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आखिरकार BJP के हुए पर्दे के ‘राम’ अरुण गोविल, लोगों ने कहा- अबकी सही पार्टी का किया चुनाव, बंगाल में करेंगे प्रचार

रामानंद सागर के धारावाहिक रामायण में भगवान राम की भूमिका निभाकर लोगों के दिलों में जगह बनाने वाले अरुण गोविल आज (मार्च 18, 2021) भारतीय जनता पार्टी के साथ आधिकारिक तौर पर जुड़ गए। उन्होंने भाजपा मुख्यालय में पहुँचकर पार्टी की सदस्यता ली।

5 राज्यों में विधानसभा चुनाव से पहले अरुण गोविल का बीजेपी से जुड़ना बेहद अहम है। वह पार्टी के लिए बंगाल में प्रचार भी करेंगे। उन्होंने आज पार्टी से जुड़ने के पहले अपने ट्विटर पर एक ट्वीट भी किया। इसमें उन्होंने कहा था, “समस्त बड़ी गलतियों की तह में अहंकार ही मूल कारण होता है।”

उल्लेखनीय है कि अरुण गोविल के भाजपा से जुड़ने के बाद लोग उन्हें बधाई दे रहे हैं। लोगों का कहना है कि उन्होंने इस बार सही पार्टी का चुनाव किया है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि गोविल अपनी सादगी के साथ जिस तरह पर्दे पर छाए वैसे ही राजनीति में भी छाप छोड़ेंगे।

बता दें कि 1988 में  कॉन्ग्रेस ने अरुण गोविल, की लोकप्रियता को अपने पक्ष में भुनाने का प्रयास किया था। एक इंटरव्यू में गुलाम नबी आजाद यह स्वीकारते हुए देखे गए थे कि कॉन्ग्रेस ने रामायण के पात्र का इस्तेमाल एक कलाकार के रूप में नहीं बल्कि ‘राम’ के रूप में करना चाहती थी ताकि लोग वीपी सिंह के खिलाफ मतदान कर सकें। कॉन्ग्रेस के लिए प्रचार करते समय रामायण के पात्र ने यह कहते हुए प्रचार किया था कि भगवान राम का नाम लेकर कॉन्ग्रेस को वोट करें।

लॉकडाउन के समय अधिक बढ़ी लोकप्रियता

पिछले साल लॉकडाउन के बाद दूरदर्शन पर शुरू किए गए रामायण के प्रसारण ने अरुण गोविल समेत अन्य कलाकारों को नई पीढ़ी के बीच भी लोकप्रिय कर दिया था। उस समय रामायण को एक ही दिन में में 77 मिलियन (यानी 7.7 करोड़) दर्शक मिले थे। वहीं ‘रामायण’ ने सबसे अधिक टीआरपी का रिकॉर्ड भी अपने नाम किया था। टीआरपी के मामले में इस धारावाहिक ने पिछले 5 साल के हर रिकॉर्ड को तोड़ दिया था और मात्र 4 दिन के भीतर 170 मिलियन व्यूज यानी 17 करोड़ दर्शक मिले थे, तभी रामायण में किरदार निभाने वाले सभी कलाकारों के सोशल मीडिया फैन्स में भी एक औचक बढ़ौतरी देखने को मिली थी।

जहाँगीरपुरी में 15 साल की लड़की का धर्मपरिवर्तन करवाकर होने जा रहा था निकाह, DCW ने मौके पर पहुँचकर रोका

दिल्ली के अमन विहार के बाद अब जहाँगीर पुरी से एक नाबालिग लड़की के धर्मपरिवर्तन और निकाह करवाने का मामला सामने आया है। दिल्ली महिला आयोग (DCW) ने स्वयं मौके पर पहुँचकर इस निकाह को रुकवाया। दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल भी इस दौरान मौके पर मौजूद रहीं।

DCW के प्रवक्ता राहुल ताहिलियानी के ट्वीट के मुताबिक, लड़की का धर्मपरिवर्तन कर निकाह करवाया जा रहा था। लेकिन स्वाति मालिवाल के नेतृत्व में पहुँची टीम ने पुलिस के साथ मिल कर विवाह रुकवा दिया।

राहुल के ट्वीट में शेयर की गई वीडियो में स्वाति मालीवाल लड़की के घरवालों से बात करती दिखाई दे रही हैं। वह कहती हैं, “दिल्ली के जहाँगीरपुरी इलाके में एक 15 साल की लड़की का निकाह कराया जा रहा था। जैसे ही हमें ये पता चला, हमारी टीम ने मौके से पहुँचकर उस निकाह को रुकवा दिया।”

घटना पर दुख व्यक्त करते हुए मालीवाल ने कहा, “मुझे बहुत दुख होता है कि आज भी इस देश में, यहाँ तक की देश की राजधानी में बच्चों के बालविवाह करवाए जा रहे हैं। ये बहुत ही शर्म की बात है और ऐसे लोग जो बच्चों से उनके बचपन छीन लेते हैं, उन्हें कड़ी से कड़ी सजा होनी चाहिए। इस केस में भी मैं दिल्ली पुलिस से अनुरोध करूँगी, उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाए और जो लड़की है उसके पुनर्वास पर दिल्ली महिला आयोग काम करे।”

बता दें कि दिल्ली पुलिस ने इस पूरे मामले पर शिकायत दर्ज कर ली है और बच्ची के परिवार को पूछताछ के लिए बुलाया है, इसके अलावा जिस लड़के के साथ बच्ची का निकाह करवाया जा रहा था, उसके परिवार वालों को भी पुलिस अपने साथ लेकर गई है। दोनों परिवार जहाँगीर पुरी के एच ब्लॉक के पास की झुग्गियों में रहते थे।

मालूम हो कि इससे पहले दिल्ली के अमन विहार के वार्ड संख्या 41 में ऐसे ही मामले को लेकर विवाद हुआ था। हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि एक नाबालिग हिंदू लड़की का धर्मांतरण कर निकाह 40 साल के मोहम्मद इंतजार हुसैन से करावाया जा रहा था। वे दिल्ली पुलिस पर सहयोग नहीं करने का भी आरोप लगा रहे थे। दूसरी ओर दिल्ली पुलिस कह रही थी कि दोनों नाबालिग हैं जबकि लड़की की आयु 17 वर्ष बताई जा रही थी और वह 7वीं कक्षा में पढ़ती थी।

