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केरल में नॉन हलाल रेस्तराँ खोलने वाली महिला से कहा- यह सब ठीक नहीं, फिर भी झुकी नहीं

तुशारा (Thushara) नाम की महिला ने केरल के एर्णाकुलम में एक नॉन हलाल रेस्तराँ खोला है। ट्विटर यूजर प्रतीश विश्वनाथ ने अपने अकाउंट के जरिए उनकी इस नई पहल की जानकारी दी है। उनके मुताबिक इस जगह सिर्फ़ गैर-हलाल खाना ही सर्व होता है और बाहर बैनर पर साफ-साफ यह लिखा है कि इस जलपान गृह में हलाल खाना प्रतिबंधित है।

तुशारा बताती हैं कि जब उन्होंने इसे शुरू किया तब कई मुस्लिमों ने उनके विचार का विरोध किया। लेकिन उन्होंने सभी की बातें सुनने के बाद भी अपने इस आइडिया पर काम किया। आज उन्हें इस रेस्तराँ को खोले डेढ़ साल बीत गए हैं। वह कहती हैं, “मुस्लिमों ने लगातार कहा कि ये सब ठीक नहीं है। जब भी हिंदू कोई बिजनेस शुरू करना चाहते हैं, मुस्लिम हस्तक्षेप जरूर करते हैं।”

एर्नाकुलम के इस रेस्तराँ में तमाम ग्राहक बिना किसी आपत्ति के खाना खाने आते हैं, जिसके आधार पर महिला कहती हैं, “जिन्हें मेरे नॉन-हलाल कॉन्सेप्ट से आपत्ति नहीं है उनका मैं स्वागत करती हूँ और जिन्हें परेशानी है, उनके पास यहाँ न आने का विकल्प है।”

महिला बताती हैं कि बहुत से ऐसे लोग हैं जो बिना हलाल हुआ खाने को पसंद करते हैं इसलिए किसी के पास यह अधिकार नहीं है कि उन्हें हलाल खाना खिलाएँ। बाहर लगे बैनर के बारे में तुशारा कहती हैं कि भोजनालयों के बाहर गैर-हलाल बोर्ड रखने को इतना बड़ा मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए।

हलाल मीट का विरोध करने पर हो चुके हैं केरल में 4 लोग गिरफ्तार

गौरतलब है कि केरल में हलाल मीट को लेकर विवादों की सूची बहुत लंबी है। हाल में एक मामला आया था, तब ‘मोडी’ नाम की एक बेकरी पर हलाल मीट की उपलब्धता बताने के लिए स्टिकर लगा था, जिसे देखकर हिंदू संगठनों ने विरोध किया।

रिपोर्टों के अनुसार, यह मामला संगठन की पराक्कड़वु (Parakkadavu) इकाई के अध्यक्ष अरुण अरविंद और कुछ अन्य लोगों के बेकरी में पहुँचने के बाद शुरू हुआ था। जहाँ उन लोगों ने गैर-हलाल भोजन की माँग की। लेकिन उन्हें वहाँ जानकारी दी गई कि वे सिर्फ़ हलाल खाना ही सर्व करते हैं। इसके बाद पूरे मामले ने सोशल मीडिया पर तूल पकड़ा और अरविंद समेत 4 गिरफ्तार कर लिए गए।

टाइम्स नाऊ के मुताबिक फिलहाल ये सब बेल पर हैं। लेकिन उनके संगठन ने हलाल खाने के विरुद्ध अपना कैंपेन और तेज कर दिया है। वह ऐसे उत्पादों और सेवाओं पर प्रतिबंध की माँग करते हुए अधिकारियों से संपर्क करने की योजना बना रहे हैं

इसके अतिरिक्त केरल के ईसाइयों ने भी केरल में हलाल मीट के बॉयकॉट का आह्वान किया था। कोच्चि स्थित क्रिश्चियन ग्रुप चर्च ऑक्जिलरी फॉर सोशल एक्शन (CASA) ने ईसाइयों से आग्रह किया कि वे अब हलाल भोजन न खरीदें। वहीं हिंदू समूहों ने भी ईसाइयों का समर्थन किया, क्योंकि उन्हें वहाँ पर हलाल मीट बेचने के लिए मजबूर किया जाता है।

इसके बाद इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने इस पूरे अभियान को मुस्लिमों को टारगेट करने वाला अभियान बताया। मगर, CASA ने घोषणा की थी कि ईसाई क्रिसमस से कुछ दिन पहले अपना विरोध-प्रदर्शन करेंगे और इसके लिए गैर-हलाल तरीके से काटे गए जानवरों को खरीदने में पैसे लगाएँगे।

हलाल मीट क्या है?

