जैसा कि ख़बरों में चल रहा है, अदालत ने कथित पर्यावरण एक्टिविस्ट दिशा रवि को टूलकिट मामले में जमानत दे दी है। दिल्ली के पटियाला हाउस सेशन कोर्ट ने कहा कि एक लोकतांत्रिक देश के नागरिक ही सरकार के अंतःकरण के रखवाले हैं। कोर्ट ने कहा कि नागरिकों को सिर्फ इसीलिए जेल में नहीं डाला जा सकता क्योंकि उन्होंने सरकार की नीतियों से असहमति जताई है। एडिशनल सेशन जज धर्मेंद्र राणा ने ये फैसला सुनाया।
कोर्ट ने इन चीजों को स्वस्थ लोकतंत्र की निशानी करार दिया। साथ ही प्राचीन भारत का भी उल्लेख करते हुए कहा कि हमारी 5000 वर्षों पुरानी सभ्यता कभी भी समाज के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले विचारों के विरोध में नहीं रही है। जज ने इस दौरान ऋग्वेद के एक श्लोक का उद्धरण देकर भी दावा किया कि ये हमारी सांस्कृतिक पहचान को दर्शाता है और साथ ही विभिन्न विचारों के प्रति सम्मान को दिखाता है।
उक्त श्लोक (ऋग्वेद 1.89.1) का अर्थ है – “हमारे पास चारों ओर से ऐंसे कल्याणकारी विचार आते रहें जो किसी से न दबें, उन्हें कहीं से बाधित न किया जा सके एवं अज्ञात विषयों को प्रकट करने वाले हों। प्रगति को न रोकने वाले और सदैव रक्षा में तत्पर देवता प्रतिदिन हमारी वृद्धि के लिए तत्पर रहें।” कोर्ट ने कहा कि ‘अभिव्यक्ति की आज़ादी’ का रथ है कि वैश्विक जनता तक अपनी बात पहुँचाना।
कोर्ट ने कहा कि सूचनाओं के आदान-प्रदान में कोई भौगोलिक सीमा नहीं होती है। साथ ही कहा कि संचार-व्यवस्था को प्राप्त करने या कहीं पहुँचाने की अनुमति कानून भी देता है। कोर्ट ने कहा कि किसी सहज टूलकिट का एडिटर होना या फिर व्हाट्सप्प ग्रुप बनाना गुनाह नहीं है। कोर्ट ने दिशा द्वारा वेब हिस्ट्री डिलीट करने वाले तथ्य को भी बेमतलब का बताया। साथ ही कहा कि गणतंत्र दिवस के दिन दिल्ली पुलिस ने ही विरोध प्रदर्शन की अनुमति दी थी।
“The offence of sedition cannot be invoked to minister to the wounded vanity of the governments”.
कोर्ट ने कहा कि दिशा रवि को अलगाववादी विचारधारा का साबित करने के लिए कोई सबूत मौजूद नहीं है। कोर्ट ने ये भी कहा कि इस टूलकिट की वजह से किसी भी भारतीय दूतावास के पास हिंसा की कोई वारदात भी नहीं हुई। कोर्ट ने जमानत देते हुए कहा कि सरकार के टूटे दंभ पर मरहम लगाने के लिए देशद्रोह का मामला नहीं चलाया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि टूलकिट का PFJ से भी कोई लिंक नहीं मिला।
दिल्ली पुलिस का दावा है कि कनाडा के पोएटिक जस्टिक फाउंडेशन से जुड़ा एमओ धालीवाल भारत में किसानों की आड़ में माहौल खराब करने की फिराक में था। अगर वो सीधे कोई कार्रवाई करता तो एक्सपोज़ हो जाता इसलिए उसने भारत मे कुछ चेहरों का सहारा लिया। दिशा रवि ने टूलकिट में एडिट किया है। इनका सहयोगी शान्तनु दिल्ली आया था और 20 से 27 तक दिल्ली में था। दिशा रवि को 1 लाख के मुचलके पर जमानत दी गई।
उत्तर प्रदेश की पुलिस ने हिन्दुओं का अपमान करने वाले ‘तांडव’ वेब सीरीज को लेकर कार्रवाई शुरू कर दी है। इस मामले में मंगलवार (फरवरी 23, 2021) को बयान दर्ज कराने के लिए अमेज़न प्राइम की नेशनल हेड अपर्णा पुरोहित लखनऊ के हजरतगंज पुलिस थाने पहुँचीं। दोपहर के 2 बजे पहुँचीं अपर्णा का बयान बंद कमरे में दर्ज किया गया। लगभग साढ़े 3 घंटे तक उनका बयान दर्ज किया गया। यूपी पुलिस इस मामले में तेज़ी से आगे बढ़ रही है।
Lucknow: Amazon Prime’s India head of original content Aparna Purohit reached Hazratganj police station to record her statement in a case related to web series ‘Tandav’ for allegedly hurting religious sentiments.
