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मुंबई पुलिस जावेद अख्तर की शिकायत पर कंगना के खिलाफ करेगी जाँच, कोर्ट ने दी मंजूरी: जानिए क्या है मामला

अंधेरी मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट आरआर खान ने आज मुंबई पुलिस को गीतकार जावेद अख्तर द्वारा अभिनेत्री कंगना रनौत के खिलाफ दर्ज आपराधिक मानहानि के मामले में जाँच के निर्देश दे दिए हैं। बता दें जावेद अख्तर ने एक टीवी इंटरव्यू के दौरान उनके खिलाफ कुछ बयान देने के लिए कंगना रनौत के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था। कोर्ट ने पुलिस को अगले साल 16 जनवरी तक अपनी रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है।

जावेद अख्तर के वकील निरंजन मुंदरगी ने कहा कि उनके मुवक्किल का नाम बेवजह संवेदनशील मामले में घसीटा गया था, जबकि उनका साक्षात्कार दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु को लेकर था। मुंदरगी ने कहा कि कथित तौर पर एक ‘बॉलीवुड सुसाइड गिरोह’ में अख्तर का संदर्भ देते हुए रनौत ने उनका नाम भी घसीटा था।

मामले को लेकर अधिवक्ता मुंदरगी ने अदालत से आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 202 को लागू करने का अनुरोध किया और या तो गवाह को बयान दर्ज करने के लिए अदालत में बुलाने या पुलिस को मामले में जाँच करने के लिए निर्देश देने को कहा था।

गौरतलब है कि इस साल शुरुआत में रिपब्लिक टीवी को दिए एक साक्षात्कार में कंगना रनौत ने बॉलीवुड गीतकार जावेद अख्तर के ‘नास्तिक’ होने के बारे में खुलासा करते हुए कहा था कि जावेद अख्तर जैसे लोग, जो ‘नास्तिक’ होने का दिखावा करते हैं, वास्तव में, इंडस्ट्री के भीतर ऐसे लोगों पर नज़र रखते हैं कि वे इस्लाम के समर्थक हैं या नहीं? कंगना ने कहा कि कि ये लोग इंडस्ट्री में इस्लाम के समर्थकों या उनके हित में रहने वाले लोगों को ‘फ़िल्टर’ करते हैं और उन्हें बढ़ावा देते हैं।

इसके बाद दिए ‘रिपब्लिक टीवी’ को दिए एक और इंटरव्यू में कंगना रनौत ने बताया था कि जावेद अख्तर ने उन्हें अपने घर बुला कर कहा था, “तुम्हें आत्महत्या करनी पड़ेगी क्योंकि वह तुम्हें जेल में बंद कर देंगे। उन्होंने (ऋतिक रोशन) तुम्हारे खिलाफ़ सारे सबूत इकट्ठा कर लिए हैं। वह समझ चुके हैं कि केस पूरी तरह उनके हाथों में है। तुम्हें आत्महत्या करनी पड़ेगी क्योंकि तेरा मुँह काला हो जाएगा तो तू जाएगी कहाँ?” अब जावेद अख्तर ने इस बयान को लेकर कंगना के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर कर दिया है।

इन्हीं इंटरव्यू को लेकर अख्तर ने रनौत के खिलाफ आईपीसी की धारा 409 और 500 के तहत मानहानि का मुकदमा दायर किया था। उन्होंने कहा था कि रानौत के साक्षात्कार को रिपब्लिक टीवी चैनल और YouTube पर लाखों लोगों ने देखा था। उन्होंने कहा कि साक्षात्कार टाइम्स नाउ और एबीपी न्यूज सहित कई मीडिया चैनलों द्वारा भी कवर किया गया था।

जज को धमकी देने वाले फहीम पाकिस्तानी के पीछे पड़ी यूपी पुलिस, कहा था- ‘किस खिड़की से गोली मारनी, सब तैयारी कर ली है’

उत्तर प्रदेश के बरेली में भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट के स्पेशल जज को पत्र लिखकर गोली मारने की धमकी देने का मामला सामने आया है। पत्र में आरोपित चुन्नीलाल को जमानत नहीं देने पर जज और उनके फैमली को जान से मारने की धमकी दी गई है। बता दें चुन्नीलाल भ्रष्टाचार के मामले में जेल में बंद है। जज ने हाईकोर्ट के महानिबंधक को पूरी मामले की जानकारी दी है।

महानिबंधक के आदेश पर न्यायाधीश मोहम्मद अहमद खान ने उत्तर प्रदेश पुलिस को सूचित किया। जज की शिकायत के आधार पर यूपी पुलिस ने कथित तौर पर धमकी देने वाले फहीम पाकिस्तानी के खिलाफ आईपीसी की धारा 506 के तहत मामला दर्ज किया है। साथ ही पत्र भेजने वाले की तलाश में जुट गई है।

खबरों के मुताबिक, फहीम पाकिस्तानी ने पत्र में न्यायाधीश से कहा कि अगर उन्हें अपने परिवार को जिंदा रखना है तो चुन्नीलाल की जमानत मंजूर कर दे। आरोपित ने लिखा कि वह चुन्नीलाल का जिगरी दोस्त है और वह उसके लिए कुछ भी कर सकता है। उसने बताया कि वह चुन्नीलाल के कहने पर एक बार विधवा पेंशन कार्यालय में काम करने वाले कंप्यूटर ऑपरेटर की हत्या भी कर चुका है।

न्यायाधीश को धमकी देते हुए उसने आगे लिखा कि उसने उनके घर के सारे ठिकानों का पता लगा लिया है। किस खिड़की से गोली मारनी है, सब तैयारी कर ली गई है। अगर उसकी माँग पूरी नहीं की गई तो परिवार समेत उसका खात्मा कर दिया जाएगा। इसके अलावा उसने अंत में लिखा कि काम कर दिया तो बढ़िया दावत नहीं तो नेस्तनाबूद कर देंगे।

