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5 अफगानी, फर्राटेदार हिंदी और ₹1 करोड़ का लेनदेन: बिहार का सीमांचल बनाया जा रहा आतंकियों का गढ़

बिहार के सीमांचल में आतंकी संगठनों ने अपनी नजरें गड़ानी शुरू कर दी हैं। आतंकियों ने यहाँ स्लीपर सेल्स का नेटवर्क बिछाने का अभियान चला रखा है। पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी, नेपाल, बांग्लादेश में बैठ कर आतंकी संगठनों के लोग पूर्णिया, अररिया, कटिहार, किशनगंज और मिथिलांचल के मधुबनी, समस्तीपुर और दरभंगा में अपना नेटवर्क तैयार कर रहे हैं। दो दिन पहले कटिहार से धराए अफगानी आतंकियों ने पूछताछ में ऐसे कई खुलासे किए हैं।

‘लाइव हिंदुस्तान’ की खबर के अनुसार, सीमांचल में आतंकियों का स्लीपर सेल्स तैयार करने, उन्हें संचालित करने और उनकी फंडिंग के सारे कार्यों को नेपाल के विराट नगर से ऑपरेट किया जा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की लखनऊ विंग की टीम ने बिहार के सीमांचल क्षेत्र में तहकीकात शुरू कर दी है। पॉंचों अफगानी नागरिकों को कटिहार कारा में पाँच अलग-अलग सेल्स में रखा गया है। उन्हें पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया जाएगा।

कटिहार एसपी विकास कुमार ने सुरक्षा एजेंसी और खुफिया विभाग को इन अफगानियों से पूछताछ से हुए खुलासों की रिपोर्ट सौंप दी है। इससे पहले भी कटिहार जिला के कदवा और बारसोई से पूर्णिया जिला के जलालगढ़ से आतंकियों की गिरफ़्तारी हो चुकी है। अब इस क्षेत्र में सतर्कता बढ़ाते हुए पुलिस को अलर्ट पर रखा गया है। केंद्रीय कारा उपाधीक्षक मृत्युंजय कुमार ने बताया कि पाँचों अफगानी एक सेल में रहने की जिद ठाने हुए थे, लेकिन उन्हें उच्च-सुरक्षा में अलग-अलग रखा गया है।

जल मोहम्मद उर्फ समुत खान को कटिहार में इन सबका आका बताया जा रहा है, जो बीए पास है। ये सभी बांग्लादेश आते-जाते थे और लोगों के संदेह से बचने के लिए सूदखोरी का धंधा करते थे। ये ब्याज पर मोटी रकम लोगों को उपलब्ध कराते थे। मोहम्मद दाऊद अनपढ़ है, आमरन खान उर्फ राजा खान बीए पास है, मोहम्मद दाऊद उर्फ शेरगुल खान छठी पास है और गुलाम मोहम्मद 7वीं तक पढ़ा हुआ है।

फर्राटेदार हिंदी के कारण लोगों के शक से ये बचे हुए थे। इन अफगान नागरिकों के साथ रहने वाले एक मुखबिर ने इनकी जानकारी पुलिस को दी। इसके बाद पुलिस ने इन्हें धर-दबोचा और इनके कनेक्शंस खँगालने शुरू कर दिए। सीमांचल के साथ-साथ मिथिलांचल में भी इनकी टीमें काम कर रही हैं। पुलिस की टीम उनके द्वारा दिए गए नामों की पड़ताल करते हुए अन्य आरोपितों की गिरफ़्तारी के लिए प्रयासरत है।

पुलिस ने कटिहार से इन अफगानी नागरिकों के पास से कई अहम कागजात भी जब्त किए हैं। ये कई वर्षों से यहीं पर जमे हुए थे। इनके पास से 5.02 लाख रुपए, 3 पासपोर्ट, 15 मोबाइल, 3 एटीएम कार्ड, 5 पैन कार्ड, 4 आधार कार्ड, 4 मोटरसाइकिल, आवासीय प्रमाण पत्र, कई क्लोन कार्ड और 1 करोड़ रुपए के लेनदेन सम्बन्धी दस्तावेज भी जब्त किए गए। वो 15 सालों से यहाँ हवाला कारोबार कर रहे थे।

हाल ही में एनआईए के डीजी योगेश चंद्र मोदी ने बताया था कि उन्हें ज्ञात हुआ है कि बांग्लादेशी आतंकी संगठन जमात उल मुजाहिद्दीन ने बिहार, महाराष्ट्र, केरल और कर्नाटक में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। जिसके संबंध में एनआईए ने 125 लोगों की लिस्ट तैयार करके संबंधित राज्यों से शेयर कर दी है। इसी तरह अब बिहार में भी आतंकियों ने नेपाल और बांग्लादेश सीमा का फायदा उठा कर सक्रियता बढ़ा दी है।

तलाकशुदा महिला 3 बार ‘लव जिहाद’ का शिकार: जुबैर, साजिद और वसीम अकरम ने ‘हिन्दू’ बन किया रेप

