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AAP विधायक सोमनाथ भारती को 2 साल की जेल: AIIMS स्टाफ पर किया था हमला, जज ने नहीं दी राहत

दिल्ली की एक अदालत ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के सुरक्षा कर्मचारियों पर हमला करने और सार्वजनिक संपत्ति को नष्ट करने के लिए AAP विधायक सोमनाथ भारती को 2016 के एक मामले में दोषी बरकार रखा। उन्हें जो 2 साल जेल की सजा सुनाई गई थी, उसे जज ने बरकरार रखा।

जज के फैसले के तुरंत बाद दिल्ली पुलिस ने सोमनाथ भारती को हिरासत में ले लिया है।

अदालत ने आईपीसी की धारा 149 और 147 के साथ ही सार्वजनिक संपत्ति अधिनियम, 1984 की धारा 3 के तहत भारती की सजा को बरकरार रखा। हालाँकि, AAP विधायक को IPC के 323 और 353 के आरोपों से बरी कर दिया गया।

गौरतलब है कि जनवरी 2021 में दिल्ली की एक अदालत ने आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक और दिल्ली के पूर्व मंत्री सोमनाथ भारती को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में मारपीट के मामले में दोषी ठहराया था। दिल्ली स्थित राउज एवेन्यू कोर्ट के अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटिन मजिस्ट्रेट रवीन्द्र कुमार पांडेय ने 2016 में दर्ज किए गए इस मामले के 4 अन्य आरोपितों को बरी कर दिया। आप विधायक पर एम्स के सुरक्षाकर्मी के साथ मारपीट का आरोप है। अदालत ने भारती को दो साल जेल की सजा सुनाई थी।

एम्स के मुख्य सुरक्षा अधिकारी ने 2016 में सोमनाथ भारती पर सुरक्षाकर्मी से मारपीट का आरोप लगाते हुए हौज ख़ास थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने सोमनाथ भारती पर दंगे भड़काने, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने, सरकारी काम में बाधा डालने का मामला दर्ज किया था। 

पिछले दिनों उत्तर प्रदेश पुलिस ने आम आदमी पार्टी विधायक को रायबरेली जाते हुए गिरफ्तार किया था। इस दौरान सोमनाथ भारती ने तैश में आकर पुलिसकर्मियों से बहस शुरू कर दी थी, तभी एक अज्ञात व्यक्ति ने आप विधायक पर काली स्याही फेंक दी थी। इस घटना के बाद सोमनाथ भारती ने उत्तर प्रदेश पुलिस और मुख्यमंत्री आदित्यानाथ को सरेआम धमकी देना शुरू कर दिया। 

स्याही मुँह पर फेंके जाने से पहले की एक वीडियो में आप विधायक कहते हैं, “और आपकी वर्दी उतरवाएँगे हम। हम पहचान रहे हैं आपको। जो-जो आज बद्तमीजी कर रहा है मेरे साथ, सबकी वर्दी उतरवाऊँगा मैं। आप हट जाइए यहाँ से।” आगे पुलिस उनसे रुकने को कहती है, जवाब में वह कहते हैं, “किस कानून में लिखा है, किस संविधान में लिखा है। हम कोई अनपढ़ मंत्री हैं?”

असम में भाजपा ने घोषणा पत्र में दिया NRC को दुरुस्त करने का भरोसा: इन 10 बड़े वादों के साथ पार्टी उतरी चुनाव में

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा (जेपी नड्डा) ने आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर आज (मार्च 23, 2021) असम में पार्टी का चुनावी घोषणा पत्र जारी कर दिया। भाजपा की ओर से उन्होंने आश्वासन दिया कि वह राज्य में सही NRC पर काम करेंगे जिससे असम की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। मौके पर असम के मुख्यमंत्री सर्बानन्द सोणोवाल और राज्य मंत्री हिमन्त बिस्वा शर्मा भी मौजूद रहे।

घोषणा पत्र लॉन्च करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष ने वादा किया कि वह असम की संस्कृति की रक्षा, असम की सुरक्षा और समृद्धि के लिए प्रतिबद्ध हैं और घुसपैठियों की पहचान करके उन्हें वापस उनके देश भेजकर रहेंगे।

मीडिया से बात करते हुए नड्डा ने कहा, “हम असली भारतीयों की रक्षा करेंगे और घुसपैठियों की पहचान करके उन्हें वापस भेजकर असम सभ्यता को सुरक्षित करेंगे।”

अपने संकल्प पत्र में भाजपा ने 10 वादे किए। पार्टी की ओर से नड्डा ने कहा कि यदि उन्हें दोबारा राज्य का नेतृत्व करने का मौका मिला तो वह अपने सभी वादों को पूरा करेंगे। घोषणा पत्र लॉन्च करते हुए नड्डा ने बताया कि पिछले 5 साल पार्टी का मकसद जाति, माटी और बेटी को सशक्त करना रहा। अब उनका वादा है कि वह राज्य में 2 लाख सरकारी, 1 लाख प्राइवेट सेक्टर में जॉब मार्च 2022 तक निकालेंगे।

नड्डा ने कहा, “ये प्रतिबद्धताएँ, विकास, कनेक्टिविटी, बुनियादी ढाँचे, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तीकरण के लिए हमारी दिशा है, और अधिक शुरुआतें समावेशी विकास के लिए हमारे उद्देश्य का एक हिस्सा हैं।”

आइए जानते हैं कि भाजपा ने असम चुनाव में कौन से 10 वादे किए हैं:

