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केजरीवाल ने खुद को बताया ‘राम भक्त’, लोगों ने याद दिलाए उनके पुराने ‘पाप’ : उनके हिन्दू विरोधी टिप्पणी हुए वायरल

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बुधवार (मार्च 10, 2021) को खुद को भगवान हनुमान का भक्त घोषित किया। उन्होंने यह भी दावा किया कि चूँकि हनुमान, भगवान राम के भक्त हैं, इसलिए वह भी भगवान राम के भक्त हैं।

केजरीवाल ने घोषणा की कि अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के बाद वह दिल्ली के बुजुर्गों को अयोध्या में दर्शन के लिए ले जाएँगे। इसके बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने अरविंद केजरीवाल को उनके पुराने ‘पाप’ याद दिलाते हुए उन तमाम ट्वीट्स की याद दिलाई, जिसमें उन्होंने न केवल हिन्दू धर्म का मजाक उड़ाया था, बल्कि हिन्दुओं का घनघोर अपमान भी किया था।

केजरीवाल ने पहले उसी राम मंदिर के निर्माण पर सवाल उठाया था जहाँ वह दिल्ली के बुजुर्गों को तीर्थ यात्रा के लिए ले जाना चाहते है।

2019 के आम चुनावों से पहले, केजरीवाल ने एक तस्वीर शेयर किया था जिसमें एक व्यक्ति को हिंदुओं, बौद्धों और जैनों के पवित्र प्रतीक स्वस्तिक चिन्ह को झाड़ू से मारते हुए देखा जा सकता है।

नेटिज़न्स ने यह भी मज़ाक उड़ाया कि मेड इन इंडिया चीनी कोरोना वायरस वैक्सीन लेने के बाद केजरीवाल का अचानक से हृदय परिवर्तन हो गया है। स्वदेशी वैक्सीन का असर दिखने लगा है।

अरविंद केजरीवाल ने कई बार हिंदुओं का अपमान किया।

AAP tweet

पिछले साल अगस्त में, AAP के आधिकारिक ट्विटर हैंडल ने सिक्किम में कंचनजंगा, उत्तराखंड में कामेट पीक, और नंदा देवी पहाड़ियों की तस्वीरें शेयर की थीं और दिल्ली के गाजीपुर में एक अपमानजनक लैंडफिल के साथ उनकी थी। विवादास्पद ट्वीट के साथ कैप्शन था, “भारत का सबसे ऊँचा पर्वत।”

AAP Youth Manifesto during Punjab Elections.

2016 में, पंजाब विधानसभा चुनाव में भाग लेने के दौरान, AAP के युवा घोषणापत्र में AAP के चुनाव चिन्ह, झाड़ू की एक तस्वीर थी, जो स्वर्ण मंदिर में पवित्र कुंड पर थी। इसके अलावा भी अनगिनत ट्वीट्स सोशल मीडिया पर वायरल हैं।

सचिन वाजे का क्राइम ब्रांच से गुपचुप ट्रांसफर: मनसुख हिरेन की हत्या के मामले में पत्नी ने लगाया था संलिप्तता का आरोप

महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने बुधवार (मार्च 10, 2021) को कहा कि विवादास्पद पुलिस अधिकारी सचिन वाजे को क्राइम ब्रांच से हटाकर किसी अन्य विभाग में तैनात किया गया है। विधानसभा में बोलते हुए, देशमुख ने कहा कि यह कदम इसलिए उठाया गया ताकि मनसुख हिरेन की मौत के मामले की निष्पक्ष जाँच की जा सके। भारत के सबसे अमीर उद्योगपति मुकेश अंबानी के मुंबई स्थित बहुमंजिला घर एंटीलिया के बाहर खड़ी मिली संदिग्ध कार के मालिक मनसुख हिरेन की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मुद्दा अब महाराष्ट्र विधानसभा में भी गूँज रहा है। वहीं उद्धव ठाकरे सरकार द्वारा गुपचुप तरीके से क्राइम ब्रांच से किसी अज्ञात विभाग में सचिन वाजे का तबादला भी सवालों के दायरे में है।

देवेंद्र फडणवीस ने एंटीलिया बम मामले में सचिन वाजे की भागीदारी पर घेरा

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के महाराष्ट्र विधानसभा में मनसुख हिरेन की पत्नी विमला हिरेन द्वारा दिए गए एक बयान के बारे में आवाज उठाने के कुछ दिनों बाद सचिन वाजे को एक अलग विभाग में स्थानांतरित करने का कदम उठाया गया। बयान में, उन्हें शक था कि मुंबई पुलिस की अपराध शाखा के अधिकारी और ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ सचिन वाजे ने उनके पति की हत्या कर दी है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सचिन वाजे ने स्कॉर्पियो कार का इस्तेमाल नवंबर 2020 से 5 फरवरी तक कई महीनों तक किया। विमला हिरेन ने अपने बयान में उल्लेख किया कि उन्हें संदेह है कि सचिन वाजे उनके पति की हत्या में शामिल थे। बकौल विमला हिरेन, वाजे ने उनके पति से इस मामले में गिरफ्तार हो जाने को कहा था और जमानत दिलाने का आश्वासन भी दिया था।

