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‘वे पेरिस वाले बँगले की चाभी खोज रहे थे, क्योंकि गर्मी की छुट्टियाँ आने वाली हैं’: IT रेड के बाद तापसी ने कहा- अब मैं सस्ती नहीं

हाल ही में आयकर (IT) विभाग ने अभिनेत्री तापसी पन्नू और फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप सहित कई के ठिकानों पर रेड की थी। बताया जाता है कि इस दौरान 650 करोड़ रुपए की गड़बड़ी का मामला सामने आया। अब तापसी पन्नू ने इस मामले में चुप्पी तोड़ी है। सबसे बड़ी बात ये है कि उन्होंने एक तरह से स्वीकार किया है कि IT विभाग ने उनके मामले में 5 करोड़ रुपए की गड़बड़ी पाई है। तापसी ने एक के बाद एक 3 ट्वीट्स किए।

उन्होंने लिखा कि 3 दिनों तक चले सघन तलाशी अभियान में मुख्य रूप से 3 चीजों ही खोज की गई। उन्होंने लिखा कि पेरिस के उस बँगले की चाभी खोजी गई, जो कथित रूप से उनकी है। साथ ही उन्होंने लिखा कि गर्मी की छुट्टियाँ लगभग आने ही वाली हैं, इसीलिए ऐसा किया गया। तापसी ने आगे लिखा कि कथित रूप से 5 करोड़ रुपए की रसीद की खोज की गई जो मैंने लेने से इनकार कर दिया था। उन्होंने लिखा कि भविष्य में उन्हें परेशान करने के लिए ऐसा किया गया।

तापसी ने आगे लिखा, “माननीय वित्त मंत्री ने याद दिलाया कि मेरे यहाँ 2013 में भी छापे पड़े थे। अब मैं उतनी सस्ती नहीं रही।” सच्चाई ये है कि फ़िल्मी हस्तियों पर पड़े छापे को लेकर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने किसी का नाम लिए बिना ही कहा था कि 2013 में भी इनमें से कुछ के यहाँ छापेमारी हुई थी। एक तरह से तापसी पन्नू ने इन ट्वीट्स के जरिए बयान देकर IT विभाग की कार्रवाई का मजाक भी बनाया और खुद को जनता के सामने निर्दोष साबित करने की कोशिश की।

तापसी पन्नू ने IT विभाग की छापेमारी पर दिया बयान

साथ ही तापसी पन्नू ने इसके साथ गुस्से वाली इमोजी भी ट्ववीट की। हाल ही में तापसी पन्नू के बॉयफ्रेंड भारतीय बैडमिंटन युगल टीम के कोच मैथियस बो (Mathias Boe) ने अनुराग कश्यप और तापसी मामले में हस्तक्षेप करते हुए ट्विटर पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू से इनकम टैक्स छापों के बारे में ‘कुछ’ करने का आग्रह किया। इस पर किरण रिजुजू ने उन्हें फटकार लगाई थी।

गौरतलब है कि चार मार्च को सीबीडीटी ने बताया था कि 4 शहरों- मुंबई, पुणे, दिल्ली और हैदराबाद के 28 ठिकानों पर आयकर विभाग ने कार्रवाई की। इसके मुताबिक आयकर विभाग के सर्च और सर्वे ऑपरेशंस की शुरुआत मुंबई में 2 फिल्म निर्माण कंपनियों, एक अभिनेत्री और दो टैलेंट मैनेजमेंट कंपनियों से 3 मार्च को हुई थी।

यह भी बताया गया था कि 5 करोड़ रुपए कैश पेमेंट लेने की रसीदें तापसी पन्नू के घर से बरामद हुई थी। कथित तौर पर टैक्स बचाने के लिए यह पेमेंट कैश के तौर पर ली गई थी। यही नहीं फिल्म प्रोडक्शन हाउस फैंटम फिल्म्स ने बॉक्स ऑफिस पर जितने कलेक्शन की बात कही थी, उससे ज्यादा रकम की जानकारी इस दौरान मिली। कंपनी के अधिकारी 300 करोड़ रुपए का हिसाब नहीं दे पाए। छापे के दौरान फर्जी खर्च के भी सबूत मिले।

‘₹5 लाख की डिमांड-₹1.5 लाख दिए, फटे पेट ही अस्पताल ने निकाला’: 3 साल की खुशी की मौत पर NCPCR सख्त

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में एक प्राइवेट अस्पताल का अमानवीय चेहरा सामने आया है। इसके कारण 3 वर्षीय खुशी की मौत हो गई। आरोप है कि अस्पताल ने पूरे रुपए न मिलने के कारण बच्ची के पेट की स्टिचिंग नहीं की और फटे पेट के साथ ही उसे बाहर निकाल दिया। निजी अस्पताल की इस हरकत के बाद आक्रोशित लोगों ने हंगामा किया, लेकिन अस्पताल वालों ने दरवाजा नहीं खोला। इस मामले में DM ने जाँच के आदेश दे दिए हैं।

