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अनुसूचित जाति की महिला MLA से कॉन्ग्रेसी भूपिंदर हुड्डा ने खिंचवाया ट्रैक्टर, खुद बैठे रहे सीट पर: सदन में रो पड़े CM खट्टर

हरियाणा में ‘किसान आंदोलन’ को मुद्दा बना कर सरकार गिराने के सपने देख रही कॉन्ग्रेस पार्टी को न सिर्फ सदन में झटका लगा, बल्कि अब एक नया विवाद भी शुरू हो गया है। बुधवार (मार्च 10, 2021) को सदन में आए अविश्वास प्रस्ताव को गिराने के लिए सरकार को 45 विधायकों का समर्थन चाहिए था। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की सरकार के पक्ष में 55 वोट पड़े। अब भूपिंदर हुड्डा द्वारा महिलाओं से ट्रैक्टर खिंचवाने का मामला सामने आया है, जिससे NCW नाराज़ है।

इस पर बात करते हुए भावुक सीएम खट्टर ने सदन में कहा, “बहुत भारी मन से एक विषय को उठाना चाहता हूँ। सारी रात नींद नहीं आई मुझे। कल महिला दिवस था। पूरे देश-दुनिया ने महिला दिवस बहुत अच्छी तरह से मनाया। विधानसभा में भी पूरे सत्र का संचालन महिला विधायकों ने किया। लेकिन, यहाँ से जाने के बाद जब मैं टीवी देखता हूँ तो एक भौंडा दृश्य देखने को मिला। महिलाओं के साथ बंधुआ मजदूरों से भी ज्यादा बुरा व्यवहार हुआ।”

दरअसल, सीएम खट्टर उस विरोध प्रदर्शन की बात कर रहे थे, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री व कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपिंदर सिंह हुड्डा ट्रैक्टर पर बैठे हुए थे और कुछ लोग उस ट्रैक्टर को खींच रहे थे। इस दौरान एक महिला विधायक भी ट्रैक्टर को खींचने में शामिल थीं। सीएम खट्टर ने कहा कि हमारी बहनों से उस ट्रैक्टर को खिंचवाया गया। बता दें कि सीएम खट्टर रोहतक के कलानौर से विधायक शंकुन्तला खटक की बात कर रहे थे।

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अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित विधानसभा क्षेत्र से विधायक खटक तीसरी बार जीत कर विधानसभा पहुँची हैं। मुख्यमंत्री खट्टर ने कहा कि टीवी पर ये पूरा दृश्य चला है। उन्होंने सुझाव दिया कि अगर कॉन्ग्रेस नेता हुड्डा को प्रदर्शन करना ही था तो वो महिलाओं को ऊपर बिठाते और खुद नीचे आकर ट्रैक्टर खींचते। बकौल खट्टर, तब उन्हें विरोध प्रदर्शन का मजा भी आता। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस नेताओं को शर्म आनी चाहिए।

राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने भी इस मामले को संज्ञान में लिया है। NCW की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा कि अगर कोई महिला अपनी जीविका चलाने के लिए परिश्रम कर रही है तो ये समझ में आता है लेकिन एक नेता का ट्रैक्टर पर बैठना और महिलाओं द्वारा उसे खिंचवाने से महिलाओं और ट्रैक्टर पर बैठे नेता की प्रतिष्ठा को गिराता है। उन्होंने कहा कि भूपिंदर सिंह हुड्डा को इस बारे में सोचना चाहिए था।

NCW की मुखिया ने कहा, “अगर महिलाओं को लगता है कि उन पर दबाव बना कर ये सब करवाया गया, तो वो हमारे पास आ सकती हैं। लेकिन, अगर वो ये सब कुछ स्वेच्छा से कर रही हैं तो ट्रैक्टर पर बैठे व्यक्ति को सोचना चाहिए कि ऐसा नहीं किया जाना चाहिए था। अगर हमारे पास कोई शिकायत आती है तो हम कार्रवाई करेंगे। अगर कोई शिकायत नहीं भी आती है तो भी ये निंदनीय कृत्य है।”

नाबालिग हिंदू लड़की को अगवा कर धर्मपरिवर्तन-निकाह, मियाँ मिट्ठू ने कबूल करवाया इस्लाम; पैसे उड़ा रहे थे मौजूद लोग

पाकिस्तान में हिंदू लड़कियों के अपहरण और उनके धर्मांतरण की खबरें आम हैं। एक तय पैटर्न के तहत किसी भी अल्पसंख्यक नाबालिग लड़की को कोई अधेड़ उम्र का कट्टरपंथी अगवा करता है, फिर उसके साथ दुष्कर्म कर, उस पर दबाव बना कर उसका धर्म बदलवाता है और बाद में उससे निकाह कर लेता है। 

