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ममता के मंत्री जाकिर हुसैन पर बम से हमला करने वाला निकला बांग्लादेशी नागरिक, CID ने पकड़ा

पश्चिम बंगाल अपराध जाँच विभाग (CID) ने पिछले हफ्ते बांग्लादेश की सीमा से सटे मुर्शिदाबाद के नीमतिता रेलवे स्टेशन में हुए विस्फोट के सिलसिले में एक बांग्लादेशी नागरिक को हिरासत में लिया है। बता दें कि इस हमले में राज्य मंत्री जाकिर हुसैन और 20 से अधिक अन्य लोग हमले में घायल हुए थे। रिपोर्ट्स के अनुसार, सीआईडी अधिकारियों ने हमले के सिलसिले में एक व्यक्ति को हिरासत में लेने की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि जाँच अभी चल रही है।

17 फरवरी को एक जानलेवा हमले में, राज्य सरकार के मंत्री जाकिर हुसैन पर बम फेंका गया था। जाकिर हुसैन कोलकाता जाने के लिए यहाँ पहुँचे थे। जब वह अपनी ट्रेन का प्लेटफॉर्म नंबर 2 पर इंतजार कर रहे थे, तभी अज्ञात हमलवारों ने मंत्री पर बम से हमला कर दिया। बम हमले के दौरान हुसैन और अन्य को गंभीर चोटें आई थीं। फिलहाल शहर के एक सरकारी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है।

सोशल मीडिया पर घटना का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में मंत्री अपने सुरक्षाकर्मियों के साथ स्टेशन की ओर जा रहे थे कि तभी पीछे से अचानक धमाका होता है और चिल्लाने की आवाजें आती हैं।

इस हमले के बाद, पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने दावा किया था कि जाकिर हुसैन पर बम हमला एक साजिश का हिस्सा था क्योंकि कुछ लोग उन पर दूसरी पार्टी में शामिल होने का दबाव बना रहे थे।

ममता बनर्जी ने कहा, “यह मंत्री जाकिर हुसैन पर एक पूर्व नियोजित हमला था। कुछ लोगों ने दावा किया है कि विस्फोट को दूर से नियंत्रित किया गया था। यह एक साजिश है। कुछ लोग पिछले कुछ महीनों से जाकिर हुसैन पर पार्टी में शामिल होने का दबाव बना रहे थे। मैं कुछ भी खुलासा नहीं करना चाहती, क्योंकि जाँच जारी है।”

गौरतलब है कि यह धमाका ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ जोरों शोरों पर है। घटना को लेकर राज्य भाजपा अध्यक्ष ने कहा, “यह घटना इस बात का प्रमाण है कि राज्य में कानून व्यवस्था नहीं है। यहाँ तक ​​कि मंत्री भी सुरक्षित नहीं हैं।”

कर्नाटक: चलती बस में छात्रा को छेड़ने वाला अरबी स्कूल का शिक्षक मोहम्मद सैफुल्ला गिरफ्तार

कर्नाटक की उप्पिनंगडी (Uppinangady) पुलिस ने 23 फरवरी को 32 वर्षीय अरबी शिक्षक मोहम्मद सैफुल्ला को बस में एक छात्रा के साथ यौन उत्पीड़न के आरोप में में गिरफ्तार किया है। ‘Daijiworld’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, आरोपित सैफुल्ला सुल्लिया के एक अरबी स्कूल में पढ़ाता है। सैफुल्ला ने धर्मशाला से उप्पिनंगडी की ओर जा रही एक बस में लड़की के साथ छेड़खानी की।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोहम्मद सैफुल्ला बस में यात्रा करते समय लगातार लड़की को गलत तरीके से छू रहा था और परेशान कर रहा था। जिसके बाद लड़की ने उसके व्यवहार पर आपत्ति जताई और बस कंडक्टर को सूचित किया।

वहीं लड़की की शिकायत पर ड्राइवर ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बस को उप्पिनंगडी पुलिस स्टेशन के सामने बस को रोक दिया। सैफुल्ला को पुलिस के हवाले कर दिया गया। छात्रा ने फिर थाने में सैफुल्ला के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद उप्पिनंगडी पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया।

गौरतलब है कि एक ऐसी ही घटना 22 फरवरी को भी सामने आई थी जब बेंगलुरु से मंगलुरु जा रही एक छात्रा को रफीक नाम के एक व्यक्ति ने अपनी आपत्तिजनक हरकतों से परेशान किया था। वहीं जब लड़की के एक रिश्तेदार ने उप्पिनंगडी बस अड्डे पर उसकी हरकतों पर आपत्ति जताई, तो एक गिरोह ने तुरंत आरोपित का समर्थन करते हुए रिश्तेदार पर हमला कर दिया। जिसके बाद परिजनों ने उप्पिनंगडी पुलिस को इस घटना के बारे में सूचित किया। जिस पर तुरंत कार्रवाई करते हुए पुलिस ने आरोपित को धर लिया और चेतावनी देने के बाद उसे छोड़ दिया।

