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‘गजनवी फोर्स’ से जम्मू-कश्मीर के मंदिरों पर हमले की फिराक में पाकिस्तान, सैन्य प्रतिष्ठान भी आतंकी निशाने पर

गणतंत्र दिवस पर किसान संगठनों को ट्रैक्टर रैली की अनुमति देते हुए दिल्ली पुलिस ने पाकिस्तानी साजिशों को लेकर आगाह किया था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी ISI जम्मू-कश्मीर के मंदिरों पर आतंकी हमलों की फिराक में है। टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के अनुसार सैन्य प्रतिष्ठान भी उसके निशाने पर हैं। सेना के आतंकरोधी अभियानों से बौखलाया पाकिस्तान इन हमलों को अंजाम देकर आतंकियों का मनोबल बढ़ाना और देश का सामाजिक सौहार्द बिगाड़ना चाहता है।  

रिपोर्ट के मुताबिक़ जम्मू-कश्मीर हमेशा से पाकिस्तान के आतंकवादी रडार के निशाने पर रहा है। वह ‘जम्मू-कश्मीर गजनवी फ़ोर्स’ की मदद से वहाँ के राज्य के कई हिस्सों में आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देना चाहता है। जम्मू-कश्मीर गजनवी फ़ोर्स पाकिस्तानी खुफ़िया एजेंसी के कश्मीर सेल के अंतर्गत काम करता है। 

13 जनवरी 2021 को कोटली स्थित ‘पाकिस्तान आर्मी ब्रिगेड हेडक्वाटर’ में बैठक हुई थी, जिसकी अगुवाई आईएसआई के मेजर कामरान ने की थी। इस बैठक में उसने विस्तार से योजना बनाई थी। 26 जनवरी को जम्मू में आतंकी हमला कर सकते हैं।

जम्मू कश्मीर में स्थित मंदिरों पर हमले का इकलौता उद्देश्य है भारत में साम्प्रदायिकता फैलाना। रिपोर्ट में यहाँ तक दावा किया गया है कि आईएसआई आतंकवादियों की जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ कराना चाहता है। इसके लिए उन्हें जीपीएस और अन्य उपकरण भी प्रदान कर रहा है।

इस महीने की शुरुआत में जम्मू कश्मीर पुलिस ने उमर अहमद मलिक और सुहैल अहमद मलिक नाम के दो आतंकवादियों को गिरफ्तार किया था। दोनों जैश-ए-मोहम्मद के तहत काम कर रहे थे। दोनों के पास दो एके 47, 1 पिस्टल, 16 ग्रेनेड, 19 एके 47 की मैगजीन और 269 गोलियाँ बरामद की गई थीं।      

गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) के मौके पर किसानों द्वारा निकाली जाने वाली ट्रैक्टर रैली पर भी पाकिस्तान की निगाहें गड़ी हुई हैं। पुलिस ने खूफिया सूत्रों से मिली जानकारी का हवाला देता हुए कहा था कि कुछ ऐसे तत्व हो सकते हैं, जो माहौल बिगाड़ने का प्रयास करें। पुलिस ने बताया है कि ट्विटर पर करीब 308 अकाउंट ऐसे चिह्नित किए गए हैं, जो पाकिस्तान में बने और अब भ्रम पैदा करके किसानों की रैली में माहौल बिगाड़ना चाहते हैं। पुलिस की साइबर टीम लगातार ऐसे सोशल मीडिया अकाउंट पर नजर बनाए हुए हैं।

गणतंत्र दिवस पर लिब्रांडुओं के नैरेटिव के लिए आप तैयार हैं?

कल की मीडिया में वामपंथियों और लिब्रांडुओं के नैरेटिव की झलक आज देख लीजिए ताकि आपको झटका न लगे!

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‘ऐसे बयान हमारी मातृभूमि के लिए खतरा’: आर्मी वेटरन बोले- माफी माँगे राहुल गाँधी

भारतीय सशस्त्र बल के तमाम वरिष्ठ पूर्व सैनिकों ने कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी के हालिया बयान की निंदा की है, जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘सेना की कोई आवश्यकता नहीं’ है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि उनके वरिष्ठ नेता का उस टिप्पणी से क्या मतलब है। दिग्गजों ने कहा कि वे उनकी टिप्पणियों से ‘स्तब्ध और बेहद आहत’ हैं।

सेना के पूर्व अधिकारियों ने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा है, “हम भारतीय किसानों, श्रमिकों और मजदूरों का सबसे अधिक सम्मान करते हैं। वे हमारी अर्थव्यवस्था की मुख्य ताकत और भारत की रीढ़ हैं। राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान के लिए हम उन्हें सलाम करते हैं। लेकिन भारत के सशस्त्र बल भी बहुत समर्पित, उच्च प्रशिक्षित हैं। दुनिया भर में भारतीय सेना की प्रतिष्ठा है। लेकिन नेताओं के ऐसे गैर-जिम्मेदाराना बयान हमारी मातृभूमि की रक्षा के लिए खतरा है।”