परिजनों का आरोप है कि बच्ची की सर्जरी के बाद उसे पेट में टाँके नहीं लगाए गए और उसे अस्पताल ने निकाल बाहर किया। करेली के करेंहदा निवासी मुकेश मिश्र ने अपनी बेटी ख़ुशी को पेट दर्द की शिकायत के बाद 15 फरवरी को इस अस्पताल में दाखिल कराया था। डॉक्टरों ने बताया कि उसकी आंतें सिकुड़ रही हैं, जो ऑपरेशन बाद ठीक होगी। 2 दिनों बाद ऑपरेशन तो हुआ, लेकिन डॉक्टरों पर इसे ठीक तरीके से अंजाम नहीं देने का आरोप है।

इसके बाद ख़ुशी को कोई आराम न मिलने के कारण 5 दिन बाद फिर से सर्जरी की गई। आरोप है कि इसके बाद डॉक्टरों ने टाँके भी नहीं लगाए और उसे कहीं और लेकर जाने को कहा। बच्ची उस समय दर्द से कराह रही थी। ख़ुशी को इसके बाद चिल्ड्रन होम ले जाया गया, लेकिन वहाँ भी डॉक्टरों ने इलाज से इनकार कर दिया। हार कर परिजन शुक्रवार (मार्च 5, 2021) को बच्ची को लेकर पुनः उसी अस्पताल में पहुँचे।

वहाँ उन्हें दरवाजे पर ही रोक दिया गया। वे अपनी बच्ची को गोद में लेकर इधर-उधर भटकते रहे लेकिन अंदर नहीं जाने दिया गया। दर्द से तड़प रही बाकी ने अस्पताल गेट पर पिता की गोद में ही दम तोड़ दिया। परिजनों और रिश्तेदारों के आक्रोश के बाद कई थानों की पुलिस वहाँ पहुँची। मंझनपुर में शव का पोर्टमॉर्टम हुआ। प्रयागराज के जिलाधिकारी ने आश्वासन दिया है कि बच्ची की मौत के मामले में लापरवाही सामने आने पर अस्पताल प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई होगी।

उक्त अस्पताल रावतपुर में स्थित है। पिता ने आरोप लगाया है कि अस्पताल ने सर्जरी के नाम पर उनसे 1.5 लाख रुपए ऐंठ लिए थे और तब भी अस्पताल द्वारा 5 लाख की डिमांड की जा रही थी। आरोप है कि पेट में टाँके न लगे होने के कारण दूसरे अस्पतालों ने बच्ची की गंभीर स्थिति को देख कर उसे दाखिल करने से इनकार कर दिया। राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग (NCPCR) ने डीएम से इस बाबत रिपोर्ट माँगी है और अस्पताल कर्मचारियों व डॉक्टरों के खिलाफ FIR दर्ज करने को कहा है।

मुख्तार अंसारी के करीबी की ‘रानी सल्तनत’ पर योगी सरकार का बुलडोजर, ढाह दी 10 दुकानें

उत्तर प्रदेश के बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी यूँ तो पंजाब की जेल में है और वहाँ की कॉन्ग्रेस सरकार पर उसके यूपी प्रत्यर्पण में बाधा डाल कर उसे बचाने के आरोप लग रहे हैं, लेकिन राजधानी लखनऊ में उसकी अवैध सम्पत्तियों पर कार्रवाई जारी है। मुख़्तार अंसारी के करीबी शाहिद के हजरतगंज स्‍थ‍ित अवैध निर्माण को ध्वस्त कर दिया गया है। ये कार्रवाई लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने की है।

हजरतगंज स्‍थित साहू सिनेमा के बगल में रानी सल्तनत प्लाजा की चौथी मंजिल पर बुलडोजर चला। किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए वहाँ भारी पुलिस बल की तैनाती भी की गई थी। जिलाधिकारी (DM) और लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष अभिषेक प्रकाश के निर्देश के बाद उक्त मंजिल पर स्थित सभी 10 दुकानों को तोड़ दिया गया। चौथी मंजिल अवैध तरीके से बनाया गया था।

डीएम ने जानकारी दी कि इस मंजिल को पास कराए गए मानचित्र के विपरीत बनाया गया था और इस सम्बन्ध में कई बार नोटिस भेजी जा चुकी थी। कॉम्प्लेक्स के मालिक को इस अवैध निर्माण को तोड़ने को कहा गया था, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। इसलिए, शनिवार (मार्च 6, 2021) की सुबह LDA ने ये कार्रवाई की। पहले दुकानें तोड़ी गईं, फिर दीवारों को ध्वस्त किया गया। छत को सबसे अंत में जमींदोज किया गया।

