Home Blog Page 4094

दलित लड़की की हत्या, गुप्तांग पर प्रहार, नग्न लाश… माँ-बाप-भाई ने ही मुआवजा के लिए रची साजिश: UP पुलिस ने खोली पोल

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में एक दलित युवती की मौत के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। पुलिस ने इस ‘नृशंस’ हत्याकांड का अनावरण करते हुए बताया है कि पिता, माँ और भाई ने ही मिल कर युवती की हत्या कर दी। तीनों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया गया है। बाराबंकी के पुलिस अधीक्षक यमुना प्रसाद ने कहा कि जैदपुर थाना क्षेत्रान्तर्गत बीबीपुर के एक सरसों के खेत में एक युवती का नग्न शव मिला था।

एसपी ने बताया, “शव को तत्काल पोस्टमॉर्टेम के लिए भेज दिया गया था और मृतका के पिता के बयान के आधार पर FIR दर्ज की गई है। हत्याकांड के खुलासे के लिए 5 टीमें तत्काल गठित की गई थीं, जिसमें हमारी सर्विलांस की टीम भी शामिल थी। कई थानों की फोर्स लगाई गई, ताकि इसे वर्कआउट किया जा सके। दिन-रात मेहनत कर के उन्होंने इस घटना का पर्दाफाश किया है। मैनुअल इंटेलिजेंस की टीम भी लगाई गई थी।”

एसपी ने जानकारी दी है कि विभिन्न स्तर पर चले जाँच अभियान के दौरान स्थानीय लोगों से भी बातचीत की गई और उनकी भावनाओं को जाना गया। पुलिस ने जाँच के बाद पाया कि इस घटना का वादी ही हत्यारा है। युवती के भाई ने उसे रास्ते से हटाने के लिए सारी साजिश रची थी और इस घटना के लिए उसने एकाध हफ्ते पहले ही माता-पिता को भी मना लिया था। ये लोग लड़की को रास्ते से किसी तरह हटाना चाहते थे।

पुलिस का कहना है कि माँ-बाप पहले तो इसके लिए नहीं तैयार हुए, लेकिन बाद में वो भी युवती की हत्या करने को लेकर राजी हो गए। घटना से एक दिन पहले मृतका के भाई ने अपने खेत में जाकर उस स्थान को चिह्नित किया, जहाँ वो शव फेंकने वाला था। पूरी तरह से तैयारी कर के वो वापस आया और घर पर माता-पिता के साथ मिल कर उसी रात हत्या की योजना बनाई। पुलिस के अनुसार, उन्होंने पहले घर में ही युवती की हत्या करने का प्लान बनाया।

बाराबंकी एसपी ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि लालच में आकर परिवार ने युवती को घर में मार डालने की योजना को त्याग दिया। चूँकि हाल के दिनों में दलित युवतियों की रेप अथवा हत्या के बाद पीड़ित परिवारों को बड़ी रकम बतौर मुआवजा मिली, ऐसा सोच कर युवती के परिवार वालों ने भी आर्थिक लाभ कमाने की सोची। पुलिस ने इसे एक षड्यंत्र करार दिया है, जिसके तहत केस को घुमाने की भी कोशिश की गई।

एसपी यमुना प्रसाद ने कहा, “जनवरी 16 युवती के परिवार वाले उसे खेत में ले गए। वहाँ माँ ने उसका पाँव पकड़ा और भाई ने गला दबाया। मौत सुनिश्चित करने के लिए उसके दुपट्टे से भी उसका गला घोंट दिया। इसके बाद उसके प्राइवेट पार्ट्स पर एक डंडे से प्रहार किया, जिससे वहाँ इंजरी हो जाए और ये दिखने में रेप का मामला प्रतीक हो। उसकी चप्पलों को बगल में फेंक दिया गया। सभी आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है।”

पुलिस ने बताया कि इस दौरान परिवार ने उन सभी लोगों को इस मामले में फँसाने की कोशिश की, जिनसे उनकी दुश्मनी थी या नहीं बनती थी। पुलिस ने ऐसे कई लोगों को थाने लाकर उनसे गहन पूछताछ की। एसपी ने बताया कि आसपास के सभी खेतों के मालिकों और मजदूरों की सूची बना कर उनसे पूछताछ की गई। आसपास के मुर्गीफार्म और सिंचाई करने वाला या वहाँ बैठ कर शराब पीने वाले लोगों तक से पूछताछ हुई।

लेकिन जाँच में जो निकला, उससे पुलिस के भी होश उड़ गए। अब तीनों आरोपितों को जेल भेजने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। दलित युवती की लाश से कपड़े भी उसके परिवार वालों ने ही हटाए थे। पुलिस को शक तब हुआ, जब पोस्टमॉर्टेम में रेप की पुष्टि नहीं हुई। स्थानीय मीडिया के अनुसार, इस घटना को जातीय रंग दिए जाने की भी साजिश थी और हाथरस की तर्ज पर फैब्रिकेट किया जा रहा था। इसे ‘दलित बनाम सवर्ण’ बनाया जाना था। जाँच के क्रम में पुलिस ने 70 लोगों से पूछताछ की।