Veterans of Indian Armed Forces slam Rahul Gandhi
Statement issued by veterans (Source: @AninBanerjee/Twitter)

पूर्व सैन्य अधिकारियों ने कहा है कि यह टिप्पणी नादान और सच्चाई से बहुत दूर है, बिलकुल 1962 में चीन के खिलाफ हमें असफल करने वाले काल्पनिक नेहरूवादी स्वप्न की तरह। लेकिन देश की भावी पीढ़ियों पर इसके भ्रामक प्रभाव को देखते हुए उन्होंने चीजों को सही परिप्रेक्ष्य में रखने का फैसला किया है।

बयान में सेना के पूर्व अधिकारियों ने कहा है, “भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना को अनावश्यक कहने जैसे निंदनीय बयान देना, न केवल हमारे वर्दीधारियों का मनोबल गिराते हैं, बल्कि राष्ट्र के सशस्त्र बलों के लिए अपमानजनक है, जिन्होंने राष्ट्र की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान करने में कभी संकोच नहीं किया है।”

सेना के पूर्व अधिकारियों ने राहुल गाँधी से अपने बयान पर माफी माँगने की माँग की है। उन्होंने लिखा, “हम ईमानदारी से राहुल गाँधी से अनुरोध करते हैं कि वह वर्दी में हमारे सबसे बहादुर पुरुषों और महिलाओं को एक माफीनामा सौंपे और भविष्य में सशस्त्र बलों के संदर्भ में विवेकशील बने रहने का वादा करें। इस तरह के कुत्सित बयान खतरे की धारणा में गंभीर अपर्याप्तता दर्शाते हैं कि भारत को बाहर के साथ-साथ देश के कुछ हिस्सों में भी चौबीसों घंटे दुश्मनों से सामना करना पड़ रहा है।”

Veterans of Indian Armed Forces slam Rahul Gandhi
Statement issued by veterans (Source: @AninBanerjee/Twitter)

बयान पर मेजर जनरल जीडी बख्शी, मेजर जनरल पीके सहगल, वाइस एडमिरल शेखर सिन्हा, एयर वाइस मार्शल पी के श्रीवास्तव और अन्य ने हस्ताक्षर किए हैं। इस पर भारतीय सशस्त्र बलों के 20 दिग्गजों ने हस्ताक्षर किए हैं।

राहुल गाँधी के बयान के प्रति नाराजगी जाहिर करने वाले सेना के पूर्व अधिकारी-

  1. लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह 
  2. वाइस एडमिरल शेखर सिन्हा
  3. एयर मार्शल एस पी सिंह
  4. एयर मार्शल पीके रॉय
  5. एयर मार्शल आरसी बाजपेई
  6. लेफ्टिनेंट जनरल संजय कुलकर्णी
  7. लेफ्टिनेंट जनरल अरविंद शर्मा
  8. लेफ्टिनेंट जनरल अरुण साहनी
  9. लेफ्टिनेंट जनरल हिमालय सिंह
  10. लेफ्टिनेंट जनरल अशोक कुमार चौधरी
  11. लेफ्टिनेंट जनरल के एच सिंह
  12. लेफ्टिनेंट जनरल नितिन कोहली
  13. मेजर जनरल जीडी बख्शी
  14. मेजर जनरल ध्रुव कटोच
  15. मेजर जनरल एस.पी. सिन्हा
  16. मेजर जनरल पी.के. सहगल
  17. मेजर जनरल संजय सोई
  18. मेजर जनरल एस.एन.कशिद
  19. मेजर जनरल एस के कालरा
  20. एयर मार्शल पी.के. श्रीवास्तव

गौरतलब है कि राहुल गाँधी ने तमिलनाडु के इरोड में ‘जबरदस्त’ भाषण दिया था। उन्होंने सुझाव दिया था कि अगर भारत के किसान, श्रमिक और मजदूर मजबूत होते, तो भारत को सीमाओं पर सेना, नौसेना और वायु सेना को तैनात करने की आवश्यकता नहीं होती, खासकर इंडो-चाइना बॉर्डर पर। उन्होंने दावा किया था कि अगर किसानों और मजदूरों को सुरक्षा और अधिकार दिया गया तो चीन भारतीय क्षेत्रों में घुसपैठ करने की हिम्मत नहीं करेगा।

10 को पद्म भूषण, 7 को पद्म विभूषण और 102 को पद्म श्री: पाने वालों में विदेशी राजनेता से लेकर धर्मगुरु तक

केंद्र सरकार ने इस साल के लिए पद्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पद्म पुरस्‍कारों की घोषणा पर ट्वीट कर कहा कि हमें उन सभी पर गर्व है, जिन्हें पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। भारत राष्ट्र और मानवता के लिए काम करने वाली हस्तियों के योगदान को सम्‍मानित करता रहा है। जीवन के विभिन्न क्षेत्रों के इन असाधारण विभूतियों ने दूसरों के जीवन में गुणात्मक परिवर्तन लाने का काम किया। 

