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सराय काले खाँ के पीड़ित दलित परिवार के समर्थन में आए कपिल मिश्रा: देंगे ₹5 लाख की मदद, बाकी को 21-21 हजार

दिल्ली के सराय काले खाँ में एक दलित हिन्दू युवक ने एक मुस्लिम लड़की से शादी की, जिसके बाद दलित युवक सुमित के मुस्लिम समुदाय की लड़की से शादी करने से नाराज युवती के परिजनों और उनके साथियों ने शनिवार (मार्च 20, 2021) रात सराय काले खाँ गाँव की दलित बस्ती में बेखौफ जमकर उत्पात मचाया था। 50 से अधिक की संख्या में बस्ती में घुसी मुस्लिम भीड़ ने हिन्दुओं की कुल तीन गलियों को निशाना बनाया और तलवार लाठी डंडे और पत्थरों के साथ जमकर हमला कर दिया। 30 से ज्यादा गाड़ियों/ बाइक को भी तहस-नहस कर दिया।

अब दिल्ली बीजेपी के नेता कपिल मिश्रा ने सुमित के माता-पिता से बात की है। उन्होंने उनको आर्थिक और सामाजिक रूप से सहयोग का आश्वासन दिया है। कपिल मिश्रा ने ट्वीट करते हुए इसकी जानकारी दी है। उन्होंने अपने ट्वीट में सुमित के माता-पिता के साथ हुई बात-चीत की रिकॉर्डिंग भी शेयर किया है, जिसमें वो उन्हें सहयोग देने की बात कहते हुए नजर आते हैं।

कपिल मिश्रा ने ट्वीट करते हुए लिखा है, “मैंने अभी दिल्ली के सराय काले खाँ में पीड़ित बाल्मीकि परिवार के माता पिता से बात की। हम प्रेम विवाह करने वाले सुमित और खुशी को ₹5 लाख की मदद देंगे। वाल्मीकि मोहल्ले में जिन भी लड़कों की बाइक तोड़ी गई है उनको ₹21-21 हजार देंगे। मदद का कैंपेन कल सुबह शुरू करेंगे।”

गौरतलब है कि शादीशुदा जोड़े ने वीडियो जारी कर सुरक्षा की माँग की है। 22 वर्षीय युवक ने कहा कि उन्होंने मार्च 17 को अपनी मर्जी से शादी की है और लड़की भी बालिग है। युवक और युवती ने वीडियो जारी करके सुरक्षा की गुहार लगाई है। उन्होंने कहा कि गली तहस-नहस कर दी गई है और धारदार हथियारों से किए गए वार में कई लोग घायल भी हुए हैं। युवक ने बताया कि उसके पिता को जान से मारने की धमकी दी जा रही है और ऐसी ही धमकियाँ उसे भी लगातार मिल रही है। युवक ने परिवार और खुद के लिए सुरक्षा की गुहार लगाई।

बता दें कि मुस्लिम भीड़ ने बस्ती में हमला करके ईंट-पत्थर चलाए व चाकू-तलवार, लाठी-रॉड न जाने किन-किन हथियारों से हमला किया। मगर जब बस्ती के हिन्दुओं ने एकजुट होकर उनका प्रतिरोध किया तो वो भाग खड़े हुए।

अब योगी के मंत्री को लाउडस्पीकर पर अजान से हुई दिक्कत, DM को पत्र लिखकर सख्त कार्रवाई की अपील

उत्तर प्रदेश में प्रयागराज से शुरू हुआ अजान को लेकर विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। अब योगी सरकार में संसदीय कार्य एवं ग्राम्य विकास राज्यमंत्री आनंद स्वरुप शुक्ला ने भी लाउडस्पीकार से अजान पर ऐतराज जताया है। मंत्री ने कहा कि लाउडस्पीकर पर अजान के शोर के कारण उनके योग, ध्यान, पूजा पाठ व शासकीय कार्यों में बाधा पैदा होती है। उन्होंने बलिया के जिलाधिकारी को पत्र लिखकर अधिक संख्या में लगे लाउस्पीकरों को हटाने की माँग की है।

मंत्री ने पत्र में लिखी ये बातें

पत्र में लिखा है कि बलिया में स्थित मस्जिदों में नमाज के दौरान अजान, दिन भर लाउडस्पीकर के माध्यम से मजहबी प्रचार-प्रसार, मस्जिद निर्माण के लिए चंदा एकत्र करने एवं विभिन्न प्रकार की सूचनाओं को अत्यधिक तेज आवाज में प्रसारित किया जाता है। जिससे छात्र-छात्राओं के पठन-पाठन एवं बच्चों, बुजुर्ग व बीमार लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। जनमानस को अत्यधिक ध्वनि प्रदूषण का भी सामना करना पड़ रहा है।

मंत्री आनंद शुुक्ला का पत्र (साभार: सोशल मीडिया)

