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‘भारत में BJP के खिलाफ एक ही असली नेता’: ममता को Pak राजनयिक का साथ, पहले पॉर्न स्टार के लिए किया था ट्वीट

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में अब पाकिस्तान की भी खासी दिलचस्पी हो आई है। नई दिल्ली में पाकिस्तान के हाई कमिश्नर के रूप में कार्य कर चुके रिटायर्ड राजनयिक अब्दुल बासित ने तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी की तारीफों के पुल बाँधे हैं। उन्हें ‘बंगाल की बाघिन’ बताते हुए बासित ने ‘अरब न्यूज़’ के एक लेख में लिखा है कि उन्हें मार्च 2015 और मार्च 2016 में ममता बनर्जी से मुलाकात का मौका मिला।

अब्दुल बासित 2016 में भारत-पाकिस्तान मैच के दौरान कोलकाता गए थे। उन्होंने लिखा है कि पहली बैठक के दौरान ही ‘दीदी’ ने अपनी नम्रता, राजनीतक कुशाग्रता और बुद्धिमता से उनके मन पर गहरा प्रभाव छोड़ा। उन्होंने लिखा है कि वो इस बैठक की यादों को हमेशा सँजो कर रखेंगे। तब वो समय था, जब कश्मीरी अलगाववादियों से मुलाकात के कारण भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में तीखापन था और अब्दुल बासित का कहना है कि भारत के ‘कठोर रवैये’ से पाकिस्तान चकित था।

अब्दुल बासित ने लिखा है कि उस बैठक में उन्होंने ममता बनर्जी को बताया कि वो भारत-पाकिस्तान के रिश्तों को ठीक करने के लिए क्या कर रहे हैं। उन्होंने अपने लेख में कहा कि पश्चिम बंगाल का चुनाव खासा जहरीला हो गया है और भारत में एक ही ऐसा नेता बचा है, जो भाजपा के खिलाफ खड़े होने की असली ताकत रखता है। उन्होंने लिखा है कि कमजोर हुई कॉन्ग्रेस पार्टी का नेतृत्व क्षीण हो रहा है और इसका भविष्य धुँधला दिख रहा है।

उन्होंने कश्मीरी अलगावादियों को ‘कश्मीरी नेताओं’ कह कर सम्बोधित करते हुए लिखा है कि उन लोगों के साथ उनके बैठक को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘बड़ा मुद्दा बना दिया’, जिसकी पाकिस्तान ने कल्पना भी नहीं की थी। उन्होंने लिखा है कि पूर्व की सरकारें ऐसी बैठकें खुद आयोजित करवाती थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि जम्मू कश्मीर में नवंबर 2014 में होने वाले चुनावों के लिए पीएम मोदी ने ऐसा किया, जहाँ भाजपा को 25 सीटें मिलीं।

अब्दुल बासित का कहना है कि ममता बनर्जी ने उन्हें ध्यान से सुना और नरेंद्र मोदी की विपक्षी नेता होने के बावजूद उनके खिलाफ एक शब्द भी नहीं कहा। उन्होंने ममता बनर्जी को ‘सच्ची देशभक्त और राजनेता’ करार दिया। बकौल बदल बासित, ममता बनर्जी ने अपने राज्य की परियोजनाओं व गरीबों की भलाई के लिए हुए कार्यों के बारे में बताया और अब्दुल बासित ने जब सिंध और पश्चिम बंगाल की साझेदारी का सुझाव देते हुए कराची व कोलकाता के ‘ट्विनिंग’ की बात की तो उसमें भी उन्होंने रुचि दिखाई।

अब्दुल बासित का कहना है कि इन प्रस्तावों को ममता बनर्जी ने आधिकारिक रूप से केंद्रीय विदेश मंत्रालय के समक्ष भेजने को कहा। इसके बाद ममता बनर्जी ने बासित से पूछा कि क्या उन्होंने कोलकाता की मटन बिरयानी खाई है? अब्दुल बासित के होटल में पश्चिम बंगाल की सीएम ने मटन बिरयानी भिजवाई। पूर्व राजनयिक का कहना है कि ये उनके लिए एक कभी न भूलने वाली ट्रीट थी। अब्दुल बासित ने लिखा कि वो किसकी जीत चाहते हैं, ये समझना कठिन नहीं है।

अब्दुल बासित अक्सर अजीब कारणों से विवाद में रहते हैं। एक बार उन्होंने एक ऐसा ट्वीट रीट्वीट किया था, जिसमें एक अडल्ट फिल्म कलाकार जॉनी सीन्स के स्क्रीनशॉट को कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद वहाँ की पीड़ित जनता बताकर दिखाया जा रहा था। बासित ने कबूल किया था कि आतंकी बुरहानी वानी के मारे जाने के बाद उन्होंने शोभा डे से एक लेख लिखवा कर पाकिस्तानी प्रोपेगंडा को आगे बढ़ाया था।

UP पुलिस पर रफीक ने परिवार के साथ किया हमला, 2 की हालत गंभीर: पत्थरबाजों में महिलाएँ भी, हरकत में आए SP खुद

उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात में कहिजरी थाने की पुलिस दहेज़-उत्पीड़न के मामले में एक पिता-पुत्र को पकड़ने गई थी, लेकिन पुलिस टीम पर ही हमला हो गया और कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। आरोपितों ने ही पुलिस पर हमला किया, जिनमें रफीक के नेतृत्व में पुरुषों के साथ-साथ महिलाएँ भी थीं।

उत्तर प्रदेश पुलिस पर जम कर ईंट-पत्थर चलाए गए। आत्मरक्षा के लिए पुलिस को फायरिंग भी करनी पड़ी। इस घटना में चौकी इंचार्ज और एक सिपाही के अलावा शिकायतकर्ता महिला भी घायल हो गई। चौकी इंचार्ज की हालत गंभीर है और उनका इलाज चल रहा है।