इस बार भी सिंध के कांडकोट में एक 13 साल की लड़की के साथ यही हुआ है। लड़की की पहचान काव्या (बदला हुआ नाम) के तौर पर हुई है। वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी के अनुसार, सिंध के कंधकोट में तखत कुमार की बेटी को अगवा करके जबरन उसका धर्म परिवर्तन करवाया गया। बाद में उसका अपहरण करने वाले से ही निकाह भी करवा दिया गया। अब उसका नया नाम उम्हीना है।

इस अकाउंट से लड़की के धर्मांतरण के समय की कुछ तस्वीरें, वीडियो आदि शेयर किए गए हैं। वीडियो में हम देख सकते हैं कि हिंदू लड़कियों के धर्म परिवर्तन करवाने के लिए कुख्यात मियाँ मिट्ठू पीड़िता को इस्लाम कबूल करवा रहा है।

उसके ईर्द-गिर्द सैंकड़ों मुसलमान खड़े हैं। सब तेज आवाज में इस्लाम से जुड़ा कुछ पढ़ रहे हैं। वहीं बाकी लोगों में कोई वीडियो बना रहा है। कोई खड़ा है। कोई हँस रहा है और कई लोग पैसे उड़ा रहे हैं। हिंदू लड़की है इस माहौल के बीचोंबीच बिलकुल चुप बैठी है। 

वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी के ट्विटर अकाउंट से कहा गया है कि इस माहौल में कोई कैसे कह सकता है उस पर दबाव बनाया गया। उसे जान जाने का डर होता है। 13 साल की लड़की हिंदू समुदाय से हैं। मियाँ मिट्ठू ने उससे इस्लाम कबूल करवाया। बाद में उसका निकाह करवा दिया गया।

गौरतलब है कि वीडियो में नजर आने वाला मियाँ मिट्ठू कोई नया चेहरा नहीं है। इसने सिंध क्षेत्र में तमाम हिंदू लड़कियों के जबरन धर्म परिवर्तन करवाए हैं। अभी हाल में उसने एक स्कूल टीचर एकता कुमारी का धर्म बदलवाया था। यह घटना 6 जनवरी 2021 को हुई थी। लड़की का नाम एकता से बदल कर आयशा कर दिया गया था। उससे पहले कविता, महक केसवानी जैसी हिंदू लड़कियों के धर्मांतरण के पीछे भी इसी मियाँ मिट्ठू का हाथ था।

एंटीलिया केस: आतंकी संदेश भेजने के लिए तिहाड़ या आस-पास से हुआ टेलीग्राम चैनल क्रिएट, एक्सपर्ट्स का खुलासा

उद्योगपति मुकेश अंबानी के मुंबई स्थित घर एंटीलिया के बाहर विस्फोटक लदी कार खड़ी करने की जिम्मेदारी जैश-उल-हिंद ने कुछ दिन पहले ली थी। इसके लिए आतंकी संगठन ने टेलीग्राम मैसेजिंग ऐप का इस्तेमाल किया था। अब इसी कड़ी में एक प्राइवेट साइबर एजेंसी ने बताया है कि यह टेलीग्राम चैनल दिल्ली की तिहाड़ जेल या उसके आसपास कहीं से क्रिएट किया गया था।  

इंडियन एक्सप्रेस ने आधिकारिक सूत्रों के हवाले से बताया कि जाँच एजेंसी ने उस फोन की लोकेशन को ट्रैक किया, जिससे चैनल बनाया गया। हालाँकि, ये स्पष्ट नहीं है कि कौन सी जाँच एजेंसी ने प्राइवेट साइबर एक्सपर्ट्स को हायर किया। लेकिन जाँच में जो भी नतीजे सामने आए हैं, उन्हें दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के साथ साझा कर दिया गया है।

TOR नेटवर्क का इस्तेमाल करके बनाया गया चैनल

प्राइवेट साइबर फर्म द्वारा सबमिट किए गए सुरक्षा विश्लेषण रिपोर्ट के अनुसार, चैनल बनाने के लिए TOR नेटवर्क का उपयोग किया गया। इस TOR नेटवर्क के बारे में बता दें कि इसका इस्तेमाल डार्कनेट एक्सेस करने के लिए किया जाता है। यानी, इंटरनेट के उन पहलुओं के उपयोग के लिए जो सामान्य वेब ब्राउजर पर नजर न आएँ।

फर्म के अनुसार, तिहाड़ के भीतर से या उसके आसपास से एक मोबाइल फोन और सिम कार्ड का इस्तेमाल कर इस चैनल को बनाया गया था। रिपोर्ट ये भी बताती है कि चैनल को 26 फरवरी को बनाया गया था। इसमें एक मोबाइल नंबर है जिसका उपयोग इंटरनेट इस्तेमाल करने के लिए किया गया। इसी चैनल ने 27 फरवरी की रात मुकेश अंबानी के घर के बाहर एसयूवी खड़ी करने की जिम्मेदारी ली थी।