हलाल मीट उसे कहा जाता है जिसकी पूरी प्रक्रिया में केवल मुस्लिम व्यक्ति ही शामिल हो। गैर मुस्लिमों को हलाल फर्म से जुड़ने की अनुमति भी नहीं होती। इस्लामी रिवाजों के मद्देनजर कुछ ऐसी शर्तें होती हैं जिसे हलाल के दौरान पूरा करना होता है। भारत में हलाल की सर्टिफिकेशन अथॉरिटी की आधिकारिक वेबसाइट पर दिशा-निर्देश उपलब्ध हैं, जो यह स्पष्ट करते है कि गैर-मुस्लिम कर्मचारियों को इस प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जाता और इसमें सिर्फ़ मुस्लिम कर्मचारी ही होते हैं। इसमें यह भी साफ लिखा है कि गैर मुस्लिम द्वारा काटा गया जानवर का मीट हलाल में नहीं आता।

ED का कसा शिकंजा तो संजय राउत की पत्नी ने ‘बिना सूद वाला’ कर्जा चुकाया, PMC बैंक घोटाले की आरोपित की बीवी से मिला था लोन

बैंक घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने हाल ही में शिवसेना सांसद संजय राउत की पत्नी को समन किया था। अब प्रवर्तन निदेशालय ने खुलासा किया है कि राउत की पत्नी वर्षा ने बैंक घोटाले के आरोपित की पत्नी से लिए 55 लाख रुपए के ‘फ्रेंडली लोन’ को चुका दिया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, वर्षा राउत ने एक रिश्तेदार के माध्यम से ईडी को दस्तावेज सौंपते हुए यह दावा किया कि उसने अपने पति द्वारा लिखी गई फिल्म ‘ठाकरे’ से प्राप्त पैसों से बैंक के कर्ज को चुका दिया है। बता दें वर्षा फ़िल्म ठाकरे की निर्माताओं में से एक थीं। इंटरेस्ट फ्री लोन लगभग एक दशक पहले लिया गया था।

वहीं वर्षा राउत के लोन के पैसे लौटाने वाले दावे पर बीजेपी नेता ने हमला बोला है। बीजेपी नेता किरीट सोमैया ने ट्वीट कर लिखा, “संजय राउत कहते हैं कि उनकी पत्नी ने सारा पैसा लौटा दिया है। हिसाब तो देना ही होगा।” सौमेया ने आगे लिखा, “आखिर में संजय राउत साहब को पैसा वापस करना ही पड़ा, लेकिन हिसाब भी देना ही पड़ेगा।”

उल्लेखनीय है कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) वित्तीय धोखाधड़ी के एक मामले में शिवसेना सांसद संजय राउत की पत्नी वर्षा राउत के खिलाफ जाँच कर रही है। आरोप है कि PMC बैंक स्कैम के आरोपित प्रवीण राउत की पत्नी और एक अन्य कंपनी ने कुल मिला कर वर्षा के अकाउंट में 67 लाख रुपए भेजे थे।

पीएमसी बैंक घोटाला मामले में वर्षा पूछताछ के लिए 4 जनवरी, 2021 को मुंबई में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के दफ्तर पहुँचीं थी। तीसरी बार समन मिलने पर वर्षा ने ईडी के सामने हाजिरी लगाई थी। इससे पूर्व 2 समन भेजे जाने पर वह स्वास्थ्य आधार पर पेश नहीं हुईं थीं।

ED ने जानकारी दी थी कि प्रवीण राउत ने हाउसिंग डेवलपमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (HDIL) के नाम पर अवैध लोन्स और अन्य मद में कुल 95 करोड़ रुपए की हेराफेरी की। प्रवीण राउत को किए गए पेमेंट्स के कई कागजात तक नहीं थे। HDIL के अकाउंट बुक से पता चलता है कि प्रवीण राउत ने पालघर में घर लेने के लिए ये रुपए लिए थे। इस आपराधिक लेनदेन में प्रवीण ने अपनी पत्नी माधुरी के अकाउंट में भी 1.6 करोड़ रुपए भेजे थे।

ED ने जानकारी देते हुए कहा कि इस रकम में से 55 लाख रुपए इंटरेस्ट फ्री लोन के नाम पर वर्षा राउत को ट्रांसफर किए गए। इनमें से 50 लाख रुपए दिसंबर 23, 2010 को ट्रांसफर किए गए थे। बाकी के 5 लाख रुपए मार्च 15, 2011 को भेजे गए थे।

ED ने बताया था कि इस रकम का इस्तेमाल मुंबई के दादर ईस्ट में एक फ्लैट खरीदने के लिए किया गया। M/s अवनी कंस्ट्रक्शंस नामक कंपनी में वर्षा और माधुरी पार्टनर्स भी हैं। ओवरड्रॉन कैपिटल को लोन में बदल कर इस कंपनी के द्वारा भी वर्षा राउत को 12 लाख रुपए भेजे गए। मात्र 5625 रुपए के कंट्रीब्यूशन को आधार बना कर ये रकम वर्षा को भेजी गई।

‘मोदी जैसे गंदे लोगों को फाँसी पर लटका दूँगा’: बच्चा बोल रहा- NDTV-BBC से सीखा

अराजकतावादियों के लिए देश में घटनाक्रम कोई भी रहा हो, उन्होंने अपने लक्ष्य पर सबसे आगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ही रखा है। ऐसे वाकए यूँ तो लिबरल जमात अक्सर ही दोहराती आई है, लेकिन गत वर्ष शाहीनबाग के बहाने इस वर्ग ने अपनी घृणा को स्पष्ट रूप से जमीन पर उतारना शुरू कर दिया।