वहीं जज ने कहा कि इस पत्र के मिलते ही वह और उनका परिवार डर में जी रहा एवं मानसिक रूप से परेशान है। उन्होंने एसएसपी से उनके और उनके परिवार की सुरक्षा के लिए सशस्त्र सुरक्षाकर्मी उपलब्ध कराने के लिए भी कहा है। इस बीच कोतवाली थाने की एक टीम मुरादाबाद के साथ अन्य ठिकानों पर फहीम पाकिस्तानी को दबिश देने के लिए रवाना हो चुकी है।

इसी तरह के कर्नाटक के एक मजिस्ट्रेट को सैंडलवुड ड्रग मामले में आरोपित अभिनेत्री रागिनी द्विवेदी और संजना गलरानी की रिहाई की माँग करते हुए बम ब्लास्ट करने की धमकी दी गई थी। इसके अलावा धमकी भरे संदेश में डीजे हल्ली और केजी हल्ली के बेंगलुरु दंगों में शामिल गिरफ्तार किए गए लोगों को भी छोड़ने की माँग की गई थी। पत्र ने न्यायाधीश से आरोपित और जेसीपी संदीप पाटिल को जाँच से दूर रखने के लिए भी कहा गया था।

इंडिया टुडे के ‘द लल्लनटॉप’ ने गुजरात के APMC और नए कृषि कानूनों पर फैलाई फर्जी जानकारी: जानिए क्या है सच

एक तरफ जहाँ ‘किसानों’ का विरोध प्रदर्शन जारी है तो वहीं दूसरी तरफ कई ऐसे वीडियो सोशल मीडिया पर घूम रहे हैं, जिसके जरिए भ्रामक जानकारियाँ फैलाई जा रही है। इस बीच इंडिया टुडे ग्रुप के ‘द लल्लनटॉप’ का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें नई दिल्ली में विरोध में हिस्सा ले रहे एक किसान का इंटरव्यू है। YouTube पर 17 मिनट लंबे ऑरिजिनल वीडियो में दो किसानों के साथ एक इंटरव्यू है। किसान का आरोप है कि गुजरात के कच्छ जिले में एपीएमसी बाजार नहीं हैं और किसानों को कम कीमत पर अपनी उपज बेचनी पड़ती है।

क्या कच्छ में APMC बाजार नहीं है?

दावा: 2010 में गुजरात में शिफ्ट होने वाले सिंह ने दावा किया कि उन्हें नहीं पता था कि गुजरात में एपीएमसी बाजार नहीं हैं। सिंह ने कहा कि उन्होंने पहले गेहूँ और कपास उगाने और बेचने की कोशिश की लेकिन उन्हें खरीदार नहीं मिले। उन्हें स्थानीय डीलरों ने अन्य राज्यों की तुलना में बहुत कम कीमत दी। फिर उन्होंने अनार उगाने की कोशिश की, लेकिन बाजार में कीमत इतनी कम थी कि उसे जानवरों को खिलाना पड़ा।

तथ्य: वीडियो का 2-मिनट का स्निपेट कार्टूनिस्ट मंजुल द्वारा ट्विटर पर साझा किया गया था। सोशल मीडिया यूजर्स ने इस दावे का खंडन किया है कि भुज में कोई मंडियाँ नहीं हैं। अगर आप गूगल पर भी खोजते हैं तो आपको आसानी से भुज के एपीएमसी मंडी का पता और डिटेल मिल जाएगा। 

गुजरात राज्य कृषि बाजार बोर्ड की वेबसाइट पर उपलब्ध [PDF] सूची के अनुसार, कच्छ में आठ एपीएमसी बाजार हैं, जिसमें से एक भुज क्षेत्र में स्थित है। दिलचस्प बात यह है कि कच्छ अच्छी गुणवत्ता के फलों के एक्सपोर्ट के लिए काफी लोकप्रिय है, खासकर ड्रैगनफ्रूट और अनार के लिए। रिपोर्टों के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया ने सितंबर 2020 में भारत से अनार के आयात की अनुमति दी है। कच्छ में 150 से अधिक किसान उच्च गुणवत्ता वाले ड्रैगन फ्रूट की खेती कर रहे हैं, जो अब भारत के होटलों में परोसा जा रहा है।

Jio कीमतों को नियंत्रित करेगा

दावा: फिरोजपुर पंजाब के एक और किसान दविंदर सिंह ने बड़ा ही विचित्र दावा किया। उन्होंने कहा कि सभी ने देखा है कि कैसे Jio ने टेलीकॉम मार्केट को बाधित किया है। अब, रिलायंस कृषि क्षेत्र में प्रवेश करेगी और इसे भी बाधित करेगी। उन्होंने दावा किया कि क्षेत्र में निजी प्लेयरों की वजह से कीमतें तेजी से बढ़ेंगी। उनका दावा था कि निजी कंपनियाँ पहले कुछ वर्षों में उच्च कीमत का भुगतान करेंगी, किसानों को निजी बाजारों में फसल बेचने के लिए आकर्षित करेगी।

दविंदर सिंह ने आगे अनुमान लगाया कि सरकार नुकसान के बहाने एपीएमसी बाजारों को बंद कर देगी, जिसके बाद निजी प्लेयर फसल की कीमत कम करना शुरू कर देंगे और किसानों को नुकसान होगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि किसानों को कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के तहत नुकसान होगा क्योंकि उन्हें कानून की समझ नहीं होगी। निजी प्लेयर उन क्लॉजों को शामिल करेंगे, जो किसानों के बजाय उन्हें लाभ देंगे।