इससे पहले, फडणवीस ने एंटीलिया बम कांड मामले में मुंबई पुलिस के अधिकारी की भागीदारी के बारे में चौंकाने वाले खुलासे किए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि एंटीलिया के बाहर मिलने वाले स्कॉर्पियो का मालिक सचिन वाजे नाम से रजिस्टर्ड मोबाइल फोन नंबर के संपर्क में था। बता दें कि इसी स्कॉर्पियो से धमकी भरा पत्र मिला था।

कार मालिक मनसुख हिरेन थे, जिन्होंने आरोप लगाया था कि उनकी कार मुलुंड-ऐरोली लिंक रोड से चुराई गई थी। हिरेन ने लापता कार के बारे में पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई थी। हिरेन को पिछले हफ्ते मुंबई के एक नाले में मृत पाया गया था।

फडणवीस ने कहा था, “जिस व्यक्ति ने अंबानी के घर के बाहर कार की गुमशुदगी दर्ज की थी, उसने एक नंबर पर कुछ कॉल किए थे और उस नंबर से फोन कॉल आए थे। जब जाँच की गई तो पता चला कि यह नंबर मुंबई पुलिस अधिकारी सचिन वाजे के पास दर्ज है। दोनों के बीच पहली बातचीत 8 जून को हुई थी। रिकॉर्ड्स दिखाते हैं कि 24 जुलाई को एक और कॉल किया गया था। इसी तरह, कई कॉल पिछले कई महीनों में दोनों के बीच हुई हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “सचिन वाजे पहले पुलिस अधिकारी थे और फिर उन्हें जाँच अधिकारी (IO) के रूप में नियुक्त किया गया। तीन दिन पहले, उन्हें IO के रूप में हटा दिया गया था और मैं यह समझने में विफल रहा कि उन्हें क्यों हटाया गया था।” फडणवीस ने पूछा कि स्थानीय पुलिस से पहले वाजे मौके पर कैसे पहुँच गए।

इन सबके अलावा ये भी पता चला था कि मनसुख हिरेन ने मौत से पहले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखा था। उन्होंने इस पत्र में कहा था कि पीड़ित होने के बावजूद उनके साथ आरोपित की तरह व्यवहार किया जा रहा है। इसमें उन्होंने पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ एक पत्रकार का नाम भी लिया था। उन्होंने कहा था कि उनसे हिरासत में भी पूछताछ की गई, जिससे उनकी मानसिक प्रताड़ना हो रही है।

मैं भी राम भक्त हूँ, दिल्ली के बुजुर्गों को राम मंदिर दर्शन के लिए अयोध्या लेकर जाऊँगा: केजरीवाल ने किया सदन से ऐलान

दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि वे भगवान राम के भक्‍त हैं। विधानसभा में केजरीवाल ने कहा कि वे हनुमान के भक्‍त हैं और हनुमान रामचंद्र जी के… तो इस नाते वे रामचंद्र जी के भी भक्‍त हुए। केजरीवाल ने कहा कि उनकी सरकार ने पिछले 6 सालों में दिल्‍ली के भीतर ‘राम राज्‍य’ लाने की कोशिश की है। दिल्‍ली के सीएम ने घोषणा करते हुए कहा कि अयोध्‍या में भव्‍य मंदिर बनने के बाद, सरकार बुजुर्गों को मुफ्त में दिल्‍ली से अयोध्‍या दर्शन के लिए ले जाएगी।

अरविंद केजरीवाल ने कहा, “मैं व्‍यक्तिगत तौर पर हनुमान जी का भक्‍त हूँ। हनुमान जी रामचंद्र जी के भक्‍त हैं तो उस नाते मैं हनुमान जी और श्री रामचंद्र जी, दोनों का भक्‍त हुआ। प्रभु श्रीराम अयोध्‍या के राजा थे। उनके शासनकाल में… कहते हैं कि सब कुछ बहुत अच्‍छा था। सब लोग सुखी थी। किसी को किसी प्रकार का दुख नहीं था। हर प्रकार की सुविधा थी। उसे ‘राम राज्‍य’ कहा गया। ‘राम राज्‍य’ एक अवधारणा है। रामचंद्र जी भगवान थे, हम उनके सामने एक तुच्‍छ प्राणी हैं। हम तो तुलना भी नहीं कर सकते लेकिन उनसे प्रेरणा लेकर हम अगर उनके ‘राम राज्‍य’ की अवधारणा के रास्‍ते पर चलकर एक सार्थक कोशिश भी कर सकें तो हमारा जीवन सफल हो जाएगा।”

केजरीवाल ने गिनाए ‘राम राज्‍य’ के 10 सिद्धांत

सीएम केजरीवाल ने कहा, “प्रभु श्रीराम से प्रेरणा लेकर ‘राम राज्‍य’ की अवधारणा को दिल्‍ली के अंदर पूरी साफ नीयत से लागू करने के लिए पिछले छह साल से हम प्रयासरत हैं। हमने एक तरह से राम राज्य के 10 सिद्धांत बनाए हैं।” 

केजरीवाल ने जो 10 सिद्धांत गिनाए, वो इस प्रकार हैं:

1. कोई भूखा ना सोए

2. बच्चों को अच्छी शिक्षा

3. सभी को बेहतर इलाज

4. 24×7 मुफ्त बिजली

5. सभी को मुफ्त पानी

6. सभी को रोजगार

7. बेघरों को मकान

8. महिलाओं को सुरक्षा

9. बुजर्गों को सम्मान

10. सभी को समान अधिकार

केजरीवाल ने कहा, “पिछले 1 साल में देश और दिल्ली ने कोरोना महामारी का सामना किया। नेता चाहे कितनी भी तारीफ कर ले लेकिन अस्पताल में इलाज तो डॉक्टर्स ने किया। हम और सदन दिल से डॉक्टर्स, नर्सेस, फ्रंटलाइन वारियर्स और वैज्ञानिकों का धन्यवाद करते हैं।”

उन्होंने कहा कि राम राज्य से एक अवधारणा है रामचंद्र जी भगवान थे। हम उनके सामने एक विचित्र प्राणी है। हम इतना भी नहीं कर सकते। लेकिन उनसे प्रेरणा लेकर हम अगर उनके राम राज्य की अवधारणा के रास्ते पर चलकर अगर एक सार्थक कोशिश भी कर सकें तो हमारा जीवन धन्य हो जाएगा।

‘TMC के गुंडों ने किया रिवाल्वर, चाकू से हमला’: ABVP के घायल सदस्यों ने दर्ज कराई शिकायत

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के दो सदस्यों को मंगलवार (मार्च 9, 2021) को उत्तर 24 परगना जिले के राहरा बाजार क्षेत्र में टीएमसी कार्यकर्ताओं द्वारा कथित रूप से पीटा गया। हालाँकि, सत्तारूढ़ टीएमसी ने इन आरोपों का खंडन किया है।

एबीवीपी के सदस्य सौतनिक बनर्जी और कृष्णेंदु चक्रवर्ती को कथित तौर पर कुछ अज्ञात लोगों ने बुलाया और उनके साथ दुर्व्यवहार किया। दोनों का दावा है कि उन्हें पीटा गया क्योंकि वे बंगाल में एबीवीपी के साथ शामिल थे। यह घटना मंगलवार दोपहर को हुई और रात में प्रकाश में आया जब एबीवीपी सदस्यों के दो वीडियो वायरल हुए।

वीडियो में सौतनिक की बाई आँखों में चोट देखा गया। सौतनिक ने खुद को एबीवीपी का कार्यकर्ता होने का दावा करते हुए कहा, “मुझे और मेरे सहयोगी कृष्णेंदु पर रिवाल्वर और चाकू से TMC गुंडों द्वारा हमला किया गया। 9-10 बदमाश थे। कृष्णेंदु पर रिवॉल्वर की बट से हमला किया गया, जबकि मुझ पर चाकू से हमला किया गया। बहुत खून बह रहा था और मैं अपनी बाईं आँख से नहीं देख पा रहा था।”

उन्होंने आगे कहा कि भाजपा सदस्यों के बचाव में आने के बाद टीएमसी के गुंडे भाग गए। सौतनिक ने यह भी दावा किया कि ‘उन्हें भगवा पार्टी से जुड़े होने के कारण पीटा गया था’ और यह भी पूछा गया कि वे तृणमूल कॉन्ग्रेस चतरा परिषद, टीएमसी के छात्रसंघ के साथ क्यों नहीं हैं। रहरा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज की गई है।

आरोपों का खंडन करते हुए, खड़ाह शहर तृणमूल कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष दिब्येंदु चौधरी ने कहा, “यह भाजपा द्वारा पूर्व में की गई एक पूर्व नियोजित घटना है। वे यहाँ हार रहे हैं और यही कारण है कि ये आंतरिक झड़पें उनके रैंकों के भीतर शुरू हो गई हैं और वो इसका आरोप मुझ पर लगा रहे हैं।”

गौरतलब है कि हाल ही में पश्चिम बंगाल भाजपा नेता फिरोज कमाल गाजी पर हमला हुआ था। ‘बाबू मास्टर’ के नाम से पहचाने जाने वाले फिरोज की कार पर शनिवार (फरवरी 13, 2021) को क्रूड बम से हमला किया गया। ये हमला तब हुआ था, जब वो राजधानी कोलकाता की तरफ जा रहे थे। गाजी उन नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने हाल के दिनों में तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) छोड़ कर भाजपा का दामन थामा है।

उन पर हमला तब हुआ, जब वो मिनखा पुलिस थाने के अंतर्गत आने वाले बसंती हाइवे से गुजर रहे थे। भाजपा की राज्य यूनिट ने आरोप लगाया कि ये हमला TMC के गुंडों ने किया है। भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने हॉस्पिटल जाकर उनसे मुलाकात की हालचाल लिया।

कश्मीर में ‘पुलवामा’ दोहराने की साजिश हुई नाकाम: IED के साथ फिदायीन हमलावर समेत 7 आतंकी गिरफ्तार

दक्षिण कश्मीर में पुलवामा जैसे हमले को दोहराने की साजिश को पुलिस ने नाकाम कर दिया है। इस बार आतंकियों की तैयारी पुलिस के सैन्य काफिले के अलावा म्युनिसिपल कमेटी पांपोर की इमारत को भी उड़ाने की थी।

गनीमत ये है कि ये आतंकी अपनी कोशिशों में कामयाब होते इससे पहले ही पुलिस ने सातों को गिरफ्तार कर लिया। इनमें से एक फिदायीन हमलावर भी है। पुलिस ने पकड़े गए आतंकियों के तार लश्कर और जैश से जुड़े बताए हैं।

आतंकियों के पास से 2 शक्तिशाली IED और वाहन बम के लिए तैयार की जा रही कार भी बरामद हुई है। IGP कश्मीर रेंज विजय कुमार ने पत्रकारों से इस विषय में बातचीत के दौरान बताया कि पुलवामा जिले के अवंतीपोर इलाके में सक्रिय लश्कर व जैश के जिन 7 आतंकियों को पकड़ा गया है। इनमें एक बीए के प्रथम वर्ष का छात्र है।

कैसे पकड़े गए 7 आतंकी?

