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CM ममता पर ‘हमला’, सहानुभूति-पाखंड पर कॉन्ग्रेस में 2 फाड़: BJP कार्यकर्ताओं की हत्या पर सबने क्यों साधी चुप्पी?

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार (मार्च 10, 2021) को नंदीग्राम से पर्चा भरा और फिर उसी दिन रात को वहाँ कुछ लोगों द्वारा उन पर हमले की बात सामने आई। फ़िलहाल उनका इलाज कोलकाता के एक अस्पताल में चल रहा है। लेकिन, TMC सुप्रीमो पर हुए इस कथित हमले को लेकर कॉन्ग्रेस में दो फाड़ है। जहाँ एक धड़ा इसे ड्रामा बता रहा है, वहीं दूसरा उनके प्रति सहानुभूति जता रहा है।

इसके लिए दो बड़े नेताओं के बयान देखते हैं। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह ने कहा कि वो ममता बनर्जी पर हुए हमले के बारे में पढ़ कर व्यथित हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र व एक सभ्य समाज में हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है। सीएम अमरिंदर ने पश्चिम बंगाल की अपनी समकक्ष के लिए स्वास्थ्य लाभ की कामना की और ट्विटर पर लिखा कि इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों को जल्द सज़ा मिलनी चाहिए।

दोहरे रवैये की पराकाष्ठा देखिए कि इसी पश्चिम बंगाल में कुछ दिनों पहले नॉर्थ 24 परगना के निम्ता की एक 80 वर्षीय बुजर्ग महिला को घर में घुस कर इसलिए मारा गया था, क्योंकि उनका बेटा भाजपा से जुड़ा हुआ था। पश्चिम बंगाल में अब तक राजनीतिक हिंसा में 100 से अधिक भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्याएँ हो चुकी हैं और लगभग सभी के आरोप TMC के गुंडों पर लगे। आपने एक भी कॉन्ग्रेस नेता को इस पर शोक जताते हुए देखा?

अर्थात, राजनीति और सभ्य समाज में हिंसा के लिए कोई जगह न होने की बात इन्हें तभी याद आती है, जब कोई साधारण 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला नहीं, बल्कि जब कोई सत्ताधीश खुद पर हमला होने का दावा करे। जिसकी सुरक्षा में सैकड़ों कर्मी लगे हैं और जिसके लाखों-करोड़ों समर्थक हैं, केवल उसी की जान की कीमत है। बंगाल में वामपंथियों और TMC की राजनीतिक हिंसा में दशकों से मर रहे लोगों की जान की कोई कीमत नहीं।

अब आते हैं अधीर रंजन चौधरी के बयान पर, जो न सिर्फ लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं बल्कि पश्चिम बंगाल कॉन्ग्रेस कमिटी के अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी सहानुभूति बटोरने के लिए ‘सियासी पाखंड’ का इस्तेमाल कर रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नंदीग्राम में खुद की राह में आने वाली दिक्कतों के बाद उन्होंने इस ‘नौटंकी’ की योजना बनाई। उन्होंने कहा कि ममता सिर्फ CM ही नहीं, पुलिस मंत्री भी हैं, ऐसे में क्या आप सोच सकते हैं कि उनके साथ पुलिस नहीं होगी?

भारतीय राजनीति में सहानुभूति के नाम पर वोट बटोरने की बात नई नहीं है। इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद ऐसी सहानुभूति की लहर चली थी कि राजीव गाँधी ने इतिहास का सबसे बड़ा बहुमत प्राप्त किया। ज्यादा पीछे न जाएँ तो बिहार में सजायाफ्ता लालू यादव के लिए RJD ने सहानुभूति बटोरी। उसी चुनाव में नीतीश इसे अपना अंतिम चुनाव बता कर सहानुभूति बटोरते रहे। भारतीय राजनीति में ऐसा अनेकों बार हुआ है।

लेकिन, यहाँ सवाल ये उठता है कि केरल में वामपंथियों को सत्ता से बेदखल करने की लड़ाई लड़ रही कॉन्ग्रेस पार्टी ने पश्चिम बंगाल में उन्हीं वामपंथियों को अपना पार्टनर बनाया है। अन्य राज्यों के कॉन्ग्रेस नेता ममता के लिए सहानुभूति जता रहे और बंगाल के कॉन्ग्रेसी इसे नौटंकी बता रहे। आखिर ये दो फाड़ क्यों? भाजपा विरोध के चक्कर में जब कोई विचारधारा ही नहीं बची है तो कौन किसके साथ है और कौन विरोध में, पता ही नहीं चलता।

नंदीग्राम से CPI(M) उम्मीदवार मिनाक्षी मुखर्जी ने ममता बनर्जी के जल्द स्वस्थ होने की कामना तो की लेकिन साथ ही ये भी कहा कि जनता इस बार मूर्ख नहीं बनेगी। राज्यपाल जगदीप धनखड़ हमले की खबर सुनते ही अस्पताल पहुँचे तो वहाँ TMC नेताओं ने उनका अपमान करते हुए उनके विरोध में नारे लगाए। पश्चिम बंगाल में तेज़ी से पल-पल बदल रही सियासी हलचल के बीच PK फैक्टर की बात करनी भी ज़रूरी है।

भाजपा की काट के लिए प्रशांत किशोर अक्सर नेताओं को मंदिर-मंदिर भटकने की सलाह देते हैं। ममता बनर्जी भी खुद को हिन्दू परिवार से बता रही हैं, अपनी ब्राह्मण पहचान दिखा रही हैं, मंच से चंडी पाठ कर रही हैं और हमले से पहले भी वो एक मंदिर में दर्शन के लिए पहुँची थी। गुरुवार तड़के सुबह उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी ने बुआ की अस्पताल से तस्वीर शेयर करते हुए लिखा कि जनता जवाब देगी।

उन्होंने भाजपा का नाम लेकर उसे चेताया। क्या अब तक कहीं ऐसा निकल कर आया है कि हमला भाजपा ने करवाया या भाजपा कार्यकर्ताओं ने हमला किया? नहीं। तृणमूल कॉन्ग्रेस ने भाजपा और चुनाव को इन सबमें घसीट कर खुद इसे सियासी रंग दे दिया है। ऐसे में अब देखना है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी नंदीग्राम और बंगाल बचा पाती हैं या फिर राजनीतिक वनवास उनकी प्रतीक्षा कर रहा है। वैसे बंगाल भाजपा के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने भी उज्जैन में महाकाल के दरबार में महाशिवरात्रि के मौके पर उनके स्वास्थ्य लाभ की कामना की।

‘रूस ने भारत को अफगान वार्ता से बाहर कर दिया’: Indian Express ने छापा झूठ, पुतिन प्रशासन ने लगाई लताड़

भारत-रूस रिश्ते को लेकर देश के प्रमुख मीडिया संस्थानों में से एक ‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने झूठ फैलाया है, जिसका रूसी दूतावास ने खंडन किया। रूसी दूतावास ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, “भारतीय मीडिया के एक बड़े प्रकाशन संस्थान के सूत्र गुमराह करने वाले सूत्रों से प्रेरित प्रतीत होते हैं।” ‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने दावा किया था कि रूस ने भारत को बातचीत से बाहर रखा है, ऐसे में अमेरिका ने अफ़ग़ानिस्तान शांति बैठक में भारत को शामिल किया है।

इस खबर में अप्रत्यक्ष रूप से इशारा किया गया था कि भारत और रूस के रिश्ते बिगड़ रहे हैं और रूस ने भारत के साथ बातचीत बंद कर दी है। खबर में बताया गया था कि अमेरिकी स्टेट सेकेट्री एंटोनी ब्लिंकेन ने अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी को लिखे पत्र में कहा है कि अमेरिका, भारत, रूस, चीन, पाकिस्तान और ईरान को मिल कर इस मामले पर बात करनी चाहिए। अफ़ग़ानिस्तान के लिए ‘यूनिफाइड एप्रोच’ के लिए ऐसा करने को कहा गया।

लेकिन, रूस का कहना है कि भारत के साथ उसके रिश्ते मधुर हैं और बातचीत रुकी ही नहीं है। रूस ने ‘इंडियन एक्सप्रेस’ को फटकार लगाते हुए कहा, “भारत-रूस के बीच हमेशा से नजदीकी सम्बन्ध रहे हैं और दोनों भविष्य को देखते हुए वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर साथ मिल कर कार्य करते रहे हैं। अफ़ग़ानिस्तान की स्थिति भी अपवाद नहीं है।” रूस ने भारतीय मीडिया में चल रहे झूठ को बेनकाब किया।