  • 1. मिशन ब्रह्मपुत्र- बाढ़ समस्या से निजात दिलाने के लिए सरकार ब्रह्मपुत्र नदी के आसपास बड़े जलाशयों का निर्माण करवाएगी। 
  • 2. ओरुनोदोई योजना: इस योजना के तहत 30 लाख परिवारों को प्रतिमाह 3,000 रुपए की आर्थिक मदद की जाएगी।
  • 3. नामघरों को ढाई लाख रुपए की आर्थिक मदद, अतिक्रमण और अवैध निर्माण को हटाया जाएगा।
  •  4. शिक्षा: सरकारी स्कूलों में मुफ्त में शिक्षा, आठवीं के बाद छात्राओं साइकिल दी जाएगी।
  • 5. एनआरसी लागू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन होगा और घुसपैठ भी रोकी जाएगी।
  • 6. परिसीमन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।
  • 7. आत्मनिर्भर असम- प्रदेश में अलग अलग क्षेत्रों को मदद दी जाएगी और उन्हें आगे बढ़ाया जाएगा।
  • 8. दो लाख लोगों को सरकारी नौकरी और प्राइवेट सेक्टर में आठ लाख नई नौकरियाँ देने का भी वादा किया गया। इसके अलावा पार्टी ने असम को सबसे तेज जॉब क्रिएयर राज्य बनाने का वादा किया है।
  • 9. स्वामी विवेकानंद के नाम योजना- युवाओं को स्टार्टअप के लिए बढ़ावा मिलेगा, इसके तहत 10 लाख से ज्यादा युवाओं को रोजगार देने का लक्ष्य होगा।
  • 10. आखिरी संकल्प के मुताबिक असम के लोगों को मजबूत करने के इरादे से जमीन के स्वामित्व का हक देने का वादा है।

बता दें कि असम में 27 मार्च से चुनाव की शुरुआत होगी। 3 चरणों में इन्हें संपन्न कराया जाएगा। परिणाम 2 मई को आएँगे। इससे पहले साल 2016 में भाजपा ने असम में ऐतिहासित जीत हासिल की थी। तब, 15 साल से सत्ता में मौजूद कॉन्ग्रेस से भाजपा ने सत्ता हासिल की थी। भाजपा और उसके गठबंधन वाली पार्टियों ने 86 सीटों पर विजय पाई थी। इनमें से 60 स्पष्ट तौर पर अकेले बीजेपी को मिली थी। एजीपी ने 14 सीट जीतीं थीं और बीपीएफ ने 12, इस बार बीपीएफ ने कॉन्ग्रेस से हाथ मिला लिया है। भाजपा का गठबंधन सिर्फ़ असम गण परिषद और यूनाइटिड पीपुल्स पार्टी लिबरल से ही है।

बंगाल: शाह ने TMC पर लगाया ‘अम्फान राहत राशि’ हड़पने का आरोप, कहा- SIT बनाकर दोषियों के खिलाफ होगी कार्रवाई

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार (मार्च 23, 2021) को पश्चिम बंगाल के गोसाबा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए ममता सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि अंफान तूफान के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने 10,000 करोड़ रुपए की सहायता राशि भेजी, लेकिन यहाँ के लोगों को कुछ नहीं मिला। भतीजा एंड कंपनी ये पैसा खा गई। भाजपा सरकार आने के बाद एसआईटी बनाकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

शाह ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी सरकार पर केंद्र की योजनाएँ राज्य में लागू ना करने को लेकर भी निशाना साधा। अमित शाह ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी जनता की बजाय केवल अपने भतीजे की भलाई के लिए काम कर रही हैं। उन्होंने कहा, “ममता दीदी भतीजे को मुख्यमंत्री बनाने में लगी हुई हैं। क्या आप उनके भतीजे को मुख्यमंत्री बनता देखना चाहते हैं? अगर नहीं तो भाजपा को वोट दें।”

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भाजपा सत्तारूढ़ तृणमूल के ‘गुंडों और सिंडिकेट’ का सामना करने को तैयार है। उन्होंने कहा, “हमें तृणमूल के इस सिंडिकेट शासन को खत्म करना है। हम इस संस्कृति को खत्म करेंगे।” 

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि आज गंगासागर के पवित्र तीर्थ की इस भूमि पर आकर मैं अपने आपको सौभाग्यशाली मानता हूँ। उन्होंने आगे कहा कि कहा जाता है कि- सारे तीर्थ बार-बार, गंगासागर एक बार। इसके साथ ही उन्होंने ममता सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि बंगाल की भूमि भ्रष्टाचार का अड्डा बन गई। 

उन्होंने कहा कि हम नोबल प्राइज की तर्ज पर टैगोर प्राइज और ऑस्कर की तर्ज पर सत्यजीत रे प्राइज लाकर हम बंगाल के दो बेटों क श्रद्धांजलि देंगे। शाह ने कहा कि बंगाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गरीबों के विकास के लिए 115 स्कीम बनाई हैं। ममता दीदी ने गरीबों को लूटने के लिए 115 स्कैम बनाए हैं। गरीबों के हक का पैसा कट मनी वाले ले जाते है। इसे बंद करने का काम भाजपा की सरकार करेगी। अपने संबोधन में अमित शाह ने फिर दोहराया कि बीजेपी की सरकार राज्य में CAA लागू करेगी और शरणार्थियों को नागरिकता देगी।

ममता बनर्जी पर शाह ने आरोप लगाया कि उन्होंने अपने 282 में से 82 वादे भी पूरे नहीं किए। दीदी अपना हिसाब नहीं देती है, लेकिन इस बार आप टीएमसी का हिसाब कर देना। अमित शाह ने ऐलान किया कि बीजेपी की सरकार बनी तो हम एक ही साल में सुंदरवन को जिला बना देंगे।

