Home Blog Page 4125

श्री अजीत भारती जी को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने असोसिएट प्रोफेसर नियुक्त किया, ऑपइंडिया से विदाई तय

‘अरी मोरी मइया, जे का सुन लेओ’ की तर्ज पर वामपंथनों का दिल छिहत्तर बीट प्रति मिनट की रफ्तार से धकधकाने लगा कि युवा दिलों की धड़कन और निहायत ही सस्ते जॉनी डेप्प के नाम से विख्यात परमसम्माननीय, हम सबके आदरणीय, श्री अजीत भारती जी अब ऑपइंडिया की नौकरी छोड़ रहे हैं। आज जब श्री भारती जी के पास, जिन्हें कभी-कभार जॉनी डेप्प कहने वाली जनता भावातिरेक में जॉनी सिन्स भी कह देती है, यह खबर आई कि उन्हें ऑक्सफोर्ड से प्रोफेसरी का बुलावा आया है तो उन्होंने भारी हृदय से सीईओ को त्यागपत्र सौंप दिया।

हालाँकि, ऑक्सफोर्ड से उन्हें सिर्फ एक मेल ही आया था, जिसकी आईडी थी [email protected], जिससे उन्होंने तय कर लिया कि सही जगह से ही ईमेल आई है। ज्योंहि यह मेल आया तब से ही श्री भारती, यानी मैं, स्वयं से ही थर्ड पर्सन अर्थात् ‘अन्य पुरुष’ में बात करने लगे। इससे पता चलता है कि व्यक्ति बड़ा होते ही कितना बड़ा वाला हो जाता है।

उन्होंने पूर्व के पत्रकारों द्वारा ऐसे विलक्षण मौकों पर किए गए कार्यों का अनुसरण करते हुए सबसे पहले तो ट्विटर के बायो में ‘असिस्टेंट प्रोफेसर, यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड’ लिखा और फिर बाद में ऑपइंडिया के लोगों को बताया कि अब वो वहीं से इंग्लैंड की राजनीति और भारत द्वारा कोहिनूर लाने के राष्ट्रवादी प्रयासों पर ‘जेपेग’ फाइल पर टेक्स्ट में अपने विचार और नीचे में ‘श्री अजीत भारती, असोसिएट प्रोफेसर, ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय’ लिख कर भेजेंगे।

इससे होता कुछ खास नहीं है, लेकिन बिना एक भी क्लास लिए हुए आप ‘टीचिंग एट ऑक्सफोर्ड’ लिख कर जब लंदन की सड़कों पर से ट्वीट करते हैं, तो उसका एक अलग किक मिलता है। जैसा कि श्री सलमान भाई खान ने भी कहा है कि जीवन में किक होना ही चाहिए। ये बात और है कि उन्होंने ये विचार फुटपाथ वाले कांड के बाद रखे।

साथ ही, परमसम्माननीय श्री अजीत जी ने ट्विटर पर अपने ऑक्सफोर्ड में जाने के महत्व को गंभीरता से लेते हुए वामपंथियों की जगह, अपने ही खेमे को लोगों को ‘बरनॉल’ आदि बाँटने लगे क्योंकि उन्हें किसी ने समझाया कि ऑक्सफोर्ड में जगह बनानी है तो वामपंथी बनना पड़ेगा। लोगों को नीचा दिखाना, बार-बार याद दिलाना कि ऑक्सफोर्ड अमेरिका में नहीं इंग्लैंड में है, आदि ऐसी आदतें हैं जो कि व्यक्ति को बड़े होने का आभास मिलते ही क्रियान्वित करते रहना चाहिए।

उन्होंने लंदन में एक घर भी देख लिया है और ऐलान कर दिया है कि वो लंदन में हैं जहाँ टेम्स नदी है। हाँ, भले ही पूरी दुनिया को पता है कि लंदन कहाँ है, और टेम्स किधर बहती है, फिर भी दुनिया को यह बताना आवश्यक है कि आप भी वहीं हैं, जहाँ टेम्स नदी है। श्री भारती को उनके मित्र अलख सुंदरम् ने बताया कि गोरों की जमीन पर जाते ही मुँह पर मुल्तानी मिट्टी लगा कर घूमें ताकि उन्हें ब्राउन समझ कर कोई दुष्टता न कर दे। अलख ने उन्हें सलाह देते हुए एक कहावत बताई कि ‘जैसे देस, वैसा भेष’। अलख से इतने पर न रहा गया तो उसने अंग्रेजी में भी कहा कि ‘व्हेन यू आर इन रोम, बिहेव लाइक बिहारी’।

श्री भारती जी से जब किसी ने पूछा कि ऑक्सफोर्ड में वो क्या पढ़ाने जा रहे हैं, तो उन्होंने कहा, “मुझे शायद कैमिस्ट्री ऑफ बॉयोलॉजिकल फिजिक्स के लिए चुना गया है।” लेकिन सत्य तो यह है कि पिछले सोलह सालों से उन्होंने अंग्रेजी साहित्य और पत्रकारिता में ही अनुभव हासिल किया है, और ऐसा कोई डिपार्टमेंट ऑक्सफोर्ड में है ही नहीं। इस पर श्री भारती ने लोगों को नीचा दिखाते हुए कहा, “आज कल दुनिया आगे बढ़ रही है, तुम लोग रह जाओगे व्हाट्सएप्प यूनिवर्सिटी के ही। जीवन बीत जाएगा गुड मॉर्निंग के मैसेज भेजने में। यूट्यूब से दुनिया लॉकडाउन में जलेबी ही नहीं, डलगोना कॉफी बनाना सीख रही है। मैंने भी नित्यानंद जी के स्पेस-टाइम से ले कर फैब्रिक ऑफ यूनिवर्स पर वीडियोज देख रखे हैं। बाद बाकी कसर इंटरस्टेलर, अवेंजर्स और टेनेट जैसी फिल्मों को देख कर पूरी कर ली।”

इतने के बाद भी श्री भारती जी की दलीलों से विरोधियों का मुँह बंद हो गया, लेकिन श्री भारती जी ने ट्विटर पर इस घटना के बारे में बताते हुए किसी रैंडम आदमी को टैग किया और लिखा, “I teach at Oxford!” कुछ लोगों ने श्री भारती को बताया कि ‘नया मुल्ला प्याज ज्यादा खाता है’ कि तर्ज पर उन्हें बौराने की आवश्यकता नहीं है। इससे वो काफी नाराज हो गए और ऐसा कहने वाले के बारे में ट्वीट किया, “कुछ लोगों को मेरे ऑक्सफोर्ड जाने से बहुत दुख हो रहा है, बरनॉल लगा लो!”

