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मंगलवार को मांस बिक्री पर प्रतिबंध = हिंदू तालिबान का निर्माण: BJP सरकार के फैसले पर लेखक रविंदर का बेतुका बयान

हाल ही में गुरुग्राम में मंगलवार को मांस की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया। प्रतिबन्ध से बेशक कुछ लोगों को परेशानी हुई होगी, लेकिन ‘क्या दोबारा हो सकता है प्यार’ सहित करीब 9 किताबों के लेखक रविंदर सिंह को कुछ ज़्यादा ही पीड़ा हो रही है।

अपनी भड़ास निकालने के लिए शहर में मंगलवार को मांस की दुकानों को बंद करने के निर्णय पर नगर निगम गुरुग्राम (MCG) के एक न्यूज़ लिंक को रीट्वीट करते हुए, रविंदर सिंह ने सवाल किया कि क्या यह प्रतिबंध ‘हिंदू तालिबान का निर्माण’ है? उनके ट्वीट में लिखा था, “अब आप मंगलवार को गुड़गाँव में मांस नहीं बेच सकते। कारण- क्योंकि इससे धार्मिक भावनाएँ आहत होती हैं। हिंदू तालिबान का निर्माण?”

रविंदर सिंह के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

लेखक रविंदर ने अफगानिस्तान और पाकिस्तान के कुछ हिस्सों में फैले कट्टर-वहशी तालिबान की तुलना एक हिंदू बहुल क्षेत्र में मंगलवार को मांस की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के फैसले से की। इनके जैसों के लिए एक विशेष समूह का अधिकार, अधिकार है और बहुसंख्यक समुदाय की आस्था कोई मायने नहीं रखती। जब भी ऐसी बात आती है तो तुरंत हिटलर और तालिबान इन्हें दिखाई देने लगता है। जबकि आज तक रविंदर सिंह जैसे लोगों ने कभी भी खुलकर पाकिस्तानी आतंक या उस तालिबान के कुकृत्यों पर नहीं बोला होगा जिन्होंने औरों का जीना हराम कर दिया है।

पाकिस्तान में तो आए-दिन हिन्दू नाबालिग लड़किया उठाई जाती है, उनका बलात्कार होता है फिर धर्म परिवर्तन कराकर उसी रेपिस्ट मुस्लिम से निकाह करा दिया जाता है जिसने उसकी अस्मत लूटी। बाकी जिस तालिबान का ये नाम ले रहे हैं उसका काम है सार्वजनिक रूप से पत्थरबाज़ी करना, महिलाओं को सार्वजनिक रूप से बोलने से रोकना, लड़कियों को कक्षा आठ से ऊपर शिक्षा प्राप्त करने से रोकना, मनोरंजन के सभी रूपों पर प्रतिबंध लगाना और 6वीं शताब्दी के स्मारक को तोड़ देना। इन सब पर तो कभी नहीं बोला होगा लेकिन गुरुग्राम में ‘हिन्दू तालिबान’ नजर आ रहा है।

इतना ही नहीं रविंदर सिंह ने मंगलवार को मांस पर प्रतिबंध को “धर्म थोपने” के रूप में स्पष्ट रूप से तालिबान के उस हिंसक रूप से जोड़ दिया जिसके लिए वह जाना जाता है।

इससे पहले, उन्होंने कोरोनोवायरस वैक्सीन का मजाक उड़ाते हुए अपने वही वामपंथी गौमूत्र वाले कटाक्ष के साथ सुर्खियों में आए थे। कोरोना वायरस वैक्सीन पर द वायर की पत्रकार रोहिणी सिंह के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए, रविंदर सिंह ने कहा था कि जब हमारे पास गोमूत्र इलाज के रूप में हैं तो हम (भारतीयों) को वैक्सीन की आवश्यकता क्यों होगी।

रविंदर सिंह इस बात पर चिंता व्यक्त कर रहे थे कि क्या भारत में राज्य सरकारों ने अपने हिस्से का वैक्सीन रिज़र्व कर दिया है जबकि दुनिया भर के देश ऐसा कर रहे हैं। लेकिन भारत में गोशालों और लव जिहाद पर बात हो रही है क्योंकि लोगों ने इसी के लिए वोट दिया था न कि वैक्सीन के लिए। ये सब देख कर लगता है कि कितना जहर भरा है इस देश के बहुसंख्यक लोगों के प्रति।

रविंदर सिंह के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

गौरतलब है कि यह सब आज का नहीं है पहले भी रविंदर ने हिंदू धर्म और संस्कृति का अपमान करने के लिए अपना पूरा समय दिया। पिछले महीने, रविंदर सिंह ने अपने 1 मिलियन फॉलोवर को हिंदू धर्म और हिंदुत्व के बीच के अंतर को समझाने की कोशिश की, ऐसे में सिंह ने खजुराहो जैसे मंदिरों की तुलना ‘पोर्न फिल्मों’ से की।

