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दिशा रवि पर इंडियन मीडिया की रिपोर्टिंग और प्रोपेगेंडा को मिला पाकिस्तान का साथ, खुल कर आई इमरान सरकार

टूलकित मामले में पूछताछ के लिए हिरासत में ली गई पर्यावरण ‘एक्टिविस्ट’ दिशा रवि को लेकर वामपंथी मीडिया गिरोह हर तरह से चिंता जाहिर कर रहा है। बीबीसी से लेकर द वायर जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्मों के जरिए सवाल खड़ा किया जा रहा है कि आखिर इस तरह की गिरफ्तारी लोकतंत्र के लिए कितना बड़ा खतरा है। वहीं विपक्षी नेता भी पूरा दम खम लगा कर इस मामले पर अपना प्रोपगेंडा फैला रहे हैं।

अब इसी क्रम में और इसी बिंदु पर पड़ोसी मुल्क की सत्ताधारी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए -इंसाफ ने इस गिरोह को समर्थन दिया है। ट्विटर पर PTI के हैंडल से नरेंद्र मोदी और आरएसएस पर निशाना साधा गया। साथ ही दिशा रवि को हिरासत में लिए जाने पर सवाल उठाया गया

पीटीआई ने लिखा, “मोदी/आरएसएस शासन में भारत अपने खिलाफ सभी आवाजों को चुप कराने में विश्वास रखता है… अब, उन्होंने दिशा रवि को भी ट्विटर टूलकिट मामले में हिरासत में ले लिया है।”

मालूम हो कि एक ओर जहाँ किसान आंदोलन के नाम पर चल रहे प्रोपगेंडे को पहले ही वामपंथी मीडिया और विपक्ष हवा देने में जुटा है, वहीं अब दिशा रवि की खबर के जरिए भी यह गिरोह देश की छवि को मटियामेट करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा।

दरअसल, पिछले दिनों पर्यावरण ‘एक्टिविस्ट’ ग्रेटा थनबर्ग द्वारा ट्विटर पर शेयर किए गए टूलकिट सामने आने के बाद किसान आंदोलन से जुड़े पूरे वैश्विक षड्यंत्र का खुलासा हुआ था। पुलिस तभी से इस केस में जाँच कर रही थी। अब हाल में जब पुलिस ने दिशा को पकड़ा तो बातें प्रोपेगेंडा का आकर लेकर देश के लोकतंत्र तक आ गईं।

द वायर ने तो इस गिरफ्तारी को सबके मुँह पर सत्ता का बूट बताया। इसी वेबसाइट ने ये भी कहा कि भाजपा के पास अपने कठोर आलोचकों के लिए अपना टूलकिट है, जिसे उसने भूतकाल में खूब इस्तेमाल किया है।

इसी तरह बीबीसी की एक रिपोर्ट है। इसमें तमाम ट्वीट इकट्ठा करके पहले इस बात पर रिपोर्ट हुई है कि कैसे 21 साल की एक बीबीए छात्रा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया, फिर ये बताया गया है कि ट्विटर पर कौन उसे लेकर प्रश्न उठा रहा है।

बता दें कि मीडिया गिरोह की भाँति कई विपक्षी राजनीतिक दल भी इस गिरफ्तारी के विरोध में दिशा को लेकर अपनी भावनाएँ प्रकट कर रहे हैं। प्रियंका गाँधी लिखती हैं, “डरते हैं बंदूकों वाले एक निहत्थी लड़की से… फैले हैं हिम्मत के उजाले एक निहत्थी लड़की से।”

आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल लिखते हैं, “21 साल की दिशा रवि की गिरफ्तारी लोकतंत्र पर एक अभूतपूर्व हमला है। हमारे किसानों का समर्थन करना कोई अपराध नहीं है।”

इसी प्रकार कपिल सिब्बल ने लिखा, “दिशा रवि, जलवायु कार्यकर्ता। क्या देश इतना कमजोर है कि एक ट्वीट से उसकी सुरक्षा को खतरा है? क्या देश इतना कमजोर है कि 22 साल की कार्यकर्ता से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा है? क्या देश इतना असहिष्णु है कि वह किसानों के साथ खड़े युवाओं को बर्दाश्त नहीं कर सकता है? क्या यह ‘बदलाव’ मोदीजी चाहते थे?”