जैश उल हिंद ने अपनी भूमिका को किया खारिज

28 फरवरी को दूसरे चैनल का इस्तेमाल करते हुए जैश-उल-हिंद ने घटना में अपना हाथ होने से मना कर दिया था। संगठन ने कहा कि उनकी ओर से ऐसा कोई संदेश नहीं पोस्ट किया गया और उसका अंबानी के घर के बाहर की गई एसयूवी से कोई लेना-देना नहीं है। अब पुलिस का अपनी जाँच में मानना है कि दूसरा संदेश देश के बाहर से किसी ने भेजा, जिसकी लोकेशन पिन नहीं है।

वहीं कथित तौर पर अंबानी से रुपए माँगने वाला संदेश तिहाड़ जेल से आया था। पेमेंट के लिए क्रिप्टोकरंसी का लिंक भी था। हालाँकि लिंक एक्टिव नहीं था। मैसेज में लिखा था कि ये सिर्फ़ ट्रेलर हैं अभी बड़ी पिक्चर दिखना बाकी है। संदेश में ये भी था, “जिस भाई ने कार पार्क की वह सुरक्षित अपने घर पहुँच गया है।”

बता दें कि इस केस से जुड़ी सारी जाँच पहले मुंबई पुलिस के हाथ थी। लेकिन विपक्ष के आरोपों के बाद जाँच ATS को देने का फैसला हुआ। बाद में पता चला कि टेरर केस की जाँच NIA करेगी। अब एटीएस मनसुख हिरेन की मृत्यु और उनके गायब वाहन वाले केस की जाँच करेगी। 

महाशिवरात्रि पर ‘तेजो महालय’ के गुम्बद के पास जाकर किया शिव स्तोत्र का पाठ, महिला हिन्दू नेता समेत 3 हिरासत में

महाशिवरात्रि के दिन एक बार फिर से आगरा का ताजमहल चर्चा में है। बता दें कि देश में कई ऐसे लोग और संस्थाएँ हैं ,जो मानते हैं कि ताजमहल एक प्राचीन हिन्दू शिव मंदिर के ऊपर बनाया गया है। इनमें अखिल भारतीय हिन्दू महासभा नामक संगठन भी शामिल है, जो इसे शिव मंदिर मानता है। वो कहते हैं कि ये तेजो महालय है। कुछ हिन्दू कार्यकर्ताओं ने गुरुवार (मार्च 11, 2021) को इसके मुख्य गुंबद के पास पहुँच कर पूजा-पाठ किया।

इस दौरान ताजमहल की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाली CISF ने एक हिन्दू महिला कार्यकर्ता को पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया। घटना की जानकारी मिलते ही कई हिन्दू कार्यकर्ता ताजगंज थाना पहुँचे और महिला नेता को रिहा करने की माँग की। हिरासत में ली गई मीना दिवाकर संगठन की प्रांत अध्यक्ष हैं। उन्होंने ताजमहल के भीतर जाकर मुख्य गुम्बद के सामने शिव स्तोत्र का पाठ शुरू कर दिया, जिससे वहाँ तैनात कर्मी उधर दौड़ पड़े।

CISF के जवानों ने मीना को पकड़ कर ताजगंज पुलिस को सूचित किया, जो उन्हें हिरासत में लेकर कर के अपने साथ थाने ले गई। मीना दिवाकर के लिए ऐसा करने का यह कोई पहला मौका नहीं है। वो पहले भी मुख्य गुम्बद पर जाकर आरती और शिव चालीसा पढ़ चुकी हैं। इस पूरे प्रकरण का वीडियो वायरल होने के बाद उनके खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया गया था। उन्होंने सावन माह में काँवड़ लेकर ताजमहल जाने का प्रयास भी किया था।

एक सप्ताह पहले ताजमहल में बम रखे जाने की अफवाह भी उड़ी थी, जो जाँच के बाद फर्जी निकली। फिरोजाबाद से इस मामले में एक धमकी देने वाले व्यक्ति को हिरासत में लिया गया था। ताजमहल कुछ देर पर्यटकों के लिए बंद भी रहा था। 4 महीने पहले हिन्दू जागरण मंच के युवाओं ने परिसर में भगवा झंडा लहराते हुए हनुमान चालीसा का पाठ किया था। इससे पहले 4-5 बार ऐसी घटनाएँ सामने आ चुकी हैं।

मीना दिवाकर ने डायना बेंच पर बैठ कर पूजा की। उनके साथ दो अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया गया है। इसकी सूचना मिलने के बाद हिंदू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संजय जाट और जिला अध्यक्ष रौनक ठाकुर समेत अन्य कार्यकर्ता थाने पर डेरा जमाए हुए हैं। थाने का घेराव भी किया गया है। इस वक़्त ताजमहल में शाहजहाँ का ‘उर्स’ चल रहा है। ऐसे में वहाँ अन्य गतिविधियों की अनुमति नहीं है।

