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20 साल पहले पति के सपने में आया नंबर, दाँव लगाती रही पत्नी; 60 मिलियन डॉलर की लॉटरी जीती

कनाडा में एक महिला ने 60 मिलियन डॉलर की लॉटरी जीती है। वह भी उस संख्या (नंबर) की मदद से जो उसके पति के सपने में आए थे। डेंग प्रवतोडॉम (Deng Pravatoudom) नाम की 57 वर्षीय महिला के मुताबिक़ उसके पति के सपने में लॉटरी के नंबर को लेकर 20 साल पहले एक सपना आया था। तब से वह उन नंबर पर दाँव लगा रही थी और पिछले महीने (दिसंबर 2020) उसे कामयाबी हासिल हुई। 

महिला ने 1 दिसंबर 2020 को ‘LOTTO MAX’ नाम की लॉटरी जीती थी। लॉटरी अधिकारियों का कहना था कि महिला के दो जवान बच्चे हैं और दो पोते भी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ महामारी की वजह से वह अपने घर, परिवार और दोस्तों के साथ लॉटरी जीतने की ख़ुशी नहीं मना पाई थी। महिला ने टोरंटो स्थित ओएलजी प्राइज सेंटर (OLG prize centre) से जीती हुई राशि लेकर वर्चुअल जश्न मनाया था। 

महिला अप्रवासी है जो कि 1980 में लाओस से कनाडा अपने 14 भाई बहनों के साथ आई थी। महिला का कहना था, “हमारे पास कुछ नहीं था इसलिए एक स्थानीय चर्च ने हमारी आर्थिक सहायता की थी। मैं उन लोगों की आभारी हूँ जिन्होंने इतने वर्षों के दौरान हमारा साथ दिया। मेरे पति और मैंने 40 सालों तक बतौर आम मजदूर घंटों तक काम किया, जिससे हमारे परिवार का गुज़ारा हो सके और हम अपने परिवार के लिए कुछ बचत कर सकें। महामारी की वजह से मैं पिछले वसंत से कुछ नहीं कर रही थी इसलिए यह पैसे बेशक हमारी ज़िंदगी को आसान और बेहतर बनाने में मदद करेंगे।”  

महिला नियमित रूप से लॉटरी में अपनी किस्मत आज़माती थी और पिछले 20 सालों से उन्हीं नंबर्स पर दाँव लगा रही थी जो उसके पति के सपने में आए थे। महिला ने बताया, “मैं प्रार्थना करके आई थी, फिर नज़दीक के मॉल में अपना लोटो मैक्स (LOTTO MAX) टिकट देखने और कुछ काम के लिए गई थी। वहाँ मैंने एक ‘फ्री प्ले टिकट’ जीता। मुझे कई दिनों बाद तक भरोसा नहीं हुआ कि फ्री टिकट 60 मिलियन डॉलर का था।” 

महिला के मुताबिक़, “मैं कुछ बिलों का भुगतान करने के लिए बैंक गई थी और मेरे पति टिकट देखने के लिए गए थे। जैसे ही हम कार में बैठे तब उन्होंने मुझसे बताया कि हम 60 मिलियन डॉलर का जैकपॉट जीत चुके हैं। वह गंभीर थे, मज़ाक नहीं कर रहे थे इसलिए मैं समझ गई कि वो सच बोल रहे हैं। मैं वहीं पर रोने लगी! मैं हमेशा प्रार्थना करती थी कि हमारा परिवार सलामत रहे।” 

लॉटरी जीतने के बाद पति-पत्नी ने पुराना अपार्टमेन्ट छोड़ कर नया घर खरीदने की तैयारी कर रहे हैं। इसके अलावा वह अपना क़र्ज़ भी चुकाएँगे और महामारी के हालात सामान्य होने पर घूमने भी जाएँगे। 

‘मुझे बंदूक दिखाओगे तो मैं बंदूक का संदूक दिखाऊँगी’: BJP पर बरसीं ‘जय श्री राम’ से भड़कीं ममता

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विक्टोरिया मेमोरियल में हुई घटना के संबंध में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा/BJP) के ऊपर निशाना साधा है। उन्होंने सोमवार (जनवरी 25, 2021) को हुगली के पुरसुआ में रैली को संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा चाहे तो उनकी बेइज्जती कर सकती है, लेकिन पश्चिम बंगाल का अपमान वह किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगी।

भाजपा को ‘भगवा’ पार्टी करार देते हुए सीएम बनर्जी ने जनता से कहा, “अगर भाजपा पैसे दे तो ले लेना लेकिन वोट TMC को ही देना। बीजेपी पूरी तरह फर्जी है। वो मेरी बेईज्जती कर सकते हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल का अपमान बर्दाश्त नहीं करूँगी। बीजेपी एक महिला की इज्जत करना भी नहीं जानती।”

शुभेंदु अधिकारी पर निशाना साधते हुए बनर्जी ने कहा कि जो लोग टीएमसी छोड़ कर भाजपा के साथ मिल रहे हैं वो लालच में भगवा पार्टी से जुड़ रहे हैं। वह बोलीं, “जो बीजेपी के साथ जुड़ने जा रहे हैं। मैं उन्हें बताना चाहती हूँ। जल्दी-जल्दी टीएमसी छोड़ो। उन्हें टीएमसी से कभी टिकट नहीं मिलती इसलिए वह TMC छोड़ रहे हैं। बीजेपी के पास तांडव करने के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं है।”