26 जनवरी से पहले खालिस्तानी संगठन के साथ मीटिंग – निकिता, धालीवाल के साथ थी दिशा भी: टूलकिट मामले में सुत्रों का खुलासा

टूलकिट मामले में बेंगलुरु से दिशा रवि की गिरफ्तारी के बाद अब दिल्ली पुलिस को निकिता जैकब और शांतनु नाम के आरोपितों की तलाश है। निकिता और शांतनु पर टूलकिट साजिश में शामिल होने का आरोप है। इस बीच टूलकिट मामले में सूत्रों के हवाले से बड़ी जानकारी मिली है। सूत्रों के मुताबिक खालिस्तानी संगठन पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन (Poetic Justice Foundation) के फाउंडर एमओ धालीवाल ने कनाडा में रह रहे अपने सहयोगी पुनीत के जरिए निकिता जैकब से संपर्क किया था।

इनका मकसद 26 जनवरी से पहले ट्विटर पर एक बड़ी मुहिम छेड़ना था। गणतंत्र दिवस से पहले इन सबकी एक ज़ूम मीटिंग भी हुई थी। इस मीटिंग में निकिता, धालीवाल के साथ दिशा भी शामिल हुई थी। मीटिंग में एमओ धालीवाल ने कहा था कि मुद्दे को बड़ा बनाना है। मकसद था – किसानों के बीच असंतोष और गलत जानकारी फैलाना। 

सूत्रों के मुताबिक चार दिन पहले स्पेशल सेल की टीम निकिता जैकब के घर गई थी। उसके इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की जाँच की गई। उस वक्त शाम हो गई थी, इसलिए निकिता से पूछताछ नहीं की गई। जाँच टीम ने कहा था कि वो अगले दिन फिर आएँगे, लेकिन जब अगले दिन स्पेशल सेल की टीम निकिता के यहाँ पहुँची, वह गायब मिली। फिलहाल निकिता जैकब फरार है।

उसके खिलाफ पुलिस ने NBW यानी गैर ज़मानती वारंट जारी करवाया है। आरोपित निकिता जैकब ने दिल्ली पुलिस की ओर से जारी गैर जमानती वारंट के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। निकिता जैकब ने गैर-जमानती वारंट के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में ट्रांजिट जमानत याचिका दाखिल की। मामले की सुनवाई कल (फरवरी 16, 2021) होगी। मामले में एक अन्य आरोपित शांतनु के खिलाफ भी गैर जमानती वारंट जारी किया गया है।

गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस ने शनिवार (फरवरी 13, 2021) को बेंगलुरु के सोलादेवना हल्ली से पर्यावरण एक्टिविस्ट दिशा रवि को गिरफ्तार किया था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अब शांतनु और निकिता जैकब नामक दो अन्य आरोपितों की गिरफ़्तारी के लिए मुंबई में दबिश दी जा रही है। पुलिस ने गूगल से भी तकनीकी मदद माँगी है। स्वीडन की क्लाइमेट एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग द्वारा गलती से लीक किए गए टूलकिट डॉक्यूमेंट को लेकर ये कार्रवाई की जा रही है।

दिशा ने चालाकी करते हुए अपने फोन के डेटा को डिलीट कर डाला, जिसे पुनः प्राप्त करने के लिए फोरेंसिक लैब भेजा गया है। पुलिस का कहना है कि हजारों लोग उक्त साजिश में शामिल हैं, जो खालिस्तान समर्थक आतंकी गुरुपतवंत सिंह पन्नू से प्रभावित हैं। निकिता जैकब के बारे में कई लोग यह भी दावा कर रहे हैं कि वह आम आदमी पार्टी (AAP) से जुड़ी हुई है। बॉम्बे हाईकोर्ट में वकालत की प्रैक्टिस करने वाली निकिता का नाम तभी सामने आया था, जब टूलकिट के लीक होने के बाद लोगों ने इसकी लाइव एडिटिंग के स्क्रीनशॉट्स लिए थे।

पालघर: रेस्टोरेंट के बाहर 2 लोगों पर फायरिंग और धारदार हथियार से हमला, 1 की हालत नाजुक

महाराष्ट्र के पालघर जिला स्थित नालसोपारा के मोरगाँव में रविवार (फरवरी 14, 2021) शाम तीन अज्ञात नकाबपोशों ने एक रेस्टोरेंट के बाहर चार राउंड फायरिंग करते हुए दो लोगों पर हमला कर दिया।

रिपोर्ट्स के अनुसार, नालसोपारा में तुलिंज पुलिस स्टेशन क्षेत्र में यह घटना एक बार एंड रेस्टोरेंट के बाहर हुई। तीन अज्ञात लोगों ने दो लोगों पर धारदार हथियार से हमला किया। पुलिस के अनुसार, यह घटना रात करीब 9 बजे हुई। घायलों की पहचान बलिराम गुप्ता और राजू के रूप में हुई है। ये दोनों लोग मोरगाँव में रेस्टोरेंट के बाहर खड़े थे।