भाजपा विधायक राम नरेश रावत ने भी ऐसा ही शक जताया था, लेकिन मीडिया ने उनके बयान को विवादित करार दिया। रायबरेली की बछरावाँ के विधायक रावत ने शक जताया था कि मृतका के माँ-बाप ही हत्यारे हो सकते हैं। उन्होंने पीड़िता के गाँव जाकर ग्रामीणों से मुलाकात की थी और घटना को समझा था। उन्होंने पुलिस से भी बातचीत की थी। ग्रामीणों ने विधायक से शिकायत की थी कि इस एक मामले में ऐसा लगता है जैसे सारा गाँव ही हिरासत में जा रहा है।

दिल्ली में ‘किसानों’ ने किया कश्मीर वाला हाल: तलवार ले पुलिस को खदेड़ा, जगह-जगह तोड़फोड़, पुलिस वैन पर पथराव

शांतिपूर्ण प्रदर्शन का वादा कर के किसानों ने गणतंत्र दिवस के मौके पर मंगलवार (जनवरी 26, 2021) को राजधानी दिल्ली में पहुँच कर उपद्रव शुरू कर दिया है। सिंघु सीमा पर ढाई महीने से जमे किसानों ने संजय गाँधी ट्रांसपोर्ट नगर में हंगामा किया, जिसके बाद उन्हें नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आँसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। इस दौरान प्रदर्शनकारी पुलिस के एक वज्र वाहन पर चढ़ गए और वहाँ जम कर तोड़-फोड़ मचाई। ‘किसानों’ द्वारा तलवारें भी भाँजी गईं।

पुलिस के वाहन को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। साथ ही पुलिस के साथ प्रदर्शनकारी किसानों ने जम कर हाथापाई भी की। इस दौरान पुलिस को हिंसा पर उतारू किसानों को रोकने के लिए हल्का बल प्रयोग भी करना पड़ा।

किसान तलवार लेकर पिल पड़े और पुलिसकर्मियों को खदेड़ने लगे। पुलिस उन्हें पीछे हटने के लिए कहती रही और किसान तलवार भाँजते हुए आगे बढ़ते रहे। इस दौरान वो धमकियाँ भी दे रहे थे।

इस घटना में पुलिस के वाटर केनन वाहन को क्षति पहुँची है और कुछ पुलिसकर्मियों को चोटें भी आई हैं। वहीं मुबारक चौक पर भी किसान प्रदर्शनकारी पुलिस की गाड़ी पर चढ़ गए और बैरिकेडिंग को तोड़ डाला। गाजीपुर सीमा पर भी किसान हिंसक हो गए और उन्होंने तोड़फोड़ मचाई, जिसके बाद पुलिस को उन्हें खदेड़ना पड़ा। किसान सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट की तरफ मार्च करने को बेचैन हैं। फरीदाबाद-पलवल सीमा पर ड्रोन की मदद से निगरानी की जा रही है।

वहीं सोशल मीडिया के माध्यम से विपक्षी नेता भी किसानों को भड़काते हुए नज़र आए। प्रियंका गाँधी वाड्रा ने किसानों की ट्रैक्टर रैली की तस्वीरें शेयर कर गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएँ दी। कई मेट्रो स्टेशनों को बंद कर दिया गया है, जिनमें ग्रीन लाइन के अधिकतर स्टेशन शामिल हैं

ट्रैक्टरों पर किसान यूनियनों और भारत के झंडे लगे हैं। उनकी संख्या दसियों हजार में है। इन संगठनों ने कहा है कि वो आउटर रिंग रोड और संसद भवन तक मार्च निकालेंगे।

इससे पहले प्रदर्शनकारी किसानों ने दिल्ली हरियाणा बॉर्डर पर पुलिस बैरिकेडिंग तोड़ दी। वीडियो में देख सकते हैं कि भारी तादाद में किसान बैरीकेडिंग के पार खड़े होते हैं, फिर धीरे धीरे उस पर चढ़ना शुरू कर देते हैं और देखते ही देखते यह भीड़ बैरिकेड्स को तोड़ कर आगे की ओर भागते हैं।

क्रीम-पाउडर बेचने वाली प्रियंका चोपड़ा को अब पछतावा, हॉलीवुड में पहचान बनाए रखने की मजबूरी या ‘दिवाली-सिगरेट’?