विक्टोरिया मेमोरियल घटना पर सीएम बनर्जी ने कहा, “मैं नेताजी के कार्यक्रम में गई। उनकी हिम्मत कैसे हुई! मुझे चिढ़ाने की, वो भी देश के प्रधानमंत्री के सामने। वो मुझे नहीं जानते।” उन्होंने कहा कि यदि उन्हें बंदूक दिखाई गई तो वह बंदूक का संदूक दिखा सकती हैं, लेकिन वह राजनीति में विश्वास करती हैं, बंदूक में नहीं। 

वह कहती हैं, “अगर उन्होंने नेताजी का नारा बुलंद किया होता तो मैं उनकी तारीफ करती लेकिन उन्होंने रबीन्द्रनाथ टैगोर का अपमान किया है।” सीएम ने कहा कि भाजपा का नाम ‘भारत जलाओ पार्टी रखा जाना चाहिए।

गौरतलब है कि हाल में पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में आयोजित नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती समारोह में जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मंच पर सम्बोधन देने आईं तो भीड़ में से कुछ लोगों ने ‘जय श्री राम’ के नारे लगा दिए, जिसे उन्होंने अपनी बेइज्जती करार देते हुए भाषण देने से इनकार कर दिया। इसके बाद सोशल मीडिया पर भी ‘ममता बनर्जी को जय श्री राम’ ट्रेंड होने लगा। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद थे।

गलवान घाटी में बलिदान हुए कर्नल संतोष बाबू को महावीर चक्र, कई अन्य जवान भी होंगे सम्मानित

पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में 15 जून, 2020 को चीनी सैनिकों के साथ हुई हिंसक झड़प में वीरगति को प्राप्त हुए कर्नल संतोष बाबू को इस साल महावीर चक्र (मरणोपरांत) से नवाजा जाएगा। गणतंत्र दिवस के मौके पर हर साल वीरता पुरस्कारों का ऐलान होता है और इस वर्ष दूसरा सबसे बड़ा सैन्य सम्मान संतोष बाबू को मिल रहा है।

इसके अलावा गलवान में पराक्रम दिखाने वाले अन्य जवानों को भी सम्मानित किया जाएगा। सेना में परमवीर चक्र के बाद महावीर च्रक दूसरा सबसे बड़ा सम्मान होता है, जो अदम्य साहस के परिचय के लिए दिया जाता है। पिछले दिनों खबर आई थी कि 16 बिहार बटालियन को गणतंत्र दिवस के मौके पर गैलेंट्री मेडल से सम्मानित किया जाएगा। बता दें कि हर साल गणतंत्र दिवस के मौके पर देश के जवानों को सम्मानित करने के लिए विभिन्न प्रकार के सम्मानों से नवाजा जाता है।

क्या हुआ था गलवान में?

मई में घुसपैठ के बाद भारतीय और चीनी सेना के बीच उच्च स्तरीय बैठक हुई। जिसमें चीन ने वादा किया कि वो विवादित इलाके से पीछे हट जाएगा। इस बीच 15-16 जून की रात भारतीय सेना को खबर मिली कि चीन फिर से गलवान घाटी में घुसपैठ की साजिश रच रहा है। जिसके बाद तुरंत 16 बिहार रेजिमेंट के जवानों के साथ कमांडिंग ऑफिसर कर्नल संतोष बाबू खुद वहाँ पर पहुँचे।

लौटते वक्त चीनी सैनिकों ने धोखे से हमला कर दिया, जिसके बाद दोनों तरफ से भीषण खूनी संघर्ष हुआ। जिसमें कर्नल बाबू समेत 20 जवान वीरगति को प्रप्त हो गए। इस दौरान भारतीय जवानों ने 40 से ज्यादा चीनी सैनिकों को मौत के घाट उतारा, साथ ही वहाँ से उन्हें खदेड़ दिया। हालाँकि आज तक चीन ने अपने मृत जवानों की संख्या का खुलासा नहीं किया है।

बता दें कि रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने कोविड-19 के इलाज के लिए बने अस्पताल के वॉर्डों का नाम बलिदानी सैनिकों के नाम पर रखा है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन ने केवल 11 दिनों में राजधानी दिल्ली में कोरोना वायरस के इलाज के लिए 1,000 बेड वाली सुविधा का निर्माण किया। अस्पताल में अस्थायी संरचना में 250 आईसीयू बेड भी शामिल हैं।

पत्नी तेलंगाना में हैं डिप्टी कलेक्टर 

कर्नल संतोष बाबू तेलंगाना के रहने वाले थे। उनकी शहादत के बाद तेलंगाना सरकार ने उनकी पत्नी को डिप्टी कलेक्टर बनाने का वादा किया था। इसके बाद जुलाई 2020 में तेलंगाना के सीएम चंद्रशेखर राव ने संतोष बाबू की पत्नी को नियुक्ति पत्र सौंपा। साथ ही राज्य सरकार ने उनके परिवार को पाँच करोड़ की सहायता राशि और हैदराबाद में एक आवसीय जमीन दी। तेलंगाना के सूर्यापेट के रहने वाले कर्नल संतोष बाबू के परिवार में माता-पिता के अलावा दो बच्चे और पत्नी हैं। 2004 में सेना में शामिल होने वाले कर्नल संतोष बाबू को 15 साल की सर्विस में चार बार प्रमोशन मिल चुका था। 