श्री भारती मानते हैं कि जो ऑक्सफोर्ड चला जाता है वो स्वतः ही पूरे इंग्लैंड, स्पेन, इटली और अमेरिका की राजनीति के बारे में जानने लगता है। लेकिन स्वयं पता हो तो क्या फायदा, आपको पता है, यह बात लोगों को भी तो पता होनी चाहिए, अतः उन्होंने बिना किसी ट्रेंड के ट्वीट किया, “अगर आप जो बाइडेन की राजनीति को देखें, और फिर आप कमल हसन को देखें, जिन्हें वाइस प्रेसिडेंट चुना गया है, तो आपको पता चलेगा कि एक लोकतंत्र के रूप में अमेरिका कितना आगे है जिसने भारतीय फिल्म उद्योग को भी अपनाया है। यह सर्वसमावेशी चरित्र ही उसे एक महान लोकतंत्र बनाता है।” इस ट्वीट को ऑपइंडिया ने प्रमुखता से जेपेग फाइल बना कर अपने हैंडल से ट्वीट कर दिया।

ऑपइंडिया द्वारा ट्वीट की गई तस्वीर

यह लिखने के बाद उन्होंने तुरंत ट्रम्प समर्थकों को एक गंदी गाली दे दी, जो यहाँ अभिव्यक्त नहीं की जा सकती। श्री भारती ने जब से यह ओहदा पाया है तब से वह बकैत कुमार को भी कुछ उल्टा-सीधा कहने को कुलबुला रहे थे। उन्होंने उसे चिढ़ाने के लिए हरे रंग के कपड़े पर ‘व्हाट्सएप्प यूनिवर्सिटी’ लिखा हुआ टीशर्ट खरीदा और उसके साथ तस्वीर खिंचा कर ट्वीट कर दिया। उनके एक प्रशंसक ने ट्वीट के नीचे कमेंट किया, “षर, रबिसबा की तो सुलग गई होगी देख के!”

कुल मिला कर देखा जाए तो ऑपइंडिया छोड़ने का उन्हें दुख तो है लेकिन व्यक्ति जीवन में आगे बढ़ता रहता है। उन्होंने वादा किया है कि विदेश से वो लगातार अपने नाम के साथ ‘असोसिएट प्रोफेसर, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी’ वाले जेपेग फाइल भेजते रहेंगे ताकि संस्थान का भी नाम ऊँचा हो कि वो अब डीयू, जेएनयू, एएमयू की कवरेज से ऊपर उठ कर ऑक्सफोर्ड तक पहुँच गए हैं।

हालाँकि, अभी श्री भारती जी गाँधी विहार के पच्चीस गज वाले मकान में ही हैं, लेकिन फ्री वीपीएन की मदद से उन्होंने ट्विटर पर अपने ‘निजी सचिव’ का अकाउंट खुलवा लिया है और उसे कहा है कि वो सर्वर लोकेशन लंदन का ही प्रयोग करे, और अपने अगले ट्वीट में यह लिखे:

“बोरिस जॉनसन को मैं देख रहा हूँ कि वो कोरोना के नए स्ट्रेन से लड़ने के लिए लॉकडाउन लगा रहे हैं। लेकिन उन्हें यह समझना होगा कि अर्थव्यवस्था पर भी ध्यान देना आवश्यक है। दोनों में सामंजस्य बिठाना ही बेहतर नेतृत्व का परिचायक है! – अजीत भारती, असोसिएट प्रोफेसर, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी”

मलेशिया ने कर्ज न चुका पाने पर जब्त किया पाकिस्तान का विमान: यात्री और चालक दल दोनों को बेइज्‍जत करके उतारा

कंगाल पाकिस्तान को उसके ही दोस्त मलेशिया ने बड़ा झटका दे दिया है। मलेशिया ने पाकिस्तान को उसकी औकात दिखाते हुए PIA (पाकिस्‍तान इंटरनेशनल एयरलाइन्‍स) के एक बोईंग 777 यात्री विमान को जब्त कर लिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक विमान लीज पर लिया गया था और कर्ज की राशि न चुका पाने के कारण विमान को जब्त कर लिया गया है।

भारत के खिलाफ हमेशा से नापाक इरादे रखने वाले पाकिस्तान के लिए ये बेहद ही शर्मिंदगी वाली बात है कि मलेशिया के क्‍वालालंपुर एयरपोर्ट पर विमान में बैठे यात्री और चालक दल दोनों को बेइज्‍जत करके उतार द‍िया गया। यह विमान कराची से मलेशिया पहुँचा था।

GEO न्यूज़ रिपोर्ट के अनुसार, पीआईए विमान को स्थानीय अदालत के आदेश के बाद जब्त किया गया। पीआईए ने 2015 में एक वियतनामी कंपनी से बोइंग -777 सहित दो विमानों को ड्राई लीज पर लिया है। विमान में 18 सदस्यीय स्टाफ मौजूद थे जोकि पाकिस्तान सरकार की हरकतों का खामियाजा भुगत रहे है और अब प्रोटोकॉल के अनुसार 14 दिनों के लिए सभी को क्वारंटीन किया जाएगा।

