स्पेन के विटोरिया में मर्सिडिज की फैक्टरी है। 31 दिसंबर की रात को इस फैक्टरी में लगभग 44 करोड़ रुपए (6 मिलियन डॉलर का) की गाड़ियों को नुकसान हुआ। जिम्मेदार था अकेला एक पूर्व कर्मचारी।
38 साल के कर्मचारी को मर्सिडिज ने काम से निकाल दिया था। वो गुस्से में था। बदला लेना चाह रहा था। इसके लिए उसने एक कंस्ट्रक्शन साइट से कैटरपिलर बैकहो (Caterpillar Backhoe, एक तरह का JCB) चुराया। 21 किलोमीटर तक उसे चलाते हुए विटोरिया स्थित मर्सिडिज की फैक्टरी पहुँचा।
31 दिसंबर की रात थी, समय था करीब 1 बज कर कुछ मिनट। फैक्टरी का गेट बंद था। JCB से पहले उसने गेट को उखाड़ दिया। फिर वो फैक्टरी के पार्किंग लॉट (मतलब उसे यह सब पता था कि नई-नवेली गाड़ियाँ कहाँ रखी जाती हैं) की ओर बढ़ा। यहाँ उसे Mercedes EQV (V-Class) गाड़ियाँ दिखीं। एक-एक कर वो 69 गाड़ियों पर JCB चढ़ाता गया।
फैक्टरी में जो सुरक्षाकर्मी थे, उन्होंने वॉर्निंग शॉट दाग कर किसी तरह से 38 साल के पूर्व कर्मचारी को काबू में किया। इसके बाद उसे पुलिस को सौंप दिया गया।
पुलिस ने बताया कि आरोपित ने मर्सिडिज की फैक्टरी तक पहुँचने के लिए चुराई गई JCB से 21 किलोमीटर की दूरी तय की। लेकिन इस दौरान भी वो सड़क किनारे गाड़ियों को धक्के मार रहा था। आश्चर्यजनक यह कि उसका फोकस यहाँ भी मर्सिडिज ब्रांड की गाड़ियों को क्षति पहुँचाना ही था।
मर्सिडिज फैक्टरी के पार्किंग लॉट में गाड़ियों को नुकसान पहुँचाने के बाद वो असेंबली लाइन में घुस कर वहाँ ज्यादा तबाही मचाने वाला था। लेकिन एक कर्मचारी की मुस्तैदी से उसका यह प्लान फेल हो गया। फिलहाल स्थानीय पुलिस उससे पूछताछ कर रही है।
जम्मू कश्मीर में पहले आतंकियों के मारे जाने के बाद उनके जनाजे निकालने का चलन चल पड़ा था, जिसके बाद सरकार ने नए नियम बना कर आतंकियों के शवों को उनके गृह इलाकों से दूर दफनाने की प्रक्रिया चालू की, ताकि उन्हें हीरो न बनाया जा सके। आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद ऐसा ही किया गया था। पुलवामा के एक आतंकी अतहर के मारे जाने के बाद भी उसके अब्बा मुस्ताक अहमद को वहाँ से दूर दफनाने को कहा गया। अब जम्मू कश्मीर पुलिस ने एनकाउंटर का वीडियो भी जारी कर दिया है।
मारे गए आतंकी का अब्बा लगातार सशस्त्र बलों पर फेक एनकाउंटर का आरोप लगाते हुए कह रहा था कि उसके बेटे के मारे जाने के बाद अब वो भी मर चुका है, इसीलिए या तो उसे पुलवामा में उसके गाँव में ही बेटे को दफनाने की इजाजत मिले, नहीं तो उसे भी अपने बेटे के बगल में दफना दिया जाए। बुधवार (दिसंबर 30-31) की रात को अतहर सहित 3 आतंकियों को श्रीनगर में हुए एक मुठभेड़ में मार गिराया गया था।
भारतीय सेना को मिले इनपुट्स के आधार पर ये कार्रवाई की गई, जिसमें CRPF और पुलिस के जवान भी शामिल थे। सेना को सूचना मिली थी कि ये आतंकी किसी हमले की साजिश रच रहे थे। ये सभी कुख्यात आतंकियों की सूची में नहीं थे, लेकिन लगातार सक्रिय थे। उन्हें आत्मसमर्पण करने का भी मौका दिया गया, लेकिन वो लगातार फायरिंग करते रहे। अब तीनों ही आतंकियों की लाशों को एक साथ दफना दिया गया है।
उनमें से एक के रिश्तेदार जम्मू कश्मीर पुलिस में हैं। उनके परिवार दावा कर रहे हैं कि ये फेक एनकाउंटर है। पुलिस ने इस मामले में जाँच का आश्वासन दिया है। मृत आतंकियों में अजाज़ अहमद पुलवामा का है और एक हेड कॉन्स्टेबल का बेटा है। वो और अतहर एक-दूसरे को जानते थे। अजाज़ के अब्बा मोहम्मद मकबूल का कहना है कि वो सुरक्षा एजेंसियों पर भरोसा नहीं कर सकते। मारा गया तीसरा आतंकी जुबैर अहमद सोपियाँ का था।
अब जम्मू कश्मीर पुलिस ने इस एनकाउंटर का वीडियो भी सोमवार को जारी कर दिया। इसमें पुलिस के जवान माइक पर अनाउंसमेंट करते हुए देखा जा सकते हैं। वो तीनों आतंकियों को लगातार आत्मसमर्पण करने के लिए कह रहे हैं। दूसरी तरफ से इसका कोई जवाब नहीं दिया जाता है। होकरसर में तीनों आतंकियों को घेर लिया गया था, जिसके बाद उन्हें आश्वस्त किया गया था कि अगर उन्होंने सरेंडर कर दिया तो कोई नुकसान नहीं पहुँचाया जाएगा, लेकिन वो नहीं माने।