इधर LAC पर चल रहे भारत और चीन के विवाद के बीच एक बार फिर सिक्किम में दोनों पक्षों में झड़प हुई है। कहा जा रहा है कि तीन दिन पहले चीन ने भारत की सीमा में घुस कर यथास्थिति को बदलने का प्रयास किया, लेकिन तभी भारतीय सैनिकों ने उन्हें रोका और खदेड़ कर वापस उनके क्षेत्र में भेज दिया। इस दौरान ही झड़प भी हुई, जिसमें 20 चीनी सैनिक घायल हुए। वहीं भारत के भी 4 जवानों को चोटें आईं।

गौरतलब है कि भारत-चीन सैनिकों के बीच इस झड़प के बाद पूर्वी लद्दाख के मोल्डो में भारत और चीन के सैन्य अधिकारियों के बीच 8वीं दौर की बैठक हुई। करीब 15 घंटे चली इस बैठक का निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है। लेकिन इसके जरिए तनाव को कम करने की अपील की गई। इसके अलावा यह भी खबर है कि चीनी सेना ने पूर्वी लद्दाख से अपने 10,000 सैनिकों को वापस बुला लिया है। हालाँकि कुछ सेना की तैनाती अब भी है इसलिए भारतीय जवान भी पीछे नहीं हुए हैं।

26 जनवरी पर क्यों दो बार सैल्यूट करता है सिख रेजिमेंट? गणतंत्र दिवस पर 1979 से शुरू हुई परंपरा के बारे में सब कुछ

भारतीय सेना की सबसे महत्वपूर्ण पैदल रेजीमेंट में से एक है- सिख रेजिमेंट। देश 71वाँ गणतंत्र दिवस मनाने की तैयारियाँ लगभग पूरी कर चुका है, ऐसे में सिख रेजिमेंट से जुड़ी एक बेहद अलग और ख़ास परंपरा है। जहाँ एक तरफ भारतीय सशस्त्र बल का हर सैन्य दल एक बार सैल्यूट करता है, वहीं सिख रेजिमेंट दो बार सैल्यूट करता है। 

यह प्रक्रिया लगभग 42 साल पहले 24 जनवरी 1979 को शुरू हुई थी। गणतंत्र दिवस (रिपब्लिक डे) की परेड के पूर्वाभ्यास (रिहर्सल) के दौरान सिख रेजिमेंट ने विजय चौक से लाल किले तक मार्च किया। ब्रिगेडियर इंजो गखल (Injo Gakhal) ने इस रेजिमेंट की अगुवाई की थी जो कि राजपथ से होते हुए केजी मार्ग, कनॉट प्लेस, मिन्टो ब्रिज, रामलीला मैदान, चावड़ी बाज़ार, किनारी बाज़ार, शीशगंज गुरुद्वारा साहिब, चाँदनी चौक के बाद लाल किले पर रुकी थी। 

जब सैन्य दल शीशगंज गुरुद्वारा साहिब से गुज़रा तब ब्रिगेडियर इंजो गखल ने तलवार नीचे करके (सैल्यूट का चिह्न) टुकड़ी को आदेश दिया, ‘दाएँ देख’। यह गुरुद्वारा प्रबंधन के लिए आश्चर्यजनक था, इसके बाद वह सैन्य दल के साथ लाल किले तक गए। इसके अलावा गुरुद्वारे के लोगों ने टुकड़ी को बतौर सम्मान ‘कड़ा प्रसाद’ भी दिया।

2 दिन बाद 1979 की गणतंत्र दिवस के परेड के मौके पर ब्रिगेडियर इंजो गखल ने अपनी तलवार नीचे करते हुए टुकड़ी को आदेश दिया, ‘दाएँ देख’। लेकिन इस बार गुरुद्वारा प्रबंधन पहले से ही तैयार था। ‘सत श्री अकाल’ के नारे लगाते हुए उन्होंने लाल किले की तरफ बढ़ते हुए सैन्य दल पर गुलाब के फूल बरसाने शुरू कर दिए। तभी से दो बार सैल्यूट की परंपरा शुरू हुई, पहला भारत के राष्ट्रपति के सामने और दूसरा शीशगंज गुरुद्वारा साहिब के सामने। 

शीशगंज गुरुद्वारा साहिब का महत्व 

गुरु तेग बहादुर सिख धर्म के 10 सिख गुरुओं में से 9वें गुरु थे। उन्होंने सिर्फ कश्मीरी पंडितों को जबरन इस्लाम में परिवर्तित होने से नहीं रोका, बल्कि इस्लाम कबूल नहीं करने की वजह से मुग़ल शासक औरंगज़ेब ने दिल्ली में सरेआम उनका सिर कलम करवा दिया था। उन्होंने मुग़ल अत्याचार के विरुद्ध जंग छेड़ी थी, जिसकी वजह से उन पर इस्लाम कबूल करने का दबाव बनाया जाता था। उन्होंने ऐसा करने से साफ़ मना कर दिया, जिसकी वजह से उनका गला काट दिया गया था। गुरुद्वारा शीशगंज ठीक उस जगह पर बनाया गया है जहाँ गुरु तेग बहादुर की हत्या की गई थी। उनका ‘शीश’ (सिर) उनके शिष्य भाई जैता आनंदपुर साहिब लेकर आए थे और सिखों के 10वें गुरु गोबिंद राय ने उनका अंतिम संस्कार किया था।    