बंगाल में मंदिर की 30 बीघा जमीन पर कब्ज़ा करके बना दिया कब्रिस्तान, बनाई नकली कब्रें, गाँव में हिन्दुओं की नाकाबंदी: रिपोर्ट

पश्चिम बंगाल के नदिया में माता के मंदिर की जमीन हथिया कर उस पर कब्रिस्तान बनाने की बात सामने आई है। आरोप है कि जब कोरोना वायरस संक्रमण से पूरा देश जूझ रहा था और लॉकडाउन लगाया गया था, तब वहाँ मंदिर की 30 बीघा जमीन हथिया कर उसे कब्रिस्तान में तब्दील कर दिया गया। स्थानीय मुस्लिम समाज पर जमीन के अवैध कब्जे का आरोप लगा है। ये घटना पश्चिम बंगाल में नदिया के घोसपाड़ा इलाके की है।

‘न्यूज़ नेशन’ की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, स्थानीय दोनों समुदायों में बहस इस बात को लेकर शुरू हुई कि ये भूमि सरकारी है या फिर किसी समुदाय विशेष की और फिर दोनों पक्ष सबूत के रूप में दस्तावेज दिखाने लगे, लेकिन ये बहस जल्द ही मारपीट में बदल गई। वीडियो में लोगों को लड़ते हुए देखा जा सकता है, जिसमें बुजुर्ग महिलाएँ भी शामिल हैं। जहाँ हिन्दू समाज ने कहा कि ये सरकारी भूमि है और सार्वजनिक है, मुस्लिम समाज ने कागज़ उनके पास होने की बात कही।

लेकिन, पत्रकार ने दावा किया कि जब मुस्लिम समाज से उसने कागज़ात दिखाने को कहा तो उन्होंने इससे इनकार कर दिया। बताया जा रहा है कि जबरन भूमि पर कब्ज़ा करने के प्रयास पूरे पश्चिम बंगाल के कई इलाके में चल रहा है। मारपीट में लाठियाँ भी चलीं। एक स्थानीय हिन्दू व्यक्ति ने बताया, “यहाँ बाउंड्री बना दी गई है। मुस्लिमों ने गेट लगा दी। यहाँ पहले कोई कब्रिस्तान था ही नहीं। बाउंड्री न होने के कारण लोगों की आवाजाही थी।”

आरोप है कि मुस्लिम समाज के लोगों ने कब्रिस्तान में नकली कब्रें तैयार कर दी हैं, ताकि उस जमीन पर कोई और कुछ न कर सके। आरोप है कि उन्होंने बाउंड्री खड़ी कर के गाँव का रास्ता रोक दिया है। हिन्दुओं का कहना है कि उनका उत्पीड़न हो रहा है और अपने ही गाँव में उनकी नाकाबंदी कर दी गई है। एक बुजुर्ग ने बताया कि ये हिन्दुओं की जमीन है जहाँ सावन में मेला लगता था और पूजा होती थी।

बुजुर्ग ने कहा कि लॉकडाउन में जोर-जबरदस्ती से किए गए कब्जे के कारण अब वहाँ हिन्दू जा ही नहीं सकते। एक महिला ने बताया कि पहले वो लोग मंदिर में जाकर अगरबत्ती जला कर पूजा कर सकते थे, लेकिन अब नहीं कर सकते। उन्होंने बताया कि केवल हिन्दू होने के कारण उन्हें नहीं जाने दिया जा रहा है। ‘न्यूज़ नेशन’ का दावा है कि कब्रिस्तान में मंदिर के अवशेष अब भी हैं और मूर्तियाँ पड़ी हुई हैं, पूजा-पाठ के संकेत हैं।

वहाँ अब भी सिन्दूर और रोली जैसी चीजें देखी जा सकती हैं। चुनावी माहौल में रंग चुके बंगाल के घोसपाड़ा के स्थानीय लोगों का कहना है कि जब यहाँ कब्रिस्तान होना चाहिए था तो असली कब्रें क्यों नहीं हैं, दिखाने के लिए नकली क्यों बनाई गईं? कुछ हिन्दुओं ने कहा कि रास्ता बंद हो जाएगा तो उन्हें भागने को मजबूर होना पड़ेगा, पलायन करना पड़ेगा। एक महिला कनकलता घोष का कहना है कि ये जमीन उनके पति की हुआ करती थीं, जिनकी मौत के बाद इस पर कब्ज़ा कर लिया गया।

महिला ने बताया कि हमारे घर के लोग पहले वहाँ जाते थे और पूजा-पाठ करते थे, लेकिन अब उन लोगों ने सब रोक दिया है। महिला ने बताया, “वो लोग कहते हैं कि यहाँ हिन्दुओं का आना मना है।” जबकि एक मुस्लिम बुजुर्ग ने बताया कि वो बचपन से देख रहा है कि यहाँ मिट्टी का घर था और कब्रिस्तान नहीं था। हिन्दुओं ने इसके लिए प्रशासन पर भी मिलीभगत का आरोप लगाया गया है। हालाँकि, किसी भी समुदाय ने जमीन के कागजात नहीं दिखाए।

रामपुर: निकाह की दावत के लिए घर में हो रही थी गोकशी, दूल्हा यासीन समेत 6 गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के रामपुर के टांडा में गोकशी के आरोप में एक दूल्हा अपने परिजनों समेत निकाह वाले दिन गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने शादी के घर से करीब एक क्विंटल गोमाँस पकड़ा और ऐसे उपकरण भी बरामद किए जिनसे जानवर काटे जाते हैं। सभी आरोपित जेल भेज दिए गए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला टांडा के लालपुर कला गाँव का है। देर रात पुलिस को मुखबिर ने जानकारी दी कि एक शादी वाले घर में गोकशी चल रही है। सूचना पाते ही पुलिस मौके पर पहुँची और घर में गायों को कटते देख हैरान रह गई। पुलिस ने फौरन घर की घेराबंदी कर परिवार के 6 लोगों को पकड़ा।