इस लिस्ट में पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान का नाम भी शामिल है, जिन्हें मरणोपरांत पद्म भूषण सम्मान दिया गया है। लोकसेवा में उल्लेखनीय काम के लिए उन्हें ये सम्मान दिया जा रहा है। इसके अलावा, गोवा की राज्यपाल रहीं मृदुला सिन्हा को पद्मश्री सम्मान दिया गया है। गत वर्ष ही मृदुला सिन्हा का निधन हो गया था।

गोवा की पूर्व राज्यपाल मृदुला सिन्हा, ब्रिटिश फिल्म निर्देशक पीटर ब्रूक, फादर वलिस (मरणोपरांत), प्रोफेसर चमन लाल सप्रू (मरणोपरांत) पद्म श्री पुरस्कार पाने वाले 102 लोगों में से कुछ नाम हैं।


समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, प्रधानमंत्री के पूर्व प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा, पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान (मरणोपरांत), असम के पूर्व सीएम तरुण गोगोई (मरणोपरांत) और धर्मगुरु कलदी सादिक (मरणोपरांत) पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित होने वालों में से 10 नाम हैं।

वहीं, जापान के पूर्व प्रधान मंत्री शिंजो आबे, गायक एसपी बालासुब्रमण्यम (मरणोपरांत), सैंड आर्टिस्ट सुदर्शन साहू, पुरातत्वविद बीबी लाल को पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया है। पद्म विभूषण से कुल 07 हस्तियों को सम्‍मानित किया गया है। 

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पद्म पुरस्कार प्रत्येक वर्ष गणतंत्र दिवस के अवसर पर उद्घोषित किए जाते हैं और सामान्यतः मार्च या अप्रैल माह में राष्ट्रपति भवन में आयोजित किए जाने वाले सम्मान समारोहों में भारत के राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किए जाते हैं।

‘1 फरवरी को हम संसद तक पैदल मार्च निकालेंगे’: ट्रैक्टर रैली से पहले ‘किसान’ संगठनों का नया ऐलान

पुलिस ने ‘किसानों’ को गणतंत्र दिवस के मौके पर दिल्ली में ट्रैक्टर रैली निकालने की अनुमति दे दी है, लेकिन अब उन्होंने नया ऐलान किया है। प्रदर्शन करने वाले ‘किसान’ संगठनों का कहना है कि वह 1 फरवरी को संसद तक पैदल मार्च निकालेंगे, जिस दिन आम बजट प्रस्तुत किया जाएगा। 

क्रांतिकारी किसान यूनियन के दर्शन पाल ने सोमवार (25 जनवरी 2021) को मीडिया वालों से बातचीत में कहा, “1 फरवरी को हम (प्रदर्शनकारी) दिल्ली में अलग-अलग जगहों से संसद तक पैदल मार्च निकालेंगे।” 

यह घोषणा कृषि संगठनों द्वारा राजधानी में ‘किसानों’ की ट्रैक्टर रैली से एक दिन पहले की गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ किसान कल यानी गणतंत्र दिवस परेड के बाद व्यापक रैली निकालेंगे। अभी तक इस रैली में शामिल होने वाले ट्रैक्टर्स की संख्या को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। 

दिल्ली पुलिस के साथ कई दौर की बातचीत के बाद किसानों को 26 जनवरी पर ट्रैक्टर रैली निकालने की अनुमति मिल गई थी। अनुमति के साथ पुलिस की शर्त है कि गणतंत्र दिवस की परेड को किसी हालत में बाधित नहीं किया जाएगा। पुलिस का कहना है कि रैली तीन भागों में निकाली जाएगी। 

प्रेस वार्ता करते हुए स्पेशल कमिश्नर ऑफ़ पुलिस (इंटेलिजेंस) दीपेंद्र पाठक ने कहा था, “हमारी भारतीय किसान यूनियन के नेताओं के साथ चर्चा हुई थी। जिसमें यह तय किया गया था कि वह राजपथ पर गणतंत्र दिवस के जश्न के बाद अपनी मार्च निकालेंगे। परेड में किसी भी तरह की बाधा नहीं आनी चाहिए। हम सुरक्षा के पूरे इंतज़ाम करेंगे, उनकी मार्च शांतिपूर्ण होगी और वह अंत में बॉर्डर पर लौट जाएँगे।”

मार्च के लिए निर्धारित किए गए रूट भी किसान यूनियन और पुलिसकर्मियों के बीच तनाव का कारण हैं। किसान यूनियन का कहना है कि जो रूट अभी तय किए गए हैं वह उनके द्वारा बताए गए रूट से अलग हैं। वहीं केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर का इस मुद्दे पर कहना था कि कृषि सुधार क़ानूनों को 1.5 साल के लिए रद्द करना ‘सबसे अच्छा ऑफर’ था। उन्हें इस बात की उम्मीद है कि किसान संगठन इस पर मंथन करेंगे और इसके बाद अंतिम फैसला लेंगे।      

कल तक ‘कसम राम की’ कहने वाली शिवसेना भी ‘जय श्री राम’ पर हुई सेकुलर, बताया- राजनीतिक एजेंडा

