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एंटीलिया केस: NIA को पुलिस मुख्यालय में साजिश रचे जाने का शक, मनसुख मामले में ATS को ‘तावड़े’ की तलाश

उद्योगपति मुकेश अंबानी के मुंबई स्थित घर एंटीलिया के बाहर 20 जिलेटिन छड़ें रखी हुई स्कॉर्पियो कार बरामद हुई थी। इस गाड़ी के मालिक मनसुख हिरेन की कुछ ही दिनों बाद संदिग्ध अवस्था में लाश मिली। इस पूरे मामले की साजिश रचने के आरोप में सचिन वाजे को NIA ने गिरफ्तार किया। उन्हें सस्पेंड भी किया गया। स्पेशल NIA कोर्ट ने सचिन वाजे की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने अपने वकील से मिलने देने का अनुरोध किया था।

शुक्रवार (मार्च 19, 2021) को उनके वकील ने कोर्ट में कहा कि अभी जब जाँच महत्वपूर्ण चरण में है, सचिन वाजे के मूलभूत अधिकारों का उल्लंघन न करते हुए उन्हें उनके वकील से मिलने दिया जाए। अनुरोध किया गया कि वो आपने वकील से उस समय मिलेंगे, जब उनसे पूछताछ न हो रही हो। कोर्ट ने कहा कि पूछताछ के दौरान कुछ दूरी पर वकील को उपस्थित करने की अनुमति है। वाजे की बहन अनुराधा ने भी एक याचिका दायर की है, जिसमें कहा गया है कि मीडिया ट्रायल से परिवार को प्रताड़ित किया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक NIA को शक है कि इस पूरे प्रकरण की साजिश पुलिस मुख्यालय और असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर (API) सचिन वाजे के ठाणे स्थित घर पर रची गई थी। मनसुख हिरेन पुलिस मुख्यालय में पहले भी जाते-आते रहे थे। वहाँ से NIA को मिली एक वीडियो रिकॉर्डिंग में मनसुख हिरेन और सचिन वाजे को एक ही कार में जाते हुए देखा गया है। इसके सबूत मिले हैं कि मुकेश अम्बानी के घर के बाहर सचिन वाजे ने ही विस्फोटक लदी कार रखवाई थी।

जाँच में खुलासा हुआ है कि वाजे ही स्कॉर्पियो चला कर ले गए और उसे पार्क करने के बाद निकल कर इनोवा में बैठ कर फरार हुए। NIA ने सचिन वाजे के सिर पर साफा बाँध कर और उन्हें कुर्ता पहना कर पूरे दृश्य को रिक्रिएट किया। मौके पर आम लोगों को रोक कर डमी स्कॉर्पियो लाया गया। CCTV कैमरों को धोखा देने के लिए सचिन वाजे ने PPE किट की तरह दिख रहा कुर्ता-पायजामा पहन रखा था।

मुंबई पुलिस हेडक्वार्टर में स्थित CIU के दफ्तर में भी NIA ने छापेमारी की थी। महाराष्ट्र ATS को शक है कि मनसुख हिरेन की हत्या में सचिन वाजे शामिल हैं और वो पता लगा रही है कि 4-5 मार्च को आखिर हुआ क्या था। वहीं सचिन वाजे ने FIR को आधारहीन बता कर खुद को फँसाने का आरोप लगाते हुए याचिका में कहा था कि उस समय वो दक्षिण मुंबई के डोंगरी में थे। NIA ने 2 मर्सिडीज सहित 5 वाहन जब्त किए हैं।

DCP विजयकांत सागर ने बताया कि 2018 में 25 लाख रुपए के रंगदारी मामले में सचिन वाजे के खिलाफ चार्जशीट तैयार की गई थी। वसई पुलिस थाने के इस मामले में वाजे जमानत लेने में कामयाब रहे थे। पुलिस हिरासत में ख्वाजा यूनुस की मौत के बाद सचिन वाजे ने सबूत मिटाने में अनिल यादव और अमोल पाटिल की मदद की थी। वो यादव से गुजरात में मिले थे, जहाँ एक कार में सबूत मिटाए गए थे।

अब NIA उस पुलिस अधिकारी को खोज रही है, जिसका नाम मनसुख हिरेन की पत्नी विमला ने लिया है। उन्होंने बताया था कि किसी ‘तावड़े’ ने फोन कर उनके पति को बुलाया था। टेक्निकल और ह्यूमन इंटेलिजेंस की 20 टीमें जाँच में लगी हुई है। कंदवाली पुलिस थाने के हर कर्मचारी के डिटेल्स NIA ने लिए हैं। इस मामले की लीड सचिन वाजे से आगे बढ़ ही नहीं रही है क्योंकि ‘तावड़े’ नाम का कोई पुलिस अधिकारी उस थाने में मिला ही नहीं।

उधर सचिन वाजे को ‘बेहद ईमानदार और योग्य अधिकारी’ बता कर क्लीनचिट देने के बाद शिवसेना नेता संजय राउत ने राष्ट्रीय जाँच एजेंसी पर संदेह जताया। उन्होंने कहा कि एनआईए केंद्र सरकार के इशारे पर काम कर रही है। शिवसेना नेता ने कहा कि जाँच एजेंसियों को ‘कुछ जिलेटिन की छड़ों’ के बजाय खतरनाक आतंकी गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। राउत ने कहा कि वह सचिन वाजे के लिए जवाब नहीं दे सकते, लेकिन केवल जाँच एजेंसियाँ ​​ही ऐसा कर सकती है।

‘तब मस्जिद में हिंदू को काटा, 2020 में गणेश प्रतिमा पर पेशाब, 21 में AIMIM की शह पर दंगा’: भैंसा पर पत्रकार का बड़ा खुलासा