पाकिस्‍तान इंटरनैशनल एयरलाइन्‍स (PIA) ने ट्वीट कर पाकिस्तान की जनता को दूसरे देश में इस कदर हुई बेज्जती के बारे में जानकारी दी है। PIA ने लिखा, “पीआईए के एक विमान को मलेशिया में एक स्थानीय अदालत के आदेश पर जब्त कर लिया गया है, जोकि एक पक्षीय निर्णय PIA और ब्रिटेन की अदालत में लंबित एक अन्य पक्ष के बीच कानूनी विवाद से संबंधित है।” उन्होंने कहा कि यात्रियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था जल्द ही की जाएगी।

अब्बू करते हैं गंदा काम… मना करने पर चुभाते हैं सेफ्टी पिन: बच्चियों ने रो-रोकर माँ को सुनाई आपबीती, शिकायत दर्ज

महाराष्ट्र के पुणे के कोंढावा खुर्द से रिश्तों को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। खबर है कि वहाँ एक आदमी ने अपनी ही दो जुड़वा बेटियों को अपनी हवस का शिकार बनाया और नाबालिगों के साथ 4 साल तक दुष्कर्म करता रहा। हाल में घटना की जानकारी होने पर लड़कियों की माँ ने इस संबंध में पुलिस में शिकायत करवाई।

महिला ने बताया कि उसका शौहर (पति) पिछले चार साल से उसकी बेटियों का रेप कर रहा था। बच्चियों की माँ का कहना है कि साल 2016 में उनकी एक बेटी ने पेट में दर्द होने की बात कही। जब डॉक्टर को दिखाया तो उसने सोनोग्राफी कराने को कहा। लेकिन रिपोर्ट आते ही आरोपित पिता ने रिपोर्ट छीन कर गैस पर रख कर जला दी। 

पहले तो ये सब महिला को सामान्य लगा। लेकिन एक रात करीब 2 बजे बच्ची के रोने की आवाज आई। माँ ने जब उठकर रोने की वजह पूछी तो एक बच्ची ने बताया कि पिता उनके साथ गंदा काम करता है। वहीं दूसरी ने बताया कि जब आप किसी काम से बाहर जाती तो अब्बू ये दरिंदगी करते हैं और हमारे मना करने पर सेफ्टी पिन भी चुभाते हैं।

पीड़ित बच्चियों की माँ कहती हैं कि उन्होंने इस संबंध में अपने शौहर से बात की थी लेकिन जवाब में उसने कहा कि अगर ये सब किसी को पता चली तो वह जान से मार देगा। महिला के अनुसार, इन्हीं सब वजहों के चलते वह अपने शौहर से जून 2020 से अलग रहती है। आरोपित फैब्रिकेशन की दुकान चलाता है और महिला मेस चलाकर किसी तरह 2 लड़कों और 2 लड़कियों का पेट पालती है।

बता दें कि इससे पहले एक ऐसा ही मामला बिहार के बेगूसराय से भी आया था। उस दौरान मोहम्मद मोहफिज नाम के शख्स के ख़िलाफ़ उसकी ही बेटियों ने शिकायत करवाई थी। बेटियों ने एक वीडियो भी पेश किया था जिसमें वह अपनी लड़कियों से वीडियो कॉल पर प्राइवेट पार्ट्स दिखाने को कह रहा था। वीडियो में उसे ‘एक बार दिखा दे बस’ कहते सुना गया था। बेटियों ने बताया था कि वह उनके साथ 2-3 बार संबंध भी बना चुका था और माँ से शिकायत करने पर उनकी हत्या की साजिश भी मोहफिज ने ही रची थी।

गंगा किनारे खोजी गई 50 से अधिक पुरातात्विक साइट: प्रयागराज में ASI ने किया बड़े पैमाने पर सर्वेक्षण

ईश्वर शरण पीजी कॉलेज के प्राचीन इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग की टीम ने प्रयागराज, उत्तर प्रदेश में पुरातात्विक महत्व वाले 50 पुरास्थलों को चिन्हित किया है। भारतीय पुरातत्व विभाग (ASI), नई दिल्ली ने कॉलेज को पुरातात्विक सर्वेक्षण (archaeological survey) करने की अनुमति प्रदान की थी। विभाग की टीम ने शृंगपुर और दारागंज से लेकर कौशाम्बी स्थित काली पल्टन तक गंगा के दोनों तरफ गाँवों में पैदल घूम कर 50 पुरातात्विक स्थल खोज निकाले। 

यह पुरातात्विक सर्वेक्षण 70 किलोमीटर से ज़्यादा लम्बाई और 3 से 5 किलोमीटर की चौड़ाई में किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ कॉलेज के प्राचार्य, विभागाध्यक्ष और प्रोजेक्ट के डायरेक्टर प्रोफेसर आनंद शंकर सिंह और प्रोजेक्ट के डिप्टी डायरेक्टर व असिसटेंट प्रोफेसर जमील अहमद ने अपने टीम के साथ यह सर्वेक्षण करने का निर्देश जारी किया था। 

ऐसा संभवतः पहली बार हुआ है जब पुरातत्व विभाग ने इतने बड़े पैमाने पर इस क्षेत्र में सर्वेक्षण किया है। 

इस सर्वेक्षण की जानकारी देते हुए प्रोफेसर आनंद कुमार सिंह ने बताया, “प्रयागराज के भीतर फूलपुर, सदर, सोराँव तथा कौशाम्बी के चायल अंतर्गत गंगा के दोनों किनारों पर बसे लगभग 80 गाँवों में सर्वेक्षण कार्य किया गया। नतीजतन यहाँ से पुरातात्विक महत्व के कुल 50 स्थानों को चिन्हित करके उनका अभिलेखीकरण किया गया है। वहाँ पाषाण काल से लेकर मुग़ल काल और उसके परवर्ती काल तक के तमाम पुरातात्विक अवशेष बरामद किए गए हैं। इसमें कई प्रकार की मिट्टी की मूर्तियाँ, माइक्रोलिथ, मनके एवं प्रस्तर, लोहे, हड्डी और हाथी दांत से बने उपकरण, मृदभांड और बहुमूल्य पत्थर बरामद किए गए हैं।”