एसपी केशव कुमार चौधरी ने पुलिस बल के साथ आरोपितों की तलाश में दबिश दी है। दहेज उत्पीड़न का ये मामला भीखदेव के रहने वाले अजमल की पत्नी शाह बेगम ने दर्ज कराया था। 2 वर्ष पहले दर्ज कराए गए इस मामले में शौहर के अलावा ससुर रफीक उर्फ़ हक्कल को भी आरोपित बनाया गया था।

18 मार्च को शाह बेगम ने उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की सदस्य पूनम कपूर के सामने भी ये मामला उठाया था। इसके बाद पुलिस ने रफीक को हिरासत में भी लिया था लेकिन समझौता होने के कारण उसे फिर से छोड़ दिया गया।

शाह बेगम अपने मायके कबीरनगर में रह रही थी। उसे लेकर पुलिस चौकी इंचार्ज गजेंद्र पाल सिपाहियों के साथ भीखदेव पहुँचे। समझौते के तहत पीड़िता को ससुराल में ही रुकना था, जिसके लिए पुलिस वहाँ गई थी। जब हमला हुआ, तब पुलिस रफीक के बड़े बेटे हसर अली से पूछताछ कर रही थी।

तभी अचानक से आरोपितों के साथ घर की महिलाओं अफरुन, असरुन, रईशा व चांदतारा ने हमला कर दिया। पुलिसकर्मी इधर-उधर भागे और किसी तरह जान बचा कर वायरलेस से सूचना दी। पथराव के बीच चौकी इंचार्ज को ईंट-पत्थर लगे और वो मौके पर ही बेहोश हो गए। सिपाही समर सिंह भी लहूलुहान हो गए। रसूलाबाद थाने की पुलिस ने वहाँ आकर पीड़िता व अन्य घायलों को कानपुर के एक नर्सिंग होम में भर्ती कराया।

आरोपितों की तलाश में पुलिस की 5 टीमें गठित की गई हैं और उन्हें जल्द ही गिरफ्तार किए जाने की बात कही गई है। रफीक के खिलाफ पहले से ही कई संगीन मामलों में मुक़दमे दर्ज हैं। DIG कानपुर ने अस्पताल जाकर घायलों का हालचाल लिया। शिवली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्राथमिक उपचार देने के बाद कानपुर के रीजेंसी अस्पताल में उन्हें भर्ती कराया गया है। एसपी मौके पर कैम्प कर रहे हैं।

इस घटना की चश्मदीद रही घायल पीड़िता ने बयान देते हुए कहा कि ससुराल वाले उसे जान से मार देना चाहते थे। उसने कहा कि उसके पति अजमत अली और ससुर रफीक के अलावा ननद अफरूँ, अकरम अली, नन्दोई वाजिद अली, मुस्कान सहित सभी ने मारा। उसने कहा कि लोहे के डंडे का भी इस्तेमाल किया गया था। पूरे मामले में पुलिस ने बस इतना कहा कि समझौते के तहत पीड़िता को घर में रखो, जिस पर उग्र होकर हमला किया गया।

महाराष्ट्र गृह मंत्री ने किसे बुलाया… कैसे-किससे वसूली का दिया टारगेट: पढ़ें परमबीर सिंह का WhatsApp चैट

मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर और अब महाराष्ट्र के DG (होमगार्ड) परमबीर सिंह के उस पत्र से बवाल मचा हुआ है, जिसमें उन्होंने राज्य के गृह मंत्री और NCP नेता अनिल देशमुख पर विवादित पुलिस अधिकारी सचिन वाजे के माध्यम से प्रतिमाह 100 करोड़ रुपए की वसूली की कोशिश के आरोप लगाए हैं। सबूत के रूप में परमबीर सिंह ने ACP संजय पाटिल के साथ व्हाट्सएप्प (Whatsapp) पर हुई बातचीत का हवाला भी दिया है। जानिए क्या है उस चैट में।

इस चैट की शुरुआत परमबीर सिंह के ये पूछने से होती है कि जब पाटिल ने ‘HM सर’ से फरवरी में मुलाकात की थी तो उन्होंने बार व ऐसे अन्य संस्थानों के बारे में क्या कहा था और कुल कितनी रकम की उगाही की बात कही थी? जब उधर से कुछ मिनट्स तक कोई जवाब नहीं आता है तो परमबीर सिंह ‘अर्जेन्ट प्लीज’ का मैसेज भेजते हैं। इस पर पाटिल जवाब देते हैं कि मुंबई के ऐसे 1750 व अन्य प्रतिष्ठानों से 3-3 लाख उगाही की बात हुई थी। Whatsapp चैट इस प्रकार है:

ACP पाटिल: हर महीने कुल 50 करोड़ की वसूली। मिस्टर पलांडे ने 4 मार्च को DCP भुजबल एनफोर्समेंट के सामने ऐसा कहा था।
परमबीर सिंह: तो इससे पहले आप HM सर से कब मिले थे?
ACP पाटिल: हुक्का ब्रीफिंग से 4 दिन पहले।
परमबीर सिंह: वाजे और HM सर की बैठक की तारीख़ क्या थी?
ACP पाटिल: सर मुझे सटीक तारीख़ याद नहीं है।
परमबीर सिंह: आपने कहा था कि आपकी बैठक से कुछ ही दिनों पहले?
ACP पाटिल: हाँ सर, लेकिन ये फरवरी से ख़त्म होने से पहले।
परमबीर सिंह: पाटिल, मुझे कुछ और सूचनाएँ चाहिए। क्या वाजे HM सर से मुलाकात करने के बाद तुमसे मिला?
ACP पाटिल: हाँ सर, वो मुझसे मिला था।
परमबीर सिंह: क्या उसने तुम्हें कुछ बताया कि वो HM सर से क्यों मिला था?
ACP पाटिल: उस बैठक का उद्देश्य, जैसा कि मुझे बताया गया था, यह था कि मुंबई में 1750 प्रतिष्ठान हैं और प्रत्येक से 3 लाख की वसूली के बाद ये आँकड़ा 40-50 करोड़ के बीच होगा।
परमबीर सिंह: HM सर ने आपसे भी यही बात कही थी?
ACP पाटिल: 4 मार्च को उनके PS पलांडे ने मुझसे ऐसा कहा था।
परमबीर सिंह: हाँ, आपकी पलांडे से मुलाकात हुई थी।
ACP पाटिल: हाँ सर, मुझे बुलाया गया था।