भारतीय सेना ने बताया है कि तीनों आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई की गई। सोमवार को इन आतंकियों के परिजन, रिश्तेदार और पड़ोसियों को लेकर श्रीनगर पहुँचे थे, जहाँ उन्होंने विरोध प्रदर्शन किया। अतहर के अब्बा मुस्ताक ने पूछा कि क्या भारत के लोग उसकी बात नहीं सुन रहे? उसने दावा किया कि उसका बेटा मात्र 16 साल का था और उसे अब न्याय चाहिए। उसने ये भी कहा कि उसकी भावनाओं को समझने वाला कोई नहीं है।
वहीं जुबैर का भाई भी पुलिस में कॉन्स्टेबल है। उसका नाम मोहम्मद शरीफ लोन है। उसने दावा किया कि उस दिन दोपहर 2 बजे तक उसका भाई घर में ही था, ऐसे में मात्र 2 घंटे के भीतर ही वो आतंकी कैसे बन गया? उसने दावा किया कि उसका भाई कंस्ट्रक्शन के बिजनेस में है। अब वीडियो जारी किए जाने के बाद परिजन कह रहे हैं कि उसमें अंदर से फायरिंग की आवाज़ नहीं आ रही है, इसीलिए ये भरोसे के लायक नहीं।
पुलिस ने जो 2 वीडियो जारी किए हैं, उनमें से एक दिसंबर 29 की शाम का है, जबकि एक उसके अगले दिन की सुबह का है। दोनों में ही पुलिस उन तीनों आतंकियों को चेतावनी देती ही दिख रही है, लेकिन उधर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आती है। आतंकियों ने जिस घर को अपना अड्डा बनाया था, उसे चारों तरफ से घेर लिया गया था। इतनी देर तक चेताए जाने के बावजूद उन्होंने फायरिंग की, जिसके बाद उन्हें मार गिराया गया।
जानकारी देते चलें कि जम्मू-कश्मीर में कट्टरपंथियों द्वारा सेना और सुरक्षबलों पर होने वाली पत्थरबाजी की घटनाओं में साल 2016 से लेकर साल 2020 तक 90% की गिरावट दर्ज की गई है। साल 2019 की तुलना में इस साल हुई पत्थरबाजी की घटनाओं में 87.13% की गिरावट हुई है। साल 2019 में, पत्थरबाजी की 1,999 घटनाएँ हुईं थीं, जिनमें से 1,193 बार यह पत्थरबाजी केंद्र सरकार द्वारा साल 2019 के अगस्त माह में जम्मू और कश्मीर के विशेष दर्जे को रद्द करने की घोषणा के बाद हुईं।
मुंबई में अभिनेता सलमान खान के दोनों छोटे भाइयों अरबाज खान और सोहैल खान के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। इन दोनों के अलावा सोहैल खान के बेटे निर्वाण खान के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज हुई है। आरोप है कि इन तीनों ने कोरोना वायरस संक्रमण के आलोक में जारी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया है। बृहन्मुम्बई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने ये FIR दर्ज करवाई है। तीनों आरोपित हाल ही में दुबई से लौटे हैं।
FIR के अनुसार, अरबाज, निर्वाण और सोहैल खान दिसंबर 25, 2020 को दुबई से लौटे। इसके बाद उन्हें निर्देश दिया गया कि वो एक होटल में क्वारंटाइन हों। लेकिन, उन्होंने प्रशासन के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करते हुए इसे नहीं माना। तीनों सीधे अपने घर चले गए। नियम बनाया गया है कि UK और UAE से आने वाले सभी लोगों को अनिवार्य रूप से 7 दिन के लिए क्वारंटाइन में रहना है।
कोरोना वायरस के नए खतरनाक स्ट्रेन के सामने आने के बाद ये निर्देश जारी किए गए। चूँकि ये कोविड-19 संक्रमण से 70% ज्यादा खतरनाक है, इसीलिए भारत में यूके जैसी स्थिति न आने देने के लिए सरकार और प्रशासन पहले से ही सतर्क है। सोमवार (जनवरी 4, 2021) को महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने जानकारी दी है कि यूके से लौटने वाले 8 लोगों के नए स्ट्रेन से संक्रमित होने की सूचना मिली है।
मुंबई पुलिस के प्रवक्ता और डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (ऑपरेशन) चैतन्य सिरीप्रोलु ने बताया कि इन तीनों के खिलाफ IPC की धारा 188 (लोक सेवक द्वारा सम्यक् रूप से प्रख्यापित आदेश की अवज्ञा), धारा 269 (उपेक्षापूर्ण कार्य जिससे जीवन के लिए संकटपूर्ण रोग का संक्रम फैलना संभाव्य हो) और महामारी अधिनियम के धारा 3 (विहित प्रक्रिया का उल्लंघन करने) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