मध्य प्रदेश के उज्जैन से ‘ग्रूमिंग जिहाद (लव जिहाद)’ का नया मामला सामने आया है। एक युवक ने नाम बदल कर तलाकशुदा महिला को फाँसा और 2 वर्षों तक उसका यौन शोषण किया। उसने छद्म हिन्दू नाम के साथ दोस्ती की और फिर उसके साथ संबंध बनाए। युवक का असली नाम वसीम अकरम था, लेकिन उसने विकास नाम के साथ महिला को धोखा दिया। उसके ड्राइविंग लाइसेंस से उसका असली राज खुला।

महिला ने जब कागजात में उसका नाम वसीम देखा तो उसका माथा ठनका और उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उसने खुद को नागदा का रहने वाला विकास बताया था। वो महिला को लेकर मंदिर भी जाता था, लेकिन बाहर ही खड़ा रहता था। पूछने पर बताता था कि वो नास्तिक है। उसका पर्स खँगालने पर पीड़िता को उसका ड्राइविंग लाइसेंस मिल और राज खुल गया। महिला ने बताया कि उसके घर के सामने जया नाम की महिला रहती थी, जिसने उसे वसीम से मिलवाया था।

‘आज तक’ की खबर के अनुसार, उसने खुद को राजपूत जाति का बता रखा था। उज्जैन के एएसपी अमरेन्द्र सिंह ने बताया कि महिला थाने के अंतर्गत एक पीड़िता ने अपनी शिकायत दर्ज कराई है और उसने यह आरोप लगाया है कि एक युवक ने नाम बदलकर उसके साथ दोस्ती की और उसके बाद उसके साथ गलत काम किया। उन्होंने बताया कि दोनों लगभग 2 साल संपर्क में थे। पीड़िता की शिकायत के आधार पर महिला थाने के अंतर्गत FIR दर्ज की गई है।

पुलिस अभी भी आरोपित की तलाश में लगी हुई है। ‘दैनिक भास्कर’ से बातचीत करते हुए पीड़िता ने बताया कि उसे इससे पहले भी 2 बार ‘लव जिहाद’ वाला धोखा मिल चुका है। 2016 में OLX पर कार खरीदने के क्रम में वो कादरपुरा कमरी मार्ग निवासी जुबैर के संपर्क में आई। जुबैर के कहने पर उसने उसके कार बेचने के धंधे में पैसा भी लगाया। बाद में उसने भी शादी का झाँसा देकर रेप किया। शिकायत दर्ज होने पर उसकी गिरफ़्तारी हुई, लेकिन फिलहाल वो जमानत पर बाहर है।

इसके बाद बिलोटीपुरा में रहने वाले साजिद से उसकी मुलाकात हुई। महिला को मकान खरीदना था और साजिद इसी किस्म का बिजनेस करता था। आरोप है कि वो खुद को हिन्दू बताता था और पीड़ित के घर पर आता-जाता था। इसी क्रम में उसने ढाई लाख रुपए और पाँच लाख के गहने भी हड़प लिए। उसके खिलाफ भी रेप का केस दर्ज कराया गया, लेकिन वो भी फिलहाल फरार ही चल रहा है।

पीड़ित की शादी 2004 में हुई थी। तीन साल तक पति के साथ उसके संबंध अच्छे थे। दो बच्चे भी हुए। वो उज्जैन के मुनि नगर में एक किराए के मकान में रहती थी। उसने बताया कि वो खासी भोली है, इसीलिए लोग उसका फायदा उठा लेते हैं। जब पति के साथ संबंध बिगड़ने लगे तो वो किराए के मकान में रहने लगी। पुलिस ने बताया है कि आरोपित वसीम अकरम को जल्द ही गिरफ्तार किया जाएगा।

बता दें कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कड़े शब्दों में कह चुके हैं, “मैं मध्य प्रदेश की धरती पर ‘लव जिहाद’ किसी भी कीमत पर नहीं चलने दूँगा। उसके लिए हम कानून बना रहे हैं। यह देश को तोड़ने का षड्यंत्र है, इसे किसी भी कीमत पर हम कामयाब नहीं होने देंगे।” उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने भी धर्म परिवर्तन से जुड़ा अध्यादेश पारित किया था, जिसके तहत कई जिलों में कार्रवाई भी हुई है।

गुरुद्वारा रकाब गंज में PM मोदी: गुरु तेग बहादुर को दी श्रद्धांजलि, जिन्हें औरंगजेब ने मरवा दिया था

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज रविवार (20 दिसंबर 2020) की सुबह राजधानी दिल्ली स्थित गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब का दौरा किया। इसके बाद उन्होंने गुरु तेग बहादुर को उनके सर्वोच्च बलिदानों के लिए श्रद्धांजलि अर्पित की। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा पहले से फिक्स नहीं था। 

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी सुबह के वक्त ही गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब आए थे। यहाँ उन्होंने गुरु तेग बहादुर के बलिदानों को याद किया। दिल्ली की सीमाओं पर लगातार 25वें दिन जारी ‘किसान’ आंदोलन के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का गुरुद्वारा रकाब गंज दौरा बेहद अहम माना जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि ‘किसान’ आंदोलन में पंजाब और हरियाणा के किसानों की अहम भूमिका है। दौरे की कोई सूचना नहीं होने के चलते प्रधानमंत्री मोदी के पहुँचने पर न तो कोई पुलिस व्यवस्था थी और न ही रास्तों पर किसी तरह के अवरोधक लगाए गए थे।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ट्वीट करते हुए इस बात की जानकारी दी। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने ट्वीट में लिखा, “आज सुबह मैंने ऐतिहासिक गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब में प्रार्थना की। जहाँ गुरु तेग बहादुर जी के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार किया गया था। मैं बेहद धन्य महसूस कर रहा हूँ, दुनिया के लाखों लोगों की तरह श्री गुरु तेग बहादुर के आशीर्वाद से प्रेरित महसूस कर रहा हूँ।”

