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गूगल पर मौजूद हैं आपके व्हाट्सएप्प प्राइवेट ग्रुप चैट और नंबर! जानें कितने सुरक्षित हैं आप

WhatsApp ने आपकी प्राइवेसी को ख़िलवाड़ मान लिया है। अत: आपके प्राइवेट ग्रुप चैट गूगल के सर्च इंजन पर कभी मिल जाएँ तो हैरान होने की आवश्यकता नहीं है। अपनी नई पॉलिसी लाकर यूजर्स की प्राइवेसी में हस्तक्षेप करने वाले मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप्प को इस समय जब हर जगह से लताड़ लग रही है। उस समय यूजर्स ने यह भी पाया कि कई लोगों के प्राइवेट चैट ग्रुप भी गूगल सर्च इंजन पर मौजूद हैं।

ये ताजा मामला रविवार (जनवरी 10,2021) को दर्ज किया गया। इससे मालूम चला कि प्राइवेट ग्रुप से जुड़ने के इन्वाइट लिंक के अलावा कई यूजर्स की प्रोफाइल भी सर्च इंजन पर थी, जिसका सीधा सा एक मतलब ही है कि यदि कोई चाहे तो आपकी न केवल ग्रुप चैट में अपनी मर्जी से एंट्री ले सकता है बल्कि उस ग्रुप से जुड़े नंबरों को भी पता कर सकता है।

इससे पहले इस तरह किसी व्यक्ति विशेष की निजता में हस्तक्षेप के आरोप इस मैसेजिंग एप पर साल 2019 में लगे थे। जिसके बाद कंपनी ने अपने बयान में कहा था कि उन्होंने मामला उजागर होने के बाद अपनी सुरक्षा को और बढ़ाया है।

पिछली बार जब यह समस्या आई थी, तो कंपनी ने कहा था कि मार्च 2020 से, व्हाट्सएप ने अपने सभी लिंक पेजों के लिए ‘noindex’ टैग को शामिल किया है। इससे इन लिंक्स को अनुक्रमण से बाहर रखा जा सकता है। इसके बाद नवंबर 2019 में सामने आए लिंक गूगल पर कहीं नहीं पाए गए हैं लेकिन अब है कि अब कुछ मामले सामने आए हैं।

साइबर जानकार राजशेखर राजाहरिया ने 10 जनवरी को अपने ट्वीट में लिखा, “आपके व्हाट्सएप्प गुप शायद उतने भी सुरक्षित नहीं है जितना की आप सोच रहे हैं। व्हॉट्सएप ग्रुप चैट के इन्वाइट लिंक, यूजर प्रोफाइल दोबारा से सार्वजनिक की जाने लगी है।” उन्होंने अपने ट्वीट के साथ कुछ तस्वीरें शेयर की। इन तस्वीरों में देख सकते हैं कि कई नंबर की चैट गूगल के सर्च इंजन पर ही दिख रही हैं।

ऑपइंडिया इस बात की पुष्टि नहीं करता है कि ये नंबर अब भी गूगल पर नजर आ रहे हैं या फिर मैसेजिंग एप ने इसका कोई समाधान खोज लिया है। मगर 11 जनवरी को राजशेखर इस बात की जानकारी दे चुके हैं कि मैसेजिंग एप ने दोबारा मामला उजागर होने के बाद ग्रुप इन्वाइट और प्रोफाइल लिंक को गूगल सर्च से हटा दिया है।

मीडिया खबरों के अनुसार साइबर एक्सपर्ट्स का कहना है “noindex’ टैग जोड़ना एक उचित समाधान नहीं है क्योंकि चैट कुछ ही महीनों में दोबारा से प्लेटफॉर्म पर है।” उनका मानना है कि व्हाट्सएप जैसी बड़ी तकनीकी कंपनियाँ यदि वास्तव में उपयोगकर्ताओं की गोपनीयता की फिक्र करती हैं तो उनको एक उचित समाधान की तलाश करनी चाहिए। इससे पहले करीब 1500 ग्रुप इन्वाइट लिंक गूगल के सर्च रिजल्ट पर पाए गए थे।

फाइनेंशियल एक्सप्रेस के मुताबिक डेवलपर्स आमतौर पर किसी भी पृष्ठ के लिए robots.txt file का इस्तेमाल करते हैं कि Google किसी पेज तक जा सकता है या नहीं। मगर WhatsApp ने कथित तौर पर chat.whatsapp.com सबडोमेन के लिए robots.txt फ़ाइल का उपयोग नहीं किया है। इससे Google पर ग्रुप चैट में अतिक्रमण हो सकता है।

रामसेतु के निर्माण और इतिहास की पड़ताल के लिए ASI ने दी समुद्र के भीतर रिसर्च प्रॉजेक्‍ट को मंजूरी