कुछ लोग किसान आंदोलनों को शाहीनबाग-2 की संज्ञा दे रहे हैं। इसके पीछे एक बड़ी वजह प्रदर्शनकारियों द्वारा ‘शाहीनबाग मॉडल’ को अपनाना भी है। हमने देखा कि पिछले कुछ समय से देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गाली देना ट्रेंड बन गया। इसके लिए तरीके भी बेहद ‘रचनात्मक’ अपनाए जाते रहे हैं।

मसलन, बच्चों के मुँह से ‘मोदी मुर्दाबाद’ बुलवाना, बच्चों से कहलवाना कि वो मोदी को गोली मारना चाहते हैं या फिर मोदी को फाँसी लगाना चाहते हैं। ऐसा ही एक वीडियो सोशल मीडिया पर एक बार फिर चर्चा में बना हुआ है, जिसमें एक पगड़ी पहने हुए बच्चा ये कहते हुए देखा जा सकता है कि वो बड़े होकर मोदी को फाँसी लगाना चाहता है और जब उससे पूछा गया कि आखिर उसने ये कहाँ से सीखा तो बच्चा जवाब में NDTV और बीबीसी जैसे वामपंथी प्रोपेगेंडा मीडिया संस्थानों का नाम लेता है।

इंस्टाग्राम पर ‘Intrepid saffron’ नाम के अकाउंट ने एक वीडियो शेयर किया है जिसमें लिखा है, “अपने बच्चों को NDTV मत देखने दें, इस वीडियो को देखें।” ‘Intrepid saffron’ द्वारा शेयर किए गए इस वीडियो पर लिखा है कि वामपंथियों के विषैले प्रोपेगेंडा को फ़ैलाने के लिए बच्चों का इस्तेमाल किया जा रहा है।”

इसमें सर पर पगड़ी पहने एक बच्चा कहता है, “मुझे ये भी लगता है कि ये जो मोदी है न, ये सारे पैसे लेकर भाग जाएगा। मैं बड़ा होकर आईएएस बनना चाहता हूँ। क्योंकि अगर मेरे जिले में ऐसे लोग पैदा हुए, वो गंदे लोग अगर मोदी की तरह पीएम हुए न, तो मैं उन्हें जेल में नहीं अंकल, फाँसी के ‘कंधे’ पर लटका दूँगा।”

इसके आगे जब एंकर बच्चे से पूछता है कि उसने आखिर ये सब कहाँ से सीखा तो बच्चे ने चैनल्स के नाम लिए- “एनडीटीवी और बीबीसी।”

यही वीडियो ट्विटर पर ‘आलू बोंडा’ नाम के अकाउंट द्वारा भी शेयर किया गया है। ‘आलू बोंडा’ ने ये वीडियो शेयर करते हुए लिखा है, “मोदी जैसे गंदे लोगों को फाँसी पर लटका दूँगा ~ नन्हा सरदार!”

हालाँकि, ये वीडियो कहाँ की है और कब की है यह स्पष्ट नहीं है। लेकिन सोशल मीडिया में किसान आंदोलनों के बीच बड़े स्तर पर शेयर किया जा रहा है। इससे पहले सीएए विरोधी आंदोलन के दौरान भी इसी तरह बच्चों में जहर भरने के मामले सामने आए थे। याद दिला दें कि इसी प्रकार बच्चों का इस्तेमाल पिछले साल सीएए/एनआरसी के ख़िलाफ़ चल रहे आंदोलन में हुआ था। लोगों ने अपने बच्चों को प्रदर्शन पर लाकर बिठा दिया था और बच्चों से नारे लगवाए गए थे, “जो हिटलर की चाल चलेगा, वो हिटलर की मौत मरेगा, जामिया तेरे खून से इंकलाब आएगा, जेएनयू तेरे खून से इंकलाब आएगा.. हम लड़कर लेंगे आजादी।”

नागरिकता कानून के विरोध के बाद कोरोना वायरस की महामारी के दौरान मध्य प्रदेश के इंदौर में इंडेक्स मेडिकल कॉलेज से डिस्चार्ज हुए एक मुस्लिम परिवार के 6 साल के बच्चे ने नारा लगाकर कहा था कि हम मोदी को मारेंगे

राजनीतिक हितों के नाम पर बच्चों का इस तरह इस्तेमाल सही चलन नहीं है, चाहे वह कोई भी समाज हो। हमारा इस खबर को प्रकाशित करने का मकसद है कि लोग अपने बच्चों को ऐसे तत्वों से दूर रखें जो उनके बालमन में इस प्रकार का जहर बोते हैं।

राम मंदिर के लिए राष्ट्रपति ने दिए ₹5 लाख, निधि समर्पण अभियान के पहले दिन वाल्मीकि मंदिर पहुँचे संघ प्रमुख

श्रीराम मंदिर निधि समर्पण अभियान की शुरुआत शुक्रवार (15 जनवरी 2021) को हुई। अभियान के पहले दिन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए शुभकामनाओं सहित 5 लाख रुपए की राशि दान की।