दंगों की वजह से तेलंगाना का भैंसा कई दिनों से ख़बरों में है। इस महीने की शुरुआत में हुई हिंसा में 10 लोग घायल हुए, जिसमें कुछ पत्रकार भी शामिल थे। साथ ही कुछ घरों और गाड़ियों को भी फूँक दिया गया था। यहाँ सांप्रदायिक हिंसा नई बात नहीं है। जनवरी 2020 में इसी तरह के दंगे हुए थे। इन दंगों को कवर करने वाले मिस्टर सिद्धू नामक पत्रकार ने इसके पीछे असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM का हाथ बताया है

हाल ही में ‘गोवा क्रॉनिकल’ ने सिद्धू से संपर्क कर इस पूरे प्रकरण के बारे में जाना। उन्होंने जनवरी 2020 से लेकर मार्च 2021 तक की घटनाओं को लेकर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जनवरी 2020 में हुआ दंगा रातोंरात हिंसक हो गया था और महाराष्ट्र-तेलंगाना सीमा पर स्थित कोरभा गली सबसे ज्यादा प्रभावित हुई थी। उस समय मुस्लिमों ने ‘इज्तिमा’ का आयोजन किया था। उसमें शामिल हुए करीब 50,000 लोगों ने ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के साथ-साथ CAA और NRC विरोधी नारे लगाए थे।

सिद्धू ने बताया कि 12 जनवरी 2020 को रात 8 बजे एक हिन्दू व्यक्ति ने बाहर मच रहे शोर से तंग आकर मुस्लिम समाज से कहा कि वो तेज़ आवाज़ में कार्यक्रम कर लोगों को परेशान न करें। धीरे-धीरे बहस होने लगी और एक मुस्लिम व्यक्ति ने हिन्दू लड़के को थप्पड़ जड़ दिया। उसने भी बदले में एक थप्पड़ रसीद कर डाला। फिर आसपास के इलाकों से मुस्लिम वहाँ जुट गए। 1 घंटे के भीतर हिन्दुओं के घरों पर पेट्रोल बम फेंके जाने लगे।

सिद्धू ने बताया कि मुस्लिमों ने लगातार पाकिस्तान समर्थक नारे लगाते हुए हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान किया और यहाँ तक कि भगवान गणेश की प्रतिमा पर पेशाब भी कर डाला। मकर संक्रांति पर हिन्दू महिलाओं द्वारा बनाए गए प्रसाद व भोजन की वस्तुओं में पेशाब कर दिया गया। हिन्दू महिलाओं के साथ बदतमीजी हुई और उनके गहने छीन लिए गए। वे बच्चों को भी मारना चाहते थे। मिस्टर सिद्धू का कहना है कि तेलंगाना के गठन के बाद हुए इस पहले हिन्दू-मुस्लिम दंगे के बारे में KCR सरकार नहीं चाहती थी कि किसी को पता चले।

किसी भी पत्रकार को वहाँ नहीं जाने दिया जा रहा था और मीडिया को कवरेज से मना कर दिया गया था। सिद्धू ने बताया कि उन्होंने वहाँ जाकर कई वीडियो अपलोड किए, जिनसे पता चल रहा था कि हिन्दुओं के पास रहने को घर नहीं थे और उनके साधन जला दिए गए थे। उन्होंने बताया कि उन्हें मुख्यमंत्री KCR के आईटी सेल ने धमकियाँ दी और वीडियोज डिलीट करने को कहा। उन पर FIR दर्ज किए गए।

स्थानीय RSS यूनिट ने हिन्दुओं को उनका घर फिर से बनाने में मदद की। सिद्धू ने इस साल हुए दंगों की बात करते हुए कहा कि अभी भी ‘इज्तिमा’ चल रहा था। जुल्फिकार और भट्टी गलियों में दंगों का सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ा और इस बार भी मीडिया को कवरेज से मना किया गया। उन्होंने बताया कि AIMIM के काउंसलर जाबिर अहमद के खिलाफ 19 मामले दर्ज हैं, लेकिन पुलिस ने उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।

उसे ओवैसी भाइयों का करीबी भी माना जाता है। उन्होंने बताया कि NIA की एक टीम ने भैंसा आकर कुछ आतंकियों को गिरफ्तार किया था और उन्हें भी AIMIM के नेताओं और स्थानीय लोगों ने शरण दी हुई थी। सिद्धू का कहना है कि यहाँ के मस्जिदों में अक्सर असामाजिक तत्वों को पनाह मिलती है। मस्जिद के पास से गुजरने वाले हिन्दू जुलूसों पर पत्थरबाजी होती है। उन्होंने दावा किया कि 2008 में एक हिन्दू को मस्जिद में ले जाकर टुकड़े-टुकड़े काट डाला गया था, जिससे दंगे भड़के थे। सिद्धू ने बताया:

“हिन्दू उस इलाके में डर के साए में जीते हैं और उनकी जीवनशैली काफी कठिन हो गई है क्योंकि मौत का भय बना रहता है। भैंसा दूसरा कश्मीर बन रहा है। मुस्लिम जनसंख्या लगातार बढ़ती जा रही है। हिन्दुओं के लिए आवाज़ उठाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की जाती है। पत्रकारों पर तलवार से हमले हुए। एक पत्रकार जीवन और मौत से जूझ रहा है लेकिन TRS के डर से कोई आवाज़ नहीं उठाता। मीडिया का एक बड़ा वर्ग राज्य की सत्ताधारी पार्टी के इशारों पर नाच रहा है।”