उन्होंने आगे लिखा है कि मेरे विधानसभा क्षेत्र में स्थित मदीना मस्जिद काजीपुर, थाना कोतवाली के समीप कई शैक्षणिक संस्थान हैं। जिसमें सेंट जोसेफ, महर्षि विद्या मंदिर, सतीश चंद्र महाविद्यालय आदि में अध्यनरत विद्यार्थियों को लाउडस्पीकर की तेज आवाज के कारण पठन-पाठन में व्यवधान उत्पन्न हो रहा है। मस्जिद में पाँचों वक्त नमाज की अजान और सारा दिन अन्य सूचनाएँ प्रसारित की जा रही है। जिससे होने वाले शोर के कारण मेरे योग, ध्यान, पूजा-पाठ व शासकीय कार्यों में व्यवधान उत्पन्न होता है। मंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का भी पत्र में जिक्र किया है।

मंत्री ने डीएम से कहा है कि जिन मस्जिदों में परमिशन से ज्यादा लाउडस्पीकर लगे हैं, उन्हें तत्काल हटवाया जाए। साथ ही लाउडस्पीकर की आवाज को सीमित करवाते हुए गाइडलाइन का पालन कराया जाए।

AU की कुलपति ने लिखा था पत्र

गौरतलब है कि इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की कुलपति प्रोफेसर संगीता श्रीवास्तव ने तीन मार्च को कमिश्नर संजय गोयल, IG कवींद्र प्रताप सिंह, जिलाधिकारी भानुचंद गोस्वामी और SSP सर्वश्रेष्ठ त्रिपाठी को पत्र लिखकर कहा था कि मस्जिद में होने वाली अजान की वजह से उनकी नींद खराब हो रही है लिहाजा इसको बंद करवाया जाए। इसके बाद मस्जिद कमेटी ने मीनार पर लगे लाउडस्पीकर का रुख VC संगीता श्रीवास्तव के घर से दूसरी तरफ कर दिया था। लाउडस्पीकर का वॉल्यूम भी कम कर दिया गया था।

मस्जिद में लाउडस्पीकर पर अजान को लेकर प्रयागराज की वीसी की चिट्ठी पर जिले के आईजी ने सख्त एक्शन लिया। उन्होंने रात के 10 बजे से सुबह के 6 बजे तक लाउडस्पीकर बजाने पर रोक लगाए जाने के आदेश दिए। आईजी का कहना था कि पॉल्युशन एक्ट के तहत रात 10 बजे से सुबह के 6 बजे कर लाउडस्पीकर बजाने पर पूरी तरह से बैन है। 

10 महीने पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा था- बिना अनुमति लाउडस्पीकर का इस्तेमाल करना गलत

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 10 महीने पहले अपने एक फैसले में कहा था कि मस्जिदों में लाउडस्पीकर से अजान इस्लाम का हिस्सा नहीं है। किसी भी मस्जिद से लाउडस्पीकर से अजान दूसरे लोगों के अधिकारों में हस्तक्षेप करना है। कोर्ट ने कहा- जिन मस्जिदों के पास लाउडस्पीकर की अनुमति है, वही इसका इस्तेमाल करें। बिना प्रशासन की अनुमति के लाउडस्पीकर से अजान न दें।

‘फर्जी आधार कार्ड से होटल में रुका सचिन वाजे, उसके पास थे जिलेटिन स्टिक वाले ब्लू बैग’: NIA को मिस्ट्री वुमन की तलाश

एंटीलिया केस और वसूली कांड में आरोपित सचिन वाजे को लेकर एक और बड़ा खुलासा हुआ है। सचिन वाजे ने होटल बुक करने के लिए फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल किया था। जिन फर्जी आईडी कार्ड का इस्तेमाल वाजे करता था उसकी कॉपी ‘रिपब्लिक भारत’ के हाथ लगी है। वाजे मुंबई के एक 5 स्टार होटल में 16 से 20 फरवरी तक रुका था। जहाँ रूम बुक करने के लिए फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल किया था। उसके पास दो ब्लू बैग थे, जिसमें जिलेटिन स्टिक थी।

इस फर्जी आधार कार्ड में सचिन वाजे की फोटो दिख रही है मगर नाम लिखा है- सुधाकर सदाशिव खामकर। साथ ही जन्म की तारीख भी गलत लिखी हुई है। खुलासा ये भी हुआ है कि जिस समय वाजे होटल में था वहाँ उससे गुजरात से मिलने के लिए एक महिला आई थी। महिला के पास पैसे गिनने की मशीन भी थी। इस महिला का सचिन वाजे से कोई रिश्ता है या नहीं? यह महिला सचिन वाजे को पहचानती या नहीं? इन सारे सवालों के जवाब एनआईए (NIA) तलाश रही है।

इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस ने दावा किया ट्रांसफर-पोस्टिंग का रैकेट चल रहा है। इसकी रिपोर्ट मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के पास होने के बावजूद उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। फडणवीस ने इस संबंध में सबूत होने की बात कहते हुए कहा कि वे केंद्रीय गृह सचिव को 6.3 जीबी डाटा सौंपेंगे। उन्होंने कहा कि वे आईपीएस और गैर-आईपीएस अधिकारियों के कथित ट्रांसफर पोस्टिंग रैकेट से संबंधित कॉल रिकॉर्डिंग और कुछ दस्तावेज व डेटा सौंपेंगे।

फडणवीस का कहना था कि इंटेलिजेंस कमिश्नर ने ट्रांसफर का रैकेट पकड़ा। इसमें शामिल संदिग्ध इंटरसेप्टेड कॉल्स की रिपोर्ट अगस्त 2020 में महाराष्ट्र के डीजी को भेजी। इस पर चिंता जताते हुए रिपोर्ट मुख्यमंत्री को भेजी गई, लेकिन कोई कार्रवााई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि उनके पास 6.3 जीबी डाटा है जिसमें सारी जानकारी है।

ATS ने दमन से एक कार बरामद की

महाराष्ट्र आतंकवाद रोधी दल (ATS) ने मनसुख हिरेन हत्याकांड के संबंध में दमन से एक कार बरामद की है। एक अधिकारी ने मंगलवार (मार्च 23, 2021) को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र के नंबर वाली एक वॉल्वो कार सोमवार को बरामद की गई जिसके मालिक का अभी पता नहीं चला पाया है। उन्होंने कहा कि बरामद की गई कार को ठाणे स्थित एटीएस कार्यालय में रखा गया है।

इससे पहले, इस हत्याकांड के संबंध में शनिवार रात को दो व्यक्तियों को गिरफ्तारी के बाद एटीएस ने गुजरात से एक अन्य व्यक्ति को गिरफ्तार किया था जिसने कथित तौर पर आरोपितों को सिम कार्ड उपलब्ध कराए थे। अधिकारियों ने बताया था कि उन्हें उक्त व्यक्ति के पास से कई सिम कार्ड मिले थे। एटीएस ने मामले के संबंध में, निलंबित पुलिसकर्मी विनायक शिंदे और सटोरिये नरेश गौड़ को पिछले सप्ताह गिरफ्तार किया था। हालाँकि, मनसुख हत्याकांड की जाँच 22 मार्च को एनआईए को सौंप दी गई थी लेकिन एटीएस अब भी जाँच कर रही है।

19 साल की पाकिस्तानी बीवी की जानकारी छिपाने वाले केटी सुलेमान पर केरल के मुख्यमंत्री चुप क्यों? : भाजपा ने उठाए सवाल

कोंडोट्टी में हुई चुनाव नामांकन की धोखाधड़ी के संबंध में केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की चुप्पी पर विदेश मामलों के केन्द्रीय राज्य मंत्री वी. मुरलीधरन ने उनकी आलोचना की। कई रिपोर्ट्स के अनुसार सीपीआईएम समर्थित केटी सुलेमान हाजी ने केरल विधानसभा चुनाव के अपने नामांकन में अपनी दूसरी बीवी की जानकारी नहीं दी। सुलेमान की दूसरी बीवी एक पाकिस्तानी है।

मातृभूमि में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, 20 मार्च को चुनाव आयोग ने केटी सुलेमान हाजी का नामांकन आगामी जाँच तक रोक दिया क्योंकि वह अपनी दूसरी बीवी की जानकारी देने में असफल रहे।

मुस्लिम लीग के नेताओं ने सुलेमान के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराई है कि उसकी दो शादियाँ हो चुकी हैं और उसकी दूसरी बीवी विदेश में है। इन आरोपों के साथ दुबई में हुए सुलेमान के निकाह के कुछ साक्ष्य भी प्रस्तुत किए गए हैं। उनकी दूसरी बीवी हीरा मोहम्मद सफदर है जो रावलपिंडी, पाकिस्तान की निवासी हैं।  

अपने ट्वीट में मुरलीधरन ने कहा, “केटी सुलेमान हाजी, कोंडोट्टी के सीपीआईएम समर्थित प्रत्याशी, जिन्होंने नामांकन में अपनी दूसरी बीवी की जानकारी छुपाई जो कि एक 19 वर्षीय पाकिस्तानी महिला है। स्वयं को लिबरल कहने वाले पिनाराई विजयन अब खुद चुप हैं, क्या यह आश्चर्य की बात नहीं है?”