PM मोदी की माँ ने 100 साल की उम्र में लगवाई कोरोना वैक्सीन, प्रधानमंत्री ने कहा- लोगों को वैक्सीन के लिए प्रेरित करें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की माँ हीराबेन मोदी ने भी कोरोना वायरस की वैक्सीन लगवा ली है। उनकी उम्र 100 वर्ष से भी ऊपर है। पीएम मोदी ने ट्विटर के जरिए बताया, “मैं आपके साथ ये जानकारी साझा करते हुए प्रसन्नता महसूस कर रहा हूँ कि मेरी माँ ने कोविड-19 वैक्सीन की पहली डोज लगवा ली है। मैं आप सब से आग्रह करता हूँ कि अपने आसपास के पात्र लोगों को वैक्सीन लगवाने के लिए प्रेरित करें।”

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी अपने परिवार के साथ कोरोना वैक्सीन की डोज ले चुके हैं। याद हो कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मार्च 2021 के पहले ही दिन सुबह-सुबह कोरोना वैक्सीन की पहली डोज ली थी। उन्होंने दिल्ली AIIMS में कोरोना वैक्सीन ली थी। उन्होंने कहा था कि जिस तरह से हमारे डॉक्टरों और वैज्ञानिकों ने इतने कम समय में अद्भुत कार्य कर कोविड-19 के खिलाफ दुनिया की लड़ाई में योगदान दिया है, वो असाधारण है।

68 साल के अहमद शाह ने किया कुत्तों के साथ रेप, वीडियो मिलने के बाद मुंबई पुलिस ने दबोचा

मुंबई पुलिस ने 68 वर्षीय एक व्यक्ति को मादा कुत्ते के साथ बलात्कार के आरोप में गिरफ्तार किया है। DN नगर की पुलिस ने बुधवार (मार्च 10, 2021) को ये कार्रवाई की। ये घटना अँधेरी वेस्ट के जुहू में दिसंबर 2020 में हुई थी, जिसका अब खुलासा हुआ है।

गिरफ्तार आरोपित अहमद शाह एक सब्जी विक्रेता है, जो जुहू गली में ही रहता है। इस वारदात के सामने आने के बाद लोगों ने सोशल मीडिया पर भी आक्रोश जताया। अहमद शाह कई कुत्तों के साथ रेप कर चुका है।

इस मामले की शिकायत 45 वर्षीय पशु अधिकार कार्यकर्ता विजय मोहनानी ने दर्ज कराई थी। वो ‘बॉम्बे एनिमल राइट्स’ NGO के साथ जुड़े हुए हैं। उन्होंने पुलिस को सबूत के रूप में एक वीडियो भी दिया, जिसमें अहमद शाह को कुत्ते के साथ रेप करते हुए देखा जा सकता है।

विजय मोहनानी को एक स्थानीय व्यक्ति ने कॉल कर के बताया था कि एक व्यक्ति आवारा कुत्तों का रेप करता रहता है। उसने ही दिसंबर 2020 का ये वीडियो भेजा।

बकौल विजय, जब उन्होंने उस व्यक्ति से पूछा कि उसने इस बारे में पुलिस में कोई शिकायत क्यों नहीं दर्ज कराई, तो उसने कहा कि वो आरोपित को जानता था और उसने उसे कई बार चेताया भी था कि वो इस तरह की हरकतों से बाज आए लेकिन जब वो बार-बार इसी कुकृत्य को दोहराता रहा तो उसे मजबूरन उसके बारे में खुलासा करना पड़ा।

इसके बाद आरोपित के जानकार ने विजय मोहनानी को कॉल कर के सब कुछ बताया।

पुलिस ने इस मामले में मंगलवार (मार्च 9, 2021) को IPC की धारा-377 (अप्राकृतिक अपराध), 429 (किसी सस्तन प्राणी की हत्या करना या उसे अपंग बनाना) और ‘प्रिवेंशन ऑफ क्रूएलिटी ऑन एनिमल्स एक्ट (PCA) की धारा-11 (पशु के साथ क्रूरता भरा व्यवहार) के तहत FIR दर्ज की है।

पुलिस का कहना है कि आरोपित ऐसे कुकृत्य करने का आदी है और उसे कई बार स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी थी।

जुलाई 2019 में इसी तरह की जघन्य वारदात की खबर आई थी, जब मंगलौर में मोहम्मद अंसारी नाम के एक शख्स को खेत में गाय के साथ अप्राकृतिक सेक्स करते हुए ग्रामीणों द्वारा देखा गया था। ग्रामीणों के मुताबिक अंसारी ने पहले गाय के पाँवों को रस्सी से बाँधा था और फिर उसके साथ दुष्कर्म किया था। उससे दिन पहले मध्य प्रदेश में छोटू खान ने गाय के साथ दुष्कर्म किया था। हाल में भी ऐसे मामले सामने आए हैं।

ममता बनर्जी के पैर देखे तो इंदिरा गाँधी की नाक याद आ गई, बंगाल में दीदी की ‘नाक’ बचेगी क्या?

