Home Blog Page 4105

त्रिपुरा कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पर हमले में पार्टी के ही अल्पसंख्यक सेल का प्रमुख हुसैन गिरफ्तार

त्रिपुरा कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष पीयूष कांति बिस्वास पर रविवार को सिपाहीजला जिले के बिसालघर में हमला हुआ था। हमले में उन्हें हल्की चोटें आई थी। इस मामले में पुलिस ने राज्य के एक वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता को गिरफ्तार किया है। इस घटना के लिए भाजपा कार्यकर्ताओं को दोषी ठहराया जा रहा था।

हमले के विरोध में कॉन्ग्रेस ने सोमवार को 12 घंटे के हड़ताल का आह्वान किया था। हालाँकि, मामले की जाँच कर रही पुलिस ने अब पार्टी के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रमुख जॉयदुल हुसैन को घटना के संबंध में गिरफ्तार किया है।

बिस्वास पर हुए हमले के बाद मीडिया भाजपा को दोषी ठहराने में इतनी जल्दीबाजी में थी कि उसने किसी प्रकार की रिपोर्ट या जाँच-पड़ताल को भी जरूरी नहीं समझा। मीडिया द्वारा हमले के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहरा दिया गया। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि वे इस निष्कर्ष पर कैसे पहुँचे।

टाइम्स नाउ ने 17 जनवरी को भाजपा को दोषी ठहराते हुए हेडलाइन के साथ एक रिपोर्ट प्रकाशित की, “बीजेपी कार्यकर्ताओं ने त्रिपुरा कॉन्ग्रेस के प्रमुख पीयूष कांति बिस्वास के वाहन पर कथित तौर पर हमला किया।”

टाइम्स नाउ की रिपोर्ट

फिर इस मामले में NDTV कहां पीछे रहने वाला था। NDTV ने भी इस पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की जिसमें कहा गया था कि “त्रिपुरा कॉन्ग्रेस प्रमुख पर ‘कथित रूप से’ भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा हमला किया गया।” रिपोर्ट में पीटीआई से इनपुट लिए गए थे।

मामले में एनडीटीवी की रिपोर्ट

India.com ने इस मामले पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसमें कहा गया था, “त्रिपुरा के कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पीयूष कांति बिस्वास के वाहन पर रविवार सुबह त्रिपुरा के सिपाहीजला जिले के बिशालगढ़ क्षेत्र में हमला हुआ। जिसमें उन्हें मामूली चोटें आई है। कॉन्ग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा यह हमला किया गया, जिसके विरोध में उन्होंने सोमवार को 12 घंटे के राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया।”

इंडिया.कॉम द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट

यह बात गौर करने वाली है कि मीडिया आउटलेट्स ने जिस आधार पर यह दावे किए उसका अभी तक कोई अता-पता नहीं है। संभव है कि वे अपने व्यक्तिगत पक्षपात के कारण हमले के लिए भाजपा कार्यकर्ताओं को दोष मढ़ने के लिए मजबूर थे।

त्रिपुरा में कॉन्ग्रेस पार्टी के पूर्व प्रमुख और पूर्ववर्ती शाही परिवार के प्रमुख प्रद्योत माणिक्य (Pradyot Manikya) ने कहा है कि उन्हें इस बात से कोई आश्चर्य नहीं है कि राज्य कॉन्ग्रेस प्रमुख पर जॉयदुल हुसैन द्वारा हमला किया गया था।

उन्होंने कहा, “त्रिपुरा कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पर हुए हमले में शामिल अपराधियों में से एक को गिरफ्तार कर लिया गया है और मुझे किसी प्रकार की हैरानी नहीं हुई है कि आरोपित कॉन्ग्रेस पार्टी के राज्य महासचिव/अल्पसंख्यक सेल का अध्यक्ष है। जॉयदुल हुसैन को हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया गया, जब वह राज्य से भागने की फिराक में था।”

उन्होंने अखिल भारतीय कॉन्ग्रेस कमेटी के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए और कहा कि हुसैन को पार्टी दिए जाने पर जब उन्होंने आपत्ति जताई तो उनकी बात को खारिज कर दिया गया था। दरअसल हुसैन पर बाल तस्करी का आरोप था।

प्रद्योत माणिक्य ने कहा, “जब मैं अध्यक्ष बना तो मैंने उसे पदाधिकारी के पद से हटा दिया। लेकिन मेरे लिस्ट को कभी स्वीकार नहीं किया गया, क्योंकि AICC उसे लिस्ट में देखना चाहती थी।”

कोरोना वैक्सीन के लिए बुजुर्गों को ड्रग अथॉरिटी से कॉल, माँग रहे OTP-आधार: Fact Check

कोरोना वैक्सीन के आते ही इस पर फर्जी जानकारी फैलाने का काम धड़ल्ले से किया जा रहा है। जालसाज इसके जरिए धोखाधड़ी को अंजाम देने की भी कोशिश कर रहे।

खबर है कि कोरोना वैक्सीन के नाम पर जालसाज वरिष्ठ नागरिकों को फोन करके खुद को ड्रग अथॉरिटी की ओर से बता रहे हैं और उनसे उनका आधार व ओटीपी माँग रहे हैं। अब चूँकि ऐसी जानकारियाँ साझा करना साइबर अपराध को बढ़ावा देती है, इसलिए पीआईबी ने इन शिकायतों पर संज्ञान लिया है।

पीआईबी ने इस शिकायत पर फैक्टचेक करते हुए लिखा, “ड्रग अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया की ओर से होने का दावा करने वाले कुछ जालसाज़ वरिष्ठ नागरिकों को COVID19 वैक्सीन आवंटन के लिए अपने आधार और ओटीपी की पुष्टि करने के लिए बुला रहे हैं। यह बदमाशों की करतूत है। ऐसे टेलीकॉलर्स को कभी भी ओटीपी और व्यक्तिगत विवरण न दें।”