रूसी दूतावास ने लिखा, “द्विपक्षीय और बहुपक्षीय वार्ताओं में कई बार इस साझेदारी पर जोर दिया गया है, जिसमें अफ़ग़ानिस्तान कॉन्टैक्ट ग्रुप और मॉस्को कन्सल्टेशन्स शामिल हैं। अफ़ग़ानिस्तान समझौते की जटिलता को देखते हुए एक क्षेत्रीय आम-राय की तरफ आगे बढ़ना और अमेरिका समेत सभी साझेदारों के साथ तालमेल बिठाना काफी ज़रूरी है। दोहा में यूएस-तालिबान के बीच हुए समझौते को यूएन सुरक्षा परिषद ने मान्यता दी थी।”

रूस ने कहा कि वो भी इसी समझौते के हिसाब से आगे बढ़ रहा है। रूस ने इस बात पर जोर देते हुए दोहराया कि अफ़ग़ानिस्तान में भारत का एक बहुत बड़ा किरदार है और इसके लिए समर्पित वार्ताओं में इसकी भागीदारी स्वाभाविक है। रूसी दूतावास ने ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की उस खबर का स्क्रीनशॉट भी शेयर किया, जिसमें ‘रूस द्वारा भारत को वार्ता से बाहर रखने’ का दावा किया गया था। साथ ही हैडिंग के उस हिस्से को लाल रंग से प्रदर्शित किया।

इससे पहले ‘द प्रिंट’ इसी तरह की हरकत कर चुका है। ‘द प्रिंट’ ने दावा किया था कि QUAD राष्ट्रों (भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान) से रूस खफा है, इसीलिए पिछले 20 वर्षों में पहली बार भारत-रूस की वार्षिक समिट नहीं होगी। क्रेमलिन ने इस खबर को गलत बताते हुए इसे ‘फेक न्यूज़’ और सनसनी पैदा करने के लिए लिखी गई खबर करार दिया था। रूस ने कहा था कि भारत क्षेत्रीय एकता के समावेशी रूप को बढ़ावा दे रहा है, वो तारीफ के लायक है।

फ्लाइट के उड़ते ही महिला ने उतार दिया अंडरवियर: लोगों ने सीट के साथ रस्सी से बाँधा, लैंड होते हुई गिरफ्तार

जमीन से दसियों हजार फ़ीट ऊपर उड़ रही एक फ्लाइट में एक यात्री को पकड़ कर रस्सियों से बाँधना पड़ा। न तो वो यात्री कोई आतंकी था और न ही कोई अपराधी। असल में वो एक महिला थी, जो बार-बार अपना अंडरवियर उतार दे रही थी। रूस की इस फ्लाइट में उक्त महिला की हरकतों के बाद उसे रस्सियों और टेप की मदद से सीट से बाँध दिया गया। बताया जा रहा है कि 39 वर्षीय महिला ने ड्रग्स ली हुई थी।

जैसे ही हवाई जहाज ऊपर उड़ा, महिला अपने सीट से उठ गई और बिना किसी काम के इधर-उधर घूमने लगी। वो केबिन में मँडरा रही थी। फ्लाइट के व्लादिवोस्तोक (Vladivostok) से उड़ान भरने के 15 मिनट के भीतर ही उसने ये हरकतें शुरू कर दी। उसने अपने कपड़े उतार लिए और फिर उन्हें पहन लिया। खुद की सुरक्षा और महिला की सुविधा के लिए अन्य यात्रीगणों ने फ्लाइट अटेंडेंट्स के साथ मिल कर उसे उसकी सीट से बाँध दिया।

फ्लाइट के भीतर फुटेज भी वायरल हो गया, जिसमें उक्त महिला को सीट से बाँधा हुआ देखा जा सकता है। फ्लाइट जब तक नोवोसिबर्स्क (Novosibirsk) के तोलमचेवो (Tolmachevo) एयरपोर्ट पर नहीं उतर गई, तब तक उसे बाँध कर ही रखा गया। वहाँ लैंड करते ही महिला को गिरफ्तार कर लिया गया। थाने में पूछताछ के दौरान महिला ने स्वीकार किया कि फ्लाइट में चढ़ने से पहले उसने सिंथेटिक ड्रग्स ली थी।

एक अन्य वीडियो में उसे अपने हैंडबैग से कुछ चीजें निकाल कर पुलिस को दिखाते हुए देखा जा सकता है। ड्रग्स का उसके शरीर पर कितना प्रभाव हुआ है, इसकी जाँच के लिए उसका मेडिकल टेस्ट भी किया गया। इंटीरियर मंत्रालय ने बताया कि उसके खिलाफ ‘तुच्छ उपद्रव’ का मामला दर्ज किया गया है और पुलिस आगे मामले की जाँच कर रही है। सोशल मीडिया पर ये महिला खासी वायरल हो रही है।

काम, क्रोध, अत्याचार, जाति-धर्म, जीवन-मृत्यु… विश्व का कल्याण आखिर क्यों छुपा है शिवत्व की प्रतिष्ठा में!

समाज में शिव की प्रतिष्ठा और पूजा-परंपरा देवता के रूप में प्राचीन काल से ही प्रचलित है किंतु हमारे शास्त्रों में वर्णित शिव का स्वरूप उनके देवत्व की पृष्ठभूमि में मनुष्य कल्याण के अनेक नए प्रतीकार्थ भी प्रस्तुत करता है। शिव का एक अर्थ कल्याण भी है। इसलिए शिव कल्याण के प्रतीक हैं और शिव की उपासना का अर्थ मनुष्य की कल्याणकारी कामना की चिरसाधना है।

कल्याण सब चाहते हैं- अच्छे लोग भी अपने कल्याण के लिए प्रयत्न करते हैं और बुरे लोग भी अपने लिए जो कुछ अच्छा समझते हैं, कल्याणकारी मानते हैं उसकी प्राप्ति हेतु हर संभव प्रयत्न करते हैं। यही ‘शिव’ की सर्वप्रियता है। शिव देवताओं के भी आराध्य हैं और दैत्य भी उनकी भक्ति में लीन दर्शाए गए हैं। श्रीराम ने सागर तट पर रामेश्वरम की स्थापना पूजा कर शिव से अपने कल्याण की कामना की और रावण ने भी जीवन भर शिव की अर्चना करके उनकी कृपा प्राप्त करने का प्रयत्न किया।

शिव का श्मशान-वास उनकी वैराग्य-वृत्ति का प्रतीक है। कल्याण की प्राप्ति उसी के लिए संभव है, जो सर्वसमर्थ होकर भी उपलब्धियों के उपभोग के प्रति अनासक्त है। मानसिक शांति उसी को मिल सकती है, जो वैभव-विलास से दूर एकांत में शांतचित्त से ईश्वर का भजन करने में रुचि लेता है। जिसकी आवश्यकताएँ न्यूनतम हैं, वही शिव हो सकता है। लौकिक इच्छाओं और भौतिक संपत्तियों से घिर कर शिव नहीं बना जा सकता। लोक का कल्याण नहीं किया जा सकता। अतः शिवत्व की प्राप्ति के लिए वीतरागी बनना अनिवार्यता है।

सदा शांत रहने वाले शिव में रूद्रतत्व का प्रतिष्ठापन मनुष्य के मन में सन्निहित शांति और क्रोध की प्रतीकात्मक प्रस्तुति है। मनुष्य स्वभाव से शांत है किंतु जब उसकी शांति भंग होती है, तब वह क्रोधित होकर शांति भंग करने वाली शक्ति को नष्ट कर देता है। भगवान शंकर द्वारा कामदेव को भस्म करने की कथा इस प्रतीकात्मकता को संकेतित करती है।

शिव मानसिक शांति के प्रतीक हैं। वे अपनी तपस्या में रत अवस्था में उस मनुष्य का प्रतीकार्थ प्रकट करते हैं, जिसे किसी और से कुछ लेना-देना नहीं रहता। जो अपने में ही मस्त और व्यस्त है; शांत है। ऐसी सच्ची शांति उसी के मन में होती है जो कामनाओं से शून्य होता है।