गृह मंत्री ने कहा कि आज 23 मार्च यानी शहीद दिवस है। आज के ही दिन शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव जी ने हँसते हँसते फाँसी का फँदा चूम कर, अपने प्राणों की आहुति माँ भारती को स्वतंत्र करने के लिए दी थी। मैं तीनों महान आत्माओं को श्रद्धांजलि देता हूँ।

‘अगर महिलाएँ और बच्चे शोर नहीं मचाते तो पूरी वाल्मीकि बस्ती को जला देती मुस्लिम भीड़’: सराय काले खाँ की काली रात

दिल्ली के सराय काले खाँ में एक दलित हिन्दू युवक ने एक मुस्लिम लड़की से शादी की, जिसके बाद लड़की के परिजनों ने अपने दूसरे 50 से अधिक मुस्लिम साथियों के साथ दलित बस्ती में घुस कर हमला कर दिया। मुस्लिम भीड़ ने बस्ती में हमला कर के ईंट-पत्थर चलाए व चाकू-तलवार, लाठी-रॉड न जाने किन-किन हथियारों से हमला किया। मगर जब बस्ती के हिन्दुओं ने एकजुट होकर उनका प्रतिरोध किया तो वो भाग खड़े हुए।

चूँकि, यहाँ हमले के बाद, हिन्दू छत पर थे और हमलावर भीड़ नीचे गली में, फिर भी इससे पहले कि हिन्दू संभलते, बचाव और विरोध करते तब तक 30 से अधिक गाड़ियाँ थोड़ दी गई, जिसका दरवाजा खोल पाए या खुला मिला बस्ती में उस पर हमला किया। बताया जा रहा है कि मुस्लिम भीड़ गाड़ी तोड़ने के बाद उसी में से पेट्रोल निकालकर बस्ती जलाने की कोशिश में थे, मगर बस्ती के लोगों और महिलाओं की सक्रियता ने, उनके मदद के लिए खूब तेज शोर मचाने ने इस हादसे को होने से बचा लिया।

चश्मदीदों ने बताया कि शनिवार (मार्च 20, 2021) की रात लगभग 11 बजे 50-60 की संख्या में मुस्लिम भीड़ आई। उनके हाथ में कई तरह के हथियार थे। उन्होंने बताया कि घटना वाले दिन दोपहर के 12 बजे मुस्लिम लड़की की एक रिश्तेदार, जिसका नाम शबीना (पिता का नाम सुलेमान) था, ने बस्ती में आकर धमकी दी थी। उसने कहा था कि वो शाम में खून की होली खेलेगी, शाम के समय सेलेक्ट कॉलोनी थाने में भी लड़का और लड़की दोनों पर हमला करने की कोशिश की गई लेकिन पुलिस ने समझा कर हटा दिया। लेकिन रात में सबीना ने अगुवाई करते हुए मुस्लिम भीड़ को बाल्मीकि बस्ती में लाई और इस भयावह घटना को अंजाम दिया गया।

मुस्लिम भीड़ लोगों के घर में घुसने लगी, दरवाजों को तोड़ा, महिलाओं के साथ बदतमीजी की गई, उन पर तलवार से हमला किया गया। मामले में फिलहाल अली, फैसल, हसन और अफरान नाम के चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। हमले में शामिल बाकी लोगों की अभी पहचान फिलहाल नहीं हो पाई है, क्योंकि बताया जा रहा है कि इन लोगों को हमला करने के लिए बाहर से बुलाया गया था। 

उन्होंने बताया कि जब मुस्लिम भीड़ ने मस्जिद की तरफ से प्रवेश करते हुए चारो तरफ फैलकर पहले बस्ती घेर लिया और तोड़फोड़ करते हुए काफी पथराव करने लगे। तब वहाँ के लोगों को लगा अगर लड़े नहीं तो नहीं बचेंगे। सबने छतों से और बाहर निकलकर एकजुट होकर ललकारा तब CCTV और लोगों के छतों और गली में डट जाने से मुस्लिम भीड़ भाग खड़ी हुई। उन्हें पुलिस के आ जाने का भी डर था क्योंकि लोग लगातार दिल्ली पुलिस को कॉल कर रहे थे। लेकिन लगभग इस आधे में भी उपद्रवियों ने लगभग 30 गाड़ियों को नुकसान पहुँचाया। वो लोग गाड़ियों की टंकी खोल कर आग लगाने की कोशिश कर रहे थे, बताया गया उनके एसिड भी था लेकिन लोग छतों से भारी चीज गली में फेंकने लगे थे जिससे मुस्लिमों को भागना पड़ा।

यह भी कहा जा रहा है कि गाड़ियों को गिराकर भागते समय भी कुछ लोगों ने तेजी से टंकियों से पेट्रोल निकालने की कोशिश की, ताकि बस्ती में आग लगा सकें, लेकिन बस्ती की महिलाओं और बच्चों की बहादुरी के सामने वो डर गए और भाग खड़े हुए। अगर वो पेट्रोल निकालने में कामयाब हो जाते तो कोई बड़ा हादसा हो सकता था।

बता दें कि दलित युवक सुमित के मुस्लिम समुदाय की लड़की से शादी करने से नाराज युवती के परिजनों और उनके साथियों ने शनिवार (मार्च 20, 2021) रात सराय काले खाँ गाँव की दलित बस्ती में बेखौफ जमकर उत्पात मचाया था। 50 से अधिक की संख्या में बस्ती में घुसी मुस्लिम भीड़ ने हिन्दुओं की कुल तीन गलियों को निशाना बनाया और तलवार लाठी डंडे और पत्थरों के साथ जमकर हमला कर दिया।