गिरफ्तार किए गए लोगों में अब्दुल सलाम, बाबू हाजी, मोहम्मद रफी, भूरा, मोहम्मद इस्लाम और मोहम्मद यासीन शामिल है। यासीन के ही निकाह की दावत के लिए गोकशी हो रही थी। पुलिस ने बताया कि बुधवार (17 मार्च 2021) को होने वाले दावत-ए-वलीमा के लिए गोकशी हो रही थी। पुलिस ने सभी के खिलाफ गोकशी की संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया है।

पुलिस अधिकारी माघो सिंह बिष्ट ने बताया, सभी के खिलाफ गोवध निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोपितों को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया। दूल्हे की गिरफ्तारी के बाद निकाह कैंसिल हो गया। पुलिस के अनुसार इस संबंध में थाना टांडा पर आईपीसी की धारा 3/5/8 गौवध निवारण अधिनियम पंजीकृत किया गया है। 

गौरतलब है कि कुछ समय पहले घर में गोकशी का ही एक मामला यूपी के फतेहपुर जिले से आया था। वहाँ खागा के मजरे खैरई में एक घर में गोकशी करने पर 10 आरोपित पकड़े गए थे। पुलिस को उनके पास से पूरा ढाई क्विंंटल गोमाँस बरामद हुआ था।

प्रभारी निरीक्षक ने इस मामले में बताया था कि जब वह जबरील नाम के युवक के घर की घेराबंदी करने लगे तो आरोपित भागने लगे। पुलिस ने तभी घर से 10 लोगों को गिरफ्तार किया और करीब 250 किलोग्राम माँस, चार चाकू, दो कुल्हाड़ी, एक तराजू-बांट, मवेशी के अंगों के अवशेष बरामद किए थे।

‘वो चाहते हैं कि एक-एक हिन्दू महिला उनकी रखैल बने’: YouTube ने हटाया यति नरसिंहानंद सरस्वती का वीडियो

वीडियो प्लेटफॉर्म यूट्यूब (YouTube) का एक बार फिर से हिन्दू विरोधी रवैया सामने आया है। डासना शिव-शक्ति पीठ के महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती के इंटरव्यू के एक वीडियो को YouTube ने हटा दिया। ये सब इसके बावजूद किया गया, जब कई जगह उनके शब्दों को सावधानी के लिए बीप कर दिया गया था। डासना मंदिर में आसिफ नाम के एक 15 साल के लड़के की पिटाई के बाद वामपंथी मीडिया ने दावा किया था कि वो मंदिर के भीतर पानी पीने गया था।

उक्त वीडियो ‘Dopolitics’ नामक यूट्यूब चैनल पर अपलोड हुआ था, जिसे हजारों लोगों ने देखा था। हालाँकि, फेसबुक पर उनके इंटरव्यू का ये वीडियो अभी भी मौजूद है, जिसे साढ़े 9 लाख लोग देख चुके हैं। इस वीडियो में यति नरसिंहानंद सरस्वती ने मुस्लिमों के प्रभाव वाले इलाके में एक मंदिर के होने का दर्द बयाँ किया है और साथ ही ‘पानी पीने के कारण पिटाई होने’ वाले नैरेटिव को ध्वस्त किया है।

महंत ने इस वीडियो में बताया था कि वो उस मीडिया से दूर रहना चाहते हैं, जो उनकी बातें सुन कर उसका उलटा मतलब निकाल कर दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि आज एक 14 साल का मुस्लिम लड़का पिट गया तो दुनिया भर की मीडिया यहाँ आ रही है लेकिन इससे पहले महंतों की हत्याएँ हुईं, उन्हें भगाया गया, 4 बार मंदिर में डकैती हुई और छेड़खानी की कई शिकायतें आईं, तब मीडिया यहाँ सुध लेने नहीं आया।

उन्होंने कहा कि इस मंदिर में महंतों की ऐसी हत्याएँ हुई हैं कि उनकी लाशें तक नहीं मिली। उन्होंने मुस्लिमों पर 16 बीघे का श्मसान कब्जाने का भी आरोप लगाया। महंत सरस्वती ने बताया कि आज़ादी से पहले मंदिर की 250 बीघा जमीन थी, जिसमें से अधिकतर पर कब्जा होने के बावजूद मीडिया नहीं आया। उन्होंने पूछा कि क्या हिन्दुओं के जीवन की कीमत नहीं? उन्होंने कहा कि मीडिया को ‘लव जिहाद’ नहीं दिखाई देती।

इस दौरान उन्होंने श्रीराम कॉलोनी के एक तिवारी जी की कहानी सुनाई, जो उनके मुताबिक पुलिस में थे। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी को एक मुस्लिम भगा कर ले गया और वो व्यक्ति आज मसूरी में रह रहा है, लेकिन लड़की का कोई अता-पता नहीं है। उन्होंने कहा कि पुलिस के साथ ऐसा हो सकता है तो आम आदमी के साथ सोच लीजिए। उन्होंने बसपा विधायक असलम चौधरी के बेटे पर मंदिर में हिन्दू लड़की से बदतमीजी करने व धमकी देने का आरोप लगाया।

उन्होंने क़स्बे में 95% मुस्लिमों के होने के आरोप को दोहराते हुए कहा कि उनकी हत्या के लिए 5000 मुस्लिमों ने पंचायत की थी, जिसमें AIMIM नेता और विधायक तक शामिल थे। उन्होंने अफगानिस्तान और कश्मीर का उदाहरण देते हुए कहा कि मुस्लिम आबादी लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि एक परिवार में 20-20 बच्चे हैं, जिन्हें पढ़ाया भी नहीं जाता। उन्होंने आशंका जताई कि कहीं हिन्दुओं की अंतिम शरण स्थली उनसे छिन न जाए।

उन्होंने डासना मंदिर का इतिहास बताते हुए कहा कि यहाँ महाकाली की प्राचीनतम प्रतिमाओं में से एक है और महाभारतकाल में यहाँ पांडव भी आए थे। साथ ही जानकारी दी कि इस्लामी आक्रांताओं के कारण माँ की प्रतिमा को तालाब में छिपा दिया गया था। उन्होंने बताया कि एक ऐसा समय था, जब रात को मेले में यहाँ हिन्दू श्रद्धालु नहीं आते थे। परिवार के बारे में बात करते हुए महंत ने बताया कि उनके दादाजी एक स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्होंने कहा,