बंगाल: फ्री वैक्सीन बाँटने के लिए दीदी ने ‘दंगाबाज’ मोदी से माँगी मदद, भाषण में उगला जहर

पश्चिम बंगाल की सीएम एवं तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी ने जहाँ एक तरफ पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर प्रदेश सरकार की तरफ से कोरोना के टीकों की खरीद को लेकर मदद माँगी है तो वहीं दूसरी ओर, उन्होंने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘सबसे बड़ा दंगाबाज’ करार दिया है।

कोरोना वैक्सीन के लिए माँगी मदद

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राज्य सरकार की ओर से कोरोना के टीकों की खरीद को लेकर मदद माँगी। दरअसल, टीएमसी अध्यक्ष राज्य के सभी लोगों को मुफ्त वैक्सीन लगाना चाहती है इस कारण बड़े पैमाने पर टीका खरीदना चाहती है।

ममता बनर्जी ने लिखा, ”पश्चिम बंगाल सरकार राज्य के सभी लोगों को मुफ्त वैक्सीनेशन के लिए टीका खरीदना चाहती है। मैं पीएम मोदी से अपील करती हूँ कि टीकों की खरीद में हमारी मदद करें जिससे की राज्य के लोगों को मुफ्त में यह वैक्सीन दिया जाए।”

ममता बनर्जी ने पीएम मोदी को लिखा है, “राज्य सरकार ने कोरोना टीकाकरण का कार्यक्रम शुरू किया है। सभी स्वास्थ्यकर्मियों, पुलिसकर्मियों, नगरपालिका के कर्मचारियों और राजस्व के अधिकारियों के साथ-साथ फ्रंटलाइन वर्कर्स को टीका दिया जा रहा है। राज्य सरकार आम लोगों तक शीघ्र ही टीका पहुँचना चाहती है। इस बाबत वह टीका निश्चित प्राधिकरण से खरीदना चाहती है, ताकि आम लोगों को निःशुल्क टीका दे सके।

बता दें, पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए ममता बनर्जी का यह पत्र सियासी माना जा रहा है। बिहार में भाजपा की राजनीतिक रणनीति को देखते हुए ममता बनर्जी ने भी चुनाव के मद्देनजर राज्य में फ्री वैक्सीन की घोषणा की थी।

सीएम ममता ने पीएम मोदी को कहा दंगाबाज

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री हुगली जिले के शाहगंज में एक रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पूरे देश में झूठ और नफरत फैला रहे हैं। उन्होंने कहा, “नरेंद्र मोदी देश के सबसे बड़े दंगाबाज हैं। ट्रंप के साथ जो हुआ, उनके (मोदी के) साथ उससे भी बुरा होगा। हिंसा से कुछ हासिल नहीं किया जा सकता।”

उन्होंने आगे कहा, “हमेशा आप (बीजेपी) कहते हैं कि तृणमूल कॉन्ग्रेस ‘तोलाबाज’ है, लेकिन मैं आज कहती हूँ आप (बीजेपी) ‘दंगाबाज और ढंगाबाज’ है। बंगाल पर बंगाल शासन करेगा। बंगाल पर गुजरात शासन नहीं करेगा। हमें बंगाल नहीं, बांग्ला चाहिए। मोदी बंगाल पर राज नहीं करेंगे। बंगाल पर गुंडे और बदमाश राज नहीं करेंगे।”

बनर्जी ने कहा, “मैं विधानसभा चुनाव में गोलकीपर रहूँगी और तुम (भाजपा) एक भी गोल नहीं कर पाओगे। सभी शॉट गोल पोस्ट के ऊपर से चले जाएँगे।” इसके अलावा मुख्यमंत्री ने कोयले की हेराफेरी से जुड़े एक घोटाले के सिलसिले में तृणमूल कॉन्ग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी की पत्नी रुजीरा बनर्जी से सीबीआई पूछताछ की भी आलोचना की और इसे एक महिला का अपमान बताया।

भाषण के दौरान पीएम मोदी पर ममता बनर्जी इस कदर बौखलाई की उन्होंने सारी मर्यादा तार तार करते हुए पीएम मोदी व अमित शाह को रावण व दानव तक करार कर दिया। उन्होंने कहा, “बहुत ज्यादा बोल रहे हैं और दो माह बाकी हैं, देखें कौन बाद में बोलता है। नरेंद्र मोदी झूठ बोल रहे हैं। बोल रहे हैं, बंगाल ले लेंगें, लेकिन बंगाल को लेना इतना आसन नहीं है। इस चुनाव में खेला होबे.. खेला तो होबे.. (खेल होगा) बीजेपी देखो खेला होबे..”