इसके पहले भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरु तेग बहादुर के ‘शहीद दिवस’ के मौके पर ट्वीट करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी थी। ट्वीट में उनका कहना था कि श्री गुरु तेग बहादुर का जीवन साहस और करुणा का प्रतीक है, महान श्री गुरु तेग बहादुर के शहीद दिवस पर मैं उन्हें नमन करता हूँ और एक समावेशी समाज के लिए उनके द्वारा दिए गए दृष्टिकोण को याद करता हूँ।” 

सिखों के नौवें गुरु गुरु तेग बहादुर ने धर्म के लिए अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया था। उनका जन्म 1621 में हुआ था और 1675 में वह बलिदान (औरंगजेब के आदेश पर उनकी हत्या की गई थी) हुए थे। 17वीं शताब्दी के दौरान उन्होंने सिख धर्म की रक्षा के अपना सब कुछ न्यौछावर कर दिया था। वह सिखों के दसवें गुरु ‘गुरु गोविंद सिंह’ के पिता भी थे। गुरु तेग बहादुर ने धर्म से जुड़े मुद्दों पर विमर्श के लिए हमेशा वेदों और उपनिषदों का हवाला देते थे। गुरु तेग बहादुर इन समस्त शास्त्र-पुराणों में पारंगत थे और साथ ही मानवता को परम धर्म मानते थे। 

उन्होंने मुग़ल साम्राज्य के अत्याचारों के विरुद्ध लंबी लड़ाई लड़ी और धर्म की रक्षा के लिए प्राणों का बलिदान कर दिया इसलिए उन्हें ‘हिन्द दी चादर’ भी कहा जाता है। राजधानी दिल्ली स्थित गुरुद्वारा शीश गंज साहिब और गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब गुरु तेग बहादुर के सर्वोच्च बलिदान के प्रतीक स्थल हैं। गुरु तेग बहादुर की याद में उनके शहीद स्थल पर जो गुरुद्वारा बनाया गया है, उसे गुरुद्वारा शीश गंज साहिब नाम से जाना जाता है। इसके अलावा गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब में गुरु तेग बहादुर का अंतिम संस्कार किया गया था।    

लालच देकर करा रहे थे दलित परिवारों का ईसाई धर्मांतरण: 3 महिलाएँ सहित 4 गिरफ्तार, दक्षिण कोरिया की महिला मुख्य सरगना

उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में ईसाई धर्मांतरण के एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। सूरजपुर थाना क्षेत्र में 4 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है, जो हिन्दू परिवारों को प्रलोभन देकर उनका धर्मांतरण कराते थे। गिरफ्तार आरोपितों में एक दक्षिण कोरिया की महिला भी शामिल है। उसे इस गिरोह का सरगना बताया जा रहा है। उन सभी से पूछताछ जारी है। आसपास के शहरों की पुलिस से भी संपर्क किया जा रहा है।

गौतम बुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि सूरजपुर पुलिस ने लोभ व लालच देकर धर्मांतरण कराने वाले 4 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से 3 महिलाएँ हैं। पुलिस ने बताया कि इन्हें शनिवार (दिसंबर 19, 2020) को गिरफ्तार किया गया। ये सभी शातिर किस्म के अपराधी हैं और लालच देकर धर्म परिवर्तन कराते हैं। उन सबके खिलाफ धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश, 2020 के तहत कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने चारों अभियुक्तों की डिटेल्स भी सार्वजनिक की है:

  • सीमा, पिता का नाम – सेवालाल, निवासी – चरपतला, थाना मेझा जनपद प्रयागराज, वर्तमान पता – किराएदार कुंडे सिंह मास्टर का मकान, मलकपुर, थाना सूरजपुर
  • अनमोल, साक्षिण कोरिया, वर्तमान पता – 602 जेपी ग्रीन, थाना बीटा 2, ग्रेटर नोएडा
  • संध्या, पिता – देवी शंकर, निवासी – साझी, थाना क़ुराव, जनपद प्रयागराज, वर्तमान पता – किराएदार कुंडे सिंह मास्टर का मकान, मलकपुर, थाना सूरजपुर
  • उमेश कुमार, पिता – मेवालाल, निवासी – चरपतला, थाना मेझा जनपद प्रयागराज, वर्तमान पता – किराएदार कुंडे सिंह मास्टर का मकान, मलकपुर, थाना सूरजपुर

NBT की खबर के अनुसार, जो लोग धर्म परिवर्तन के लिए तैयार होते थे, उन्हें तुरंत मोटा पैकेज दिया जाता था। बच्चों की पढ़ाई के लिए किताबों से लेकर स्टेशनरी के समानों तक उपलब्ध कराया जाता था। दलित बस्ती के लोगों को खास कर के निशाना बनाया जाता था और गरीबों के बच्चों की मदद के नाम पर धर्मांतरण का खेल चलता था। दादरी और जारचा क्षेत्रों में पहले भी ऐसे मामले सामने आ चुके हैं।

