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सूअर का माँस खाने वाला, शराब पीने वाला ‘क़ायद ए आजम’, जो नमाज तक पढ़ना नहीं जानता था

25 दिसंबर के दिन कई तरह से विशेष है। जहाँ भारत में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपयी का जन्मदिन मनाया जा रहा है तो वहीं ईसाई सम्प्रदाय के लोग आज क्रिसमस का त्योहार मना रहे हैं। लेकिन पाकिस्तान के लिए आज क़ायद-ए आज़म यानी, महान नेता और देश के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना का जन्मदिन है।

मोहम्मद अली जिन्ना का जन्मदिन इस वर्ष कई कारणों से महत्वपूर्ण है। साल 2020 शुरुआत से ही कोरोना वायरस की महामारी के कारण चर्चा में रहा। इसकी शुरुआत में जहाँ चर्चा का विषय हाथ धुलना और हैण्ड सैनीटाइजर का नियमित इस्तेमाल था, तो इसके जाते-जाते चर्चा का विषय कोरोना वायरस की वैक्सीन हैं। लेकिन दोनों ही चीजों में कुछ ऐसी चीजें हैं जो एक खास समुदाय के लिए विशेष परेशानी का भी कारण बनी रही हैं। वो हैं- अल्कोहल और पोर्क यानी, सूअर का माँस!

देश-दुनियाभर में मुस्लिम समुदाय के लिए जिन्दगी और मजहब के बीच तालमेल बिठाना इस कारण विवादित विषय बनकर रह गया है क्योंकि इस्लाम में शराब के साथ ही सूअर के माँस को हराम माना गया है। लेकिन अगर कोरोना वायरस से सुरक्षित रहने के लिए एक ओर जहाँ हैंडसैनीटाइजर में अल्कोहल इस्तेमाल किया जाता है तो वहीं दूसरी ओर कोरोना वायरस वैक्सीन में सूअर के माँस का उपयोग किया जाता है।

लेकिन मजहब के नाम पर एक अलग देश की माँग करने वाले जिन्ना तो सूअर का माँस भी खाते थे और शराब का इस्तेमाल भी जमकर करते थे। यही नहीं, जिन्ना तो नमाज पढ़ना तक भी नहीं जानते थे। जिन्ना अक्सर इस्लाम का मजाक भी बनाते देखे जाते थे। एक बार तो उन्होंने यहाँ तक कह दिया था कि पवित्र स्थल मक्का का पत्थर इस कारण काला हो चुका है क्योंकि हम मुस्लिम उसे हजारों वर्षो से छूते आ रहे हैं।

वास्तव में, मोहम्मद अली जिन्ना खुद को मुस्लिमों का एक धार्मिक राजनेता नहीं बल्कि राजनीतिक नेता मानते थे। एक मशहूर लेखक केएल गौबा ने इस बारे में लिखा था कि एक बार उन्होंने मोहम्मद अली जिन्ना को एक मस्जिद में नमाज़ पढ़ने के लिए बुलाया तो जिन्ना ने उनसे कहा कि उन्हें तो नमाज पढ़नी ही नहीं आती। इस पर केएल गौबा ने जिन्ना से कहा कि फिर वो वही करें जैसा कि वहाँ पर मौजूद दूसरे लोग कर रहे हैं।

मोहम्मद अली जिन्ना को खाने में पोर्क (सूअर का माँस) और सिगार का भी खूब शौक था। इसका जिक्र एक समय जिन्ना के सहायक रहे मोहम्मद करीम छागला, जो कि बाद में भारत के विदेश मंत्री भी बने, ने अपनी आत्मकथा ‘रोज़ेज इन दिसंबर’ में करते हुए बताया कि किस तरह मुंबई के एक मशहूर रेस्तराँ में जिन्ना ने कॉफ़ी के साथ सूअर के सॉसेज ऑर्डर किए थे। कुछ पुस्तकों में तो जिक्र मिलता है कि जिन्ना रोजाना नाश्ते में पोर्क ही खाना पसंद करते थे।

अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत में जिन्ना जहाँ एक उदारवादी के रूप में जाने जाते थे, वहीं समय के साथ वो एक बड़े कट्टरपंथी बनकर उभरे। मोहम्मद अली जिन्ना का पूरा जीवन ऐसे ही तमाम विरोधाभासों से घिरा रहा। उनके मजहब इस्लाम का उनके जीवन पर जरा भी असर नहीं था। फिर भी, जिन्ना की मौत के समय उनके मजहब और आस्था, विवाद का विषय बनने से अछूते नहीं रहे। यह विवाद उनके अंतिम संस्कार के तरीकों के चयन को लेकर था कि यह शिया समुदाय के अनुसार किया जाना चाहिए या फिर सुन्नी! विवाद की स्थिति में जिन्ना की अंत्येष्टि में आखिकार शिया और सुन्नी, दोनों ही तरीक़ों को अपनाया गया।

