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दिल्ली में हमले की साजिश रच रहा जैश, बिहार से हथियारों की खरीद: आतंकियों से पूछताछ में खुलासा

आतंकी राजधानी दिल्ली को दहलाने की साजिश में जुटे हुए हैं। जम्मू-कश्मीर के DGP दिलबाग सिंह ने रविवार (फरवरी 14, 2021) को खुलासा किया कि पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद किसी बड़े हमले की फ़िराक में है। कश्मीर में सक्रिय आतंकियों ने अब पाकिस्तान के साथ-साथ बिहार से भी हथियारों की खरीद शुरू कर दी है।

आतंकी साजिशों के लिए पंजाब में पढ़ाई करने वाले कुछ कश्मीरी छात्रों का इस्तेमाल किया जा रहा था। इन अवैध हथियारों को घाटी तक लाने के लिए कई तिकड़म आजमाए गए थे। आतंकियों हिदायतुल्ला मलिक और जहूर अहमद राथर की गिरफ़्तारी के बाद दोनों से हुए पूछताछ में ये सूचनाएँ मिली हैं। मलिक लश्कर-ए-मुस्तफा का संस्थापक है, तो जहूर द ‘रेजिस्टेंट फ्रंट’ से जुड़ा हुआ है।

मलिक को जम्मू के कुंजवानी से दबोचा गया था। वहीं राथर सांबा जिले के बारी ब्राह्मना क्षेत्र से धराया है। ये दोनों जैश और लश्कर का मुखौटा संगठन चला रहे थे। मलिक को उसकी बीवी समेत 4 आतंकियों का साथ दबोचा गया, जो पिछले वर्ष एक बैंक वैन से 60 लाख रुपए की लूट के आरोपित हैं। उसने पाकिस्तान में आतंकवाद का प्रशिक्षण लेकर कश्मीर में अपना संगठन खड़ा किया। अब तक इस नेटवर्क के 8 आतंकियों की पहचान हो चुकी है।

इनमें से कुछ को गिरफ्तार किया गया है, जिनसे पूछताछ जारी है। मलिक ने बिहार से 7 पिस्टल मँगा कर अपने गुर्गों में बाँटा। वो जम्मू में अपना अड्डा बनाने की योजना पर काम कर रहा था, ताकि कश्मीर में कड़ी सुरक्षा से बच कर आतंकी हरकतों को अंजाम दिया जा सके। पाकिस्तान से सुरंगों और ड्रोन के माध्यम से गोला-बारूद मँगाए जाते थे। वो जैश कमांडर आशिक नेंगरू का भी करीबी हुआ करता था।

आशिक के बारे में पता चला है कि वो अपने परिवार के साथ ही पाकिस्तान भाग गया है। पाकिस्तान भागने के बाद वो कश्मीर के आतंकियों को प्रशिक्षण और निर्देश दे रहा है। आईबी ने पिछले कुछ दिनों में सीमा पर 6 ऐसे सुरंगों का पता लगाया है, जिनका इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए होता था। शनिवार को जम्मू बस स्टैंड से चंडीगढ़ के नर्सिंग कॉलेज में पढ़ने वाले अल-बद्र के आतंकी सोहैल को IED विस्फोटक के साथ दबोचा गया था।

आईजी मुकेश सिंह ने पाकिस्तान की साजिश का भंडाफोड़ करते हुए कहा था कि सोहेल को आईईडी लगाने के लिए तीन से चार जगहों का टारगेट दिया गया था। इनमें रघुनाथ मंदिर, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और लखदाता बाजार का नाम शामिल था। इसमें से किसी एक जगह पर उसे आईडी रखना था। इस आईडी को रखने के बाद उसे श्रीनगर की फ्लाइट पकड़नी थी, जहाँ उसे अल बदर तंजीम का ग्राउंड वर्कर अथर शकील खान उसे रिसीव करता।

बता दें कि हिदायतुल्लाह मलिक के पास से भारी मात्रा में गोला-बारूद और हथियार भी जब्त किए गए थे। हिदायतुल्लाह 24 मार्च 2019 को श्रीनगर से दिल्ली के लिए इंडिगो फ्लाइट से निकला था और अजीत डोभाल के दफ्तर के बाहर सुरक्षा तथा CISF की तैनाती के डिटेल्स जुटाए थे। फिर उसने इसका वीडियो अपने पाकिस्तानी आका को भेजा। इस सूचना के बाद डोभाल की भी सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।

कारवाँ की कुंठा: सचिन तेंदुलकर डरपोक, अंबानी का कर्मचारी; मिडिल क्लास को बुद्धि नहीं

‘किसान आंदोलन’ की आड़ में अंतरराष्ट्रीय साजिश का पर्दाफाश होने के बाद कला और खेल क्षेत्र की नामचीन हस्तियों ने इसका विरोध करते हुए देश के प्रति एकजुटता दिखाई थी। लिबरल लॉबी को यह बेहद नागवार गुजरी। इसके बाद से ही एकजुटता दिखाने वाली हस्तियाँ, खासकर सचिन तेंदुलकर इनके निशाने पर हैं।