रामसेतु का जिक्र आपने रामायण में जरूर सुना होगा। रामसेतु के बारे में दुनिया उतना ही जानती है, जितना कि रामायण में बताया गया है, लेकिन अब भारत और श्रीलंका के बीच समुद्र में मौजूद रामसेतु कितना पुराना है और इसका निर्माण कैसे हुआ था, इसका पता लगाने के लिए ऑर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) के अधीन आने वाले सेंट्रल एडवायजरी बोर्ड ने एक अंडरवाटर रिसर्च प्रॉजेक्‍ट को मंजूरी दे दी है जो कि इसी साल शुरू होगा।

टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार इस प्रोजेक्ट पर जो वैज्ञानिक काम करेंगे, उन्होंने उम्मीद जताई है कि अत्‍याधुनिक तकनीक से उन्‍हें पुल की उम्र और रामायण काल का भी पता लगाने में मदद मिलेगी।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के तहत आने वाले केंद्रीय पुरातत्व सलाहकार बोर्ड ने CSIR और नेशनल इंस्टट्यूट ऑफ ओसनोग्राफी, गोवा (NIO) को इस संबंध में शोध को लेकर पिछले महीने मंजूरी दी है। इसे लेकर ठोस वैज्ञानिक जानकारी अगले कुछ वर्षों में सामने आ सकती है। NIO डायरेक्टर प्रोफेसर सुनील कुमार सिंह के अनुसार, “प्रस्तावित अध्ययन पुरातात्विक वस्तुओं, रेडियोमेट्रीक और भौगोलिक समय और दूसरे पर्यावरण संबंधित डाटा पर आधारित होगा।”

उन्होंने कहा, “रेडियोमेट्रिक तकनीक से ये पता लगाया जाएगा कि ढाँचा कितना पुराना है। ऐसा माना जाता है कि रामसेतु से जुड़े ये पत्थर कोरल या प्यूमिस स्टोन से बने हुए हैं। कोरल पत्थर में दरअसल कैल्शियम कार्बोनेट होते हैं जिसकी मदद से रामायण के काल और ढाँचा कितना पुराना है, इस संबंध में जानकारी हासिल करने में मदद मिलेगी।”

बता दें, इस रिसर्च में रेडियोमेट्रिक और थर्मोल्‍यूमिनेसेंस (TL) डेटिंग जैसी तकनीकों का इस्‍तेमाल किया जाएगा। रेडियोमैट्रिक डेटिंग किसी वस्तु की आयु का पता लगाने के लिए रेडियोएक्टिव अशुद्धियों की तलाश करता है। जब किसी वस्तु को गर्म किया जाता है तो TL डेटिंग उसकी लाइट का विश्लेषण करती है।

ऐतिहासिकता और रामायण काल की तिथि इतिहासकारों, पुरातत्वविदों और वैज्ञानिकों के बीच एक बहस का विषय बनी हुई है। इस स्टडी में इस बात की भी जानकारी मिलेगी कि क्‍या पुल के आस-पास कोई बस्‍ती भी थी या नहीं।

एनआईओ पानी की सहत के 35 से 40 मीटर नीचे जाकर सैंपल लेगा। इसके लिए ‘सिंधु संकल्‍प’ या ‘सिंधु साधना’ नाम के जहाजों का इस्‍तेमाल किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि NIO ने पाँच साल पहले देश भर में पानी के अंदर शोध के लिए ASI के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया था। उस समय रामसेतु और द्वारका को लेकर शोध की बात भी हुई थी। द्वारका को भगवान कृष्ण की नगरी कहा जाता जिसके बारे में मान्यता है कि ये बाद में समुद्र में डूब गई।

अधिकारियों के अनुसार द्वारका पर शोध के लिए अतिरिक्त 28 लाख का बजट प्रस्तावित है जबकि रामसेतु के लिए शुरुआती बजट के तौर पर 10 लाख दिए जाएँगे। इस शोध को लेकर NIO के एक अधिकारी का कहना है कि यह परियोजनाएँ वैज्ञानिक जाँच हैं, न कि केवल विश्वास का विषय।

गौरतलब है कि एएसआई ने इससे पहले 2007 में कहा था कि उस इस दावे के संबंध में कोई सबूत नहीं मिले हैं। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने एएसआई ने इस हलफनामे को वापस ले लिया था।

रामायण के अनुसार, भगवान राम जब लंका के राजा रावण की कैद से अपनी पत्‍नी सीता को बचाने निकले थे तो रास्‍ते में समुद्र पड़ा। इस समुद्र को पार करने के लिए वानरों ने छोटे-छोटे पत्‍थरों की मदद से इस पुल को तैयार किया था। भारत और श्रीलंका के बीच बना यह पुल करीब 48 किलोमीटर लंबा है। इस पुल की गहराई 3 फीट से लेकर 30 फीट तक है।