परमबीर सिंह के पत्र की एक और बड़ी बात ये है कि उन्होंने इस पूरे प्रकरण के साथ-साथ दादर एंड नगर हवेली लोकसभा क्षेत्र से 7वीं बार सांसद बने मोहन डेलकर की आत्महत्या वाले मामले का भी जिक्र किया है। उन्होंने कहा कि सुसाइड नोट के हिसाब से दादर एंड नगर हवेली में अधिकारियों द्वारा प्रताड़ित किए जाने की बात लिखी थी लेकिन गृह मंत्री देशमुख उन पर बार-बार केस रजिस्टर करने का दबाव बना रहे थे और नहीं चाहते थे कि वो इस पर वकीलों की राय लें।

उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ महीनों में राज्य के गृह मंत्री ने दयानेश्वर स्थित अपने आवास पर कई पुलिस अधिकारियों को बुलाया है और उन्हें कहा है कि किसी खास प्रकरण में उन्हें जाँच को किस दिशा में ले जाना है। परमबीर सिंह ने इसे अवैध और न्यायपालिका का उल्लंघन बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सिर्फ वाजे ही नहीं बल्कि कई अधिकारियों को अपने आवास पर बुला कर देशमुख ने ‘कलेक्शन टारगेट’ दिए थे।

जबकि अनिल देशमुख का कहना है कि अब परमबीर सिंह को लगता है कि एंटीलिया मामले में वो मुसीबत में हैं तो उन्होंने ‘महा विकास अघाड़ी (MVA)’ सरकार को ब्लैकमेल करने के लिए ये आरोप लगाए हैं। सीएम उद्धव ने पत्र की प्रमाणिकता पर सवाल उठाए। सीएम व गृह मंत्री ने एक-दूसरे का विरोधाभासी बयान जारी किया। इसके कुछ ही देर बाद परमबीर सिंह ने मीडिया से कहा कि ये पत्र उन्होंने ही भेजा है और अब वो इसकी हस्ताक्षरित कॉपी पुनः सेंड करने जा रहे हैं।

ACP पाटिल से मिल व्हाट्सएप्प पर खेला खेल: परमबीर सिंह के ‘100 करोड़ी’ लेटर पर CM उद्धव के उलट अनिल देशमुख

मुंबई पुलिस कमिश्नर के पद से हाल ही में ट्रांसफर किए गए परमबीर सिंह ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिख कर आरोप लगाया कि राज्य के गृह मंत्री और NCP नेता अनिल देशमुख ने विवादित पुलिस अधिकारी सचिन वाजे को हर महीने रेस्टॉरेंट्स, बार और पब से 100 करोड़ रुपए की वसूली का लक्ष्य दिया था। इस पत्र में एंटीलिया के बाहर बम वाले कार से लेकर मनसुख हिरेन की मौत को लेकर कई सवाल थे।

इसके बाद अनिल देशमुख ने बयान जारी कर आरोपों का खंडन किया, जबकि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने इस पत्र की प्रमाणिकता पर प्रश्न खड़े किए। उन्होंने कहा कि इस पत्र पर परमबीर सिंह के हस्ताक्षर नहीं थे और इसे जीमेल अकाउंट से भेजा गया था। उन्होंने कहा कि चूँकि इस अहस्ताक्षरित पत्र को परमबीर सिंह के आधिकारिक मेल से नहीं भेजा गया था, इसीलिए संभव है कि ये पत्र पूरा का पूरा फेक ही हो।

उन्होंने कहा कि परमबीर सिंह से संपर्क करने की कोशिश की जा रही है। शिवसेना सुप्रीमो ने कहा कि जिस मेल अकाउंट से पत्र आया, वो ‘[email protected]’ था, जबकि परमबीर सिंह का सरकारी मेल एड्रेस ‘[email protected]’ है। इसी बीच अनिल देशमुख ने एक नया विस्तृत बयान जारी कर दिया। उन्होंने इसमें अपने ऊपर लगे आरोपों को झूठा बताते हुए इसे उन्हें और MVA सरकार को बदनाम करने की साजिश करार दिया। अपने बयान में उन्होंने कहा:

“मैं आपका ध्यान कुछ बिंदुओं की तरफ आकर्षित करना चाहता हूँ, जिससे पता चलता है कि परमबीर सिंह झूठ बोल रहे हैं। सचिन वाजे की गिरफ़्तारी के बाद वो इतने दिनों तक चुप क्यों थे? उन्होंने शुरू में क्यों कुछ नहीं कहा? मार्च 16 को उन्हें पता चला कि उनका ट्रांसफर किया जाना है तो फिर अगले दिन से उन्होंने साजिश शुरू कर दी। उन्होंने अपने करीबी ACP संजय पाटिल को कुछ प्रश्न व्हाट्सएप्प पर भेजे और बदले में मनपसंद उत्तर पाया। ये उनकी एक बड़ी साजिश का हिस्सा है, जिसके माध्यम से वो सरकार को बदनाम करना चाहते हैं।”

महाराष्ट्र के गृह मंत्री के बयान में आरोप लगाया गया है कि 16 वर्षों से निलंबन की अवस्था में चल रहे सचिन वाजे को फिर से पदस्थापित करने का निर्णय परमबीर सिंह का ही था और अब खुद को बचाने के लिए वो इस तरह के आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने परमबीर सिंह के आरोपों को आधारहीन बताते हुए उन्हें साबित करने की चुनौती दी। उन्होंने कहा कि वो मानहानि का मुकदमा दर्ज कराएँगे। उन्होंने कहा कि सचिन वाजे फरवरी में ही सिंह से मिले थे, फिर उस समय क्यों नहीं उन्होंने कुछ कहा?