उन्होंने बताया कि मुस्लिमों के प्रभाव वाले संवेदनशील क्षेत्र भैंसा में टीआरएस और AIMIM का मुस्लिम गुंडों को समर्थन मिलता है। उन्होंने कहा कि यहाँ हिन्दुओं को पलायन के लिए मजबूर करने का लक्ष्य लेकर चला जा रहा है और पुलिसकर्मियों पर भी राजनीतिक दबाव है। बकौल सिद्धू, स्थानीय स्तर पर मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण और प्रभाव के हिसाब से डेमोग्राफी कुछ ऐसी बनाई गई है कि AIMIM की ही जीत हो।

उन्होंने ‘हिन्दू वाहिनी’ के बारे में बात करते हुए कहा कि हिन्दुओं की सुरक्षा के लिए और इस्लामी जिहादियों से लड़ने के लिए यही संगठन आगे आता है। साथ ही आरोप लगाया कि सरकार के इशारे पर ‘हिन्दू वाहिनी’ के युवाओं को जहाँ गिरफ्तार किया जाता है, वहीं मुस्लिम आरोपित खुला घूमते हैं। पुलिसकर्मियों ने हिन्दू कार्यकर्ताओं को धमकाया भी है। हिन्दुओं पर झूठे केस चला कर उन्हें फँसाने के आरोप भी लगे हैं।

हाल ही में वहाँ एक नाबालिग बच्ची के यौन शोषण का मामला भी सामने आया था। पीड़ित बच्ची और आरोपित अलग-अलग समुदाय से थे और लड़की की उम्र मात्र 4 वर्ष है। आरोप लगा था कि इसके बाद पुलिस ने पीड़ित परिजनों से बिना कोई हो-हल्ला मचाए अपने गाँव वापस लौट जाने को कहा। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बंदी संजय कुमार ने दावा किया था कि पुलिस ने पीड़ित परिजनों पर इस हैवानियत के बारे में किसी को कुछ न बताने का दबाव बनाया। 

झारखंड में 181 आदिवासियों ने की घर वापसी, कहा- लोभ और बहकावे में हमारे पूर्वज बन गए थे ईसाई

झारखंड में मिशनरियों द्वारा आदिवासियों और दलितों को फुसला कर उनका धर्मांतरण कराने की घटनाएँ सामने आती रही हैं। इसी बीच 181 आदिवासियों के वापस ईसाई से हिन्दू बनने की खबर आई है। गढ़वा जिले के विश्रामपुर गोरैयाबखार गाँव के 18 परिवार के 104, खूँटी टोला करचाली गाँव के 7 परिवार के 42 और महंगई गाँव के 8 परिवार के 35 सदस्यों ने घर वापसी की है।

इसके लिए पूरे हिन्दू विधि-विधान से कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन धर्म जागरण और जनजातीय सुरक्षा मंच ने सरईडीह गाँव में किया था। जनजातीय सम्मलेन के दौरान ही इन सभी ने घर वापसी की। ईसाई से हिन्दू धर्म में वापस लौटने वालों का जनजातीय परंपरा के अनुसार पाँव पखार कर स्वागत किया गया। सभी को चंदन-टीका लगाया गया। प्रकृति की पूजा के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। महिलाओं ने गीत भी गए। ‘बैगा पाहणों’ ने विधिवत पूजा-अर्चना की।

महिला कार्यकर्ताओं ने हिन्दू धर्म में वापस लौटने वाली महिलाओं को सिंदूर लगा कर उनका स्वागत किया। ग्रामीणों ने बताया कि लोभ-लालच और बहकावे में आकर उनके पूर्वजों ने धर्मांतरण कर लिया था। कार्यक्रम में वनवासी कल्याण आश्रम के अखिल भारतीय उपायक्ष सत्येन्द्र, जनजातीय सुरक्षा मंच के प्रांत संयोजक संदीप उराँव, सह प्रांत संगठन मंत्री देवनंदन, सरना समिति रांची के अयक्ष मेघा उराँव, धर्म जागरण प्रमुख शिवमूर्ति समेत कई लोग मौजूद थे।

मेघा उराँव ने कहा कि इस इलाके में ईसाई प्रचारकों ने कई गाँवों में भोले-भाले आदिवासियों का धर्म परिवर्तन कराया है। हिन्दू धर्म व सरना समुदाय में वापस लौटने वाले लोग लगातार उनके संगठनों से संपर्क में थे। कार्यक्रम में उन्होंने मन की बातें कही और साथ ही ख़ुशी जाहिर की। इस दौरान उन्होंने वापस अपने समुदाय व धर्म में वापसी पर ख़ुशी जताई और बताया कि कैसे उनके पूर्वजों को ईसाई बनाया गया था।

पिछले महीने ही झारखंड के चतरा में एक किशोर ने कुएँ में कूद कर आत्महत्या कर ली थी, क्योंकि वो अपनी माँ के ईसाई धर्मांतरण से दुःखी था। उक्त घटना जोरी वशिष्ठ नगर थाना क्षेत्र स्थित कटैया पंचायत के पन्नाटांड रविदास टोला में हुई, जहाँ कमलेश दास के 14 वर्षीय पुत्र सूरज कुमार दास ने कुएँ में कूद कर आत्महत्या कर ली थी। झारखंड में आदिवासियों के बीच ईसाई मिशनरी खासे सक्रिय बताए जाते हैं।

मुस्लिम छात्र ने कहा- मेरे अब्बा तुम्हारा सिर कलम कर देंगे, माफी माँगने के बावजूद फ्रांस में शिक्षक सस्पेंड: रिपोर्ट