इन सभी को दुर्गा गोल चक्कर से गिरफ्तार किया गया। ये सभी ईसाई धर्म अपनाने के लिए लोगों को लालच दिया करते थे। पुलिस को इनकी शिकायत मिली थी, जिसके बाद दबिश दी गई। जब ये लोग दो अलग-अलग परिवारों का धर्मांतरण करा रहे थे, तभी उन्हें गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार अभियुक्तों में सीमा, अनमोल और अनध्या महिलाएँ हैं। अभी तक की पूछताछ में इन्होंने कोई बड़ी जानकारी नहीं दी है।

इसी वर्ष अगस्त में उत्तर प्रदेश के ही एटा में एक शख्स को ईसाई धर्म में परिवर्तित करने की कोशिश करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। दिल्ली का 30 वर्षीय मनदीप कुमार एटा में रह रहा था, जहाँ वह लोगों को ईसाई धर्म में परिवर्तित करने की कोशिश कर रहा था। आरोपित मनदीप कुमार भी अपनी पत्नी मार्गेट एंथोनी के साथ एटा में किराए के मकान पर रह रहा था। ग्रेटर नोएडा से गिरफ्तार आरोपित भी इसी तरह किराए में रह रहे थे।

कोतवाली के भीतर जिस पुलिस वाले ने 3 लोगों का किया था मर्डर, योगी सरकार ने उस DSP को किया बर्खास्त

पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) भगवान सिंह को तिहरे हत्याकांड के पुराने मामले में दोषी पाए जाने पर सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। यह निर्णय उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने लिया है। लगभग 16 साल पहले कोंच कोतवाली में 3 लोगों की गोली मार कर हत्या के मामले में न्यायालय ने 8 नवंबर 2019 को तत्कालीन उपनिरीक्षक (सब इंस्पेक्टर) भगवान सिंह समेत अन्य आरोपित पुलिसकर्मियों को आजीवन कारावास और 50 हज़ार रुपए जुर्माने का दंड सुनाया था। 

इस मामले में कुछ समय बाद भगवान सिंह को उच्च न्यायालय से जमानत मिल गई थी। हाल ही में भगवान सिंह निरीक्षक (इंस्पेक्टर) से पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) पद पर पदोन्नत हुए थे और उन्हें कानपुर कर्नलगंज में तैनात किया गया था। उत्तर प्रदेश सरकार ने कुछ समय पहले ही भगवान सिंह को निलंबित किया था।   

लगभग 16 साल पहले 2004 के फरवरी महीने में दो पक्षों में विवाद हुआ था, जिसकी पैरवी करने के लिए सपा नेता महेंद्र निरंजन कोतवाली पहुँचे थे। इसके बाद कोंच कोतवाली में तैनात कोतवाल देवदत्त सिंह राठौर (दिवगंत) की सपा नेता सुरेंद्र निरंजन से बहस हुई थी। विवाद बढ़ने पर देवदत्त सिंह और अन्य पुलिसकर्मियों ने कोतवाली परिसर में सुरेंद्र निरंजन, उनके भाई रोडवेज यूनियन के नेता महेंद्र निरंजन और मित्र दयाशंकर झा की सर्विस रिवॉल्वर से गोली मार कर हत्या कर दी थी। 

कोतवाली के भीतर 3 लोगों की हत्या की गूँज पूरे प्रदेश में सुनाई दी थी, पूरे कोंच में कर्फ्यू लगा दिया गया था। कानपुर के अलावा पूरे प्रदेश में पुलिस महकमे का जम कर विरोध हुआ था। फिर कोतवाल देवदत्त सिंह, उनके पुत्र अनिल राठौर, उपनिरीक्षक भगवान सिंह उपनिरीक्षक लालमणि गौतम समेत कुल 8 पुलिसकर्मियों पर हत्या का मामला दर्ज किया गया था। हालाँकि देवदत्त सिंह की जेल में हार्ट अटैक से मृत्यु हो गई थी, मामले के अन्य आरोपित पुलिसकर्मी भी जेल गए थे। 

मुक़दमे के ट्रायल के दौरान आरोपित पुलिसकर्मी जमानत पर रिहा होकर नौकरी करने लगे थे। लगभग 15 साल के दौरान भगवान सिंह को दो बार पदोन्नति भी मिली, पहले इंस्पेक्टर और फिर डीएसपी। एडीजे अमित पाल ने इस मामले में बीते वर्ष फैसला सुनाया था, जिसके तहत सभी आरोपितों को आजीवन कारावास और आर्थिक जुर्माने की सज़ा सुनाई गई थी। 

बाद में भगवान सिंह को इस मामले में उच्च न्यायालय से जमानत मिल गई थी। घटना के संबंध में अपने पिता दयाशंकर झा को खो चुके ऋषि झा का कहना है कि सरकार ने भगवान सिंह को बर्खास्त करके सही कदम उठाया है। मामले के आरोपित अन्य पुलिसकर्मियों ने जमानत के लिए सर्वोच्च न्यायालय में अर्जी दी है, वह इसके विरोध में वहाँ भी पैरवी करेंगे।    