आईजीपी ने कहा कि उन्हें अपने सूत्रों से पता चला था कि पांपोर में जैश-ए-मोहम्मद ने कुछ नए लड़कों को भर्ती किया है, जो 14 फरवरी 2019 की तरह ही कोई बड़ा बम धमाका करने की साजिश की तैयारी कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि इस जानकारी के बाद उन्होंने संदिग्ध तत्वों के ऊपर निगरानी शुरु की और साहिल नजीर नामक एक युवक को पकड़ लिया। साहिल बीए प्रथम वर्ष का छात्र है जो पांपोर में रहता है। वह इंटरनेट के जरिए जिहादी तत्वों के संपर्क में आया और आतंकी संगठन का हिस्सा बना।

साहिल नजीर से पूछताछ के बाद 4 आतंकी और पकड़े गए। पुलिस ने उनके पास से कार JK0E-0690 बरामद की। अधिक पूछताछ में पता चला कि इस कार का इस्तेमाल वाहन बम के तौर पर किया जाना था।

बता दें कि जैश-ए-मोहम्मद ने पंपोर से कुछ ही दूरी पर लिथपोरा में सीआरपीएफ के काफिले पर वाहन बम से 14 फरवरी 2019 को हमला किया था। हमले में 40 सीआरपीएफ कर्मी शहीद हो गए थे। आतंकी आदिल डार इसमें फिदायीन हमलावर था जिसके विस्फोट में बुरी तरह परखच्चे उड़ गए थे।

साहिल व उसके साथी उसी तरह के हमले को अंजाम देने की फिराक में थे। सख्ती से पूछताछ में साहिल ने सारी बातें उगली। इतना ही नहीं उसने ये भी बताया कि साजिश को अंजाम तक पहुँचाने में उसकी व उसके साथियों की मदद उत्तरी कश्मीर में सक्रिय आतंकियों का एक ओवरग्राऊंड वर्कर कर रहा था।

25 Kg अमोनियम पाउडर हुआ आतंकी के घर से बरामद, इमारत उड़ाने की साजिश का खुलासा

आईजीपी ने यह भी बताया कि पांपोर में एक मुसैब अहमद नाम का आतंकी भी पकड़ा गया है। ये लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा है। मुसैब ने पूछताछ में अपने घर में छिपा कर रखे 25 किलो अमोनियम पाउडर की जानकारी दी। पुलिस ने सूचना पाते ही फौरन इसे बरामद किया। इसी पाउडर का यूज आइईडी बनाने में होना था।

इसके बाद मुसैब ने जैसे ही बताया कि IED के लिए बाकी सामान उत्तरी कश्मीर से आने वाला था और उसे शाहिद सोफी नाम का आतंकी उसे लाता। पुलिस ने तेजी दिखाते हुए सोफी को भी पकड़ लिया। जिसके बाद सोफी ने बताया कि वह एक शक्तिशाली विस्फोटक तैयार कर उसेे म्युनिसिपल कमेटी पांपोर की इमारत में लगाना चाहते थे।

बता दें कि जैश और लश्कर के पकड़े गए यह 7 आतंकी कुछ समय पहले ही आतंकवादी बने हैं। इनमें से कुछ कथित तौर पर अपने घरों में ही थे। आईजीपी ने तो बताया कि यह सभी इंटरनेट मीडिया के जरिए सरहद पार बैठे आतंकी सरगनाओं के साथ लगातार संपर्क में थे।

उन्होंने ये भी कहा कि आतंकी अब अपने हमलों को अंजाम देने के लिए अपनी रणनीति लगातार बदल रहे हैं। लेकिन सुरक्षाबल उनकी साजिशों से अवगत हैं। वह लगातार सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा कर उसे बेहतर बनाते हैं ताकि आतंकियों को किसी तरह का मौका न मिले।

सोपोर में भी सुरक्षाबल को सफलता

गौरतलब है कि एक ओर पांपोर में पुलिस को यह सफलता मिली है। वहीं बारामुला जिले के सोपोर में मंगलवार को सुरक्षाबलों ने अल-बदर कमांडर गनई ख्वाजा को मार गिराने में सफलता पाई। इस संबंध में कश्मीर जोन के आईजी विजय कुमार ने बताया कि सोपोर पुलिस को आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिली थी।

इसके बाद पुलिस सेना और सीआरपीएफ ने इलाके की घेराबंदी की। जहाँ आतंकियों की ओर से फायरिंग शुरू हो गई। जवाबी कार्रवाई में गनई ख्वाजा मारा गया, जबकि उसके दो साथी मौके से भाग निकले। मारे गए आतंकी के पास से भारी मात्रा में हथियार व गोला बारूद बरामद हुआ है।