अभियान के तहत आर्थिक सहयोग इकट्ठा करने के लिए विश्व हिन्दू परिषद, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रतिनिधि मंडल ने राष्ट्रपति से मुलाक़ात की।

राष्ट्रपति से हुई मुलाक़ात के दौरान श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी जी महाराज, विश्व हिन्दू परिषद के कार्याध्यक्ष आलोक कुमार, राम मंदिर निर्माण समिति के मुखिया नृपेन्द्र मिश्रा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत अध्यक्ष कुल भूषण आहूजा मौजूद थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ यह अभियान आगामी डेढ़ महीने तक चलेगा।  

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकर्ता इस अभियान के अंतर्गत चंदा इकट्ठा करने के लिए 5 लाख गाँवों में जाकर लगभग 12 करोड़ परिवारों से संपर्क करेंगे। इसके अलावा दोनों संगठनों के पदाधिकारियों ने चंदे के लिए कई प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों से मुलाक़ात की। साथ ही पदाधिकारी अलग-अलग प्रदेशों के मशहूर लोगों से मिल कर भव्य मंदिर निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग की माँग करेंगे। 

आज ही संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने मंदिर मार्ग स्थित महर्षि वाल्मीकि मंदिर में जाकर महामंडलेश्वर पूज्य संत कृष्ण शाह विद्यार्थी जी महाराज से निधि समर्पण के लिए संपर्क किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी अयोध्या में राम मंदिर निधि समर्पण अभियान के लिए एक लाख रुपए के सहयोग की राशि का चेक प्रदान किया। पदाधिकारियों से बैठक के बाद शिवराज सिंह चौहान ने इस अवसर को सौभाग्यशाली भी बताया।   

इसी क्रम में दक्षिण भारतीय अभिनेत्री प्रणिता सुभाष ने भी ट्वीट करके लोगों से आर्थिक सहयोग करने का निवेदन किया था। अभिनेत्री ने ट्वीट में कहा, “मैं अयोध्या के राम मंदिर निधि समर्पण अभियान के लिए 1 लाख रुपए की शुरुआती प्रतिज्ञा करती हूँ। मेरा आप सभी से निवेदन है कि आप सभी इस ऐतिहासिक क्षण में सहयोग के लिए आगे आएँ।”     

अभियान की शुरुआत के पहले विहिप के कार्याध्यक्ष आलोक कुमार ने बताया था, “अभियान के लिए शुभकामना प्राप्त करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी से भी समय माँगा गया है। इस अभियान में अधिक से अधिक आर्थिक सहयोग इकट्ठा करने के लिए विहिप और संघ के कार्यकर्ता देश भर के 5 लाख गाँवों में रहने वाले 12 करोड़ से ज़्यादा परिवारों से संपर्क करेंगे।” 

‘200 आतंकी मार गिराए, 300-400 घुसपैठ की ताक में’: सेना प्रमुख नरवणे ने कहा- व्यर्थ नहीं जाएगा गलवान का बलिदान

सेना दिवस (Army Day) के मौके पर सेना प्रमुख एमएम नरवणे ने दिल्ली के करियप्पा मैदान में परेड का निरीक्षण किया। उन्होंने 5 जवानों को उनके शौर्य और साहस के लिए सेना मेडल से सम्मानित भी किया। 10 पैरा स्पेशल यूनिट के नाइक संदीप को जम्मू-कश्मीर में दो आतंकियों का एनकाउंटर कर अपने कमांडर की जान बचाने के लिए सेना मेडल से सम्मानित किया गया। इसके अलावा सेना प्रमुख नरवणे ने आतंकवाद के प्रति भारतीय सेना के सख्त रवैये को लेकर भी कई अहम बातें कहीं।

उन्होंने कहा, “हम सभी उत्तरी बॉर्डर पर चीन के साथ बने तनाव के हालातों को अच्छे से जानते हैं। बॉर्डर पर यथास्थिति में बदलाव लाने के लिए रचे गए षड्यंत्र का कड़ा जवाब दिया गया था। मैं देश को भरोसा दिलाना चाहता हूँ कि गलवान घाटी में किया गया सैनिकों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। हम बातचीत और राजनीतिक मानकों की मदद से समस्या का हल निकालने के लिए प्रयासरत हैं, लेकिन इस बीच कोई हमारे धैर्य की परीक्षा करने की गलती नहीं करे।” 

सेना प्रमुख ने कहा, “बॉर्डर के इर्द-गिर्द प्रशिक्षण शिविरों में 300-400 आतंकवादी घुसपैठ करने की ताक में बैठे हैं। सीज़फायर उल्लंघन की घटनाओं में 44 फ़ीसदी तक बढ़ोतरी हुई और ये पाकिस्तान के नापाक इरादों की पोल खोलता है। पिछले साल सेना ने एलओसी के नजदीक और आतंकवाद विरोधी अभियान में लगभग 200 आतंकवादियों को मार गिराया था।” 