कार्रवाई करने के लिए सुबह का वक़्त इसीलिए चुना गया क्योंकि तब हजरतगंज में भीड़भाड़ कम होती है और बाजार बंद रहता है। प्रशासन का कहना है कि राजधानी क्षेत्र में बनी ऐसी अवैध संपत्तियों को चरणबद्ध तरीके से तोड़ा जा रहा है। उक्त इमारत का नाम ‘रानी सल्तनत’ है, जो गाँधी आश्रम के बगल में स्थित है। यूपी सरकार मुख़्तार अंसारी और उसके पूरे गैंग के अवैध कामकाज को ख़त्म करने में लगी हुई है।

उधर माफिया नेता के दोनों बेटे गुरुवार को हजरतगंज कोतवाली दोबारा पहुँचे। लगभग 45 मिनट तक पूछताछ किए जाने के बाद उन्हें 2 सप्ताह बाद आने का निर्देश दिया गया। पुराने दरोगा के रिटायर होने के कारण नए विवेचक को पूरे मामले का नए सिरे से अध्ययन करना पड़ रहा है। मामला अगस्त 2020 में हुए धोखाधड़ी के मामले के FIR से जुड़ा है। आरोपितों को दस्तावेजों के साथ फिर बुलाया गया है।

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट से पंजाब सरकार ने कहा था कि यूपी की योगी आदित्यनाथ की सरकार को अंसारी को रूपनगर जेल से उत्तर प्रदेश के बाँदा जेल में ट्रांसफर करने की माँग करने का कोई मौलिक अधिकार नहीं है। वहीं यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से पंजाब की अमरिंदर सरकार और रूपनगर जेल प्रशासन को निर्देश देने की माँग की कि मऊ के विधायक मुख़्तार अंसारी की हिरासत जल्द से जल्द यूपी के बाँदा जिला जेल को सौंप दी जाए।

ओडिशा के टाइगर रिजर्व में आग पशु तस्करों की चाल या प्रकृति का कोहराम? BJP नेता ने कहा- असम से सीखें

ओडिशा के सिमिलिपाल अभयारण्य में लगी आग ने पर्यावरणविदों की चिंताएँ बढ़ा दी हैं। सिमिलिपाल बाघों के लिए भी लोकप्रिय है, लेकिन इसमें अक्सर लगने वाली आग ने जंगल के अस्तित्व पर सवाल खड़ा कर दिए हैं। फरवरी में इसके बायोस्फेयर रिजर्व एरिया में आग लग गई और 1 सप्ताह तक जंगल जलता रहा। हालाँकि, अब इसे नियंत्रित कर लिए जाने की बात कही जा रही है। ये उत्तरी ओडिशा के मयूरभंज जिले में स्थित है।

सिमिलिपाल का नाम ‘सिमुल’ से आया है, जिसका अर्थ है सिल्क कॉटन के वृक्ष। ये एक राष्ट्रीय अभयारण्य और टाइगर रिजर्व है। 5569 वर्ग किलोमीटर में फैले इस जंगल का इकोसिस्टम पूर्वी घाट के पूर्वी छोर पर स्थित है, जिसे जून 22, 1994 में केंद्र सरकार ने बायोस्फेयर रिजर्व घोषित किया गया था। ये 94 खास किस्म के फूलों और 3000 तरह के पौधों का घर है। 264 तरह की चिड़िया, 42 किस्म के मैमल्स और 29 किस्म के रेप्टाइल्स इसे खास बनाते हैं।

स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि जंगल से लगे सीमावर्ती इलाकों में 399 फायर पॉइंट्स चिह्नित किए गए हैं। उनका कहना है कि ये पॉइंट्स गाँवों के नजदीक हैं और आग को नियंत्रित करने के लिए हर जगह प्रयास किया जा रहा है, जिससे स्थिति कंट्रोल में है। हर साल पतझड़ के बाद जब वसंत ऋतु आता है तो आग की खबरें सामने आती हैं। इससे पहले यहाँ 2015 में आग की बड़ी घटना हुई थी। गिरी हुई पत्तियों में आग पकड़ने के बाद ये जंगल में फ़ैल जाता है।

इनमें कई बार प्राकृतिक कारणों, जैसे बिजली वगैरह गिरने से ऐसा होता है। सूखी हुई पत्तियों में जरा सी चिंगारी भी आग का रूप ले लेती है। कई बार शिकारी भी जंगल के एक खास क्षेत्र में आग लगा देते हैं, ताकि उनके मनचाहे इलाके से सारे जानवर भाग कर जाएँ। पशु तस्कर अपना काम निकलने के बाद आग को बुझाने की कोशिश तक नहीं करते। महुआ चुनने के लिए भी ग्रामीण सूखी पत्तियों को जलाते हैं।

इससे उन्हें महुआ के फूल चुनने में आसानी होती है। महुआ का उपयोग मदिरा किस्म के पेय को तैयार करने में किया जाता है, जिसे पीकर ग्रामीण मदमस्त हो जाते हैं। ग्रामीणों का ये भी मानना है कि कुछ पेड़ों की शाखाएँ जलने से उनमें बाद में अच्छा विकास होता है। 1200 गाँवों और 4.5 लाख की जनसंख्या पूरे ट्रांजिशन जोन में आती है, जिनमें से 73% आदिवासी हैं। इस बार गर्मी पहले आने और गर्म हवाएँ चलने को भी इसका कारण माना जा रहा है।