ख्वाजा के बारे में आईजीपी ने बताया कि वह साल 2000 में पाकिस्तान गया था। जहाँ से वह 2 साल बाद 2002 में वापस आया। इसके बाद उसकी गिरफ्तारी हुई। साल 2008 में वह आतंकी संगठन अल बदर में शामिल हो गया। पिछले कुछ महीनों में मारे गए आतंकियों को उसने पाकिस्तान के इशारे पर भर्ती किया था।

उज्जैन में तेजाब डाल कर हनुमान जी की मूर्ति को जलाया: हिन्दू संगठनों के लोग कार्रवाई के लिए सड़क पर, 144 लागू

मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले के बड़नगर शहर में डायवर्शन रोड पर पेट्रोल पंप के पास बने हनुमान मंदिर में असामाजिक तत्वों ने छेड़छाड़ कर बजरंग बली की मूर्ति को जला कर काला कर दिया। मूर्ति की हालत देख मालूम होता है कि किसी ज्वलनशील पदार्थ को मूर्ति पर डाला गया। 

मामले की जानकारी होते ही हिंदू संगठन के लोग आक्रोशित हो गए और सड़कों पर आकर प्रदर्शन करने लगे। इस दौरान चक्का जाम भी हुआ। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि पुलिस को बैरिकेडिंग करनी पड़ी। वहीं हालातों के मद्देनजर बाजार भी बंद करा दिए गए हैं। 

मंदिर में क्षतिग्रस्त हुई हनुमान जी की मूर्ति

रिपोर्ट्स में पथराव और तोड़फोड़ की बात भी कही जा रही है। हालाँकि स्थिति अभी नियंत्रण में हैं। शहर में धारा 144 लगाई गई है। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि जल्द से जल्द मूर्ति को क्षतिग्रस्त करने वाला पकड़ा जाएगा। 

पुलिस की एक विशेष टीम आरोपितों को पकड़ने में लग गई है। मूर्ति देख पुलिस ने आशंका जताई है कि मूर्ति पर तेजाब डाला गया या फिर हो सकता उस पर आग लगाई गई हो। फॉरेंसिक दल इसकी जाँच कर रहा है।

जानकारी के अनुसार, स्थानीयों के संज्ञान में ये घटना मंगलवार को आई, वो भी तब जब सुबह श्रद्धालु हनुमान जी के दर्शन को पहुँचे, वहाँ लोगों ने देखा कि वहाँ मूर्ति काली हुई पड़ी थी।

थोड़ी देर में हर जगह इसका शोर हो गया। हिंदूवादी संगठन विरोध करने सड़कों पर उतर आए। प्रमुख मार्गों पर चक्का जाम कर दिया गया। लोगों ने घटना से नाराज होकर पुलिस और प्रशासन के ख़िलाफ़ नारेबाजी की। कई जगह पथराव भी हुआ। भारी भीड़ में घटना के ख़िलाफ़ जुलूस निकाले गए।

स्थानीय समाचार पोर्टल Damoh Today के अनुसार, स्वस्तिक पीठ के संत डॉ अवधेश पुरी ने इस घटना को बेहद शर्मनाक बताया है। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी 5 मार्च को मंदिर को नुकसान पहुँचाया गया था। यदि उसी समय कार्रवाई हो जाती तो यह दूसरी बार घटना नहीं होती। दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के डॉ. नरेंद्र सिंह राजावत ने घटना की निंदा की। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं से हिन्दुओं की भावनाओं को ठेस पहुँची है। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि प्रशासन जितनी जल्दी हो सके, उतनी जल्दी सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वालों को पकड़े। स्थानीय लोगों ने मोटरसाइकिल रैली निकाल कर असामाजिक तत्वों की गिरफ्तारी की माँग भी की।

बता दें कि हिंदूवादी संगठनों के लोगों ने पुलिस-प्रशासन पर सही से जाँच न करने का आरोप लगाया है। जिसके चलते एसपी सत्येंद्र शुक्ला ने टीआइ सतनाम सिंह को लाइन अटैच कर दिया और शहर में धारा 144 लगा दी गई है। सुरक्षा के लिहाज से बड़ी संख्या में पुलिस बल भी तैनात किया गया है। पुलिस ने अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ केस दर्ज कर मामले की जाँच शुरू कर दी है।

‘पार्टी में नहीं बचा लोकतंत्र’: पीसी चाको ने सोनिया को भेजा इस्तीफा, कहा- ‘कॉन्ग्रेस के साथ काम करना मुश्किल’

पाँच राज्यों में विधानसभा चुनावों का ऐलान हो गया है, लेकिन कॉन्ग्रेस की अंदरुनी कलह खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। हाल ही में कॉन्ग्रेस के नाराज नेताओं के ग्रुप G-23 ने पार्टी हाईकमान की टेंशन बढ़ाई थी। वहीं अब कॉन्ग्रेस को एक बड़ा झटका लगा है, क्योंकि वरिष्ठ नेता पीसी चाको ने कॉन्ग्रेस छोड़ने का ऐलान कर दिया है। साथ ही अपना इस्तीफा कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी को भेज दिया है।