यहाँ बता दें कि कोरोना वैक्सीन के आने के बाद से इसे लेकर कई तरह के झूठ मीडिया व सोशल मीडिया पर तैर रहे हैं। हाल में 18 जनवरी को कई एजेंसियों ने दावा किया कि यूपी में वैक्सीन लेने के बाद 48 साल के वार्ड बॉय की मृत्यु हो गई जबकि सच्चाई ये थी कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी रिपोर्ट में साफ कहा था कि इसका टीके से कोई संबंध नहीं है। उसकी मृत्यु का कारण कोई और बीमारी थी।

कॉन्ग्रेस समर्थक साकेत गोखले ने भी ऐसे फर्जी दावे को सनसनीखेज बनाकर पेश किया। उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं को ये वैक्सीन लेने से बचना चाहिए, क्योंकि इसके बारे में जानकारी सार्वजनिक नहीं है। सोचिए, ये हाल तब है जब स्वास्थ्य मंत्री कह चुके हैं कि टीके से जुड़ी सारी जानकारी जमीनी स्तर पर उपलब्ध है और 15 जनवरी को शेयर ट्वीट में बता चुके हैं कि किसे वैक्सीन लेने से बचना है।

अब जिस तरह फर्जी जानकारियों से बचने के लिए सरकार पहले ही सभी सूचना मुहैया करवा चुकी है। उसी प्रकार जालसाजों की धोखाधड़ी से लोगों को बचाने के लिए भी प्रयास कर रही है। सरकार की ओर से स्पष्ट बता दिया गया है कि कोरोना वैक्सीन को देने की प्रक्रिया में वह किस तरह से और किन वर्गों का चुनाव कर रहे हैं। इसके अलावा यह जानकारी भी मौजूद है कि वैक्सीन कब, कहाँ, किसे और कैसे दिया जाएगा।

अडानी ग्रुप द्वारा दायर मानहानि के मुकदमे में पत्रकार प्रंजॉय गुहा ठाकुरता के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी

गुजरात की एक अदालत ने अडानी ग्रुप द्वारा दायर मानहानि के मुकदमे में पत्रकार प्रंजॉय गुहा ठाकुरता के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया। यह गिरफ्तारी वारंट मंगलवार (जनवरी 19, 2021) को गुजरात के कच्छ जिले के एक अदालत द्वारा जारी किया गया। लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रदीप सोनी ने नई दिल्ली की निजामुद्दीन थाना पुलिस को निर्देश जारी करते हुए आरोपित को गिरफ्तार करने और अदालत के समक्ष पेश करने का आदेश दिया। उन्होंने बताया कि आरोपित के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 500 के तहत आरोप तय किया गया है।

ठाकुरता ने कथित तौर पर अरेस्ट वारंट के आदेश पर अनभिज्ञता व्यक्त की और साथ ही इस मामले में अपने वकील आनंद याग्निक से बात करने के लिए कहा। आनंद याग्निक ने कहा कि उनके मुवक्किल को अदालत से कोई सूचना नहीं मिली है। उन्हें इस बारे में मीडिया से पता चला। उन्होंने बताया कि अडानी ग्रुप ने ठाकुरता को छोड़कर सभी के खिलाफ शिकायतें वापस ले ली हैं।

याग्निक ने कहा, “लेख प्रकाशित करने वाली पत्रिका आपराधिक मानहानि के लिए जिम्मेदार नहीं है। सह-लेखक के खिलाफ भी मामला वापस ले लिया गया है लेकिन आप लेखक के खिलाफ शिकायत वापस नहीं ले रहे हैं। हमने अदालत में मुकदमा ख़ारिज करने की अर्जी दी है।”

ठाकुरता ने लेख में आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने अडानी ग्रुप के लाभ के लिए ‘नियमों को बदल दिया’

दरअसल, साल 2017 में ठाकुरता इकॉनॉमिक एंड पॉलिटिकल वीकली पत्रिका (ईपीडब्ल्यू) के संपादक थे और उन्होंने अडानी समूह को मोदी सरकार की ओर से 500 करोड़ रुपए का लाभ मिलने की खबर प्रकाशित की थी, इसी को लेकर समूह ने उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था। लेख को पहली बार ईपीडब्ल्यू में प्रकाशित किया गया था। यह लेख सामने आने के बाद अडानी ग्रुप ने प्रकाशन को कानूनी नोटिस भेजकर मानहानि होने का दावा करने वाले लेख को हटाने के लिए कहा। इसके बाद दिल्ली में हुई समीक्षा ट्रस्ट बोर्ड की बैठक में संपादकीय विभाग को दोनों लेखों को हटाने का आदेश दिया गया, जिसके बाद ठाकुरता ने इस्तीफा दे दिया था और फिर बाद में ‘द वायर’ में लेख प्रकाशित किया था।

अडानी ग्रुप ने लेख को पुनः प्रकाशित करने के लिए वायर के खिलाफ मामला दायर किया

नोटिस का पालन करने से इनकार करते हुए, वायर ने लेख को पुनः प्रकाशित किया जिसको लेकर अडानी ग्रुप ने अदालत में निषेधाज्ञा की माँग की। ग्रुप ने गुजरात के दो अलग-अलग अदालतों में वायर के लेखकों और संपादकों के खिलाफ दो मानहानि का मुकदमा दायर किया- एक नागरिक मानहानि का मुकदमा भुज में और एक आपराधिक मानहानि का मुकदमा मुंद्रा में।

जुलाई 2018 में, आपराधिक मानहानि का मुकदमा अदालत द्वारा अलग रखा गया था। मई 2019 में, अडानी समूह ने वायर और ठाकुरता को छोड़कर अन्य सभी अभियुक्तों के खिलाफ मामला वापस ले लिया।