रविंदर सिंह के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

इससे पहले ये नागरिकता संशोधन कानून के बारे में फर्जी न्यूज़ और गलत सूचनाएँ फैलाने में जी जान से लगे रहे, जो कि तीन पड़ोसी इस्लामी देशों में हिंदुओं, सिखों, जैनियों और ईसाइयों सहित धार्मिक अल्पसंख्यकों को सताए जाने के लिए भारतीय नागरिकता सुलभ कराने के लिए लाया गया है।

रविंदर सिंह के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

यहाँ यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि सीएए किसी भी भारतीय, मुस्लिम या अन्यथा उनके मजहब विशेष के आधार पर लागू नहीं है। और न ही कहीं इस बात का जिक्र है कि यदि भारत में रहने वाला मुस्लिम, अपनी नागरिकता साबित नहीं कर सकता है, तो उसे बाहर निकाल दिया जाएगा, सीएए कानून के अनुसार यह एक सरासर झूठ बात है। लेकिन क्या किया है ऐसे लोगों ने उस समय आपने देखा ही।

बता दें कि रविन्द्र सिंह एक-बेस्ट-सेलिंग ’लेखक हैं और अब तक 9 किताबें लिख चुके हैं। ट्विटर पर उनके एक मिलियन से अधिक फॉलोअर हैं और इंस्टाग्राम पर एक लाख से अधिक लोग हैं जो नियमित आधार पर ऐसों की हिन्दुओं के प्रति नफरत, कट्टरता और गलत सूचनाओं के संपर्क में आते हैं।

आज UP नहीं लाया जा सका मुख्तार अंसारी: व्हीलचेयर पर मोहाली की कोर्ट में हुआ हाजिर, रोपड़ जेल वापस भेजा गया

माफिया डॉन मुख्तार अंसारी बुधवार 31 मार्च 2021 को उत्तर प्रदेश नहीं लाया जा सका। उसे दोपहर में मोहाली की कोर्ट में पेश किया गया। उसे फिरौती माँगने के मामले में चार्जशीट की कॉपी देने के लिए कोर्ट लाया गया था। पेशी के बाद उसे रोपड़ जेल भेज दिया गया।

मुख्तार अंसारी को व्हील चेयर पर अदालत लाया गया था। इस दौरान वह बेसुध दिखा। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक पंजाब सरकार ने अदालत से कहा कि वह पूरी तरह से फिट नहीं है, लिहाजा कोर्ट उसे अभी यूपी न जाने दे। वहीं न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार उसने खुद को निर्दोष बताते हुए पंजाब की सरकार पर फँसाने का आरोप लगाया।

मोहाली पुलिस ने बताया कि मुख्तार को कोर्ट की प्रक्रिया के मुताबिक ही लाया गया था। मुख्तार चालान की कॉपी लेने के लिए आरोपित की हैसियत से कोर्ट आया था। अंसारी को चालान की कॉपी रिसीव कराकर कोर्ट से वापस रोपड़ जेल भेज दिया गया। मामले की अगली सुनवाई 12 अप्रैल को होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने दिया है शिफ्ट करने का आदेश

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने मुख्तार अंसारी को पंजाब की जेल से यूपी की बांदा जेल भेजने का आदेश दिया था। न्यायमूर्ति अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ ने निर्देश दिया था कि अंसारी को दो सप्ताह के भीतर यूपी को सौंप दिया जाए और फिर बांदा जेल में रखा जाए। शीर्ष अदालत ने यूपी सरकार की याचिका पर यह निर्णय दिया। याचिका में अंसारी को पंजाब से यूपी जेल में स्थानांतरित करने की माँग की गई थी।

यूपी सरकार ने शीर्ष अदालत को बताया था कि पंजाब सरकार गैंगस्टर से नेता बने अंसारी की रक्षा कर रही है। यूपी सरकार ने कहा कि 30 से अधिक एफआईआर और हत्या के जघन्य अपराध सहित 14 से अधिक आपराधिक मुकदमे और गैंगस्टर अधिनियम के तहत विभिन्न एमपी / एमएलए अदालतों में अंसारी के खिलाफ लंबित हैं, जहाँ उसकी व्यक्तिगत उपस्थिति की माँग की जाती है।

इस बीच मुख्तार अंसारी के खिलाफ POTA (आतंकवाद निरोधक अधिनियम, 2002) के तहत कार्रवाई करने वाले पूर्व डिप्टी SP शैलेन्द्र कुमार सिंह को यूपी सरकार से बड़ी राहत मिली है। उनके खिलाफ दर्ज मुकदमा योगी सरकार ने वापस ले लिया। जनवरी 2004 में वे यूपी STF की वाराणसी यूनिट के प्रभारी डिप्टी एसपी थे। उन्होंने भाजपा विधायक कृष्णनंदन राय हत्याकांड में अहम खुलासा किया था।

