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इबोला खोजने वाले डॉक्टर ने ‘Disease X’ को लेकर चेताया, कोरोना से भी ज्यादा घातक

इस वक्त दुनिया कोरोना महामारी से जूझ रही है। लेकिन, इबोला की खोज करने वाले डॉक्टर की मानें तो दुनिया पर इससे भी घातक महामारी का खतरा मँडरा रहा है। इसे नाम दिया गया है Disease X। 1976 में इबोला वायरस की खोज में मदद करने वाले प्रोफेसर जीन जैक्स मुएंबे तांफुम (Jean-Jacques Muyembe Tamfum) का कहना है कि अफ्रीका के वर्षा वनों से नए और घातक वायरस के फैलने का खतरा है।

प्रोफेसर तांफुम ने कहा कि हम अब ऐसी दुनिया में रह रहे हैं जहाँ नए वायरस आएँगे और इसी वजह से इंसानियत पर खतरा भी बना रहेगा। उन्होंने इंसानों से जानवरों में बीमारी के प्रसार को लेकर कहा कि यह मानवता के लिए कहीं अधिक खतरनाक हो सकता है और इसकी शुरुआत अफ्रीका के वर्षा वनों से होने की आशंका है।

हाल ही में अफ्रीका के कॉन्गो में एक मरीज में Hemorrhagic Fever के लक्षण दिखे। इसके बाद मरीज को आइसोलेट कर दिया गया और उसके सैंपल इबोला टेस्ट के लिए भेज दिए गए। इस दौरान तमाम मेडिकल एक्सपर्ट एक सवाल से जूझ रहे थे कि क्या होगा अगर महिला को इबोला ना हो? क्या होगा अगर महिला किसी नए वायरस से पैदा होने वाली ‘Disease X’ की पेशेंट जीरो हो? हालाँकि महिला का रिपोर्ट निगेटिव आया। लेकिन उनकी बीमारी आज भी रहस्य बनी हुई है।

WHO के अनुसार, ‘Disease X’ में X अज्ञात है। यानी एक अज्ञात बीमारी जो आने वाले वक्त में दुनिया में फैल सकती है। दुनिया के जाने-माने मेडिकल साइंटिस्ट्स का कहना है कि ‘Disease X’ का डर जायज है।

बता दें नया वायरस कोरोना की तरह से तेजी से फैल सकता है लेकिन इससे मरने वालों की संख्‍या इबोला से भी 50 से 90 फीसदी ज्‍यादा हो सकती है। गौरतलब है कि प्रोफेसर जीन ने वायरस का पता लगाने के लिए जिस नमूने को लिया था, उसे बेल्जियम और अमेरिका भेजा गया जहाँ वैज्ञानिकों ने पाया कि यह खून में वार्म के आकार के वायरस मौजूद है। बता दें इबोला होने पर खून बहने लगता था और मरीज की मौत हो जाती है।

कॉन्गो के Yambuku Mission Hospital में पहली बार रहस्यमय बीमारी की पुष्टि इबोला के रूप में हुई थी और तब हॉस्पिटल के 88 फीसदी मरीज और 80 फीसदी स्टाफ की जान इबोला ने ले ली थी।

महिलाओं ने कपड़े फाड़े, छतों से बरसाए पत्थर: रेहान को पकड़ने पहुँची UP पुलिस पर जानलेवा हमला

कानपुर के हिस्ट्रीशीटर रेहान उर्फ गुड्डू को पकड़ने गई बेकनगंज पुलिस टीम पर आरोपितों के साथियों ने पथराव कर दिया। यहाँ तक कि पुलिस से मुहल्ले के लोग भी भिड़ गए। किसी तरह बेकनगंज थाने के दरोगा व सिपाही वहाँ से जान बचाकर भाग निकले। बता दें कि रेहान डी 80 गैंग का सरगना है।

मामला कानपुर के कर्नलगंज क्षेत्र के गम्मू खाँ के हाते का है। यहाँ टॉप 10 अपराधी को पकड़ने पहुँची पुलिस से लोग भिड़ गए। वहीं महिलाओं ने कपड़े फाड़कर हंगामा किया। अराजक तत्वों ने छतों से पुलिस टीम पर पथराव कर दिया। बवाल की जानकारी पर कई थानों की फोर्स मौके पर पहुँची, लेकिन तब तक हिस्ट्रीशीटर अपने भाइयों के साथ रफूचक्कर हो चुका था

पुलिस के अनुसार गम्मू खाँ का हाता निवासी रेहान उर्फ गुड्डू शातिर हिस्ट्रीशीटर व टॉप 10 मोबाइल चोर है। उसके भाई भी हिस्ट्रीशीटर हैं। रेहान इन दिनों शुक्लागंज में रहता है। जबकि उसके दो भाई गम्मू खाँ का हाता में रहते हैं और दो अन्य भाई बजरिया थानाक्षेत्र में रह रहे हैं। मोबाइल चोरी व लूट के मामले में बेकनगंज थाने के दारोगा मो. नईम शनिवार (जनवरी 02, 2021) देर शाम दो सिपाहियों सलमान व मुश्ताक के साथ रजाकत को पकड़ने के लिए हाते में पहुँचे।