जब 18 जनवरी को अदालतें खुलीं तो ठाकुरता को मजिस्ट्रेट के सामने पेश होना था। उनके वकील ने सूचित किया था कि उन्होंने ठाकुरता को व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट देने की अपील की थी लेकिन अदालत ने इसके लिए सहमति नहीं दी। ठाकुरता के लेख को आगे बढ़ाने वाले वामपंथी पोर्टल द वायर ने एक बयान जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि यह लेख मानहानिकारक नहीं है और वो यह देखकर निराश हैं कि ठाकुरता के खिलाफ मानहानि का मुकदमा वापस नहीं लिया गया।

इस्लामी कट्टरता की बात करने पर लिबरपंथियों ने वीर सांघवी की कर दी डिजिटल लिंचिंग

मीडिया के अभिजात्य वर्ग में वीर सांघवी एक ऐसा नाम हैं जिनकी जिनकी शिक्षा और पत्रकारिता जगत में उपस्थिति को लेकर इंकार नहीं किया जा सकता। कल इन्हीं वीर सांघवी ने मुनव्वर फारूकी के “शर्मनाक उत्पीड़न” और तांडव को लेकर हुए “बेवजह के विवाद” पर एक लेख लिखा।

अपने लेख “हानिरहित हास्य और निर्मित क्रोध (Of harmless humour and manufactured anger)” पर उन्होंने भाजपा को लेकर बात की। इसमें उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधने के लिए ‘सत्तावादी’, ‘आपातकाल’ और ‘अत्याचार’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया।

अब यदि आप मेरी तरह सोचते हैं तो शायद आप ये सब पढ़कर बिलकुल हैरान नहीं हुए होंगे। आखिर सच तो यही है कि इस वर्ग का एक भी दिन कैसे बीत सकता है, बिना ये कहे कि सरकार ने इनकी अभिव्यक्ति के अधिकार को इनसे छीन लिया है।

लेकिन क्या आप इस बात पर विश्वास करेंगे कि वीर सांघवी के इस आर्टिकल से लिबरल गिरोह उन पर भड़क गया है।

है न हैरानी की बात? आइए बताएँ कि वीर सांघवी के इस लेख से वामपंथियों को क्या दिक्कत हो गई।

दरअसल, वामपंथियों के लिए यहाँ तक के विचार स्वीकार्य है जब तक कोई भाजपा सरकार को अत्याचारी बताए। लेकिन ये उन्हें बर्दाश्त नहीं है कि कोई मौलवियों के लिए अपमानजनक भाषा का प्रयोग करे। उदाहरण के लिए नीचे ट्वीट देखिए।

वीर सांघवी का ट्वीट करीब 200 दफा कोट हुआ है और हर किसी ने उन पर अपनी नाराजगी सिर्फ़ एक वजह से दिखाई कि आखिर उन्होंने अपने आर्टिकल में मौलवी का अपमान कैसे किया। वीर सांघवी की टाइमलाइन पर देख सकते हैं कि वह उन चंद लोगों को रीट्वीट कर रहे हैं जिन्होंने उनके लेख के समर्थन में कहा, जबकि उनके फॉलोवर्स की संख्या 4.2 मिलियन है। यानी उनके अधिकतर साथी उनके पक्ष में नहीं है।

अब दूसरे शब्दों में यदि समझें तो हिंदू विरोधी नफरत घृणा की हद तक भारतीय लिबरल-सेकुलरों में हर पराकाष्ठा को पार कर चुकी है। ये वर्ग अब मुस्लिम समुदाय के किसी सदस्य की जरा भी आलोचना बर्दाश्त नहीं कर सकता। तब भी नहीं, जब आप भाजपा की आलोचना करते हुए उन्हें हिंदू कट्टरवादी कहें और केवल समझाने के लिए उनके समकक्ष मुस्लिम चरमपंथियों को रख दें।

लिबरल गिरोह आपको इतनी अनुमति भी नहीं देता कि आप ये समझें कि मुस्लिम चरमपंथियों का कोई अस्तित्व भी है। ये नए तरह के वामपंथी हैं, ये सिर्फ़ हिंदू कट्टरता के लिए भाजपा को इल्जाम देना चाहते हैं और उन्हें ही सबसे बड़ा और एकलौता भक्षक के तौर पर पेश करता चाहते हैं। उन्हें ये स्वीकार्य ही नहीं है कि उनकी तुलना किसी और से हो।

अब बताते हैं कि आखिर वीर संघवी ने अपने लेख में भाजपा की तुलना करते हुए ऐसा क्या लिख दिया कि सब वामपंथी इतना भड़क गए। उन्होंने लिखा:

यह एक रणनीति है जिसमें कई मुस्लिम कट्टरपंथियों ने सफलतापूर्वक महारत हासिल की है। सबसे प्रसिद्ध उदाहरण लें: सलमान रुश्दी के ‘satanic verses’ पर विवाद। उस क़िताब पर प्रतिबंध लगाने वाले लोगों में से किसी ने भी इसे नहीं पढ़ा था। उन्हें इस बात का कोई अंदाजा नहीं था कि क्या इसने इस्लाम का मजाक उड़ाया है। लेकिन उन्होंने किसी भी तरह से विरोध प्रदर्शन किया और उपन्यास को बैन कर दिया।”

इसमें लिखा, “एक अयातुल्ला खुमैनी (Ayatollah Khomeini,) जिन्होंने सलमान रुश्दी या किताब के बारे में पहले कभी सुना भी नहीं था, उन्होंने यह कह दिया कि किताब में पैगंबर का मजाक उड़ाया गया। खुमैनी ने तुरंत एक फ़तवा जारी किया जिसमें उनके चाटुकारों ने रुश्दी को मारने की बात कही।”

समझें? हिंदुओं से घृणा का स्तर कितना अधिक व्यापक है कि यदि भाजपा की तुलना अयातुल्ला खुमैनी (Ayatollah Khomeini,) से भी हो जाए तो नाराजगी दिखने लगती है। मानो जैसे बेचारे अयातुल्ला ने ऐसा भी क्या कर दिया कि उसकी तुलना ‘फासीवादी’ भाजपा से की जाए।