बकौल अनिल देशमुख, अब परमबीर सिंह को लगता है कि एंटीलिया मामले में वो मुसीबत में हैं तो उन्होंने ‘महा विकास अघाड़ी (MVA)’ सरकार को ब्लैकमेल करने के लिए ये आरोप लगाए हैं। इस तरह से मुख्यमंत्री और गृह मंत्री ने एक-दूसरे का विरोधाभासी बयान जारी किया। इसके कुछ ही देर बाद परमबीर सिंह ने मीडिया से कहा कि ये पत्र उन्होंने ही भेजा है और अब वो इसकी हस्ताक्षरित कॉपी पुनः सेंड करने जा रहे हैं।

इसके बाद कयासों का अंत हुआ और मीडिया में परमबीर सिंह द्वारा हस्ताक्षरित पत्र भी जारी हो गया, जो उन्होंने मुख्यमंत्री ठाकरे को भेजा है। मुंबई कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष संजय निरुपम ने कहा कि अगर परमबीर सिंह के आरोप सच्चे हैं तो सवाल NCP सुप्रीमो शरद पवार से पूछा जाना चाहिए, जो MVA सरकार के सूत्रधार हैं। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस को इस मामले में अपना स्टैंड स्पष्ट करना चाहिए।

परमबीर सिंह ने चिट्ठी में ये भी कहा कि सचिन वाजे ने उन्हें बताया था कि अनिल देशमुख ने उससे हर महीने जेल से, रेस्ट्रॉं, होटल, बार आदि जगहों से 100 करोड़ रुपए इकट्ठा करने को कहा था। उनके मुताबिक गृहमंत्री ने वाजे को बताया था कि मुंबई में लगभग 1750 बार, रेस्ट्रॉं और अन्य जगह हैं। यदि प्रत्येक से 2-3 लाख रुपए एकत्रित किए जाएँ तो हर महीने 40-50 करोड़ मिल जाएँगे। बाकी का कलेक्शन अन्य माध्यमों से किए जा सकते हैं।

इस प्रकरण पर पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने कहा, “पूर्व कमिश्नर ने जो आरोप लगाए हैं वह बेहद गंभीर हैं। मैं तो मानता हूँ कि जिलेटिन की जो छड़े मिली हैं, उससे भी ज्यादा विस्फोटक ये आरोप हैं।”

उनके अनुसार, इन आरोपों पर गंभीरता से इसलिए भी जाँच होनी चाहिए, क्योंकि ये आरोप कार्यरत डीजी ने लगाए हैं। इन आरोपों की पुष्टि करने के लिए उन्होंने व्हॉट्सएप चैट या एसएमएस चैट भी लगाई है। जिसमें यह स्पष्ट है कि रेस्ट्रां, बार से पैसा जमा करने को कहा गया है।

‘भड़^*$# करना बंद करो, जाकर धंधे पर बैठ जाओ’: AAP नेता सोमनाथ भारती ने कोर्ट में महिला एंकर से माँगी माफी

साल 2018 में सुदर्शन न्यूज की एंकर रंजना द्विवेदी के लिए अपमानजनक भाषा का प्रयोग करने वाले आम आदमी पार्टी नेता सोमनाथ भारती ने शनिवार (मार्च 20, 2021) को अपनी बदजुबानी के लिए रंजना से माफी माँग ली। दिल्ली हाई कोर्ट में चल रहे मानहानि मामले में AAP विधायक ने रंजना द्विवेदी से अदालत में माफी माँगी। यह जानकारी सुदर्शन न्यूज ने अपने ट्विटर हैंडल पर दी।

न्यूज चैनल ने इसे अपनी ऐतिहासिक जीत बताते हुए कहा कि सुदर्शन की पूर्व एंकर रंजना अंकित द्विवेदी के साथ सुदर्शन न्यूज़ के प्लेटफार्म पर अभद्रता करने वाले सोमनाथ भारती ने कोर्ट में माफी माँग ली है। रंजना ने भी इस बात की पुष्टि की।

वह बोलीं कि आरोपित सोमनाथ भारती ने जो सुदर्शन न्यूज के मंच पर उनके साथ अभद्रता की थी। उस मामले में विधायक ने माफी माँगी है। आगे उन्होंने कहा कि जिस समय उनके साथ विधायक ने बदजुबानी की थी, उस समय उनकी नई-नई शादी हुई थी। उस दौरान इस घटना से नए परिवार में उनकी छवि बिगाड़ने का प्रयास हुआ, मगर उनके पति उनके साथ रहे और व्यक्तिगत रूप से भी वह ये बात ठान चुकी थीं कि इतनी आसानी से वह इस केस को नहीं छोड़ेंगीं।

बता दें कि सोमनाथ भारती ने कोर्ट में अपने बयान में कहा कि उनकी स्टेमेंट में सुदर्शन न्यूज की पत्रकार को कुछ नहीं कहा गया था। अगर किसी भी तरह से शिकायतकर्ता की भावनाएँ आहत हुईं तो वह ईमानदारी से इस मामले में माफी माँगते हैं।

भारती द्वारा मामले में अदालत के सामने माफी माँगने के बाद रंजना ने इस केस को खत्म करने के लिए अपनी सहमति दे दी। इसी के साथ उन्होंने AAP विधायक के खिलाफ आईपीसी की धारा 504/509 के तहत एफआईआर भी वापस ले ली।

उल्लेखनीय है कि महिलाओं के साथ बदसलूकी करने के लिए पहचाने जाने वाले सोमनाथ भारती ने साल 2018 में सुदर्शन न्यूज की महिला एंकर से बातचीत के दौरान अभद्र भाषा का प्रयोग किया था।

सुदर्शन न्यूज की महिला पत्रकार से बात करते हुए उन्होंने कहा था, “ये भड़^$# करना बंद करो। जाकर धंधे पर बैठ जाओ’। इसके बाद आप विधायक ने 2019 के चुनावों का इंतजार करने के लिए महिला एंकर से कहा और बोले, “ये भड़%गिरि नहीं चलेगी, 2019 का इंतजार कर लो।”