उन्हें सूचना मिली थी कि रेहान भी भाइयों से मिलने आया है। जैसे ही पुलिस टीम के आने की जानकारी आरोपित के घरवालों को हुई, कई महिलाएँ हाथों में डंडे लेकर पुलिस से भिड़ने लगीं।

यहाँ तक कि कुछ महिलाओं ने कपड़े फाड़कर पुलिस टीम पर ही आरोप लगाने शुरू कर दिए। इसके बाद अचानक छतों से कुछ युवकों ने पत्थर चला दिए। पत्थर चलते ही दारोगा और सिपाही जान बचा कर वहाँ से भागे। उन्होंने बेकनगंज थाना प्रभारी को घटना की जानकारी दी।

इसके बाद बेकनगंज व कर्नलगंज थाने की फोर्स मौके पर पहुँची। हालाँकि इस बीच रजाकत व उसके भाई फरार हो चुके थे। कर्नलगंज सीओ दिनेश कुमार शुक्ला ने बताया कि दारोगा की तहरीर पर आरोपितों के खिलाफ बलवा, सरकारी कार्य में बाधा डालने, मारपीट करने आदि धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। जल्द ही आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

विकास दुबे कांड से कोई सीख नहीं

गौरतलब है कि पिछले दिनों कानपुर के चौबेपुर के बिकरू गाँव में दबिश देने गई पुलिस टीम पर हमला कर आठ पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी गई थी। नक्सलियों की तरह 8 पुलिसकर्मियों की बेरहमी से हत्या करने वाला मोस्टवांटेड हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे एमपी के उज्जैन में पकड़ा गया। हालाँकि बाद में वह भागने की कोशिश करते हुए पुलिस एनकाउंटर में मारा गया

एसओ कौशलेंद्र प्रताप सिंह ने बताया था कि उस रात पुलिस एनकाउंटर के इरादे से नहीं गई थी और न ही उनके पास पर्याप्त मात्रा में असलहे थे। लेकिन विकास दुबे और उसका गैंग पूरी तैयारी में था। घायल एसओ कौशलेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि 2 जुलाई की रात करीब 12 बजे दबिश देने की तैयारी थी।

उनके साथ उनकी टीम थी, साथ ही चौबेपुर थाने के एसओ विनय तिवारी, माय फोर्स व एक अन्य थाने की फोर्स भी थी। इसके अलावा सीओ भी थे। सभी लोगों को करीब साढ़े 12 बजे विकास के घर से करीब 200 मीटर की दूरी पर गाड़ी से उतरना पड़ा। रास्ते में जेसीबी को इस तरह से खड़ा किया गया था कि कोई गाड़ी न निकल सके। पैदल भी एक बार में एक ही आदमी निकल सके।

इसके साथ ही उन्होंने बताया कि वहाँ पर पर्याप्त मात्रा में रोशनी न होने की वजह से वो लोग विकास दुबे की गैंग को नहीं देख पा रहे थे, मगर वो लोग उनको अच्छी तरह से देख रहे थे। उन्होंने बताया कि तीन तरफ से फायरिंग हो रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे एक ही समय में 15 लोग गोली चला रहे हों। उन्होंने आरोपितों के पास सेमी ऑटोमेटिक वेपन्स होने की भी आशंका जताई थी।

मुनव्वर फारूकी, ये चुटकुला सुनो, बहुत मजा आएगा… | Ajeet Bharti on Munawar Faruqui

लिबरलों द्वारा शार्ली एब्दो के कार्टूनिस्टों की हत्या, तत्पश्चात् सैमुअल पेटी की गर्दन काटने को मुनव्वर फारूकी की गिरफ्तारी के समानांतर रखना, बताता है कि इनके तर्क कितने वाहियात हैं जहाँ कुछ बोलने के लिए किसी राष्ट्र के कानून के खिलाफ जा कर हत्या और कुछ बोलने पर राष्ट्र के कानून के आलोक में की गई गिरफ्तारी बराबर बात है।

पूरा वीडियो यहाँ क्लिक कर के देखें

रेड बिकनी गर्ल: 18 की उम्र और जहाज में छेद कर समुद्र में छलांग… कम्युनिस्टों को चकमा देने की एक नायाब कहानी

70 का दशक। सोवियत यूनियन (USSR) और अमेरिका की प्रतिद्वंद्विता। दुनिया कोल्ड वॉर के दौर से गुजर रही थी। उसी दौर में कई लोगों ने USSR से पलायन भी किया। इनमें एक 18 साल की लड़की भी थी, जिसे दुनिया ने ‘रेड बिकनी गर्ल’ के नाम जाना।