तथ्य: कृषि कानूनों के अनुसार, एक प्रावधान है जिसके तहत सरकार मूल्य को नियंत्रित करेगी यदि यह प्रति व्यक्ति 100% और गैर-विनाशकारी उत्पादों में 50% बढ़ जाती है। कीमतों की तुलना पिछले बारह महीनों या पाँच वर्षों में कमोडिटी की लागत से की जाएगी। सरकार सार्वजनिक वितरण योजना (पीडीएस) के तहत उपज की खरीद बंद नहीं करने जा रही है। सरकार ने किसानों से हर समय उच्च खरीफ उपज की खरीद की है। 2021 के लिए अगली उपज के लिए एमएसपी पहले से ही निर्धारित किया गया है और सरकार ने खरीफ की उपज की खरीद पर 67,248.22 करोड़ रुपए खर्च किए हैं।

इसी तरह के दावे गुरुद्वारा बंगला साहिब से कथा वाचक बंता सिंह जी द्वारा किए गए थे, जिसका हाल ही में ऑपइंडिया ने खंडन किया। कई विपक्षी नेता और संघ के नेता भी इसी तरह के दावे कर रहे हैं। इतना ही किसानों ने सिम और फोन सहित Jio उत्पादों के बहिष्कार की घोषणा की है। हाल ही में, Reliance ने TRAI पर एक शिकायत दर्ज की है जिसमें आरोप लगाया गया है कि उसके प्रतिस्पर्धी Airtel और Vi कंपनी के खिलाफ अफवाह फैला रहे हैं कि यह किसान विरोधी है। हालाँकि, एयरटेल ने दावों का खंडन किया था।

फारूक अब्दुल्ला पर ‘क्रिकेट घोटाले में’ ED का बड़ा एक्शन: ₹11.86 करोड़ की संपत्ति जब्त

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) ने बड़ी कार्रवाई की है। प्रवर्तन निदेशालय ने जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (JKCA) स्कैम केस में मनी लॉन्ड्रिंग के मामले के तहत फारूक अब्दुल्ला की 11.86 करोड़ रुपए मूल्य की संपत्ति जब्त कर ली है।

जानकारी के मुताबिक, प्रवर्तन निदेशालय ने फारूक अब्दुल्ला की जो संपत्तियाँ जब्त की है, उसमें दो घर, तीन प्लॉट और एक अन्य प्रॉपर्टी भी शामिल है। इसमें एक घर गुपकार रोड, दूसरा तहसील कटिपोरा, तन्मर्ग, और तीसरा भटंडी जम्मू में बताया जा रहा है। इसके अलावा ईडी ने श्रीनगर के पॉश रेजिडेंसी रोड इलाके में फारूक अब्दुल्ला की व्यावसायिक इमारतों पर भी कार्रवाई की है।

दरअसल, यह मामला जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन के 43.69 करोड़ के घोटाले से जुड़ा हुआ है। साल 2005-06 से 2011-12 तक J&KCA को BCCI से 94.06 करोड़ का फंड अलॉट हुआ था, जो कि J&K में क्रिकेट के डेवलेपमेंट के लिए था। लेकिन आरोप है कि J&K के पूर्व मुख्यमंत्री और J&KCA के तत्कालीन अध्यक्ष फारूख अब्दुल्ला ने अहसान अहमद मिर्जा और मीर मंजूर गजनफर के साथ मिल कर 43.69 करोड़ रुपए का घोटाला किया और अपने बैंक खातों में इन पैसों को जमा कराया या कैश निकाल लिया।

जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन में हुए घोटालों को लेकर जाँच सीबीआई (CBI) को सौंप दी थी, जिसमें फारूख अब्दुल्ला समेत खजांची एहसान एहमद मिर्जा और मीर मंजूर गजनफर समेत दूसरे आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज कर कर जाँच शुरू की थी और उसी के आधार पर ईडी ने मनी लॉड्रिंग का मामला दर्ज किया था।

ईडी ने जाँच में पाया कि 2004 में JKCA के खजांची मुख्तारकांत ने इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद फारुख अब्दुल्ला ने एहसान अहमद मिर्जा को बिना इलेक्शन करवाए कोषाध्यक्ष बना दिया। 2006 में जब JKCA के इलेक्शन हुए तो मीर मंजूर गजनफर JKCA के खजांची बने, लेकिन कोर्ट के स्टे के कारण एहसान अहमद मिर्जा ही चार्ज संभाले रहे। जब कोर्ट का स्टे हट गया तो मीर मंजूर गजनफर को खजांची का चार्ज देने के बजाय फारूख अब्दुल्ला ने एक फाइनेंस कमेटी बना दी और दोनों को JKCA के खाते चलाने की मंजूरी दे दी।

आरोप है कि इसके बाद दोनों ने J&K बैंक में संयुक्त नाम से अपने खाते खुलवा लिए और जेकेसीए के डेवलेपमेंट के लिए आए पैसों को अपने खाते में ट्रांसफर कर लिया। 2009 में हुए JKCA के चुनावों में एहसान अहमद मिर्जा खजांची बने और 2011 में हुए चुनावों में जनरल सेक्रेटरी और फारुख अब्दूल्ला अध्यक्ष बने। आरोप है कि 2004 से 2012 तक लगातार JKCA के खातों से पैसे निजी खातों में जाते रहे।

सीबीआई ने जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन के कोष में गबन के मामले में डा. फारूक अब्दुल्ला समेत जेकेसीए के तत्कालीन महासचिव मोहम्मद सलीम खान, तत्कालीन कोषाध्यक्ष अहमसान अहमद मिर्जा और जम्मू-कश्मीर बैंक के एक कर्मचारी बशीर अहमद पर आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए श्रीनगर की एक अदालत में सितंबर महीने में एक आरोप पत्र भी दाखिल किया था।