शादीशुदा जोड़े ने वीडियो जारी कर सुरक्षा की माँग की है। 22 वर्षीय युवक ने कहा कि उन्होंने मार्च 17 को अपनी मर्जी से शादी की है और लड़की भी बालिग है। युवक और युवती ने वीडियो जारी कर के सुरक्षा की गुहार लगाई है। उन्होंने कहा कि गली तहस-नहस कर दी गई है और धारदार हथियारों से किए गए वार में कई लोग घायल भी हुए हैं। युवक ने बताया कि उसके पिता को जान से मारने की धमकी दी जा रही है और ऐसी ही धमकियाँ उसे भी लगातार मिल रही है। युवक ने परिवार और खुद के लिए सुरक्षा की गुहार लगाई।

औवैसी के साथी अब्बास की रैली में जाने पर इंडियन सेकुलर फ्रंट के नेता के घर में लगाया आग, TMC के गुंडों पर आरोप

जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आता जा रहा है, वैसे-वैसे पश्चिम बंगाल में राजनीतिक लड़ाई तेज होती जा रही है। रविवार (मार्च 21, 2021) को पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में इंडियन सेकुलर फ्रंट (ISF) के एक नेता के घर में आग लगा दी गई। यह घटना भांगोर थाना क्षेत्र के शापा में हुई।

आईएसएफ नेता अजीत मोल्ला पार्टी प्रमुख अब्बास सिद्दीकी की रैली में भाग लेने के बाद घर लौट रहे थे, इसी दौरान उनके घर में आग लग गई। पुलिस ने बताया कि घटना में कोई घायल नहीं हुआ है।

हाल ही में इंडियन सेकुलर फ्रंट ने राज्य में लगातार हमले के लिए तृणमूल कॉन्ग्रेस पार्टी पर दोष लगाया, जबकि TMC ने आरोपों का खंडन किया है। इस मामले में भी आईएसएफ ने आरोप लगाया कि अजीत मोल्ला के घर को कथित तौर पर तृणमूल कॉन्ग्रेस के ‘गुंडों’ ने आग लगा दी क्योंकि उन्होंने रविवार को अब्बास सिद्दीकी की रैली में भाग लिया था। 

पश्चिम बंगाल पुलिस ने कहा कि उन्होंने घटना के संबंध में दो लोगों को गिरफ्तार किया है और मामला दर्ज किया है। उसी रात, पुलिस ने जिले के बरुईपुर थाना क्षेत्र में चलतबेरिया से 20 क्रूड बम भी बरामद किए।

गौरतलब है कि पिछले साल अगस्त में पश्चिम बंगाल के विवादित मौलवी अब्बास सिद्दीकी पर तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं ने हमला बोला था। फुर्फूरा शरीफ पीरजादा को दक्षिण 24 परगना के भांगर क्षेत्र में टीएमसी कार्यकर्ताओं ने घेर कर पीटा था। वहाँ वह अपने एक अनुयायी से मिलने गया था।

इस घटना का एक वीडियो क्लिप भी सामने आया था। इसमें टीएमसी गुंडों को सिद्दीकी को धमकाते, गाली देते हुए देखा गया। इसके अलावा टीएमसी के गुर्गों ने दरवाजे और खिड़कियों को तोड़ कर भी घर में घुसने की कोशिश की।

पश्चिम बंगाल में 2021 में होने वाले विधानसभा चुनाव में AIMIM के असदुद्दीन ओवैसी की एंट्री के बाद तृणमूल कॉन्ग्रेस के खेमे में बेचैनी है, क्योंकि ममता बनर्जी ने पिछले एक दशक में मुस्लिम तुष्टिकरण को लेकर खासी सक्रियता दिखाई है। अब पश्चिम बंगाल में ओवैसी को बंगाल के सबसे प्रभावशाली मौलानाओं में से एक अब्बास सिद्दीकी का साथ मिल रहा है। विश्लेषक मानते हैं कि 2011 में मुस्लिम वोट बैंक के सहारे ही ममता बनर्जी ने साढ़े 3 दशक से सत्ता पर काबिज वामपंथियों को हराया था।

मौलाना अब्बास सिद्दीकी पहले से ही विवादित चेहरा रहे हैं। अप्रैल 2020 में उन्होंने कहा किया था कि अल्लाह कोई ऐसा वायरस भेज दे, जिससे भारत में 20-50 करोड़ लोग मारे जाएँ। जब CAA को लेकर उपद्रव हो रहा था, तो उसने धमकी दी थी कि अगर इस कानून को बंगाल में वापस नहीं लिया गया तो वो कोलकाता एयरपोर्ट को ठप्प कर देगा।

‘गैर-मुस्लिमों को अल्लाह शब्द के इस्तेमाल की इजाजत नहीं, किसी ईश्वर की तुलना अल्लाह से नहीं हो सकती’: अदालत में सुनवाई

मलेशिया में इस बात पर बहस चल रही है कि क्या ‘अल्लाह’ शब्द की पवित्रता को बचाए रखने के लिए नॉन-मुस्लिमों द्वारा इसके प्रयोग पर पूर्ण पाबंदी लगा दी जाए? वहाँ की अदालत में इसी तरह का मामला चल रहा है, जिस पर मलेशिया के 13 राज्यों में से एक सेलंगोर के सुल्तान शरफुद्दीन इदरीस शाह ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने ‘अल्लाह’ शब्द को लेकर हाईकोर्ट द्वारा नॉन-मुस्लिमों पर प्रतिबंध न लगाए जाने पर आपत्ति जताई।