सेना के आधुनिकीकरण को लेकर उन्होंने कहा, “सेना आधुनिकीकरण के लिए तमाम अहम कदम उठा रही है। आपातकाल (इमरजेंसी) और फास्ट ट्रैक योजनाओं के तहत सेना ने 5000 करोड़ रुपए के उपकरण खरीदे और 13000 करोड़ का समझौता किया। हमने पिछले कुछ वर्षों में सेना को अत्याधुनिक बनाने के लिए और भी कई ज़रूरी कदम उठाए हैं।” 

‘बेकार आवाज वाली लता ने लोगों के करियर बर्बाद किए’: लिबरलों की दुलारी ‘कावेरी’ को नेटिजन्स ने लताड़ा

बॉलीवुड गायिका लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) की आवाज पर बहस छिड़ी हुई है। यह विवाद तब शुरू हुआ, जब कावेरी नाम की एक ट्विटर यूजर ने कहा कि लता मंगेशकर की आवाज ‘ओवर रेटेड’ है और उन्होंने इंडस्ट्री में लोगों के करियर बर्बाद किए। इसके बाद ट्विटर पर मौजूद तमाम लोग ये ट्वीट करने वाली कावेरी के पक्ष और विपक्ष में लिखने लगे।

दरअसल, कावेरी नाम की एक ट्विटर यूजर ने लिखा, “भारतीयों को ये मानने के लिए ब्रेनवॉश किया गया है कि लता मंगेशकर की आवाज़ अच्छी है। यही नहीं, उनकी आवाज़ बिगड़ी हुई और बहुत ज़्यादा इस्तेमाल की हुई (ओवर यूज्ड) है।”

कावेरी के इस ट्वीट पर अब तक लगभग डेढ़ हजार रीट्वीट और करीब साथ हजार लाइक भी आ चुके हैं। उन्होंने इस पर एक नहीं बल्कि कई ट्वीट करते हुए लिखा, “लता मंगेशकर ने अपनी आवाज़ की उम्र से अधिक गाने गाए। संगीत से जुड़े जो लोग उनकी तारीफ करते नहीं थकते, वो इसलिए क्योंकि लता मंगेशकर पावरफुल थीं और इसलिए कोई उनसे भिड़ना नहीं चाहता था। लता मंगेशकर लोगों को तबाह करने का दम रखती थीं।”



जब यह विवाद बढ़ने लगा तो कावेरी ने एक और ट्वीट करते हुए लिखा कि उन्होंने ये बात पहले भी कई बार कही लेकिन तब उन्हें इस स्तर तक नहीं सुना गया था।

कावेरी ने लता मंगेशकर को लेकर ट्वीट जारी रखते हुए लिखा, “मुझे खुशी है कि उन्होंने उमराव जान के लिए गाना नहीं गाया। पाकीजा तक वो मुझे इतनी बुरी नहीं लगीं, इसलिए मुझे इससे ज्यादा ऐतराज नहीं है। मुझे इन दोनों ही फिल्मों के ओएसटी पसंद हैं।”

एक अन्य ट्विटर यूजर ने लिखा कि लता मंगेशकर ने अकेले ही कई लोगों के करियर तबाह किए, जिनमें से एक अनुराधा पौढ़वाल भी हैं। इस पर कावेरी ने जवाब में लिखा कि वो बस ये कहने ही वाली थी और लता मंगेशकर रेखा भारद्वाज के साथ भी यही करती अगर वो समकालीन होते।

कावेरी के ही इस ट्विटर थ्रेड पर एक अन्य यूज़र ने भी अपनी सहमति जताते हुए कुछ और उदाहरणों का भी जिक्र करते हुए लिखा, “इसके बाद आप कहेंगे कि शाहरूख खान हमेशा ओवर एक्टिंग करते हैं, सचिन तेंदुलकर को आवश्यकता से अधिक महत्त्व दिया गया और अमिताभ बच्चन को रिटायर हो जाना चाहिए, अब उन्हें झेलना मुश्किल है। मैं इनमें से किसी भी बात से अहसहमत नहीं हूँ।”

इसके बाद इस विवाद में कूदने वालों में गायक अदनान सामी भी मौजूद थे। उन्होंने लता मंगेशकर के बचाव में ट्विटर पर लिखा, “बन्दर क्या जाने अदरक का स्वाद।” साथ ही उन्होंने कहा कि मुँह खोलकर दुनिया को अपनी मूर्खता के बारे में बताने के बजाय चुप रहना चाहिए।

रमेश श्रीवत्स ने भी लता मंगेशकर के समर्थन में ट्वीट करते “लता मंगेशकर के खिलाफ ज़हर उगलना बंद करिए। अगर आज तक किसी भी इंसान की आवाज़ इतनी परफेक्ट रही है कि उसे किसी संगीत वाद्य की तरह इस्तेमाल किया जा सके तो वह लता मंगेशकर की आवाज़ है। वो एक वाद्य यंत्र जैसी परफेक्ट हैं, जिसमें भावनाएँ भी हैं।”

‘ममता दीदी की पतंग तो कटेगी’: अब MP शताब्दी रॉय ने दिखाए बागी तेवर, 16 जनवरी को बड़ा ऐलान संभव

