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‘हिन्दू राष्ट्र का सुप्रीम कोर्ट, नपुंसक, हरा@जादा’: रंजन गोगोई और न्यायपालिका पर एमनेस्टी इंडिया के पूर्व प्रमुख ने फैलाई घृणा

खुद को मानवाधिकार कार्यकर्ता बताने वाले और एमनेस्टी इंडिया के मुखिया रहे आकार पटेल ने अकारण ही देश के सर्वोच्च न्यायालय के खिलाफ तिरस्कारपूर्ण टिप्पणी कर दी है। कभी मुस्लिमों और दलितों को हिंसा के लिए भड़काने वाले आकार पटेल ने शुक्रवार (जनवरी 8, 2021) रात सुप्रीम कोर्ट पर छींटाकशी की। उन्होंने एक सेक्सिस्ट और ट्रांसजेंडर समुदाय के प्रति घृणा दर्शाने वाले ट्वीट के जरिए ऐसा किया।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के जजों की तुलना ‘नपुंसकों’ से की और कहा कि न्यायपालिका जब ‘संकट’ में है तो ये जज ‘मर्द की तरह’ खड़े नहीं हो पाए। साथ ही उन्होंने पूर्व CJI रंजन गोगोई के खिलाफ आए यौन शोषण के एक मामले का भी जिक्र किया और लिखा, “हिन्दू राष्ट्र के सुप्रीम कोर्ट के नपुंसक जजों ने यौन शोषक मुख्य न्यायाधीश को उसी मामले में पेश होने दिया, जिसमें वो खुद ही मुख्य आरोपित हैं।”

उन्होंने आगे लिखा, “इन सबके बावजूद हमें सुप्रीम कोर्ट के सामने इस तरह से घुटने टेकने हैं, जैसे डेल्फी (ग्रीक गॉड अपोलो की सैंक्चुरी) की कोई आकाशवाणी हो।” हालाँकि, जब इस ट्वीट के लिए जम कर उन्हें लोगों ने लताड़ लगाई, तब उन्होंने इसे तुरंत डिलीट कर लिया। लेकिन, उन्होंने इससे भी बड़ी बेहूदगी कर दी। उन्होंने लिखा कि अब वो ‘नपुंसक’ की जगह यहाँ ‘हरामजादा’ शब्द लेकर आ रहे हैं।

आकार पटेल का घृणास्पद ट्वीट

साथ ही उन्होंने ‘नपुंसक’ शब्द के इस्तेमाल के लिए माफ़ी भी माँगी। उन्होंने भारत को ‘हिन्दू राष्ट्र’ बताते हुए पूछा कि क्या पूर्व CJI पर लगे यौन शोषण के आरोपों के बारे में बच्चों को पढ़ाया जाएगा? उन्होंने गोगोई पर असम में हजारों लोगों को प्रताड़ित करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने गोगोई पर अपने पद का गलत इस्तेमाल कर के राज्यसभा सांसद की सीट बदले में लेने का भी आरोप लगाया।

सुप्रीम कोर्ट के जजों के लिए किया गाली का इस्तेमाल

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के जजों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ‘डरा हुआ’ और कायर भी करार दिया। उन्होंने लिखा कि न्यायपालिका को कार्यपालिका से ज्यादा अधिकार मिले हुए हैं, लेकिन वे ‘डरे हुए’ हैं। उन्होंने बार-बार अपने ट्वीट्स में देश के सर्वोच्च न्यायालय को ‘हिन्दू राष्ट्र का सुप्रीम कोर्ट’ बताया। ‘माफ़ी माँगने’ के बाद उन्होंने ‘नपुंसक’ की जगह ‘हरामजादा’ लिख कर फिर से उसी ट्वीट को दोबारा से प्रकाशित किया।

बता दें कि मई 2019 में ही सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई द्वारा गठित तीन सदस्यीय जाँच पैनल ने उन्हें क्लीनचिट दे दी थी। जाँच पैनल को सीजेआई रंजन गोगोई के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट की पूर्व कर्मचारी द्वारा लगाए गए यौन शोषण के आरोपों का कोई सबूत नहीं मिला था। इस पैनल का नेतृत्व जस्टिस एसए बोबडे कर रहे थे, जो अब देश के मुख्य न्यायाधीश हैं। चूँकि यह एक अनौपचारिक जाँच थी, इसीलिए इस जाँच की रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया था।

दिल्ली की मदीना मस्जिद में 10 साल के बच्चे की लाश मिली, ईंट से दबाकर रखा गया था: रिपोर्ट

दिल्ली के खजूरी ख़ास के सी ब्लॉक स्थित मदीना मस्जिद के भीतर एक बच्चे की लाश मिलने से हड़कंप मच गया। फरहान नाम के बच्चे का शव मस्जिद की सबसे ऊपरी मंजिल पर ईंट से दबाकर रखा गया था। बच्चे की उम्र 10 वर्ष बताई जा रही है। पुलिस ने घटना की जानकारी मिलते ही शव को कब्ज़े में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मामले की पड़ताल चल रही है।