वे आगे कहते हैं कि केरल की जनता इस प्रश्न का उत्तर चाहती है जबकि एक प्रत्याशी ने विदेशी नागरिक की पहचान छुपाई है।

केरल में 6 अप्रैल को 140 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव आयोजित होने वाले हैं। चुनाव परिणाम 2 मई को घोषित किया जाएगा।

मनसुख हिरेन हत्याकांड में ATS ने सचिन वाजे को बताया मुख्य साजिशकर्ता, कानून मंत्री ने कहा- महाराष्ट्र में खेला चल रहा है

महाराष्ट्र एटीएस ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर निलंबित पुलिस अधिकारी सचिन वाजे को मनसुख हिरेन हत्याकांड का मुख्य साजिशकर्ता बताया है। वहीं, वाजे ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को गलत बताया है।

एटीएस प्रमुख जय जीत सिंह ने बताया कि सचिन वाजे का कहना है कि वह मनसुख हिरेन के संपर्क में नहीं था और उसने कभी भी स्कॉर्पियो का इस्तेमाल नहीं किया था, जो मुकेश अम्बानी के घर के बाहर से मिली थी। लेकिन हमारे पास सबूत हैं कि वह सीधे तौर पर हत्या में शामिल था। हम आने वाले दिनों में और लोगों को गिरफ्तार करेंगे।

हालाँकि, महाराष्ट्र एटीएस प्रमुख ने हत्या के पीछे वाजे का क्या मकसद था इसका खुलासा नहीं किया है। उन्होंने केवल महत्वपूर्ण दस्तावेज साझा किए हैं, जो हत्या के मामले में वाजे की संलिप्तता की ओर इशारा करते हैं।

एटीएस ने कहा कि अन्य आरोपित नरेश गोरे ने 14 सिम कार्ड खरीदे थे, जिनका उसने इस्तेमाल किया। एटीएस ने बताया कि वह सचिन वाजे की रिमांड के लिए अपील करेंगे।

एटीएस प्रमुख ने यह भी कहा कि आज हत्या के मामले में एक वोल्वो कार को दमन से जब्त किया गया, जिसकी मुंबई की फोरेंसिक टीम द्वारा जाँच की जा रही है।

इसी बीच केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेस में महाराष्ट्र सरकार पर ​हमला बोला। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र में अलग ही खेला चल रहा है। महाविकास अघाड़ी की सरकार वसूली की सरकार बन गई है।

एटीएस अधिकारियों ने आज प्रेस कॉन्फ्रेस की और बिना सवालों के जवाब दिए ही चले गए। महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख का वसूली का कोटा 100 करोड़ रुपए है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार आखिर कौन चला रहा है। हम जाँच नहीं, तथ्य सामने ला रहे हैं।

2012 से 2021: हिंदुओं की दुखद दास्ताँ, जब 12 बार इस्लामी आतंकियों ने बांग्लादेश में बनाया इन्हें निशाना

हाल ही (18 मार्च) में बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय के एक युवा द्वारा कथित तौर पर सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखने के बाद एक इस्लामी समूह के सैकड़ों समर्थकों द्वारा पूर्वोत्तर में स्थित सिलहट डिवीजन में हिंदुओं के 70-80 घरों पर बर्बतापूर्ण हमला करने का मामला सामने आया।

ढाका ट्रिब्यून अखबार के मुताबिक हिफाजत ए इस्लाम के नेता मामुनुल हक के हजारों अनुयायियों ने सिलहट डिवीजन के सुनामगंज जिले के शल्ला उप जिले में एक हिंदू गाँव पर हमला किया। बताया गया कि काशीपुर, नाचनी, चाँदीपुर और कुछ अन्य मुस्लिम बहुल गाँवों से हक के समर्थक, नवागाँव में एकत्र हुए और उन्होंने स्थानीय हिंदुओं के घरों पर डंडों और देसी हथियारों से हमला किया व 70 से 80 घर तोड़ डाले।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार लगभग 70 से 80 हिंदुओं के घरों में तोड़फोड़ की गई थी, लेकिन एक स्थानीय पत्रकार ने दावा किया है कि कम से कम 500 हिंदू घरों में तोड़फोड़ की गई और उन्हें जला दिया गया । इसके अलावा इस्लामी चरमपंथियों ने 8 मंदिरों में भी तोड़फोड़ की। इस हमले को फेसबुक पर लाइव किया गया था।

अगले दिन (19 मार्च, शुक्रवार) कुछ उपद्रवियों ने बांग्लादेश के ठाकुरगाँव के रानीसंकल उपजिला के उत्तरगांव गाँव में स्थित एक मंदिर में काली माता की मूर्ति को भी तोड़ डाला।

पाकिस्तान की तरह बांग्लादेश में भी हिंदुओं पर कई बर्बरतापूर्ण हमले किए गए हैं। दशकों से बांग्लादेश में हिंदू समुदाय इस्लामी कट्टरपंथियों के निशाने पर रहे हैं और आज त​क उनके द्वारा किए जा रहे उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं। इतना ही नहीं धार्मिक उत्पीड़न और भेदभाव के कारण लगभग 11.3 मिलियन (1 करोड़ 13 लाख) हिंदू 1964 और 2013 के बीच बांग्लादेश छोड़ चुके हैं।

