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‘BDO रहते मैंने बिना जाँच-पड़ताल वोटर लिस्ट में जोड़े थे आप सब के नाम’: कॉन्ग्रेस उम्मीदवार का खुलासा, सालों से चल रहा खेल

असम में कॉन्ग्रेस की एक उम्मीदवार ने खुद ही उस आरोप को सिद्ध कर दिया, जो भाजपा उस पर कई वर्षों से लगाती रही है और राज्य में कई लोगों का भी ऐसा मानना है। दरअसल, नगाँव के बटद्रवा विधानसभा क्षेत्र से कॉन्ग्रेस उम्मीदवार सिबमोनी बोरा ने साबित कर दिया कि बिना वेरिफिकेशन के वोटर लिस्ट में कई लोगों का नाम जोड़वाने में सरकारी अधिकारियों ने मदद की है। बोरा पहले BDO रही हैं।

उन्होंने बतौर सरकारी अधिकारी अपने कार्यकाल को याद करते हुए कहा कि जब वो BDO हुआ करती थीं तो उन्हें चुनावी ड्यूटी भी मिलती थी और उस दौरान वो बिना किसी वेरिफिकेशन के लोगों को वोट डालने के लिए अंदर भेज देती थीं। उन्होंने कहा, “इस तरह मैं क्षेत्र के लोगों की सेवा राजनीति जॉइन करने से पहले से ही करती आ रही हूँ, जब मैं सरकारी अधिकारी थी।” बता दें कि असम में लगातार 15 वर्ष कॉन्ग्रेस की सरकार थी।

सर्वानंद सोनवाल के मुख्यमंत्री बनने से पहले दिवंगत कॉन्ग्रेस नेता तरुण गोगोई ने वहाँ हैट्रिक लगाई थी। एक न्यूज़ चैनल द्वारा शेयर किए गए वीडियो में सिबमोनी बोरा को कहते हुए सुना जा सकता है, “मैं और मेरे पिता जनता के लिए वर्षों से काम कर रहे हैं। मैं दावा कर सकती हूँ कि आप में से अधिकतर को मेरे कारण वोट डालने का अधिकार मिला। जब मैं यहाँ BDO थीं तो वोटर लिस्ट के वेरिफिकेशन/अपडेट के लिए कई बार सुनवाई हुई।”

उन्होंने आगे कहा, “तब मैं बिना किसी के घर गए या जाँच-पड़ताल किए ही सभी आवेदनों को स्वीकार कर लेती थी और वोटर लिस्ट को अपडेट कर देती थी। जो यहाँ आज वोट देने आएँगे, उन्हें मैंने इस लायक बनाया है। अगर मैंने उस वक़्त ऐसा नहीं किया होता तो आप सभी के मताधिकार छिन गए होते।” उन्होंने कहा कि ऐसे वोटरों को अब डरने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि कॉन्ग्रेस के नेतृत्व में महागठबंधन की सरकार बनेगी।

कॉन्ग्रेस उम्मीदवार ने अपने भाषण में खुद खोली अपनी पार्टी की पोल

उन्होंने रैली में आए लोगों को डराया कि अगर कॉन्ग्रेस-AIDUF सरकार सत्ता में नहीं आती है तो उन सभी को अपने मताधिकार से वंचित होना पड़ेगा। बता दें कि असम में वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए अधिकारियों की मौजूदगी में सार्वजनिक सुनवाई होती है, जिसमें साबित करना होता है कि उक्त नागरिक मतदाता है और अवैध घुसपैठिया नहीं। चुनाव आयोग इसके लिए राज्य के ही सरकारी अधिकारियों की मदद लेता है।

कॉन्ग्रेस उम्मीदवार के इस बयान से साफ़ हो गया है कि अधिकारियों की मदद से अवैध घुसपैठियों को भी मताधिकार देने का खेल लंबे समय से चल रहा है। सिबमोनी का मुकाबला भाजपा नेत्री और असम सिनेमा की पूर्व अभिनेत्री अंगूरलता डेका से है, जो वहाँ की वर्तमान विधायक हैं। बटद्वारा असम में वैष्णव संप्रदाय के जनक शंकरदेव की जन्मस्थली है। बांग्लादेश से बड़ी संख्या में घुसपैठिए यहाँ आकर बसे हुए हैं।

असम में भाजपा को सत्ता में न लौटने देने के लिए कॉन्ग्रेस CAA और NRC के मुद्दे उछाल रही है। असम में 27 मार्च से 6 अप्रैल तक होने वाले 15वें विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी ने सोशल मीडिया पर फेक न्यूज़ को भी हथियार बनाया है। पार्टी ने ‘CAA के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों पर असम पुलिस द्वारा गोली चलाने’ का वीडियो शेयर किया, लेकिन वो 2017 का वीडियो निकला जो झारखंड पुलिस का मॉक-ड्रिल था।

MP में महिला ने बलात्कार का प्रयास कर रहे आरोपित का हँसिया से काटा गुप्तांग, दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज

मध्यप्रदेश के सीधी जिले में एक 45 साल की महिला ने एक अधेड़ उम्र के व्यक्ति के गुप्तांग को काट डाला। कथिततौर पर वह व्यक्ति महिला का रेप करने के इरादे से उसके घर में घुसा था। 

पूरा मामला गुरुवार (मार्च 18, 2021) को रात 11 बजे का है। उमरिया गाँव में महिला अपने घर पर अपने 13 साल के बच्चे के साथ अकेली थी। उसका पति काम से बाहर गया हुआ था। तभी आरोपित आया और जबरदस्ती करने लगा। बेटे को लगा कोई चोर है तो वह खुद को बचाने के लिए घर से बाहर निकल गया।

पुलिस के मुताबिक, महिला ने करीब 20 मिनट तक खुद को छुड़ाने का प्रयास किया। मगर जब आरोपित उसके ऊपर से नहीं हटा तो महिला ने खाट के नीचे से एक हँसिया निकाली और उसका गुप्तांग काट डाला।