आज तक में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक़ दिल्ली के थाना खजूरी ख़ास क्षेत्र अंतर्गत सी ब्लॉक की गली नंबर 11 में शमीम का परिवार रहता है। शमीम का 10 वर्षीय बेटा फरहान नज़दीक की मस्जिद में कुरान पढ़ने जाता था। शमीम के चार बच्चों में फरहान सबसे छोटा था। वह रोज़ की तरह कुरान पढ़ने के लिए मस्जिद की तरफ निकला, लेकिन रात होने के बावजूद वापस नहीं लौटा। परिजनों को इस बात से चिंता हुई तब उन्होंने पुलिस को इस मामले की सूचना दी। 

इसके बाद रात के ही वक्त पुलिस और फरहान के परिवार वालों ने उसकी खोजबीन शुरू कर दी। रिपोर्ट के मुताबिक़ खोजबीन के दौरान जब वे मदीना मस्जिद की सबसे ऊपरी मंजिल पर पहुँचे तो वहाँ उन्होंने देखा कि फरहान का शव ईंट के नीच दबा कर रखा गया है। पुलिस ने शव को कब्ज़े में लेकर तत्काल प्रभाव से पोस्टमार्टम के लिए जीटीबी अस्पताल भेज दिया गया।

पुलिस ने इस संबंध में हत्या का मामला दर्ज कर लिया है और पूरे प्रकरण की जाँच शुरू कर दी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि बच्चे की मृत्यु का असल कारण क्या है।

‘सेक्स करने को कहते हैं पादरी, करते हैं ब्लैकमेल’: ईसाई महिलाओं की याचिका सुनेगा SC, चर्च में ‘पाप का प्रायश्चित’ को चुनौती

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (जनवरी 8, 2021) को केरल की ईसाई महिलाओं की एक रिट याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया, जिसमें मालंकारा ऑर्थोडॉक्स सीरियन चर्च में अनिवार्य कन्फेशन की परम्परा को चुनौती दी गई है। याचिका में इसे धर्म और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकारों के विरुद्ध करार दिया गया है। मुख्य याचिकाकर्ता को सुप्रीम कोर्ट ने याचिका में संशोधन कर और नए फैक्ट्स आलोक में लाने की अनुमति भी दे दी है।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस रमासुब्रमण्यन की पीठ इस मामले को सुनेगी। हालाँकि, इस दौरान पाँचों ईसाई महिलाओं के वकील मुकुल रोहतगी से सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि वो इस मामले में केरल हाईकोर्ट क्यों नहीं जा रहे हैं। इसके जवाब में रोहतगी ने कहा कि सबरीमाला जजमेंट में ऐसे सवाल उठ चुके हैं, जिस पर 9 सदस्यीय पीठ सुनवाई कर रही है, इसलिए हाईकोर्ट ऐसे विचाराधीन मामलों में फैसला नहीं सुना सकती। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि कन्फेशन के एवज में पादरी यौन फेवर माँगते हैं, सेक्स करने को कहते हैं।

इन महिलाओं का कहना था कि उन्हें अपने चुने हुए पादरी के समक्ष भी कन्फेशन करने दिया जाए। साथ ही ये भी कहा गया कि ईसाई महिलाओं के लिए कन्फेशन अनिवार्य करना असंवैधानिक है, क्योंकि पादरियों द्वारा इसे लेकर ब्लैकमेल करने की घटनाएँ सामने आई हैं। केरल और केंद्र की सरकारों को भी इस मामले में पक्ष बनाया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में भारत के अटॉर्नी जनरल केसी वेणुगोपाल से भी प्रतिक्रिया माँगी है। AG ने बताया कि ये मामला मालंकारा चर्च में जैकोबाइट-ऑर्थोडॉक्स गुटों के संघर्ष से उपज कर आया है।

ये संघर्ष भी सुप्रीम कोर्ट पहुँचा था, लेकिन तीन जजों की पीठ ने इस मामले की सुनवाई के बाद फैसला दे दिया था। मुकुल रोहतगी ने ध्यान दिलाया कि ऐसे मामले संवैधानिक अधिकारों के साथ-साथ ये भी देखना होगा कि क्या कन्फेशन एक अनिवार्य धार्मिक प्रक्रिया हुआ करती थी। किसी बिलिवर की ‘राइट टू प्राइवेसी’ का धार्मिक प्राधिकरण के आधार पर पादरी द्वारा उल्लंघन किया जा सकता है या नहीं, उन्होंने इस पर भी विचार करने की सलाह दी।

उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ पादरी महिलाओं द्वारा किए गए कन्फेशन का गलत इस्तेमाल करते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामले व्यक्तिगत अनुभवों के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं, जिस पर रोहतगी ने कहा कि वो याचिका में संशोधन कर ऐसी घटनाओं को जोड़ेंगे। कन्फेशन को लेकर इससे पहले भी याचिकाएँ आ चुकी हैं। कन्फेशन के अंतर्गत लोग पादरी की उपस्थिति में अपने ‘पापों’ को लेकर प्रायश्चित करते हैं।