ये हकीकत है भारतीय लिबरलों की। आप यदि ये भी सोचें कि अयातुल्लाह खुमैनी से बद्तर सरकार को आपने चुना है तो भी आपकी बात बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

अब ध्यान दीजिए कि अगर भारतीय लिबरलों के लिए असली लिबरल वीर सांघवी जैसे पत्रकार नहीं हैं तो कौन है जो भाजपा पर भी निशाना साधे और मुस्लिमों के हित के लिए भी बोले? बता दें कि इस सूची में सबसे ताजा उदाहरण AIUDF के मुखिया बदरुद्दीन अजमल का हो सकता है।

जी हाँ, कल ही की बात है कि AIUDF के मुखिया बदरुद्दीन अजमल ने एक रैली में कहा है कि भाजपा के पास देश की 3,500 मस्जिदों की सूची है। अगर यह केंद्र में फिर से सत्ता में आते हैं , तो वे उन सभी मस्जिदों को ध्वस्त कर देंगे।

अजमल ने राज्य में सत्तारूढ़ भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा, “यदि भाजपा असम चुनाव फिर से जीतती है, तो वे महिलाओं को ‘बुर्का’ पहनकर बाहर नहीं निकलने देंगे, दाढ़ी नहीं बढ़ाने देंगे, इस्लामी टोपी नहीं पहनेंगे देंगे और मस्जिदों में ‘अज़ान’ भी नहीं होने देंगे।”। क्या आप इस तरह से रह पाएँगे?”

ममता कैबिनेट से इस्तीफों की हैट्रिक पूरी, मोदी के आने से पहले राजीब बनर्जी ने TMC को दिया झटका

पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मुश्किलों का अंत होता नहीं दिख रहा है। वन मंत्री और डोमजूर (Domjur) से विधायक राजीब बनर्जी ने ममता कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया है।

हाल में ममता कैबिनेट को छोड़ने वाले वे तीसरे मंत्री हैं। उनसे पहले शुभेंदु अधिकारी और लक्ष्मी रतन शुक्ला इस्तीफा दे चुके हैं। नंदीग्राम में खासा प्रभाव रखने वाले शुभेंदु बीजेपी का दामन थाम चुके हैं, जबकि लक्ष्मी रतन पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली के करीबी माने जाते हैं।

राजीब बनर्जी का इस्तीफा राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने स्वीकार कर लिया है। उनके भी बीजेपी में जाने की अटकलें लग रही है। उन्होंने इस्तीफा ऐसे वक्त में दिया है जब नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बंगाल दौरे पर आ रहे हैं।

राजीब बनर्जी ने इस्तीफे में लिखा है, “मुझे यह बताते हुए खेद है कि आज 22 जनवरी 2021 को मैंने कैबिनेट मंत्री के पद से अपने कार्यालय से अपना इस्तीफा दे रहा हूँ। पश्चिम बंगाल के लोगों की सेवा करना बहुत सम्मान और सौभाग्य की बात है। मैं इस अवसर को पाने के लिए दिल से आभार व्यक्त करता हूँ।”

कहा जा रहा है कि राजीब बनर्जी भी ममता बनर्जी की कार्यशैली और पार्टी के कामों में उनके भतीजे की बढ़ती दखलंदाजी से नाखुश चल रहे थे। त्यागपत्र देते हुए राजीब ने कहा, “मैं परेशान और मानसिक रूप से आहत था और मुझे यह कदम उठाना पड़ा। मैं दुखी हूँ और इससे मेरा दिल टूट रहा लेकिन मुझे यह करना पड़ा। मैं ममता बनर्जी के इतने सालों के मार्गदर्शन के लिए उनका आभारी हूँ। मैं बंगाल के लोगों के लिए काम करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराता हूँ।”

कई मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी 30 और 31 जनवरी को बंगाल दौरे पर जा रहे हैं। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि उस दौरान कई नेता भाजपा में शामिल हो सकते हैं।

उल्लेखनीय है कि भाजपा महासचिव व राज्य के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय 40 से ज्यादा तृणमूल कॉन्ग्रेस के विधायकों के संपर्क में होने का दावा पहले ही कर चुके हैं। हालाँकि उन्होंने नामों का खुलासा नहीं किया है। उन्होंने कहा कि केवल स्वच्छ छवि वाले नेताओं को ही पार्टी में शामिल होने की अनुमति दी जाएगी।

भाजपा नेता ने कहा था,“मेरे पास 41 विधायकों की सूची है जो भाजपा में शामिल होना चाहते हैं। अगर मैं उन्हें भाजपा में शामिल कर लूँ, तो बंगाल सरकार गिर जाएगी। हम उनके बैकग्राउंड को चेक कर रहे हैं और पार्टी में केवल स्वच्छ छवि वाले नेताओं को ही शामिल होने दिया जाएगा। सभी का मानना है कि ममता सरकार सत्ता से जाने वाली है।” गौरतलब है कि अब तक 16 टीएसमी विधायक इस्तीफा दे चुके हैं। इनमें से ज्यादातर बीजेपी में शामिल हुए हैं।

बॉलीवुड पर मुंबई पुलिस मेहरबान, यूपी पुलिस को फरहान अख्तर से नहीं करने दी पूछताछ

वेब सीरीज ‘मिर्जापुर’ के निर्माताओं खिलाफ दर्ज मामले की जाँच करने गुरुवार (जनवरी 21, 2021) को मुंबई पहुँची उत्तर प्रदेश पुलिस को मुंबई पुलिस का सहयोग नहीं मिल रहा है। उत्तर प्रदेश पुलिस टीम ने यह शिकायत की है। 

यूपी पुलिस की तीन सदस्यीय टीम उत्तर प्रदेश में मिर्जापुर जिले के कोतवाली देहात थाने में दर्ज मुकदमे की जाँच कर रही है। उन्होंने मुंबई पुलिस पर जाँच प्रक्रिया में सहयोग न करने का आरोप लगाया है। बता दें कि नियमों के मुताबिक मुंबई में किसी भी केस की जाँच के लिए मुंबई पुलिस के नोडल ऑफिसर (क्राइम ब्रांच DCP) की इजाजत यूपी पुलिस को हासिल करनी होगी।