‘कारवाँ मैगजीन’ ने एक लेख में तेंदुलकर को सत्ता के सामने झुकने वाला व्यक्ति करार दिया है। वो भी तब, जब महाराष्ट्र की सरकार इन ट्वीट्स की जाँच कर रही है। लेख में सचिन तेंदुलकर को नैतिक रूप से डरपोक बताते हुए CAA विरोध-प्रदर्शन के दौरान उनकी चुप्पी पर सवाल खड़े किए गए हैं। इस लेख को वैभव वत्स ने लिखा है, जो शनिवार (फरवरी 13, 2021) को प्रकाशित हुआ।

किसी डच इतिहासकार की पुस्तक से उद्धरण लेकर लिखा गया है कि एक तानाशाह अपने आसपास के लोगों को झूठा बना देता है। भारत के पक्ष में सेलेब्रिटीज के ट्वीट्स को मोदी काल का पाखंड बताते हुए लिखा गया है कि उन्होंने सत्ता के नौकरों की तरह बर्ताव किया। इसमें सचिन के बारे में लिखा है कि वो एक बड़े सार्वजनिक छवि वाले व्यक्ति हैं, जिनके खिलाफ कोई सरकार किसी प्रकार की कार्रवाई करते दिखना नहीं चाहेगी।

कारवाँ ने सचिन तेंदुलकर को कहा भला-बुरा

इसमें इस पर एकदम से चुप्पी साध ली गई है कि सचिन तेंदुलकर और लता मंगेशकर जैसे ‘भारत रत्न’ से सम्मानित व्यक्तियों के खिलाफ भी महाराष्ट्र की शिवसेना-कॉन्ग्रेस-एनसीपी सरकार जाँच करवा रही है। उनके मुकेश अम्बानी के साथ संबंधों की बात करते हुए लिखा गया है कि मध्यम वर्ग में उनकी परवरिश हुई है और मुंबई में इस तरह के लोग हमेशा सत्ताधारियों के सामने झुकते हैं। कारवाँ ने लिखा है कि क्रिकेट हो या राजनीति, सचिन शक्तिशाली लोगों से डरते हैं।

उन्हें चेतावनी दी गई है कि अगर वो ‘नैतिक मूल्यों’ को नजरअंदाज करेंगे तो फिर उन्हें जीवन भर इस तरह सेलेब्रिटी वाला स्टेटस नहीं मिलेगा। सचिन पर निशाना साधने के क्रम में मध्यम वर्ग को ‘बौद्धिक रूप से खाली, मानवाधिकार और लोकतंत्र के प्रति उदासीन तथा लोगों के हितों की उपेक्षा करने वाला’ बताया है। सचिन को बचकाना बताते हुए उनकी आत्मकथा को दिमाग खराब कर देने वाली तुच्छता कहा गया है।

कारवाँ में लिखा गया है कि सचिन ने अपनी पुस्तक में कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं कहा। साथ ही अक्षय कुमार पर निशाना साधते हुए तेंदुलकर को उन्हीं की श्रेणी में जाने वाला बताया गया है। समाज और दुनिया के बारे में उनकी समझ पर सवाल उठाए गए हैं। उन्हें रिलायंस के मुंबई इंडियंस का ‘कर्मचारी’ बताते हुए अम्बानी के सामने दण्डवत होने वाला बताया गया है। वसीम जाफर का समर्थन न करने को लेकर भी नाराजगी जताई गई है।

इससे पहले कॉन्ग्रेस सांसद जसबीर सिंह गिल ने तेंदुलकर पर हमला करते हुए कहा था कि वे ‘भारत रत्न के लायक नहीं हैं’। साथ ही दावा किया था कि सचिन अपने बेटे को आईपीएल टीम में जगह दिलाने के लिए सरकार का समर्थन कर रहे हैं। इसी तरह केरल के कोच्चि में युवा कॉन्ग्रेस के सदस्यों ने विरोध जताते हुए सचिन तेंदुलकर के कट आउट पर कालिख पोत दी थी। उनके खिलाफ जम कर नारेबाजी भी की गई थी।

केजरीवाल की बेटी से ऑनलाइन ठगी में मेवात के साजिद सहित 3 गिरफ्तार, मास्टरमाइंड फरार

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की बेटी के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले में दिल्ली पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान कपिल, मानवेंद्र और साजिद के रूप में हुई है। कपिल और मानवेंद्र उत्तर प्रदेश से हैं, जबकि साजिद हरियाणा के मेवात का रहने वाला है। धोखाधड़ी का मास्टरमाइंड अब भी फरार है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, मानवेंद्र ने एचडीएफसी बैंक में कपिल का अकाउंट खोला था। दूसरा अकाउंट साजिद का था। 7 फरवरी को जब सीएम की बेटी ने OLX पर सेकेंड हैंड सोफा बेचना चाहा तो डील फाइनल होने पर खरीददार ने एक कोड स्कैन करने को भेजा। कथित तौर पर हर्षिता को विश्वास दिलाने के लिए पहले धोखेबाजों ने थोड़ा अमाउंट भेजा था, लेकिन उसके कुछ देर बाद पहले हर्षिता के अकाउंट से 20 हजार और दूसरी बार 14000 रुपए निकाल लिए।

NDTV की रिपोर्ट हो गई थी गायब

बता दें कि इस मामले में NDTV ने फरवरी 8, 2021 को एक रिपोर्ट पब्लिश की थी। इसमें मीडिया हाउस ने बताया था कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की बेटी हर्षिता केजरीवाल ने जब ऑनलाइन मार्केटप्लेस ओएलएक्स (OLX) पर सेकेंड हैंड सोफा बेचने की कोशिश की, तो जालसाज ने उन्हें 34,000 रुपए का चूना लगा दिया