घायलों में से एक, बलिराम गुप्ता ने कहा, “हम रेस्टोरेंट के बाहर थे। तभी नकाब पहने कुछ अज्ञात लोगों ने अचानक हम पर गोलीबारी की। उन्होंने दो गोलियाँ चलाईं, जिसके बाद मैं घायल हो गया और फिर नकाबपोशों ने मेरे दोस्त राजू पर हमला कर दिया। वो स्कूटर पर सवार थे और उन्होंने पीछे से हमला किया।”

घायलों को पास ही के एक निजी अस्पताल में ले जाया गया, जहाँ बलिराम गुप्ता की हालत स्थिर बताई जा रही है, लेकिन एक अन्य पीड़ित राजू की हालत नाजुक बताई जा रही है। राजू पर भी गोली चलाई गई और उनके सिर पर धारदार हथियार से हमला किया गया था।

तुलिंज पुलिस स्टेशन के पुलिस इंस्पेक्टर राजेंद्र कांबली ने कहा, “हमलावरों ने चार राउंड फायरिंग की, जिनमें से तीन घायलों को लगी। तीनों हमलावर मास्क पहने हुए थे और हम उन स्कूटरों की जानकारी खोजने की कोशिश कर रहे हैं, जिनका उन्होंने हमला करने के लिए इस्तेमाल किया था।”

पुलिस अधिकारियों को संदेह है कि इस हमले के पीछे की वजह आपसी मतभेद हो सकती है। पुलिस का कहना है कि हमलावर इन दोनों घायलों के ठिकाने के बारे में अच्छी तरह से जानते थे और इस तरह हमले की योजना भी बनाई गई थी। इलाके में लगे सीसीटीवी को स्कैन किया जा रहा है और आगे की जानकारी माँगी जा रही है।

सुशांत की बहन प्रियंका के खिलाफ होगी जाँच, रिया ने कराई थी FIR, नहीं होगी रद्द: बॉम्बे HC का फैसला

बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार (फरवरी 15, 2021) को दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की बहन प्रियंका के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने से इनकार कर दिया। हालाँकि, उनकी एक अन्य बहन मीतू के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने का आदेश दिया गया और उन्हें राहत मिली। ये FIR सुशांत सिंह राजपूत की गर्लफ्रेंड रही रिया चक्रवर्ती ने दायर किया था। सुशांत के पिता द्वारा पटना में दर्ज कराई गई FIR में रिया चक्रवर्ती मुख्य अभियुक्त के रूप में नामित की गई थी।

जस्टिस एसएस शिंदे और जस्टिस एमएस कार्णिक की खंडपीठ ने दोनों बहनों द्वारा दायर की गई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए ये फैसला सुनाया, जिन्होंने FIR को रद्द करने की माँग की थी। रिया ने अपने FIR में इन दोनों पर दिल्ली के एक डॉक्टर के साथ मिल कर सुशांत का फेक मेडिकल प्रिस्क्रिप्शन तैयार करने का आरोप लगाया था। सितम्बर 7, 2020 को दायर की गई FIR में कहा गया था कि इस प्रिस्क्रिप्शन के अनुसार दवाएँ लेनी शुरू करने के 5 दिन बाद सुशांत की मौत हो गई

रिया का आरोप है कि राम मनोहर लोहिया अस्पताल के डॉक्टर तरुण कुमार ने प्रियंका और मीतू के कहने पर ‘अवैध रूप से’ वो दवाएँ लिखी थीं। मुंबई पुलिस ने रिया की शिकायत के आधार पर स्वापक ओषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम (NDPS), 1985 के तहत FIR दर्ज की थी। अक्टूबर 6, 2020 में वकील माधव थोराट के माध्यम से याचिका दायर कर दोनों बहनों ने FIR को रद्द करने का निवेदन किया था।

बॉम्बे HC की खंडपीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया प्रियंका सिंह के खिलाफ मामला बनता है और उनके खिलाफ जाँच में कोई अवरोध नहीं आनी चाहिए। रिया ने अंदेशा जताया था कि इन्हीं दवाओं के खाने से और दवाओं का कॉम्बिनेशन गलत होने से उनकी मौत हुई। जबकि दोनों बहनों का आरोप था कि सुशांत की मौत के मामले में चल रही जाँच को भटकाने के लिए ये FIR दर्ज कराई गई। साथ ही इसमें 91 दिन की देरी को भी रद्द करने का आधार बताया।

उन्होंने आरोप लगाया कि रिया चक्रवर्ती ने अपने खिलाफ दर्ज की गई FIR और CBI जाँच के बाद किसी परोक्ष मंशा से ये मामला दर्ज करवाया। इससे पहले CBI ने भी कहा था कि एक ही मामले की अलग-अलग FIR दर्ज कर के उसकी सामानांतर जाँच नहीं चलाई जा सकती, वो भी जब केंद्रीय एजेंसी जाँच में लगी हो। रिया का कहना है कि उनके कहने के बावजूद सुशांत ने मुंबई के डॉक्टर की बताई दवाएँ लेने की बजाए अपनी बहनों द्वारा बताई गई दवाएँ ली।