जिन्ना एक ऐसा व्यक्तित्व था, जो शराब पीता था, सूअर का माँस खाता था, उर्दू नहीं बोलता था और नमाज तक पढ़ना नहीं जनता था। बावजूद इन तमाम मजहबी विरोधाभासों के, उन्हें समुदाय विशेष ने प्रेम किया, यह चौंकाने वाली बात जरूर है। हालाँकि जिन्ना ने मजहब के नाम पर ही एक अलग राष्ट्र की वकालत कर उसे साकार रूप दिया, यह शायद एक मजहब की नजरों में जिन्ना के तमाम गैर-मजहबी कारनामों पर पर्दा डालने के लिए काफी हो।

फिलहाल दुनियाभर के मुस्लिम हलाल सर्टिफिकेट वाली कोरोना वैक्सीन के इन्तजार में हैं। मुस्लिम धर्मगुरु और मौलवी वैक्सीन को लेकर तरह-तरह के बयान भी दे रहे हैं। जिन्ना का जन्मदिन ऐसे समय पर मनाया जा रहा है जब सूअर का माँस और शराब, कोरोना वायरस के इलाज के बीच एक बड़ी दीवार पैदा करता नजर आ रहा है।

वाजपेयी के सेक्स पर शायरी: जिस अटल को विपक्षी भी करते प्रणाम, ‘घटिया’ शायर ने ठहाके के साथ उड़ाया था मजाक

आज देश के प्रतिष्ठित प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जन्म जयंती है। वे सदैव अपने कर्मों और अपनी राजनैतिक शैली, भाषण कला के लिए विख्यात रहे, कोई विरला ही इससे इतर उन्हें निचा दिखाने के लिए इतना नीचे गिर सकता है जितना बहुत पहले मशहूर शायर डॉ राहत इंदौरी ने किया था। हालाँकि, कुछ महीने पहले ही उनका कोरोना वायरस संक्रमण के बाद दिल का दौरा पड़ने के कारण (16 अगस्त, 2020) को निधन हो गया। उनकी मौत के बाद उनके चाहने वालों ने सोशल मीडिया पर उनकी कुछ शायरियाँ शेयर करके उन्हें श्रद्धांजलि दी थी। इसी बीच कुछ मुशायरों में अपनी बात रखते हुए उनकी कई पुरानी वीडियोज भी वायरल होना शुरू हुईं थी।

ये वह वीडियोज थीं, जिनमें उन्होंने अपनी शायरी करने के हुनर का इस्तेमाल दिग्गज नेताओं और देश के हालातों को बयान करने के लिए इस्तेमाल किया था। कुछ लोग इसे उनका हुनर समझकर शेयर कर रहे थे। तो कुछ ऐसे भी थे, जिन्होंने इन वीडियोज को शेयर करके राहत इंदौरी की सोच पर अपना गुस्सा निकाला। आज जब देश वाजपेयी की जयंती मना रहा है तो एक बार फिर सब ताजा हो गया है।

साल 2001 में राहत इंदौरी ने घुटनों पर एक शेर पढ़ा था और दिलचस्प बात यह है कि उसी समय पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के घुटनों की सर्जरी हुई थी।

अपने शेर को मुशायरे में पढ़ते हुए तब राहत ने अटल बिहारी वाजपेयी का नाम अपनी जुबान से लेने से मना कर दिया था और कहा था, “मैं किसी का नाम नहीं लेता हूँ अपने जुबान से। क्योंकि मेरे शेरों की कीमत करोड़ों रुपए है। मैं दो-दो कौड़ी के लोगों का नाम लेकर अपने शेर की कीमत कम नहीं करना चाहता।” 

अपनी इस बात के बाद उन्होंने कहा था, “100 करोड़ के मुल्क का वजन जिन पैरों पर है, उनका खुद वजन नहीं संभलता।” यह कहकर इस बात को उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि वह अटल बिहारी वाजपेयी के बारे में ही बात कर रहे हैं। इसके बाद उन्होंने तमाम वाहवाही के बीच अपना शेर पढ़ा, जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री के घुटनों की सर्जरी का मजाक उड़ाया गया था।

उन्होंने कहा:

रंग चेहरे का ज़र्द कैसा है 

आईना गर्द-गर्द कैसा है 
काम घुटनों से जब लिया ही नहीं 

फिर ये घुटनों में दर्द कैसा है

इस शेर को सुनकर मुशायरे में ठहाके और तालियाँ गूँज गईं थीं। कुछ लोग उठकर आए थे और राहत को सम्मानित भी किया था। अब इसी मुशायरे की वीडियो को शेयर करके उनकी आलोचना की जी रही है।