‘मेरे शौहर मोहसिन अख्तर को पाकिस्तानी और आतंकी कहा जाता है’: उर्मिला मातोंडकर का छलका ‘दर्द’

हाल ही में कॉन्ग्रेस छोड़ कर शिवसेना में शामिल हुईं उर्मिला मातोंडकर का इंस्टाग्राम अकाउंट हैक कर लिया गया था। बाद में पुलिस के प्रयासों के बाद ये वापस आ गया। उर्मिला मातोंडकर ने इन घटनाओं पर बात करते हुए दावा किया कि उनके शौहर मोहसिन अख्तर को अक्सर ट्रोल किया जाता है। बरखा दत्त से बात करते हुए 46 वर्षीय बॉलीवुड अभिनेत्री ने कहा कि उनके शौहर को आतंकी और पाकिस्तानी तक कहा गया।

प्रोपेगंडा पत्रकार बरखा दत्त से ‘मोजो स्टोरी’ पर बात करते हुए उर्मिला मातोंडकर ने कहा कि हर चीज की एक लिमिट होनी चाहिए और हमें पता होना चाहिए कि हम किस हद तक आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि उनके विकिपीडिया पेज के साथ छेड़छाड़ कर के उनके पिता का नाम शिविंदर सिंह और माँ का नाम रुखसाना अहमद कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि ये दोनों नामों वाले व्यक्ति भारत में कहीं न कहीं रह रहे होंगे, लेकिन ये कौन हैं, उन्हें नहीं पता।

उन्होंने कहा, “सबसे बड़ी बात तो ये है कि मेरे शौहर केवल मुस्लिम नहीं हैं, वो कश्मीरी मुस्लिम हैं। हम दोनों समान रूप से निष्ठावान होकर अपने-अपने धर्मों का पालन करते हैं। इससे ट्रॉल्स को लगातार मुझे, मोहसिन अख्तर और उनके परिवार को निशाना बनाने का बड़ा मौका मिल गया। ये काफी दुर्भाग्यपूर्ण है।” शिवसेना ने उर्मिला मातोंडकर का नाम विधान परिषद के लिए भेजा है, ऐसे में वो जल्द ही MLC भी बन सकती हैं।

पार्टी का कहना है कि उसे मराठा, अंग्रेजी और हिंदी – तीनों भाषाओं में पार्टी का प्रतिनिधित्व करने के लिए कोई बड़ा चेहरा चाहिए था और उर्मिला उनमें से एक हैं। उर्मिला मातोंडकर ने दावा किया कि उनकी चमड़ी मोटी तो नहीं है लेकिन इतनी ज्यादा सुंदर है कि उनके रास्ते में आने वाली इस तरह की चीजों से गंदी नहीं हो सकती। उन्होंने संवेदनशीलता को महिलाओं का मजबूत पक्ष करार देते हुए कहा कि उनके पास इसके साथ-साथ दया और सहानुभूति का भाव भी है।

उन्होंने कहा कि एक महिला और अभिनेत्री होने के कारण लोग समझते हैं कि वो मूर्ख और नासमझ हैं, जबकि अधिकतर नेता ही नासमझ हैं। इस पर बरखा दत्त ने उन्हें टोकते हुए कहा कि कई पत्रकार भी ऐसे ही हैं। उर्मिला ने कहा कि इन ट्रोल्स के पालन-पोषण और संस्कृति के साथ क्या है या क्या नहीं, ये तो नहीं पता, लेकिन वो काफी ख़ुशी से अपने पति के साथ रह रही हैं। उन्होंने कहा कि वो बदलाव के लिए इस क्षेत्र में आई हैं।

2019 में आम चुनावों के वक्त उर्मिला कॉन्ग्रेस में शामिल हुई थीं और उन्होंने लोकसभा चुनाव भी लड़ा था। लेकिन वह जीत नहीं पाईं थी। चुनाव के 5 महीने बाद उन्होंने कॉन्ग्रेस की अंदरूनी राजनीति से तंग आकर दिया इस्तीफ़ा दे दिया था। इस्तीफा देते वक़्त उन्होंने एक बयान में कहा था, “मेरी राजनीतिक और सामाजिक संवेदनशीलता का एक बड़े लक्ष्य पर काम करने के बजाय मुंबई कॉन्ग्रेस में कुछ लोग आपसी लड़ाई के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।”

TMC के गुंडों ने BJP कार्यकर्ताओं को गाड़ी से निकाल-निकाल कर लाठी-डंडों से पीटा: अमित शाह की रैली से लौट रहे थे

पश्चिम बंगाल के मिदनापुर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने (शनिवार दिसंबर 19, 2020) को एक विशाल जनसभा को सम्बोधित किया, जिसमें शुभेंदु अधिकारी सहित पश्चिम बंगाल की 3 राजनीतिक पार्टियों के 11 विधायकों ने भाजपा का दामन थामा। लेकिन, इस दौरान भी भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमले बंद नहीं हुए। रैली से लौटते समय भाजपा के कई कार्यकर्ताओं पर जानलेवा हमला कर दिया गया।