“मैं कम्युनिस्ट रूस में पढ़ा हूँ। मस्जिदों/मदरसों से मुझे इस्लाम की जानकारी मिली। कई मुस्लिम दोस्त थे मेरे। इस इलाके में हिन्दू बहू-बेटियों का घर में घुस कर रेप की कोशिश की जाती थी। यहाँ मुस्लिम लड़कों की करतूतों की शिकायत करने पर बड़ी-बड़ी दाढ़ी वाले मौलाना लड़ने आते थे। मैं गणितज्ञ हूँ। 1994 में मैंने एम. टेक कर लिया था। मस्जिदों और मदरसों में मैंने देखा कि मुस्लिम हिन्दुओं की एक-एक बेटी को रखैल बनाना चाहते हैं। वो हिन्दुओं की एक-एक संपत्ति को हथियाना चाहते हैं।”

महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती ने आगे कहा कि ‘बीप’ के बारे में बोलते हुए पूछा कि जो लोग एक चोर, एक डकैत का अनुसरण करते हैं वो लोग कैसे होंगे? उन्होंने कहा कि उनकी हत्या भी हो जाए तो लोगों को पता चलेगा कि मैं सत्य पर था। उन्होंने ‘जिहादियों के पेरोल’ पर जी रही मीडिया को भी लताड़ा। उन्होंने विश्व धर्म संसद बुला कर इस्लाम के जिहाद पर बात करने की बात कही, जिसमें देश-विदेश के धर्मगुरुओं को बुलाया जाए।

उन्होंने कहा कि अगर 2029 में भारत का प्रधानमंत्री कोई मुस्लिम हुआ तो ये दुनिया भर की एक ऐसी दुर्दांत घटना होगी, जिसके बाद भारत में कोई नॉन-मुस्लिम नहीं बचेगा और ‘इस्लामी भारत’ दुनिया का सबसे बड़ा खतरा होगा। उन्होंने कहा कि देवबंद के दारुल उलूम और तबलीगी जमात के खिलाफ वो लोगों को जागरूक करते रहते हैं। साथ ही दावा किया कि तबलीगी जमात ने 40 देशों को इस्लामी बना दिया।

महंत यति ने कहा कि एक भी मुस्लिम देश किसी एक भी शरणार्थी को बसने नहीं देते हैं, जिसके बाद वो वहाँ बस जाते हैं जहाँ मुस्लिम नहीं हो। उन्होंने कहा कि हिन्दुओं भाईचारे के कॉन्सेप्ट में भाई वो रहे और चारा हम हो गए। उन्होंने कहा कि संविधान भी उनकी हरकतों पर लगाम नहीं लगा सकता। बकौल यति नरसिंहानंद सरस्वती, देश में मुस्लिमों की जनसंख्या 40 करोड़ हो गई है क्योंकि उन्होंने आँकड़े छिपाए हैं।

उन्होंने कहा, “हिन्दुओं के बड़े-बड़े घरों में बुजुर्ग रह रहे हैं क्योंकि बच्चे विदेश चले गए, जबकि मुस्लिमों के घर में सोने के लिए भी जगह नहीं है। उनका लक्ष्य है कि वो दुनिया भर के 500 करोड़ काफिरों का क़त्ल करेंगे। मैं माँ और महादेव का भक्त हूँ, लेकिन मैं गीता को मानता हूँ। भगवद्गीता में कहा गया है कि जिसके मन में संशय है, उसका विनाश निश्चित है। गुरु तेगबहादुर मेरे आदर्श हैं, जिन्होंने धर्म के लिए शीश कटा दिया।”

उधर आसिफ को पीटने के मामले में गिरफ़्तारी के बाद जमानत पर बाहर आए श्रृंगी यादव ने बताया कि उन्होंने उस लड़के को शिवलिंग पर चढ़ाए गए जल में पेशाब करते हुए देखा था। साथ ही इस तथ्य को दोहराया कि अगर उसे पानी पीना होता तो वो मंदिर के बाहर कई चापाकल और नल हैं, उनमें से पी लेता। उन्होंने कहा कि आसिफ के साथ एक और लड़का था, जो अपनी पैंट की चेन खोल कर गलत हरकतें कर रहा था।

‘मैं गौरी, गणपति और हिंदू भगवानों में विश्वास नहीं करता’: तेलंगाना में IPS अधिकारी का हिंदू विरोधी प्रोपेगेंडा

तेलंगाना के वरिष्ठ IPS अधिकारी आरएस प्रवीण कुमार की एक विवादित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। इस वीडियो में वह छात्र-छात्राओं को हिंदू विरोधी शपथ दिलवाते दिख रहे हैं कि वे भविष्य में कोई हिंदू धर्म व परंपरा का पालन नहीं करेंगे।

वीडियो में नजर आने वाले अधिकारी फिलहाल तेलंगाना सोशल वेल्फेयर रेसीडेंशियल एड्यूकेशनल इंस्टिट्यूशन सोसायटी (TSWREIS) के सचिव भी हैं। उनकी विवादित वीडियो हर जगह वायरल है। इसमें कई लोग हिंदू विरोधी प्रोपगेंडा का भाग बनते दिखाई दे रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, आईपीएस अधिकारी ने हिंदुओं के विरुद्ध छात्रों को शपथ दिलाने का काम ‘Swaero Holy Month’ सेरेमनी के दौरान किया, जिसे उन्होंने तेलंगाना के पेद्दापल्ली जिले के धुलीकत्ता इलाके में बने बौद्ध मंदिर में लॉन्च किया।  

इसी आयोजन की एक छोटी सी क्लिप में देख सकते हैं कि प्रवीण कुमार मासूमों को शपथ दिलवाते हुए कहते हैं, “मैं गौरी, गणपति और अन्य हिंदू भगवानों में विश्वास नहीं करता। मैं कभी उनकी पूजा नहीं करूँगा। मैं उन्हें भगवान का अवतार नहीं मानता। मैं श्राद्ध कर्म नहीं करूँगा और न ही पिंड दान करूँगा। मैं कोई भी ऐसी चीज नहीं करूँगा जो बुद्ध के दिखाए रास्ते व सिद्धांतों से अलग होगी। मैं कभी शराब नहीं पिऊँगा। मैं राम-कृष्ण में भी विश्वास नहीं करूँगा।”