साल 1995 की बात है। बॉलीवुड निर्देशक मणिरत्नम की फिल्म ‘बॉम्बे’ से शिवसैनिक और खुद बाल ठाकरे बेहद नाराज थे। फिल्म के कुछ दृश्यों में शिव सैनिकों को मुस्लिम समुदाय के लोगों की हत्या करते और उन्हें लूटते दिखाया गया था। इस फिल्म के अंतिम दृश्यों में बाल ठाकरे जैसे नजर आने वाले एक कैरेक्टर को इन दंगों पर शोक व्यक्त करते हुए दिखाया गया था।

ठाकरे और उनकी शिवसेना ने तब इस फिल्म के प्रसारण पर भारी विरोध दर्ज करते हुए इसके प्रदर्शन पर रोक लगा दी थी। ऐसे में जब उनके मित्र और बॉलीवुड अभिनेता अमिताभ बच्चन ने उनसे सवाल किया था कि क्या उन्हें शिवसैनिकों के इस चित्रण से कष्ट हुआ? इस पर बाल ठाकरे ने जवाब में कहा था कि उन्हें जो बात ख़राब लगी वो ये कि ठाकरे के कैरेक्टर को इन दंगों के लिए खेद प्रकट करते और माफ़ी माँगते दिखाया गया है।

को लेकर बाल ठाकरे हमेशा दावा करते रहे कि शिवसैनिकों ने उसे गिरा दिया। उनके रहते उनकी पार्टी अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनाने को लेकर हमेशा मुखर रही।

पर अब न बाल ठाकरे रहे और न भगवान राम को लेकर शिवसेना की वैसी ‘निष्ठा’ रही। ये हम नहीं कह रहे। बाल ठाकरे के बेटे उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में शिवसेना ने खुद कई मौकों पर यह साबित किया है।

यही कारण है कि कल तक ‘कसम राम की’ कहने वाली शिवसेना को अब जय श्री राम के नारे में धार्मिक अलगावाद दिखता है। पार्टी के के मुखपत्र ‘सामना’ में उसने कहा है कि उत्तर प्रदेश और बिहार की तरह पश्चिम बंगाल में भाजपा ने धार्मिक अलगाववाद शुरू किया है।

शिवसेना आज भाजपा को सिर्फ अपना राजनीतिक दुश्मन घोषित नहीं कर रही, बल्कि बंगाल में उसकी विपक्षी पार्टी प्रमुख ममता दीदी को ‘की-पॉइंट्स’ देते हुए ममता के बड़े भाई की भूमिका भी निभा रही है।

सोमवार (जनवरी 25, 2021) के ‘सामना’ के सम्पादकीय में शिवसेना ने भाजपा की आलोचना करते हुए ‘जय श्री राम’ के नारे को राजनीतिक एजेंडा तक घोषित कर दिया है। इस राजनीतिक टकराव के चलते शिवसेना ने उस ममता बनर्जी का ‘राजनीतिक गुरु’ बनने तक का ख्वाब बुनना शुरू कर दिया है, जो ‘जय श्री राम’ का उद्घोष करने वालों को कट्टर और धर्मांध बताते हुए सार्वजानिक मंच पर जमकर इस्लामी नारे लगाती हैं।

वास्तव में, शिवसेना की हालत आज एक मुंबई के उस स्ट्रगलिंग कलाकार जैसी हो चुकी है, जो मुंबई जाता तो मार्लन ब्रैंडो बनने का ख्वाब लेकर है, लेकिन आखिर में उसे प्रेशर कूकर के विज्ञापन कर किसी भी तरह अपना गुजारा करने तक सीमित हो जाना पड़ता है।

राम मंदिर के लिए कभी सीना ठोकने वाले शिवसेना अब ‘सेकुलर’ हो चली है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण, जो कि प्रत्यक्ष तौर पर एक फजीहत ज्यादा थी, सरकार बनाने के लिए उद्धव ठाकरे का अयोध्या दौरा रद्द करना था।

नवंबर 09, 2019 को अयोध्या राम जन्मभूमि मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उद्धव ठाकरे ने घोषणा की थी कि वो 24 नवंबर को अयोध्या जाएँगे, लेकिन फिर ‘सुरक्षा कारणों’ का हवाला देकर पलटी मार गए। उस वक़्त उद्धव, परदे के पीछे से कॉन्ग्रेस व शरद पवार की पार्टी के साथ साँठगाँठ में लगे थे।

हालत ये हैं कि हिंदुत्व, भगवा और राम नाम को कभी अपनी विचारधारा का मूल बताने वाली शिवसेना कॉन्ग्रेस की शरण में जाते ही खुलकर ‘जय श्री राम’ का नारा तक नहीं लगा पा रही है। बंगाल में भाजपा के खिलाफ ममता का मार्गदर्शन करने वाली शिवसेना के नेतृत्व वाले मुंबई के मुस्लिम बहुल इलाके मालवणी में भगवान राम के पोस्टर तक फाड़ दिए गए और ‘सेकुलर’ शिवसेना कुछ भी कर पाने में असमर्थ ही नजर आ रही है।