रेड बिकनी गर्ल यानी लिलियाना गैसिन्काया (Liliana Gasinskaya) को तब सनसनी बनीं जब वह कम्युनिस्टों को चकमा देकर ऑस्ट्रेलिया पहुँचने में कामयाब रही। वह भी समुद्री रास्ते से। इस घटना के 41 साल बाद केजीबी की वह सीक्रेट फाइल सामने आई है जिसमें गैसिन्काया के बारे में सूचनाएँ हैं।

1979 में ऑस्ट्रेलिया की मीडिया में सिर्फ गैसिन्काया की ही चर्चा थी। ‘डेली मिरर’ ने उन्हें ‘लाल बिकनी वाली सुंदरी’ कहा था, क्योंकि वो इसी ड्रेस में क्रूज के एक छेद से किसी तरह निकलीं और तैरते हुए सिडनी हार्बर पहुँची थीं। लिलियाना गैसिन्काया को ऑस्ट्रेलिया में शरण मिली और उन्होंने वहाँ की पत्रिका ‘पेंटहाउस’ के लिए न्यूड तस्वीरें भी क्लिक करवाईं। पत्रिका ने उनकी तस्वीर को बीच के दो पन्नों पर जगह दी और लिखा – ‘लाल बिकनी वाली सुंदरी, बिना बिकनी के।’

वैसे तो उनकी इस बहादुरी भरी तैराकी के 41 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन अब जाकर रूस की खुफिया एजेंसी KGB की वो फाइल सामने आई है, जिसमें इसके डिटेल्स हैं। असल में वो ‘SS Leonid Sobinov’ जहाज में लिफ्ट अटेंडेंट और वेट्रेस थीं। ये जहाज ओडेस्सा के ब्लैक सी पोर्ट से ऑपरेट किया जाता था। लाल बिकनी में ऑस्ट्रेलिया पहुँचीं लिलियाना गैसिन्काया को एक व्यक्ति अपने पालतू कुत्ते के साथ दिखा, जिससे उन्होंने कपड़े और मदद माँगी थी।

हालाँकि, इस दौरान एक अखबार की भी चाँदी हो गई और इससे पहले कि ऑस्ट्रेलिया या सोवियत रूस की खुफिया एजेंसियाँ उन्हें ढूँढ पाती, उससे पहले ही ‘The Mirror’ उन्हें लेकर एक सेक्रेट जगह पर ले गई और उसके बाद कई एक्सक्लूसिव खबरों के साथ-साथ बिकनी में उनकी कई तस्वीरें भी प्रकाशित की। लिलियाना ने बताया था कि उन्होंने एक बिकनी और अँगूठी के अलावा सब कुछ छोड़ दिया था, क्योंकि उन्हें पता था कि वो कुछ भी लेकर जाएँगी तो वो लोग उन्हें पकड़ लेंगे।

वो जहाज में एक बिस्तर के ऊपर चढ़ीं और फिर एक पोर्टहोल के माध्यम से बाहर निकल आईं। KGB का एक अधिकारी लियोनिड सोबिनोव उनका पीछा कर रहा था और ऑस्ट्रेलिया के तटों पर लोगों से पूछा कि क्या उन्होंने किसी ऐसी लड़की को देखा है। वहाँ के कम्युनिस्ट सरकार ने इसे गद्दारी के रूप में देखा। जनवरी 14, 1979 को लिलियाना गैसिन्काया ने क्रू पार्टी में हिस्सा नहीं लिया था और सिरदर्द का बहाना बनाया था।

उनके भागने के बाद जहाज में एक कागज का टुकड़ा भी मिला था, जिसमें उन्होंने अंग्रेजी के कुछ शब्द सीख कर प्रैक्टिस किए थे। इसमें शामिल था कि वो कैसे ऑस्ट्रेलिया में शरण के लिए मदद माँगेंगी। उनकी माँ एक अभिनेत्री और पिता संगीतकार थे। USSR में उनके खिलाफ एक आपराधिक मामला भी चल रहा था। वो अपने साथ रुपए और पासपोर्ट तक नहीं ले गई थीं, जो जहाज के केबिन में ही पड़े रह गए थे।

अब भी रूस के ख़ुफ़िया अधिकारी यही मानते हैं कि लिलियाना गैसिन्काया को एक प्रोपेगेंडा की तरह अमेरिका ने बाहर निकाला था। शिप के कप्तान का कहना था कि वो रात की पार्टियों में अजनबियों से मिलती थीं और उन्हें किस करती थीं, जबकि जहाज पर विदेशियों के साथ नजदीकियाँ बढ़ाने पर प्रतिबन्ध था। वो अंग्रेजी सुधारने के बहाने ये सब करती थीं। विदेशियों से दूर रखने के लिए 2 बार उनका ट्रांसफर भी हुआ था।