बरामद की गई इन सभी चीज़ों को कॉलेज के पुरातात्विक विभाग में आगामी शोध कार्यों के लिए सुरक्षित रख दिया गया है। परंपरागत और वैज्ञानिक शैली से किए गए इस सर्वेक्षण की विस्तृत रिपोर्ट भारतीय पुरातात्विक विभाग, नई दिल्ली की वार्षिक पत्रिका ‘इंडियन आर्कियोलॉजी- ए रिव्यू’ में प्रकाशित होने के लिए भेजा गया है। इस सर्वेक्षण में इलाहाबाद विश्वविद्यालय स्थित प्राचीन इतिहास विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर उमेश चंद्र चटोपाध्याय और डॉ. माणिक चंद्र गुप्ता ने भी अहम भूमिका निभाई।

NDTV की निधि ने खरीद लिया था हार्वर्ड का टीशर्ट, लोगों को भेज रही थी बरनॉल… लेकिन ‘शिट हैपेन्स’ हो गया!

“कबीरा इस संसार में भाँति-भाँति के लोग..” कबीरा कहता ही रहा मगर निधि ने नहीं सुना। नहीं सुना तो परिणाम दुखद निकले। इक्कीस वर्षों तक NDTV की पत्रकार रह चुकी निधि राजदान के साथ हार्वर्ड यूनिवर्सिटी (Harvard University) ने एक दुर्भाग्यपूर्ण प्रैंक (मजाक) कर दिया है। पोटेंशियल हार्वर्ड एसोसिएट प्रोफेसर निधि राजदान ने कहा कि एसोसिएट प्रोफेसर के तौर पर ज्वाइन करने की बातें हार्वर्ड नहीं बल्कि ‘व्हाट्सएप्प यूनिवर्सिटी’ (WhatsApp University) से जारी की गईं थी और वो एक साइबर फ्रॉड या एक तरह के फिशिंग अटैक का शिकार हुई हैं।

इस पूरे प्रकरण में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें एनडीटीवी ने ही निधि राजदान को कई महीनों से ‘हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर निधि’ बताकर जमकर फेक न्यूज़ भी चला डालीं। इससे भी बड़ा स्कैम, जो निधि लोगों के साथ करती रही, वो ये कि बिना किसी इंटरव्यू के वो प्रोफेसर बनी घूमती रही और ‘तीस मार खाँ गिरी’ ये कि फिर अपने नाम के नीचे जॉब मिलने से पहले ही ‘प्रोफेसर’ लगा कर ‘जानकार’ वाले मोड में एनडीटीवी पर छपती रही।

निधि राजदान कई दिनों से ट्विटर पर ‘भक्तों’ को ‘बरनोल’ तक बाँटने लगीं थीं और हार्वर्ड से ट्वीट कर भक्तों को सबक सीखाने का भी ख्वाब बना रही थी। लेकिन वामपंथ का हल्कापन बहुत दिनों तक नहीं चल सका और एक आम शोषित और वंचित की तरह निधि को अपनी आवाज सामने रखनी ही पड़ी कि जिस यूनिवर्सिटी की वो एसोसिएट प्रोफेसर बन गई हैं, वो एक व्हाट्सएप्प यूनिवर्सिटी थी। कोई बौड़म सर्वहारा ही निधि के साथ प्रैंक कर गया।

एनडीटीवी और व्हाट्सएप्प यूनिवर्सिटी के कुलपति जात बाबू भी निधि की व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी में पोस्टिंग से इस तरह सीना चौड़ा कर यहाँ-वहाँ जमकर फेक न्यूज़ चलाते घूम रहे थे, जिस तरह एक बाप, जिसका बेटा पहले अटेम्प्ट में UPSC निकाल गया हो, अपने रिश्तेदारों का जीना यही बात सौ तरह से बताकर हराम कर के घूमता है।

लेकिन वस्तुतः व्हाट्सएप्प यूनिवर्सिटी को उन्होंने हार्वर्ड पढ़ लिया था और फिर वहीं से सारी समस्य शुरु हो गई, ऐसा हमें सॉल्ट न्यूज के लोगों ने बताया। कई लोगों ने निधि को सलाह भी दे डाली थी कि उसे अपनी खुशियों पर नियंत्रण रखते हुए हॉवर्ड वाली बात को अपने ट्विटर बायो में कम से कम नहीं रखना चाहिए, हर दूसरे ट्वीट में तो इसका जिक्र ना ही करे, लेकिन निधि ने जिन्हें शुभचिंतक कहना था, उन्हें भक्त और संघी का तमगा दिया।

अभी जनता को अगले ट्वीट में यह न कहा जाए कि यूनिवर्सिटी बदलने का सारा खेल मोदी जी की ही सारी प्लानिंग थी और किसीने बादलों का फायदा उठाकर हार्वर्ड को रातोंरात व्हाट्सएप्प कर दिया।

फिलहाल तमाम वामपंथ का पालतू फैक्ट चेक गिरोह भी शर्मिंदा है क्योंकि हार्वर्ड को व्हाट्सएप्प बना देने वाले लोग जिन्दा हैं और फैक्ट चेकर इतने दिन-महीने और साल तक भी कुछ नहीं कर सके। अभी भी वो अपने लम्पट वामपंथी साथियों के साथ मिलकर ये कर सकते हैं कि मोदी जी या आईटी सेल की साजिश साबित कर दें। फिलहाल उन्होंने निधि को निराश किया है। पहली माफ़ी अब अगर किसीको निधि के प्रति जारी करनी चाहिए तो वो मजहबी फैक्ट चेकर्स हैं।

खैर, पब्लिसिटी कैसी भी हो, बुरी कभी नहीं होती। निधि राजदान के लिए यह कहावत अंतिम संतोष होनी चाहिए। आखिर में बस एक ही पंक्ति निधि राजदान के लिए समर्पित, “बरनॉल नियरे रखिए..”