शरफुद्दीन ने ‘सेलंगोर इस्लामी रिलीजियस काउंसिल’ से कहा है कि वो इस मामले में हाईकोर्ट में हस्तक्षेप करे। उन्होंने कहा कि ‘अल्लाह’ शब्द मुस्लिमों के लिए पवित्र है और कोई इसका दुरुपयोग नहीं कर सकता – अपने इस स्टैंड पर वो कायम हैं। उनके राज्य ने 2010 में एक फतवा जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि अल्लाह की तुलना किसी भी दूसरे मजहब/समुदाय के ईश्वर या देवी-देवता से नहीं की जा सकती है।

उन्होंने कहा कि अगर वो इस्लाम की पवित्रता और ‘अल्लाह’ शब्द के सम्मान को बरक़रार रखने में कामयाब नहीं होते हैं तो फिर सेलंगोर में उनके इस्लाम का मुखिया होने का औचित्य ही क्या रह जाता है? उन्होंने कहा कि लोगों को न सिर्फ एक-दूसरे के मजहबों का सम्मान करना चाहिए, बल्कि किसी अन्य मजहब के संवेदनशील मुद्दों को छूने से भी बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे क्षेत्र में सांप्रदायिक एकता पर दुष्प्रभाव पड़ेगा।

साथ ही उन्होंने चेताया कि जब मुस्लिम अन्य मजहबों में हस्तक्षेप नहीं कर रहे हैं तो अन्य मजहब वाले भी मुस्लिमों और इस्लाम की इज्जत करें, खासकर ‘अल्लाह’ शब्द का सम्मान करें। मलेशिया में दिसंबर 5, 1986 को गृह मंत्रालय ने आदेश जारी किया था कि ‘अल्लाह, बैतुल्लाह और सोलत’ – ये तीन शब्द नॉन-मुस्लिमों की जुबान पर नहीं आने चाहिए। हाईकोर्ट ने इसे अवैध और असंवैधानिक बताते हुए रद्द कर दिया।

अब फिर सरकार ने अदालती आदेश के खिलाफ अपील दायर की है। जोहोर के सुल्तान इब्राहिम इस्कंदर ने भी इसके खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। शरफुद्दीन ने सभी राज्यों को ऐसा ही करने को कहा है। सरकारी आदेश को रद्द करने का आदेश जज नूर बी आरिफ़िन ने दिया था। अब मलेशिया के दो इस्लामी संस्थाओं को सुनवाई में पार्टी बनाया गया है, जिनके मौलाना कोर्ट में अपना पक्ष रखेंगे।

फिल्मी नहीं, फैमिली वाला है ये बॉलीवुड: जो कंगना ने कहा, शनाया के लिए करण जौहर ने वही दिखाया

एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद बॉलीवुड में नेपोटिज्म (भाई-भतीजावाद) का मसला खूब उछला था। खासकर कंगना रनौत इसको लेकर बेहद मुखर थीं। उनके निशाने पर खासतौर पर ​थे निर्माता-निर्देशक करण जौहर। वही करण जौहर अब शनाया कपूर के तौर पर एक और स्टार किड्स की लॉचिंग की तैयारियों में हैं।

सुशांत की मौत के बाद कंगना ने कहा था कि नेपोटिज्म उन वजहों में एक है जिसके चलते इतने प्रतिभाशाली एक्टर को दुनिया छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। उन्होंने सुशांत की मौत के मामले में कई बड़ी हस्तियों को मूवी माफिया कहकर घेरा था। कंगना का मानना रहा है कि करण जौहर बाहरी टैलेंट के प्रति असहिष्णु हैं और नेपोटिज्म की अगुवाई करते हैं।

शनाया कपूर को लॉन्च करने का ऐलान कर करण ने एक तरह से इसकी पुष्टि ही की है। शनाया, संजय कपूर की बेटी और अनिल कपूर की भतीजी हैं। करण ने शनाया की एक वीडियो शेयर करके बताया है कि इस जुलाई से शनाया बॉलीवुड प्रोजेक्ट की शूटिंग शुरू करेंगी।

5 years of Student Of The Year:
स्टूडेंट ऑफ द ईयर में आलिया भट्ट और वरुण धवन को किया गया था लॉन्च

वैसे शनाया पहली स्टार किड नहीं हैं, जिन्हें करण लॉन्च करने जा रहे हैं। इससे पहले उन्होंने महेश भट्ट की बेटी आलिया भट्ट और डेविड धवन के बेटे वरुण धवन को ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर’ के जरिए लॉन्च किया था। फिर चंकी पाडे की बेटी अनन्या पांडे को उसी फिल्म के दूसरे पार्ट में लॉन्च किया।

स्टूडेंट ऑफ द ईयर 2 में अनन्या पांडे

श्रीदेवी की बेटी जाह्ववी कपूर को धाकड़ फिल्म के जरिए बॉलीवुड में भी वही लाए थे। आलोचकों का कहना है कि करण जिस तरह से स्टार किड्स को लॉन्च करते हैं उसी आसानी से बाहर की प्रतिभाओं को मौका नहीं मिलता है।

शनाया के अलावा अभी और कुछ स्टार किड्स हैं जिनको ​जल्द ही लॉन्च किए जाने की अटकलें हैं। इस सूची में सबसे पहले शाहरुख खान की बेटी सुहाना और बेटे आर्यन खान हैं। दोनों की सोशल मीडिया पर फैन फॉलोइंग हैं और करण जौहर से अच्छे रिलेशन भी। चर्चा है कि इनमें से आर्यन को भी करण जौहर ही लॉन्च करेंगे। संभवत: वह स्टूडेंट ऑफ द ईयर 3 से बॉलीवुड करियर की शुरुआत कर सकते हैं।