फ्रांस में पिछले कुछ महीनों से शिक्षकों में भय का माहौल है। पैगम्बर मुहम्मद का कार्टून दिखाने के आरोप में शिक्षक सैमुअल पैटी की हत्या के बाद से भले देश में इस्लामी कट्टरपंथ के खिलाफ कई सख्त फैसले लिए गए हों, लेकिन छात्रों के बीच फिर भी इस्लामी कट्टरपंथ पाँव पसार रहा है। ताजा मामला फ्रांस के एक और स्कूल का है, जहाँ छात्र ने शिक्षक को धमकाया कि उसका अब्बा शिक्षक का सिर कलम कर देगा।

उक्त शिक्षक ने सैमुअल पैटी की हत्या के 1 दिन बाद ‘सिविक एंड मोरल एजुकेशन (EMC)’ की कक्षा के दौरान पैटी का बचाव किया था। इसके बाद एक मुस्लिम छात्र खड़ा हो गया और उसने कहा, “मेरे अब्बा तुम्हारा सिर कलम कर देंगे।” इसके कुछ दिनों बाद शिक्षक को प्रधानाध्यापक के दफ्तर में बुलाया गया। शिक्षक को डाँट लगाई और साथ ही पूरी कक्षा के सामने माफी माँगने को भी कहा गया।

इसके बाद भी शिक्षक को स्कूल से सस्पेंड कर दिया गया। शिक्षक ने बताया कि एक पर्सियन स्कूल में इसी तरह एक छात्र नाराज हो गया था कि किसी शिक्षक ने रमजान का सम्मान नहीं किया है। एक कक्षा के दौरान जब उन्होंने एडम और ईव को बाइबल का किरदार बताया तो एक मुस्लिम छात्र नाराज हो गया, क्योंकि मस्जिदों में उसे ये नहीं बताया गया था। शिक्षक ने बताया कि वो इन कारणों से अब अवसाद में हैं।

याद हो कि फ्रांस में पैगंबर मोहम्मद का कार्टून कक्षा के छात्रों को दिखाने के आरोप में सैमुअल पैटी नाम के शिक्षक की बेरहमी से हत्या का मामला सामने आया था। कुछ ही दिनों पहले खुलासा हुआ है कि ये पूरा हमला एक झूठ पर आधारित था, जिसे बच्ची ने अपने पिता के डर से बोला था। 13 साल की एक फ्रांसीसी लड़की ने इस बात को स्वीकार किया कि उसने अपने अब्बा के गुस्से से बचने के लिए अपने शिक्षक पर तोहमत लगाई थी, जबकि हकीकत यह थी कि वह उस दिन क्लास में ही नहीं थी।

CCTV कैमरे में कुतिया के साथ रेप करता कैद हुआ तौफीक अहमद, घर पहुँची मुंबई पुलिस तो यूपी भागा: FIR दर्ज

मुंबई में कुत्ते के साथ रेप का एक और मामला सामने आया है। इस बार इस तरह की वारदात सांताक्रुज के कलीना से सामने आई है। कुतिया के साथ रेप के आरोपित की पहचान 20-25 वर्ष के तौफीक अहमद के तौर पर हुई है। CCTV सर्विलांस कैमरे में ये घटना कैद हो गई। इस मामले में ‘अप्राकृतिक सेक्स’ के आरोप में FIR दर्ज की गई है। वकोला पुलिस थाने में FIR दर्ज की गई है।

पशु अधिकार संस्था ‘एनिमल रेस्क्यू एंड केयर ट्रस्ट (ARAC)’ के अध्यक्ष सविता महाजन ने ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ को बताया कि आरोपित तौफीक अहमद के खिलाफ उन्होंने वकोला थाने में FIR दर्ज कराई है। इस आपराधिक वारदात की CCTV फुटेज सहित संस्था ने सभी इलेक्ट्रॉनिक सबूत भी पुलिस को उपलब्ध कराए हैं। सविता ने अस्सिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (ACP) सुधीर कुकडलकर को भी धन्यवाद दिया।

उन्होंने कहा कि पुलिस इंस्पेक्टर मिथुन पाटिल ने भी इस मामले की FIR दर्ज कराने में पूरा सहयोग दिया। जहाँ ये घटना हुई, वहाँ प्राइवेट कार को पार्क किया जाता है। चूँकि वहाँ एक समय में कई कार होते हैं, इसीलिए गाड़ियों के पार्ट-पुर्जे की चोरी रोकने के लिए CCTV सर्विलांस कैमरे लगाए गए। उन्हीं कैमरों में तौफीक को चीनो नामक कुतिया का रेप करते हुए पाया गया। वह एक हॉकर है जो उस इलाके में ब्रेड बेचता है।

थाने में FIR दर्ज होने के बाद पुलिस उसके स्थानीय पते पर उसे पकड़ने के लिए गई, लेकिन वहाँ पता चला कि वो अपने पैतृक घर के लिए निकल चुका है जो उत्तर प्रदेश में स्थित है। IPC की धारा-377 (अप्राकृतिक सेक्स) के तहत FIR दर्ज हुई है। सविता महाजन ने पुलिस से निवेदन किया है कि आरोपित को जल्द से जल्द पकड़ा जाए। मुंबई पुलिस इसके लिए यूपी पुलिस से संपर्क कर रही है।

हाल ही में मुंबई से ही अहमद शाह नामक बुजुर्ग को मादा कुत्ते के साथ रेप के आरोप में धरा गया था। पूछताछ के दौरान 68 वर्षीय आरोपित ने खाने का लालच देकर रात के 3-4 बजे के बीच 30-40 कुत्तों के साथ रेप करने की बात कही थी। आरोपित ने कहा था कि वह जानवरों को खाना देता है और उनके साथ रेप करता है, इसमें यदि जानवरों को कोई आपत्ति नहीं है तो यह क्राइम नहीं है।