इस साल की शुरुआत में साउथ दिल्ली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने दिवंगत फिल्म अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के नाम पर सड़क का नाम रखने वाले प्रस्ताव को पास किया था। पार्षद अभिषेक दत्त ने माँग की थी कि सुशांत सिंह राजपूत इंजीनियरिंग के छात्र थे और दिल्ली से उनका कनेक्शन था, इसीलिए एंड्रयूज गंज वार्ड में रोड नंबर 8 (एंड्रयूज गंज से लेकर इंदिरा कैंप तक की सड़क) का नाम सुशांत सिंह राजपूत के नाम पर कर दिया जाना चाहिए।

‘हिंदू कोई धर्म नहीं, सबको सिख हो जाना चाहिए’: किसान आंदोलन की आड़ में कम्युनल कार्ड

हरियाणा के बहादुरगढ़ के नामी जाट नेता हवा सिंह सांगवान ने पिछले हफ्ते ऐलान किया कि वह 21 अप्रैल को 250-300 लोगों के साथ सिख धर्म अपनाएँगे। उन्होंने कहा कि हिंदू कोई धर्म नहीं है, सबको सिख धर्म स्वीकार लेना चाहिए। ये वही नेता हैं जिन्होंने हरियाणा में जाट आरक्षण की आग को भड़काया था। 

टिकरी बॉर्डर पहुँचे सांगवान ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों की माँग नहीं मान रही है। वह कानून लागू करने की कोशिश कर रही है। लेकिन किसान ऐसा नहीं होने देंगे। सांगवान ने ये भी माँग उठाई कि 26 जनवरी को हुई हिंसा में जितने भी लोगों पर केस हुआ है, सबको वापस लिया जाना चाहिए।

किसानों को भड़काते हुए सांगवान ने कहा कि चूँकि सरकार उनकी माँग नहीं सुन रही है, इसलिए उन्हें नए प्लान की जरूरत है। आगे उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने बातें नहीं मानी तो वह 250-300 लोगों के साथ मिल कर सिख धर्म अपना लेंगे।

कौन हैं हवा सिंह सांगवान?

बता दें कि 73 वर्षीय हवा सिंह सांगवान सीआरपीएफ के पूर्व अधिकारी हैं और जाट आंदोलन के प्रमुख नेता भी।वे लगातार बहादुरगढ़, झज्जर, हरियाणा से जाट समुदाय के लिए आरक्षण माँगते रहे हैं। साल 2011 में ‘रेल रोको’ उपद्रव में उनकी अहम भूमिका थी। इसके अलावा ये भी कहा जाता है कि साल 1990, में सांगवान को अयोध्या में पोस्ट किया गया था। उस समय लाल कृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा जब वहाँ पहुँची तो वह वही साइट पर थे और उन्होंने कई बार विवादित ढाँचे को बचाने की कोशिश की थी।

साल 2020 में अहीर समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुँचाने के आरोप में हवा सिंह को गिरफ्तार किया गया था। रिपोर्ट्स बताती हैं कि उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी राव तुला राम और अहीर समुदाय के लिए अपमानजनक टिप्पणी की थी। बाद में विवाद इतना बढ़ा कि उन्हें अपना पोस्ट डिलीट करना पड़ा और उन्होंने माफीनामा भी जारी किया। इस मामले में उनके ऊपर आईपीसी की धारा 153ए, 505 (2) के तहत साइबर पुलिस थाने में केस दर्ज हुआ था और लैपटॉप भी सीज कर लिया गया था।

गौरतलब है कि वर्तमान में जब कथित किसान आंदोलन चुनिंदा नेताओं को छोड़ कर भारी जनसमर्थन नहीं पा रहा है तो इस प्रोटेस्ट को सांप्रदायिक व जातिगत रंग दिया जाने का प्रयास हो रहा है। हाल में हरसिमरत बादल ने लोकसभा में इस पूरे आंदोलन को सिख बनाम हिंदू का मामला बता दिया था। ये भाषा बिलकुल वैसी ही थी जिस तरह से खालिस्तानी बोलते हैं। उससे पहले साल 2020 के दिसंबर माह में बीकेयू प्रवक्ता राकेश टिकैत पर ब्राह्मण विरोधी टिप्पणी करने के मामले में केस दर्ज हुआ था।

हाथरस कांड: सिद्दीक कप्पन को 5 दिन की बेल, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- मीडिया से दूर रहना

उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित हाथरस मामले में कथित तौर पर हिंसा भड़काने की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार सिद्दीक कप्पन को सुप्रीम कोर्ट ने पाँच दिन की अंतरिम जमानत दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने सिद्दीक कप्पन को केरल में अपनी बीमार माँ से मिलने के लिए जमानत दी है।