इसमें कहा गया था कि दिल्ली के सिविल लाइन्स पुलिस स्टेशन में इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई है और मामले की जाँच की जा रही है। लेकिन, रिपोर्ट प्रकाशित करने के कुछ मिनट बाद NDTV ने अपनी वेबसाइट से इसे हटा लिया। बाद में इंडिया टीवी ने भी इस रिपोर्ट को अपनी साइट से हटा लिया था। मीडिया संस्थानों ने ऐसा क्यों किया था, ये साफ नहीं है।

भगवद्गीता और PM मोदी की तस्वीर लेकर ‘आत्मनिर्भर मिशन’ पर स्पेस में जाएगा सैटेलाइट

भारत से निजी क्षेत्र का पहला सैटेलाइट (सतीश धवन सैट/ Satish Dhawan Satellite) अपने साथ श्रीमद्भगवद्गीता, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर और 25 हजार लोगों के नाम लेकर अंतरिक्ष में जाने को तैयार है। ये सैटेलाइट इस माह के अंत तक लॉन्च की जाएगी। इस नैनो सैटेलाइट को चेन्नई आधारित कंपनी स्पेसकिड्ज ने डेवलप किया है। ये कंपनी छात्रों के बीच स्पेस साइंस से जुड़ी चीजों को प्रमोट करने के लिए जानी जाती है।

स्पेसकिड्ज इंडिया के सीईओ और संस्थापक डॉ. श्रीमथी केसान (Dr Srimathy Kesan) ने बताया कि समूह में इसे लेकर बहुत उत्साह है। ये उनका स्पेस में भेजा जाने वाला पहला सैटेलाइट है। उनके अनुसार, “जब हमने इस मिशन को फाइनल किया, हमने लोगों से उनके नाम स्पेस में भेजने के लिए पूछे। मात्र एक हफ्ते में हमारे पास 25 हजार एंट्री आई। इनमें 1 हजार ऐसे नाम हैं जो भारत से बाहर के हैं।” जानकारी के मुताबिक, जिन लोगों के नाम स्पेस में भेजे जाएँगे, उन्हें एक बोर्डिंग पास भी मिलेगा।

डॉ. श्रीमथी केसान के अनुसार, स्पेस साइंस में लोगों की दिलचस्पी बढ़ाने के मकसद से ऐसा किया गया है। उन्होंने बताया कि इस मिशन में टॉप पैनल में प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर के साथ आत्मनिर्भर मिशन लिखा होगा। ये सैटेलाइट पूरी तरह भारत में निर्मित है। यहाँ तक की इलेक्ट्रॉनिक्स और सर्किटरी भी भारत में ही तैयार हुए हैं। उन्होंने कहा कि जैसे अन्य मिशन में बाइबल भेजी जाती है, उसी आधार पर वह इस सैटेलाइट में भगवद्गीता भेज रहे हैं।

केसान ने कहा कि इसरो की सलाह के बाद कुछ डिजाइन परिवर्तन होने हैं। इसके बाद इसे श्रीहरिकोटा के स्पेसपोर्ट भेजा जाएगा। हम सैटेलाइट भेजने से पहले अंतिम मिनट की जाँच कर रहे हैं। हमें इसरो में परीक्षण  के बाद सोलर पैनल को फिर से देखना है, क्योंकि इसमें कुछ दिक्कत थी। लेकिन हमने यही सोचा था कि ये दो दिन में अंतरिक्ष में पूरी तरह जा सकती है।

बता दें कि स्पेसकिड्ज की इस सैटेलाइट का प्रक्षेपण इसरो अपने विश्वसनीय ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान ‘पीएसएलवी सी-51’ से दो अन्य निजी उपग्रहों के साथ करेगा। कंपनी के मुख्य तकनीकी पदाधिकारी ने बताया कि 3.5 किलोग्राम वजनी इस नैनो उपग्रह में एक अतिरिक्त चिप लगाई जाएगी, जिसमें सभी लोगों के नाम होंगे। इस नैनोसेटेलाइट को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के संस्‍थापक के नाम पर ही रखा गया है। इसका मकसद सिर्फ़ छात्रों के बीच अंतरिक्ष विज्ञान को बढ़ावा देना है।

दिशा रवि ने डिलीट कर दिया था फोन का पूरा डेटा, अब पुलिस को निकिता जैकब और शांतनु की तलाश: रिपोर्ट

दिल्ली पुलिस ने शनिवार (फरवरी 13, 2021) को बेंगलुरु के सोलादेवना हल्ली से पर्यावरण एक्टिविस्ट दिशा रवि को गिरफ्तार किया था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अब शांतनु और निकिता जैकब नामक दो अन्य आरोपितों की गिरफ़्तारी के लिए मुंबई में दबिश दी जा रही है। पुलिस ने गूगल से भी तकनीकी मदद माँगी है। स्वीडन की क्लाइमेट एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग द्वारा गलती से लीक किए गए टूलकिट डॉक्यूमेंट को लेकर ये कार्रवाई की जा रही है।