पकड़ा गया बिलाल, बीवी का काट डाला था सिर और गुप्तांग: अलग-अलग जगह गाड़ा-फेंका था शरीर के हिस्सों को

अपनी ही बीवी का सिर काट देने का आरोपित शेख बिलाल पकड़ा गया। राँची पुलिस इस विभत्स हत्या के पीछे के मकसद को समझने के लिए अब बिलाल से पूछताछ करेगी।

14 जनवरी 2021 को राँची ग्रामीण के एसपी नौशाद आलम ने शेख बिलाल के पकड़े जाने की सूचना दी।

कब, कहाँ, कैसे मिली लाश

झारखंड की राजधानी राँची स्थित ओरमाँझी में युवती की सिर कटी लाश बरामद हुई थी। युवती का कटा हुआ सिर उसके पहले पति बिलाल खान के खेत से बरामद किया गया है। युवती का सिर बिलाल खान के खेत में दफ़नाया गया था, जिसे पुलिस अधिकारियों ने खोद कर निकलवाया है। 

महिला का शव नग्न अवस्था में मिला था और सिर कटा हुआ था। इसके बाद पुलिस की टीम ने जाँच शुरू कर दी थी। युवती के शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं मिला था। युवती का गुप्‍तांग भी काट दिया गया था। 

जिस युवती की लाश बरामद की गई थी, बिलाल उसका उसका पहला पति है। इसके अलावा, पुलिस ने दूसरे पति खालिद को भी हिरासत में लिया है। युवती पिछले 2 महीने से लापता थी।

जिस जलीकट्टू को बताया था पशुओं पर अत्याचार, उसे राहुल गाँधी ने बताया तमिल संस्कृति: खुद पहुँचे देखने

तमिलनाडु के मदुरई के अवनीयापुरम में जलीकट्टू (Jallikattu) का खेल शुरू हो चुका है। कॉन्ग्रेस ने जिस खेल को कभी ‘बर्बर’ बताकर भाजपा पर इसके राजनीतिकरण का आरोप लगाया था, उसी जलीकट्टू का मजा लेने कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी अवनियापुरम के इस कार्यक्रम में पहुँच चुके हैं।

राहुल गाँधी शायद ये भूल गए कि उन्हीं की पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और यहाँ तक कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इस जलीकट्टू को ‘हिंसक’ और पशुओं पर अत्याचार वाला खेल बता चुके हैं। यही नहीं, साल 2016 के कॉन्ग्रेस के चुनावी घोषणापत्र में जलीकट्टू को प्रतिबंधित करना भी शामिल था।

सोशल मीडिया पर राहुल गाँधी की जलीकट्टू में शामिल होने को लेकर जमकर खिंचाई हो रही है। वर्ष 2016 में, कॉन्ग्रेस ने जल्लीकट्टू को ‘बर्बर’ हरकत कहते हुए भाजपा पर इसे समर्थन देकर राजनीति करने का आरोप लगाया था।

वहीं, शशि थरूर ने तो जनवरी, 2016 में भाजपा को घेरते हुए पशु कल्याण बोर्ड से आग्रह कर लिया था कि वो ‘बैलों को यातना’ देने वाले इस खेल पर एक्शन ले।

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने बृहस्पतिवार (जनवरी 14, 2021) को जलीकट्टू में शामिल होने के बाद बयान दिया, “मैं यहाँ आया हूँ क्योंकि मुझे लगता है कि तमिल संस्कृति, भाषा और इतिहास भारत के भविष्य के लिए आवश्यक हैं और इसका सम्मान करने की आवश्यकता है।”

राहुल गाँधी ने कहा कि तमिल संस्कृति को देखना काफी प्यारा अनुभव था और उन्हें ये देखकर बेहद खुशी हुई कि जलीकट्टू को व्यवस्थित और सुरक्षित तरीके से आयोजित किया जा रहा है। राहुल ने कहा कि वो उन लोगों को संदेश देने के लिए गए हैं, जो ये सोचते हैं कि वो तमिल संस्कृति को खत्म कर देंगे।

जिस बिलाल खान से किया था प्रेम विवाह, उसी ने सिर काट कर खेत में गाड़ा: झारखंड पुलिस ने खुदवा कर निकाला

झारखंड की राजधानी राँची स्थित ओरमाँझी में युवती की सिर कटी लाश बरामद हुई थी। लगभग 10 दिनों से अधिक की जाँच के बाद पुलिस वीभत्स हत्या की गुत्थी सुलझाने के काफ़ी करीब पहुँच चुकी है।

पुलिस ने इस प्रकरण में नया खुलासा किया है, युवती का कटा हुआ सिर उसके पहले पति बिलाल खान के खेत से बरामद किया गया है। युवती का सिर बिलाल खान के खेत में दफ़नाया गया था, जिसे पुलिस अधिकारियों ने खोद कर निकलवाया है। 