पश्चिम बंगाल में इस साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की आंतरिक लड़ाई थमती नजर नहीं आ रही है। पार्टी सांसद शताब्दी रॉय ने अब बागी तेवर दिखाए हैं। वहीं भाजपा महासचिव और बंगाल के पार्टी प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने 41 टीएमसी विधायकों के संपर्क में होने का दावा किया है।

विजयवर्गीय ने कहा, “बंगाल में ममता बनर्जी और उनकी पार्टी से सत्ता कभी भी छूट सकती है। हमारे पास तृणमूल कॉन्ग्रेस के लगभग 41 विधायकों की सूची है, जो भाजपा के संपर्क में हैं और पार्टी बदलने के लिए तैयार हैं। अगर हमने उन्हें अपनी पार्टी में शामिल कर लिया तो ममता बनर्जी की सरकार किसी भी समय गिर जाएगी। लेकिन हम उन नामों की पड़ताल कर रहे हैं क्योंकि हम नहीं चाहते हैं कि कोई नकारात्मक पृष्ठिभूमि का व्यक्ति हमारी पार्टी का हिस्सा बने। ममता जी की पतंग तो कटेगी 100%, क्योंकि हमने इतनी ढील दी है। अब तो एक हाथ खींचेंगे और सरकार गिर जाएगी। इसलिए हमें विश्वास है कि ममता जी की पतंग तो गई।”  

इधर टीएमसी सांसद और अभिनेत्री शताब्दी रॉय ने फेसबुक पर जनता के नाम पोस्ट लिख कर अपना दुःख और पार्टी के प्रति गुस्सा जाहिर किया है। उन्होंने पोस्ट में लिखा, “मेरे निर्वाचन क्षेत्र बीरभूम के लोगों का 2021 बहुत अच्छे बीते, लोग स्वस्थ रहें। मेरा पार्टी के साथ गहरा रिश्ता रहा है, लेकिन पिछले कुछ समय से लोग मुझसे लगातार पूछ रहे हैं मैं कार्यक्रमों में क्यों नहीं नज़र आती हूँ? मैं उन्हें बताना चाहती हूँ कि मुझे लोगों से मिलना और उनके बीच रहना पसंद है लेकिन तमाम ऐसे लोग हैं ये नहीं चाहते हैं।” 

शताब्दी रॉय ने उन लोगों के नाम का खुलासा नहीं किया है लेकिन इतना ज़रूर कहा है कि वह 16 जनवरी दोपहर दो बजे स्पष्ट करेंगी कि उनका अगला कदम क्या होगा।   

इस बीच विधानसभा चुनाव की तैयारियों को मद्देनज़र रखते हुए पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष, अमिताव चक्रवर्ती, मुकुल रॉय और संगठन के अन्य नेता केंद्रीय नेतृत्व के साथ बैठक के लिए दिल्ली का दौरा करेंगे। फ़िलहाल इस बैठक के एजेंडे को लेकर जानकारी स्पष्ट नहीं है लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक़ इस बैठक में आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति को लेकर चर्चा होगी। इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद रहेंगे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पश्चिम बंगाल के चुनाव संभावित तौर पर अप्रैल के पहले हफ्ते में हो सकते हैं। 

टिकैत का 26 जनवरी को लाल किले से इंडिया गेट मार्च का ऐलान, SFJ ने कहा था- खालिस्तानी झंडा फहराओ, इनाम पाओ

गणतंत्र दिवस के जश्न से हफ्ते भर पहले भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के नेता राकेश टिकैत ने गुरुवार (14 जनवरी 2021) को एक ऐलान किया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी 26 जनवरी को लाल किले से इंडिया गेट तक मार्च निकालेंगे और अमर जवान ज्योति पर तिरंगा फ़हराएँगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ स्वघोषित ‘किसान’ राकेश टिकैत ने दावा किया कि इस मार्च का ‘नज़ारा ऐतिहासिक’ होगा, जहाँ एक तरफ ‘किसान’ होंगे और दूसरी तरफ ‘जवान’।

टिकैत के मुताबिक़ किसान संगठन के नेता सरकारी प्रतिनिधियों, केंद्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर, रेलवे मंत्री पीयूष गोयल, राज्य मंत्री सोम प्रकाश के साथ 9वें राउंड की बैठक करेंगे। प्रदर्शनकारी सरकार के साथ अपनी बातचीत जारी रखेंगे और दिल्ली के तमाम बॉर्डर्स पर अपना विरोध-प्रदर्शन भी जारी रखेंगे। 

राकेश टिकैत की इस घोषणा के ठीक दो दिन पहले खालिस्तानी आतंकवादी संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) ने गणतंत्र दिवस के मौके पर इंडिया गेट पर खालिस्तानी झंडा फहराने वाले को 1.8 करोड़ रुपए का इनाम देने का ऐलान किया था। खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू द्वारा सिंघु बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे पंजाब के किसानों को लिखे गए पत्र में कहा गया था कि 26 जनवरी को इंडिया गेट पर खालिस्तानी झंडा फहराने वाले व्यक्ति को 1.8 करोड़ रुपए का इनाम दिया जाएगा। 