बॉलीवुड-हॉलीवुड अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा एक बार फिर चर्चा में आई हैं। इस बार मुद्दा फेयरनेस क्रीम है। प्रियंका को पछतावा है कि उन्होंने भारत में फेयरनेस क्रीम के ऐड किए। अपने हालिया इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि उन्हें भारत में फेयरनेस क्रीम के विज्ञापन के लिए विरोध झेलना पड़ा और हॉलीवुड में उन्होंने ऐसे कैंपेन में भाग लेना बंद कर दिया।

अपनी एक नई प्रोफाइल में प्रियंका चोपड़ा ने बताया कि एक भारतीय एक्टर के लिए फेयरनेस क्रीम का विज्ञापन करना कितनी साधारण बात है। इसके बारे में प्रियंका चोपड़ा ने अपनी लॉन्च होने वाली बुक ‘अनफिनिश्ड’ में खुल कर बात की है।

उनकी ये किताब 9 फरवरी 2021 को रिलीज हो रही है। इसमें उन्होंने अपने बचपन, यूएस में रंग-रूप को लेकर होने वाला भेदभाव और मिस इंडिया व मिस वर्ल्ड के साथ बॉलीवुड-हॉलीवुड के सफर पर बात की है

प्रियंका चोपड़ा ने इंटरव्यू में कहा, ”साउथ एशिया में स्किन लाइटनिंग को एंडोर्स करना आम बात है। इंडस्ट्री इतनी बड़ी है कि हर कोई कर रहा है। बल्कि, आज भी इसे ठीक माना जाता है। महिला एक्टर इसे करती है, लेकिन यह गलत बात है। मेरे लिए भी यह करना गलत था। एक छोटी बच्ची जो चेहरे पर टैल्कम पाउडर लगाती थी, क्योंकि मुझे लगता था कि डार्क स्किन होना अच्छी बात नहीं है।”

याद दिला दें कि प्रियंका चोपड़ा हाल में ब्लैक लाइव्स मैटर कैंपेन का भी हिस्सा बनीं थीं और उससे पहले उन्होंने साल 2015 में बरखा दत्त को दिए अपने साक्षात्कार में भी कहा था, 

“मैं इसे लेकर बहुत बुरा महसूस करती थी, इसलिए मैंने फेयरनेस क्रीम का विज्ञापन करना बंद कर दिया। मेरे सारे भाई-बहन गोरे-चिट्टे थे। मैं ही केवल साँवली थी, क्योंकि मेरे पिता सांवले थे। सिर्फ मजे लेने के लिए मेरी पंजाबी फैमिली मुझे काली, काली, काली बुलाते थे। 13 साल की उम्र में मैं फेयरनेस क्रीम लगाना चाहती थी और चाहती थी कि मेरा सांवलापन दूर हो जाए।”

गौरतलब हो कि आज के समय में प्रोग्रेसिव विचारों की वाहक बन समय-समय पर चर्चा में आ जाने वाली प्रियंका चोपड़ा हमेशा से इस तरह की सोच नहीं रखती थीं। जिन प्रियंका को आज पछतावा है कि उन्होंने भारत में फेयरनेस क्रीम के ऐड किए, वही प्रियंका इन विज्ञापनों के जरिए खासी ख्याति पा चुकी हैं। 2008 से 2012 का समय ऐसा था, जब हर चैनल और बड़े बैनर पर प्रियंका चोपड़ा ही विज्ञापनों में छाई होती थीं।

केवल फेयनेस क्रीम की बात करें तो प्रियंका सबसे पहले 2008 में Ponds के साथ जुड़ीं और बाद में उन्होंने गार्नियर के लिए उसे छोड़ दिया था। इसके बाद एक इंटरव्यू में प्रियंका को ये कहते हुए पाया गया कि आखिर उन्होंने Ponds क्रीम को क्यों एंडोर्स किया। इसमें उन्होंने यहाँ तक कहा था कि Ponds झूठे दावे नहीं करती। रातों रात आपको गोरी-गोरी नहीं बनाती। क्रीम आप गुलाबी निखार देती है।

Image for post
Image for post

अब सोचने वाली बात है कि एक साल में ऐसा क्या हुआ कि प्रियंका चोपड़ा अचानक इन क्रीम्स के ऐड पर पछतावा जताने लगीं और साल 2015 में ये कह दिया कि वह इसे लेकर बुरा महसूस करती हैं। तो बता दें कि वजह उनका वाकई एक दंभ के ख़िलाफ़ जागरूक होना नहीं है। बल्कि उनकी अपनी प्रवृत्ति है, जो उन्हें हर बार अवसरवादी दर्शाती है और दिखाती है कि वह भारत में रहते हुए फेयरनेस क्रीम को एंडोर्स कर सकती हैं व हॉलीवुड के मार्केट में बने रहने के लिए अपने साँवलेपन को। बिलकुल वैसे ही जैसे दिवाली में उन्हें साँस की दिक्कत होती है और छुट्टी पे जाते ही सिगरेट पीने से गुरेज नहीं होता।

याद करिए साल 2015 में जब प्रियंका ने पहली बार इस मुद्दे पर पछतावा जताया था! वह वही समय था, जब प्रियंका ने क्वांटम मूवी से हॉलीवुड में एंट्री की और अधिकतर गोरे कलाकारों में उनकी पहचान एक ब्राउन गर्ल बनकर उभरी। इसके बाद ही उन्होंने खुद को वहाँ स्थापित करने के लिए अपने रंग को एंडोर्स करना शुरू किया और एक गिरोह के बीच में नारीवाद का वो चेहरा बनतीं गईं, जो सशक्त है व अपने विचारों पर खुल कर बात करती है।