Big breaking – @mybmc registers FIR against actor Arbaaz Khan,Sohail Khan and his son Nirvaan khan for violating COVID norms.They came to Mumbai on 25th Dec from UAE. They gave false undertaking to quarantine themselves at Hotel Taj Lands End but went to their Bandra home instead pic.twitter.com/RsKdduArzN
इनमें से 5 मुंबई के हैं, जबकि ठाणे, मीरा भायंदर और पुणे के एक-एक हैं। इन आठों लोगों के सभी संपर्कों को ट्रेस कर के उन्हें क्वारंटाइन किए जाने की कोशिश जारी है। महाराष्ट्र के CMO ने कहा है कि विदेश से मुंबई आने वाले लोग राज्य से बाहर के एयरपोर्ट पर उतर रहे हैं और सड़क मार्ग से मुंबई आ रहे हैं, ताकि उन्हें क्वारंटाइन नहीं किया जा सके। पूरे देश में अब तक 38 लोगों के कोरोना के नए स्ट्रेन से संक्रमित होने की सूचना है।
वहीं अब FIR दर्ज होने के बाद तीनों को मुम्बई के बांद्रा स्थित ताज लैंड्स एंड होटल में क्वारंटाइन कर दिया गया है। बांद्रा के पाली हिल पर ही इन तीनों के घर हैं और ये होटल उनके घरों के एकदम करीब है। अरबाज, सोहैल और निर्वाण उसी इलाके में अलग-अलग घरों में रहते हैं। FIR दर्ज करवाने वाले BMC अधिकारी संजय फुंदे ने बताया कि तीनों को रात के 10 बजे ही क्वारंटाइन कर दिया गया। फ़िलहाल वो एक सप्ताह वहाँ रहेंगे, फिर आगे का निर्णय लिया जाएगा। सुशांत और जिया खान के मामले में भी सलमान खान का नाम विभिन्न कारणों से उछला था।
चीन ने दो महामारी दी। पहली- कोरोना, जिसके टीकाकरण की तैयारियाँ चल रही है। दूसरी- टिकटॉक, जिसका टीकाकरण भारत सरकार ने जून 2020 में ही कर दिया था। टिकटॉक पर बहुत कुछ परोसा गया, कभी महिलाओं पर एसिड फेंकने का वीडियो तो कभी आतंकवाद की मानसिकता का पुरजोर प्रचार। ऐसा करने वाले ‘सौभाग्य’ से कोई और नहीं बल्कि शांति प्रिय समुदाय के लोग थे। इन तमाम मोमबत्ती जैसे बाल वाले ‘मज़हबी डूड्स’ की सूची में एक नाम है फैज़ल शेख उर्फ़ फैजू का।
ओटीटी प्लेटफॉर्म (OTT Platform) ऑल्ट बालाजी एक टीवी सीरीज़ लेकर आने वाला है। नाम है बैंग बैंग (Bang Baang)। इसमें नज़र कौन आएगा? वही फैज़ल शेख। कंटेंट की आड़ में फूहड़ता और उन्माद फैलाने वाला नाम। फैज़ल की अपार ‘लोकप्रियता’ का अनुमान इस तथ्य के आधार पर ही लगा लीजिए कि 30 अगस्त 2020 को इस टीवी सीरीज़ का ट्रेलर/टीज़र जारी किया गया था। उसे अभी तक लगभग 7.6 लाख लोग देख चुके हैं लेकिन देखने वाले उसे पसंद करें ऐसा ज़रूरी नहीं।
वीडियो को अभी तक लगभग 1.20 लाख लोग नापसंद (dislike) कर चुके हैं और सिर्फ 42 हज़ार लोग पसंद (like) करते हैं। इससे आपके लिए समझना आसान हो गया होगा कि दर्शक उस टीवी सीरीज़ के रिलीज़ होने की कितनी बेताबी से प्रतीक्षा कर रहे हैं। रिलीज़ होने के बाद टीवी सीरीज़ कितनी बड़ी ब्लॉकबस्टर साबित होने वाली है (शायद सड़क 2 की रेटिंग को भी पीछे छोड़ दे)।
इसके बावजूद फैज़ल शेख की लोकप्रियता पर संदेह बचा हो तो मज़हबी डूड के ‘यूटठूब चैनल’ पर टहल आइए। जहाँ नेटिज़न्स dislikes की संख्या को लाखों में बनाए रखने के लिए हाजिरी लगाते हैं। एक दौर था जब हर यूट्यूब क्रियेटरर्स के लिए फैज़ल शेख किसी ‘बेल आइकन’ से कम नहीं था। फैज़ल शेख की मज़हबी रचनात्मकता यहीं ख़त्म नहीं होती है।
एक वीडियो है जो गूगल से लेकर यूट्यूब तक कहीं भी खोजने पर बेहद सरलता से मिल जाता है। उस वीडियो में फैज़ल शेख और मोमबत्ती जैसे बाल वाले ‘मज़हबी डूड’ आतंकवादी मानसिकता को बढ़ावा देते हैं। दुर्भाग्य से यह वीडियो कहीं और नहीं, बल्कि चीन के तकनीकी वायरस ‘टिकटॉक’ पर साझा किया गया था।
समय-समय पर जनता बीच सड़क पर इनकी क्षणिक ‘क्रियेटिविट’ के लिए इन्हें भरपूर प्रसाद भी देती है। लेकिन इनकी पूँछ इनके बाल हैं, सीधे नहीं होते हैं। ध्यान रहे कि टिकटॉक वही मंच है जिस पर एसिड अटैक को बढ़ावा देने का वीडियो डाला गया था और डालने वाला कौन? फैज़ल सिद्दकी! जो खुद को ‘सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर’ कहता है। यही नहीं टिकटॉक पर रेप, पुलिस पर हमले, यौन शोषण, आतंकवाद और नस्लभेद को बढ़ावा देने वाले वीडियो साझा किए गए थे।