इस हमले में भाजपा के 15 कार्यकर्ता घायल हुए हैं, जिनमें से 6 का इलाज अभी भी अस्पताल में चल रहा है। इन्हें काफी चोटें आई हैं। साथ ही भाजपा कार्यकर्ताओं की गाड़ियों को भी खासा नुकसान पहुँचाया गया है। हमेशा की तरह इस हमले के पीछे भी पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी TMC का हाथ बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि दक्षिण बंगाल में अपना गढ़ हाथ से फिसलने से पार्टी नेता बौखलाए हुए हैं।

भाजपा ने कहा है कि TMC के गुंडों ने ही कार्यकर्ताओं पर हमला किया है। ये सभी शुभेंदु अधिकारी के भाजपा में शामिल होने से आक्रोशित हैं। इस हमले के दौरान अधिकारी के खिलाफ नारेबाजी भी की गई। तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं पर आरोप लगा है कि वो अमित शाह की रैली में कड़ी सुरक्षा के कारण व्यवधान नहीं डाल पाए तो उन्होंने रैली से लौट रहे साधारण कार्यकर्ताओं को ही अपना निशाना बना लिया।

केशपुर में हुई इस घटना में भाजपा कार्यकर्ताओं को गाड़ी से निकाल-निकाल कर लाठी-डंडों से पीटा गया। सांसद नितीश प्रमाणिक ने इस घटना के बारे में कहा, “फौलाद के बने हैं भाजपा कार्यकर्ता।जितना जुल्म बंगाल की सरकार हम पर करेगी, हम उतने ही मजबूत होंगे। फिर से राज्य सरकार द्वारा आश्रित गुंडों ने अमित शाह जी के रैली से लौट रहे भाजपा कार्यकर्ताओं की गाड़ियों पर तोड़फोड़ किया। मैं कड़े शब्दों से इसकी निंदा करता हूँ।”

भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमला (वीडियो साभार: Republic)

उधर शुभेंदु अधिकारी ने एक पत्र के जरिए जमीनी कार्यकर्ताओं का हौंसला बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल एक नाजुक मोड़ पर खड़ा है, जहाँ 2021 में यहाँ की जनता को एक ऐसा निर्णय लेना है – जो सब कुछ हमेशा के लिए बदल देगा। उन्होंने कहा कि न तो ये राज्य और न ही TMC किसी की जागीर है। उन्होंने लिखा कि कई लोगों ने कई दिनों तक न जाने कितनी मेहनत की है, जिसके बाद तृणमूल को सत्ता मिली।

ममता सरकार से इस्तीफा देने वालों में शुभेन्दु अधिकारी, बैरकपुर विधानसभा क्षेत्र के टीएमसी विधायक शीलभद्र दत्ता, उत्तरी काठी से विधायक बनाश्री मैती, अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के महासचिव टीएमसी नेता कबीरुल इस्लाम, टीएमसी के नेता और दक्षिण बंगाल राज्य परिवहन निगम (SBSTC) के अध्यक्ष (Rtd) कर्नल दिप्तांगशु चौधरी और अभिजीत आचार्य जैसे दिग्गज नेता शामिल हैं। बीजेपी सांसद अर्जुन सिंह का मानना है कि अगले साल जनवरी तक टीएमसी के 60 से 65 विधायक उनके साथ आ सकते हैं।

बेटे का Porn कलेक्शन फेंक दिया माँ-बाप ने, कोर्ट ने कहा – 55 लाख रुपए का जुर्माना दो

डैविंड वेर्किंग (Davind Werking) अमेरिका के इंडियाना में रहते हैं। इसके पहले वो अपने माता-पिता के साथ थोड़े दिनों के लिए मिशिगन में रहे थे, अपने तलाक के बाद। लेकिन अब उन्होंने अपने माँ-बाप पर ही केस कर दिया और कोर्ट में जीत भी गए। कारण – उनके पास पोर्न का ‘बेशकीमती’ कलेक्शन था, जिन्हें उनके माता-पिता ने फेंक दिया।

12 पेटियों में 1605 DVD, CD और पुराने VCR/VHS टेप्स के अलावा 2 पेटी सेक्स टॉय भी डैविंड वेर्किंग के पास थे। इन सारे ‘बेशकीमती’ कलेक्शन को वो अपने माँ-बाप के घर ले गए थे। यह बात बाप-बेटे के बीच हुए मेल संवाद से पता चली है।

तलाक के कुछ दिनों बाद तक डैविंड वेर्किंग अपने माँ-बाप के यहाँ रेंटर के तौर पर रह रहे थे। कुछ महीने वहाँ रहने के बाद वो इंडियाना चले गए। लेकिन अपना कुछ सामान माँ-पिता के घर में ही छोड़ गए थे। फिर कुछ दिनों के बाद उन्होंने मेल कर अपने पिता से इन सामानों को अपने पास भेजने को कहा।

बेटे के सामानों को भेजने के दौरान पॉल वेर्किंग और बर्थ वेर्किंग (डैविंड वेर्किंग के पिता-माता) ने देखा कि वो सारे पॉर्न कलेक्शन हैं। उन्होंने उसे नष्ट कर दिया। और बेटे को एक मेल भी भेजा कि इन सारी गंदी चीजों को नष्ट कर रहे हैं ताकि मेरे बेटे की मानसिक हालत सही रहे।