कथित तौर पर, तेलंगाना सरकार ने 2014 में जरूरतमंद और वंचित बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने और तेलंगाना राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न स्कूलों, कॉलेजों और छात्रावासों को संचालित करने के लिए TSWREIS स्थापित किया था, जिसके सचिव पद पर आज प्रवीण कुमार बैठे हुए हैं।

हिंदू विरोधी प्रोपगेंडा चलाने वाले प्रवीण कुमार कर रहे बच्चों का दिमाग भ्रष्ट

लीगल राइट्स प्रोटेक्शन फोरन नाम के एक्टिविस्ट ग्रुप के अनुसार, आरएस प्रवीण कुमार हिंदू विरोधी विचारधारा को बढ़ावा देकर स्कूल व हॉस्टल में पढ़ने वाले बच्चों के दिमाग को भ्रष्ट कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री जीतेंद्र सिंह को भेजी गई अपनी शिकायत में LRPF ने आरोप लगाया है कि प्रवीण कुमार ने SWAROES नाम का मूवमेंट शुरू किया है,  जो गैर सामाजिक गतिविधियों में लिप्त है और गरीब अनुसूचित जाति के लोगों के भले के नाम पर उनके दिमाग में जहर भर रहा है।

शिकायत में लिखा है कि कल्याण के नाम पर चल रही ऐसी घटिया हरकतों पर लगाम लगना जरूरी हैं। साथ ही ऐसे लोगों को दंड देने के लिए कदम उठाने भी आवश्यक हैं, जो सार्वजनिक शांति और कानून व्यवस्था के हित में काम नहीं कर रहे हैं।

LRPF की शिकायत के अनुसार, एक तय धर्म के देवी देवताओं का नाम लेने वाले प्रवीण कुमार वो आईपीएस अधिकारी हैं, जो तेलंगाना सोशल वेल्फेयर रेसीडेंशियल एड्यूकेशनल इंस्टिट्यूशन सोसायटी के एक जिम्मेदार पद पर हैं। वह अत्यधिक निर्णायक व पब्लिक ब्यूरोक्रेट होने के बावजूद, खुलेआम दूसरे धर्मों के ख़िलाफ़ नफरत फैला रहे हैं।

पत्र में इस बात का भी उल्लेख है कि प्रवीण कुमार एक ही पद पर पिछले सात साल से बने हुए हैं और उनका हाल में एंडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस के तौर पर प्रमोशन भी हुआ है जबकि उन्हें फुल टाइम पुलिस अधिकारी के तौर पर काम करने का अनुभव ही नहीं है।

शिकायत में बताया गया है कि SWAEROS को प्रवीण कुमार ने लॉन्च किया है। ‘Swaero Holy Month’ को भीम दीक्षा भी कहा जाता है। इसमें डॉ बीआर अंबेडकर से जुड़े काम और अन्य गतिविधियों के बारे में बताया जाता है।

इसमें लिखा गया है कि SWAEROS ने कथिततौर पर सैकड़ों टैक्सपेयर फंडेड सरकार द्वारा संचालित एड्यूकेशनल इंस्टिट्यूशन पर कब्जा कर लिया है। शिकायत में बताया गया है कि बौद्ध शिक्षा के हिस्से को थोप कर, बच्चों के सिर को नियमित रूप से मुंडवाकर उन्हें घर भेजा जाता है।

SWAEROS का विरोध करने पर हुआ भाजपा नेता पर हमला

गौरतलब है कि SWAEROS और आईपीएस प्रवीण के विरोध में कई हिंदू संगठन व भाजपा नेता प्रदर्शन कर रहे हैं। तेलंगाना के भाजपा नेता व वीएचपी सदस्यों ने प्रवीण कुमार को हिंदुओं की भावना भड़काने का जिम्मेदारा बताया है। इन्हीं आरोपों के बीच भाजपा अध्यक्ष बांदी संजय कुमार पर तेलंगाना के कोआड़ा के नजदीक रॉड और पत्थरों से हमला हुआ। साथ ही उनके वाहन को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया।

भाजपा नेताओं ने इस हमले के लिए पूरी तरह SWAEROS और आईपीएस प्रवीण कुमार को जिम्मेदार बताया। साथ ही प्रवीण कुमार के ट्रांस्फर की भी माँग उठाई। बीजेपी नेताओं ने कहा कि सुनियोजित ढंग से संजय कुमार पर हमला हुआ, वो भी तब जब वह हुजूरनगर से हैदरबाद के लिए जा रहे थे।

वहीं विवादित पुलिस अधिकारी प्रवीण कुमार ने पूरे मामले पर कहा कि SWAEROS एक समावेशी विचारधारा है, जहाँ सभी धार्मिक धर्मों के लोग गरीबी से मुक्ति के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने अपने बयान में भाजपा नेताओं के खिलाफ किसी भी हिंसा की निंदा नहीं की।

बयान में लिखा गया, “Swaero Network में सभी धार्मिक मान्यताओं वाले लोग हैं, और हम सभी धर्मों से सर्वश्रेष्ठ चीजें लेते हैं। हम अपने घरों और कार्यस्थलों दोनों में किसी भी धर्म के खिलाफ कोई पूर्वाग्रह नहीं सिखाते हैं और सभी त्योहार मनाते हैं। हम देश में न्यायपूर्ण और समान समाज के लिए केवल शिक्षा, स्वास्थ्य जागरूकता, वैज्ञानिक सोच और आर्थिक सशक्तिकरण के माध्यम से काम करते हैं, न कि घृणा के माध्यम से।”

नंदीग्राम में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के सामने BJP नेता का सिर फोड़ा, MP अर्जुन सिंह के घर पर बमबाजी: TMC पर आरोप