सीधी जिले के खड्डी पुलिस चौकी के प्रभारी उप निरीक्षक धर्मेंद्र सिंह राजपूत ने शनिवार को महिला की शिकायत के हवाले से बताया कि गुरुवार को रात को 11 बजे रमेश साकेत (45) महिला के घर में जबरदस्ती घुस गया और महिला के साथ कथित रूप से जोर जबरदस्ती करने लगा और जब महिला ने विरोध किया तो वह मारपीट पर उतारू हो गया।

इसके बाद खुद को छुड़ाकर महिला पुलिस के पास पहुँची और शुक्रवार रात 1:30 बजे इस संबंध में शिकायत करवाई। पुलिस ने फौरन आरोपित को अस्पताल पहुँचाया। वहाँ से उसे संजय गाँधी मेडिकल कॉलेज में भर्ती किया गया और आगे के ईलाज के लिए उसे रेवा जिले के अस्पताल में भेज दिया गया।

पुलिस ने आरोपित के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 354, 456, 294, 506 के तहत मुकदमा दर्ज किया। वहीं आरोपित ने भी महिला के ख़िलाफ़ शिकायत लिखवाई। शिकायत के आधार पर महिला के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 327 के तहत मुकदमा दर्ज हुआ।

बता दें कि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में ये भी कहा जा रहा है कि आरोपित व्यक्ति को महिला ने ही अपने घर में साँप मारने के लिए बुलाया था। जहाँ महिला और उसके बेटों ने मारपिटाई करके उसका गुप्तांग काट दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक गुप्तांग के रीट्रांसप्लान्ट की संभावना से इंकार किया जा रहा है। उसकी उम्र 48 साल की है। वह सेमरिया जिले के सीधी का रहनेे वाला है।

कितनी पीढ़ियों तक जारी रहेगा शिक्षा और नौकरी में आरक्षण? सुप्रीम कोर्ट ने मराठा रिजर्वेशन पर सुनवाई के दौरान पूछा

शिक्षा और नौकरी में कितनी पीढ़ियों तक आरक्षण जारी रहेगा? इस सवाल का जवाब सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने मराठा रिजर्वेशन से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान जानना चाहा। 5 जजों की संवैधानिक पीठ ने शुक्रवार (मार्च 19, 2021) को इस पर सुनवाई की।

जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि आरक्षण पर कैपिंग रखने के मंडल कमेटी के फैसले पर दोबारा विचार करने की ज़रूरत है। इस दौरान कोर्ट ने सवाल उठाया कि कितनी पीढ़ियों तक शिक्षा और नौकरी में ये आरक्षण जारी रहेगा। कोर्ट ने यह भी जानना चाहा कि यदि 50% आरक्षण हटा दिया जाए तो संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत मिलने वाला समानता का अधिकार तो प्रभावित नहीं होगा।

बता दें कि 5 जजों की संवैधानिक पीठ में न्यायाधीश अशोक भूषण, एल नागेश्वर राव, एस अब्दुल नजीर, हेमंत गुप्ता और एस.रवीन्द्र भट्ट शामिल हैं। ये पीठ महाराष्ट्र राज्य आरक्षण अधिनियम की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही है। इसके तहत मराठा के लिए 16% आरक्षण किया गया था।

मंडल फैसले पर दोबारा विचार हो: मुकुल रोहतगी

अदालत में आरक्षण कानून के पक्ष में बहस करते हुए रोहतगी ने मंडल जजमेंट के कई आयामों पर बात की। उन्होंने कहा कि 10% आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को आरक्षण देने वाले केंद्र सरकार के फैसले ने 50% कैप को भंग कर दिया। उन्होंने कहा कि कई कारणों से मंडल कमेटी के फैसले पर दोबारा से गौर करने की जरूरत है, जिसे 1931 की जनगणना पर आधारित तैयार किया गया था, लेकिन आज जनसंख्या 135 करोड़ पहुँच गई है।

कोर्ट ने रोहतगी की दलीलों पर सवाल पूछा, “अगर आरक्षण पर कोई कैप नहीं रहेगी, तो समानता की कोई बात ही नहीं रह जाएगी। घूम-फिरकर फिर उसी चीज से निपटना होगा। इससे जो नई असमानता पैदा होगी, उस पर आपका क्या कहना है? हम इसे (आरक्षण को) आखिर कितनी पीढ़ियों तक जारी रखने वाले हैं?”

पीठ ने यह भी कहा कि आजादी के 70 साल बीत चुके हैं, और राज्यों को कई लाभकारी योजनाएँ चल रही हैं, और ‘क्या हम स्वीकार कर सकते हैं कि कोई विकास नहीं हुआ है, कोई भी पिछड़ी जाति आगे नहीं बढ़ी है?’

इस पर रोहतगी ने कहा, “हम बिल्कुल आगे बढ़े हैं। लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि देश में आज पिछड़ी श्रेणियों की संख्या 50 से घटकर 20 फीसदी हो गई है। मैं ये नहीं कह रहा कि पिछले नियम ख़राब थे। मैं बस ये कह रहा कि देश की आबादी काफी बढ़ चुकी है और मुमकिन है कि पिछड़े वर्ग की आबादी भी बढ़ गई। इसलिए आरक्षण के नियमों पर दोबारा विचार की ज़रूरत है।”

इससे पहले सर्वोच्च न्यायालय ने 8 मार्च को भी सभी राज्य सरकारों को नोटिस जारी करके पूछा था कि क्या आरक्षण की सीमा को 50 फीसदी से ज़्यादा बढ़ाया जाना चाहिए? इसका मकसद दो सवालों के जवाब तलाशने हैं। पहला, क्या इंद्रा साहनी जजमेंट (मंडल कमीशन केस) पर पुनर्विचार की जरूरत है? 1992 के इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण की सीमा 50% तय की थी। दूसरा, क्या 102वाँ संवैधानिक संशोधन राज्यों की विधायी क्षमता को प्रभावित करता है। यानी, क्या राज्य अपनी तरफ से किसी वर्ग को पिछड़ा घोषित कर आरक्षण दे सकते हैं या 102वें संशोधन के तहत अब यह अधिकार केवल संसद को है?