सिद्दीक कप्पन ने अपनी जमानत याचिका में कहा था कि उनकी माँ की हालत ठीक नहीं है और वो मौत के कगार पर है। अदालत ने कप्पन को कुछ शर्तों के साथ ही सिद्दीक कप्पन की जमानत मंजूर की है।

5 अक्टूबर को मथुरा में गिरफ्तार हुए सिद्दीक कप्पन की जमानत का उत्तर प्रदेश सरकार ने विरोध किया, लेकिन अदालत ने कहा कि अपनी माँ की मृत्यु को लेकर कोई झूठ नहीं बोलता।

रिपोर्ट्स के अनुसार, चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस सिद्दीक कप्पन को उसके घर केरल लेकर जाएगी और घर की रखवाली करेगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि जब सिद्दीक कप्पन अपनी बीमार माँ से मुलाकात करेगा, उस समय पुलिस वहाँ पर मौजूद नहीं रहेगी। 

साथ ही, अदालत ने उन्हें मीडिया से बात ना करने और अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर भी कुछ ना कहने/लिखने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि सिद्दीक कप्पन अपनी माँ, रिश्तेदार, डॉक्टर और करीबी दोस्तों के अलावा किसी और से नहीं मिलेगा।

हाथरस कांड में उत्तर प्रदेश पुलिस ने मथुरा से पीएफआई और उसके सहयोगी संगठन सीएफआई के 5 सदस्यों को गिरफ्तार किया था। सिद्दीक कप्पन जो कि कथित तौर पर पत्रकार भी है, इन्हीं में शामिल था। इन लोगों पर पीएफआई के इशारे पर हाथरस में दंगा फैलाने की साजिश रचने का आरोप था।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के हाथरस में सितंबर 14, 2020 को एक मामला सामने आया था, जिसमें दावा किया गया कि आरोपितों ने कथित तौर पर युवती की रीढ़ की हड्डी तोड़ दी और उसकी जीभ काट दी, जिसके बाद पीड़िता की 29 सितंबर को दिल्ली में इलाज के बाद मौत हो गई। इस घटना को लेकर जमकर बवाल हुआ और विपक्षी राजनीतिक दलों ने इस पर जमकर राजनीति की थी।

‘जय श्री राम’ के उद्घोष से माँ ने रिंकू शर्मा को दी श्रद्धांजलि, कपिल मिश्रा ने परिवार के लिए जुटाए ₹85 लाख

दिल्ली के मंगोलपुरी में रविवार (जनवरी 14, 2021) को हजारों की संख्या में लोग रिंकू शर्मा के श्रद्धांजलि कार्यक्रम में पहुँचे। लोगों ने रिंकू शर्मा के हत्यारों को तत्काल फाँसी देने की माँग की। पीड़ित माँ राधा देवी के वहाँ पहुँचने से माहौल और गमगीन हो गया। उन्होंने बेटे के लिए न्याय की माँग करते हुए मंच से ‘जय श्री राम’ का उद्घोष भी किया।

रिंकू शर्मा की माँ ने उपस्थित लोगों को सम्बोधित करते हुए कहा, “मेरा बेटा जिनकी दुःखों में दो बार अपना खून देकर शामिल हुआ, उन्हीं लोगों ने उसकी पीठ में छुरा घोंप दिया। हत्यारों ने हमें ऐसा गम दिया है, जिसे कभी भूला नहीं जा सकता। मैं उन धोखेबाजों के लिए फाँसी की सजा की माँग करती हूँ।” आक्रोश और गम में डूबी राधा शर्मा ने कई बार ‘जय श्री राम’ का उद्घोष किया, जिसे वहाँ मौजूद लोगों ने भी दोहराया।

रिंकू के छोटे भाई मन्नू शर्मा ने भी ‘जय वीर बजरंगी’ का उद्घोष करते हुए उपस्थित लोगों का श्रद्धांजलि सभा में आने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि उनका भाई मरा नहीं है, बल्कि उसने बलिदान दिया है। मंगोलपुरी में सुरक्षा के अब भी तगड़े इंतजाम हैं और रिंकू के घर की तरफ जाने वाली गलियों में पुलिस की बैरिकेडिंग है। मेटल डिटेक्टर से जाँच के बाद ही लोगों को आगे जाने की अनुमति दी जा रही है।