गणतंत्र दिवस 2021: सुप्रीम कमांडर राष्ट्रपति के साथ खास पगड़ी में PM… और महिला कमांडर प्रीति – परेड की तस्वीरें

दिल्ली में मंगलवार (जनवरी 26, 2021) को 72वें गणतंत्र दिवस के दौरान राजपथ पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने झंडोत्तोलन किया, जहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत केंद्रीय मंत्रिमंडल के तमाम सदस्य मौजूद रहे। गणतंत्र दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जामनगर से एक विशेष पगड़ी पहनी। गुजरात के जामनगर के शाही परिवार द्वारा इस तरह की पहली पगड़ी पीएम को उपहार में दी गई थी। पीएम मोदी हर वर्ष अलग-अलग पगड़ी पहन कर राष्ट्रीय एकता का संदेश देते हैं।

गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय शहीद स्मारक पर जाकर सेना के बलिदानियों को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ मिल कर महामहिम राष्ट्रपति का स्वागत किया। इस बार का गणतंत्र दिवस कोरोना से सम्बंधित दिशा-निर्देशों और सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों को ध्यान में रख कर मनाया जा रहा है।

राष्ट्रपति ने बयान जारी कर कहा कि हमारा संविधान भारतीय लोकतंत्र की आत्मा है जो एकता, समानता, न्याय, स्वतंत्रता और भातृत्व की भावना को प्रोत्साहित करते हुए करोड़ों भारतीयों की आशाओं और आकांक्षाओं की पूर्ति का सशक्त माध्यम है।

140 एयर डिफेंस रेजिमेंट की कैप्टेन प्रीति चौधरी, परेड में सेना से महिला दस्ते की एकमात्र कमांडर

इस बार गणतंत्र दिवस के दौरान किसानों का विरोध प्रदर्शन भी जारी है और उन्होंने टिकरी सीमा से राजधानी में घुस कर ट्रैक्टर रैली निकाली। वहीं सिंघु सीमा से ट्रैक्टर रैली निकल कर संजय गाँधी ट्रांसपोर्ट नगर पहुँची। ये रैली DTU-शाहबाद-एसबी रोड-दरवाला-बवाना-टी पॉइंट-खंजवाला चौक-खरखोड़ा टोल प्लाजा से होकर गुजर रही है। वहीं टिकरी सीमा ने नजफ़गढ़ और असोड़ा टोल प्लाजा तक जानी है।

गणतंत्र दिवस 2021 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर बलिदानी सैनिकों को श्रद्धांजलि देते पीएम मोदी
भारतीय सेना के टैंक टी-90 भीष्म सलामी देते हुए
राजपथ पर गणतंत्र दिवस परेड का एक दृश्य

दिल्ली में इस बार का गणतंत्र दिवस कई मामलों में पहला है। बांग्लादेश की फ़ौज के 122 सदस्यों ने भी परेड में हिस्सा लिया। इस बार कोई मुख्य अतिथि भी नहीं था। साथ ही राफेल की उड़ान भी देखने को मिली। देश भर में गणतंत्र दिवस की अन्य तस्वीरें आप यहाँ देख सकते हैं। गणतंत्र दिवस की पूर्व-संध्या पर कुल 119 लोगों को पद्म पुरस्कार दिए जाने की भी घोषणा हुई, जिनमें 7 को पदम् विभूषण मिला।

3 बॉर्डर पर बैरीकेडिंग तोड़ ‘किसान’ प्रदर्शनकारियों की भीड़ दिल्ली में घुसी, मुकरबा चौक पर तनावपूर्ण माहौल

गणतंत्र दिवस के मौके पर पुलिस के कंधों पर वैसे तो हर साल सुरक्षा इंतजामों की जिम्मेदारी होती है लेकिन इस वर्ष किसान रैली के कारण उनके सामने नई चुनौती है। इस रैली के नाम पर दिल्ली की सीमा पर इकट्ठा हो रही भीड़ ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। तस्वीरें दिल्ली-हरियाणा टिकरी बॉर्डर से सामने आई हैं। यहाँ कथित किसानों ने पुलिस की बैरीकेडिंग तोड़ दी है।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, प्रदर्शनकारी किसानों ने दिल्ली हरियाणा बॉर्डर पर पुलिस बैरिकेडिंग तोड़ दी है। एजेंसी ने इस जानकारी के साथ एक वीडियो भी जारी की है। वीडियो में देख सकते हैं कि भारी तादाद में किसान बैरीकेडिंग के पार खड़े होते हैं, फिर धीरे धीरे उस पर चढ़ना शुरू कर देते हैं और देखते ही देखते यह भीड़ बैरिकेड्स को तोड़ कर आगे की ओर भागते हैं।

इसी प्रकार गाजीपुर बॉर्डर को लेकर भी खबर है कि गाजीपुर बॉर्डर पर भी किसान बेरिकेडिंग तोड़कर दिल्ली की सीमा में घुस गए। हालाँकि पुलिस अब तक (खबर लिखने तक) किसी को भी आगे नहीं जाने दे रही है, किसानों और नेताओं के साथ बातचीत चल रही है।