दिल्ली पुलिस अपने द्वारका कार्यालय में दिशा से पूछताछ कर रही है। दिशा ने चालाकी करते हुए अपने फोन के डेटा को डिलीट कर डाला, जिसे पुनः प्राप्त करने के लिए फोरेंसिक लैब भेजा गया है। पुलिस का कहना है कि हजारों लोग उक्त साजिश में शामिल हैं, जो खालिस्तान समर्थक आतंकी गुरुपतवंत सिंह पन्नू से प्रभावित हैं। दिशा ने खुद को ‘किसान आंदोलन’ का समर्थक बताया। दिशा के पिता मैसूर में एथलेटिक्स कोच हैं और माँ घरेलू महिला हैं।

‘फ्राइडे फॉर फ्यूचर’ नामक संस्था की संस्थापकों में से एक दिशा रवि उस टूलकिट का प्रचार-प्रसार करने में सक्रिय रूप से शामिल थीं, जिसमें भारत की छवि खराब करने की साजिश रची गई थी। दिल्ली पुलिस ने पहले ही बताया था कि उसने उस टूलकिट को संज्ञान में लिया है, जिसमें भारत के खिलाफ आर्थिक, सांस्कृतिक, और क्षेत्रीय युद्ध छेड़ने के साथ-साथ गणतंत्र दिवस के दिन हुई हिंसा जैसी वारदातों को अंजाम देने के लिए योजना बनाई गई थी।

डॉक्यूमेंट को बनाने वालों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया था। दिशा रवि को दिल्ली पुलिस की साइबर क्रिमिनल सेल ने गिरफ्तार किया था। पुलिस ने बताया है कि उस डॉक्यूमेंट को तैयार करने और उसका प्रचार-प्रसार करने में वो शामिल है। दिशा ने एक व्हाट्सएप्प ग्रुप बनाया था और उसमें ही इसकी पूरी साजिश रची गई। इस टूलकिट का ड्राफ्ट बनाने के लिए दिशा रवि ने अन्य साजिशकर्ताओं के साथ मिल कर काम किया

पुलिस के अनुसार, इस प्रक्रिया में इन सबने खालिस्तानी संगठन ‘पोएटिक जस्टिस ग्रुप’ का साथ दिया, जो भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने के एजेंडे पर काम करता है। दिशा रवि ने ही इस टूलकिट को ग्रेटा थनबर्ग के साथ शेयर किया था। पुलिस ने बताया है कि गलती से ग्रेटा द्वारा इसे ट्वीट किए जाने के बाद दिशा रवि ने उससे उक्त ट्वीट को डिलीट करने को कहा था। दिशा बस 2 लाइन की एडिटिंग करने की बात कर रही है, लेकिन पुलिस के मुताबिक उस डॉक्यूमेंट में काफी ज्यादा एडिटिंग की गई।

दिशा माउंट कार्मेल कॉलेज में BBA की छात्रा है और पेड़-पौधों पर आधारित भोजन को बढ़ावा देने के दावा करती है। साथ ही वो खुद के शाकाहारी होने की बात भी कहती है। पटियाला हाउस कोर्ट में रोते हुए दिशा ने कहा कि उसने तो बस डॉक्यूमेंट में दो लाइन की एडिटिंग की है। उसके मोबाइल फोन्स और लैपटॉप्स सहित सारे गैजेट्स जब्त कर लिए गए हैं। राजद्रोह के अलावा उसके खिलाफ IPC की धारा 124A (लिखित शब्दों या संकेतों द्वारा भारत में विधि द्वारा स्थापित सरकार के खिलाफ घृणा फैलाना) के तहत भी मामला दर्ज किया गया है।

इन दोनों धाराओं के अलावा धारा-153 (अपने बयानों से सांप्रदायिक शत्रुता पैदा करना), 153A (लिखित बयानों या संकेतों द्वारा दंगे जैसी स्थिति पैदा करने की कोशिश) और 120B (आपराधिक साजिश) के तहत मामला दर्ज हुआ है। ग्रेटा थनबर्ग ने उसके संस्था ‘FFF’ को समर्थन दे रखा है। दिशा ‘गुड माइल्ड’ नामक कंपनी से भी जुड़ी हुई है। कोर्ट में उसने किसानों को ‘भोजन-पानी’ देने वाला बता कर इमोशनल माहौल बनाने की कोशिश की।

ब्रांडिंग के लिए आंटी कमला हैरिस के नाम का इस्तेमाल बंद करें: मीना हैरिस को ह्वाइट हाउस के वकीलों ने चेताया

अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस की भतीजी मीना हैरिस हाल के दिनों में भारत विरोधी बयानों के कारण सुर्ख़ियों में रही हैं। ‘लॉस एंजेल्स टाइम्स’ में प्रकाशित खबर की मानें तो ह्वाइट हाउस के अधिवक्ताओं ने अब उनसे कहा है कि वे अपनी कंपनी की ब्रांडिंग के लिए अपनी आंटी के नाम का इस्तेमाल करना बंद करें। मीना हैरिस एक कंपनी चलाती हैं, जो कपड़ों, वीडियोज, डिजाइनर हेडफोन्स और बच्चों की किताबों का कारोबार करती है।

मीना ने ‘एम्बिशयस गर्ल’ नामक एक किताब भी लिखी है। इसके प्रमोशन हाल ही में NBC टुडे और ABC द व्यू नामक शोज में किया गया था। इस किताब के प्रमोशन के लिए वह कई मैगजीन्स के कवर पर भी दिख चुकी हैं। ह्वाइट हाउस के अधिकारियों ने LA टाइम्स से कहा कि कुछ चीजों को वापस पुराने रूप में नहीं लाया जा सकता, लेकिन इस व्यवहार में बदलाव लाने की ज़रूरत है।