यूपी पुलिस पिछले 2 दिनों से क्राइम ब्रांच के डीसीपी अकबर पठान के दफ्तर के चक्कर लगा रही है। लेकिन डीसीपी अकबर पठान के उपलब्ध नहीं होने से मिर्जापुर पुलिस को जाँच की इजाजत नहीं मिल रही है। गुरुवार सुबह भी मिर्जापुर पुलिस अंधेरी स्थित क्राइम ब्रांच डीसीपी के दफ्तर पहुँची थी, लेकिन मुंबई पुलिस से कोई सहयोग नहीं मिला। 

इसके बाद यूपी पुलिस अंधेरी से निकलकर खार इलाके में पहुँची और फरहान अख्तर से पूछताछ करने पहुँच गई। मुंबई पुलिस को तत्काल इसकी भनक लग गई और इसकी सूचना स्थानीय खार पुलिस स्टेशन को दी गई। खार पुलिस स्टेशन के पुलिसकर्मी फरहान अख्तर के घर पहुँचे और फरहान अख्तर के घर के दरवाजे पर यूपी पुलिस और मुंबई पुलिस के बीच जमकर नोकझोंक हुई। मुंबई पुलिस ने चेतावनी देते हुए कहा कि नियमों का पालन करते हुए उचित इजाजत लेकर आएँ और फिर पूछताछ करें। इस हंगामे और नोकझोंक के बाद यूपी पुलिस फरहान अख्तर के घर से बाहर निकली।

धार्मिक भावनाओं को आहत करने के लिए FIR

उत्तर प्रदेश पुलिस की एक टीम गुरुवार को ‘मिर्जापुर’ के खिलाफ दर्ज एफआईआर की जाँच करने मुंबई पहुँची। अरविंद चतुर्वेदी की शिकायत के बाद मामला दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता ने कहा कि वेब सीरीज ने उनकी धार्मिक, सामाजिक और क्षेत्रीय भावनाओं को चोट पहुँचाई है और यह मिर्जापुर शहर की छवि को धूमिल करता है। इसके अलावा, शिकायतकर्ता ने कहा कि वेब सीरीज मिर्ज़ापुर अपमानजनक सामग्री, अनाचार और अवैध संबंधों को भी दिखाती है।

कथित तौर पर, फरहान अख्तर, भौमिक गोंदालिया और रितेश सिधवानी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। उत्तर प्रदेश पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 295 ए, 504, 505 और आईटी अधिनियम के संबंधित धाराओं के तहत तीनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।

SC ने मिर्जापुर के निर्माताओं को नोटिस जारी किया

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को वेब सीरीज़ मिर्जापुर (Mirzapur) और अमेजन प्राइम वीडियो (Amazon Prime Video) के निर्माताओं को नोटिस भेजा। इस नोटिस में कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के जिला मिर्ज़ापुर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक छवि खराब करने के संबंध में ओवर-द-टॉप (OTT) प्लेटफॉर्म और शो के निर्माताओं से जवाब माँगा।

यह नोटिस मिर्जापुर जिले के निवासी एसके कुमार की एक याचिका पर जारी किया गया। याचिकाकर्ता ने निर्माताओं पर उत्तर प्रदेश की छवि खराब करने का आरोप लगाया था। शिकायतकर्ता कुमार ने कहा था कि वेब सीरीज में मिर्ज़ापुर को ‘आतंक और अवैध गतिविधियों का केंद्र’ के रूप में चित्रित किया गया है।

सुशांत सिंह मामले में भी नहीं किया था बिहार पुलिस का सहयोग

गौरतलब है कि बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत आत्महत्या मामले में भी मुंबई पुलिस का रवैया ऐसा ही था। उन्होंने मुंबई पहुँची बिहार पुलिस का सहयोग नहीं किया था। सुशांत सिंह आत्महत्या की जाँच करने मुंबई पहुँचे पटना के एसपी विनय तिवारी को बीएमसी के अधिकारियों ने 14 दिनों के लिए क्वारंटाइन कर दिया था। बिहार के तत्कालीन डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने बताया था कि मुंबई पुलिस ने बिहार पुलिस के साथ सुशांत सिंह राजपूत की ऑटोप्सी रिपोर्ट शेयर करने से इनकार कर दिया था।

भारत ने UN में उठाया पाकिस्तान में मंदिर तोड़े जाने का मुद्दा, कहा- ‘मुस्लिम’ भीड़ के आगे मूक दर्शक बनी रही सरकार

पाकिस्तान में एक मौलवी के आदेश पर कट्टरपंथियों द्वारा हिंदू मंदिर को तोड़े जाने वाले मामले को भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की नीयत पर सवाल उठाते हुए लताड़ लगाई है। भारत ने कहा कि शांति की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव से पाकिस्तान जुड़ा हुआ है। इसके बावजूद भीड़ ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में एक ऐतिहासिक मंदिर में तोड़फोड़ की और पाकिस्तानी सरकार मूकदर्शक बनकर देखती रही।

संयुक्त राष्ट्र महासभा में धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के लिए शांति और सहिष्णुता की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए अपनाए गए प्रस्ताव पर गुरुवार को हो रही चर्चा के दौरान भारत ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में पिछले साल दिसंबर 2020 में सैकड़ों लोगों की भीड़ द्वारा तोड़े गए एक हिंदू मंदिर की बर्बरता पर पाकिस्तान को फटकार लगाई है। संयुक्त राष्ट्र में भारतीय राजदूत टीएस तिरुमूर्ति ने कहा कि इस प्रस्ताव का इस्तेमाल पाकिस्तान जैसे देशों के लिए छिपने या गुमराह करने के लिए नहीं किया जा सकता है।