बांग्लादेश में हिंदुओं की दुखद दास्तां 1947 के नरसंहार के साथ शुरू हुई थी। बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान यह और बढ़ गई थी, तब लगभग 30,00,000 हिंदू मारे गए थे। यह सदी के सबसे बड़े जनसंहारों में से एक था, जो आज तक जारी है।

साल 2012 और 2013 में फरवरी और नवंबर के बीच, चटगाँव में हठजारी और बशखाली, सतखीरा के कालीगंज, दिनाजपुर के चिरिरबंदर में अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ कम से कम 20 हमले हुए।

हिंदुओं द्वारा 10वें आम चुनावों का बहिष्कार करने से इंकार करने के बाद 2014 में बांग्लादेश में बड़ी झड़पें हुई थीं। बांग्लादेश में मतदान समाप्त होने के तुरंत बाद हिंदुओं को बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी और जमात-शिबिर के कार्यकर्ताओं का सामना करना पड़ा।

ठाकुरगाँव, दिनाजपुर, रंगपुर, बोगरा, लालमोनिरहाट, राजशाही, चटगाँव और जेसोर जैसे कई स्थानों पर हिंदू घरों को लूटा गया और बर्बरतापूर्वक जला दिया गया था।

इसी तरह 23 अक्टूबर, 2019 को बुरहानुद्दीन में पुलिस और स्थानीय मुसलमानों के बीच झड़प में 10 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे और चार लोगों की मौत हो गई थी। वहीं सैकड़ों पुलिसकर्मी मारे गए थे।

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस दौरान 12 हिंदू घरों और एक मंदिर में तोड़फोड़ भी की गई थी। एक हिंदू घर में भी आग लगा दी गई। एक मोटरसाइकिल को भी जला दिया गया था।

पिछले साल 2 नवंबर को कट्टरपंथी इस्लाम के एक समूह ने बांग्लादेश के कोमिला जिले में मुरादनगर उपजिला के अंतर्गत कोरबनपुर गांव में 10 हिंदू परिवारों पर हमला कर दिया था।

डर का माहौल! भारत के सबसे ‘ईमानदार’ पत्रकार 3 दिन से कहाँ गायब? क्या यह चुप्पी ही है आज का शो

जिन्हें लगता है कि साल 2014 में भारतीय जनता पार्टी के सत्ता में आने के बाद से सब कुछ चौपट हो चुका है उनके लिए वह व्यक्ति एक अकेली उम्मीद है और तमाम मूक लोगों की एकमात्र आवाज है। उनका हर रात एक घंटे का शो आता है, सिर्फ़ इसीलिए ताकि इस जहरीली दुनिया में उनके दर्शकों को कुछ पल सुकून के मिल सकें। 

उनके शो में कोई डर का माहौल नहीं होता, कोई निराशा नहीं होती, कहीं अहिष्णुता नहीं होती, कुछ होता है तो वो होता बस और बस न्याय। वह अपनी साधारण सी आवाज में विषय को उठाते हैं और इस तरह तथ्यों को रखते हैं कि जो कोई भी उनके कटघरे में खड़ा होता है वह दोषी बने बिना बाहर नहीं निकलता।

यही सच्ची पत्रकारिता है। सच बोलना बिलकुल वैसे जैसी आपसे उम्मीद हो।

लेकिन, बावजूद इतनी लोकप्रियता के वह पिछले तीन दिनों से कहाँ हैं? हमारे जीवन में जो आशा की किरण थी वह चली गई है और ये चारों तरफ अंधेरा क्यों है भाई?

क्या देश के सबसे ईमानदार पत्रकार की दी न्यूज के साथ कुछ हुआ है जो उन्हें छिपना पड़ रहा है? वो कहाँ है? या कोई एक ऐसी कहानी आ गई है जिसे वह कवर नहीं करना चाहते? वह डर रहे हैं क्या? नहीं-नहीं वह तो निडर हैं…तो फिर? उनकी क्या मंशा है?

और इस संकट की घड़ी में उनके लाखों फॉलोवर्स का क्या हुआ? उनके ज्ञान के बिना उनके दर्शक क्या करेंगे? पिछली बार तो मैंने सुना था कि उनके फॉलोवर्स उनके प्यार में इतना डूबे कि वह अपने नाम से उनका नाम जोड़ रहे हैं। ये लोगों का उनके लिए और उनकी निडर पत्रकारिता के लिए प्यार और श्रद्धा नहीं तो क्या है? एक रात उन्हें अपने ही शो में इस प्यार का पता चला था, सोचिए उनके फॉलोवर्स के लिए वो दिन क्या रहा होगा?

विचार करिए कि सिंघू बॉर्डर के साथी उनके समर्थन में अपना नाम बदल लें। या कल्पना करिए कि कोई पूरा का पूरा गाँव उन्हीं के नाम पर अपना नाम रख ले और उनके पीछे पीछे चलने लगे…. कैसा लगता है न ये सब सुन कर? है विश्व का कोई अन्य पत्रकार जो इतनी वफादारी कमा पाए?