उन्होंने पता लगाया था कि इस हत्याकांड के लिए मुख्तार अंसारी ने ‘लाइट मशीनगन (LMG)’ की खरीद की थी। साथ ही उन्होंने उस LMG को बरामद करने में भी सफलता प्राप्त की थी। तब राज्य में मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में सपा की सरकार थी। तत्कालीन राज्य सरकार शैलेन्द्र के इस कदम से नाराज़ हो गई थी और उन पर POTA वापस लेने का दबाव बनाया जाने लगा था। इसके आगे झुकने से इनकार करते हुए शैलेन्द्र सिंह ने यूपी पुलिस सेवा से इस्तीफा दे दिया था।

रवींद्र जडेजा की पत्नी (BJP नेता) ने लड़कों-मर्दों को झाड़ू-कचरा से जोड़ा, बहुतों को लग गई मिर्ची

भारतीय क्रिकेटर रवींद्र जडेजा की पत्नी हैं रीवाबा जडेजा। एक गाँव में वो महिलाओं को लड़कियों के विकास से संबंधित विभिन्न योजनाओं के बारे में समझा रही थीं। इसी दौरान उन्होंने एक ऐसा बयान दिया, जो सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में है।

रीवाबा को ग्रामीणों को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि लड़का हो या लड़की, स्त्री हो या पुरुष… घरेलू कामों में सबको हाथ बँटाना चाहिए। इसके लिए उन्होंने अपने क्रिकेटर पति का उदाहरण दिया।

रीवाबा जडेजा ने सबको बताया कि जब रवींद्र जडेजा को कोई काम करने की जरूरत नहीं भी होती है, तो भी वो मदद करने के लिए रसोई में आते हैं और चाय बनाते हैं।

रीवाबा की यह वीडियो वायरल हो गई है। कई लोग इसे अच्छा बता रहे हैं, तो कई इसके खिलाफ हैं। इस वीडियो में वो कहती हैं कि घर में झाड़ू लगाने से दरबारियों (उनका मतलब राजपूत से था, जो उनकी जाति है) की इज्जत में कोई कमी नहीं आएगी।

रीवाबा जडेजा ने आगे जोर देकर कहा कि हम अपनी बेटियों को समाज में अच्छे से रहना सिखाते हैं, उन्हें शिक्षित करते हैं और उन्हें अपनी संस्कृति के बारे में सिखाते हैं। लेकिन इससे विपरीत हम शायद ही कभी अपने लड़कों से इन्हीं सब बातों को लेकर बातचीत भी करते हैं।

रीवाबा के इस वीडियो के वायरल होने पर समर्थन और असहमति दोनों पक्षों में सोशल मीडिया पर चर्चा हो रही है। अपने आप को स्पष्ट करने के लिए, उन्होंने गुजराती समाचार चैनल वीटीवी को एक साक्षात्कार भी दिया, जहाँ उन्होंने फिर से अपने दृष्टिकोण और मैसेज के बारे में खुल कर बात रखी।

उन्होंने सवाल किया कि समाज में ‘कन्या केलव्नी’ (kanya kelavni, लड़कियों को कौशल-विकसित बनाने की शिक्षा) के बारे में बात की जाती है। लेकिन क्यों ‘कुंवर केलव्नी’ (kunwar kelavni, लड़कों को कुशल-विकसित बनाने की शिक्षा) के बारे में बात नहीं की जाती? एक उदाहरण देते हुए उन्होंने पूछा, “जब एक परिवार में एक लड़का और एक लड़की होती है, तो वे लड़की को प्लेट सिंक में डालने के लिए कहेंगे। लोग अपने बेटों को सिंक में प्लेट रखने के लिए नहीं कहते हैं। जबकि अपना काम करने से कोई छोटा या बड़ा कैसे हो सकता है?”

रीवाबा जडेजा की जो वीडियो क्लिप वायरल हुई है, वह सिर्फ 30 सेकंड की है, जबकि ग्रामीणों के साथ उनकी बातचीत लगभग 2.5 घंटे हुई थी। रीवाबा ने बाद में स्पष्ट किया कि उनका मैसेज किसी विशेष जाति, समुदाय या लिंग के लिए नहीं था। बल्कि उनके कहने का मकसद यह था कि आम कामों के लिए किसी दूसरे के ऊपर निर्भर रहने के बजाय सभी (लड़का हो या लड़की) को सीखने चाहिए।