‘जय श्रीराम’ के नारे से बिदकने वाली नेता ने जब नंदीग्राम से चुनाव लड़ने का फैसला किया तो यह कोई मास्टरस्ट्रोक नहीं था। करीब सवा दो लाख मतदाताओं वाले इस सीट में तकरीबन 62 हजार मतदाता मुस्लिम हैं। जो सरकार चुनाव अचार संहिता लागू होने से चंद घंटे पहले फुरफुरा शरीफ दरगाह के लिए खजाना खोल दे, उसके मुखिया को अपने कोर वोटर (मुस्लिम, जिन्हें तुष्टिकरण की राजनीति में अल्पसंख्यक मतदाता कहते हैं) को छिटकने से रोकने के लिए इसी तरह के किसी सीट की तलाश होती है।

लेकिन, चुनाव किसी एक खास वर्ग को लुभाकर नहीं जीते जाते। भारतीय राजनीति में मोदी के अभ्युदय के बाद से यह भी देखने को मिला है कि जब-जब मुस्लिमों वोटों का ध्रुवीकरण करने की कोशिश की जाती है तो उसकी प्रतिक्रिया में दूसरी तरफ भी वोटर लामबंद हो जाते हैं। हालिया बिहार चुनाव में भी यह देखने को मिला था। नतीजतन, प​हले चरण की सीटों पर राजद गठबंधन से पिछड़ने के बाद अगले दो चरणों में एनडीए ने न केवल नुकसान की भरपाई की, बल्कि सरकार बनाने लायक संख्याबल भी हासिल करने में कामयाब रही।

लिहाजा, ममता बनर्जी का शिव पूजा और चंडी पाठ भी चौंकाने वाला नहीं था। यह कुछ-कुछ ऐसा ही था, जैसा हमने पिछले गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान राहुल गाँधी को करते देखा था। लेकिन, दो नावों की सवारी आसान नहीं होती। इसलिए नंदीग्राम में जिस दिन ममता बनर्जी ने नामांकन दाखिल किया, इस कहानी में नया ट्विटस्ट आ गया।

ममता बनर्जी ने दावा किया, “जब मैं गाड़ी के पास थी तो 4-5 लोगों ने मुझे धक्का दिया। मेरा पैर कुचलने की कोशिश की गई। मेरे पैर मैं सूजन है। मैं अब कोलकाता जा रही हूँ, डॉक्टर को दिखाने के लिए। बहुत दर्द है। बुखार भी आ गया है। कोई पुलिसकर्मी नहीं था। 4-5 लोगों ने जान-बूझकर यह किया है। यह साजिश है।”

बाद में टीवी9 भारतवर्ष ने चश्मदीदों के हवाले से बताया कि ममता बनर्जी पर किसी ने हमला नहीं किया। उनकी गाड़ी पिलर से टकराई थी। उनके साथ कई सारे पुलिसकर्मी थे। पुलिसकर्मी ने ममता बनर्जी के पैर पर बर्फ लगाया। ममता बनर्जी 5 मिनट रूकी और फिर चली गईं। 4-5 लोगों द्वारा धकेलने की बात झूठी है।

इस घटना को लेकर दो तरह की प्रतिक्रियाएँ देखने को मिल रही हैं। एक खेमा इसे ममता बनर्जी पर हमले की साजिश बता रहा है, तो दूसरा राजनीतिक स्टंट। चुनाव आयोग ने भी इस मामले पर रिपोर्ट माँग ली है। फिलहाल टीएमसी ममता बनर्जी के जख्मी पैर का फायदा उठाने की हरसंभव कोशिश में लगी है।

इस घटना ने फरवरी 1967 में ओडिशा में एक चुनावी सभा के दौरान इंदिरा गाँधी पर पथराव की याद दिला दी। ईंट का एक टुकड़ा उनकी नाक पर आकर लगा और खून बहने लगा। टूटी नाक पर पट्टी लगवाकर अगले दिन इंदिरा ने कोलकाता में जनसभा को संबोधित किया और बाद में नाक का ऑपरेशन करवाया। इस घटना को लेकर आज तक दावा किया जाता है कि यह सब प्रायोजित था।

इंदिरा पर पत्थर फेंके जाने की घटना को लेकर ‘दिनमान’ में प्रकाशित रिपोर्ट

उस चुनाव में कॉन्ग्रेस को इंदिरा को लगी चोट का लाभ नहीं मिल पाया था। कई राज्यों में कॉन्ग्रेस को सत्ता गँवानी पड़ी थी। अब सवाल है कि क्या ममता कामयाब होंगी?