ये आग सामान्यतः प्राकृतिक रूप से हुई बारिश के बाद ही नियंत्रण में आते हैं। शिकारियों पर शिकंजा कस कर और सूखे डाल-पत्तियों को हटाना भी इस प्रक्रिया में शामिल है। इस बार पाँचों डिवीजन में 21 स्क्वाड्स बना कर आग पर नियंत्रण के लिए काम पर लगाया गया। 40 फायर टेंडर और 240 ब्लोअर लगाए गए। 250 फॉरेस्ट गार्ड्स काम पर लगे। ग्रामीणों के बीच जागरूकता अभियान की भी शुरुआत की गई है।

भाजपा नेता विजयंत जय पांडा ने भी आग की इस घटना पर दुःख जताते हुए कहा कि ओडिशा के इस सबसे बड़े जंगल में आग लगने का सबसे बड़ा कारण है कि सरकार शिकारियों और टिम्बर माफिया के बढ़ते प्रभावों को लेकर सतर्क नहीं है। उन्होंने इसके लिए असम का उदाहरण दिया, जहाँ भाजपा ने 5 वर्षों के कार्यकाल में राइनो तस्करी पर रोक लगाई और काजीरंगा को बचाया। ओडिशा में नवीन पटनाटक के नेतृत्व में बीजद की सरकार है।

मयूरभंज के राजपरिवार खानदान से ताल्लुक रखने वाली अक्षिता एम भंज देव ने इस आग की तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए लिखा, “2000 हेक्टेयर आग की चपेट में है। 1000 से अधिक चिड़ियों, पशु और पेड़-पौधों की स्पीसीज खतरे में है। ये 11 दिनों से ऐसा ही चल रहा है।” उन्होंने फोटोग्राफर देबाशीष मिश्रा की तारीफ की, जो इन तस्वीरों को सामने लाकर सरकार व दुनिया का ध्यान आगाह कर रहे हैं।

माँ-बाप-भाई एक-एक कर मर गए, अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होने दिया: 20 साल विष्णु को किस जुर्म की सजा?

इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा बरी किए जाने के बाद विष्णु तिवारी करीब 20 साल बाद जेल से निकले हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। संस्था ने उत्तर प्रदेश के DGP और और मुख्य सचिव को जवाब देने को कहा है। विष्णु को रेप के मामले में फँसाया गया था। NHRC ने पूछा है कि इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है?

साथ ही पीड़ित विष्णु तिवारी को राहत और उनके पुनर्वास के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं, NHRC ने इसका भी विस्तृत विवरण माँगा है। इसके लिए 6 सप्ताह का समय दिया गया है। सेंटेंस रिव्यू बोर्ड (सजा समीक्षा बोर्ड) पर सवाल उठाते हुए संस्था ने कहा है कि ये बोर्ड एकदम से निष्क्रिय हो गया है। ऐसे कई मामले आए हैं, जिनमें 75 वर्ष से अधिक की उम्र के बंदियों की जेल में ही मौत हो गई।

NHRC ने मीडिया रिपोर्ट्स के सामने आने पर इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया। कहा गया है कि एक 23 वर्ष के युवक को बलात्कार के मामले में ट्रायल कोर्ट उम्रकैद की सज़ा सुनाता है और 20 साल जेल में बिताने के बाद हाईकोर्ट उसे निर्दोष पाता है। इस अवधि के दौरान विष्णु तिवारी के परिवार के कई सदस्यों की मृत्यु हो गई।

जेल में उनका आचरण अच्छा पाया गया था। लेकिन, आश्चर्य की बात ये है कि इन सबके बावजूद उन्हें पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पैरोल नहीं दिया गया। भाई के अंतिम संस्कार में शामिल होने की भी अनुमति नहीं मिली। उन पर वर्ष 1999 में अनुसूचित जाति (SC) की एक महिला के साथ बलात्कार का आरोप लगा था। 2005 में वो न्याय के लिए हाईकोर्ट पहुँचे और वहाँ से उन्हें अब जाकर राहत मिली है।

बता दें कि CrPc की की धारा 433 के तहत, सरकार सज़ा को कम (मौत की सज़ा, आजीवन कारावास, सश्रम कारावास या साधारण कारावास) कर सकती है। सेंटेंस रिव्यू बोर्ड को इसके लिए अदालत की सज़ा की समीक्षा करनी पड़ती है। पीड़ित को हुए आघात, मानसिक पीड़ा और सामाजिक कलंक की क्षतिपूर्ति के लिए उसे क्या राहत दी गई है, NHRC ने ये विशेष रूप से पूछा है। विष्णु तिवारी पर रेप का मामला भूमि विवाद के कारण दायर किया गया था, जिस कारण उनके जीवन के दो दशक जेल में बीत गए।