2018 में केरल हाईकोर्ट ने कन्फेशन को हटाने की याचिका को रद्द करते हुए कहा था कि जब कोई किसी खास धर्म को मानता है तो इसका अर्थ है कि वो इसके अंतर्गत आने वाले नियम-कानूनों को भी स्वीकार करता है। हाईकोर्ट ने कहा था कि ये प्रक्रिया ईसाई महजब का एक अंग रहा है और याचिककाकर्ता किसी धर्म की परम्पराओं से नाराज हैं तो वो उसे छोड़ सकते हैं। NCW भी यौन शोषण के आरोपों के कारण इस प्रक्रिया को बंद करने की सलाह दे चुका है।

केरल के एक नन ने अपनी आत्मकथा में आरोप लगाया था कि एक पादरी अपने कक्ष में ननों को बुला कर ‘सुरक्षित सेक्स’ का प्रैक्टिकल क्लास लगाता था। इस दौरान वह ननों के साथ यौन सम्बन्ध बनाता था। उसके ख़िलाफ़ लाख शिकायतें करने के बावजूद उसका कुछ नहीं बिगड़ा। उसके हाथों ननों पर अत्याचार का सिलसिला तभी थमा, जब वह रिटायर हुआ। सिस्टर लूसी ने लिखा था कि उनके कई साथी ननों ने अपने साथ हुई अलग-अलग घटनाओं का जिक्र किया और वो सभी भयावह हैं।

लॉरा ने जो 2018 में कहा, वही 2021 में ट्रंप के साथ कर रहा ट्विटरः अमेरिकी संसद की सुनवाई में जैक डर्सी को लगाई थी लताड़

आज जब ट्विटर अमेरिका की राजनीति में बढ़-चढ़कर हस्तक्षेप कर रहा है और उसने वहाँ के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हैंडल को सस्पेंड कर दिया है, लोग सितंबर 2018 की उस घटना को याद कर रहे हैं, जब एक महिला एक्टिविस्ट लॉरा लूमर ने कैपिटल हिल में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ चल रही सुनवाई में घुस कर ट्विटर के CEO जैक डॉर्सी को खरी-खोटी सुनाई थी। उस समय ट्विटर और फेसबुक को सीनेटरों के कई सवालों के जवाब देने पड़े थे।

जहाँ ट्विटर की तरफ से जैक डॉर्सी वहाँ पहुँचे हुए थे, फेसबुक ने COO शेरिल सैंडबर्ग को अपना पक्ष रखने के लिए भेजा था। उनसे पूछताछ की गई थी कि वो अपने प्लेटफॉर्म्स पर गालियों और घृणा फैलाने वाले कंटेंट्स से कैसे निपट रहे हैं। साथ ही चुनावी हस्तक्षेप से लेकर राजनीतिक भेदभाव के सम्बन्ध में भी सवाल किए गए थे। हालाँकि, गूगल ने अपने प्रतिनिधि को भेजने से इनकार कर दिया था, जिससे एक खाली कुर्सी को वहाँ रखा गया था।

अब लोग उस महिला एक्टिविस्ट लॉरा लूमर को याद कर रहे हैं। लॉरा लूमर ने सुनवाई के बीच में ही घुस कर ट्विटर के CEO जैक डॉर्सी पर आरोप लगाए थे। उन्होंने वहाँ पर आशंका जाहिर कर दी थी कि ट्विटर भविष्य में क्या करने वाला है। इस्लामी कट्टरपंथियों के खिलाफ आवाज़ उठाने के लिए लॉरा लूमर को उबर और लिफ्ट जैसी राइडिंग सर्विस कंपनियों के अलावा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने भी प्रतिबंधित कर रखा है।

उन्होंने कॉन्ग्रेसनल सुनवाई में घुस कर जैक डॉर्सी को झूठा बताते हुए कहा उन्हें पक्षपात वाला रवैया त्यागने की चेतावनी दी थी और आरोप लगाया था कि ट्विटर विरोधी विचारधारा के लोगों को सेंसर करने में लगा हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया था कि न सिर्फ ट्विटर ने कन्जर्वेटिव्स को सेंसर किया, बल्कि चुनाव में भी पक्षपात किया। उस दौरान रिप्रेजेन्टेटिव बिली लॉन्ग जोर-जोर से बोलने लगे थे, ताकि लोग उनकी आवाज़ न सुन पाएँ।

लॉरा लूमर ने तब कहा था, “राष्ट्रपति महोदय, हमलोगों की मदद कीजिए। इससे पहले कि बहुत देर हो जाए, हमारी मदद कीजिए। जैक डॉर्सी चुनाव को प्रभावित करना चाह रहे हैं। वो चुनाव को अपने हिसाब से मोड़ देना चाहते हैं। डेमोक्रेट्स इस चुनाव को चुरा सकें, इसीलिए वो ऐसा कर रहे हैं। इसीलिए वो कन्जर्वेटिव्स को शैडो-बैन कर रहे हैं और उन्हें सेंसर कर रहे हैं।” उन्होंने ऐसा बोलते समय मोबाइल से खुद का वीडियो भी बनाया था।