कामनाओं का जागरण शांति भंग का कारण बनता है क्योंकि जब मन में कामनाएँ जागती हैं, तब शांति शेष नहीं रह जाती। शिव शांति चाहते हैं। अतः कामनाओं के प्रतीक कामदेव को तत्काल भस्म कर देते हैं। इस कथा से स्पष्ट है कि यदि हमें शांति चाहिए तो अपनी अतिरिक्त और अनावश्यक अभिलाषाओं को त्यागना होगा।

शिव द्वारा रति को वरदान देकर कामदेव को पुनः जीवित किए जाने की कथा भी गहरा अर्थ व्यक्त करती है। ‘रति’ सहज जीवन के प्रति असक्ति की प्रतीक है। सब शिव के समान बीतरागी संन्यासी नहीं हो सकते। सृष्टि के क्रम और सांसारिक जीवन की स्थितियों को स्थिर रखने के लिए शुभकामनाओं, मनुष्य के मन में सदिच्छाओं का होना आवश्यक है।

संन्यासी शिव समस्त कामनाओं का नाश कर देते हैं, इस कारण संसार का सामाजिक जीवन-प्रवाह बाधित होता है। अतः उसे पुनः सुसंचालित करने और सुव्यवस्थित बनाने के लिए शिव कामदेव की भस्म से पुनः काम को जीवन प्रदान करते हैं। अभिप्राय यह है कि जीवन में लोककल्याणकारी स्वस्थ कामनाओं का होना भी आवश्यक है।

साधारण मनुष्य की जीवन यात्रा कामनाओं- सहज इच्छाओं का पाथेय ग्रहण किए बिना पूर्ण नहीं हो सकती। अतः विषय वासनाओं को भस्म कर अर्थात त्याग कर स्वस्थ कामनाओं और जीवन को रचनात्मक दिशा देने वाली सद् इच्छाओं की ओर गतिशील किया जाना आवश्यक है।

शिव का विषपान सामाजिक जीवन में व्याप्त विषमताओं और विकृतियों को पचाकर भी लोककल्याण के अमृत को प्राप्त करने की प्रक्रिया का जारी रखना है। समाज में सब अपने लिए शुभ की कामना करते हैं। अशुभ और अनिष्टकारी स्थितियों को कोई स्वीकार करना नहीं चाहता। सुविधा सब को चाहिए पर असुविधाओं में जीने को कोई तैयार नहीं। यश, पद और लाभ के अमृत का पान करने के लिए सब आतुर मिलते हैं किंतु संघर्ष का हलाहल पीने को कोई आगे आना नहीं चाहता।

वर्गों और समूहों में बटे समाज के मध्य उत्पन्न संघर्ष के हलाहल का पान लोककल्याण के लिए समर्पित शिव अर्थात वही व्यक्ति कर सकता है, जो लोकहित के लिए अपना जीवन दाँव पर लगाने को तैयार हो और जिसमें अपयश, असुविधा जैसी समस्त अवांछित स्थितियों का सामना करके भी स्वयं को सुरक्षित बचा ले जाने की अद्भुत क्षमता हो। समाज सागर से उत्पन्न हलाहल को पीना और पचाना शिव जैसे समर्पित व्यक्तित्व के लिए ही संभव है।

शिव समन्वयकारी शक्ति हैं। शिव परिवार में सिंह और नन्दी, मयूर और नाग, नाग और मूषक सब साथ-साथ हैं। सबकी अपनी सामर्थ्य और मर्यादा है। कोई किसी पर झपटता नहीं, कोई किसी को आतंकित नहीं करता, कोई किसी से नहीं डरता। अपनी-अपनी सीमाओं में सुरक्षित रहते हुए अपने अस्तित्व को बनाए रखने की यह स्थिति आदर्श समाज के लिए आवश्यक है।

आज जब भारतीय-समाज जाति, वर्ण, धर्म, संप्रदाय, भाषा वर्ग आदि के असंख्य समूहों में बंटकर परस्पर भीषण संघर्ष करता हुआ सामाजिक जीवन को अशांत कर रहा है, तब शिव-परिवार के इन विरोधी जीवों की सहअस्तित्व पूर्ण स्थिति समाज के लिए अनुकरणीय आदर्श उपस्थित करती है। शिव परिवार की उपर्युक्त समन्वयकारी प्रतीकात्मक स्थिति इस तथ्य की भी साक्षी है कि कल्याण चाहने वाले समाज में समन्वय होना अत्यंत आवश्यक है। पारस्परिक अंतर्विरोधी शत्रुताओं को त्यागे बिना समाज के लिए शिवत्व की प्राप्ति संभव नहीं हो सकती।

शिव की संतानों में कार्तिकेय पहले हैं और गणेश बाद में। इनका क्रम इस प्रतीकार्थ की प्रतीति कराता है कि शारीरिक शक्ति शिशु को प्रथमतः प्राप्त होती है और बौद्धिक शक्ति का विकास बाद में होता है। शिव के ये दोनों पुत्र कल्याण-विहग के दो सशक्त पंख हैं। दोनों की समन्वित शक्ति से ही शिवत्व की प्राप्ति संभव हो सकती है। कार्तिकेय सामरिक शक्ति और कौशल का चरम उत्कर्ष हैं तो गणेश बौद्धिक बल, सूझ-बूझ से लिए जाने वाले शुभ-फल प्रदायी निर्णयों की क्षमता की पराकाष्ठा हैं। दोनों का समन्वय समाज कल्याण के कठिन पथ को निरापद बनाता है।

‘शिव’ शब्द में सन्निहित इकार ‘शक्ति’ का प्रतीकार्थ व्यक्त करती है। शक्तिरुप ‘इ’ के अभाव में ‘शिव’ शब्द ‘शव’ में परिणत हो जाता है। इसका तात्पर्य यह है कि शक्तिहीन अवस्था में शिव अर्थात कल्याण की स्थिति संभव नहीं होती। यदि सत्य शिव की देह है तो शक्ति उनका प्राणतत्व है। शक्तिरहित शिव की संकल्पना निराधार है। पार्वती के रूप में शक्ति का प्रतीकार्थ स्वतः सिद्ध है।

शक्ति के अनेक रूप हैं, जबकि कल्याण सर्वदा एक रुप ही होता है। कल्याण की दिशाएँ अनेक हो सकती हैं किंतु उसकी आनंद रूप में परिणिति सदा एकरूपा है। इसीलिए शिव का स्वरूप सर्वदा एक सा है। उसमें एकत्व की निरंतरता सदा विद्यमान है, जबकि विविध-रूपा शक्ति अर्थात पार्वती बार-बार जन्म लेती हैं, अपना स्वरूप परिवर्तित करती हैं। सामान्य जीवन प्रवाह में बौद्धिक, आर्थिक, सामरिक शक्तियाँ भी युग के अनुरूप अपना स्वरूप बदलती रही हैं। यही शिव की अर्धांगिनी भवानी के पुनर्जन्म का प्रतीकार्थ है।

शक्ति सदा शिव का ही वरण करती है। शिव के सानिध्य में ही उसकी सार्थकता है। अत्याचारी आसुरी प्रवृत्तियाँ जब शक्ति पर अधिकार प्राप्त करने का दुस्साहस करती हैं, तब शक्ति उनका नाश कर देती है। देवी के द्वारा असुरों के वध की कथा इसी प्रतीकात्मकता की अभिव्यक्ति है। सामान्य जीवन में भी अपराधियों का दुखद अंत सुनिश्चित होता है क्योंकि लोककल्याणकारिणि शक्ति पार्वती को तो कल्याण मूर्ति शिव की सेवा में ही समर्पित रहने का अभ्यास है। इसीलिए शक्ति का लोकोपकारी स्वरूप ही समाज में सदा सम्मानित हुआ है।

भगवान शिव के शीश पर संस्थित गंगा जीवन में जल के महत्व का प्रतीक हैं। कल्याण चाहने वाले को जल स्रोतों का संरक्षण-संवर्धन करना होगा। जलशक्ति की प्रतीक गंगा को महत्व दिए बिना, नदियों, जलाशयों, कूपों आदि जल स्त्रोतों की पवित्रता का संरक्षण किए बिनास जीवन की सामान्य आवश्यकताएँ भी पूरी नहीं हो सकतीं।