अपने भाई महादेव को जेल में खुद से मिलने आया हुआ देख कर विष्णु तिवारी हमेशा काँप जाते थे क्योंकि चार अपनों की मौत की खबर भी महादेव ही लेकर आए थे। सबसे पहले 2013 में उनके पिता की मौत हो गई। एक साल बाद ही माँ भी चल बसीं। उसके बाद उनके दो बड़े भाई भी दुनिया छोड़कर चले गए। विष्णु 5 भाइयों में तीसरे नंबर पर आते हैं। आगरा के सामाजिक कार्यकर्ता नरेश पारस ने उनके लिए आवाज़ उठाई थी।

जेल के कैदियों का भी कहना है कि विष्णु उन सबके अच्छे मित्र बन गए थे और कैदियों के लिए भोजन पकाया करते थे। उनका सबसे पसंदीदा गाना ‘शोर (1972)’ में महेंद्र कपूर और मन्ना डे का गाया हुआ ‘जीवन चलने का नाम, चलते रहो सुबह-शाम’ है, जिसे वो हमेशा गुनगुनाते रहते थे। जेल से छूटने के बाद वो एक ढाबा चलाना चाहते हैं, लेकिन उनके पास इसके लिए कोई पूँजी नहीं है। वो कहते हैं कि कहीं नौकरी कर के कुछ रुपए जमा करेंगे।

1 साल से छात्रा को धर्मांतरण व निकाह के लिए प्रताड़ित कर रहा था सलमान, पीड़िता के लिए वरदान बना MP का नया कानून

मध्य प्रदेश के खंडवा से ‘लव जिहाद’ का मामला सामने आया है। सलमान नाम का युवक एक हिन्दू छात्रा को जबरन इस्लामी धर्मांतरण के लिए पिछले 1 वर्ष से प्रताड़ित कर रहा था। मध्य प्रदेश के नए धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक के तहत यह मामला दर्ज हुआ है। खंडवा में नए कानून के तहत ‘लव जिहाद’ का यह पहला मामला है। सलमान पीड़िता पर निकाह के लिए दबाव बना कर उसे प्रताड़ित कर रहा था।

चूँकि अभी पुलिस के ऑनलाइन सॉफ्टवेयर में इस कानून से सम्बंधित धाराएँ नहीं अपलोड की गई थीं, इसीलिए FIR दर्ज करने से पहले पुलिस अधीक्षक ने भोपाल के आला अधिकारियों के साथ चर्चा की। मूंदी थाना अंतर्गत जामकोटा गाँव की पीड़ित छात्रा का कहना है कि रशीद खान का बेटा सलमान उसे परेशान कर इस्लामी धर्मांतरण व निकाह का दबाव बना रहा था। वो जान से मार डालने की धमकी देता थे, जिससे छात्रा के परिजन परेशान थे।

सलमान की करतूतों से तंग आकर पीड़िता को उसके परिजनों ने मामा के घर भेज दिया। फिर भी वह बाज नहीं आया। पीड़िता 12वीं में पढ़ती है। आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसे न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है। आरोपित अक्सर पीड़िता का पीछा करता था और उसे धमकियाँ देता रहता था। उसकी हरकतों से तंग आकर पीड़िता ने पुलिस में मामला दर्ज कराया।

इस मामले में थाना प्रभारी मोहन सिंह सिंगोरे ने IPC की धारा 354 डी (महिला के प्रति अश्लील इशारे करना, अश्लील टिप्पणी और पीछा करना), धारा 341 (किसी व्यक्ति को गलत तरीके से रोकना), धारा 506 (जान से मारने की धमकी) और 3/5 धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक 2021 (शादी और किसी अन्य कपटपूर्ण तरीके से किए गए धर्मांतरण का मामला) के तहत FIR दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।

मनसुख हिरेन की लाश, 5 रुमाल और मुंबई पुलिस का ‘तावड़े’: पेंच कई, ‘एंटीलिया’ के बाहर मिली थी विस्फोटक लदी कार

पिछले दिनों मुकेश अंबानी के मुंबई स्थित घर एंटीलिया के बाहर एक विस्फोटक लदी SUV कार पार्क की हुई मिली थी। इसके मालिक मनसुख हिरेन की शुक्रवार (मार्च 5, 2021) को लाश मिली थी। यह घटना तब हुई जब विधानसभा में पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हिरेन की सुरक्षा का मुद्दा कुछ ही घंटों पहले उठाया था। मुम्ब्रा की खाड़ी में उनकी लाश मिली थी। उनकी पत्नी ने आत्महत्या के दावों को नकार दिया है। परिजनों का कहना है कि उनकी कार चोरी हो गई थी।

उन्होंने चोरी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी। पत्नी का कहना है कि इसके बाद उनके पति को पुलिस स्टेशन में रोज पूछताछ के लिए बुलाया जाता था। उनका दावा है कि लाश मिलने से 1 दिन पहले भी मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच के एक अधिकारी ने उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया था, लेकिन फिर उनकी लाश ही मिली। पत्नी विमला हिरेन ने बताया कि कांदिवली से तावड़े नामक किसी पुलिस अधिकारी का कॉल आया था।