जनवरी 18 को दर्ज किए गए इस मामले में अपर्णा पुरोहित का बयान दर्ज कराने की प्रक्रिया की वीडियोग्राफ़ी भी कराई गई। यूपी पुलिस ने इस मामले में 100 सवालों की सूची तैयार की थी। लेकिन, अपर्णा पुरोहित पहले दिन कई सवालों के जवाब नहीं दे सकीं, इसलिए अभी कई सवालों को लेकर पूछताछ बाकी है। अपर्णा पुरोहित के साथ उनके सुरक्षाकर्मी और अधिवक्ता भी साथ गए थे, जिन्हें कक्ष के बाहर ही रोक दिया गया।
अपर्णा पुरोहित से पूछताछ का क्रम जारी रहेगा। इलाहबाद हाईकोर्ट की एकल पीठ ने इस मामले में उन्हें थाने पहुँच कर बयान दर्ज कराने का आदेश दिया था। इस मामले में निर्देशक अली अब्बास ज़फर और निर्माता हिमांशु कृष्ण मैहर का बयान मुंबई में ही दर्ज किया गया था। ‘तांडव’ में हिन्दू देवी-देवताओं का मजाक बनाने और हिन्दू धर्म का अपमान करने के बाद देश भर में विरोध प्रदर्शन हुए थे। शो के निर्माताओं ने माफ़ी भी माँगी थी।
हजरतगंज के अलावा उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर में अपर्णा पुरोहित समेत अन्य के खिलाफ धारा 153- A (1) (B), 295-A, 505(1)(B), 505(2) में FIR दर्ज हुई थी। हजरतगंज वाला मामला इंस्पेक्टर अमरनाथ वर्मा ने दर्ज कराया था। उन्होंने ‘तांडव’ के सारे एपिसोड में से हिन्दू धर्म का अपमान करने वाले दृश्यों का विवरण नोट कर के पेश किया था। अब इस मामले में आगे की कार्रवाई का इंतजार है।
बता दें कि अमेजन प्राइम की वेब सीरिज ‘तांडव’ के मेकर्स के खिलाफ पिछले दिनों लखनऊ में शिकायत दर्ज की गई थी। इस संबंध में जाँच के लिए यूपी पुलिस मुंबई भी गई थी। गुरुवार जनवरी 21, 2020 को यूपी पुलिस की टीम सीरीज के डायरेक्टर, लेखक के घर तथा प्रोड्यूसर के दफ्तर पहुॅंची थीं। लेकिन, इनमें से कोई भी नहीं मिला था। इन सभी के ख़िलाफ़ सीरिज के जरिए लोगों की धार्मिक भावनाएँ आहत करने के आरोप में केस दर्ज है।
गुजरात में हुए म्युनिसिपल कॉरपोरेशन चुनाव में भाजपा की बंपर जीत को देखते हुए पीएम मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने ट्वीट कर जनता का आभार जताया। भाजपा ने कुल 85% सीटें जीती हैं। वहीं कॉन्ग्रेस मात्र 44 सीटों पर सिमट कर रह गई है।
गुजरात स्थानीय निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के शानदार प्रदर्शन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर जनता का शुक्रिया अदा किया। पीएम मोदी ने ट्वीट कर कहा, “शुक्रिया गुजरात! राज्य भर में स्थानीय निकाय चुनावों के परिणाम स्पष्ट रूप से लोगों में विकास और सुशासन की राजनीति के प्रति अटूट विश्वास को दर्शाता है। बीजेपी पर फिर से भरोसा करने के लिए राज्य की जनता का आभारी हूँ।”
Thank you Gujarat!
Results of municipal elections across the state clearly show the unwavering faith people have towards politics of development and good governance.
Grateful to the people of the state for trusting BJP yet again.
पीएम ने आगे लिखा, “मैं BJP Gujarat के हर एक कार्यकर्ता के प्रयासों की सराहना करता हूँ, जिन्होंने पूरे राज्य में जन-जन तक पहुँच कर उन्हें पार्टी के विजन से अवगत कराया। गुजरात सरकार की जनहित की नीतियों ने राज्य में सकारात्मक परिवर्तन लाने का काम किया है।”
वहीं जीत पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, “गुजरात में विकास यात्रा जारी है। गुजरात में बीजेपी की जीत ऐतिहासिक है। गुजरात नगर निकाय के चुनाव में कॉन्ग्रेस पार्टी बुरी तरह हारी है। पूरे गुजरात में सिर्फ 44 सीटें कॉन्ग्रेस को मिली हैं। आज गुजरात में म्युनिसिपल कॉरपोरेशन चुनाव के नतीजे दिखाते हैं कि गुजरात भारतीय जनता पार्टी का गढ़ के रूप में फिर से एक बार खुद को प्रस्थापित करता है।”
#WATCH | Opposition tried to create many types of misconceptions on a range of issues like farmers’ protest & COVID-19 & successive poll results have dismantled these misconceptions – from Leh-Ladakh to Hyderabad & Gujarat. Results of West Bengal elections will also be good: HM pic.twitter.com/6D171Bkjkv
उन्होंने आगे कहा, “गुजरात में नरेंद्र मोदी की नेतृत्व में जो विकास की यात्रा शुरू हुई थी, उसे आज भी भाजपा ने बरकरार रखा है। आज जो परिणाम आए हैं, वो गुजरात के अब तक के सबसे अच्छे परिणामों में से एक हैं।”
पश्चिम बंगाल के आगामी विधानसभा चुनाव को मद्देनजर रखते और विरोधी पार्टियों को लताड़ते हुए शाह ने आगे कहा, “किसानों के विरोध और COVID-19 जैसे कई मुद्दों पर विपक्ष ने कई तरह की भ्रांतियाँ पैदा करने की कोशिश की लेकिन लगातार चुनावी नतीजों ने इन भ्रांतियों को दूर किया- लेह-लद्दाख से लेकर हैदराबाद और गुजरात तक हमारे पक्ष में रहे। पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजे भी अच्छे होंगे।”
#WATCH | Opposition tried to create many types of misconceptions on a range of issues like farmers’ protest & COVID-19 & successive poll results have dismantled these misconceptions – from Leh-Ladakh to Hyderabad & Gujarat. Results of West Bengal elections will also be good: HM pic.twitter.com/6D171Bkjkv
वहीं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने ट्वीट कर गुजरात की जनता का आभार जताते हुए पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की तारीफ की। नड्डा ने कहा कि गुजरात भाजपा की यह ऐतिहासिक जीत प्रदेश की जनता की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की जन-कल्याणकारी और विकास की नीतियों में अटूट विश्वास की जीत है। मैं प्रदेश की जनता को भाजपा में निरंतर विश्वास प्रकट करने के लिए धन्यवाद देता हूँ।