आपको बता दें कि रीवाबा जडेजा 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले भाजपा में शामिल हुई थीं। पार्टी में उनके शामिल होने के समय गुजरात के कृषि मंत्री आरसी फलदू और सांसद पूनम महाजन मौजूद थे।

बंगाल में गोत्र वार: टीएमसी MP महुआ मोइत्रा के ‘चोटीवाले राक्षस’ पर बोले गिरिराज- धोते रहिए रोहिंग्या के पैर

पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण में 30 विधानसभा सीटों पर 1 अप्रैल को वोट डाले जाएँगे। उससे पहले गोत्र की सियासत गरमा गई है। इसकी शुरुआत मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के एक बयान से हुई। उसके बाद से केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह और तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा के बीच ट्विटर पर जंग छिड़ गई है।

ममता को जवाब देते हुए गिरिराज सिंह ने पूछा था कि क्या रोहिंग्या और घुसपैठियों का भी गोत्र शांडिल्य है। उन्होंने ट्वीट कर कहा था, “रोहिंग्या को वोट के लिए बसाने वाले, दुर्गा-काली पूजा रोकने वाले, हिंदुओं को अपमानित करने वाले, अब हार के खौफ से गोत्र पर उतर गए। ‘शांडिल्य गोत्र’ सनातन और राष्ट्र के लिए समर्पित है, वोट के लिए नहीं।”

इसके जवाब में महुआ मोइत्रा ने ट्वीट किया, “केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह कहते हैं कि ममता का गोत्र रोहिंग्याओं का है। हमें इस पर गर्व है। ये चोटीवाले राक्षस गोत्र से तो कहीं बेहतर है।”

अब इसका जवाब देते हुए गिरिराज ने ट्वीट किया है, “शिखा/चुटिया हिंदुस्तान की सनातन सभ्यता और संस्कृति का अभिन्न अंग रहा है और वोट की खातिर सनातन को गाली देना उचित नहीं है। रोहिंग्या के पैर धोते रहिए…जल्द ही हिदुस्तान जवाब माँगेगा।”

गौरतलब है कि नंदीग्राम में मंगलवार (30 मार्च 2021) को ममता बनर्जी ने बताया कि चुनाव प्रचार के दौरान वे एक मंदिर में गईं तो पुजारी ने उनका गोत्र पूछा और उन्होंने अपना गोत्र ‘माँ-माटी-मानुष’ बताया। रैली में ममता बनर्जी ने कहा कि उनका गोत्र ‘शांडिल्य’ है किन्तु वो अपना गोत्र ‘माँ-माटी-मानुष’ बताती हैं।

नंदीग्राम में भी 1 अप्रैल को मतदान होगा। यहाँ ममता बनर्जी और भाजपा के शुभेंदु अधिकारी के बीच मुकाबला है।

इशरत जहाँ आतंकवादी ही थी… नहीं होने का कोई सबूत नहीं: कोर्ट ने ‘फेक’ एनकाउंटर में पुलिसकर्मियों को बरी किया

सीबीआई की विशेष अदालत में इशरत जहाँ एनकाउंटर मामले में क्राइम ब्रांच के तीन अधिकारियों की ओर से की गई कार्यवाही को जायज ठहराया है। सीबीआई की विशेष अदालत ने आखिरी तीन आरोपित आईपीएस अधिकारी तरुण बारोट, जीएल सिंघल और सहायक उप निरीक्षक अनाजू चौधरी को भी आरोप से बरी कर दिया है। सभी पर इशरत जहाँ, जावेद शेख उर्फ ​​प्राणेश पिल्लई और दो अन्य लोगों का जून 2004 में ‘फर्जी’ एनकाउंटर करने का आरोप था।

पिछले दिनों तीनों ही अधिकारियों ने आरोपों से मुक्त करने की अर्जी लगाई थी। इससे पहले तत्कालीन महानिदेशक पीपी पांडे, तत्कालीन डीआईजी डी जी वंजारा व तत्कालीन पुलिस उपायुक्त एन के अमीन को भी आरोपों से मुक्त कर दिया गया था। अदालत ने कहा कि क्राइम ब्रांच के अधिकारी जी एल सिंघल, तरुण बारोट व अनाजू चौधरी ने आईबी से मिले इनपुट के आधार पर कार्यवाही की जैसा उन्हें करना चाहिए था। 

अदालत ने यह भी कहा कि इशरत को आतंकवादी नहीं मानने का कोई कारण नजर नहीं आता है। कोर्ट ने कहा कि इशरत जहाँ, लश्कर ए तैयबा की आंतकी थी, इस खुफिया रिपोर्ट को नकारा नहीं जा सकता, इसलिए तीनों अधिकारियों को निर्दोष बताते हुए बरी किया जाता है।