दरअसल रविवार (3 जनवरी 2021) को झारखंड के राँची में एक युवती की सिरकटी लाश मिली थी। इसके बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया था। वारदात ओरमाँझी थाना इलाके के जिराबार जंगल में अंजाम दी गई थी।

महिला का शव नग्न अवस्था में मिला था और सिर कटा हुआ था। इसके बाद पुलिस की टीम ने जाँच शुरू कर दी थी। युवती के शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं मिला था। युवती का गुप्‍तांग भी काट दिया गया था। 

वारदात के कई दिन बाद पुलिस ने इसके मुख्य आरोपित और युवती के शव की पहचान की थी। आरोपित की पहचान बिलाल खान उर्फ़ शेख बेलाल के रूप में हुई, जो हाल ही में जेल से निकला था, इसके बाद ही वह फ़रार हो गया था।

जिस युवती की लाश बरामद की गई थी, बिलाल उसका उसका पहला पति है। पुलिस अभी भी उसकी तलाश में जुटी हुई है। इसके अलावा पुलिस ने दूसरे पति खालिद को भी हिरासत में लिया है। युवती पिछले 2 महीने से लापता थी।

चान्‍हो इलाके के चटवल गाँव के एक दंपती ने मृतका की पहचान की थी। दम्पति के डीएनए सैम्पल को जाँच के लिए भेजा गया था। इसके बाद लाश की पहचान हुई थी। मुख्य आरोपित बिलाल खान उर्फ़ शेख बेलाल के पोस्टर जारी कर दिए गए हैं। युवती का रेप किए जाने के बाद उसकी हत्या की गई थी। हत्या आरोपित बिलाल पिठोरिया के चंदवे बस्ती का रहने वाला है।

जाँच में मृतका चान्हो दम्पति की बेटी पाई गई। दम्पति ने बताया था कि युवती ने बिलाल खान उर्फ़ शेख बेलाल से प्रेम विवाह किया था। जल्द ही दोनों में लड़ाई-झगड़े होने लगे। युवती ने पिठोरिया थाने में उसके विरुद्ध दहेज़ प्रताड़ना का मामला दर्ज कराया था। फिर मई 2020 में उसे गिरफ्तार किया गया था। फिर युवती अपने मायके में रहने लगी। इसके बाद उसकी दोस्ती खालिद से हुई, जो शादी में बदल गई।

खालिद पहले से शादीशुदा था। वो युवती को लेकर दिल्ली गया, लेकिन वहाँ दोनों में अनबन होने के कारण वो फिर वापस लौट आई थी। परिजनों ने आरोप लगाया था कि शेख बेलाल ही युवती का हत्यारा है। इससे पहले वो कुख्यात सरजा जावेद उर्फ़ बम्बइया की हत्या के मामले में भी जो जेल जा चुका है। उस पर आर्म्स एक्ट के कई मामले लंबित हैं। वो 2 महीने से फरार चल रहा है। पुलिस ने उसकी जल्द गिरफ़्तारी का आश्वासन दिया है। 

ओरमाँझी में लोगों ने विरोध-प्रदर्शन किया। इस दौरान गुस्साए लोगों ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के काफिले को राँची के किशोरगंज चौक के पास रोक दिया। वहाँ से गुजर रहे सीएम के काफिले को रास्‍ता बदल कर रवाना होना पड़ा था।

स्कूली किताबों से हटे मुगलों का फर्जी इतिहास: RSS संबंधी संगठनों ने की संसदीय समिति से सुधार की माँग

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े दक्षिणपंथी संगठन भारतीय शिक्षा मंडल, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास (SSUN), शिक्षाविद जेएस राजपूत और शंकर शरण ने बुधवार (जनवरी 13, 2021) को स्कूल की पाठ्यपुस्तक और पाठ्यक्रम में सुधारों पर चर्चा करने के लिए एक संसदीय पैनल से मुलाकात की। इस संगठन के प्रतिनिधियों ने NCERT द्वारा मुगलों के फर्जी महिमामंडन आदि ‘गैर-ऐतिहासिक दावों’ को पाठ्यक्रम से हटाने की भी माँग की और भारतीय इतिहास की महान महिलाओं की भूमिका को उजागर करने पर जोर दिया।।

दरअसल, यह खुलासा हाल ही में एक RTI के जरिए सामने आया था कि NCERT के पास कक्षा-12 के पाठ्यक्रम में शामिल किए गए उन दावों का कोई आधिकारिक स्रोत नहीं है, जिसमें बताया जाता है कि मुगलों ने नष्ट हो चुके मंदिरों का पुनर्निर्माण कराया था।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शिक्षा शाखा, विद्या भारती के पूर्व प्रमुख दीना नाथ बत्रा की अध्यक्षता वाले SSUN को मंगलवार (जनवरी 12, 2021) को शिक्षा, महिलाओं, बच्चों, युवाओं और खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति की बैठक में आमंत्रित किया गया था। बैठक में स्कूली शिक्षा, NCERT और CBSE विभाग के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। एनसीईआरटी के पूर्व निदेशक जेएस राजपूत, एनसीईआरटी के शंकर शरण, एसएसयूएन और आरएसएस से जुड़े भारतीय शिक्षा मंडल (बीएसएम) ने समिति के समक्ष अपना पक्ष रखा।