गुजरात की सभी छः महानगर पालिका में हुए स्थानीय निकाय के चुनावों में @BJP4Gujarat को अपार बहुमत मिला है। मैं इस अभूतपूर्व विजय के लिए मैं सभी छः महानगर पालिका के मतदाताओं , मुख्यमंत्री @vijayrupanibjp जी , प्रदेश अध्यक्ष @CRPaatil जी और पार्टी कार्यकर्ताओं को धन्यवाद देता हूँ।
उन्होंने अपने ट्वीट में कहा, ”गुजरात की सभी 6 महानगर पालिका में हुए स्थानीय निकाय के चुनावों में गुजरात भाजपा को अपार बहुमत मिला है। मैं इस जीत के लिए सभी 6 महानगर पालिका के मतदाताओं, मुख्यमंत्री विजय रूपाणी, प्रदेश अध्यक्ष और पार्टी कार्यकर्ताओं को धन्यवाद देता हूँ।”
बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने सोमवार (फरवरी 22, 2021) को कहा कि पिछले साल उत्तर पूर्वी दिल्ली में दंगे शुरू होने से एक दिन पहले सीएए विरोधी प्रदर्शनकारियों पर निशाना साधने वाला उन्होंने जो भाषण दिया था, उसका उन्हें कोई पछतावा नहीं है, और जरूरत पड़ी तो वह फिर से ऐसा करेंगे।
मिश्रा ने ‘डेल्ही रॉयट्स 2020 : द अनटोल्ड स्टोरी’ नाम की किताब के विमोचन पर कहा, “मैंने जो किया है, मैं फिर करूँगा। मुझे कोई पछतावा नहीं है, सिवाए इसके कि मैं दिनेश खटीक, अंकित शर्मा (हिंदू विरोधी दंगा के पीड़ित) और कई अन्य की जान नहीं बचा सका।”
भाजपा नेता ने वामपंथी इकोसिस्टम को लताड़ने के लिए ग्रेटा ‘टूलकिट’ को भी अपने भाषण के दौरान घसीटा। बता दें इस टूलकिट के जरिए भारत को बदनाम करने की साजिश रची गई थी। साथ ही चाय और योग को भी निशाना बनाया गया था।
गौरतलब है कि यह सभी जानते हैं कि पीएम मोदी ने बचपन में चाय बेचने का काम भी किया था। इसके अलावा उन्होंने योग को एक बड़े अंतर्राष्ट्रीय मंच पर रखा, जिसके परिणामस्वरूप 2014 में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की शुरुआत हुई। ग्रेटा टूलकिट के उद्देश्यों के इन दो पहलुओं का किसानों के साथ कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन यह भारत की छवि अंतरराष्ट्रीय मंच पर नुकसान पहुँचा रहा है।
3 फरवरी, 2021 को स्वीडिश प्रदर्शनकारी ग्रेटा थनबर्ग द्वारा साझा किए गए टूलकिट के खुलासे को लेकर, जिसने भारत के खिलाफ साजिश रचने के लिए कई संगठनों, हस्तियों और नेताओं को उजागर किया, कपिल मिश्रा ने कहा, “चाय और योग तो तुम्हारा बाप भी खत्म नहीं कर सकता। चाय वाला तो तुमसे झेला नहीं जाता और योग वाला भी तुमसे झेला नहीं जाएगा।”
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि भाजपा नेता द्वारा ‘चाय वाला’ यहाँ भारत पीएम मोदी और ‘योग वाला’ योगी आदित्यनाथ के संदर्भ में उपयोग किया गया हैं।
दिल्ली में पिछले साल हुए हिंदू-विरोधी दंगों के बारे में बीजेपी नेता ने बताया कि कैसे उस दौरान सीएए के विरोध के आड़ में हिंदुओं का कत्लेआम किया गया, उनके घरों को नष्ट कर दिया गया और इस्लामिक भीड़ द्वारा उनकी संपत्तियों को खत्म कर दिया गया, फिर भी वामपंथी, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया इन दंगों को मुस्लिम विरोधी दंगे बताने की कोशिश में लगे रहे।
भाजपा नेता मिश्रा ने कहा, “जब भी सड़कें अवरुद्ध की जाएँगी और लोगों को काम पर या बच्चों को स्कूल जाने से रोका जाएगा तो इसे रोकने के लिए वहाँ हमेशा कपिल मिश्रा होगा। जब भी कोई चिदंबरम या कपिल सिब्बल झूठ बोलने कर इनकी वकालत करेगा, मोनिका अरोड़ा उन्हें बेनकाब करेगी। जब भी कोई राजदीप, बरखा या निधि राजदान प्रचार या झूठ फैलाने की कोशिश करेंगी, तो अशोक श्रीवास्तव ऐसे प्रोपेगेंडा का भंडाफोड़ करने के लिए खड़े होंगे। जब भी आप भारत के अतीत या वर्तमान के बारे में झूठ फैलाकर युवाओं को उकसाने की कोशिश करते हैं, तो प्रेरणा मल्होत्रा होगी जो आपके प्रयासों को नष्ट कर देगी।”
उल्लेखनीय है कि दिल्ली रॉयट्स 2020: द अनटोल्ड स्टोरी’ के विमोचन पर, कपिल मिश्रा ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे पहले पुस्तक के ऑनलाइन विमोचन के दौरान वामपंथी कार्यकर्ताओं और इस्लामवादियों ने ब्लूम्सबरी इंडिया को इसका प्रकाशन रोकने के लिए उकसाया था।
भाजपा नेता ने आगे कहा कि दिल्ली उत्तर-पूर्व में हिंसक दंगों में कम से कम 53 लोगों की जान गई और करोड़ों की संपत्ति का नुकसान हुआ था, इसके बावजूद वामपंथी इको सिस्टम और उसके अनुकूल मीडिया जैसे एनडीटीवी ने घातक दंगों के बारे में गलत जानकारी फैलाना बंद नहीं किया है।
उन्होंने लगातार वैश्विक मंच पर भारत और हिंदुओं को नीचा दिखाने की कोशिश की है। यह जानने के बावजूद कि यह मुस्लिम भीड़ थी, जिन्होंने राष्ट्रीय राजधानी में हिन्दू विरोधी दंगों को अंजाम दिया था। इसके अलावा राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया ने इन दंगों के खिलाफ ‘एंटी मुस्लिम पोग्रोम’का इस्तेमाल करते हुए बड़े पैमाने पर झूठ का सहारा लिया। और मुस्लिमों को बेकसूर घोषित करने की कोशिश की थी।
मिश्रा ने कहा कि, 24 और 25 फरवरी को हुई हिंसा की साजिश पहले ही रची जा चुकी थी। बता दें हिंसा की शुरुआत 15 दिसंबर को हुई जब मुस्लिमों ने पहली बार राष्ट्रीय राजधानी में तोड़फोड़ की थी। आम आदमी पार्टी के विधायक और दिल्ली के सुन्नी वक्फ बोर्ड के प्रमुख अमानतुल्ला खान जामिया नगर में हुए दंगों के मुख्य साजिशकर्ता के रूप में उभरे थे। हिंदुओं के खिलाफ कई तरह के नारे लगाए गए और मुस्लिमों को बरगलाया गया था।
ऑपइंडिया ने दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों की एक-एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी। और दंगों के पीछे के साजिशकर्ताओं का खुलासा किया था। इसके अलावा मिश्रा ने अपने भाषण के दौरान पूछा, “लोकतंत्र में अल्टीमेटम जारी करने का और क्या तरीका है? मैंने एक पुलिस अधिकारी के सामने ऐसा किया। क्या दंगा शुरू करने वाले लोग पुलिस के सामने अल्टीमेटम देते हैं?”