पुलिस अधिकारियों ने जिस घटना को अंजाम दिया वह परिस्थिति के हिसाब से सही थी तथा उनके द्वारा यह जानबूझकर किया गया हो, ऐसा नहीं लगता है। इशरत जहाँ व उसके तीन साथियों जावेद शेख, अमजद अली व जीशान जौहर को क्राइम ब्रांच ने जून 2004 में एक एनकाउंटर में मार गिराया था। इस एनकाउंटर मामले में गुजरात के पूर्व पुलिस महानिदेशक पी पी पांडे पूर्व आईपीएस एवं क्राइम ब्रांच के मुखिया डी जी बंजारा तथा पुलिस उपाध्यक्ष एनके अमीन को भी आरोपित बनाया गया था।

महाराष्ट्र: होलिका दहन में मुस्लिम भीड़ का उत्पात, पानी डाला-लात मारी; मंदिर में ‘अल्लाहु अकबर’ के बाद दूसरी घटना

महाराष्ट्र के अकोला जिले में एक मंदिर में मुस्लिम भीड़ द्वारा होलिका दहन में विघ्न उत्पन्न करने की खबर आई है। लगभग 200-300 की संख्या में आई मुस्लिम भीड़ ने होलिका दहन के दौरान उस पर न सिर्फ पानी उड़ेल दिया, बल्कि लात से मार-मार कर आग को बुझा दिया। सोशल मीडिया पर ये वीडियो तेज़ी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद हिन्दुओं ने आक्रोश जताते हुए महाराष्ट्र की उद्धव सरकार से कार्रवाई की माँग की है।

यह घटना अकोला के पोला चौक स्थित हनुमान मंदिर की है। यह मंदिर मुस्लिमों के प्रभाव वाले इलाके में है। आरोप है कि जब हिन्दू होलिका दहन के कार्यक्रम में लगे हुए थे, तभी मुस्लिम भीड़ वहाँ आ गई और दोनों में संघर्ष होने लगा। इसके बाद मजहबी भीड़ ने होलिका की आग को बुझा दिया। लात मार कर उसका अपमान किया और हिन्दुओं को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा।

इस मंदिर को ‘उदासी मठ’ के रूप में भी जाना जाता है, जो काफी प्राचीन है। महाराष्ट्र भाजपा सोशल मीडिया के सदस्य स्वानंद कोंडोलिकार ने बताया कि मंदिर मुस्लिम बहुल क्षेत्र में स्थित है। उन्होंने जानकारी दी कि इस मंदिर को पिछले कई वर्षों से नज़रअंदाज़ किया जाता रहा है। ऐसे में पिछले कुछ महीनों से कुछ हिन्दू युवकों ने यहाँ शनिवार के शनिवार नियमित रूप से हनुमान चालीसा और आरती की शुरुआत की है।

इससे पहले भी महाराष्ट्र से इस तरह की एक और घटना सामने आई थी। लगभग 50 से 60 मुस्लिम कट्टरपंथियों ने मलंगगढ़ किले के ऊपर बने मच्छिंद्रनाथ के प्राचीन मंदिर में घुसकर हिंदू श्रद्धालुओं की आरती को बाधित करने के लिए ‘अल्लाह-हू-अकबर’ के नारे लगाए। हिंदू पारंपरिक आरती कर रहे थे, तभी मुस्लिमों की भीड़ ने मच्छिंद्रनाथ मंदिर में प्रवेश किया और इसे बाधित करने का प्रयास किया।

​2 ठिकानों पर रेड-8 घंटे पूछताछ, तब गिरफ्तार हुआ एजाज खान: बोला- बीवी का हुआ है गर्भपात, खाती है नींद की गोलियाँ

अभिनेता एजाज खान को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने मंगलवार (मार्च 30, 2021) को मुंबई एयरपोर्ट से हिरासत में लिया था। मुंबई में दो ठिकानों पर हुए रेड में एजेंसी को बड़ी सफलता हाथ लगी थी। एजाज़ खान से 8 घंटे चली पूछताछ के NCB ने उसे गिरफ्तार कर लिया। ड्रग्स से जुड़े एक मामले में ये कार्रवाई की गई। अब NCB उसे रिमांड पर लेने के लिए कोर्ट में पेश करेगी।

कोर्ट में पेश किए जाने से पहले एजाज खान को मेडिकल चेकअप के लिए अस्पताल ले जाया गया। एजाज खान का कहना है कि उसके घर से मात्र 4 नींद की गोलियाँ ही मिली थीं। उसकी बीवी का गर्भपात हो गया था, जिस कारण वो ‘एंटी-डेप्रेसेंट्स’ के रूप में उन गोलियों का प्रयोग करती थी। ड्रग्स पेडलर शादाब बटाटा के साथ पूछताछ में उसका नाम सामने आया था। एजाज के साथ अँधेरी और लोखंडवाला में तलाशी अभियान चलाई गई।