ख़ास बात तो यह रही कि राम मंदिर समर्पण निधि अभियान से जुड़े पोस्टर फाड़ने का आरोप मुंबई पुलिस पर है। शायद शिवसेना के लिए अभी ‘जय श्री राम’ के नारे को ‘चुनावी एजेंडा’ और ‘अलगाववाद को बढ़ाने वाला’ घोषित कर देना ही सत्ता में बने रहने का विकल्प नजर आ रहा हो। विचारधारा से समझौता शिवसेना के लिए यूँ भी कोई नया या चौंकाने वाला कदम नहीं रह गया है।

अशोका यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर ने भगवान राम का उड़ाया मजाक, राष्ट्रपति को कर रहा था ट्रोल

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती पर राष्ट्रपति भवन में उनके पोर्ट्रेट (portrait) का अनावरण किया था। इसके बाद गिरोह विशेष के ‘पत्रकारों’ और नेताओं ने ने झूठा दावा किया कि पोर्ट्रेट बंगाली अभिनेता प्रसनजीत चटर्जी का है। दरअसल चटर्जी ने ‘गुमनामी’ फिल्म में नेताजी का किरदार निभाया था। 

ऐसा ही दावा अशोका यूनिवर्सिटी के सहायक प्राध्यापक (असिस्टेंट प्रोफेसर) नीलांजन सरकार ने किया। कई लोगों ने इस फ़ेक न्यूज़ की मदद से मोदी सरकार पर कीचड़ उछालने का प्रयास किया था, लेकिन नीलांजन ने भाजपा सरकार की आलोचना करने की आड़ में भगवान श्रीराम का उपहास किया। वह अशोका यूनिवर्सिटी में राजनीतिक विज्ञान (पॉलिटिकल साइंस) के असिसटेंट प्रोफेसर पद पर कार्यरत है। उसने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया है। 

उसने अपने ट्वीट में लिखा था, “वाकई शानदार! यह नेताजी सुभाष चंद्र बोस नहीं हैं, ये मशहूर बंगाली अभिनेता प्रसनजीत चटर्जी की तस्वीर है, जिन्होंने एक फिल्म में नेताजी की भूमिका निभाई थी।” 

जब ट्वीट में किया गया उसका दावा झूठा साबित हो गया तब उसने हिन्दू आस्था पर तंज करना शुरू कर दिया। ट्वीट के अगले हिस्से में उसने लिखा, “और ये सब नेताजी के कार्यक्रम में ‘जय श्रीराम चिल्लाने के बाद। आज़ादी के बाद के दौर के राजनीतिक नेताओं का दिवालियापन।” 

प्रोफेसर के ट्वीट का स्क्रीनशॉट (साभार: Befittingfacts)

वामपंथ परस्तों और लिब्राट गैंग के लोगों की हमेशा से यही रणनीति रही है। राजनीतिक समालोचना की आड़ लेकर हिन्दू देवी-देवताओं को निशाना बनाना या उन पर दोयम दर्जे का कटाक्ष करना। सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च के मुताबिक़ नीलांजन सरकार उस संस्थान में ही सीनियर विजिटिंग फेलो भी है। वेबसाइट में लिखा है, “मिस्टर सरकार का सबसे नया काम भारत के प्रदेश चुनावों पर केंद्रित था, जिसे डाटा वर्क (data work) और नृवंशविज्ञान (ethnographic) के आधार पर तैयार किया गया था। वह उन सिद्धांतों को समझना चाहते हैं जिनसे भारतीय मतदाताओं के निर्णय लेने की प्रक्रिया प्रभावित होती है, जो कि विकासशील देशों में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर प्रकाश डाल सकता है।” 

नेताजी पोर्ट्रेट विवाद 

नीलांजन सरकार का ट्ववीट कोलकाता के विक्टोरिया मेमोरियल में हुए उस इवेंट से संबंधित था, जिसमें नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती मनाई गई थी। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मंच छोड़ कर जाने लगी थीं और उन्होंने जनता को संबोधित करने से भी मना कर दिया था। इसकी वजह यह थी कि उनके बोलने से पहले ‘जय श्रीराम और भारत माता की जय’ के नारे लगाए गए थे। जय श्रीराम के नारे से गुस्सा होकर ममता बनर्जी ने कहा कि इस ‘अपमान’ की वजह से वह कुछ भी नहीं बोलेंगी। 

हटाया था निधि राजदान को हार्वर्ड प्रोफेसर बताने वाला लिंक 

हाल ही में अशोका यूनिवर्सिटी ने बताया था कि वह अपने सारे ट्वीट और पोस्ट हटाएगी जिसमें निधि राजदान का परिचय बतौर हार्वर्ड प्रोफेसर किया गया है। इसके पहले निधि राजदान ने दावा किया था कि उन पर फिशिंग अटैक (phishing attack) हुआ है और उन्हें हार्वर्ड से इस तरह का कोई ऑफर नहीं आया था।           