इतने प्यार के बावजूद हमारे प्रिय पत्रकार कहाँ हैं? वह क्यों देश से इस सबसे बड़ी खबर को छिपा रहे हैं? उन्हें किस बात का डर है। सब तो उनका है। वह अपने शो में विपक्षियों के मत को जगह नहीं देते। उनके शो में कोई नहीं चिल्लाता। सिर्फ़ वही होते हैं। उनके पास कहने को सच्चाई होती हैं, जिसकी प्रमाणिकता भी यही होती है कि वह बात उन्होंने बोली हैं।

यही चीज उनके शो को महान बनाती है कि उसमें सिर्फ़ और सिर्फ वही बोलते हैं। शायद शो में यदि कोई और आ जाएगा तो उनकी आवाज में खलल पड़े और उनका शो भी बाकी चैनल पर आने वाले शो जैसा हो जाए। जाहिर है चीजें अच्छे से तभी हो पाती हैं जब आपका एक नजरिया हो और बिना किसी हल्ले वाली एक आवाज हो। और सबसे बड़ी बात तो ये है कि जब उन्होंने हमें सच दिखाने को कहा हुआ है तो हम कहीं और क्यों जाएँ?

उनके तो कर्मचारी भी उनसे डरते हैं। एक बार उन्होंने अपने एम्प्लॉय को वीडियो के क्लिप्स काटकर यूट्यूब पर अपलोड करने से मना कर दी थी। जरा सोचिए! क्या मोनालिशा टुकड़ों में बिखरी अच्छी लगती हैं क्या? नहीं न। तो हमारे पत्रकार का शो क्यों क्लिपों में जाए? मान लीजिए कि यदि ऐसा हो जाता तो क्या आप उस मास्टरपीस को सराह पाते? अब मैं तो छोटा आदमी हूँ। मैं तो मोनालिशा को पूरा देख कर नहीं समझ पाता उसके टुकड़ों को तो क्या ही समझूँगा। लेकिन मुझे पता है कि अन्य लोग जानते होंगे। उनका शो बिलकुल वैसा ही है। इसलिए उन्होंने कहा कि यूट्यूब पर पूरा शो ही अपलोड होना चाहिए।

उन पर यदि अपना तरीका होता तो शायद वह लोगों को यूट्यूब या टीवी पर सिर्फ़ अपना ही शो देखने देते। कहीं बीच में छोड़कर जाने की इजाजत नहीं होती। कुछ खाना नहीं होता। स्विच तो भूल कर भी नहीं बदलना होता। बिलकुल सावधान स्थिति में हर रात उनके ऐतिहासिक घोषणाएँ सुननी होतीं। मैं शर्त लगा सकता हूँ कि सिंघू बॉर्डर पर आधे से ज्यादा साथी ऐसा कर भी रहे होंगे।

तब भी, पता नहीं वो कहाँ चले गए हैं? वो अपने शो से खुद को क्यों छिपा रहे हैं? वह क्यों अपने फॉलोवर्स को नजर नहीं आ रहे।

इससे पहले अन्य लोगों ने उन्हें बहुत बार चुप करवाने की कोशिश की थी। लेकिन वह हर बार हमेशा अपने दर्शकों तक पहुँच जाते थे। वह अपने फॉलोवर्स के लिए अंधेरी स्क्रीन के पीछे से बोलते सुनाई देते थे। जहाँ सिर्फ़ आवाज आती थी और कोई विजुअल्स नहीं दिखता था।

इसके अलावा जब जब असहिष्णुता बढ़ती थी वह अपने दर्शकों तक किसी न किसी तरह बात रखते थे। वह चेहरों को पेंट करवा कर शो में बात करते और खुद ही उनके मतलब भी समझते। बाद में वही भाषा अपने दर्शकों को भी समझा देते। एक महान ज्ञानी आदमी को अपने अनुयायियों तक पहुँचने से कोई फासीवादी सरकार नहीं रोक सकती थी। लेकिन अब चीजें बदल गई हैं। अगर कोई बड़ी स्टोरी आई है और आप मौके पर हैं तो आप उसे इग्नोर कर सकते हैं। लेकिन यदि आपने उस स्टोरी को उठा लिया है तो आपको सच बोलना होगा और सच बोलने के लिए कोई अंतरराष्ट्रीय अवार्ड नहीं मिलेंगे।

शायद इसलिए रेडियो चुप है। कोई ब्लैक स्क्रीन नहीं है। कहीं पेंट हुए चेहरे नहीं हैं और कोई मीम नहीं है। सिर्फ़ चुप्पी है।

इसलिए उनके दर्शकों को मैं कहना चाहता हूँ: यही चुप्पी तुम्हारे रक्षक की हकीकत है। ये चुप्पी ही आज का शो है।

क्रुणाल पांड्या ने बनाया सचिन-कोहली से भी तेज रिकॉर्ड: डेब्यू मैच में सबसे तेज फिफ्टी, भावुक हुए हार्दिक पांड्या

इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट और टी20 सीरीज के बाद अब वनडे सीरीज का पहला मुकाबला भारत और इंग्लैंड के बीच खेला जा रहा है। जिसमें अपने डेब्यू वनडे मैच में खेल रहे क्रुणाल पांड्या ने तूफानी पारी से इतिहास रच डाला है।

क्रुणाल पांड्या ने भारत के लिए नंबर 7 पर खेलते हुए तेजतर्रार अर्धशतक जड़ा। जिसके चलते वो ODI क्रिकेट के डेब्यू मैच में सबसे तेज फिफ्टी जड़ने वाले दुनिया के एकलौते बल्लेबाज बन गए हैं।

दरअसल मैच के दौरान 41वें ओवर में जब क्रुणाल के छोटे भाई हार्दिक पांड्या 1 रन बनाकर आउट हो गए, उसके बाद पहली बार वनडे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बल्ला लेकर मैदान में क्रुणाल पांड्या उतरे और शुरू से ही दमदार शॉट्स लगाते चले गए।

रिजल्ट ये रहा कि महज 26 गेंदों में 7 चौकों और 2 छक्के की मदद से उन्होंने अपनी फिफ्टी पूरी कर डाली। इस तरह उनके द्वारा खेली गई ये तेजतर्रार पारी किसी खिलाड़ी द्वारा वनडे क्रिकेट के डेब्यू मैच में अभी तक की सबसे तेज फिफ्टी बन गई। जबकि ऐसा करने वाले वो दुनिया के एकलौते बल्लेबाज बन गए हैं।

क्रुणाल को उनके छोटे भाई हार्दिक पंड्या ने डेब्यू कैप थमाई। 29 साल के क्रुणाल इससे पहले टी20 इंटरनैशनल मैच खेल चुके हैं। क्रुणाल ने 18 टी20 इंटरनेशनल मैचों में 121 रन बनाने के साथ साथ कुल 14 विकेट चटकाए हैं। क्रुणाल डेब्यू कैप हासिल कर भावुक हो गए। कैप हासिल कर क्रुणाल ने आसमान की ओर देखते हुए पिता को याद किया। टीम इंडिया के पूर्व ओपनर वसीम जाफर ने फोटो ट्वीट कर लिखा, ‘मेरी आँखों में कुछ है’।

वहीं भारत के लिए वनडे क्रिकेट में डेब्यू करते हुए फिफ्टी जड़ने वाले क्रुणाल पांड्या 7वें बल्लेबाज बन गए हैं। इस रिकॉर्ड में रॉबिन उथप्पा, रविन्द्र जडेजा और केएल राहुल जैसे बल्लेबाज शामिल हैं। वहीं वनडे क्रिकेट में डेब्यू मैच में नंबर 7 पर बल्लेबाजी करते हुए फिफ्टी जड़ने वाले क्रुणाल पांड्या तीसरे बल्लेबाज बन गए हैं। इस लिस्ट में सबा करीम और रविन्द्र जडेजा शामिल हैं। 

मैच की बात करें तो शुरू में शिखर धवन के 98 और कप्तान कोहली के 56 रनों की पारी के बाद अंत में क्रुणाल पांड्या 58 रन और केएल राहुल के 62 रनों की नाबाद पारी के बदौलत भारत ने इंग्लैंड को जीत के लिए 318 रनों का विशाल लक्ष्य दिया है।

जनवरी में हुआ था पांड्या ब्रदर्स के पिता का निधन

गौरतलब है कि इस साल जनवरी में ही क्रुणाल और हार्दिक पांड्या के पिता का निधन हार्ट अटैक से हो गया था। उस समय क्रुणाल पांड्या सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के लिए बड़ौदा टीम के साथ थे और वह कप्तान थे। पिता के बारे में खबर मिलते ही वह टूर्नामेंट छोड़कर घर के लिए रवाना हो गए थे। पांड्या ब्रदर्स को उनके पिता ने क्रिकेट खेलने में काफी मदद और सपोर्ट किया था।

‘मुसलमान के हिंदू पूर्वजों ने 200 साल पहले मंदिर निर्माण में मदद की होगी… लेकिन कोई रिकॉर्ड नहीं: यति नरसिंहानंद सरस्वती

हाल ही में गाजियाबाद के डासना में एक नाबालिग लड़के आसिफ की पिटाई हुई, जिसके बाद दावा किया गया कि वो मंदिर में पानी पीने गया था। हालाँकि, एक व्यक्ति ने इस पूरे नैरेटिव पर तथ्यों से तगड़ा प्रहार किया। डासना में जब जात-पात या आस-पड़ोस की लड़ाई होती है तो एक ही व्यक्ति का समझौता अंतिम माना जाता है, यति नरसिंहानंद सरस्वती का।