पैनल में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास (SSUN) ने कक्षा 11 की हिंदी पाठ्यपुस्तक ‘अंतराल’ में चित्रकार एमएफ हुसैन के एक अध्याय पर आपत्ति जताई। न्यास ने कहा कि छात्रों के लिए ऐसे व्यक्ति के जीवन का अध्ययन करना अनावश्यक है, जिस पर अश्लीलता को बढ़ावा देने और धार्मिक भावनाओं को अपमानित करने का आरोप लगा हो।

आरएसएस से जुड़े संगठन ने कक्षा 6 इतिहास की पाठ्यपुस्तक के अध्याय 5 में ‘वर्ण व्यवस्था’ पर दिए गए खंड पर भी आपत्ति जताई है, जिसमें कहा गया है कि ‘पंडितों ने लोगों को चार समूहों में विभाजित किया है, जिन्हें वर्ण कहा जाता है’ और दावा किया जाता है कि ‘पंडितों के कहने पर इन समूहों के वर्गीकरण का आधार उनके ‘जन्म’ को बनाया गया। न्यास ने पूछा कि क्या कक्षा 6 के छात्रों के मन में एक वर्ग के प्रति शत्रुता को बढ़ावा देना उचित है?

समाचार पत्र ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनावरण के बाद पाठ्यपुस्तकों की समीक्षा की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए विशेषज्ञों के विचार माँगे गए थे। वर्ष 2005 के बाद से पाठ्यपुस्तकों की कोई समीक्षा नहीं हुई है। इसलिए यह कार्य शुरू हो गया है और आने वाले दिनों में विशेषज्ञों और संगठनों के विचारों को सुना जाएगा। उन्होंने कहा, चूँकि यह एक सर्वदलीय संसदीय पैनल है, इसलिए इस सम्बन्ध में अलग-अलग मतों को सुना जाएगा।

शिक्षा पर संसदीय स्थायी समिति की बैठक में चर्चा किए गए मुद्दों में बोर्ड परीक्षा के लिए व्यापक प्रश्न बैंक के विचार के साथ-साथ स्कूलों को फिर से खोलने पर भी विचार किया गया। गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी के विधायक विनय सहस्रबुद्धे इस समिति के प्रमुख हैं।

स्कूल शिक्षा विभाग ने सदस्यों को सूचित किया कि एनसीईआरटी हमारे राष्ट्रीय नायकों और देश की घटनाओं के बारे में ‘गैर-ऐतिहासिक तथ्यों’ और ‘विकृतियों’ से जुडी तमाम शिकायतों का विश्लेषण करेगा और जाँच के लिए एक पैनल गठित करने जा रही है।

विवादित रहा है ‘मार्क्सवादी हाथों से लिखा’ गया भारत का इतिहास

नई शिक्षा नीति के उद्घाटन के बाद से ही स्कूलों में पढ़ाए जाने वाले पाठ्यक्रम और विषय निरंतर ही चर्चा का विषय रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी परंपरागत ‘मार्क्सवादी साहित्य’ की जगह वास्तविक तथ्यों को बच्चों के पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने की बात हमेशा से ही बहस का विषय रहा है और हाल ही के कुछ दिनों में यह तेज हुई है।

NCERT के अंतर्गत पढ़ाए जाने वाले विषय और उसके लेखकों के वामपंथी रुझानों पर अक्सर ही सवालिया निशान भी उठते आए हैं। ऐसा ही एक उदाहरण एक RTI के माध्यम से भी प्रकाश में आया है। इस RTI के जारी यह तथ्य सामने आया है कि जिन मुगलों का महिमाकरण हमारे पाठ्यक्रमों में अक्सर होता आया है, उसका कोई आधिकारिक स्रोत मौजूद ही नहीं है और यह एकदम काल्पनिक बात है।

ऐसे में, लोगों की माँग यही है कि स्कूलों के पाठ्यक्रम को नए नजरिए से लिखे जाने और समीक्षा की आवश्यकता रही है। नई शिक्षा नीति-2020 को कैबिनेट की मंज़ूरी मिलने के बाद लोग यही चाहते हैं कि नया पाठ्यक्रम तथ्यपरक हो और इसमें वामपंथी अजेंडे के लिए शून्य जगह रहे। इससे पहले, वर्ष 1986 में शिक्षा नीति लागू की गई थी और 1992 में इस नीति में कुछ संशोधन किए गए थे।

