बेंगलुरु के चेन्नहल्ली स्थित जनसेवा विद्या केंद्र में आज (19 मार्च 2021) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की दो दिवसीय बैठक की शुरुआत हुई। बैठक के पहले दिन सरसंघचालक मोहन भागवत और सरकार्यवाह भय्याजी जोशी मौजूद रहे।
दो दिवसीय बैठक के पहले दिन जानकारी दी गई कि 89% शाखाएँ दोबारा से चालू हो गई हैं। इनमें 90% शाखा युवाओं की हैं, जिसमें से 60% कॉलेज के छात्र हैं। बैठक में राम मंदिर और कोरोना काल को लेकर भी बातें हुईं। इससे कुछ चौंकाने वाले आँकड़े सामने आए।
बैठक में राम मंदिर निधि समर्पण अभियान को लेकर बताया गया कि इस अभियान के तहत संघ के स्वयंसेवक 5,45,737 जगहों पर गए। 20 लाख कार्यकर्ता इस समर्पण अभियान में शामिल रहे।
संघ की दो दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा बेंगलूरु में प्रारम्भ। पूजनीय सरसंघचालक मोहनजी भागवत और माननीय सरकार्यवाह भय्याजी जोशी ने भारत माता के चित्र पर पुष्पार्चन कर बैठक का शुभारम्भ किया। बैठक में देशभर से लगभग 450 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। pic.twitter.com/Y1DGwqctMV
इस पूरे अभियान के तहत कार्यकर्ताओं के जोश का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मात्र सवा महीने तक चलने वाले इस निधि समर्पण के कार्य में कार्यकर्ताओं ने 12 करोड़ 47 लाख 21 हजार परिवारों से संपर्क किया। वे न केवल देश के बड़े राज्यों के छोटे कस्बों में पहुँचे, बल्कि नॉर्थ ईस्ट के गाँवों में जाकर भी स्थानीयों को इस अभियान से जोड़ा। बैठक में बताया गया कि स्वयंसेवक नागालैंड, मिजोरम, मेघायल, लद्दाख, अण्डमान के गाँव तक गए थे।
इसके अलावा बैठक में संघ द्वारा चालित सेवा भारती से जुड़े डेटा भी सामने रखे गए। इसमें बताया गया कि सेवा भारती की ओर से कोरोना संकट के दौरान 92,656 जगहों पर सेवा कार्य किए गए। 5 लाख 60 हजार स्वयंसेवकों ने संकट की घड़ी में सेवा भारती से जुड़कर सक्रियता से काम किया। 73,000 लोगों के घर में राशन पहुँचाए गए। 5 करोड़ लोगों को खाना बाँटा गया। 90 लाख मास्क वितरित किए गए। 20 लाख प्रवासी मजदूरों की मदद की गई और 2.5 लाख घुमंतू लोगों को सहायता दी गई।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख अरुण कुमार ने इस आयोजन से जुड़ी एक प्रेस वार्ता में कहा कि समाज में कार्यरत सामाजिक, धार्मिक संगठनों को साथ लेकर समाजव्यापी, राष्ट्रव्यापी सामाजिक शक्ति खड़ी करना ही संघ का लक्ष्य है। संघ समाज की सामूहिक शक्ति के जागरण का कार्य कर रहा है। देश समाज के लिए कार्य करने वाले समान विचार के समस्त लोगों, संगठनों को साथ जोड़ना, इस दिशा में भी संघ प्रयास कर रहा है।
एक हिंदू महिला पर धर्मांतरण करने के लिए दबाव डालने की आरोपित कैथोलिक नन को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 16 मार्च 2021 को अग्रिम जमानत दे दी। शिकायतकर्ता का कहना था कि नन ने न केवल उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया, बल्कि बात न मानने पर उसे नौकरी से भी निकाल दिया।
जानकारी के मुताबिक, आरोपित सिस्टर भाग्य छतरपुर जिले के खजुराहो के सेक्रेड हार्ट कॉन्वेंट हाई स्कूल की प्रिंसिपल हैं। स्कूल की पूर्व सहायक लाइब्रेरियन ने आरोप लगाया था कि प्रिंसिपल उनसे ईसाई धर्म अपनाने को कहती थीं।
शिकायत करने वाली हिंदू महिला के मुताबिक, उनके पति एक मानसिक विकार से पीड़ित हैं। उनसे कहा गया कि अगर उनका पूरा परिवार ईसाई बन जाता है तो उनके पति को ठीक कर दिया जाएगा। महिला ने कई प्रलोभनों के बाद भी स्कूल प्रिंसिपल की यह बात नहीं मानी। अंत में उन्हें खराब प्रदर्शन का हवाला देकर स्कूल से बाहर कर दिया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक एफआईआर में कहा गया है कि शिकायतकर्ता से कहा गया कि ईसाई धर्म के भगवान हिंदू धर्म के भगवान से महान होते हैं। नन के वकील ने सभी आरोपों को फर्जी बताया है। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता को नौकरी से निकाल दिया गया था और इसी नाराजगी में उन्होंने केस फाइल किया।
बता दें कि हिंदू महिला की शिकायत के बाद नन के ख़िलाफ़ मध्यप्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 2020 की धारा 3 और धारा 5 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। इसी कारण से प्रिंसिपल ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत की माँग की थी, जिस पर जस्टिस श्रीधरन की पीठ ने सुनवाई करते हुए उसे स्वीकार कर लिया।
कोर्ट ने इस केस में अगली सुनवाई की तारीख 7 अप्रैल को तय की है। अदालत ने नन को अग्रिम जमानत देने के लिए 10,000 रुपए के एक निजी बांड और इतनी ही राशि का एक जमानदार पेश करने की शर्त रखी। साथ ही पुलिस की जाँच के दौरान पेश होने का निर्देश दिया गया।
उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 2020 की धारा 3 में यह प्रावधान है कि कोई भी व्यक्ति खरीद, धमकी या बल का उपयोग, अनुचित प्रभाव, ज़बरदस्ती विवाह या कोई धोखाधड़ी का उपयोग करके किसी भी अन्य व्यक्ति को सीधे या अन्य किसी भी व्यक्ति को धर्मांतरित करने या उसके धर्म को परिवर्तित करने का प्रयास नहीं करेगा। यह दंडनीय अपराध है।