जाने के कई घंटों बाद जब मनसुख हिरेन का फोन नंबर नहीं मिल रहा था तो परिवार ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने इसे तकनीकी मामला बताते हुए कहा की ये कार मनसुख के पास ज़रूर थी, लेकिन वो इसके मालिक नहीं थे और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद ही कुछ भी कहा जा सकेगा। उन्होंने कहा कि ATC (आतंक निरोधी दस्ता) इस मामले की जाँच करेगा। मनसुख के पड़ोसियों ने उन्हें एक हँसमुख व मिलनसार इंसान करार दिया है।

उन्हें 10-15 वर्षों से जानने वाले लोगों ने कहा कि ये सब कैसे हो गया, उन्हें विश्वास ही नहीं हो रहा। उनके तीन बेटे भी हैं। उनकी आखिरी लोकेशन ठाणे से काफी दूर विवार इलाके की थी। वो अपने इलाके के बच्चों को तैरना सिखाते थे। पूर्व सीएम फडणवीस का पूछना है क्रॉफर्ड मार्केट में उनसे मिलने वाला पहला व्यक्ति कौन था? उन्होंने आरोप लगाया कि मुंबई पुलिस एक गवाह की सुरक्षा नहीं कर पाई। पुलिस अधिकारी सचिन वाजे से उनकी कई बार फोन पर बातचीत होने के आरोप भी उन्होंने दोहराए।

उन्होंने माँग करते हुए कहा कि इस मामले की निष्पक्ष जाँच अब NIA ही कर सकती है। उन्होंने पूछा कि धमकी भरा पत्र सचिन वाजे को ही क्यों मिला और वे घटनास्थल पर सबसे पहले कैसे पहुँचे? ये वही अधिकारी हैं, जिन्होंने अर्णब गोस्वामी को गिरफ्तार किया था। वहीं देशमुख का कहना है कि कि अगर फडणवीस के पास कोई जानकारी है तो वो मुंबई पुलिस से साझा करें, क्योंकि वो ठीक तरीके से जाँच कर रही है और उन पर कोई शक नहीं कर सकता।

मनसुख हिरेन के शव की जाँच के दौरान उनके मुँह से 5 रुमाल भी निकले हैं, जो रहस्य को और बढ़ा रहे हैं। ठाणे में ऑटोमोबाइल पार्ट्स का कारोबार चलाने वाले हिरेन का शव संदिग्ध अवस्था में मिला था और शुरुआती बयान में मुंबई पुलिस ने इसे आत्महत्या प्रतीत होता बताया था। जिस विरार में उनका आखिरी लोकेशन मिला, वो पालघर में है। ठाणे से वहाँ की दूरी 50 किलोमीटर के करीब है।

रुमाल वाले मामले में मुंबई पुलिस का कुछ और ही कहना है। उसका कहना है कि ये रुमाल चेहरे से बँधे हुए मिले हैं, मुँह के एकदम भीतर नहीं थे। कपड़ों से टुकड़ों से उनके चेहरे को ढक दिया गया था। महाराष्ट्र सरकार का कहना है कि अंबानी के घर के बाहर मिले कार के मालिक का नाम सैम पीटर न्यूटन है, मनसुख का तो उस पर कब्ज़ा भर था। विपक्ष पूछ रहा है कि इस मामले में एक साथ इतने सारे संयोग कैसे?

इससे पहले, फडणवीस ने यह भी दावा किया कि एक नहीं बल्कि दो कारें थीं- एक स्कॉर्पियो और एक इनोवा और दावा किया कि दोनों कारें ठाणे से आई थीं और उसी रास्ते से चलकर लोकेशन तक पहुँची थीं। उन्होंने कहा कि मुकेश अंबानी के आवास के पास विस्फोटकों के साथ एक स्कॉर्पियो खड़ी थी, जबकि इनोवा इसे छोड़कर आगे बढ़ गई थी। फडणवीस ने मुकेश अंबानी के खिलाफ हमले के पीछे साजिश रचने का आरोप लगाया था।

ममता बनर्जी ने टिकट काटा तो पूर्व MLA अराबुल इस्लाम ने TMC दफ्तर को किया तबाह, समर्थकों ने लगा दी आग

तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव के लिए प्रत्याशियों की सूची का ऐलान शुक्रवार (मार्च 5, 2021) को किया। जिन नेताओं को इस बार टिकट नहीं दिया गया है उनकी नाराजगी पार्टी को भारी पड़नी लगी है। टिकट न मिलने से नाराज TMC के पूर्व विधायक अराबुल इस्लाम ने अपनी ही पार्टी के दफ्तर में तोड़फोड़ मचाई और उसे तबाह कर डाला। साथ ही दफ्तर में रखी लकड़ी की कुर्सियों को भी आग के हवाले कर दिया