यूजर्स का कहना है कि 2001 में अटल बिहारी वाजपेयी ने अपना घुटनों की सर्जरी करवाई थी और राहत इंदौरी ने उन्हें दो कौड़ी का बता कर अपनी शायरी को करोड़ों की बताया था। लोग याद दिला रहे हैं कि राहत ने उनके ऊपर इसलिए घुटनों वाला शेर पढ़ा था क्योंकि वह आजीवन अविवाहित थे (मतलब निहायत ही घटिया मानसिकता का आदमी था राहत इंदौरी, जिसने घुटने को सिर्फ और सिर्फ सेक्स से जोड़ा)।

सोशल मीडिया यूजर्स यहीं पर नहीं रुके। राहत इंदौरी द्वारा गोधरा कांड पर की गई शायरी भी बेहद विवादित थी, उसे भी लोगों ने खोज निकाला। एक मुशायरे में उन्होंने गोधरा कांड को लेकर ये कह दिया था कि उस दिन कारसेवकों के साथ कुछ हुआ ही नहीं था।

अपनी शायरी सुनाने से पहले वह लोगों को बताते हैं कि गोधरा कांड के मात्र एक साल में सारी रिपोर्ट्स सामने आ गई है। जाँच कमीशन यह कहने लगा है कि गोधरा में कुछ हुआ ही नहीं था। मीडिया ने हौआ बना दिया और ये बताया कि रेल के डिब्बों में आग लगा दी गई थी।

इसके बाद राहत इंदौरी अपना शेर फरमाते हुए कहते हैं:

जिनका मसलक है रौशनी का सफर
वो चिरागों को क्यों बुझाएँगें
अपने मुर्दे भी जो जलाते नहीं
जिंदा लोगों को क्या जलाएँगे

इस वीडियो को शेयर करके लोग कारसेवकों को याद कर रहे हैं, जिन्हें गोधरा कांड में अपनी जान गँवानी पड़ी। लोग कह रहे हैं कि राहत इंदौरी ने थ्योरी गढ़ी और जहरीली हिंसक कट्टरपंथी भीड़ को अपने शेरों से बचाने की कोशिश की।

इतना ही नहीं, अपनी बातों से उन्होंने इस पूरे कांड के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री मोदी को जिम्मेदार बताया। साथ ही यह भी बताने की कोशिश की कि यह काम हिंदुओं का हो सकता है क्योंकि हिंदू ही शव का दाह संस्कार करते हैं।

हलाल मीट हिंदू-सिख के लिए वर्जित, होटलों-मीट की दुकानों को लगाना होगा बोर्ड: SDMC का प्रस्ताव पास

मीट या चिकन आप हलाल खा रहे हैं या झटका? होटलों में शायद ही पता चलता है। लेकिन अब नहीं! दिल्ली के ऐसे होटल या मीट की दुकान जो SDMC (दक्षिण दिल्ली म्युनिशपल कॉर्पोरेशन) के अंतर्गत आते हैं, उन्हें अब हलाल या झटका बोर्ड टाँग कर रखना जरूरी होगा।

SDMC की सिविक बॉडी की स्टैंडिंग कमिटी ने यह प्रस्ताव गुरुवार (24 दिसंबर 2020) को पास कर दिया। इस प्रस्ताव में यह भी लिखा है कि हिंदू और सिख के लिए हलाल मीट खाना वर्जित है। पास हुआ यह प्रस्ताव अब SDMC सभा में जाएगा, जहाँ भाजपा का बहुमत है।

SDMC की सिविक बॉडी की स्टैंडिंग कमिटी के अध्यक्ष राजदत्त गहलोत ने बताया कि इस प्रस्ताव का उद्देश्य ग्राहकों को जानकारी उपलब्ध कराना है कि वो जो खा रहे हैं, वो क्या है। साथ ही उन्होंने कहा, “अभी समस्या यह है कि लाइसेंस किसी और चीज के लिए दिया जाता है और बेचा कुछ और ही जाता है।”

आपको बता दें कि इसके संबंध में छतरपुर काउंसिलर अनिता तँवर ने प्रस्ताव रखा था, जिसे मेडिकल रिलीफ ऐंड पब्लिक हेल्थ पैनल ने 9 नवंबर 2020 को स्टैंडिंग कमिटी के सामने प्रस्तावित किया था।

ईसाइयों ने किया हलाल माँस का विरोध

क्रिसमस से ठीक पहले ईसाइयों ने हलाल माँस का बहिष्कार करने का फैसला किया है। ईसाई समुदाय के इस फैसले को हिंदू समूहों ने भी अपना समर्थन दिया है। उनका कहना है कि राज्य में हिंदू धर्म के लोग हलाल माँस बेचने के लिए मजबूर हैं। क्रिश्चियन एसोसिएशन CASA ने ईसाइयों से अपील की है कि हलाल भोजन को अब उनकी खाने की टेबल पर नहीं लाया जाना चाहिए।