मीना हैरिस के कपड़े की कंपनी ‘फेनोमेनल’ ने कमला हैरिस की तस्वीर वाली स्वेटशर्ट्स निकाले थे, जिन पर ‘वाइस प्रेसिडेंट आंटी’ लिखा था। हालाँकि, चुनाव के बाद उन्हें कमला हैरिस के नाम का इस्तेमाल करने से रोक दिया गया। साथ ही हेडफोन्स पर ‘द फर्स्ट बट नॉट दी लास्ट’ लिखा था, जिसमें कमला हैरिस के रूप में अमेरिका को पहली महिला उपराष्ट्रपति मिलने की बात कही गई थी।

खबर में कहा गया है कि चेतावनी देने के बावजूद मीना हैरिस ने शपथग्रहण समारोह में जाने के लिए एक प्राइवेट जेट का इस्तेमाल किया था। इसका खर्च एक कैम्पेन डोनर ने उठाया था। 36 वर्षीय मीना हैरिस हार्वर्ड में प्रशिक्षित वकील हैं, जिन्होंने 4 वर्ष पहले एक कंपनी की शुरुआत की थी। उनके ब्रांड के कपड़े अक्सर सेलेब्रिटी या सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को पहने देखा गया है।

‘आई एम स्पीकिंग’ लिखे कपड़े अब भी बिक रहे हैं। ये वही पंक्ति है, जिसका इस्तेमाल कमला हैरिस ने तत्कालीन उपराष्ट्रपति माइक पेन्स के साथ बहस के दौरान किया था। उन्होंने एक प्रोडक्शन कंपनी के साथ मिल कमला हैरिस की सफलता पर एक वीडियो भी बनाया। हेडफोन्स पर भी कमला हैरिस द्वारा कहे गए शब्द थे। मीना का दावा है कि वो वैधानिक और नैतिक दायरों में रह कर ही ये सब कर रही हैं। मीना हैरिस पहले Uber में एक बड़े पद पर थीं।

उपराष्ट्रपति की प्रवक्ता सबरीना सिंह ने कहा कि कमला हैरिस और उनका परिवार उच्च-स्तर के नैतिक व्यवहार का प्रदर्शन करेगा। साथ ही उन्होंने ह्वाइट हाउस के नियमों की याद दिलाते हुए कहा कि उपराष्ट्रपति का नाम किसी भी कमर्शियल गतिविधि के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए, जिससे लगे कि वो इस चीज का समर्थन या प्रचार करती हैं। डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ अभियान में बायडेन और हैरिस ने पारिवारिक कारोबारों को लेकर उनकी खूब आलोचना की थी।

बता दें कि मीना हैरिस सोशल मीडिया पर फेक न्यूज़ भी फैलाती हुई नज़र आई थीं। इसमें दावा किया गया था कि 23 साल की लेबर राइट ‘एक्टिविस्ट’ नवदीप कौर को गिरफ्तार कर पुलिस हिरासत में उन पर अत्याचार किए गए और उनका ‘यौन शोषण’ हुआ। उन्होंने झूठा दावा किया कि भारतीय मीडिया ने उनके खिलाफ हो रहे विरोध-प्रदर्शन का महिमामंडन किया। साथ ही ग्रेटा के टूलकिट का समर्थन किया।

‘गाना’ से छुट्टी के बाद तंजिला ने माँगी माफी, कहा- ट्वीट्स डिलीट कर रही हूँ, अकाउंट भी डिएक्टिवेट कर दूँगी

तंजिला अनीस ने रविवार (फरवरी 14, 2021) को अपने विवादित ट्वीट के लिए माफी माँगी। उसने बजरंग दल कार्यकर्ता रिंकू शर्मा की हत्या के बाद एक ट्वीट किया था। इसके बाद उस पर अप्रत्यक्ष तौर पर हत्या को जायज ठहराने का आरोप लगा था। इसे देखते हुए म्यूजिक स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म ‘गाना (Gaana)’ ने तंजिला को नौकरी से निकाल दिया था।

अपने माफीनामे में तंजिला अनीस ने उन लोगों से बिना शर्त माफी माँगी, जो उसके हालिया ट्वीट से आहत थे। उसने कहा, “मैं आपको आश्वस्त करना चाहती हूँ कि मेरा उद्देश्य किसी की धार्मिक भावनाओं या आस्था को आहत करना नहीं था। अगर मैंने अनजाने में ऐसा किया है, तो उसके लिए बिना शर्त माफी माँगती हूँ।”

Tanzila Anis apology
तंजिला अनीस का माफीनामा

तंजिला अनीस ने यह भी कहा कि वह अपने सोशल मीडिया अकाउंट को डिएक्टिवेट कर देगी। फिलहाल वह अपने ट्वीट और सोशल मीडिया पोस्ट डिलीट करने में लगी है। हालिया विवाद के दौरान उसके कई पुराने हिंदूफोबिक ट्वीट्स के स्क्रीनशॉट भी वायरल हुए थे।

माफीनामे में उसने कहा, “मैंने अपनी नौकरी भी खो दी है और इस महान राष्ट्र की बेटी के रूप में कुछ गोपनीयता चाहती हूँ।” फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि उसके खिलाफ दायर आपराधिक शिकायत पर इसका कोई प्रभाव पड़ेगा या नहीं।