चोटी गुहल कनिया रहिए गेल: NDTV में रहीं निधि राजदान को हार्वर्ड ने कभी नहीं बुलाया, बताई ठगे जाने की व्यथा

मैथिली में एक कहावत है- चोटी गुहल कनिया रहिए गेल। यानी, अरमानों पर पानी फिर गया। ऐसा ही कुछ एनडीटीवी की पूर्व पत्रकार निधि राजदान के साथ हुआ है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में बतौर प्रोफेसर बुलाए जाने को लेकर साल 2020 में खूब चर्चा बटोरने वाली NDTV की पूर्व पत्रकार निधि राजदान ने खुलासा किया है कि वह एक फिशिंग अटैक (ऑनलाइन धोखाधड़ी, जहाँ ईमेल के जरिए धोखा देकर सारी जानकारी ले ली जाती है) का शिकार हुईं थीं और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से कोई प्रोफेसर बनने का ऑफर नहीं आया

कुछ देर पहले निधि ने अपने ट्विटर पर एक बयान जारी किया है। इस बयान में उन्होंने खुद को फिशिंग अटैक का शिकार बताया। वह लिखती हैं कि 21 साल तक एनडीटीवी में काम करने के बाद उन्होंने साल 2020 के जून माह में आगे बढ़ने का फैसला किया है और हार्वर्ड यूनिवर्टी में बतौर पत्रकारिता की एसोसिएट प्रोफेसर के तौर पर ज्वाइन कर रही हैं।

उन्होंने बताया कि वह ज्वाइनिंग का समय पहले सितंबर 2020 मानकर चल रही थीं और अपनी नई जिम्मेदारियों को उठाने की तैयारी कर रही थीं। बाद में उन्हें कहा गया कि जनवरी 2021 में उनकी क्लास शुरू होगी। धीरे-धीरे उन्हें हर चीज इतना डिले होने पर असामान्य लगना शुरू हुआ।

शुरूआत में वह महामारी के कारण सब चीजों को नजर अंदाज करती रहीं लेकिन हाल ही में उन्हें इन चीजों को लेकर शक गहराया और उन्होंने यूनिवर्सिटी के शीर्ष प्रशासन से संपर्क किया। 

बाद में यूनिवर्सिटी के अनुरोध पर निधि की ओर से हर वह प्रमाण पेश किए गए जिसे देख वह सोच रहीं थीं कि उन्हें यह सब हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की ओर से मिल रहा है। आखिर में उन्हें पता चला कि वास्तविकता में हार्वर्ड ने उन्हें प्रोफेसर बनने के लिए कोई ऑफर भेजा ही नहीं बल्कि वह तो एक तरह के ऑनलाइन हमले का शिकार हुईं।

वह लिखती हैं कि उन्हें हार्वर्ड से कोई ऑफर लेटर भी नहीं मिला। धोखाधड़ी करने वालों ने बड़ी चालाकी से उनके पर्सनल डेटा, कम्युनिकेशन को एक्सेस करने के लिए सारा खेल खेला और शायद डिवाइस से लेकर ईमेल व सोशल मीडिया अकॉउंट तक पहुँचने का रास्ता भी पा लिया।

बयान के अनुसार, ऑनलाइन हमले का शिकार हुई निधि राजदान को जब सब कुछ पता चला तो उन्होंने फौरन इस संबंध में कंप्लेन की। साथ ही सारे सबूत पुलिस के सामने पेश किए। अब निधि ने पुलिस से इस मामले पर जल्द से जल्द एक्शन लेने के लिए पुलिस से अपील की है ताकि आरोपित पकड़े जा सकें। इसके अलावा अलग से हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को भी पत्र लिखा गया है ताकि वह इस मामले को गंभीरता से लें।

वह बताती हैं कि पिछले कुछ दिनों में उन्होंने उन व्यक्तियों और संगठनों को भी पत्र लिखा है जिनसे वह बीते कुछ समय से संपर्क में थी। फर्जी बातचीत का शिकार हुई निधि राजदान अब उम्मीद कर रही हैं कि पुलिस जल्द से जल्द इस मामले के तह तक जाएँ और उनकी मदद करे।

बता दें कि निधि द्वारा ये बयान जारी किए जाने के बाद कुछ लोगों ने अपने पुराने ट्वीट पर उनका ध्यान आकर्षित करवाना शुरू किया है। इन ट्वीट में वह निधि को पहले ही आगाह कर चुके थे कि फैसला लेने से पहले वह एक बार पुष्टि कर लें। लेकिन शायद वह हार्वर्ड से जुड़ने की बात पढ़ने भर से इतनी खुश थीं कि उन्होंने इसे क्रॉस चेक करना उचित नहीं समझा और बड़े-बड़े सपने बुनने लगीं। अब हालत ये है कि उन्हें हर किसी को अपने ठगे जाने की दास्तां सुनानी पड़ रही है।

बिलाल ने ‘आश्रम’ वेब सीरीज देखकर जंगल में की युवती की हत्या, धड़ से सिर अलग कर 2 KM दूर गाड़ा

जो लोग कहते हैं कि फिल्मों का हमारे वास्तविक जीवन पर कोई असर नहीं पड़ता है और उन्हें कला के नाम पर जो आवश्यक लगे वो दिखाने की आजादी दी जानी चाहिए। इस प्रकार का ज्ञान लिखने या सुनाने वाले लोग ऐसा करते समय इसके दूसरे पहलू से आँखें बंद कर लेना बेहतर समझते हैं। लेकिन ओरमाँझी में जो वीभत्स घटना घटी है, वह इस दावे पर मोहर लगाती है कि समय के साथ भारतीय सिनेमा का जो स्वरुप बदला है, उसने समाज पर अपना पूरा प्रभाव छोड़ा है।

झारखंड की राजधानी राँची स्थित ओरमाँझी से कुछ ही दिन पहले एक युवती की सिर कटी लाश बरामद हुई थी। इस युवती के हत्यारे आरोपित शेख बेलाल ने कहा है कि उसे हाल ही में विवाद के कारण चर्चा में आई वेब सीरीज ‘आश्रम’ ने ऐसा करने की प्रेरणा दी और इसे देखकर ही उसने इस क्रूरता को अंजाम दिया।