ईसाई समुदाय का कहना है कि ईसा मसीह के जन्मदिन पर हलाल माँस क्यों खाना चाहिए? इस विवाद पर कई तरह की प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं। हिंदू समूहों का दावा है कि ईसाई और हिंदू दोनों को हलाल माँस बेचने के लिए मजबूर किया जाता है।

हलाल मतलब जिहाद और आतंक

किसी भी भोज्य पदार्थ, चाहे वे आलू के चिप्स क्यों न हों, को ‘हलाल’ तभी माना जा सकता है जब उसकी कमाई में से एक हिस्सा ‘ज़कात’ में जाए- जिसे वे जिहादी आतंकवाद को पैसा देने के ही बराबर मानते हैं, क्योंकि हमारे पास यह जानने का कोई ज़रिया नहीं है कि ज़कात के नाम पर गया पैसा ज़कात में ही जा रहा है या जिहाद में। और जिहाद काफ़िर के खिलाफ ही होता है- जब तक यह इस्लाम स्वीकार न कर ले!

यानी जब कोई गैर-मुस्लिम हलाल वाला भोजन खरीदता है, तो वह उसका एक हिस्सा अपने ही खिलाफ होने जा रहे जिहाद को आर्थिक सहायता देने में खर्च करता है। इसे वह ‘हलालो-नॉमिक्स’ यानी हलाल का अर्थशास्त्र कहते हैं। “हलालो-नॉमिक्स का अर्थ है आप अपनी सुपारी खुद दे रहे हैं।”

फुटबॉलर से जैश-ए-मोहम्मद का आतंकी बना आमिर सिराज एक पाकिस्तानी आतंकी के साथ ढेर, जुलाई से ही था लापता

सुरक्षा बलों ने बृहस्पतिवार (दिसंबर 24, 2020) को उत्तरी कश्मीर के बारामूला जिले में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के दो आतंकवादियों को मार गिराया। जहाँ एक मारे गए आतंकवादी की पहचान पाकिस्तानी के रूप में हुई है, वहीं दूसरा आतंकी कॉलेज में पढ़ रहा एक छात्र अमीर सिराज नाम का फुटबॉलर था। आमिर सिराज जुलाई 02, 2020 से ही लापता बताया जा रहा था।

रिपोर्ट्स के अनुसार, सोपोर में एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि आमिर 6 महीने पहले लापता हो गया था। उन्होंने बताया कि आमिर फुटबॉल खेलने के लिए सोपोर के आदिपोरा में अपने मामा के घर से जाने के बाद गायब हो गया था और उसके बाद कभी घर नहीं लौटा। बाद में उन्हें पता चला कि वह जैश-ए-मोहम्मद में शामिल हो गया था।

वर्ष 2020 में सुरक्षा बल दर्जनों स्थानीय युवाओं को सफलतापूर्वक आतंकवादी शिविरों से वापस लाने और उन्हें मनाने में कामयाब रहे हैं। सुरक्षाबलों ने इसी तरह का अवसर आमिर सिराज को भी दिया, लेकिन उसने स्पष्ट इंकार कर दिया।

जिस ऑपरेशन में आमिर सिराज मारा गया था, वह जम्मू-कश्मीर के बारामुला जिले के वानीगम क्रीरी इलाके में आतंकवादियों की मौजूदगी के संबंध में एक विशिष्ट इनपुट पर कार्रवाई करते हुए बारामूला पुलिस, 29RR और 176Bn CRPF द्वारा संयुक्त कॉर्डन और सर्च ऑपरेशन के तहत किया गया था।

जब सुरक्षाबलों को पता चला कि आतंकवादी एक घर के अंदर छिपे हुए हैं, तो उन्होंने उन्हें आत्मसमर्पण करने का भी मौका दिया। लेकिन आतंकवादियों ने आत्मसमर्पण के बजाय संयुक्त खोज दल पर अंधाधुंध गोलियाँ बरसानी शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई के साथ ही मुठभेड़ शुरू हो गई। कई घंटे तक चली मुठभेड़ में सुरक्षाबलों को दो आतंकियों को मार गिराने में सफलता मिली।

मारे गए जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों में एक शीर्ष कमांडर भी शामिल है। मारे गए आतंकियों की पहचान पाकिस्तान के अबरार उर्फ लंगू और सोपोर के आमिर सिराज के रूप में हुई। अधिकारियों ने बताया कि दोनों आतंकवादी इस क्षेत्र में हुई कई आतंकवादी घटनाओं में शामिल थे।

सेक्स पार्टी के लिए पादरियों को बच्चों की सप्लाई करती थीं नन, रेप के बदले देते थे पैसे: पीड़ित ने जर्मनी की कोर्ट में खोली पोल