हालात सामान्य होने तक सुरक्षा बलों की तैनाती जारी रहेगी। पुलिस इलाके के लोगों से संवाद कर के शांति-व्यवस्था बनाए रखने की अपील कर रही है। उधर, कपिल मिश्रा ने पीड़ित परिवार की मदद के लिए जो अभियान चलाया था, उसके तहत अब तक अब तक करीब 8.5 हजार लोगों ने मिल कर 80 लाख से भी अधिक की राशि ‘Crowdcash’ वेबसाइट के जरिए इकट्ठी की है। उन्होंने एक करोड़ रुपए का लक्ष्य रखा है। मनीष मुंद्रा के 5 लाख रुपए मिला दें तो ये आँकड़ा 85 लाख हो जाता है।

कपिल मिश्रा ने कहा कि वो मंगलवार को रिंकू के परिवार से मिलने के लिए जाएँगे। उन्होंने कहा कि इस नृशंस हत्या के 5 दिन बीतने के बावजूद दिल्ली के सीएम ने पीड़ित परिवार से मिलना तो दूर, संवेदना के दो शब्द तक नहीं कहा। दिल्ली के पूर्व मंत्री मिश्रा ने कहा कि केजरीवाल अपना वोट बैंक नाराज होने के डर से ऐसा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हत्यारे केजरीवाल के वोट बैंक वाले लोग थे। उन्होंने कहा:

“देश की राजधानी में बैठ कर वोट बैंक की घटिया राजनीति हो रही है और उन्हें एक शब्द भी बोलना गँवारा नहीं है, हमारे बेटे की हत्या पर? मुझे केवल इस बात का संतोष है कि केजरीवाल की इस शर्मनाक राजनीति का हम सबने मिल कर जवाब दिया है। पूरी दुनिया से लोगों ने पीड़ित परिवार को श्रद्धांजलि दी है और सहयोग राशि भी दी है। हम उनका बेटा वापस नहीं ला सकते, लेकिन परिवार अकेला और कमजोर न पड़े- ये जिम्मेदारी तो हम उठा ही सकते हैं।”

कपिल मिश्रा ने बताया कि अब जल्द ही उस धनराशि को परिवार के बैंक अकाउंट में ट्रांसफर करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उन्होंने पूरे देश से पूछा कि क्या वोट बैंक की इस घिनौनी राजनीति को चलने देनी चाहिए, जो केजरीवाल कर रहे हैं? उन्होंने कहा कि हमारे बेटों के पीठ पर खंजर घोंपा जाए और हमारा ही सीएम एक शब्द न बोले? उन्होंने कहा कि AAP अपने वोट बैंक को खुश करे, हम परिवार के साथ हैं।

बताते चलें कि रिंकू शर्मा के भाई मन्नू के मुताबिक, राम मंदिर शिलान्यास के बाद से ही पड़ोस में रहने वाले नसरूदीन के परिवार से उनके भाई की अक्सर कहासुनी हुआ करती थी। इसको लेकर दोनों परिवारों के बीच काफी समय से मतभेद था। पहले भी कई बार ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने, हनुमान चालीसा का पाठ कराने, गली में दीप जलाने को लेकर मुस्लिम परिवार ने गाली-गलौज और मारपीट की थी। 10 फरवरी 2021 की रात बजरंग दल के कार्यकर्ता रिंकू शर्मा पर घर में घुसकर हमला किया गया था। अगले दिन उनकी मौत हो गई थी।

CM योगी ने किया ‘अभ्युदय’ का आगाज, 484852 छात्रों ने कराया रजिस्ट्रेशन

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज (फरवरी 15, 2021) सिविल परीक्षाओं के लिए फ्री कोचिंग योजना ‘अभ्युदय’ का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने कोचिंग के लिए चयनित छात्र-छात्राओं से संवाद भी किया। 16 फरवरी 2021 यानी बसंत पंचमी से इस योजना के तहत कक्षाएँ शुरू हो जाएँगी। अब तक इस योजना के लिए 4 लाख 84 हजार से अधिक छात्र पंजीकरण करवा चुके हैं। इनमें 50 हजार का चयन हुआ है।

सीएम योगी ने सोमवार को इस योजना की औपचारिक शुरुआत करते हुए बताया कि सभी मंडलों में फिजिकल और वर्चुअल क्लास शुरू होंगी। इस योजना के तहत छात्रों को सिविल सर्विस, आइआइटी जेईई, नीट सहित सभी प्रतियोगी परीक्षाओं की निःशुल्क कोचिंग दी जाएगी।

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जीवन के सर्वांगीण विकास का माध्यम ही ‘अभ्युदय’ है। यह कोचिंग मात्र नहीं है। यह उत्तर प्रदेश के युवाओं के सर्वांगीण विकास का पथ प्रदर्शक बनेगा। इसी विश्वास के साथ इस योजना को शुरू किया गया है।