उन्होंने जैक डॉर्सी पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को भी ऑनलाइन सेंसर करने का आरोप लगाया था। उन्होंने उस घटना का भी जिक्र किया था, जब ट्विटर पर डोनाल्ड ट्रम्प के अकाउंट को सस्पेंड कर दिया गया था और इसके लिए कंपनी ने एक कर्मचारी पर आरोप मढ़ दिए थे। एक ट्विटर कस्टमर सपोर्ट कर्मचारी को इसके लिए दोषी ठहराते हुए ट्विटर ने कहा था कि वो आंतरिक जाँच बिठा रहे हैं और ऐसा आगे नहीं होगा।

बता दें कि सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म ट्विटर ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हैंडल को सस्पेंड कर दिया है। साथ ही उनके एक और आधिकारिक ट्विटर हैंडल ‘टीम ट्रम्प’ को भी सस्पेंड कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने POTUS (प्रेजिडेंट ऑफ यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका) के ट्विटर हैंडल से ट्वीट्स किए, लेकिन ट्विटर ने उन ट्वीट्स को भी हटा दिया। हिंसा फैलाने की आशंका का आरोप लगा कर ऐसा किया गया है।

यूपी पुलिस ने मंदिर के पास गायों की हत्या करने वाले कसाइयों को घेरा, मुठभेड़ के बाद 3 को दबोचा

गेटर नोएडा में पुलिस और गाय की हत्या करने वाले कसाइयों के बीच मुठभेड़ हुई। इसके बाद पुलिस ने 3 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार किए गए आरोपितों पर एनसीआर के कई थानों में गोकशी के मामले दर्ज हैं। पुलिस फ़िलहाल इस मामले से जुड़े अन्य आरोपितों की तलाश कर रही है।  

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ पुलिस उपायुक्त (ज़ोन तृतीय) राजेश कुमार सिंह ने बताया कि गुरुवार (7 जनवरी 2021) की देर रात ग्रेटर नोएडा की दादरी पुलिस मायचा गाँव के नज़दीक खोजबीन कर रही थी। इस बीच पुलिस को जानकारी मिली कि कई लोग उसी गाँव में गोकशी करने की योजना बना रहे हैं। 

पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए सभी आरोपितों को गाँव के मंदिर के पास घेर लिया। बदमाशों ने खुद को पुलिस से घिरा देख कर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिसकर्मियों ने भी बदमाशों पर गोली चलाई। नतीजतन शाह आलम और गफ्फार के पैरों में गोली लगी। इस बीच बदमाशों के 4 साथी मौके का फ़ायदा उठा कर भागने में कामयाब रहे। 

पुलिस फ़िलहाल उन चारों की तलाश में जुट गई है। गिरफ्तार किए गए आरोपितों से की गई पूछताछ में पुलिस को पता चला कि वे गायों की हत्या करने वाले कसाई हैं। लगभग तीन दिन पहले ही इन आरोपितों ने दादरी थाना क्षेत्र के एक गाँव में गोकशी की थी।  

गुजरात के जिस टाटा प्लांट को राहुल गाँधी ने कोसा था, उनके नेता ने उसे बताया ‘विकास का मॉडल’

लगभग तीन साल पहले राहुल गाँधी ने गुजरात के सानंद स्थित टाटा मोटर्स प्लांट की आलोचना की थी। अब उनकी ही पार्टी के नेता उसकी प्रशंसा कर रहे हैं। उसे ‘विकास का मॉडल’ बता रहे हैं। लोकसभा में कॉन्ग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने यह टिप्पणी पश्चिम बंगाल की ममता सरकार पर हमला बोलते हुए की। 

कॉन्ग्रेस नेता ने सानंद प्लांट की सराहना करते हुए बताया कि कैसे ममता सिंगूर में ममता बनर्जी की राजनीति से पश्चिम बंगाल को नुकसान और गुजरात को फ़ायदा हुआ। हालॉंकि ऐसा करते हुए उन्होंने अपनी ही पार्टी के पूर्व अध्यक्ष को भी झुठला दिया।

अधीर रंजन चौधरी ने कहा, “जिस तरह सिंगूर से टाटा मोटर्स के प्लांट हटाया गया, कॉन्ग्रेस उसका बिलकुल समर्थन नहीं करती। इस प्लांट को तब हटाया गया जब उसमें सरकार के 1000 करोड़ रुपए खर्च हो चुके थे। वहीं गुजरात के सानंद में बनाया गया प्लांट देश के लिए विकास का मॉडल है।” 