वकील मोनिका अरोड़ा और दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षकों सोनाली चीतलकर और प्रेरणा मल्होत्रा द्वारा लिखित पुस्तक के बारे में बात करते हुए मिश्रा ने कहा कि यह उनके खिलाफ इस्तेमाल किए गए ‘खतरनाक प्रोपगंडे’ के विरुद्ध एक उम्मीद का दीया था, जो उन्हें दंगों के लिए दोषी ठहरा रहा है।
केरल विधानसभा चुनाव मई 2021 में होने वाला है। देश के लगभग सभी राज्यों में शर्मनाक हार झेल चुके कॉन्ग्रेस पार्टी के लिए यह चुनाव बेहद महत्वपूर्ण है। वहीं अब चुनाव को मद्देनजर रखते हुए केरल के सिरो मालाबार चर्च ने कॉन्ग्रेस पार्टी को एक सख्त निर्देश जारी किया है।
दरअसल, चंगनास्सेरी आर्कबिशप मार जोसेफ पेरुमोत्तम (Changanassery Archbishop Mar Joseph Perumthottam) ने चर्च के परामर्श के बिना आगामी विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी उम्मीदवारों को तय करने के खिलाफ कॉन्ग्रेस पार्टी को चेतावनी दी है।
मेट्रोपॉलिटन आर्कबिशप ने निर्देश दिया है कि अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में अपने उम्मीदवारों का चयन करने से पहले कॉन्ग्रेस को अल्पसंख्यकों से परामर्श करना चाहिए। यह भी कहा कि पार्टी को राज्य में ईसाई क्षेत्रों के लिए उम्मीदवार तय करने से पहले चर्च से परामर्श करना चाहिए।
चर्च के आधिकारिक मुखपत्र दीपिका के एक संपादकीय में, मार जोसफ पेरुमोत्तम ने कहा कि कॉन्ग्रेस को समुदाय के बाहर के उम्मीदवारों को मैदान में नहीं उतारना चाहिए। संपादकीय के एक हिस्से में कहा गया है कि 1951 में, जवाहरलाल नेहरू ने पीसीसी अध्यक्षों को एक समान निर्देश जारी किया था।
आर्कबिशप ने लिखा कि उम्मीदवार केवल वही होने चाहिए जिन्होंने उस क्षेत्र में अल्पसंख्यकों का विश्वास जीता है जहाँ से उन्हें मैदान में उतारा जा रहा है। इसमें कहा गया है कि बाहरी लोग, जो विश्वास या जन्म से समुदाय के नहीं हैं, को अल्पसंख्यक ईसाई निर्वाचन क्षेत्रों में उम्मीदवार के रूप में नहीं उतारा जाना चाहिए।
गौरतलब है कि 2021 के केरल विधानसभा को मद्देनजर रखते हुए चुनावी भागदौड़ का समय है। जो लोग केरल की जनसांख्यिकी और राजनीति से परिचित हैं, उन्हें पता होगा कि राजनीतिक रूप से, केरल बाई पोलर रहा है, विधानसभा चुनावों में सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाले वाम लोकतांत्रिक मोर्चा और कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के बीच सत्ता बारी-बारी से आई है।
बता दें, कॉन्ग्रेस और मुस्लिम लीग सहित पिछले तीन दशकों से यूडीएफ अपने घटते प्रदर्शन से गुजर रहा है, कॉन्ग्रेस लगातार अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है। ऐसे में, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कॉन्ग्रेस सिरो-मालाबार चर्च की माँगों को मानेगी और उनके अनुसार चलेगी या नहीं।
बंगाल चुनाव से पहले ऑपइंडिया की टीम पश्चिम बंगाल में लगातार बनी हुई थी और उन्होंने अलग-अलग जगहों पर जाकर जानकारी इकट्ठा की, लोगों से बात की। हमारी टीम ने हर तरह के लोगों से बात की, गाँव में गई, मृतकों के परिवार से मिली और भी कई चीजें कवर की। उसी का हम संक्षेप में एक-एक करके वीडियो और रिपोर्ट आपके सामने ला रहे हैं। बंगाल चुनाव की पहली कड़ी में हम खीदीरपुर इलाके के मुस्लिम युवाओं से बात कर रहे हैं।
इनसे बात करते हुए हमने पाया कि मुस्लिम युवाओं का मानना है कि यहाँ पर शांति व्याप्त है। कहीं पर भी कोई हिंसा नहीं हो रही है और यदि कहीं हिंसा हो भी रही है तो उसमें भाजपा का हाथ है। वो अपनी राजनीति चमकाने के लिए हिंसा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा ही हिंसा करवा रही है और पूरे देश को बर्बाद कर रही है। दंगों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने इसे खारिज कर दिया और जब हमारे संपादक ने नाम गिनाया तो पहले तो वो चुप हो गए फिर कहा कि वो अलग तरह के दंगे थे।
इनका कहना है कि भाजपा बंगाल में सांप्रदायिकता लाकर राजनीति करना चाहती है। उन्होंने बंगाल में दंगे के लिए भी बीजेपी को जिम्मेदार ठहराया। यह पूछे जाने पर कि बंगाल में सामाजिक हिंसा है या राजनीतिक हिंसा? इम्तियाज ने इसका जवाब देते हुए कहा कि बंगाल में राजनीतिक हिंसा है ही नहीं। बीजेपी पूरे देश में लोगों को धार्मिक चीजों में उलझा कर सरकार बना रही है, बंगाल में भी वह हिंदू-मुस्लिम करके सरकार बनाना चाह रही है।
जब हमारे संपादक ने 350 राजनीतिक कार्यकर्ताओं की मौत के एक लिस्ट (जिसमें 90% बीजेपी से और 10% टीएमसी से थे) का जिक्र करते हुए पूछा कि क्या उनको भाजपा ने मरवाया है, तो उन्होंने कहा- “100%, पुलवामा हमले के इतने दिन हुए, सरकार इसको जनता के सामने नहीं लाना चाहती। इतना बड़ा RDX कहाँ से आया? जब बीजेपी जवानों को नहीं छोड़ रही है तो लोगों को क्या छोड़ेगी?”