जब केंद्रीय मंत्री ने राजदीप से पूछा- ‘क्या आप झूठों के प्रवक्ता हो?’: देखिए कैसे किया हरदीप सिंह पुरी ने ‘खामोश’

‘पत्रकार’ राजदीप सरदेसाई एक बार फिर पत्रकारिता का एक या शायद दो पाठ पढ़ते हुए नज़र आए, जब उन्होंने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी से केंद्र सरकार और पंजाब-हरियाणा के ‘किसानों’ के बीच कृषि सुधार क़ानूनों पर जारी खींचतान को लेकर इंडिया टुडे के प्राइम टाइम पर शुक्रवार (18 दिसंबर 2020) को सवाल पूछा। 

इंडिया टुडे के पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने हरदीप सिंह पुरी से मोदी सरकार पर सवाल पूछते हुए कहा कि क्यों सरकार आंदोलन करने वाले किसानों को भरोसा दिलाने में असफल रही है। ऐसा करते हुए राजदीप ने केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री (civil aviation minister) के मुँह में शब्द डालने का प्रयास किया जिस पर उन्होंने गुस्साते हुए कहा, “राजदीप क्या आप एक तटस्थ प्रस्तोता (objective anchor) हैं या ऐसे लोगों के प्रवक्ता हैं जो झूठे प्रचार या प्रोपेगेंडा को बढ़ावा देने का प्रयास करते हैं।” 

एक ट्विटर यूज़र द्वारा साझा किए गए इंडिया टुडे के इस साक्षात्कार के इस हिस्से में केंद्रीय मंत्री राजदीप सरदेसाई को याद दिलाते हैं कि किस तरह इंडिया टुडे के पत्रकार ने नागरिक उड्डयन के मुद्दे पर सवाल पूछते समय ऐसा ही किया था। विपक्ष द्वारा किसानों को भड़काए जाने की बात करते हुए झल्ला कर हरदीप सिंह पुरी ने कहा, “मुझे आपको सावधान करने की ज़रूरत है, यह पत्रकारिता नहीं है। तब भी मुझे आपके सामने तथ्य रखने पड़े थे और आप फिर वही काम कर रहे हैं।” 

जब राजदीप सरदेसाई ने पूछा कि क्यों मोदी सरकार प्रदर्शन कर रहे किसानों को पहले भरोसा नहीं दिला पाई जब वह सड़कों पर उतरने वाले थे। हरदीप सिंह पुरी ने अपने शब्दों में बिना किसी तरह का टाल मटोल किए बिना कहा कि केंद्र सरकार हमेशा से किसानों का हित सुनिश्चित करना चाहती थी। लेकिन विपक्ष शुरू से ही इस मुद्दे पर राजनीति कर रहा है। केंद्रीय मंत्री के मुताबिक़ चाहे खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को इस मुद्दे पर बयान देना हो या केंद्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर द्वारा दिया गया लिखित आश्वासन हो। केंद्र सरकार प्रदर्शन कर रहे किसानों की चिंताओं पर अपना पक्ष रखने से पीछे कभी नहीं हटी है। केंद्र सरकार की बात दोहराते हुए हरदीप सिंह ने कहा कि कृषि सुधार क़ानूनों से जुड़ी किसी भी तरह की समस्या का हल बातचीत से ज़रिए ही निकाला जाएगा। 

इसके बाद उन्होंने राजदीप को याद दिलाया कि जब यह क़ानून संसद के उच्च सदन में पारित किया गया था तब विपक्ष ने कितना हंगामा किया था। किस तरह कॉन्ग्रेस, टीएमसी, डीएमके और सीपीएम ने इसके विरोध में नारे लगाए थे, शोर मचाया था और क़ानून की प्रतियाँ फाड़ी थीं। 

मेरा सुझाव है कि एक तटस्थ प्रस्तोता की तरह बर्ताव करिए: हरदीप सिंह पुरी 

यह कहते हुए हरदीप सिंह ने ‘पत्रकार’ राजदीप सरदेसाई को नसीहत दी। उन्होंने राजदीप को सुझाव देते हुए कहा कि ऐसे लोगों को अलग कर देना चाहिए जो उल्टी जुबान बोलते हैं और अपनी विश्वसनीयता बनाए रखते हुए एक वस्तुनिष्ठ प्रस्तोता की तरह बर्ताव करने की बात कही। 

यहाँ उल्लेखनीय बात है कि जब से मोदी सरकार कृषि सुधार क़ानून लेकर आई है तब से विपक्षी दल और वामपंथी मीडिया ने इसका इस्तेमाल अपने ठहरे हुए करियर में प्राण फूँकने के लिए किया है। कृषि सुधार क़ानूनों में गैर मौजूद गलतियों का उल्लेख करते हुए विपक्षी दलों ने इसके बारे में खूब झूठी ख़बरें फैलाई हैं और किसानों को जम कर भड़काया है।  

किसान संगठनों ने कृषि क़ानूनों को वापस लेने की बात करते हुए सरकार के साथ 6वीं राउंड की बातचीत को खारिज कर दिया था। जबकि केंद्र सरकार किसानों की चिंता को मद्देनज़र रखते हुए इसमें संशोधन करने के लिए तैयार थी लेकिन कृषि संगठन के नेताओं का कहना था कि वह क़ानून वापस लेने के अलावा किसी और बात पर सहमत नहीं होंगे। 

क्या हैं कृषि सुधार क़ानून 

देश में कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सबसे अहम कारणों में से एक है, किसानों को सही बाज़ार मिले जिससे उन्हें अपने उत्पादन के लिए सही दाम मिले। इस मुद्दे पर देश की तमाम प्रदेश सरकारों ने APMC (Agricultural Produce Market Regulation Acts) लागू कर दिया है, जिससे किसानों को होलसेल मार्केट में शामिल होने का मौक़ा मिलेगा। 