यहाँ यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि ममता बनर्जी उस राज्य की मुख्यमंत्री हैं जो राजनीतिक हिंसा के लिए कुख्यात रहा है। भाजपा से जुड़े लोगों को निशाना बनाने की घटनाएँ लगातार सामने आती रही हैं। यह सब तब हो रहा है जब किसी दौर में ममता बनर्जी खुद इस तरह की हिंसा में बाल-बाल बचीं थी। 16 अगस्त 1990 को ममता पर तत्कालीन वामपंथी सरकार के गुंडों ने हमला किया था। ममता बनर्जी को इतनी बेरहमी से पीटा गया कि उनके सिर में 16 टाँके लगे थे। बाँह पर प्लास्टर चढ़ा था। ममता के सिर पर लाठियों की बरसात करने का आरोप सीपीएम के बाहुबली वर्कर लालू आलम पर लगा, जो तत्कालीन सरकार के नंबर दो बुद्धदेव भट्टाचार्य (जो बाद में मुख्यमंत्री भी बने) का खास बताया जाता था। इस घटना के वक्त टीएमसी का जन्म भी नहीं हुआ था और ममता कॉन्ग्रेस की युवा नेत्री थीं। ममता पर हुए इस हमले का कॉन्ग्रेस को बंगाल में कभी लाभ नहीं मिला।

यानी, इस तरह के स्टंट राजनीतिक तौर पर लाभ दे जाएँ, इसकी कोई गारंटी नहीं है।

वैसे जबर्दस्त बगावत के बावजूद हालिया सर्वे ममता बनर्जी को चुनाव में आगे बता रहे हैं। लेकिन राजनीति की सामान्य समझ रखने वाला व्यक्ति भी जानता है कि लहर नहीं होने कि स्थिति में चुनाव मतदान के ऐन वक्त तक बदलता रहता है। इस स्थिति में अमूमन फायदा उस दल को होता है जो तेजी से आगे बढ़ रही होती है। बंगाल में इस स्थिति में बीजेपी है और चुनाव भी आठ चरणों में होने हैं।

इस कहानी में अभी कई और पटकथा लिखी जानी बाकी हैं। लेकिन ममता बनर्जी के पैरों को शायद एहसास हो चुका है कि हैट्रिक की डगर बेहद मुश्किल है!

‘ईद पर मुबारकबाद, महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की तस्वीर फॉरवर्ड न करने का ज्ञान’: सोनू सूद पर बरसे लोग

अभिनेता सोनू सूद अक्सर मीडिया में बने रहते हैं। वो रोज अच्छी-अच्छी बातें लिख कर ट्वीट करते हैं, जिस पर हजारों लाइक्स और रिट्वीटस मिलते हैं। अब महाशिवरात्रि को लेकर भी उन्होंने ज्ञान दिया, लेकिन ये उन्हें भारी पड़ गया। उन्होंने लिखा, “शिव भगवान की फोटो फॉरवर्ड करके नहीं, किसी की मदद करके महाशिवरात्रि मनाएँ।”

सोशल मीडिया पर यह ‘ज्ञान’ लोगों पचा नहीं। इसलिए नहीं कि यह सच में ज्ञान की बात थी बल्कि इसलिए क्योंकि लोग इन सबके पीछे छिपे प्रोपगेंडा को आसानी से समझने लगे हैं। लोगों का सवाल बस इतना है कि सारा ज्ञान सिर्फ हिन्दुओं के लिए ही है?

‘कड़वा सच’ नामक ट्विटर हैंडल ने उनसे पूछा, “ईद और बकरीद पर ये ज्ञान कहाँ चला जाता है?” वहीं पूर्णिमा चौबे ने इस ट्वीट की रिप्लाई करते हुए सेक्युलरिस्म को कोसा।

‘राइज ऑफ बरनोल’ नामक ट्विटर हैंडल ने कहा कि भगवान शिव की तस्वीर भी भेजो और लोगों की मदद भी करो, क्योंकि Jio का डेटा सस्ता है। लाला नामक हैंडल ने पूछा, “ये दोगलापन क्यों, सिंपल विशेज क्यों नहीं, जैसे ईद या गुड फ्राइडे पर देते। ज्ञान क्यों? मसीहा तो डबल स्टेन्डर्ड वाला नहीं होता।”

लोगों ने रिप्लाई में ऐसे पोस्टर भी ट्वीट किए, जिसमें लिखा हुआ था कि हमारे त्योहारों पर ज्ञान देना बंद करो क्योंकि हमारे पर्व-त्यौहार आपका सामाजिक जागरूकता अभियान नहीं हैं।

एक ने उन्हें ‘फोटो फॉरवर्ड ज्ञानी’ बताते हुए उनके एक पुराने ट्वीट का स्क्रीनशॉट शेयर किया, जिसमें उन्होंने तस्वीर के जरिए ही ईद की बधाई दी थी, बिना ज्ञान के। रिप्लाई में एक यूजर ने ‘बॉलीवुड’ की जगह ‘कराचीवुड’ शब्द का प्रयोग किया।

एक व्यक्ति ने सलाह दे डाली कि बॉलीवुड की फ़िल्में मत देखें बल्कि टिकट के रुपयों से किसी गरीब की मदद कर दें। एक ने उनसे पूछा कि कोई भगवान शिव की तस्वीर किसी को भेज रहा है तो उससे उन्हें क्या परेशानी आ रही है?