सिंघू बॉर्डर की बात करें तो यहाँ से किसान रैली शुरू हो चुकी है और मुकरबा चौक पहुँच कर इन्होंने राइट मुड़कर तय रास्ता बदल लिया है। बादली जाने की बजाय इनकी जिद है कि वह मुकरबा चौक से दिल्ली जाएँगे। इस कारण मुकरबा चौक पर माहौल काफी तनावपूर्ण बन गया है।

गौरतलब है कि किसान नेताओं के साथ कई दौर की बातचीत के बाद रविवार को दिल्ली पुलिस ने 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली निकालने की अनुमति दी थी। पुलिस ने कहा था, “बैरीकेड और अन्य सुरक्षा प्रबंधों को हटाकर राष्ट्रीय राजधानी में किसानों को आने दिया जाएगा और बाद में वह तय दूरी कवर करने के बाद दोबारा अपनी जगह पर लौट जाएँगे।”

बता दें कि आज किसानों की रैली अलग अलग सीमाओं से शुरू हो गई है। कई जगह पर केवल रैली के जरिए प्रदर्शनकारी शांति से अपना शक्ति प्रदर्शन कर रहे हैं और कहीं-कहीं हालातों को काबू करने के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है।

इस बीच दिल्ली पुलिस ने लोगों से अपील की है कि दोपहर तक नई दिल्ली व मध्य दिल्ली में जाने से बचें। गणतंत्र दिवस की परेड खत्म होने के बाद दोपहर से लेकर देर शाम तक किसानों की बाहरी व पूर्वी दिल्ली एरिया में किसान ट्रैक्टर यात्रा हैं। ऐसे में बाहरी व पूर्वी दिल्ली में बड़े पैमाने पर जाम रहने की संभावना है।

झील जम गई… लेकिन तिरंगे के साथ कदम मिलते रहे: देखिए गणतंत्र दिवस 2021 की मजेदार तस्वीरें

मंगलवार (जनवरी 26, 2021) को गणतंत्र दिवस के मौके पर देश भर में कई जगहों पर तिरंगा झंडा फहराया गया और उसे सलामी दी गई। इस अवसर पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद दिल्ली में राजपथ पर झंडोत्तोलन करने वाले हैं और वहाँ परेड की तैयारी चालू है।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक दिन पहले ही गणतंत्र दिवस मना लिया और सम्बोधन भी दे दिया। देश के सभी राज्यों की राजधानियों में राज्यपाल और उप-राज्यपाल ने परेड की सलामी की। यहाँ हम आपको गणतंत्र दिवस 2021 की देश भर की तस्वीरें दिखा रहे हैं, अलग-अलग कोने से।

अपने दिल्ली स्थित आवास पर सुरक्षाकर्मियों में मिठाई बाँटते केंद्रीय मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन
अपने आवास पर गणतंत्र दिवस के दौरान राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत
लद्दाख में बर्फ जमी झील के ऊपर मार्च करते ITBP के जवान
गणतंत्र दिवस के मौके पर कुछ ऐसे चमका श्रीनगर एयरपोर्ट
रेवा के SAF ग्राउंड में झंडोत्तोलन करते सीएम शिवराज सिंह चौहान
कर्णावती में सरसंघचालक मोहनरावजी भागवत ने किया ध्वजारोहण

दिल्ली में इस बार का गणतंत्र दिवस कई मामलों में पहला होगा। बांग्लादेश की फ़ौज के 122 सदस्य भी परेड में हिस्सा लेंगे। इस बार कोई मुख्य अतिथि भी नहीं है। साथ ही राफेल की उड़ान भी देखने को मिलेगी।

परेड में हिस्सा लेने वाले तीनों सेनाओं के जवानों की संख्या इस बार घटा दी गई है। सभी अधिकारियों को पहले ही से कोरोना संक्रमण के कारण बायो बबल में रखा गया था। उधर किसानों की ट्रेक्टर परेड भी जारी है।

जिन्होंने बाबरी मस्जिद के नीचे खोजा राम मंदिर, वैज्ञानिक तरीके से ढूँढा पांडवों का इंद्रप्रस्थ… मिला पद्म विभूषण सम्मान

जिन 7 लोगों को इस वर्ष देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण के लिए चुना गया है, उनमें प्रोफेसर ब्रज बासी लाल (B.B. Lal) का नाम भी शामिल है। उन्होंने 1968-72 में ‘भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI)’ के प्रमुख के तौर पर काम किया था। उनके बारे में जानने लायक सबसे खास बात ये है कि उन्होंने ही बाबरी मस्जिद के नीचे राम मंदिर के दबे होने की बात पता लगाई थी, जिसके कारण दुनिया भर के वामपंथी इतिहासकारों ने उनकी आलोचना की थी।