एजाज खान ने हिरासत में लिए जाने से पहले दावा किया था कि वो खुद ही NCB अधिकारियों से मिलने के लिए एजेंसी के साउथ मुंबई स्थित दफ्तर आया है। इससे पहले जुलाई 2019 में भी उसे मानहानि और हेट स्पीच मामलों में गिरफ्तार किया गया था। वह ‘बिग बॉस’ और ‘फियर फैक्टर’ जैसे रियलिटी शो का हिस्सा रहा है। 2018 में भी एजाज खान को मुंबई की एंटी नारकोटिक्स सेल ने प्रतिबंधित ड्रग्स रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के वक्त वह नशे में धुत था।

2019 में एजाज खान एक विवादित वीडियो की वजह से गिरफ्तार हुआ था। उसमें उसने कहा था, “ये सारे पंडितों की पूरी गली को इतना मारो और इनको जेल में डालो। कौन से पंडित? ये दरिंदे हैं साले। बल्कि सारे हिंदुस्तान के पंडितों को इनको अंदर करवाना चाहिए। इन्होंने पंडितों का नाम भी खराब किया है। पंडितों की जाति का नाम खराब किया है। ब्राह्मणों की जाति का नाम खराब किया है। अब तो ऐसा हो गया है कि पंडित भी मॉब लिंचिंग कर रहे हैं। मतलब ब्राह्मण पंडित भी मॉब लिंचिंग में आ गए हैं। क्या बात है यार! कमाल हो गया।”

अब दिल्ली में बताना होगा, माँस ‘झटका’ है या ‘हलाल’: NDMC ने भी रेस्टॉरेंट-दुकान पर बोर्ड लगाने के दिए निर्देश

मीट 'झटका' है या 'हलाल'। यह बात अब नॉर्थ दिल्ली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (NDMC) के अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी रेस्टॉरेंट्स, ढाबे और मीट की दुकानों को बताना होगा। NDMC के मेयर जय प्रकाश ने कहा है कि हिन्दुओं और सिखों के लिए 'हलाल' माँस निषिद्ध है, ऐसे में एक प्रस्ताव पारित कर के सभी रेस्टॉरेंट्स, ढाबे और मीट की दुकानों को निर्देश दिया गया है कि वो अपने प्रतिष्ठानों के सामने पोस्टर लगा कर बताएँ कि वे 'हलाल' माँस सर्व करते हैं, या फिर 'झटका'।

ईस्ट और साउथ MCD में भी इसी तरह का प्रस्ताव पारित किया जा चुका है। फिलहाल दिल्ली की सभी 3 नगर निगमों में भाजपा की सत्ता है। 2022 में दिल्ली में स्थानीय निकाय का चुनाव भी होना है। मेयर जय प्रकाश ने बुधवार (मार्च 31, 2021) को बताया कि आज हुई बैठक में इस प्रस्ताव को पास किया गया। सभी प्रतिष्ठानों को अब बेचे या खिलाए जाने वाले माँस के ‘झटका’ या ‘हलाल’ होने की जानकारी देनी होगी।

NDMC की स्टैंडिग कमिटी ने इस प्रस्ताव को पेश किया था। जहाँ ‘झटका’ मीट के लिए पशु को तुरंत ही मार दिया जाता है, वहीं ‘हलाल’ मीट के लिए उसके एक खास नस को काट कर धीमे-धीमे मरने के लिए छोड़ दिया जाता है। नॉर्थ दिल्ली में चाँदनी चौक, दरियागंज और कश्मीरी गेट जैसे इलाके भी हैं, जहाँ माँस की दुकानें, रेस्टॉरेंट्स और ढाबे बड़ी संख्या में हैं। दिसंबर 2020 में साउथ MCD ने भी ऐसा ही प्रस्ताव पारित किया था।

ईस्ट MCD ने 2018 में ही ऐसा फैसला ले लिया था। हालाँकि, कई रेस्टॉरेंट्स और मीट की दुकानों के मालिकों ने इस कदम का विरोध किया है। उनका कहना है कि इससे न सिर्फ उनके कारोबार पर असर पड़ेगा, बल्कि मुस्लिमों के स्वामित्व वाले ‘हलाल’ दुकानों और रेस्टॉरेंट्स का कारोबार ठप्प हो जाएगा, जो अधिकतर ‘हलाल’ ही पेश करते हैं। डिफेंस कॉलोनी, सरोजिनी नगर, साउथ एक्सटेंशन, अमर कॉलोनी और INA में भी मीट की कई दुकानें/रेस्टॉरेंट्स हैं।