प्रदूषित जल जीवन के लिए अभिशाप ही सिद्ध होगा। अतः उसकी पवित्रता बनाए रखना मनुष्य का दायित्व है। गंगा को शिव ने सिर पर धारण किया है। सिर पर वही वस्तु-पदार्थ धारण किया जाता है, जो पवित्र हो, महत्वपूर्ण हो और सम्मान के योग्य हो। इस प्रकार शिव द्वारा सिर पर गंगा का धारण किया जाना, जीवन में जल के महत्व का स्पष्ट संदेश है।

नाग भयानक और विषैले जीव हैं। उनके विष का प्रभाव क्षण भर में मनुष्य की जीवन-लीला समाप्त कर देता है। यही स्थिति सामाजिक जीवन में दुष्टों और अत्याचारी अपराधियों की भी होती है। वे अपने संपर्क में आने वाले व्यक्ति का जीवन अभिशप्त कर देते हैं। शिव के गले में पड़े नाग ऐसे ही समाजविरोधी तत्वों के प्रतीक हैं। इसका अर्थ यह नहीं कि कल्याणमूर्ति शिव आपराधिक तत्वों का आश्रय हैं।

इसका आशय यह है कि कल्याण करने वाले व्यक्ति को इतना शक्तिमान होना चाहिए कि वह अपराधी-तत्वों को भी नियंत्रित कर सके। लोककल्याण की बाधक शक्तियाँ उसके नियंत्रण में उसके आस-पास रहें ताकि शेष समाज उनके कारण आतंकित और पीड़ित ना हो। शिव के शरीर पर नागों की प्रस्तुति इसी अर्थ की प्रतीति कराती है।

शिव के अशन-बसन नितांत सामान्य हैं। वे बेलपत्र आदि सहज-सुलभ आहार ग्रहण करते हैं और बाघम्बर धारण करते हैं। शिव वैभव और विलास से परे हैं। राजसी ठाठ बाट से महलों में रहने वाला और जगत में उपलब्ध विभिन्न सुविधाओं का अबाध उपभोग करने वाला शिव नहीं हो सकता। ना उससे समाज का कल्याण संभव है और ना ही वह समाज में सर्वमान्य बन सकता है।

पर्वत के एकांत में वास, वन उपज का भोजन, बाघम्बर का वस्त्र और नंदी की सवारी शिव के सहज सामान्य जीवन के प्रतीक हैं। समाज का कल्याण ऐसे ही साधारण जीवन यापन करने वाले लोगों के नेतृत्व से संभव है। समग्रतः शिव से संबंधित प्रत्येक वस्तु, जीव आदि मानव-कल्याण से जुड़े किसी ना किसी पक्ष से संबंधित प्रतीकार्थ अवश्य देते हैं।

शिवत्व की प्रतिष्ठा में ही विश्व मानव का कल्याण संभव है। शिव की उपासना के अन्य आध्यात्मिक-पौराणिक विवरण आस्था और विश्वास के विषय हैं। उन पर पूर्ण श्रद्धा रखते हुए यदि हम बौद्धिक धरातल पर शिव से संबंधित इन प्रतिकार्थों को समझने का भी प्रयत्न करें तो अनेक व्यक्तिगत और सामाजिक समस्याओं के समाधान सहज संभव हैं। शिव-तत्व की यह प्रतीकात्मकता सबके लिए समान रूप से कल्याणकारी है। अतः सर्वथा विचारणीय भी है।

लेखक: डॉ कृष्णगोपाल मिश्र, हिन्दी विभागाध्यक्ष, शासकीय नर्मदा स्नातकोत्तर महाविद्यालय, होशंगाबाद (मध्य प्रदेश)

कंधा, कलाई, गर्दन, टखना, एड़ी में चोट, सीने में दर्द, साँस में दिक्कत और बुखार: CM ममता के भतीजे ने BJP को चेताया

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लगी चोट के बाद उनकी पार्टी के नेता भाजपा पर हमलावर हैं। उनका कहना है कि भाजपा ने ये हमला करवाया। वहीं फिलहाल ममता बनर्जी का इलाज SSKM अस्पताल में चल रहा है।

अस्पताल के बाहर रात भर समर्थकों की भारी भीड़ जुटी रही। उनका इलाज कर रहे डॉक्टरों ने बताया कि सीएम ममता के कंधे और टखने में चोट आई है। उन्हें 48 घंटों के लिए मेडिकल देखभाल में रखा गया है। डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें बुखार भी है।

डॉक्टर एम बंदोपाध्याय ने बताया कि TMC सुप्रीमो के स्किन में खासी खरोंच आई है और उनके पाँव, दाएँ कंधे, कलाई और गर्दन में जख्म आए हैं। साथ ही उनकी छाती में भी दर्द हो रहा है।

ममता बनर्जी ने साँस रुकने की भी शिकायत दर्ज कराई है। उधर उनके भतीजे और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी ने अपनी बुआ की अस्पताल की तस्वीर ट्वीट करते हुए भाजपा को चेताया। उन्होंने लिखा, “भाजपा वालो, रविवार (मई 2, 2021) को जनता की ताकत देखने के लिए तैयार रहो!”

मंत्री पार्थ चटर्जी ने कहा कि कई लोग ममता बनर्जी को रोकना चाहते हैं लेकिन अब तक कोई इसमें सक्षम नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि पहले ADG (कानून-व्यवस्था) को हटाया गया, फिर DG को हटाया गया और आज ये घटना हुई।

पार्थ चटर्जी ने आरोप लगाते हुए कहा कि जिस चुनाव आयोग ने इतने सारे बदलाव कर डाले, वो इस घटना पर चुप है। उनके अनुसार EC को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वो शुक्रवार (मार्च 12, 2021) को चुनाव आयोग के अधिकारियों से मिल कर अपनी बात रखेंगे।

ममता बनर्जी को सरकारी अस्पताल के वुडबर्न वार्ड के विशेष केबिन नंबर 12.5 में ले जाया गया और वहाँ चलती फिरती मशीन की मदद से उनका एक्स-रे किया गया। इसी परिसर के बांगुर इंस्टिट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंसेज में उन्हें MRI के लिए भी ले जाया गया। उनके बाएँ पैर का एक्स-रे हुआ है।

CM ममता बनर्जी को फिलहाल विशेष वार्ड में रखा गया है। राज्य सरकार द्वारा गठित 5 डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही है। ममता बनर्जी का पैर सूज गया है। मुख्यमंत्री का आरोप है कि उनके SUV के दरवाजे का इस्तेमाल कर के बदमाशों ने हमला किया।

बुधवार की रात ये घटना हुई और उसी दिन उन्होंने नंदीग्राम से अपना नामांकन दायर किया था, जहाँ उनका मुकाबला दिग्गज भाजपा नेता शुभेन्दु अधिकारी के साथ है। ममता ने कहा कि स्थानीय पुलिस का कोई जवान वहाँ नहीं था और SP भी मौके पर मौजूद नहीं थे। राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने अस्पताल पहुँच कर ममता से मुलाकात की।

तृणमूल सांसद सौगात रॉय ने दावा किया कि भाजपा नेताओं ने इसे ड्रामा बताया है, जबकि देश की एकमात्र महिला मुख्यमंत्री को गंभीर चोटें आई हैं। अरविंद केजरीवाल और अखिलेश यादव जैसे नेताओं ने ‘दीदी’ के उत्तम स्वास्थ्य की प्रार्थना की है।

ममता बनर्जी के साथ ये घटना रानी चौक के गिरीबाजार क्षेत्र में हुई। वहाँ ममता एक मंदिर में दर्शन करने गई थीं। बताया गया कि वहाँ 5000 की भीड़ थी। पूर्वी मिदनापुर पुलिस का कहना है कि भीड़ दिन भर अनियंत्रित थी।

टीवी9 भारतवर्ष ने अपनी रिपोर्ट में चश्मदीदों के हवाले से बताया कि ममता बनर्जी पर किसी ने हमला नहीं किया। उनकी गाड़ी पिलर से टकराई थी। उनके साथ कई सारे पुलिसकर्मी थे। पुलिसकर्मी ने ममता बनर्जी के पैर पर बर्फ लगाया। ममता बनर्जी 5 मिनट रुकीं और फिर चली गईं।