संतराम को ट्रैक्टर से कुचला, चश्मदीदों को बंदूक-तलवारें लहरा धमकाया: वन माफिया फकीर मोहम्मद के खिलाफ की थी शिकायत

मध्य प्रदेश में एक सरपंच के पति की हत्या से सनसनी मच गई है। विदिशा के लटेरी स्थित मुरवास पंचायत की सरपंच आशा देवी के पति संतराम वाल्मीकि धौलपुरिया (पिता सुंदरलाल) की वन माफिया ने गुरुवार (मार्च 18, 2021) को दोपहर में ट्रैक्टर से कुचल कर हत्या कर दी। इस घटना के बाद सिरोंज के विधायक उमाकांत शर्मा ने पुलिस पर भी कोई मदद न करने का आरोप लगाया है। संतराम सड़क पर तड़प रहे थे, लेकिन किसी ने उनकी मदद नहीं की।

विधायक का आरोप है कि पुलिस मौके पर मृतक को बचाने की बजाए आरोपित को बचाने में लगी हुई थी। विधायक ने वहाँ पहुँच कर आक्रोशित लोगों के साथ मुरवास थाने का घेराव भी किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सोची-समझी साजिश के तहत हत्या की गई है। उन्होंने बताया कि तलवारों और बंदूकों के साथ चश्मदीदों को धमकाया गया। गवाही देने पर लोगों को हत्या की धमकी दी गई।

लटेरी के SDM ने घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए धारा-144 लागू कर दिया है। जब ये घटना हुई, तब संतराम पंचायत भवन से भैरो चौक की तरफ जा रहे थे। दोपहर के दो बजे ब्लेड लगे ट्रैक्टर को चलाते हुए फ़क़ीर मोहम्मद का पुत्र रिजवान उधर से आया। उसके साथ उसके 3 साथी भी थे। उनलोगों ने ट्रैक्टर से बाइक को टक्कर मार दी। वो तब तक ट्रैक्टर को चलाते रहे, जब तक उन्हें लगा कि संतराम ने दम तोड़ दिया है।

घटनास्थल पर ही संतराम की मौत हो गई। विदिशा के उसी गाँव का रहने वाले फ़क़ीर मोहम्मद वन माफिया है, जिस पर सरपंच के पति संतराम की हत्या करवाने का आरोप लगा है। सरपंच ने उसके और उसके पुत्र इरफ़ान के अलावा रिजवान, उमर, फारूक के अलावा हीरो इरफान पुत्र जहूर खान और सईद खान के बेटे शकील के खिलाफ शिकायत की थी। आरोप है कि फ़कीर मोहम्मद ने परिजनों के साथ मिल कर वन विभाग की सैकड़ों बीघा जमीन का अतिक्रमण कर लिया है।

इस बात की शिकायत सितंबर 10, 2020 को डीएम पंकज जैन से की गई थी। इसके बाद DM ने SDM को पत्र लिख जाँच के लिए कहा था। तभी से फ़क़ीर मोहम्मद ने संतराम के साथ रंजिश पाल रखी थी। फ़क़ीर का बेटा उमर वन विकास निगम में चौकीदार है और उसकी वन विभाग में अच्छी-खासी पैठ है। संतराम ने आरोप लगाया कि रेंजर संतोष दुबे और नाकेदार पंकज सहित कुछ लोग फ़क़ीर मोहम्मद को सभी चीजों की जानकारी दे देते थे।

DM ने वन विकास निगम के डिवीजनल मैनेजर आदर्श श्रीवास्तव को जनवरी 28, 2021 को इस मामले में कार्रवाई करने को कहा था। 9 मार्च को डिविजनल मैनेजर ने कार्रवाई हेतु अधिकारियों को पत्र जारी किया। इसके बाद मार्च 16 को जाँच के लिए टीम गठित की गई थी। थाना प्रभारी अनिरुद्ध पांडेय ने आरोपितों को बचाने की बात पर कहा कि थाने से घटनास्थल की दूरी 400 मीटर है, वो सिर्फ उसे पकड़ कर ले गए।

विदिशा के एसपी विनायक शर्मा ने कहा कि इस मामले में एक आरोपित को गिरफ्तार किया गया है। 6 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। स्थानीय लोगों ने इस मामले में न्याय की माँग करते हुए धरना दिया हुआ है। उनका पूछना है कि जिसने वन विभाग की भूमि पर कब्ज़ा किया, उसे ही चौकीदारी क्यों सौंपी गई? सरपंच संघ के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह रघुवंशी ने परिवार को आर्थिक मदद दिलाने और वाल्मीकि महापंचायत के युवा विंग प्रदेश महामंत्री रोहित घेंघट ने परिवार को न्याय दिलाने की माँग की।

क्या आप कलिता माझी और चंदना बाउरी को जानते हैं… बंगाल में इनकी लड़ाई लोकतंत्र की जीत है!