ममता बनर्जी ने कहा, “हमें सीबीआई की धमकी दे रहे हैं, लेकिन गिरफ्तार करके दिखाए। कितने लोगों को गिरफ्तार करेंगे। 20 लाख लोगों को गिरफ्तार करना होगा। तुम मुझे यहां दबाओगे, मैं दिल्ली में पेड़ बनकर उठूँगी। एक घायल बाघिन खतरनाक होती है। खेल जारी है। ममता बनर्जी ने लोगों से कहा, “यदि आप उन्हें बंगाल में हरा सकते हैं, तो जान लें कि वे भारत से गायब हो जाएँगे।”

महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस ने मुस्लिम और मराठा आरक्षण के समर्थन में किया प्रस्ताव पारित

महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस की संसदीय समिति की एक बैठक ने मंगलवार (23 फरवरी, 2021) को राज्य में मुस्लिम और मराठा आरक्षण के समर्थन में एक प्रस्ताव पारित किया है। वहीं कृषि कानून का विरोध करते हुए कॉन्ग्रेस पार्टी ने यह भी कहा कि राज्य में केंद्र सरकार द्वारा पारित कृषि कानूनों को लागू नहीं किया जाना चाहिए।

संसदीय समिति की बैठक की अध्यक्षता महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले द्वारा पार्टी के राज्य प्रभारी एचके पाटिल की उपस्थिति में आयोजित की गई थी। बैठक में कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता बाबासाहेब थोराट, अशोक चव्हाण, पृथ्वीराज चव्हाण और सुशीलकुमार शिंदे जैसे कई दिग्गज नेता मौजूद रहे।

प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने बैठक के दौरान कहा कि कॉन्ग्रेस राज्य में सभी समुदायों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है और मुस्लिम समुदाय के लिए आरक्षण लागू करना महाविकास अघाड़ी सरकार के प्रोग्राम का हिस्सा है, ताकि सभी समुदायों के कल्याण हो सके।

कॉन्ग्रेस ने मुस्लिम आरक्षण के अलावा, केंद्र द्वारा पारित कृषि कानूनों को रद्द करने, राज्य में अलग-अलग कृषि कानूनों के निर्माण, राज्य में वैधानिक बोर्ड्स के लिए धन के संवितरण और धन के आवंटन के लिए वीजेएनटी और अन्य पिछड़ा वर्ग के प्रस्तावों की माँग को भी पारित किया। इसके अलावा पार्टी ने संगठन को मजबूत करने के लिए कई अन्य कार्यक्रमों की भी चर्चा की। पार्टी ने संकल्प अभियान शुरू करने का फैसला किया, जिसके तहत राज्य के नेता अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन को वापस पाने के लिए प्रयास करेंगे।

बता दें कि संसदीय समिति की बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि पार्टी महागठबंधन (MVA) के सहयोगियों – शिवसेना और NCP के साथ स्थानीय निकाय चुनावों में पार्टी की स्थानीय इकाइयों के साथ परामर्श करेगी।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में जब से महाविकास अघाड़ी ने गठबंधन से सरकार बनाई है, तब से गठबंधन से जुड़ी दूसरी पार्टियाँ राज्य में मुस्लिमों के लिए आरक्षण लाने का दबाव बना रही हैं। उद्धव ठाकरे के जनवरी 2020 में मुख्यमंत्री बनने के एक महीने बाद, मीडिया में ऐसी कई रिपोर्ट्स सामने आईं, जिसमें कहा गया था कि महाविकास अघाड़ी सरकार राज्य में मुस्लिमों के लिए आरक्षण लागू करने की तैयारी कर रही है।

वहीं अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री नवाब मलिक ने फरवरी 2020 में कहा था कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली MVA सरकार जल्द ही अध्यादेश लाएगी ताकि राज्य में शैक्षणिक संस्थानों में मुस्लिमों के लिए 5 प्रतिशत आरक्षण का विस्तार किया जा सके। इसके अलावा उन्होंने राज्य विधान परिषद को आगामी शैक्षणिक वर्ष की शुरुआत और प्रवेश प्रक्रिया से पहले इस संबंध में ‘उचित कार्रवाई’ करने का आश्वासन भी दिया था।

UP: लव-जिहाद के खिलाफ विधेयक विधानसभा में ध्वनि मत से पास, नाम बदलकर निकाह करने वालों के ‘अच्छे दिन’ समाप्त