उसी टिकटॉक से स्टार बना है फैज़ल शेख, जो खुद आतंकवादी मानसिकता को बढ़ावा देता है। जनता ऐसे चेहरों को पहचानने में देर नहीं करती है शायद इसलिए इसकी आने वाली टीवी सीरीज़ पर प्यार से ज़्यादा नफ़रत है। अफ़सोस ऐसे मज़हबी डूड्स को ‘स्टार’ बनाने की कवायद चल रही है। खैर जनता कूल है समय पर क्रांति करना जानती है, जब ट्रेलर पर इतना प्यार लुटाया तो सीरीज़ पर भी नए रिकॉर्ड बनाएगी।
कोरोना वैक्सीन अब कुछ देशों में उपलब्ध है और भारत अगले कुछ हफ्तों में टीकाकरण कार्यक्रम को शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इसके साथ ही, वैक्सीन को लेकर कई प्रकार की कॉन्सपिरेसी थ्योरी और फर्जी सूचनाओं का बाजार भी गर्म है।
दावा: लिंग में वैक्सीन का इंजेक्शन लगाने के पक्ष में हैं डॉक्टर्स
हाल ही में जो एक सबसे विचित्र दावा कोरोना वैक्सीन को लेकर सामने आया है, उसके अनुसार, संक्रमित पुरुषों में कोरोना का टीका पेनिस (लिंग) में लगाया जाएगा। एक ‘मीम’ को ‘वैज्ञानिक खोज’ बताते हुए सोशल मीडिया पर बड़ी मात्रा में शेयर किया जा रहा है। इसके अनुसार, “संक्रमित पुरुषों में वैक्सीन लिंग से होकर पूरे शरीर में जल्दी से फैलती है।”
इस पोस्टर में यह भी दावा किया गया है कि ये ‘तथ्य’ कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के नतीजों पर आधारित हैं, जिसमें एक अध्ययन के लिए 1,500 पुरुष शामिल किए गए और उन्हें वैक्सीन का इंजेक्शन लगाया गया।
ट्विटर पर @RoflIndian ने इस दावे का खंडन किया है। उन्होंने कहा कि शेयर किए जा रहे ‘मीम’ में नजर आ रहे डॉक्टर का नाम डॉ मोहित कुमार अर्डेसाना (Mohitkumar Ardesana) हैं, जो कि कैलिफोर्निया के क्लेयरमोंट मेडिकल सेंटर में चिकित्सक हैं। दाईं ओर की तस्वीर मैरी एन जपलैक (Mary Ann Zapalac) द्वारा बनाया गया ‘पेनाइल सेल्फ-इंजेक्शन’ का एक मेडिकल स्केच है।
Fake news. The doctor in the picture is Dr Mohitkumar Ardesana, MD, a primary care physician of Claremont Medical Centre, California. The picture on the right is a medical sketch of penile self injection by celebrated illustrator Mary Ann Zapalac. The rest is all bull crap. https://t.co/haSoHaTI4X
ऑपइंडिया द्वारा तस्वीरों और लिखे गए संदेश का सत्यापन
हमने RoflIndian द्वारा दी गई जानकारी को प्रमाणित करने का फैसला किया और हमें यही जानकारी मिली। जब हमने ‘मोहित कुमार अर्डेसाना’ नाम सर्च किया, तो हम डॉ मोहित की ‘लिंक्डइन’ (LinkedIn) प्रोफाइल तक पहुँचे। उनकी इस प्रोफ़ाइल से पता चलता है कि वह वर्तमान में ब्रुकलिन, न्यूयॉर्क के क्लेयरमोंट मेडिकल सेंटर में चिकित्सक के पद पर कार्यरत हैं।
डॉ मोहित का LinkedIn प्रोफाइल
हमने वायरल मीम में इस्तेमाल की गई उनकी तस्वीर को भी तलाश किया। उसी तस्वीर का प्रयोग क्लेयरमोंट मेडिकल सेंटर के इंस्टाग्राम प्रोफ़ाइल में भी किया गया है।
अस्पताल के इंस्टाग्राम प्रोफाइल पर भी उसी एक तस्वीर का इस्तेमाल किया गया हैरिवर्स इमेज सर्च से यह पुष्टि हुई कि ये डॉ मोहित ही हैं
अब दूसरी तस्वीर की बात करते हैं, जिसने कई लोगों को हैरान कर दिया है। जब हमने तस्वीर को रिवर्स सर्च किया, तो हमें कुछ और जानकारियाँ भी मिलीं। यह एक प्रसिद्ध इलस्ट्रेटर मैरी एन ज़पलैक ( Mary Ann Zapalac) द्वारा बनाया गया था, जिन्होंने पिछले 27 वर्षों में कई मेडिकल प्रोजेक्ट्स पर काम किया है। ज़पलैक ने डेल्लास में टेक्सास यूनिवर्सिटी के साउथवेस्टर्न मेडिकल सेंटर से मेडिकल इलस्ट्रेशन में मास्टर्स किया है और वर्ष 1993 से मेडिकल इलस्ट्रेटर के रूप में अपना व्यवसाय चला रही हैं।
मैरी का LinkedIn प्रोफाइल
जिस चित्र को इस मीम में इस्तेमाल कर भ्रम फैलाया जा रहा है, वह पेनाइल इंजेक्शन थेरेपी के बारे में बताती है जोलिंग सम्बन्धी समस्या के इलाज के लिए एक प्रभावी तरीका है। ये इंजेक्शन आमतौर पर रोगियों द्वारा स्वयं लगाए जाते हैं, जो लिंग में रक्त प्रवाह को बेहतर बनाने में मदद करता, जिसके परिणामस्वरूप लिंग में तनाव होता है। जाहिर तौर पर, इस तस्वीर का कोरोना वायरस वैक्सीन से कोई संबंध नहीं है।
रिवर्स इमेज सर्च में इलस्ट्रेशन के निर्माता की जानकारी मिली हैं