उन्होंने कॉन्ग्रेस में गुटबाजी के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि पार्टी में अब जरा भी लोकतंत्र नहीं बचा है। खुद पीसी चाको ने ऐलान करते हुए कहा कि उन्होंने कॉन्ग्रेस पार्टी छोड़ दी है और अपना इस्तीफा पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी को भेज दिया है।

इस्तीफे के ऐलान के बाद चाको ने कहा कि केरल कॉन्ग्रेस की टीम के साथ काम करना मुश्किल है। उन्होंने त्याग पत्र में कहा, “मैंने पार्टी के लिए कड़ी मेहनत की, लेकिन केरल कॉन्ग्रेस टीम के साथ काम करना वास्तव में मुश्किल है। मैं कॉन्ग्रेस द्वारा लिए गए हर फैसले के साथ खड़ा था, लेकिन अब यह बहुत मुश्किल है। आप एक केंद्रीय चरित्र वाली पार्टी नहीं चला सकते।”

उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस नेतृत्व ने स्थिति को सुधारने के लिए कोई कदम नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारों के चयन के लिए प्रदेश समिति की कोई भूमिका नहीं है। इस्तीफे की घोषणा के बाद कॉन्ग्रेस के पूर्व सांसद पीसी चाको ने कहा, “मैं पिछले कई दिनों से इस फैसले पर सोच रहा था। मैं केरल से हूँ, जहाँ कॉन्ग्रेस पार्टी जैसा कुछ नहीं है। वहाँ 2 पार्टी हैं- कॉन्ग्रेस (आई) और कॉन्ग्रेस (ए)। वहाँ 2 पार्टियों की कोऑर्डिनेशन कमिटी है, जो KPCC के रूप में काम कर रही है।”

उन्होंने आगे कहा कि केरल में महत्वपूर्ण विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। लोग चाहते हैं कि कॉन्ग्रेस वापस आए, लेकिन पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में गुटबाजी है। मैं हाईकमान से गुटबाजी को खत्म करने के लिए कह रहा था, लेकिन वो दोनों गुटों के तर्क से संतुष्ट है।

चाको ने आगे कहा कि कॉन्ग्रेस एक महान पार्टी है। कॉन्ग्रेस का कार्यकर्ता होना प्रतिष्ठा की बात है लेकिन आज केरल में कोई भी व्यक्ति कॉन्ग्रेस का आदमी नहीं है। जो भी लोग हैं वो या तो I ग्रुप के हैं या फिर A ग्रुप के, इसलिए उन्होंने पार्टी को छोड़ने का फैसला लिया है। उनके मुताबिक कॉन्ग्रेस हाईकमान गुटबाजी पर मूकदर्शक बना हुआ है, जिस वजह से इसका कोई हल नहीं हो पा रहा है।

वरिष्ठ नेता पीसी चाको के इस्तीफे को चुनावी मौसम में कॉन्ग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। चाको, केरल की त्रिशूर संसदीय सीट का लोकसभा में प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। विधानसभा चुनाव से पहले कॉन्ग्रेस ने पीसी चाको को दिल्ली का प्रभारी बनाया था। हालाँकि, विधानसभा चुनाव में हार के बाद पीसी चाको ने कॉन्ग्रेस के दिल्ली प्रभारी पद से इस्तीफा दे दिया था।

वोटिंग में एक महीने से कम का वक्त 

पश्चिम बंगाल, असम, पुडुचेरी, तमिलनाडु के अलावा केरल में भी विधानसभा के चुनाव हैं। चुनाव आयोग ने इस बार विधानसभा चुनाव सिर्फ एक चरण में करवाने का फैसला लिया है, जिसके तहत 6 अप्रैल को वोटिंग होगी, जबकि 2 मई को रिजल्ट आएँगे। वहीं बीजेपी भी केरल में जी-जान से जुटी हुई है। हाल ही में मेट्रोमैन ई श्रीधरन ने केरल में बीजेपी के दामन को थाम लिया था।

भैंसा सांप्रदायिक हिंसा में 15 मामले दर्ज, दो पार्षदों समेत 13 दंगाई गिरफ्तार: 2 घर और 9 वाहन हुए थे खाक, कई घायल

तेलंगाना के भैंसा में सांप्रदायिक हिंसा के संबंध में कुल 15 मामले दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा दो पार्षदों समेत 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिन पर हिंसा में सक्रियता से भाग लेने का आरोप है। निर्मल पुलिस अधीक्षक विष्णु वारियर ने बुधवार (मार्च 10, 2021) को द न्यूज मिनट को इसकी जानकारी दी। एसपी ने कहा, “दो पार्षदों ने लोगों को इकट्ठा किया और हिंसा में सक्रिय रूप से भाग लिया।” बताया जा रहा है कि गिरफ्तार किए गए दोनों पार्षदों में से एक AIADMK से है, जबकि दूसरा स्वतंत्र पार्षद है। 

भैंसा में दो धार्मिक समूहों के बीच रविवार शाम सांप्रदायिक झड़प हुई थी, जिसके परिणामस्वरूप दो घरों और नौ वाहनों को आग लगा दी गई थी। पथराव में कुछ पत्रकारों और पुलिसकर्मियों सहित 10 लोग घायल हो गए। पुलिस ने बाद में कहा कि हिंसा दो व्यक्तियों के बीच एक बाइक दुर्घटना पर बहस के बाद हुई, जो बाद में दो धार्मिक समूहों के बीच लड़ाई में बदल गई और पूरे शहर में फैल गई।