क्या है मराठा आरक्षण विवाद?

साल 2018 में महाराष्ट्र सरकार ने पढ़ाई और नौकरी में मराठा आरक्षण को 16% कर दिया था। 2019 में बॉम्बे उच्च-न्यायालय ने मराठा आरक्षण को बरकरार रखा, लेकिन आरक्षण को घटा कर नौकरी में 13 प्रतिशत और उच्च शिक्षा में 12 प्रतिशत कर दिया।बॉम्बे हाईकोर्ट की याचिका को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने वाले याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि यह आरक्षण सुप्रीम कोर्ट के इंद्रा साहनी मामले में दिए गए फैसले का उल्लंघन करता है। सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने अंतरिम आदेश में कहा है कि मराठा आरक्षण 2020-21 में लागू नहीं होगा। 

दत्‍तात्रेय होसबोले बने RSS के सरकार्यवाह, जानिए उनके बारे में सब कुछ

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की निर्णय लेने वाली सर्वोच्च इकाई अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में दत्‍तात्रेय होसबोले को राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ का सरकार्यवाह चुना गया है। अब दत्‍तात्रेय होसबोले, भैय्याजी जोशी की जगह लेंगे। बता दें कि 73 वर्षीय भैय्याजी जोशी 3-3 वर्षों के लिए 4 बार सरकार्यवाह रहे हैं। वहीं होसबोले 2009 से संघ के सह सरकार्यवाह थे।

आरएसएस के नए सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले का यह चुनाव बेंगलुरु के चेन्नहल्ली स्थित जनसेवा विद्या केंद्र में चल रही प्रतिनिधि सभा में शनिवार (मार्च 20, 2021) को हुआ। बता दें कि आज इस बैठक का आखिरी दिन है। संघ की प्रतिनिधि सभा ने सर्वसम्मति से अगले तीन साल के लिए दत्तात्रेय को सरकार्यवाह चुना है।

आरएसएस ने ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी, “बेंगलुरु: आरएसएस की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा (एबीपीएस) ने श्री दत्तात्रेय होसबोले को सरकार्यवाह चुन लिया। वह 2009 से ही आरएसएस के सह- सरकार्यवाह थे।”

गौरतलब है कि आरएएसस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख अरुण कुमार ने बताया कि भैय्याजी जोशी ने इच्‍छा प्रकट की थी कि वह 12 सालों से इस दायित्‍व को सँभाल रहे हैं और अब ये जिम्‍मेदारी किसी युवा को दी जानी चाहिए। उन्‍होंने उम्र की वजह से ये निर्णय लिया है। हालाँकि उनका स्‍वास्‍थ्‍य बिल्‍कुल ठीक है। जिस पर निर्णय लेते हुए दत्‍तात्रेय होसबोले को तीन वर्षों के लिए सर्वसम्‍मति से चुना गया है और अब वह संघ में नंबर दो के पद पर पहुँच गए हैं।

संघ में ऐसे होता है चुनाव

संघ में हर तीन साल बाद जिला संघचालक, विभाग संघचालक, प्रांत संघचालक और क्षेत्र संघचालक के साथ-साथ सरकार्यवाह का चुनाव होता है। हालाँकि, आवश्यकतानुसार बीच में भी कुछ पदों पर जरुरत होने पर बदलाव होता रहता है। क्षेत्र प्रचारक और प्रांत प्रचारकों के दायित्व में बदलाव भी प्रतिनिधि सभा की बैठक में होता है। बता दें कि संघ में प्रतिनिधि सभा निर्णय लेने वाला सर्वोच्च विभाग है।

बता दें कि एबीपीएस की वार्षिक बैठक अलग-अलग स्थानों पर होती है लेकिन हर तीसरे वर्ष यह नागपुर स्थित आरएसएस के मुख्यालय में होती है जहाँ सरकार्यवाह का चुनाव होता है। बहरहाल, महाराष्ट्र में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए इस वर्ष इसे बेंगलुरु में स्थानांतरित कर दिया गया है।

कौन हैं दत्तात्रेय होसबोले

अंग्रेजी साहित्य में परास्नातक 66 वर्षीय दत्तात्रेय होसबोले कर्नाटक के शिवमोगा जिले से आते हैं। वह साल 1968 में राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ से जुड़े थे। आपातकाल के समय दत्‍तात्रेय होसबोले ने गिरफ्तारी भी दी थी। असम में यूथ डेवलपमेंट सेंटर को विकसित करने में उन्‍होंने महत्‍वपूर्ण भूमिका भी निभाई है। शुरू में वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् (एबीवीपी) के साथ जुड़े जो आरएसएस की छात्र शाखा है।

13 वर्ष की उम्र में संघ से जुड़ाव

जानकारी के मुताबिक, दत्तात्रेय होसबोले का जन्म एक दिसंबर 1954 को हुआ। दत्तात्रेय 1968 में 13 वर्ष की आयु में संघ के स्वयंसेवक बने और 1972 में संघ की छात्र ईकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े। अगले 15 वर्षों तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के संगठन मंत्री रहे। 1978 में वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पूर्णकालिक सदस्य बने और 1990 में प्रचारक की जिम्मेदारी सँभाली। दत्तात्रेय होसबोले विद्यार्थी परिषद में क्षेत्रीय और राष्ट्रीय महामंत्री के साथ-साथ अखिल भारतीय संगठन मंत्री भी रह चुके हैं। पहले वह संघ के अखिल भारतीय बौद्धिक प्रमुख रहे और उसके बाद सह सरकार्यवाह का दायित्व सँभाला।

जेपी आंदोलन में गए जेल

इंदिरा गाँधी के दौर में हुए 1975-77 के जेपी आन्दोलन में भी वे सक्रिय थे और लगभग पौने दो वर्ष ‘मीसा’ के अंतर्गत जेल मे भी रहे। जेल से उन्होंने दो पत्रिकाओं का सम्पादन भी किया। विद्यार्थी परिषद के अलग-अलग पदों पर रहते हुए पूर्वोत्तर से दक्षिण तक काम किया।