साथ ही, 1,500 आदमियों के लिंग में कोविड -19 वैक्सीन का इंजेक्शन लगाकर कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय ने कोई भी दावा नहीं किया है। विश्वविद्यालय ने ऐसा कोई शोध नहीं किया और यह वायरल इमेज में किया गया दावा एकदम फर्जी और फेक है।
झारखंड के राँची में एक युवती की सिरकटी लाश मिलने से हड़कंप मच गया। मामला ओरमांझी थाना इलाके के जिराबार जंगल का है। महिला का शव नग्न अवस्था में मिला है और सिर की तलाश जारी है। पुलिस की टीम लगातार जाँच में जुटी हुई है। इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी है। खोजी कुत्तों की भी मदद ली जा रही है। फिलहाल महिला का सिर का अभी तक पता नहीं चला है।
ओरमांझी पुलिस का कहना है कि आसपास के लोगों को मौके पर बुलाकर शव दिखाया गया, लेकिन कोई सुराग नहीं मिल पाया। पुलिस आशंका जता रही है कि युवती के साथ दुष्कर्म करने के बाद अपराधियों ने गला रेत कर उसकी हत्या कर दी। युवती के शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं मिला। अपराधियों ने युवती का गुप्तांग भी काट दिया है।
A naked & beheaded body of a female was recovered from Ormanjhi. Identification is yet to be done. Body has been sent for autopsy. Whether she was sexually assaulted or not will be ascertained after postmortem. Investigation is going on: Naushad Alam, SP, Ranchi Rural #Jharkhand
राँची के पुलिस अधीक्षक नौशाद आलम ने बताया, “निर्वस्त्र अवस्था में महिला की सिर कटी लाश मिली है। युवती की पहचान अभी नहीं की जा सकी है। डेड बॉडी को ऑटोप्सी के लिए भेजा गया है। पोस्टमार्टम के बाद ही खुलासा हो पाएगा कि युवती के साथ दुष्कर्म हुआ है या नहीं। मामले में जाँच जारी है।”
वहीं कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि पुलिस को घटनास्थल पर खाना बनाने के लिए चूल्हा और कई बीयर की खाली बोतलें भी मिली है। इससे भी अनुमान लगाया जा रहा है कि युवती के साथ दुष्कर्म कर उसकी हत्या की गई है और साक्ष्य छुपाने की नीयत से उसके कपड़े और सर को गायब कर दिया गया।
युवती के शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं मिला। शव की पहचान नहीं हो पाए इस वजह से सिर को कहीं और ले जाकर फेंक दिया गया होगा। हालाँकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही दुष्कर्म की पुष्टि हो जाएगी। पुलिस घटना की हर एंगल से जाँच कर रही है।
इस संबंध में सिल्ली के डीएसपी चंद्रशेखर ने बताया कि एक हफ्ते के अंदर राँची में जितनी भी महिलाओं और युवतियों के लापता होने का मामला दर्ज हुआ है, उनकी तस्वीर और विस्तृत जानकारी मँगाई जा रही है।
शव के डीएनए को भी सुरक्षित रखवाया गया है, जल्द ही युवती की पहचान हो जाने और घटना को अंजाम देने वाले आरोपितों की शिनाख्त हो जाने की संभावना है। बताया जा रहा है कि घटनास्थल के पास नदी है। युवती की हत्या करने के बाद अपराधियों ने घटनास्थल पर पानी डाल दिया था ताकि खून और पुलिस को साक्ष्य नहीं मिल पाए।
ऐसी आशंका भी जताई जा रही कि करीब 19 से 20 वर्षीय युवती की हत्या कहीं और करने के बाद शव को जंगल में लाकर फेंक दिया गया। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुँची। जाँच में महिला का शव पूरी तरह से नग्न अवस्था में मिला।
पुलिस इस मामले में सीसीटीवी का फुटेज देखकर और घटनास्थल का कॉल डंप निकाल अपराधियों तक पहुँचने का प्रयास कर रही है। पुलिस कॉल डंप के सहारे इस बात का पता लगाने का प्रयास कर रही है कि घटनास्थल पर कौन-कौन से मोबाइलधारक मौजूद थे। एसएसपी सुरेंद्र झा का कहना है कि अपराधियों के द्वारा बड़ी घटना को अंजाम दिया गया है। पुलिस हर हाल में अपराधियों को गिरफ्तार करेगी।
ओरमांझी में रविवार (जनवरी 03, 2021) को मिले युवती के शव के विरोध में लोगाें ने किशोरगंज चौक पर सोमवार (जनवरी 4, 2020) को विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान गुस्साए लोगों ने जमकर प्रदर्शन किया। उन्होंने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के काफिले को राँची के किशोरगंज चौक के पास रोक दिया। वहाँ से गुजर रहे सीएम के कारकेड को रोकने का प्रयास किया। सुरक्षा के मद्देनजर सीएम का काफिला रास्ता बदलकर रवाना हुआ।