रविवार (जनवरी 10, 2021) को जिराबार जंगल से एक युवती की सिर कटी हुई लाश मिली थी, जो नग्न अवस्था में थी। सिर न मिलने के कारण मृतका की पहचान नहीं हो सकी थी। पुलिस ने मामले में आरोपित बिलाल खान उर्फ शेख बेलाल की तलाश की और उसे दबोचने में कामयाब रही।

लाश मिलने के बाद राँची के पुलिस अधीक्षक नौशाद आलम ने बताया था कि उन्हें निर्वस्त्र अवस्था में महिला की सिर कटी लाश मिली और युवती का कटा हुआ सिर उसके पहले पति बिलाल खान के खेत से बरामद किया। युवती का सिर बिलाल खान के खेत में दफ़नाया गया था, जिसे पुलिस अधिकारियों ने खोद कर निकलवाया।

इस हत्या की जाँच कर रहे पुलिस अधिकारियों ने हत्या के तरीके से कयास लगाए हैं कि फ़िल्मी तरीके से बिलाल ने हत्‍या के बाद युवती की लाश की पहचान ना हो सके, इसलिए उसका धड़ और सिर अलग-अलग जगहों पर दो किलोमीटर दूर फेंक दिए। पुलिस का कहना है कि ‘आश्रम’ वेब सीरीज के पहले भाग की थीम की तरह ही इस हत्या को भी अंजाम दिया गया और जंगल में हत्या कर लाश को ठिकाने लगाया गया। पुलिस ने कहा कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में ये बात सामने आई कि पहले युवती की गला दबाकर हत्या की गई, उसके बाद सिर और चेहरे पर 15 बार वार किए गए।

उल्लेखनीय है कि निर्देशक प्रकाश झा और अभिनेता बॉबी देओल की ‘आश्रम’ वेबसीरीज की कहानी ड्रग्स, बलात्कार, नरसंहार और राजनीति से सम्बंधित है और फिल्म में ‘बाबा’ को सनातन धर्म का बाबा दिखाकर हिंदुत्व को बदनाम करने का जमकर प्रयास किया गया।

‘आश्रम’ के रिलीज होने के साथ ही इसकी पटकथा और हिन्दूघृणा चर्चा का विषय रही। इसमें कई ऐसे दृश्य भी डाले गए जो सनातन धर्म से जुड़ी धार्मिक भावनाओं को चोट पहुँचाते हैं।

जिसने सुशांत के लिए लिखा- नखरे दिखाने वाला, उसने करण जौहर की मेहरबानी के बाद छोड़ी ‘पत्रकारिता’

अपने लेखों के जरिए सुशांत सिंह राजपूत की छवि धूमिल करने वाले फिल्म आलोचक राजीव मसंद ने ‘पत्रकारिता’ को अलविदा कह दिया है। उन्होंने करण जौहर के धर्मा प्रोडक्शन के नए वेंचर को बतौर चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) ज्वाइन किया है। इस बात की जानकारी पत्रकार सौम्यादित्य ने ट्विटर पर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स में भी यह बताया गया है कि पत्रकार राजीव मसंद अब धर्मा कॉर्नरस्टोन को अगले हफ्ते से ज्वाइन करने वाले हैं। वह वहाँ COO (चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर) के तौर पर ज्वाइन करेंगे। करण और अन्य शीर्ष अधिकारियों को लगता है कि इस पद के लिए राजीव बिलकुल सही व्यक्ति हैं और वह नई प्रतिभाओं की खोज में मदद करेंगे।

बता दें कि 15 दिसंबर 2020 को ही करण जौहर ने अपना नया वेंचर बंटी सजदेह की कॉर्नरस्टोन स्पोर्ट और मैनेजमेंट के साथ शुरू किया था। ये वही फर्म है जिसमें सुशांत सिंह राजपूत की प्रबंधक दिशा सालियान मैनेजर बनने से पहले काम करती थीं। 

कहा जा रहा है कि दिशा इसी फर्म के जरिए सुशांत के संपर्क में आईं थीं। इसके बाद जब जून 2020 में सुशांत और दिशा सालियान दोनों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई तो सितंबर 2020 में सीबीआई ने इस कंपनी के सीईओ बंटी सजदेह को समन भेजा। ये समन सुशांत के फ्लैट में रहने वाले सिद्धार्थ पिठानी से पूछताछ के बाद बंटी को भेजा गया था, उसी ने अपने पहले बयान में यह नाम लिया था। 

सुशांत की मृत्यु के बाद मुंबई पुलिस ने राजीव मसंद को भी पूछताछ के लिए समन भेजा गया था, जिसके चलते बांद्रा थाने में उनसे पूछताछ भी हुई। इसके अलावा कंगना रनौत ने भी मूवी माफिया पर बात करते हुए राजीव मसंद का नाम लेकर कहा था कि सुशांत सिंह राजपूत मामले में राजीव से पड़ताल होनी चाहिए।

गौरतलब है कि सुशांत के जाने के बाद कई लोगों ने बॉलीवुड के गिरोह को लेकर अपना गुस्सा व्यक्त किया था। इस बीच यह बात सामने आई कि एक्टर को बदनाम करने के लिए किसी के इशारे पर निगेटिव आर्टिकल लिखे जाते थे। इन लेखों में सुशांत की छवि बिगाड़ने का प्रयास हुआ। राजीव मसंद उन्हीं लोगों में से एक थे जिन्होंने टैलेंटेड एक्टर के लिए ‘skirt-chaser’, ‘overpaid outsider’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया। साथ ही उन्हें नखरे दिखाने वाला एक्टर भी कहा।

BHU में शुरू होगा हिंदू अध्ययन: प्राचीन शास्त्रों से लेकर सैन्य विज्ञान तक में छात्रों को किया जाएगा पारंगत