SDMC द्वारा पारित प्रस्ताव में कहा गया था, “दक्षिण दिल्ली म्युनिशपल कॉर्पोरेशन के अंतर्गत आने वाले चार ज़ोन के 104 वार्डों में हजारों होटल-रेस्टोरेंट हैं। इनमें से लगभग 90 प्रतिशत में मांस परोसा जाता है। लेकिन किसी में यह बताया नहीं किया जाता है कि परोसा जा रहा मांस ‘हलाल’ या ‘झटका’ है।” ‘हलाल’ मीट के लिए मारे जाते समय जानवर को मुस्लिमों के पवित्र स्थल मक्का की तरफ़ ही चेहरा करना होता है और वो तड़प-तड़प कर मरता है।

वहीं गुरुग्राम का स्थानीय निकाय में भी माँस को प्रतिबंधित करने की माँग बढ़ रही है। हाल ही में सिविल बॉडी ने सभी मीट की दुकानों को आदेश दिया था कि वे मंगलवार को बंद रखें। काउंसिलर अश्विनी ने माँग की है कि सप्ताह के सातों दिन मीट की दुकानें बंद रहें। अब तक मीट के दुकानदार ही फैसला करते थे कि किस दिन उन्हें बंद रखना है। हरियाणा सरकार का कहना है कि ये MCG का फैसला है, इससे उसका कोई सम्बन्ध नहीं।

SC/ST एक्ट में फँसाने की धमकी, गर्भवती होते यौन शोषण: महाराष्ट्र की ‘लेडी सिंघम’ की सुसाइड की हर डिटेल

महाराष्ट्र की ‘लेडी सिंघम’ के रूप में जानी जाने वाली 28 वर्षीय महिला फॉरेस्ट रेन्ज ऑफिसर ने पिछले बीते गुरुवार (25 मार्च 2021) को सुसाइड कर ली थी। इसके बाद से ही इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर कई सवाल पूछे जा रहे हैं। दीपाली चव्हाण मोहिते ने अपनी सर्विस रिवॉल्वर से ही खुद को गोली मार ली थी। घटना अमरावती के हरिशाल गाँव की है, जहाँ टाइगर रिजर्व भी स्थित है। दीपाली की खून से लथपथ लाश उनके आधिकारिक फ्लैट में मिली थी।

रिश्तेदारों और सहकर्मियों ने उनकी लाश देखने के बाद इसकी सूचना पुलिस को दी। आत्महत्या के समय वह 5 महीने की गर्भवती भी थीं। दीपाली की लाश के पास से कथित रूप से एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें उन्होंने एक वरिष्ठ IFS अधिकारी पर यौन शोषण और प्रताड़ना का आरोप लगाया है। मेलघाट टाइगर रिजर्व में कार्यरत रहीं मोहिते ने सुसाइड नोट में DCF (डिप्टी कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स) विनोद शिवकुमार पर कार्रवाई की माँग की है, ताकि किसी और के साथ ऐसा न हो।

शिवकुमार पर अपने पद का दुरुपयोग करने, मानसिक प्रताड़ना देने और यौन शोषण करने के आरोप लगाए गए हैं। दीपाली ने पिछले कुछ महीनों में कई बार MTR फील्ड डायरेक्टर MS रेड्डी के समक्ष इसकी शिकायत की थी। आरोप है कि रेड्डी ने शिकायत को नज़रअंदाज़ कर आरोपित का ही साथ दिया। शिवकुमार पर शराबी होने का आरोप लगाते हुए दीपाली ने सार्वजनिक रूप से गाली-गलौज करने और शारीरिक सम्बन्ध बनाने के लिए दबाव डालने का आरोप भी लगाया है।

आरोप है कि जब दीपाली ने शिवकुमार की इन हरकतों का विरोध किया तो DCF ने उन्हें कठिन असाइनमेंट्स देना शुरू कर दिया और सैलरी रोक कर व्यस्ततम वर्क शेड्यूल दे दिया। वो रात को मिल कर अश्लील बातें करने का दबाव बनाता था। एक टूरिस्ट कॉम्प्लेक्स में अकेले बुला कर सेक्सुअल फेवर माँगता था। साथ ही दीपाली ने ये बड़ा आरोप भी लगाया कि शिवकुमार ने SC/ST एक्ट के तहत उसके खिलाफ मामला दर्ज करवाने की धमकी दी थी।

दीपाली ने लिखा है कि मंगिया गाँव के कुछ लोगों ने उन पर SC/ST एक्ट लगाने की धमकी दी थी। आरोप है कि जब दीपाली शिवकुमार को इसके बारे में बताया, तो उसने कहा कि वो देखेगा कि SC/ST एक्ट की किन धाराओं के तहत दीपाली को जेल होगी और वो सज़ा सुनिश्चित करेगा। ग्रामीणों ने दीपाली को नजरबन्द कर दिया था और सूचना मिलने पर शिवकुमार ने इसे ड्रामा करार दिया था।