इन लोगों का मानना है कि जितनी भी हत्याएँ हुई हैं, वो भाजपा ने खुद अपनी राजनीति चमकाने के लिए करवाई है। जबकि हमारे पास कई रिपोर्ट्स हैं, जिसमें भाजपा नेता ने अपने कार्यकर्ताओं को मरवाने के लिए टीएमसी को दोषी ठहराया है और वो लोग हमेशा इसके खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं, लेकिन इन युवाओं का मानना है कि ये सरकार खुद ही अपने लोगों को मरवा रही है।
सतही तौर पर इन युवाओं की अगर हम बात सुनें और दूसरे हमारे आगे आने वाले वीडियो में जो बातें हैं, उससे यही लग रहा है कि ये युवा बंगाल में चुनाव और ममता बनर्जी के राज को लेकर बिल्कुल अलग तरह से सोच रहे हैं। इससे इतर जो वाकई में बंगाली हिंदू हैं और जो बाहर से आकर बंगाल में बसे हैं और अब वहाँ के वोटर हैं, उनके बारे में आगे पढ़ेंगे, देखेंगे तो पाएँगे की उनका विचार इससे बिल्कुल भी मेल नहीं खाता।
विकास के बारे में सवाल करने पर यूँ तो उन्होंने कोई वास्तविक बातें नहीं बताई, लेकिन इतना जरूर कहा कि विकास हुआ है। हालाँकि वो यह नहीं बता पाए कि कहाँ पर और कितना हुआ है। उन्होंने कहा कि सड़क बनी, हॉस्पिटल बना, स्कूल बने… मगर ये नहीं बता पाए कि कौन सा बना है और कहाँ पर बना है? गोल-गोल घूमाकर बस वो इतना ही बोलते रहे कि विकास हुआ है।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 26 जनवरी के दिन ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा के मामले में पुलिस का ताबड़तोड़ एक्शन जारी है। इसी कड़ी में दिल्ली पुलिस ने गणतंत्र दिवस पर लाल किले में उपद्रव मचाने वाले दो और आरोपितों को गिरफ्तार किया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपितों में एक 45 वर्षीय मोहिंदर सिंह कथित तौर पर जम्मू कश्मीर यूनाइटेड किसान फ्रंट का चेयरमैन है। वहीं दूसरा आरोपित मनदीप सिंह, गोल गुजराल का रहने वाला है। पुलिस का कहना है कि दोनों आरोपितों ने 26 जनवरी में हुई हिंसा में सक्रिय भूमिका निभाई थी और मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक थे।
Delhi Police Crime Branch has arrested two key wanted accused from Jammu, in connection with 26th January violence at Red Fort pic.twitter.com/1xfrJtrY0u
कथित तौर पर दोनों आरोपितों को पुलिस ने जम्मू से गिरफ्तार किया था। गणतंत्र दिवस में हुए हिंसा के मामले में सोमवार को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने जसप्रीत सिंह नाम के एक और आरोपित को गिरफ्तार किया था। बता दें 29 वर्षीय जसप्रीत सिंह उर्फ सनी दिल्ली के स्वरूप नगर का रहने वाला है। 26 जनवरी के हिंसक विरोध प्रदर्शन के दौरान उसने लाल किले में जमकर उपद्रव मचाया था। उस पर प्राचीर के दोनों तरफ लगे गुंबद में से एक पर चढ़ने का भी आरोप है।
17 फरवरी को दिल्ली पुलिस ने लाल किले पर हिंसा के मुख्य आरोपितों में से एक मनिंदर सिंह को दिल्ली के पीतमपुरा इलाके से गिरफ्तार किया था। वह भी मूलरूप से स्वरूप नगर का रहने वाला है।
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, लाल किले पर हुई हिंसा की कई तस्वीरें सामने आई थी, जिसमें मनिंदर सिंह दो तलवारों को लहरा रहा था और पुलिसकर्मियों पर बर्बर हमला करने के लिए लोगों को प्रेरित कर रहा था। गिरफ्तार मनिंदर सिंह ने कई भड़काने वाले फेसबुक पोस्ट भी किए थे।
गौरतलब है कि गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर रैली के दौरान आईटीओ और लाल किले में भड़की हिंसा के संबंध में दिल्ली पुलिस ने अब तक 100 से भी अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने हाल ही हिंसा में शामिल 220 लोगों की तस्वीरें जारी की थीं। इसके अलावा पुलिस ने आम जनता से भी हिंसा की तस्वीरें और वीडियो साझा करने की अपील की थी। पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए लोगों में अभिनेता और खालिस्तानी हमदर्द दीप सिद्धू और इकबाल सिंह भी शामिल हैं, जिन्होंने कथित तौर पर हिंसा के साथ- साथ पुलिस से भी बर्बरता की थी।
उल्लेखनीय है कि गणतंत्र दिवस के दिन दिल्ली में किसानों की ट्रैक्टर परेड के दौरान किसानों और पुलिसकर्मियों के बीच झड़प हुई थी। इस बीच, कुछ प्रदर्शनकारी ट्रैक्टर लेकर जबरन लालकिले में घुस गए और ऐतिहासिक इमारत की प्राचीर पर धार्मिक झंडा लगा दिया। हिंसा में करीब 500 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। वहीं पुलिस ने उपद्रवियों के खिलाफ 38 एफआईआर दर्ज किए थे।