वह संघ के ऐसे तेजतर्रार प्रचारक हैं, जो कन्नड़, तमिल, हिंदी, अंग्रेजी और संस्कृत में धाराप्रवाह बोलते हैं। एक सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर उन्होंने इंदिरा गाँधी सरकार में देश पर थोपे गए आपातकाल का तीखा विरोध किया था।

‘मोदी न होते PM तो हाथ से निकल गया होता कश्मीर’: NDTV का हर प्रोपेगेंडा ‘मेट्रो मैन’ के सामने बेपटरी

हाल ही में बीजेपी में शामिल हुए ‘मेट्रो मैन’ ई श्रीधरन केरल की पलक्कड विधानसभा सीट से मैदान में हैं। चुनाव प्रचार के दौरान एनडीटीवी ने उनसे बात की। इस दौरान उन्होंने कश्मीर से लेकर केरल तक हर मुद्दे पर NDTV के प्रोपेगेंडा का दो टूक जवाब दिया। श्रीधरन ने कहा कि यदि नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री नहीं होते तो जम्मू-कश्मीर भारत के हाथ से निकल गया होता।

अपने अनुभवों का हवाला देते हुए कहा कि 5 वर्ष में काफी कुछ बदला जा सकता है। जब उन्होंने कोचीन शिपयार्ड में कामकाज संभाला था, तब वहाँ 2 महीने में चीजों को बदल कर रख दिया था। साथ ही लोगों के रवैए में भी बदलाव आया था।

NDTV ने ने उनसे बातचीत में दावा कर डाला कि जम्मू-कश्मीर में महीनों इंटरनेट नहीं मिला और लोगों के पास संचार की कोई सुविधा नहीं थी। इस पर ई श्रीधरन ने कहा कि ये छोटे-छोटे त्याग हैं जो देश के लिए सभी को करना पड़ता है। साथ ही पूछा कि लेकिन इन सबके बीच मीडिया क्या कर रहा है? उन्होंने कहा कि मीडिया को भाजपा विरोधी पार्टियों ने खरीद लिया है।

उन्होंने NDTV के पत्रकार को राई का पहाड़ न बनाने की सलाह देते हुए कहा कि ये ठीक नहीं है और मीडिया आजकल यही कर रहा है। NDTV ने उनसे ये भी पूछ डाला कि क्या देश आज ज्यादा ध्रुवीकरण और सांप्रदायिक नहीं हो गया है? इस पर कड़ा जवाब देते हुए ई श्रीधरन ने कहा कि ऐसा कुछ भी नहीं है और ये थ्योरी उन लोगों गढ़ी गई है जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पसंद नहीं करते हैं।

उन्होंने कहा कि अधिकतर लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्वीकार कर लिया है और आप प्रोग्रेस देखिए। उन्होंने कहा कि जो लोग पीएम मोदी के विरोधी हैं, वो कहीं-कहीं से ढूँढ कर छोटी-मोटी गलतियाँ निकालते रहते हैं। उन्होंने कहा कि ये ठीक नहीं है और नरेंद्र मोदी अगर प्रधानमंत्री नहीं होते तो जम्मू-कश्मीर हाथ से निकल गया होता। उन्होंने कहा कि वो राजनीति में आलोचनाओं के लिए तैयार हैं, लेकिन जनता के लिए कार्य करते रहेंगे।

उन्होंने पूछा कि केरल में कम समय में बदलाव क्यों संभव नहीं हो सकता। साथ ही विश्वास जताया कि संभव है। केरल में भाजपा का मात्र एक विधायक होने की बात पर उन्होंने कहा कि ये सच्चाई है और हर पार्टी इसी स्तर से शुरू होती है। उन्होंने त्रिपुरा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहाँ तो एक भी विधायक नहीं था, फिर भाजपा ने कैसे सत्ता पाई? उन्होंने दिल्ली में AAP का उदाहरण देते हुए कहा कि उनका तो कोई आधार ही नहीं था।

दिल्ली में AAP ने अपने दूसरे चुनाव में ही सत्ता पा ली थी। ई श्रीधरन ने कहा कि अब भाजपा का समय है और जनता LDF और UDF, दोनों से ही तंग आ चुकी है। उन्होंने आशा जताई कि भाजपा इस बार केरल में सत्ता पाएगी। ‘मेट्रो मैन’ ने NDTV से बात करते हुए ये बातें कही। उन्होंने कहा कि वो ‘लव जिहाद’ जैसे विवादित मुद्दों पर नहीं जाना चाहते हैं, लेकिन वो सपाट और पारदर्शी तरीके से चीजों को बदलना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि सभी को अपनी तरफ लेकर आगे बढ़ना है और किसी को विरोधी नहीं बनाया जा सकता, उन्हें मुख्यधारा से अलग नहीं किया जा सकता। ई श्रीधरन ने कहा कि देश को आगे बढ़ाने के लिए सबको आगे आकर मिल-जुल कर कार्य करना होगा। ‘लव जिहाद’ पर उन्होंने ये भी कहा कि पूरी स्थिति को समझना चाहिए और भाजपा नहीं होती तो पूरा राज्य ही हाथ से निकल गया होता। उन्होंने वादा किया कि वो पलक्कड को 2 वर्षों में सबसे अच्छा विधानसभा क्षेत्र बना देंगे। उन्होंने कहा:

“मैं मूलभूत सुविधाओं की बात कर रहा हूँ। पलक्कड में तो हमारे पास ठीक-ठाक वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम तक नहीं है। मात्र 6 महीनों में इस कार्य को पूरा किया जा सकता है। यहाँ पानी की सप्लाई में समस्याएँ हैं। हमें इसका समाधान तेज़ी से निकालना पड़ेगा। इस शहर को स्वच्छ बनाना मात्र 2 माह का कार्य है। मैं बिना समय गँवाए शहर का चेहरा बदल सकता हूँ। मेरे साथ कार्यकर्ता पैदल चल रहे हैं। मैं विधानसभा क्षेत्र के हर एक व्यक्ति से व्यक्तिगत रूप से मिलूँगा। मैं एक व्यक्तिगत अपील भी लिख रहा हूँ, जो जनता के दिल को छुए।”