‘कोहराम मचा दो… मोदी को जला कर राख कर देगी’: किसानों के नाम पर अबू आजमी ने उगला जहर, सुनते रहे पवार

नए कृषि कानूनों के विरोध के नाम पर चले कथित किसान आंदोलन के नाम पर किस तरह लोगों को भड़काने और राजनीतिक रोटियॉं सेकने की कोशिश हो रही यह किसी से छिपी नहीं है। इसी कड़ी में मुंबई में सपा विधायक अबू आजमी ने लोगों को उकसाने की कोशिश की है। वह जब प्रदर्शनकारियों को उकसा रहे थे, तब मंच पर एनसीपी के मुखिया शरद पवार भी थे।

आजमी ने यह जहरीला भाषण मुंबई के आजाद मैदान में दिया। शरद पवार भी प्रदर्शनकारियों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए इस कार्यक्रम में शामिल हुए थे। इस विरोध प्रदर्शन में महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस अध्यक्ष बाला साहेब थोराट भी उपस्थित थे।

अबू आजमी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, “ये मोदी सरकार अहंकारी हो गई है। ये बिल्कुल हिटलर के रास्ते पर चल रही है। याद रखना मोदी जी, ये आजादी की लड़ाई पंजाब से ही शुरू हुई थी और पंजाब से शहीद भगत सिंह जी को जब फाँसी दी जा रही थी, तो उन्होंने कहा कि मुझे फाँसी मत दो, मुझे सड़क पर गोली मार दो। शहीद भगत सिंह ने अंग्रेजों के सामने घुटने नहीं टेके थे। सावरकर की तरह सात बार माफी नहीं माँगी थी।”

आजमी ने आगे कहा, “याद रखना, ये पंजाब से जो हवा आएगी न, ये मोदी तुम्हें जला कर राख कर देगी और तुम्हारा पता नहीं चलेगा इस देश के अंदर। शर्म नहीं आती मोदी जी आपको। आज किसान आत्महत्या कर रहा है। पंजाब का सर्वे आया है। सिर्फ पंजाब में 1 लाख करोड़ किसान पर कर्ज है। हर परिवार पर 10 लाख रुपए का कर्ज है और आमदनी साल के 6 लाख रुपए। क्या हो रहा है देश के अंदर।”

अबू आजमी यही नहीं रूके। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है मोदी जी आप इस देश को बेचने आए हो और सिर्फ अंग्रेजों की चाल चलकर गंगा-जमुनी तहजीब को बर्बाद करके डिवाइड एंड रूल करके इस देश पर राज कर रहे हो। इस देश की भोली-भाली जनता को बेवकूफ बना रहे हो। किसान इतनी ठंड में वहाँ बैठे हैं। सैकड़ों किसान ‘शहीद’ हो गया और मोदी जी कह रहे हैं कि खालिस्तानी है, पाकिस्तान-चीन से मदद आ रही है, शर्म आनी चाहिए।”

प्रदर्शनकारियों को उकसाते हुए आजमी ने कहा, “मैं बधाई देना चाहता हूँ सभी पार्टियों को जिन्होंने ये शुरू किया है। एक-एक घर से लोगों को निकलना चाहिए। कोहराम मचा दो इसके लिए। कोहराम मचा दो, जब तक ये कानून खत्म नहीं हो जाता। मैं पंजाब के किसानों को बधाई देना चाहता हूँ। 2 महीने से ज्यादा हो गए, लेकिन ये टस से मस नहीं हुए। मोदी जी आप समझते हो कि ये आपके पास आएँगे। जब उनके सामने जिनका सूरज कभी डूबता नहीं था, उनको कुछ नहीं समझा तो तू कौन सी खेत की मूली है। तुम्हारे पास ये कभी नहीं आएँगे। इस कानून को खत्म किया जाए। ये आंदोलन जबरदस्त चलना चाहिए।”

गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस के साथ कई दौर की बातचीत के बाद किसानों को 26 जनवरी पर ट्रैक्टर रैली निकालने की अनुमति मिल गई है। बस पुलिस की शर्त है कि गणतंत्र दिवस की परेड को किसी हालत में बाधित नहीं किया जाएगा। रविवार (जनवरी 24, 2021) को दिल्ली पुलिस ने कहा कि ट्रैक्टर रैली रिपब्लिक डे परेड के बाद निकाली जाएगी। सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम होंगे।

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, “बैरीकेड और अन्य सुरक्षा प्रबंधों को हटाकर राष्ट्रीय राजधानी में किसानों को आने दिया जाएगा और बाद में वह तय दूरी कवर करने के बाद दोबारा अपनी जगह पर लौट जाएँगे।”

बॉम्बे HC के ‘स्किन टू स्किन’ जजमेंट के खिलाफ अपील करें: महाराष्ट्र सरकार से NCPCR

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने सोमवार (जनवरी 25, 2021) को महाराष्ट्र सरकार से कहा कि वह बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ तत्काल अपील दायर करे, जिसमें कहा गया कि बिना ‘शरीर से शरीर के स्पर्श’ (स्किन टू स्किन) को यौन शोषण नहीं माना जा सकता है।