पश्चिम बंगाल में बुद्धदेब भट्टाचार्या की सरकार ने टाटा मोटर्स को ग्रीन फील्ड ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट (greenfield automobile manufacturing plant) स्थापित करने के लिए ज़मीन प्रदान की थी, जिससे वहाँ पर नैनो कार का निर्माण किया जा सके। उस दौरान विपक्ष यानी ममता बनर्जी की अगुवाई में किसानों ने उस प्लांट का जमकर विरोध किया। इस विरोध-प्रदर्शन की वजह से टाटा मोटर्स ने प्लांट गुजरात के सानंद में स्थापित करने का फैसला लिया। इसके बाद देश के कई राज्यों ने टाटा को प्लांट स्थापित करने के लिए अनुरोध किया। 

नवंबर 2017 में राहुल गाँधी ने इस प्लांट को कोसा था, उनके मुताबिक़ प्लांट असफल था क्योंकि नैनो कार कामयाब नहीं हुई। इसके अलावा राहुल गाँधी ने गुजरात सरकार पर आरोप भी लगाया था कि सरकार ने प्लांट को 33,000 करोड़ रुपए दिए थे लेकिन सड़क पर कोई नैनो कार नज़र नहीं आती। 

यानी राहुल गाँधी की समझ के अनुसार गुजराती करदाताओं के 33,000 करोड़ रुपए मिट्टी में मिल गए क्योंकि बाज़ार में इसकी बिलकुल माँग नहीं थी और डीलर्स ने नैनो कार का ऑर्डर लेना ही बंद कर दिया था। 

आँकड़ों को लेकर राहुल गाँधी की उदासीनता कभी छुपी नहीं रही है। इस बात को तथ्य में ढालते हुए उन्होंने झूठ ही परोसा। सच ये था कि गुजरात सरकार ने टाटा मोटर्स को कोई आर्थिक सहयोग नहीं दिया था, बल्कि कंपनी को 456.79 करोड़ रुपए का लोन दिया था। कंपनी को कम ब्याज दर वाला लोन बतौर प्रोत्साहन (incentive) दिया गया था। तमाम राज्य सरकारों ने टाटा मोटर्स को इस तरह के ऑफर देकर प्लांट स्थापित करने का निवेदन किया था।    

यह बात गलत नहीं है कि 2017 तक सड़कों पर नैनो कार लगभग नहीं के बराबर नज़र आती थीं। लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं था कि सानंद प्लांट असफल था। टाटा मोटर्स ने इंडिका और नैनो से लेकर एक लंबा सफ़र तय किया है। कमर्शियल पोर्टफोलियो के अलावा इन गाड़ियों की उपयोगिता और भी तमाम क्षेत्रों में है। प्लांट में टिअगो और टिगोर (Tiago and Tigor) जैसी गाड़ियों का निर्माण होता है, इसी प्लांट में टिगोर इलेक्ट्रिक कार का भी निर्माण किया जाता है। 

पिछले साल सितंबर में कंपनी ने बताया था कि प्लांट से लगभग 3 लाख टिअगो की बिक्री हो चुकी है। प्लांट उस वक्त भी कार निर्माण कर रहा था जब राहुल गाँधी ने इसे असफल बताया था। अब उनकी ही पार्टी के नेता ने प्लांट की सफलता को जाना और समझा है और इसे विकास का मॉडल बताया है।    

WhatsApp की प्राइवेसी पॉलिसी में अडानी-अम्बानी कनेक्शन ना ढूँढ पाने पर अवसाद में गया वोक लिबरल

व्हाट्सऐप (WhatsApp) ने अपनी गोपनीयता नीतियों में कुछ बदलाव किए हैं। दुर्भाग्य से, इस नीति में बदलाव के बावजूद वोक राजू नाम के वोक लिबरल की जिन्दगी में कोई खास बदलाव नहीं आया। हालाँकि, अब वो अवसाद में जरूर चला गया है। और इस तरह आखिरकार वो कम से कम इसके लिए मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहरा सका है।

दरअसल, ये घटना गत शुक्रवार रात करीब 11 बजकर 59 मिनट की है। अपने ‘किसान साथी एकता समूह’ नामक व्हाट्सऐप ग्रुप में ‘गुड नाइट जी’ का संदेश प्रेषित करते अचानक एक सन्देश वोक राजू की मोबाइल स्क्रीन पर नजर आया। सन्देश में व्हाट्सऐप की नीतियों में कुछ बदलाव की बात कही गई थी।

इस बदलाव को ही शुक्रवार की क्रांति मानकर वोक राजू ने आव देखा न ताव और तुरन्त रजाई त्यागकर गूगल सर्च करने निकल पड़ा कि आखिर इन नीतियों से अडानी और अम्बानी को किस तरह फायदा हो सकता है?