‘द स्किन डॉक्टर’ ने लिखा, “कृपया ऐसी ही अपील अपनी फिल्मों के रिलीज़ से पहले भी किया कीजिए: मेरी फिल्मों के टिकट पर पैसा बर्बाद करके नहीं, उससे किसी गरीब को रोटी खिला कर पुण्य कमाइए।”

‘बेटी होने के बाद से प्रताड़ित कर रहा शौहर शाहनवाज, माँग रहा ₹10 लाख’: नेहा ने CM योगी से लगाई गुहार, Video वायरल

गुजरात के अहमदाबाद में आयशा नाम की महिला के आत्महत्या करने के बाद अब उत्तरप्रदेश के संभल के चंदौसी की एक महिला ने ससुराल पक्ष की यातनाओं से तंग आकर सुसाइड करने की बात कही है। महिला का नाम नेहा नाज़ है। उसका वीडियो इस समय सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। 

वीडियो में नाज़ को कहते सुना जा सकता है कि उसकी शादी 6 साल पहले हुई थी। शादी के 1 साल बाद उसने बेटी को जन्म दिया। इसके कारण ससुराल वाले उससे नाराज हो गए। शौहर शाहनवाज अख्तर भी उससे खुश नहीं है। सबका कहना है कि उन्हें बेटी नहीं चाहिए।

नाज़ आगे कहती हैं, “बेटी होने के बाद ससुराल वालों ने मेरा दो बार गर्भपात करवा दिया। इसके बाद से 15 माह हो गए, मैं अपने पिता के घर रहती हूँ। पिता के घर आने के बाद भी शौहर शहनवाज अख्तर मुझसे 10 लाख रुपए की माँग कर रहा है। मैंने अपने पिता को ये बात बताई। वे हर्ट हो गए और 9 माह पहले उनकी मृत्यु हो गई। मेरी माँ विधवा हैं। वह मेरा और मेरी बेटी का खर्चा कैसे उठाएँ? उनके पास आय का कोई साधन नहीं है। मैं क्या करूँ। मैं अपना जीवन समाप्त करने की सोच रही हूँ।”

पीड़िता सिसकते हुए जिला प्रशासन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मदद माँगती है। वह कहती है, “मैं संभल जिला प्रशासन व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अनुरोध करती हूँ कि आप मेरी मदद करें। अगर मुझे कुछ होता है तो मेरी मौत का जिम्मेदार शहनवाज अख्तर और मेरा जेठ वसीम अख्तर होंगे। वह शहर के सबसे रसूखदार आदमी हैं।”

बता दें कि नाज की इस वीडियो के वायरल होने के बाद सम्भल पुलिस ने इस पर संज्ञान लिया है। उन्होंने कहा है कि 10 मार्च 2021 को सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, दिसमें एक महिला द्वारा अपने ससुराल पक्ष पर दहेज, उत्पीड़न व मारपीट करने तथा आत्महत्या के लिए मजबूर करने के आरोप लगा रही थी। इस वीडियो के आधार पर चंदौसी पुलिस द्वारा तत्काल संज्ञान ले लिया गया है।

पुलिस द्वारा जारी प्रेस नोट के मुताबिक महिला की तहरीर पर आईपीसी की धारा 498ए/323/506/377/312/ IPC व 3/4 दहेज अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज हुआ है। आगे आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। महिला को कोई खतरा नहीं है। पुलिस उसके पास मौजूद है।

गौरतलब है कि इससे पहले गुजरात के अहमदाबाद में आयशा ने 25 फरवरी 2021 को साबरमती नदी में कूद कर जान दी थी। बाद में उसका आखिरी वीडियो हर जगह सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। पता चला था कि राजस्थान के जालौर के रहने वाले उसके शौहर आरिफ ने न केवल दहेज माँगा था, बल्कि उसे प्रताड़ित भी किया था।