महाराष्ट्र के मुख्य सचिव को लिखे पत्र में, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के चेयरपर्सन प्रियांक कानूनगो ने कहा कि फैसले में ‘यौन इरादे से बिना किसी पेनेट्रेशन के स्किन टू स्किन’ की भी समीक्षा किए जाने की जरूरत है और राज्य को भी इस पर संज्ञान लेना चाहिए। यह फैसला इस मामले में नाबालिग पीड़िता के लिए अपमानजनक प्रतीत हो रहा है।

एनसीपीसीआर प्रमुख ने कहा कि ऐसा लगता है कि पीड़ित की पहचान का खुलासा कर दिया गया है और आयोग का विचार है कि राज्य को इस पर ध्यान देना चाहिए और आवश्यक कदम उठाने चाहिए।

आयोग ने कहा, “उपरोक्त समस्या को देखते हुए और इस मुद्दे की गंभीरता को समझते हुए आयोग POCSO अधिनियम, 2012 की धारा 44 के तहत निगरानी निकाय होने के नाते आपसे अनुरोध करता है कि आप इस मामले में आवश्यक कदम उठाएँ और माननीय न्यायालय द्वारा पूर्व में लिए गए फैसले के खिलाफ तत्काल अपील दायर करें।”

कानूनगो ने कहा, “आपसे अनुरोध है कि नाबालिग पीड़िता (सख्त गोपनीयता बनाए रखने) का विवरण प्रदान करें, ताकि आयोग बच्चे के सर्वोत्तम हित में कानूनी सहयोग आदि जैसी सहायता प्रदान कर सके।”

गौरतलब है कि हाल ही में बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने एक फैसला सुनाया है, जिसके मुताबिक़ सिर्फ ग्रोपिंग (groping, किसी की इच्‍छा के विरुद्ध कामुकता से स्‍पर्श करना) को यौन शोषण नहीं माना जा सकता है। कोर्ट के मुताबिक इसके लिए शारीरिक संपर्क या ‘यौन शोषण के इरादे से किया गया शरीर से शरीर का स्पर्श’ (स्किन टू स्किन) होना चाहिए।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने यह फैसला उस आरोपित की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुनाया, जिसे एक नाबालिग लड़की के साथ यौन शोषण करने लिए जेल की सज़ा सुनाई गई थी। हाईकोर्ट के मुताबिक सिर्फ नाबालिग लड़की की छाती को छूना यौन शोषण की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता है।

आर्थिक सुधारों के पूरक हैं नए कृषि कानून: राष्ट्रपति के संदेश में किसान, जवान और आत्मनिर्भर भारत पर फोकस

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद सोमवार (जनवरी 25, 2021) को 72वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर शाम 7 बजे राष्ट्र को संबोधित कर रहे हैं। इस सम्बोधन में राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि विपरीत प्राकृतिक परिस्थितियों, अनेक चुनौतियों और कोविड की आपदा के बावजूद हमारे किसान भाई-बहनों ने कृषि उत्पादन में कोई कमी नहीं आने दी और यह कृतज्ञ देश हमारे अन्नदाता किसानों के कल्याण के लिए पूर्णतया प्रतिबद्ध है।

राष्ट्र के नाम अपने सम्बोधन की शुरुआत करते हुए राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि हमारे राष्ट्रीय त्योहारों को, सभी देशवासी, राष्ट्र-प्रेम की भावना के साथ मनाते हैं। गणतन्त्र दिवस का राष्ट्रीय पर्व भी, हम पूरे उत्साह के साथ मनाते हुए, अपने राष्ट्रीय ध्वज तथा संविधान के प्रति सम्मान व आस्था व्यक्त करते हैं।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के सम्बोधन की महत्वपूर्ण बातें –