वहीं, अधिनियम 5 में कहा गया है कि यदि कोई भी व्यक्ति धारा 3 के तहत प्रावधानों का उल्लंघन करता है तो उस व्यक्ति को एक अवधि के लिए कारावास की सजा दी जाएगी, जो 1 वर्ष से कम नहीं होगी और अधिकतम यह 5 साल तक बढ़ सकती है। इसके साथ ही जुर्माने के रूप में दोषी को कम से कम 25,000 रुपए भरने होंगे।
कृषि कानूनों के खिलाफ राज्य के बिल को राष्ट्रपति की संस्तुति नहीं मिलने पर पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सुप्रीम कोर्ट जाने की चेतावनी दी है। उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि वह किसानों और बिचौलियों के बीच के सदियों पुराने रिश्ते को तोड़ने की कोशिश कर रही है। अपने बयान में पंजाब के सीएम ने आढ़तियों और किसानों के बीच के संबंध को पुराना और आजमाया हुआ बताया।
उन्होंने कहा, “अगर भारत के राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद राज्य संशोधन विधेयकों को स्वीकृति नहीं देते हैं, तो हम सर्वोच्च न्यायालय में जाएँगे।” कैप्टन ने कहा कि राज्यपाल ने अभी भी राज्य संशोधित विधेयकों को राष्ट्रपति के पास नहीं भेजा है। विधानसभा ने इसे पारित किया है, लेकिन यह दुखद है कि शिरोमणि अकाली दल और आम आदमी पार्टी ने इस मुद्दे पर राजनीतिक खेल खेलना शुरू कर दिया है।
बता दें कि अमरिंदर सिंह का यह बयान साफ बताता है कि वह खुले तौर पर आढ़तियों के पक्ष से बात कर रहे हैं। उनकी पार्टी कॉन्ग्रेस जो कुछ समय पहले तक किसान हित का राग अलाप रही थी, उसके लिए भी किसान हित दूसरे नंबर की बात हो गई है। पूरी पार्टी आढ़तियों के पक्ष से बोलने लगी है। पंजाब के फूड एंड सप्लाई मिनिस्टर भरत भूषण आशु ने 13 मार्च को कहा था कि किसानों को ‘आढ़तियों के जरिए डायरेक्ट पेमेंट’ जाएगी।
As per rules of APMC Act, we are making payments to farmers through arthiyas. The CM has also made it clear that payments will directly reach the farmers through arhtiyas: Punjab Food & Supply Minister Bharat Bhushan Ashu pic.twitter.com/vsNYlesYGl
उल्लेखनीय है कि साल 2012 में भी केंद्र में बैठी यूपीए सरकार ने किसानों को प्रत्यक्ष भुगतान करने की बात का सुझाव दिया था। हालाँकि, स्थानीय कॉन्ग्रेस नेताओं ने तब भी इसका विरोध किया था। उस समय राज्य में SAD-BJP की गठबंधन सरकार थी। तब केंद्रीय मंत्री व पटियाला की सांसद परणीत कौर, संगरूर के सांसद विजयेंद्र सिंगला और अन्य कॉन्ग्रेस सांसदों ने राज्य आढ़ती संघ के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए उपभोक्ता मामलों के तत्कालीन केंद्रीय मंत्री केवी थॉमस से मुलाकात की थी। उस समय भी इन सबने मिलकर केंद्रीय सरकार के सामने आढ़तियों के पक्ष में आवाज उठाई थी। तब कहा गया था कि बिना आढ़तियों के पंजाब में खाद्यान्नों की खरीद के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। वर्तमान व्यवस्था को समाप्त करने से केवल किसानों को परेशानी होगी।
आज 9 साल बाद ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ भी नहीं बदला है। बस बदला है तो किसान संघ का मत। किसान यूनियन ने उस समय कॉन्ग्रेस नेताओं के विरुद्ध आवाज उठाई थी, क्योंकि वे आढ़तियों के समर्थन में थे।
भारतीय किसान यूनियन के राज्य अध्यक्ष बूटा सिंह ने कहा था, “कॉन्ग्रेस को स्पष्ट होना चाहिए। ये पलटा-पलटी क्यों? कई बार पार्टी ने सिस्टम को खत्म करने के लिए आवाज उठाई। अब ये उन्हीं आढ़तियों का समर्थन कर रहे जो कमीशन के नाम पर किसानों को लूटते हैं।”
किसान संघ के राज्य अध्यक्ष सतनाम सिंह ने कहा था, “जब कैप्टन अमरिंदर सिंह मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने हमें आश्वासन दिया था कि वे किसानों के साथ दु:ख-दर्द दूर करने की बात करेंगे। पिछले दिनों भी कॉन्ग्रेस ने समर्थन दिया था। अब ये यू-टर्न जरूर आढ़तियों की लॉबी के कारण लिया गया है, क्योंकि उनके पास पैसे की ताकत है।”
मालूम हो कि साल 2016 में चुनाव कैंपेन के समय अमरिंदर सिंह ने कहा था कि राज्य में कॉन्ग्रेस सरकार बनने पर आढ़ती सिस्टम को समाप्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा था कि कॉन्ग्रेस सरकार कोई ऐसा फैसला नहीं लेगी और न ही व्यापार के साथ अन्य समुदायों से जनादेश लिए बिना नई नीति बनाएगी।
2018 में पंजाब सरकार आढ़तियों को रेगुलेट करने के लिए एक विधेयक लाई थी, जिससे पार्टी में काफी बहस हुई। हालाँकि, अब अमरिंदर सिंह किसानों और आढ़तियों के बीच के संबंध को पुराना व आजमाया हुआ बता रहे हैं, जबकि उनके एक विधायक ने खुद कहा था कि एक समय में किसानों और कमीशन एजेंट्स में अच्छी तालमेल थी, लेकिन अब परिदृश्य बदल चुके हैं।
जब से नए कृषि कानूनों पर विरोध शुरू हुआ है, कॉन्ग्रेस पार्टी पूरी तरह से आढ़तियों के साथ है। पंजाब के मुख्यमंत्री तो केंद्र सरकार पर इल्जाम लगा चुके हैं कि वह आढ़तियों पर आईटी रेड जैसे नए-नए हथकंडे आजमाकर उन्हें डरा रही है।
बता दें कि आढ़तियों को लेकर किसानों में गुस्सा और नाराजगी बहुत पुरानी बातें हैं। नोटबंदी के समय इन्हीं आढ़तियों को लेकर एक किसान ने कहा था, “ जब हम अपने पैसे के लिए या ऋण या अग्रिम भुगतान के लिए इन आढ़तियों के पास जाते हैं, तो वे हमें पूरे दिन बैठाए रखते हैं चाहे बात 5,000 रुपए की ही हो। वे हमसे उम्मीद कैसे करते हैं कि हम उनके काले धन को रातोंरात सफेद में बदल दें?”