इस शो की क्लिप बाद में सोशल मीडिया पर हर जगह वायरल हुई थी। महिला एंकर ने बाद में इस संबंध में एफआईआर भी करवाई थी। हालाँकि, मामले के तूल पकड़ने के बावजूद भी हैरानी की बात ये देखने के मिली थी कि अरविंद केजरीवाल ने उस समय अपने विधायक के रवैये तक की आलोचना नहीं की थी।

जिलेटिन की छड़ों से भी विस्फोटक है देशमुख पर लगे आरोप, उन्हें हटाकर हो निष्पक्ष जाँच: देवेंद्र फडणवीस

मुंबई के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह द्वारा राज्य के गृहमंत्री अनिल देशमुख पर गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर देशमुख के इस्तीफे की माँग की। उन्होंने कहा, “पूर्व कमिश्नर ने जो आरोप लगाए हैं वह बेहद गंभीर हैं। मैं तो मानता हूँ कि जिलेटिन की जो छड़े मिली हैं उससे भी ज्यादा विस्फोटक ये आरोप हैं।”

उनके अनुसार, इन आरोपों पर गंभीरता से इसलिए भी जाँच होनी चाहिए, क्योंकि ये आरोप कार्यरत डीजी ने लगाए हैं। इन आरोपों की पुष्टि करने के लिए उन्होंने व्हॉट्सएप चैट या एसएमएस चैट भी लगाई है। जिसमें यह स्पष्ट है कि रेस्ट्रां, बार से पैसा जमा करने को कहा गया है।

देवेंद्र फडणवीस ने अपनी बात को रखते हुए कहा, “हम गृह मंत्री के इस्तीफे की माँग करते हैं। अगर वह खुद अपना पद नहीं छोड़ते हैं तो सीएम को उन्हें हटा देना चाहिए। मामले की निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए।”

उन्होंने कहा कि या तो केंद्रीय एजेंसियाँ इसकी जाँच करें और यदि राज्य सरकार को लगता है कि उन्हें ये जाँच केंद्रीय एजेंसियों से नहीं करवाना है, तो भी कोर्ट मॉनिटर इंक्वायरी होनी चाहिए। पूर्व सीएम के अनुसार, मामले में जाँच तभी सफल हो पाएगी जब सर्विंग गृहमंत्री अपने पद से दूर होंगे और मामले में उच्च स्तरीय जाँच होगी।

फडणवीस ने कहा, “मैंने महाराष्ट्र के इतिहास में ये कभी नहीं देखा कि डीजी रैंक का व्यक्ति, सीधे मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर, इतने सबूतों के साथ ये सारी बातें कहे।” उन्होंने ये भी पूछा कि जब पूर्व पुलिस कमिश्नर ने कहा हुआ है कि सीएम को इस विषय पर बताया गया था तो आखिर उन्होंने इस पर जाँच क्यों नहीं की। क्या सिर्फ़ अपनी सरकार को बचाने के लिए मुख्यमंत्री ने उसे नजरअंदाज किया?

बता दें कि मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह ने महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख पर बड़ा आरोप लगाते हुए राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को चिट्ठी लिखी है। इसमें उन्होंने गृह मंत्री अनिल देशमुख पर आरोप लगाया है कि उन्होंने निलंबित पुलिस अधिकारी सचिन वाज़े को हर महीने 100 करोड़ रुपए इकट्ठा कर उन्हें देने के आदेश दिए थे।

हालाँकि, अनिल देशमुख ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए परमबीर सिंह पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि परमबीर सिंह ने खुद को बचाने के साथ-साथ आगे की कानूनी कार्रवाई से खुद को बचाने के लिए यह झूठा आरोप लगाया है। गृहमंत्री का कहना है कि मुकेश अंबानी मामले के साथ-साथ मनसुख हिरेन हत्याकांड में भी सचिन वाजे की संलिप्तता स्पष्ट हो रही है और आगे ये जाँच तत्कालीन पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह तक पहुँचने की संभावना है।

मुंबई में बढ़ रहे कुत्तों से रेप के मामले, चंद महीने में आए 4 केस: तौफीक, अहमद शाह सहित कई अज्ञात आरोपितों पर FIR

ऐसे दौर में जब हर जगह महिलाएँ यौन अत्याचार के खिलाफ खुलकर बोलने लगी हैं, उस समय मुंबई में एक घटिया ट्रेंड देखने को मिला है। पिछले दिनों मुंबई से कुछ ऐसे मामले सामने आए हैं जहाँ जानवरों का बेरहमी से यौन उत्पीड़न किया गया। सिरफिरों ने न तो गायों को छोड़ा और न ही कुत्ते और भेड़-बकरियों को।

बीते चंद महीनों की बात करें तो मुंबई से ऐसे 4 मामले सामने आ चुके हैं। जहाँ सड़कों पर जानवरों (खासकर कुत्तों-कुतियों) को हवस का शिकार बनाया गया।

20 साल के तौफीक ने कुतिया का किया रेप

अभी कल की एक घटना है जब मुंबई के सांताक्रुज के कलीना में 20-25 वर्ष का तौफीक अहमद एक कुतिया का रेप करते सीसीटीवी में पकड़ा गया। मामला संज्ञान में आते ही पुलिस ने उसके विरुद्ध केस दर्ज कर लिया।

पशु अधिकार संस्था ‘एनिमल रेस्क्यू एंड केयर ट्रस्ट (ARAC)’ के अध्यक्ष सविता महाजन ने ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ को बताया कि आरोपित तौफीक अहमद के खिलाफ उन्होंने वकोला थाने में FIR दर्ज कराई है। इस आपराधिक वारदात की CCTV फुटेज सहित संस्था ने सभी इलेक्ट्रॉनिक सबूत भी पुलिस को उपलब्ध कराए हैं।