  • संविधान की उद्देशिका में रेखांकित न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुता के जीवन-मूल्य हम सबके लिए पुनीत आदर्श हैं। यह उम्मीद की जाती है कि केवल शासन की ज़िम्मेदारी निभाने वाले लोग ही नहीं, बल्कि हम सभी सामान्य नागरिक भी इन आदर्शों का दृढ़ता व निष्ठापूर्वक पालन करें।
  • मातृभूमि के स्वर्णिम भविष्य की उनकी परिकल्पनाएँ अलग-अलग थीं परंतु न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुता के मूल्यों ने उनके सपनों को एक सूत्र में पिरोने का काम किया।
  • बाल गंगाधर ‘तिलक’, लाला लाजपत राय, महात्मा गाँधी और सुभाष चन्द्र बोस जैसे अनेक महान जन-नायकों और विचारकों ने हमारे स्वतंत्रता संग्राम को प्रेरित किया था।
  • सियाचिन व गलवान घाटी में, माइनस 50 से 60 डिग्री तापमान में, सब कुछ जमा देने वाली सर्दी से लेकर, जैसलमर में, 50 डिग्री सेन्टीग्रेड से ऊपर के तापमान में, झुलसा देने वाली गर्मी में – धरती, आकाश और विशाल तटीय क्षेत्रों में – हमारे सेनानी भारत की सुरक्षा का दायित्व हर पल निभाते हैं।
  • हमारे सैनिकों की बहादुरी, देशप्रेम और बलिदान पर हम सभी देशवासियों को गर्व है।
  • अन्तरिक्ष से लेकर खेत-खलिहानों तक, शिक्षण संस्थानों से लेकर अस्पतालों तक, वैज्ञानिक समुदाय ने हमारे जीवन और कामकाज को बेहतर बनाया है।
  • दिन-रात परिश्रम करते हुए कोरोना-वायरस को डी-कोड करके तथा बहुत कम समय में ही वैक्सीन को विकसित करके, हमारे वैज्ञानिकों ने पूरी मानवता के कल्याण हेतु एक नया इतिहास रचा है।
  • हमारे सभी किसान, जवान और वैज्ञानिक विशेष बधाई के पात्र हैं और कृतज्ञ राष्ट्र गणतन्त्र दिवस के शुभ अवसर पर इन सभी का अभिनंदन करता है।
  • पिछले वर्ष, जब पूरी मानवता एक विकराल आपदा का सामना करते हुए ठहर सी गई थी, उस दौरान, मैं भारतीय संविधान के मूल तत्वों पर मनन करता रहा। मेरा मानना है कि बंधुता के हमारे संवैधानिक आदर्श के बल पर ही, इस संकट का प्रभावी ढंग से सामना करना संभव हो सका है।
  • मैं यहाँ उन डॉक्टरों, नर्सों, स्वास्थ्य-कर्मियों, स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े प्रशासकों और सफाई-कर्मियों का उल्लेख करना चाहता हूँ, जिन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर पीड़ितों की देखभाल की है। बहुतों ने तो अपने प्राण भी गंवा दिए।
  • इस महामारी ने, देश के लगभग डेढ़ लाख नागरिकों को, अपनी चपेट में ले लिया। उन सभी के शोक संतप्त परिवारों के प्रति, मैं अपनी संवेदना प्रकट करता हूँ।
  • इस महामारी के कारण, हमारे बच्चों और युवा पीढ़ी की शिक्षा प्रक्रिया के बाधित होने का खतरा पैदा हो गया था। लेकिन हमारे संस्थानों और शिक्षकों ने नई टेक्नॉलॉजी को शीघ्रता से अपनाकर यह सुनिश्चित किया कि विद्यार्थियों की शिक्षा निरंतर चलती रहे।
  • बिहार जैसी घनी आबादी वाले राज्य तथा जम्मू-कश्मीर व लद्दाख जैसे दुर्गम व चुनौती भरे क्षेत्रों में निष्पक्ष व सुरक्षित चुनाव सम्पन्न कराना हमारे लोकतन्त्र एवं चुनाव आयोग की सराहनीय उपलब्धि रही है। टेक्नॉलॉजी की सहायता से न्यायपालिका ने, न्याय उपलब्ध कराने की प्रक्रिया जारी रखी।
  • हाल ही में दर्ज की गयी जीएसटी की रेकॉर्ड वृद्धि और विदेशी निवेश के लिए आकर्षक अर्थव्यवस्था के रूप में भारत का उभरना, तेजी से हो रही हमारी ‘इकनॉमिक रिकवरी’ के सूचक हैं।
  • नए भारत के समावेशी समाज का निर्माण करने के लिए हम शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषाहार, वंचित वर्गों के उत्थान और महिलाओं के कल्याण पर विशेष बल दे रहे हैं।
  • पूरी गति से आगे बढ़ रहे हमारे आर्थिक सुधारों के पूरक के रूप में, नए क़ानून बनाकर, कृषि और श्रम के क्षेत्रों में ऐसे सुधार किए गए हैं, जो लम्बे समय से अपेक्षित थे। आरम्भ में, इन सुधारों के विषय में आशंकाएँ उत्पन्न हो सकती हैं। परंतु, किसानों के हित के लिए सरकार पूरी तरह समर्पित है।

राष्ट्रपति कोविंद ने अपने भाषण में कवि मैथिली शरण गुप्त की कविता का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा –

“हम भारतवासी, मानवता के लिए जीते भी हैं और मरते भी हैं। इसी आदर्श को महान कवि मैथिली शरण गुप्त ने इन शब्दों में व्यक्त किया है: उसी उदार की सदा, सजीव कीर्ति कूजती; तथा उसी उदार को, समस्त सृष्टि पूजती। अखण्ड आत्मभाव जो, असीम विश्व में भरे¸ वही मनुष्य है कि जो, मनुष्य के लिये मरे।”

उन्होंने कहा कि सन 2020 को सीख देने वाला वर्ष मानना चाहिए। पिछले वर्ष के दौरान प्रकृति ने बहुत कम समय में ही अपना स्वच्छ और निर्मल स्वरूप फिर से प्राप्त कर लिया था। ऐसा साफ-सुथरा प्राकृतिक सौंदर्य, बहुत समय के बाद देखने को मिला।