उन्होंने बताया कि मंगलवार से कक्षाएँ शुरू हो जाएँगी। उन्होंने आश्वस्त किया कि जो भी छात्रों के मन में है, वह परिणाम यह योजना जरूर देगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के प्रतिभाशाली युवाओं के स्वप्नों को अब सही दिशा और रफ्तार मिलेगी। अब बच्चों को तैयारी के लिए कोटा नहीं जाना पड़ेगा।

इस बातचीत में उन्होंने कृषि कानून पर भी बात की। वह बोले कि खेती को लाभकारी बनाने के लिए कृषि कानून लाए गए हैं। जो लोग नहीं चाहते कि किसानों का हित हो उन लोगों द्वारा भ्रम पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है। इस भ्रम के परिणाम स्वरूप कुछ जगह भले ही आंदोलन हो रहा है, लेकिन सामान्यत: देश के किसानों ने कृषि कानूनों को सकारात्मक भाव से लिया है।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार की इस योजना के जरिए छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उच्‍च स्‍तरीय मार्गदर्शन और एग्जाम से पहले ट्रेनिंग दी जाएगी। जिसमें संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC), अधीनस्‍थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC), अन्‍य भर्ती बोर्ड, नीट (NEET), जेईई (JEE), एनडीए (NDA), पीओ (PO), एसएससी (SSC), टीईटी (TET), बीएड (B.Ed) और अन्य परीक्षाएँ शामिल हैं।

अभ्‍युदय कोचिंग के पोर्टल पर अब तक 36 लाख से अधिक हिट आ चुके हैं। पोर्टल 10 फरवरी को लॉन्च हुआ था। प्रदेश सरकार की ओर से शुरू की गई इस योजना का फायदा छात्रों को एक परीक्षा देने के बाद मिलेगा। इसके लिए शनिवार को ऑफलाइन परीक्षा का आयोजन किया गया था। कुल 4,84,852 छात्रों में से 50192 छात्रों का चयन ऑफलाइन क्लास के लिए किया गया।

सहयोग का वादा कर वकील निकिता जैकब फरार, शांतनु का भी निकला वारंट: दिशा के समर्थन में केजरीवाल

दिशा रवि के बाद अब दिल्ली पुलिस निकिता जैकब और शांतनु की तलाश कर रही है। दोनों के खिलाफ पटियाला हाउस कोर्ट ने गैर जमानती वारंट जारी किया है। दिशा को 13 फरवरी को दिल्ली पुलिस ने बेंगलुरु से गिरफ्तार किया था और अगले दिन अदालत ने उसे 5 दिन की पुलिस रिमांड में भेज दिया था। ग्रेटा थनबर्ग टूलकिट मामले में यह​ पहली गिरफ्तारी थी। देश विरोधी टूलकिट को तैयार करने में प्रमुख भूमिका निभाने का आरोप दिशा पर है।

दिशा की गिरफ्तारी के बाद उसके समर्थन में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल आगे आए हैं। कॉन्ग्रेस के नेता और लिबरल बिग्रेड भी उसकी गिरफ्तारी पर लगातार प्रलाप कर रही है। निकिता भी उसकी करीबी बताई जाती है।

दिल्ली पुलिस की एक टीम गुरुवार (फरवरी 11, 2021) को निकिता के घर पहुँची थी, लेकिन शाम का समय होने के कारण उससे पूछताछ नहीं हो सकी। एक्टिविस्ट और अधिवक्ता निकिता ने पुलिस के बताए दस्तावेजों पर हस्ताक्षर भी किए थे।

साथ ही उसने कहा था कि वह जाँच में पूरा सहयोग देगी। लेकिन, उसके बाद वह अंडरग्राउंड हो गई। निकिता के मुंबई स्थित आवास पर पुलिस ने उसके महिला होने के कारण शाम के बाद तलाशी नहीं ली। निकिता के बारे में उसके माता-पिता ने कुछ भी बताने से इनकार कर दिया। बताया जाता है कि जैकब ने ही टूलकिट का खाका तैयार किया था। उसके लोकेशन के बारे में पता किया जा रहा है।

निकिता जैकब के बारे में कई लोग यह भी दावा कर रहे हैं कि वह आम आदमी पार्टी (AAP) से जुड़ी हुई है। बॉम्बे हाईकोर्ट में वकालत की प्रैक्टिस करने वाली निकिता का नाम तभी सामने आया था, जब टूलकिट के लीक होने के बाद लोगों ने इसकी लाइव एडिटिंग के स्क्रीनशॉट्स लिए थे। निकिता ने अपने सारे सोशल मीडिया हैंडल्स डिलीट कर लिए हैं। निकिता और शांतनु इस टूलकिट को बाँटने के लिए भी जिम्मेदार बताए जाते हैं।