नेताजी के बदले एक्टर प्रसनजीत चटर्जी के पोट्रेट का राष्ट्रपति कोविंद ने कर दिया अनावरण? फैक्टचेक

लिबरल गिरोह ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नाम पर एक नया प्रोपेगेंडा शुरू किया है। इसमें वह नेताजी की उस पोट्रेट पर सवाल उठा रहे हैं जिसका अनावरण राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उनकी 125वीं जयन्ती के मौके पर 23 जनवरी को किया था। 

इस पोट्रेट को लेकर गिरोह का दावा है कि वह सुभाष चंद्र बोस की तस्वीर नहीं है। उनके अनुसार ये पोट्रेट प्रसनजीत चटर्जी (Prosenjit Chatterjee) की है, जिन्होंने बोस पर बनी फिल्म में उनका किरदार अदा किया था।

राष्ट्रपति कोविंद पर इस संबंध में सवाल उठाने वालों की सूची बहुत लंबी है। इसमें बरखा दत्त, सागरिका घोष जैसे चर्चित नाम हैं। बरखा दत्त इस संबंध में लिखती हैं, “ये सुन कर हैरान हूँ कि राष्ट्रपति ने असली नेताजी की जगह उनका रोल निभाने वाले प्रसनजीत चटर्जी की पोट्रेट का अनावरण किया। इसे देखना पड़ेगा। मुझे दो बार चेक करना पड़ेगा कि आखिर ये है क्या। कितना शर्मनाक है।”

Netaji Prosenjit Chatterjee

सागरिका घोष लिखती हैं, “माननीय राष्ट्रपति सर, कृपया इस पोट्रेट को रिप्लेस करें। हम राष्ट्रपति भवन की पवित्र दीवारों पर फर्जी नेताजी नहीं देख सकते हैं।” 

डॉ. आदिल हुसैन लिखते हैं, “भारत के राष्ट्रपति ने राष्ट्रपति भवन में प्रसनजीत चटर्जी के आधिकारिक तस्वीर का अनावरण किया, नेताजी का नहीं। इन्होंने श्रीजीत मुखर्जी निर्देशित फिल्म गुमनामी में नेताजी का रोल अदा किया था। कास्टिंग की जय हो।”

Netaji Prosenjit Chatterjee

महुआ मित्रा लिखती हैं, “राम मंदिर के लिए 5 लाख रुपए की डोनेशन के बाद राष्ट्रपति, प्रसनजीत के चित्र का अनावरण नेताजी के सम्मान में कर रहे हैं जिन्होंने उनकी बॉयोपिक में उनका रोल निभाया। भगवान बचाए भारत को (क्योंकि ये सरकार तो नहीं बचा सकती।)”

Netaji prosenjit chatterjee

सोशल मीडिया में तमाम लोग इस तरह के दावे कर रहे हैं। ऐसे में जरूरी है ये जानना कि आखिर सच्चाई क्या है? क्या वाकई वामपंथी मीडिया गिरोह के कहे मुताबिक देश के राष्ट्रपति से इतनी बड़ी गलती हुई या फिर लोगों के मन में संशय उत्पन्न करके ये कोई प्रोपेगेंडा फैलाने का प्रयास है?

The portrait of Netaji on the Left and Prosenjit Chatterjee on the right
नेताजी सुभाष चंद्र बोस और उनका किरदार अदा करने वाले प्रसनजीत चटर्जी

भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने ऐसे प्रश्नों का जवाब देते हुए तीन तस्वीर शेयर कर लिखा है, “बरखा दत्त और उनकी गैंग का शर्मनाक फर्जी प्रोपेगेंडा। पहली तस्वीर नेताजी की असली तस्वीर है। दूसरा उनका राष्ट्रपति भवन में स्केच है। तीसरी तस्वीर प्रसनजीत चटर्जी की है।” वह लिखते हैं “बरखा दत्त कहती हैं कि दूसरी तस्वीर तीसरी जैसी है लेकिन पहली जैसी नहीं है।”

चंद्र कुमार बोस का ट्वीट

उनके अलावा, नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पोते चंद्र कुमार बोस ने भी अपने दादाजी की तस्वीर जनवरी 2020 में शेयर की थी। तस्वीर देख कर अंदाजा लगाया जा सकता है कि चंद्र बोस द्वारा शेयर फोटो और पद्मश्री से सम्मानित परेश मैती द्वारा बनाई गई तस्वीर एक ही हैं। मैती का काम किसी किरदार पर आधारित नहीं है, बल्कि असली नेताजी की तस्वीर से जुड़ा हुआ है। नए पोर्ट्रेट में मैती के हस्ताक्षर भी देखे जा सकते हैं।

The portrait is the work of a Bengali painter of repute and Padma Shri Awardee Paresh Maity and is definitely not Prosenjit Chatterjee
बंगाली पेंटर पद्म श्री द्वारा निर्मित नेताजी का स्केच

ऐसे लोगों को छोड़ा नहीं जाना चाहिए: मुनव्वर फारूकी पर जस्टिस रोहित आर्य, कुंडली निकालने में जुटा लिब्रांडु गिरोह

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (इंदौर खंडपीठ) ने कथित कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी (Munawar Faruqui) की जमानत याचिका पर सोमवार (जनवरी 25, 2021) को आदेश सुरक्षित रख लिया। फारूकी को धार्मिक भावनाओं को आहत करने के एक मामले में इंदौर पुलिस ने 2 जनवरी को गिरफ्तार किया था।

न्यायमूर्ति रोहित आर्य की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा, “लेकिन आप अन्य धर्मों की भावनाओं का अनुचित लाभ क्यों उठाते हैं? आपकी मानसिकता के साथ क्या समस्या है? आप अपने व्यवसाय के उद्देश्य के लिए यह कैसे कर सकते हैं?”