टीवी9 भारतवर्ष की रिपोर्ट की मानें तो 4-5 लोगों द्वारा धकेलने की बात झूठ है। भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, ”वह मुख्यमंत्री हैं और 300-400 पुलिसकर्मियों के साथ रहती हैं, कोई सपने में भी नहीं सोच सकता है कि ममता बनर्जी पर हमला करे।

महाशिवरात्रि: शून्यता के उस शिखर को छू लेने की परमरात्रि जहाँ से उद्घाटित होता है शिव तत्व

महाशिवरात्रि अर्थात देवाधिदेव शिव की विशेष कृपा की रात, आध्यात्मिक रूप से ख़ुद को जागृत करने की एक ऐसी घड़ी जब मात्र आपका सीधी रीढ़ के साथ एक विशेष मुद्रा में होना ही आपके जीवन-अनुभवों को बदलने के लिए पर्याप्त है। इस वर्ष यह शुभ अवसर आज (मार्च 11, 2021) है। महाशिवरात्रि और महादेव शिव के कई पहलुओं पर बोध जगाने से पहले शिवरात्रि और महाशिवरात्रि पर बात कर लेते हैं।

वैसे तो हर चंद्र मास का चौदहवाँ दिन अथवा अमावस्या से पूर्व का दिन शिवरात्रि होती है। एक कैलेंडर वर्ष में आने वाली सभी शिवरात्रियों में से, महाशिवरात्रि, को सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना जाता है, जो हर वर्ष फरवरी-मार्च के माघ महीने में आती है। इस रात, पृथ्वी का उत्तरी गोलार्द्ध इस प्रकार अवस्थित होती है कि मनुष्य के भीतर ऊर्जा प्राकृतिक रूप से ऊपर की ओर उठकर एक दिव्य अनुभव का माध्यम बनती है। आगे इस पर और भी विस्तार से बात होगी। उससे पहले भारतीय सनातन परंपरा के उत्सवधर्मिता की बात कर लेते हैं।

जब भी भारतीय सनातन संस्कृति की बात होगी तो वह बात उत्सवों के बिना अधूरी होगी। कहा जाता है कि किसी समय, भारतीय संस्कृति में, एक वर्ष में 365 त्योहार हुआ करते थे। अर्थात वे साल के प्रतिदिन, प्रतिपल को पूरी सजगता से जीने के उल्लास में ही उत्सव खोज लेते थे। जीवन अपने आप में एक उत्सव था। आज भी है बस कुछ दूसरी गैरजरुरी बातों में उलझकर हम उस बोध को खोते जा रहे हैं।

हर कार्य के गीत हुआ करते थे। प्रकृति के कण-कण में व्याप्त संगीत से जीवों का गहन परिचय था। जो भी उत्सव थे वो कर्म बोध से जुड़े थे, 365 त्योहार के पीछे कोई न कोई कारण जीवन के विविध उद्देश्यों से जुड़े ढूँढ लिए गए थे। इन्हें विविध ऐतिहासिक घटनाओं, विजय तथा जीवन की कुछ अवस्थाओं या जीवनोपयोगी कार्यों जैसे फसल की बुआई, रोपाई और कटाई आदि से जोड़ा गया था।

महादेव शिव

जीवन की हर अवस्था और हर परिस्थिति के लिए हमारे पास एक त्योहार था। कालांतर में नाहक व्यस्तता बढ़ती गई, या हमने खुद को इतना व्यस्त कर लिया कि ख़ुद से ही दूर होते गए और जीवन अपनी सहज-स्फूर्त गति खोकर, हमारे अपने ही जाल में उलझकर घुटने लगी। अब हम इतने व्यस्त हैं कि अपने हर छोटे-बड़े अनुभव के लिए दूसरों पर निर्भर हैं। हम हर छोटी-बड़ी जानकारी कहीं और से हासिल करना चाहते हैं कि यह कैसा है? हम अपनी मूल प्रकृति को भूलकर वाह्य अलंकरण को अपना सबकुछ मान बैठे हैं। महाशिवरात्रि वापस अपने उसी बोध को जागृत करने का अवसर मनुष्य को उसके जीवन काल में हर वर्ष देती है। पर कितने उस जागरण को उपलब्ध हो पाते हैं यह भी गहन शोध का विषय है।

महाशिवरात्रि जीव को आत्मबोध तक पहुँचाने की रात्रि है। योग परम्परा के अनुसार बात की जाए तो ख़ुद को अस्तित्व से एकाकार करने की रात। यह एक ऐसा नैसर्गिक अवसर है, जब प्रकृति स्वयं मनुष्य को उसके आध्यात्मिक शिखर तक ले जाने में मदद करती है।

इस समय का उपयोग करने के लिए, सनातन परंपरा में, पहले पूरी रात उत्सव मनाते थे और आज भी यह परम्परा बरक़रार है। ख़ासतौर से दक्षिण भारत और काशी में, महाशिवरात्रि का उत्सव पूरी रात चलता है। पूरी रात मनाए जाने वाले इस उत्सव में इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है कि ऊर्जाओं के प्राकृतिक प्रवाह को उमड़ने और ऊपर उठने का पूरा अवसर मिले। आप अगर ध्यान और योग की परंपरा से नहीं भी जुड़े हैं तो भी बस अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा रखते हुए, रात्रि पर्यन्त खुद को जगाए रखने से भी आपके जीवन अनुभव में अध्यात्म की अलख जग सकती है।

महाशिवरात्रि आध्यात्मिक पथ पर चलने वाले साधकों के लिए बहुत महत्व तो रखती ही है। यह उनके लिए भी अति महत्वपूर्ण है जो पारिवारिक हैं और संसार की महत्वाकांक्षाओं में मग्न हैं। पारिवारिक परिस्थितियों में मग्न लोग महाशिवरात्रि को शिव के विवाह के उत्सव की तरह मनाते हैं। सांसारिक महत्वाकांक्षाओं में मग्न लोग महाशिवरात्रि को, शिव के द्वारा अपने शत्रुओं पर विजय पाने के दिवस के रूप में मनाते हैं।

वर्तमान में कैलाश पर्वत को ही शिव का प्रतीक माना जाता है।

परंतु, साधकों के लिए, महाशिवरात्रि वह दिन है, जिस दिन शिव कैलाश पर्वत के साथ एकात्म हो गए थे। वे एक पर्वत की भाँति स्थिर व निश्चल हो गए थे। यहाँ यह जानना ज़रूरी है, यौगिक परंपरा में, शिव को किसी देवता की तरह नहीं पूजा जाता। उन्हें आदि गुरु माना जाता है, पहले गुरु, जिनसे ज्ञान उपजा। ध्यान की अनेक सहस्राब्दियों के पश्चात्, एक दिन वे पूर्ण रूप से स्थिर हो गए। वह दिन महाशिवरात्रि का था। उनके भीतर की सारी गतिविधियाँ शांत हुईं और वे पूरी तरह से स्थिर हो गए, इसलिए साधक महाशिवरात्रि को स्थिरता की रात्रि के रूप में मनाते हैं।

आधुनिक विज्ञान भी आज अनेक चरणों से गुजरते हुए, आज उस बिंदु पर पहुँच चुका है, जहाँ वैज्ञानिकों ने भी यह प्रमाणित कर दिया है कि हम जिसे भी जीवन के रूप में जानते हैं, पदार्थ और अस्तित्व के रूप में जानते हैं, जिसे हम ब्रह्माण्ड और तारामंडल के रूप में जानते हैं; वह सब केवल एक ऊर्जा है, जो स्वयं को लाखों-करोड़ों रूपों में अभिव्यक्त करती है।

यौगिक विज्ञान में, सनातन परम्परा में, यह वैज्ञानिक तथ्य प्रत्येक योगी के लिए एक अनुभव से उपजा सत्य है। यहाँ ‘योगी’ शब्द से तात्पर्य उस व्यक्ति से है, जिसने अस्तित्व की एकात्मकता को जान लिया है। जब ‘योग’ की बात होती है तो इसका तात्पर्य कोई विशेष अभ्यास या तंत्र नहीं। ब्रह्माण्ड के इस असीम विस्तार को तथा अस्तित्व में एकात्म भाव को जानने की सारी चाह, योग है। महाशिवारात्रि की रात, इसी अनुभव को पाने का परम अवसर है।