रातभर एक तपस्वी की भाँति यहाँ-वहाँ से ‘अम्बानी कनेक्शन’ ढूँढने के बाद भी जब आखिरकार राजू के हाथ बस नाकामयाबी ही लगी तो उसने आखिरकार ये कहकर सुबह 4 बजे सोने का फैसला किया कि इंसान के लिए पहले सोना जरूरी है। वोक राजू ने पालिका बाजार से खरीदी हुई एक शायरी की किताब में पढ़ा था कि क्रांति इंतजार कर लावा बनकर बहती है। इस पर अंतिम निष्कर्ष यही निकला कि राजू को कुछ देर सो ही जाना चाहिए।

अगले दिन, शनिवार सुबह नियमित अभ्यास की ही तरह उठते ही राजू ने सबसे पहले बिना आँखें खोल अपने मोबाइल को अनलॉक करने का करतब दोहराया और उसमें गूगल खोलकर कीवर्ड्स डाले- “सुबह उठने से अम्बानी-अडानी को होने वाले फायदे” मगर राजू के माथे पर पसीना तब उतर आया जब उसकी मोबाइल स्क्रीन पर Jio का ही एक और सन्देश आया, जिसमें लिखा था कि आप आने मोबाइल की दैनिक डेढ़ जीबी रात को ही समाप्त कर चुके हैं।

अब वोक राजू के क्रोध का ठिकाना न रहा। उसने शपथ ली कि आज वो बिना अम्बानी और अडानी की ईंट से ईंट बजाए सोएगा नहीं। इसके लिए वोक राजू ने सबसे पहले अपनी महबूबा को फोन कर एक 4G टॉप-अप रिचार्ज करने की मिन्नतें माँगी।

रिचार्ज होते ही वोक राजू ने प्रगतिशील फेसबुक ग्रुप से लेकर तमाम ट्विटर एकाउंट तलाश मारे मगर कहीं से उसके हाथ अम्बानी के खिलाफ कोई सबूत नहीं लगा। परिणाम ये हुआ कि इस खोज में राजू के 8-10 वो अहम घण्टे खत्म हो गए, जिनमें उसने फेसबुक पर क्रांति की कविताएँ पोस्ट करने में व्यर्थ करना था।

आखिरकार, थक-हारकर वोक राजू ने फैसला किया कि क्रांति जाए तेल लेने, पहले उचित कैलोरी जरूरी है, तभी दिमाग भी सही तरह से काम करता है। लेकिन तब तक कहीं ना कहीं, व्हाट्सऐप की नीतियों से अम्बानी को होने वाले लाभ पर कुछ भी हाथ ना लगने के चलते राजू के मन में एक निराशा का भाव पैदा हो चुका था। जब घरवालों ने उसकी मनोदशा पर गौर किया तो वे उसे एक मनोचिकित्सक के पास ले गए। डॉक्टर्स ने कहा कि वोक राजू में अवसाद के लक्षण नजर आ रहे हैं, जिसके उपाय के लिए उसे और अधिक क्रांतिकारी बातें सुननी होंगी।

वोक राजू के परिवार ने फैसला किया है कि वो राजू को किसान आंदोलन में बैठे किसान साथियों के साथ भेज देंगे। उन्होंने तर्क दिया कि अरविंद केजरीवाल द्वारा किसानों के लिए लगवाए गए मुफ्त इंटरनेट से वोक राजू जल्द ही अवसाद से उबरने में कामयाब रहेगा।

‘कट्टर वामपंथियों की करतूत’: डोनाल्ड ट्रम्प और उनकी टीम के Twitter हैंडल्स हमेशा के लिए सस्पेंड, POTUS से भी हटाए गए ट्वीट्स

सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म ट्विटर ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हैंडल को सस्पेंड कर दिया है। साथ ही उनके एक और आधिकारिक ट्विटर हैंडल ‘टीम ट्रम्प’ को भी सस्पेंड कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने POTUS (प्रेजिडेंट ऑफ यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका) के ट्विटर हैंडल से ट्वीट्स किए, लेकिन ट्विटर ने उन ट्वीट्स को भी हटा दिया। हिंसा फैलाने की आशंका का आरोप लगा कर ऐसा किया गया है।

ट्विटर ने कहा है कि ताज़ा परिस्थितियों को देखते हुए और आगे हिंसा की आशंका से बचने के लिए ऐसा किया गया है। कंपनी ने कहा है कि हाल के दिनों में जिस तरह से हिंसा हुई है, आशंका है कि उनके सोशल मीडिया पर बने रहने से और डरावनी स्थिति आ सकती है। इस तरह से शुक्रवार (जनवरी 8, 2021) को अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा किए गए 2 ट्वीट्स अंतिम थे, क्योंकि अब स्थायी रूप से उनका अकाउंट बंद रहेगा।

ट्विटर ने आरोप लगाया है कि डोनाल्ड ट्रम्प ने इन ट्वीट्स के माध्यम से हिंसा का महिमामंडन किया। उसने कहा कि इससे भीड़ फिर से इकट्ठी होकर उग्र हो सकती है। ट्रम्प ने कहा था कि जिन 7.5 करोड़ अमेरिकी नागरिकों ने उन्हें वोट दिया है, उनके साथ भविष्य में भी किसी तरह का कोई बुरा व्यवहार नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा था कि आगे भविष्य में हमारे बाद एक विशाल आवाज़ है। उन्होंने ‘अमेरिका फर्स्ट’ और ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ का भी नारा दोहराया।