ये घटना नॉर्थ 24 परगना के भांगर इलाके में हुई। आगामी विधानसभा चुनाव के लिए अराबुल इस्लाम को टिकट न मिलने से नाराज उनके समर्थकों ने जम कर हंगामा किया। समर्थकों का हुजूम विरोध करने के लिए स्थानीय TMC दफ्तर पहुँचा। आराबुल इस्लाम को 2006 में इसी क्षेत्र से विधायक चुना गया था, लेकिन पिछले चुनावों में उन्हें हार मिली थी। CPI (M) के बादल जमादार ने उन्हें हराया था।

जब समर्थकों ने उत्पात मचाया तो आराबुल इस्लाम भी रो पड़े और रोते-रोते खुद को TMC द्वारा टिकट न दी जाने की व्यथा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की जनता उन्हें जो करने को कहेगी, वो करेंगे। उन्होंने कहा कि वे अकेले नहीं हैं, पार्टी के कई वफादार नेताओं को नजरंदाज किया गया है। 2018 पंचायत चुनावों के दौरान आराबुल इस्लाम को बंगाल पुलिस ने गिरफ्तार भी किया था।

उन पर आरोप था कि उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी हफिजुर रहमान को गोली मारने की सुपारी दी थी। गोली रहमान के चेहरे में लगी थी और उनकी मौत हो गई थी। इस्लाम की गिरफ़्तारी के कुछ दिनों बाद उनके घर से कई क्रूड बम भी बरामद हुए थे। 2 पार्टी कार्यकर्ताओं की मौत के बाद 2014 में उन्हें पार्टी ने बाहर का रास्ता दिखा दिया था। कई करोड़ों के स्कैम में भी उनका नाम है। क्षेत्र में उनकी माफिया वाली छवि है।

साथ ही वामपंथी नेता अब्दुर रज्जाक मोल्लाह पर हुए हमले का साजिश रचने के आरोप में भी वो 2013 में गिरफ्तार हो चुके हैं। उधर अडंगा के विधायक रफीकुर रहमान के समर्थकों ने भी उन्हें टिकट न दिए जाने के विरोध में सड़क पर हंगामा किया। सतगछिया से 4 बार से विधायक सोनाली गुहा को भी टिकट नहीं मिला। सीएम ममता का कहना है कि स्वच्छ छवि के नेताओं को ही टिकट दिया गया है।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद इस बार नंदीग्राम से चुनाव लड़ेंगी। उम्मीदवारों की सूची में बंगाली फिल्म एक्ट्रेस सायानी घोष (Sayoni Ghosh) का भी नाम है। सायानी को टीएमसी ने पश्चिमी वर्धमान के आसनसोल (दक्षिणी) सीट से मैदान में उतारा है। वो 2015 में एक हिन्दू विरोधी और आपत्तिजनक ट्वीट को लेकर विवादों में रही थीं, जिसमें एक महिला पवित्र हिंदू प्रतीक शिवलिंग के ऊपर कंडोम डालते हुए दिख रही थी।

‘वह शिक्षित है… 21 साल की उम्र में भटक गया था’: आरिब मजीद को बॉम्बे हाई कोर्ट ने दी बेल, ISIS के लिए सीरिया गया था

आरिब मजीद (Areeb Majeed) शुक्रवार (5 मार्च 2021) को जेल से बाहर निकल गया। बॉम्बे हाई कोर्ट ने पिछले दिनों उसकी जमानत बरकरार रखी थी। उस पर आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) में शामिल होने के लिए सीरिया जाने का आरोप है। कथित तौर पर वह 2014 में तीन अन्य लोगों के साथ आईएस में शामिल होने गया था। छह महीने बाद लौट आया। देश लौटते ही आतंकरोधी दस्ते ने उसे गिरफ्तार कर राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) के हवाले कर दिया था।

अदालत ने कहा, “हमने देखा है कि प्रतिवादी एक शिक्षित व्यक्ति है। 21 वर्ष की आयु में जब वह इराक के लिए रवाना हुआ था, तब वह सिविल इंजीनियरिंग में स्नातक की पढ़ाई कर रहा था। उसने स्पष्ट रूप से कहा है कि 21 वर्ष की आयु में वह भटक गया था और उसने गंभीर गलती की है, जिसके लिए वह पहले से ही छह साल से ज्यादा वक्त जेल में काट चुका है।”

अदालत ने यह भी कहा, “पिछले छह साल की कैद में प्रतिवादी ने एनआईए कोर्ट में खुद ही अपने मामले पर बहस की है। उसने इस कोर्ट में और एनआईए कोर्ट में अपने मामले का प्रतिनिधित्व किया है और हम देख सकते हैं कि उसने अपना मामला शिष्टाचार और उचित तरीके से पेश किया है।”

आरिब मजीद ने दावा किया कि उसे एनआईए और इस्तांबुल स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास की मदद से लाया गया था। लाइवलॉ की रिपोर्ट के अनुसार उस पर आईपीसी की यूएपीए की धारा 125 (भारत सरकार की सहयोगी किसी एशियाई शक्ति के खिलाफ युद्ध छेड़ना) और धारा 16 (आतंकवादी गतिविधि के लिए सजा) और धारा 18 के तहत आरोप लगाया गया है।