उन्होंने पता लगाया था कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद की नींव के नीचे राम मंदिर है। उनका जन्म 1921 में उत्तर प्रदेश के झाँसी में हुआ था। 2000 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया था। इसके दो दशक बाद 100 वर्ष की उम्र में उन्हें पद्म विभूषण प्राप्त हुआ है। उन्होंने जहाँ-जहाँ की खुदाई की थी, उनमें हस्तिनापुर (उत्तर प्रदेश), शिशुपालगढ़ (उड़ीसा), पुराना किला (दिल्ली) और कालीबंगन (राजस्थान) प्रमुख हैं।

प्रोफेसर बीबी लाल महाभारत में दिए गए भूगोल को सटीक मानते हैं और उन्होंने बार-बार ऐतिहासिक रूप से उसे परख कर सही भी पाया है। उनकी थ्योरी थी कि प्राचीन काल में जरूर यमुना नदी की धारा मुड़ गई होगी, जिससे पांडवों को अपनी राजधानी बदलनी पड़ी। अंततः महाभारत में उन्हें वो श्लोक मिल गया और उसके आधार पर खुदाई कर के उन्होंने साबित कर दिया कि भारी बाढ़ और यमुना की धारा बदलने के कारण राजधानी बदली थी।

1975-76 के बाद से प्रोफेसर बीबी लाल ने रामायण से जुड़े अयोध्या, भारद्वाज आश्रम, श्रृंगवेरपुरा, नंदीग्राम और चित्रकूट जैसे स्थलों की खुदाई कर दुनिया को कई महत्वपूर्ण तथ्यों से अवगत कराया और जिस हिन्दू धर्म के इतिहास को गायब कर दिया गया था, उसे पुनः जागृत किया। उन्होंने इस संबंध में 150 से भी अधिक रिसर्च आर्टिकल लिखे। उनकी पुस्तक ‘राम, उनकी ऐतिहासिकता, मंदिर और सेतु: साहित्य, पुरातत्व और अन्य विज्ञान’ ने राम मंदिर को लेकर बहस की दिशा ही बदल दी थी

लगभग 67 वर्ष पहले उन्होंने दिल्ली के पुराने किले को खोद डाला था। इसमें कई प्राचीन अवशेष मिले, जिन्हें संरक्षित किया गया। 1953 में ये देश के स्वतंत्र होने के बाद की पहली खुदाई थी। 1969-73 में फिर से उत्खनन हुआ। वो पांडवों की भव्य राजधानी इंद्रप्रस्थ के बारे में पता लगाना चाह रहे थे। दोनों बार की खुदाई का काम उनके ही नेतृत्व में हुआ था। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल कुछ दिनों पहले उनके घर पहुँचे थे और उनका जन्मदिन मनाया था।

उन्होंने रामायण और महाभारत में बताए गए स्थानों को चिह्नित किया और आज भी उनके दिखाए रास्ते पर ही खुदाई होती है और सनातन इतिहास के कई पन्ने हमें मिलते रहते हैं। आर्य-द्रविड़ की थ्योरी को खारिज कर के उसे झूठा साबित कर देने के कारण उन्हें वामपंथी बुद्धिजीवियों की आलोचना का सामना भी करना पड़ा था। लेकिन, वो झुके नहीं और कई पुस्तकों व शोध लेखों के जरिए हिंदुत्व इतिहास को नया जीवन दिया। अब पुरातत्वविद ब्रज बासी लाल को पद्म विभूषण मिला है।

आधी मूँछ में खेलने उतरेंगे अश्विन, पुजारा ने जो ऑस्ट्रेलिया में नहीं किया… अगर इंग्लैंड के खिलाफ कर देंगे तो!

लोग कह रहे हैं कि अश्विन इंडिया के सबसे बड़े क्रिकेट कॉमेंटेटर बनेंगे। जबकि वो अभी टीम इंडिया के लिए खेल ही रहे हैं। लेकिन अपनी शैली से और कहानी गढ़ने की कला से उन्होंने अपने यूट्यूब चैनल को खासा लोकप्रिय बना दिया है।

ऑस्ट्रेलिया को उसी के घर में टेस्ट सीरीज हराने के बाद अश्विन ने अपने यूट्यूब चैनल पर सीरीज से संबंधित कई कहानियाँ सुनाईं। अब वो उसी एनर्जी के साथ इंग्लैंड के खिलाफ होने वाली सीरीज को लेकर अपने साथी खिलाड़ियों को चैलेंज दे रहे हैं।

चेतेश्वर पुजारा ने अपने शरीर पर 11 गेंदे खेल कर चौथे और निर्णायक टेस्ट में उस समय टीम को बाँधे रखा, जब विकेट गिरने का मतलब लगभग हार थी। अब उसी पुजारा को अश्विन ने इंग्लैंड के खिलाफ किसी भी स्पिनर पर क्रिज से निकल आगे बढ़ कर उड़ा कर शॉट खेलने का चैलेंज दिया है। साथ में एक चैलेंज खुद भी लिया है।