राजनीति और चुनाव की चर्चा शुरू होते ही धनबल और बाहुबल की बात होने लगती है। एक धारणा यह भी है कि राजनीतिक दल सामान्य लोगों को टिकट नहीं देते हैं। लेकिन, जब आपकी नजर पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में किस्मत आजमा रहीं बीजेपी की उम्मीदवार कलिता माझी और चंदना बाउरी पर पड़ती है तो तमाम धारणाएँ टूट जाती हैं। इससे पता चलता है कि भारत का लोकतंत्र कितना मजबूत है।

कलिता माझी पूर्वी बर्दवान के आशाग्राम (आरक्षित सीट) से तो चंदना बांकुरा की सल्तोरा सीट से मैदान में हैं। महिला होने के साथ-साछ इनका चुनावों में उतरना इसलिए भी खास है, क्योंकि दोनों की पृष्ठभूमि बेहद सामान्य है।

कलिता माझी एक साधारण सी महिला हैं जो घर-घर में काम कर अपने परिवार का पेट पालती हैं। आम भाषा में कहें तो वह एक मेड हैं। भाजपा की ओर से टिकट मिलने के बाद वह चर्चा में आई हैं। वह अपने प्रचार में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती, पर चूँकि रोज-रोज काम निपटाने के बाद प्रचार करने निकलना उनके लिए थोड़ा कठिन था, इसलिए उन्होंने चुनाव तक अपने काम से 1 माह की छुट्टी ली है।

भाजपा उम्मीदवार कलिता माझी (साभार: न्यूजरूमपोस्ट)

कलिता बेहद गरीब परिवार से हैं। उन्होंने प्राइमरी स्कूल की शिक्षा पास करने से पहले ही पढ़ाई छोड़ दी थी। शादी के बाद भी उनकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ। उनके पति प्लंबर का काम करते रहे। सिर्फ़ पति की कमाई से घर नहीं चलता था, इसलिए उन्होंने घर का खर्चा उठाने के लिए घर-घर काम करना शुरू किया। 

साधारण सा जीवन जीने वाली कलिता की अब हर जगह चर्चा है (साभार: एबीपी न्यूज)

उनका बेटा पार्थ माझी आँठवी कक्षा में पढ़ता है। उनके मायके की भी स्थिति बहुत दुरुस्त नहीं है। वह 7 बहनों में से एक हैं। उनका एक भाई है। पिता भी मजदूर थे, जो अब इस दुनिया में नहीं हैं। वह भाजपा की ओर से टिकट मिलने के बाद दम लगाकर सफल होने की कोशिश कर रही है। चुनावों में उनका मुख्य मुद्दा गरीब बच्चों की पढ़ाई का है। उनका मकसद गरीब बच्चों को शिक्षा दिलवाना है। वह कहती हैं, “मुझे मालूम हैं गरीब की दशा। मैं गरीब छात्रों को शिक्षा के अवसर देने का भरपूर प्रयास करूँगी।: 

दिहाड़ी मजदूर की पत्नी चंदना

माझी की तरह एक दूसरा नाम जो बंगाल चुनावों में चर्चा में है- वह चंदना बाउरी का है। 30 साल की चंदना, सल्तोरा विधानसभा क्षेत्र से भाजपा की उम्मीदवार हैं। संपत्ति के नाम पर चंदना के पास सिर्फ तीन बकरियाँ, तीन गाय और एक मिट्टी का घर है। घर में न पानी आता है, न शौचालय है। बैंक में कुल जमा 31 हजार 985 रुपए है।

चंदना के पति दिहाड़ी मजदूर हैं। बहुत मेहनत के बाद भी दिन खत्म होते उनके पास सिर्फ 400 रुपए आते हैं। जब मॉनसून के समय अन्य मजदूर काम पर नहीं आते तो चंदना खुद अपने पति की मदद करती हैं। दोनों के पास मनरेगा कार्ड है।

भगवा साड़ी और कमल के फूल के साथ वोट माँगने निकलीं चंदना (साभार: सोशल मीडिया)

चंदना के सपने ज्यादा बड़े नहीं हैं। लेकिन वह अपने घर में एक शौचालय चाहती हैं। अभी पिछले माह ही उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना की पहली इंस्टालमेंट से 60,000 रुपए में दो कमरे बनवाए हैं। जिले की भाजपा सदस्य होने के बावजूद उनके लिए टिकट पाना बहुत बड़ी बात है। वह भगवा साड़ी में हर सुबह 8 बजे घर से निकलती हैं। साड़ी पर कमल का फूल होता है और साथ में उनका बेटा। वह लोगों को बताती हैं कि कैसे टीएमसी ने लोगों को लूटा।

अपने पति और परिवार के साथ चंदना बाउरी (साभार: न्यूजरूम पोस्ट)

चंदना को टिकट मिलने की जानकारी स्थानीय लोगों से मिली। लोगों ने टीवी पर देख उन्हें जानकारी दी थी। वह कहती हैं, “मैं गरीब परिवार से आती हूँ। भाजपा ने ये दर्शाया है कि आर्थिक स्थिति का मजबूत होना नेता बनने के लिए जरूरी नहीं है।”

वह बताती हैं कि 2011 में सत्ता में आने के बाद उनके पति को तृणमूल कार्यकर्ताओं ने बहुत सताया था तभी वह भाजपा से जुड़े। इसके बाद 2016 में चंदना, उत्तर गंगाजल घाटी मंडल की महिला मोर्चा में सचिव बनीं। उसके बाद बांकुरा जिले में मुख्य सचिव बनीं। चंदना ने दसवीं तक पढ़ाई की हैं।

महाराष्ट्र में ये कैसी सरकार: कोरोना बेकाबू, मिड डे मील में चारा, जिलेटिन-डेटोनेटर्स लेकर घूम रहे बाइक सवार

महाराष्ट्र में नवबंर 2019 में शिवसेना, कॉन्ग्रेस और एनसीपी ने मिलकर उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में महाविकास अघाड़ी की सरकार बनाई थी। उस समय से ही तीनों दलों के मतभेद और उद्धव ठाकरे में प्रशासनिक अनुभव की कमी के कारण राज्य में चीजें सरकार के नियंत्रण से बाहर होने का अंदेशा जताया जाता रहा है। ये सभी आशंकाएँ धीरे-धीरे सही साबित होती दिख रही हैं। एक तरफ राज्य में कोरोना का संक्रमण दिन प्रतिदिन फिर से बेकाबू होता जा रहा, दूसरी तरफ कानून-व्यवस्था की स्थिति भी लगातार बिगड़ रही है।