इस बिल का उद्देश्य राज्यों की APMC को निष्प्रभावी करना है ही नहीं। ये किसानों को मौजूदा APMC का अतिरिक्त विपणन चैनल प्रदान करेगा। APMC अपने प्रचलन की दक्षता में और सुधार करें, इसके लिए ये क़ानून उन्हें प्रोत्साहित करेगा।

मोदी सरकार ने हाल ही में 3 कृषि सुधार क़ानून पारित किए हैं जिससे किसानों को उनकी पैदावार के लिए उचित दाम मिले और इसकी व्यापार प्रक्रिया सहज हो जाए। यह तीनों क़ानून कुछ इस प्रकार हैं

कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) क़ानून 2020

इस क़ानून में ऐसी प्रक्रिया बनाने का प्रावधान है जिसमें किसानों और व्यापारियों को प्रदेश की APMC पंजीकृत मंडियों से बाहर फसल बेचने की आज़ादी होगी। 

कृषक (सशक्तिकरण और संरक्षण) मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा पर क़रार क़ानून, 2020 

इस क़ानून में कृषि करारों (कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग) का उल्लेख किया गया है और इसके लिए राष्ट्रीय स्तर का फ्रेमवर्क तैयार करने का प्रावधान रखा गया है। 

आवश्यक वस्तु (संशोधन) क़ानून 2020 

इस क़ानून के तहत असाधारण हालातों के अलावा तमाम फसलों का भंडारण मनमुताबिक रूप से किया जा सकता है। 

सबसे अहम बात यह है कि कृषि सुधार क़ानून ऐसे 3 क़ानूनों का संग्रह हैं जो किसानों को अपनी फसल APMC एक्ट बाहर बेचने की अनुमति देता है (अधिकांश राज्यों ने इसे अनिवार्य कर दिया है कि किसानों को APMC पर ही बिक्री करनी होगी)। इसकी मदद से किसान सीधे कॉर्पोरेट घरानों से सीधे संपर्क कर सकते हैं। 

कृषि क़ानून सिर्फ APMC से बँधे हुए नहीं हैं, अगर कोई वर्तमान सिस्टम के बाहर जाकर बाज़ार पर भरोसा करता है तो वह पुराने सिस्टम पर बने रहने के लिए स्वतंत्र है। यही बात न्यूनतम समर्थन मूल्यों पर भी लागू होती है लेकिन फ़िलहाल AMPC और MSP को लेकर जिस तरह का नैरेटिव बनाया जा रहा है उससे स्पष्ट है कि वह राजनीति से प्रेरित है। 

तमाम लोग यह आरोप लगाते हैं कि इन क़ानूनों की वजह से किसानों के साथ समझौता करते हुए बड़ी कंपनियों का पक्ष भारी रहेगा और यह दावा भी पूरी तरह झूठा है। कृषक (सशक्तिकरण और संरक्षण) मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा पर क़रार क़ानून में यह सुनिश्चित किया गया है कि कॉन्ट्रैक्ट पर दोनों पक्षों में बराबर सहमति हो और किसानों के पास कॉन्ट्रैक्ट ख़त्म करने का अधिकार हो।   

अरविंद केजरीवाल ने फिर बोला झूठ, दिल्ली में सबसे अधिक कोविड टेस्ट का किया गलत दावा: फैक्ट चेक

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शनिवार (दिसंबर 19, 2020) को जनता को गुमराह करते हुए दावा किया कि दिल्ली सरकार ने देश में किसी भी अन्य राज्य की तुलना में अधिक संख्या में कोरोना वायरस टेस्ट किए।

मीडिया को संबोधित करते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली अब कोरोना वायरस संक्रमण की तीसरी लहर से उबर गई है और हर दिन 90,000 कोरोना वायरस टेस्ट कर रही है, जो उनके अनुसार देश में ही नहीं बल्कि संयुक्त राज्य अमेरिका से भी अधिक था।

दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा, “दिल्ली के लोगों के प्रयासों से हमने कोरोना की तीसरी लहर को प्रभावी ढंग से और सफलतापूर्वक पार कर लिया है। ऐसा लगता है कि दिल्ली में कोविड -19 की तीसरी लहर अब समाप्त हो रही है। आज दिल्ली में रोजाना लगभग 90,000 परीक्षण किए जा रहे हैं। यह देश में एक दिन में कोरोना परीक्षण की सबसे ज्यादा संख्या है।”

हालाँकि, अरविंद केजरीवाल द्वारा किया जा रहा यह दावा झूठा है कि रोजाना 90,000 कोरोना वायरस टेस्ट हो रहे हैं।

विभिन्न राज्यों द्वारा जारी आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, देश में सबसे अधिक कोरोना टेस्ट करने वाला राज्य दिल्ली नहीं है। आँकड़ों में कहा गया है कि कोरोना वायरस के ताजा मामलों का पता लगाने के लिए सबसे अधिक परीक्षण उत्तर प्रदेश द्वारा किए जा रहे हैं, न कि दिल्ली में।

18 दिसंबर को दिल्ली के 88,400 परीक्षणों की तुलना में उत्तर प्रदेश में 1,50,036 COVID-19 परीक्षण किए गए।

Image Source: COVID19india

बता दें कि देश में प्रतिदिन होने वाले COVID- 19 परीक्षण की संख्या के मामले में दिल्ली दूसरे स्थान पर भी नहीं है। बिहार और कर्नाटक ने दिल्ली की तुलना में अधिक परीक्षण किए। बिहार ने शुक्रवार (दिसंबर 18, 2020) को 1.22 लाख परीक्षण किए, जबकि कर्नाटक ने 1.04 लाख COVID परीक्षण किए।

Image Source: COVID19india

इससे स्पष्ट है कि अरविंद केजरीवाल कोरोना वायरस टेस्ट की संख्या मामले में झूठ बोल रहे हैं।

सिंघु बॉर्डर पर बब्बर खालसा के आतंकियों का बैनर, लोगों ने पूछा- ‘किसानों’ के आंदोलन में इन पोस्टरों का क्या काम?

कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली के सिंघु, टिकरी, कुंडली, गाजीपुर समेत सभी बॉर्डरों पर किसान धरने पर बैठे हैं। इन किसानों में सबसे ज्यादा संख्या पंजाब के किसानों की हैं। मौके पर माहौल और सिंघु बॉर्डर पर लगे मंच पर हो रहे भाषणों से ये कहा जा सकता है कि आंदोलन किसानों के मुद्दों को छोड़कर अन्य मुद्दों की ओर डाइवर्ट हो गया है।

सिंघु बॉर्डर पर बैठे आंदोलित किसानों ने अपने वाहनों और धरना स्थल पर जगह-जगह ‘वी आर फार्मर, नॉट टेररिस्ट’ के बैनर और पोस्टर लगा रखे हैं। लेकिन इन पोस्टरों के उलट भी बहुत कुछ ऐसा चल रहा है जो साबित करता है कि इस आंदोलन में बब्बर खालसा इंटरनेशनल आतंकी संगठन से जुड़े लोग भी शामिल हैं।

इसका सबसे बड़ा सबूत आंदोलन स्थल पर लगा पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह समेत 17 लोगों की हत्या के दोषी जगतार सिंह हवारा और उसके साथियों के पोस्टर है। सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि हवारा के नाम पर बने संगठन अकाल यूथ की ओर से लंगर लगाया गया है। यह लंगर संयुक्त मोर्चा के मंच से 300 मीटर की दूरी पर लगा हुआ है। जहाँ लंगर लगा है, वहीं पर ट्रैक्टर ट्राली के दोनों ओर हवारा के फोटो लगे दो बड़े-बड़े पोस्टर लगे हैं।

कौन है जगतार सिंह हवारा?

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह समेत 17 लोगों की हत्या के दोषी खालिस्तान समर्थक आतंकी जगतार सिंह हवारा को चंडीगढ़ की निचली अदालत ने फाँसी की सजा सुनाई थी। हालाँकि, पंजाब व हरियाणा हाई कोर्ट ने फाँसी की सजा को उम्रकैद में बदलते हुए निर्देश दिया था कि उसे अंतिम साँस तक जेल में रखा जाए। मगर पिछले दिनों लुधियाना की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अतुल कसाना की अदालत ने तिहाड़ जेल में बंद आतंकी जगतार सिंह हवारा को 24 वर्ष पूर्व लुधियाना के घंटाघर में हुए बम ब्लास्ट मामले में बरी कर दिया। अदालत में पेश हुए 23 गवाहों में से किसी ने भी आरोपित की शिनाख्त नहीं की थी।

गौरतलब है कि प्रोटेस्ट के 15वें दिन वहाँ से एक ऐसी तस्वीर सामने आई थी जिसने साबित कर दिया था कि पूरे आंदोलन को वामपंथियों-खालिस्तानियों ने हाईजैक कर लिया है। तस्वीर में नजर आया था कि किसान महिलाएँ हाथ में उमर खालिद और शरजील इमाम जैसे कट्टरपंथियों और अर्बन नक्सलियों की रिहाई माँग रही थी। पोस्टर के सभी चेहरे वही थे जो सीएए/एनआरसी के ख़िलाफ़ आवाज उठा रहे थे। लोगों ने ये देख कर पूछा था कि क्या ये लोग भी अब किसान बन गए हैं।

वहीं पिछले दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें ‘प्रदर्शनकारी’ महिलाएँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मरने की दुआ कर रही थी। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में महिला कह रही थी, “मोदी मर जा तू, शिक्षा बेच के खा गया रे मोदी, मर जा तू। रेल बेचकर खा गया रे मोदी, मर जा तू। देश बेच के खा गया रे मोदी, मर जा तू। किसानों को धोखा दे गए रे मोदी, मर जा तू।” वहीं सामने बैठी महिला बार-बार ‘हाय-हाय मोदी मर जा तू’ दोहरा रही थी।

NCP नेता अरबाज़ खान ने हिन्दुओं को दी माँ-बहन की गाली और देश छोड़ने की धमकी: वीडियो वायरल होते ही माफी माँगते आया नजर

सोशल मीडिया पर नेशनल कॉन्ग्रेस पार्टी नागपुर शहर के अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एनसीपी नेता अरबाज़ खान को हिंदू धर्म के लोगों के खिलाफ अभद्र और अश्लील भाषा का प्रयोग करते हुए देखा जा सकता है। हालाँकि, यह वीडियो कब की है अभी इसका पता नहीं लगा है।

वीडियो में अरबाज़ बेहद ही बेढंगे तरीके से हिंदुओं को धमकी दे रहा और हिंदू महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल कर रहा। इतना ही नहीं एनसीपी नेता ने हिंदुओं को भारत छोड़ देने की बात भी कही है।

वीडियो में अरबाज़ खान की अकड़ को साफ़तौर पर देखा जा सकता है। गाली-गलौज के साथ खान ने अपने घर का एड्रेस भी बताया है और हिंदुओं को चुनौती दी है कि वह उसका कुछ बिगाड़ नहीं सकते। उधर, हिंदुओं ने भी उसके चुनौती को स्वीकारने में देरी नहीं दिखाई। जिसके बाद एनएसपी नेता अरबाज खान ने एक और वीडियो जारी किया, जिसमें उसे माफी माँगते हुए देखा जा सकता है।