‘मंदिरों के पास धर्मांतरण को बढ़ावा देती ईसाई मिशनरी’ – चंद्रबाबू नायडू के बयान पर 13 जिलों के ईसाई नेताओं ने पार्टी छोड़ी

तेलुगु देशम पार्टी के क्रिश्चियन सेल के आंध्र प्रदेश स्थित 13 जिलों के ईसाई नेताओं ने विजयवाड़ा में इकट्ठा होकर बुधवार (13 जनवरी 2021) को पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया। इसकी वजह थी पार्टी के मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू का कथित विवादित बयान। इसके पहले पार्टी के वरिष्ठ अल्पसंख्यक नेता फिलिप सी टोचर (Philip C Tocher) ने भी अपने रास्ते अलग कर लिए थे। 

टीडीपी के प्रदेश अध्यक्ष किन्जरपू अट्चननायडू को अपना इस्तीफ़ा सौंपते हुए पूर्व विधायक टोचर ने लिखा, “बेहद दुःख के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि मैं पार्टी की सदस्यता से इस्तीफ़ा दे रहा हूँ। इसकी वजह चंद्रबाबू नायडू द्वारा ईसाई समुदाय के लिए दिया गया नफ़रत भरा बयान है। इस बयान की वजह से हमारे समुदाय के लोग तमाम तरह के सवाल खड़े कर रहे हैं।”

अल्पसंख्यक नेता फिलिप सी टोचर 1983 से ही पार्टी से जुड़े हुए थे और 2014 से 2019 के बीच टीडीपी के शासनकाल में बतौर एंग्लो इंडियन विधायक नामित किए गए थे। 

दरअसल पिछले कुछ समय के दौरान प्रदेश में मंदिरों और मूर्तियों पर हमला करने के तमाम मामले सामने आए थे। इस पर आंध्र प्रदेश की राज्य सरकार को काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था।

हिन्दू धार्मिक स्थलों पर हमलों के मुद्दे पर चंद्रबाबू नायडू ने भी विवादित बयान दिया था। रामतीर्थम दौरे पर एक जनसभा को संबोधित करते हुए नायडू ने कहा था कि ईसाई मिशनरी प्रदेश के तमाम बड़े मंदिरों के इर्द-गिर्द धर्मांतरण को बढ़ावा दे रही हैं। 

इस बयान के सुर्ख़ियों में आने पर प्रदेश के कई ईसाई नेताओं ने नायडू की जम कर आलोचना की। कुछ लोगों ने विशाखापट्टनम के ग्रेटर विशाखापट्टनम म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन स्थित महात्मा गाँधी की मूर्ति के नज़दीक विरोध प्रदर्शन करते हुए माँग उठाई थी कि चंद्रबाबू नायडू को अल्पसंख्यकों से माफ़ी माँगनी चाहिए।

विजयवाड़ा के दलित ईसाई नेता पेरिका वराप्रसाद राव ने यहाँ तक कहा कि नायडू ने राजनीति में अपना अस्तित्व बनाए रखने के लिए इस तरह का बयान दिया है। इसी तरह 2019 के चुनावों में टीडीपी का समर्थन करने वाले एक और अल्पसंख्यक नेता जॉन बेनी लिंगम ने कृष्णा जिले के एसपी को लिखा, “हमें इस बात का संदेह है कि नायडू अपने आदमियों की मदद से इन घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं और ईसाईयों को इसके लिए दोषी ठहरा रहे हैं।” 

टीडीपी क्रिस्चियन सेल के पूर्व प्रदेश संयोजक प्रवीण ने द न्यूज़ मिनट से बात करते हुए कहा, “प्रदेश में चर्च बहुत पहले समय से हैं, टीडीपी और वाईएसआरसीपी की सरकारों से भी पहले। उन्हें अब क्यों चर्चों से परेशानी हो रही है। हमें उनसे (नायडू) इस तरह के बयान की उम्मीद नहीं थी। बीते 30-35 सालों में उन्होंने ऐसा कुछ भी नहीं कहा था। अगर उनकी पार्टी ने इस तरह की बात पहले कभी कही होती तो हम उनके साथ इतने समय तक कभी नहीं रहते।”

इसके अलावा प्रवीण ने नायडू को ढोंगी भी कहा क्योंकि कुछ ही समय पहले वह धर्म निरपेक्ष नज़र आने की कोशिश में पादरियों से शुभकामनाएँ ले रहे थे और क्रिसमस मना रहे थे।            

10 रोहिंग्या मुस्लिम राजधानी ट्रेन में, 35000* रुपए का टिकट: रेलवे पुलिस ने सबको किया गिरफ्तार