भारत सरकार द्वारा पारित तीन नए कृषि कानूनों का समर्थन करने पर खालिस्तानियों ने अमेरिका के कैलिफोर्निया में फ्रेमोंट में रहने वाले एक भारतीय मूल के डॉक्टर के घर के सामने जमकर विरोध प्रदर्शन किया और अपमानजनक नारे लगाए।
सोशल मीडिया प्लेटफार्म ट्विटर पर इस विरोध प्रदर्शन का वीडियो वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में कुछ खालिस्तानियों को कैलिफोर्निया के पैसिफिक कार्डियोलॉजी एसोसिएट्स के सीईओ और कार्डियोलॉजिस्ट डॉ.रोमेश जापरा के घर के बाहर प्रदर्शन करते हुए देखा जा सकता है।
See,how Hindu Homes are getting attacked in California just for Supporting farmers law..yesterday these Khalistani goons have attacked eminent Indian American cardiologist Dr.Romesh Japra’s home just for one facebook post supporting Farmers Law…unbelivable!! pic.twitter.com/wIBvC8ULgl
वीडियो में अलगाववादी खालिस्तानी झंडे को लहराते हुए भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डॉ.जापरा के खिलाफ अपमानजनक नारे लगाते हुए सुनाई दे रहे हैं।
गौरतलब है कि इससे पहले अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में 21 फरवरी को भारत सरकार के तीनों कृषि सुधार कानून के समर्थन में NRI लोगों द्वारा कार रैली का आयोजन किया था।
USA: NRIs of the San Francisco Bay Area organised a car rally on 21st February, in support of the Government of India’s new Farm Laws pic.twitter.com/PsqFPQ9skU
दरअसल, डॉ. रोमेश जापरा ने 20 फरवरी को फेसबुक पर अपने फॉलोवर्स से कृषि कानूनों का समर्थन करने के लिए कार रैली में शामिल होने का अनुरोध किया था। डॉ. जापरा ने फेसबुक पोस्ट पर कार रैली का विवरण साझा करते हुए लिखा था कि, एक किसान का बेटा होने के नाते वह भारत में नए कृषि कानूनों का समर्थन करने के लिए कार रैली में शामिल होने के कहा था।
https://m.facebook.com/romesh.japra?fref=nf#
जिसके बाद पोस्ट को देखते ही खालिस्तानी समर्थक डॉ.जापरा के घर पहुँच गए और भारत उनके घर के बाहर प्रदर्शन किया। साथ ही डॉक्टर और मोदी के खिलाफ अपमानजनक नारे लगाए।
उल्लेखनीय है कि पहले भी ऑपइंडिया ने बताया था कि किस तरह खालिस्तानी तत्वों ने पंजाब के किसान विरोध प्रदर्शन को हाइजैक कर लिया था, जिसके चलते गणतंत्र दिवस पर लाल किले में जबरन दंगाइयों ने घुसकर सिखों के धार्मिक झंडे को लहराया दिया था और दिल्ली में जमकर उपद्रव मचाया था।
वहीं दिल्ली में हुए हिंसा के एक हफ्ते बाद पॉपस्टार रिहाना और पोर्न स्टार मिया खलीफा के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनकारी ग्रेटा थनबर्ग ने विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों के समर्थन में आवाज उठाई थी। जोकि खालिस्तान समर्थक पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन द्वारा वैश्विक मंच पर भारत को बदनाम करने की एक सोची समझी साजिश थी, जिसका बाद में खुलासा हुआ था।
बता दें, अमेरिका के कैलिफ़ोर्निया में खालिस्तानियों ने हिंसक किसान विरोध प्रदर्शनों का समर्थन किया था और इसकी आड़ में महात्मा गाँधी की मूर्ति को भी तोड़ दिया था।
बिहार बोर्ड परीक्षा के परीक्षार्थी का वीडियो वायरल हो रहा है। हालाँकि, यह स्पष्ट नहीं है कि वीडियो कब का है। वीडियो में आप देख सकते हैं कि एक परीक्षार्थी परीक्षा में चीटिंग करने के लिए पूरी तरह से तैयार होकर आया था।
परीक्षा से पहले अधिकारी परीक्षार्थी की चेकिंग कर रहे होते हैं, तभी एक ऐसा कैंडिडेट सामने आता है, जिसने अपने पूरे शरीर पर पर्ची छिपा रखी थी। चेकिंग के दौरान अधिकारी ने जैसे ही उसकी जींस नीचे से ऊपर की तरफ सरकाया, उसके नीचे उसने उत्तर पुस्तिका छिपा रखी थी। उसने इसे बाल में लगाने वाले रबड़ से बाँध रखा था। जिसे देख कर अधिकारी ने पूछा, “रबड़ किससे माँगा है? मम्मी से या दीदी से या पत्नी से?” तभी दूसरे अधिकारी कहते हैं, “ये तो पूरा पोथी लेकर आया है।” एक अन्य ने टिप्पणी करते हुए कहा, “सोचा कि पूरा समुद्र ही ले चलते हैं, जितना मन होगा, पानी पिएँगे और पिलाएँगे।”