पश्चिम बंगाल में 27 मार्च को होने वाले पहले चरण के मतदान से पहले हिंसा तेज हो गई है। नंदीग्राम में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की पदयात्रा पर हमला किया गया। वहीं नॉर्थ 24 परगना के भाटपाड़ा में बीजेपी सांसद अर्जुन सिंह के आवास सह कार्यालय पर बमबारी की गई। बीजेपी (BJP) ने दोनों घटनाओं के लिए तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) को जिम्मेदार ठह​राया है। हालाँकि टीएमसी ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार नंदीग्राम के सोनचुरा में गुरुवार (18 मार्च 2021) को केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की रैली थी। इस दौरान अचानक से हिंसा होने लगी। कुछ लोगों ने बीजेपी कार्यकर्ताओं को पीट दिया। आरोप है कि हमला करने वाले टीएमसी से जुड़े थे।

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि ममता बनर्जी को लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव लड़ना चाहिए। शुभेंदु अधिकारी की पदयात्रा शुरू होने के बाद बीजेपी युवा मोर्चा के नेता पर उनके सामने हमला किया गया। उन्होंने कहा कि मैं चुनाव आयोग से अर्धसैनिक बलों की तैनाती की अपील करता हूँ। रिपोर्ट में बताया गया है कि बीजेपी कार्यकर्ता का हमले में सिर फट गया।

नंदीग्राम वही सीट है जहाँ से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद मैदान में हैं। यहीं नामांकन के बाद उनके पैर में चोट लगी थी, जिसे टीएमसी ने ‘हमले’ के तौर पर प्रचारित करने की कोशिश की थी। ममता का मुकाबला बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी से है, जिन्होंने कुछ महीने पहले ही ममता कैबिनेट और टीएमसी से इस्तीफा दिया था।

बंगाल के मंत्री और टीएमसी नेता फिरहाद हाकिम ने बीजेपी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि वह अपने कार्यकर्ताओं को काबू में नहीं रख पा रही है। इसकी वजह से बीजेपी के पुराने और नए कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई। उन्होंने इसे शुभेंदु बीजेपी बनाम पुरानी बीजेपी का झगड़ा बताया। हाकिम ने कहा कि बीजेपी राजनीति को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रही है। अपनी अंदरुनी लड़ाई छिपाने के लिए टीएमसी पर आरोप लगा रही है।

इधर भाटपाड़ा के जगदाल इलाके में बुधवार को अर्जुन सिंह के आवास सह कार्यालय ‘मजदूर भवन’ को निशाना बनाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इलाके में करीब 15 जगहों पर टीएमसी कैडरों ने बम फेंके। सीसीटीवी कैमरों को भी तोड़ दिया गया।

बीजेपी सांसद ने ट्विटर पर एक वीडियो साझा करते हुए कहा है कि बम हमलों के बाद से स्थानीय लोग दहशत में है। उन्हें स्थानीय पुलिस से कोई मदद नहीं मिल रही।

एक अन्य ट्वीट में तस्वीर साझा करते हुए उन्होंने आरोप लगाया है कि बंगाल पुलिस की मौजूदगी में हमलावरों ने उनकी गाड़ी पर बम फेंके। पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुकुल रॉय ने कहा है कि इस घटना से चुनाव आयोग को अवगत कराया जाएगा।

गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब बंगाल में बीजेपी कार्यकर्ताओं और नेताओं को निशाना बनाने के आरोप टीएमसी पर लगा है। बीते दिसंबर में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के काफिले तक को निशाना बनाया गया था। वहीं गुरुवार को बंगाल के पुरुलिया में एक रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इन चुनावों में टीएमसी साफ हो जाएगी।

इस्लामी आतंकवाद पर प्रश्नोत्तर को लेकर भड़की इस्लामी भीड़, प्रकाशन संस्थान के दफ्तर पर हमला: तोड़े फर्नीचर, जलाई किताबें

राजस्थान में मजहब के नाम पर इस्लामी भीड़ द्वारा कानून अपने हाथ में लेने का मामला सामने आया है। राजधानी जयपुर में एक मुस्लिम भीड़ एक किताब में प्रकाशित कंटेंट को लेकर इस कदर नाराज़ और आक्रोशित हो गई कि प्रकाशन संस्थान के दफ्तर पर ही हमला बोल दिया। ये घटना बुधवार (मार्च 16, 2021) को चारदीवारी क्षेत्र में स्थित संजीव प्रकाशन में शाम के समय हुई। वहाँ जम कर तोड़फोड़ मचाई गई।

उक्त प्रकाशन संस्थान द्वारा छापी गई 12वीं की एक पुस्तक में इस्लामी आतंकवाद को लेकर एक चैप्टर था, जिसके कारण सारा विवाद हुआ। हमलावरों के ऑफिस में रखे फर्नीचरों को तोड़ डाला और वहाँ रखी दूसरी किताबों को भी फाड़ दिया। सूचना मिलने पर पुलिस वहाँ पर ज़रूर पहुँची, लेकिन उससे पहले हमलावर अपना काम करके फरार हो चुके थे। वो अपने साथ कई किताबें लूट कर भी ले गए।

इसके बाद इस्लामी समूह ऑफिस के बाहर आ गया और फिर वहाँ सारी किताबों को फाड़ कर रखा गया। फिर उसमें आग लगा दी गई। बेख़ौफ़ बदमाशों ने इस पूरी घटना का वीडियो भी बनाया। पब्लिशिंग मैनेजर विजय शंकर शुक्ला ने बताया कि राजनीतिक विज्ञान की पुस्तक को लेकर बवाल किया जा रहा है, जिसमें इस्लामी आतंकवाद के सवाल पर एक जवाब छपा था और माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में भी वो प्रश्न आया था। उसका कंटेंट इस प्रकार है:

सवाल:इस्लामी आतंकवाद से आप क्या समझते है?
जवाब:इस्लामी आतंकवाद इस्लाम का ही एक रूप है, जो पिछले 20-30 सालों में अत्यधिक शक्तिशाली बन गया है। आतंकवादियों में किसी एक गुट विशेष के प्रति समर्पण का भाव नहीं होकर एक समुदाय विशेष के प्रति समर्पण भाव होता है। समुदाय के प्रति प्रतिबद्धता इस्लामी आतंकवाद का मुख्य लक्षण है। मजहब या अल्लाह के नाम पर आत्मघाती हमला और अत्यधिक बर्बरता, ब्लैकमेल, जबरन धन वसूली, और निर्मम नृशंस हत्याएँ करना ऐसे आतंकवाद की विशेषता बन गई है। जम्मू कश्मीर में आतंकवाद पूर्णतया मजहबी व अलगाववादी श्रेणी में आता है।