उत्तर प्रदेश में जबरन धर्म परिवर्तन और लव-जिहाद (Love Jihad) के मामलों पर रोक लगाने के लिए बनाया गया उत्तर प्रदेश अवैध धर्म परिवर्तन विधेयक 2021 विधानसभा में ध्वनि मत से पारित हो गया है। योगी सरकार ने प्रदेश में धर्मांतरण जैसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए ये ड्राफ्ट तैयार किया था। ‘उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध विधेयक 2021’ के मुताबिक, जबरदस्ती धर्मांतरण कराने वाले को अलग-अलग श्रेणी में एक साल से 10 साल तक की सजा का प्रावधान है। साथ ही कम से कम 50,000 रुपए का जुर्माना भी पीड़ित पक्ष को देना होगा।

बुधवार (फरवरी 24, 2021) को योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश विधानसभा में अपने सबसे महत्वपूर्ण विधेयक उत्तर प्रदेश अवैध धर्म परिवर्तन विधेयक 2021 यानी एंटी लव जिहाद विधेयक ध्वनि मत से पारित किया। हालाँकि अभी यह विधेयक विधान परिषद में पास होने के बाद राज्यपाल के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा जाएगा। उसके बाद ही ये कानून का रूप लेगा।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने ‘ग्रूमिंग जिहाद (लव जिहाद)’ के खिलाफ बने विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश 2020 पर हस्ताक्षर कर इसे मंजूरी दे दी थी। इसके मुताबिक अगर कोई सामूहिक धर्म परिवर्तन करवाता है तो उसे 3 साल से 10 साल तक सजा दी जाएगी। अध्यादेश के उल्लंघन की दोषी किसी संस्था या संगठन के विरुद्ध भी सजा का प्रावधान होगा।

इसके अलावा कम से कम 50,000 रुपए का जुर्माना भी देना होगा। साथ ही, धर्म परिवर्तन में शामिल संगठनों का रजिस्ट्रेशन कैंसल कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। नाम छिपा कर छद्म नाम से शादी करने वालों को 10 साल तक की सज़ा मिलेगी। इसके साथ ही यह अपराध संज्ञेय अपराध की श्रेणी में होगा और गैर जमानती (Non Bailable) होगा। अभियोग का विचारण प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट की कोर्ट में किया जाएगा।

अध्यादेश के अनुसार, नाबालिग लड़की, अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति की महिला का जबरन धर्म परिवर्तन कराए जाने के मामले में कम से कम दो वर्ष तथा अधिकतम 10 वर्ष तक का कारावास तथा कम से कम 25 हजार रुपए जुर्माना होगा।

योगी आदित्यनाथ ने पहले ही कहा था, “यह अध्यादेश ऐसे लोगों के लिए चेतावनी है, जो अपनी पहचान छिपा कर हमारी बहनों के सम्मान के साथ खिलवाड़ करने का प्रयास करते हैं। हमने जो कहा था, वह करके दिखाया है। साथ ही यह भी कहने के लिए आए हैं कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश दिया है शादी ब्याह के लिए धर्म परिवर्तन आवश्यक नहीं है। ऐसा नहीं किया जाना चाहिए और न ही इसे मान्यता मिलनी चाहिए। इस बात को ध्यान में रखते हुए सरकार भी निर्णय ले रही है कि हम लव जिहाद को सख्ती से रोकने का प्रयास करेंगे।” 

जापान: अकेलेपन से जूझ रहे लोगों के लिए बनाया Loneliness मंत्रालय, जानिए क्यों पड़ी इसकी जरूरत

ग्यारह सालों में पहली बार जापान में सुसाइड के मामले बढ़ने लगे हैं। ऐसे में, सरकार ने इस मुसीबत से निपटने के लिए एक ‘Minister of Loneliness’ (अकेलेपन को दूर करने के लिए एक मंत्री) को नियुक्त किया है। ये मिनिस्टर न केवल स्थानीय लोगों के अकेलेपन को दूर करने के तरीकों पर काम करेगा बल्कि सामाजिक अलगाव कम करना भी इसी की जिम्मेदारी होगी।

जापान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा (Yoshihide Suga) ने टेटूसि सकामोटो (Tetsushi Sakamoto ) को ‘लोनलीनेस मिनिस्टर’ के रूप में नियुक्त किया। सकामोटो पहले से ही जापान में घटती जन्म दर पर काम करने में लगे थे और क्षेत्रीय पुनरोद्धार को बढ़ावा दे रहे थे।

12 फरवरी को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीएम सुगा ने सकामोटो को नियुक्त करते हुए कहा, “पुरुषों के मुकाबले महिलाएँ अकेलेपन से ज्यादा जूझ रही हैं और इसलिए आत्महत्या के आँकड़े बढ़ रहे हैं। मुझे उम्मीद है कि अब इन परेशानियों को पहचानेंगे और बड़े पैमाने पर नीतिगत उपायों को बढ़ावा देंगे।”