भारत ने कहा कि दुनिया में आतंकवाद, हिंसात्मक अतिवाद, कट्टरपंथ और असहिष्णुता में इजाफा हो रहा है। इससे धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत स्थलों पर आतंकी गतिविधियों से नुकसान और विनाश का भय बढ़ रहा है। इसका ताजा उदाहरण हाल ही में पाकिस्तान में हिंदुओं के साथ हुई घटना है।

संयुक्त राष्ट्र में भारतीय राजदूत टीएस तिरुमूर्ति ने कहा कि एक बहुसांस्कृतिक देश के रूप में भारत सभी धार्मिक और सांस्कृतिक अधिकारों और पूजा स्थलों की रक्षा करता है। इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान की आलोचना करते हुए कहा कि जब करक में ऐतिहासिक हिंदू मंदिर में आग लगा दी थी, तब वहाँ के अधिकारी चुपचाप दर्शक की तरह तमाशा देख रहे थे। मंदिर में तोड़फोड़ और आगजनी वहाँ के प्रशासन के स्‍पष्‍ट समर्थन से किया गया था।

भारत ने कहा, “संयुक्त राष्ट्र और यूएन अलायंस ऑफ सिविलाइजेशन को किसी का पक्ष नहीं लेना चाहिए और जब तक ऐसी चयनात्मकता मौजूद है, दुनिया कभी भी शांति की संस्कृति को बढ़ावा नहीं दे सकती है। हमें उन ताकतों के खिलाफ एकजुट होना चाहिए जो नफरत और हिंसा के साथ बातचीत और शांति को दबाती हैं।”

भारत ने अल्पसंख्यकों पर हुए अत्याचारों को भी गिनाया और कहा, “अफगानिस्‍तान में कट्टरपंथियों द्वारा भगवान बुद्ध की मूर्तियाँ तोड़े जाने की याद आज भी हमारे जेहन में बनी हुई है। आतंकियों ने अफगानिस्‍तान में सिखों के गुरुद्वारे पर कायराना हमला किया जिसमें 25 श्रद्धालु मारे गए। यह इस खतरे का एक और उदाहरण है। “

गौरतलब है कि साल 2020 के दिसंबर महीने में खैबर पख्तूनख्वा प्रांत स्थित एक मंदिर के मरम्मत कार्य का विरोध कर रहे मुस्लिमों की भीड़ ने मंदिर में तोड़-फोड़ की थी और आग लगा दी थी। सोशल मीडिया पर वॉयस ऑफ पाकिस्तानी माइनॉरिटी ने पूरी घटना की वीडियो शेयर की थी।

वीडियो में देख सकते हैं कि सैंकड़ों मुस्लिमों की भीड़ वहाँ मौजूद थी। मंदिर तोड़ते वक्त आस-पास अल्लाह-हू-अकबर के नारे लग रहे थे। इस्लामी झंडा लहरा कर मंदिर को तोड़ा जा रहा था। जगह जगह से धुआँ उठ रहा था। गोले दागने की आवाजें भी वीडियो में साफ सुनाई दे रही थी।

3 महीने की प्लानिंग, 15 दिन की छुट्टी, 25 किलो सोना… दिल्ली पुलिस को चकमा नहीं दे पाया शेख नूर

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में चोरी का एक बड़ा ही सनसनीखेज मामला सामने आया है। कालकाजी इलाके में स्थित अंजलि ज्वैलर्स के बाहर 5 हथियारबंद गार्ड मौजूद होने के बावजूद एक चोर पीपीई किट पहनकर शोरूम में घुसा और करोड़ों का सामान लेकर फरार हो गया। पूरी घटना बुधवार (जनवरी 20, 2021) रात 11:00 बजे की है। 

पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए यह केस 24 घंटों में सुलझा लिया है। पड़ताल में पता चला कि चोर कोई और नहीं, बल्कि ज्वैलरी शॉप में काम करने वाला शेख नूर रहमान है। उसने 6 घंटे में अकेले इस वारदात को अंजाम दिया और इन 6 घंटों में भी वह सिर्फ़ 4 घंटे शोरूम में था।

पुलिस का कहना है कि आरोपित ने पहचान छिपाने के लिए पीपीई किट पहनकर चोरी की। वह अच्छे से वाकिफ था कि शोरूम के अंदर और आसपास कहाँ-कहाँ सीसीटीवी कैमरे लगे हैं।

इस वारदात के बारे में बुधवार को करीब 11 बजे अंजलि ज्वैलर्स के मैनेजर अरिजीत चक्रवर्ती ने पुलिस को सूचना दी थी। पुलिस मौके पर पहुँची और जाँच की। पड़ताल में पता चला कि चोर छत से दुकान में घुसा और 25 किलो सोना लेकर चंपत हो गया। उसने करीब 20 करोड़ रुपए की चोरी को अंजाम दिया।

चोरी की राशि सुन पुलिस भी हैरान रह गई। डीसीपी साउथ ईस्ट राजेंद्र प्रसाद मीणा ने फौरन जिले की तमाम पुलिस को चोरी की वारदात को सुलझाने के लिए लगा दिया। सबसे पहले पुलिस ने इलाके की तमाम सीसीटीवी फुटेज को खंगाला और शोरूम के पास लगे कैमरे को भी देखा।

इसके बाद शोरूम के अंदर जो कैमरा लगा था, उसमें उन्हें चोरी करते हुए एक शख्स नजर आया, जिसने पहचान छिपाने के लिए पीपीई किट पहनी हुई थी। इस फुटेज से और चोर की गतिविधियों से यह पता चला कि यह कारनामा किसी अंदर के आदमी ने ही किया है।

पुलिस ने इसी आधार पर शोरूम में काम करने वाले सभी कर्मचारियों की लिस्ट बनाई, फिर सबका वेरिफिकेशन किया और सब से पूछताछ की गई। इसी पड़ताल में पुलिस को पता चला कि शोरूम में काम करने वाला एक इलेक्ट्रिशियन शेख नूर रहमान 15 दिन की छुट्टी लेकर घर गया हुआ है। पुलिस को इसी बिंदु पर शक हुआ।