लिलियाना को ‘पेंटहाउस’ के फोटोशूट के लिए $15000 मिले थे। उनका कहना था कि सोवियत संघ (USSR) में तो ऐसा कुछ भी करने पर प्रतिबंध था, जो सेक्सी हो। एक फोटोग्राफर से रिलेशनशिप के कारण उन्हें DJ की नौकरी मिली और एक टीवी शो में भी काम मिला। उनके तीन बच्चे भी हुए। उन्होंने एक शादी भी की, जो 6 वर्षों के बाद ही टूट गई। वो फिर लाइमलाइट से दूर लंदन जाकर रहने लगीं। भागने के एक साल बाद ही सोवियत ने उनकी नागरिकता छीन ली थी।

‘जिस अलीपुर जेल को नीले-सफेद रंग से पुतवाया, वही TMC नेताओं का होगा ऑफिस’

पश्चिम बंगाल में इस साल होने वाले विधानसभा चुनावों के पहले प्रदेश में सियासी पारा काफी गर्म है। राजनीतिक दलों के नेताओं का एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप जारी है। इसी क्रम में भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो ने तृणमूल कॉन्ग्रेस पर हमला बोला है। उन्होंने भाषण देते हुए कहा कि 2021 के बाद अलीपुर केंद्रीय जेल (Alipore Central Jail) टीएमसी कार्यकर्ताओं का कार्यालय होगा। टीएमसी के सभी नेता वहीं रहेंगे। 

शनिवार (2 जनवरी 2021) को पुरबा मेदनीपुर में एक जनसभा को सम्बोधित करते हुए भाजपा नेता ने बंगाल सरकार की जम कर आलोचना की। उन्होंने टीएमसी छोड़ कर भाजपा में शामिल हुए नेताओं से परिवार की तरह साथ काम करने का निवेदन किया। आने वाले समय में प्रदेश के सत्ताधारी के सामने पैदा होने वाली चुनौतियों के लिए आगाह भी किया। 

बाबुल सुप्रियो ने भाषण के दौरान कहा, “तृणमूल कॉन्ग्रेस एक बुरी कंपनी है। एक तूफ़ान आ रहा है, जो टीएमसी को पूरी तरह तबाह कर देगा। टीएमसी का साथ छोड़ कर हमारे साथ आए तमाम नेताओं से मेरा अनुरोध है कि वह एक परिवार की तरह मिल कर मेहनत करें। सिर्फ उससे ही हमारी पार्टी को प्रदेश में मजबूती मिल सकती है।” 

इसके बाद ममता बनर्जी की प्रदेश सरकार पर तंज कसते हुए भाजपा सांसद ने कहा, “दीदी ने इकलौता अच्छा काम यही किया है, जो अलीपुर केंद्रीय जेल को नीले और सफ़ेद रंग से पुतवा दिया है क्योंकि कुछ समय बाद उनके सभी कार्यकर्ताओं को वहीं रहना है। 2021 के बाद वह तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं का कार्यालय बन जाएगा।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जनवरी के अंतिम हफ्ते में (29-30 जनवरी) पश्चिम बंगाल का दौरा कर सकते हैं। यह दौरा प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों को मद्देनज़र रखते हुए तय किया गया है। 9 जनवरी को भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा बीरभूम जिले का दौरा करेंगे। इस दौरान वह प्रदेश के भीतर संगठन के शीर्ष नेतृत्व से मुलाक़ात करेंगे और रोड शो में भी शामिल होंगे।           

‘जगन ने हिंदुओं से विश्वासघात किया’: भगवान राम का सिर तो सुब्रमण्येश्वर स्वामी की मूर्ति का तोड़ दिया था हाथ

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी पर तुष्टिकरण के आरोप पहले भी लगते रहे हैं। राज्य में मंदिरों पर हमले बढ़ने और उनकी चुप्पी से इन आरोपों को बल मिला है। पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने उन पर हिंदुओं से विश्वासघात करने और धर्मांतरण को बढ़ावा देने के आरोप लगाए हैं।

चंद्रबाबू नायडू ने शनिवार (जनवरी 2, 2021) को कहा कि जगन मोहन रेड्डी की सरकार आंध्र प्रदेश में हिंदू मंदिरों की रक्षा करने में पूरी तरह से विफल रही। रामतीर्थ पहाड़ी पर श्री कंदापानी मंदिर में भगवान राम की मूर्ति का विध्वंस पूजा स्थलों पर हमलों की लगातार होती घटनाओं का एक और उदाहरण था। चंद्रबाबू नायडू ने मुख्यमंत्री रेड्डी पर ‘हिंदुओं के साथ विश्वासघात’ करने का आरोप लगाते हुए कहा कि वह राज्य में धर्म परिवर्तन को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं।