सुहाना खान और आर्यन खान

इसी प्रकार चंकी पांडे के भतीजे अहान पांडे भी इस साल फिल्मों में नजर आने वाले हैं। उनके करियर की शुरुआत यशराज फिल्म से हो सकती है।

जाह्नवी कपूर और बहन खुशी कपूर

वहीं श्रीदेवी की दूसरी बेटी खुशी के भी बॉलीवुड में आने के चांस ज्यादा हैं। बस देखना ये है कि क्या उनको भी करण ही लॉन्च करेंगे, जैसे जान्हवी को किया था या कोई और प्रोडक्शन हाउस इसकी जिम्मेदारी लेगा।।

मालूम हो कि शनाया कपूर के बॉलीवुड एंट्री को लेकर नेपोटिज्म का मुद्दा फिर तूल पकड़ चुका है। करण जौहर को स्टार किड्स का गॉडफादर कहा जा रहा है। वहीं शनाया के लुक्स से लेकर एक्टिंग स्किल पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं।  लोगों का कहना है कि करण जौहर ने कंपनी ही इसलिए खोली है ताकि वह सभी स्टारकिड्स को एक्टर-एक्ट्रेस बना सकें।

अब जाहिर है कि सोशल मीडिया यूजर्स और कंगना रनौत के इल्जाम बेबुनियाद नहीं हैं। इतनी बड़ी तादाद में स्टार किड्स का बॉलीवुड में एंट्री पाना सवाल तो उठाता ही है कि क्या करण जैसे निर्देशकों के लिए अब एक्टर बनने की योग्यता स्टार किड होने तक सीमित रह गई है। अगर नहीं, तो सुशांत जैसे टैलेंट को नकारना या फिर कंगना रनौत की अंग्रेजी का मजाक उड़ाना कहाँ तक उचित है। करण के पुराने इंटरव्यू देख कर लगता है जैसे उनके लिए यह मुद्दा हँसी-मजाक की बात है। एक इंटरव्यू में करण को कहते हुए सुना जा सकता है कि नए टैलेंट को मौका देने का ठेका उन्होंने नहीं उठाया। उन्होंने कहा था, “मैं जो करना चाहता हूँ करूँगा। चाहे मैं अपने फूफे के बेटे को लॉन्च करूँ या चाची के भतीजे को लॉन्च करूँ।”

कॉन्ग्रेसी आजाद अली WhatsApp पर महिला से करने लगा गंदी बात, गिरफ्तार: पहले जताई थी महिला अपराध पर चिंता

कॉन्ग्रेस पार्टी के एक नेता को एक महिला के साथ दुर्व्यवहार के आरोप में दबोचा गया है। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून की पुलिस ने कॉन्ग्रेस नेता व पार्टी की प्रदेश कमिटी के सचिव आजाद अली को एक महिला के साथ व्हाट्सएप्प पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने के आरोप में गिरफ्तार किया है।

शिकायतकर्ता महिला एक बैंक में बतौर मैनेजर कार्यरत हैं। इंश्योरेंस को लेकर पीड़िता की आरोपित के साथ बातचीत चल रही थी। SSI लोकेन्द्र बहुगुणा ने बताया कि उक्त महिला इंश्योरेंस पॉलिसी व इससे सम्बंधित अन्य चीजों की जानकारी आरोपित कॉन्ग्रेस नेता को व्हाट्सएप्प के माध्यम से देती थीं।

आरोप है कि इसी बीच आजाद अली की नीयत बिगड़ गई और उसने महिला के साथ अभद्र और अश्लील भाषा में बातचीत की। महिला के पति को जब इस बात की जानकारी मिली तो उसने आजाद अली को व्हाट्सएप्प पर ही कॉल किया।

लेकिन, आजाद अली ने कॉल पर भी अभद्रता की। महिला के पति ने उसकी करतूतों को रिकॉर्ड कर लिया। सोमवार (मार्च 22, 2021) को महिला अपने पति के साथ शहर कोतवाली पहुँची और तहरीर दी।

पुलिस ने FIR दर्ज करते हुए आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। फिर उसे कोर्ट में पेश किया गया। हालाँकि, कोर्ट ने कहा कि चूँकि इस अपराध में सजा 7 वर्ष से कम की होती है, इसीलिए उसे कोतवाली से ही जमानत दे दी जाए।

वैसे ये पहली बार नहीं है जब आजाद अली के खिलाफ इस तरह का कोई मामला सामने आया हो। उसके खिलाफ 2006 में भी यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज किया गया था। पटेलनगर थाना और शहर कोतवाली में उसके खिलाफ दो अन्य मामले भी दर्ज हैं।

इस पूरे मामले में आरोपित आजाद अली महिला पर दोषारोपण करते हुए खुद को फँसाए जाने की दलीलें दे रहा है। उसका कहना है कि महिला 4 महीने से उससे व्हाट्सएप्प चैट कर रही थी, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया।

आजाद अली ने दावा किया कि उक्त महिला खुद को बीमा एजेंट बताते हुए उसे कॉल करती थी और उसके पास उसकी बेगुनाही के सबूत भी मौजूद हैं।

प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी के अध्यक्ष अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने आजाद अली को पार्टी से निष्काषित कर दिया है। उसे प्रदेश सचिव के साथ-साथ विशेष आमंत्रित सदस्य का पद भी मिला हुआ था। संगठन महामंत्री विजय सारस्वत ने कहा कि पार्टी नेतृत्व ने स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई की है।