उद्योगपति मुकेश अंबानी के मुंबई स्थित घर एंटीलिया के बाहर 25 फरवरी 2021 को विस्फोटक लदी कार मिली थी। कार से जिलेटिन की 20 छड़े बरामद हुई थीं। इस मामले में रोजाना हो रहे चौंकाने वाले खुलासों के बीच अमरावती में विस्फोटक की बड़ी खेप मिली है।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक अमरावती जिले के तिवसा पुलिस थाना क्षेत्र से जिलेटिन की 200 छड़ें और 200 डेटोनेटर बरामद किए गए हैं। बताया जा रहा है कि एक बाइक पर सवार दो युवकों को जब पूछताछ के लिए रोका गया तो वे विस्फोटकों से भरा थैला फेंक भाग गए। पुलिस ने जब थैले को खोला तो इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक देख हड़कंप मच गया। इस मामले में एक गिरफ्तारी हुई है और आगे की जाँच चल रही है।

वहीं पुणे म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन के तहत आने वाले एक स्कूल में बच्चों के मिड डे मील में पशु आहार चारा भेजे जाने की घटना सामने आई है। इसकी जानकारी मिलने के बाद फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के अधिकारियों ने मौके पर पहुँच सारा सामान जब्त कर लिया। इस संबंध में पुणे के मेयर का कहना है कि मिड डे मील योजना राज्य सरकार द्वारा संचालित है। निगम की जिम्मेदारी केवल बच्चों के बीच खाना बाँटना है। उन्होंने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए जाँच की माँग की है।

इधर राज्य में कोरोना से हालात फिर बेकाबू हो गए हैं। शुक्रवार (19 मार्च 2021) को संक्रमण के कुल मामले 24 लाख 22 हजार हो गए। पिछले 24 घंटे में राज्य में 25 हजार से ज्यादा मामले सामने आए हैं। 14, 400 ठीक हुए हैं, लेकिन 70 लोगों की मौत भी कोरोना के कारण दर्ज की गई है। राज्य में वर्तमान में सक्रिय मामलों की संख्या 1 लाख 77 हजार 560 है। केवल महाराष्ट्र में ही 53, 208 लोगों की मौत हुई है।

राज्य की स्थिति देख भाजपा लगातार महाराष्ट्र सरकार पर सवाल उठा रही है। भाजपा सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे ने महाराष्ट्र सरकार पर सही से काम नहीं करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, “महाराष्ट्र सरकार सही तरीके से काम नहीं कर रही है। सब कुछ अधिकारियों की इच्छा पर किया जा रहा है। मुंबई में मुकेश अंबानी जैसे व्यक्ति असुरक्षित हैं। कानून-व्यवस्था की खराब हालत और भ्रष्टाचार के कारण, मैंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर सीएम के इस्तीफे और राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की माँग की है।”

केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने भी राज्य के बिगड़ते हालात देखते हुए कहा, “महाराष्ट्र में कानून और व्यवस्था बर्बाद होती जा रही है। सचिन वाजे जैसे एक क्रिमिनल ऑफिसर को राज्य सरकार प्रोटेक्शन दे रही है। मैं महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाने की माँग करता हूँ। मैं भी केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को इस संबंध में पत्र लिखूँगा।”

‘वसीम रिजवी इस्लाम का दुश्मन’: जामा मस्जिद के बाहर जुटे सैकड़ों, कुरान की आयत हटाने की याचिका का विरोध

शिया वक़्फ़ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन वसीम रिज़वी के ख़िलाफ़ आज यानी शुक्रवार को (19 मार्च 2021) दिल्ली के जामा मस्जिद के बाहर सैंकड़ों की तादाद में प्रदर्शनकारियों ने इकट्ठा होकर नारेबाजी की। रिजवी को इस्लाम का दुश्मन करार देते हुए उनकी गिरफ्तारी की माँग की गई।

पिछले दिनों रिज़वी ने सुप्रीम कोर्ट में कुरान की 26 आयत को हटाने के संबंध में याचिका दाखिल की थी। उनका मत है कि इन 26 आयत में से कुछ आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली हैं और उन्हें बाद में शामिल किया गया।

उनके इसी कदम के बाद से मुस्लिम समुदाय गुस्से में है। शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जवाद का कहना है कि रिजवी ने जानबूझकर कुरान का अपमान किया। हम नहीं चाहते कि कुरान कोई हिस्सा हटाया जाए। हम रिजवी के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई चाहते हैं।

वहीं, प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वसीम रिजवी ये सब करके शिया और सुन्नी समुदाय में दरार पैदा करना चाहते हैं। लेकिन आज दोनों समुदाय मिलकर उनके खिलाफ़ विरोध कर रहे हैं।

एक अन्य प्रदर्शनकारी ने रिजवी को लेकर कहा कि ऐसे लोगों का समाज के हर कोने से बहिष्कार हो जाना चाहिए। वह पाक किताब के लिए अपमानजनक बातें करके सिर्फ़ शांति भंग करना चाहते हैं।

बता दें कि जामा मस्जिद के बाहर एक ओर जहाँ सैंकड़ों की भीड़ इकट्ठा है और रिजवी के विरुद्ध कार्रवाई की माँग कर रही है। वहीं वसीम रिजवी ने कहा है कि वह इस मामले में आखिरी साँस तक लड़ाई लड़ेंगे।