नायडू ने विजयनगरम जिले के रामतीर्थम में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा, “जगन रेड्डी ईसाई हो सकते हैं। लेकिन यह सोचना कि वह अपने शक्ति का इस्तेमाल हिंदुओं को धर्मांतरित करने के लिए कर सकते हैं, गलत है। अगर सत्ता में लोग धर्मांतरण का सहारा लेते हैं, तो यह विश्वासघात होता है। किसी को भी इस तरह की धार्मिक असहिष्णुता नहीं दिखानी चाहिए। अयोध्या के राम मंदिर में ‘जय श्री राम’ का नारा गूँजता है। ठीक इसी तरह, रामतीर्थम के राम मंदिर को हमेशा उत्तर आंध्र में सम्मान के साथ देखा गया है। ऐसे मंदिर में उपद्रवियों ने भगवान राम की मूर्ति के साथ बर्बरता की है, लेकिन सरकार दोषियों को पकड़ने के लिए कोई कदम नहीं उठा रही है।”

नायडू ने विशाखापत्तनम में रामतीर्थ मंदिर का दौरा किया, जहाँ भगवान राम की 400 साल पुरानी मूर्ति का सिर धड़ से काट कर अलग कर दिया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि रेड्डी का प्रशासन जान-बूझकर मंदिरों पर हमलों को रोकने में धीमी गति से चल रहा है, क्योंकि सीएम ईसाई हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 19 महीनों में मंदिरों, मूर्तियों और पुजारियों पर 127 से अधिक हमलों में अब तक एक भी आरोपित को गिरफ्तार नहीं किया गया है।

उन्होंने कहा कि रेड्डी हमेशा धर्मनिरपेक्ष बयानबाजी करते रहते हैं, लेकिन उनके राज्य में जिस तरह से दूसरे धर्म की भावनाओं का अपमान किया जा रहा है, वह बर्दाश्त करने के लायक नहीं है। नायडू ने कहा कि रेड्डी की अपनी व्यक्तिगत धार्मिक भावनाएँ हैं। उन्होंने शपथ ग्रहण के दौरान बाइबल अपने पास रखा था। लोटस पॉन्ड स्थित उनके महलनुमा आवास पर ‘क्रॉस’ की तस्वीर है। मगर ऐसा लगता है कि सीएम की नजर में हिंदू उस भावना के लायक नहीं हैं। उन्हें यह पता होना चाहिए कि राम की प्रतिमा का सिर धड़ से अलग कर देना इस भूमि का अपमान है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, “श्री कोदंडापानी मंदिर का एक महान इतिहास है और इसे 16 वीं शताब्दी में पुसापति परिवार द्वारा बनाया गया था। इसे उत्तर आंध्र प्रदेश का अयोध्या कहा जाता है। मूर्ति के साथ की गई बर्बरता ने हिंदुओं की भावनाओं को आहत किया है। जिन लोगों ने मूर्ति से तोड़फोड़ की और जो लोग दोषियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें भगवान के क्रोध का सामना करना पड़ेगा।”

गौरतलब है कि हाल ही में आंध्र प्रदेश के राजमुंद्री के विघ्नेश्वर मंदिर में भगवान सुब्रमण्येश्वर स्वामी की प्रतिमा को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया। राजमुंद्री का श्रीराम नगर ईस्ट गोदावरी जिले में पड़ता है। राजमुंद्री को आंध्र की सांस्कृतिक राजधानी भी कहते हैं, लेकिन लोगों का दावा है कि यहाँ ईसाई मिशनरियों का बोलबाला है।

इस घटना से 2 दिन पहले ही विजयनगरम जिले के नेल्लीमरला मंडल में एक पहाड़ी पर स्थित मंदिर में अज्ञात उपद्रवियों ने भगवान राम की 400 साल पुरानी मूर्ति को क्षतिग्रस्त कर दिया था। मूर्ति रामतीर्थम गाँव के पास पहाड़ी की चोटी पर स्थित बोडिकोंडा कोदंडाराम मंदिर में विराजमान थी। उपद्रवी ताला तोड़ मंदिर के गर्भगृह में घुसे और और स्वामी कोदंडारामुडु का सिर काटकर अलग कर दिया। मुख्य मंदिर पहाड़ी की तलहटी में है।

इसके अलावा वंतालमामिडी के पड़ेरु घाट पर स्थानीय लोगों की इष्ट देवी कोमलम्मा की प्रतिमा के साथ छेड़छाड़ की गई। ये मंदिर विज़ाग एजेंसी में स्थित मोडकोंदम्मा पडालू मंदिर के सामने स्थित है।

घर के बाहर खेल रही थी 5 साल की बच्ची, खेत में ले गया महबूब मंसूरी; मुँह में कपड़ा ठूँस कर रेप