हालाँकि, ये हमला कंटेंट को हटाए जाने और किताबें बाजार से वापस लेने के बावजूद हुई है। पब्लिशिंग मैनेजर का कहना है कि कुछ दिनों पहले जब इस पर आपत्ति आई थी, तभी तमाम पुस्तकों को बाजारों से वापस उठवा लिया गया था और उक्त कंटेंट को हटा दिया गया था। शुक्ला ने कहा कि किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुँचे, इसीलिए ऐसा किया गया। जबकि बाकी प्रकाशन संस्थानों की पुस्तकों में भी इस सवाल का जवाब यही है।

इतना ही नहीं, संजीव प्रकाशन संस्थान ने इसे लेकर लिखित में माफ़ी भी माँग ली थी। इसके बावजूद उन्हें कुछ दिनों पहले धमकी भरे फोन कॉल्स आए थे। पुलिस कोतवाली में शिकायत करने पर 2-4 जवान भी सुरक्षा के लिए उपलब्ध कराए गए थे। दोपहर 3 बजे 4-4 लोग ऑफिस में आ धमके, जिनके साथ 30-40 और लोग थे जो बार खड़े थे। पुलिस ने इस मामले में 3 आरोपितों को गिरफ्तार किया है।

ये पूरा मामला 2017 का है। ये जवाब उसी साल छपा था। 4 साल बाद उस कंटेंट को लेकर प्रकाशन संस्थान के दफ्तर पर हमला हुआ। राजस्थान पुलिस द्वारा मुहैया कराए गए 3 सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी में ‘संजीव प्रकाशन’ के दफ्तर पर इस्लामी आतंकवाद के उसी कंटेंट को लेकर हमला हुआ। कॉन्ग्रेस विधायक रफीक खान ने इस कंटेंट का मामला राजस्थान की विधानसभा में भी उठाया था और जवाबदेह लोगों पर कार्रवाई की माँग की थी। पुलिस जाँच की बात कह रही है।

जहाँ आसमान से गिराए गए थे हथियार, वहाँ ममता पर बरसे PM मोदी: मारे गए BJP कार्यकर्ताओं के परिजनों से भी मिले

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार (18 मार्च 2021) को पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में रैली की। ममता बनर्जी सरकार की नाकामी गिनाते हुए उन्होंने कहा कि इस सरकार के अब गिनती के दिन बचे हैं। पुरुलिया वही जगह है, जहाँ 1995 में रूस के एक कार्गो प्लेन से हथियार गिराए गए थे।

रैली के दौरान प्रधानमंत्री ने मारे गए बीजेपी कार्यकर्ताओं के परिजनों से भी मुलाकात की। उन्होंने तृणमूल कॉन्ग्रेस को भ्रष्टाचार का पर्याय बताते हुए कहा कि TMC का अर्थ ट्रांसफर माय कमीशन होता है, जबकि हम डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर की बात करते हैं। यही हमारी और उनकी सोच का अंतर है।

ममता बनर्जी के ‘खेला होबे’ नारे पर हमला करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारा नारा है- विकास होबे। बाटला हाउस एनकाउंटर से जुड़े एक मामले में आए फैसले का जिक्र करते हुए ममता को उनके बयान भी याद दिलाए। बंगाल के पुरुलिया में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि लोकसभा चुनाव में टीएमसी हाफ हो गई थी। इस बार वह पूरी तरह साफ हो जाएगी। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी अपनी झल्लाहट उन पर निकाल रही हैं। लेकिन, हमारे लिए वह भारत की करोड़ों बेटियों में से एक हैं। उनका सम्मान हमारी संस्कृति का हिस्सा है।

पुरुलिया की सांस्कृतिक विरासत को याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि यह पवित्र भूमि है। लेकिन आज यहाँ पानी तक की किल्लत हो गई है। पहले वामपंथियों ने यहाँ उद्योग-धंधे पनपने नहीं दिए। इसके बाद टीएमसी की उपेक्षा ने पुरुलिया की पहचान देश के सबसे पिछड़े इलाके के तौर पर बना दी है। उन्होंने कहा कि इन लोगों ने पुरुलिया को दिया- जल संकट। पुरुलिया को दिया- पलायन। इन लोगों ने पुरुलिया के गरीबों को दिया- भेदभाव भरा शासन।

PM मोदी ने कहा कि इस क्षेत्र में टूरिज्म की भरपूर सम्भावनाएँ हैं। बीजेपी की सरकार आने पर यहाँ के हैंडिक्राफ्ट को बढ़ावा दिया जाएगा। जल संकट का समाधान होगा। बंगाल के हर हिस्से को रेलवे और रोड नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि 2 मई के बाद यहाँ बीजेपी सरकार बनेगी तो विकास में तेजी आएगी।

गौरतलब है कि बंगाल में आठ चरणों में विधानसभा चुनाव होने हैं। पहले चरण में 30 सीटों पर 27 मार्च को वोट डाले जाएँगे।

AAP की चाटुकारिता, मोदी-विरोध में रवीश की सस्ती कविता: दिल्ली-बिल्ली कर गिराई पत्रकारिता की गिल्ली

“दिल्ली के पीछे एक दिल्ली, दिल्ली के आगे एक दिल्ली। बोलो कितनी दिल्ली? आगे-आगे दिल्ली, पीछे-पीछे दिल्ली। पीछे-पीछे दिल्ली, आगे-आगे दिल्ली। भीगी दिल्ली, भीगी बिल्ली। भीगी बिल्ली, भीगी दिल्ली। दिल्ली के पीछे पड़ गई दिल्ली। इचक दिल्ली, बीचक दिल्ली, दिल्ली ऊपर दिल्ली, इचक दिल्ली। दिल्ली बन गई बिल्ली। बिल्ली बिचक गई दिल्ली। एक बिल्ली के पीछे दिल्ली, एक दिल्ली के आगे बिल्ली। बोलो कितनी दिल्ली? हम बड़की दिल्ली, तुम छोटकी दिल्ली। हम छोटकी दिल्ली, तुम बड़की दिल्ली। खूब घूमाओ जनता को, जनता बन जाए भीगी बिल्ली।”