भारतीय जनता पार्टी को अन्य राजनीतिक दलों से अलग बताने वाले ई श्रीधरन ने कहा कि एक सप्ताह में पर्सनल अपील सबके पास पहुँच जाएगी और उनका सीधा कहना है कि अगर आप समझते हैं कि मैं बदलाव कर सकता हूँ तो मेरे लिए वोट कीजिए, वरना मत कीजिए- ये आप पर निर्भर है, मुझे फर्क नहीं पड़ता। सबरीमाला मामले पर उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी संप्रदाय की भावनाओं का अपमान नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फैसला दे दिया है, लेकिन सरकार से ऐसा नहीं कहा है कि वह सुरक्षा के बीच महिलाओं को सबरीमाला मंदिर में लेकर जाएँ और फिर वापस लेकर आएँ। उन्होंने पूछा कि आखिर सरकार ने ऐसा क्यों किया? उन्होंने कहा कि सरकार भले इनकार करे, लेकिन महिलाओं को अंदर लेकर वही गई और इसके सबूत हैं। जिन्होंने रोका, उन पर केस दर्ज किए गए। उन्होंने केरल सरकार पर सबरीमाला के श्रद्धालुओं की प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए कहा कि कोई भी समाज इसे बर्दाश्त नहीं करेगा, क्योंकि सरकार जनता के विरोध में है।

अब मनसुख हिरेन मौत के मामले की भी जाँच करेगी NIA: गृह मंत्रालय ने दी मंजूरी, महाराष्ट्र ATS आज सौंप सकता है सभी दस्तावेज

मुंबई के एंटीलिया केस में काली स्कॉर्पियो के मालिक मनसुख हिरेन की मौत के मामले की जाँच अब नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) करेगी। इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आदेश जारी कर दिए हैं। बता दें कि पहले इस मामले की जाँच महाराष्ट्र एटीएस कर रही थी। मनसुख हिरेन की संदिग्ध मौत पर काफी सवाल उठ रहे हैं। इन सवालों की जद में सचिन वाजे भी हैं, जिन्हें बीते दिनों मुंबई क्राइम ब्रांच से हटा दिया गया था और बाद में फिर निलंबित भी कर दिया गया। हिरेन की पत्नी ने वाजे पर उनके पति की मौत में संलिप्त होने का आरोप लगाया है।

मनसुख हिरेन की मौत के मामले में हत्या की आशंका को देखते हुए यह जाँच भी राष्ट्रीय जाँच एजेंसी को सौंपी गई है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र, आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) चीफ जयजीत सिंह ने इसकी पुष्टि भी कर दी है। ATS ने यह जाँच सेक्शन 8 के तहत NIA को सौंपी है। कहा जा रहा है कि ATS ने मनसुख हिरेन के मामले में अबतक 25 लोगों के बयान लिए हैं। ATS चीफ ने बताया कि केस से जुड़े दस्तावेज जल्द ही NIA को हैंड ओवर किया जाएगा।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) के एक अधिकारी ने गुरुवार (मार्च 18, 2021) को एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा था कि उन्हें व्यवसायी मनसुख हिरेन के सिर और गर्दन पर चोट के निशान मिले हैं, जिनका शव 5 मार्च को ठाणे जिले के रेटिबंदर नाले के पास मिला था।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, 48 वर्षीय ठाणे स्थित ऑटो स्पेयर पार्ट्स डीलर मनसुख हिरेन की मौत की जाँच कर रहे ATS के एक सूत्र ने कहा था कि हो सकता है कि उनकी मौत से पहले उन पर हमला किया गया हो। हिरेन का लिंक 25 फरवरी को अरबपति मुकेश अंबानी के घर के बाहर खड़ी विस्फोटक से लदी कार से जुड़ा था। हालाँकि, इस घटना के 10 दिन बाद उन्हें रहस्यमय तरीके से नाले के पास मृत पाया गया था।

एटीएस अधिकारी ने बताया था कि ऐसा लगता है कि किसी ने मनसुख हिरेन के साथ मारपीट और भारी वस्तु से हमला किया होगा और आशंका जताई जा रही है कि इस हमले की वजह से वह बेहोश हो गए होंगे। पुलिस अधिकारी ने हिन्दुस्तान टाइम्स से कहा था कि हमलावर ने उनके मुँह में चार-पाँच रूमाल ठूँस दिए और उनके पूरे चेहरे को दुपट्टे से ढक दिया।

अधिकारी ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए यह भी कहा था, “हत्यारे ने हिरेन को बेहोश करने के लिए क्लोरोफॉर्म का इस्तेमाल किया होगा या हो सकता है कि उसने कुछ अन्य साधनों का इस्तेमाल किया हो क्योंकि हिरेन का चेहरा कई तरह के रूमाल और मास्क से ढका हुआ था। बाद में (बेहोश होने के बाद) उन्हें पानी में फेंक दिया गया था।”

बता दें कि पिछले दिनों मुकेश अंबानी के मुंबई स्थित घर एंटीलिया के बाहर एक विस्फोटक लदी SUV कार पार्क की हुई मिली थी। इसके मालिक मनसुख हिरेन की शुक्रवार (मार्च 5, 2021) को लाश मिली थी। यह घटना तब हुई जब विधानसभा में पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हिरेन की सुरक्षा का मुद्दा कुछ ही घंटों पहले उठाया था। लेकिन समय रहते मुंबई पुलिस और उद्धव सरकार द्वारा कोई एक्शन न लेने के कारण मुम्ब्रा की खाड़ी में उनकी लाश मिली थी। उनकी पत्नी ने उसी समय मुंबई पुलिस के आत्महत्या के दावों को नकार दिया था।

भगवद्गीता में छिपा है जीवन का सार, स्कूल में बच्चों को पढ़ाई जानी चाहिए: ‘नागिन’ फेम मौनी रॉय