इस घटना के बाद कई मुस्लिमों ने दावा किया कि उनके पूर्वजों ने मंदिर के निर्माण में मदद की थी। हालाँकि, मंदिर के मुख्य पुजारी ने अब दावा किया है कि उन्होंने मंदिर के अधिकांश हिस्सों का निर्माण किया है। यति नरसिंहानंद सरस्वती ने यह भी दावा किया कि स्थानीय मुसलमानों के पूर्वजों ने शायद 200 साल पहले मंदिर के निर्माण में मदद की थी, जब वो हिंदू थे, मुस्लिम में कन्वर्ट नहीं हुए थे।

यति नरसिंहानंद सरस्वती ने दावा किया कि उनके पास मंदिर को दिए जाने वाले सभी दान का रिकॉर्ड है और उनमें से कोई भी स्थानीय मुस्लिम आबादी से नहीं है। उन्होंने कहा, “स्थानीय मुसलमानों के पूर्वज हिंदू थे और उन्होंने शायद 200 साल पहले मंदिर के निर्माण में योगदान दिया था, मगर किसी के पास भी इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। मेरे पास इस मंदिर के लिए किए गए प्रत्येक दान का विवरण है और मैं गारंटी दे सकता हूँ कि उनमें से कोई भी स्थानीय मुस्लिम आबादी से नहीं है।”

मंदिर परिसर के अंदर मुसलमानों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने वाले नए बोर्ड के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “यह बोर्ड हमेशा के लिए रहेगा। हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले किसी भी व्यक्ति को मंदिर में प्रवेश करने से रोका नहीं जाएगा, यह बोर्ड केवल उन लोगों के लिए है, जिनका धार्मिक गतिविधियों से कोई लेना-देना नहीं है।”

बता दें कि मंदिर के गेट पर पहले से भी एक बड़ा बोर्ड लगा दिया गया है। जिस पर लिखा है, “यह मंदिर हिन्दुओं का पवित्र स्थल है। यहाँ मुसलमानों का प्रवेश वर्जित है।”

गौरतलब है कि डासना देवी मंदिर पौराणिक समय से महाभारत के इतिहास से जुड़ा हुआ है। यहाँ पर अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने कुछ समय बिताया था। इस मंदिर पर जब हमला हुआ था तो यहाँ पर देवी देवाताओं की मूर्तियों को मंदिर परिसर में बने एक तालाब में छुपा दिया गया था।

नवरात्र पर्व के मौके पर अष्टमी और नवमी के दिन हजारों की संख्या में लोग ऐतिहासिक महत्व वाले डासना स्थित प्राचीन देवी में दर्शन के लिए आते हैं। परिवार के लोगों की सुख शांति के लिए प्रचंड चंडी देवी की पूजा करते हैं। कहा जाता है कि करीब पाँच हजार साल पुराने इस मंदिर में भगवान शिव, नौ दुर्गा, सरस्वती, हनुमान की मूर्ति स्थापित हैं।

बदायूँ में अर्धनग्न अवस्था में मिला साधु का शव: चेहरा कुचलकर की गई बुरी तरह हत्या, प्राइवेट पार्ट भी जलाया

उत्तर प्रदेश के बदायूँ में एक साधु की हत्या करके उसकी लाश को सड़क पर फेंक दिया गया। घटना उझानी क्षेत्र की है। मंगलवार की सुबह ही गाँव के एक व्यक्ति माखनलाल के घर के बाहर साधु का नग्न शव मिला।

मीडिया खबरों के अनुसार उस साधु के सिर को बहुत बुरे तरीके से किसी भारी वस्तु से कुचला गया और उनके प्राइवेट पार्ट को भी जलाया गया है, अर्धनग्न और अधजली अवस्था में उनका शव मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया। जानकारी मिलते ही पुलिस घटनास्थल पर पहुँची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

इस्लामनगर का निवासी था साधु

शव मिलने के पश्चात जब पुलिस द्वारा आसपास के गाँवों के लोगों से शिनाख्त की गई तब यह जानकारी मिली कि साधु का नाम रामचन्द्र कश्यप है और वह इस्लामनगर क्षेत्र के सोहरा गाँव के निवासी थे। वह उझानी गाँव कैसे पहुँचे, इसकी जानकारी उस साधु के परिवार वाले भी नहीं दे पा रहे हैं।

जिस माखनलाल के घर के बाहर साधु का शव मिला, वह किसी दूसरे घर में छिपा हुआ था। ऐसे में पुलिस शक के आधार पर उससे भी पूछताछ कर रही है।

परिजनों के अनुसार रामचन्द्र ने घर-गृहस्थी छोड़ दी थी और सन्यासी बनकर अपना जीवन व्यतीत कर रहे थे। इसके अतिरिक्त किसी भी प्रकार की जानकारी प्राप्त नहीं हो सकी है।

एसपी सिटी प्रवीण सिंह चौहान ने बताया है कि मामले की जाँच की जा रही है। जाँच के आधार पर ही मुकदमा दर्ज किया जाएगा।