जापान में अकेलेपन का इतिहास

जापान में लोगों के लिए अकेलापन एक बहुत बड़ी समस्या रही है। इसे ‘Hikikomoi’ के साथ डिस्कस किया जाता रहा है, जिसका मतलब होता है बहुत बड़े स्तर पर सामाजिक अलगाव। कई बार इससे निपटने की कोशिशें हुईं। जैसे इंजिनियर्स ने रोबोट बनाए जो किसी का हाथ पकड़ने में समर्थ थे ताकि इंसान को अकेले होते हुए भी अकेलापन महसूस न हो। इसके अलावा, ऐसी व्यवस्थाएँ चालू की गईं जहाँ लोगों को साथ देने के लिए पैसे लिए जाते। गले लगने के साथ दोस्त,ब्वॉयफ्रेंड/ गर्लफ्रेंड भी पैसों के बदले लेने की सर्विस जापान में है।

रिपोर्ट के अनुसार, जापान में महामारी के दौरान ये समस्या बढ़ी जब लोग सामाजिक तौर पर अधिक अलग हो गए। इसी के बाद 11 वर्षों में सुसाइड केसों में बढ़त पहली बार दर्ज किया गया।

कोरोना के दौरान जब लोग पहले से ज्यादा एक दूसरे से अलग अलग रहने लगे तो जापान में सुसाइड केसों में बढ़ौतरी देखी गई। जापान टाइम्स के अनुसार, केवल साल 2020 में 20, 919 लोगों ने आत्महत्या की। ये आँकड़ा पिछले साल के मुकाबले 750 ज्यादा थे। इनमें युवा लोग और महिलाएँ बहुत ज्यादा थी। अकेले अक्टूबर में जापान में  879 महिलाओं की मौत हुई जो 2019 की तुलना में 70% अधिक थी।

जापान में आत्महत्या का अध्ययन करने वाली एक प्रोफेसर मिचिको उएदा का इस पर कहना है कि कई महिलाएँ अकेले रह रही हैं, और बड़ी संख्या में उनके पास स्थिर रोजगार नहीं है। इसलिए जब भी कुछ होता है तो वह उन्हें बहुत बुरी तरह चोट पहुँचाता है।

अकेलापन एक विश्वव्यापी मसला है

जापान अकेला देश नहीं है जो अकेलेपन से लड़ रहा है। साल 2017 की रेड क्रॉड रिपोर्ट बताती है कि  ब्रिटेन में 9 मिलियन लोग इस समस्या से जूझ रहे थे या इससे हार मान चुके थे। इस स्टडी के रिलीज होने के बाद यूके पहला ऐसा देश बना था जिसने लोनलीनेस मिनिस्टर का कॉन्सेप्ट अपनाया था।

इस पर रमोना हर्डमैन ने कहा था कि अकेलापन ऐसी अनचाही भावना है और एक ऐसा अनुभव है जिसके नतीजे खराब स्वास्थ्य के परिणाम देते हैं। इसी प्रकार  2018 की रिपोर्ट में, वैश्विक स्वास्थ्य संगठन Cigna ने कहा कि अकेलापन मृत्यु दर पर उतना ही प्रभाव डालता है जितना कि एक दिन में 15 सिगरेट पीने से। यह मोटापे से भी अधिक खतरनाक है।

UP पुलिस की गाड़ी में बैठने से साफ मुकर गया हाथरस में दंगे भड़काने की साजिश रचने वाला PFI सदस्य रऊफ शरीफ

उत्तर प्रदेश पुलिस की जीप में बैठना अपराधियों के लिए किसी खतरे की घंटी से कम नहीं है। उत्तर प्रदेश पुलिस का बदमाशों और अपराधियों में खौफ इस कदर कायम है कि हाथरस कांड की आड़ में दंगे भड़काने की साजिश रचने वाले पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) की छात्र विंग कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया(CFI) के महासचिव रऊफ शरीफ ने मेडिकल जाँच कराने के लिए ले जा रही STF टीम से गाड़ी में बैठने से साफ मना कर दिया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, STF की टीम पाँच दिन की पुलिस रिमांड पूरी होने के बाद आरोपित रऊफ को मेडिकल करवाने के लिए ले जा रही थी, लेकिन जैसे ही टीम ने उसे गाड़ी में बैठने की कोशिश की उसने तुरंत बैठने से मना कर दिया और गाड़ी से नहीं जाने की जिद्द पर अड़ गया।