भागलपुर के शाहकुंड थाना क्षेत्र से एक पाँच साल की बच्ची के साथ रेप का मामला सामने आया है। गाँव का ही रहने वाला मो. महबूब मंसूरी घर के पास खेलती पाँच साल की बच्ची को उठाकर खेत में ले गया और मासूम के मुँह में कपड़ा ठूँस कर उसके साथ बलात्कार किया। बच्ची की हालत गंभीर बताई जा रही है। वहीं आरोपित फरार है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, घटना शुक्रवार (1 जनवरी, 2020) शाम की है। 5 वर्षीय बच्ची अपने घर के बगल की गली में पड़ोस के अन्य बच्चों के साथ खेल रही थी। इसी दौरान आरोपित महबूब मंसूरी उसे बहला-फुसलाकर कर पास के एक खेत में ले गया। बच्ची के चीखने की आवाज लोगों तक न पहुँचे इसलिए आरोपित ने उसके मुँह को एक कपड़े से बाँध दिया और दुष्कर्म को अंजाम दिया।

पीड़िता की माँ ने महबूब मंसूरी के खिलाफ शाहकुंड थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है। एफआईआर में बच्ची की माँ ने बताया कि अंधेरा होने के बाद जब बेटी घर नहीं आई तो हमने उसकी खोजबीन शुरू की। जिस दौरान उन्होंने घटनास्थल पर आरोपी को रंगेहाथ पकड़ भी लिया। हालाँकि आरोपित उन्हें चकमा देकर मौके से फरार हो गया।

गंभीर हालत में परिजनों ने बच्ची को इलाज के लिए शाहकुंड सीएचसी में भर्ती कराया। लेकिन बच्ची की नाजुक स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे बेहतर इलाज के लिए जेएलएनएमसीएच रेफर कर दिया है। फिलहाल पुलिस आरोपित की धर-पकड़ में जुटी है और मामले की जाँच की जाँच कर रही है। शाहकुंड थानाध्यक्ष विश्व बंधु कुमार ने बताया कि पुलिस मो. महबूब मंसूरी की तलाश में जुटी है और उसकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है।

नेपाल में अब ‘लाल सलाम’ नहीं, अपनों को ‘सड़ा हुआ फल’ ब​ता रहे कॉमरेड: खिसियानी ओली, प्रचंड और माधव को नोचे

नेपाल में शनिवार (जनवरी 2, 2021) को कम्युनिस्ट पार्टी (NCP) के सक्रिय कैडरों की बैठक हुई, जिसमें प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के अलावा पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ और माधव कुमार नेपाल भी शामिल हुए। इस दौरान पीएम ओली ने मजाक-मस्ती में ही दोनों पूर्व प्रधानमंत्रियों की निंदा की और उन पर उन्हें अपदस्थ करने की साजिश रचने का आरोप लगाया। उन्होंने बैठक में दोनों पूर्व पीएम के लिए ‘सड़े हुए आम जो गिर पड़े हैं’ वाली कहावत का प्रयोग किया।

इस बैठक के बारे में नेपाल के अख़बार ‘द हिमालय टाइम्स’ ने खबर प्रकाशित की है। बैठक में पीएम ओली ने कहा, “नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी में दो नट-बोल्ट ऐसे थे, जिनमें जंग लग गई थी। जब से वो ढीले पड़ कर गिर गए हैं, तब से NCP का कामकाज भी ठीक हो गया है।” ओली ने बताया कि NCP के उनके विरोधी गुट ने संगठन का वैध नेतृत्व होने का दावा किया है, जिस बारे में उन्हें तब पता चला जब चुनाव आयोग ने उन्हें इससे सम्बंधित पत्र भेजा।

उन्होंने पूछा कि क्या किसी मकान मालिक के लिए ये अनिवार्य है कि वो अपने ही घर पर दावा करने के लिए एप्लिकेशन फाइल करे? उन्होंने कहा, “इस पार्टी को हमने बनाया है। हमें किसी की अनुमति लेने की ज़रूरत नहीं है। दो सड़े हुए फल जो गिर चुके हैं, अब वो पूरे पेड़ का मालिक होने का दावा ठोक रहे हैं।” उन्होंने सड़क पर उतर कर संसद भंग करने के निर्णय के खिलाफ प्रदर्शन करने को लेकर भी विरोधी गुट को आड़े हाथों लिया।

नेपाल के पीएम ओली ने दावा किया है कि NCP का वो गुट ही वैध है, जिसका नेतृत्व वो करते हैं। ओली ने दावा किया कि उन्होंने किसी को भी अपने पद से नहीं हटाया है, चाहे वो सह-अध्यक्ष प्रचंड हों या माधव या फिर झलनाथ खनाल। वहीं उप-प्रधानमंत्री ईश्वर पोखरेल ने भी दोनों नेताओं पर पीएम ओली को हटाने के लिए पार्टी तोड़ने का आरोप लगाया। ये बैठक काठमांडू में हुई, जिसमें काफी गहमा-गहमी रही।