टीवी सीरियल ‘नागिन’ से प्रसिद्ध हुईं अभिनेत्री मौनी रॉय का कहना है कि स्कूलों में बच्चों को श्रीमद्भगवद्गीता पढ़ाई जानी चाहिए। एक इंटरव्यू में मौनी ने कहा कि उन्हें लगता है कि गीता, स्कूल सिलेबस का हिस्सा होना चाहिए क्योंकि उसमें जीवन से जुड़े हर सवाल के जवाब हैं। मौनी यह भी मानती हैं कि मात्र गीता के अध्य्यन से भारतीय परिवारों में पल रही रूढ़िवादी सोच खत्म हो सकती है।

मौनी रॉय के मन में गीता के प्रति इतनी आस्था है कि उन्हें लगता है केवल देश में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में गीता का पाठ करवाया जाना चाहिए। उनके मुताबिक इसमें निहित ज्ञान की पूरी दुनिया को जरूरत है। IANS से बात करते हुए टीवी एक्ट्रेस ने कहा, “मैंने श्रीमद्भगवदगीता का सार बचपन में पढ़ा था, लेकिन वो मुझे समझ नहीं आया। लॉकडाउन से पहले जब मेरे एक दोस्त ने गीता पढ़ना शुरू किया तो मैंने भी क्लास ली। व्यस्त रहने के कारण मैं कई बार वो क्लास नहीं भी ले सकी। लेकिन लॉकडाउन में मैं बहुत धार्मिक हो गई।”

वह कहती हैं, “मुझे लगता है कि ये अपने विद्यालयों का हिस्सा होनी चाहिए। मुझे सच में लगता है कि ये किताब एक धार्मिक पुस्तक से बहुत ऊपर हैं। इसमें जीवन सार है। अनन्त ज्ञान और मूल जानकारियाँ। अगर आपके दिमाग में कोई भी प्रश्न है तो गीता के पास उसका जवाब है।”

मौनी के अनुसार, “हम अज्ञानता में जीवन जी रहे हैं। हम हकीकत में वेदों और उपनिषद् वाले देश से आते है, तब भी हमें कुछ नहीं पता। हम सोने की खान पर बैठे हैं और हमें उसके बारे में पता ही नहीं है। मनोरंजन उद्योग में बहुत तनाव है। आपके पास शनिवार और रविवार का कॉन्सेप्ट नहीं होता। 9 से 5 की जॉब में हम अपने दिमाग और विचारों में पिस जाते हैं। ऐसे में निश्चित रूप से गीता की हमें आवश्यकता है। मुझे लगता है कि ग्रामीण, शहरी और सभी महानगरों में भगवद्गीता के उपदेशों की सख्त जरूरत है।”

बता दें कि टीवी एक्ट्रेस मौनी रॉय टीवी के साथ-साथ ओटीटी और बॉलीवुड में भी काम कर रही हैं। जल्द ही वह रणबीर कपूर और आलिया भट्ट के साथ वह फिल्म ‘ब्रह्मास्त्र’ में दिखाई देंगी। सोशल मीडिया पर भी उनकी आए दिन तस्वीरें देखने को मिलती रहती हैं। हाल में महाशिवरात्रि पर उन्होंने पूजा करती अपनी फोटो इंस्टाग्राम पर डाली थी।

जहाँ मिला था मनसुख हिरेन का शव, वहीं से अब शेख सलीम अब्दुल की लाश मिली: जाँच में जुटी पुलिस

मुंबई स्थित मुम्ब्रा के उस इलाके में फिर से एक लाश मिली है, जहाँ से मनसुख हिरेन की लाश बरामद हुई थी। मनसुख हिरेन उस स्कॉर्पियो कार के मालिक थे, जिसे विस्फोटक सामग्री के साथ मुंबई स्थित मुकेश अंबानी के 27 मंजिला घर एंटीलिया के बाहर पाया गया था। इस पूरे मामले में सचिन वाजे नामक पुलिस अधिकारी की गिरफ़्तारी हुई है, जो शिवसेना का नेता भी रह चुके हैं। उन्हें सस्पेंड कर दिया गया है।

अभी मनसुख हिरेन की मौत और उनके मुँह में मिलीं कई रूमालों का राज सुलझा भी नहीं था कि उसी क्षेत्र से एक और लाश मिलने से सनसनी पैदा हो गई है। ये लाश मुम्ब्रा रेती बंदर क्षेत्र से मिली। मुम्ब्रा पुलिस घटनास्थल पर जाकर जाँच कर रही है। ये वही जगह है, जहाँ मनसुख हिरेन की लाश मिली थी। मृतक की पहचान शेख सलीम अब्दुल के रूप में की गई है, जिसकी उम्र लगभग 48 वर्ष बताई गई है।

पुलिस जाँच कर रही है कि ये आत्महत्या है या फिर हत्या। उधर स्पेशल NIA कोर्ट ने सचिन वाजे की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने अपने वकील से मिलने देने का अनुरोध किया था।  NIA को शक है कि इस पूरे प्रकरण की साजिश पुलिस मुख्यालय और असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर (API) सचिन वाजे के ठाणे स्थित घर पर रची गई थी। मनसुख हिरेन पुलिस मुख्यालय में पहले भी जाते-आते रहे थे।

जाँच में खुलासा हुआ है कि वाजे ही स्कॉर्पियो चला कर ले गए और उसे पार्क करने के बाद निकल कर इनोवा में बैठ कर फरार हुए। NIA ने सचिन वाजे के सिर पर साफा बाँध कर और उन्हें कुर्ता पहना कर पूरे दृश्य को रिक्रिएट किया। मौके पर आम लोगों को रोक कर डमी स्कॉर्पियो लाया गया। CCTV कैमरों को धोखा देने के लिए सचिन वाजे ने PPE किट की तरह दिख रहा कुर्ता-पायजामा पहन रखा था।