रेलवे पुलिस ने बिहार के किशनगंज से लगभग 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशन पर 10 रोहिंग्या मुस्लिमों को गिरफ्तार किया। ये सभी बुधवार (13 जनवरी 2021) की दोपहर 02501 अगरतला-नई दिल्ली राजधानी स्पेशल ट्रेन से गिरफ्तार किए गए। इसमें 3 पुरुष, 2 महिला और 5 बच्चे शामिल हैं।

गिरफ्तार किए गए सारे रोहिंग्या मुस्लिम बांग्लादेश के कॉक्स बाज़ार स्थित कुटूपालंग शिविर से फरार हुए थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ इन सबकी गिरफ्तारी ट्रेन अधीक्षक की सक्रियता से संभव हो पाई।

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ नॉर्थ-ईस्ट फ्रंटियर रेलवे (एनएफ रेलवे) के चीफ पब्लिक रिलेशन ऑफिसर (सीपीआरओ) शुभानन चंद्रा ने कहा, “02501 अगरतला नई दिल्ली राजधानी स्पेशल ट्रेन में ट्रेन अधीक्षक गुवाहाटी की ड्यूटी थी। वह यात्रियों के टिकट की जाँच के लिए गुवाहाटी स्टेशन पर ट्रेन में सवार हुए थे। टिकट की जाँच के दौरान उन्हें ट्रेन के बी-7 कोच में यात्रा करने वाले कुछ यात्रियों के तौर-तरीके से संदेह हुआ।”

इसके बाद ट्रेन अधीक्षक ने उन संदिग्ध यात्रियों की जाँच के लिए रेलवे पुलिस को एक मेमो प्रेषित किया। यह जानकारी मिलने के बाद रेलवे पुलिस ने लगभग 1:40 बजे ट्रेन को न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशन पर जाँच के लिए रोका।

जाँच के दौरान दो पुरुष और तीन महिलाओं की नागरिकता संदेह के दायरे में नज़र आई। इसके बाद उन्हें न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशन पर ही उतार लिया गया। पूछताछ के दौरान उन्होंने खुलासा किया कि वह रोहिंग्या हैं और 11 जनवरी को अगरतला स्टेशन से ट्रेन पर सवार हुए थे। 

IRCTC की साइट पर जाएँगे तो आपको थर्ड एसी का टिकट 3540 रुपए का दिखाएगा। यानी 10 आदमियों का टिकट हुआ 35400 रुपए। एजेंट से टिकट करवाने पर यह ज्यादा ही लगा होगा, इसकी पूरी संभावना है।

यह सभी 10 जनवरी को बांग्लादेश के कोमिल्ला से भारत के सोनामुरा में दाखिल हुए थे। उन्होंने पूछताछ के दौरान यह भी बताया कि वह एजेंट की सहायता से ट्रेन पर सवार हुए थे। आगामी कार्रवाई के लिए गिरफ्तार किए गए रोहिंग्याओं को न्यू जलपाईगुड़ी जीआरपी के हवाले कर दिया गया है।   

MBBS छात्रा पूजा भारती की हत्या, हाथ-पाँव बाँध फेंका डैम में: झारखंड सरकार के खिलाफ गुस्सा

परीक्षा देने के लिए घर से बाहर निकली झारखण्ड के हजारीबाग मेडिकल कॉलेज की छात्रा पूजा भारती (Puja Bharti) कुछ दिन से लापता थी और बाद में उसकी लाश पतरातू डैम (Patratu Dam) से मंगलवार (जनवरी 12, 2021) सुबह बरामद हुई। 22 साल की पूजा भारती गोड्डा की रहने वाली थी। सोशल मीडिया पर लोग मेडिकल की छात्रा पूजा भारती के लिए #JusticeForPujaBharti हैशटैग के जरिए न्याय की माँग कर रहे हैं।

मृतका गोड्डा शहर थाना क्षेत्र में लोहियानगर की रहने वाली थी। पूजा के लापता होने के बाद परिवार और उसके दोस्तों ने इसकी शिकायत पुलिस के पास दर्ज की। खोजबीन के बाद पूजा का शव पास के ही पतरातू डैम में मिला। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि लड़की का शरीर बंधा हुआ था और उसे बाँध में डुबोकर बेरहमी से मार दिया गया।

समाचार पत्र ‘जागरण’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी यह तथ्य सामने आया है कि पूजा को जिन्दा ही डैम में फेंक दिया गया था। मेडिकल बोर्ड की मौजूदगी में हुए पोस्टमॉर्टम में पूजा भारती के पेट से पानी निकला है। डॉक्टर्स का कहना है कि मरे हुए व्यक्ति के पेट में पानी नहीं पहुँच पाता है, जिससे इस बात की पुष्टि होती है कि पूजा भारती को जिन्दा ही बाँधकर पानी में फेंक दिया गया।