जिसके बाद अधिकारियों ने जाँच करने के लिए उसे अंडरविअर खोलने के लिए कहा। और उसके अंडरविअर से भी कई चिट निकले। अंडरविअर से चिट निकलने के बाद बेशर्मी का सामना करते हुए परीक्षार्थी परीक्षा देने के लिए गया। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि परीक्षार्थी किस परीक्षा में शामिल होने के लिए आया था, लेकिन अन्य विद्यार्थियों द्वारा लगाए गए मास्क से पता चलता है कि हालिया परीक्षा का ही है।
बिहार और परीक्षा में नकल
पिछले हफ्ते, बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड (BSEB) ने कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा शुरू की। परीक्षा के दौरान अनुचित साधनों का सहारा लेने की वजह से पहले ही दिन लगभग 82 छात्रों को निष्कासित कर दिया गया था।
हाल के वर्षों में बिहार बोर्ड परीक्षा की नकली टॉपरों के कारण बदनामी हुई है। लगभग चार साल पहले रूबी रॉय ने बिहार बोर्ड परीक्षा में टॉप किया था। बाद में पता चला कि रूबी तो परीक्षा में शामिल नहीं हुई थी, मगर उसने कथित तौर पर ‘टॉप’ किया था।
जैसा कि देखा जा सकता है, 2016 के बिहार बोर्ड की टॉपर रूबी राय को उन विषयों के बारे में भी नहीं पता था, जिनके लिए उसने परीक्षा दिया था। इसके बाद, उसे फिर से परीक्षा में फेल होने के बाद गिरफ्तार कर लिया गया था।
एक साल बाद, बिहार बोर्ड के एक अन्य परीक्षा के टॉपर ने अपने विषयों के बारे में इधर-उधर की बातें की।
भारत में चीजें कहाँ से आईं? प्राचीन इतिहास में मध्य एशिया से लोग आए। उसके बाद पश्चिम एशिया से आए। उन्हीं लोगों में से कोई धातु लेकर आ गया, किसी ने हमें घोड़ा दिया, तो किसी ने हमें गाय के दुग्ध के बारे में बताया। फिर मुग़ल आए। आजकल हम जो भी खाते-पीते हैं, उनमें से अधिकतर चीजें उन्हीं की देन हैं। सबसे उन्नत सभ्यताएँ तो मेसोपोटामिया की थीं, माया सभ्यता थी, मिस्र की थी। सच में देखा जाए तो हम उनके सामने कुछ नहीं थे। आर्य बाहर से आए और उन्होंने यहाँ के लोगों को गुलाम बना कर आदमी होना सिखाया।
अगर आप सब ने वामपंथियों वाला इतिहास पढ़ा है तो हर बच्चा यही सोचता हुआ बड़ा हुआ होगा। इतिहास में दिलचस्पी न होने के कारण हम ज्यादा पढ़ते-सुनते भी नहीं। तभी तो सिनौली में खुदाई आज से 3 वर्ष पहले हुई (सबसे पहले 2005 में हुई थी) लेकिन हमें उसके बारे में अब पता चल रहा है, वो भी डिस्कवरी प्लस की डॉक्यूमेंट्री “Secrets of Sinauli” से। यकीन मानिए, आपके 55 मिनट तब भी जाया नहीं जाएँगे जब आपको इतिहास में बिलकुल भी रुचि नहीं है।
मनोज वाजपेयी का नैरेशन शानदार है। विशेषज्ञों से विस्तृत बातचीत की गई है और ग्राफिक्स की मदद से 5000 वर्ष पूर्व की उस सभ्यता को लगभग उकेर दिया गया है। सच्चाई ये है कि हमारे यहाँ पनपने वाली एक छोटी सी सभ्यता भी अपने समकालीन विदेशी सभ्यताओं से कम से कम 5 सदी आगे थी। अब तक हमें पढ़ाया जा रहा था कि भारत में रथ तो ईरान वाले लेकर आए। सिकंदर वगैरह लेकर आया।
लेकिन, अगर 5000 वर्ष पूर्व का कोई ऐसा रथ मिले जिसकी संरचना उन्नत हो और उसके डिजाइंस शानदार हों, तो आप क्या कहेंगे? वो भी तब, जब विश्व की बाकी सभ्यताओं में रथ के नाम पर लोग ठूँठ में खड़े होकर चलते थे? निश्चित ही, ये हमारी उन्नत प्राचीन सभ्यताओं का परिचायक है। इस बारे में अधिक जानने के लिए आप 55 मिनट में डॉक्यूमेंट्री ही देख लें तो बेहतर है। हो सकता है आपके भीतर और रिसर्च करने, खँगालने की रुचि जाग उठे।
हमारे यहाँ कहा गया है – “इतिहासपुराणाभ्यां वेदं समुपबृंहयेत्॥” – इसका अर्थ है कि वेदों के विस्तार का वर्णन हमें पुराणों और इतिहास की सहायता से ही करनी चाहिए। हाल ही में जिन बीबी लाल को पद्म विभूषण मिला, उन्होंने पांडवों की राजधानी इंद्रप्रस्थ को खोज निकाला था और रामायण-महाभारत में दिए गए भूगोल के हिसाब से खुदाई की थी। ‘Secrets Of Sinauli’ में आपको उन्हें भी सुनने को मिलेगा।
इतिहास में गोता लगाने के लिए ज़रूरी है सिनौली को जानना (वीडियो साभार: Discovery Plus)
बस संक्षेप में इतना समझिए कि भारत के उत्तर प्रदेश के बागपत एक छोटे से गाँव में हमें एक ऐसी सभ्यता का प्रमाण मिला है, जो बताता है कि हड़प्पा, वैदिक और महाजनपद काल – ये तीनों ही एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। सिंधु-सरस्वती हो या गंगा-यमुना, हर जगह पनपी सभ्यताएँ एक-दूसरे से जुड़ी हैं। पूर्णतः भारतीय हैं। कोई बाहर से नहीं आया। भारत का प्राचीन इतिहास इतना जटिल है कि अगर कहीं मिट्टी की चीजें मिलती हैं तो उसके ही समकालीन कहीं धातुओं पर कलाकृति में दक्ष लोगों के अस्तित्व का प्रमाण मिल जाता है।