उन्होंने बताया कि जहाँ ये घटना हुई, वहाँ प्राइवेट कार को पार्क किया जाता है। चूँकि वहाँ एक समय में कई कार होते हैं, इसीलिए गाड़ियों के पार्ट-पुर्जे की चोरी रोकने के लिए CCTV सर्विलांस कैमरे लगाए गए। उन्हीं कैमरों में तौफीक को चीनो नामक कुतिया का रेप करते हुए पाया गया। वह एक हॉकर है जो उस इलाके में ब्रेड बेचता है।

थाने में FIR दर्ज होने के बाद पुलिस उसके स्थानीय पते पर उसे पकड़ने के लिए गई, लेकिन वहाँ पता चला कि वो अपने पैतृक घर के लिए निकल चुका है जो उत्तर प्रदेश में स्थित है। IPC की धारा-377 (अप्राकृतिक सेक्स) के तहत FIR दर्ज हुई है। 

जुहू इलाके में अहमद शाह ने 30 से ज्यादा कुत्तों का किया रेप 

तौफीक की तरह ही कुछ दिन पहले मुंबई पुलिस ने 68 वर्षीय एक व्यक्ति को कुतिया के साथ बलात्कार के आरोप में गिरफ्तार किया था। आरोपित की पहचान अहमद शाह के तौर पर हुई । वह एक सब्जी विक्रेता है, जो जुहू गली में ही रहता है। उसे एक एनजीओ वॉलिंटियर ने कुत्ते का रेप करते देखा था। इसके बाद थाने में शिकायत दर्ज कराई गई।

पड़ताल में पता चला कि अहमद ने करीब 30 कुत्तों का रेप किया है। वह इस काम को देर रात 3 से 4 बजे के बीच अंजाम देता। पहले वह उन्हें जानवरों का मीट खिलाता फिर जब वह उसे खाने लगते तो वही रुककर वह उनका रेप करता।

शर्मनाक बात तो यह है कि आरोपित अहमद को अपने किए का कोई पछतावा नहीं है। उसने बेशर्मी से अपने अपराध को स्वीकारते हुए कहा कि वह जानवरों को खाना देता है और जानवरों ने कभी उसे ऐसा करने से मना नहीं किया। ये सब अपराध नहीं है।

शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में 8 साल की कुतिया का हुआ बलात्कार

साल 2020 के अक्टूबर माह में मुबंई के पवई में गैलेरिया शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के अंदर नूरी नाम की एक कुतिया का रेप हुआ था, जिसके बाद उसकी हालत बिगड़ गई। बाद में उसे एनिमल केयर सेंटर ले जाया गया, जहाँ डॉक्टर्स ने बताया कि उसके प्राइवेट पार्ट्स से 11 इंच की लकड़ी की छड़ी मिली थी, जिसे ईलाज के दौरान निकाल दिया गया।

बॉम्बे एनिमल राइट्स (BAR) के कार्यकर्ता विजय किशोर मोहनानी ने इस पर कहा था, “22 अक्टूबर को स्थानीयों ने हमें सूचित किया कि नूरी को गैलेरिया में गंभीर रूप से घायल पाया गया। हमें संदेह है कि कुछ सरफिरे जो या तो गैलेरिया के अंदर काम करते हैं या पास में रहते हैं, उन्होंने एक दोस्ताना कुत्ते के साथ ऐसी क्रूरता को अंजाम दिया।” इस केस में बता दें कि अज्ञात लोगों के विरुद्ध मामला दर्ज हुआ था। सोशल मीडिया पर कई जगह नूरी की वीडियो वायरल हुई थी।

दिहाड़ी मजदूर ने किया कुतिया का रेप

नूरी के बाद नेरुल रेलवे स्टेशन के बाहर एक कुतिया के रेप की वारदात सामने आई थी। आरोपित की पहचान महेंद्र डी पवार के तौर पर हुई थी। स्टेशन कॉम्प्लेक्स की सीसीटीवी फुटेज में पूरा वाकया कैद था, जिसे देखने के बाद फौरन एनिमल राइट्स ग्रुप के पास भेज दिया गया था।

PFA एक्टिविस्ट विजय रंगरेर ने इस पर बताया था, “लगभग एक हफ्ते पहले (घटना के समय), नेरुल स्टेशन कॉम्प्लेक्स के पश्चिम की ओर एक मादा कुत्ते का यौन शोषण करते हुए एक देर रात के सीसीटीवी फुटेज हमारे पीएफए ​​मुंबई यूनिट -2 को भेजे गए थे।” इसके बाद वह और उनके सहयोगी आदित्य पाटिल घटनास्थल पर पहुँचे और अपराध के बारे में पूछताछ करने लगे। जल्द ही, उन्होंने आरोपित महेंद्र डी पवार का पता लगा लिया।

पड़ताल में पता चला कि आरोपित दिहाड़ी मजदूर था जो नेरुल स्टेशन पर ही सोता था। घटना वाले दिन उसने शराब पी हुई थी और एक कुतिया का रेप कर रहा था। उन्होंने बताया कि कुछ समय तक महेंद्र उनकी पकड़ से बाहर था। लेकिन बाद में स्थानीयों की मदद से उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

गृहमंत्री अनिल देशमुख ने दिया था सचिन वाजे को ₹100 करोड़/महीने वसूली का लक्ष्य: परमबीर सिंह ने CM उद्धव को लिखा पत्र

मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह ने महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख पर बड़ा आरोप लगाते हुए राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को चिट्ठी लिखी है। इसमें उन्होंने गृह मंत्री अनिल देशमुख पर आरोप लगाया है कि उन्होंने निलंबित पुलिस अधिकारी सचिन वाज़े को हर महीने 100 करोड़ रुपए इकट्ठा कर उन्हें देने के आदेश दिए थे।

बता दें कि परमबीर सिंह को हाल ही में मुंबई के पुलिस कमिश्नर पद से हटाया गया था। इसके बाद आज (शनिवार) को उन्होंने सीएम उद्धव ठाकरे को एक चिट्ठी लिखी। इसमें उन्होंने अनिल देशमुख पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच के क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट के हेड सचिन वाजे को महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने पिछले कुछ महीनों में कई बार अपने सरकारी आवास ज्ञानेश्वर पर बुलाया था।