11 जनवरी को SFJ ने भारत में रहने वाले ऐसे सिखों जो खालिस्तानी आंदोलन का समर्थन करते हैं, उन्हें भड़काने के लिए यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो साझा किया। पन्नू ने उस वीडियो में युवा सिखों को संबोधित करते हुए कहा कि वह लाल किले पर खालिस्तानी झंडा फहराएँ और भारतीय झंडे को दिल्ली के हर कोने से हटा दें। उसने कहा, “26 जनवरी को सिख पूरी दिल्ली में ट्रैक्टर्स से घूमें और हर तिरंगा हटा दें। भारत का झंडा दबाव का प्रतीक है इसे सिख पिछले कई सालों से झेल रहे हैं। भारत का हर झंडा हटा कर कुचल दिया जाना चाहिए।”

पन्नू ने यहाँ तक दावा किया कि अगर भारत का झंडा हटाते हुए कोई सिख गिरफ्तार किया जाता है है तो उसका संगठन उन लोगों को भारत से बाहर निकाल कर यूके में बसाने की व्यवस्था करेगा।

किसान आंदोलन में खालिस्तानी आतंकवादी समूह की भागीदारी 

ये बात लगभग सभी जान चुके हैं कि खालिस्तानी आतंकवादी संगठन ने लोगों को मोदी सरकार के खिलाफ़ भड़काने के लिए किसान आंदोलन पर कब्ज़ा कर लिया है। 12 जनवरी को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष कहा कि उनके पास पुख्ता सबूत मौजूद हैं कि किसान आंदोलन में खालिस्तानी तत्व शामिल हैं। 

प्रदर्शन के दौरान तमाम ‘किसानों’ ने हिंसा भड़काने का प्रयास किया और खालिस्तान समर्थक नारे भी लगाए। पंजाब के किसानों को मोदी सरकार के खिलाफ भड़काने के मामले में SFJ की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। एक और अहम बात ये है कि पाकिस्तान प्रायोजित खालिस्तानी आतंकी संगठन SFJ ने पहले पंजाब और हरियाणा के किसानों को खालिस्तान का समर्थन करने के लिए 1 मिलियन डॉलर का लालच दिया था। 

किसानों को भड़काने के लिए राकेश टिकैत की धमकियाँ  

स्वघोषित किसान नेता राकेश टिकैत की 26 जनवरी को दिल्ली में मार्च निकालने की धमकी के कुछ हफ्ते पहले ही इन्होंने दिल्ली को जोड़ने वाले एक्सप्रेसवे को ब्लॉक करने की चेतावनी दी थी। इनका कहना था कि सरकार तीन कृषि सुधार क़ानूनों को लेकर प्रदर्शनकारियों की माँग स्वीकार नहीं करती है तो वह ‘चक्का जाम’ करेंगे। इसके पहले राकेश टिकैत ने कहा था कि 2024 के पहले उनकी विरोध-प्रदर्शन रोकने की योजना नहीं है।   

मारपीट से रोका तो शाहबाज अंसारी ने भीम आर्मी के नेता रंजीत पासवान को चाकुओं से गोदा, मौत

भीम आर्मी के पूर्व जिलाध्यक्ष रंजीत पासवान उर्फ ​​जॉन की बुधवार (जनवरी 13, 2021) रात बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में करजा थानांतर्गत पकरी गाँव में शाहबाज ने चाकू मारकर हत्या कर दी। इस घटना के पीछे कारण पड़ोसी शाहबाज अंसारी उर्फ़ रिंकू के भाई के साथ रंजीत पासवान का विवाद बताया गया है।

पुलिस ने आरोपित शाहबाज अंसारी को गिरफ्तार कर मामले की जाँच कर शुरू कर दी है। भीम आर्मी नेता रंजीत की हत्या के बाद उनके समर्थकों ने लगभग 2 घंटे तक शव के साथ प्रदर्शन किया। रिपोर्ट्स के अनुसार, मृतक के पोस्टमॉर्टम होने के बाद जब शव घर पहुँचा तो हजारों की संख्या में लोग उनके घर के पास इकट्ठे होए गए और डीएसपी और डीएम को मृतक रंजीत के घर बुलाने की माँग करने लगे।

प्रदर्शनकारियों ने मृतक रंजीत के परिजन को सरकारी नौकरी, मुआवजे के रूप में डेढ़ करोड़ रुपए और उसकी हत्या करने वाले को फाँसी पर लटकाने की माँग भी की। डीएसपी सरैया राजेश शर्मा और डीएम ने मौके पर पहुँचकर लोगों को आश्वासन देकर अंत्येष्टि के लिए मनाया।

भीम आर्मी नेता रंजीत पकड़ी चौक पर जिम सेंटर भी चलाते थे और उनकी माँ पूर्व वार्ड सदस्य हैं। बुधवार रात शाहबाज और रंजीत के छोटे भाई के बीच मोबाइल में वीडियो देखने को लेकर विवाद हुआ था। विवाद इतना बढ़ गया और बात हाथापाई तक पहुँच गई। इसे देखते हुए रंजीत भी वहाँ पहुँच गया। जब रंजीत ने बीच-बचाव करने की कोशिश की तो शाहबाज अंसारी ने उसके जाँघ और पेट में चाकू घोंप दिया, जिसके बाद उसे स्थानीय लोगों की मदद से बैरिया के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उन्हें डॉक्टरों की एक टीम ने मृत घोषित कर दिया।