पंद्रह मिनट तक चली इस सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने मुनव्वर फारूकी के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा से पूछा कि क्या वो जमानत आवेदन वापस लेना चाहते हैं? इस पर अधिवक्ता तन्खा ने कहा, “उन्होंने इस मामले में कोई अपराध नहीं किया है। जमानत दी जानी चाहिए।”

जमानत याचिका का विरोध करने वाले कुछ हस्तक्षेपकर्ताओं ने पीठ को बताया कि कथित कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी ने हिंदू देवताओं और देवताओं के खिलाफ अत्यधिक आपत्तिजनक बयान दिए हैं।

एक वकील ने कहा, “आरोपित मुनव्वर फारूकी ने पहले कई ऐसे वीडियो पोस्ट किए हैं, जो 18 महीने पहले सोशल मीडिया पर प्रसारित किए गए थे। उनकी यह टिप्पणी 18 महीने पहले की गई थी। उन्होंने तीन अलग-अलग मौकों पर, यानी कॉमेडी शो में इन बयानों को दोहराया। इसे देखकर अन्य कॉमेडियन भी हिन्दू देवी-देवताओं पर ऐसे चुटकुले बना रहे हैं। 70% कॉमेडियन ऐसा कर रहे हैं।

जब पीठ ने पूछा कि क्या अन्य वकील जमानत याचिका का विरोध कर रहे हैं? तो एक अन्य वकील ने भी आरोप लगाया कि फारूकी ने भगवान राम और सीता के खिलाफ आपत्तिजनक बयान दिए। इसके बाद न्यायमूर्ति रोहित आर्य ने कहा, “ऐसे लोगों को बख्शा नहीं जाना चाहिए। मैं आदेश सुरक्षित रखता हूँ।”

जज ने जमानत अर्जी पर आपत्ति जताने वाले अन्य लोगों से संबंधित दस्तावेज और सबूत दाखिल करने को कहा। अदालत ने फारूकी के सह-कलाकार के रूप में गिरफ्तार सह-आरोपित नलिन यादव की जमानत याचिका पर भी आदेश सुरक्षित रखा है।

फारूकी और उसके साथ दूसरे आरोपित को अभी दो और रातें कस्टडी में बितानी पड़ सकती हैं। बताया जा रहा है कि मामले की अगली सुनवाई आने वाले बुधवार को हो सकती है।

गौरतलब है कि गत 1 जनवरी को इंदौर के 56 दुकान इलाके में आयोजित एक शो के दौरान हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने वाले चार अन्य लोगों के साथ गुजरात के निवासी मोहम्मद फारूकी को 2 जनवरी को गिरफ्तार किया गया था।

फारूकी के खिलाफ स्थानीय भाजपा विधायक मालिनी लक्ष्मण सिंह गौर के बेटे एकलव्य सिंह गौर (36) ने शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने 05 आरोपितों के खिलाफ धारा -299-ए और धारा 269 भारतीय दंड संहिता (IPC) के प्रावधान के तहत मामला दर्ज किया था।

लिबरल्स को याद आई FoE

इस मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति रोहित के बयान के बाद सोशल मीडिया पर लिबरल जमात उनकी कुंडली खंगालने में जुटी हुई है। इसमें भी न्यायमूर्ति के उस आदेश का जिक्र किया जा रहा है, जिसमें उन्होंने एक छेड़छाड़ के आरोपित को पीड़िता को राखी बाँधने का आदेश देते हुए उसकी रक्षा करने का वचन देने को कहा था। कई लोगों ने इस बात पर आपत्ति जताई है कि न्यायमूर्ति को ऐसा नहीं कहना चाहिए था।

एक ट्विटर यूजर ने तो न्यायमूर्ति रोहित आर्य को ‘ब्राह्मण’ तक बता दिया है।

TikTok स्टार रफी शेख ने की आत्महत्या: दोस्त मुस्तफा पर मारपीट और आपत्तिजनक वीडियो का आरोप

आंध्र प्रदेश के टिक टॉकर रफी शेख ने नेल्लोर जिले में अपने निवास पर आत्महत्या कर ली। पुलिस आत्महत्या के पीछे के कारणों का पता लगाने के लिए जाँच में जुट गई है और उनके माता-पिता का बयान दर्ज किया है।

रफी शेख के माता-पिता ने आरोप लगाया है कि उनके बेटे को काफी समय से कुछ युवकों द्वारा परेशान किया जा रहा था। रफी के माता-पिता का कहना है कि उनके बेटे का कुछ दिनों पहले उसके कुछ दोस्तों ने अपहरण कर लिया था। हालाँकि, बाद में उन्होंने उसे छोड़ दिया था।