आजाद अली सोशल मीडिया पर मोदी सरकार को घेरने के लिए बड़े-बड़े दावे भी करता रहा है। अक्टूबर 2020 में उसने महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ने का दावा करते हुए इस पर चिंता जताई थी। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के साथ बैठकों में भी वो शामिल होता रहा है। यहाँ तक कि उसने खुद के ही नाम से वेबसाइट भी बना रखी है, जिस पर वो खुद से जुड़ी खबरें डालता है। सहसपुर विधानसभा क्षेत्र में वो खासा सक्रिय रहता है।

‘… शायद ही लौटूँ’: सबसे सीनियर IPS ने परमबीर सिंह से पहले ही CM उद्धव को लिख दी थी चिट्ठी, अब हाई कोर्ट पहुँचे

परमबीर सिंह ने मुंबई पुलिस के कमिश्नर पद से हटाए जाने के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को एक पत्र लिखा। इसमें आरोप लगाया कि राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने सचिन वाजे को 100 करोड़ रुपए की वसूली का टारगेट दे रखा है। इस पत्र ने राज्य में सियासी भूचाल खड़ा कर दिया है। लेकिन, परमबीर सिंह से पहले एक और आईपीएस अधिकारी ने उद्धव ठाकरे को पत्र लिखा था। ये अधिकारी हैं महाराष्ट्र महाराष्ट्र पुलिस के सबसे सीनियर अधिकारी IPS संजय पांडे।

1986 बैच के IPS संजय पांडे ने यह पत्र DG होमगार्ड से तबादला होने के बाद लिखी थी। पत्र में हमेशा साइड पोस्टिंग देने की बात कहते वे छुट्टी पर चले गए। यह भी संकेत दिया कि वे शायद ही अब पुलिस की सेवा में लौटें। अब संजय पांडे ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि महाराष्ट्र में कार्यकारी DGP की नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन है। उन्होंने आरोप लगाया है कि कुछ अधिकारियों को प्रमोट करने के लिए मनमाने ढंग से ये सब किया जा रहा है।

दिसंबर 2020 में DGP सुबोध जायसवाल ने महाराष्ट्र सरकार के साथ मतभेदों के कारण केंद्रीय सेवा का विकल्प चुना था, जिसके बाद उन्हें CISF का मुखिया बनाया गया था। फिर पांडे के बाद राज्य के दूसरे सबसे वरिष्ठ अधिकारी हेमंत नगराले को DGP का अतिरिक्त प्रभार दिया गया। लेकिन, सचिन वाजे मामला सामने आने के बाद मुंबई पुलिस के आयुक्त परमबीर सिंह को DG (होमगार्ड) बना दिया गया और हेमंत नगराले को मुंबई पुलिस का कमिश्नर। फिर रजनीश सेठ को राज्य का कार्यकारी DGP नियुक्त कर दिया गया। पांडे का आरोप है कि उन्हें लगातार दरकिनार किया गया, जबकि वो वरिष्ठ हैं।

संजय पांडे फ़िलहाल महाराष्ट्र के DG (महाराष्ट्र स्टेट सिक्योरिटी कॉर्पोरेशन, MSSC) के रूप में सेवा दे रहे हैं। उन्होंने पुलिस विभाग में ट्रांसफर-पोस्टिंग में अपनी वरिष्ठता को नज़रअंदाज़ किए जाने के कारण छुट्टी ली और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र भी लिखा था।

संजय पांडे का कहना है कि जो भी हुआ वो कानून के अनुरूप नहीं हुआ और इसीलिए उन्होंने सरकार को पत्र लिख कर गलतियों को सुधारने के लिए कहा। राजनीतिक विद्वेष के मसले पर उन्होंने कहा कि 1993 मुंबई दंगों के दौरान वो जोन 8 के DCP थे और उन्होंने खेरवाड़ी क्षेत्र में शिवसेना कार्यकर्ताओं के खिलाफ न्यायसंगत कार्रवाई की थी। उन्होंने बताया कि तब शिवसेना कार्यकर्ताओं ने सड़क जाम करने से लेकर कई हरकतें की थीं।

संजय पांडे ने कहा कि सरकार एक बहुत बड़ी संस्था है और अगर वो उनसे बदला लेना चाह रही है तो इसका मतलब है कि शासन सुरक्षित हाथों में नहीं है। उन्होंने बताया कि उन्हें कुछ IPS अधिकारियों के खिलाफ जाँच की जिम्मेदारी मिली थी, जिन्हें पूरा करने के बाद उन्होंने रिपोर्ट भी सौंपी। लेकिन, पांडे का कहना है कि जब उन्हें बड़े दफ्तर में मौका देने की बारी आई तो उन्हें ऐसे नज़रअंदाज़ किया गया, जैसे कि वो इसके योग्य ही नहीं हों।

संजय पांडे ने कहा कि वे अभी तक सोच रहे हैं कि उनके साथ ऐसा क्यों किया गया? उन्होंने कहा कि उनका पत्र उनके साथ हुए अन्याय के बारे में बताता है और न सिर्फ इस सरकार, बल्कि पूर्ववर्ती सरकारों के समय भी अन्याय हुआ है। हालाँकि, इस पत्र में उन्होंने इस सरकार द्वारा किए गए कृत्यों के बारे में ही बताया है। उन्होंने कहा कि अब वो कोई नया पद नहीं लेंगे, क्योंकि उन्हें जो जिम्मेदारी दी गई थी, उन्होंने उसे छोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