रंजीत की मौत की खबर सुनकर गुस्साए ग्रामीणों ने शाहबाज के घर पर हंगामा कर दिया। घटना के बाद आरोपित अपने पूरे परिवार के साथ घर से फरार हो गया। घर पर जब लोगों को आरोपित नहीं मिले तो ग्रामीणों ने उसके घर में आग लगा दी।

घटना की सूचना मिलते ही करजा स्टेशन की पुलिस मौके पर पहुँची और मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च अधिकारियों को सूचित किया। इसके बाद, एसएसपी जयंत कांत, सिटी एसपी राजेश कुमार और सरैया एसडीपीओ सहित बड़ी संख्या में पुलिस थानों ने मौके पर पहुँचकर लोगों को शांत किया।

‘कोरोना वैक्सीन से नपुंसकता नहीं’: 20 लाख डोज लेने ब्राजील से आया विशेष विमान, देश में 16 जनवरी से अभियान

16 जनवरी 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान की शुरुआत भारत में करेंगे। इससे पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कोरोना वैक्सीन से जुड़े भ्रम को दूर करने की कोशिश की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि इस वैक्सीन से नपुंसकता का खतरा नहीं है। वहीं भारत से 20 लाख कोविड वैक्सीन की डोज ले जाने के लिए ब्राजील ने विशेष विमान भेजा है।

कोविड 19 वैक्सीनेशन के पहले दिन देश के 2934 अलग-अलग हिस्सों में लगभग 3 लाख स्वास्थ्य कर्मचारियों को वैक्सीन लगाई (शॉट) जाएगी। केंद्र सरकार ने वैक्सीन, कोवीशील्ड (covishield) की 1.1 करोड़ डोज़ सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया से खरीदी है। इसके अलावा भारत बायोटेक इंडिया लिमिटेड से कोवैक्सीन (covaxin) की लगभग 55 लाख डोज़ खरीदी गई है। टीकाकरण से पहले केंद्र ने गाइडलाइन जारी कर बताया है कि गर्भवती और दूध पिलाने वाली महिला इसे न लगवाएँ, क्योंकि उन्हें अभी तक किसी भी कोरोना वायरस-रोधी टीके के क्लिनिकल ट्रायल का हिस्सा नहीं बनाया गया है।

क्या वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स हैं?

डॉ. हर्षवर्धन ने बताया कि जैसा कि अलग वैक्सीन का मामलों में देखा गया है, कुछ लोगों को वैक्सीन लगवाने के बाद हल्का बुखार, सिर दर्द या शरीर में दर्द जैसे सामान्य साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। लेकिन इस तरह के साइड इफेक्ट्स अस्थायी हैं और कुछ समय बाद अपने आप ही ख़त्म हो जाते हैं।   

केंद्रीय स्वस्थ्य मंत्री ने बताया कि ऐसे कोई वैज्ञानिक सबूत नहीं मौजूद हैं जो इस बात का दावा करते हों कि वैक्सीन आदमी या औरतों को नपुंसक बनाती है। अभी तक कोरोना वायरस की वजह से भी नपुंसकता की बात सामने नहीं आई है। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी से जुड़ी किसी भी तरह की जानकारी के लिए प्रशासनिक और आधिकारिक सूत्रों की ही सहायता लें। ऐसे संवेदनशील समय में किसी भी तरह की अफ़वाहों पर भरोसा नहीं करें। 

दूसरी तरफ ब्राज़ील को कोविड 19 वैक्सीन की 20 लाख डोज़ दिए जाने की तैयारियाँ भी लगभग पूरी हो चुकी हैं। दरअसल पिछले हफ्ते ब्राज़ील के राष्ट्रपति जेयर बोल्सनारो ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने भारत के वैक्सीनेशन अभियान को प्रभावित किए बिना वैक्सीन प्रदान करने का निवेदन किया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ ब्राज़ील ने सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया से एक समझौता किया था। ब्राज़ील ने इसके पहले चीन से वैक्सीन मँगाई थी, लेकिन वो किए गए दावों के अनुसार प्रभावी नहीं थी। 

पुणे की फर्म ने ऑक्सफ़ोर्ड द्वारा तैयार की गई वैक्सीन का निर्माण करने के लिए एस्ट्राज़ेनेका (AstraZeneca) के साथ समझौता किया है। वैक्सीन की पहली खेप सीरम इंस्टीट्यूट भेजेगा और इसके अलावा ब्राज़ील ने वैक्सीन के लिए भारत बॉयोटेक का भी चुनाव किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक़, “भारत की वर्तमान क्षमता से ज़्यादा वैक्सीन स्टोर करने का कोई मतलब नहीं है। इसलिए दूसरे देशों को भेजे जाने वाली वैक्सीन से भारत का वैक्सीनेशन अभियान प्रभावित नहीं होगा।”