एक और बात शिवरात्रि माह का सबसे अंधकारपूर्ण रात्रि होती है। प्रत्येक माह शिवरात्रि का उत्सव तथा महाशिवरात्रि का उत्सव मनाना ऐसा लगता है मानो हम अंधकार का उत्सव मना रहे हों। कोई तर्कशील मन अंधकार को नकारते हुए, प्रकाश को सहज भाव से चुनना चाहेगा। परंतु शिव का शाब्दिक अर्थ ही यही है, ‘जो नहीं है’। ‘जो है’, वह अस्तित्व और सृजन है। ‘जो नहीं है’- वह शिव है। ‘जो नहीं है’- उसका अर्थ है- अगर आप अपनी आँखें खोल कर आसपास देखें और आपके पास सूक्ष्म दृष्टि है तो आप बहुत सारी रचना देख सकेंगे। अगर आपकी दृष्टि केवल विशाल वस्तुओं पर जाती है, तो आप देखेंगे कि विशालतम शून्य ही, अस्तित्व की सबसे बड़ी उपस्थिति है।

कुछ ऐसे बिंदु, जिन्हें हम आकाशगंगा कहते हैं, वे तो दिखाई देते हैं, परंतु उन्हें थामे रहने वाली विशाल शून्यता सभी लोगों को दिखाई नहीं देती। इस विस्तार, इस असीम रिक्तता को ही शिव कहा जाता है। वर्तमान में, आधुनिक विज्ञान ने भी साबित कर दिया है कि सब कुछ शून्य से ही उपजा है और शून्य में ही विलीन हो जाता है। इसी संदर्भ में शिव यानी विशाल रिक्तता या शून्यता को ही महादेव के रूप में जाना जाता है।

इस ग्रह के प्रत्येक धर्म व संस्कृति में, सदा दिव्यता की सर्वव्यापी प्रकृति की बात होती रही है। यदि हम इसे ध्यान से देखें, तो ऐसी एकमात्र चीज़ जो सही मायनों में सर्वव्यापी हो सकती है, ऐसी वस्तु जो हर स्थान पर उपस्थित हो सकती है, वह केवल अंधकार, शून्यता या रिक्तता ही है। सामान्यतः, जब लोग अपना कल्याण चाहते हैं, तो हम उस दिव्य को प्रकाश के रूप में दर्शाते हैं। जब लोग अपने कल्याण से ऊपर उठ कर, अपने जीवन से परे जाने पर, विलीन होने पर ध्यान देते हैं और उनकी उपासना और साधना का उद्देश्य विलयन ही हो, तो हम सदा उनके लिए दिव्यता को अंधकार के रूप में परिभाषित करते हैं।

महादेव शिव

प्रकाश आपके मन की एक छोटी सी घटना है। प्रकाश शाश्वत नहीं है, यह सदा से एक सीमित संभावना है क्योंकि यह घट कर समाप्त हो जाती है। हम जानते हैं कि इस ग्रह पर सूर्य प्रकाश का सबसे बड़ा स्रोत है। यहाँ तक कि आप हाथ से इसके प्रकाश को रोक कर भी, अंधेरे की परछाईं बना सकते हैं। परंतु अंधकार सर्वव्यापी है, यह हर जगह उपस्थित है।

सद्गुरु जग्गी वासुदेव कहते हैं कि संसार के अपरिपक्व मस्तिष्कों ने सदा अंधकार को एक शैतान के रूप में चित्रित किया है। पर जब आप दिव्य शक्ति को सर्वव्यापी कहते हैं, तो आप स्पष्ट रूप से इसे अंधकार कह रहे होते हैं, क्योंकि सिर्फ अंधकार सर्वव्यापी है। यह हर ओर है। इसे किसी के भी सहारे की आवश्यकता नहीं है। प्रकाश सदा किसी ऐसे स्त्रोत से आता है, जो स्वयं को जला रहा हो। इसका एक आरंभ व अंत है। यह सदा सीमित स्रोत से आता है।

जबकि, अंधकार का कोई स्रोत नहीं है। यह अपने-आप में एक स्रोत है। यह सर्वत्र उपस्थित है। तो जब हम शिव कहते हैं, तब हमारा संकेत अस्तित्व की उस असीम रिक्तता की ओर होता है। इसी रिक्तता की गोद में सारा सृजन घटता है। रिक्तता की इसी गोद को हम शिव कहते हैं। 

भारतीय संस्कृति में, सारी प्राचीन प्रार्थनाएँ केवल आपको बचाने या आपकी बेहतरी के संदर्भ में नहीं थीं। सारी प्राचीन प्रार्थनाएँ कहती हैं- “हे ईश्वर, मुझे नष्ट कर दो ताकि मैं आपके समान हो जाऊँ। तो जब हम शिवरात्रि कहते हैं जो कि माह का सबसे अंधकारपूर्ण रात्रि है, तो यह एक ऐसा अवसर है जब व्यक्ति अपनी सीमितता को विसर्जित कर, सृजन के उस असीम स्रोत का अनुभव करे, जो प्रत्येक मनुष्य में बीज रूप में उपस्थित है।

अंततः, बस यही कहना है कि महाशिवरात्रि एक अवसर और संभावना है, जब आप स्वयं को, हर मनुष्य के भीतर बसी असीम रिक्तता के अनुभव से जोड़ सकते हैं, जो कि सृष्टि में व्याप्त सम्पूर्ण सृजन का स्रोत है। एक ओर शिव संहारक कहलाते हैं और दूसरी ओर वे सबसे अधिक करुणामयी कल्याणकारी भी हैं। वे बहुत ही उदार दाता हैं। यौगिक गाथाओं में वे, अनेक स्थानों पर महाकरुणामयी के रूप में सामने आते हैं। उनकी करुणा के रूप विलक्षण और अद्भुत रहे हैं। रावण और भष्मासुर से जुड़ी महादेव शिव की कहानी तो आपने सुनी होगी, नहीं सुनी तो सुनिएगा, आदिदेव शिव के कल्याण स्वरुप की कहानियाँ सृष्टि के कण-कण में हैं।

चलते-चलते एक और बात- महाशिवरात्रि शिव तत्व के अनुभव की एक विशेष रात्रि है। इस रात में कम से कम एक क्षण के लिए शांत मन से उस असीम विस्तार का अनुभव करें, जिसे हम महादेव शिव कहते हैं। आपके लिए यह वर्ष भी केवल गहन निद्रा या तन्द्रा में सोने या सिर्फ नींद से जागते रहने की रात भर न रह जाए बल्कि यह आपके लिए जागरण की रात्रि होनी चाहिए, चेतना व जागरूकता से भरी एक रात!

महाशिवरात्रि की रात न करें ये गलती :

ऑर्डर लेने से किया इनकार तो Zomato डिलिवरी बॉय ने लड़की को जड़ दिया घूँसा: वीडियो शेयर कर सुनाई आपबीती

देश के बड़े शहरों में शुमार बेंगलुरु से एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है। यहाँ ऑनलाइन फूड ऑर्डर करने वाली जोमैटो कंपनी के डिलीवरी बॉय ने एक युवती पर हमला कर दिया, इस हमले में उसकी नाक की हड्डी टूट गई है। खबर के मुताबिक बेंगलुरु की रहने वाली लड़की ने आरोप लगाया है कि उसके साथ जोमैटो डिलीवरी एग्जीक्यूटिव ने मारपीट की थी, जो मंगलवार (मार्च 9, 2021) को उसके घर में आया था। इस मारपीट में उसकी नाक की हड्डी में फ्रैक्चर भी आया है।

मंगलवार को हुई घटना आज बुधवार (मार्च 10, 2021) को सबके सामने आई। पीड़िता ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर करते हुए पूरी घटना के बारे में बताया। पीड़िता हितेशा चंद्रानी ने आरोप लगाया है कि जोमैटो डिलीवरी बॉय ने उसके घर में ऑर्डर देने आया फिर उसने उसके साथ मारपीट की। इस मारपीट में युवती की नाक से खून तक आ गए थे।

वीडियो शेयर कर बताई कहानी

पीड़िता हितेशा ने पूरी घटना की जानकारी देते हुए बताया कि उसने जोमैटो से फूड दोपहर 3.30 पर ऑर्डर किया था, लेकिन जब वो शाम 4.40 तक भी नहीं आया तो उसने कस्टमर केयर पर फोन कर ऑर्डर कैंसिल करनी की बात कही। इसके बाद उन्होंने डिलीवर बॉय से ऑर्डर लेने से मना कर दिया तो दोनों में आपसी विवाद हो गया, इसके बाद डिलीवरी बॉय ने लड़की की नाक पर मुक्का मार दिया, जिसके बाद खून आने पर वो वहाँ से भाग गया।