परमबीर सिंह ने चिट्ठी में ये भी कहा कि सचिन वाजे ने उन्हें बताया था कि अनिल देशमुख ने उससे हर महीने जेल से, रेस्ट्रां, होटल, बार आदि जगहों से 100 करोड़ रुपए इकट्ठा करने को कहा था। उनके मुताबिक गृहमंत्री ने वाजे को बताया था कि मुंबई में लगभग 1750 बार, रेस्ट्रां और अन्य जगह हैं। यदि प्रत्येक से 2-3 लाख रुपए एकत्रित किए जाएँ तो हर महीने 40-50 करोड़ मिल जाएँगे। बाकी का कलेक्शन अन्य माध्यमों से किए जा सकते है।

मालूम हो कि इस पत्र को लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इसमें कोई हस्ताक्षर भी नहीं दिख रहे। हालाँकि, इसमें बताया गया है कि फरवरी के मध्य और उसके बाद गृह मंत्री ने वाजे को अपने सरकारी आवास पर बुलाया था। तब गृह मंत्री के एक-दो कर्मचारी और उनके निजी सचिव भी वहाँ मौजूद थे। वहीं उन्हें पैसा इकट्ठा करने के आदेश दिए गए थे।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अनिल देशमुख ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए परमबीर सिंह पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि परमबीर सिंह ने खुद को बचाने के साथ-साथ आगे की कानूनी कार्रवाई से खुद को बचाने के लिए यह झूठा आरोप लगाया है

गृहमंत्री का कहना है कि मुकेश अंबानी मामले के साथ-साथ मनसुख हिरेन हत्याकांड में भी सचिन वाजे की संलिप्तता स्पष्ट हो रही है और आगे ये जाँच तत्कालीन पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह तक पहुँचने की संभावना है।

उल्लेखनीय है कि इस मामले के सामने आते ही भाजपा ने राज्य के गृहमंत्री अनील देशमुख से इस्तीफे की माँग भी कर दी है। भाजपा नेता किरीट सोमैया ने कहा, “पूर्व मुंबई पुलिस आयुक्त का कहना है कि असल में जबरन वसूली करने वाला और कोई नहीं बल्कि महाराष्ट्र का गृह मंत्री अनिल देशमुख है, सचिन वाजे से कई बार मिलता था। देशमुख पब आदि से पैसा निकाल रहे थे। भाजपा की माँग है कि अनिल देशमुख को बर्खास्त किया जाना चाहिए।”

सचिन वाजे मनसुख हिरेन के पोस्टमार्टम के समय मौजूद था अस्पताल के बाहर: वीडियो फुटेज से हुआ बड़ा खुलासा

मुंबई के एंटीलिया केस में काली स्कॉर्पियो के मालिक मनसुख हिरेन की मौत के मामले में निलंबित पुलिस अधिकारी सचिन वाजे से जुड़ा एक नया खुलासा हुआ है। रिपब्लिक टीवी के अनुसार, उन्हें एक वीडियो मिली है जिससे पता चला है कि जिस दिन हिरेन का शव ठाणे के अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए ले जाया गया उस दिन वाजे अस्पातल के बाहर ही था।

समाचार चैनल द्वारा जारी की गई वीडियो फुटेज में देख सकते हैं कि 5 मार्च 2021 को वाजे अस्पताल के बाहर खड़े होकर कुछ अधिकारियों से बात कर रहा था। रिपोर्ट्स के अनुसार, ये वीडियो इसलिए भी अहम है क्योंकि 3 मार्च को सचिन वाजे ने एंटीलिया बम केस को अपने हाथ में लिया और जब हिरेन की मौत का मामला 5 मार्च को उजागर हुआ तब वह रात में अस्पताल में भी पहुँच गया। ऐसे में सवाल उठता है कि वह आखिर अस्पताल में कर क्या रहे थे।

बता दें कि मनसुख हिरेन की मौत की जाँच अब नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) कर रही है। फिलहाल वाजे 25 मार्च तक उन्हीं की हिरासत में है। शुक्रवार की रात एनआईए, एक फॉरेंसिक टीम के साथ मिल कर वाजे को क्राइम सीन पर लेकर गई थी। पुलिस के पास वीडियोज हैं जिसमें वाजे को घटनास्थल के पास जाते देखा जा सकता है।

इससे पहले चूँकि सचिन वाजे के ही एक स्टाफ ने इस बात की पुष्टि की थी कि घटनास्थल पर कि पीपीई किट में नजर आने वाला शख्स कोई और नहीं बल्कि खुद सचिन वाजे ही है। इसलिए NIA ने इन्हीं बिंदुओं पर वाजे को क्राइम सीन पर ले जाकर उसे ओवर साइज कुर्ता पहनवाया, मुँह पर मास्क और सिर पर रुमाल बाँधा ताकि पूरा सीन रीक्रिएट हो सके।

पिछले हफ्ते NIA ने सचिन लाजे के लैपटॉप, कुछ मोबाइल फोन, आईपैड और दस्तावेज कब्जे में लिए थे। गुरुवार को वाजे के घर और कार्यालय से कई कारें बरामद हुईं थीं, जिसके बाद वाजे पर दोबारा शक गहरा गया। NIA ने इसी केस में एक मर्सिडीज कार भी बरामद की थी। कार से 5 लाख रुपए की नकद राशि, कुछ कपड़े और एक कैश काउंटिंग मशीन बरामद हुई थी। इसी मर्सिडीज से वो नंबर प्लेट भी मिली, जो एंटीलिया के बाहर खड़ी स्कॉर्पियों पर थी।

‘मोदी आया तो आतंकी बनेंगे, बंगाल बनेगा अफगानिस्तान और हम तालिबान’: जुमे की नमाज के बाद लगे भारत विरोधी नारे