एसपी विष्णु वारियर ने टीएनएम को बताया कि 22 और लोग उनकी हिरासत में हैं, जिन्हें जल्द ही रिमांड पर लिया जाएगा। एसपी ने कहा, “हम विभिन्न स्रोतों से सबूत इकट्ठा कर रहे हैं। लोगों को पकड़ने और गिरफ्तार करने की कवायद चल रही है। इलाके में कुल 450 पुलिस कर्मी तैनात हैं। स्थिति नियंत्रण में है।”

पुलिस ने आगे के दंगों को रोकने के लिए भैंसा में आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 144 लगा दी है। 450 पुलिस कर्मियों में पड़ोसी जिलों के 50 उच्च पदस्थ अधिकारी हैं जो निर्मल में तैनात किए गए हैं। गैरकानूनी सभा को रोकने के लिए पिकेटिंग प्वाइंट की भी व्यवस्था की गई है। जिले में इंटरनेट सेवाएँ भी निलंबित कर दी गई हैं।

एसपी ने टीएनएम से कहा कि वे स्थिति का आकलन करने के बाद बुधवार शाम एक बैठक के बाद फिर से शुरू की जाने वाली इंटरनेट सेवा के बारे में निर्णय लेंगे। इस बीच, आरोप लगाया गया कि भैंसा में हिंदू हिंसा के पीड़ित थे, भाजपा के कई नेताओं ने भैंसा का दौरा करने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। 

भाजपा सांसद सोयम बापू राव और धर्मपुरी अरविंद को पुलिस ने मंगलवार को हिरासत में ले लिया। अरविंद को घर में नजरबंद कर दिया गया था, लेकिन बापू राव, जो निर्मल के रास्ते में थे, को बलकोंडा में हिरासत में लिया गया था। हिंसा को लेकर गृह राज्य मंत्री किशन रेड्डी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को हिंसा के बारे में लिखा है।

किशन रेड्डी ने कहा, “पिछले 30-40 वर्षों से भैंसा में सांप्रदायिक दंगे होते रहे हैं। यह तीन दिन पहले फिर से हुआ। इन दंगों के पीछे असामाजिक तत्व हैं, जो सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ रहे हैं। ऐसा लगता है जैसे कि दंगे आम लोगों पर हमला करने के लिए एक बड़ी साजिश का हिस्सा हैं।”

गौरतलब है कि ये पहली बार नहीं जब भैंसा साम्प्रादायिक हिंसा का गवाह बना हो। साल 2020 में यहीं हिंदुओं और मुस्लिमों में बात बिगड़ी थी। पूरे 11 लोग घायल हुए थे। कोरबागल्ली सड़क पर 18 घरों को जलाया गया था और कई बाइक भी आग के हवाले की गई थीं। 

Shero कौन: पीरियड का खून पोस्टर पर दिखाने वाली या देश के लिए अपना खून बहाने वाली बलिदानी?

13 दिसंबर 2001, देश की संसद में दिन आम दिनों जैसा ही जा रहा था। हंगामे के बाद शीतकालीन सत्र के दोनों सदन स्थगित हो चुके थे और सोनिया और अटल संसद से निकल गए थे।

सदन स्थगित हुए 40 मिनट बीत चुके थे, मगर अभी भी आडवाणी और जसवंत सिंह जैसे अहम मंत्रियों समेत कई और वीआईपी और वीवीआईपी संसद के अंदर मौजूद थे कि तभी एक सफ़ेद एंबेसडर तेज़ी से गेट नंबर 11 की तरफ जाती हुई दिखी। उसके पास आयरन गेट नंबर 1 पर एक कॉन्स्टेबल की तैनाती थी।

कॉन्स्टेबल को शक हुआ तो उन्होंने एंबेसडर का पीछा किया। तब तक वो कार उपराष्ट्रपति की खाली खड़ी गाड़ी से टकरा चुकी थी। इसके बाद उन्हें उस कार से 5 हथियारबंद आदमी उतरते हुए दिखे।

कॉन्स्टेबल के पास कोई हथियार नहीं था, सिर्फ़ एक वॉकी-टॉकी था। उन्होंने उसी से फ़ोर्स के बाकी लोगों को अलर्ट किया और वहीं से चिल्ला कर गेट नंबर 11 पर तैनात सूबेदार सुखविंदर सिंह को भी आतंकियों की सूचना दी।

सूबेदार सिंह तो अलर्ट हुए ही मगर इससे आतंकी भी अलर्ट हो गए और उन्होंने एक के बाद एक 11 गोलियाँ उस कॉन्स्टेबल के शरीर में उतार दीं, मगर तब तक कॉन्स्टेबल ने अपनी ड्यूटी निभा दी थी। पूरी फोर्स अलर्ट हो गई थी और कुछ देर बाद पाँचों आतंकी ढेर हो चुके थे।

कॉन्स्टेबल के इस अदम्य साहस के चलते उन्हें मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया गया। अशोक चक्र देश में शांति के दौरान दिया जाने वाला सबसे बड़ा वीरता सम्मान है।

CRPF की 88 बटालियन में तैनात उस कॉन्स्टेबल का नाम था कमलेश कुमारी। वो शादीशुदा थीं और उनकी दो बेटियाँ भी थीं।