एक सहकर्मी के मुताबिक फरवरी 2020 में शिवकुमार ने दीपाली को सैकड़ों किलोमीटर की तीन दिन की पेट्रोल ड्यूटी के लिए बाध्य किया था। उस समय वह गर्भवती थी। बाद में उसका गर्भपात हो गया, जिसके कारण वह गहरे अवसाद में थी। उप-मुख्यमंत्री अजित पवार ने इस मामले में जाँच की बात कही है। महाराष्ट्र सरकार ने फ़िलहाल MS रेड्डी को सस्पेंड कर दिया है। वहीं विनोद शिवकुमार को भी सस्पेंड कर गिरफ्तार कर लिया गया है। दीपाली जंगल के तस्करी और फॉरेस्ट माफिया गिरोह के खिलाफ कार्रवाई के बाद मशहूर हुई थीं।

कोरोना वैक्सीन के लिए छुट्टी, पत्रकारों के लिए स्पेशल जाँच कैंप: जमीनी और प्रैक्टिकल स्तर पर योगी सरकार का काम

कोविड के बढ़ते संक्रमण के दौर में उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने पत्रकारों के लिए स्पेशल मुहिम चलाई है। उत्तर प्रदेश सरकार का सूचना विभाग 31 मार्च को एक कैम्प का आयोजन कर रहा है।

28 मार्च को भी एक ऐसा ही कैम्प लखनऊ के मीडिया सेंटर में लगाया गया था। लेकिन किसी कारणवश सिर्फ 60 पत्रकारों ने ही उस दिन अपनी जाँच कराई थी। इस संख्या को बढ़ाने और अधिक से अधिक पत्रकारों की जाँच के लिए दूसरी बार यह कैंप लगाई गई।

पत्रकार, कोरोना संक्रमण और जाँच

कोरोना संक्रमण को रोकने का सबसे कारगर तरीका इसकी टेस्टिंग ही है। चूँकि हर हमेशा काम को लेकर बाहर रहने वाले पत्रकारों को इसके संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है, इसलिए ऐसे पत्रकार जो किसी कोविड पेशेंट के संपर्क में पिछले दिनों आए हों या वो किसी तरह का लक्षण महसूस कर रहे हों, तो वे मीडिया सेंटर में जाकर अपनी जाँच करवा सकते हैं।

लखनऊ के मीडिया सेंटर में कोरोना जाँच का यह कैंप 11 बजे दिन के बाद शुरू होगा।

कोरोना वैक्सीन के लिए छुट्टी

वोटिंग के लिए छुट्टी को लेकर सरकारी आदेश के बारे में अब तक सुना होगा। अब यही व्यवस्था कोरोना वैक्सीन को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार ने की है। प्रदेश सरकार के आदेश के अनुसार कोरोना वैक्सीन के लिए लोगों को छुट्टी दी जाएगी। यह छुट्टी सरकारी और प्राइवेट कर्मचारियों दोनों को मिलेगी।

20 लाख कोरोना वैक्सीन लगाने वाला पहला राज्य UP

कुछ दिन पहले उत्तर प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य बना था, जहाँ 20 लाख लोगों को कोरोना वैक्सीन का लाभ मिला। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस उपलब्धि पर संतोष जाहिर किया था। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि सारी चीजें पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए और पोर्टल पर प्रत्येक दिन के टीकाकरण के आँकड़ों को अपलोड किया जाए।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया था कि नियमित मॉनीटरिंग करते हुए लक्षित आयु वर्ग के अधिक से अधिक लोगों को इसके लिए प्रेरित और प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि जिले में बने इंटीग्रेटेड कमांड और कंट्रोल सेंटरों का उपयोग भी टीकाकरण के लिए किया जाए।

‘TIME’ मैगजीन में CM योगी के कोरोना नियंत्रण पर लेख

कोरोना काल में उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा किए गए कार्यों की गूँज दुनिया भर में सुनाई दे रही है। अंतरराष्ट्रीय ‘Time’ मैगजीन में छपे एक लेख में इसकी चर्चा हुई। ‘Time’ मैगजीन में छपे लेख में कहा गया है कि कोरोना से निपटने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उठाए गए क़दमों से पूरी दुनिया प्रभावित है और WHO ने भी इसकी प्रशंसा की है।

मजदूरों को स्वच्छ भोजन और पानी देने, कम्युनिटी किचेंस की व्यवस्था और लॉकडाउन में उनके बीच 6.75 करोड़ फ़ूड पैकेट्स बाँटने जैसे क़दमों की प्रशंसा की गई है। विभिन्न पेंशन योजनाओं के तहत 86.8 लाख लोगों को 2 महीने का एडवांस पेंशन दिया गया।