लिए बलिदान होने वाला बताया। राष्ट्रपति जो बिडेन ने इवांस के सम्मान में ह्वाइट हाउस पर और पेलोसी ने कैपिटल हिल बिल्डिंग पर राष्ट्रध्वज को आधा झुकाने का आदेश दिया है।

कौन था हमलावर?

पिटमैन ने हमलावर की पहचान ग्रीन के तौर पर होने की पुष्टि नहीं की, लेकिन बताया कि हमलावर का एजेंसियों के पास कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं था। लेकिन अमेरिकी मीडिया की रिपोर्टों में पुलिस सूत्रों के हवाले से उसकी पहचान ग्रीन के तौर पर की गई है।

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार हमलावर ने फेसबुक पेज पर खुद को ‘नेशन ऑफ इस्लाम’ के लीडर लुइस फर्रखान (Louis Farrakhan) का समर्थक बताया था। यह पेज अब हटा लिया गया है। ग्रीन इंडियाना का रहने वाला था और कैपिटल पुलिस की गोली लगने से वह मारा गया। वह वेस्ट वर्जीनिया में पैदा हुआ था और 2019 में फाइनेंस की डिग्री के साथ ग्रेजुएशन पूरा किया था। दिसंबर 2020 में उसने अपना नाम बदलकर नोआह जईम मुहम्मद रखने के लिए पेटिशन दी थी। लेकिन बीते मंगलवार को इसकी सुनवाई के वक्त इंडियाना पुलिस के सामने पेश होने में नाकाम रहा था।

फेसबुक पेज पर उसने फर्रखान और 1934 से 1975 तक नेशन ऑफ इस्लाम की अगुवाई करने वाले एलिजाह मुहम्मद (Elijah Muhammad) के भाषण और लेख शेयर कर रखे थे। फेसबुक पर उसने कोरोना महामारी के कारण अपने जीवन के संघर्षों को लेकर भी पोस्ट कर रखा था। 17 मार्च को उसने नेशन ऑफ इस्लाम के वर्जीनिया चैप्टर को दिए दान की तस्वीर पोस्ट की थी। साथ ही फर्रखान के एक भाषण का वीडियो पोस्ट किया था, जिसका शीर्षक ‘द डिवाइन डिस्ट्रक्शन ऑफ अमेरिका’ था। इसके बाद उसने अपने दोस्तों को इससे जुड़ने और फर्रखान तथा मुहम्मद के बारे में पढ़ने को प्रोत्साहित किया था।

गौरतलब है कि कैपिटल हिल में इससे पहले 6 जनवरी को हुई हिंसा में दर्जनों घायल हो गए थे और 5 की मौत हो गई थी।

‘इस्लामोफोबिया’ से लड़ने के लिए मेगन मर्केल ने दिया दान, संस्था ने नहीं किया सार्वजनिक: जानिए वजह

प्रिंस हैरी की पत्नी मेगन मर्केल फिर से सुर्खियों में हैं। इस्लामोफोबिया से लड़ने का दावा करने वाली ब्रिटेन की संस्थान ‘हिम्माह (Himmah)’ का कहना है कि उसे मर्केल से दान मिला था। लेकिन, उन्होंने इसे सार्वजनिक नहीं किया, क्योंकि आशंका थी कि इससे मर्केल की प्रतिष्ठा को नुकसान हो सकता है।

बीबीसी न्यूज को संस्था के डायरेक्टर साजिद मोहम्मद ने बताया, ”हमारे द्वारा इसे सार्वजनिक नहीं किए जाने का कारण यह है कि ट्रस्टियों का मानना था कि वह काफी चर्चित हैं और ऐसे में रेप्यूटेशॅन से जुड़े विवाद हो सकते हैं। लोग हमारे चैरिटी को पसंद नहीं कर रहे हैं, क्योंकि वे उसे (मेगन मार्केल) पसंद नहीं करते हैं। इसलिए हमने दान गुप्त रखने का फैसला किया।”

उन्होंने कहा कि उन्होंने ओपरा विन्फ्रे के साथ विवादास्पद इंटरव्यू के बाद दंपती के प्रति एकजुटता का भाव दिखाने की आवश्यकता महसूस की। यह इंटरव्यू मार्च में सीबीएस पर प्रसारित हुआ था। उनके अनुसार, अगस्त में द रॉयल फाउंडेशन के माध्यम से $13,000 (£ 10,000) का दान प्राप्त किया गया था।

साजिद मोहम्मद ने कहा, “इंटरव्यू के बाद हमें अहसास हुआ कि हम गरीबी और नस्लवाद के विरुद्ध चलने वाले संगठन हैं। हमें एकजुटता दिखाने की जरूरत है।” उन्होंने खुलासा किया कि उन्होंने शुरू में सोचा था कि यह एक बड़ा झूठ है लेकिन जब उन्हें अहसास हुआ कि यह वास्तविकता है तो वह बहुत रोए। मोहम्मद ने कहा कि हिम्माह के वॉलिंटियर और ट्रस्टी पूर्ण रूप से रानी की दयालु, उदार और विनम्र बातों से ऊपर उठ गए थे।