जर्मनी के एक ‘चिल्ड्रेन्स होम’ में काम करने वाली ईसाई नन पर ईसाई पादरियों, राजनेताओं और व्यापारियों को सेक्स पार्टी में बलात्कार करने के लिए बच्चे सप्लाई करने का आरोप लगा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, जर्मनी के डार्मस्टैड में एक सोशल वेलफेयर कोर्ट (Social Welfare Court, Darmstadt) ने 63 साल के एक व्यक्ति को इस मामले में मुआवजा दिया है। उस व्यक्ति ने ही खुलासा किया कि किस तरह से ईसाई नन द्वारा उन्हें पार्टियों में पादरी और प्रभावशाली लोगों द्वारा यौन दुर्व्यवहार का शिकार बनाया गया। तब उनकी उम्र मात्र पाँच साल थी। पीड़ित ने बताया कि युवा लड़कों के साथ सेक्स करने की अनुमति देने के लिए इन प्रभावशाली पादरियों द्वारा ननों का भुगतान किया जाता था।

पीड़ित ने अपनी पहचान छिपाते हुए ने कहा कि 1960 और 70 के दशक में घर में अन्य लड़कों के साथ रहने के दौरान उसके साथ लगभग 1,000 बार बलात्कार किया गया था।

स्पीयर (Speyer) के बिशप, कार्ल-हेंज वीसमन (Karl-Heinz Wiesemann) ने भी सार्वजनिक रूप से बिशप रुडोल्फ मोत्ज़ेनबैकर (Bishop Rudolf Motzenbäcker), जिनकी 1998 में मृत्यु हो गई, का नाम लेते हुए उन्हें भी ऐसे जघन्य अपराध में शामिल बताया था। बिशप ने कहा कि इसके बाद से तीन और पीड़ित आगे आ चुके हैं।

पादरियों के लिए युवा लड़कों की ‘सेक्स पार्टी’ में दलाली करती थी नन्स

पीड़िता का शोषण पाँच साल की उम्र में तब किया गया, जब वह मार्च, 1963 में जर्मन शहर स्पीयर में ‘ऑर्डर ऑफ़ सिस्टर्स’ द्वारा चलाए जा रहे ‘द डिवाइन सेवियर’होम में शामिल हुए थे। पीड़ित ने कहा कि वह ननों द्वारा बिशप मोत्ज़ेनबैकर के अपार्टमेंट में यौन शोषण के लिए भेजे गए थे और इसका विरोध करने पर ईसाई पादरी उसे पीटते थे।

पीड़ित, जो स्पीयर कैथेड्रल में एक पादरी के सहायक थे, ने कहा कि उसे कंफ़ेसर के रूप में प्रीस्ट की भूमिका सौंपी गई। पीड़ित ने कहा कि चर्च में नन ‘दलाल’ की तरह काम करती थीं और और 07 से 14 साल के युवाओं को पादरी, स्थानीय राजनेताओं और व्यवसायियों के पास भेजा करते थे।

पीड़ित ने अपनी गवाही में अदालत से कहा, “एक कमरा था, जहाँ नन पुरुषों को ड्रिंक और खाना देती थीं और दूसरे कोने में बच्चों के साथ बलात्कार किया जाता था।” उन्होंने कहा कि ननों ने पैसा कमाया क्योंकि वहाँ मौजूद पुरुषों ने जमकर पैसा लुटाया।

पीड़ित ने अदालत के समक्ष कहा कि घरों पर बच्चों के साथ दुर्व्यवहार में नन्स की महत्वपूर्ण भूमिका थी, यहाँ तक ​​कि ‘सिस्टर्स’ खुद भी छोटे बच्चों का यौन शोषण करती थीं। वर्ष 2000 में ‘चिल्ड्रेन्स होम’ बंद कर दिया गया।

‘चर्च के आदेशों की अवहेलना करने पर होता था कई बार बलात्कार’

पीड़ित के अनुसार, अगर उनमें से कोई भी लड़का चर्च के आदेशों की अवहेलना करता, तो उन्हें लाठी से पीटा जाता या उनके सिर को दीवार पर पटक दिया जाता। उन्होंने कहा कि एक ही समय में तीन पादरियों द्वारा उनके साथ बलात्कार किया गया था।

पादरी के सहायक रहे पीड़ित ने अपनी व्यथा सुनते हुए कहा, “कभी-कभी मैं खून से सने कपड़ों में घर वापस चला जाता था, खून मेरे पैरों से टपक रहा होता था। सितंबर, 1972 में मेरे जाने से पहले, मेरे साथ एक हजार बार यौन दुर्व्यवहार किया गया था।”

कैथोलिक चर्च ने पीड़ित को 15,000 यूरो मुआवजे के साथ 10,000 यूरो थैरेपी का मूल्य पीड़ितों की पेंशन के रूप में भुगतान किया। डार्मस्टैड सामाजिक न्यायालय (Darmstadt Social Court) के न्यायाधीश एंड्रिया हेरमैन ने कहा, “दुर्व्यवहार के शिकार लोगों के लिए, कानूनी कार्रवाई करना काफी मनोवैज्ञानिक तनाव से जुड़ा हुआ है।”