केरल की वामपंथी सरकार को आर्थोडॉक्स चर्च ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है। मुख्यमंत्री पी विजयन के तानाशाही रवैए पर तंज कसते हुए कहा है कि केरल में कम्युनिस्ट पार्टी के फासीवादी शासन को अनुमति नहीं दी जा सकती।
चर्च के मीडिया प्रमुख डॉ. गिवर्गीस मार यूलिओस मेथ्रोपोलिथ ने कहा कि मुख्यमंत्री का राजनीतिक संदेश सीपीआईएम के पार्टी कार्यालयों के लिए होना चाहिए, न कि ऑर्थोडॉक्स चर्च के लिए। उन्होंने कहा कि विजयन को राज्य में सीएम का पद दिया गया है और अगर वह चाहते हैं कि उन्हें दिया गया सम्मान बरकरार रहे तो उन्हें चर्च से जुड़े मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
ऑर्थोडॉक्स चर्च के मीडिया प्रमुख ने कहा, “मुख्यमंत्री को केवल पार्टी के स्थानीय कार्यालय में राजनीतिक प्रतिक्रिया देने की जरूरत है। अगर वह चर्च के साथ सम्मान के साथ व्यवहार करते हैं तो यह उनके लिए फायदेमंद होगा।”
जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री ने एक पादरी से ऑर्थोडॉक्स चर्च और जैकबाइट चर्च के बीच विवाद एवं प्रवेश के बारे में सवाल पूछा था। इसकी जह से ऑर्थोडॉक्स चर्च मीडिया प्रमुख उत्तेजित थे। डॉ. गिवर्गीस ने सीएम को फटकारते हुए कहा, “हम केरल के मुख्यमंत्री के गुलाम नहीं हैं।” उन्होंने आगे कहा कि पिनाराई विजयन को चर्च के साथ व्यवहार करते समय शालीनता दिखानी चाहिए।
चर्च ने विजयन पर कथित तौर पर झूठ बोलने और पादरियों की अखंडता पर सवाल उठाने का आरोप लगाया। मीडिया प्रमुख ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला उनकी तरफ था और विवादित चर्चों को जब्त करना और उन्हें सौंपना राज्य सरकार की जिम्मेदारी थी। उन्होंने यह भी कहा कि चर्च का निष्कासन अदालत के आदेशों के अनुसार है और यह राज्य सरकार की मंशा के अनुसार नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि मुख्यमंत्री को कभी भी गलत धारणा नहीं बनानी चाहिए कि चर्चा के माध्यम से अदालत के फैसले से ऊपर जाया जा सकता है।
रुबीना सुलेमान मेमन को बॉम्बे हाई कोर्ट ने 31 दिसंबर 2020 को पेरोल पर जेल से बाहर जाने की इजाजत दे दी। उसने बेटी की शादी का हवाला देते हुए पेरोल माँगी थी। 1993 में मुंबई में हुए धमाकों में रुबीना उम्रकैद की सजा काट रही है। 8 जनवरी 2021 को उसकी बेटी की शादी होनी है।
न्यायाधीश एसएस शिंदे और न्यायाधीश अभय आहूजा की पीठ ने बेटी के मानवाधिकारों को मद्देनज़र रखते हुए पैरोल की अनुमति दी। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा, “पहले बताए गए हालातों और बेटी के मानवाधिकारों को देखते हुए हम पेरोल याचिका स्वीकार कर रहे हैं।”
Bombay High Court on 31st December allowed 6 days parole to 1993 Mumbai Blasts convict Rubina Suleman Memon for her daughter’s marriage in Mumbai on 8th Jan.
Rubina was convicted by Special TADA court for life imprisonment in 2006 & had been in jail for 13 years.
रुबीना मेमन ने यरवदा सेंट्रल जेल में पेरोल के लिए आवदेन किया था। लेकिन अधिकारियों ने इस पर कोई फैसला नहीं लिया। इसके बाद उसने हाईकोर्ट में अर्जी डाली। जब हाईकोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई तब पुलिस ने अदालत को बताया कि 2 दिन की पेरोल दी गई है। इसके अलावा पेरोल पर रिहाई के पहले पुलिस बंदोबस्त का भुगतान किया जाना भी ज़रूरी है। न्यायालय ने पुलिस का पक्ष सुनने के बाद मामले की सुनवाई 31 दिसंबर 2020 को तय की थी।
31 दिसंबर को रुबीना की वकील फरहाना ने निवेदन किया था कि अदालत रुबीना को अपनी बेटी की शादी में शामिल होने के लिए कम से कम सात दिन की पेरोल दे। अदालत के सामने ये दलील भी पेश की गई कि 13 साल के कारावास में रुबीना को कभी पेरोल नहीं दी गई। अदालत ने जेल के भीतर रुबीना के व्यवहार की जानकारी लेते हुए उसे 6-11 जनवरी तक पेरोल की अनुमति दी। रुबीना को पेरोल पर रिहाई से पहले पुणे के पुलिस मुख्यालय में 1 लाख रुपए भी जमा करने होंगे।
कौन है रुबीना मेमन?