माँ-बाप ने जिन सामानों को बेटे की भलाई के लिए नष्ट की, उसके एवज में बेटे ने उनके खिलाफ कोर्ट में केस कर दिया। 18 लाख 50 हजार रुपए (25000 डॉलर) के अपने पोर्न कलेक्शन को नष्ट करने के मामले को बेटा डैविंड वेर्किंग कोर्ट में ले गया। आश्चर्य यह कि कोर्ट ने भी माँ-बाप के खिलाफ जजमेंट सुनाया है।

डैविंड वेर्किंग के फेवर में फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने उनके माँ-बाप को 55 लाख रुपए (75000 डॉलर) चुकाने का आदेश दिया है। अपने फैसले में कोर्ट ने यह भी कहा कि ‘बेशकीमती’ पोर्न में एक भी आइटम चाइल्ड पोर्न से संबंधित नहीं था। इसलिए एक आदमी को खुद के पैसे से खरीदे गए पोर्न को देखने से वंचित करना या उसे नष्ट कर देना गैर-कानूनी है।

बेटे के पोर्न कलेक्शन को नष्ट करने के पीछे पॉल वेर्किंग और बर्थ वेर्किंग ने जो तर्क दिया था, वो था – “हमारा बेटा एक रेंटर के तौर पर हमारे यहाँ रहने आया था, न कि बेटे के तौर पर। और हमने उसे इन पोर्न कलेक्शन को घर नहीं लाने को कहा था, फिर भी वो ले आया था।” इस पर कोर्ट ने कहा कि मकान मालिक के तौर पर भी किसी की निजी संपति को नष्ट करने का हक किसी दूसरे को नहीं है।

36 में से 33 सीट पर भाजपा तो वहीं कॉन्ग्रेस 1 पर सिमटी: असम में TAC चुनाव में BJP ने दर्ज की ऐतिहासिक जीत

यूपीपीएल के साथ गठबंधन में असम में बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल (बीटीसी) में कार्यकारी समिति के गठन के ठीक एक हफ्ते बाद भारतीय जनता पार्टी ने राज्य में एक और स्वायत्त परिषद में बड़ी जीत हासिल की है। पार्टी ने तिवा स्वायत्त परिषद (टीएसी) चुनाव में 36 में से 33 सीटों पर जीत दर्ज किया है।

बता दें परिषद के चुनाव कड़ी सुरक्षा और कोविड -19 के दिशानिर्देशों को पालन करते हुए 17 दिसंबर को संपन्न हुआ था। असम के तिवा स्वायत्त परिषद में मोरीगाँव (19 सीटें), नगाँव (10 सीटें), होजई (1 सीट) और कामरूप (मेट्रो) (6 सीटें) जिले शामिल हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, कुल 36 सीटों में से 35 सीटों पर चुनाव आयोजित किए गए थे। वहीं जगरोड की 1 सीट भाजपा ने पहले ही निर्विरोध जीती थी। एक तरफ जहाँ बीजेपी ने 33 सीटें जीतीं, वहीं उसके सहयोगी एजीपी ने 2 सीटें जीती हैं। जबकि कॉन्ग्रेस को इस चुनाव में भी करारी हार के सामना करना पड़ा। कुल 35 सीटों में कॉन्ग्रेस ने बस 1 सीट जीती।

इस मौके पर असम के कैबिनेट मंत्री और NEDA के संयोजक हेमंत बिस्वा ने ट्वीट करते हुए कहा कि तिवा स्वायत्त परिषद के चुनावों में भाजपा को मिली भारी जीत यह बताती है कि असम के लोगों ने पीएम नरेंद्र मोदी पर अपना भरोसा जताया है। हालाँकि, उन्होंने कहा कि भाजपा ने 34 सीटें जीती, क्योंकि अंतिम परिणाम उस समय तक सामने नहीं आए थे।

वहीं यह ध्यान रखना दिलचस्प है कि चुनावों से पहले भाजपा ने दावा किया था कि वह इस चुनाव में 25-30 सीटें जीतेंगी। जबकि पार्टी को उससे अधिक सीटें प्राप्त हुई है।

गौरतलब है कि भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी असम के लोगों को भारी जनादेश के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा, “तिवा स्वायत्त परिषद चुनावों में बीजेपी को मिले इस जनादेश के लिए असम को धन्यवाद। असम एक उज्जवल भविष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है और लोग पीएम नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन पर अपना विश्वास बनाए हुए हैं। सर्बानंद सोनोवाल, हिमंत बिस्वा सरमा और असम भाजपा की टीम को बधाई।”

बोडोलैंड टेरीटोरियल कॉउन्सिल की ही तरह तिवा स्वायत्त परिषद का गठन संविधान की छठी अनुसूची के तहत नहीं किया गया है। बीटीसी के अलावा, डिमा हसाओ स्वायत्त जिला परिषद और कार्बी आंगलोंग स्वायत्त जिला परिषद छठी अनुसूची में शामिल हैं। इन तीनों के अलावा, राज्य कानून के तहत गठित राज्य में छह स्वायत्त परिषद हैं। ये सभी राज्य में रहने वाले विशिष्ट जनजातियों से संबंधित हैं।