बता दें कि पिछले दिनों मेगन मर्केल और प्रिंस हैरी के इंटरव्यू ने एक बड़े विवाद को जन्म दिया था। इस इंटरव्यू में दंपती ने ब्रिटिश शाही परिवार पर नस्लीय भेदभाव के गंभीर आरोप लगाए थे। मेगन ने ओप्रा विन्फ्रे को बताया था कि जब वह गर्भवती थीं, तो शाही परिवार में बहुत सी चर्चाएँ जोरों पर थीं। जैसे- मेगन और प्रिंस हैरी के बच्चे को कोई शाही खिताब नहीं दिया जा सकता है या उनके बच्चे का रंग कैसा होगा।

बता दें कि शाही परिवार से नाता तोड़कर जीवन में आगे बढ़ने का निर्णय लेने के कारण प्रिंस हैरी और उनकी पत्नी मेगन मार्केल (Meghan Markle) लंबे समय से चर्चा में हैं। कथित तौर पर इस जोड़े ने शाही परिवार में बड़ी अजीब परिस्थितियों का सामना किया। मेगन को तो नस्लीय भेदभाव भी झेलना पड़ा। ओप्रा से बात करते हुए, मेगन मर्केल ने बताया था कि वह उस समय बहुत चिंतित थीं जब उन्हें पता चला कि यूके का शाही परिवार हैरी और उनके बच्चे आर्ची को कोई सुरक्षा नहीं दे रहा है।

‘असम में दाढ़ी, टोपी और लुंगी वालों की होगी सरकार’: बदरुद्दीन अजमल के बेटे ने अलापा ‘बुर्का’ और ‘इस्लामी टोपी’ का राग

असम में कॉन्ग्रेस की साझेदार बदरुद्दीन अजमल की AIUDF लगातार विवादों में बनी हुई है। अब AIUDF प्रमुख के बेटे अब्दुर रहीम अजमल ने विवादित बयान दिया है। रहीम ने दावा किया है कि वह दाढ़ी, टोपी और लुंगी पहनने वाले लोगों की सरकार बनाएँगे।

अपनी पार्टी उम्मीदवार फणीधर तालुकदार के लिए असम के बभनीपुर में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए, अब्दुर रहीम अजमल ने बंगाली में कहा, “इस बार यह गरीब लोगों की सरकार होगी। सरकार में दाढ़ी, टोपी और लुंगी वाले पुरुष होंगे।”

दूसरी रैली में अजमल ने कहा कि चुनाव जीतने के बाद लोगों को बुर्का, दाढ़ी और इस्लामी टोपी की इज्जत करनी होगी। AIUDF प्रत्याशी अशरफ्फुल हुसैन के लिए चेंगा विधानसभा में रैली को संबोधित करते हुए अजमल ने कहा, “हमारी माताओं और बहनों के दुपट्टे का सम्मान करना होगा, हमारी माताओं और बहनों के बुर्का का सम्मान करना होगा, हमारी दाढ़ी और टोपी का सम्मान करना होगा।”

बता दें कि अब्दुर रहीम अजमल जमुनामुख निर्वाचन क्षेत्र से AIUDF विधायक हैं। हालाँकि, इस बार एआईयूडीएफ द्वारा बदरुद्दीन अजमल के भाई सिराजुद्दीन अजमल को इस सीट से उम्मीदवार बनाया गया है।

गौरतलब है कि राज्य में दाढ़ी, टोपी और बुर्का बांग्लादेशी घुसपैठियों की ओर इशारा करता है। असम के मुसलमान ऐसी पोशाकों से पहचाने नहीं जाते। वह असमियों की तरह की रहते हैं। ऐसे में बार-बार चुनावी रैली में दाढ़ी, इस्लामी टोपी, लुंगी, बुर्के का नाम लाकर अब्दुर रहीम बता रहे हैं कि कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाला गठबंधन यदि सत्ता में आया तो वह मियाँ मुस्लिमों की सरकार बनवाएँगे और बांग्लादेशी घुसपैठियों के लिए काम करेंगे।

गौरतलब है कि अभी हाल में एक चुनावी रैली में स्वयं ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल असम के सांस्कृतिक प्रतीक ‘गमोसा’ का अपमान करते नजर आए थे। इसके बाद AIUDF मुखिया की हर जगह आलोचना हुई। पीएम ने भी रैली में कहा कि इससे लोगों की भावनाएँ आहत हुई है और उनमें गुस्सा है।