इस बीच AAP सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि 21 वर्षीय दिशा रवि की गिरफ़्तारी लोकतंत्र पर बहुत बड़ा हमला है। उन्होंने कहा, “हमारे किसानों का समर्थन करना अपराध नहीं है।” कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी ने शायराना अंदाज़ में मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए लिखा, “डरते हैं बंदूकों वाले एक निहत्थी लड़की से, फैले हैं हिम्मत के उजाले एक निहत्थी लड़की से”। चिदंबरम सहित अन्य कॉन्ग्रेस नेताओं ने भी सुर में सुर मिलाए हैं।

उधर दिल्ली पुलिस अपने द्वारका कार्यालय में दिशा से पूछताछ कर रही है। दिशा ने अपने फोन का डेटा डिलीट कर दिया था, जिसे पुनः प्राप्त करने के लिए फोरेंसिक लैब भेजा गया है। पुलिस का कहना है कि हजारों लोग उक्त साजिश में शामिल हैं, जो खालिस्तान समर्थक आतंकी गुरुपतवंत सिंह पन्नू से प्रभावित हैं। दिशा ने खुद को ‘किसान आंदोलन’ का समर्थक बताया। सुनवाई के दौरान वह अदालत में रोने भी लगी थी।

राम मंदिर के लिए सारे जेवर देना चाहती थीं 54 वर्षीय आशा कंवर, मृत्यु के बाद पति ने समर्पित कर दिए

अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण से पहले देश भर में निधि जुटाने निकले कार्यकर्ताओं को तमाम ऐसे रामभक्त मिल रहे हैं, जिनकी आस्था किसी को भी भावुक कर दे। राजस्थान के जोधपुर से एक मामला आया है जहाँ एक पति ने रुंधे गले के साथ अपनी पत्नी के सारे जेवर प्रभु श्रीराम के मंदिर निर्माण के लिए समर्पित कर दिए। पति ने निधि जुटा रहे दल को 4 फरवरी को फोन करके बताया कि उनकी पत्नी की आखिरी इच्छा थी कि सारे जेवर राम मंदिर निर्माण में दिए जाएँ, इसलिए वह लोग आकर ले जाएँ।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, 4 फरवरी को कॉल करने वाले ने दल के सदस्यों से कहा, “श्रीमान, मैं विजयसिंह गौड़ बोल रहा हूँ। मेरी पत्नी आशा कंवर राम मंदिर के लिए अपने सारे जेवर भेंट करना चाहती थीं। आज वो हमें छोड़कर चली गई। उनकी क्रियाक्रम से पहले कृपया आप लोग आइए और उनकी अंतिम इच्छा के तौर पर सारे गहने प्रभु के लिए ले जाइए।”

घटना जोधपुर के सूरसागर भूरटिया का है। यहाँ आशा कंवर नाम की महिला ने 1 फरवरी को अपने पति और बेटे मनोहर सिंह के अपने जेवर मंदिर निर्माण के लिए समर्पित करने की इच्छा जताई थी। पति और बेटे ने इससे रजामंदी जताते हुए उन्हें भरोसा दिलाया कि वे जल्द पता करेंगे कि कैसे ये गहने मंदिर के लिए दिए जाएँ।

आशा के गहनों में आड़, कानों के झुमके, शीशफूल, हाथ की नोगरी, गले की चेन, दो जोड़ी टॉप्स, एक जोड़ी अँगूठी, एक बोर, कान की बालियाँ, एक कंठी शामिल थी।

बता दें कि 1 फरवरी को पति-पुत्र के सामने राम मंदिर के लिए दान देने की इच्छा प्रकट करने वाली आशा कंवर कोरोना से संक्रमित हो चुकी थीं। 3 फरवरी को रूटीन चेकअप के लिए जब अस्पताल गईं तो फेफड़ों का संक्रमण बता उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया। अगले दिन सुबह 9 बजे उनकी मृत्यु हो गई। दाह संस्कार के बाद परिवार के लोगों ने आशा की अंतिम इच्छा को पूरा करने का संकल्प लिया और अंतत: उनके गहने समपर्ण निधि अभियान के कार्यकर्ताओं को सौंप दिए।

गहने सौंपते हुए आशा कंवर के सभी परिजनों की आँख में आँसू थे। वहीं समर्पण निधि अभियान चलाने वाले भी ऐसी आस्था देख हैरान थे। घरवालों ने बताया कि मृत्यु से कुछ दिन पहले उन्होंने आत्मकथा लिखना शुरू किया था। इसमें उन्होंने विवाह से लकर अपने मायके व ससुराल पक्ष से मिले प्रेम का उल्लेख किया था। अपनी आत्मकथा में उन्होंने प्रभु श्रीराम और रामायण के प्रति लगाव जाहिर किया था। हालाँकि, इसे पूरा कर पाने का समय नियति ने आशा को नहीं दिया और वह मात्र 54 साल की उम्र में परिवार को अलविदा कह गईं।