ये कोई सस्ता कवि-सम्मलेन के मंच पर कविता पढ़ रहा कोई सस्ता कवि नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय चैनल पर प्राइम टाइम में खबर पढ़ रहा एक बहुत बड़ा पत्रकार है। NDTV पर रवीश कुमार ने कुछ इसी अंदाज़ में संसद में लाए गए उस विधेयक पर टिप्पणी की, जिसमें कहा गया है कि दिल्ली में सरकार से तात्पर्य होगा दिल्ली के उप-राज्यपाल से। वहीं सत्ताधारी आम आदमी पार्टी कह रही है कि ये चुनी हुई सरकार का अपमान है।

रवीश कुमार भला मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की तरफ से न बोलें, ऐसा कैसे हो सकता है। उन्होंने दिल्ली सीएम का महिमामंडन करते हुए सर्टिफिकेट दे डाला कि उन्होंने पिछले कुछ महीनों में केंद्र सरकार से टकराव वाली राजनीति छोड़ दी थी और साथ ही कहा कि वो वर्षों बाद जंतर-मंतर लौटे हैं।

इस दौरान वो राज्यसभा में अक्सर हंगामा के कारण विवादों में रहने वाले सांसद संजय सिंह का भी गुणगान करना नहीं भूले। रवीश कुमार ने दावा कर डाला कि AAP सरकार के काम को पहचान मिली और सराहना भी हुई।

देशभक्ति और राम मंदिर पर दिल्ली सरकार के ऐलानों के लिए उसकी पीठ थपथपाते हुए संभावना जताई कि केंद्र के साथ सामंजस्य के लिए ऐसा किया जा रहा है। उन्होंने दावा कर डाला कि केंद्र सरकार चुनी हुई दिल्ली सरकार के अधिकारों पर अंकुश लगा रही है। अपनी बातों को सही साबित करने के लिए उन्होंने उमर अब्दुल्लाह जैसों के बयान का समर्थन किया।

सबसे बड़ी बात तो ये कि रवीश कुमार ने तृणमूल कॉन्ग्रेस के इस बार के चुनावी स्लोगन ‘खेला होबे’ का इस्तेमाल किया। आखिर वो एक ‘न्यूट्रल’ पत्रकार जो हैं।

अरविंद केजरीवाल के लंबे-चौड़े भाषण भी इस प्राइम टाइम खबर में दिखाए गए, जिसमें वो कहते दिख रहे हैं कि फिर चुनावों का क्या मतलब रह गया? तो क्या अब AAP ये मान कर अगला चुनाव नहीं लड़ेगी? क्योंकि उसका ही कहना है कि अब दिल्ली सरकार के पास कोई अधिकार ही नहीं है।

असली बात तो ये है कि ‘नेशनल कैपिटल टेरिटरी एक्ट’ में संशोधन कर के उसमें सिर्फ एक चीज जोड़ी गई है, कुछ भी हटाया नहीं गया है। बस 1991 एक्ट में इतना जोड़ा गया है कि दिल्ली में सरकार का तात्पर्य उप-राज्यपाल से होगा।

सेक्शन 24 में लिखा है कि विधानसभा द्वारा पास किए गए कानून उप-राज्यपाल के पास हस्ताक्षर के लिए जाएँगे। साथ ही प्रशासनिक जाँच बिठाने जैसे अधिकारों में कटौती की गई है। बता दें कि दिल्ली पुलिस पहले से ही वहाँ की सरकार के अधीन न होकर केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत काम करती है, ऐसे में चीजों को लिखित में और स्पष्ट किया गया है।

सरकार के फैसलों के लिए उप-राज्यपाल का मत लिए जाने की बात भी कही गई है। बता दें कि नई दिल्ली देश की राजधानी है, ऐसे में वहाँ हर घटना का सम्बन्ध देश की सुरक्षा से जुड़ता है। इसीलिए, राजनीति होने से बचने के लिए दोनों सरकारों के अधिकारों की स्पष्ट व्याख्या ज़रूरी है।

पूरे प्राइम टाइम में अरविंद केजरीवाल पर रवीश कुमार ने यही दोष लगाया कि उन्होंने जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद-370 को निरस्त किए जाने का विरोध नहीं किया। एक ‘संविधान विशेषज्ञ’ को बुला कर भी यही कहलवाया गया।

रवीश कुमार ने इस दौरान अपनी पुरानी भविष्यवाणी भी दिखाई, जो उन्होंने तब किया था, जब सुप्रीम कोर्ट ने एक जजमेंट में उप-राज्यपाल के अधिकारों को लेकर फैसला दिया था। रवीश ने तब कहा था कि खिलाड़ी अब नया खेल लेकर आएँगे। उन्होंने पूछ डाला कि केंद्र सरकार यही सारे अधिकार राष्ट्रपति को क्यों नहीं दे देती है?

  • रवीश कुमार को पता होना चाहिए कि राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बिना पूर्ण बहुमत से संसद के दोनों सदनों में पारित बिल भी कानून का रूप नहीं ले पाता।
  • रवीश कुमार को पता होना चाहिए कि राष्ट्रपति ही देश की तीनों सेनाओं का सर्वोच्च कमांडर है।
  • रवीश कुमार को पता होना चाहिए कि संसद में अभिभाषण के समय राष्ट्रपति द्वारा ‘मेरी सरकार’ शब्द का प्रयोग किया जाता है।
  • रवीश कुमार को पता तो होना चाहिए… लेकिन वो एक ‘न्यूट्रल’ पत्रकार हैं… इसलिए नहीं पता है!

रवीश कुमार ने अपने इस प्राइम टाइम में विपक्षी नेताओं के बयानों के हवाले से भाजपा पर निशाना साधा है। साथ ही सीएम केजरीवाल को अप्रत्यक्ष रूप से सलाह दी है कि वो जम्मू कश्मीर के मुद्दे पर भी इस्लामी कट्टरपंथी नेताओं का साथ दें, तो वो उनके और लाडले हो जाएँगे। रवीश कुमार ने दिल्ली-बिल्ली करते-करते प्रोपेगेंडा वाली गिल्ली को अपने कुतर्कों के डंडे से दूर मारना तो चाहा, लेकिन वो उनके कमरे में ही गिर गया।