पोस्टमॉर्टम में मृतका के शरीर पर कोई बाहरी चोट के निशान नहीं मिले हैं। हत्या से पहले बलात्कार की संभावना की जाँच के लिए सैम्पल भेजे जा चुके हैं और इस पर अभी रहस्य बना हुआ है।

पूजा भारती पूर्वे हत्या मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है और इसकी जाँच के लिए तीन जिलों की पुलिस सत्रह लोगों का दल बनाकर काम कर रही है। पूजा मेडिकल कॉलेज अस्पताल के गर्ल्स हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रही थी। उसने तीन साल कोटा में रहकर मेडिकल की तैयारी करने के बाद पिछले साल ही मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया था।

मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल एसके सिंह का कहना है कि लाश मिलने के एक दिन पहले, यानी सोमवार को सुबह 9:30 बजे से पूजा की प्रैक्टिकल परीक्षा थी, लेकिन वो उसमें शामिल नहीं हुई थी। जब पूजा के मोबाइल पर टीचर्स द्वारा फ़ोन किया गया तो मोबाइल स्विच ऑफ बताया गया। हालाँकि, एक खबर में यह बात भी सामने आई है कि मेडिकल कॉलेज के गेट पर पूजा भारती के सोमवार रात 10 बजे जाने की एंट्री मिली है।

उद्धव के मंत्री का दामाद समीर खान गिरफ्तार: ड्रग्स का है मामला, ससुर ने कहा था – ‘अर्णब गोस्वामी कर लेगा आत्महत्या’

एनसीपी नेता और महाराष्ट्र सरकार में अल्पसंख्यक मामलों और कौशल विकास मंत्री नवाब मलिक के दामाद समीर खान को एनसीबी (नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो) ने ड्रग्स मामले में गिरफ्तार कर लिया है। इसके पहले एनसीबी ने उन्हें ड्रग्स मामले में पूछताछ के लिए समन भेजा था।   

ड्रग्स और बॉलीवुड से जुड़े मामलों की जाँच के दौरान एनसीबी को यह पता चला कि इस मामले के एक आरोपित और समीर खान के बीच रुपयों का ऑनलाइन लेन-देन हुआ है। इस मामले में ब्रिटिश नागरिक करण सजनानी और दो अन्य आरोपितों को पिछले हफ्ते 200 किलो प्रतिबंधित ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया गया था।

सजनानी के साथ गिरफ्तार किए गए दो अन्य लोग राहिला फर्नीचरवाला और उसकी बहन शाइस्ता फर्नीचरवाला थी। राहिला फर्नीचरवाला एक्टिविस्ट और बॉलीवुड अभिनेत्री दिया मिर्ज़ा का मैनेजर भी रह चुका है। 

समीर खान और करण सजनानी के बीच लेन-देन गूगल पे पर हुआ था, जिसे लेकर एनसीबी का मानना है कि वह संभवतः ड्रग्स की खरीद के लिए हुआ था। इसके अलावा बुधवार (13 जनवरी 2021) को एनसीबी ने समीर खान को पूछताछ के लिए समन भेजा था। लंबी पूछताछ के बाद एनसीबी ने समीर खान को गिरफ्तार करने का फैसला लिया। 

मंगलवार को एनसीबी ने इस मामले में रामकुमार तिवारी को गिरफ्तार किया था, जो साउथ बॉम्बे स्थित मशहूर मुच्छड़ पनवल शॉप के मालिकों में से एक है, जिस पर अक्सर तमाम दिग्गज सेलिब्रेटी, व्यवसायी और औद्योगिक घरानों से जुड़े लोग नज़र आते हैं। एनसीबी ने उस पान शॉप के वेयरहाउस में ड्रग्स बरामद किया था। 

रामकुमार तिवारी गाँजा, ओजी कुश (OG Kush) और भाँग की तस्करी करते हुए पाया गया था, जिसमें कुछ का निर्यात अमेरिका से किया गया था। बुधवार को जिला अदालत ने रामकुमार को 15000 रुपए का जुर्माना देने के बाद जमानत पर रिहा किया था। 

पिछले साल अक्टूबर महीने के दौरान महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और एनसीपी नेता ने दावा किया था कि रिपब्लिक टीवी के एडिटर इन चीफ अर्णब गोस्वामी खुद पर लगे आरोपों और महाराष्ट्र सरकार द्वारा दर्ज कराए गए मामलों से निराश होकर आत्महत्या कर लेंगे।

एक स्टिंग ऑपरेशन में नवाब मलिक ने अर्णब के बारे में कहा था, “इस आदमी को बहुत परेशानियाँ मिलने वाली हैं। मुझे इस बात से डर लगता है कि ये आदमी खुद उस ज़ोन में चला जाएगा। ये पागलपन है और ये फोबिया बन जाता है। यही फोबिया एक समय के बाद दिवालिएपन में तब्दील हो जाएगा।”