टीम ट्रम्प के अकाउंट के माध्यम से उन्होंने बयान दिया कि ट्विटर लम्बे समय से फ्री स्पीच पर पाबन्दी लगाता रहा है और अब उन्हें चुप कराने के लिए ट्विटर के कट्टर वामपंथी और डेमोक्रेट कर्मचारियों ने मिल कर ये साजिश रची है। उन्होंने कहा कि ट्विटर भले ही एक प्राइवेट कम्पनी हो, लेकिन अनुच्छेद-230 के रूप में सरकार ने उन्हें जो गिफ्ट दिया है उसी कारण वे ये दुस्साहस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें इसका अंदाज़ा था, इसलिए जल्द ही बड़ी घोषणा होगी।

कई अन्य वेबसाइटों के साथ डोनाल्ड ट्रम्प की बातचीत चल रही है। साथ ही उन्होंने इशारा किया है कि वो खुद का भी कोई प्लेटफॉर्म ला सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि फ्री स्पीच विरोधी ट्विटर कट्टर वामपंथी विचारधारा के घृणित व्यक्तियों के प्रमोशन का अड्डा बन चुका है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग इस पर खुलेआम बोलते हैं। साथ ही चुनौती दी कि उन्हें चुप नहीं कराया जा सकता। फेसबुक और इंस्टाग्राम पर भी डोनाल्ड ट्रम्प का अकाउंट लॉक कर दिया गया है।

उधर कई रिपब्लिकन डोनाल्ड ट्रम्प के समर्थन में हैं। अमेरिकी मीडिया का कहना है कि ट्रम्प अभी कहीं नहीं जा रहे हैं और वो राजनीति में प्रासंगिक बने रहेंगे और अगले चुनाव में बतौर उम्मीदवार लौट भी सकते हैं। अरबपति कारोबारी ट्रम्प के बारे में चर्चा है कि ट्रम्प समर्थक कैपिटल हिल उपद्रव को लेकर खुश हैं। कहा जा रहा है कि ‘Trumpism’ अभी यहाँ रहने वाला है और उनका अभियान सशक्त बना रहेगा।

बता दें कि कैपिटल हिल में हिंसा के बीच कॉन्ग्रेस ने जो बाइडेन की जीत पर मुहर लगा दी थी। वे 20 नंवबर को राष्ट्रपति पद सँभालेंगे। उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने इलेक्‍टोरल कॉलेज के वोटों के आधार पर जो बाइडेन के जीत का ऐलान किया है। वहीं इस फैसले पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि वे चुनाव के नतीजों से पूरी तरह असहमत है, इसके बावजूद 20 जनवरी को कानून के मुताबिक बाइडेन को सत्ता का हस्तांतरण किया जाएगा।

आंध्र प्रदेश में मंदिरों पर हमलों की जाँच के लिए SIT: CM जगन ने 9 मंदिरों की रखी आधारशिला, 8 का भूमि पूजन

आंध्र प्रदेश में मंदिरों पर हमलों की जाँच के लिए मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली YSRCP सरकार ने 16 सदस्यों वाली स्पेशल जाँच समिति (SIT) का गठन किया है। SIT सितम्बर 2020 के बाद राज्य में मंदिरों पर हुए हमलों की जाँच करेगी। ACB विजयवाड़ा के एडिशनल डायरेक्टर अशोक कुमार को इसका मुखिया बनाया गया है। SIT अपनी रिपोर्ट सीधे सीएम जगन को सौंपेगी।

आंध्र प्रदेश सरकार की इस SIT में 1 SP, 2 एडिशनल SP, 2 DSP, 2 ACP और 4 CI और 4 SI लेवल के पुलिस अधिकारी शामिल हैं। सरकार ने कहा है कि मंदिरों पर हमलों और प्रतिमाओं को क्षतिग्रस्त करने की इन घटनाओं ने राज्य की सांप्रदायिक शांति को भी भंग किया है, जिस कारण इस SIT का गठन किया जा रहा है। सभी पुलिस अधिकारियों और उनकी यूनिट को SIT को ज़रूरी सहयोग मुहैया कराने का निर्देश दे दिया गया है।

साथ ही FSL के निदेशक को भी सूचित कर दिया गया है कि वो किसी भी प्रकार की फॉरेंसिक सहयोग की स्थिति में SIT के साथ मिलकर काम करें। SIT के कार्यों को प्राथमिकता देने को भी कहा गया है। CID सहित अन्य ख़ुफ़िया एजेंसियों को भी SIT का सहयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। SIT इन हमलों के पैटर्न का अध्ययन करेगी और सभी जिलों के SP के साथ सामंजस्य बिठा कर जाँच की जाएगी।

विजयवाड़ा और विशाखापत्तनम के CID के साइबर सेल के PS को भी ज़रूरी सहयोग मुहैया कराने के लिए निर्देशित किया गया है। मामले की जटिलता को ध्यान में रखते हुए ये निर्णय किया गया। टीम को कहा गया है कि उन्हें जहाँ भी ज़रूरत महसूस हो, वो अतिरिक्त अधिकारियों एवं संसाधन के लिए सीधे राज्य के DGP से संपर्क कर सकते हैं। कोर्ट की निगरानी में SIT के मुखिया जाँच रिपोर्ट तैयार करेंगे।