क्या आप जानते हैं कि उनके पास हथियार क्यों नहीं था? क्योंकि महिला कॉन्स्टेबलों को संसद में हथियार रखने की परमिशन नहीं थी। फिर भी उन्होंने उस वक्त वो किया, जिसकी उस वक्त देश को सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी।

अशोक चक्र से सम्मानित होने वाली वो पहली महिला कॉन्सटेबल बनीं।

तो, बेसिकली हमारे और आपके फ़ेमिनिज़म में बस यही अंतर है कि आपको आतंकियों से सहानुभूति रखने वाली आज़ादी छाप हस्तियों में अपनी शीरो (Shero) दिखती है और हमको कमलेश कुमारी में अपनी हीरो दिखती है।

  • आपकी शीरो (Shero) को देश में दंगे भड़काने के लिए विदेशी मैगजीन के कवर पर जगह मिलती है, हमारी हीरो को देश बचाने के लिए हमारे दिल में जगह मिलती है।
  • आपकी शीरो (Shero) को कमोड पर बैठ कर गर्व महसूस होता है और हमारी हीरो को फ़ाइटर जेट में बैठ कर।
  • आपकी शीरो (Shero) को पीरियड्स का खून फ्लॉन्ट करने में आज़ादी दिखती है और हमारी हीरो देश के लिए अपना खून बहा कर आज़ादी की गाथा लिखती हैं।
  • आपकी शीरो (Shero) पद्मावती को सेक्स स्लेव बनने की सलाह देती है और हमारी हीरो पूरी दुश्मन सेना को धूल चटाना जानती है।

आपको हीरो के समकक्ष शीरो खड़ी करनी है और हमारे हिस्से में हैं वो लड़कियाँ, जो इन शब्दों से परे अलग इतिहास रच देती हैं। क्योंकि हीरो हो या शीरो, इन शब्दों को अर्थ हम देते हैं, ये शब्द हमको अर्थ नहीं देते। हमारी लड़ाई शब्दों से परे अगर अधिकारों की लड़ाई है, तो ज़िम्मेदारियों की लड़ाई भी है।

लेखिका: तृप्ति शुक्ला, पत्रकार हैं। फिलहाल गूगल के लिए काम कर रही हैं। साल 2014 में लाडली मीडिया अवॉर्ड भी जीत चुकी हैं।

तबारक खान ने 14 साल की हिन्दू बच्ची से किया निकाह: UP पुलिस ने ‘लव जिहाद’ में धरा, काज़ी की भी तलाश

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र में लव जिहाद का मामला उजागर हुआ है। यहाँ बिहार के समस्तीपुर निवासी तबारक खान पर आरोप लगा है कि उसने पहले 14 साल की नाबालिग हिन्दू बच्ची का अपहरण किया, फिर उससे जबरन निकाह किया और बाद में जान से मारने की धमकी देकर वह उसे घर भी छोड़ गया।

पीड़िता की माँ का कहना है कि बिहार के समस्तीपुर निवासी तबारक खान का परिवार लंबे समय से शाहपुर थाना क्षेत्र में किराए के मकान में रह रहा था। यहीं तबारक लंबे समय से उनकी 14 साल की बेटी को परेशान कर रहा था। स्कूल आते-जाते भी उसका पीछा करता था।

1 मार्च को जब उनकी बेटी घर से निकली तो तबारक उसका अपहरण करके गोरखपुर ले गया। वहाँ उसने उसके साथ निकाह किया। जब नाबालिग ने विरोध किया तो उसने उसे जान से मारने की बात कही और किसी को भी कुछ बताने से मना किया। लड़की घटना के बाद चुप-चुप रहने लगी। परिवार ने बहुत पूछा लेकिन उसने डर से कुछ नहीं बताया। 

मगर, रविवार को जब लड़की की माँ ने उसका बस्ता देखा तो उसमें उर्दू में लिखे कुछ दस्तावेज मिले। माँ ने ये दस्तावेज दूसरे लोगों को दिखाए तो मालूम पड़ा कि ये निकाहनामा है। लड़की ने बात पता लगने पर खुल कर सबसे सारी बातें बताई और ये भी बताया कि उसे धमकी मिली थी कि अगर घरवालों को कुछ भी बताया तो उसे जान से मार दिया जाएगा।

पूरी बात जानने के बाद लड़की की माँ ने शाहपुर में शिकायत लिखवाई। जिसके बाद आरोपित के विरुद्ध अपहरण व लव जिहाद की धारा में मामले दर्ज हुए और जल्द से जल्द तबारक को गिरफ्तार कर लिया गया। इस केस में पुलिस निकाह कराने वाले काज़ी की भी तलाश कर रही है। किशोरी का अब मेडिकल होना है। यदि रेप की पुष्टि हो गई तो रेप की धारा भी मुकदमे में जोड़ दी जाएगी।

हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार प्रभारी सीओ गोरखनाथ रत्नेश सिंह ने बताया कि आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है। पीड़ित को मेडिकल के लिए आशा ज्योति केंद्र भेजा गया है। निकाह कराने वाले की तलाश चल रही है। मेडिकल जाँच में रेप की पुष्टि हुई तो रेप की धारा भी बढ़ाई जाएगी।