इंस्टाग्राम/फेसबुक/व्हाट्सएप्प तो रात को 50 मिनट डाउन हुआ, बंगाल में विकास 50 साल से डाउन है: खड़गपुर में PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (मार्च 20, 2021) को पश्चिम बंगाल के खड़गपुर में एक विशाल चुनावी जनसभा को सम्बोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि ये उनका सौभाग्य है कि इतनी बड़ी संख्या में लोग भाजपा (BJP) को आशीर्वाद देने आए हैं और उनका ये उत्साह साफ-साफ कह रहा है- बंगाल में इस बार, भाजपा सरकार। उन्होंने कहा कि खड़गपुर के इस क्षेत्र में मिनी भारत की झलक मिलती है। उन्होंने कहा कि पिछली रात 50-55 मिनट के लिए व्हाट्सएप्प/फेसबुक/इंस्टाग्राम डाउन थे, लेकिन बंगाल में 50 सालों से विकास डाउन है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की विविधता, अलग-अलग भाषाओं-बोलियों की ताकत खड़गपुर देखने को मिलती है और यहाँ का इतना लंबा रेलवे प्लेटफॉर्म, भारत की पहली IIT, इस भूमि का गौरव बढ़ाते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें गर्व है कि उनकी पार्टी के पास दिलीप घोष जैसे अध्यक्ष हैं, जिन पर अनेक हमले हुए, मौत के घाट उतारने की कोशिशें हुई, लेकिन वो बंगाल के उज्ज्वल भविष्य का प्रण लेकर चल पड़े और आज पूरे बंगाल में नई ऊर्जा भर रहे हैं।

बकौल पीएम मोदी, बंगाल ने कॉन्ग्रेस के कारनामे देखे हैं, वामदल की बर्बादी को अनुभव किया है और कॉन्ग्रेस-वामदल-TMC ने जनता के सपनों को कैसे चूर-चूर किया पिछले 70 साल में यह देखा है। उन्होंने जनता से निवेदन किया कि हमें 5 साल का मौका दीजिए, 70 साल की बर्बादी को मिटाकर रहेंगे। उन्होंने याद दिलाया कि जनसंघ के जनक इसी बंगाल के सपूत थे, इसलिए अगर सही अर्थ में कोई बंगाल की पार्टी है तो वो है भाजपा।

पीएम मोदी ने बंगाल की जनता को याद दिलाया कि भाजपा के DNA में आशुतोष मुखर्जी और डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी का आचार, विचार, व्यवहार और संस्कार है। उन्होंने कहा कि जिन-जिन राज्यों में भाजपा सरकारें हैं, वहाँ केंद्र और बीजेपी की राज्य सरकार मिलकर डबल इंजन की ताकत के साथ जनता-जनार्दन की सेवा में लगे हुए हैं और ‘सबका साथ-सबका विकास और सबका विश्वास’ के मंत्र के साथ काम कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने जनता को बताया कि पश्चिम बंगाल में दीदी, विकास की हर योजना के सामने दीवार बनकर खड़ी हो गई हैं। जनता ने दीदी पर भरोसा किया, लेकिन दीदी ने उन्हें दुर्नीति दी, उनके साथ विश्वासघात किया। उन्होंने कहा कि आज दीदी, दस ‘ओन्गीकार’ की बात कर रही हैं, लेकिन उन्हें बंगाल के लोगों ने दस साल सेवा का अवसर दिया था। उन्होंने जनता को लूट-मार से भरे दस साल दिए, 10 साल का भ्रष्टाचार दिया और 10 साल का कुशासन दिया। पीएम मोदी ने कहा:

आज पश्चिम बंगाल में शिक्षा की क्या स्थिति है, ये खड़गपुर के लोग बहुत अच्छी तरह जानते हैं। शिक्षक भर्ती के नाम पर यहाँ का युवा कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाने के लिए मजबूर हैं। दीदी से पश्चिम बंगाल के लोग 10 साल का हिसाब माँग रहे हैं। अम्फान चक्रवात का हिसाब माँगो, तो दीदी गुस्सा! राशन चोरी का जवाब माँगो, तो जेल में डाल दिया जाता है! कोयला घोटाले पर जवाब माँगो, तो पुलिस से डंडे मरवाए जाते हैं! केंद्र सरकार की तरफ से बीते वर्षों में बंगाल के लिए 33 लाख पक्के घर स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से लाखों घर अब भी पूरे नहीं हो पाए हैं। दीदी को लगता है कि इन सब योजनाओं का फायदा लोगों को होगा तो वो मोदी को आशीर्वाद देंगे। शहरों में रेहड़ी-ठेला चलाने वाला गरीब पूछ रहा है कि उनको पीएम स्वनिधि के तहत आर्थिक मदद सही से क्यों नहीं मिली? आज बंगाल की बहनें पूछ रही हैं कि हर घर जल पहुँचाने के लिए TMC सरकार को जो पैसा दिया था, वो पैसा तिजोरी में रखकर क्यों बैठ गईं?”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री से पूछा कि दीदी, आपको मोदी को क्रेडिट नहीं देना था, तो मत दीजिए। लेकिन, आपने गरीब के पेट पर लात क्यों मारी? उन्होंने सवाल दागा कि आपने रेहड़ी-पटरी वालों के पेट पर लात क्यों मारी? साथ ही बताया कि देश निरंतर सिंगल विंडो सिस्टम की तरफ बढ़ रहा है, लेकिन पश्चिम बंगाल में एक अलग तरह का सिंगल विंडो सिस्टम बना दिया गया है और ये सिंगल विंडो है- भाइपो विंडो।

पीएम मोदी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में इस विंडो से गुज़रे बिना कुछ नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि स्वर्णरेखा नदी और कंसवती नदी में अवैध खनन के तार कहाँ से जुड़े हैं ये यहाँ का बच्चा-बच्चा जानता है। प्रधानमंत्री ने वादा किया कि बंगाल में भाजपा सरकार आने के बाद, इन सभी पर सख्त कार्रवाई होगी, कानून का राज स्थापित किया जाएगा। उन्होंने TMC पर हमला बोलते हुए कहा कि पिछले 10 साल में तृणमूल सरकार ने हर वो काम किया, जो यहाँ रोज़गार और स्वरोज़गार के अवसरों को रोकने वाला था।