आत्महत्या से पहले बनाए गए वीडियो में आयशा ने कहा था, “प्यार करते हैं आरिफ से। उसे परेशान थोड़े न करेंगे। उसे आज़ादी चाहिए, आज़ाद रहे वो। चलो, अपनी ज़िंदगी तो यहीं तक है। मैं खुश हूँ कि मैं अल्लाह से मिलूँगी। मैं उनसे पूछूँगी कि मुझसे क्या गलती हुई। अच्छे माँ-बाप मिले, दोस्त भी बहुत अच्छे मिले- फिर भी कमी कहाँ रह गई? सुकून के साथ जाना चाहती हूँ। और अल्लाह से मैं ये भी कहूँगी कि मुझे दोबारा इंसानों की शक्ल न दिखाए।”

चुनाव से पहले नेताओं के पिटने का ‘PK कनेक्शन’: ममता बनर्जी से पहले केजरीवाल और जगन पर भी हुए थे हमले

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की नींद तभी से उड़ी हुई है, जब से भाजपा ने 2019 लोकसभा चुनाव में 18 सीटें जीत कर पश्चिम बंगाल में दस्तक दी। नतीजे आने के बाद उसी साल जून में खबर आई कि ममता बनर्जी ने एक खास फ्लाइट से प्रशांत किशोर को कोलकाता बुलाया है। एक वरिष्ठ विमानन अधिकारी ने तब बताया था कि इसे लॉकडाउन का उल्लंघन मानते हुए जाँच की जा सकती है।

प्रशांत किशोर ने इसके बाद TMC की रणनीतियाँ बनानी शुरू कीं। इनमें एक फैक्टर दिलचस्प है – हमले का फैक्टर! प्रशांत किशोर और नेताओं पर हमले का ‘कनेक्शन’ पुराना है। हमला, संवेदना, सांत्वना आदि की राजनीति को समझिए।

अब जब ममता बनर्जी पर नंदीग्राम में कथित रूप से हमला हुआ और उसके कारण उन्हें न सिर्फ कई चोटें आने की बातें कही जा रही है, बल्कि सीने में दर्द, बुखार और साँस लेने में दिक्कत जैसी समस्याएँ भी आ गई हैं। कोलकाता के अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है। उनके भतीजे अभिषेक ने भाजपा पर आरोप लगाया है। कॉन्ग्रेस का एक वर्ग सहानुभूति जताने में लगा हुआ है तो दूसरा इसे पाखंड बता रहा है।

अब कहानी प्रशांत किशोर की। प्रशांत किशोर और उनसे जुड़े नेताओं पर हमले का ये सिलसिला नया नहीं है। कुछ नेताओं पर प्रशांत किशोर द्वारा उनका चुनावी प्रबंधन संभालने के बाद हमले हुए तो कुछ पर उससे पहले। लेकिन, पिटने वाले नेताओं और प्रशांत किशोर का ये कनेक्शन सोशल मीडिया पर कुछ लोगों को पच नहीं रहा।

प्रशांत किशोर ने बंगाल चुनाव को अपनी प्रतिष्ठा का विषय भी बनाया है क्योंकि उन्होंने बाकायदा ट्वीट कर भाजपा द्वारा दहाई का आँकड़ा पार न करने की भविष्यवाणी की थी।

अरविंद केजरीवाल पर हमला कोई नई बात नहीं है। कई बार ये सामने आता है कि उन्हें थप्पड़ जड़ने वाला आम आदमी पार्टी (AAP) का ही कार्यकर्ता है। नवंबर 2018 में किसी ने उनके चेहरे पर मिर्च पाउडर छिड़क दिया तो अप्रैल 2016 में ऑड-इवन से नाराज एक व्यक्ति ने उन पर जूता चलाया। जनवरी 2016 में उन पर इंक अटैक हुआ। अप्रैल 2014 में एक ऑटो ड्राइवर ने उनकी पिटाई की।

2014 लोकसभा चुनाव में भी केजरीवाल पर अंडों से हमले हुए थे। उससे पहले 2013 में भी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन पर इंक से हमला हुआ था। दिसंबर 2019 में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ऐलान किया था कि AAP ने प्रशांत किशोर की कंपनी I-PAC के साथ करार किया है। उन्होंने कंपनी के स्वागत में ट्वीट भी किया था। खास बात ये है कि इससे 4 दिन पहले ही AAP ने भाजपा कार्यकर्ताओं पर उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के घर में घुस कर उन पर हमले का आरोप लगाया था।

अक्टूबर 2018 में खबर आई थी कि YSR कॉन्ग्रेस पार्टी के मुखिया जगन मोहन रेड्डी पर चाकू से हमला हुआ है। विशाखापत्तनम एयरपोर्ट के VIP लाउन्ज में ये हमला हुआ। हमलावर कार्यकर्ताओं द्वारा पकड़ा गया और मौके पर ही पुलिस के हवाले कर दिया गया था। आंध्र प्रदेश में किस तरह से प्रशांत किशोर ने जगन मोहन रेड्डी की जीत में मदद की है, इस पर बड़े मीडिया संस्थानों में भी लेख प्रकाशित हुए थे।