बता दें, हालही रऊफ शरीफ को एसटीएफ की टीम मथुरा लेकर पहुँची थी। 18 फरवरी को एडीजे प्रथम कोर्ट की अनुमति मिलने के बाद एसटीएफ की टीम ने आरोपी को पाँच दिन की पुलिस अभिरक्षा में रखा था। 5 दिन बाद यानी मंगलवार को रउफ की कोर्ट में पेशी थी। जिसके लिए एसटीएफ को उसका मेडिकल जाँच करवाना था। फिर क्या, जैसे ही सोमवार की रात पुलिस ने उसे गाड़ी में बैठाया वह फौरन उतर गया, और पुलिस की गाड़ी से नहीं जाने पर तूल गया।

रिपोर्ट्स के अनुसार, काफी समझने बुझाने और कड़ी मशक्कत के बाद रउफ ने पुलिस की बात मानी और सरकारी अस्पताल जाने के लिए सरकारी पुलिस की गाड़ी में बैठने से माना। जिसके बाद अगले दिन सुबह अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश न्यायालय प्रथम अनिल कुमार पांडेय की अदालत पेश किया गया। जहाँ से उसे न्यायिक हिरासत के तहत जेल में डाल दिया गया।

पुलिस ने हाथरस के बहुचर्चित किशोरी हत्याकांड को लेकर सांप्रदायिकता फैलाने के आरोप में गिरफ्तार रउफ से की गई 5 दिन की पूछताछ में कई अहम जानकारियाँ हासिल की है। आरोपित की निशादेही पर एसटीएफ ने राम मंदिर और बाबरी मस्जिद को लेकर भड़काऊ पोस्टर और पर्चे बरामद किए हैं। संगठन के नेटवर्क के संबंध में भी एसटीएफ को कई अहम जानकारी एसटीएफ के हाथ लगी हैं। उसने प्रदेश में सक्रिय संगठन के सदस्यों के नाम भी बताए हैं। एसटीएफ मामले में आगे की जाँच में जुटी हैं।

गौरतलब है कि रउफ को केरल एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया था। उस पर यूपी के हाथरस में दंगे की साजिश रचने और विदेशी फंडिंग जुटाने का आरोप है। यूपी में CAA और NRC के दौरान भड़के दंगों में भी उसकी भूमिका संदिग्ध रही है।

हाथरस मामले में जमकर हो रही राजनीति के दौरान मथुरा जाते समय PFI के चार सदस्य सिद्दीक कप्पन, अतीकुर्रहमान, आलम और मसूद को गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ के बाद यह खुलासा हुआ कि उनकी हाथरस में दंगा फैलाने की साजिश थी। साथ ही रऊफ शरीफ का नाम सामने आया था। इसके बाद यूपी पुलिस ने प्रोडक्शन वारंट के लिए आवेदन किया था।

हाथरस मामले में जाँच कर रही पुलिस को पता चला था कि दंगे भड़काने के लिए PFI के सदस्य कप्पन और उसके साथियों को पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी रऊफ शरीफ व पी.कोया द्वारा फंडिंग की गई थी। आरोपितों को 1.36 करोड़ रुपए ओमान व कतर में बैठे पीएफआइ सदस्यों के जरिये रउफ तक पहुँचाई गई थी।

UP: भीम सेना प्रमुख ने CM आदित्यनाथ, उन्नाव पुलिस के खिलाफ SC/ST एक्ट के तहत दर्ज की FIR

उन्नाव पुलिस ने तीन दलित लड़कियों को जहर दिए जाने वाली खबर पर फर्जी खबर फैलाने के आरोप में 21 फरवरी को आठ ट्विटर अकाउंट पर एफआईआर दर्ज की गई थी। इस एफआईआर में बरखा दत्त की ‘द मोजो स्टोरी’ और भीम सेना प्रमुख नवाब सतपाल तंवर के चैनल का भी नाम है। बता दें कि तीन लड़कियों में से दो की मौत हो गई, जबकि तीसरी बहन की हालत गंभीर बनी हुई थी। उसे फ़ौरन अस्पताल में भर्ती किया गया और आज ही उसे होश आया है।

अब इस एफआईआर के जवाब में, भीम सेना प्रमुख ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उन्नाव के पुलिस अधीक्षक, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, डीएसपी सिटी और पुलिस स्टेशन कोतवाली सदर प्रभारी पर गुरुग्राम में एससी/एसटी एक्ट के तहत जवाबी शिकायत दर्ज करवाई है।

नवाब सतपाल तंवर ने ट्विटर पर शिकायत की कॉपी शेयर करते हुए लिखा, “माननीय CM योगी जी, उन्नाव SP, ASP, DSP City, SO कोतवाली सदर प्रभारी पर गुरुग्राम में SC/ST ACT के तहत शिकायत दर्ज। आप कानून का दुरुपयोग करो साहब। हम कानून का सदुपयोग करेंगे, क्योंकि हम हैं कानून रक्षक, संविधान रक्षक भीम सैनिक उन्नाव में हमारे खिलाफ दर्ज झूठे केस पर आपके ऊपर भी तैयार FIR।”