आज भले ही किसान के नाम पर किसान आंदोलन भड़काया जा रहा हो। लेकिन हकीकत यही है कि ये प्रदर्शन सिर्फ़ और सिर्फ़ बिचौलियों के लिए किया जा रहा है। हाल में आया पंजाब सीएम का बयान केवल इस प्रदर्शन का एक विस्तार है।
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में स्थित मुस्लिम बहुल क्षेत्र डासना के शिव-शक्ति मंदिर में आसिफ नाम के एक किशोर की पिटाई के बाद मंदिरों को बदनाम करने का एक बार फिर सिलसिला सा चल पड़ा था। यहाँ तक कि तमाम वामपंथी मीडिया बिना महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती का पक्ष जाने पूरे हिन्दू समुदाय को एक बार फिर से असहिष्णु साबित करने में लग गए थे। लेकिन जल्द ही सबकी कलई खुल गई और कल तक डासना मंदिर में दावेदारी ठोककर जुमे की नमाज़ के बाद प्रवेश करने की धमकी देने वाले बसपा विधायक असलम चौधरी भी आज अपने बयान से पलटते नजर आ रहे हैं। कहा जा रहा है कि उन्होंने यूपी पुलिस की डर से तगड़ा यू-टर्न लिया है।
उस दिन कैमरे पर महंत जी को धमकाने वाले बसपा विधायक असलम चौधरी आज कहते पाए गए, “मेरा ऐसा कोई बयान नहीं है कि मैं जुमे की नमाज़ के बाद मंदिर जाऊँगा और न ही मेरा जाने का ऐसा कोई प्रोग्राम है। पुलिस प्रशासन अपनी व्यवस्था देख रहे हैं। कई संगठनों के फोन आए थे मैंने उनसे भी कहा शांति भंग करने का मेरा कोई बयान नहीं है।”
हर हर महादेव Watch this 45 second video … असलम मियां LOL???Alsam changed his stand मैं मंदिर में नहीं जाऊंगा pic.twitter.com/nrL0F5kXm4
यह सब हुआ एक तरफ योगी सरकार के डर, जो किसी भी प्रकार के अराजकता के सख्त खिलाफ हैं तो दूसरी तरफ महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती को विश्व हिंदू परिषद (VHP) सहित तमाम हिन्दू संगठनों और श्रद्धालुओं के सहयोग और एकजुटता के कारण। हालाँकि, इससे पहले ही वामपंथी मीडिया और उसके गिरोह द्वारा बनाए गए माहौल कि डासना के देवी मंदिर में एक मुसलमान को पानी नहीं पीने दिया जा रहा है। उसके लिए उसे मारा गया की हवा खुद जमानत पर छूटे श्रृंगी यादव और महंत नरसिंहानंद के बयानों से पहले ही निकल गई थी।
यहाँ ध्यान देने वाली बात यह भी है कि आज जैसी आशंका जताई जा रही थी कि जुमे की नमाज के बाद भारी संख्या में विधायक असलम चौधरी और अन्य मुस्लिम संगठनों के नेतृत्व में मुस्लिम भीड़ डासना मंदिर की तरफ बढ़ सकती है। जिसे देखते हुए मंदिर और महंत के समर्थन में तमाम हिन्दू श्रद्धालु मंदिर परिसर में जुटने लगे थे। साथ ही यूपी की पुलिस प्रशासन भी सतर्क थी। तो वहीं हिन्दू संगठनों ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए मंदिर के गेट पर पहले से भी एक बड़ा बोर्ड लगा दिया था। जिस पर लिखा है, “यह मंदिर हिन्दुओं का पवित्र स्थल है। यहाँ मुसलमानों का प्रवेश वर्जित है।”
मंदिर के गेट पर लगा बड़ा बोर्ड
यह इस बात की कहीं न कहीं घोषणा भी थी कि हिन्दू समुदाय मुस्लिमों के ऐसे धमकियों से नहीं डरने वाला है। इससे पहले ही मंदिर प्रशासन का साफ कहना था कि वे किसी भी कीमत पर इस बोर्ड को नहीं हटाएँगे क्योंकि यह बोर्ड जब 10 साल पहले जब यहाँ के मुस्लिमों से तंग होकर लगाया गया था। उस समय प्रदेश में बसपा की सरकार थी, उसके बाद समाजवादी पार्टी की सरकार बनी और अब भाजपा की सरकार है। लेकिन अब आज के इस माहौल में यह बोर्ड नहीं हटाया जाएगा।
विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने ट्विटर पर एक प्रेस रिलीज जारी कर महंत जी के साथ एकजुटता प्रदर्शित की थी। साथ ही बजरंग दल के प्रांत संयोजक विजय त्यागी ने गाजियाबाद के डासना मंदिर में 19 मार्च को विधायक असलम चौधरी द्वारा प्रवेश किए जाने वाले भड़काऊ बयान पर कहा था कि यदि असलम चौधरी हिंदुओं के देवी-देवताओं के प्रति अपनी श्रद्धा व पूर्व में किए गए कृत्यों के पश्चाताप के लिए मंदिर आना चाहते हैं, तो उनका स्वागत है। किंतु यदि असलम जेहादी मानसिकता को लेकर मंदिर में प्रवेश करना चाहते हैं तो प्रांत संयोजक ने उन्हें चेतावनी देते हुए कहा कि बाबर की औलादों हिंदू समाज ने भी अपने हाथों में चूड़ियाँ नहीं पहन रखी है। हिंदू समाज भी ईंट का जवाब पत्थर से देना जानता है।