रुबीना मेमन 1993 मुंबई बम धमाकों के मामले में दोषी है। फ़िलहाल वह यरवदा सेंट्रल जेल में आजीवन कारावास की सज़ा भुगत रही है। इन बम धमाकों में 257 लोगों की जान गई थी और लगभग 700 लोग घायल हुए थे। वह इस मामले के मुख्य आरोपित टाइगर मेमन की भाभी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ टाइगर मेमन फ़िलहाल पाकिस्तान में छुपा हुआ है। 2006 में रुबीना को ‘आतंकवादी और विघटनकारी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम’ (TADA) के तहत दोषी पाया गया था।
2015 में अदालत ने रुबीना की कुछ दिनों के अवकाश की याचिका खारिज की थी। ऐसा करते हुए हाईकोर्ट ने कहा था, “अगर उसे (रुबीना) को रिहा किया जाता है जो काफी लोग उससे मिलने के लिए आएँगे। इसकी वजह से क़ानून-व्यवस्था के लिए समस्या खड़ी होगी। ख़ास कर इस बात को ध्यान में रखते हुए कि याकूब मेमन की अंतिम यात्रा में किस तरह लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई थी।”
फैक्ट चेक के नाम पर इस्लामी संस्थाओं, मजहबी मुल्ला-मौलवियों और कोरोना वायरस महामारी की दहशत के बीच यहाँ-वहाँ थूकने वाले तबलीगियों को क्लीन चिट देने वाली वेबसाइट ‘ऑल्ट न्यूज़’ के सह संस्थापक मोहम्मद जुबैर ने एक बार फिर अपने ट्विटर अकाउंट से अपना ‘पाकिस्तान प्रेम’ जगजाहिर किया है।
दरअसल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सूचना सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी ने सोमवार (जनवरी 04, 2021) को ट्विटर पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें अल्लामा कौकब नूरानी नाम का एक मौलवी, कोरोना वायरस की वैक्सीन को लेकर बेहद भ्रामक जानकारी और अफवाह फैलाते हुए देखा जा सकता है।
नूरानी ने इस वीडियो में इतनी वाहियात बातें कही हैं कि इन्हें अगर कोरोना वायरस खुद अपने कानों से सुन ले तो वो बिना वैक्सीन के ही आत्महत्या करने का मन बना सकता है। मौलाना नूरानी इस वीडियो में कहते सुने जा सकते हैं कि मुस्लिमों के खिलाफ छेड़ी गई साजिश कोरोना यहूदियों की साजिश इसलिए है क्योंकि वे इसकी वैक्सीन बनाकर उसमें एक चिप डाल रहे हैं। जब वह वैक्सीन मुसलमानों या किसी भी इंसान को लगाई जाएगी, तब चिप भी इंसानी जिस्म में दाखिल कर टिका दी जाएगी। इस चिप से आपका मिजाज कंट्रोल किया जाएगा। आप क्या सोचते हैं, क्या करते हैं सब यहूदियों को पहले ही पता होगा।
मगर मौलाना नूरानी ने इसमें क्या कहा, यह बड़ा विषय नहीं है। विषय इस वीडियो को शेयर करने वाले व्यक्ति, यानी मोहम्मद जुबैर, जिसका अधिकतर समय हममजहब लोगों का बचाव करने और झूठ फ़ैलाने में ही जाता है, की मंशा है। ये वीडियो शेयर करते हुए शलभ मणि त्रिपाठी ने लिखा, “ये हैं भारत के ‘मुन्ना भाई वैक्सीन विशेषज्ञों’ का इस्लामिक संस्करण। कहते हैं वैक्सीन में चिप लगी है, सबका मिज़ाज क़ाबू कर लेंगे।”
मौलाना कौकब नूरानी का यह वीडियो काफी समय से ही सोशल मीडिया पर वायरल होता आया है। लेकिन इस्लामी प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘ऑल्ट न्यूज़’ के सह संस्थापक मोहम्मद जुबैर को कौकब नूरानी के इस वीडियो का मजाक बनाना बहुत रास नहीं आया और ‘फैक्ट चेकर’ ने इस पर अपनी मजहबी खुजली मिटाते हुए ‘ज्ञान’ देने की कोशिश कर डाली।
मोहम्मद जुबैर ने शलभ मणि त्रिपाठी का यह ट्वीट रीट्वीट करते हुए लिखा, “हैलो शलभ मणि त्रिपाठी, वो आदमी पाकिस्तान से है (Raukab Noorani Okarvl), भारत से नहीं। वैसे वीडियो देख के, नैनो चिप वाली नोट का वीडियो याद आ गया।”
पहली गलती तो यहाँ पर मजहबी ‘फैक्ट चेकर’ ज़ुबैर ने यह की है कि मौलाना नूरानी का बचाव करने की जल्दबाजी में उसने मौलाना कोकब नूरानी का नाम ‘रोकब नूरानी’ लिख दिया।
दूसरी गलती, जो मोहम्मद जुबैर ने अपनी होशियारी दिखाते हुए और मौलाना नूरानी का बचाव करते हुए की, वो ये कि जब शलभ मणि त्रिपाठी ने इस मौलाना के देश का जिक्र ही नहीं किया तो फिर मोहम्मद जुबैर को इसमें स्पष्टीकरण देने की आवश्यकता ही क्यों महसूस हुई?
वास्तव में, शलभ मणि त्रिपाठी ने अपने ट्वीट में लिखा कि ‘भारत के मुन्ना भाई विशेषज्ञों का इस्लामी संस्करण’, जिसका सीधा सा मतलब ‘भारत के वैक्सीन विरोधी मूर्खों का इस्लामी संस्करण’ है। यह लिखते हुए उन्होंने कहीं पर भी इस मौलवी को ‘भारतीय’ नहीं कहा है, जैसा कि मोहम्मद जुबैर ने जल्दबाजी में मौलाना का बचाव करते हुए दावा किया है।
मोहम्मद जुबैर को यहाँ पर ज्यादा कुछ नहीं करना चाहिए, लेकिन अगर उसे हिंदी नहीं आती है तो पहले किसी से पूछ लिया करे। अगर योगी आदित्यनाथ के सूचना सलाहकार ने वहाँ इस्लामी संस्करण की जगह ‘भारतीय संस्करण’ लिखा होता तो मोहम्मद जुबैर की बात शायद सही होती।
यह भी सम्भव है कि मोहम्मद जुबैर को दाएँ से बाएँ पढ़ने की आदत हो। हो सकता है कि इसी आदत के चलते उन्होंने ‘भारतीय’ को सबसे आखिर में पढ़ा और फौरन ये मतलब भी निकाल लिया कि मौलवी को भारतीय बताया जा रहा है जबकि वो पाकिस्तानी है।
अकबर-बीरबल के चुटकुलों का फैक्ट चेक करने वाला मोहम्मद जुबैर अपनी बुद्धि क्षमता का परिचय देकर हर दूसरी बात पर फैक्ट चेक की गुंजाइश तलाशता है और जब दिनभर में ये कोटा पूरा नहीं होता, तो उसे इसी तरह से दूसरों के रैंडम ट्वीट का जबरन फैक्ट चेकर करना होता है।
ऐसे में, अगर किसी मुल्ला-मौलवी को क्लीन चिट देने का मौका मिल जाए तो वह आखिर उसे चूकेगा ही क्यों? यूँ भी, मजहब में ‘उम्माह’ का महत्त्व सबसे ऊपर है। तो क्या ये माना जा सकता है कि चाहे मुल्ला-मौलवी पाकिस्तानी ही क्यों न हो, मोहम्मद जुबैर को बचाव करने के लिए आना पड़ा?