उल्लेखनीय है कि तिवा परिषद के अलावा, राज्य कानून के तहत अन्य परिषदों में राभा हासोंग स्वायत्त परिषद, मिसिंग स्वायत्त परिषद, देवरी स्वायत्त परिषद, थेंगाल कचहरी स्वायत्त परिषद और सोनोवाल कचौड़ी स्वायत्त परिषद हैं। असम विधानसभा ने हाल ही में तीन और परिषदों के निर्माण को मंजूरी दी है, जोकि मोरन स्वायत्त परिषद, मटक स्वायत्त परिषद और कामतापुर स्वायत्त परिषद हैं।

अमित शाह की मौजूदगी में TMC, वामपंथी और कॉन्ग्रेस के 10 विधायकों ने थामा BJP का दामन: यहाँ है पूरी लिस्ट

पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) राजनीतिक उथल-पुथल की स्थिति में है। पिछले कुछ दिनों के भीतर ही ममता सरकार के कई दिग्गज विधायकों ने पार्टी से नाता तोड़ लिया है। आज (दिसंबर 19, 2020) मिदनापुर में भाजपा नेता अमित शाह की मौजदूगी में टीएमसी, वामपंथी और कॉन्ग्रेस के कई विधायकों ने बीजेपी का दामन थामा।

कई दिनों से चल रहे अटकलों के बाद आखिरकार ममता सरकार में मंत्री रहे शुभेन्दु अधिकारी भी मिदनापुर की रैली में अमित शाह की मौजूदगी में भाजपा में शामिल हो गए। टीएमसी, कॉन्ग्रेस और वाम दलों के कई विधायक और पार्टी नेता भी इस दौरान बीजेपी का दामन थाम लिया।

पश्चिम बंगाल में भाजपा में शामिल होने वाले प्रमुख नेता हैं:

◆बर्दवान पूर्बा सांसद सुनील मंडल, टीएमसी

◆पूर्व मंत्री और तमलुक विधायक शुभेन्दु अधकारी, टीएमसी

◆ उत्तर काठी की विधायक बानसरी मैती, टीएमसी

◆कलना विधायक बिस्वजीत कुंडू, टीएमसी

◆पूर्वी बर्धमान के विधायक सैकत पांजा, टीएमसी

◆बैरकपुर विधायक शीलभद्र दत्ता, टीएमसी

◆गाजोल की विधायक दीपाली विश्वास, टीएमसी

◆नागराकाटा के विधायक शुक्रा मुंडा, टीएमसी

◆तमलुक के विधायक अशोक डिंडा, सीपीआई

◆हल्दिया के विधायक तापसी मंडल, सीपीआईएम

◆पुरुलिया विधायक सुदीप मुखर्जी, कॉन्ग्रेस

◆पूर्व सांसद दशरथ तिर्की, टीएमसी

◆पूर्व मंत्री श्यामपद मुखर्जी, टीएमसी

◆पूर्व विधायक सत्येन रॉय, टीएमसी

इनके अलावा कई पंचायत स्तर के नेता और TMC विधायक शुभेन्दु अधिकारी के फॉलोवर्स भी बीजेपी में शामिल हुए। इनमें कबेरी चट्टोपाध्याय, स्नेहाशीष भौमिक, आकाशदीप सिंह, तन्मय रॉय, रंजन वैद्य, देव महापात्र और सुकुमार दास शामिल हैं। भगवा पार्टी में कॉन्ग्रेस नेता सुदीप कुमार मुखर्जी और सनमय बनर्जी भी शामिल हुए।

बता दें कि गौर बंग विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति गोपाल मिश्रा भी आज भाजपा में शामिल हो गए है। वहीं बड़ी संख्या में टीएमसी और अन्य दलों के राजनेता भी पार्टी से जुड़ गए हैं।

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। वहीं सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के गुंडों द्वारा बीजेपी से जुड़े लोगों को निशाना बनाने के कई मामले सामने आए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार 3 दिन के भीतर टीएमसी में कई इस्तीफे सामने आए। वहीं बीजेपी सांसद अर्जुन सिंह का मानना है कि अगले साल जनवरी तक टीएमसी के 60 से 65 विधायक उनके साथ आ सकते हैं।

ममता सरकार को इस्तीफा देने वालों में शुभेन्दु अधिकारी, बैरकपुर विधानसभा क्षेत्र के टीएमसी विधायक शीलभद्र दत्ता, उत्तरी काठी से विधायक बनाश्री मैती, अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के महासचिव टीएमसी नेता कबीरुल इस्लाम, टीएमसी के नेता और दक्षिण बंगाल राज्य परिवहन निगम (SBSTC) के अध्यक्ष (Rtd) कर्नल दिप्तांगशु चौधरी और अभिजीत आचार्य जैसे दिग्गज नेता शामिल हैं।

उल्लेखनीय है कि आज (दिसंबर 19, 2020) गृह मंत्री अमित शाह अपने दो दिवसीय पश्चिम बंगाल दौरे पर सुबह कोलकाता पहुँचे। शाह आगामी राज्य विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की स्थिति का जायजा लेंगे। उन्होंने आज मिदनापुर में एक जनसभा को संबोधित किया। साथ ही गृह मंत्री ने रामकृष्ण आश्रम का दौरा किया, क्रांतिकारी खुदीराम बोस को श्रद्धांजलि दी, सिद्धेश्वरी मंदिर का दौरा किया और मिदनापुर में एक किसान के घर दोपहर का भोजन किया।