जब पुलिस ने इस संबंध में पड़ताल की तो शेख से संपर्क नहीं हुआ। मगर, बाद में अपने खबरियों की मदद से पुलिस शेख रहमान तक पहुँच गई और उसे दिल्ली के करोलबाग से धर दबोचा। सख्ती से पूछताछ के बाद पुलिस ने उसके पास से सारा कैश और ज्वैलरी बरामद कर ली। शेख ने अपना जुर्म कबूलते हुए बताया कि शोरूम में उसे प्रताड़ित किया जाता था। बदला लेने के लिए उसने ये सब किया।

डीसीपी साउथ ईस्ट राजेंद्र प्रसाद मीणा के अनुसार शेख नूर रहमान ने वारदात से पहले रेकी की हुई थी। उसने यूट्यूब देखकर आइडिया इकट्ठे किए और बाद में इस वारदात को अंजाम दे डाला।  पुलिस का कहना है कि इलेक्ट्रिशियन होने के कारण वह हाई टाइप टूल चलाने में माहिर है। चोरी की वारदात को अंजाम देने से पहले शेख नूर रहमान 3 माह से प्लानिंग कर रहा था। उसने 50,000 खर्च करके ऑनलाइन उपकरण खरीदे थे। इन्हें ही उसने चोरी के दौरान इस्तेमाल भी किया।

सभी इंतजाम होने के बाद वह घटना वाले दिन एक बगल वाली बिल्डिंग से शोरूम के थर्ड फ्लोर पर दाखिल हुआ और थर्ड फ्लोर का ताला तोड़कर शोरूम में घुसा। 4 घंटे भीतर रहने के बाद वह सारा सामान लेकर फरार हो गया। पूरी वारदात के लिए ही शेख ने 15 दिन की छुट्टी ली थी ताकि किसी को उस पर संदेह न हो। जाँच में पता चला है कि रहमान कोलकाता का निवासी है। करीब एक साल से वह शोरूम में काम कर रहा था।

आज हुए चुनाव तो NDA को 321 सीटें: अपने ही चैनल के सर्वे से राजदीप परेशान, ट्विटर पर निकाली भड़ास

इंडिया टुडे ने जनता की द्विवार्षिक राय जानने के लिए ‘मूड ऑफ द नेशन’ नाम से एक पोल कराया। 2021 का पहला पोल इंडिया टुडे द्वारा कल जारी किया गया। लेकिन जो परिणाम आए वह तथाकथित ‘धर्मनिरपेक्ष-उदारवादी’ मीडिया के लोगों के लिए काफी चौकाने वाले निकले। क्योंकि लिबरल गिरोह तो शायद यह उम्मीद कर रहे थे कि महामारी और उसके बाद के आर्थिक स्थिति के चलते भारतीय नागरिक मोदी सरकार से नफरत करने लगे होंगे।

चीन से फैले महामारी के लगभग एक साल बाद, इंडिया टुडे-कर्वे इनसाइट्स ने अपने द्विवार्षिक ‘मूड ऑफ द नेशन’ पोल करवाया। गुरुवार को प्रकाशित पोल के परिणामों से यह बात साबित हुई कि कोरोनावायरस महामारी को लेकर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उठाए गए कदमों पर भारतीयों ने अपनी संतुष्टि व्यक्त की है।

इंडिया टुडे कर्वे इनसाइट्स ‘मूड ऑफ द नेशन’ सर्वे

इंडिया टुडे-कर्वे इनसाइट्स मूड ऑफ द नेशन पोल के अनुसार, सर्वे में भाग लेने वाले देश के लगभग तीन-चौथाई नागरिक मोदी सरकार द्वारा आर्थिक संकट से निपटने की नीति को लेकर खुश है। MOTN सर्वे में पाया गया है कि 73 प्रतिशत भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश में कोविड-19 महामारी से निपटने के लिए किए गए कार्यों से संतुष्ट हैं।

सर्वे में कहा गया है कि 23% रेस्पोंडेंट ने कहा कि मोदी सरकार का काम आउटस्टैंडिंग रहा, जबकि 50% ने इसे अच्छा माना। अप्रूवल रेटिंग के संदर्भ में, 74% भारतीय पीएम मोदी से खुश हैं। गौरतलब है कि जहाँ अगस्त 2020 के सर्वेक्षण में 78% का आँकड़ा सामने आया था, वहीं इस बार के आँकड़े में यह बस एक मामूली सी गिरावट है।

साभार: India Today

MOTN सर्वे में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने महामारी की वजह से आर्थिक संकट को जिस तरह से हैंडल किया उससे 67 फीसदी भारतीय संतुष्ट हैं। 20% रेस्पोंडेंट ने इसे आउटस्टैंडिंग कहा तो वहीं 47% भारतीयों ने इसे अच्छा प्रदर्शन कहा। इसके अलावा MOTN पोल ने यह भी कहा कि 66 प्रतिशत रेस्पोंडेंट ने कहा कि महामारी के कारण उनकी इनकम कम हुई है, जबकि 19 प्रतिशत ने कहा कि उन्होंने इस दौरान अपनी नौकरियाँ खो दी हैं।

साथ ही सर्वे में यह भी अनुमान लगाया गया है कि अगर आज चुनाव करवाया जाए तो भाजपा भारी बहुमत से सत्ता में वापसी करेगी। द मूड ऑफ द नेशन पोल के मुताबिक बीजेपी 291 सीटें जीतेगी, जोकि अगस्त 2020 में मिले सीटों से आठ सीटे से ज्यादा है। अभी आए MOTN सर्वेक्षण के अनुसार, भाजपा की अगुवाई वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) लगभग 321 सीटें जीतेगी, जोकि अगस्त में 316 था।