पुजारा अगर यह चैलेंज पूरा कर लेंगे तो अश्विन आधी मूँछ मूड़ कर मैदान पर खेलने पहुँच जाएँगे। यह सब कुछ अश्विन ने टीम इंडिया के बैटिंग कोच विक्रम राठौर के साथ बातचीत करते हुए कहा।

शुरुआत में अश्विन ने किसी भी ऑफ स्पिनर को आगे बढ़ कर पुजारा के द्वारा मारने के बारे में राठौर (बैटिंग कोच की हैसियत) से पूछा। इस पर राठौर ने बताया कि वो पुजारा को इसके लिए अभी तक सहमत नहीं कर पाए हैं, और इसके लिए उनके पास तमाम तर्क हैं। फिर अश्विन ने ऑफ-स्पिनर के बजाय दायरा बढ़ाते हुए किसी भी स्पिनर के खिलाफ पुजारा को आगे बढ़ कर मारने का चैलेंज दिया और ऐसा करने पर खुद को आधे मूँछ में क्रीज पर उतरने का भी।

पंत ने मैच जिताया लेकिन पुजारा ने 11 गेंदे शरीर पर झेलीं

ब्रिस्बेन में हुए अंतिम मैच की बात करें तो चेतेश्वर पुजारा ने चौथी पारी में भारत को जिताने में अहम् भूमिका निभाई। भले ही युवा शुभमण गिल और ऋषभ पंत ने इस मैच को भारत की झोली में डालने में बड़ा योगदान दिया, लेकिन पुजारा एक तरफ से खड़े थे। भारतीय टीम के अन्य बल्लेबाजों को पता था कि मैच को ड्रॉ कराने के लिए एक दीवार खड़ी है। पुजारा ने भी निराश नहीं किया।

चौथे टेस्ट मैच के दौरान 11 बार गेंद से उनके शरीर को निशाना बनाया गया या फिर शरीर पर आकर लगी, लेकिन वो टस से मस नहीं हुए।

IND Vs AUS सीरीज की सबसे ‘गंदी’ कहानी

अश्विन ने फील्डिंग कोच श्रीधर को बताया कि भारतीय क्रिकेटरों को सिडनी में लिफ्ट में प्रवेश करने की तब तक अनुमति नहीं थी, जब तक ऑस्ट्रेलियाई टीम का कोई भी सदस्य पहले से ही लिफ्ट के अंदर हो। अश्विन ने बताया:

“हम सिडनी पहुँचे। उन्होंने हम सब पर गंभीर प्रतिबंध लगा रखे थे। भारतीय और ऑस्ट्रेलियाई टीम दोनों ही बायो-बबल में थे। लेकिन जब ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी लिफ्ट में होते थे, तो भारतीय खिलाड़ियों को इसके अंदर जाने की अनुमति नहीं थी।”

TikTok और UC Browser समेत 59 चाइनीज एप्स पर परमानेंट बैन, सरकार के सवालों का नहीं दे पाए जवाब!

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (MeitY) मंत्रालय ने TikTok समेत 59 चीनी एप्स को नोटिस भेज कर उन्हें भारत में हमेशा के लिए प्रतिबंधित करने का निर्णय लिया है। इन सभी कंपनियों को प्रश्नावली सौंपी गई थी, जिसका उन्होंने संतोषजनक जवाब नहीं दिया है। इसीलिए, अब 59 चीनी एप्स पर परमानेंट बैन लग गया है। ये नोटिस पिछले सप्ताह ही भेजा गया था। हालाँकि, कोई आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है।

MeitY ने जून 2020 में ही इन 59 चीनी एप्स को प्रतिबंधित किया था, जिनमें TikTok, Alibaba का UC Browser और Tencent का WeChat शामिल था। उन्हें ऐसी गतिविधियों में संलिप्त पाया गया था, जो देश की संप्रभुता और सम्पूर्णता, रक्षा, सुरक्षा और पब्लिक ऑर्डर को नुकसान पहुँचाने वाली थी। इसके बाद प्राइवेसी और सिक्योरिटी से जुड़े मामलों को लेकर इन कंपनियों से स्पष्टीकरण माँगा गया था।

इन एप्लीकेशंस को IT एक्ट की धारा-69 के तहत प्रतिबंधित किया गया था। पिछले 6 महीनों में सरकार ऐसे 208 चाइनीज एप्स पर बैन लगा चुकी है। भारत-चीन के बीच चल रहे तनावपूर्ण सम्बन्ध और चीन द्वारा सीमा पर की गई हरकतों के बाद ये एक्शन लिया गया। इन एप्स के खिलाफ शिकायतें लगातार मिल रही थीं। TikTok ने कहा है कि वो सरकारी नोटिस का अध्ययन कर रहा है और जल्द ही प्रत्युत्तर देगा।

TikTok के प्रवक्ता ने कहा, “जून 29, 2020 को भारत सरकार के नोटिस को प्राप्त कर के उसका उत्तर तैयार करने वाली हम पहली कंपनी थे। हम स्थानीय नियम-कानूनों के साथ मिल कर चलने की हमेशा कोशिश करते हैं। अगर सरकार को हमसे कोई समस्या है तो हम त्वरित निदान का प्रयास करते हैं। सभी यूजरों की प्राइवेसी और सिक्योरिटी को सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिकता है।” हालाँकि, TikTok के जवाब सरकार को संतुष्ट नहीं कर पाए।