पीड़ित परिवार का ये भी कहना है कि बदमाशों ने रफी पर हमला भी किया था और उन्होंने उसके आपत्तिजनक वीडियो भी बना लिए थे। इसके बाद रफी के परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई तो उन्होंने कथित तौर पर धमकी दी कि अगर उन्होंने शिकायत वापस नहीं ली तो वो वीडियो लीक कर देंगे।

मीडिया से बात करते हुए रफी के भाई सैयद इकबाल ने कहा कि रफी कॉफी शॉप में एक दोस्त से मिलने गए थे, जिसके बाद उन्हें मुस्तफा नामक एक व्यक्ति ने नारायण रेड्डी पेटा में आने के लिए कहा, जहाँ उन्हें कुछ लोगों ने कथित तौर पर पीटा था। उनके भाई ने कहा कि घटना के बाद से रफी काफी दर्द में थे। फिलहाल पुलिस ने परिवार के बयान पर संदिग्ध मौत का मामला दर्ज कर लिया है। 

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक शेख और मुस्तफा बचपन के दोस्त थे। मुस्तफा की चेतावनियों के बावजूद शेख उसकी पूर्व प्रेमिका के साथ घूमता था। जिसकी वजह से मुस्तफा, रफी शेख से चिढ़ा हुआ था। वो शेख को जबरन अपने गाँव ले गया और वहाँ पर लड़की की मौजूदगी में उसे धमकी दी। जिसके बाद शेख ने शुक्रवार (जनवरी 22, 2021) देर शाम आत्महत्या कर ली।

बता दें कि रफी शेख साल 2019 में उस समय सुर्खियों में आया था, जब उसकी बाइक दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। उस दौरान वह अपने साथी टिकटॉक स्टार सोनिका केथावथ के साथ था, जिसकी मौके पर ही मौत हो गई थी। इसके बाद रफी ने भी टिकटॉक छोड़ने का ऐलान कर दिया था।

15 साल छोटी हिन्दू से निकाह कर परवीन बनाया, अब ‘लव जिहाद’ विरोधी कानून को ‘तमाशा’ बता रहे नसीरुद्दीन शाह

पिछले दिनों वरिष्ठ अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने उत्तर प्रदेश में ‘धर्मांतरण’ और ‘लव जिहाद’ के खिलाफ आए कानून के खिलाफ जम कर ज़हर उगला और मीडिया ने भी उनके बयान को जम कर प्रचारित किया। उन्होंने इस कानून को तमाशा तक बताया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में ‘लव जिहाद’ को लेकर तमाशा चल रहा है, उससे वे खासे आक्रोशित हैं। उन्होंने इसे समाज को विभाजित करने वाला बताते हुए कहा कि लोगों को ‘जिहाद’ का सही अर्थ ही नहीं पता है।

नसीरुद्दीन शाह ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि इस देश में कभी भी मुस्लिमों की जनसंख्या हिन्दुओं से ज्यादा हो जाएगी। कोई बेहूदा ही इस पर यकीन करेगा। मुस्लिमों को अपनी जनसंख्या हिन्दुओं से ज्यादा करने के लिए अविश्वसनीय गति से बच्चे पैदा करने होंगे। मुझे नहीं लगता कि कोई भी इस पर विश्वास करेगा। उत्तर प्रदेश में लव जिहाद का तमाशा चलाया जा रहा है, ताकि हिन्दू-मुस्लिम के सम्बन्ध खराब हो जाएँ। उनके बीच सद्भाव न हो।”

नसीरुद्दीन शाह का कहना है कि हिन्दू और मुस्लिम लड़के-लड़कियाँ आपस में विवाह की सोच भी न पाएँ, इसलिए ये सब किया जा रहा है। उन्होंने रत्ना पाठक शाह के साथ अपनी शादी को मिसाल के तौर पर पेश किया, गोहत्या को लेकर राय दी और यूपी के नए कानून पर लोगों में डर पैदा करने और प्रताड़ित करने के आरोप लगाए। उन्होंने ये बातें हर्ष मंदर के ‘कारवाँ-ए-मोहबब्त’ यूट्यूब पेज पर कही।

उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में निर्दोषों को पकड़ कर मारा जा रहा है और प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शादी के शुभ मौके पर पुलिस आ जाती है और बाद में पता चलता है कि दूल्हा-दुल्हन दोनों मुस्लिम ही थे। उन्होंने पुलिस पर माफ़ी तक न माँगने का आरोप मढ़ते हुए कहा कि ये दुनिया अब वो नहीं रही, जिसका उन्होंने सपना देखा था।

‘स्वराज्य मैग’ में पत्रकार स्वाति गोयल शर्मा ने नसीरुद्दीन शाह की इस बयानबाजी का जवाब दिया है। स्वाति खुद ‘लव जिहाद‘ के कई मामलों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखती हैं। उनका मानना है कि नसीरुद्दीन शाह को यूपी के नए कानून के बारे में कुछ जानकारी ही नहीं है। दिसंबर 28 तक इस मामले में यूपी में 18 मामले दर्ज किए जा चुके थे। नए कानून के तहत दर्ज पहले 14 मामलों में से 9 में पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के सामने आरोपों का समर्थन किया था।