ब्यूटी इंफ्लूएंसर हितेशा चंद्राणी ने बताया कि उसने जोमैटो से ऑर्डर प्लेस किया था, लेकिन ऑर्डर समय के बाद डिलिवर हुआ, जिससे उसने कस्टमर केयर पर बात करते हुए कैंसिल कर दिया। हितेशा ने वीडियो में कहा, ”डिलिवरी ब्वॉय के दरवाजे पर आने के बाद मैंने उससे कहा कि मुझे ऑर्डर नहीं चाहिए, आप वापस ले जाओ। लेकिन उसने ऐसा करने से मना कर दिया और अपशब्द बोलने लगा। मैंने तुरंत दरवाजा बंद करने की कोशिश की। उसने तुरंत ही दरवाजा खोला और ऑर्डर अपने हाथ में लेते हुए मेरे चेहरे पर पंच जड़ दिया।” 

हितेशा ने आगे बताया कि इस घटना के बारे में बिल्डिंग में किसी और ने नहीं सुना। युवती का दावा है कि इस घटना की वजह से उसकी नाक की हड्डी टूट गई है और उसकी सर्जरी करनी पड़ेगी। हितेशा को अस्पताल भी ले जाया गया। डॉक्टरों ने उसे कई दवाएँ भी दीं। घटना के बाद वह पुलिस थाने भी गई और डिलिवरी ब्वॉय के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई है। पुलिस ने मामले की जाँच करने के लिए कहा है। हितेशा ने कहा कि लोग वीडियो को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि किसी और के साथ यह घटना न हो।

जोमैटो ने जारी किया बयान

वहीं ट्वीट का जवाब देते हुए जोमैटो ने विश्वास दिलाया कि कंपनी का स्थानीय प्रतिनिधि उनकी मदद करने के लिए जल्द ही उनसे संपर्क में करेगा। वहीं मेडिकल देखभाल की सहायता के साथ-साथ पुलिस जाँच की भी बात कही। साथ ही कंपनी ने अपने जबाव में इस घटना पर खेद जताते हुए कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने की धमकी दी, वीडियो वायरल: फैक्ट चेक

असम में विधानसभा चुनाव से पहले, एक छोटा सा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में AIUDF के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल को कुछ बेहद ही सांप्रदायिक और भड़काऊ टिप्पणियाँ करते सुना जा सकता है। वीडियो एक छोटी क्लिप है और यह स्पष्ट है कि यह विवादास्पद राजनेता द्वारा दिए गए कई भाषणों की कई टिप्पणियों का संकलन है। 

क्लिप में, अजमल को यह कहते हुए सुना जा सकता है, “मुगल बादशाहों ने इस देश में आठ सौ वर्षों तक इस देश में शासन किया… इस देश को इस्लामिक राज्य बनाया जाएगा… मंत्रालय कौन बनाएगा? हमारा महागठबंधन, यूपीए, महागठबंधन एक साथ वहाँ सरकार बनाने के लिए आएँगे और इस सरकार में आपकी पार्टी एआईयूडीएफ भी एक हिस्सा होगी… पूरे हिंदुस्तान में एक भी हिंदू नहीं रहेगा, सभी को मुस्लिम में बदल दिया जाएगा।”

ये स्पष्ट रूप से अत्यधिक सांप्रदायिक टिप्पणी हैं, और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने AIUDF प्रमुख पर अत्यधिक सांप्रदायिक भाषण देने का आरोप लगाते हुए वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर पोस्ट किया है।

हालाँकि, बदरुद्दीन अजमल ने अतीत में उत्तेजक और सांप्रदायिक भाषण दिए हैं, मगर इस भाषण में उन्होंने ऐसी कोई टिप्पणी नहीं की है। उनके भाषण के वीडियो को केवल चुनिंदा पंक्तियों को बनाए रखने के लिए गलत तरीके से संपादित किया गया था, ताकि ये दिखाया जा सके कि उन्होंने भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने की धमकी दी। उन्होंने अप्रैल 2019 में लोकसभा चुनाव के दौरान असम के बारपेटा में एक चुनावी रैली में भाषण दिया गया था।

भाषण के अनएडिटेड हिस्से को नीचे दिए गए वीडियो में देखा जा सकता है।

उनके भाषण का अनुवाद कुछ इस तरह से है, “इस भारत में, मुगल बादशाहों ने 800 वर्षों तक शासन किया। उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि वे इस देश को इस्लामिक राष्ट्र बनाएँगे। अगर वे ऐसा करने का सोचते तो 800 साल में पूरे भारत में एक भी हिंदू व्यक्ति नहीं रहता। सभी को मुस्लिम के रूप में परिवर्तित किया गया होगा। क्या उन्होंने उन्हें परिवर्तित किया? क्या उन्होंने ऐसा किया? उन्होंने इसकी कोशिश नहीं की, उन्होंने इसकी हिम्मत नहीं की। उसके बाद 200 वर्षों तक, अंग्रेजों ने इस देश पर शासन किया। यहाँ तक कि उन्होंने भी भारत को ईसाई राष्ट्र बनाने की कोशिश नहीं की। उसके बाद, राष्ट्र स्वतंत्र होने के बाद 70 साल में कॉन्ग्रेस ने 55 साल शासन किया। जवाहरलाल नेहरू, शास्त्री से लेकर राजीव गाँधी तक, मनमोहन सिंह तक, नरसिम्हा राव तक, एक भी कॉन्ग्रेसी नेता ने भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने का सपना नहीं देखा था। मोदी जी, इसका सपना मत देखो, आपका सपना सच नहीं होगा।”

उन्होंने कहा, “इस बार, आपको लॉक एंड की (AIUDF सिंबल) पर वोट देकर मोदी जी, बीजेपी, आरएसएस, हिमंत बिस्वा सरमा एंड पार्टी को जवाब देना है। इस तरह से वोट दें कि इंशा अल्लाह, मोदी चुनाव के बाद प्रधानमंत्री नहीं बन पाएँगे। सरकार कौन बनाएगा? हमारे महागठबंधन, यूपीए, महागठबंधन वहाँ सरकार बनाएँगे, और आपकी पार्टी यूडीएफ इस सरकार में सहयोगी होगी।”

इसलिए, AIUDF ने इस तरह की कोई टिप्पणी नहीं की, जिनके बारे में उन पर आरोप लगाया गया था। सोशल मीडिया पर जो वीडियो शेयर किया जा रहा है वह एक डॉक्टर्ड वीडियो है। इसके अलावा, वीडियो 2019 के लोकसभा चुनावों से है, आगामी विधानसभा चुनावों के दौरान का नहीं।

ममता घायल, एक भी पुलिस न होने का दावा: कॉन्ग्रेस ने कहा ‘सियासी नौटंकी’, BJP ने की CBI जाँच की माँग

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी नंदीग्राम में प्रचार के दौरान घायल हो गई हैं, उनके पैर में चोट लगी है। बताया जा रहा है कि उनके पैर में सूजन है। उन्होंने इसे बीजेपी की साजिश बताते हुए कहा है कि उन पर हमला हुआ है। नामांकन दाखिल करने के बाद वह लगातार मंदिरों में दर्शन कर रही थीं और लोगों से मिल रही थीं। इसी दौरान एक जगह भीड़ होने पर उनके पैर में चोट लगी है। वहीं, बीजेपी ने कहा है कि ममता बनर्जी सहानुभूति बटोरने की कोशिश कर रही हैं। 

ममता बनर्जी ने कहा, ”4-5 लोगों ने मुझे धक्का दिया, जब मैं गाड़ी के पास थी। मेरा पैर कुचलने की कोशिश की गई। मेरे पैर मैं सूजन है। मैं अब कोलकाता जा रही हूँ, डॉक्टर को दिखाने के लिए। बहुत दर्द है। बुखार भी आ गया है। कोई पुलिसकर्मी नहीं था। 4-5 लोगों ने जानबूझकर यह किया है। यह साजिश है।” वहीं टीएमसी ने कहा है कि चार-पाँच लोगों ने उनपर हमला किया। यह साजिश के तहत किया गया है। पार्टी इसकी शिकायत चुनाव आयोग से करेगी। वहीं चुनाव आयोग ने इस मामले पर रिपोर्ट माँग ली है।