विकास त्यागी ने अपने उसी पत्र में यह भी कहा कि हमारे मठ, मंदिरों, साधु संतों व हमारी हिंदू संस्कृति के ऊपर यदि किसी ने हमला करने का तथा ऊँगली उठाने का प्रयास किया तो परिणाम बहुत गंभीर होंगे। विकास त्यागी ने योगी सरकार से माँग करते हुए कहा कि एमएलए असलम चौधरी को तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए और ऐसी मानसिकता रखने वाले सभी जिहादियों पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने चेतवानी देते हुए बसपा विधायक से कहा, “भले ही आप लोग 90% से ऊपर होंगे किन्तु विधायक असलम चौधरी जी डासना के महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती जी के पवित्र स्थल पर कोई दुस्साहस मत कर बैठना। जनता ने आपको विकास व सुरक्षा के लिए चुना है, धौंस, धमकी या दंगे के लिए नहीं।”
गौरतलब है कि यह सब बवाल तब और बढ़ गया जब आसिफ से मिलने के लिए विधायक असलम चौधरी से लेकर दिल्ली की पूर्व विधायक अलका लांबा, कॉन्ग्रेस के जिला अध्यक्ष विजेंद्र यादव समेत अनेक विपक्षी नेता उसके घर पहुँचने लगे। सोमवार (मार्च 15, 2021) को ही धौलाना के बसपा विधायक असलम चौधरी जब आसिफ के घर पहुँचकर उसका हाल चाल लिया। तभी धमकी भरे अंदाज में असलम ने ज्ञान देते हुए बहुत कुछ कह दिया था कि कोई भी धार्मिक स्थल हो, उन पर सभी का अधिकार होता है। देवी मंदिर भी उनके वंशजों की विरासत है। माफिया व अपराधिक प्रवृत्ति के लोग अमन बिगाड़ना चाहते हैं।
असलम ने यहाँ तक कहा था, “डासना मंदिर हमारे पूर्वजों का मंदिर है। यह मंदिर हमारे पूर्वजों ने बनाया है। यहाँ पर कुछ गुंडे प्रवृत्ति के लोग आ गए। कुछ लोगों ने बाहर से आकर मंदिर पर कब्जा करना चाहा और तरह-तरह की एक्टीविटी करके यहाँ के माहौल को बिगाड़ने की कोशिश की। मगर यहाँ के हिंदू-मुसलमान के बीच इतनी एकता है कि उन्होंने इसे बिगड़ने नहीं दिया। हम इन गुर्गों को बताना चाहेंगे कि मंदिर हमारी विरासत है। हम पानी पीने भी जाएँगे, अपनी मंदिर की देख-रेख करने भी जाएँगे। मैं मंदिर में जाऊँगा। मैं देखता हूँ कि कौन रोकता है।”
विधायक असलम चौधरी का वह बयान जिससे वे साफ मुकर गए
उन्होंने तो यह भी कहा, “यह जो बाबा है, वह बहुत बड़ा गुंडा है, माफिया है, इसने माहौल बिगाड़ने का काम किया है। वो जो बिहार का गुंडा आसिफ पर लात मार रहा था। अगर हम जैसे लोगों को उस टाइम पर पता चल जाता तो बवाल बड़ा हो जाता। अब वह जेल में है। इस बच्चे की पैरोकारी करेंगे। उसकी जमानत भी नहीं होने देंगे।”
विधायक असलम के ऐसे धमकियों के बाद भी जहाँ श्रृंगी यादव को आसानी से जमानत मिल गई तो वहीं आज विधायक खुद अपने धमकी भरे बयान से पलटते नजर आए जबकि शायद वह यह भूल गए कि उनका पिछला बयान भी टीवी सहित सोशल मीडिया पर न सिर्फ चल चुका है बल्कि वायरल भी है।
वहीं ‘सुदर्शन न्यूज़’ से बात करते हुए श्रृंगी यादव ने बताया था कि वो लड़का झूठ बोल रहा है कि वो पानी पीने के लिए मंदिर के भीतर घुसा था। उन्होंने कहा था कि मंदिर में कई शिवलिंग मौजूद हैं। आसिफ को पीटने के मामले में गिरफ़्तारी के बाद जमानत पर बाहर आए श्रृंगी यादव ने बताया था कि उसने उस लड़के को शिवलिंग पर चढ़ाए गए जल में पेशाब करते हुए देखा था। साथ ही इस तथ्य को दोहराया कि अगर उसे पानी पीना होता तो वो मंदिर के बाहर कई चापाकल और नल हैं, उनमें से पी लेता।
बता दें कि धौलाना से बसपा विधायक असलम चौधरी की दबंगई पहले भी देखने को मिली है। पिछले दिनों उनके दबंगों को टोल पर हफ्ता वसूली करते हुए देखा गया था और मना करने पर उनके साथ मारपीट भी की गई थी। विधायक और उनके गुंडों ने टोल कर्मियों को इस कदर पीटा कि उन्हें घायल कर दिया था।
गौरतलब है कि डासना देवी मंदिर पौराणिक समय से महाभारत के इतिहास से जुड़ा हुआ है। यहाँ पर अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने कुछ समय बिताया था। इस मंदिर पर जब हमला हुआ था तो यहाँ पर देवी देवाताओं की मूर्तियों को मंदिर परिसर में बने एक तालाब में छुपा दिया गया था। नवरात्र पर्व के मौके पर अष्टमी और नवमी के दिन हजारों की संख्या में लोग ऐतिहासिक महत्व वाले डासना स्थित प्राचीन देवी में दर्शन के लिए आते हैं। परिवार के लोगों की सुख शांति के लिए प्रचंड चंडी देवी की पूजा करते हैं। कहा जाता है कि करीब पाँच हजार साल पुराने इस मंदिर में भगवान शिव, नौ दुर्गा, सरस्वती, हनुमान की मूर्ति स्थापित हैं।