जब आपको पता चलता है कि 5000 वर्ष पूर्व सिनौली की महिलाएँ योद्धा हुआ करती थीं, तो ये बहस समाप्त करनी होती है कि भारत में सदियों से औरतों को दबा कर रखा गया है, घर में अंदर रखा गया है। जब हम महाभारत में मणिपुर की चित्रांगदा और नाग कन्या उलूपी के योद्धा होने का इतिहास पढ़ते हैं तो ध्यान नहीं देते क्योंकि विदेशी इसे कथा-कहानी कह कर नकार देते हैं। हाँ, कथा-कहानी तो है, लेकिन सच्ची।
जब रामायण में कैकेयी के राजा दशरथ के साथ मिल कर इंद्र की तरफ से असुरों से युद्ध करने की बातें हमें पता चलती है तो किसी पुरातात्विक प्रमाण के बिना किसी को ये समझा नहीं पाते। लेकिन, जब प्रमाण चीख-चीख कर कहता है कि 5000 वर्ष पूर्व महिलाएँ खतरनाक हथियारों को चलाने में पारंगत थीं, तो हमें मानना होगा कि 1 लाख वर्ष पूर्व के लिखित इतिहास के प्रमाण भी कहीं न कहीं मौजूद हैं, भविष्य में निकलेंगे, या नहीं भी।
सिनौली अकेला नहीं है। भारत में ऐसी सैकड़ों स्थान मिल सकते हैं, बशर्ते सरकार और ASI ध्यान दे। अब तक वामपंथियों के हाथ में रही इस संस्था को अब ज़रूरत है उस इतिहास को खँगालने की, जिसे हमसे अब तक छिपाया गया। राजा सुहेलदेव के बारे में बोलते समय खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल ही में इसका जिक्र कर चुके हैं। माहौल अनुकूल है, इसीलिए इस्लामी आक्रांताओं के गुणगान की जगह हमें अपने इतिहास पर फोकस रखना होगा।
जब आप ‘Secrets of Sinauli’ देखेंगे तो पाएँगे कि इतिहासकारों के मन में भी कहीं न कहीं ये व्यथा है। एक इतिहासकार ने उन पर सवाल उठाया, जो कहते हैं यहाँ घोड़े नहीं थे। उन्होंने मजाक में ऐसे ही एक व्यक्ति से कह दिया कि तब ज़रूर ये रथ खच्चर चलाते रहे होंगे। इसी तरह एक इतिहासकार ने वेदों से उद्धरण लेकर समझाया कि कैसे सिनौली के लोगों की अंतिम संस्कार की प्रतिया ऋग्वेद के रीति-रिवाजों से मिलती है।
महिलाओं के योद्धा होने के मौजूद हैं प्रमाण (वीडियो साभार: Discovery Plus)
आखिर वो सिनौली के कौन लोग थे जो कला और युद्ध, दोनों में ही इतने दक्ष थे कि विश्व की उस समय की तमाम सभ्यताएँ उनके सामने नहीं टिकतीं। वामपंथी इतिहासकार तो ये कह कर भी चीजों को ख़ारिज करते रहे हैं कि अरे तलवार मिला है तो उनका उपयोग सब्जी काटने के लिए होता होगा। भाला मिला है तो जानवर मारते होंगे। रथ मिला है तो कढ़ाई-कलाकारी के लिए उससे खेलते होंगे। चीजों को नकारने के हजार कारण बन जाते हैं उनके पास।
लेकिन, जब ऋग्वैदिक श्लोकों के हिसाब से जीवन हड़प्पा में भी चलता मिले, और उसके बाद भी, तो मानिए कि उससे पूर्व भी वेद थे। जिस सिनौली के बारे में मैं बात कर रहा हूँ, वहाँ के लोगों ने अपने पूर्वजों से ये भी सुना है कि ये वो 5 गाँवों में शामिल है, जिनकी माँग श्रीकृष्ण ने दुर्योधन के समक्ष रखी थी – पांडवों के लिए। एक इतिहासकार ने कह दिया कि रथ अगर पुराना मिला है तो आर्य ईरान से और पहले आए होंगे। अगर 10 हजार वर्ष पूर्व का मिल जाए तो ये कहेंगे ईरान वाले और पहले आए होंगे।
क्यों? हमारे पूर्वज ये सब नहीं बना सकते थे? ये चीजें भी तो ग्रामीणों को गलती से मिल गईं तो पता चल गया। किसी इतिहासकार ने हमारे प्राचीन साहित्यों के भूगोल के हिसाब से खुदाई ही नहीं की कि और प्रमाण मिले। विकिपीडिया सहित अन्य स्रोतों पर विशेषज्ञों के हवाले से बताया गया है कि महाभारत 300 ईश्वी में लिखा गया। जब पूछा जाता है कि पाणिनि (500-600 BCE इतिहासकारों के हिसाब से) ने फिर कैसे इसका जिक्र कर दिया, फिर ये कहते हैं उस समय कोई दूसरा महाभारत रहा होगा।
ये सत्य है कि हमारे साहित्य में नैरेटर के भीतर नैरेटर, उसके भीतर फिर नैरेटर की परंपरा रही है, जिसे आप ‘Embedded/Nested Narrativ’ कह सकते हैं। नैमिषारण्य में हजारों ऋषियों का निवास था और एक के मुँह से निकला इतिहास 10वें तक पहुँचते हुए थोड़ा तो बदलेगा, वो भी तब जब हजारों वर्षों तक ये प्रक्रिया चली हो। ‘Secrets of Sinauli’ भारत में अपनी तरह का पहला प्रयास है, आगे बढ़ाने लायक है।