बता दें कि रिंकू शर्मा की निर्मम हत्या के बाद तंजिला अनीस ने एक ट्वीट किया था। इसमें कहा गया था: बजरंग दल का कार्यकर्ता। इतना काफी है। विवाद होने पर उसने ट्वीट डिलीट करते हुए सफाई देते हुए कहा था कि उसे हत्या के बारे में जानकारी नहीं थी। उसके ट्वीट का मकसद केवल यह बताना था कि ‘कट्टरपंथी संगठन’ बजरंग दल से जुड़े व्यक्ति को ‘एक्टिविस्ट’ नहीं कहा जाना चाहिए।

‘गाना’ ने तंजिला को नौकरी से निकालते हुए सोशल मीडिया में जारी एक बयान में कहा था, “गाना देश के सभी धर्मों और समुदायों को सम्मान करता है। हाल ही में ज्वाइन करने वाली एक कर्मचारी के सोशल मीडिया पोस्ट के आलोक में हमारा कहना है कि यह हमारे मूल्यों का प्रतिनिधित्व नहीं करता। अब वह कंपनी की कर्मचारी नहीं है।”

उससे पहले तंजिला के खिलाफ चंडीगढ़ में आपराधिक शिकायत की गई थी। साथ ही चंडीगढ़ भाजपा के प्रवक्ता गौरव गोयल ने उसे निकाल बाहर करने की माँग ‘Gaana’ से की थी। गोयल ने ‘Gaana’ के CEO प्रशान अग्रवाल को पत्र लिखकर उनकी कंटेंट हेड तंज़िला पर हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करने और राम मंदिर के लिए चंदा इकट्ठा करने के कारण रिंकू शर्मा की हत्या का जश्न मनाने का आरोप लगाया था।

‘एनर्जी ड्रिंक दी, नंगा किया, अश्लील काम को मजबूर किया’: ‘गंदी बात’ वाली गहना वशिष्ठ पर गैंगरेप का भी आरोप

‘गंदी बात’ फेम अभिनेत्री गहना वशिष्ठ उर्फ वंदना तिवारी पर सामूहिक दुष्कर्म और गलत तरीके से कैद करने के आरोप लगाए गए हैं। बता दें कि अश्लील वीडियो शूट करने और उसे अपनी वेबसाइट पर अपलोड करने के आरोप में अभिनेत्री पहले ही गिरफ्तार की जा चुकी है।

पुलिस ने अभिनेत्री गहना वशिष्ठ और 3 लोगों पर महिलाओं के साथ अश्लील हरकतें करने का मामला दर्ज किया है। बता दें कि ये आरोप एक 24 वर्षीय मॉडल के द्वारा लगाया गया है। जिसके अनुसार, उसे एक वीडियो शूट के दौरान 3 पुरुषों के साथ अश्लील काम करने के लिए मजबूर किया गया था।

इससे पहले 21 साल की मॉडल ने आरोप लगाया था कि इस गैंग ने उसका भी शोषण किया था। 21 वर्षीय अभिनेत्री ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि उसने एक ब्यूटी कॉन्टेस्ट जीता था। वह अपने करियर को आगे बढ़ाने के लिए मौके की तलाश में थी, तभी वह अलीशा नाम की महिला के संपर्क में आई। अलीशा ने उसकी मुलाक़ात ‘मोनू’ नाम के कैमरामैन से कराई। इसके बाद उसे एक नशीली ‘एनर्जी ड्रिंक’ दी गई थी और नग्न अवस्था में उसके साथ अश्लील दृश्य फ़िल्माए गए थे। 

इस घटना के बाद जब पीड़िता मॉडल अपने घर गई तब उसके दोस्तों ने बताया कि उसके कई वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए गए हैं। इसके बाद उसने पूरे मामले की शिकायत पुलिस से की और तभी उसे पता चला कि अलीशा और यास्मीन खान एक ही व्यक्ति हैं।  

मामले में पुलिस ने यास्मीन बेग खान उर्फ़ रोवा, प्रतिभा नलावडे, मोनू गोपालदास जोशी, भानुसूर्यम ठाकुर, मोहम्मद आसिफ और सैफी को धर-दबोचा है। पुलिस का मानना है कि इस रैकेट के पीछे यास्मीन बेग खान उर्फ़ रोवा का दिमाग है।

गौरतलब है कि गहना वशिष्ठ को मुंबई क्राइम ब्रांच ने शनिवार (फरवरी 6, 2021) को गिरफ्तार किया था। गहना वशिष्ठ को ‘मिस एशिया बिकनी क्राउन’ विजेता के रूप में जाना जाता है। गहना पर एक वेबसाइट के लिए एडल्ट वीडियो शूट करने और उन्हें अपलोड करने का आरोप है। 

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि वो स्ट्रगल कर रहीं एक्ट्रेस को काम का लालच देकर पोर्न वीडियो शूट करवाती थी। काम के एवज में हर फिल्म के लिए 15,000 से 20,000 रुपए भुगतान करती थी। पुलिस को आरोपितों के सैकड़ों एक्स-रेटेड वीडियो मिले हैं।