साथ ही शाओमी के MI कम्युनिटी सहित SHAREit, Likee और Weibo को भी हमेशा के लिए प्रतिबंधित किया गया है। इन सभी से जवाब माँगा गया था कि वो भारत में अपने ऑपरेशन के सम्बन्ध में जवाब दें। प्रश्नों की लम्बी सूची में ‘बिना अनुमति के डेटा एक्सेस करने’ से लेकर जासूसी तक के आरोपों पर जवाब माँगे गए थे। शाओमी ने कहा है कि वो सरकार से हर स्तर पर बात कर के समस्याओं के निदान की कोशिश कर रहा है।

इस मामले में पिछले वर्ष भारत को अमेरिका का भी साथ मिला था। अमेरिकी के तत्कालीन विदेश मंत्री माइक पॉम्पिओ ने भारत के फैसले पर कहा था कि एप्स को हटाने का दृष्टिकोण भारत की संप्रभुता को बढ़ावा देगा और अखंडता और राष्ट्रीय सुरक्षा को भी सुदृढ़ करेगा। उन्होंने कहा था, “हम कुछ मोबाइल ऐप्स पर बैन लगाने के भारत के कदम का स्वागत करते हैं।” जो बायडेन की सरकार भी चीन के खिलाफ सख्त है।

‘गजनवी फोर्स’ से जम्मू-कश्मीर के मंदिरों पर हमले की फिराक में पाकिस्तान, सैन्य प्रतिष्ठान भी आतंकी निशाने पर

गणतंत्र दिवस पर किसान संगठनों को ट्रैक्टर रैली की अनुमति देते हुए दिल्ली पुलिस ने पाकिस्तानी साजिशों को लेकर आगाह किया था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी ISI जम्मू-कश्मीर के मंदिरों पर आतंकी हमलों की फिराक में है। टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के अनुसार सैन्य प्रतिष्ठान भी उसके निशाने पर हैं। सेना के आतंकरोधी अभियानों से बौखलाया पाकिस्तान इन हमलों को अंजाम देकर आतंकियों का मनोबल बढ़ाना और देश का सामाजिक सौहार्द बिगाड़ना चाहता है।  

रिपोर्ट के मुताबिक़ जम्मू-कश्मीर हमेशा से पाकिस्तान के आतंकवादी रडार के निशाने पर रहा है। वह ‘जम्मू-कश्मीर गजनवी फ़ोर्स’ की मदद से वहाँ के राज्य के कई हिस्सों में आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देना चाहता है। जम्मू-कश्मीर गजनवी फ़ोर्स पाकिस्तानी खुफ़िया एजेंसी के कश्मीर सेल के अंतर्गत काम करता है। 

13 जनवरी 2021 को कोटली स्थित ‘पाकिस्तान आर्मी ब्रिगेड हेडक्वाटर’ में बैठक हुई थी, जिसकी अगुवाई आईएसआई के मेजर कामरान ने की थी। इस बैठक में उसने विस्तार से योजना बनाई थी। 26 जनवरी को जम्मू में आतंकी हमला कर सकते हैं।

जम्मू कश्मीर में स्थित मंदिरों पर हमले का इकलौता उद्देश्य है भारत में साम्प्रदायिकता फैलाना। रिपोर्ट में यहाँ तक दावा किया गया है कि आईएसआई आतंकवादियों की जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ कराना चाहता है। इसके लिए उन्हें जीपीएस और अन्य उपकरण भी प्रदान कर रहा है।

इस महीने की शुरुआत में जम्मू कश्मीर पुलिस ने उमर अहमद मलिक और सुहैल अहमद मलिक नाम के दो आतंकवादियों को गिरफ्तार किया था। दोनों जैश-ए-मोहम्मद के तहत काम कर रहे थे। दोनों के पास दो एके 47, 1 पिस्टल, 16 ग्रेनेड, 19 एके 47 की मैगजीन और 269 गोलियाँ बरामद की गई थीं।      

गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) के मौके पर किसानों द्वारा निकाली जाने वाली ट्रैक्टर रैली पर भी पाकिस्तान की निगाहें गड़ी हुई हैं। पुलिस ने खूफिया सूत्रों से मिली जानकारी का हवाला देता हुए कहा था कि कुछ ऐसे तत्व हो सकते हैं, जो माहौल बिगाड़ने का प्रयास करें। पुलिस ने बताया है कि ट्विटर पर करीब 308 अकाउंट ऐसे चिह्नित किए गए हैं, जो पाकिस्तान में बने और अब भ्रम पैदा करके किसानों की रैली में माहौल बिगाड़ना चाहते हैं। पुलिस की साइबर टीम लगातार ऐसे सोशल मीडिया अकाउंट पर नजर बनाए हुए हैं।