बांग्लादेश की स्वतंत्रता की 50वीं वर्षगाँठ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 26 मार्च 2021 को देश की राजधानी ढाका जाने वाले हैं। ऐसे में खबर है कि शुक्रवार (मार्च 19, 2021) को वहाँ के मुस्लिम और कुछ छात्र कार्यकर्ताओं ने उनके इस दौरे के विरोध में प्रदर्शन करते हुए मार्च निकाला है।

जुमा की नमाज के बाद 500 मुस्लिमों ने बैतुल मोकर्रम मस्जिद के बाहर मार्च किया। वीडियो में देख सकते हैं कि बड़ी तादाद में इस्लामी टोपी पहने और बड़ी-बड़ी दाढ़ी रखे लोग सड़कों पर भारत और भारत के प्रधानमंत्री के विरुद्ध नारेबाजी कर रहे हैं। इन सभी के हाथ में चप्पल है और ये माँग कर रहे हैं कि प्रधानमत्री मोदी के ढाका दौरे को निरस्त किया जाए।

दूसरे प्रोटेस्ट में छात्र कार्यकर्ताओं ने ढाका यूनिवर्सिटी के कैंपस के बाहर मार्च किया। प्रदर्शनकारियों के बैनर पर लिखा था, “गो बैक मोदी” “गो बैक इंडिया” “गो बैक किलर मोदी।”

प्रदर्शनकारियों ने मार्च के दौरान इल्जाम लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी हिंदू नेशनलिस्ट पार्टी भारत में मुस्लिमों को दबा रही है। उन्होंने ये भी इल्जाम लगाए कि आए दिन भारतीय सीमा पर बांग्लादेशी मारे जा रहे हैं। हालाँकि, सच्चाई ये है कि भारतीय सीमा पर गोली सिर्फ़ उन पर चलती है जो या तो तस्करी करते पकड़े जाते हैं या फिर घुसपैठ करते हुए।

हम तालिबानी बन जाएँगे- बांग्लादेशी प्रदर्शनकारी

प्रदर्शनकारियों में से एक मोहम्मद अनवर ने कहा कि भारत की अधीनस्थ हसीना सरकार ने मोदी को आमंत्रित किया है, हम इसका विरोध करने के लिए यहाँ हैं। वहीं बांग्लादेशी हिंदू कार्यकर्ता राजू दास द्वारा शेयर एक अन्य वीडियो में एक मुस्लिम व्यक्ति को कहते सुना सकता है, “अगर नरेंद्र मोदी को बांग्लादेश आने को कहा गया तो हम आतंकी बन जाएँगे। बंगाल बनेगा अफगानिस्तान और हम बनेंगे तालिबान।”

प्रदर्शनकारी कहता है, “हम ओसामा बिन लादेन की हुंकार के साथ उठेंगे। हम किसी भी बाधा को पार कर लेंगे। हम रसूल के फौजी हैं, बम और बुलेट्स से नहीं डरते। बस याद रहे अल्लाह तुम्हारे साथ है। हम ये बर्दाश्त नहीं करेंगे। इस्लाम, कुरान और देश की खातिर हम साथ में लड़ेंगे।” बता दें कि पूरे प्रदर्शन में ये प्रदर्शनकारी पीएम मोदी को आतंकी बताते हुए सुनाई दिए और तिरंगे पर क्रॉस का निशान लगाए दिखे।

भारत के ख़िलाफ़ पहले भी इस्लामी संगठनों ने किया था विरोध

ऐसा ही नजारा पिछले साल फरवरी में भी बांग्लादेश में देखने को मिला था। ढाका की प्रमुख मस्जिद के बाहर दिल्ली में हुए दंगों के लिए भारत सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन हुआ था। सैंकड़ों की संख्या में मुस्लिम बैतुल मोकर्रम मस्जिद के बाहर इकट्ठा हुए थे और उन्होंने रैली में शामिल होकर जोर-जोर से पीएम मोदी के विरुद्ध नारेबाजी की थी।

प्रदर्शनकारियों की माँग थी कि हसीना सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शेख मुजीबुर रहमान की 100वें जन्मदिवस पर न बुलाए। उनका मत था कि ये आमंत्रण 1971 में हुए युद्ध का अपमान है। उस समय मार्च का आयोजन 6 मुस्लिम राजनीतिक समूहों ने किया था। स्थिति ऐसी थी कि भारी तादाद में पुलिस को मौके पर मौजूद रहना पड़ा था।

भारत में रहकर बांग्लादेशी छात्रा कर रही थी भारत विरोधी काम

पिछले साल ही केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक बांग्लादेशी छात्रा को भारत छोड़ने का फरमान सुनाया था। छात्रा पर देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप था। अफसरा अनिका मीम नाम की यह छात्रा पश्चिम बंगाल की विश्वभारती विश्वविद्यालय में पढ़ रही थी। छात्रा को कोलकाता में फॉरन रिजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस की तरफ से नोटिस थमाया गया था। उसे 29 फरवरी 2020 तक भारत छोड़ने को कहा गया था।

दरअसल, मीम ने 8 फरवरी को CAA के खिलाफ पश्चिम बंगाल में आयोजित प्रदर्शन में हिस्सा लिया था। यह प्रदर्शन बीरभूम जिले में हुआ था और लेफ्ट विंग के छात्रों की तरफ से आयोजित किया गया था। अनिका बांग्लादेश की कुश्तिया जिले की रहनेवाली थी। उसने सीएए विरोधी प्रदर्शनों की तस्वीरें फेसबुक पर पोस्ट की थीं। उसने 2018 में विश्वभारती यूनिवर्सिटी के डिजाइनिंग कोर्स में दाखिला लिया था। 

उस पर आरोप था कि साल 2019 में भारत सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून को संसद से पास किया था, उसके बाद से वह उसका विरोध कर रही थी। छात्रा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से सीएए विरोधी प्रदर्शन की तस्वीरें शेयर की थी। बाद में वह पोस्ट काफी वायरल हुआ था और उसकी काफी आलोचना भी हुई थी। इसके बाद छात्रा को फॉरन रिजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस की तरफ से 14 फरवरी को नोटिस थमा दिया गया। उसे 15 दिन का समय दिया गया था।