जब अदालत ने उससे देश से बाहर जाने को लेकर सवाल किया तो उसने कहा, “मैं 21 साल का था, मैं दुखी होकर चला गया। वहाँ जाकर मैं लोगों की मदद कर रहा था।” उसने यह भी दावा किया कि उस पर लगाए आतंकवाद के आरोप झूठे हैं।

बॉम्बे हाई कोर्ट ने उसे जमानत देते हुए शर्तें लगाई है। इसके मुताबिक पहले दो महीनों तक दिन में दो बार, उसके बाद अगले दो महीनों तक दिन में एक बार, उसके बाद अगले दो महीने तक सप्ताह में तीन बार, उसके बाद ट्रायल पूरा होने तक सप्ताह में दो बार उसे स्थानीय पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट करना होगा।

गौरतलब है कि मजीद को विशेष अदालत ने 17 मार्च 2020 को जमानत दी थी। इसके बाद एनआई ने हाईकोर्ट में अपील की और आदेश पर रोक लगा दी गई थी। लेकिन, बॉम्बे हाई कोर्ट से जमानत मिलते ही उसके जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया।

PM मोदी को मिला सेरावीक ग्लोबल एनर्जी एंड एनवायरनमेंट लीडरशिप अवार्ड, कहा- देश के लोगों को करता हूँ अर्पित

आज प्रधानमंत्री मोदी को एक वार्षिक अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा सम्मेलन के दौरान CERAWeek ग्लोबल एनर्जी एंड एनवायरनमेंट लीडरशिप अवॉर्ड (Global Energy And Environment Leadership Award) से सम्मानित किया गया। इस अवसर पीएम मोदी ने ट्वीट कर कहा, “मैं इस पुरस्कार को अपने देश के लोगों को अर्पित करता हूँ। आप किसी भी भाषा में भारतीय साहित्य को पढ़ लीजिए आपको पता चलेगा कि लोगों का प्रकृति के साथ गहरा संबंध रहा है।”

वहीं केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी ट्वीट कर यह सूचना देश के लोगों को दी, उन्होंने कहा, “आज प्रधानमंत्री मोदी जी को एक वैश्विक अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। सेरावीक वैश्विक ऊर्जा कार्यक्रम में पिछले कई वर्षों से ऊर्जा के क्षेत्र में अच्छे काम करने वाले नेतृत्व को सम्मानित करते आए हैं। इस साल उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री को चुना है।”

इस अवसर पर अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा, “मैं बहुत विनम्रता के साथ सेरावीक वैश्विक ऊर्जा और पर्यावरण नेतृत्व पुरस्कार को स्वीकार करता हूँ। मैं इस पुरस्कार को अपने महान देश की जनता को समर्पित करता हूँ। मैं यह पुरस्कार अपनी भूमि की महान परम्परा को समर्पित करता हूँ जिसने पर्यावरण को हमेशा राह दिखाई है।”

कब हुई थी इस पुरस्कार की शुरुआत

गौरतलब हैकी सेरावीक वैश्विक ऊर्जा और पर्यावरण लीडरशीप पुरस्कार की शुरुआत 2016 में हुई थी। वैश्विक ऊर्जा और पर्यावरण के क्षेत्र में प्रतिबद्ध नेतृत्व के लिए यह पुरस्कार प्रदान किया जाता है। डॉक्टर डेनिएल येरगिन ने 1983 में सेरावीक की स्थापना की थी। इसकी स्थापना के बाद से प्रत्येक साल मार्च महीने में हृयूस्टन में सेरावीक का आयोजन होता है। इसकी गिनती विश्व के अग्रणी ऊर्जा मंचों में होती है। इस साल यह आयोजन डिजिटल तरीके से आज आयोजित हुआ है।

इस मंच पर दुनिया को सम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “आज दुनिया फिटनेस और वेलनेस पर केंद्रित है। स्वस्थ और जैविक भोजन की बढ़ती माँग के बीच भारत अपने मसाले, आयुर्वेद उत्पादों आदि के माध्यम से इस वैश्विक परिवर्तन को ड्राइव कर सकता है।”

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सम्मेलन में प्रमुख वक्ताओं में जलवायु जॉन केरी के लिए अमेरिकी विशेष राष्ट्रपति दूत, बिल और मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के सह-अध्यक्ष और ब्रेकथ्रू एनर्जी बिल गेट्स के संस्थापक और सऊदी अरामको के सीईओ अमीन नासिर भी शामिल हुए।

आज पीएम मोदी ने स्वीडन के पीएम स्टीफान लोफवेन के साथ शिखर वार्ता भी की। करीब पाँच साल में दोनों के बीच यह पाँचवीं वार्ता है। दोनों नेताओं ने पिछले साल अप्रैल में कोरोना की स्थिति को लेकर फोन पर भी बातचीत की थी।