अमित शाह के लिए भी नतीजे चौकाने वाले निकले

MOTN सर्वेक्षण ने गृह मंत्री अमित शाह को मोदी सरकार में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला मंत्री माना है। सर्वे प्रतिभागियों में से 39% ने शाह के पक्ष में मतदान किया है। उनके बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 17%, तो वहीं 10% के साथ नितिन गडकरी चौथे स्थान पर रहे।

इंडिया टुडे

अपने ही चैनल का सर्वे देखकर राजदीप हुए हैरान-परेशान

जैसे ही इंडिया टुडे ने गुरुवार को अपने शो में इन उपरोक्त नंबरों को प्रकाशित किया, राजदीप सरदेसाई हैरान रह गए। राजदीप सरदेसाई ने अपने मन की भड़ास ट्विटर पर निकालते हुए कहा कि यह उनके लिए ‘चौंकाने वाला’ था कि आर्थिक संकट और करोना महामारी के बावजूद पोल के नतीजों में भारतीयों ने मोदी सरकार के कामों सराहना की है।

राजदीप सरदेसाई ने सर्वेक्षण पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वह सर्वे पर विश्वास ही नहीं कर पा रहे क्योंकि लगभग 85% लोग लॉकडाउन में अपनी आजीविका के अवसरों को खोने के बावजूद आर्थिक संकट से निपटने के लिए दो तिहाई से अधिक लोग सरकार की सराहना कर रहे हैं।

अपने शो में राजदीप सरदेसाई ने कहा, “चलो बहुत स्पष्ट तौर पर बताते है कि COVID के समय के दौरान इनकम में 66% की कमी आई, 19% लोग कहते हैं कि उन्होंने अपनी नौकरी खो दी। और फिर भी इस सर्वे से पता चलता है कि लोग जीवन बचाने के लिए सरकार की सराहना कर रहे है। एक तरह वे अपनी आजीविका के लिए चिंतित हैं, लेकिन साथ ही, वे यह कहने को तैयार नहीं हैं कि केंद्र गलत तरीके से काम कर रहा है। मेरे पास अभी भी इस मामले में तर्कसंगत व्याख्या नहीं है।”

हमने रिस्क लिया, आलोचना झेली तभी स्वदेशी वैक्सीन आज दुनिया को सुरक्षा कवच दे रही है: दीक्षांत समारोह में PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (जनवरी 22, 2021) सुबह असम के तेजपुर विश्वविद्यालय के 18वें दीक्षांत समारोह का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उद्धाटन किया। 18 वें दीक्षांत समारोह में असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने भाषण की शुरुआत की। इस अवसर पर पीएम मोदी छात्रों के साथ भारतीय क्रिकेट टीम द्वारा ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हासिल की गई विजय का जिक्र करना भी नहीं भूले।

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि तेजपुर विश्वविद्यालय ने कचड़े को कंचन बनाने का बीड़ा उठाया है और यहाँ का इनोवेशन सेंटर अच्छा काम कर रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि हमें जल जीवन मिशन को आगे ले जाना है। इस दिशा में हमें नदियों से सीख लेने की जरूरत है। ऐसा इसलिए कि नदियाँ हमें जीने की प्रेरणा देती हैं।

पीएम मोदी ने कहा, “हमारा राष्ट्र इस वर्ष स्वतंत्रता के 75 वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। असम के असंख्य लोगों ने हमारे स्वतंत्रता संग्राम में योगदान दिया है। अब यह आप पर है कि आप अपने जीवन का उपयोग एक आत्मनिर्भर भारत के लिए करें।”

छात्रों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि कोरोना काल में भारत ने ‘वोकल फॉर लोकल’ के सन्देश को आम बनाया है। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ हमारी शब्दावली का अहम हिस्सा हो गया है और हमारा पुरुषार्थ, हमारे संकल्प, हमारी सिद्धि, हमारे प्रयास ये सब हम अपने ईर्द-गिर्द महसूस कर रहे हैं।

पीएम मोदी ने कहा, “भारत ने त्वरित, सक्रिय निर्णय लिए और समस्या के बढ़ने का इंतजार नहीं किया। ‘मेड इन इंडिया’ समाधानों के साथ, हमने वायरस के प्रसार को नियंत्रित किया और हमारे स्वास्थ्य ढाँचे में सुधार किया। अपने हेल्थ इंफ्रा को बेहतर किया। अब हमारे वैक्सीन से जुड़ी रिसर्च और प्रोडक्शन की क्षमता भारत के साथ-साथ दुनिया के अनेक देशों को सुरक्षा कवच का विश्वास दे रही है।”

भारतीय क्रिकेट टीम की साहसिक जीत का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “ऑस्ट्रेलिया में भारतीय टीम, दृष्टिकोण में बदलाव का एक बड़ा उदाहरण है। पहला टेस्ट हारने के बाद भी उन्होंने लड़ना जारी रखा। ऑस्ट्रेलिया में भारतीय क्रिकेट टीम से बुरी हार के बावजूद भी हमारे खिलाड़ियों ने जीत हासिल की। चुनौतीपूर्ण स्थिति में निराश होने की वजह, हमारे युवा खिलाड़ियों ने चैलेंज का सामना किया और नया समाधान तलाशा।”

पीएम ने युवाओं से संवाद करते हुए कहा कि अगर आपके सामने एक तरफ सुरक्षित जीवन जीने का मौका हो (सेफ पैसेज) और दूसरी तरफ रिस्क लेकर आगे बढ़ने का विकल्प हो, तो आपको रिस्क लेना चाहिए। उन्होंने कहा, “आपको क्या लगता है हमारे सामने चुनौतियाँ या रिस्क नहीं हैं। हमारी सरकार खुद रिस्क उठा रही है। हमें आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। भारत ने हालत से समझौता करने के बजाय तेजी से फैसले लिए। इसी का परिणाम है कि हम आत्मनिर्भर भारत की दिशा में काफी आगे बढ़ चुके हैं। कोरोना से निपटने में काफी सक्षम साबित हुआ। स्वदेशी कोरोना वैक्सीन भारतवासियों के साथ दुनिया को सुरक्षा कवच दे रही हैं।”