हालाँकि, पीड़ित ने सवाल किया कि इस तरह के पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर और अवसाद से पीड़ित होने के बाद इस पैसे का क्या उपयोग है। उन्होंने पूछा, “मेरी शादी टूट गई है और मेरी हड्डियाँ, यकृत और गुर्दे भी।”

2010 के बाद से, कैथोलिक चर्च में यौन शोषण के कई मामले सामने आए हैं। वर्ष 2018 में यौन दुर्व्यवहारों की आंतरिक जाँच में 1946 और 2014 के बीच 1,670 पादरियों और 3,677 पीड़ितों के साथ दुर्व्यवहार का खुलासा हुआ था।

दुनिया भर के चर्चों में बलात्कार और अन्य अपमानजनक घटनाओं के बार-बार होने वाले मामलों की एक खतरनाक प्रवृत्ति रही है। दुर्भाग्य से, भारत में इस ‘महामारी’ को लेकर कोई समाधान नहीं मिल सका है। ईसाई पादरी और चर्च, दुनिया भर के अधिकांश मामलों की तरह, गरीबों को निशाना बना रहे हैं, लेकिन मामले किसी का ध्यान नहीं जाते हैं।

इको-फ्रेंडली क्रिसमस मनाओ, धरती बचाओ | Ajeet Bharti speaks for #EcoFriendlyChristmas

पेड़ काटना, जीवों की निर्मम हत्या, भोजन की बर्बादी, प्लास्टिक का इस्तेमाल, अत्यधिक आतिशबाज़ी, लाइट पॉलुशन, पेपर की बर्बादी… इसके हर आयाम में पर्यावरण विरोध दिखता है

पूरा वीडियो यहाँ देखें

कॉन्ग्रेस हमेशा से किसान विरोधी, राहुल गाँधी को उनकी पार्टी के लोग भी गंभीरता से नहीं लेते: केंद्रीय कृषि मंत्री

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गॉंधी पर करारा निशाना साधा है। उन्होंने गुरुवार (24 दिसंबर, 2020) को कहा कि जो कुछ भी राहुल गाँधी बोलते है उसे कॉन्ग्रेस भी गंभीरता से नहीं लेती है। उन्होंने कॉन्ग्रेस को किसान विरोधी भी करार दिया है।

एएनआई ने केंद्रीय कृषि मंत्री के हवाले से कहा, “राहुल गाँधी जो कुछ भी कहते हैं, उनकी बातों को खुद कॉन्ग्रेस भी गंभीरता से नहीं लेती। आज जब वे हस्ताक्षरों के साथ अपना विरोध दर्ज कराने के लिए राष्ट्रपति के पास गए, तो इन किसानों ने मुझसे कहा कि कॉन्ग्रेस का कोई भी नेता हमारे हस्ताक्षर लेने के लिए नहीं आया था।”

उन्होंने कहा, “अगर राहुल गाँधी इतने ही चिंतित हैं तो उन्हें किसानों के लिए कुछ करना चाहिए था जब उनकी सरकार सत्ता में थी। कॉन्ग्रेस हमेशा किसान विरोधी रही है।”

किसान आंदोलन की आड़ में अपनी राजनीतिक रोटियाँ सेकने के लिए कॉन्ग्रेस पार्टी को आड़े हाथों लेते हुए तोमर ने कहा कि कॉन्ग्रेस हमेशा से किसान विरोधी रही है। जिस बिल का आज कॉन्ग्रेस द्वारा विरोध किया जा रहा वह स्वयं पार्टी ने ही 2019 चुनाव के दौरान अपने मेनिफेस्टो में डाल रखा था।

तोमर ने पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष से पूछा कि वह इस वक्त झूठ बोल रहे या 2019 चुनाव को मद्देनजर लोगों को धोखा देने का काम कर रहे थे। वहीं लोकतंत्र की बात करने वाले राहुल गाँधी पर कटाक्ष करते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि ‘आपातकाल लगाने वाले आज लोकतंत्र की बात कर रहे हैं।’

कृषि बिल के समर्थन में आए किसानों के बारे बताते हुए तोमर ने कहा, “बागपत से आए किसानों ने केंद्र के नए कृषि कानूनों के समर्थन में मुझे पत्र सौंपा। उन्होंने मुझसे कहा कि सरकार को किसी के दबाव में आकर कृषि कानूनों में संशोधन नहीं करना चाहिए।” किसान मजदूर संघ से जुड़े बागपत के 60 किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल ने कृषि भवन में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात की थी।

कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन को देखते हुए तोमर ने पिछले कुछ दिनों में कई किसान नेताओं के प्रतिनिधिमंडल से मिलकर बातचीत की है और उन्होंने दावा किया है कि ये लोग सुधार के पक्ष में हैं।

इस बीच सरकार की ओर से किसानों को एक और चिट्ठी लिखी गई है। कृषि मंत्रालय द्वारा लिखी गई चिट्ठी में कहा गया है कि सरकार किसानों की हर माँग पर चर्चा करने के लिए तैयार है। सरकार ने साफ तौर पर कहा है कि अभी भी बातचीत के रास्ते खुले हुए हैं। इसके अलावा सरकार ने आंदोलनकारी किसानों को लिखे पत्र में किसानों से बातचीत के अगले दौर के लिए तारीख और समय खुद तय करने को कहा है।

पंडित राहुल शास्त्री बनकर लोगों को चूना लगाता था हारून मियाँ, दिल्ली पुलिस ने मेरठ से पिता-पुत्र को पकड़ा

दिल्ली पुलिस ने ग्रह शांति के नाम पर ठगी करने वाले जालसाज हारून मियाँ उर्फ शाहजी बंगाली को अरेस्ट किया है। पंडित राहुल शास्त्री नाम से पुजारी बनकर आरोपित हारून लोगों को अंधविश्वास में फँसाता और उनसे पैसे हड़पता था। मेरठ के ज़ाकिर नगर के रहने वाले हारून ने गूगल व ट्रू कॉलर एप पर भी मियाँ शाहजी बंगाली के नाम से खुद को पंजीकृत कर रखा था। इसके जरिए वह लोगों को ठगने का काम करता था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हारून के खिलाफ हत्या और दंगों के कई मामले दर्ज हैं। सिर्फ हारून ही नहीं बल्कि उसका बेटा आरिफ भी धोखाधड़ी के धंधे में शामिल था।

दिल्ली पुलिस ने एक महिला की शिकायत के बाद कार्रवाई करते हुए इस ऑनलाइन तांत्रिक को गिरफ्तार किया। केशवपुरम में रहने वाली एक युवती के पास एक अनजान नंबर से फोन आया था। फोन करने वाले ने खुद को पंडित राहुल शास्त्री बताते हुए कहा कि वह उसके घर में चल रही परेशानियों को दूर कर सकता है।

पंडित बने ठग हारून ने महिला से घर में शांति कराने के नाम पर 85,000 रुपए उसके खाते में ट्रांसफर करने के लिए कहा। पीड़ित महिला को शक तब हुआ जब आरोपित ने उससे से 55 हजार रुपए और जमा कराने को कहा।

इसके बाद पुलिस ने महिला की शिकायत पर हारून के खिलाफ मामला दर्ज किया और एसएचओ संजय रावत के नेतृत्व में पुलिस की एक टीम ने मामले की तफ्तीश शुरू की। पुलिस ने पीड़िता के फोन पर आए कॉल के माध्यम से हारून का पता लगाया और मेरठ से उसे गिरफ्तार कर लिया। साथ ही उसके बेटे आरिफ को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस अब इस बात की जाँच कर रही है कि आरोपित कितने लोगों के साथ ठगी कर चुका है।

गौरतलब है कि इस साल अक्टूबर में भी इसी तरह की एक घटना का वीडियो वायरल हुआ था। इसमें तीन मुस्लिम युवक को साधुओं की वेशभूषा में अपनी पहचान छिपाते देखा गया था। इन लोगों की असली पहचान तब सामने आई जब एक व्यक्ति द्वारा उनका नाम पूछा गया। जिस दौरान उन्होंने अपना नाम सुड्डू, दीवान और अली हुसैन बताया।

वीडियो में तीनों ने कबूल किया कि वे मुसलमान हैं। साथ ही एक मुस्लिम व्यक्ति ने यह भी कहा कि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया या कोई चोरी नहीं की है। हो सकता है कि इनकी बातें सच हो लेकिन भगवा वस्त्र की आड़ में अमूमन इसी तरह साधुओं को बदनाम करने का काम किया जाता है।

कर्नाटक: इस्लाम कबूलने के लिए हिंदू लड़की पर दबाव डालने वाला सोयूब गिरफ्तार, इंस्टाग्राम पर भेजता था गंदे मैसेज

सोशल मीडिया पर एक हिंदू लड़की को अश्लील मैसेज भेजने, प्रताड़ित करने और इस्लाम कबूलने के लिए मजबूर करने के आरोप में पुलिस ने कर्नाटक के सावनूर में एक मुस्लिम युवक को गिरफ्तार किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दक्षिण कन्नड़ जिला पुलिस ने मंगलवार (22 दिसंबर, 2020) को मंगलौर इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई लिमिटेड कंपनी में सोयूब कोतवाल नाम के एक कर्मचारी को गिरफ्तार किया है। आरोपित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर लड़की को परेशान करता था और उसे जबरन बार-बार तोहफे स्वीकारने और इस्लाम धर्म कबूलने के लिए मजबूर करता था।