उनको इस बात का गिला है कि मुंबई के पुलिस आयुक्त के रूप में उनकी वरिष्ठता पर ध्यान न देते हुए उनकी उपेक्षा की गई। उन्होंने कहा कि उनके मन में साथी पुलिस अधिकारियों के लिए कोई गलत भावना नहीं है, दिक्कत है तो सिर्फ सरकार द्वारा लिए गए फैसलों से।

सीएम ठाकरे को भेजे गए पत्र में संजय पांडे ने परमबीर सिंह पर आरोप लगाते हुए लिखा है कि ADG देवेन भारती के खिलाफ जाँच के मामले में परमबीर सिंह ने गवाहों को धमकाया था और जाँच को प्रभावित किया था। उन्होंने लिखा है कि इसके बाद अतिरिक्त सचिव ने ADG के खिलाफ जाँच रोकने का आदेश दिया था। उन्होंने लिखा कि सचिव मुंबई पुलिस को प्रभावित कर रहे हैं और दबाव बनाते हैं।

संजय पांडे के बारे में बताते चलें कि उन्होंने IIT कानपुर से पढ़ाई की है, जिसके बाद वो 1986 बैच के IPS अधिकारी बने। 1993 मुंबई दंगों में उन्होंने भाजपा नेता गोपीनाथ मुंडे को गिरफ्तार किया था। 1999 में एक ऐसा समय भी आया था जब मुंडे राज्य के गृह मंत्री थे और चमड़ा घोटाला की जाँच कर रहे DCP पांडे ने ट्रांसफर के बाद इस्तीफा दे दिया था। उनका कहना है कि हाल ही में कई गोपनीय जाँच की रिपोर्ट बनाने के बाद शरद पवार ने भी उनकी तारीफ की थी।

कमिश्नर ने ट्रांसफर रैकेट पकड़ा, CM उद्धव को दी रिपोर्ट, फिर भी कार्रवाई नहीं: फडणवीस 6.3 GB डाटा का देंगे सबूत

मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह का पत्र सामने आने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति गरम है। पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस ने दावा किया है ट्रांसफर-पोस्टिंग का रैकेट चल रहा है। इसकी रिपोर्ट मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के पास होने के बावजूद उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की।

फडणवीस ने इस संबंध में सबूत होने की बात कहते हुए कहा है कि वे केंद्रीय गृह सचिव को 6.3 जीबी डाटा सौंपेंगे। उन्होंने कहा कि वे आईपीएस और गैर-आईपीएस अधिकारियों के कथित ट्रांसफर पोस्टिंग रैकेट से संबंधित कॉल रिकॉर्डिंग और कुछ दस्तावेज व डेटा सौंपेंगे।

फडणवीस का कहना है कि इंटेलिजेंस कमिश्नर ने ट्रांसफर का रैकेट पकड़ा। इसमें शामिल संदिग्ध इंटरसेप्टेड कॉल्स की रिपोर्ट अगस्त 2020 में महाराष्ट्र के डीजी को भेजी। इस पर चिंता जताते हुए रिपोर्ट मुख्यमंत्री को भेजी गई, लेकिन कोई कार्रवााई नहीं हुई। मेरे पास 6.3 जीबी डाटा है जिसमें सारी जानकारी है।

पूर्व मुख्यमंत्री के अनुसार जब डीजी ने इस रिपोर्ट को लेकर जानकारी जुटाई तो बताया कि यह गृह मंत्री के पास भेजी गई है। उन्होंने कहा कि मैंने केंद्रीय गृह सचिव से समय माँगा है। उनसे मिलने दिल्ली जा रहा हूँ और मामले की सीबीआई जाँच की माँग करूँगा।

उल्लेखनीय है कि परमबीर सिंह ने उद्धव ठाकरे को लिखे पत्र में आरोप लगाया था कि राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने सचिन वाजे को 100 करोड़ रुपए की वसूली का टारगेट दिया था। एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने देशमुख को क्लीनचिट देते हुए कहा था कि जिस समय की बात पत्र में की गई है उस समय देशमुख अस्पताल में भर्ती थे और बाद में होम क्वारंटाइन थे। हालाँकि पवार के दावे कुछ ही घंटों में गलत साबित हो गए।

फडणवीस ने भी देशमुख को लेकर नए सबूत दिए हैं। बीजेपी नेता ने दावा किया कि पुलिस के रिकॉर्ड के मुताबिक अनिल देशमुख 17 फरवरी को सहयाद्री गेस्ट हाउस में थे। 24 फरवरी को वे अपने घर से मंत्रालय गए थे। वे क्वारंटाइन नहीं थे, बल्कि लोगों से मुलाकात कर रहे थे।

सोमवार को पवार ने दावा किया कि देशमुख 15 से 27 फरवरी तक नागपुर में थे। पवार ने इसके जरिए यह साबित करने की कोशिश की थी कि फिर इस दौरान मुंबई में वाजे और देशमुख की मुलाकात कैसे संभव है। लेकिन, इस दावे को देशमुख ने ही गलत साबित कर दिया है। उन्होंने बताया है कि वे एक प्राइवेट प्लेन से नागपुर से मुंबई गए थे।

ट्विटर पर एक वीडियो जारी कर देशमुख ने कहा कि नागपुर में 15 फरवरी को उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिली थी। इसके तत्काल बाद आवश्यक अनुमति और सरकारी गाइडलाइन का पालन करते हुए होम क्वारंटाइन के लिए वे मुंबई निकल गए। उनका दावा है कि इसके बाद 27 फरवरी तक वह होम क्वारंटाइन में रहे।