सोशल मीडिया पर जामा मस्जिद के बाहर हुए प्रोटेस्ट की वीडियो भी सामने आई हैं। इन वीडियोज में सुन सकते हैं कि ‘अल्लाह हू अकबर’ और ‘नारा ए तकबीर’ के साथ रिजवी के विरुद्ध कार्रवाई की माँग की जा रही है। उनके पोस्टर पर चप्पलें मारी जा रही हैं। कुछ लोग प्लेकार्ड हाथ में लिए हुए हैं जिसमें रिजवी की तस्वीर है और उसमें उनके मुँह पर क्रॉस लगाकर उन्हें इस्लाम का दुश्मन बताया जा रहा है। हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक मुरादाबाद में भी जुमे की नमाज के बाद मुस्लिमों ने प्रदर्शन किया।

‘नॉटी ने राजदीप के नाम के आगे माननीय नहीं लगाया’: शिवसेना MP संजय राउत ने साझा की तस्वीर, नेटिजन्स ने लिए मजे

शिवसेना सांसद संजय राउत ने गुरुवार (मार्च 18, 2021) को ट्विटर पर एक तस्वीर अपलोड की। इससे सोशल मीडिया में एक नई बहस छिड़ गई। तस्वीर राउत के दिल्ली के सफदरजंग लेन स्थित आवास की है। 

इसमें उनके साथ नेशनल कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) के सुप्रीमो शरद पवार, एनसीपी नेता सुनील तटकरे, भाजपा नेता युवराज संभाजी राजे और मीडिया गिरोह के सबसे चहेते राजदीप सरदेसाई दिखाई दे रहे हैं।

संजय राउत ने तस्वीर शेयर करते हुए ट्वीट में लिखा, “आज मेरे दिल्ली स्थित निवास 15 सफदरजंग लेन पर… माननीय शरद पवार, माननीय छत्रपति संभाजीराजे, माननीय श्री सुनील तटकरे और श्री राजदीप सरदेसाई।”

पहले तो इस तस्वीर को लेकर कुछ लोगों के मन में सवाल उठे कि आखिर राजदीप सभी नेताओं के बीच में क्या कर रहे हैं। लेकिन फिर पता चला कि सरदेसाई एंटीलिया बम केस में राउत का इंटरव्यू लेने गए थे, तभी अन्य नेताओं के साथ यह तस्वीर ली गई।

वैसे तस्वीर को लेकर बहस इसलिए शुरू नहीं हुई कि सरदेसाई उसमें क्यों नजर आ रहे हैं, बल्कि लोगों का सवाल तो ये है कि क्या संजय राउत, सरदेसाई को ‘माननीय’ नहीं मानते।

दरअसल, राउत के ट्वीट को देखा जाए तो उन्होंने सभी के लिए Honourable शब्द का प्रयोग किया, लेकिन राजदीप सरदेसाई के नाम के आगे उन्होंने सिर्फ़ SHRI लगाया है। ऐसे में यूजर्स इस बात पर चुटकी लेने से पीछे नहीं रहे। यूजर्स ने कहा कि हर कोई माननीय है सिर्फ़ राजदीप को छोड़कर।

मालबिका परासर नाम के ट्विटर अकाउंट से कहा गया कि नॉटी ने राजदीप के नाम के आगे honourable नहीं लगाया। वह बेस्ट सीएम के लिए टूलकिट तैयार कर रहा है। 

यो यो फनी सिंह नाम के अकाउंट से कहा गया कि राजदीप तो अपने ही लोगों में honourable  नहीं है।

कुछ लोगों ने इस बात पर भी ध्यान दिलवाया कि राजदीप तस्वीर में ऐसे खड़े हैं जैसे कोई छात्र या नौकर अपने मास्टर के सामने खड़ा होता है। यूजर्स कहते हैं कि राजदीप के पास कोई आत्मसम्मान नहीं है।

ऋषि ने कहा, “मुझे लगता है कि राउत ने राजदीप के नाम के साथ माननीय इसलिए नहीं लगाया क्योंकि वह वहाँ बिन बुलाए गए। मैं कोई इंसान पालने वाला नहीं हूँ, लेकिन मुझे पता है कि पालतू दूर से अपने मालिक को अच्छे से सूँघ लेते हैं।” 

सरदेसाई को इंटरव्यू में राउत ने NIA पर उठाए सवाल

बता दें कि जिस इंटरव्यू को लेने राजदीप शिवसेना नेता संजय राउत के घर पहुँचे थे, उसमें राउत ने एनआईए पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि NIA केंद्र सरकार के इशारे पर काम कर रही है।

शिवसेना नेता ने इसमें कहा कि जाँच एजेंसियों को कुछ जिलेटिन की छड़ें के बजाय खतरनाक आतंकी गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। एंटीलिया बम केस में शिवसेना नेता ने महाविकास आघाड़ी सरकार और मुंबई पुलिस का पक्ष लिया। उन्होंने कहा कि वह सचिन वाजे को लेकर वह कोई जवाब नहीं दे सकते। इसका उत्तर सिर्फ़ जाँच एजेंसियाँ ही देंगी।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जाँच एजेंसियाँ किसकी तरफ से काम कर रही हैं, ये बात सब जानते हैं । उन्होंने NIA पर सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले कुछ सालों में NIA ने क्या उपलब्धि हासिल की है। एनआईए का काम आतंकवादियों के बीच साँठ-गाँठ को तोड़ना है। बताइए, उरी आतंकी हमले, पठानकोट आतंकी हमले और पुलवामा हमलों के बाद एनआईए ने क्या किया है? क्या उन्होंने कोई रिपोर्ट प्रस्तुत की है।