मोहम्मद जुबैर को अपने दैनिक फैक्ट चेक के बहीखाते को दुरुस्त रखने के लिए इस तरह के कारनामों का सहारा लेना पड़ता है। लेकिन इससे पहले उन्हें हिंदी पर भी अपनी पकड़ मजबूत करनी होगी वरना वो इसी तरह अपना ही फैक्ट चेक करवाते नजर आएँगे।
आखिरी बार जब मोहम्मद जुबैर चर्चा में आया था, तब वह अस्पताल से लेकर सड़कों पर स्वास्थ्यकर्मियों के लिए सरदर्द बने तबलीगी जमात के लोगों को क्लीन चिट देते हुए देखा गया था। यही नहीं, जुबैर ने फलों पर थूक लगाकर बेचने वाले समुदाय विशेष के लोगों का भी फर्जी फैक्ट चेक कर उन्हें क्लीन चिट देने की कोशिशें भी की थीं।
सोशल मीडिया पर लोगों की स्टाकिंग करना और उनकी गोपनीय जानकारियाँ सार्वजानिक करना तो मोहम्मद जुबैर का पहला पेशा है ही। इसी शौक के चलते वो एक मासूम बच्ची की तस्वीर सार्वजनिक कर चर्चा का विषय भी बने थे।
आजकल मोहम्मद जुबैर, कोरोना को यहूदियों की साजिश बताने वाले मौलाना नूरानी के वकील और निजी प्रवक्ता की भूमिका निभा रहे हैं। हालाँकि, यह बात कितनी सही है और कितनी गलत, इसका फैक्ट चेक करने की गुंजाइश हमेशा बनी रहेगी मगर उनके ट्वीट और स्पष्टीकरण कम से कम इस बात की गवाही देने के लिए काफी हैं।
ग्रूमिंग जिहाद (लव जिहाद) और जबरन धर्मांतरण को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने जो कानून लागू किया है, उसका 224 पूर्व IAS अधिकारियों ने समर्थन किया है। इससे पहले 104 पूर्व आईएएस अधिकारियों ने इस कानून को ‘हेट पॉलिटिक्स’ का हिस्सा बताते हुए वापस लेने की माँग की थी।
टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के मुताबिक 224 पूर्व नौकरशाहों ने पत्र में कहा है, “यह चिंता का विषय है कि खुद को गैर राजनीतिक दिखाने वाला सेवानिवृत्त अधिकारियों का एक समूह पक्षपाती है और उसका रवैया हर मुद्दे पर सत्ता विरोधी है। वह समूह इस तरह के अनैतिक बयान देकर भारतीय संविधान, उससे जुड़े लोगों, संस्थानों और खुद आईएएस अधिकारियों की छवि खराब करने का कोई मौक़ा नहीं छोड़ता है।”
‘फोरम ऑफ़ कंसर्न्ड सिटिज़न्स’ (Forum of Concerned Citizens) के बैनर तले 224 सेवानिवृत्त अधिकारियों ने कहा कि ‘पक्षपाती’ प्रशासनिक अधिकारियों और कुछ अन्य लोगों की रुचि इस बात में है कि कैसे भारत की अखंडता को नुकसान पहुँचाया जाए।
टाइम्स नाउ से बात करते हुए पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले योगेन्द्र नरेन ने कहा कि ‘धर्मांतरण के खिलाफ़ क़ानून’ ग़ैरक़ानूनी तरीके से होने वाले धर्म परिवर्तन के मामलों पर निगाह रखने के लिए ज़रूरी है। उत्तर प्रदेश की सरकार ने इस तरह के मामलों से निपटने के लिए यह क़ानून बना कर बिलकुल सही किया। उन्होंने कहा, “यह सभी पर लागू होता है। यह किसी एक धर्म या वर्ग को निशाना नहीं बनाता है। अगर कोई धर्म परिवर्तन करवाना चाहता है तो उन्हें कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा। सरकार के पास यह तय करने का अधिकार है कि धर्म परिवर्तन किस तरह किए जाएँगे।”
104 पूर्व आईएएस अधिकारियों द्वारा किए गए दावों से जुड़े सवालों का जवाब देते हुए नरेन ने कहा कि जनता ने प्रदेश के मुख्यमंत्री को चुना है और सरकार के पास इस तरह के क़ानून को लागू करने का अधिकार है। इस क़ानून की ‘संवैधानिक वैधता’ जाँचने के लिए न्यायपालिका है। जबरन धर्मांतरण की समस्या को कई समाचार पत्र सामने लेकर आए हैं और इस मामले में सरकार की तरफ से कदम उठाए जाने के लिए यही सही समय था।
कुछ दिनों पहले 104 पूर्व आईएएस अधिकारियों ने योगी आदित्यनाथ को पत्र लिख कर आरोप लगाया था कि उत्तर प्रदेश ‘नफ़रत की राजनीति’ का केंद्र बन गया है। अधिकारियों ने अपने पत्र में लिखा था, “यह काफी दुःखद है कि पिछले कुछ सालों में, उत्तर प्रदेश जिसे गंगा-जमुनी तहजीब का गढ़ माना जाता था वह कट्टरता, विभाजन और नफ़रत की राजनीति का केंद्र बन चुका है। इसके अलावा शासन से जुड़ी संस्थाएँ समाज में ज़हर घोलने का काम कर रही हैं।”