प्रधानमंत्री ने कहा कि तृणमूल के वसूली गिरोहों, सिंडिकेट के कारण अनेक पुराने उद्योग बंद हो गए और यहाँ सिर्फ एक ही उद्योग चलने दिया गया है- माफिया उद्योग। पीएम मोदी ने जनता को आश्वस्त किया कि अब दीदी को लोकतंत्र को कुचलने नहीं दिया जाएगा। साथ ही पुलिस और प्रशासन को भी याद दिलाया कि संविधान और लोकतंत्र की मर्यादाओं से बड़ा कुछ नहीं होता है। उन्होंने कहा कि 2018 के पंचायत चुनाव में जिस तरह दीदी ने आपके अधिकारों को कुचला, वो दुनिया ने देखा है।

एंटीलिया केस: NIA को पुलिस मुख्यालय में साजिश रचे जाने का शक, मनसुख मामले में ATS को ‘तावड़े’ की तलाश

उद्योगपति मुकेश अंबानी के मुंबई स्थित घर एंटीलिया के बाहर 20 जिलेटिन छड़ें रखी हुई स्कॉर्पियो कार बरामद हुई थी। इस गाड़ी के मालिक मनसुख हिरेन की कुछ ही दिनों बाद संदिग्ध अवस्था में लाश मिली। इस पूरे मामले की साजिश रचने के आरोप में सचिन वाजे को NIA ने गिरफ्तार किया। उन्हें सस्पेंड भी किया गया। स्पेशल NIA कोर्ट ने सचिन वाजे की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने अपने वकील से मिलने देने का अनुरोध किया था।

शुक्रवार (मार्च 19, 2021) को उनके वकील ने कोर्ट में कहा कि अभी जब जाँच महत्वपूर्ण चरण में है, सचिन वाजे के मूलभूत अधिकारों का उल्लंघन न करते हुए उन्हें उनके वकील से मिलने दिया जाए। अनुरोध किया गया कि वो आपने वकील से उस समय मिलेंगे, जब उनसे पूछताछ न हो रही हो। कोर्ट ने कहा कि पूछताछ के दौरान कुछ दूरी पर वकील को उपस्थित करने की अनुमति है। वाजे की बहन अनुराधा ने भी एक याचिका दायर की है, जिसमें कहा गया है कि मीडिया ट्रायल से परिवार को प्रताड़ित किया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक NIA को शक है कि इस पूरे प्रकरण की साजिश पुलिस मुख्यालय और असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर (API) सचिन वाजे के ठाणे स्थित घर पर रची गई थी। मनसुख हिरेन पुलिस मुख्यालय में पहले भी जाते-आते रहे थे। वहाँ से NIA को मिली एक वीडियो रिकॉर्डिंग में मनसुख हिरेन और सचिन वाजे को एक ही कार में जाते हुए देखा गया है। इसके सबूत मिले हैं कि मुकेश अम्बानी के घर के बाहर सचिन वाजे ने ही विस्फोटक लदी कार रखवाई थी।

जाँच में खुलासा हुआ है कि वाजे ही स्कॉर्पियो चला कर ले गए और उसे पार्क करने के बाद निकल कर इनोवा में बैठ कर फरार हुए। NIA ने सचिन वाजे के सिर पर साफा बाँध कर और उन्हें कुर्ता पहना कर पूरे दृश्य को रिक्रिएट किया। मौके पर आम लोगों को रोक कर डमी स्कॉर्पियो लाया गया। CCTV कैमरों को धोखा देने के लिए सचिन वाजे ने PPE किट की तरह दिख रहा कुर्ता-पायजामा पहन रखा था।

मुंबई पुलिस हेडक्वार्टर में स्थित CIU के दफ्तर में भी NIA ने छापेमारी की थी। महाराष्ट्र ATS को शक है कि मनसुख हिरेन की हत्या में सचिन वाजे शामिल हैं और वो पता लगा रही है कि 4-5 मार्च को आखिर हुआ क्या था। वहीं सचिन वाजे ने FIR को आधारहीन बता कर खुद को फँसाने का आरोप लगाते हुए याचिका में कहा था कि उस समय वो दक्षिण मुंबई के डोंगरी में थे। NIA ने 2 मर्सिडीज सहित 5 वाहन जब्त किए हैं।

DCP विजयकांत सागर ने बताया कि 2018 में 25 लाख रुपए के रंगदारी मामले में सचिन वाजे के खिलाफ चार्जशीट तैयार की गई थी। वसई पुलिस थाने के इस मामले में वाजे जमानत लेने में कामयाब रहे थे। पुलिस हिरासत में ख्वाजा यूनुस की मौत के बाद सचिन वाजे ने सबूत मिटाने में अनिल यादव और अमोल पाटिल की मदद की थी। वो यादव से गुजरात में मिले थे, जहाँ एक कार में सबूत मिटाए गए थे।

अब NIA उस पुलिस अधिकारी को खोज रही है, जिसका नाम मनसुख हिरेन की पत्नी विमला ने लिया है। उन्होंने बताया था कि किसी ‘तावड़े’ ने फोन कर उनके पति को बुलाया था। टेक्निकल और ह्यूमन इंटेलिजेंस की 20 टीमें जाँच में लगी हुई है। कंदवाली पुलिस थाने के हर कर्मचारी के डिटेल्स NIA ने लिए हैं। इस मामले की लीड सचिन वाजे से आगे बढ़ ही नहीं रही है क्योंकि ‘तावड़े’ नाम का कोई पुलिस अधिकारी उस थाने में मिला ही नहीं।

उधर सचिन वाजे को ‘बेहद ईमानदार और योग्य अधिकारी’ बता कर क्लीनचिट देने के बाद शिवसेना नेता संजय राउत ने राष्ट्रीय जाँच एजेंसी पर संदेह जताया। उन्होंने कहा कि एनआईए केंद्र सरकार के इशारे पर काम कर रही है। शिवसेना नेता ने कहा कि जाँच एजेंसियों को ‘कुछ जिलेटिन की छड़ों’ के बजाय खतरनाक आतंकी गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। राउत ने कहा कि वह सचिन वाजे के लिए जवाब नहीं दे सकते, लेकिन केवल जाँच एजेंसियाँ ​​ही ऐसा कर सकती है।