पश्चिम बंगाल में 27 मार्च को पहले चरण का मतदान होना है। बीजेपी ने चुनाव मैदान में कुछ सांसदों को भी उतारा है। इनमें से एक नाम आसनसोल के सांसद और केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो का भी है। वे टॉलीगंज से चुनाव लड़ रहे हैं।
बाबुल सुप्रियो ने ट्वीट कर एक वीडियो शेयर किया है और तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के कार्यकर्ताओं पर बदसलूकी का आरोप लगाया है। घटना गुरुवार (मार्च 18, 2021) रात की है।
उन्होंने ट्वीट करते हुए बताया कि गुरुवार रात वह अपने काफिले के साथ भवानीपुर के बलवंत सिंह ढाबा पर पहुँचे। उनके गाड़ी से उतरने से पहले ही उत्तर कोलकाता के युवा टीएमसी सचिव वसीम अहमद के नेतृत्व में कुछ लोगों ने उनकी कार को घेर लिया और नारेबाजी करने लगे। केंद्रीय मंत्री ने टीएमसी कार्यकर्ताओं को समझाने की कोशिश की, लेकिन किसी ने भी उनकी बात नहीं सुनी।
(1/3) चुनाव प्रचार के बाद देर रात चाय के लिए भवानीपुर के बलवंत सिंग के ढाबे पर रुका था .. गाड़ी से उतरा भी नहीं था .. अचानक उत्तरी कोलकाता के युवा #TMC सचिव वसीम अहमद के नेतृत्व में कुछ लोगों ने कार के दूसरी तरफ से नारेबाजी शुरू कर दी। @BJP4Bengal@KailashOnline@Sunil_Deodharpic.twitter.com/LJVl3kvCv1
उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “चुनाव प्रचार के बाद देर रात चाय के लिए भवानीपुर के बलवंत सिंह ढाबे पर रुका था। गाड़ी से उतरा भी नहीं था। अचानक उत्तरी कोलकाता के युवा TMC सचिव वसीम अहमद के नेतृत्व में कुछ लोगों ने कार के दूसरी तरफ से नारेबाजी शुरू कर दी।”
वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता हैकि बाबुल सुप्रियो भीड़ के बीच में अपने सुरक्षा गार्डों के साथ खड़े हुए हैं। वे वहाँ मौजूद लोगों से कहते हैं कि आप जिस भी पार्टी को सपोर्ट करते हों अपनी अपनी पार्टी की इज्जत करें, लेकिन जब कोई दूसरी पार्टी का नेता आपके बीच में आए तो कुछ भी ऐसा न करें जिससे उसके जाने के बाद आपस में झड़प हो।
गाड़ी को घेरकर नारेबाजी
बाबुल सुप्रियो ने उन्हें काफी समझाने की कोशिश की लेकिन टीएमसी कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी शुरू कर दी। इसके बाद बाबुल सुप्रियो अपनी गाड़ी में बैठ गए। वीडियो में दिख रहा है कि गाड़ी में बैठने के बाद टीएमसी के लोगों ने उनके गाड़ी को घेर लिया और नारेबाजी करते रहे।
इस घटना पर बाबुल सुप्रियो ने ट्वीट करते हुए लिखा कि गुंडागर्दी और मनमुटाव उत्पन्न करने वाला व्यवहार ही टीएमसी का असली चरित्र है और नेतृत्व सीएम ममता बनर्जी की तरफ से किया जा रहा है। अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा कि यह सब ज्यादा दिन अब पश्चिम बंगाल में नहीं चलने वाला। 2 मई को पीएम मोदी के नेतृत्व में यह सब खत्म हो जाएगा।
उत्तर प्रदेश के लखनऊ में लव जिहाद का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ के ठाकुरगंज निवासी एक युवक ने अपना मजहब छिपाकर युवती को झाँसे में लेकर शादी की। इसके बाद उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने लगा। यही नहीं बच्चों की खतना करवाने की कोशिश। महिला के विरोध पर आरोपित ने बच्चों समेत उसे घर में बंद कर दिया और बाहर से आग लगा दी। महिला और बच्चे बाल-बाल बच गए। पीड़िता की तहरीर पर एफआइआर दर्ज कर पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।
महिला के मुताबिक 13 फरवरी 2009 को महिला ने आर्य समाज मंदिर में राजीव नाम के युवक से प्रेम विवाह किया था। आरोप है कि शादी के बाद महिला को पता चला कि उसके पति का असली नाम मोहम्मद अफजल सिद्दीकी है। अफजल ने खुद को अनाथ बताकर महिला को झाँसे में लिया था और पहचान छिपाकर शादी कर कर ली।
पीड़िता के अनुसार वह 2009 में राजीव उर्फ अफजल से मिली थी। अफजल ने तब खुद को अनाथ हिंदू बताया था और दोनों ने 13 फरवरी 2009 को आर्य समाज मंदिर में शादी कर ली। शादी के बाद दंपति के दो बच्चे हुए। पीड़िता ने कहा कि जब राजीव उर्फ अफजल ने अपने बच्चों के गैर-हिंदू नाम रखने पर जोर दिया तो दोनों में विवाद हो गया। जब राजीव अपने बच्चों का नाम गैर-हिंदू रखने का जिद करने लगा तो पीड़िता को शक हुआ। इसके बाद उसने पाया कि राजीव हिंदू नहीं था। उसका असली नाम मोहम्मद अफजल सिद्दीकी था। इस दौरान उसे यह भी पता चला कि वह अनाथ नहीं है, उसके माता-पिता भी हैं।