बीएचयू के भारत अध्ययन केंद्र में हिंदू स्टडीज के नाम से पूर्णत: हिंदू धर्म व संस्कृति पर ही आधारित कोर्स की विधिवत शुरूआत की जा रही है। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय एक बार फिर राष्ट्र निर्माण में अपनी सार्थकता सिद्ध करने की दिशा उठ खड़ा हुआ है। आधुनिकता के साथ सनातन प्राचीन परंपरा की थाती संजोए BHU में छात्र अब वेद, पुराण, ब्राह्मण और श्रमण परंपरा के साथ रामायण, महाभारत, दर्शन, ज्ञान मीमांसा सहित हिंदू धर्म के वैशिष्ट्य और परंपरा पर आधारित पाठ्यक्रमों में पढ़ाई कर सकेंगे।

भारत अध्ययन केंद्र द्वारा स्नातकोत्तर की उपाधि देने वाले इस कोर्स का पाठ्यक्रम कला संकाय प्रमुख प्रो. विजय बहादुर सिंह की अध्यक्षता में बनारस और देश-विदेश के कई नामी-गिरामी आचार्याें द्वारा तैयार किया गया है, जिस पर हाल ही में कला संकाय प्रमुख की अध्यक्षता वाली बोर्ड ऑफ स्टडीज की बैठक में सर्वसम्मति से मुहर लगा दी गई है।

बीएचयू, जेएनयू, आइआइटी-कानपुर समेत देश भर के विद्वानों ने बैठक कर फैसला लिया है कि भारत में पहली बार बीएचयू में हिंदू अध्ययन की शिक्षा दी जाएगी। हिंदू स्टडीज नामक नए कोर्स को 2021-22 के इसी सत्र से शुरू करने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत दो वर्षीय एम ए का कोर्स होगा, जो कि इसी सत्र 2021-22 से शुरू हो जाएगा।

भारत में यह पहला मौका है जब इस कोर्स के तहत देश में सनातन परंपरा, ज्ञान मीमांसा सहित तत्व विज्ञान लेकर सैन्य विज्ञान जैसे प्राचीन हिंदू शास्त्रों को एकेडमिक स्वरूप प्रदान किया गया है। इस कोर्स के अंतर्गत हिंदू धर्म के वैशिष्ट्य और परंपरा पर आधारित पाठ्यक्रम की रचना की गई है, जिसमें मुख्य रूप से तत्त्व, प्रमाण विमर्श, वाद परंपरा और शास्त्रों के अर्थ निर्धारण की पद्धति, पाश्चात्य ज्ञान मीमांसा, रामायण, महाभारत, स्थापत्य, लोकवार्ता, लोक-नाट्य कला, भाषा विज्ञान और प्राचीन सैन्य विज्ञान को विषय रूप में शामिल किया गया है।

ऑपइंडिया ने इस हिन्दू धर्म के अध्ययन की सम्पूर्ण परिकल्पना, कोर्स, इसकी आवश्यकता और उद्देश्यों को लेकर प्रोफ़ेसर राकेश उपाध्याय से विस्तृत बातचीत की है। इससे पहले कि मैं उनसे बातचीत का व्यौरा दूँ आप यह जान लीजिए कि हिन्दू अध्ययन के इस डिज़ाइन के पीछे कौन सी प्रमुख हस्तियाँ शामिल हैं।

विशेष रूप से पाठ्यक्रम में निर्णय लेने के दौरान बोर्ड आफ स्टडीज की बैठक में कला संकाय प्रमुख प्रो. विजय बहादुर सिंह की अध्यक्षता में जेएनयू के प्रो. रामनाथ झा, आइआइटी-कानपुर के प्रो. नचिकेता तिवारी, प्रो. कमलेश दत्त त्रिपाठी, प्रो. ब्रजकिशोर स्वाई (ओडिशा), बीएचयू संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के प्रमुख प्रो. विंध्येश्वरी प्रसाद मिश्र, लोकगायिका प्रो. मालिनी अवस्थी, प्रो. प्रद्युम्न शाह, प्रो. विमलेंद्र कुमार, प्रो. सच्चिदानंद मिश्र, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र वाराणसी के निदेशक प्रो. विजय शंकर शुक्ल, प्रो. राकेश उपाध्याय, प्रो. केशव मिश्र, डा. अर्पिता चटर्जी, प्रो. सदा शिव कुमार द्विवेदी समेत कई अन्य प्रमुख आचार्य मौजूद थे, जिन्होंने लंबे विचार-विमर्श के बाद पाठ्यक्रम पर अपनी संस्तुति दी।

ऑपइंडिया ने इसी कोर्स से जुड़े और बोर्ड ऑफ़ स्टडीज में शामिल प्रोफ़ेसर राकेश उपाध्याय से बातचीत करके जानना चाहा इस कोर्स के उद्देश्यों के बारे में तो उनका साफ कहना था कि भारत में हिन्दू धर्म और शास्त्रों को लेकर मनमानी व्याख्या चल रही है। खासतौर से हमारे इतिहासकार जिनमें से अधिकांश ऐसे लोग हैं जिनको संस्कृत भाषा तक नहीं पता लेकिन वो व्याख्या कर रहे हैं हिन्दू धर्म, शास्त्र और सनातन परंपरा की, जिनके अध्ययन का स्रोत ही विकृत है तो क्या व्याख्या करेंगे यह कोई भी समझ सकता है।

प्रोफ़ेसर राकेश उपाध्याय का कहना था, “ज़्यादातर ऐसे विचारधारा के लोग हैं जिनका एकमात्र उद्देश्य हिन्दू धर्म और सनातन परंपरा से द्रोह के कारण अपने नैरेटिव के लिए हर जगह अनावश्यक डिबेट खड़ा करके उसे ख़ारिज करना है न कि उसे समझाना और उस पर वास्तविक विमर्श करना।”