हालाँकि, टीवी9 भारतवर्ष ने अपनी रिपोर्ट में चश्मदीदों के हवाले से बताया कि ममता बनर्जी पर किसी ने हमला नहीं किया। उनकी गाड़ी पिलर से टकराई थी। उनके साथ कई सारे पुलिसकर्मी थे। पुलिसकर्मी ने ममता बनर्जी के पैर पर बर्फ लगाया। ममता बनर्जी 5 मिनट रूकी और फिर चली गई। 4-5 लोगों द्वारा धकेलने की बात झूठी है।

ममता बनर्जी को इलाज के लिए कोलकाता ले जाया जा रहा है। रात होने की वजह से चॉपर उड़ान नहीं भर सकता है, इसलिए उन्हें सड़क मार्ग से ही ले जाया जा रहा है। बताया जा रहा है कि इसके लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया है। कोलकाता में दो अस्पताल तैयार रखे गए हैं।

बीजेपी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, ”वह मुख्यमंत्री हैं और 300-400 पुलिसकर्मियों के साथ रहती हैं, कोई सपने में भी नहीं सोच सकता है कि ममता बनर्जी पर हमला करे। हमला तो दूर की बात है कोई आँख उठा कर नहीं देख सकता है। यह एक्सीडेंट हो सकता है। लेकिन कोई हमला करने की हिम्मत नहीं कर सकता है। वह सहानुभूति बटोरने की कोशिश कर रही हैं।” बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता सामिक भट्टाचार्य ने कहा, ”मैं कामना करता हूँ कि वह जल्दी रिकवर कर जाएँ। उनके आसपास पुलिसकर्मी और समर्थक थे।”

पश्चिम बंगाल में बीजेपी के उपाध्यक्ष अर्जुन सिंह ने कहा, ”क्या तालिबान ने उनके पैर पर हमला किया। बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी उनके साथ रहते हैं। कौन उनके नजदीक जा सकता है? 4 आईपीएस अधिकारी उनकी सुरक्षा में तैनात हैं, उन्हें तुरंत सस्पेंड करना चाहिए। हमला करने वालों को गिरफ्तार किया जाए। वह सहानुभूति के लिए नाटक कर रही हैं।”

इसके साथ ही अर्जुन सिंह ने मामले में सीबीआई जाँच की माँग की है। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, “राज्य में कानून व व्यवस्था खराब होने की बात कहता था। आज मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पुलिस सुरक्षा के बीच घायल हो गईं। घटना की CBI जाँच करवाई जाए, दोषियों की तुरंत गिरफ्तारी हो और जिम्मेवार पुलिस अफसरों पर कार्रवाई। दीदी की जान बहुत कीमती है, उन्हें केंद्रीय सुरक्षा दी जाए।”

इसके साथ ही कॉन्ग्रेस नेता अधीर रंजन ने ममता को मुख्यमंत्री के साथ पुलिस मंत्री बताते हुए इसे सियासी नौटंकी कहा है। उन्होंने कहा कि नंदीग्राम की विरोधी हवा भाप कर ये सिम्पैथी गेन करने की कोशिश है।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को नंदीग्राम विधानसभा सीट से अपना नामांकन दाखिल किया और जीतने का विश्वास जताते हुए कहा कि वह नंदीग्राम से कभी खाली हाथ नहीं लौटी हैं। इस सीट पर उनका मुकाबला पूर्व में अपने सहयोगी और अब भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी से होगा। बनर्जी ने तृणमूल प्रदेश अध्यक्ष सुव्रत बक्शी की उपस्थिति में हल्दिया सब डिविजनल कार्यालय में नामांकन दाखिल किया।

इससे पहले उन्होंने दो किलोमीटर लंबे रोड शो में हिस्सा लिया और एक मंदिर में पूजा अर्चना की। नामांकन दाखिल करने में बाद बनर्जी एक और मंदिर गईं। मुख्यमंत्री कोलकाता की भवानीपुर सीट छोड़ने के बाद पहली बार नंदीग्राम से चुनाव लड़ रही हैं। उन्होंने नंदीग्राम में एक घर किराए पर लिया है जहाँ से वह चुनाव प्रचार करेंगी। ऐसे ही कभी चुनाव प्रचार में केजरीवाल पर हमले की बात भी सुर्खियाँ बनती थी जबकि वह सुरक्षाकर्मी और अपने कार्यकर्ताओं से घिरे होते थे।

‘पहले- हिजाब पहनती हूँ, मुसलमानों की हिफाजत करती हूँ अब- BJP के डर से खुद को ब्राह्मण बताने में जुटीं ममता’

पश्चिम बंगाल में जैसे-जैसे चुनाव के पहले चरण की तारीख नजदीक आ रही है वैसे-वैसे सूबे का सियासी पारा चढ़ता जा रहा है। राजनीतिक बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी चरम पर है। इस बीच कॉन्ग्रेस पार्टी के नेता अधीर रंजन चौधरी ने टीएमसी प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर बड़ा हमला बोला है।

दरअसल, नंदीग्राम की रैली में ममता के मंत्र और श्लोक पाठ के बाद बीजेपी उन्हें चुनावी हिंदू बता रही है। वहीं कॉन्ग्रेस नेता अधीर चौधरी ने कहा, “बीजेपी के डर से ममता उनसे भी बड़ी हिन्दूवादी बनने की कोशिश कर रहीं हैं।”

अधीर रंजन ने कहा कि इस चुनाव में आम लोगों की कोई बात नहीं कर रहा। सिर्फ सोनार बांग्ला करके बीजेपी (BJP) और टीएमसी (TMC) लोगों से वोट माँग रहे हैं। ममता पहली बार खुद को ब्राह्मण साबित करने की कोशिश कर रही हैं। पहले कहती थीं की हिजाब पहनती हूँ और मुसलमानों की हिफाजत करती हूँ। अब तेवर बदल गए हैं आजकल चंडी पाठ कर रही हैं। और ये सब बीजेपी के डर की वजह से हो रहा है।

कॉन्ग्रेस नेतृत्व द्वारा बंगाल में चुनाव प्रचार की योजना पर पूछे गए सवाल के जवाब में अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में पार्टी पूरे दमखम से चुनाव लड़ेगी। अपने सहयोगियों के खिलाफ हम विरोधियों को कड़ी टक्कर देंगे। वहीं अधीर रंजन ने ये भी कहा कि राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी भी प्रचार करने के लिए वहाँ जाएँगे। 

राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर ममता बनर्जी को पश्चिम बंगाल में चुनाव लड़ने में मदद कर रहे हैं और ऐसा प्रतीत होता है कि उन्होंने मतदाताओं को लुभाने के लिए चालें चल दी हैं। हमेशा की तरह, उन्होंने राजनेताओं को उनकी हिंदू पहचान का सहारा लेने का सुझाव दिया।

2020 के चुनाव में हनुमान मंदिर जाते केजरीवाल

टीएमसी महाशिवरात्रि पर अपना घोषणा पत्र जारी करने जा रही है। घोषणा पत्र जारी करने से पहले 11 मार्च को नंदीग्राम में सुबह पूजा करने की भी उम्मीद है। जाहिर तौर पर, उन्हें भाजपा की ‘राम भक्त’ छवि का विरोध करने के लिए ‘शिव भक्त’ के रूप में पेश किया जा रहा है।

इधर दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि वे भगवान राम के भक्‍त हैं। विधानसभा में केजरीवाल ने कहा कि वे हनुमान के भक्‍त हैं और हनुमान रामचंद्र जी के… तो इस नाते वे रामचंद्र जी के भी भक्‍त हुए। केजरीवाल ने कहा कि उनकी सरकार ने पिछले 6 सालों में दिल्‍ली के भीतर ‘राम राज्‍य’ लाने की कोशिश की है। दिल्‍ली के सीएम ने घोषणा करते हुए कहा कि अयोध्‍या में भव्‍य मंदिर बनने के बाद, सरकार बुजुर्गों को मुफ्त में दिल्‍ली से अयोध्‍या दर्शन के लिए ले जाएगी।