तंवर ने दावा किया कि उन्हें सोशल मीडिया से इस घटना के बारे में पता चला और उन्होंने पीड़ितों के लिए आवाज उठाने की कोशिश की। उन्होंने आगे दावा किया कि उनके संगठन ने कोई गलत सूचना नहीं फैलाई और केवल यह माँग की कि जीवित लड़की को निष्पक्ष जाँच के साथ एम्स में स्थानांतरित कर दिया जाए ताकि यह पता लगाया जा सके कि लड़कियों पर यौन हमला हुआ था या नहीं।

गौरतलब है कि उन्नाव पुलिस द्वारा दर्ज कराई गई FIR में कहा गया है कि इन ट्विटर अकाउंट्स ने झूठी जानकारी फैलाई थी कि इन लड़कियों का बलात्कार किया गया था, जबकि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में साफ तौर पर इससे इनकार किया गया। इन ट्विटर अकाउंट ने उनके शवों का घर वालों की मर्जी के खिलाफ अंतिम संस्कार किए जाने जैसी अफवाह फैलाकर आम जनता में आक्रोश पैदा करने का भी प्रयास किया।

बता दें कि भीम सेना (अखिल भारतीय भीम सेना या ABBS) और भीम आर्मी (भीम आर्मी भारत एकता मिशन) नाम के दो संगठन हैं। भीम सेना की स्थापना अक्टूबर 2010 में हरियाणा के गुरुग्राम में नवाब सतपाल तंवर द्वारा की गई थी। भीम आर्मी की स्थापना उत्तर प्रदेश में 2015 में चंद्रशेखर आज़ाद रावण द्वारा की गई थी। उन्नाव हत्या मामले के बारे में जानकारी फैलाने के मामले में भीम आर्मी से जुड़े दो ट्विटर अकाउंट्स का नाम लिया गया है।

अगवा किया, नंगा कर बनाया वीडियो.. मार-मार कर तोड़ा पैर: इमरान खान की पार्टी के नेताओं पर पाकिस्तानी पत्रकार ने लगाए आरोप

पाकिस्तान में अपने खिलाफ खबर चलाए जाने से बौखलाए प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी के लोगों ने एक पत्रकार को अगवा कर लिया और उसे पार्टी कार्यालय में ले जाकर खूब टॉर्चर किया। अब किसी तरह पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के गुंडो से बचकर भागे पत्रकार ने प्रेस कांफ्रेंस कर सरकार और इमरान खान पर गंभीर आरोप लगाए हैं और पूरे मामले की न्यायिक जाँच की माँग की है। पीड़ित पत्रकार का नाम सैफुल्लाह जान (Saifullah Jan) है और वो चरसड्डा प्रेस क्लब की गवर्निंग बॉडी के सदस्य हैं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस कर लगाए गंभीर आरोप

सैफुल्लाह खान ने कहा कि उन्हें पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के नेताओं जिसमें अब्दुल्लाह, उनके भाई फहीम, जकात कमेटी के चेयरमैन इफ्तिखार और अन्य हथियार बंद लोगों ने अगवा कर लिया और चरसड्डा बाजार में स्थित पीटीआई (PTI) के कार्यालय में लेकर गए। वहाँ उन लोगों ने उन्हें नंगा किया और जमकर टॉर्चर किया। जानकारी के मुताबिक सैफुल्लाह खान का वीडियो भी बनाया गया है, जब उनके कपड़े उतार दिए गए थे।

स्थानीय लोगों के दबाव के बाद छोड़ा

सैफुल्लाह जान ने कहा कि पीटीआई के लोगों ने उन्हें तब छोड़ा, जब स्थानीय लोगों ने उन पर दबाव बनाया। पीड़ित ने कहा कि जिले के पुलिस अधिकारी मोहम्मद शोएब ने स्थानीय सरदारी पुलिस स्टेशन के पुलिसकर्मियों को केस दर्ज करने का आदेश दिया था, लेकिन स्थानीय पुलिस मामले में जान बूझकर देरी कर रही है और न उपयुक्त धाराओं में केस भी दर्ज नहीं किया। 

पत्रकार ने कहा कि पिटाई की वजह से उनका पैर फ्रैक्चर हो गया। लेकिन पुलिस ने एफआईआर में लिखा है कि उन्हें मालूमी चोटें आई हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस ने मुख्य अभियुक्त इफ्तिखार का नाम एफआईआर में डाला ही नहीं है। यही नहीं, पेशावर हाइकोर्ट के आदेश के बावजूद पुलिस ने उन्हें मुख्य आरोपित नहीं बनाया और स्थानीय कोर्ट ने इफ्तिखार को जमानत दे दी। 