उधर राजनीतिक उथल-पुथल के दौर से गुजर रहे नेपाल में संवैधानिक राजतंत्र और हिंदू राष्ट्र की माँग जोर पकड़ रही है। इसके समर्थन में राजधानी काठमांडू की सड़कों पर मार्च निकाला गया। पूर्व उप-प्रधानमंत्री कमल थापा ने संवैधानिक राजतंत्र (Constitutional Monarchy) बहाल करने और नेपाल को पुनः हिन्दू राष्ट्र घोषित करने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की माँग की है। उन्होंने माँग पूरी नहीं होने पर बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन की चेतावनी दी है।  

इंग्लैंड के बाद अब दक्षिण अफ्रीका में कोरोना वायरस का नया वैरिएंट, 501Y.V2 फैल चुका है 4 देशों में

विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन के वुहान में पहले कोरोना वायरस मामले के बाद से ही दुनिया भर में कम से कम चार नए प्रकार के कोरोनोवायरस का पता चला है। चीन के वुहान में नवंबर 2019 में संक्रमण की शुरुआत हुई थी। संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी को ऐसे कई संक्रमण के असामान्य मामले मिले हैं, जो संभवतः SARS-CoV-2 के वेरिएंट के कारण हैं।

WHO ने कहा कि SARS-CoV-2 का एक वेरिएंट D614G के सब्स्टीट्यूशन के साथ जीन स्पाइक प्रोटीन में मिला, जो जनवरी के अंत या फरवरी 2020 की शुरुआत में उभरा। कई महीनों बाद D614G ने अपने आप को SARS-CoV-2 में पूरी तरह से परिवर्तित कर लिया, जिसकी पहचान चीन में हुई।

डब्ल्यूएचओ ने बताया कि जून 2020 में वायरस में यह परिवर्तन वैश्विक रूप से प्रसारित हो गया, जोकि कोरोना वायरस महामारी का अधिक प्रभावी रूप बन कर उभरा।

कई अध्ययनों से इस बात का पता चला है कि D614G सब्स्टीट्यूशन के साथ दूसरा स्ट्रेन पहले स्ट्रेन की तुलना में कहीं ज्यादा संक्रमित और एक दूसरे में ट्रांसफर हो सकेगा। हालाँकि यह “अधिक गंभीर बीमारी का कारण नहीं बनता या मौजूदा निदान, चिकित्सा, टीके, या सार्वजनिक स्वास्थ्य निवारक उपायों की प्रभावशीलता में परिवर्तित नहीं होगा।”

बता दें कि हाल ही में कोरोना वायरस के दूसरे प्रकार की खबर आने से पहले इसके एक और वैरिएंट के बारे में अगस्त और सितंबर 2020 में रिपोर्ट किया गया था जोकि खेत में रहने वाले एक प्रकार के ऊदबिलाव के बालों के संक्रमण से जुड़ा हुआ था, जो बाद में मनुष्यों में फैल गया। ताजा कोरोनावायरस वैरिएंट डेनमार्क के नॉर्थ जुटलैंड से फैला है, जिसकी पहचान “क्लस्टर 5” के रूप में हुई थी। सितंबर 2020 में केवल 12 मामले इसके देखे गए थे।

ब्रिटेन सरकार ने 14 दिसंबर, 2020 को एक वैरिएंट के बारे में सूचना दी थी। जिसका नाम SARS-CoV-2 VOC 202012/01 दिया गया। यह वैरिएंट SARS-CoV-2 बायोलॉइकॉली पहले वायरस से संबंधित नहीं था, जो उस समय यूके में मौजूद था। यह स्पष्ट नहीं है कि SARS-CoV-2 VOC 202012/01 की उत्पत्ति कैसे और कहाँ से हुई है।

वैक्सीन बनने से पहले ही धीरे-धीरे समय के साथ पूरे ब्रिटेन में कोरोनावायरस के अधिक मामलों का पता चला है। कोरोना वायरस के नए प्रकार VOC-202012/01 को 30 दिसंबर तक 31 अन्य देशों/क्षेत्रों/6 WHO क्षेत्रों में से पाँच में पाया गया है।

वहीं 18 दिसंबर को दक्षिण अफ्रीका ने SARS-CoV-2 के एक नए वैरिएंट के बारे में दुनिया को सूचित किया था जोकि वहाँ के तीन प्रांतों में तेजी से फैल रहा है। दक्षिण अफ्रीका ने इस वेरिएंट का नाम 501Y.V2 रखा है।

गौरतलब है कि दक्षिण अफ्रीका में जिस वैरिएंट के बारे में रिपोर्ट किया गया था, वह अब तक चार अन्य देशों में फैल चुका है।

‘मोहम्मद रियाज शेख’ 11 साल बाद गिरफ्तार, लंबी दाढ़ी रख मुस्लिम लड़की से शादी कर बदल ली थी पहचान