14 में से 13 मामलों में पीड़िता हिन्दू महिला थी और आरोपित मुस्लिम थे। एक मामले में पीड़िता का कोई अता-पता ही नहीं है। कम से कम आँकड़े तो इस कानून की ज़रूरत पर बल देते हैं। मुरादाबाद में पिंकी नामक लड़की के परिजनों ने रशीद पर अपनी बेटी के अपहरण का मामला दर्ज कराया था, जिसके बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। जैसे ही पिंकी ने कहा कि वो अपनी मर्जी से रशीद के साथ भागी थी और निकाह किया था, उसे तुरंत रिहा किया गया।

लेकिन, ऐसे एक मामले को लेकर नसीरुद्दीन शाह पूरे परिदृश्य को झुठला रहे हैं। स्वाति गोयल शर्मा ने पूछा है कि क्या पुलिस को पिंकी के परिजनों के बयान दर्ज करने से इनकार कर देना चाहिए था? जिस लड़की के माता-पिता को लगता है कि उनकी बेटी का अपहरण हुआ है, उसे खोजने की कोशिश पुलिस नहीं करती? अगर कोई आरोपित है तो उसे थाने नहीं लाया जाए? व्यस्तता के कारण पुलिस को बयान दर्ज करने में समय लग गया है, इस एक गलती के कारण शाह सारे मामलों को झुठला रहे हैं। स्वाति ने लिखा:

“प्रक्रिया में कुछ गड़बड़ या देरी हो जाना किसी कानून को खराब नहीं बना देता। ऐसी गड़बड़ियाँ मजहब देख कर नहीं आती। इसके शिकार सिर्फ मुस्लिम नहीं होते। सभी होते हैं। 2 साल पहले 65 लड़कियों को ट्रैफिकिंग से बचा कर लाया गया था, लेकिन वो सभी अब तक सरकारी शेल्टर होम में थीं, क्योंकि बयान दर्ज नहीं किया गया था। जहाँ तक ‘जिहाद’ की परिभाषा की बात है, नसीरुद्दीन शाह क्या इसकी कोई कानूनी परिभाषा लाकर दे सकते हैं? वामपंथी मीडिया इसे हिंदुत्व की कांस्पिरेसी बताता है। ऐसी कई खबरें हैं, जहाँ हिन्दू महिलाओं ने किसी मुस्लिम आरोपित द्वारा धर्मांतरण के लिए झाँसा देने की बात कही है।”

कुछ ही सप्ताह पहले बस्ती से 2 हिन्दू महिलाओं को रेस्क्यू किया गया था, जिसे एक मुस्लिम व्यक्ति जॉब का झाँसा देकर ले गया था। वो उन्हें इस्लाम में धर्मांतरित कर उनकी तस्करी करने वाला था। खुद बाबा साहब भीमराव आंबेडकर ने ‘Pakistan, or The Partition of India‘ में लिखा था कि हिन्दुओं की ये सोच सही है कि हिन्दू-मुस्लिम सम्बन्ध का मतलब ही है कि एक तरफ की लड़की और एक तरह का लड़का।

और हाँ, नसीरुद्दीन शाह की पहली पत्नी मनारा सीकरी भी एक हिन्दू ही थी, जिन्होंने शादी के बाद धर्मांतरण के जरिए इस्लाम अपना लिया था। इसके बाद उन्होंने अपना नाम परवीन मुराद रख लिया था। वो अपने शौहर से 15 वर्ष छोटी हैं। नसीरुद्दीन शाह खुद को ‘नॉन-मजहबी व्यक्ति’ बताते हैं, लेकिन बेटी का नाम हीबा रखा है। उनके और रत्ना पाठक शाह के बेटों का नाम इमाद और विवान है। और वो धर्मांतरण को लेकर ज्ञान दे रहे।

इंडियन आर्मी ने कश्मीर ही नहीं बचाया, खुद भी बची: सेना को खत्म करना चाहते थे नेहरू

एक समय था जब कश्मीर के युद्ध ने भारतीय सेना को खत्म होने से बचाया था! जी हाँ, आज शायद  इस बात पर आपको यकीन न हो कि युद्ध के होने से सेना कैसे बची? लेकिन मेजर जनरल डीके ‘मोंटी’ पालित ने अपनी किताब ‘मेजर जनरल एए रुद्र: हिज सर्विस इन थ्री आर्मी एंड टू वर्ल्ड वार’ में इसका जिक्र किया है।

किताब के अनुसार, वह समय था जब भारतीय सेना के पहले कमांडर-इन-चीफ सर रॉब लॉकहार्ट देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के पास एक औपचारिक रक्षा दस्तावेज़ लेकर पहुँचे, जिसे पीएम के नीति-निर्देश की आवश्यकता थी। लेकिन नेहरू ने उस पर संज्ञान लेने की बजाय उन्हें डपटते हुए कहा:

“बकवास! पूरी बकवास! हमें रक्षा नीति की आवश्यकता ही नहीं है। हमारी नीति अहिंसा है। हम अपने सामने किसी भी प्रकार का सैन्य ख़तरा नहीं देखते। जहाँ तक मेरा सवाल है, आप सेना को भंग कर सकते हैं। हमारी सुरक्षा ज़रूरतों को पूरा करने के लिए पुलिस काफ़ी अच्छी तरह सक्षम है।”

इस घटना के बाद सर लॉकहार्ट हक्का-बक्का रहकर दफ्तर लौट आए। जब उनसे पूछा गया कि आखिर क्या हुआ, तो उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने उनके कागज देखे और गुस्से से फट पड़े।