बुधवार (मार्च 17, 2021) रात करीब आठ बजे अफजल ने महिला और उसके दोनों बच्चों को घर में बंद कर दिया और आग लगा दी। महिला ने फोन कर डायल 112 पर मामले की सूचना दी। इसके बाद फायर ब्रिगेड और आसपास के लोगों की मदद से आग पर काबू पाया गया और महिला और उसके दोनों बच्चों को सकुशल बाहर निकाला जा सका।
दूसरों से शारीरिक संबंध बनाने का बनाया दबाव
आरोप है कि अफजल लगातार पत्नी को धर्म परिवर्तन का दबाव बना रहा था। आरोपित महिला को लोगों से शारीरिक संबंध बनाने के कह रहा था। आरोपित का कहना था कि शारीरिक संबंध बनाने के बाद ही उसका धर्म परिवर्तन होगा। यही नहीं अफजल दोनों बच्चों का जबरन खतना करने के लिए पीड़िता पर दबाव बना रहा था।
पीड़िता की तहरीर पर पुलिस ने अफजल, उसके पिता, माँ और अन्य मौलानाओं के खिलाफ जानलेवा हमला और यूपी विधि विरूद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश के तहत एफआइआर दर्ज की है। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।
प्रिंस हैरी और उनकी पत्नी मेगन मर्केल के विवादित इंटरव्यू के बाद ओप्रा विन्फ्रे ने अपने शो ‘सुपर सोल’ में भारतीय अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा का साक्षात्कार लिया है। इसका प्रोमो शुक्रवार (मार्च 19, 2021) को रिलीज किया गया। प्रोमो में देख सकते हैं कि प्रियंका चोपड़ा विन्फ्रे से आध्यात्मिक शक्ति के अस्तित्व पर बात कर रही हैं। इसमें वह ये भी बताती हैं कि उन्हें हिंदू धर्म के अलावा ईसाई और इस्लाम के बारे में भी बचपन से पता था।
इंटरव्यू में ओप्रा अपने भारत दौरे का अनुभव साझा करते हुए प्रियंका से आध्यात्मिक आधार पर सवाल करती हैं। इसके जवाब में प्रियंका कहती हैं, “भारत में तमाम धर्मों के अस्तित्व के कारण यह इतना मुश्किल नहीं है। मैं एक कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ी तो मुझे ईसाइयत का पता था। मेरे पिता एक मस्जिद में गाते थे तो मैं इस्लाम भी जानती थी। हिंदू परिवार में तो मेरा लालन-पालन ही हुआ। आध्यात्म भारत का एक बहुत बड़ा भाग है। आप उसे नकार नहीं सकते। मेरा परिवार भी सर्वश्रेष्ठ शक्ति में यकीन करता है। उस पर विश्वास करता है।”
प्रियंका कहती हैं, “मेरा पिता कहते थे कि धर्म एक रास्ता है ताकि सर्वश्रेष्ठ शक्ति को प्राप्त किया जा सके। जिस दिशा में हम जा रहे हैं, उसी दिशा में हर धर्म का एक अलग चेहरा है। मैं एक हिंदू हूँ, मेरे घर में एक मंदिर है और मैं वहाँ जितनी बार हो सकता है प्रार्थना करती हूँ, लेकिन इसी दौरान, मैं इस तथ्य में भी विश्वास करती हूँ कि एक सर्वोच्च शक्ति मौजूद है और मुझे उस पर विश्वास करना पसंद है।”
बता दें कि प्रियंका चोपड़ा का यह इंटरव्यू डिस्कवरी प्लस पर 20 मार्च को ऑन एयर किया जाएगा।
ओप्रा विन्फ्रे का प्रिंस हैरी और मेगन मार्केल के साथ इंटरव्यू
इससे पहले ओप्रा विन्फ्रे का शो प्रिंस हैरी और मेगन मर्केल के इंटरव्यू से चर्चा में आया था। उस साक्षात्कार में प्रिंस हैरी की पत्नी ने बताया था कि कैसे उन्हें शाही परिवार में अजीब स्थितियों का सामना करना पड़ा। ओप्रा से बात करते हुए, मर्केल ने कहा था कि जब वह गर्भवती थीं तो शाही परिवार में कई तरह की बातें होती थीं। जैसे लोग बात करते थे कि उनके आने वाले बच्चे को शाही टाइटल नहीं दिया जा सकता।
उन्होंने बताया कि गर्भावस्था के दौरान, शाही परिवार यहाँ तक बात करता था कि उनके बच्चे का रंग कितना काला होगा। जब ओप्रा ने पूछा कि आखिर इस तरह की बातें उनसे करता कौन था, तब मेगन मर्केल ने बताया कि वह उनका नाम नहीं बता सकती क्योंकि ये उनके लिए सही नहीं होगा।
उसी इंटरव्यू में प्रिंस हैरी ने भी कई बातों का खुलासा किया था। उन्होंने उन चुनौतियों और दबावों के बारे में बताया था जिसे उन्हें शाही परिवार का हिस्सा होने के कारण फेस करना पड़ा। हैरी ने बताया कि उन्हें 2020 के शुरुआती सालों में ही आर्थिक रूप से मदद मिलना बंद हो गई थी।
उन्हें बस वही मिला जो उनकी माँ ने उनके लिए छोड़ा था। उनके अनुसार शायद उनकी माँ को पता था कि क्या होगा। इसलिए इस कठिन समय में वह हर समय अपनी माँ के अस्तित्व को महसूस करते रहे। प्रिंस हैरी ने बताया कि वे शाही परिवार में खुद को फँसा हुआ महसूस करते थे।
बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं को लगातार उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। ऐसी ही एक और घटना सामने आई है। बर्बरता के ताजा मामले में उपद्रवियों ने एक मंदिर पर हमला किया और माँ काली की मूर्ति में आग लगा दी।
बांग्लादेशी मीडिया में आई खबरों के मुताबिक, यह घटना ठाकुरगाँव के रानीसंकल उपजिला के उत्तरगांव गाँव की है। कुछ उपद्रवियों ने गुरुवार (मार्च 18,2021) रात एक मंदिर में हिंदू देवी काली की मूर्ति को आग लगा दी। पुलिस ने कहा कि हमलावरों ने मंदिर में तोड़फोड़ की और देवी काली की मूर्ति को जला दिया।
रानीसंकिल पुलिस स्टेशन के अधिकारी जाहिद इकबाल ने बताया, “लोगों के एक समूह ने रात 9 बजे के आसपास गाँव में शन्नो चंद्रा के घर से सटे काली मंदिर में मूर्ति को क्षतिग्रस्त कर दिया और फिर भाग गए।” पुलिस ने बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोग घटनास्थल पर पहुँचे, मगर तब तक मूर्ति जल कर राख हो चुकी थी।
पुलिस अधिकारी ने कहा कि इलाके में गश्त तेज कर दी गई है और जाँच की जा रही है। वहीं हिंदू-बौद्ध-ईसाई एकता परिषद की अपजिला इकाई के महासचिव साधना बोसाक ने कहा कि इस संबंध में शिकायत दर्ज करवाई जाएगी।
गौरतलब है कि इससे पहले बुधवार (मार्च 17, 2021) को हजारों की मुस्लिम भीड़ ने एक हिन्दू गाँव पर हमला बोल दिया। इस्लामी संगठन ‘हिफाजत-ए-इस्लाम’ के बैनर तले भीड़ ने हिन्दू गाँव पर हमला बोला था। ये घटना सुनामगंज जिले के ‘शल्ला उपजिला’ इलाके में हुई। हिन्दू गाँव पर हमले के पीछे मामला बस इतना था कि एक हिन्दू व्यक्ति ने संगठन के जॉइंट सेक्रेटरी जनरल मौलाना मुफ़्ती मामुनुल द्वारा दिए गए कट्टरवादी भाषण की आलोचना की थी।
नवागाँव के एक हिन्दू युवक ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मामुनुल की आलोचना की थी। मौलाना ने अपने भाषण में बंगबंधु मुजीबुर रहमान की प्रतिमा लगाने का विरोध किया था। जैसे ही इस सोशल मीडिया पोस्ट के बारे में खबर फैली, हजारों की मुस्लिम भीड़ ने धारदार हथियारों के साथ हिन्दू गाँव पर हमला बोल दिया।
आसपास के मुस्लिम बहुल इलाकों से ‘हिफाजत-ए-इस्लाम’ के समर्थक वहाँ हथियारों के साथ आ धमके। बुधवार को सुबह 9 बजे से ही हिन्दुओं के घरों पर हमले शुरू कर दिए गए। इस घटना में 80 से अधिक हिन्दू परिवारों के घरों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया।
हबीबपुर यूनियन चेयरमैन विवेकानंद मजूमदार बकुल ने बताया कि कई हिन्दुओं के घरों को ध्वस्त किया गया है। भीड़ से बचने के लिए स्थानीय हिन्दू वहाँ से भाग खड़े हुए। बांग्लादेश के हिन्दू एक्टिविस्ट राजू दास ने बताया था कि इस दौरान 88 घरों और 8 पारिवारिक मंदिरों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया।
चुनावी राज्य पश्चिम बंगाल राजनीतिक हिंसा के लिए कुख्यात रहा है। राज्य से बमबाजी की घटनाएँ भी लगातार सामने आती रहती है। राजनीतिक विरोधियों को आतंकित करने के लिए चुनाव के वक्त ऐसी घटनाएँ और तेज हो जाती हैं। पिछले दिनों ही बीजेपी सांसद अर्जुन सिंह के घर के बाहर बम फेंके गए थे। उन्होंने तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडों को इसका जिम्मेदार बताया था।
असमाजिक तत्वों और गैर कानूनी तरीके से बम बनाने वालों को राजनीतिक संरक्षण मिलने के आरोप इससे पहले भी राज्य में लगते रहे हैं। यहाँ तक की बम धमाकों के मामलों की जाँच कर रही राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) को इस तरह की घटनाओं में पाकिस्तानी आतंकी संगठन अल-कायदा की संलिप्तता भी मिली है।
न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान से पहले सुरक्षा बल अवैध हथियार फैक्ट्रियों पर कार्रवाई की योजना बना रहे हैं। सीआरपीएफ (CRPF) के डीजी कुलदीप सिंह के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि चुनाव के दौरान लोगों को आतंकित करने के इरादे से पश्चिम बंगाल में गैर कानूनी तरीके से बम बनाए जाते हैं।
West Bengal’s bomb culture.
Bengal’s saga of blood & violence.
NIA points to terror groups in the state.@Arunima24 brings you a report.