मंगोलपुरी से मंगलदोई तक हिंदुओ कहना ही होगा- 21 की दिशा ही नहीं, फिदायीन मोहम्मद आदिल डार भी था

मुस्लिम बहुल मंगोलपुरी का K ब्लॉक। इसी ब्लॉक में रहते थे 26 साल के रिंकू शर्मा। उनके घर से कुछ ही दूर वह भीड़ भी रहती है, जिसने निर्ममता से उनको मार डाला। संकरी गलियों वाले इस ब्लॉक में इन दिनों काफी चहलकदमी है। हिंदू खौफ में हैं। दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बल की भारी तैनाती है। मीडिया के कैमरे चमक रहे हैं। बजरंग दल, विहिप, बीजेपी नेता एक-एक कर परिवार का दुख बाँटने पहुँच रहे हैं। न्याय के लिए कैंडल मार्च निकल रहा है। पीड़ित परिवार के लिए कुछ लोग ऑनलाइन फंड जुटा रहे हैं।

मंगोलपुरी उसी दिल्ली में है, जहाँ 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली की आड़ में हिंसा हुई। लाल​ किले पर तिरंगे का अपमान हुआ। यह सब कुछ जिस कथित किसान आंदोलन की आड़ में हुआ उसके समर्थन में दिल्ली का मुख्यमंत्री अपना पूरा अमला उतार देता है। देश का मुख्य विपक्षी दल और उसका युवराज अपनी पूरी ताकत झोंक देता है।

रिंकू शर्मा के परिवार के आँसू पोंछने के वक्त आपकी दिल्ली का मुख्यमंत्री कहाँ हैं? कहाँ हैं उनका अमला? कहाँ है कॉन्ग्रेस? युवराज कहाँ हैं?

कॉन्ग्रेस के युवराज राहुल गाँधी (14 फरवरी 2021) रविवार को असम में थे। उसी असम में जहाँ मंगलदोई है। उसी असम में जहाँ अगले कुछ महीनों में चुनाव हैं। मंगलदोई के दर्द पर जाने से पहले ये जानते हैं कि राहुल ने असम में कहा क्या?

असम के शिवसागर की रैली में उन्होंने कहा, “हमने ये गमछा पहना है इस पर लिखा है सीएए। इस पर हमने क्रॉस लगा रखा है मतलब चाहे जो हो जाए सीएए नहीं होगा! हम दो हमारे दो…। अच्छी तरह सुन लो, (सीएए) नहीं होगा, कभी नहीं होगा।” उनके एक और बयान पर गौर करिए। इसमें उन्होंने कहा, “असम के चाय बगान में काम करने वाले वर्कर रोजाना 167 रुपए की मजदूरी पाते हैं, जबकि गुजरात को चाय बगान मिलते हैं। हम वादा करते हैं कि असम के वर्कर को रोजाना 365 रुपए की मजदूरी देंगे। इसके लिए पैसा कहाँ से आएगा? यह गुजरात के व्यापारियों से आएगा।”

गुजरात से कॉन्ग्रेस और गाँधी परिवार की घृणा समझी जा सकती है। वहाँ के एक नेता ने गुजरात को ऐसे किले में तब्दील किया जो कॉन्ग्रेस के लिए अभेद्य हो गया। जिसने केंद्र से कॉन्ग्रेस को उखाड़ फेंका। जिसने कॉन्ग्रेस को उसके सबसे बुरे दौर में धकेल दिया। ऐसी दुर्गति में जिसकी उसने सपनों में भी कल्पना नहीं की होगी। जहाँ से बाहर निकलने के उसे ख्वाब भी नहीं आते होंगे। जिसकी आभा ऐसी है कि मंदिर-मंदिर प्रदक्षिणा करने, खुद को जनेऊधारी ब्राह्मण बताने और हार्दिक-जिग्नेश जैसों को हवा देकर भी 2017 में वह गुजरात जीत नहीं पाई।

पर उसे हिंदुओं की प्रताड़ना इतनी क्यों भाती है? यह हम नहीं कह रहे। यह खुद राहुल ने आज शिवसागर की रैली में दोहराया है। उन्होंने जिस सीएए (CAA) को लागू नहीं होने देने का संकल्प दोहराया है, वह किनके लिए है? पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश जैसे इस्लामी मुल्कों के प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने के लिए। ये अल्पसंख्यक कौन हैं? ये हैं- हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध और ईसाई।

सीएए-एनआरसी के नाम पर देश में हुई हिंसा और शाहीनबाग जैसे प्रयोग छिपे नहीं हैं। कथित किसान आंदोलन भी उन्हीं प्रयोगों का हिस्सा है। असम में राहुल के इस बात पर जोर देने की वजह स्पष्ट है।

असल में एनआरसी असम के मंगलदोई के जिक्र के बिना अधूरी है। अपनी किताब ‘द लास्ट बैटल आफ सरायघाट’ में रजत सेठी और शुभ्राष्ठा ने लिखा है कि इमरजेंसी के बाद हुए 1977 के चुनावों में असम में कॉन्ग्रेस को 14 में से 10 सीटें मिली। तीन सीटें जनता पार्टी को मिली थीं। इनमें एक सीट मंगलदोई की थी। इस सीट पर जनता पार्टी के हीरा लाल पटवारी (तिवारी) चुनाव जीते थे। मंगलदोई लोकसभा क्षेत्र में 5,60, 297 मतदाता थे। एक साल बाद हीरा लाल की मौत हो गई तो उपचुनाव कराया गया।