किताब के अनुसार, मेजर जनरल एए रुद्र का मानना था कि कश्मीर युद्ध ने ही भारतीय सेना के अस्तित्व को बचाया। दरअसल, आजादी के बाद भारत में सेना के पहले कमांडर जहाँ सर रॉब लॉकहार्ट बने थे, वहीं पाकिस्तान में इस पद पर जनरल सर डगलस ग्रेसी को नियुक्त किया गया था। दोनों पंजाब से आने-जाने वाले शरणार्थियों के बारे में रोजाना सूचना का आदान-प्रदान रिपोर्ट में करते थे।

एक दिन अक्टूबर 1947 में ग्रेसी ने बताया कि उनके पास रिपोर्ट हैं कि अटक रावलपिंडी में कुछ कबायली इकट्ठा हो रहे हैं। दोनों जानते थे कि पाकिस्तान की ओर से पुंंछ निशाने पर है। लेकिन, तब कश्मीर भारत के प्रभुत्व का हिस्सा नहीं था, इसलिए लॉकहार्ट को लगा कि कबायली भारत के लिए खतरा नहीं हैं। नतीजतन, उन्होंने आगे मंत्रालय को या जनरल स्टाफ को कोई जानकारी साझा नहीं की।

तीन माह बाद उनका सामना नेहरू से हुआ। जहाँ उन्होंने इस बात को स्वीकारा और कहा कि शायद वह बेपहरवाह हो गए थे। नेहरू ने सारा ठीकरा उन पर फोड़ा और पूछने लगे कि कहीं उनकी सहानुभूति पाकिस्तान के साथ तो नहीं थी? हैरान कमांडर ने जवाब में कहा,

“मिस्टर प्राइम मिनिस्टर, अगर आप मुझसे ऐसे सवाल करेंगे तो मुझे यहाँ आपकी सेना का कमांडर इन चीफ बनने में कोई इच्छा नहीं है। मैं जानता हूँ कि बॉम्बे से कुछ दिनों में बोट जा रही है जिसमें ब्रिटिश अधिकारी और उनके परिवार इंग्लैंड जाएँगे। मैं उसमें ही रहूँगा।”

बायोग्राफी के अनुसार इस घटना के बाद जनरल लॉकहार्ट ने अपने सेक्रेट्री मेजर जनरल रुद्र को बुलाया और 26 जनवरी 1948 यानी अगले दिन कहा कि उन्होंने अपने पोस्ट से रिजाइन कर दिया है और अपने उत्तराधिकारी की तलाश में हैं।

Bigg Boss वाली हिरोइन जयश्री की संदिग्ध मौत, अपने ही फ्लैट में फंदे से लटका मिला शव

कन्नड़ अभिनेत्री जयश्री रमैया की मौत हो गई है। उनका शव संदिग्ध अवस्था में मिला है। पुलिस ने बताया है कि उनकी लाश फाँसी से फंदे से लटकी हुई मिली। इससे पहले वो ‘बिग बॉस कन्नड़’ का भी हिस्सा रही थीं। सोमवार (जनवरी 25, 2021) को उनके बेंगलुरु स्थित फ्लैट में उनकी लाश मिली। जयश्री रमैया की मौत के बाद लोगों के जेहन में सुशांत सिंह राजपूत की संदिग्ध मौत की यादें ताज़ा हो गईं, जिसकी जाँच सीबीआई कर रही है।

पुलिस ने अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं की है कि कन्नड़ अभिनेत्री जयश्री रमैया की मौत का कारण आत्महत्या है। पुलिस अभी इस मामले की जाँच कर रही है, जिसके बाद आधिकारिक बयान दिया जाएगा।

जयश्री पिछले कुछ दिनों से डिप्रेशन से जूझ रही थी। पिछले दिनों ही खबर आई थी कि बेंगलुरु के संध्या किरण आश्रम में उनका इलाज चल रहा था। उन्होंने पिछले साल सोशल मीडिया पर पोस्ट लिख कर इस दुनिया को छोड़ने की बात कही थी। उन्होंने वीडियो में कहा था कि वह डिप्रेशन से उबरने में सक्षम नहीं रही हैं, इसलिए मौत को गले लगाना चाहती हैं। हालाँकि, कुछ देर बाद ही जयश्री रमैया ने अपने इस पोस्ट को डिलीट कर दिया था।

उन्होंने कहा था कि वो डिप्रेशन से उबर नहीं पा रही हैं और इसीलिए उन्हें इच्छा-मृत्यु की अनुमति चाहिए। वो एक लोकप्रिय मॉडल थीं और बतौर अभिनेत्री भी कर्नाटक में पहचान बनाया था। कन्नड़ स्टार किच्चा सुदीप इस शो के होस्ट थे। उनके दोस्तों का कहना था कि वो किसी पारिवारिक कारण से अवसाद में चली गई थीं। वो अक्सर अपना फोन नंबर बदल लेती थीं, जिससे उनके परिचित उनसे सम्पर्क नहीं कर पाते थे।

सोशल मीडिया पर लाइव आकर अवसाद की बात करने के कुछ ही हफ़्तों बाद उनकी मौत होने को लेकर लोगों में तरह-तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है। उन्होंने बाद में सफाई देते हुए कहा था कि वो एकदम ठीक हैं और अब कोई दिक्कत वाली बात नहीं है।