न्यूज 18 से बात करते हुए सीआरपीएफ के डीजी कुलदीप सिंह ने कहा कि पेट्रोल बम, सुतली बम जैसे अलग-अलग तरह के बम बंगाल में चुनाव के समय बनाए जाते हैं। जिन जगहों पर अवैध हथियार बनाए और रखे जाते हैं, वहाँ कार्रवाई कर और ऐसा करने वाले लोगों पर शिकंजा कर इस तरह की घटनाओं की आशंका कम की जा सकती है।
बर्दवान ब्लास्ट में बांग्लादेशी आतंकी को हुई थी 29 साल की सजा
रिपोर्ट्स के मुताबिक, बंगाल में साल 2014 में हुए बर्दवान ब्लास्ट की जाँच में NIA को सीमा पार से जुड़े आतंकी लिंक मिले थे। एनआईए की विशेष अदालत ने बांग्लादेशी नागरिक और आतंकी संगठन जमात-उल-मुजाहिद्दीन के प्रमुख कौसर को बर्दवान बम विस्फोट में शामिल होने के आरोप में 29 साल की सजा सुनाई थी।
कौसर पर भारत और बांग्लादेश की लोकतांत्रिक रूप से स्थापित सरकारों के खिलाफ आतंकवादी कार्रवाई करने, युद्ध छेड़ने, युवकों को भर्ती करने और प्रशिक्षित करने का प्रयास करने का आरोप था। अल-कायदा मॉड्यूल मामले में भी, एनआईए ने पश्चिम बंगाल और केरल से गिरफ्तार हुए 9 लोगों के खिलाफ आरोप-पत्र दायर किया था।
पिछले महीने की बात करें तो राज्य श्रम मंत्री जाकिर हुसैन पर भी तब देशी बम फेंका गया, जब वह ट्रेन पर चढ़ने के लिए निमिता रेलवे स्टेशन की ओर जा रहे थे। इस मामले की जाँच केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी गई है। इसमें कुल 20 लोग घायल हुए थे।
अब इन्हीं राजनीतिक हिंसा के इतिहास को देखते हुए राज्य में 8 चरणों में चुनाव करवाए जा रहे हैं। यहाँ शांतिपूर्ण और अहिंसक तरीके से चुनाव कराना सुरक्षा बलों के लिए एक चुनौती है, क्योंकि पहले चरण के चुनाव शुरू होने से पहले ही हिंसा की घटनाएँ होने लगी हैं।
महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) के एक अधिकारी ने गुरुवार (मार्च 18, 2021) को एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा कि उन्हें व्यवसायी मनसुख हिरेन के सिर और गर्दन पर चोट के निशान मिले हैं, जिनका शव 5 मार्च को ठाणे जिले के रेटिबंदर नाले के पास मिला था।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, 48 वर्षीय ठाणे स्थित ऑटो स्पेयर पार्ट्स डीलर मनसुख हिरेन की मौत की जाँच कर रहे ATS के एक सूत्र ने कहा है कि हो सकता है कि उनकी मौत से पहले उन पर हमला किया गया हो। हिरेन का लिंक 25 फरवरी को अरबपति मुकेश अंबानी के घर के बाहर खड़ी विस्फोटक से लदी कार से जुड़ा था। हालाँकि, इस घटना के 10 दिन बाद उन्हें रहस्यमय तरीके से नाले के पास मृत पाया गया था।
एटीएस अधिकारी ने कहा कि ऐसा लगता है कि किसी ने मनसुख हिरेन के साथ मारपीट और भारी वस्तु से हमला किया होगा और आशंका जताई जा रही है कि इस हमले की वजह से वह बेहोश हो गए होंगे। पुलिस अधिकारी ने हिन्दुस्तान टाइम्स से कहा कि हमलावर ने उनके मुँह में चार-पाँच रूमाल ठूँस दिए और उनके पूरे चेहरे को दुपट्टे से ढक दिया।
अधिकारी ने कहा, “हत्यारे ने हिरेन को बेहोश करने के लिए क्लोरोफॉर्म का इस्तेमाल किया होगा या हो सकता है कि उसने कुछ अन्य साधनों का इस्तेमाल किया हो क्योंकि हिरेन का चेहरा कई तरह के रूमाल और मास्क से ढका हुआ था। बाद में (बेहोश होने के बाद) उन्हें पानी में फेंक दिया गया था।”
फोरेंसिक टीम का कहना है कि हिरेन की डूबने से मौत हो गई, ATS ने जताया संदेह
हालाँकि, जेजे अस्पताल में एक फोरेंसिक टीम द्वारा प्रस्तुत परीक्षण के परिणामों ने हिरेन के शरीर में डायटम की उपस्थिति की पुष्टि की है। भले ही जेजे अस्पताल की रिपोर्ट का दावा है कि हिरेन जीवित थे जब उसे नाले में फेंक दिया गया था, एटीएस जाँचकर्ताओं ने इस थ्योरी के बारे में संदेह जताया है। इस बीच, हिरेन के शरीर पर चोटों के बारे में पता चलने के बाद, जाँच अधिकारी ने अब हरियाणा फोरेंसिक प्रयोगशाला से सेकेंड ओपिनियन माँगी है।
मुकेश अंबानी के घर विस्फोटकों से भरी स्कार्पियो कार मामले की जाँच में एनआईए ने एक और खुलासा किया है। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर एनआईए और एटीएस की जाँच से खुलासा हुआ है कि 17 फरवरी को कोर्ट में जीपीओ फोर्ट के पास हिरेन और वाजे की मर्सिडीज में 10 मिनट की बातचीत हुई थी। कहा जा रहा है कि मुलुंड-ऐरोली रोड पर स्कॉर्पियो में खराबी आने के चलते हिरेन ने एक ओला कैब में दक्षिण मुंबई की यात्रा की थी।
सचिन वाजे-मनसुख हिरेन की मुलाकाता का CCTV फुटेज
NIA और ATS को 17 फरवरी का एक सीसीटीवी फुटेज हाथ लगा है। वीडियो में दिख रहा है कि हिरेन और वाजे ने फोर्ट में जीपीओ के पास मर्सिडीज में 10 मिनट तक बातचीत की। मनसुख ओला कैब में वाजे से मिलने आया था।
ओला ड्राइवर ने बताया- पाँच कॉल आई थी
जिस ओला कैब से मनसुख मिलने के लिए पहुँचे थे। उस दिन सीएसएमटी पहुँचने के दौरान उनके पास पाँच कॉल आई थी। कॉल करने वाले ने मनसुख को पहले पुलिस मुख्यालय के सामने बुलाया और आखिरी कॉल में उसे सीएमएमटी के सिग्नल पर आने के लिए कहा।
बता दें कि एंटीलिया बम कांड मामले में निलंबित मुंबई पुलिस एपीआई सचिन वाजे का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह ड्राइव करते हुए मनसुख हिरेन को क्राइम ब्रांच ले जाते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो 26 फरवरी का बताया जा रहा है। वीडियो में क्राइम ब्रांच के बाहर का फुटेज है, जिसमें वाजे और मनसुख हिरेन को उनके लैंड क्रूजर प्राडो में यूनिट में आते हुए देखा जा सकता है। यह वाहन एनआईए द्वारा जब्त कर लिया गया है।
इससे पहले महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि मनसुख हिरेन की हत्या की गई है। उन्होंने कहा कि हिरेन को मारने के बाद शव को खाड़ी में फेंका गया। लो टाइड की वजह से शव बहा नहीं, अगर शव हाई टाइड में चला जाता तो मिलता ही नहीं। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हिरेन के फेफड़ों में पानी नहीं है। अगर हिरेन की मौत पानी में डूबने से हुई होती तो फेफड़ों में पानी दिखता। इससे साफ है कि हिरेन की हत्या हुई है। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मनसुख हिरेन का गला घोटने की जानकारी सामने आई है।