अरबाज खान ने अपने माफीनामे में कहा कि वीडियो अभी का नहीं है और वह हिंदुओं से उनके खिलाफ इस्तेमाल किए गए शब्दों के लिए माफी माँगता है। उसने कहा, “मेरा जो वीडियो वायरल हुआ है, मैं उसके लिए माफी माँगता हूँ और यह काफी पुराना वीडियो है। मुझसे गलती हो गई है। प्लीज मेरी गलती को माफ कर दीजिए। सभी हिंदू मेरे भाई लोग हैं और मैं उनसे हाथ जोड़कर माफी माँगता हूँ। क्योंकि मेरे से गलती हुई है। प्लीज मेरी गलती को माफ कर दीजिए। अगली बार से बिल्कुल ऐसा नहीं होगा। आई एम सो सॉरी।”

गौरतलब है कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि एनसीपी ने अपमानजनक और अश्लील टिप्पणियों के लिए अरबाज खान के खिलाफ कोई कार्रवाई की है या नहीं। यह देखा जाना बाकी है कि क्या एनसीपी की सहयोगी पार्टी शिवसेना इस मामले पर कोई ठोस कदम उठाती है या नहीं, क्योंकि वे अभी भी हिंदुत्व का समर्थन करने का दावा करते हैं।

पिनराई विजयन सरकार देवास्वम बोर्ड को लौटाए ₹10 करोड़: केरल हाई कोर्ट ने कहा- मंदिर की संपत्ति पर ‘भगवान’ का हक

केरल हाई कोर्ट ने शुक्रवार (दिसंबर 18, 2020) को गुरुवायूर मंदिर देवास्वम फंड से राज्य सरकार द्वारा लिए गए 10 करोड़ रुपए की तत्काल वापसी का आदेश दिया। हाई कोर्ट ने यह आदेश भाजपा नेता एन नागेश सहित कई लोगों द्वारा दायर की गई याचिका पर फैसला सुनाते हुए दिया।

केरल उच्च न्यायालय ने मंदिर बोर्ड द्वारा मुख्यमंत्री के कोष को किए गए भुगतान को अवैध माना और कहा कि गुरुवायूर देवास्वम प्रबंध समिति को देवास्वम फंड से मुख्यमंत्री संकट राहत कोष अथवा किसी अन्य सरकारी एजेंसी को धनराशि देने की शक्ति नहीं है। भक्तों द्वारा भगवान गुरुवायप्पन के नाम पर समर्पित, सम्पोषित समस्त चल-अचल सम्पत्ति का सर्वाधिकार श्री कृष्ण मंदिर, गुरुवायुर में प्रतिष्ठित भगवान गुरुवायुरप्पा की मूर्ति में निहित होगा। मंदिर की प्रबंध समिति अपनी शक्तियाँ और कर्तव्य राज्य सरकार या किसी अन्य संस्था को नहीं सौंप सकती। अदालत ने कहा कि शासकीय निकाय केवल कानून की सीमा के भीतर कार्य कर सकता है।

बता दें कि गुरुवायूर देवास्वम बोर्ड केरल के चार देवास्वाम बोर्ड में से एक है जो राज्य भर के मंदिरों के मामलों का प्रबंधन करता है। गुरुवायूर देवास्वम बोर्ड 12 मंदिरों की अध्यक्षता करता है, जिनमें श्री कृष्ण मंदिर भी शामिल है, जो त्रिशूर से 30 किमी दूर है।

अदालत ने कहा, “आपदा राहत कोष के लिए योगदान जैसे मामले देवास्वाम बोर्ड के दायरे या अधिकार क्षेत्र में नहीं आते हैं।” केरल राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए उच्च न्यायालय ने आदेश दिया कि उसके पास देवास्वाम बोर्ड द्वारा प्रबंधित धन की आवश्यकता के लिए कोई शक्ति या अधिकार नहीं है।

आदेश में हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच को यह भी निर्देश दिया गया कि मुख्यमंत्री राहत कोष में दान की गई राशि को कैसे वसूला जाए। बता दें कि बोर्ड ने बाढ़ और COVID-19 की अवधि के दौरान मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष में 10 करोड़ रुपए दिए थे।

केरल में हिंदू मंदिरों से फंड लेने पर भाजपा का वामपंथी सरकार पर हमला

गौरतलब है कि मई 2020 में केरल में लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) सरकार द्वारा गुरुवायूर देवास्वाम बोर्ड से मुख्यमंत्री कोविड -19 राहत कोष के लिए पैसे लेने के बाद विवाद खड़ा हो गया था। यह धनराशि गुरुवायूर देवास्वाम के अध्यक्ष केबी मोहनदास द्वारा जिला कलेक्टर एस शानावस को यह कहते हुए सौंपी गई थी कि फंड में योगदान देवास्वाम की सामाजिक जिम्मेदारी का एक हिस्सा है।

मोहनदास ने कहा था कि इसमें कुछ भी गैरकानूनी नहीं है। उनका कहना था कि देवास्वाम बोर्ड ने इससे पहले 2018 में बाढ़ के दौरान भी मुख्यमंत्री राहत कोष में दान किया था। मंदिर के फंड में से मुख्यमंत्री राहत कोष में धन ट्रांसफर किए जाने को लेकर काफी विवाद हुआ था। केरल के भाजपा नेताओं ने पिनराई विजयन के नेतृत्व वाली सरकार को आड़े हाथों लिया था। केरल बीजेपी अध्यक्ष के सुरेन्द्र ने केरल सरकार पर हमला करते हुए इसे देवास्वाम का गलत कदम बताया था।