साथ ही जाँच टीम को ये भी कहा गया है कि वो समय-समय पर वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी मुहैया कराते रहें कि जाँच कहाँ तक आगे बढ़ी है, क्या कुछ पता चला है और आगे क्या किया जाना है। राज्य सरकार ने शुक्रवार (जनवरी 8, 2021) को ये आदेश जारी किया। उधर आंध्र प्रदेश IPS एसोसिएशन ने उन आरोपों की निंदा की है, जिसमें पुलिस अधिकारियों पर हिन्दुओं के साथ पक्षपात के आरोप लगाए गए हैं।

इस बीच मुख्यमंत्री जगन ने विजयवाड़ा में 9 मंदिरों के निर्माण की आधारशिला रखी, जिन्हें 4 साल के गैप के बाद बनाया जा रहा है। इसमें आंजनेय स्वामी, राहु-केतु, सीतम्मावरी और वेणुगोपाल मंदिर शामिल हैं। इन मंदिरों के निर्माण का शुरुआती खर्च 3.79 करोड़ रुपए आँका गया है। सीएम ने कनक दुर्गा मंदिर में भी 8 मंदिरों के निर्माण के लिए भूमिपूजन किया, जिसमें 77 करोड़ रुपए खर्च होंगे। पूरे दुर्गा मंदिर का कायाकल्प होना है।

ताज़ा घटनाओं की बात करें तो जनवरी 3, 2021 को ही विजयवाड़ा के सीताराम मंदिर में देवी सीता की 40 वर्ष पुरानी मूर्ति खंडित पाई गई थी। यह मंदिर विजयवाड़ा के पंडित नेहरू बस कॉम्पलेक्स में स्थित है। उससे पहले विभिन्न मंदिरों में भगवान गणेश, राम, वेंकटेश और सुब्रमण्येश्वर स्वामी की प्रतिमाओं को नुकसान पहुँचाया गया था। इन घटनाओं को लेकर राज्य की विपक्षी पार्टियाँ भाजपा और टीडीपी लगातार YSRCP पर हमलावर हैं। TDP का कहना है कि हाल के दिनों में 150 के करीब मंदिरों पर हमले हो चुके हैं।

महाराष्ट्र: जिला अस्पताल के न्यूबॉर्न केयर यूनिट में लगी आग, 10 नवजात शिशुओं की मौत

महाराष्ट्र के विदर्भ स्थित भंडारा जिला अस्पताल में आग लगने के कारण 10 नवजात शिशुओं की मौत हो गई। ये घटना शनिवार (जनवरी 9, 2021) की रात 2 बजे हुई। अस्पताल के नवजात (Neonatal) केयर यूनिट में आग लगने के बाद ये हादसा हुआ। बताया जा रहा है कि आग लगने के कारण चारों ओर धुआँ भर गया था, जिस कारण नवजात शिशुओं का दम घुटने से मौत हो गई।

एक कर्मचारी ने जब यूनिट का दरवाजा खोला तो उसने पाया कि अंदर धुआँ ही धुआँ भरा हुआ है, जिसके बाद उसने अपने वरिष्ठों को इसकी सूचना दी। इसके बाद फायर ब्रिगेड को आग बुझाने के लिए बुलाया गया। भंडारा के अस्पताल के कर्मचारियों ने दावा किया है कि वो 7 नवजात शिशुओं को मौत के मुँह से बचाने में कामयाब रहे हैं। घटना की सूचना के बाद जिले के वरिष्ठ पुलिस-प्रशासन के अधिकारी घटनास्थल पर पहुँचे।

ये घटना अस्पताल के ‘न्यूबॉर्न केयर यूनिट (SNCU)’ में हुई। उस समय वार्ड में कुल 17 नवजात शिशु मौजूद थे। बताया जा रहा है कि शार्ट सर्किट की वजह से ये हादसा हुआ। आमजनों ने भी रेस्क्यू ऑपरेशन में हिस्सा लिया। डिस्ट्रिक्ट जनरल हॉस्पिटल में इस विभाग के दो यूनिट हैं – आउटबॉर्न और इनबॉर्न। इनमें से इनबॉर्न यूनिट के शिशु सुरक्षित हैं। सिविल सर्जन प्रमोद खंडाते ने इस घटना की जानकारी दी।

बता दें कि महाराष्ट्र के अस्पतालों में हाल के दिनों में आग लगने की ये पहले घटना नहीं है। सितम्बर 2020 में राज्य के पश्चिमी क्षेत्र के कोल्हापुर स्थित एक शासकीय अस्पताल में भी शार्ट सर्किट से आग लग गई थी, जब वहाँ 400 से भी अधिक कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज चल रहा था। NCP नेता राजेश टोपे फ़िलहाल महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री हैं। अभी तक इस पर सरकार की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। महाराष्ट्र सरकार पर पहले से ही कई मामलों में सवाल उठ रहे हैं।