लड़के की हरकतों से परेशान होकर लड़की ने इसकी शिकायत अपने परिजनों से की। परिजनों की तहरीर पर बेलारे थाना पुलिस ने आरोपित के खिलाफ POCSO अधिनियम की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज किया है। एफआईआर के अनुसार, सोयूब बार-बार दक्षिण कन्नड़ के सावनूर के पास पेरियाडका गाँव से पीयूसी (प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज) में पढ़ने वाली लड़की को इंस्टाग्राम पर रिक्वेस्ट भेजता था।

पीड़िता ने आरोप लगाया है कि आरोपित ने उसे कई बार अश्लील मैसेज भेजे और उसे प्रपोज भी किया था। इसके अलावा सोयूब ने कई बार उसे तोहफे भी दिए, जिसे लेने के लिए वह उसे मजबूर करता था। बाद में मुस्लिम युवक उसे धर्म बदलने के लिए भी मजबूर करने लगा था। बता दें पुलिस ने मामले को संज्ञान में लेते हुए आरोपित युवक को गिरफ्तार कर लिया है।

गौरतलब है कि इस घटना को लेकर हिंदू जागरण वेदिके इकाई ने कहा कि लव जिहाद के ऐसे कई उदाहरण हैं, जहाँ हिंदू लड़कियों को फँसाने की कोशिश की जाती है और जब लड़कियाँ फँस जाती हैं तो उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया जाता है। वेदिके ने हिंदू महिलाओं से इन परिस्थितियों के मद्देनजर सतर्क रहने का आग्रह किया है। साथ ही हिंदू जागरण वेदिके के सदस्यों ने पीड़िता के घर पहुँच कर परिजनों से मामले के बारे में बातचीत भी की।

दंगा पीड़ितों को झूठ बोलने पर मजबूर करता था SC का वकील महमूद प्राचा, दफ्तर पर दिल्ली पुलिस का छापा

दिल्ली पुलिस की एक विशेष सेल ने अदालत से वारंट लेकर आज बृहस्पतिवार (दिसंबर 24, 2020) को दिल्ली दंगों के मामले के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य महमूद प्राचा के ऑफिस की तलाशी ली।

पत्रकार राज शेखर ने आज ट्वीट किया कि अदालत ने पहले प्राचा के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था। महमूद प्राचा पर हलफनामें से छेड़छाड़ करने और दिल्ली दंगा पीड़ितों को झूठे बयान देने के लिए मजबूर करने का आरोप है।

इसके अलावा महमूद प्राचा पर एक आरोप ये भी है कि उसने एक अन्य वकील के हस्ताक्षर वाला शपथ पत्र (हलफनामा) आगे बढ़ाया था, जबकि वो वकील तीन साल पहले ही मर चुका था।

पत्रकार आदित्य मेनन के मुताबिक, पुलिस ने दावा किया है कि वो महमूद प्राचा के लॉ फर्म की आधिकारिक ईमेल आईडी के आउटकमिंग दस्तावेजों और मेटा डेटा की खोज कर रही है।

अदालत द्वारा इस मामले में दिल्ली पुलिस को आदेश दिए जाने के बाद ही पुलिस ने इस मामले में जाँच शुरू की। अदालत ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया कि एडवोकेट प्राचा के खिलाफ लगे तमाम आरोपों की जाँच के लिए स्पेशल सेल या अपराध शाखा को निर्देश जारी किए जाएँ।

सर्च वारंट के अनुसार, वकील प्राचा पर आईपीसी की धारा 182, 193, 420, 468, 471, 472, 473, 120B के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसमें धारा 471 का प्रयोग कूटरचित दस्तावेज का असली की तरह इस्तेमाल करने पर किया जाता है।

महमूद प्राचा के खिलाफ सांप्रदायिक घृणा भड़काने के लिए हुई थी FIR

इसी साल, जुलाई माह में प्राचा और शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जवाद, दोनों पर एफआईआर दर्ज की गई थी। दोनों ने ही एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुस्लिमों और दलितों को ‘आत्म-रक्षा के अधिकार’ और बन्दूक और लाइसेंस आवेदन करने को लेकर बयान दिए थे।

हालाँकि, FIR के बावजूद, महमूद प्रचा को लखनऊ मस्जिद के अंदर एक शिविर में देखा गया था, जहाँ वह मुस्लिम समुदाय के लोगों को प्रशिक्षण दे रहा था कि लाइसेंस के लिए किस तरह आवेदन कर आग्नेयास्त्रों को कैसे हासिल कर सकते हैं। महमूद प्राचा ने इस साल अगस्त के महीने में CAA विरोधी प्रदर्शन फिर से शुरू करने की बात भी कही थी।