सुरेंद्र ने कहा कि यह पैसा उन मंदिरों में भेजा जाना चाहिए जो दीये जलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने केरल सरकार से यह भी पूछा कि मुख्यमंत्री फंड अन्य धार्मिक संस्थानों से पैसा क्यों नहीं ले रहा है।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले तमिलनाडु सरकार ने 47 मंदिरों को CM राहत कोष में ₹10 करोड़ रुपए देने का आदेश दिया था। राज्य सरकार ने 16 अप्रैल को रमजान के महीने में प्रदेश की 2,895 मस्जिदों को 5,450 टन मुफ्त चावल वितरित करने आदेश दिया था, ताकि रोजेदारों को परेशानी ना हो। 

रमजान के पर्व की शुरुआत में ही, तमिलनाडु राज्य सरकार ने कथित अल्पसंख्यकों को एक बड़ा लाभ देने की घोषणा की थी। दिवंगत सीएम जयललिता ने मजहब विशेष के दिल और वोटों को जीतने के लिए इसे शुरू किया था। तमिलनाडु सरकार ने घोषणा की थी कि इस साल दलिया तैयार करने के लिए 2,895 मस्जिदों को 5,450 टन चावल दिया जाएगा, जो कि साधारण गणना के अनुसार 2,1,80,00,000 रुपए निकल आती है।

‘सोनार बांगला’ के लिए अमित शाह ने माँगे 5 साल, ममता को सबसे बड़ा झटका दे BJP के हुए शुभेंदु अधिकारी

पश्चिम बंगाल में जिस बड़े राजनीतिक उलटफेर के कयास कई दिन से लग रहे थे, वह शनिवार (दिसंबर 19, 2020) को हकीकत बन गया। शुभेंदु अधिकारी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में मिदनापुर की एक बड़ी रैली में बीजेपी का दामन थाम लिया। कुछ समय पहले तक ममता बनर्जी की कैबिनेट का हिस्सा रहे शुभेंदु का जाना सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) के लिए अब तक का सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है।

पश्विम बंगाल में 2021 में विधानसभा चुनाव होने हैं। इस लिहाज से अमित शाह का दौरा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने रैली को संबोधित करते हुए कहा, “आपने तीन दशक कॉन्ग्रेस को दिए। 27 साल वामपंथियों और 10 साल ममता दीदी को दिए। 5 साल बीजेपी को दीजिए, हम ‘सोनार बांगला’ का सपना पूरा करेंगे।”

इससे पहले बीजेपी में शामिल होते हुए शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश में अपनी ताकत दिखा दी है। उन्होंने दिखाया है कि वे अपने वादों को पूरा कर सकते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि भाजपा ने उन्हें जितना प्यार और सम्मान मिला है, उतना TMC में भी नहीं मिल पाया।

शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि भाजपा नेताओं ने उनके लिए उतना किया है, जितना TMC ने कभी नहीं किया। जनता को सम्बोधित करते हुए दिग्गज नेता ने कहा कि वो पश्चिम बंगाल और उसकी जनता की हर आशाओं-आकाँक्षाओं को पूरा करेंगे। उन्होंने खुलासा किया कि वे कई वर्षों पहले से अमित शाह से जुड़े हुए हैं, लेकिन शाह ने कभी भी उन्हें भाजपा में शामिल होने को नहीं कहा। जब उन्हें कोरोना संक्रमण हुआ था, तब एक भी TMC नेता ने उन्हें पूछा तक नहीं- पर अमित शाह ने उनका हालचाल जाना।

उन्होंने कहा कि उस दौरान अमित शाह ने 2 बार उन्हें फोन कॉल किया था। शुभेंदु अधिकारी ने स्थानीय नेताओं से कहा कि वे न तो उन्हें प्रभावित करना चाहते हैं, न ही उन पर कोई निर्देश थोपना चाहते हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे भाजपा के एक साधारण कार्यकर्ता की तरह कार्य करेंगे। उन्होंने भविष्यवाणी की कि आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा की भारी जीत होगी और TMC पश्चिम बंगाल का प्रतिनिधित्व करने लायक ही नहीं रहेगी।

मिदनापुर कॉलेज ग्राउंड में जब शुभेंदु अधिकारी बोलने आए तो जनता ने ताली बजा कर उनका स्वागत किया। उनके हजारों समर्थक वहाँ पहले से ही जुट गए थे। उन्होंने सब पहले ‘अखंड मिदनापुर’ की मिट्टी और इसके इतिहास को प्रणाम करते हुए अपने सम्बोधन की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि ये खुदीराम बोस और माटोगिनी हाजरा की पवित्र भूमि है। उन्होंने कहा, “मेरे बड़े भाई इस देश की आन-बान-शान हैं।”

भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुकुल रॉय ने शुभेंदु अधिकारी का पार्टी में स्वागत करते हुए कहा कि उन दोनों ने मिल कर पूर्व में मिदनापुर के लिए न जाने कितनी ही लड़ाइयाँ लड़ी हैं। पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राहुल सिन्हा ने खुलासा किया कि 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले से ही शुभेंदु अधिकारी की उनसे भाजपा में शामिल होने को लेकर बातचीत चल रही है। उन्होंने इसे ‘TMC की ताबूत में आखिरी कील’ बताते हुए कहा कि जो तब संभव नहीं हो पाया, वो अब हो रहा है।

उधर शुभेंदु अधिकारी के इस्तीफे को स्वीकार करने से पश्चिम बंगाल विधानसभा के स्पीकर बिमान बनर्जी ने इनकार कर दिया है। उन्होंने शुक्रवार (दिसंबर 18, 2020) को कहा कि शुभेंदु का इस्तीफा न तो सदन के नियमों के अनुरूप है और न ही संविधान के प्रावधानों का पालन करता है। उन्होंने कहा कि शुभेंदु ने व्यक्तिगत रूप से उन्हें अपना इस्तीफा नहीं सौंपा और वे इसे लेकर निश्चित नहीं हैं कि उनका ये कदम स्वेच्छा से लिया गया और वास्तविक है।