गौरतलब है कि पिछले दिनों जाने-माने ट्विटर यूजर और पाकिस्तानी मानवाधिकार कार्यकर्ता राहत ऑस्टिन पर चाकू से हमला किया गया। खुद ऑस्टिन ने मंगलवार (जनवरी 5, 2021) को इसकी जानकारी दी। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “मुझ पर एक जिहादी ने चाकू से हमला किया। मुझे नहीं पता कि वह कौन था, मगर वह शायद मध्य-पूर्व या कहीं और से था।” राहत ने कहा कि वह घायल हो गए हैं और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

ऑपइंडिया के साथ शेयर किए गए एक वीडियो मैसेज में राहत ऑस्टिन ने कहा था, “अभी कुछ समय पहले मुझ पर एक इस्लामी जिहादी ने हमला किया था। उसके पास एक चाकू था और जिस तरह से उसने ‘अल्लाहू अकबर’ कहा था, मुझे लगता है कि वह मध्य-पूर्वी देश से है। ये लोग दुनिया में हर जगह ऐसी चीजें क्यों करते रहते हैं? हम कुछ भी गलत नहीं कर रहे हैं।”

लाल टोपी देख एक बच्चा बोला था- मम्मी, वो देखो गुंडा: सदन में रंगीन टोपियाँ देख CM आदित्यनाथ ने सुनाया किस्सा

उत्तर प्रदेश की विधानसभा में बोलते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार (फरवरी 24, 2021) को हँसी-मजाक में बातें करते हुए माहौल काफी हल्का कर दिया, लेकिन साथ ही समाजवादी पार्टी को उसी अंदाज़ में आईना भी दिखाया। सदन में सपा के नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी की लाल टोपी पर मजे लेते हुए सीएम आदित्यनाथ ने कहा कि विधायिका को ड्रामा कंपनी ना मान लें, कोई लाल टोपी, कोई हरी टोपी और कोई नीली टोपी पहन कर आता है। उन्होंने कहा कि पता नहीं ये क्या परिपाटी बन गई है।

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के अभिभाषण पर विधानसभा में बोलते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी बेहद सरल व्यक्ति हैं, लेकिन ग़लत पार्टी में होने के कारण कभी-कभी भटक जाते हैं। साथ ही, उन्होंने कहा कि पता नहीं ये लोग घर में भी यही टोपी पहन कर चलते हैं या नहीं। इस दौरान सीएम ने एक वाकया भी सुनाया, जब वो किसी बेसिक विद्यालय के उद्घाटन के लिए गए थे।

उन्होंने बताया, “वहाँ मेरा विरोध करने कुछ लोग टोपी लगा कर पहुँच गए थे। टोपी पहन कर आने वालों की तरफ इशारा करते हुए ढाई साल के एक बच्चे ने कहा- ‘मम्मी-मम्मी, वो देखो गुंडा।’ अगर आप गमछा बाँध कर आते या पगड़ी पहनकर आते तो मैं आपका स्वागत करता और ये अच्छा भी लगता। वो इस नाटक से तो बेहतर होता।” इसके बाद समाजवादी पार्टी के विधायकों ने सदन में ही हंगामा शुरू कर दिया।

इस पर मुख्यमंत्री ने चुटकी ली कि मैंने किसी का नाम तो नहीं लिया, फिर भी ये हंगामा ‘चोर की दाढ़ी में तिनका’ की तरह है। उन्होंने केरल जाकर ‘उत्तर प्रदेश की खिल्ली उड़ाने’ के लिए राहुल गाँधी को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि राहुल के पास इटली जाने के लिए समय है, लेकिन अमेठी जाने के लिए नहीं। उन्होंने प्रियंका वाड्रा की भी आलोचना करते हुए कहा कि उन्हें मंदिर तभी याद आता है, जब वो यहाँ आते हैं।

मालूम हो कि राहुल गाँधी ने त्रिवेंद्रम में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा था, “मैं 15 साल तक उत्तर भारत में सांसद था। मुझे एक अलग तरह की राजनीति की आदत हो गई थी। मेरे लिए केरल आना बेहद नया था क्योंकि मुझे अचानक लगा कि यहाँ के लोग मुद्दों में दिलचस्पी रखते हैं और जमीनी तौर पर मुद्दों के विस्तार में जाने वाले हैं।” इस बयान के बाद अमेठी से वर्तमान सांसद स्मृति ईरानी ने राहुल गाँधी के लिए ‘एहसान फरामोश’ शब्द का इस्तेमाल किया। साथ ही, कहा कि इनके बारे में तो दुनिया कहती है- थोथा चना बाजे घना।