साभार: द लास्ट बैटल आफ सरायघाट

महज़ एक साल से थोड़े से अधिक समय में जब मतदाता सूची (वोटर लिस्ट) अपडेट की गई तो मतदाताओं की संख्या 80,000 बढ़ गई! यानी रातों-रात 15% की एकाएक वृद्धि! इनमें से लगभग 70,000 मतदाताओं का मजहब इस्लाम था। तमाम नागरिक समूहों ने इसके विरुद्ध शिकायतें दर्ज कराईं। ऐसे मामलों की संख्या भी लगभग 70 हज़ार थी, इनमें से 26 हज़ार ही टिक पाए। यहीं से भारतीय राजनीति में ‘अवैध बांग्लादेशी’ शब्द आता है, जिसका बड़ा हिस्सा बांग्लादेशी मुस्लिमों का है।

इसी वर्ग को शिवसागर में राहुल गाँधी सीएए के जरिए संदेश दे रहे थे। इनके लिए वह बदरुद्दीन अजमल की ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) जैसे दलों को साधते हैं। ये वही अजमल हैं, जिनके लिए असम के मंत्री हिमांत ​बिस्व सरमा ने कहा है कि समाज सेवा के लिए वह कट्टपंथी संगठनों से पैसा लेते हैं। इसके जरिए वह एक ऐसे नेटवर्क को पोषित करते हैं जो असम की संस्कृति के लिए खतरनाक है।

उनका लक्ष्य स्पष्ट है। वे पूरे असम को मंगलदोई बनाना चाहते हैं। उनकी चिंता 26 साल का रिंकू शर्मा नहीं, 21 साल की दिशा रवि है।

सोचना आपको है। शुतुरमुर्ग की तरह जमीन में सिर गाड़े बैठे रहेंगे या फिर जब वे टूलकिट की साझेदार दिशा रवि की गिरफ्तारी पर उम्र का हवाला देंगे तो आप उठकर खड़े होंगे, यह बताने को कि पुलवामा में आतंकी हमले को अंजाम देने वाला जैश का फिदायीन मोहम्मद आदिल डार भी 21 बरस का था।

पाकिस्तानी बानो बेगम गिरफ्तार, शादी में शामिल होने कराची से आई और UP में बन गई ग्राम प्रधान

उत्तर प्रदेश पुलिस ने पाकिस्तानी महिला बानो बेगम को गिरफ्तार कर लिया है। शनिवार (फरवरी 13, 2021) को उसे अदालत में पेश किया गया। अदालत के आदेश पर उसे जेल भेज दिया गया। बानो बेगम पर फर्जी दस्तावेज बनाकर पंचायत चुनाव लड़ने का आरोप है। वह एटा जिले के जलेसर तहसील के गुदऊ गाँव की ग्राम प्रधान भी बन गई थी।

1 जनवरी 2021 को उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके बाद से वह फरार चल रही थी। गुप्त सूचना के आधार पर जलेसर पुलिस ने उसे उसके घर के पास से गिरफ्तार किया।

यूपी पुलिस ने ग्रामीणों द्वारा दर्ज की गई शिकायतों के आधार पर उसके खिलाफ मामला दर्ज किया था। इसमें दावा किया गया था कि पाकिस्तानी नागरिक होने के बावजूद बानो ने 2015 में ग्राम पंचायत का चुनाव लड़ा और उसमें जीत दर्ज की। पंचायत प्रमुख शहनाज़ बेगम की मृत्यु के बाद, वह अंतरिम पंचायत प्रमुख बन गई।

35 साल पहले बानो बेगम एक शादी में शामिल होने कराची से भारत आई। फिर एटा में अख्तर अली से निकाह कर ली। उसके बाद से वह अपने दीर्घकालिक वीज़ा की अवधि कई बार बढ़वा चुकी थी।

बानो ने बनवाए थे फर्जी दस्तावेज

गाँव के निवासी कुवैदान खान ने 10 दिसंबर 2019 को डिस्ट्रिक्ट पंचायत राज ऑफिसर (डीपीआरओ) आलोक प्रियदर्शी से शिकायत की। शिकायत में उन्होंने कहा था कि बानो बेग़म पाकिस्तान की नागरिक है। इस बात के सामने आते ही पूरे गाँव में हडकंप मच गया। फिर बानो बेग़म ने ग्राम प्रधान पद से इस्तीफ़ा दे दिया था। डीपीआरओ आलोक प्रियदर्शी ने पूरे प्रकरण के बारे में ग्राम पंचायत सचिव और एटा डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट सुखलाल भारती को सूचित किया। मजिस्ट्रेट सुखलाल भारती ने बानो बेग़म पर मामला दर्ज करने और जाँच शुरू करने का आदेश दिया है। 

जाँच के कुछ ही समय बाद यह पता चला कि बानो बेग़म भारत की नागरिक नहीं है। उसने नकली वोटर आईडी और आधार कार्ड बनवाए थे। आरोपों के मुताबिक़ गुदऊ ग्राम पंचायत सचिव ध्यान सिंह ने प्रधान पद के लिए बेग़म बानो के नाम का सुझाव दिया था। उन लोगों के खिलाफ़ भी जाँच की जा रही है जिन्होंने बेग़म को नकली दस्तावेज़ उपलब्ध कराने में मदद की।