11 साल पहले एक महिला को बुरी तरह पीटने के बाद पुलिस की नजरों से फरार हुआ अपराधी अब जाकर मुंबई पुलिस की पकड़ में आया है। 38 वर्षीय राजा भीमराव रामपुरे ने अपना मजहब और नाम तक बदल लिया था। वो मोहम्मद रियाज शेख के नाम से छद्म मुस्लिम पहचान के साथ रह रहा था। नेहरू नगर पुलिस ने दिसंबर 2010 में उसके खिलाफ एक महिला को बुरी तरह पीटने और दुर्व्यवहार करने का मामला दर्ज किया था।

उसने कुर्ला ईस्ट में इस घटना को अंजाम दिया था। इसके बाद वो पुलिस की नजरों से बचने के लिए फरार हो गया। पुलिस को उसका कोई सुराग नहीं मिल पा रहा था। लेकिन, इस घटना के लगभग 11 वर्षों बाद उसे गुरुवार (दिसंबर 31, 2020) को भिवंडी से धर-दबोचा गया। वो 2011 से यहीं रह रहा था। जबकि 2010 में वो वत्सलाबाई नाईक नगर में रहा करता था। वो अपनी बीवी और बेटी के साथ वहाँ रहा करता था।

उसने अपने दो दोस्तों के साथ मिल कर महिला की पिटाई की थी। इसके लिए उन्होंने बाँस की छड़ी और लकड़ी के फट्टों का इस्तेमाल किया था। तीनों पीड़िता के ही घर में मरम्मत का कार्य कर रहे थे और उसी दौरान पेमेंट को लेकर उनकी महिला के साथ बहस हुई थी। आरोपित बतौर कंस्ट्रक्शन मजदूर काम करता था। नेहरू नगर पुलिस थाने के सब इंस्पेक्टर दयानेश्वर पाटिल ने उसकी गिरफ़्तारी की पुष्टि की है।

अब पुलिस उस महिला की तलाश कर रही है, जिसने ये शिकायत दर्ज कराई थी। आरोपित के खिलाफ IPC की धारा 326 (किसी घातक हथियार से किसी को गंभीर रूप से जख्मी कर देना), 323 (स्वेच्छा से जानबूझकर किसी व्यक्ति को चोट पहुँचाना), 504 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझ कर अपमान करना) और 34 (जब कोई आपराधिक कृत्य सभी व्यक्तियों ने सामान्य इरादे से किया हो, तो प्रत्येक व्यक्ति ऐसे कार्य के लिए बराबर जिम्मेदार होता है) के तहत मामला दर्ज किया गया था।

इसके दोनों साथियों को तभी गिरफ्तार कर के उनके खिलाफ चार्जशीट तैयार कर ली गई थी। लेकिन, राजा भीमराव रामपुरे परिवार सहित कुर्ला ईस्ट के अपने किराए के घर से निकल भागा था। कुछ दिनों के लिए वो लोग अपने गृह इलाके शोलापुर में ही रहे। जब वो लौटा तो उसने अपनी पहचान बदल ली। उसने एक मुस्लिम लड़की से शादी कर रखी है। इसीलिए, उसने पुलिस को अपना मजहब बदल कर भ्रमित करने की कोशिश की।

पुलिस ने उसका जो PAN और आधार कार्ड जब्त किया है, उन सबमें उसका नाम मोहम्मद रियाज शेख ही है। सब-इंस्पेक्टर पाटिल फरार आरोपितों की तलाश की ही जिम्मेदारी संभालते हैं। उन्हें हाल ही में एक टिप-ऑफ मिला था कि आरोपित वाशी नाका इलाके में रह रहा हो सकता है, जिसके बाद 15 दिन पहले उसकी तलाश शुरू हुई। पुलिस यूँ तो उसके पुराने घर वाले इलाके में किसी अन्य आरोपित की तलाश में गई थी, लेकिन उसके मामले की भी इस दौरान तहकीकात की गई।

एक स्थानीय व्यक्ति ने आरोपित का पता दिया, लेकिन वो वहाँ नहीं मिला। बाद में उसके एक दूर के सम्बन्धी से उसका पता मिला। सम्बन्धी को नहीं पता था कि वो इस मामले में आरोपित है। उसकी पत्नी को कह कर उसे खेमानी रोड के उस्माननगर में बुलाया गया और कहा गया कि एक मामले में उसका बयान लेना है। वो वहाँ पहुँचा, लेकिन पुराने मामले की याद आने पर भागने की कोशिश की। फिर पुलिस ने उसे दबोच लिया।

वो बार-बार कहता रहा कि वो मुस्लिम है, जबकि पुलिस जिसकी तलाश कर रही है उस आरोपित का नाम हिन्दू वाला है। उसने अपनी दाढ़ी भी मुस्लिमों की तरह ही बढ़ा रखी थी, ताकि पुलिस को कन्फ्यूज कर सके। लेकिन, उसके रिश्तेदार ने थाने आकर उसकी पहचान की, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। अब उसे जुडिशल कस्टडी में रिमांड पर भेजा गया है। उसे नेहरू नगर पुलिस ने गिरफ्तार किया।