उन्होंने कुछ इतिहासकारों की तरफ इशारा करते हुए कहा, “कई ऐसे प्राचीन इतिहास के विशेषज्ञ बने हुए हिन्दू धर्म पर व्याख्यान देते फिर रहे हैं। इन्हें खुद मूल ग्रंथों का ज्ञान नहीं है। जो परंपरा से ऋग्वेद पढ़ रहे हैं उन्हें उसमें गाय काटने का वर्णन नहीं मिलेगा लेकिन जिन्हें हिन्दू धर्म को सिर्फ बदनाम करना है वह ऐसा कोई भी क्षेपक-प्रक्षेपक के सहारे जो भारत का है, जो इस राष्ट्र का गौरवशाली तत्व है उसे विकृत और दुष्प्रचारित करने में लगे हैं।”

साथ ही उन्होंने यह जोड़ा कि इस सम्पूर्ण अध्ययन का उद्देश्य किसी के साथ विवाद करना नहीं बल्कि आगे आने वाले दिनों में सनातन और हिन्दू धर्म को केंद्र में रखकर प्राचीन शास्त्रों से लेकर, योग, ज्ञान, सैन्य और शास्त्र परम्पराओं का समावेशन करते हुए अपनी विशिष्टताओं को उभारना है। इस पर शोध और लेखन को बढ़ाना है ताकि आगे आने वाली पीढ़ी अपनी विशिष्टतता को जानकर गौरवान्वित हो न कि ऐसे किसी भी दुराग्रह के कारण खुद को हीन समझे। हमारे मूल शास्त्रों ग्रंथों में बहुत कुछ ऐसा विशिष्ट है जिससे आज भी वह सनातन परंपरा इतना कुछ झेलते हुए भी अक्षुण्य है।

ऑपइंडिया से बातचीत में बुद्ध और जैन साहित्य पर भी चर्चा करते हुए उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि बाद में जो भी धर्म, मत या विचारधारा निकले उनका भी मूल सनातन ही है। उन्होंने यह भी कहा कि इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए ब्राह्मण से लेकर श्रमण परम्पराओं का अध्ययन भी इस अध्ययन का प्रमुख हिस्सा है। कैसे इस प्राचीन भूमि पर सनातन से ही बाकी परम्पराएँ किस तरह से निकली, कहाँ तक यात्रा की, उनके मूल में क्या था, उनके ज्ञान मीमांसा का स्रोत क्या रहा है इन सबको लेकर न सिर्फ शास्त्रीय बल्कि व्यावहारिक और प्रयोगात्मक दृष्टि से भी अध्ययन पर जोर दिया जाएगा।

प्रोफ़ेसर राकेश उपाध्याय ने बताया कि कोर्स को इस तरह से डिज़ाइन किया गया है ताकि इसकी लोकप्रियता के साथ आगे चलकर इसमें नेट-जेआरएफ के साथ शोध को भी बढ़ावा मिले और आने वाली पीढ़ियाँ अपने वैशिष्ट्य को उसके मूल रूम में जान और समझ सकें न कि उसके विकृत स्वरुप को ही सत्य मानकर भ्रमित हों। ऐसा इस दिशा में तमाम विद्वानों का मत है।

किसने डिलीट किया पूजा भारती का फेसबुक अकाउंट? हाथ-पैर बाँध डैम में फेंकी गई थी MBBS छात्रा

झारखंड के हजारीबाग मेडिकल कॉलेज में MBBS की पढ़ाई कर रही पूजा भारती के मौत का राज और भी गहराता जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार यह बात सामने आ रही है कि पूजा का फेसबुक अकाउंट डिलीट किया जा चुका है।

पूजा भारती की मौत के मामले में जाँच कर रही एसआइटी की टीम हर एक पहलू को बारीकी से इन्वेस्टिगेट कर रही है। पुलिस की जाँच अलग-अलग स्थानों पर चल रही हैं। छात्रा के कमरे, घटनास्थल, ई-रिक्शा, बस कंडेक्टर और गार्ड का बयान के साथ-साथ मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों और छात्रों के बयान को भी आधार मान कर पुलिस जाँच में जुटी है। मामले में अब तकनीकी दायरा भी बढ़ता जा रहा है।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस पूजा के फ़ोन के डिटेल खँगाल रही है। साथ ही उसके फेसबुक अकाउंट से भी डाटा निकलने की तैयारी चल रही है। जिसके मद्देनजर पुलिस ने फेसबुक को पत्र लिख जाँच में सहयोग करने के लिए कहा है। कथित तौर यह बात सामने आई है कि छात्रा का फेसबुक अकाउंट डिलीट किया जा चुका है। हालाँकि इस संबध में फिलहाल कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

इस घटना पर भाजपा ने कॉन्ग्रेस व झामुमो सरकार के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया है। साथ ही चेतावनी दी है कि अगर शीघ्र ही इस मामले के आरोपितों को गिरफ्तार नहीं किया तो भाजपा सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेगी। पार्टी ने इस घटना पर पुलिस के रवैए को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।

क्या है पूरी घटना

पूजा भारती परीक्षा देने के लिए घर से निकली और लापता हो गई। बाद में उसकी लाश पतरातू डैम (Patratu Dam) से 12 जनवरी, 2021 सुबह बरामद हुई। 22 साल की पूजा भारती गोड्डा की रहने वाली थी।

रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि लड़की का शरीर बँधा हुआ था और उसे बाँध में डुबोकर बेरहमी से मार दिया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी यह तथ्य सामने आई है कि पूजा को जिन्दा ही डैम में फेंक दिया गया था। मेडिकल बोर्ड की मौजूदगी में हुए पोस्टमॉर्टम में पूजा भारती के पेट से पानी निकला है। डॉक्टर्स का कहना है कि मरे हुए व्यक्ति के पेट में पानी नहीं पहुँच पाता है, जिससे इस बात की पुष्टि होती है कि पूजा भारती को जिन्दा ही बाँधकर पानी में फेंक दिया गया।

पोस्टमॉर्टम में मृतका के शरीर पर कोई बाहरी चोट के निशान नहीं मिले थे। हत्या से पहले बलात्कार की आशंका की जाँच के लिए सैम्पल भेजे जा चुके हैं और इस पर अभी रहस्य बना हुआ है। पूजा भारती हत्या मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।